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महंत नरेंद्र गिरि के बाद अब अयोध्या में साधु मणिराम दास की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, मंदिर की तीसरी मंजिल से गिरे नीचे

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत को अधिक दिन भी नहीं बीते थे कि अब अयोध्या में एक साधु की संदिग्ध परिस्थितियों में छत से नीचे गिरने के कारण मौत हो गई है। मृतक साधु की पहचान मणिराम दास के रूप में की गई है। वह श्री राम मंत्रार्थ मंडपम मंदिर की तीसरी मंजिल से नीचे गिर गए थे। पुलिस उनकी मौत के कारणों की जाँच कर रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी मंजिल से नीचे गिरने के कारण उनकी मौत हुई है। पुलिस ने उनके शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। उन्होंने आत्महत्या की है या उनकी हत्या हुई है पुलिस दोनों पहलू से मामले की जाँच कर रही है। बताया जा रहा है कि मरने से पहले बीते कुछ दिन से मणिराम ने लोगों से बातचीत कम कर दी थी। वह अकेले रहा करते थे और बहुत ही कम बाहर निकला करते थे। उन्हें किसी बात की परेशानी थी या नहीं उन्होंने किसी से भी इसका जिक्र तक नहीं किया था।

कुछ समय से तनाव में थे मणिराम

शुरुआती जाँच में सामने आया है कि मृतक साधु मणिराम बीते कुछ समय से तनाव में जी रहे थे। हालाँकि, ऐसा किन कारणों से था यह स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस प्रशासन मृतक साधु के फोन नंबरों की डिटेल्स को खंगालने में जुट गया है। इसके साथ ही मंदिर प्रशासन समेत दूसरे साधुओं से पूछताछ की जा रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। महंत का शव बाघमबरी मठ में सोमवार (20 सितंबर 2021) को फाँसी के फंदे से लटकता मिला। इसके बाद उनके शिष्य आनंद गिरि ने उनकी हत्या का भी दावा किया।

इस मामले में मंगलवार (21 सितंबर 2021 ) महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने जाँच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन करने का आदेश दिया। प्रयागराज के डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन कर टीम का नेतृत्व डेप्यूटी एसपी अजीत सिंह चौहान को सौंपा दी थी।

‘गाजियों की धरती पर गरजेंगे शेर-ए-हिंदुस्तान ओवैसी’: संभल में लगे पोस्टर पर बीजेपी ने घेरा, कहा- ‘मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे’

अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी सियासी पार्टियाँ वोटों को लुभाने में लगी हैं। इसी क्रम में आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी यूपी के संभल में चुनावी जनसभाएँ करने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले ही वह विवादों में घिर गए हैं। इसको लेकर बीजेपी ने उनपर निशाना साधा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ओवैसी की रैली के मद्देनजर शहरभर में AIMIM के समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं। इसमें संभल को गाजियों की धरती अर्थात (इस्लाम के वीर योद्धाओं ) की धरती बताया गया है। पोस्टर पर लिखा है, “गाजियों की धरती पर गरजेंगे शेर-ए-हिंदुस्तान…” इसी पोस्टर पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे ओवैसी का चुनावी स्टंट करार दिया है। हालाँकि, इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद उन पोस्टरों को हटा दिया गया है।

इस मामले पर भाजपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल ने कहा है कि यह केवल ओवैसी का चुनावी पैंतरा बस है। संभल कभी भी गाजियों की धरती नहीं रहा है। हिंदुस्तान का कोई भी शहर न तो कभी गाजियों का रहा है औऱ न हम ऐसा होने देंगे। बीजेपी नेता ने कहा इस तरह के मंसूबों को कभी भी कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।

संभल को पौराणिक शहर करार देते हुए राजेश सिंघल ने कहा कि इस शहर को लेकर पुराणों में कल्कि अवतार के बारे में जिक्र है, लेकिन अगर कोई यह साबित कर दे कि कुरान में इसे गाजियों की धरती बताया गया है तो राजनीति छोड़ दूँगा।

2022 चुनाव पर है ओवैसी की नजर

AIMIM चीफ असुदुद्दीन ओवैसी की नजर 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर टिकी है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि असुदुद्दीन ओवैसी की पार्टी राज्य में 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। यही कारण है कि ओवैसी यहाँ पर अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं।

ओवैसी की गाजियों की धरती वाले बयान को लेकर ट्विटर पर राधादेव शर्मा ने तंज कसा। शर्मा ने लिखा, “यूपी के जिले संभल मे आज AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की जनसभा के लिए लगवाए गए पोस्टर और विज्ञापनों में पौराणिक क्षेत्र संभल को ‘गाजियों की धरती’ लिखा गया है। इससे पहले ये लोग अयोध्या को फैजाबाद लिखे थे। संभल गाजियों की धरती कैसे हो गई नमकहरामों?”

वहीं राधादेव के ट्वीट पर कमेंट करते हुए सुरेश शर्मा नाम के यूजर ने कहा कि इस बात के बारे में सेक्युलर हिंदुओं को सोचने की आवश्यकता है।

‘जो कौम अपने इतिहास व परंपराओं को भूला देती है, वह अपने भूगोल की भी रक्षा नहीं कर पाती’: दादरी में CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (22 सितंबर 2021) को गौतमबुद्ध नगर में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा का अनावरण किया। इस बीच ग्रेटर नोएडा में सम्राट मिहिर भोज के वंशज होने का दावा करने वाले राजपूत और गुर्जरों के बीच गतिरोध लगातार जारी रहा।

इस दौरान सीएम योगी ने दादरी विधानसभा की 12 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण किया। यहाँ उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ”राजा मिहिर भोज नौंवी सदी के एक महान धर्मरक्षक थे, जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं के छक्के छुड़ा दिए थे। मैं उनको नमन करता हूँ, जो कौम अपने इतिहास व परंपराओं को विस्मृत कर देती है, वह अपने भूगोल की भी रक्षा नहीं कर पाती।”

उन्होंने कहा, “महापुरुषों को कभी जातीय सीमाओं में कैद नहीं करना चाहिए। उनका महान बलिदान किसी व्यक्ति या परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए होता है। माँ पन्ना धाय ने अपने पुत्र का बलिदान देकर महाराणा को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया था। उनके इस महान त्याग पर सिर्फ गुर्जर समाज को नहीं, अपितु संपूर्ण भारत को गौरव की अनुभूति करनी चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “तालिबानियों जैसे मजहबी अराजक तत्व पूरी मानव-जाति के लिए खतरा हैं। यदि ‘राष्ट्रधर्म’ पर आँच आई तो कोई व्यक्ति, जाति या मजहब सुरक्षित नहीं रहेगा। यदि किसी को लगता है कि देश की सुरक्षा खतरे में आ जाए तब भी वह सुरक्षित रह लेगा, तो यह उसकी गलतफहमी होगी। इतिहास में हुई लीपापोती को अब मिटाया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि राजा माहिर भोज का इतिहास पढ़ने पर पता चलता है कि उनके शासन के बाद डेढ़ सौ वर्षों तक कोई भी आक्रांता यहाँ आँख उठाने की हिम्मत नहीं कर सका। ये सुरक्षा का भाव राजा मिहिर भोज ने दिया था। वो एक शिवभक्त थे। आप इतिहास को पढ़िए, पानीपत के युद्ध के बारे में पढ़िए। उस समय भारतीय सेना संगठित न होने के कारण विदेशी आक्रांता सेंध लगा जाते थे।

सीएम योगी ने कहा, “4 साल पहले का समय पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोग नहीं भूल सकते। यहाँ कांवड़ यात्रा नहीं निकालने दी जाती थी। दुर्गा पूजा उत्सव नहीं मनाने दिया जाता था। आप 5 अगस्त 2020 की तारीख याद करिए कैसे भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है, जो भव्यता के साथ आगे बढ़ रहा है। हर भारतीय गर्वित महसूस करता है।”

गैंगरेप मामले में राजस्थान पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट महिला ने DSP ऑफिस के बाहर छिड़का पेट्रोल, बुजुर्ग ने भी लगाई आग

राजस्थान में मंगलवार (21 सितंबर 2021) को दो जगह पुलिस प्रशासन से नाराजगी व्यक्ति करने के लिए दो लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया। पहले सवाईमाधोपुर जिले के डीएसपी ऑफिस के बाहर एक महिला द्वारा आत्महत्या का प्रयास किया गया और फिर टोंक जिले में एक बुजुर्ग ने पुलिस स्टेशन के बाहर खुदकुशी की कोशिश की।

जानकारी के मुताबिक बुजुर्ग ने पुलिस थाने के बाहर पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग लगाना चाहा। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें बचाया और फौरन अस्पताल में भर्ती कराया। अब वहाँ उनका इलाज हो रहा है। इससे पहले मंगलवार को ही 65 साल की वृद्ध महिला ने खुद को खत्म करने का प्रयास किया था।

उसका कहना था कि उसने गैंगरेप की शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन पुलिस कार्रवाई में ढिलाई करती रही। उसके मुताबिक उसने अगस्त में अपने तीन रिश्तेदारों पर गैंगरेप का आरोप लगाया था, लेकिन उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डिप्टी एसपी नारायण ने बताया कि शुरुआती जाँच में उन्होंने पाया है कि रेप का मामला झूठा था। महिला और उसके रिश्तेदारों के बीच 6 लाख रुपए को लेकर विवाद था जिसके कारण ही महिला ने रेप केस दर्ज करवा दिया। उन्होंने ये भी बताया कि महिला मंगलवार को उनके दफ्तर गई थी और कार्रवाई का दबाव बना रही थी। इसी के बाद उसने खुद पर पेट्रोल डाल कर आग लगाई।

ऐसे ही टोंक जिले में हुई घटना की बाबत जानकारी आई है कि बुजुर्ग का नाम रामस्वरूप बैरवा है। वो मंगलवार की शाम टोडराय सिंह पुलिस थाने गए थे। लेकिन बाद में वे पुलिस स्टेशन के गेट से ही लौट गए और करीब 100 मीटर आगे जाकर खुद को आग के हवाले कर दिया। पुलिस का कहना है कि बुजुर्ग ने बाइक से पेट्रोल निकाल कर खुद पर छिड़का। हालाँकि उन्होंने ऐसा क्यों किया ये अभी नहीं मालूम चला है। लेकिन ये बात सामने आई है कि बुजुर्ग की ओर से कुछ मामलों की शिकायत अलग-अलग थानों में दर्ज कराई गई थी। एक जमीन के विवाद में तो वो खुद भी आरोपित थे।

सना खान का निकाह कराने वाले मौलाना को लेकर ATS ने किया बड़ा खुलासा, ‘AAP’ के अमानतुल्लाह ने बताया- ‘मुसलमानों पर अत्याचार’

पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री सना खान का निकाह कराने वाले मौलाना कलीम सिद्दीकी को लेकर यूपी एटीएस ने लखनऊ में बड़े खुलासे किए हैं। एटीएस के अनुसार, अवैध धर्मांतरण के मामले में मेरठ से गिरफ्तार मौलाना मदरसों में फंडिंग करवाता था। उसे हवाला के जरिए विदेशों से फंडिंग की जाती थी।

यूपीएटीएस के अनुसार, मुजफ्फरनगर निवासी मौलाना कलीम सिद्दीकी दिल्ली में रहकर विभिन्न प्रकार की शैक्षणिक, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की आड़ में अवैध धर्मांतरण के कार्य को अंजाम देता है। वह हिंदुओं को गुमराह कर और उन्हें डराकर उनका धर्मांतरण करता है। इसके बाद वह उन्हें भी इस काम में लगा देता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह लोगों को भ्रमित कर शरीयत व्यवस्था लागू करने और मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर धर्मांतरण करवा रहा था। यूपी एटीएस लंबे समय से कलीम पर नजर बनाए हुए थी। 

वहीं, ‘आप’ नेता अमानतुल्ला खान के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने मौलाना की गिरफ्तारी को गलत ठहराया है। शफीकुर्रहमान ने कहा, ”ये गलत है। भाजपा के पास मुसलमानों को परेशान करने के अलावा कोई काम नहीं।” इससे पहले आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने मौलाना कलीम की गिरफ्तारी को ‘मुसलमानों पर अत्याचार’ बताया है।

मौलाना की गिरफ्तारी को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। एक यूजर ने लिखा है, ”ये योगी जी का यूपी है, यहाँ कोई नहीं बचेगा। आज बाबा जी की पुलिस ने मेरठ से उस मौलाना कलीम सिद्दीकी को दबोच लिया, जिसके सामने उँगली उठाने पर भी सेक्युलर सरकारें काँपती थीं। ये मौलाना धर्मांतरण वाले खेल का मास्टरमाइंड था, यूपी पुलिस उठाकर ले गई है, अब बाँस के जरिए सब उगलवाएगी।”

मानसी नाम की ट्विटर यूजर ने लिखा, ”धर्मांतरण का देशव्यापी गिरोह चलाने वाले गिरफ्तार मौलाना कलीम सिद्दीकी को विदेशों से हवाला के जरिए करोड़ों रुपए की फंडिंग हो रही थी। बहरीन से ट्रस्ट को डेढ़ करोड़ रुपए मिले हैं। अवैध धर्मांतरण कर मुस्लिम जनसंख्या बढ़ाने, शरीयत व्यवस्था लागू करने की साजिश थी।”

गौरतलब है कि मौलाना कलीम सिद्दीकी पर धर्मांतरण कराने के कई आरोप हैं। एटीएस की जाँच में सामने आया कि मौलाना मदरसों की आड़ में पैगामे इंसानियत का संदेश देने के बहाने लोगों को जन्नत और जहन्नुम जैसी बातों का लालच और भय दिखाकर उन पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाता था।

द वायर वाले वरदराजन की ‘पेरिस कैफे’ स्टोरी, कल्पना का तड़का लगा वैक्सीन और PM मोदी की तस्वीर पर छोड़ा नया शिगूफा

कोरोना के भारतीय टीकों और मोदी सरकार की वैक्सीनेशन नीतियों को लेकर लिबरल-वामपंथी गुट शुरुआत से ही प्रोपेगेंडा फैलाने में लगे हैं। इसी कड़ी में वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने नया शिगूफा छोड़ा है। उन्होंने ट्वीट कर दावा किया है कि उनसे पेरिस के एक रेस्तरां में वैक्सीन लेने का प्रमाण माँगा गया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक बनाने की भी कोशिश की है।

वरदराजन ने दावा किया कि पेरिस के एक कैफे में एक वेटर ने उनसे वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट माँगा। सर्टिफिकेट देखने के बाद वेटर ने उस पर लगी तस्वीर का मिलान वरदराजन से किया। जब वरदराजन ने उसे बताया कि तस्वीर प्रधानमंत्री की है तो वह अचंभित रह गया कि उनकी बजाए नेता की तस्वीर क्यों लगी है?

नेटिजन्स ने अमेरिकी नागरिक वरदराजन की इस कहानी में कल्पना का घोल बताते हुए उनके दावे पर सवाल उठाए हैं। संदीप बांगिया नाम के एक यूजर ने कहा कि उन्हें वरदराजन की कहानी मनगढ़ंत लगती है। साथ ही सवाल किया कि वरदराजन ने वेटर को वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट का डिजिटल प्रारूप क्यों नहीं दिखाया? एक अन्य यूजर रिषभ वत्स ने ध्यान दिलाया कि सार्वजनिक जगहों पर पहुँच के लिए फ्रांस 18 साल की आयु से ऊपर के हरेक व्यक्ति को कोविड पास/सर्टिफिकेट मुहैया कराता है जो टीकाकरण का मुख्य प्रमाण है।

दिलचस्प यह है कि फ्रांसीसी सरकार की वेबसाइट पर जो जानकारी उपलब्ध है उससे भी वरदराजन की कहानी में झोल दिखता है। इसके मुताबिक फ्रांस आने वाले गैर यूरोपीय देश के नागरिकों और छात्रों के लिए कोविड सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। सर्टिफिकेट उन लोगों को दिया जाता है जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आती है या फिर उन्होंने यूरोपीय मेडिसीन एजेंसी द्वारा मान्यता प्राप्त या उसका समतुल्य टीका ले रखा होता है। डिजिटल फॉर्मेट में जारी किया जाने वाला यह सर्टिफिकेट पूरे यूरोपीय यूनियन में मान्य होता है। जाहिर है फ्रांस में गैर यूरोपीय नागरिकों से टीकाकरण का प्रमाण की जगह कोविड सर्टिफिकेट की माँग की जाती है।

कोविड सर्टिफिकेट को लेकर फ्रांस की गाइडलाइन

इसे हासिल करने के लिए या तो किसी को वैध COVID वैक्सीन प्रमाण-पत्र दिखाना होगा या अपनी नेगेटिव आरटी-पीसीआर या एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट, जो एक क्यूआर कोड के साथ आता है और जिसे कोई अपने फोन से भी हासिल कर सकता है। इसके अलावा जिन्हें मान्यता प्राप्त टीका लगा हो उन्हें भी फ्रांस में रहने के लिए एक ‘COVID प्रमाण-पत्र’ मिलेगा। यहाँ यह जानना जरूरी है कि फ्रांस ने भारत के कोविशील्ड को मान्यता दे रखी है।

साफ है कि इस स्थिति में फ्रांस में कोविड पास हासिल करने के लिए वरदराजन को भी या तो नेगेटिव रिपोर्ट दिखाने की जरूरत हुई होगी या फिर उन्होंने टीका ले रखा होगा तो उसका प्रमाण। इस बात की संभावना नहीं दिखती कि रेस्तरां में उनसे किसी वेटर ने वैक्सीनेशन का प्रमाण मॉंगा होगा या फिर पीएम मोदी की तस्वीर देख उनसे चर्चा की होगी।

गुम हुई बेटी, घर लौटी तो केस खत्म करने के छत्तीसगढ़ पुलिस ने माँगे ₹20,000: इनकार पर माँ की पिटाई, साफ करवाए शौचालय

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में पुलिसिया क्रूरता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आय़ा है। यहाँ पुलिस थाने में एक केस को खत्म करने के लिए थाना प्रभारी और संबंधित केस के जाँच अधिकारी ने आदिवासी महिला से 20 हजार रुपए की रिश्वत माँगी। जब महिला ने 20 हजार रुपए देने से इनकार कर दिया तो पुलिसवालों ने महिला और उसके दिव्यांग बेटे को जमकर पीटा।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना पलारी थाना क्षेत्र की है। थाने में महिला को बेरहमी से पीटने के बाद पुलिसवालों ने उसके दो बच्चों को भी पीटा औऱ उनसे शौचालय भी साफ करवाए। महिला को पीटे जाने की घटना के बाद लोगों ने थाने का घेराव किया औऱ इस मामले की शिकायत जिले के पुलिस अधीक्षक से की गई। मामले पर संज्ञान लेते हुए एसपी ने आऱोपित थाना प्रभारी को सीआर चंद्रा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही इस केस की जाँच का जिम्मा अब जिले के एडिशनल एसपी पीताम्बर पटेल को सौंपा गया है। उनसे एक सप्ताह के भीतर अपनी जाँच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

एसडीओपी को सौंपी गई शिकायत

शिकायत के मुताबिक, पीड़ित महिला वार्ड नंबर-13 निवासी रेखा सावरा है। उसने बताया है कि उसकी बेटी 2 महीने पहले घर से भाग गई थी। इसी मामले में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट उसने थाने में दर्ज कराई थी। पीड़ित महिला का कहना है कि उसकी बेटी अपनी बड़ी माँ के घर चली गई थी। लेकिन पुलिसवालों का कहना था कि वह किसी के साथ भाग गई थी।

आरोप है कि पुलिसवालों ने जाँच के नाम पर महिला को सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक उन्हें थाने में ही बिठा कर रखा था। हालाँकि, बाद में स्थानीय समाज सेविका के हस्तक्षेप के बाद उन्हें घर जाने दिया गया। साथ ही पुलिस ने उन्हें अगले दिन भी थाने बुलाया था, लेकिन अपने बेटों के साथ वह सुअर चराने चली गई थी। इसके बाद पुलिसवाले वहाँ गए और उसके बेटे समेत दो और को पकड़ ले आए। बाद में महिला से मारपीट भी की।

टीआई के निलंबन का आदेश

टीआई ने खुद को बताया निर्दोष

निलंबन के बाद थाने के सीआर चंद्र ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मैने किसी तरह की कोई भी रिश्वत नहीं माँगी थी। हमने घर से भागकर वापस लौटी महिला की बेटी को मेडिकल जाँच के लिए बुलाया था। लेकिन उसने इससे इनकार कर दिया।

‘साड़ी स्मार्ट ड्रेस नहीं’- दिल्ली के अकीला रेस्टोरेंट ने महिला को रोका: ‘ओछी मानसिकता’ पर भड़के लोग, वीडियो वायरल

भारतीय परिधानों को पिछड़ा बताने का काम अब रेस्टोरेंट वालों ने भी खुलेआम शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही है जो कि अंसल प्लाजा के अकीला रेस्टोरेंट की है। वहाँ का स्टाफ एक महिला पत्रकार अनीता चौधरी से कह रहा है कि साड़ी चूँकि स्मार्ट आउटफिट नहीं है इसलिए वो उसे पहनने वालों को अपने यहाँ अनुमति नहीं देते।

इस वीडियो को अनीता चौधरी ने शेयर किया है। अब इसे कई मीडिया पोर्टल्स पर कवरेज मिल रही है। लोग ऐसी ओछी मानसिकता की आलोचना कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार अनीता अपनी बेटी का जन्मदिन मनाने 19 सितंबर को दिल्ली के अकीला रेस्टोरेंट में गई थीं लेकिन उन्हें साड़ी में देख एंट्री देने से मना कर दिया। वीडियो में नजर आ रहे कर्मचारियों ने पहले परिधानों पर बात की और फिर उनकी बेटी की उम्र कम बताकर उन्हें रोकने लगे।

इस घटना के संबंध में अनीता ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। अनीता ने पूछा कि उन्हें बताया जाए कि अगर साड़ी मॉर्डन या स्मार्ट आउटफिट नहीं है तो फिर कौन सी ड्रेस को पहनना ‘स्मार्ट आउटफिट’ कहलाएगा।

वह कहती हैं कि आज के समय में विदेशी सोच का कब्जा हो रहा है। वो छोटी स्कर्ट की बात उठाती हैं और इसे गलत न बताते हुए कहती हैं उन्हें किसी कपड़े से गुरेज नहीं है। वो भी मानती हैं कि लड़कियाँ किसी भी तरह के परिधान को पहन सकती हैं। उसी तरह वो भी अपनी साड़ी को प्यार करती हैं और उन्हें साड़ी पहनना अच्छा लगता है। इसलिए अगर भारत में साड़ी को स्मार्ट आउटफिट नहीं माना जाता है तो उन्हें बताया जाए कि वो कौन से कपड़े हैं जिन्हें स्मार्ट आउटफिट माना जाता है और जिन्हें वो पहन सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि बीते साल मार्च 2020 में भी दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में ऐसा मामला सामने आया था। उस समय वसंत कुंज के Kylin and Ivy रेस्टोरेंट में महिला को साड़ी के कारण से एंट्री नहीं दी गई थी। महिला गुरुग्राम के प्राइवेट स्कूल की प्रिंसपल संगीता नाग थीं। जिनसे रेस्टोरेंट के कर्मचारियों ने कहा था, “यहाँ पारंपरिक परिधान में आने वालों को एंट्री नहीं दी जाती।”

ToolKit पर सुप्रीम कोर्ट में भी छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार को झटका, रमन सिंह और संबित पात्रा पर FIR से जुड़ा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें टूलकिट से जुड़े एक मामले में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा पर दर्ज प्राथमिकी (FIR) को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए जाँच पर रोक लगा दी थी। कॉन्ग्रेस की छात्र ईकाई NSUI के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा की शिकायत पर रायपुर सिविल लाइन पुलिस ने 19 मई 2021 को दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने बुधवार (22 सितंबर 2021) को राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। हाई कोर्ट को इस मामले में अपना काम करने दिया जाए। इससे पहले छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ के सामने हाई कोर्ट की टिप्पणियों पर विचार करते हुए सुनवाई का आग्रह किया। लेकिन पीठ ने उनकी दलीलें यह कहते हुए खारिज कर दी, “अपनी ऊर्जा बर्बाद मत करिए। हम हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। हाई कोर्ट को फैसला करने दें। हम उस अवलोकन को लेंगे।”

एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष की शिकायत के आधार पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 505 (सार्वजनिक शरारत), 469 (जालसाजी) और 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा) के तहत मामला दर्ज किया था। शर्मा ने आरोप लगाया था कि संबित पात्रा कॉन्ग्रेस के लेटरहेड के माध्यम से फर्जी दस्तावेज शेयर कर रहे हैं और टूलकिट के बहाने कॉन्ग्रेस पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। वहीं रमन सिंह पर समुदायों के बीच तनाव उत्पन्न करने का आरोप लगाया गया था। सिंह और पात्रा को पूछताछ का नोटिस भी भेजा गया था।

हाई कोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने जून में सुनवाई करते हुए दोनों के खिलाफ एफआईआर को दुर्भावना और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित माना था। उन्होंने कहा था, “तथ्यों और प्राथमिकी के अवलोकन के बाद प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। स्पष्ट रूप से याचिकाकर्ता के खिलाफ दुर्भावना या राजनीतिक द्वेष के कारण कार्यवाही की गई है।” इस आधार पर अदालत ने दर्ज एफआईआर के आधार पर जाँच जारी रखने पर रोक लगा दी थी। अदालत ने माना था कि जाँच जारी रखना कानून का दुरुपयोग होगा।

हाई कोर्ट ने कहा था कि धारा 504 और 505 के तहत अपराध नहीं बनता क्योंकि ट्वीट से सार्वजनिक शांति प्रभावित नहीं हुई। धारा 469 के तहत जालसाजी के आरोप को लेकर कहा कि जो दस्तावेज इन्होंने ट्वीट किए थे वे पहले से ही पब्लिक डोमेन में थे। अब मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

गौरतलब है कि संबित पात्रा ने ट्वीट कर कहा था कि कॉन्ग्रेस ने विदेशी मीडिया में देश की छवि खराब करने के लिए टूलकिट तैयार किया है। कथित टूलकिट में कोरोना वायरस से पैदा हालात का फायदा उठाकर केंद्र की मोदी सरकार और उसके मंत्रियों को बदनाम करने के दिशा-निर्देश दिए गए थे। साथ ही विदेशी मीडिया से साँठ-गाँठ की बातें भी कही गई थी। इसमें कुंभ को भी बदनाम करने की साजिश रची गई थी। कॉन्ग्रेस का दावा था कि ये दस्तावेज जाली हैं। उसने दिल्ली पुलिस से भी शिकायत की थी जो बाद में यह कहते हुए वापस ले ली गई कि वह छत्तीसगढ़ में मामले को आगे बढ़ाएगी।

मौलाना कलीम सिद्दीकी को यूपी ATS ने मेरठ से किया गिरफ्तार, अवैध धर्मांतरण के लिए की हवाला के जरिए फंडिंग

उत्तर प्रदेश के आतंक निरोधी दस्ते (एटीएस) ने बुधवार (22 सितंबर, 2021) को अवैध धर्मांतरण मामले में मौलाना कलीम सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है। भारत के सबसे बड़े धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एटीएस ने यह गिरफ्तारी मेरठ से की है। पुलिस ने बताया कि मौलाना जामिया इमाम वलीउल्लाह ट्रस्ट चलाता है, जो कई मदरसों को फंड देता है। इसके लिए उसे विदेशों से भारी फंडिंग मिलती है। मौलाना को पूछताछ के लिए मेरठ से लखनऊ लाया गया है। यूपी एटीएस ने कलीम के साथ ही उसके तीन सहयोगी मौलानाओं और ड्राइवर को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार मौलाना की गिरफ्तारी को लेकर आज यूपी पुलिस मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह मौलाना की गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी साझा करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौलाना कलीम अवैध धर्मांतरण मामले जून 2021 में गिरफ्तार किए गए उमर गौतम का करीबी है। बताया जा रहा है कि उमर से पूछताछ के बाद मिले सुराग के आधार पर एटीएस ने यह कार्रवाई की है।

64 वर्षीय इस्लामिक स्कॉलर संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर था। मौलाना कलीम ग्लोबल पीस सेंटर और जमीयत-ए-वलीउल्लाह का अध्यक्ष भी है। इसके अलावा पश्चिमी यूपी के सबसे बड़े मौलवियों में से एक कलीम सिद्दीकी कई मदरसों का प्रभारी भी है।

वहीं, दिल्ली के ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान ने मौलाना कलीम की गिरफ्तारी को ‘मुसलमानों पर अत्याचार’ बताया है। शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन के दौरान खासा विवादों में रहे अमानतुल्ला ने ट्वीट किया, ”उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले अब मशहूर इस्लामिक स्कॉलर मौलाना कलीम सिद्दीकी साहब को गिरफ्तार किया गया है, मुसलमानों पर अत्याचार बढ़ता जा रहा है। इन मुद्दों पर सेक्यूलर पार्टियों की खामोशी भाजपा को और मज़बूती दे रही है। यूपी चुनाव जीतने के लिए बीजेपी आखिर और कितना गिरेगी?”

बताया जा रहा है कि कलीम मुजफ्फरनगर के फूलत गाँव का रहने वाला है। वह मुजफ्फरनगर से मेरठ के लिसाड़ीगेट के हुमायूँनगर में स्थित एक मस्जिद के इमाम शारिक में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आया था। मंगलवार (21 सितंबर 2021) रात लगभग नौ बजे नमाज अदा करने के बाद मौलाना वापस मुजफ्फरनगर लौट रहा था, इसी दौरान उसे ATS की टीम ने गिरफ्तार कर लिया।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश एटीएस ने धर्मांतरण कराने के मामले में गिरफ्तार किए गए मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहाँगीर आलम कासमी को जून में दिल्ली के जामिया नगर इलाके से गिरफ्तार किया गया था। उन पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) से कथित फंडिंग के साथ बधिर छात्रों और गरीब लोगों को इस्लाम में कन्वर्ट करने की कोशिश करने का आरोप लगा था।