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एक साथ दिखे ओवैसी, राजभर और चंद्रशेखर तो सपा में शामिल हुए मुख्तार अंसारी के भाई और चौधरी: जानिए UP में इसके सियासी मायने

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मी काफी बढ़ गई है। हर पार्टी अपने सियासी समीकरण साधने की तैयारी में जुटी हुई है। इस बार AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी यूपी चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने वाले हैं। वे ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी संग मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। 

ओवैसी की चंद्रशेखर से मुलाकात

लेकिन अब कहा जा रहा है कि ओवैसी के इस चुनावी गठबंधन का विस्तार हो सकता है। वे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद संग हाथ मिला सकते हैं। दलित वोटों को ध्यान में रखते हुए ओवैसी ये बड़ा फैसला ले सकते हैं। ये अटकलों का दौर इसलिए शुरू हुआ है क्योंकि हाल ही में असदुद्दीन ओवैसी की चंद्रशेखर से अहम मुलाकात हुई है। उस मुलाकात में ओम प्रकाश राजभर भी शामिल हुए। शुक्रवार (अगस्त 27, 2021) को दोनों नेताओं से मुलाकात के बाद ओवैसी ने मीटिंग की फोटो अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर की। इस तस्वीर के आते ही तीनों दलों के एकसाथ आने की अटकलें लगनी शुरू हो गई। 

गठबंधन या फिर कोई और रणनीति?

अब किन मुद्दों पर चर्चा हुई, किन बातों पर सहमति बनी, ये सब साफ नहीं हुआ है। लेकिन क्योंकि चुनावी मौसम में AIMIM चीफ ने ये मुलाकात की है, ऐसे में इसके अलग ही सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। वैसे भी जब से बसपा प्रमुख मायावती द्वारा चंद्रशेखर को नजरअंदाज कर दिया गया है, अखिलेश ने भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है, ऐसे में भीम आर्मी को भी यूपी में किसी का साथ चाहिए। उसी साथ को पाने के लिए अगर चंद्रशेखर, असदुद्दीन ओवैसी संग कोई करार करें तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।

इस गठबंधन के सहारे दलित और पिछड़े वोट बैंक के साथ मुस्लिम वोट को भी अपने पक्ष में किया जा सकता है। अगर ये तीनों दल एक साथ आते हैं तो विधानसभा चुनाव में कई पार्टियों के लिए राजनीतिक समीकरण बदल जाएँगे। यादव, मुस्लिम और पिछड़े वोट बैंक के सहारे लखनऊ पहुँचने की तैयारी कर रहे अखिलेश यादव पर भी इस संभावित गठबंधन का प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही दलित-ब्राह्मण वोट बैंक के जरिए सत्ता की चाभी पाने का सपना देख रही मायावती की पार्टी बसपा के लिए राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।

हालाँकि, आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कई बड़ी पार्टियाँ बड़े दलों के साथ गठबंधन करने के बजाय छोटी पार्टियों को साथ लाने की कोशिश कर रही हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसी को ध्यान में रखते हुए जनवादी पार्टी और महान दल जैसी छोटी पार्टियों के साथ चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। अखिलेश कई और छोटे दलों को भी साथ लाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

मुख्तार के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी सपा में शामिल

लखनऊ में शनिवार (अगस्त 28, 2021) को समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय में माफिया डॉन और बहुजन समाज पार्टी के विधायक मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी अपने बेटे के साथ पार्टी की सदस्यता ले ली है। इसके साथ ही अम्बिका चौधरी ने भी बेटे बलिया के जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद चौधरी से साथ घर वापसी की। मुलायम सिंह यादव तथा अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे अम्बिका चौधरी लोकसभा चुनाव के दौरान बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए थे। अब वह फिर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं।

सिबगतुल्लाह अंसारी के साथ उनके बेटे मन्नू अंसारी को अखिलेश यादव ने पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाई। मुहम्मदाबाद विधानसभा से दो बार विधायक रहे चुके मुख्तार के बड़े भाई सिबगतुल्लाह 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की अलका राय से हारे थे। कौमी एकता दल का गठन करने वाले सिबगतुल्लाह अब समाजवादी पार्टी का दामन थाम रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हेंं या उनके बेट को 2022 के विधानसभा चुनाव में टिकट देगी।

राज्य में सत्ताधारी भाजपा भी छोटे दलों की नाराजगी दूर कर गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है। पार्टी इस बार भी अपना दल, निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों के साथ ही चुनाव लड़ने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव में करीब 32 छोटी पार्टियों ने चुनाव लड़ा था। जिसमें उनके प्रत्याशियों को काफी अच्छी संख्या में वोट मिले थे। इसलिए इस बार के चुनाव में सभी पार्टियाँ अपनी दावेदारी मजबूती से पेश करने के लिए छोटे दलों को साथ लाने की कोशिश कर रही हैं।

कौन है ‘जार्वो 69’, जो भारत-इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट सीरीज के दौरान दो बार पिच पर आकर आए चर्चा में: ‘Trollstation’ पर ऐसे कई वीडियो

भारत और इंग्लैंड के बीच तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन यानी शुक्रवार (27 अगस्त) को सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा के आउट होने के बाद क्रिकेटिंग गियर पहने ‘जार्वो 69’ सबको चकमा देते हुए हेडिंग्ले क्रिकेट मैदान में घुस गया। हालाँकि, उसे तुरंत सुरक्षाकर्मियों ने मैदान से बाहर निकाल दिया। इससे पहले वह दोनों टीमों के बीच दूसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन के खेल के दौरान लार्ड्स मैदान में घुसा था। दरअसल, ‘जार्वो 69’ कोई भारतीय क्रिकेटर नहीं है और ना ही उसका क्रिकेट से दूर दूर तक कोई नाता है। बल्कि वह तो एक Serial Prankster है, जो इंग्लैंड के केंट काउंटी के ग्रेवेसेंड शहर का रहने वाला है।

शायद ही कोई ‘डेनियल जार्विस’ को उसके असली नाम से जानता होगा। वह दूसरे टेस्ट मैच के दौरान एक इंडियन फिल्डर के रूप में लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान में घुसने के बाद सुर्खियों में आया है। उनकी भारतीय जर्सी का नाम ‘जार्वो 69’ था। वह दोनों टीमों के बीच दूसरे टेस्ट के चौथे दिन के खेल के दौरान लार्ड्स मैदान में घुसा था और भारतीय टीम के लिए क्षेत्ररक्षकों को सजाने जैसा नाटक कर रहा था। उसकी इस हरकत पर मोहम्मद सिराज और रविंद्र जडेजा भी अपनी हँसी नहीं रोक पाए थे। एक श्वेत क्रिकेट प्रशंसक के लिए न केवल पिच पर घुसना, बल्कि क्षेत्ररक्षकों की तरह दिखने का नाटक करना बेहद चौंकाने वाला दृश्य था। पहचान में आने के बाद जार्विस को सुरक्षाकर्मियों ने मैदान से तुरंत हटाया।

एक ट्वीट में प्रैंकस्टार ने पुष्टि की थी, “हाँ, मैं जार्वो हूँ, जो पिच पर गया था। मुझे भारत के लिए खेलने वाला पहला श्वेत व्यक्ति होने पर गर्व है।” इस दौरान डेनियल जार्विस भारतीय जर्सी के साथ पोज देते नजर आए।

डेनियल जार्विस के ट्वीट का स्क्रीनग्रैब

पिच पर दूसरी बार घुसे

शुक्रवार (27 अगस्त) को वह एक बार फिर भारतीय क्रिकेटर बनकर पोज दे रहे थे। इस बार वह एक हेलमेट, पैड, मास्क और एक बल्ले के साथ थे। जार्विस भीड़ के बीच से निकल आए थे। इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें स्टेडियम से बाहर निकाला। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें दिखाया गया है कि ‘जार्वो 69’ किस तरह से स्टंट करने में कामयाब रहा।

बाद में सीरियल प्रैंकस्टार ने ट्विटर पर कहा, “हाँ, यह मैं फिर से उर्फ जार्वो उर्फ जार्वो 69 था। इंग्लैंड और भारत के बीच टेस्ट क्रिकेट मैच का पूरा वीडियो बहुत जल्द मेरे यूट्यूब चैनल पर होगा।”

डेनियल जार्विस के ट्वीट का स्क्रीनग्रैब

‘जार्वो 69’ और सुरक्षा प्रोटोकॉल में चूक

डेनियल जार्विस की हरकतें यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें प्रैंकस्टार को क्रिकेट के मैदान के बीच में ‘Trespass‘ नाम का एक तंबू लगाते हुए देखा गया था। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहाँ से भी हटा दिया। हालाँकि, ‘जार्वो 69’ बिना किसी गलत इरादे के ऐसे स्टंट करते हैं, लेकिन ऐसा करके उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मैचों में कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल की खामियों के बारे में सवाल उठाए हैं। पिच पर क्रिकेटरों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है।

(Video Courtesy: Youtube/BMWJarvo)

शुक्रवार को दूसरी बार पिच पर घुसने के बाद क्रिकेटर आरएस अश्विन ने ‘जार्विस’ को अपने ऑन-फील्ड मज़ाक को दोहराने से रोकने के लिए कहा। ट्वीट कर स्पिनर ने कमेंट भी किया।

आरएस अश्विन के ट्वीट का स्क्रीनग्रैब

इससे पहले भी डेनियल जार्विस कई खेल आयोजनों के दौरान जबरन घुस चुके हैं। 2015 में डाइविंग वर्ल्ड सीरीज़ के दौरान, उन्होंने लंदन के एक्वेटिक्स सेंटर में सुरक्षा घेरे को पार कर उसमें घुस गए थे। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें जार्विस को पोल में जाने से पहले अपने कपड़े उतारते हुए देखा गया था। घटना का वीडियो मूल रूप से उनके ‘Trollstation’ नाम के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया गया था। उस समय जार्विस की उम्र 26 साल थी।

ऊं… ऊं… अपनी ही दुल्हन से थप्पड़ खाकर भी सिर्फ ऊं… ऊं… ही बोल पाया… क्योंकि गुटखा चबा रहा था, वीडियो वायरल

इन दिनों सोशल मीडिया पर शादी के वीडियो का जैसे ट्रेंड सा चल गया है। आए दिन शादी के मजेदार और हैरान कर देने वाले वीडियो वायरल होते रहते हैं। कभी स्टेज से दुल्हन गिर जाती है, तो कभी दुल्हन कैमरामैन को थप्पड़ मारती है। ऐसा ही एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक दुल्हन, दूल्हे को कई थप्पड़ मारते हुए नजर आ रही है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 

वीडियो देखने के बाद आप भी अपनी हँसी रोक नहीं पाएँगे। दरअसल, दुल्हन को पता चलता है कि दूल्हा गुटखा खा रहा है। देखते ही वो आग-बबूला हो जाती है और दूल्हे को थप्पड़ मारकर गुटखा थूककर आने को कहती है।

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर official_niranjanm87 नाम के यूजर ने शेयर किया है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि दुल्हा-दुल्हन बैठे हैं और दुल्हन काफी गुस्से में नजर आ रही है। पूरा मामला ये है कि एक शादी में दूल्हा गुटखा खाकर मंडप में बैठा रहता है और ये बात दुल्हन को पसंद नहीं आती है। इस दौरान दुल्हन का पारा चढ़ जाता है। वीडियो में आसानी से देखा जा सकता है कि दुल्हन, दूल्हे की खबर लेती नजर आ रही है, क्योंकि भाई साहब मंडप में बैठकर गुटखा चबा रहे थे। 

इसके बाद दुल्हन अचानक पंडित जी से रुकने के लिए कहती है और पास ही बैठे शख्स को गुस्से में थप्पड़ मार देती है। इतने में दूल्हे के मुँह से एक शब्द नहीं फूटता, वो बस ऊं… ऊं… करता है। दुल्हन उसे भी एक जोर से लगाती है और चिल्लाकर बोलती है कि मुँह में गुटखा रखे हो, थूको इसे। इसके बाद दुल्हा खड़ा होता हो और गुटखा थूक देता है। इतना ही नहीं, पास बैठे एक शख्स को भी दुल्हन गुस्से में कई थप्पड़ जड़ देती है।

ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो के देखने के बाद तो किसी को भी ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए। गुटखा स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है और ये हमारे शरीर को नुकसान पहुँचाता है। इस वजह से सरकार भी लोगों को गुटखा न खाने की सलाह देती है। वीडियो पर ढेरों कमेंट्स कर रहे हैं और कह रहे हैं कि दुल्हन ने दूल्हे को बिल्कुल सही सबक सिखाया है।  

शक के चलते पति बना हैवान, सुई-धागे से सिल दिया पत्नी का प्राइवेट पार्ट: मध्य प्रदेश में FIR दर्ज

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के एक गाँव से बेहद अजीबोगरीब घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि शक के चलते 64 वर्षीय हैवान पति ने अपनी 55 वर्षीय पत्नी के प्राइवेट पार्ट को सुई-धागे से सिल दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेक्सजेनेरियन को शक था कि उसकी पत्नी का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चल रहा है।

इस घटना के बाद 55 वर्षीय महिला ने शुक्रवार (27 अगस्त) को एक महिला पुलिस अधिकारी से संपर्क किया और अपने पति के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अमानवीय कृत्य को अंजाम देने वाले ​शख्स के खिलाफ मामला दर्ज ​कर शिकायतकर्ता को एक सरकारी अस्पताल भेजा, जहाँ उसके टाँके हटा दिए गए हैं।

बताया जा रहा है कि आरोपित ने महिला के प्राइवेट पार्ट को घर में इस्तेमाल किए जाने वाले सुई-धागे से सिला था। इससे उसे बेहद पीड़ा से गुजरना पड़ा। उसके प्राइवेट पार्ट में चोटें भी आई हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारी ने सुई-धागे को जब्त कर लिया है।

टीओआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने 64 वर्षीय आरोपित के खिलाफ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न सहित संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एक अधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता ने पुलिस से अनुरोध किया है कि वे उसके पति पर कठोर कार्रवाई न करें। उन्होंने बताया कि इस दंपति के चार बच्चे और पोते-पोतियाँ भी हैं।

एडिशनल एसपी अनिल सोनकर ने बताया कि इस मामले में कार्रवाई करते हुए पीड़िता का मेडिकल चेकअप करवाया गया। उसके बाद ही एफआईआर दर्ज की गई है। फिलहाल, आरोपित अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।

BJP नेता के साथ लिव-इन में रह रहीं ‘सिंगल मदर’ नुसरत जहाँ, नहीं करेंगी अपने बच्चे के पिता के नाम का खुलासा: रिपोर्ट

बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री व पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद नुसरत जहाँ ने गुरुवार (26 अगस्त, 2021) को अपने बच्चे को जन्म दिया। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पश्चिम बंगाल के बशीरहाट से सांसद नुसरत जहाँ 2020 से ही अभिनेता यश दासगुप्ता के साथ लाइव-इन में रह रही हैं। यश दासगुप्ता भाजपा के नेता भी हैं। नुसरत जहाँ ने अपने बच्चे के पिता का नाम बताने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद कोलकाता की ‘सिंगल मदर्स’ उनके समर्थन में उतरी हैं।

2003 में ही अपने पति से तलाक ले चुकीं विसुअल आर्टिस्ट एलेना बनिक ने कहा कि वो रिलेशनशिप में थीं, लेकिन शादी नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा कि 2010 में उनका गर्भपात हो गया था, जब पहली बार वो गर्भवती बनी थीं। उन्होंने बताया कि वो अपनी बेटी की सिंगल मदर हैं और उनकी बेटी के अलावा किसी को नहीं पता है कि उसका पिता कौन है। उन्होंने दावा किया कि पिता का नाम न होने के कारण उसे स्कूल में दाखिला कराने में परेशानी हुई।

फिल्म निर्देशक अनिंदिता सर्बाधिकारी IVF तकनीक के जरिए 8 साल पहले माँ बनी थीं। वो भी संगल मदर हैं। उन्होंने कहा कि एक माँ के पास अधिकारी होता है कि वो अपने बच्चे के पिता का नाम सार्वजनिक करना चाहती हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि मीडिया की लाइमलाइट में रह कर ऐसा करना कठिन है। उन्होंने कहा कि वो ऐसी कई माँओं को जानती हैं, जो सिंगल हैं और अब समाज उन्हें स्वीकार भी कर रहा है।

इसी तरह एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर सावन सेन भी 2015 में माँ बनीं। उन्होंने कहा कि खुद को बोल्ड और बहादुर साबित करने के लिए उन्होंने सिंगल मदर बनने का फैसला लिया। सांसद व अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती, फिल्म निर्माता व विधायक राज चक्रवर्ती, अभिनेत्री तनुश्री, वरिष्ठ बंगाली अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी और अभिनेत्री प्रियंका सरकार समेत कई हस्तियों ने नुसरत जहाँ को माँ बनने की बधाई दी है।

इधर लोगों की नजरें नुसरत जहाँ के पूर्व पति निखिल जैन के एक इंस्टाग्राम पोस्ट की तरफ भी गई, जिसमें उन्होंने लिखा है कि कर्म ही धर्म है। जुलाई 2019 में दोनों ने तुर्की के बोद्रोम में शादी की थी। बाद में नुसरत जहाँ ने कानून की नज़र में इस शादी को अवैध बताते हुए निखिल जैन से नाता तोड़ लिया। बता दें कि अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी को आदर्श मानने वाली नुसरत जहाँ ने कहा था कि वो कभी योग करना नहीं भूलती हैं।

नुसरत के पूर्व पति निखिल ने कहा था कि उनकी और नुसरत की शादी टूट गई है और वे छह महीने से ज्यादा समय से साथ नहीं रह रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह से ये बच्चा उनका नहीं है। निखिल ने ये भी कहा था कि उनके और नुसरत के बीच कोई संपर्क नहीं है। नुसरत और यश दिसंबर में अजमेर शरीफ गए थे और उन्होंने नया साल साथ में राजस्थान में मनाया था। इसके अलावा, दोनों एक साथ दक्षिणेश्वर मंदिर भी गए थे।

1 दिन में 1 करोड़+ लोगों को कोरोना वैक्सीन: भारत ने रचा इतिहास, लगभग 30 लाख लोगों के साथ UP टॉप पर

कोरोना महामारी के खिलाफ जारी जंग में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत ने शुक्रवार (अगस्त 27, 2021) को रात 10 बजे तक COVID-19 के खिलाफ 1 करोड़ से अधिक टीके की खुराक देशवासियों को लगाई। यह पहला मौका था, जब देश में एक ही दिन (24 घंटे) में इतनी वैक्सीन लगाई जा सकी हो। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने 50 फीसद वयस्क आबादी को पहली खुराक से टीका लगाने के लिए देश को बधाई दी।

सौम्या स्वामीनाथन ने ट्वीट किया, “भारत ने वयस्क आबादी का 50% कवरेज यानी 50 फीसद वयस्क को (कम से कम एक खुराक) लगा दी है। अब तक देश में 620 मिलियन खुराक दी जा चुकी है (देश में कोविड-19 टीकाकरण का दायरा 62,09,43,580 डोज पर पहुँच गया है), पिछले दिन 10 मिलियन (1 करोड़) लगाई गई। इसमें शामिल हजारों कर्मियों को बधाई। सार्वजनिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत निवारक उपायों के साथ टीकाकरण सभी की रक्षा करेगा।”

भारत में टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के प्रमुख डॉ एनके अरोड़ा ने शुक्रवार को एक ही दिन में एक करोड़ लोगों को टीका लगाए जाने पर कहा कि यह भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली के लिए गर्व की बात है।

वहीं, एक दिन में 1 करोड़ लोगों के टीकाकरण पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, “रिकॉर्ड टीकाकरण संख्या आज! 1 करोड़ को पार करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। टीका लगवाने वालों और टीकाकरण अभियान को सफल बनाने वालों को बधाई।”

उत्तर प्रदेश पूरे देश में अव्वल

टीका लगाने में उत्तर प्रदेश पूरे देश में पहले स्थान पर रहा। राज्य में शुक्रवार को सबसे ज्यादा 30 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन लगी है। लखनऊ में सबसे ज्यादा 89000 लोगों को टीके की डोज लगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई देते हुए ट्वीट किया, “उत्तर प्रदेश में कल 30 लाख से अधिक कोरोना वैक्सीन की डोज लगी है। यह आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन, उत्तर प्रदेश सरकार के कुशल प्रबंधन, कोरोना वाॅरियर्स की प्रतिबद्धता तथा समर्पित स्वास्थ्य कर्मियों के सेवाभाव का प्रतिफल है। आप लोग भी अपनी बारी आने पर ‘टीका जीत का’ अवश्य लगवाएँ।”

वहीं देश में एक करोड़ टीका लगने पर बधाई देते हुए उन्होंने लिखा, “आदरणीय प्रधानमंत्री जी के कुशल मार्गदर्शन में कल देश में एक करोड़ से अधिक कोविड वैक्सीन की डोज लगी है। यह कीर्तिमान ‘नए भारत’ की सामर्थ्य व संकल्प शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है। यह उपलब्धि कोरोना वॉरियर्स व स्वास्थ्य कर्मियों की प्रतिबद्धता तथा अनुशासित जनसहयोग को समर्पित है।”

बता दें कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में इस महीने सबसे ज्यादा टीकाकरण हुआ है। इस महीने अब तक उत्तर प्रदेश ने लगभग 2.15 करोड़ खुराकें दी हैं, मध्य प्रदेश ने इस महीने 1.3 करोड़ खुराक दी है जबकि महाराष्ट्र ने अगस्त में अब तक लगभग 1.1 करोड़ खुराक दी है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों ने इस महीने दो-दो दिन टीकाकरण के लिए विशेष अभियान चलाए हैं, जिससे डोज की संख्या में काफी वृद्धि हुई है।

काबुल बम ब्लास्ट का केरल कनेक्शन: ISKP में शामिल वहाँ के 14 आतंकी, तुर्कमेनिस्तान दूतावास ब्लास्ट वाली साजिश नाकाम

अफगानिस्तान में आतंक मचा हुआ है और इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रांत (ISKP) के आतंकियों ने काबुल को दहला कर रखा हुआ है। काबुल एयरपोर्ट पर हुए आत्मघाती हमले में मरने वालों का आँकड़ा 200 पार कर गया है, जिनमें 13 अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं। इन सबके बीच खुलासा हुआ है कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रांत यानि आईएसकेपी में 14 आतंकी केरल के रहने वाले हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ये 14 आतंकी पहले राजधानी काबुल के बगराम जेल में बंद थे, लेकिन काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद इन्हें जेल से रिहा कर दिया गया और ये फिर से इस्लामिक आतंकी संगठन आईएसकेपी में शामिल हो गए। बगराम जेल से तालिबान द्वारा आजाद किए जाने के बाद कम से कम 14 केरल के रहने वाले इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रांत की तरफ से काबुल में बड़े विस्फोट को अंजाम देने की साजिश में लगे हुए हैं। 

वहीं, रिपोर्ट है कि काबुल हमले के बाद दो पाकिस्तानी आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें कहा गया कि 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर हमला करने के साथ साथ तुर्कमेनिस्तान दूतावास के बाहर भी बहुत बड़ा धमाका करने की प्लानिंग थी, जिसे नाकाम किया गया है। 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर धमाका होने के बाद इन पाकिस्तानी नागरिकों से IED बरामद हुआ था।

अफगानिस्तान से आने वाली रिपोर्टों के मुताबिक, राजधानी काबुल हक्कानी नेटवर्क के नियंत्रण में है। जादरान पश्तून पारंपरिक रूप से पाकिस्तान की सीमा से लगे अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में रहते हैं और ये पक्ष जलालाबाद-काबुल पर अपना काफी प्रभाव रखता है। आपको बता दें कि आईएसकेपी नंगरहार प्रांत में भी सक्रिय है और अतीत में हक्कानी नेटवर्क के साथ काम कर चुका है। ऐसी रिपोर्ट है कि बगराम जेल से रिहा होने के बाद इन 14 आतंकियों में से एक ने केरल स्थिति अपने घर से संपर्क किया है। जबकि बाकी के 13 आतंकी अभी भी काबुल में आईएसकेपी आतंकवादी संगठन के साथ फरार हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में इस्लामिक स्टेट ऑफ सीरिया और लेवंत के मोसुल पर कब्जा करने के बाद केरल के मलप्पुरम, कासरगोड और कन्नूर जिलों के रहने वाले 14 आतंकी इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के बाद भारत से भाग गए थे। इसमें से कुछ आतंकियों के परिवार आईएसकेपी के तहत बसने के लिए अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में आ गए। जबकि भारत इस बात से चिंतित है कि तालिबान और उनके आका अफगानिस्तान में आतंकवादी कृत्यों में लिप्त होकर इन कट्टरपंथी केरलवासियों का उपयोग भारतीय प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए कर सकते हैं। 

हिंदुस्तान टाइम्स ने दावा किया है कि अफगानिस्तान से आ रही विश्वसनीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्कमेनिस्तान एबेंसी के बाहर विस्फोट करने की कोशिश कर रहे दो पाकिस्तानी आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। जाहिर है, तालिबान ने चुप्पी साध रखी है। लेकिन खुफिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि 26 अगस्त को काबुल हवाईअड्डा विस्फोट के तुरंत बाद इन पाकिस्तानी नागरिकों के पास से एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण बरामद किया गया था। 

‘तालिबान का नाम लेकर भारत के मुस्लिमों को बदनाम किया जा रहा’: IPS से नेता बने शफाकत अली वटाली

जहाँ एक तरफ अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर जबरन कब्ज़ा करते हुए तालिबान ने मुल्क की सत्ता हथिया ली है और शरीयत के हिसाब से शासन चलाना शुरू कर दिया है, भारत के कुछ मुस्लिम नेता उसकी निंदा की जगह तारीफ़ करने में लगे हुए हैं। इसमें नया नाम ‘जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस’ के नेता शफाकत अली वटाली का जुड़ा है। अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है, लेकिन उसे लेकर कुछ नहीं कहा जा रहा।

शफाकत अली वटाली ने ट्विटर पर लिखा, “भारत की सांप्रदायिक ताकतें यहाँ की मीडिया व सोशल मीडिया के माध्यम से तालिबान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ISI, ISIS, अलकायदा इत्यादि का नाम लेकर भारतीय मुस्लिमों को बदनाम कर रहे हैं। ऐसा कर के वो हिन्दुओं के बीच एक असुरक्षा की भावना पैदा कर रहे हैं। साथ ही राष्ट्र के असल मुद्दों से ध्यान भटका कर चुनाव जीतने के लिए साम्प्रदायिक घृणा के माहौल के निर्माण में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।”

एक अन्य ट्वीट में भी उन्होंने तालिबान के अलावा सब को दोष दे दिया, लेकिन तालिबान के विरोध में एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने अफगानिस्तान के पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह से पूछा कि अमेरिका द्वारा प्रशिक्षित किए गए अफगानिस्तान के 3 लाख सैनिकों का क्या हुआ? साथ ही उन्होंने ये भी पूछा कि राष्ट्रपति अशरफ गनी कहाँ हैं? उन्होंने अफगान नेताओं व अमेरिका को ‘निर्दोष नागरिकों के कत्लेआम’ के लिए जिम्मेदार ठहराया।

इसी तरह वामपंथी पार्टी CPI(M) ने भी बयान जारी किया था कि अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के कब्जे का इस्तेमाल भाजपा इस्लामोफोबिया फ़ैलाने के लिए किया जा रहा है। उसने ‘हिंदुत्व ताकतों’ की भी आलोचना की थी। उसने मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा बढ़ने का दावा करते हुए कहा था कि ‘कुछ मौलानाओं द्वारा तालिबान के समर्थन’ में दिए गए बयानों का इस्तेमाल कर के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे नेता बयान दे रहे हैं।

जहाँ तक वटाली की बात है, वो राजनीति में आने से पहले IGP के पद पर तैनात थे। हाल ही में जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने भी केंद्र सरकार को अफगानिस्तान जैसा हाल करने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था, “अमेरिका को देखो, अफगानिस्तान से बोरिया-बिस्तर बाँध कर भागने पर मजबूर हो गया। इसलिए, हम कश्मीरियों की परीक्षा मत लो।” महबूबा का कहना था कि कश्मीरी बड़े बहादुर औऱ सहनशील हैं, लेकिन उनके सहनशीलता का बाँध टूटा तो सरकार हार जाएगी।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के 7 साल, बदला गरीबों का जीवन: कुल जमा राशि 5.7 गुना, खातों में 2.5 गुना ज्यादा पैसा

एक समय था जब बैंक खाता होना गरीब लोगों के लिए विलासिता का प्रतीक माना जाता था। आजादी के बाद से, भारत के नागरिकों का एक बड़ा वर्ग बैंक खाते का लाभ उठाने में सक्षम नहीं था। जब 2014 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यभार सँभाला, तो उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण पहल जो की थी, उसमें एक थी-  प्रधानमंत्री जन धन योजना

इस योजना का उद्देश्य समाज के गरीब और हाशिए के वर्गों को बैंकिंग प्रणाली के तहत लाना था। इसकी शुरुआत के बाद से भारत सरकार ने देश के हर कोने में बैंकिंग प्रणाली की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

इस योजना की घोषणा पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2014 को अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान की थी। उन्होंने कहा था, “मैं यहाँ आजादी के इस पर्व पर एक योजना शुरू करने का संकल्प लेकर आया हूँ। इसका नाम प्रधानमंत्री जन-धन योजना होगा। मैं इस योजना के माध्यम से देश के सबसे गरीब नागरिकों को बैंक खातों की सुविधा से जोड़ना चाहता हूँ। लाखों परिवार ऐसे हैं जिनके पास मोबाइल तो है लेकिन बैंक खाते नहीं हैं। हमें इस परिदृश्य को बदलना होगा। देश के आर्थिक संसाधनों का उपयोग गरीबों की भलाई के लिए किया जाना चाहिए। अब बदलाव शुरू होगा। ‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ के तहत खाताधारक को डेबिट कार्ड दिया जाएगा। प्रत्येक गरीब परिवार के लिए उस डेबिट कार्ड से एक लाख रुपए के बीमा की गारंटी दी जाएगी, ताकि ऐसे परिवार अपने जीवन में किसी भी संकट की स्थिति में एक लाख रुपए के बीमा का लाभ ले सकें।”

इस योजना का 28 अगस्त, 2021 को सात साल पूरा हो गया। PMJDY की वेबसाइट पर उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत 43.04 करोड़ लाभार्थियों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है। इन खातों में फिलहाल 146,230.71 करोड़ रुपए जमा हैं। सरकार ने सभी क्षेत्रों में बैंक मित्र की नियुक्ति कर रखी है, ताकि सभी लोग आसानी से बैंकिंग प्रणाली का लाभ ले सकें।

आँकड़े बताते हैं कि योजना के तहत खोले गए 86.3% खाते एक्टिव हैं। अगस्त 2015 से अगस्त 2020 के दौरान, योजना के तहत खातों की संख्या में 2.3 गुना और इन खातों में जमा राशि में 5.7 गुना वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि जन धन योजना के तहत प्रत्येक खाते में औसतन 3,239 रुपए का एवरेज अमाउंट है जो अगस्त 2015 की तुलना में 2.5 गुना अधिक है।

खास बात यह है कि इस योजना के तहत कोई मिनिमम बैलेंस की आवश्यकता नहीं है। यानी खाताधारक बैंक में पैसा रखने के लिए बाध्य नहीं हैं, इसलिए उन्होंने बैंकिंग सिस्टम से जुड़े रहने का फैसला किया, जो केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। साथ ही, इस योजना के तहत कैशलेस बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए बैंकों ने 31 करोड़ से अधिक RuPay कार्ड जारी किए हैं। योजना की पहली वर्षगाँठ पर, पीएम मोदी ने राष्ट्र को बताया कि योजना के तहत खातों में 22,000 करोड़ रुपए जमा हुए।

महिला सशक्तिकरण में जन धन योजना की भूमिका

महिला विश्व बैंकिंग और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार ‘जन धन की शक्ति: भारत में महिलाओं के लिए वित्तीय कार्य करना’, [PDF] PMJDY खातों के 55% (43.04 में से 23.76 करोड़) महिलाओं के स्वामित्व में हैं। चूँकि खाते में न्यूनतम कागजी कार्रवाई की आवश्यकता होती है और बैंक इन खातों को खोलने के लिए अतिरिक्त सहायता प्रदान कर रहे हैं, ऐसे में PMJDY ने निरक्षरता जैसी समस्या को खत्म कर महिलाओं को बैंक खाते प्रदान किए हैं, जो समाज के निम्न-आय वर्ग के बीच बैंक खाता खोलते समय एक आम चुनौती थी। रिपोर्टों से पता चलता है कि जन धन खातों में महिलाओं का एवरेज बैलेंस पुरुषों की अपेक्षा 30% अधिक है।

12 अगस्त को, आत्मानिर्भर नारी शक्ति संवाद के तहत महिला लाभार्थियों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब 2014 में भाजपा सरकार सत्ता में आई, तो उन्होंने देखा कि करोड़ों महिलाओं के पास बैंक खाते नहीं थे। उन्होंने कहा, “आज, देश में 42 करोड़ से अधिक जन धन खाते हैं और इनमें से लगभग 55 प्रतिशत अकाउंट हमारी माताओं और बहनों के हैं। इन खातों में हजारों करोड़ रुपए जमा हैं। अपनी बचत को रसोई के बक्सों में डालने के बजाय (जैसा कि पहले होता था) पैसा अब बैंक खातों में जमा किया जा रहा है।”

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत जनधन खातों की महिला खाताधारकों को तीन महीने के लिए 500 रुपए मिले। इस योजना से लगभग 20 करोड़ महिलाएँ लाभान्वित हुईं।

भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने में जन धन खातों की भूमिका

इस योजना ने जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस योजना की वजह से सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत लाभार्थियों को सीधे लाभ पहुँचाने में सफल रही, जिसकी वजह से इसने बिचौलियों की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), अटल पेंशन योजना (APY), माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी बैंक (MUDRA) योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) और स्टैंड-अप इंडिया (SUPI) जैसी योजनाओं के तहत और कई अन्य योजना लाभार्थियों को सीधा लाभ पहुँचाती है।

PMJDY के तहत विभिन्न बीमा योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक ट्वीट में कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) ने 23.66 करोड़, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) ने 10.53 करोड़ और अटल पेंशन योजना (APY) ने 3.13 करोड़ लाभार्थियों को जोड़ा है।

सरकार ने योजना के तहत अधिक लाभ प्रदान करने के लिए और कदम उठाए हैं, जैसे कि दुर्घटना बीमा कवर को 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दिया है। ऐसे बैंकों की ओवरड्राफ्ट सीमा 5,000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए कर दी गई है। खातों के लिए आयु सीमा भी 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि अधिक से अधिक लोग इस योजना से जुड़े, सरकार ने ‘एक खाता प्रति परिवार’ से ‘एक खाता प्रति वयस्क’ पर जोर दिया है।

‘कानून से ऊपर कोई नहीं’: कोर्ट में पेश न होने पर हनी सिंह को फटकार, पत्नी शालिनी तलवार ने लगाए थे घरेलू हिंसा के आरोप

गायक हृदेश सिंह उर्फ़ ‘यो यो हनी सिंह’ के खिलाफ उनकी पत्नी शालिनी तलवार ने घरेलू हिंसा के आरोप लगाए थे, जिसके बाद ये मामला अदालत में चल रहा है। इस मामले में शनिवार (28 अगस्त, 2021) को हनी सिंह को तीस हजारी कोर्ट के समक्ष अदालत में पेश होना था, लेकिन लगातार दूसरी बार वो सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहे। कोर्ट ने उनके इस रवैये पर उन्हें फटकार लगाई है।

अदालत ने कहा है कि ‘यो यो हनी सिंह’ 3 सितंबर, 2021 को साढ़े 12 बजे कोर्ट में हाजिरी दें। उनके वकीलों से नाराज़गी जताते हुए अदालत ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। साथ ही अदालत ने इस बात से भी हैरानी जताई कि हनी सिंह इस मामले को इतने हल्के में ले रहे हैं। हनी सिंह के वकीलों ने अपने मुवक्किल के तबीयत खराब होने की बात कही थी। उन्हें बुखार होने का दावा करते हुए सुनवाई की अगली तारीख़ माँगी गई थी।

इससे पहले अदालत ने हनी सिंह का मेडिकल रिपोर्ट और उनकी आईटी रिपोर्ट भी तलब की थी। वकील ने कहा कि इन दोनों रिपोर्ट्स को जल्द से जल्द कोर्ट को सौंपा जाएगा। ‘द प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट’ के तहत मामला दर्ज कराते हुए उनकी पत्नी ने उन पर शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न के अलावा आर्थिक व यौन शोषण के आरोप भी लगाए हैं। दोनों की शादी 2011 में हुई थी।

तलवार का कहना है कि पिछले कुछ सालों में उनसे साथ कई बार मारपीट हुई। वह लगातार डर में जी रही थीं। उनके वकीलों ने बताया था कि मानसिक तौर पर शोषण होने के कारण शालिनी डिप्रेशन में हैं और दवाई लेती हैं। अपनी याचिका में तलवार ने बताया था कि कैसे उनके साथ जानवरों सा बर्ताव हुआ और उनके पति ने उन्हें धोखा दिया। शालिनी तलवार का आरोप है कि उनका पति कई अलग-अलग महिलाओं के साथ सेक्स करता है, अपनी शादी की अंगूठी नहीं पहनता है और शादी की तस्वीरें जारी करने पर मारता है।