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ममता बनर्जी के खिलाफ खड़ी BJP उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल पर बंगाल पुलिस ने किया ‘शारीरिक हमला’: पार्टी ने EC को लिखा पत्र

बंगाल बीजेपी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि कोलकाता पुलिस के डीसीपी साउथ ने भवानीपुर से उनकी उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल पर ‘हमला और छेड़छाड़’ की।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग को सौंपे गए पत्र में उल्लेख किया गया है, “हमारी उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल, प्रदेश अध्यक्ष सांसद डॉ. सुकांत मजूमदार, ज्योतिर्मय सिंह महतो और अर्जुन सिंह के साथ छेड़छाड़ और उन पर शारीरिक हमला किया गया। यह आवश्यक कार्रवाई के लिए आपके तत्काल ध्यान में लाने के लिए है। यह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को रोकने के लिए और चुनाव के दौरान अशांति पैदा करने के इरादे से किया गया स्पष्ट उल्लंघन है।”

पत्र के मुताबिक, घटना 23 सितंबर की है, जब भाजपा प्रत्याशी प्रियंका टिबरेवाल, सांसद सुकांत मुजुमदार, सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो और सांसद अर्जुन सिंह के साथ चुनाव के बाद पीड़ित मानस साहा के शांतिपूर्ण अंतिम संस्कार के जुलूस के लिए निकली थीं। मानस साहा टीएमसी द्वारा चुनाव के बाद किए गए हिंसा में घायल हो गए थे।

बीजेपी ने पत्र में बताया कि डीसीपी साउथ आकाश मघारिया ने शांतिपूर्ण जुलूस को तोड़ते हुए सुकांत मजूमदार को खींचना, धक्का देना शुरू कर दिया। उसी अधिकारी ने प्रियंका टिबरेवाल और वहाँ पर उपस्थित महिलाओं के साथ भी अनुचित तरीके से छेड़छाड़ की।

पत्र में कहा गया है, “सत्ता में बैठे पार्टी के इशारे पर काम कर रहे एक सिविल सेवक द्वारा इस तरह का गैरकानूनी व्यवहार न केवल हर गर्वित भारतीय का मनोबल तोड़ता है बल्कि आईपीसी की धारा 166, 166A, 334, 354,336, 339,349, 350,351, 354, 354 (A) (B) और 355 के तहत कानून का भी उल्लंघन है।”

पार्टी की माँग है कि डीसीपी साउथ, आकाश मघरिया और मौके पर मौजूद कोलकाता पुलिस के अन्य अधिकारियों की पहचान की जाए और उन्हें तुरंत चुनाव ड्यूटी से हटाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निलंबित करने की भी माँग की।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा में दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट पश्चिम से भाजपा उम्मीदवार मानस साहा जख्मी हो गए थे। जिन्होंने लंबे संघर्ष के बाद बुधवार (सितंबर 22, 2021) को दम तोड़ दिया। बंगाल भाजपा ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। बंगाल भाजपा के मुताबिक, विधानसभा चुनाव परिणाम के दिन तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने डायमंड हार्बर पर मानस साहा को बेरहमी से पीटा था। इस हमले में बुरी तरह से जख्मी हो गए और लंबे इलाज के बाद उनकी मौत हो गई। भाजपा ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथ भाजपा कार्यकर्ताओं के खून से रंगे हुए हैं।

बैरकपुर से भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा, “चुनाव बाद हिंसा में मौत का सिलसिला थमा नहीं है। मतगणना के दिन तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों के हमले में घायल मगराहाट पश्चिम विधानसभा सीट से बीजेपी के प्रार्थी रहे मानस साहा ने आज दम तोड़ दिया। ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करें और परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति दें। ॐ शांति।”

बता दें कि भाजपा कार्यकर्ता मानस साहा की शव यात्रा को लेकर गुरुवार (सितंबर 23, 2021) को बवाल मच गया। दरअसल, प्रदेश इकाई के अध्यक्ष डॉ. सुकांतो मजूमदार, सांसद अर्जुन सिंह, प्रियंका टिबरेवाल समेत कई विधायक मानस साहा के शव को मुख्यमंत्री बनर्जी के आवास के पास ले जाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। इसी बीच भाजपा नेताओं और पुलिस के बीच झड़प हो गई। हालाँकि बाद में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मानस साहा को अंतिम विदाई दी।

अलीगढ़ में मौलवी ने मस्जिद में किया 12 साल के बच्चे का रेप, कुरान पढ़ने जाया करता था छात्र: यूपी पुलिस ने भेजा जेल

अलीगढ़ के एक मस्जिद में एक नाबालिग के यौन शोषण का मामला सामने आया है। मौलवी ने ही इस वारदात को अंजाम दिया। बच्चा मस्जिद में कुरानशरीफ पढ़ने गया था। पीड़ित बच्चे की उम्र मात्र 12 वर्ष है। इस वारदात के बाद बच्चा डरा-सहमा हुआ है। मौलवी ने उसके साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया। हालाँकि, डरे-सहमे बच्चे ने घर आकर अपने परिवार वालों को सारी आपबीती सुनाई। इसके बाद मामला प्रकाश में आया।

उक्त बच्चा मस्जिद में कुरान पढ़ने जाता था। मौलवी की हरकतों का पता चलते ही उसके माता-पिता उसे लेकर रोरावर थाने पहुँचे। वहाँ मौलवी के खिलाफ लिखित तहरीर देकर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। इस मामले को लेकर अलीगढ़ के सीओ राघवेंद्र सिंह ने जानकारी दी है कि फिलहाल मामले की जाँच की जा रही है। इलाके में भी इस घटना को लेकर रोष है। लोगों ने पुलिस से कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने भी मौके पर पहुँच कर जाँच-पड़ताल की है और इस मामले की जानकारी ली। इसके बाद आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। ये घटना गुरुवार (23 सितंबर, 2021) की है। पुलिस ने मौलवी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही बच्चे का मेडिकल परीक्षण कराने के लिए भेज दिया गया है। परिजनों ने बताया कि बच्चा काफी भोला-भाला है, ऐसे में मौलवी ने इसका फायदा उठाया है।

‘खाने में जहर दे सकती है राज्य सरकार’: योगी सरकार की सख्ती से डरा मुख्तार अंसारी, कोर्ट में अर्जी देकर माँगी विशेष सुविधा

यूपी के बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी ने एक बार फिर अपनी जान का खतरा जताया है। मुख्तार ने एमपी एमएलए विशेष कोर्ट में वर्चुअल पेशी के दौरान अपनी हत्या की आशंका जाहिर की है। उन्होंने कहा कि खाने में जहर देकर भी मारा जा सकता है। क्योंकि सरकार ‘नाराज’ चल रही है। उन्होंने उच्च श्रेणी की सुविधा को लेकर न्यायालय में पत्र भी दिया।

उसके वकील रणधीर सिंह सुमन के अनुसार मुख़्तार अंसारी ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित एक सुनवाई के दौरान बाराबंकी के विशेष सत्र न्यायाधीश कमलकांत श्रीवास्तव से अनुरोध किया। मुख्तार ने कहा, “राज्य सरकार मुझसे नाखुश है। ऐसे में हो सकता है कि मुझे खाने में जहर दे दिया जाए।” उसने आगे कहा कि अगर उसे जेल में उच्च श्रेणी मिल जाती है तो उसके मन से डर खत्म हो जाएगा। 

गैंगस्टर के वकील ने अदालत में दलील दी कि उसका मुवक्किल उच्च श्रेणी का कैदी है, लेकिन राज्य सरकार और जिला मजिस्ट्रेट जेल में मुख्तार अंसारी को उच्च श्रेणी की सुविधा नहीं दे रहे हैं। इसलिए उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि वह अंसारी को यह सुविधा देने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करें। मुख्तार के वकील ने बताया कि जेल मैनुअल के तहत उच्च श्रेणी मुहैया करवाने की अर्जी दी थी। उन्होंने बताया कि मुख्तार को उच्च श्रेणी सुरक्षा देने के मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख सात अक्टूबर तय की गई है। वकील ने बताया कि जज ने कहा है कि वो इस मामले में जल्द ही फैसला लेंगे।

इससे पहले अगस्त में सुनवाई के दौरान मुख्तार ने आरोप लगाया था कि उसे जेल के अंदर मारने के लिए 5 करोड़ रुपए की सुपारी दी गई है। अंसारी को पंजाब में अदालतों और जेल के बीच ले जाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बुलेटप्रूफ एम्बुलेंस के रजिस्ट्रेशन में जालसाजी और धोखाधड़ी के एक मामले में अदालत में पेश किया गया था। हाल ही में पंजाब के रोपड़ जेल से लाए जाने के बाद अंसारी कई आपराधिक मामलों में बांदा जेल में बंद है। इससे पहले भी कई बार मुख्तार पेशी के दौरान खुद की जान का खतरा जता चुका है।

गौरतलब है कि 03 अगस्त 2021 को यूपी सरकार द्वारा कुख्यात माफिया और अपराधी मुख्तार अंसारी से जुड़ी लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपए मूल्य की संपत्ति की कुर्की की गई थी। यह संपत्ति अंसारी की बीवी और उसके सालों के नाम पर थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते एक साल में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी समेत 25 माफियाओं की 11 अरब 28 करोड़ 23 लाख 97 हजार 846 रुपए की संपत्तियाँ जब्त की गई हैं। 

100 साल पहले से ही हिन्दुओं के खून के प्यासे थे मोपला, इन 50 घटनाओं से समझिए: 1921 के हिन्दू नरसंहार से पहले की बर्बरता

साल 1921 का मालाबार हिंदू नरसंहार तो याद ही होगा, जिसे सामान्यतः जमींदारों के खिलाफ ‘किसान विद्रोह’ के तौर पर याद किया जाता है। इसी को लेकर कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल ही में टिप्पणी करते हुए उसे ‘इतिहास का संस्करण’ करार दिया था, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम किसानों ने हिंदू जमींदारों के खिलाफ विद्रोह किया था। इसको लेकर दावा किया गया था कि 1921 में हुई घटना मुस्लिमों द्वारा किया गया नरसंहार नहीं, बल्कि वह जमींदारों के खिलाफ हुआ विद्रोह था। अगर कोई उन घटनाओं के बारे में पढ़ने की कोशिश भी करे तो उसे प्राथमिक स्रोतों में से खारिज कर दिया गया है।

दीवान बहादुर सी. गोपालन नायर ने अपनी पुस्तक ‘द मोपला रिबेलियन’ में खुलासा किया है कि कैसे मोपला नरसंहार से पहले भी रह-रहकर उन्मादी मुस्लिमों ने हिंदुओं का नरसंहार किया। वह लिखते हैं कि मुस्लिम कभी-कभी अपने ‘हाल इलकम’ (धार्मिक उन्माद) में चले जाते हैं। वह न केवल हिंदुओं का नरसंहार करते हैं, बल्कि उनके मंदिरों को भी अपवित्र कर देते हैं।

उस वक्त मालाबार में विशेष आयुक्त एमआर टीएल स्ट्रेंज को वहाँ के उन्मादी कारणों को समझने के लिए भेजा गया गया। साल 1852 की एक रिपोर्ट में स्ट्रेंज ने लिखा:

“किसी भी खतरे को जमींदारों द्वारा किसानों के उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। बावजूद इसके दक्षिणी तहसील में मोपला आबादी इन प्रकोपों का दोष जमींदारों पर मढ़ने की कोशिश कर रही है। वे इसके लिए खूब कोलाहल कर रहे थे। मैंने इस मामले में पूरा ध्यान दिया है और मुझे विश्वास है कि हालाँकि किसानों की व्यक्तिगत कठिनाई के उदाहरण हो सकते हैं, लेकिन हिंदू जमींदार अपने किसानों के प्रति सामान्य चरित्र, चाहे मोपला या हिंदू, नरम, न्यायसंगत और सहनशील हैं। मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूँ कि मोपला के काश्तकारों का आचरण ठीक नहीं है। वो सामान्यतः अपने दायित्वों से बचने के लिए झूठी और कानूनी दलीलों का सहारा लेते हैं। ऐसे में इसको लेकर कड़े उपाय किए जाते हैं।”

उन्होंने आगे कहा:

“इन सभी मामलों में एक विशेषता सामान्य रही है कि उन्हें सबसे निश्चित कट्टरता द्वारा सभी को चिह्नित किया गया है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसके लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जाता था। इस तरह की घटनाएँ जिन हिस्सों में है, वहाँ हिंदू मोपलाओं के डर में जी रहे हैं। अधिकतर अपने अधिकारों के लिए वहाँ के हिंदू मोपलाओं के इस तरह के डर में खड़े हैं कि ज्यादातर उनके खिलाफ अपने अधिकारों के लिए दबाव बनाने की हिम्मत नहीं करते हैं। कई मोपला यहाँ किराएदार हैं, लेकिन वे अपना किराया नहीं देते हैं। इसके अपने रिस्क भी हैं और इसीलिए अच्छा है कि वहाँ से बेदखल हो जाएँ।”

जबकि कई ऐसे वसीयतनामा और रिपोर्ट हैं, जिनसे यह साबित होता है कि मालाबार में हिंदुओं का नरसंहार शायद ही जमींदारों के खिलाफ किसान विद्रोह था। वामपंथी हमेशा से इस कहानी को प्रबल तरीके से हिंदू इतिहास के एक जघन्य हिस्से को व्हाइटवॉश करने की कोशिश करते रहे हैं।

‘किसान विद्रोह’ के सिद्धांत का खंडन करने वाले प्रत्यक्ष प्रमाणों के अलावा उसी सामान्य क्षेत्र में हिंदुओं के खिलाफ मोपला ‘आक्रोश’ को लेकर कम से कम 50 डॉक्युमेंट ऐसे हैं जो इस तथ्य को बल देते हैं कि 1921 का नरसंहार किसी भी तरह से अलग घटना नहीं थी, जिसमें काफिरों की हत्या करने के लिए मुस्लिम गए थे।

मोपला नरसंहार की पहली घटना सबसे पहले 1836 से शुरू हुई, जब कट्टरवादी मुस्लिमों ने हिंदुओं का नरसंहार किया था। यह क्रूर हत्या, लूट और बलात्कार की प्रक्रिया रुक-रुक कर 1919 तक जारी रही। मालाबार नरसंहार 1921 में शुरू हुआ और खिलाफत आंदोलन साल 1920 में आधिकारिक तौर पर शुरू किया गया था।

कालीकट के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर दीवान बहादुर सी गोपालन नायर ने अपनी पुस्तक में ऐसी 50 घटनाओं का जिक्र किया है।

1. 26 नवंबर 1836 में पंडालुर एर्नाड में कलिंगल कुन्होलन ने पन्निकर को चाकू मार दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके साथ ही उसने तीन अन्य लोगों को भी घायल कर दिया। हालाँकि, इसके बाद 28 नवंबर को तहसीलदार ने उसे गोली मार दी।

2. इसी तरह से 15 अप्रैल 1837 को एर्नाड के कलपट्टा में चेंगारा अम्सोम के एक अली कुट्टी ने नारायण मूसाद पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया और उसकी दुकान पर कब्जा कर लिया है। तहसीलदार और तालुक के चपरासी ने उसे कंट्रोल करने की कोशिश की, लेकिन बाद में अगले दिन पुलिस ने उसे गोली मार दी।

3. 5 अप्रैल 1839 में वलुवनाद के पल्लीपुरम में एक थोरयम पुलकल अथान और कई अन्य लोगों ने एक हिंदू मंदिर में आग लगा दी। इसके बाद वे एक दूसरे हिंदू मंदिर में छिप गए जहाँ उन्हें तहसीलदार के चपरासी ने गोली मार दी थी।

4. 6 अप्रैल 18 39: मम्बट्टोडी कुट्टीथन ने एक हिंदू व्यक्ति पारु तारगन और एक तालुक चपरासी को घायल कर दिया। इस मामले में उसे सजा सुनाई गई।

5. 19 अप्रैल 1940: इरिंबल्ली एर्नाड में परथोडियिल अली कुट्टी ने ओडयाथ कुन्हुन्नी नायर समेत एक अन्य व्यक्ति को घायल कर दिया। और मुस्लिम आरोपित ने किदंगिल मंदिर में आग लगा दी। हालाँकि, बाद में तालुक के चपरासी ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।

6. 5 अप्रैल 1941 में वलुवनाद के पल्लीपुरम में तुम्बा मणि कुन्युनियन और आठ अन्य लोगों ने एक पेरुम्बल्ली नंबूदिरी समेत एक अन्य व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी। कट्टरपंथियों ने उनके घर और 4 अन्य घरों को भी जला दिया था। मोपला के मुस्लिमों को 9 अप्रैल को 36 वीं रेजिमेंट नेटिव इन्फैंट्री और पुलिस चपरासी ने निष्क्रिय कर दिया था।

7. 13 नवंबर 1841 के दिन कैदोट्टी पडिल मोइदिन कुट्टी समेत 7 अन्य लोगों ने हिंदू व्यक्ति तोतास्सेरी ताचू पन्निकर और एक चपरासी को मार डाला। इस वारदात को अंजाम देने के बाद वे तीन दिनों तक एक मस्जिद में छिपे रहे। बाद में 17 नवंबर की सुबह वे तीन अन्य मुस्लिम कट्टरपंथियों से जुड़ गए। हालाँकि, बाद में उन्हें 40 सिपाहियों ने मार डाला।

8. 17 नवंबर 1841 को करीब 2,000 कट्टरपंथी मोपला मुस्लिमों ने उस जगह की रखवाली कर रहे जहाँ 13 कट्टरपंथी मुस्लिमों को दफनाया गया था। बाद में वहाँ से उन्होंने शवों को ले जाकर एक मस्जिद में दफन कर दिया। इनमें से 12 लोगों को दोषी ठहराया गया और दंडित किया गया।

9. 27 दिसंबर 1841 में मेलेमन्ना कुन्यात्तन ने 7 अन्य लोगों के साथ मिलकर तलप्पिल चक्कू नाइक और एक अन्य व्यक्ति की हत्या कर दी औऱ अधिकारी घर में जाकर छिप गए। इसके बाद उन्हें पुलिस और ग्रामीणों ने घेर लिया। फिर उन्हें मार दिया गया और उनकी लाश को कालीकट में फांसी के फंदे के नीचे दबा दिया गया।

10. 19 अक्टूबर 1843 को तिरुरंगाड़ी में कुन्ननचेरी अली आत्मान समेत 5 अन्य लोगों ने हिंदू व्यक्ति कपरात कृष्ण पन्निकर की हत्या कर दी। मोपला के ही एक और मुस्लिम कट्टरपंथी के शामिल होने के बाद वे और अधिक प्रताड़ना देने के लिए वे नायर के घर गए। वे घर में छिप गए। 24 अक्टूबर की सुबह सेना की टुकड़ी को उन्हें मारना था। लेकिन जब मोपला के मुस्लिम उन पर टूट पड़े तो सिपाही वहाँ से भाग गए। बाद में तालुक के चपरासी और ग्रामीणों ने मुस्लिम कट्टरपंथियों को मार डाला। वहीं, मौके से भागे सिपाहियों का कोर्ट-मार्शल किया गया।

11. 4 दिसंबर 1843 नायर नाम के एक मजदूर का शव मिला। उसके शरीर पर 10 गहरे घाव थे। बताया जाता है कि मोपला के मुस्लिम कट्टरपंथियों ने उसकी हत्या कर दी थी।

12. 11 दिसंबर 1843 में पांडिकड में अनावतत सोलिमन और 9 अन्य लोगों ने हिंदू व्यक्ति करुकम्मन गोविंद और उसके एक नौकर को मार डाला। हमलावर मंदिरों को अपवित्र कर एक घर में छुप गए। घटना के बाद क्षेत्र में सैनिकों की तैनाती की गई थी, लेकिन जब मोपला मुस्लिमों ने सैनिकों पर हमला किया तो वे मारे गए।

13. इसके बाद 19 दिसंबर 1843 के दिन एक चपरासी का हाथ और धड़ से सिर अलग मिला। इस घटना को अंजाम देने वाले अपराधी मोपला मुस्लिम कट्टरपंथी ही थे।

14. 26 मई 1849 एर्नाड में चकलाक्कल कम्माड ने कन्ननचेरी चेरू नाम के व्यक्ति और एक अन्य व्यक्ति को घायल कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपित मस्जिद में छिप गए। उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए राजी करने के लिए तहसीलदार मस्जिद गए। लेकिन बाद में वो मोपला चाकू लेकर उनकी ओर बढ़ा, हालाँकि बाद में वो मारा गया।

15. 25 अगस्त 1849 को तोरंगल उन्नियान ने पदितोदी तेयुन्नी की हत्या कर दी और उसके बाद अत्तन गुरुक्कल और अन्य ने तीन और लोगों को मार डाला। उसके बाद उन्होंने एक मंदिर में शरण ली और मंजेरी में मंदिर को आंशिक रूप से जलाने के साथ ही उसे अपवित्र कर दिया। किताब के मुताबिक, एनसाइन वायस की मौत हो गई थी जब 4 पुरुषों को छोड़कर मोपला के खिलाफ आगे बढ़ने से इनकार कर दिया और वहाँ से भाग गए। उस रात मोपला के मुस्लिम अंगदीपुरम मंदिर गए और उनके पीछे एक पैदल सेना की टुकड़ी थी। इसके बाद मुसलमानों ने हमला किया और मारे गए। उस रात 64 से अधिक मोपला मुस्लिम मारे गए थे।

16. 2 अक्टूबर 1850 में पेरियाम्बथ अट्टन का बेटा और मोपला अधिकारी ने दूसरों के साथ मिलकर मुंगमदम्बलट्ट नारायण मूसाद को मारने के लिए और उन्हें भी खुद को मारने के लिए इकट्ठा किया था।

17. 5 जनवरी 1851 को पय्यानाड एर्नाड में चूंड्यामूचिकल अट्टान नाम के हमलावर ने रमन मेनन नामक क्लर्क पर हमला कर उसे घायल कर दिया। इसके बाद पुलिस को धता बताते हुए खुद को इंस्पेक्टर के घर में बंद कर लिया। तहसीलदार ने पहले मोपला को सरेंडर कराने की कोशिश की, लेकिन उसने गोली चला दी। जिसके बाद उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।

18. 17 जनवरी 1851 में पुस्तक के अनुसार, 3 मोपला ‘हमले पर विचार’ की योजना बना रहे थे, जिसके बाद उनके टार्गेट को बचाने के लिए सुरक्षा प्रदान की गई थी।

19. 15 अप्रैल 1851 को इलिकोट कुनुन्नी और 5 अन्य लोगों को कोटुपरामबत कोमू और अन्य को तोड़ने और मारने के लिए डिजाइनिंग के रूप में सूचित किया गया था। किताब के मुताबिक, इसकी जानकारी सही थी, लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया।

20. 22 अगस्त 1851 को उपर्युक्त मामले में कुलथुर वलुवनाड में जहाँ कोमू मेनन और उसके नौकर और 3 अन्य के साथ ही मोपला 6 मुस्लिमों ने कदकोटिल नंबूदिरी और कोमू मेनन के भाई रमन मेनन की भी हत्या कर दी। मुस्लिमों ने उन्होंने मुंडनगारा रारिचन नायर पर हमला कर उन्हें बुरी तरह से घायल कर दिया था, जिनकी बाद में मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने रामा मेनन के घर में लगाने के बाद वो कुलथुर चले गए और कुलुथुर वरियार नामक एक बूढ़े व्यक्ति और दो नौकरों की हत्या कर दी। हालाँकि, बाद में हुई पुलिस कार्रवाई में एक सूबेदार और 4 यूरोपीय लोगों के साथ 17 मोपला मुसलमान मारे गए।

21. 5 अक्टूबर 1851 को तोत्तिंगल मम्मद और 3 अन्य मोपला मुस्लिमों ने एक ‘आक्रोश’ करने की योजना बनाई थी। जिसके बाद टारगेट को सुरक्षा मुहैया कराई गई थी।

22. 27 अक्टूबर 1851 को इरिंबुली एर्नाड में कलाथुर के विरोध में शामिल होने की कोशिश करने वाले दो मोपलाओं से सुरक्षा वापस ले ली गई है।

23. 4 जनवरी 1852 को 200 मोपला मुस्लिमों की भीड़ द्वारा समर्थित चोरियोट मय और 14 अन्य लोगों ने कलात्तिल केशवन तंगल के घर के सभी 18 लोगों का नरसंहार कर डाला और परिवार को नष्ट कर दिया, मंदिरों को जला दिया, घरों को जला दिया और अंत कल्लियाड नांबियार के घर पर जानलेवा हमला कर दिया। इसके बाद 8 जनवरी को आखिरकार गिर खत्म हो गया।

24. 5 जनवरी 1852 को 5 मोपला मुस्लिमों से सुरक्षा ली गई।

25. 28 फरवरी 1852 को मेलमुरी और किल्मुरी अम्सोम्स के त्रियाकलटिल चेक्कू और १५ अन्य मोपला मुस्लिम ‘मरने और कड़ा प्रतिरोध’ पैदा करने के लिए निकल पड़े। इसके बाद उनसे सुरक्षा छीन ली गई।

26. साल 1852 मई का महीना था, एर्नाड में दो चेरुमा इस्लाम में शामिल होने के बाद घर वापसी कर मूल धर्म (हिंदू धर्म) में लौट आए। ये चेरुमा तब कुदिलिल कन्नू कुट्टी नायर के लिए काम कर रहे थे। चपरासी होने के कारण पहले एर्नाड तालुक से पोन्नानी और बाद में कालीकट में स्थानांतरित कर दिया गया था ताकि उनकी जान बचाई जा सके। किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए हिंदू धर्म में घर वापसी करने वाले लोगों को दूसरीा जगहों पर भेज दिया गया।

27. 9 अगस्त 1852 कुरुम्ब्रानड में 3 मोपला मुस्लिमों गाँव के एक घर में लेखाकार (पुत्तूर) का पद संभाला और ‘बलिदानी’ के रूप में मरने का संकल्प लिया था। उन्होंने हमला करके एक ब्राह्मण को घायल कर दिया और 12 अगस्त को पुलिस ने उन्हें मार डाला।

28. इसी तरह 16 सितंबर 1853 को अंगदीपुरम में कुन्नुमल मोइदिन और चेरुकाविल मोइदिन ने हिंदू व्यक्ति चेंगलरी वासुदेवन नंबूदिरी की हत्या कर दी। मोपला मुस्लिमों को किसी तरह की कोई ‘भर्ती’ नहीं मिल रही थी इसलिए अंगदीपुरम के पास एक पहाड़ी की चोटी की ओर आगे बढ़े। तहसीलदार अपने चपरासी के साथ वहाँ गया था लेकिन कट्टरपंथियों की उन पर हमला कर दिया। उस दौरान 18 गोलियाँ चलाई गईं और बूढ़े को घायल अवस्था में नीचे लाया गया। इसके बाद एक छोटा व्यक्ति घायल होकर चपरासी और उन ग्रामीणों पर गिर गया, जिनके द्वारा उसे भेजा गया था।

29. 12 सितंबर 1855 को कालीकट में 3 मोपला – वलस्सेरी एमालु, पुलियाकुनत तेनु, चेम्बन मोइदिन कुट्टी और वल्लट्टदय्यत्ता परम्बिल मोइदीन कालीकट में जेल के कैदियों के कार्यदल के साथ वलुवनाद जाने के लिए भाग निकले। देश भर में घूमते हुए आखिर में 10 सितंबर को वे कालीकट पहुँचे और 12 सितंबर को उन्होंने कलेक्टर मिस्टर कोनोली की उनके बंगले में हत्या कर दी। हत्यारों को 17 सितंबर को मेजर हेली की पुलिस टीम और एचएम के 74वें हाई लैंडर्स की पार्ट नंबर 5 कंपनी ने गोली मार दी। आक्रोश में फंसे गाँवों से 38,331.80 रुपए का जुर्माना लिया गया और श्रीमती कोनोली को 30,936 रुपए का भुगतान किया गया।

30. नवंबर 1855 को मालाबार पुलिस के कोर ने कोलोनी के हत्यारों का साथ देने के आरोप में गिरफ्तार 2 मोपलाओं को अच्छे व्यवहार के लिए प्रतिभूतियों को देने की जरूरत थी, लेकिन वो 3 साल के सिक्योरिटी देने में सफल नहीं हुए। बाद में उन्हें देश छोड़ने की इजाजत दे दी गई।

31. अगस्त 1857 को पोनमाला में पूवदान कुन्हप्पा हाजी और 7 अन्य मोपला मुस्लिमों पर नायर के घर वापसी करने से अपने धर्म के लिए कथित अपमान का बदला लेने व देश से छुटकारा पाने व काफिरों द्वारा चलाई जा रही सरकार के खिलाफ साजिश रचने का संदह उत्पन्न हुई। बाद में उत्तर भारत में विद्रोह से सरकार कमजोर हो गई थी। षड्यंत्रकारियों को आश्चर्य हुआ और उन्हें बंदी बना लिया गया और उनमें से सात को मोपला आक्रोश अधिनियम के तहत निर्वासित कर दिया गया था।

32. फरवरी 1858 का दिन था और तिरुरंगाड़ी एर्नाड में एक मोपला ने जमीन का एक टुकड़ा खरीदा था, जो 19 अक्टूबर 1943 के विद्रोह के दौरान मारे गए मोपलाओं के मृत्यु संघर्ष की जगह थी। उसने उस जगह एक मस्जिद बनाई। इसके बाद उसने एक दिन का उत्सव आयोजित किया। वहाँ काफी लोग आए और वहाँ संख्या बढ़ने से दावत की स्थिति खराब हो गई। मोपला के खरीददार और दो मुल्लाओं को निर्वासित कर दिया गया।

33. साल 1860 में उत्तरी मालाबार में दो मोपलाओं को एक अधिकारी की जान को खतरे में डालने के कुछ समय के लिए निर्वासित किया गया था।

34. 4 फरवरी 1864 को मेलमुरी में रमज़ान की दावत के दौरान धार्मिक कट्टरता के कारण अत्तन कुट्टी नाम के मोपला ने चाकू से वार कर नोटा पन्निक्कर की हत्या कर दी, जिसे उसने अपने टार्गेट तियान के घर में पाया था। अत्तन को एक साधारण अपराधी के रूप में फाँसी की सजा सुनाई गई थी और उसके साथी को निर्वासित कर दिया गया था। इसके साथ ही गाँव पर भी 2037 रुपए का जुर्माना लगाया गया था।

35. 17 सितंबर 1865 को 3 मोपलाओं को नेन्मिनी अम्सम के शांगू नायर की हत्या का दोषी ठहराया गया था। उस दौरान यह माना गया था कि यह हत्या व्यक्तिगत और निजी उद्देश्यों के कारण की गई थी। हालाँकि, मुवलद समारोह में हत्या से तीन दिन पहले प्रदर्शन के द्वारा एक धार्मिक आवरण फैला दिया गया था। उसमें कई लोग भी मौजूद थे जो कि हत्या के बारे में जानते थे। इनमें से 6 को बाहर कर दिया गया था।

36. 8 सितंबर 1973 को पराल में कुन्हप्पा मुसलियार ने तुथेकिल मंदिर के वेलीचापद या ओरेकल का दौरा किया और वहाँ उसने तलवार से कई बार हमले कर उन्हें वहीं मरने के लिए छोड़ दिया। इसके बाद वो कोलाथुर गया औक कोलाथुर वेरियर के परिवार के एक सदस्य पर जानलेवा हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। मलप्पुरम के सैनिकों ने घर को घेर लिया, जिसके बाद कट्टरपंथियों ने उनपर हमले कर दिए। इस दौरान जबावी कार्रवाई में 9 में से 8 चरमपंथी मारे गए। इस दौरान एक बच्चा भी घायल हो गया था जो बाद में ठीक हो गया। इस मामले में संबंधित गाँवों पर 42,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया था।

37. 27 मार्च 1877: इरिंबुली में अविंजीपुरथ कुन्ही मोइदीन और 4 अन्य मोपला मुस्लिमों के साथ मिलकर कट्टरता भरा आक्रोश फैलाने की कोशिश की थी। ऐसा इसलिए क्योंकि नायर ने उनमें से एक की बीवी का अपमान कर दिया था। बहरहाल मालाबार से मक्का जाने के लिए चुने गए दो षड्यंत्रकारियों को उन्हें किस स्थान पर भेजा गया था और कुन्ही मोइदीन अच्छे व्यवहार के लिए ‘बाध्य’ कर दिया गया था।

38. जून 1879: पराल में कुन्नानाथ कुन्ही मोइदु ने 6 युवकों लोगों को आक्रोशित करने के इरादे से उकसाया था, लेकिन उससे पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद रिंग लीडर को वहाँ से बाहर कर दिया गया।

40. 9 सितंबर 1880 के दिन मेलत्तूर में इस्लाम अपनाने के बाद फिर से घर वापसी करने वाले एक चेरुमा लड़के एम अली ने गला काट दिया। वारदात के अगले ही दिन उसने एक कुम्हार को भी घायल कर दिया। इसके बाद जब वह इच्छित पीड़ितों के घर गया तो एक चौकीदार ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। इसके लिए 7 मोपलाओं को बाहर कर दिया गया और कुछ पर जुर्माने भी लगाए गए थे।

41. 4 मार्च 1884 के दिन अधिकारियों को एक याचिका मिली थी कि 2 मोपला एक हिंदू की हत्या करने की योजना पर काम कर रहे थे। इसके बाद दो सरगनाओं को भी डिपोर्ट कर दिया गया।

42. 18 जून 1884: किताब के मुताबिक, इस्लाम अपनाने के बाद पुन: हिंदू धर्म अपनाने वाले कन्नाचेरी रमन पर सबसे बर्बर तरीके से हमला किया गया। इस हमले को 2 मोपला मुस्लिमों ने ही अंजाम दिया था। 3 मोपलाओं को आजीवन के लिए ले जाया गया, जबकि 3 अन्य को निर्वासित कर दिया गया।

43. 28 दिसंबर 1884: निर्वासन और जुर्माने के कारण मोपला मुस्लिम नाराज थे। एक कोलाकादम कुय्यासम और 11 अन्य रमन के भाई चोयिकुट्टी के घर के लिए रवाना जाने के लिए निकले, लेकिन मोपला के मुस्लिमों ने उनका हाथों में हथियारों की एक वॉली के जरिए वार किया। इसके बाद उन्होंने हिंदू के घर में आग लगा दी। मलप्पुरम छोड़ने के दौरान रास्ते में भी उन्होंने एक ब्राह्मण व्यक्ति पर हमला कर उसे घातक तरीके से घायल कर दिया और त्रिकालूर मंदिर चले गए। मोपला के मुस्लिम मंदिर में छिपे हुए थे और उसे सैनिकों ने मंदिर को घेर लिया, जिसके बाद मुस्लिमों ने गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। मंदिर के अंदर जाने के लिए उन लोगों ने डायनामाइट ब्लास्ट कर दरवाजे को तोड़ दिया। 12 मुस्लिमों में से 3 अभी भी जीवित थे और 2 की तुरंत मृत्यु हो गई थी।

44. 1 मई 1885: कट्टरपंथी मोपला मुस्लिमों के एक समूह में कुट्टी करियानंद नाम के हिंदू के घर पर हमला कर दिया और उसकी, उसकी पत्नी और उसके 4 बच्चों की हत्या कर दी। उन्होंने उसके घर में आग लगाने के बाद पास के एक मंदिर को भी जला दिया। पीड़िता ने बाद में इस्लाम अपना लिया था, लेकिन 14 साल पहले उसने हिंदू धर्म में वापसी कर ली थी। मौत का तांडव मचाने के बाद मोपला मुस्लिम अपने-अपने क्षेत्रों में चले गए और 2 मई को एक ब्राह्मण व्यक्ति के घर पर कब्जा कर लिया। उसी दिन दोपहर को उन्होंने मलप्पुरम से साउथ वेल्स बॉर्डर्स की एक पार्टी पर हमला किया। उन्होंने सेना पर उस घर की ऊपरी मंजिल की एक खिड़की से गोलियाँ चलाईं और 4 लोग घायल हो गए। बाद में सेना की जवाबी कार्रवाई में सभी 12 मोपला मुस्लिम मारे गए।

45. 11 अगस्त 1885: उन्नी मम्मद नाम का मोपला मुस्लिम धान खरीदने के बहाने एक हिंदू कृष्ण पिशारोदी के घर में घुस गया। जिस वक्त वह हिंदू के घर में घुसा उस दौरान वो स्नान कर रहा था। मम्मद उन्नी (मोपला मुस्लिम) ने चाकू से हिंदू व्यक्ति पर हमला कर दिया। बाद में ट्रायल के बाद उसे फांसी दे दी गई।

​​46. 1894: पांडिकड़ में मोपला मुस्लिमों का एक गिरोह युद्धपथ चल पड़ा। इस दौरान वो घूम-घूमकर रास्ते में नायरों और ब्राह्मणों पर हमला करने और उनकी हत्या करने के अलावा जहाँ मौका मिलता था तो मंदिरों को जलाते और अपवित्र कर रहे थे। इसी तरह की वारदात को अंजाम देने के बाद जैसे ही वे मंदिर से बाहर निकले तो पुलिस ने उन्हें गोली मार दी।

47. 1896: नायर ने किताब में लिखा है कि हिंदुओं पर किए गए इस अत्याचार के लिए किसी भी ट्रिगर को खोजने के लिए दबाव डाला गया था। यह सब बेलगाम मोहम्मदन कट्टरता का परिणाम था। 25 फरवरी 1896 को 20 मोपला मुस्लिमों के गिरोह ने चेम्ब्रसेरी अम्सोम से हत्याएँ शुरू की। उन्होंने 5 दिन तक गाँवों को आतंकित किया। पुस्तक के में कहा गया है कि इस अवधि के दौरान, हिंदुओं की हत्या कर दी गई और उनकी कुडुमियों को काट दिया गया। उनसे जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया। इस भीषण नरंसहार के दौरान मंदिरों को बड़े पैमाने पर उजाड़ दिया गया और उन्हें जलाकर राख कर दिया गया। इसी क्रम में 1 मार्च को कट्टरपंथी मुस्लिमों ने अपना अंतिम स्टैंड बनाने के दृढ़ संकल्प के साथ करनमुलपाड मंदिर में घुस गए। करीब 20 सैनिकों के साथ गोलीबारी शुरू हुई। सुबह नौ बजे जिलाधिकारी ने जवानों की मुख्य टुकड़ी के साथ करीब 750 गज की दूरी पर मंदिर के सामने वाली पहाड़ी पर कब्जा कर लिया। पुलिस की फायरिंग के दौरान छिपने के बजाय मुस्लिम कट्टरपंथियों ने धार्मिक नारे लगाते और फायरिंग करते हुए जान-बूझकर मौत को गले लगा लिया। टूटी हुई जमीन पर लगातार आगे बढ़ते हुए पुलिस मोपला के कट्टरपंथी मुस्लिमों से सरेंडर करने के लिए कहने के लिए मंदिर के पास आई। मुस्लिम उद्दंड थे, लेकिन सैनिकों ने बिना किसी प्रतिरोध के मंदिर में प्रवेश किया। लेकिन 92 मुस्लिमों के कटे हुए गले को देख रुक गए। इन मुस्लिमों की हत्या भी मुस्लिमों ने ही की थी।

48. अप्रैल 1898: पय्यनाड में मोपलाओं ने विद्रोह किया था, लेकिन बाद में उन्हें सरेंडर करना पड़ा।

49. 1915 में जिला मजिस्ट्रेट इन्स की जान लेने की कोशिश की गई। उस दौरान कट्टरपंथी मोपला के मुस्लिमों ने आगजनी और हत्याएँ की थी। हालाँकि, बाद में उन्हें मार गिराया गया।

50. फरवरी 1919: बर्खास्त किए गए मोपला हेड कॉन्स्टेबल के नेतृत्व में कट्टरपंथियों के एक गिरोह ने हंगामा करना शुरू कर दिया। उन्होंने कई मंदिरों को तोड़ दिया और उन्हें अपवित्र कर दिया। उनके सामने आने वाले हर ब्राम्हण और नायर की उन्होंने हत्या कर दी थी। हालाँकि, बाद में वो पुलिस के हाथों मारे गए। इस घटना में 4 ब्राह्मण और 2 नायर मारे गए थे।

1919 की घटना के बाद 1921 में मालाबार हिंदू नरसंहार छिड़ गया जहाँ 10,000 से अधिक हिंदुओं को बेरहमी से मार दिया गया। मोपला मुस्लिमों द्वारा की जा रही इन नासमझ कट्टर हत्याओं के दौरान टीएल स्ट्रेंज को एक विशेष आयुक्त के रूप में यह पूछने के लिए भेजा गया था कि मुस्लिम रुक-रुक कर हिंदुओं को क्यों मार रहे थे। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, अपनी रिपोर्ट में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि इसका कारण मुसलमानों की नासमझ कट्टरता थी, न कि किसान विद्रोह।

हिंदुओं के मालाबार नरसंहार के बाद कालीकट में एक विशेष न्यायाधिकरण की अध्यक्षता करने वाले तीन न्यायाधीशों ने कहा था:

जिला गजेटियर से प्रतीत होता है कि मोपला मुस्लिम युद्ध के रास्ते पर थे और हिंदुओं की हत्याएँ करते थे, फिर सामने चाहे कोई भी हो। ये दूसरे कट्टरपंथियों से जुड़ जाते थे। अन्य कट्टरपंथियों से जुड़ जाते थे और फिर सैनिकों के साथ खूनी संघर्ष करते थे। कुछ मामलों में वे किसी विशेष जमींदार से घृणा से प्रेरित हो सकते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी हिंसक हरकतों को शुरू करने के लिए किसी शिकायत जरूरी नहीं है।

मोपलाओं को बर्बर जाति के तौर पर देखा गया है और वर्तमान में वो बिल्कुल उपयुक्त लगता है। लेकिन यह केवल कट्टरता नहीं थी, यह कृषि की परेशानी भी नहीं थी, यह गरीबी नहीं थी, जिसने अली मुसलैर और उसके अनुयायियों के दिमाग में काम किया। निर्णायक रूप से सबूतों से पता चलता है कि यह खिलाफत और असहयोग आंदोलनों का प्रभाव था, जिसने उन्हें इस अपराध के लिए प्रेरित किया। यह ऐसा है जो वर्तमान को पिछले सभी प्रकोपों ​​​​से अलग करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि उनका इरादा यह सब ब्रिटिश सरकार को नष्ट करने और हथियारों के बल पर खिलाफत सरकार को प्रतिस्थापित करने का था।

इस फैसले से ही साफ पता चलता है कि 1921 से 100 साल पहले तक मोपला मुसलमान जंग के रास्ते पर चले गए थे और हिंदुओं का कत्लेआम किया था। उन्होंने अपनी इस्लामी कट्टरता के कारण ऐसा किया। 1921 के हिंदुओं के नरसंहार के बारे में जो बात अलग थी वह यह नहीं था कि वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन करने के लिए ऐसा कर रहे थे, बल्कि अंग्रेजों की खिलाफत सरकार स्थापित करने के लिए कर रहे थे। यहाँ खिलाफत सरकार का मतलब इस्लामिक खिलाफत के अलावा और कुछ नहीं है। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि यह आंदोलन मोहनदास करमचंद गाँधी द्वारा संक्षेप में और पूरे दिल से समर्थित था। आज तक, मालाबार हिंदू नरसंहार की घटनाओं को मालाबार के हिंदुओं द्वारा सामना की जाने वाली भयावहता को दूर करने के लिए विकृत किया गया है, यह बताने के लिए कि हिंदुओं की हत्याएँ मुस्लिम किसानों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले हिंदू जमींदारों के लिए प्रतिशोध थीं। हालाँकि हकीकत इससे कोसों दूर है।

नोट: यह आर्टिकल ऑपइंडिया से नुपुर शर्मा द्वारा लिखा गया है, जिसे कुलदीप सिंह ने हिंदी में संपादित किया है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें।

PM मोदी ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को दिया दादा से जुड़ा खास तोहफा, ऑस्ट्रेलिया-जापान के PM को भी दिए विशेष गिफ्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिका की उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को ऐसा उपहार दिया है जिसे देखकर कमला हैरिस को भारतीय मूल की याद आएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कमला हैरिस को उनके दादा पीवी गोपालन की सरकारी नियुक्तियों और सेवानिवृत्ति से जुड़े गजट नोटिफिकेशन को लकड़ी की फ्रेम में सजा कर भेंट किया है।

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कमला हैरिस के दादा से जुड़े नोटिफिकेशन (साभार: सोशल मीडिया)

बता दें कि अमेरिकी उप राष्ट्रपति के दादा पीवी गोपालन एक वरिष्ठ और सम्मानित सरकारी अधिकारी थे जिन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए कई पदों पर काम किया। कमला हैरिस बचपन में ही अपने माता पिता के साथ भारत को छोड़कर अमेरिका चली गई थीं। प्रधानमंत्री मोदी का उपहार पाकर अमेरिका की उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को अपने दादा के साथ अपने बचपन की भी याद आएगी।

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने कमला हैरिस को गुलाबी मीनाकारी शतरंज का सेट भी उपहार में दिया है। गुलाबी मीनाकारी का रोमांचक शिल्प दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक काशी से बेहद करीब से जुड़ा हुआ है साथ ही यह प्रधानमंत्री मोदी का निर्वाचन क्षेत्र भी है। शतरंज के इस सेट के एक-एक मोहरे को बारीकी से हाथों से तैयार किया गया है। इनमें काशी की जीवंतता की झलक दिखाई पड़ती है।

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पीएम मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री को चंदन से बनी बुद्ध की मूर्ति भेंट की (साभार: ANI)

जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा (Yoshihide Suga) को पीएम मोदी ने चंदन की बुद्ध की मूर्ति भेंट की। जापान में बौद्ध धर्म छठी शताब्दी से प्रचलित है। साथ ही, यह भारत और जापान को एक साथ लाने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। जापान की अपनी पिछली यात्राओं के दौरान, पीएम मोदी ने बौद्ध मंदिरों का दौरा किया था।

पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को चाँदी का गुलाबी मीनाकारी जहाज भेंट किया (साभार: ANI)

वहीं ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष स्कॉट मॉरिसन (Scott Morrison) को प्रधानमंत्री मोदी ने चाँदी का गुलाबी मीनाकारी जहाज भेंट किया। इस जहाज पर भी काशी की गतिशीलता को दर्शाते हुए खास तौर पर दस्तकारी की गई है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे पर हैं। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस ने आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वहाँ (पाकिस्तान की सरजमीं पर) कई आतंकी संगठन सक्रिय हैं और इस बाबत उन्होंने पाकिस्तान को कहा भी है कि वो इनके विरुद्ध एक्शन लें, ताकि अमेरिका और भारत की सुरक्षा पर कोई असर न पड़े। विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने जानकारी देते हुए कहा, “जब आतंकवाद का मुद्दा आया तो उपराष्ट्रपति ने स्‍वयं इस मामले (आतंकवाद) में पाकिस्तान की भूमिका का उल्लेख किय।” श्रृंगला के अनुसार, हैरिस ने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादी समूह काम कर रहे थे।

अदालत में शराब… कपिल शर्मा शो के खिलाफ FIR, कोर्ट के अपमान का आरोप, उधर बच्चन के पान मसाला एड पर भी बवाल

सेट पर शराब पीने वाले सीन का मामला सामने आने के बाद कपिल शर्मा के शो के खिलाफ FIR दर्ज की गई। उधर अमिताभ बच्चन के पान मसाला विज्ञापन पर बवाल मचा है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में ‘द कपिल शर्मा शो’ के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई। सोनी टीवी पर आने वाले इस शो के खिलाफ FIR इसीलिए दर्ज की गई है, क्योंकि एक कोर्टरूम सीन को फिल्माने के समय अभिनेताओं को शराब पीते हुए दिखाया गया था।

आरोप है कि इससे अदालत व न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँची है। CJM कोर्ट में एक वकील ने ये मामला दर्ज कराया। इस मामले में 1 अक्टूबर, 2021 को सुनवाई होगी। वकील ने कहा, “ये शो काफी मैला है। उन्होंने महिलाओं पर भी आपत्तिनजक टिप्पणियाँ की थीं। एक दृश्य में तो उन्हें कोर्ट का दृश्य फिल्माते हुए देखा गया और अभिनेता शराब पी रहे थे। ये अदालत की अवमानना है। गंदापन का ऐसा प्रदर्शन प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।”

दरअसल, जिस एपिसोड को लेकर विवाद हो रहा है उसका प्रसारण 19 जनवरी, 2021 को हुआ था। 24 अप्रैल, 2021 को इसका रिपीट टेलीकास्ट किया गया था। अधिवक्ता के अनुसार, कोर्टरूम सेट पर एक व्यक्ति को शराब के नशे में दिखाया गया है। उनके औसर, ये अदालत का अपमान है। बता दें कि लगभग 7 महीनो तक ऑफ एयर रहने के बाद 21 अगस्त को ही TKSS टीवी पर लौटा है।

उधर तम्बाकू के खिलाफ अभियान चलाने वाले एक राष्ट्रीय NGO ने अमिताभ बच्चन से अपील की है कि वो पान मसाला का विज्ञापन छोड़ें। NGO ने कहा कि इससे युवाओं में गलत सन्देश जा रहा है। ‘National Organisation for Eradication of Tobacco’ के अध्यक्ष शेखर सलकर ने पत्र लिख कहा कि चूँकि बच्चन सरकार के प्लस पोलियो अभियान के ब्रांड एम्बेसडर हैं, उन्हें जल्द से जल्द पान मसाला का विज्ञापन छोड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा, “शाहरुख़ खान, अमिताभ बच्चन, रणवीर सिंह, अजय देवगन और हृतिक रौशन जैसे अभिनेता तम्बाकू उत्पादों के विज्ञापन में काम कर रहे हैं। इससे छात्र बड़ी संख्या में तम्बाकू का प्रयोग करने लगे हैं। सिगरेट कंपनियों ने छात्रों को निशाना बनाया है। ये चीजें कैंसर का कारण बन सकती हैं। पान भी ओरल कैसंर पैदा कर सकता है। WHO ने इस वैज्ञानिक अध्ययन को माना है, जिसमें कहा गया था कि पान से ओरल कैंसर हो सकता है।

गो वीगन के नाम पर ‘SEX’ बेच रहा PETA, प्रमोशन के लिए सेक्सुअल एक्ट का सहारा: Video में दिखाए फलों के साथ ‘गंदे’ प्रयोग

पेटा के दोहरे रवैये से तंग आकर आमजन वैसे भी उनकी बातों पर गौर नहीं करते शायद इसीलिए अब उन्होंने खुद को केंद्र में लाने के लिए सेक्स संबंधी चीजों का सहारा लिया है। पेटा अपने ट्विटर अकॉउंट पर सेक्स से जुड़ी वीडियोज डाल रहा है। फलों पर उंगली से प्रयोग करके ये दिखा रहा है कि कैसे फल खाने के बाद बेडरूम में पार्टनर को खुश किया जा सकता है।

एक वीडियो में पेटा ने कई तरह के फल लिए हैं और उन पर अपनी उंगली फेर रहे हैं। कैप्शन और पेटा के ढंग से साफ पता चला रहा है कि वो किस तरह लोगों का ध्यान खुद पर आकर्षित करना चाहते हैं। उंगली की मूवमेंट्स फलों पर इतनी घटिया तरह दिखाई गई है कि यूजर्स जवाब में ये लिखने लगे कि उन्हें बेकार सेक्स लाइफ ही चलेगी लेकिन वो इस तरह फल नहीं खा सकते।

दरअसल, पेटा इतना घटिया स्टंट करके लोगों को ये मनाने का प्रयास कर रहा है कि ये फल उन लोगों के लिए उपचार हैं जो कि अच्छा सेक्स जीवन नहीं अनुभव कर पा रहे। उनका मानना है कि ऐसे लोगों के लिए उपचार सिर्फ वीगन होना है। संस्था दावा कर रही है कि वीगन लोग अपनी सेक्स लाइफ को ज्यादा एंजॉय करते हैं जबकि नॉन-वीगन और खासकर मांसाहारी इतना आनंद नहीं ले पाते।

वीडियो में अजीबोगरीब दावे हैं। बिना सिर-पैर के कैप्शन हैं। उदाहरण देखिए- कैप्शन में लिखा है “बेडरूम में चीजों में तड़का लगाना चाहते हैं? चिली पेपर बिन समय लिए आपको हॉट और हेवी कर देगा। थोड़ा सा संतरे का जूस आपके जरूरी अंगों में खून का प्रवाह बढ़ाएगा। जिंक भरपूर लो ताकि यौनेच्छा बढ़े। एवोकडो आपको घंटों बिताने के लिए स्टैमिना देगा। आपका साथी आपको आभार देगा।”

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। घटिया हथकंडा देखते हुए लोगों का कहना है कि पेटा अब गलती से ये न कह दे कि उनका अकॉउंट हैक हो गया है। सबसे घटिया बात यह है कि पेटा सिर्फ फलों पर अपनी क्रिएटिविटी नहीं दिखाने पर रुका। उन्होंने बकायदा ऐसी वीडियोज शेयर कर दीं जिनमें कपल्स को बेडरूम में दिखाया गया था। 

एक तरफ कुछ मीट खाने वालों के लिए ये बताया गया कि वो कुछ टाइम के लिए बिस्तर पर जोश में होते हैं और फिर हल्के पड़ जाते हैं जबकि वीगन व्यक्ति घंटों-घंटों अपने पार्टनर के साथ इन्वॉल्व रहते हैं और अलग अलग सेक्सुअल पोजिशन ट्राय करके अपने साथी को आनंद देते हैं। 

पेटा द्वारा साझा वीडियो वाला ट्वीट नीचे लगा रहे हैं। आप इसे अपने विवेक पर देखें:

बता दें कि पेटा की यह वीडियो गो वीगन अभियान का हिस्सा है। अपने हालिया आर्टिकल में पेटा ने वीगन होने के फायदे बताए थे। उन्होंने कहा था जानवरों के लिए शाकाहार अच्छा है, मीट हरा नहीं होता, शाकाहार सेहत के लिए अच्छा होता है।

शाकाहार से यौन जीवन को बढ़ावा देने के सभी दावे सिर्फ दावे हैं। हर साल सैकड़ों लेख और दावे यह कहते हैं कि बेहतर सेक्स लाइफ के लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं। यौन शक्ति बढ़ाने वाले फलों के बारे में पेटा के दावों का कुछ आधार फलों के विटामिन और खनिजों का एक अच्छा स्रोत होने के कारण हो सकता है। लेकिन अच्छे समग्र स्वास्थ्य के लिए, व्यक्तियों को संतुलित आहार की आवश्यकता होती है।

पेटा हर साल सैंकड़ों जानवरों को मारता है

लोगों को शाकाहार का ज्ञान देने वाला पेटा सबसे ज्यादा जानवरों को मारने के लिए उत्तरदायी पाया जाता है। द अटलांटिक में 2012 के एक लेख में बताया गया था कि कैसे कुत्तों के लिए पेटा की गोद लेने की दर सिर्फ 2.5% है। यह भी पाया गया कि उन्होंने बड़ी संख्या में बिल्लियों, कुत्तों और अन्य जानवरों को मार डाला, जिनका उन्होंने ‘रेस्क्यू’ करने का दावा किया था। इसके बाद साल दर साल ऐसे कई आर्टिकल आते रहे हैं जिन्होंने पेटा के चेहरे को उजागर किया और बताया कि कैसे जानवरों को आश्रय देने के नाम पर उन्हें मारा गया और अपने प्रमोशन के लिए लाखों खर्च होते रहे।

पेटा बनाम अमूल

बता दें कि पेटा भारत में भी अपने पाखंड के लिए जाना जाता है। वे हर हिंदू त्योहार को निशाना बनाते हैं और यहाँ की बहुसंख्यक आबादी को शर्मसार करने की कोशिश करते हैं। ये चाहते हैं कि लोग अपनी संस्कृति परंपरा भुला कर इनके निर्देशों का पालन करें

हाल ही में, पेटा ने भारत के सबसे बड़े डेयरी उत्पाद सहकारी अमूल को भी निशाना बनाना शुरू किया था, जो हजारों ग्रामीण महिलाओं को आजीविका प्रदान करता है। उन्होंने अमूल को ‘शाकाहारी दूध’ बेचने के लिए कहकर ज्ञान देने की कोशिश की थी। हालाँकि जब उनसे हिंदू समुदाय को निशाना बनाने पर और बूचड़खानों पर चुप्पी साधने को लेकर सवाल किया गया तो पेटा ने विचित्र दावा करते हुए कहा कि डेयरी उद्योग के कारण गोहत्या होती है।

मालूम हो कि पेटा भले ही जानवरों की देखभाल करने का दावा करता है लेकिन कभी यह समझाने की जहमत नहीं उठाता कि भारत में सैकड़ों गोशालाओं को गायों को आश्रय देने और उनकी रक्षा करने में मदद क्यों नहीं करता है, जिन्हें अक्सर पशु तस्करों के हाथों से बचाया जाता है जो उन्हें कत्ल के लिए ले जाते हैं। ये स्पष्ट है कि पेटा न केवल अत्यधिक महंगे ‘शाकाहारी’ उत्पादों का प्रचार कर रही है बल्कि लोगों को उनके खाने के विकल्पों पर शर्मिंदा भी कर रही है।

‘उस इलाके में 1983 से हो रही हत्याएँ, मंदिर की जमीन पर कब्ज़ा’: CM सरमा ने बताया- 10000 की भीड़ ने पुलिस को घेरा था

असम में अतिक्रमण खाली कराने के दौरान पुलिस और घुसपैठियों में हुए संघर्ष व इसके बाद वायरल हुए वीडियोज पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वो क्षेत्र 1983 से ही हत्याओं के लिए जाना जाता है, अन्यथा सामान्यतः लोग मंदिर की जमीन और कब्ज़ा नहीं करते। सीएम सरमा ने कहा कि उन्होंने चारों तरफ अतिक्रमण देखा है। साथ ही उन्होंने पूछा कि जब जमीन खाली कराए जाने की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने की बात हुई थी, फिर उत्तेजित किया?

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “उस क्षेत्र में 1983 से ही हत्याएँ होती रही हैं। इसके लिए वो कुख्यात है। मैं मंदिर गया था, मैंने चारों तरफ अतिक्रमण देखा। आखिर वो लोग लाठी व हथियारों से लैस होकर कैसे आ गए? आप सिर्फ एक 30 सेकेण्ड के वीडियो को आधार बना कर असम सरकार को बदनाम नहीं कर सकते। उससे पहले और उसके बाद क्या हुआ था, ये देखना पड़ेगा। समग्र नजरिए से घटना को देखिए।”

सीएम सरमा ने कहा कि अगर कोई भी पुलिसकर्मी इसमें शामिल है तो वो खुद कार्रवाई करेंगे, लेकिन साथ ही पूछा कि आखिर 27,000 एकड़ जमीन को 2-3 हजार परिवार कैसे कब्ज़ा सकते हैं? उन्होंने कहा कि गरीब लोग एक-एक इंच जमीन के लिए मर रहे हैं और बाढ़ आने से उन्हें परेशानी हो रही है। भूमिहीनों की बात करते हुए सीएम हिमंता बिस्वा ने कहा कि लोग सरकार से जमीन के लिए गुहार लगा रहे हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि असम सरकार को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने जंगल की एक जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश हाल ही में दिया है। उन्होंने कहा कि जब उच्च-न्यायालय के आदेश का पालन कराते हुए अतिक्रमणकारियों को वहाँ से हटाना है, तो इसमें विपक्ष को सहयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि ताज़ा कार्रवाई भी अचानक से नहीं की गई, इसके लिए पिछले 4 महीनों से विचार-विमर्श किया जा रहा था।

उन्होंने बताया कि लगभग 10,000 लोगों ने पुलिस को घेर लिया था, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि भूमिहीनों को सरकार ने दो-दो एकड़ जमीन देने की योजना बनाई है, जिसके तहत अतिक्रमण को खाली कराया जा रहा है। इस घटना में असम पुलिस के 11 जवान घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि कैमरामैन क्यों आया और उसने ये सब क्यों किया, इसकी न्यायिक जाँच की जाएगी।

बता दें कि जुलाई 2012 में ‘नॉर्थ-ईस्ट पॉलिसी इंस्टिट्यूट’ ने एक अध्ययन में पाया गया था कि 26 सत्रों की 5548 बीघा जमीन को घुसपैठियों ने कब्ज़ा रखा है। एक RTI से तो यहाँ तक पता चला था कि असम का 4 लाख हेक्टेयर जंगल क्षेत्र अतिक्रमण की जद में है। ये राज्य के कुल जंगल क्षेत्रों का 22% एरिया है। 2017 में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एचएस ब्रह्मा की अध्यक्षता वाली एक समिति ने पाया था कि असम के 33 जिलों में से 15 में बांग्लादेशी घुसपैठिए हावी हैं।

रोहिणी कोर्ट में जज के सामने गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की गोली मारकर हत्या, वकील बन घुसे दोनों हमलावर भी ढेर: देखें वीडियो

राजधानी दिल्ली में आज दिनदहाड़े रोहिणी कोर्ट परिसर में फायरिंग से हड़कंप मच गया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता कि हुआ क्या है। कोर्ट में दो बदमाशोें ने अंधाधुंध फायरिंग कर कुख्यात बदमाश जितेंद्र मान उर्फ गोगी की हत्या कर दी। वारदात के समय उसे कोर्ट रूम में पेशी के लिए लाया गया था। जबावी कार्रवाई में दिल्ली पुलिस ने भी गोली चलाई। जिसमें दोनों हमलावरों की भी मौके पर ही मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने तीनों शवाें को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रोहिणी कोर्ट रूम 207 में एनडीपीएस के एक मामले में जितेंद्र गोगी को पेशी के लिए लाया गया था। कोर्ट में मामले की सुनवाई चल ही रही थी कि वकील की पोशाक पहने दो हमलावरों ने गोगी पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि गोगी को तीन से चार गोलियाँ लगी और उसकी अस्पताल ले जाते हुए मौत हो गई। जबकि जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी दोनों हमलावरों पर ताबड़तोड़ गोली चलाई। जिसमें उन दोनों हमलावरों की भी गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि गोगी गैंग के सरगना जितेंद्र गोगी पर यह हमला कभी उसका दोस्त रहा और अब उसका धुर विरोधी सुनील मान उर्फ टिल्लू ताजपुरिया गैंग के दो हमलावरों ने किया है। टिल्लू गैंग का गोगी के साथ दुश्मनी बहुत पुरानी बताई जाती है।

बता दें कि जितेंद्र गोगी की पेशी एएसजे गगन दीप सिंह के कोर्ट में हो रही थी तभी कोर्ट रूम में पेशी के दौरान गैंगस्‍टर पर हमला होने से हड़कंप मच गया। इस पर दिल्‍ली पुलिस के आयुक्‍त राकेश अस्‍थाना ने कहा कि यह गैंगवार नहीं है बल्कि हमला है। जबकि पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दोनों हमलावरों को ढेर कर दिया है। हमलावरों को ढेर करने वाले प्रत्येक पुलिसकर्मियों को 50-50 हजार रुपए बतौर इनाम देने की घोषणा भी पुलिस आयुक्त के द्वारा की गई है।

रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव सत्यनारायण शर्मा ने मीडिया को बताया कि वकील की पोशाक पहनकर आए बदमाशों ने कोर्ट रूम में जज के सामने गोली मारी। इतिहास में शायद पहली ऐसी घटना है। इस वारदात के बाद कोर्ट रूम में वकील की ड्रेस में बदमाशों के पहुँचने से सुरक्षा व्‍यवस्‍था पर सवाल भी उठ रहे हैं।

वहीं पुलिस ने भी बदमाशों के मारे जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि गोगी को मारने आए राहुल फफूंदा और उसके साथी को सुरक्षा बल के जवानों ने मार गिराया। गोगी समेत कुल तीन बदमाश मरे हैं। कहा जा रहा है कि एक महिला वकील के पैर में गोली लगी है। घटना के बाद पुलिस ने रोहिणी कोर्ट में सुरक्षा बढ़ा दी है। फिलहाल, कोर्ट के अंदर किसी को नहीं जाने दिया जा रहा है।

इस वारदात के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में आज जो वारदात हुई है, वो दिल्ली की किसी भी निचली अदालत में हो सकती है। साकेत कोर्ट में भी सुरक्षा राम भरोसे होने का दावा किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट में एक वकील ने बताया कि साकेत में भी न तो मेटल डिटेक्टर ठीक से काम करता है और न ही प्रवेश के समय वकीलों या अन्य किसी की कोई जाँच की जाती है। जब सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की जाँच होती है, हाई कोर्ट में बिना आइ कार्ड दिखाए वकील कोर्ट परिसर में नहीं जा सकते तो निचली अदालतों में भी सुरक्षा की ऐसी ही कड़ी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती। पुलिस को वकीलों के साथ समन्वय के साथ कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

गौरतलब है कि गोगी रोहिणी जेल संख्या- 2 के हाई रिस्क वार्ड में बंद था। गोगी को स्पेशल सेल ने पिछले साल मार्च में बहुत मुश्किल से गुरुग्राम से पकड़ा था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1 साल पहले दिल्ली पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कुख्यात गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की गिरफ्तारी के लिए गुरुग्राम के सेक्टर-83 में छापा मारा था। इस दौरान गोगी के साथ उसके गैंग के तीन साथी कुलदीप मान उर्फ फज्जा, रोहित उर्फ मोई और कपिल उर्फ गौरव भी फ्लैट में थे। पुलिस से घिरने के बाद जितेंद्र गोगी ने फोन पर वीडियो बनाकर वायरल कर दिया था। उसका आरोप था कि पुलिस उसका एनकाउंटर कर देगी और वो सरेंडर करना चाहता है।

दिल्ली के अलीपुर के रहने वाले गैंगस्टर जितेंद्र गोगी पर गिरफ्तारी के समय लगभग 8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। गोगी बेहद कुख्यात बदमाश था, जिस पर हत्या, जबरन उगाही और पुलिस पर हमला करने जैसे कई मामले दर्ज था। कुछ महीने पहले जितेंद्र गोगी के खास माने जाने वाले कुलदीप मान उर्फ फज्जा का दिल्‍ली पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया था। यह एनकाउंटर भी रोहिणी के ही एक फ्लैट में हुआ था।

रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि टिल्लू ताजपुरिया और जितेंद्र गोगी दोनों ही दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रद्धानंद कॉलेज के स्टूडेंट थे। जबकि कॉलेज के समय से ही दोनों के बीच दुश्मनी शुरू हो गई। यही नहीं, गोगी गैंग और टिल्लू ताजपुरिया गैंग के बीच पिछले 3-4 वर्षों में 20 से ज्यादा गैंगवार हुई हैं, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। इससे पहले दिल्ली के बुराड़ी इलाके में भी इन दोनों गैंग के बीच फायरिंग हुई थी, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई थी।

भूखे बच्चे ने चुराकर खाई मिठाई, पुलिस ने कर दी FIR: कोर्ट ने बरी कर पूछा- माखन चोरी बाल लीला तो फिर ये अपराध कैसे?

सनातन संस्कृति को अपने फैसले का आधार बना एक बच्चे को अदालत ने दोषमुक्त किया है। बच्चे पर मिठाई और मोबाइल चोरी का आरोप लगाया गया था। बिहार के बिहारशरीफ किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र ने बच्चे को बरी करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी वाली लीला का भी जिक्र किया।

मामला बिहार के नालंदा जिले के हरनौत थाना क्षेत्र के चेरो ओपी के एक गाँव से जुड़ा हुआ था। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार घटना सात सितंबर की थी। बच्चे ने कोर्ट में भूख लगने की वजह से मिठाई चुरा कर खाने और गेम खेलने के लिए मोबाइल फोन लेने की बात स्वीकार की। इसके बाद प्रधान दंडाधिकारी ने बच्चे को आरोप मुक्त करते हुए आरा जिला बाल संरक्षण इकाई को उसकी उचित देखभाल का निर्देश दिया।

प्रधान दंडाधिकारी ने कहा, “भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी बाल लीला तो मिठाई चोरी अपराध कैसे।” साथ ही मामले में FIR दर्ज करने वाले चेरो थानाध्यक्ष को चेताते हुए कहा कि छोटे-मोटे अपराध में किशोर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से बचें। उसे समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने केस दर्ज कराने वाली महिला को भी बच्चों के प्रति सहिष्णु और सहनशील बनने की नसीहत दी। कहा कि अगर उसका अपना बेटा मिठाई, मोबाइल या पैसे चुराता तो वह उसे पुलिस को सौंप देती या उसे समझाती।

आरोपित किशोर भोजपुर जिले के आरा का रहने वाला है। घटना के समय वह अपने ननिहाल हरनौत आया हुआ था। गुरुवार (23 सितंबर, 2021) को किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र ने मामले की सुनवाई करते हुए किशोर से पूरे मामले पर पूछताछ की। इस दौरान किशोर काफी डरा और सहमा हुआ था। जब उसे समझाया गया तो वह फफक-फफक कर रोने लगा। रोते हुए अपने परिवार की स्थिति बयाँ की।

किशोर के पिता रोग ग्रस्त हैं। वहीं माँ मानसिक रूप से विक्षिप्त है। परिवार की आमदनी का कोई साधन नहीं है। घटना के समय वह ननिहाल में था। मामा और नाना की भी मौत हो चुकी है। वह काफी भूखा था और पड़ोस की मामी के घर चला गया। वहाँ भूख मिटाने के लिए फ्रीज में रखी मिठाई खा ली। बालपन के कारण फ्रीज पर रखा मोबाइल लेकर गेम खेलने लगा। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि शिकायतकर्ता ने मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पुलिस के समक्ष पेश किया।

प्रधान दंडाधिकारी ने कहा कहा कि सनातन संस्कृति में भगवान श्रीकृष्ण को दूसरों के घर से माखन खाने और हांडी फोड़ने की बातें कही गई है। इसे हमारी संस्कृति ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला बताई। वहीं आज भूख के कारण एक किशोर के मिठाई चुराने को अपराध कैसे माना जाये। सरकारी अभियोजन पदाधिकारी ने भी बच्चे को सुधार के लिए एक अवसर दिए जाने का समर्थन किया। इस फैसले पर किशोर न्याय परिषद की सदस्य उषा कुमारी ने भी सहमति दी।