Home Blog Page 3473

थाने आई युवती से SHO ने नंबर लिया, रोज कॉल करता; 15-20 बार किया रेप: राजस्थान पुलिस फिर दागदार

राजस्थान में हाल में कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जिससे पता चलता है कि राज्य के थाने भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं हैं। ताजा मामला नागौर जिले के खुनखुना थाने का है। यहाँ एसएचओ रहे एसआई शंभुदयाल मीणा पर 24 साल की युवती ने रेप का आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत पर आरोपित पुलिस अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

पीड़िता ने शनिवार (21 अगस्त 2021) को आरोपित पुलिस अधिकारी के खिलाफ केस रेप का केस दर्ज कराया। पीड़िता के मुताबिक, वह 2018 में एक मामले में शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने गई थी। उसी दौरान आरोपित थाना अधिकारी शंभुदयाल मीणा ने उसका मोबाइल नंबर ले लिया। इसके बाद उसने लगातार उसे फोन करना शुरू कर दिया। इसी बीच आरोपित ने डींडवाना कस्बा स्थित एक होटल में उसे बुलाया रेप किया।

पीड़िता ने बताया है कि रेप करने के बाद मीणा ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी। उसके बाद तो रेप का सिलसिला चल पड़ा। एक बार बलात्कार करने के बाद मीणा का जब भी मन करता था तो वह युवती का शारीरिक शोषण करता था। पिछले महीने उसका तबादला होने के बाद युवती के मन में बैठा मीणा का खौफ खत्म हो गया, जिसके बाद उसने मामले की शिकायत की। रिपोर्ट के मुताबिक मीणा पीड़िता को रोज कॉल करता और करीब 15-20 बार उसके साथ रेप किया।

इस केस को लेकर मौजूदा थाना प्रभारी हरिराम जांजूदा ने बताया है कि 2018 में थाना अधिकारी रहे मीणा ने युवती के साथ कई बार रेप की वारदात को अंजाम दिया था। रविवार (22 अगस्त 2021) को उसका (पीड़िता) मेडिकल कराने के बाद बयान दर्ज करा लिया गया है। वहीं जिले के पुलिस उप अधीक्षक गोपाराम के मुताबिक, मीणा के खिलाफ जाँच शुरू हो चुकी है।

गौरतलब है कि इसी साल मार्च में अलवर के खड़ेली थाने में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने गई 26 साल की महिला से थाना परिसर में ही सब इंस्पेक्टर द्वारा तीन दिन तक लगातार रेप किए जाने का मामला सामने आया था। पीड़िता ने आऱोप लगाया था कि 2 मार्च 2021 को वह पति से विवाद के निपटारे के लिए खड़ेली थाना गई थी। वहाँ सेकेंड ऑफिसर भरत सिंह ने उसे पति से विवाद के निपटारे का झाँसा देकर रेप किया।

एंटी करप्शन ब्यूरो इसी साल मार्च में ACP कैलाश बोहरा को ऑफिस में पीड़िता के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था। पीड़िता ने जवाहर सर्कल थाने में किसी युवक के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी समेत 3 मामले दर्ज करवा रखे थे। इसी केस की जाँच का हवाला देकर अधिकारी बार-बार युवती को अपने ऑफिस बुलाते और कई बार ड्यूटी पूरी होने के बाद भी मिलने के लिए दबाव बनाते। 

2019 में राजस्थान के चुरु जिले में एम दलित युवक की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के मामले में भी पुलिस पर रेप के आरोप लगे थे। मृतक की 35 वर्षीय भाभी और परिजनों ने आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया था।

‘हाथ काटो, जजिया लगाओ, गोली मारो’: ISIS समर्थक ‘उपदेशक’ अंजेम चौधरी ने तालिबान को भेजा संदेश

अफगानिस्तान में तालिबान के घुसने के बाद कई तालिबानी समर्थक विश्व के कोने-कोने में बैठ कर अपनी बयानबाजी कर रहे हैं। ऐसे में नफरत फैलाने वालों का कारोबार भी अपने चरम पर है। हाल में यूके के एक मौलवी व मजहबी घृणा फैलाने के लिए कुख्यात ‘उपदेशक’ अंजेम चौधरी ने बयान दिया है कि तालिबान को व्‍यभिचारियों को मौत की सजा देनी चाहिए, चोरों के हाथ काट देने चाहिए और संगीत पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

54 वर्षीय अंजेम चौधरी, जिस पर कई आतंकवादी हत्याओं को प्रेरित करने का आरोप है, उसने तालिबान को सलाह देते हुए अपनी यह बात कही। मालूम हो कि ये उपदेशक 5 साल तक इसीलिए जेल में बंद था क्योंकि इसका समर्थन ISIS को था। 2018 में इसकी रिहाई हुई और इस पर प्रतिबंध लगाया गया कि ये सार्वजनिक स्थलों पर नहीं बोलेगा। लेकिन, पिछले माह जैसे ही ये प्रतिबंध हटा, इसने दोबारा अपना बयान दे डाला।

टेलीग्राम के एन्क्रिप्टेड सुविधा के माध्यम से इसने जहर फैलाया और तालिबान को संदेश दिया कि जो कोई भी अल्लाह की हुकूमत लागू करने के बीच में आए उन सब पर वो (तालिबान) गोली चलाएँ। उसने यह भी कहा कि तालिबान अफगानिस्तान के विदेशी दूतावासों को बंद करे और संयुक्त राष्ट्र को काबुल से बाहर निकालने का आग्रह किया। इसके अलावा देश में जो कोई भी गैर मुसलमान है उससे जजिया की माँग रखने की भी अपील की। साथ ही साथ उस हर कोर्ट को बंद करने की माँग की, जो शरीया कानून के मुताबिक फैसले नहीं देता।

चौधरी कहता है, “केवल सख्त शरिया दंड, जिसमें चोरों के हाथ काटना और मिलावट करने वालों को पत्थर मारना शामिल है, उसको लागू किया जाना चाहिए।” उपदेशक का सुझाव यह भी है कि तालिबान को अफगानिस्तान का नाम इस्लामिक स्टेट कर देना चाहिए। उसके मुताबिक, “सभी सीमाओं को हटा दिया जाना चाहिए और सभी मुसलमानों को नए इस्लामिक राज्य के नागरिक बनने का निमंत्रण दिया जाना चाहिए, जिसका उद्देश्य भारतीय उपमहाद्वीप की मुस्लिम भूमि को एकजुट करना और खलिफाओं के बीच एकता स्थापित करना है।”

उल्लेखनीय है कि अंजेम चौधरी के बयान के संबंध में अभी यूके प्रशासन से कोई आधिकारिक बयान आने की पुष्टि नहीं हुई है। हालाँकि, सोशल मीडिया पर लोग इस बयान को पढ़कर गुस्से में हैं। उनका पूछना है कि प्रशासन ने ऐसे नफरत फैलाने वाले व्यक्ति को अपने देश में जगह ही क्यों दी है। इसे वहीं क्यों नहीं भेज दिया जाता जहाँ के लिए ये सलाह दे रहा है।

‘कल्याण सिंह मार्ग’ से भगवान श्रीराम का दर्शन करने जाएँगे भक्त, अलीगढ़ में एयरपोर्ट भी: ‘रामभक्त’ को योगी सरकार का सम्मान

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार सोमवार (23 अगस्त 2021) को बुलंदशहर जिले के नरौरा राजघाट पर किया जाएगा। इस बीच उनके सम्मान में प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कई फैसले लिए हैं। इसी क्रम में प्रदेश सरकार उनके नाम पर अयोध्या में राम जन्म भूमि को जाने वाले मार्ग, प्रयागराज, बुलंदशहर, अलीगढ़ और लखनऊ में एक मार्ग का नाम कल्याण सिंह मार्ग रखेगी। इस बात की जानकारी राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दी है।

उन्होंने बताया है कि राम जन्मभूमि को जाने वाले मार्ग का नाम पूर्व सीएम के नाम पर रखा जाएगा। डिप्टी सीएम ने ट्वीट किया, “राम भक्त स्वर्गीय कल्याण सिंह (बाबू जी) के नाम लोक निर्माण विभाग अयोध्या अलीगढ़, एटा, बुलंदशहर प्रयागराज में एक एक मार्ग होगा। बाबू जी ने राम मंदिर के लिए सत्ता छोड़ दी परंतु कारसेवकों पर गोली नहीं चलाई! अधिकारियों को जल्द प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश।”

इसके अलावा राज्य सरकार अलीगढ़ हवाई अड्डे का नाम बदलकर कल्याण सिंह हवाई अड्डा करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए जल्द ही फैसला लिया जा सकता है। बहरहाल, पूर्व सीएम के अंतिम संस्कार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित रहेंगे।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम कल्याण सिंह का शनिवार (21 अगस्त 2021) को लंबी बीमारी के कारण निधन हो गया था। उन्हें गंभीर हालत में बीते 4 जुलाई को पीजीआई में भर्ती कराया गया था। लंबी बीमारी और शरीर के कई अंगों के धीरे-धीरे फेल होने के कारण आज उन्होंने अंतिम साँस ली। कल्याण सिंह यूपी के सीएम रहने के अलावा राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके हैं।

इसके अलावा उन्हें राम मंदिर के कारसेवकों पर गोली चलवाने का आदेश न देने के लिए भी जाना जाता है। साथ ही हिन्दू धर्म के प्रति उनकी जो प्रतिबद्धता थी, उसके कारण वो जीवन भर कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे थे।

मॉडल इनाया को जकड़ कर अजीबोगरीब डांस करते दिखे रामगोपाल वर्मा, लोगों ने NCW को किया टैग: ‘कास्टिंग काउच’ के आरोप

कभी ‘सत्या’ और ‘सरकार’ जैसी फ़िल्में बना चुके रामगोपाल वर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वो अजीब तरीके से न्यूकमर इनाया सुल्ताना के साथ डांस करते दिख रहे हैं। इसमें वो कभी इनाया सुल्ताना को दोनों हाथों से जकड़ रहे हैं, कभी उनके पाँव पर गिर रहे हैं तो कभी उनके इर्दगिर्द चक्कर काट रहे हैं। ये वीडियो इनाया सुल्ताना की जन्मदिन की पार्टी का है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

रामगोपाल वर्मा ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए तंज कसते हुए लिखा, “मैं फिर से स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि इस वीडियो में जो शख्स दिख रहा है, वो मैं नहीं हूँ। साथ ही लाल कपड़ों में जो लड़की दिख रही हैं, वो इनाया सुल्ताना नहीं हैं। मैं अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन की शपथ खा कर ऐसा कहता हूँ।” हालाँकि, लोगों को उनका मजाक पसंद नहीं आया और उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) तक को भी टैग किया।

लोगों का कहना था कि उस समय रामगोपाल वर्मा नशे की हालत में लग रहे हैं और उनके द्वारा एक न्यूकमर लड़की के साथ इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है। वहीं कुछ ने अंदाज़ा लगाया कि लड़की को मजबूरी में ये सब बर्दाश्त करना पड़ रहा है। लोगों ने ध्यान दिलाया कि जिस तरह वो इनाया सुल्ताना को जकड़ रहे हैं, वो आपत्तिजनक है। कइयों ने इसे ‘कास्टिंग काउच’ से भी जोड़ा और अपना विरोध दर्ज कराया।

रामगोपाल वर्मा पिछले कई सालों से फ्लॉप चल रहे हैं और एक दशक से उनकी कोई फिल्म हिट नहीं हुई है। मॉडल इनाया सुल्ताना भी न्यूकमर हैं और उनकी कोई बड़ी फिल्म अभी नहीं आई है। रामगोपाल वर्मा का नाम इससे पहले भी कई अभिनेत्रियों के साथ जुड़ चुका है। इनाया सुल्ताना ने अपने जन्मदिन की एक तस्वीर भी शेयर की थी, जिसमें वर्मा उन्हें साइड की तरफ से हग कर रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने फिर ये तस्वीर डिलीट कर दी।

‘मूर्ति पूजा में कोई दम नहीं है’ : अबू बकर समेत 4 ने करवाया हिंदू युवक का धर्म परिवर्तन, गोमाँस न खाने पर पीटा

हरियाणा के मेवात से एक बार फिर धर्म परिवर्तन से जुड़ा मामला सामने आया है। इस बार शिकायत रोजकामेव थाना में दर्ज हुई है। आरोप है कि रोजकामेव थाना अंतर्गत बरोटा गाँव के एक व्यक्ति को पैसे का लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाया गया और बाद में उससे मारपीट हुई। शनिवार को इस मामले में 4 लोगों के विरुद्ध थाने में तहरीर दी गई थी। मामले की जाँच के बाद रविवार की शाम पुलिस ने अबू बकर नाम के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। अब बाकी आरोपितों की तलाश जारी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, थाना एसएचओ मनोज वर्मा ने कहा कि पुलिस ने रविवार (22 अगस्त 2021) शाम अबू बकर को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपितों की तलाश चल रही है। जल्द सारे आरोपित पुलिस गिरफ्त में होंगे। बता दें कि शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने नूँह जिला के एसपी को बताया था कि अप्रैल 2020 में अबू बकर, दिलशाद मौलाना, मौलाना मुबीन, मास्टर सोहराब व इनके अन्य साथियों ने रुपयों का लालच देकर उसका धर्म परिवर्तन करवाया था। इस दौरान दिलशाद ने कागज तैयार करवाकर उसे धर्म परिवर्तित करने को कहा था और हिंदुओं के देवी-देवताओं के बारे में कई आपत्तिजनक शब्द बोलते हुए कहा था कि मूर्ति पूजा में दम नहीं है।

पीड़ित ने पुलिस को बताया कि वह सबसे पहले सलंबा गाँव के अबू बकर से संपर्क में आया थ। इसके बाद उसी अबू ने उसे तावडू निवासी मौलाना दिलशाद और गाँव खड़खड़ी के रहने वाले मौलाना मुबीन से मिलाया। सबने मिल कर ऐसे स्थिति बनाई कि अप्रैल 2020 में मनोज को इस्लाम कबूलना पड़ा। मनोज बताता है कि उसे इस्लाब कबूलने पर कुछ रकम दी गई थी और बाद में शादी कराने का वादा किया गया था।

मनोज के अनुसार, धर्म परिवर्तन के बाद उसे सलंबा में ही बसा दिया गया और अन्य हिंदू युवकों को इस्लाम कबूल करवाने के काम में लगाया गया। कई माह तक आरोपितों ने उसे अपने साथ रखा और गोमाँस खिलाने का प्रयास करते थे। मना करने पर मारपीट होती थी। धीरे-धीरे मनोज को हकीकत समझ आने लगी। उसने किसी तरह अपने पिता को ये सारी बातें बताई। जब पिता उससे मिलने आए तो उन पर भी धर्मांतरण का दबाव बनाया गया और पैसे का लालच देकर रोकने का प्रयास हुआ। मनोज किसी तरह आरोपितों के चंगुल से निकला और दो दिन पहले पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी। पीड़ित का कहना है कि ये आरोपित दावत-ए-इस्लाम और ग्लोबल पीस सेंटर चलाते हैं। ये सभी गरीब, छोटी जातियों के हिंदुओं, बेसहारा हिंदू धर्म के लोगों को बहला-फुसला कर इस्लाम कबूल करवाते है।

300 तालिबानी ढेर, कई बंदी: पंजशीर के लड़ाकों ने सप्लाई रूट भी बंद किया, 3 जिलों से खदेड़ा भी था

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद से ही पूरे मुल्क में भगदड़ की स्थिति है। अब तालिबान की नजर पंजशीर घाटी की तरफ है। ये वही क्षेत्र है, जहाँ 20 वर्ष पहले भी तालिबान कब्ज़ा नहीं जमा सका था जब पूरे मुल्क पर उसका शासन हुआ करता था। तालिबान ने ऐलान किया है कि उसके लोग अब पंजशीर घाटी की तरफ बढ़ रहे हैं। लेकिन, उस तरफ बढ़ने के दौरान ही उन्हें तगड़ा झटका लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पंजशीर के लड़ाकों ने घात लगा कर हमला बोला और 300 तालिबानियों को मार गिराया। पंजशीर घाटी विद्रोहियों का गढ़ रहा है। कई तालिबानी बंदी भी बना लिए गए हैं। बगलान प्रांत के अंदराब में युद्ध के दौरान बंदी बनाए गए इन तालिबानियों की भी सामने आई हैं। बीबीसी की पत्रकार यालदा हकीम ने भी ट्वीट कर के ये जानकारी दी। कारी फसीहुद दीन हाफिजुल्लाह के नेतृत्व में तालिबान ने पंजशीर पर हमला बोला था।

लेकिन, विद्रोहियों ने घात लगा कर हमला किया और न सिर्फ 300 को मार गिराया, बल्कि कइयों को बंदी भी बना लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने तालिबान का सप्लाई रूट भी बंद कर दिया है। खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर चुके अमरुल्लाह सालेह ने भी ट्वीट कर के जानकारी दी कि अंदराब घाटी के एम्बुश जोन में फँसने और बड़ी मुश्किल से एक पीस में बाहर निकलने के एक दिन बाद तालिबान ने पंजशीर के एंट्रेंस पर फोर्स लगा दी है।

पंजशीर में अहमद मसूद ने लगभग 9000 विद्रोही सैनिकों को इकट्ठा करने में सफलता पाई है। इस इलाके में दर्जनों रंगरूट ट्रेनिंग एक्सरसाइज और फिटनेस प्रैक्टिस करते देखे गए हैं। इन लड़ाकों के पास हम्वी जैसी गाड़ियाँ भी मौजूद हैं। विद्रोही सेना के प्रवक्ता ने कहा कि हम अफगानिस्तान की रक्षा के लिए तैयार हैं और हम रक्तपात की चेतावनी देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर इसी रास्ते पर चलता रहा तो तालिबान टिकेगा नहीं।

सालेह ने लिखा, “हालाँकि, इस बीच सलांग हाइवे को विद्रोही ताकतों ने बंद कर दिया है। ये वे रास्ते हैं जिनसे उन्हें बचना चाहिए। फिर मिलते हैं।” तालिबान ने जब अपना अभियान शुरू किया था, तभी से पंजशीर घाटी में विद्रोही लड़ाकों का जुटान शुरू हो गया था। बताया जा रहा है कि इनमें सबसे ज्यादा संख्या अफगान नेशनल आर्मी के सैनिकों की है। नॉर्दन एलायंस ने चीफ रहे पूर्व मुजाहिदीन कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद इसका नेतृत्व कर रहे हैं।

अहमद मसूद जब 12 साल के थे, तब तालिबान और अलकायदा ने षड्यंत्र करके उनके पिता अहमद शाह मसूद की हत्या कर दी थी। उनकी हत्या 9/11 के आतंकी हमले से पहले की गई थी। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से करीब 100 किलोमीटर (किमी) दूर पूर्वोत्तर में स्थित पंजशीर, शुरुआत से ही तालिबान के विरोध का केंद्र रहा। पंजशीर ही वो जगह है, जहाँ शाह मसूद के नेतृत्व में सन् 1996 में तालिबान विरोधी आंदोलन खड़ा हुआ था।

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दोनों धड़ों पर शिकंजा कसने की तैयारी, UAPA के तहत लगाया जा सकता है प्रतिबंध

जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दोनों धड़ों को मोदी सरकार बैन कर सकती है। संगठन पर अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) की धारा 3 (1) के तहत कार्रवाई की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में पाकिस्तानी संस्थानों में कश्मीरी छात्रों को एमबीबीएस सीट देने के मामले में चार गिरफ्तारियों से पता चला है कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़े संगठन उम्मीदवारों से पैसा लेकर उसका इस्तेमाल घाटी में आतंकी घटनाओं के लिए फंडिग में कर रहे थे।

अधिकारियों के मुताबिक, घाटी में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के सदस्य हिज्बुल-मुजाहिदीन (एचएम), दुख्तरान-ए-मिल्लत (डीईएम) और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकवादियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इन लोगों ने आतंकी फंडिंग के लिए हवाला के जरिए विदेशों से धन का संचय किया। इस फंड का इस्तेमाल सुरक्षाबलों पर पथराव करने, स्कूलों को व्यवस्थित रूप से जलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसे कार्यों के लिए किया गया। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दोनों धड़ों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने का प्रस्ताव मोदी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत लाया गया है।

गौरतलब है कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गठन वर्ष 1993 में हुआ था। शुरुआत में यह 26 कट्टरपंथी समूहों के साथ मिलकर बना था, लेकिन साल 2005 में इसमें फूट पड़ गई। इसी के साथ इसके नरम दल का नेतृत्व  मीरवाइज और कट्टरपंथी दल का नेतृत्व सैयद अली शाह गिलानी करने लगे।

खास बात यह है कि 1993 के बाद ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि इस संगठन पर कोई सरकार प्रतिबंध लगाने जा रही है। इससे पहले पाकिस्तान समर्थक और अलगाववादी समर्थक संगठन जमात-ए-इस्लामी को 2019 में केंद्र द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके अलावा, आसिया अंद्राबी दुख्तारन-ए-मिल्लत और यासीन मलिक के जेकेएलएफ को भी क्रमशः 2018 और 2019 में प्रतिबंधित कर दिया गया।

द्रौपदी का चीरहरण, ऑनलाइन कपड़े ढूँढ रहे श्रीकृष्ण: विवाद के बाद पुराने विज्ञापन से Myntra ने पल्ला झाड़ा

सोशल मीडिया पर लोग Myntra के एक पुराने विज्ञापन को लेकर उसके बहिष्कार की अपील कर रहे हैं। इस विज्ञापन में उसने भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी का मजाक बनाया है। इस विज्ञापन में द्रौपदी के चीरहरण के दृश्य का इस्तेमाल किया गया है। दिखाया गया है कि एक व्यक्ति द्रौपदी के वस्त्र उतार रहा है और भगवान श्रीकृष्ण मोबाइल फोन में Myntra का एप खोल कर उसमें लंबी साड़ी ढूँढ रहे हैं।

कविता नाम की यूजर ने लिखा, “ये सिर्फ एक विज्ञापन नहीं है, बल्कि ये हिन्दू धर्म व दुनिया भर में रह रहे हिन्दुओं का अपमान है। हमें इस बार स्पष्ट और ऊँचे स्वर में संदेश देने की आवश्यकता है – हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा को हम सहन नहीं करेंगे। हम इसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।”

लोगों ने ट्विटर पर ‘Boycott Myntra’ ट्रेंड कराया और इसके बहिष्कार की अपील की। बता दें कि Myntra एक एक भारतीय फैशन ई-कॉमर्स कंपनी है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। 2007 में इसकी स्थापना की गई थी, जब इसके माध्यम से गिफ्ट आइटम्स बेचे जाते थे, ये कपड़ों की एक बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी बन गई। ये भी जानने लायक है कि Myntra का स्वामित्व 2014 के बाद से फ्लिपकार्ट के पास है।

शेजल जोशी ने लिखा, “बस अब बहुत हुआ। ये हिन्दू विरोधी गतिविधियों का उच्च-स्तर है। उन्होंने हमें और हमारी धार्मिक भावनाओं को ग्रांटेड ले लिया है। हम हमें उन्हें अपनी ताकत दिखानी है।” बताया जा रहा है कि ये ग्राफिक्स 2016 का है, जो अब वायरल हुआ है। Myntra का कहना है कि उसने ये आर्टवर्क नहीं बनाया है और न ही वो इसे एंडोर्स करता है। साथ ही उसने इसे हटा कर लीगल एक्शन लेने की भी अपील की।

‘ScrollDroll’ नामक कंपनी ने कहा है कि ये एड उन्होंने बनाया है और इसका Myntra से कोई लेनादेना नहीं है। वहीं Myntra ने अपने ब्रांड का इस्तेमाल करने के लिए उसे कानूनी कार्रवाई की भी धमकी दी है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसी एक फेमिनिस्ट की शिकायत पर Myntra अपने लोगो में बदलाव ला सकता है, फिर हिन्दू धर्म के अपमान के विषय में ये कंपनियाँ बार-बार गलती क्यों कर रही हैं?

मंत्री के स्वागत में DMK का झंडा लगा रहा था 13 साल का बच्चा, करंट लगने से मर गया: फिर भी नहीं बदला कार्यक्रम-न कोई गिरफ्तारी

तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में सत्ताधारी डीएमके के एक मंत्री के स्वागत के लिए झंडा लगा रहे 13 साल के बच्चे की करंट लगने से मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार (20 अगस्त 2021) को मंत्री पोनमुडी एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए आने वाले थे। उन्हीं के स्वागत के लिए मंडप बुक किया गया था। यहीं पर पोस्टर-बैनर लगाने में पार्टी कार्यकर्ताओं की मदद कर रहे बच्चे को करंट लग गया।

मंत्री का स्वागत करने के लिए 10 से भी अधिक लोग पोस्टर-बैनर लगाने का काम कर रहे थे। इन्हीं की मदद 13 साल का दिनेश कर रहा था। इस दौरान वह हाईटेंशन तार के संपर्क में आ गया। करंट लगने के बाद दिनेश को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक दिनेश पुंधोत्तम सरकारी स्कूल में 9वीं कक्षा का छात्र था और लॉकडाउन के कारण घर पर ही था।

इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर करंट लगने के कारण हुई मौत का हवाला देते हुए मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी कर दिया है। हालाँकि, केस दर्ज करने के बावजूद अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है। बच्चे की मौत के बाद भी उसी शाम को तय कार्यक्रम के अनुसार शादी हुई और मंत्री पोनमुडी अतिथि के रूप में शामिल भी हुए।

बैनर संस्कृति खत्म करने का था वादा

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में द्रविण मुनेत्र कडगम (DMK) नेतृत्व ने कहा है कि उन्होंने कटआउट और झंडे लगाने पर रोक लगा दी है। लेकिन जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता लगातार इसे करते रहते हैं। खास बात यह है डीएमके के लोगों ने झंडे या पोस्ट लगाने के लिए न तो पुलिस और न ही नगर निगम की अनुमति ली। सवाल यह भी है कि एक बच्चे को इस काम पर कैसे लगाया गया।

इससे पहले वर्ष 2019 में आर सुभाश्री नाम की 23 वर्षीय इंजीनियर अपनी स्कूटी से ऑफिस जा रही थीं। उसी दौरान एआईडीएमके के कार्यकर्ताओं द्वारा अवैध रूप से लगाई जा रही होर्डिंग उनके ऊपर गिर गई, जिससे उनकी मौत हो गई थी। उस घटना के बाद डीएमके ने सत्ता में आने पर बैनर-संस्कृति को खत्म करने का वादा किया था।

खोपड़ियों के ढेर पर इंदिरा गाँधी: सिद्धू के सलाहकार ने शेयर किया आपत्तिजनक स्केच, कश्मीर को बताया था अलग मुल्क

पंजाब में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अपने सलाहकारों के कारण विवाद में आ गए हैं। हाल ही में पंजाब में कॉन्ग्रेस ने अपनी कलह सुलझाई है, लेकिन मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच का मनमुटाव ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा। इसी बीच सिद्धू के सलाहकारों की हरकतों पर कैप्टेन ने नसीहत भी दी है। इसके साथ ही पंजाब कॉन्ग्रेस में फिर से खींचतान शुरू हो गई है।

सिद्धू के सलाहकार मलविंदर सिंह माली की दो अलग-अलग फेसबुक पोस्ट पर विवाद हुआ था। उन्होंने न सिर्फ जम्मू कश्मीर, बल्कि कॉन्ग्रेस की दिवंगत नेता व पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी पर भी विवादित पोस्ट कर डाला। जहाँ एक तरफ कश्मीर को उन्होंने अलग देश बता डाला तो वहीं इंदिरा गांधी का एक आपत्तिजनक स्केच सोशल मीडिया पर शेयर किया। इससे नाराज़ कैप्टेन ने सिद्धू को सलाह दी है।

सीएम अमरिंदर ने कहा कि डॉक्टर प्यारे लाल गर्ग और मलविंदर सिंह माली सिर्फ प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष को सलाह देने तक ही खुद को सीमित रखें तो बेहतर है। उन्होंने कहा कि ये संवेदनशील मुद्दे हैं, इसीलिए इन पर वो अधूरा ज्ञान रख कर न बोलें। उन्होंने कहा कि जिस चीज के बारे में जानकारी न हो, उस पर नहीं बोलना चाहिए। कैप्टेन ने माली के बयान को देशविरोधी बताते हुए कहा कि इससे माहौल खराब हो सकता है।

उन्होंने इसे देश विरोधी काम बताया। हालाँकि, इतना विवाद होने के बावजूद भी माली ने अपना बयान वापस नहीं लिया है। सीएम कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने कहा, “सिद्धू के सलाहकार वास्तविकता से कोसों दूर हैं। उन्हें जमीनी हकीकत नहीं पता है। ये हर किसी को पता है कि पाकिस्तान हमारे के लिए असल खतरा है। वहाँ से लगातार हथियार लाए जाते हैं, पंजाब में ड्रग्स की सप्लाई की जाती है। इसका इस्तेमाल पंजाब को अस्थिरता की ओर धकेलने के लिए होता है।

सीएम ने याद दिलाया कि कैसे हमारे सैनिक भी बॉर्डर पर शहीद हो रहे हैं। उन्होंने 80 के दशक का दौर भी याद दिलाया, जब कई लोगों को आतंकवाद के कारण अपनी जान गँवानी पड़ी थी। माली ने फेसबुक के अपने कवर पेज पर 1990 के आसपास प्रकाशित होने वाली एक मैगजीन ‘जनतक पैगाम’ के मुख्य पृष्ठ का फोटो लगाया है। इसमें इंदिरा गाँधी को हाथ में बंदूक लिए दिखाया गया है, जिसके एक सिरे पर खोपड़ी लटक रही है।

इस कार्टून में इंदिरा गांधी के पीछे भी खोपडियों का ढेर लगा हुआ है और इस पेज पर पंजाबी में लिखा है, “हर जबर दी इही कहाणी, करना जबर ते मुँह दी खाणी’, अर्थात ‘हर जुल्म करने वाले की यही कहानी है अंत में उसे मुँह की खानी पड़ती है।’ एक तरह से उन्होंने सिख दंगों के लिए कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए और स्वर्ण मंदिर में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए इंदिरा गाँधी का ये स्केच शेयर किया है।