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‘रसूल’ के लिए पंजाबी सिंगर-एक्टर एमी विर्क से मँगवाई माफी, सुफना फिल्म के गाने पर गिरफ्तारी की मिली थी धमकी

मुस्लिम समाज की भावनाएँ फिर से आहत हुई हैं। एमी विर्क नाम के पंजाबी सिंगर और एक्टर के साथ-साथ गीतकार जानी ने माफी माँगी है। कारण है गाने में एक शब्द का इस्तेमाल- ‘रसूल’

एक फिल्म है सुफना। इसका एक गीत है ‘कबूल है’। इसी गीत में रसूल शब्द का इस्तेमाल किया गया है और यही लफड़े की वजह है। एक लड़की जसनूर ने रसूल शब्द पर आपत्ति जता दी। विवाद इतना बढ़ गया कि शाही मौलाना तक को बीच में आना पड़ा।

‘रसूल’ पर विरोध-प्रदर्शन और गिरफ्तारी की धमकी

लुधियाना में एक जामा मस्जिद है। यहाँ के शाही मौलाना हैं मुहम्मद उस्मान रहमानी। फिलहाल चर्चा में हैं। एमी विर्क नाम के पंजाबी सिंगर और एक्टर के साथ-साथ शाही मौलाना ने गीतकार जानी से भी माफी मँगवाई है।

शाही मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी के पास इस मामले को लेकर जसनूर ही गई थीं। जसनूर के अनुसार गाने में रसूल शब्द के कारण मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। शाही मौलाना ने इस मामले को आगे बढ़ाते हुए पंजाब सरकार से एमी विर्क को गिरफ्तार करने की माँग की थी।

पंजाबी सिंगर और एक्टर एमी विर्क के साथ-साथ गीतकार जानी ने गिरफ्तारी या बवाल से बचने के लिए माफी वाला रास्ता चुना। पिंकी धालीवाल के साथ ये दोनों शाही मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी के पास गए। उनसे मिले और गलती के लिए माफी माँग ली।

शाही मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी से मिल कर इन लोगों ने स्पष्ट किया कि ‘सुफना’ फिल्म के गाने ‘कबूल है’ में ‘रसूल’ शब्द का इस्तेमाल अनजाने में किया गया। इन लोगों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पूरी फिल्म बनाने की प्रक्रिया या फिल्म यूनिट में से किसी में भी धार्मिक भावनाएँ आहत करने की कोई मंशा नहीं थी।

एमी विर्क ने क्यों माँगी माफी?

आखिर क्यों सिंगर-एक्टर-गीतकार जैसी जानीमानी हस्ती को माफी माँगनी पड़ी? क्या मामला सिर्फ शाही मौलाना तक सीमित था? नहीं। इस मामले को लेकर पंजाब के मालेरकोटला, पटियाला और जालंधर तक में मुस्लिम समाज ने विरोध-प्रदर्शन किया था।

मुस्लिम समाज की नाराजगी से फिल्म/कंटेंट इंडस्ट्री के लोगों के डरने और माफी माँगने की प्रक्रिया नई नहीं है। ‘मुहम्मद दी मेसेंजर ऑफ गॉड’ (Muhammad: The Messenger of God) नाम की फिल्म को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने तो पिछले साल YouTube, फेसबुक, Instagram सब जगह बैन करने के लिए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री को पत्र लिखा था।

BBC का तो नाम आपने सुना ही होगा। वही BBC जो हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर कार्टून छापता है। न कभी माफी माँगता है, न कभी इन कार्टूनों को डिलीट करता है। फरवरी 2021 का महीना BBC के लिए थोड़ा चेंज लेकर आया था। माफी माँगी थी इसने… लेकिन पैगंबर मोहम्मद के नाम पर। शायद शार्ली हेब्दो याद आ गया होगा।

‘यूनिवर्सिटी कैंपस में मस्जिद बनाना सही नहीं’: UP सरकार के एक्शन पर रोक लगाने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस संबंध में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। यह यूनिवर्सिटी सपा सांसद और यूपी सरकार के पूर्व मंत्री आजम खान से जुड़ा हुआ है।

जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि ट्रस्ट को जिन शर्तों पर 2005 में जमीन दी गई थी, उनमें से कुछेक का पालन करने में वह विफल रहा है। अदालत ने माना कि यूनिवर्सिटी की जमीन को राज्य सरकार के नियंत्रण में लेने के लिए रामपुर प्रशासन ने जो कार्रवाई की है उसमें दखल दिए जाने की जरूरत नहीं है।

अदालत ने यह भी माना कि ट्रस्ट ने गैरकानूनी तरीके से जमीन पर कब्जा किया। साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में मस्जिद निर्माण को भी शर्तों का उल्लंघन माना। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने कहा कि ट्रस्ट को केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए जमीन के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। ऐसे में एसडीएम की रिपोर्ट से साफ है कि ‘मस्जिद’ का निर्माण शर्त का उल्लंघन है। खंडपीठ ने कहा, “यूनिवर्सिटी कैंपस में रहने वाले शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए मस्जिद निर्माण का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह राज्य द्वारा दी गई अनुमति के खिलाफ है।”

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार के मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय अधिनियम, 2005 से इस यूनिवर्सिटी के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ था। यूनिवर्सिटी के लिए 471 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। लेकिन अब केवल 12.50 एकड़ जमीन ही ट्रस्ट के पास रहेगी। ट्रस्ट को सरकार ने नवंबर 2005 में 400 एकड़, जनवरी 2006 में 45.1 एकड़ और सितंबर 2006 में 25 एकड़ जमीन अधिग्रहण की इजाजत दी थी। लेकिन एसडीएम की रिपोर्ट में बताया गया है कि केवल 24000 वर्गमीटर जमीन में ही निर्माण हो रहा है जो शर्तों का उल्लघंन है। साथ ही अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन भी नियमों की अनदेखी कर ली गई।

अदालत ने कहा, “इस मामले में 12.50 एकड़ से ज्यादा जमीन अधिग्रहण की अनुमति शैक्षणिक संस्थान की स्थापना के लिए दी गई है। मस्जिद का निर्माण इसके खिलाफ है। साफ है कि ट्रस्ट ने शर्तों का उल्लंघन किया। ऐसे में सरकार को यह अधिकार है कि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने की स्थिति में 12.50 एकड़ से अतिरिक्त जमीन वह अपने अधीन ले ले।”

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन लेने के लिए जिलाधिकारी से अनुमति नहीं ली गई। अधिग्रहण शर्तों का उल्लंघन कर शैक्षिक कार्य के लिए निर्माण की बजाय मस्जिद का निर्माण कराया गया। ग्राम सभा की सार्वजनिक उपयोग की जमीन और नदी किनारे की सरकारी जमीन ली गई। किसानों से जबरन बैनामा लिया गया, जिसके लिए 26 किसानों ने पूर्व मंत्री और ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खान के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है। निर्माण 5 साल में होना था, लेकिन इसकी भी वार्षिक रिपोर्ट नहीं दी गई। गौरतलब है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खान इस समय जेल में हैं।

‘अहम् ब्रह्मास्मि’: ‘रावण लीला’ में प्रतीक गाँधी ने निभाए दो दमदार किरदार, इस दिन रिलीज होगी फिल्म; देखें टीजर

वेब सीरीज ‘स्कैम 1992’ में हर्षद मेहता का किरदार निभाकर डिजिटल दुनिया के स्टार बने गुजराती अभिनेता प्रतीक गाँधी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘रावण लीला’ को लेकर खासा चर्चा में हैं। ‘लवयात्री’ और ‘मित्रों’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुके प्रतीक गाँधी ‘रावण लीला‘ में लीड रोल में नजर आएँगे। सोशल मीडिया पर फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा के साथ इसका टीजर शेयर किया गया है। इसका ट्रेलर 9 सितंबर, 2021 को रिलीज होने वाला है। वहीं फिल्म 1 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

‘स्कैम 1992’ में अपनी दमदार एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीतने वाले गाँधी ने अपने ट्विटर हैंडल पर फिल्म का दिलचस्प टीज़र साझा किया है। उन्होंने इसके साथ कैप्शन लिखा, “हर फिल्म आपको एक साथ दो अलग-अलग किरदारों को जीने का मौका नहीं देती। रावण लीला (भावई) एक ऐसी कहानी है, जिसने मुझे बहुत कुछ सीखने का मौका दिया। फिल्म के रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूँ, जब आप सभी 1 अक्टूबर को सिनेमाघरों में इस फिल्म को देखेंगे।”

फिल्म के टीज़र में अभिनेता को राम लीला के मंच पर रावण का किरदार निभाते हुए दिखाया गया है। अभिनेता इसमें अपनी दमदार आवाज में कहता है, ”मैं भय हूँ, मैं लाली हूँ, मैं राख हूँ, मैं चिंगारी हूँ, मैं रोम, मैं कोम में हर कण में व्यापित हूँ। शिव भक्त हूँ मैं, तीनों लोगों पर राज करता हूँ। मैं ‘अहं ब्रह्मास्मि’ हूँ। इसके बाद वह जोर-जोर हँसता है। ‘अहं ब्रह्मास्मि’। यह अध्यामिक शास्त्रों का निचोड़ है। अहं ब्रह्मास्मि का सरल अर्थ है अहं ब्रह्म अस्मि। अर्थात मैं ब्रह्म हूँ। अहं ब्रह्मास्मि शब्द जो हिंदू दर्शन में ब्राह्मण (पूर्ण) के साथ आत्मा के मिलन का वर्णन करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

फिल्म में प्रतीक गाँधी के साथ अभिनेता ऐंद्रिता रे मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म में अभिनेता अंकुर भाटिया, अभिमन्यु सिंह, राजेश शर्मा, अंकुर विकल, राजेंद्र गुप्ता, गोपाल सिंह, फ्लोरा सैनी, अनिल रस्तोगी, कृष्णा बिष्ट और भाग्यश्री मोटे भी हैं। इस फिल्म की कथा, पटकथा हार्दिक गज्जर ने लिखी है। हार्दिक गज्जर इस फिल्म के निर्देशक हैं।

फहीम दश्ती की मौत का BBC जिम्मेदार? सेटेलाइट फोन नंबर TV पर किया फ्लैश: लोगों ने कहा- बीबीसी पर हो युद्ध अपराध का केस

रविवार को तालिबान ने पाकिस्तानी सेना की मदद से अफगानिस्तान के पंजशीर इलाके पर हमला किया, जिसमें नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (एनआरएफ) के प्रवक्ता फहीम दश्ती की मौत हो गई। इसके अलावा, तालिबान के हमले में फ्रंट के शीर्ष कमांडर जनरल साहिब अब्दुल वदूद की भी मौत हो गई। दश्ती और वदूद की मौत को ताजिक मूल के विद्रोही नेता और एनआरएफ के प्रमुख अहमद मसूद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ये दोनों मसूद के बेहद करीबी और विश्वसनीय थे। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि बीबीसी की एक गलती फहीम दश्‍ती की मौत का कारण बनी।

सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि फहीम के बारे में तालिबान को कैसे जानकारी मिली? इसके लिए लोग बीबीसी को दोषी बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि बीबीसी ने फहीम का सेटेलाइट नंबर सार्वजनिक किया, जो तालिबान के लिए फायदेमंद साबित हुई और उसने नंबर को ट्रेस कर फहीम पर हमला कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर तालिबान ने जब पंजशीर पर हमला किया और रेजिस्टेंस फ्रंट के नेताओं को निशाना बनाया, तब अहमद मसूद के साथी फहीम दश्ती बीबीसी को इंटरव्यू दे रहे थे। खुद को नीति विशेषज्ञ बताने वाले जलमई निशत ने अपने ट्विटर हैंडल @ZalNishat से ट्वीट कर कहा कि जब वे बीबीसी पर्शिया पर फहीम का साक्षात्कार देख रहे थे, उसी दौरान फहीम से बीबीसी का कनेक्शन कट गया और उनका सेटेलाइट मोबाइल नंबर स्क्रीन पर फ्लैश होने लगा।

लोगों का कहना है कि इसी सेटेलाइट नंबर के आधार पर तालिबान ने फहीम को ट्रेस कर लिया और उन तक पहुँच गया। इसके बाद तालिबान ने ड्रोन से हमला कर फहीम और उनके साथियों को निशाना बनाया। सोशल मीडिया पर लोगों ने फहीम की मौत के लिए बीबीसी को पूरी तरह जिम्मेदार बताया है।

फहीम ने साक्षात्कार के दौरान कहा था कि एनआरएफ का तालिबान के साथ सरकार बनाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि अफगानिस्तान के भविष्य के लिए वे और उनका लड़ाकू दस्ता जान देने के लिए तैयार है।

वहीं, बीबीसी की इस करतूत को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सुमी नाम के ट्विटर हैंडल ने संयुक्त राष्ट्र को टैग करते हुए लिखा है, “यह एक गंभीर युद्ध अपराध है और इसके लिए बीबीसी पर आरोप तय किये जाने चाहिये।” allabtme नामके ट्वीटर यूजर ने कहा कि बीबीसी ने जानबूझकर ऐसा किया है।

गौरतलब है कि पंजशीर में तनावपूर्ण स्थिति है। घाटी में तालिबान और नेशनल रेजिस्‍टेंस फ्रंट (NRF) के बीच जारी जंग अभी भी जारी है। तालिबान का दावा है कि उसने घाटी पर पूरी तरह से अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया है। वहीं, एनआरएफ ने तालिबान के जीत के दावों को नकारा है और कहा है कि इलाके के हर रणनीतिक जगह पर उसके लड़ाके तैनात हैं।

‘जून 2020 के संघर्ष ने बदल दिए भारत-चीन के रिश्‍ते, पटरी पर लाना बड़ी चुनौती’: एस जयशंकर ने ‘क्वाड’ की मजबूती पर दिया जोर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार (6 सितंबर) को ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में जेजी क्रॉफर्ड ओरेशन 2021 में अपने संबोधन के दौरान कहा, ”दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय संबंध एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं।” उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और चीन का नाम लेते हुए कहा कि कई पुराने सिद्धांत अब फेल हो रहे हैं और नई चीजें सामने आ रही हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान में अमेरिका एक मजबूत शक्ति के रूप में स्पष्ट रूप से संघर्ष कर रहा है। इसमें दो राय नहीं है कि आने वाले समय में इंडो-पैसिफिक अंतरराष्‍ट्रीय कूटनीति के मूल में होगा। हालाँकि, पिछले कुछ दशकों में एशिया यूरोप की तुलना में अधिक गतिशील रहा है, लेकिन इसका क्षेत्रीय ढाँचा कहीं अधिक रूढ़िवादी है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्वाड (भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान का संगठन) को मौजूदा माहौल में ज्यादा जरूरी बताया और इसे भी चीन के एक बड़ी शक्ति के तौर पर उभरने से जोड़ कर देखा। विदेश मंत्री ने यह बात भी सामने रखी कि चीन के एक शक्ति के तौर पर बढ़ने से कई देशों पर भारी असर होगा।

क्वाड को विदेश मंत्री ने वैश्विक माहौल में हो रहे बदलाव का ही एक परिणाम के तौर पर चिह्नित किया। उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि एकल शक्ति का दौर खत्म हो गया। द्विपक्षीय संबंधों की अपनी सीमाएँ हैं। बहुपक्षीय संगठन काम नहीं कर पा रहे। जिस तरह के बदलाव का दौर चल रहा है हमें पता नहीं है कि आगे क्या होगा। लेकिन निश्चित तौर पर हिंद-प्रशांत का क्षेत्र इस बदलाव के केंद्र में होगा।

विदेश मंत्री ने भारत-चीन द्व‍िपक्षीय संबंधों पर बात करते हुए दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि साल 1988 में प्रधानमंत्री राजीव गाँधी चीन गए थे, तब उनका फोकस इस बात पर था कि हमारे संबंध बॉर्डर पर शांतिपूर्ण बने रहे। एस जयशंकर ने ये भी कहा कि दोनों देश विभिन्‍न समझौतों के जरिए इस पर आगे भी बढ़े, जिससे दोनों में विश्वास पैदा हुआ था। इसमें कहा गया था कि दोनों ही देश अपनी सेनाओं को सीमा पर नहीं लाएँगे।

विदेश मंत्री ने कहा कि साल 1975 के बाद एक छोटी सी झड़प हुई थी, हालाँकि इस दौरान बॉर्डर पर किसी की जान नहीं गई थी। विदेश मंत्री ने कहा कि जब सेना की बड़ी संख्या में मौजूदगी का हमने विरोध करना शुरू किया तो जून 2020 में बहुत बड़ा संघर्ष हुआ, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। इससे दोनों देशों के रिश्तों में दरार पैदा हो गई। मुझे लगता है कि भारत और चीन के संबंधों को कैसे पटरी पर लाया जाए, ये इस समय की एक बड़ी चुनौती है।

मुख्तार अंसारी की विधानसभा के पास की करोड़ों की संपत्ति जब्त करेगी योगी सरकार, SC ने सुरक्षा याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार बाँदा जेल में बंद बसपा के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी की करोड़ों की अवैध संपत्ति को जब्त करने जा रही है। बताया जा रहा है कि लखनऊ विधानसभा के पास उसकी करोड़ों की जमीन है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2007 में मुख्तार अंसारी ने करोड़ों की संपत्ति के सर्किल रेट छिपाकर मात्र 5 लाख रुपए में बैनामा करा लिया था, जिसे जल्द ही लखनऊ पुलिस द्वारा जब्त किया जाएगा। इससे पहले यूपी सरकार ने अंसारी की कई अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर भी चलाया था।

बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने आज (6 सितंबर) मुख्‍तार अंसारी की पत्नी अफसां अंसारी की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिका में उन्‍होंने जेल में बंद पति की जान को खतरा बताते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश देने की माँग की थी। वहीं, कोर्ट ने अंसारी की पत्नी को इस मामले से संबंधित याचिका हाईकोर्ट में दाखिल करने को कहा है।

मुख्तार अंसारी के साथ उसके गैंग की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को पुलिस ने गैंगस्टर मुकदमे में उसके गैंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस केस में फरार चल रहे मुख्तार अंसारी के करीबी अभियुक्त अनुज कन्नौजिया की संपत्ति को कुर्क किया है। एसपी सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि माफिया मुख्तार गैंग के खिलाफ तरवां थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है, जिसमें उसके अलावा 11 लोग शामिल हैं।

गौरतलब है कि 03 अगस्त 2021 को यूपी सरकार द्वारा कुख्यात माफिया और अपराधी मुख्तार अंसारी से जुड़ी लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपए मूल्य की संपत्ति की कुर्की की गई थी। यह संपत्ति अंसारी की बीवी और उसके सालों के नाम पर थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते एक साल में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी समेत 25 माफियाओं की 11 अरब 28 करोड़ 23 लाख 97 हजार 846 रुपए की संपत्तियाँ जब्त की गई हैं। 

पंजशीर पर लड़ाकू विमानों से बम बरसा रहा है पाक: रेजिस्टेंस फ्रंट प्रमुख अहमद मसूद ने कहा- ‘तालिबान जंगली, खून के आखिरी कतरे तक लड़ेंगे’

नेशनल रेजिस्‍टेंस फ्रंट (NRF) ने कहा है कि पंजशीर को कब्जे में लेने के लिए तालिबान, पाकिस्तान की मदद ले रहा है। तालिबान की मदद के लिए पाकिस्तान अपने वायु सेना की मदद से पंजशीर में बम बरसा रहा है। एनआरएफ के प्रमुख अहमद मसूद ने इसकी पुष्टि की है।

पंजशीर में तनावपूर्ण स्थिति है। घाटी में तालिबान और नेशनल रेजिस्‍टेंस फ्रंट (NRF) के बीच जारी जंग अभी भी जारी है। तालिबान का दावा है कि उसने घाटी पर पूरी तरह से अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया है। वहीं, एनआरएफ ने तालिबान के जीत के दावों को नकारा है और कहा है कि इलाके हर रणनीतिक जगह पर उसके लड़ाके तैनात हैं।

अफगानिस्तान में नेशनल रेजिस्‍टेंस फ्रंट के नेता अहमद मसूद ने कहा कि पाकिस्तानी लड़ाकू जेट पंजशीर में बम गिरा रहे हैं और तालिबान की मदद कर रहे हैं। अपने 19 मिनट के ऑडियो में अहमद मसूद ने तालिबान की मदद में पाकिस्तान द्वारा पंजशीर में बमबारी की बात कही है, जिसमें फहीम और मसूद के परिवार के कई सदस्य मारे गए।

पंजशीर में शहीदों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मसूद ने कहा कि पाकिस्तान ने पंजशीर में सीधे अफगान नागरिकों पर हमला किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे चुपचाप देखता रहा। उन्होंने कहा कि वह अपने खून की आखिरी बूँद तक हार नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा कि तालिबान ‘जंगली’ है और पाकिस्तान की मदद से वह हमला कर रहा है।

मसूद ने कहा, “तालिबान ने साबित कर दिया है कि वह बदला नहीं बदले हैा। तालिबान, अफगान नहीं है। वह बाहरी है और बाहरी लोगों के लिए काम करता है। वह अफगानिस्तान को बाकी दुनिया से अलग रखना चाहता है। सभी अफगानों को इस जंग में शामिल होना चाहिए। जंग अभी जारी है।”

गौरतलब है कि NRF ने तालिबान की जीत का दावा खारिज करते हुए कहा है कि पंजशीर घाटी के महत्वपूर्ण रणनीतिक मोर्चों पर उसके लड़ाके मौजूद हैं। इस बीच पंजशीर के गर्वनर हाउस में तोड़फोड़ किए जाने की खबरें भी हैं। इससे पहले भी तालिबान ने पंजशीर घाटी को फतह कर लेने का दावा किया था, जिसे पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह और नॉर्दन एलायंस के नायक अहमद मसूद ने खारिज कर दिया था। वहीं, पंजशीर गवर्नर के कार्यालय पर तालिबानी झंडा फहराने की तस्वीर सामने आई है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि अफगानिस्तान के पंजशीर प्रांत को भी पूरी तरह जीत लिया गया है।

‘अल्लाह-हू-अकबर, नारा-ए-तकबीर के नारे के साथ अमेरिकियों को मारने की माँग’: शिक्षा के बाद अब ‘तालिबान’ में कट्टरपंथी खातूनों का मार्च

तालिबानियों की हुकूमत में ‘समान अधिकारों’ की माँग को लेकर अफगानिस्तान की सड़कों पर सोमवार (सितंबर 6, 2021) को प्रदर्शन करने उतरीं महिलाओं पर आंसू गैस के गोले छोड़ कर उनको शांत कराने की कोशिश हुई। अब इस प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

ये प्रदर्शन मजार-ए-शरीफ के पास हो रहा है।

तालिबानी कोशिश कर रहे हैं कि पत्रकारों को इसकी कवरेज करने से रोक सकें।

महिलाओं की माँग है कि उन्हें शिक्षा और रोजगार के अलावा मौलिक अधिकारों की भी गारंटी दी जाए।

सामने आई तस्वीरों में देख सकते हैं कि इन प्रदर्शनों में ज्यादा महिलाएँ शामिल नहीं हैं। जाहिर है कि तालिबान के विरुद्ध आवाज उठाने की भावना अभी सबमें नहीं जगी है।

इस बीच कुछ अन्य बुर्काधारी महिलाएँ भी एक काउंटर प्रोटेस्ट में सड़क पर मार्च करती नजर आईं। ये महिलाएँ तालिबान के समर्थन में नारेबाजी कर रही थीं और तेज-तेज अल्लाह-हू-अकबर, नारा-ए-तकबीर चिल्ला रही थीं। इनकी माँग थी कि अमेरिका और उनके नौकरों को मौत की सजा दी जाए।

बता दें कि कट्टरपंथी महिलाओं का यह प्रदर्शन उस समय सामने आया है जब अफगानी महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा हर जगह हो रही है। हाल में खबर आई थी कि कैसे एक महिला पुलिस कर्मी को जो कि 8 माह गर्भवती भी थी उसे घर में घुस कर गोली मार दी गई, वो भी उसके शौहर और बच्चों के सामने।

‘आधार कार्ड से हो शराब की बिक्री…न मिले फूड सब्सिडी’: रतन टाटा के नाम पर वायरल संदेश का सच

सोशल मीडिया के दौर में किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर फैलाई जा रही हर खबर हकीकत हो ये जरूरी नहीं होता। हाल में 83 वर्षीय बिजमेसमैन रतन टाटा का नाम इस्तेमाल करके ऐसी ही फेक न्यूज फैलाई गई। एक मैसेज शेयर हुआ जिसमें लिखा था कि शराब खरीददारों को फूड सब्सिडी नहीं दी जानी चाहिए, ऐसा रतना टाटा ने कहा है, जबकि सच्चाई ये थी कि रतन टाटा ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं।

वायरल होते संदेश में लिखा था, “आधार कार्ड से शराब की बिक्री होनी चाहिए। शराब खरीदने वालों के लिए सरकारी फूड सब्सिडी बंद की जानी चाहिए, क्योंकि जिनके पास शराब खरीदने के लिए पैसे हैं, वे खाना भी जरूर खरीद सकते हैं।”

रतन टाटा ने सोशल मीडिया पर बताई वायरल मैसेज की सच्चाई

अब वैसे तो इस फेक पोस्ट में रतन टाटा के नाम की स्पेलिंग (Rathan Tata) भी गलत लिखी थी, जिससे कुछ लोग शायद नोटिस करते कि ये पोस्ट फेक है। मगर, कई लोग ऐसे भी होते हैं जो पोस्ट को सरसरी निगाह से देख कर फॉर्वर्ड कर देते हैं और उसकी प्रमाणिकता जाँचना जरूरी नहीं समझते। शायद यही वजह है कि अपने नाम से फैलाई जा रही फेक न्यूज का भंडाफोड़ स्वयं रतन टाटा ने किया।

उन्होंने पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए उसे फेक न्यूज बताया और लिखा, “मैंने ऐसा कभी नहीं कहा, धन्यवाद।” उल्लेखनीय है कि पिछले साल भी रतन टाटा ने इसी तरह अपने नाम पर फैलाई जा रही फेक न्यूज का भंडाफोड़ा था। उस समय उन्होंने लोगों से किसी भी मैसेज को आगे फॉर्वर्ड करने से पहले चेक करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था, “अगर मुझे कुछ कहना होगा तो मैं अपने आधिकारिक चैनल पर कहूँगा।”

महापंचायत में पहुँचे ‘किसानों’ ने CAA-NRC-NPR को बताया ‘काला कृषि कानून’, लोगों को समझ आया अल्लाह-हू-अकबर’ कनेक्शन: वीडियो

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसान यूनियन ने रविवार (5 सितंबर) को एक ‘महापंचायत’ आयोजित की, जिसमें कथित तौर पर लाखों किसान प्रदर्शनकारियों ने अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाए और केंद्र सरकार का विरोध किया। वहीं, महापंचायत में मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने आए किसानों में से कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें कृषि कानूनों के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी। वे नहीं जानते थे कि तीन नए कृषि कानून कौन से हैं और उन्हें क्यों लागू किया गया है।

एक ऑनलाइन समाचार चैनल हिन्दुस्तान 9 ने महापंचायत की एक ग्राउंड रिपोर्ट अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर की है। हिन्दुस्तान 9 के पत्रकार रोहित शर्मा ने महापंचायत में शामिल किसान प्रदर्शनकारियों से कुछ सवाल पूछे। मोहम्मद दानिश नाम के एक शख्स ने बताया कि वह पास के एक गाँव के किसानों के समूह के साथ प्रदर्शन स्थल पर आया है।

दानिश ने कहा, “हम भारत सरकार द्वारा लाए गए तीन काले कानूनों का विरोध करने के उद्देश्य से यहाँ आए हैं। राकेश और नरेश टिकैत के नेतृत्व में गाजीपुर बॉर्डर पर हम पिछले नौ महीने से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सरकार को इन काले कानूनों को निरस्त करना होगा, जो किसानों के हित में नहीं हैं।”

‘तीन काले कानून हैं सीएए, एनआरसी और एनपीए’ किसान प्रदर्शनकारी का दावा

रोहित ने सवाल किया कि क्या उन्हें काले कानूनों के बारे में पता है। इस पर दानिश ने कहा, “हाँ, मुझे पता है। एक है एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर), एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर) और एक और है, जिसे मैं भूल गया हूँ।” रोहित ने पूछा कि क्या आप सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के बारे में बात कर रहे हैं, जिस पर दानिश ने कहा, “हाँ, हाँ! वही वाला।” रोहित ने पूछा, “तो आप इन तीन कानूनों के खिलाफ महापंचायत में भाग ले रहे हैं?” इस पर दानिश ने हाँ में जवाब दिया।

‘देश को बेचने वाले इन गुजराती बनियों को हम बाहर निकालेंगे’

बातचीत में शामिल हुए एक अन्य प्रदर्शनकारी कथित किसान ने कहा कि भाजपा को देश के विकास के लिए सत्ता में लाया गया था, लेकिन उसने कुछ नहीं किया। उसने आरोप लगाया, “वे सिर्फ हिंदू और मुस्लिम करते हैं।” उसने आगे कहा, ”मैं आपको बता रहा हूँ कि ये विदेशी आक्रमणकारी हैं। हम उन्हें वैसे ही बाहर निकालेंगे जैसे हमने अंग्रेजों को बाहर निकाला था। ये गुजराती बनिया हैं, जो देश को बेच रहे हैं।”

खुद को शान मोहम्मद बताने वाले एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि सरकार की वजह से उनके पास खाने को कुछ नहीं है। वहाँ, एक और प्रदर्शनकारी था जो हाथ में गन्ना पकड़े हुए था उसने कहा, “हमारा खाना तिजोरियों में बंद कर दिया गया है। हम अपने भोजन को फिर से पाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर हम सरकार बनाना जानते हैं तो उन्हें सत्ता से बाहर भी कर सकते हैं। दीपक नाम के एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम मोदी को जड़ से खत्म कर देंगे।”

हाल ही में एबीपी न्यूज की पत्रकार रुबिका लियाकत ने एक इंटरव्यू के दौरान राकेश टिकैत से सवाल किया था कि उनके हिसाब से कृषि कानून को लेकर कौन सी समस्या आड़े आ रही है। टिकैत, जो कुछ मिनट पहले इसे लेकर आत्मविश्वास से लबरेज थे, वह इस पर जबाव नहीं दे पाए। तीन कृषि कानूनों को ‘काले कानून’ कहने वाले टिकैत ने रुबिका के सवाल को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद उन्हें अपनी बातों को घुमाते रहे और एंकर पर निजी हमले करते रहे।

मुज़फ्फरनगर किसान महापंचायत में शामिल ‘भाड़े के किसान’ जब “CAA-NRC-NPR” को तीन काले कानून बता रहे हैं, तब अब आप समझ ही गए होंगे कि किसान आंदोलन में “अल्लाह-हू-अकबर” के नारे क्यों लग रहे थे। अफसोस की बात है कि दोनों विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली में दंगे और हिंसा हुई। सीएए के विरोध के कारण फरवरी 2020 में हिंदू विरोधी दंगे हुए। किसान विरोध प्रदर्शनों के कारण 2021 में गणतंत्र दिवस पर दंगे हुए।