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अमेरिका में PM मोदी तो राकेश टिकैत ने बायडेन से लगा ली गुहार, पर भूल गए कृषि कानूनों का समर्थक है अमेरिका

राकेश टिकैत ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन से तीन कृषि कानूनों का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उठाने की अपील की है। जबकि USA ने इन कृषि सुधारों का समर्थन किया था। राकेश टिकैत ने ट्विटर पर उन्हें टैग करते हुए लिखा, “हम किसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पिछले 11 महीनों में 700 किसानों की मौत हो गई है।”

राकेश टिकैत ने कृषि सुधारों के लिए आए इन तीनों कानूनों को ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि हमें बचाने के लिए इन्हें वापस लिया जाना ज़रूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बैठक के दौरान आप हमारी चिंताओं को उठाएँ। साथ ही उन्होंने ‘बायडेन, किसानों के लिए आवाज़ उठाओ’ वाला टैग भी लगाया। उनके साथ-साथ कई प्रदर्शनकारियों ने अपने ट्विटर हैंडल से इस टैग को आगे बढ़ाया।

बता दें कि जिस अमेरिका-कनाडा से ये किसान अपने आंदोलन को समर्थन देने के लिए अपील करते रहे हैं, वही देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के MSP नियमों का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने इसके खिलाफ ‘विश्व व्यापार संगठन (WTO)’ में शिकायत की थी। जबकि खालिस्तान के लिए सहानुभूति रखने वाले प्रदर्शनकारियों ने कनाडा का उन्हें समर्थन के लिए धन्यवाद दिया था। अब वो अमेरिका से अपील कर रहे हैं।

साथ ही याद हो कि भारत द्वारा किए जा रहे कृषि सुधारों के महत्व को समझते हुए, संयुक्त राज्य अमेरिका ने फरवरी 03, 2021 को मोदी सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को अपना समर्थन दिया था। बायडेन प्रशासन ने कहा था कि वो उन कदमों का स्वागत करता है, जो भारत के बाजारों की कुशलता में सुधार करेंगे और निजी क्षेत्र में अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे। अमेरिका से पहले वर्ड बैंक और आईएमएफ भी भारत के तीन नए कृषि कानूनों का समर्थन कर चुका है।

केरल में बचाओ-बचाओ, कर्नाटक में चाहें खुला मैदान: भोले-भाले हिंदुओं को मिशनरियों के रहम पर नहीं छोड़ सकती सरकारें

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से बुधवार (22 सितंबर 2021) को बंगलुरु के आर्च बिशप पीटर मैकाडो की अगुवाई में कैथोलिक बिशप मिले। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने राज्य सरकार के प्रस्तावित जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर चिंता व्यक्त की। बिशप मैकाडो की अगुवाई वाले डेलीगेशन ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन दिया जिसके अनुसार जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए प्रस्तावित कानून की कोई आवश्यकता नहीं है और यदि ऐसा कानून लाया गया तो इसके कारण अनावश्यक सांप्रदायिक मुद्दे उठेंगे और राज्य में अशांति फैलेगी।

कर्नाटक के ईसाई समुदाय के धार्मिक प्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री को दिया गया ऐसा ज्ञापन समझ से परे है, खासकर तब जब उन्हीं के समुदाय के धार्मिक नेता पड़ोसी राज्य केरल में ग्रूमिंग जेहाद को लेकर बार-बार चिंता व्यक्त कर रहे हैं। कर्नाटक में ईसाई समुदाय के धार्मिक प्रतिनिधियों को यह समझ क्यों नहीं आ रहा कि जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया जाने वाला कानून सभी संप्रदायों के लोगों को जबरन धर्मांतरण से सुरक्षा प्रदान करेगा? या फिर कर्नाटक के ईसाई समुदाय के धार्मिक प्रतिनिधि ऐसा मान कर चल रहे हैं कि इस तरह का कानून लाया गया तो जबरन धर्मांतरण से केवल हिंदुओं को सुरक्षा मिलेगी? यदि वे ऐसा मानकर नहीं चल रहे तो फिर कानून के मात्र प्रस्ताव भर से चिंतित होकर मुख्यमंत्री से मिलने क्यों पहुँच गए?

मिशनरी के तमाम बिशप का आनन-फानन में मुख्यमंत्री से मुलाकात का फैसला दरअसल कर्नाटक के ईसाई धर्म के प्रतिनिधियों के बारे में बहुत कुछ बताता है। उनका यह कदम बताता है कि उन्हें कानून लागू होने के बाद उसके प्रभाव और परिणाम की चिंता है। धर्मांतरण विरोधी कानून आने से उन्हें उनके काम करने में तकलीफ हो सकती है। ऐसा न होता तो सरकार द्वारा ऐसे किसी कानून लाने की मात्र संभावना व्यक्त करने के साथ ही एक प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात करने की आवश्यकता महसूस न होती। इन सबके ऊपर उनका एक चुनी हुई सरकार से यह कहना कि ऐसे किसी कानून से राज्य में अशांति फैलेगी, उनकी अपनी ताकत और समाज तथा कानून के प्रति उनके धार्मिक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।

मिशनरी के इस कदम के पीछे का कारण बिलकुल स्पष्ट है। राज्य विधानसभा में धर्मांतरण जैसे गंभीर विषय पर हाल के वर्षों में बहस नहीं हुई थी। लेकिन हाल ही में विधानसभा में धर्मांतरण पर एक बहस हुई। इस बहस के दौरान अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए भारतीय जनता पार्टी के होसदुर्ग के विधायक गूलीहट्टी शेखर ने यह खुलासा किया था कि धर्मांतरण में लिप्त मिशनरी ने कैसे उनकी माँ का भी धर्म परिवर्तन कर दिया है और अब वे हिंदू देवी-देवताओं और रीति-रिवाजों के विरुद्ध हो गई हैं। साथ ही शेखर ने यह भी बताया कि कैसे केवल उनके क्षेत्र में प्रलोभन देकर या किसी और बहाने से करीब बीस हजार हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कर दिया गया है। शेखर का यह भी कहना था कि इस तरह से धर्मांतरण करवाने वाले लोग इतने ताकतवर हैं कि अपने विरोधियों को वे झूठे कानूनी मामलों में फँसा देते हैं। यह बात चिंताजनक है।

सुनने में ये आँकड़े साधारण लगेंगे पर प्रश्न यह है कि धर्मांतरण के ऐसे प्रयासों का दीर्घकालीन परिणाम क्या हो सकता है?

जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन की घटनाएँ देश के तमाम राज्यों के लिए नई नहीं हैं। केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में क्या हुआ या क्या हो रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है। पिछले कई वर्षों से पंजाब में क्या हो रहा है, यह भी पूरे देश को विदित ही है। झारखंड में इससे पहले जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी तब उसने धर्मांतरण विरोधी कानून पारित किया था और उसका प्रभाव भी दिखाई दिया था। पर अब जबसे वर्तमान सरकार आई है, ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यह प्रश्न पुराना है कि हिंदुओं का लगातार इस तरह से धर्म परिवर्तन क्यों हो रहा है? फिलहाल जो प्रश्न पूछे जाने की आवश्यकता है वह ये है कि यदि ऐसा हो रहा है तो हमारी राज्य सरकारें इसे रोकने को लेकर कितनी गंभीर हैं? अपराधी का काम है अपराध करना, पर राज्य और प्रशासन का भी तो काम है अपराध रोकना। एक अपना काम कर रहा है और दूसरा नहीं। ऐसे में स्वाभाविक है कि समाज का धार्मिक संतुलन बिगड़ेगा।

ईसाई मिशनरी जबरन या प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण की बात को खारिज करते रहे हैं। पर जब भी कोई राज्य सरकार कानून बनाकर ऐसी घटनाओं को रोकना चाहती है तो ये उसके विरोध में खड़े हो जाते हैं। प्रश्न यह है कि यदि ईसाई मिशनरी और राज्य सरकार, दोनों एक ही पेज पर नज़र आते हैं तो सरकारों द्वारा कानून लाने की बात का मिशनरी विरोध कैसे कर सकते हैं?

दरअसल जबरन धर्मांतरण पर मिशनरी का विरोध दिखावे के मौखिक विरोध से अधिक कुछ नहीं है। वे जिस अपराध का विरोध करते हैं, उसी में लिप्त हैं और चाहते हैं कि राज्य, सरकार और हिंदू समाज उनके इस दिखावे के विरोध को ‘जैसा है जहाँ है’ आधार पर स्वीकार कर लें। यह बात शायद तीस वर्ष पहले उनके अनुसार ही होती पर इसे लेकर पिछले लगभग डेढ़ दशक से हिंदू समाज की सतर्कता के चलते यह अनवरत नहीं चल सकता। सोशल मीडिया के आने के बाद इस तरह के धर्मांतरण के बारे में जागरूकता का स्तर ऊँचा हुआ है और इसका प्रभाव आए दिन दिखाई भी देता है।

पंजाब से लेकर तमिलनाडु और झारखंड से लेकर छत्तीसगढ़ तक में इस समय धर्मांतरण कैसे चल रहा है वह दिखाई देता है। कहीं बीमारी ठीक करने के नाम पर तो कभी प्रार्थना के नाम पर लगातार हो रहे धर्मांतरण को देख कर किसी भी समुदाय का चिंतिति होना स्वाभाविक है। प्रश्न यह है कि कब तक हम केवल चिंता करके निज को दायित्वमुक्त समझते रहेंगे? या फिर हो रहे धर्म परिवर्तन को किसी तरह का तर्क (या कुतर्क) देकर ऐसा करने वालों को ‘बेनिफिट ऑफ डाउट’ देते रहेंगे?

आए दिन हो रहे हिंदुओं के धर्म परिवर्तन को हँसी-मजाक में केवल चावल के लिए हुआ बताना (राइस बैग कन्वर्ट कहना) इस समस्या को बहुत हल्का करके देखना है। हिंदुओं का धर्मांतरण किसी चावल या गेहूँ के बारे में नहीं, बल्कि भारतवर्ष के बहुसंख्यक समाज के बारे में है। यह कहना भी लोगों की मानसिक कमजोरी दर्शाता है कि हिंदू समाज आर्थिक रूप से कमजोर अपने लोगों की चिंता नहीं करता, इसलिए धर्म परिवर्तन होता है। आर्थिक रूप से कमजोर होना किसी को यह अधिकार नहीं देता कि वो उस व्यक्ति का धर्म परिवर्तन करवा दे। हिंदू समाज को ही धर्म परिवर्तन के लिए जिम्मेदार बताकर हम जाने-अनजाने उन्हें अपराध मुक्त कर देते हैं जो इसमें लिप्त हैं। समाज और सरकार जब तक इस बात को लेकर सतर्क नहीं होंगे, लगातार बढ़ रही जागरूकता का कोई ख़ास असर न होगा।

दशकों से इस तरह से चल रहे धर्मांतरण को लेकर अब सरकारें, मंत्री या नेता केवल चिंता व्यक्त करके काम नहीं चला सकते। राज्य सरकारें क्या करेंगी वह सबके लिए उत्सुकता का विषय होगा। इतिहास गवाह है कि किसी भी प्रस्तावित कानून का हरसंभव विरोध दिखाई देगा। ऐसे में यह राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न होगा कि वे इस समस्या से कैसे निपटती है। सबसे ताजा विरोध जो कर्नाटक में दिखाई दिया, वह इस बात को साबित करता है कि धर्मांतरण के विरोध में कानून बनाना सरकारों के लिए हमेशा चुनौती रहेगी। वे इस चुनौती का मुकाबला कैसे करते हैं, इस पर हिंदू समाज की दृष्टि रहेगी।

दिल्ली के एक हाईफाई होटल में महिला मॉडल के काट दिए ज्यादा बाल, दो साल बाद कोर्ट ने ₹2 करोड़ देने को कहा

दिल्ली की उपभोक्ता अदालत ने एक अजीबोगरीब फैसला सुनाते हुए आईटीसी मौर्य (ITC Maurya) को आदेश दिया है कि वो उस मॉडल को 2 करोड़ रुपए का मुआवजा दें जिसके बाल उनके यहाँ हेयरस्टाइलिस्ट ने खराब काटे और उसके कारण उसे मानसिक आघात हुआ।

मॉडल को हुई मानसिक तंगी के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने मंगलवार को (21 सितंबर) अपना यह आदेश जारी किया। इस आदेश में ही महिला को 2 करोड़ रुपए देने की बात कही गई है। मामले में सुनवाई करते हुए राष्ट्रपति न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और सदस्य एसएम कांतिकर की दो सदस्यीय पीठ ने कहा,

“इसमें कोई संदेह नहीं है कि महिलाएँ अपने बालों के संबंध में बहुत सतर्क और सावधान रहती हैं। बालों को अच्छा रखने के लिए वह अच्छी-खासी रकम खर्च करती हैं। वे भावनात्मक रूप से अपने बालों से भी जुड़ी होती हैं।”

इसके बाद कोर्ट ने आईटीसी मौर्य को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उनकी सर्विस में कमी के लिए शिकायतकर्ता आशना रॉय को 8 सप्ताह के भीतर 2 करोड़ का मुआवजा देने को कहा। आयोग ने कहा कि दूसरा पक्ष (होटल) बालों के उपचार में चिकित्सीय लापरवाही का दोषी है। उसकी (मॉडल) खोपड़ी तक जल गई थी और स्टाफ की गलती के कारण उसे सिर में अब तक खुजली है।

कथिततौर पर रॉय ने कोर्ट में शिकायत दी थी कि उन्हें इस घटना के बाद मानसिक आघात हुआ और उन्होंने खुद को शीशे में देखना भी छोड़ दिया था। इसके अलावा वो अलग सामाजिक गतिविधियों से दूर हो गईं थी वो भी सिर्फ इतने घटिया हेयरकट और उसके बाद आई दिक्कतों की वजह से।

पीठ ने कहा, “उसने खुद को आईने में देखना बंद कर दिया … और उसकी सामाजिक गतिविधियाँ भी बंद हो गईं। वह एक कम्यूनिकेशन वाले पेशे से है और उसे बैठकों और मेलजोल वाले सत्रों में शामिल होना आवश्यक है। लेकिन अपने छोटे बालों के कारण उसने अपना आत्मविश्वास खो दिया। घटिया बाल कटवाने के बाद मानसिक रूप से टूट जाने और उसके बाद कष्टप्रद बालों के उपचार के कारण उसे आय का नुकसान भी हुआ है। उसने अपनी नौकरी भी छोड़ दी।”

उपभोक्ता अदालत की बेंच ने कहा, “शिकायतकर्ता, अपने लंबे बालों की वजह से हेयर प्रोडक्ट्स के लिए एक मॉडल रही है और उसने पैंटीन और वीएलसीसी जैसे बड़े ब्रांडों के लिए मॉडलिंग की है। लेकिन उसके निर्देशों के खिलाफ बाल काटने के कारण … उसने अपने अपेक्षित काम खो दिए और एक बड़ा नुकसान हुआ जिसने उसकी जीवन शैली को पूरी तरह से बदल दिया और एक शीर्ष मॉडल बनने के उसके सपने को तोड़ दिया।”

क्या है मामला?

42 वर्षीय शिकायतकर्ता एक जरूरी इंटरव्यू से पहले 18 अप्रैल, 2018 को होटल के सैलून में बाल कटवाने गई थी। उसने हेयरड्रेसर को समझाया कि उसे बाल 4 इंच ट्रिम कराने है और आगे से फ्लिक चाहिए। लेकिन इतना समझाने के बावजूद हेयरड्रेसर ने उसके लंबे बाल काटे। महिला के मुताबिक वो चश्मा पहनती थी जिसे बाल काटने के दौरान उसे उतरवा दिया गया था और नाई ने उसका सिर भी झुका दिया था। जब बाल कटने के बाद उसने खुद को आईने में देखा तो बाल पूरे कट गए थे।

उसे आश्चर्य हुआ कि इतना समझाने के बाद भी उसके बाल पूरे काट दिए गए और ऊपर से केवल 4 इंच छोड़े गए कि बहुत मुश्किल से वो उसके कंधों को छू रहे थे। महिला के बहुत नाराजगी दिखाने पर होटल में उससे इस सर्विस का कोई चार्ज नहीं लिया गया और दूसरा उस हेयरड्रेसर पर गुस्सा निकाला गया जिसने ये लापरवाही की थी। महिला की शिकायत में ये भी था कि सैलून वालों ने उसके साथ बदसलूकी की। इसके बाद होटल के तत्कालीन सीईओ को बुलाकर मामले की जानकारी दी गई और मामला तब खत्म किया गया। बाद में केस कोर्ट में आया।

अबकी बार भी हाथ काटो, लेकिन छिप-छिपा के: एक आँख-एक पैर वाले तालिबान के संस्थापक का फरमान, ‘कुरान के कानून’ का हवाला

तालिबान के संस्थापक मुल्ला नूरुद्दीन तराबी ने धमकी दी है कि अफगानिस्तान में उसके संगठन का शासन आने के बाद से चोरों के लिए अंग-भंग की सज़ा फिर से वापस लाई जा सकती है। एक आँख और एक पाँव वाले तालिबान के संस्थापक ने कहा कि चोरों का हाथ काटने की सज़ा वापस आएगी, लेकिन हो सकता है कि ऐसी कार्रवाई अब सार्वजनिक रूप से नहीं की जाए। साथ ही उसने तालिबान द्वारा मचाए गए कत्लेआम का भी बचाव किया।

बता दें कि तालिबान अक्सर महिलाओं को कोड़े मारने से लेकर कथित अपराधियों पर पत्थरबाजी तक, इस तरह की कार्रवाइयों को सार्वजनिक रूप से लोगों के सामने अंजाम देता रहा है। यहाँ तक कि मौत की सज़ा भी लोगों के सामने ही दी जाती है। मुल्ला नूरुद्दीन तराबी ने दुनिया को तालिबान के कार्यों में हस्तक्षेप करने पर भुगतने की भी धमकी दी। पिछली बार जब तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता पाई थी, तब नूरुद्दीन ही उस सरकार का सर्वेसर्वा था।

उसने कहा, “स्टेडियम में सज़ा देने के लिए सभी ने हमारी आलोचना की। लेकिन, हम तो दुनिया के इन देशों के कानूनों और सज़ाओं पर कोई टिप्पणी नहीं करते। हमें कोई नहीं बता सकता कि हमारे कानून कैसे हों। हम इस्लाम का अनुसरण करेंगे और अपने नियम-कानून कुरान के हिसाब से बनाएँगे।” बता दें कि काबुल में तालिबान का शासन आने के बाद 90 के दशक में हुई क्रूरता फिर से दोहराई जा रही है।

पिछली बार जब अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आया था, तब मुल्ला नूरुद्दीन तराबी उस सरकार में न्याय मंत्री हुआ करता था। उस समय वो अपने जीवन के सातवें दशक में था। उस समय काबुल के स्पोर्ट्स स्टेडियम से लेकर ईदगाह मैदान तक सामूहिक सज़ा दी गई थी, जिसकी दुनिया ने निंदा की थी। ‘पीड़ितों’ के परिवार को बंदूक दी जाती थी, जिसके बाद वो आरोपित के सिर में एक गोली दाग कर उसका काम तमाम कर देते थे।

जो चोरी करने में पकड़े जाते थे, उनके हाथ काट डाले जाते थे। जो लोग डकैती में दोषी पाए जाते थे, उनके हाथ-पाँव दोनों काट कर सज़ा दी जाती थी। सुनवाई से लेकर सज़ा सुनाने वाली चीजें सार्वजनिक नहीं होती थीं और मुल्ला-मौलवी इसका निर्णय लेते थे। बस सज़ा लोगों के बीच दी जाती थी। उसने कहा कि सुरक्षा के लिए हाथ काटना ज़रूरी है। अफगानिस्तान में चोरों-डकैतों के हाथ-पाँव काट कर उनका परेड भी निकाला जाता था।

‘हिंदू जवान बेटियों को मुस्लिमों के पीछे लगाते हैं’: मसूद हाशमी को शो से निकाला, ‘राजनीतिक विश्लेषक’ बनकर आया था

मसूद हाशमी नाम के एक राजनीतिक विश्लेषक ने गुरुवार (23 सितंबर, 2021) को एक टीवी शो में विवादित दावा किया। उसने कहा कि हिंदू माता-पिता दहेज से बचने के लिए अपनी बेटियों को मुस्लिम पुरुषों के पीछे लगाते हैं। उसने यह विवादित टिप्पणी ज़ी हिंदुस्तान पर प्रसारित होने वाले शो ‘शंखनाद’ के दौरान की। इसके बाद एंकर ने उसे शो से बाहर जाने को कहा।

नीचे टीवी शो के वीडियो (लगभग 37 मिनट, 40 सेकंड पर) में आप हाशमी को यह कहते सुन सकते हैं , “हिंदू माता-पिता अपनी जवान बेटियों को मुस्लिम के पीछे लगाते हैं और कहते हैं कि हिंदू धर्म में तो हम तेरी शादी कर नहीं सकते, क्योंकि यहाँ पर दहेज प्रथा है। मुस्लिम तो बगैर दहेज के शादी कर लेता है, तो तू किसी मुस्लिम को सेट कर शादी कर ले।” मसूद हाशमी ने यह टिप्पणी इस्लाम कबूल करने पर ‘जन्नत’ मिलने के दावों पर की थी।

(Video Credits: Youtube/Zee Hindustan)

इसके बाद एंकर रोहित रंजन ने हाशमी को बीच में ही टोक दिया और उसे शो से बाहर जाने को कहा।उन्होंने कहा, “आप उठिए और जाइए। ऐसी घटिया सोच और मानसिकता वाले लोगों का कहीं भी स्वागत नहीं है। आप कौन होते हैं हिंदू धर्म पर सवाल उठाने वाले? क्या आपके पास इस बात का कोई सबूत है, जो आपने अभी क्या कहा? डिबेट में बैठ कर निराधार दावे कर रहे हैं। आप गुनहगार को गुनहगार न बोलो और ऊपर से तमाशा करते रहो। आप हिंदू धर्म के ऊपर सवाल उठा रहे हो। मुझे बेशर्म लोगों से बात करने में बड़ी दिक्कत है और आपकी बेशर्मी हद से ज्यादा है। जिस वक्त आपको हिंदू धर्म समझ में आएगा, उस वक्त मैं आपको फिर से बुलाऊँगा।”

हाशमी ने दावा किया कि एंकर इसलिए गुस्से में थे क्योंकि उन्होंने उनके मुँह पर ‘सच’ कहा था। रोहित रंजन ने उन्हें कार्यक्रम से बाहर कर दिया और अपने दर्शकों के सामने स्पष्ट कर दिया कि उनके शो में हिंदू आस्था का, सनातन धर्म का मजाक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रंजन ने ट्वीट करते हुए लिखा, “सनातन का मज़ाक़ बनाओ, हिंदू बेटियों के खिलाफ बोलो और हम खामोश रहेंगे? अभी तो बस शो से बाहर निकला है। ज़ुबान पर लगाम लगाओ। ना गलत कहते हैं ना सुनेंगे।”

बता दें कि यह शो हाल ही में उत्तर प्रदेश में सामने आए धर्मांतरण रैकेट के ऊपर था। उत्तर प्रदेश एटीएस ने धर्मांतरण मामले में 21 सितंबर 2021 को मौलाना कलीम सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था। वह 10 दिनों की पुलिस रिमांड पर है। एटीएस ने एक बयान में बताया था कि मौलाना सिद्दीकी अपने मदरसों, सामाजिक और मजहबी संस्थानों की आड़ में देशव्यापी धर्मांतरण का रैकेट चला रहा था और इसके लिए उसे विदेश से फंडिंग भी मिल रही थी। पुलिस ने कहा था कि 64 वर्षीय मौलाना जामिया इमाम वलीउल्लाह ट्रस्ट चलाता है, जो कई मदरसों को फंड करता है, जिसके लिए उसे बड़ी विदेशी फंडिंग मिली थी।

यूपी एटीएस ने जून में उमर गौतम और उसके सहयोगी की गिरफ्तारी के बाद बड़े पैमाने पर जाँच अभियान शुरू किया था। कथित तौर पर, दोनों ने अपने अन्य सहयोगियों के साथ इस्लामिक दावा सेंटर (IDC) नामक एक संगठन चलाया, ताकि लोगों को शादी, नौकरी और पैसे और मानसिक दबाव जैसे प्रलोभनों के माध्यम से इस्लाम में परिवर्तित किया जा सके। जाँच में गौतम और उसके साथियों को मिली अवैध विदेशी फंडिंग का भी खुलासा हुआ था।

यूपी के चुनावी रण में बीजेपी के साथ होगी निषाद पार्टी, प्रधान ने किया गठबंधन का ऐलान

उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव चुनाव होने हैं। इन चुनावों में अपना दल और निषाद पार्टी के साथ मिलकर बीजेपी मैदान में उतरेगी। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार (सितंबर 24, 2021) को निषाद पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया। इस दौरान उनके साथ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और निषाद पार्टी के संजय निषाद भी थे।

लखनऊ में यूपी बीजेपी प्रमुख स्वतंत्र देव सिंह ने कहा, “बीजेपी 2022 का विधानसभा चुनाव सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निषाद पार्टी के साथ मिलकर लड़ेगी।” वहीं धर्मेंद्र प्रधान ने बताया, “उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए अपना दल भी भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा होगा।”

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने इस दौरान बताया, “हम किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, चाहे वह एमएसपी पर कृषि उपज खरीद हो, जैविक खेती को बढ़ावा देना हो या कृषि विपणन बुनियादी ढाँचे पर 1 लाख करोड़ रुपए खर्च करने का। मुझे लगता है कि बीजेपी पर किसानों, खासकर छोटे किसानों का आशीर्वाद है।”

उन्होंने कहा कि वे तीन दिन से यूपी में हैं। इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ पर जनता का अटूट भरोसा है। उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र में विश्वास ही सबसे बड़ी पूँजी होती है। 2022 में यूपी की जीत महत्वपूर्ण है। सरकार व संगठन के काम व समन्वय के कारण हम जीतेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चुनाव होगा। हम सभी समाज और समुदाय को साथ लेकर चुनाव लड़ेंगे। 

सीटों के बँटवारे को लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सही समय पर निर्णय होगा। अन्य कई दलों से बात चल रही हैं। अपना दल और निषाद पार्टी को सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में निषाद पार्टी और अपना दल के साथ सीटों का बँटवारा सम्मानजनक होगा।

बता दें कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा था कि वह बीजेपी में विलय नहीं करेंगे और उनकी पार्टी अपने निशान पर चुनाव लड़ेगी।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सियासी बिसात बिछने लगी है। हर राजनीतिक दल अपने समीकरण दुरुस्‍त करने में लगा है। भाजपा ने भी चुनाव प्रभारी धर्मेन्‍द्र प्रधान की अगुवाई में रणनीतिकारों की पूरी टीम मैदान में उतार दी है। पिछले कई दिनों से यह टीम अलग-अलग स्‍तरों पर बैठकें कर माहौल को भाँपने और पार्टी कार्यकर्ताओं-नेताओं को जीत के गुर सिखाने में जुटी है। इसी क्रम में शुक्रवार को बीजेपी के चुनावी गठबंधन का ऐलान करते हुए प्रधान ने कहा सबका साथ और सबका विश्‍वास जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि सीएम योगी और पीएम मोदी के नेतृत्‍व में हम आगे बढ़ेंगे। दोनों मिलकर राज्‍य में कमल खिलाएँगे।

‘तेरी लुंगी में बम फाड़ दूँगी… 6 महीने में दफना दूँगी’: भीम आर्मी वाली सीमा की जहरीली जुबान का Video, CM योगी को दी धमकी

उत्तर प्रदेश में भीम सेना की महिला राज्य अध्यक्ष सीमा सिंह की एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में वो अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दे रही है। इसके अलावा उन्होंने यूपी के एसपी डीएसपी को भी बीच चौराहे पर लटकाने की बात कही है। अब यह पूरी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है और लोग इसे शेयर करके कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, इस वीडियो के बाद बरेली की पुलिस ने सिरौली थाने में सीमा पर आईटी एक्ट और धमकी देने का मुकदमा दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। इस बीच नेटीजन्स सवाल कर रहे हैं कि पुरुष अपराधी हो तो फौरन कार्रवाई होती और ऐसी महिलाओं के लिए कानून बनते रहते हैं। इंस्पेक्टर केके वर्मा का कहना है कि 20 सितंबर की रात सीमा सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मामले की जाँच की जा रही है।

वीडियो में सीमा को बार-बार किसी बंटी का नाम लेते सुना जा सकता है जिसकी रिहाई को लेकर सीमा ने कई बार पुलिस से सिफारिश की थी। लेकिन सुनवाई न होने पर ऐसी विवादित वीडियो बना डाली। दैनिक जागरण की रिपोर्ट में कहा गया है, “19 सितंबर को सिरौली कस्बे में रहने वाले बंटी और महेश के बच्चों में झगड़ा हुआ था। इसी के बाद दोनों पक्षों में मारपीट हुई। पुलिस के पास जब सूचना गई तो उन्होंने दोनों पक्ष के लोगों का शांति भंग में चालान कर दिया। पुलिस के अनुसार उसी दिन खुद को भीम सेना की महिला प्रदेश अध्यक्ष बताने वाली किसी सीमा सिंह ने फोन पर बंटी को छोड़ने की सिफारिश की थी।”

सीमा की सिफारिश के बाद जब ये बंटी नहीं छूटा तो उसने ये वीडियो बनाई। सीमा ने इसमें कहा है, “..पुलिस ने सीधा बंटी को ही अरेस्ट कर लिया। हम ये सब कब तक सहन करेंगे। हमसे नहीं होगा सहन। ये क्या हो रहा है। मनुवादियों के ऊपर कोई शिकायत नहीं, कोई कार्रवाई नहीं। उलटा बंटी के ऊपर ही कार्रवाई हो गई। ये तानाशाही कब तक चलेगी। सबकी तो कहती नहीं, लेकिन मैं बर्दाश्त नहीं करूँगी। एसपी डीएसपी जितने भी स्टार हैं न कंधे पर सब तोड़ कर बीच चौराहे पर लटका दूँगी और योगी आदित्यनाथ बाबा, तेरी लुंगी में बम नहीं फाड़ दिया न मैंने तो मेरा नाम सीमा सिंह नहीं। भीम सेना की महिला प्रदेश अध्यक्ष हूँ। चेहरा नोट करले या तो दलितों पर अत्याचार करना बंद कर दे। योगी आदित्यनाथ तेरी ठाकुर गिरी निकाल दूँगी। बहुत हुई तानाशाही। ये चेहरा नोट कर ले। आगे वाले टाइम में तुझे ध्यान होना चाहिए मैं कौन हूँ।”

सीमा कहती है, “6 महीने के अंदर अंदर तुझे न मैंने गिरा दिया न दफना दिया तो मेरा नाम सीमा सिंह नहीं है। हर चीज का बदला लूँगी तुझसे तेरे बस की कुछ नहीं है। न हत्यारों पर कार्रवाई करना तेरे बस में है, न तेरे बस में बलात्कारियों पर एफआईआर करने की है, बस तेरा जोर एक महिला पर चलेगा। एक मुझ पर ही तेरा बस चलता है। मुकदमे दर्ज कराएगा जा करा। जितना तेरी ठाकुरगिरी है जिस दिन तू मेरे सामने आ गया न माँ कसम फाड़ दूँगी। सीमा सिंह नाम है मेरा। शेर-शेरनी से पैदा हुई हूँ गीदड़ से नहीं। तुम्हारी तरह नहीं औरतों का सहारा लेकर मारते हो हमें। सा&^ सुधर जाओ। इंसान हो तो इंसान की तरह रहो। हम भीम सैनिक हैं। इज्जत से बात करना जानते हैं और कराना भी जानते हैं और जो कु% होगा वो बर्दाश्त करेगा। हम शेर है शेर।  किसी की बस की हो तो डरा कर दिखा दो।”

‘वैष्णव मठों की 5548 बीघा जमीन घुसपैठियों के कब्जे में, 22% वन क्षेत्र का भी अतिक्रमण’: असम में सालों से चल रहा है ‘खेला’

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक सरकारी फोटोग्राफर एक अतिक्रमणकारी की लाश पर कूदता दिख रहा है। इस वीडियो को लेकर असम पुलिस और वहाँ हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा की राज्य सरकार पर मुस्लिम विरोधी होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ये वीडियो गुरुवार (23 सितंबर, 2021) का है। एक अन्य वीडियो में अतिक्रमणकारियों को लाठी-डंडे से पुलिस पर हमला करते हुए देखा जा सकता है।

उसमें से एक व्यक्ति की पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई, ऐसा कहा जा रहा है। असम के दर्रांग जिले में 800 परिवारों ने 4500 बीघा जमीन हथिया रखी थी। राज्य सरकार अवैध घुसपैठियों व कब्जे के खिलाफ अभियान चला रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जानकारी दी है कि 4 मजहबी स्थलों के अलावा एक प्राइवेट संस्थान को भी ध्वस्त कर दिया गया है। धौलपुर के सिपाझार क्षेत्र में 20 सितंबर से ही ये अभियान चालू है।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में 2 लोगों की मौत हुई है, साथ ही एक डीएसपी समेत 11 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। असम के DGP भास्कर ज्योति महंता ने कहा कि उन्होंने जिस क्षण ये वीडियो देखा, उसी समय उक्त फोटोग्राफर की गिरफ़्तारी का आदेश दे दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतों के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है। भाजपा सरकार ने अचानक से सब कुछ नहीं किया है। इस मुद्दे पर उन्होंने चुनाव भी लड़ा था।

भाजपा ने अपने चुनावी वादे में कहा था कि वो मंदिरों-मठों की जमीन को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराएगी। साथ ही इन जमीनों को राज्य के ऐसे स्थानीय नागरिकों को दिया जाएगा, जो भूमिहीन हैं। इसी तरह होजाइ के लंका शहर में 70 अतिक्रमणकारी परिवारों और सोमितपुरी के जामगुरिहाट में अवैध कब्ज़ा वाले 25 परिवारों को हटाया गया था। ये अभियान जून में चला था। सिपाझार में असम सरकार कई करोड़ रुपयों के ‘Garukhuti’ परियोजना को लागू करने वाली है।

2021-22 में आए असम के बजट में इसका जिक्र था, जिसके तहत जमीन को कब्जे से मुक्त करा कर उसे जंगल और कृषि के लिए उपयोग में लाया जाएगा। इसमें स्थानीय नागरिकों को भी शामिल किया जाएगा, जिनकी आय बढ़ेगी। हालाँकि, विपक्षी पार्टियाँ और मानवाधिकार संगठन इस अभियान का विरोध करते हुए कहते रहे हैं कि अतिक्रमणकारियों को बसाने के लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं है।

असम के ये अधिकतर अतिक्रमणकारी बांग्लादेश के घुसपैठिए हैं। 2017 में असम के स्थानीय नागरिकों को जमीन के अधिकार की सुरक्षा के लिए एक समिति बनी थी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एचएस ब्रह्मा ने की थी। इसमें उनका कहना था कि असम के 33 जिलों में से 15 में बांग्लादेशी घुसपैठिए हावी हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इनकी तुलना ‘लुटेरे आक्रांताओं’ से करते हुए कहा था कि उनके पास खतरनाक हथियार भी हैं।

इस रिपोर्ट में कहा गया था कि इन अतिक्रमणकारियों ने अवैध गाँव के गाँव बसा लिए हैं और इन्होंने रातोंरात भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों की मदद से यहाँ रहने में सफलता पाई। रिपोर्ट में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले सांप्रदायिक नेताओं का भी जिक्र था, जो इन्हें बढ़ावा देते हैं। असम में ‘सत्रों’ का बहुत महत्व है। वहाँ कई वैष्णव सत्र मठ हैं। ब्रह्मा की रिपोर्ट में कहा गया था कि ऐसे 18 सत्रों की जमीनों को बांग्लादेशी घिसपैठियों ने बड़ी मात्रा में कब्जाया है।

जुलाई 2012 में इस सम्बन्ध में ‘नॉर्थ-ईस्ट पॉलिसी इंस्टिट्यूट’ ने एक अध्ययन भी किया था। इसमें पाया गया था कि 26 सत्रों की 5548 बीघा जमीन को घुसपैठियों ने कब्ज़ा रखा है। एक RTI से तो यहाँ तक पता चला था कि असम का 4 लाख हेक्टेयर जंगल क्षेत्र अतिक्रमण की जद में है। ये राज्य के कुल जंगल क्षेत्रों का 22% एरिया है। वीडियो वायरल होने के मामले में सीएम सरमा ने भी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

असम सरकार के अनुसार, प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई हजारों साल पुराने हिंदू मंदिर को सुरक्षित करने के लिए की गई थी जहाँ अवैध रूप से कब्जा किया गया था। कार्रवाई के पूर्व ही वहाँ के लोग पुलिस पर हमला करने को तैयार थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि हजारों की भीड़ मुर्दाबाद, हाय-हाय के नारे लगा रही है। पुलिस के पीछे कई लोग लाठी डंडा बड़े-बड़े फट्टे लेकर दौड़ रहे थे। पत्थरबाजी व तोड़फोड़ भी की जा रही थी।

महंत नरेंद्र गिरि की मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी CBI, 6 सदस्यीय टीम बनाई

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत की जाँच केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने अपने हाथ में ले ली है। एजेंसी ने एफआईआर दर्ज करते हुए 6 सदस्यीय जाँच टीम का गठन किया है। यह टीम प्रयागराज पहुॅंच चुकी है।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पुलिस द्वारा जुटा गए साक्ष्य, रिकॉर्ड किए गए बयान सहित अन्य दस्तावेज लेने के बाद एजेंसी अपनी जाँच आगे बढ़ाएगी। बुधवार (सितंबर 22, 2021) को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस मामले की सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया था।

कई संतों ने यह मानने से इनकार करते हुए कि महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की थी, इस घटना की सीबीआई जाँच की माँग की थी। अखाड़ा परिषद के महंत हरि गिरि ने कहा था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मामले से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं। उनके बयान के कुछ घंटों बाद ही यूपी सरकार ने सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी।

सीबीआई की टीम प्रयागराज में जब छानबीन शुरू करेगी तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल होगा कि नरेंद्र गिरि की मौत कैसे और किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल, पुलिस ने उस कमरे को सील कर दिया है जिसमें महंत नरेंद्र गिरि का शव मिला था। बताया जा रहा है कि इसी कक्ष से सीबीआई छानबीन शुरू करेगी।

बता दें कि सोमवार (सितंबर 20, 2021) को महंत नरेंद्र गिरी मृत पाए गए थे। मगर उन्होंने आत्महत्या की थी या फिर यह कोई साजिश थी, अब तक इससे पर्दा नहीं उठ पाया है। महंत नरेंद्र गिरि की कथित आत्महत्या मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। संदीप तिवारी को बुधवार की शाम गिरफ्तार किया गया था। उससे पहले दो अन्य आरोपितों आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को गिरफ्तार किया गया और बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने इन दोनों आरोपितों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

महंत नरेंद्र गिरि का शव मठ में पंखे से लटका मिला था। उनके पास से सुसाइड नोट भी मिला था जिसमें उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरि समेत तीन लोगों को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि सुसाइड नोट के असली होने पर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि सुसाइड नोट में किया गया हस्ताक्षर नरेंद्र गिरि द्वारा उनके पिछले दस्तावेजों किए गए हस्ताक्षर से अलग थे। 

इस गुत्थी को एक वीडियो ने और उलझा दिया है जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि यह पुलिस के मौके पर पहुँचने के ठीक बाद का है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार वीडियो 1.45 मिनट का है। जिस कमरे में नरेंद्र गिरि शव लटका मिला था, उस कमरे का पंखा तेजी से चल रहा था। ऐसे में पूछा जा रहा है कि चलते पंखे से कोई फंदा ​कैसे लगा सकता है? य​दि इसे किसी ने शव उतारने के बाद चलाया तो ऐसा क्यों किया? वीडियो में महंत का शव फर्श पर और पीले रंग की रस्सी पंखे से लटकी दिख रही है। वीडियो में पुलिस अधिकारी मठ में मौजूद शिष्यों से पूछताछ कर रहे हैं।

ISI एजेंट कभी बन जाती है पूजा तो कभी नेहा, माथे पर बिंदी और हिंदू नाम: पाकिस्तानी लड़कियों के निशाने पर भारतीय जवान, रिपोर्ट में दावा

पाकिस्तानी लड़कियाँ हिंदुस्तान के जवानों को फेक प्रोफाइल बनाकर फँसा रही हैं। ये खुलासा इंडिया टीवी के ‘आज की बात’ शो में हुआ है। शो में एक लड़की की वीडियो दिखा कर बताया गया कि वीडियो में नजर आने वाली ISI एजेंट है जिसका कोड नेम पूजा राजपूत है। ये लड़की पाकिस्तान के सिंध प्रांत से ऑपरेट कर रही थी और पिन लोकेशन हैदराबाद की हुई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, पूजा राजपूत जैसे कोड नाम की आईएसआई एजेंट ने खुद को भारतीय मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में काम करने वाली कहा था। रजत शर्मा बताते हैं कि वीडियो में नजर आने वाली लड़की खुद को आर्म फोर्सेस की पूर्व कर्मचारी, तो कभी पूर्व फौजी की बेटी, कभी मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में काम करने वाली बता कर बातें शुरू करती थी। इसका काम संवेदनशील जानकारी माँगने से शुरू नहीं होता था। ये पहले अपने टारगेट की कमजोरियाँ जानती थी। 

कई दिन सिर्फ हँसी मजाक और पर्सनल लाइफ पर बातें होतीं। जब टारगेट ऐसी लड़कियों पर भरोसा करने लगता तो फिर उससे उसकी दिक्कतों, फैमिली संबंधी परेशानियों के बारे में बात की जाती। अगर टारगेट को कुछ पैसों की जरूरत है तो ये लोग उसे पैसे भी देते हैं। इस लेन-देन के लिए भी ISI ने कुछ भारतीयों को फँसा रखा है। उन्हीं के माध्यम से पैसा जवान तक पहुँचाया जाता है। 

पूरी ट्रेनिंग देकर इन्हें ऐसे तैयार किया जाता है कि हिंदुस्तानी जवानों को संदेह न हो कि उनसे बात करने वाली लड़की पाकिस्तान में बैठी है। वो लड़की को अच्छे से हिंदी बोलना सिखाते हैं। कपड़े पहनने का तरीका बताया जाता है। इसके अलावा कॉल के समय भी ऐसा बैकग्राउंड तैयार होता है कि सामने वाले को लगे लड़की भारत में ही बैठी है। वीडियो में लड़की को हाथ में कलावा बाँधे और माथे पर टीका लगाए भी देखा जा सकता है।

रिपोर्ट बताती है कि पूजा राजपूत के अलावा कई आईडी, पाकिस्तानी आईपी एड्रेस से ट्रेस हुए हैं। ये लड़कियाँ कभी नेहा शर्मा बन कर, अंजना जोशी बन कर, कभी सोनिया पटेल, जसमीत, सानवी, इशानिका बन कर नकली प्रोफाइल बना कर लोगों को फँसाती हैं। इनका मकसद भारतीय यूनिट की मूवमेंट, कमांडर्स की विजिट या सेना से जुड़ी कोई जानकारी एकत्रित करना होता है।

यहाँ बता दें कि कुछ दिन पहले बेंगलुरु से गिरफ्तार हुए जितेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान के इस घिनौने खेल का पर्दाफाश हुआ था। जितेंद्र बाड़मेर का रहने वाला है और कपड़ों का व्यापार करता है। रिपोर्ट कहती है कि जितेंद्र इसकी आड़ में ही पाकिस्तान के लिए जासूसी भी करता था। इसके अलावा जयपुर से रेलवे ऑफिसर और एक गैस एजेंसी चलाने वाले संदीप गिरफ्तार हुए थे। उनके संबंध भी पाकिस्तान से पाए गए थे और फोन में महत्तवपूर्ण जानकारियाँ बरामद हुई थी।

इनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस को पता चला कि ये पाकिस्तान, रावलपिंडी में मौजूद लोगों के संपर्क में थे। ओडिशा की मिसाइल फैसिलिटी से भी 6 लोगों को अरेस्ट किया गया था। ये लोग कॉन्ट्रैक्चुएल लेबर के तौर पर वहाँ लगे हुए थे और मिसाइल से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने में जुटे थे। इस काम के लिए इनको कराची से निर्देश आ रहे थे। अब पूरे केस को NIA जाँच रही है।