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चिल्कुर का ‘वीजा बालाजी’ मंदिर: जब भक्त के लिए जंगल में प्रकट हो गए भगवान वेंकटेश्वर

आस्था और भक्ति के पीछे कोई कारण नहीं होता, यह मात्र एक भाव है जो भक्तों को अपने भगवान, अपने आराध्य से बाँधे रखता है। भक्तों के यही भाव कई देवस्थानों को सबसे अद्वितीय बनाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर तेलंगाना में हैदराबाद से लगभग 28 किलोमीटर (किमी) दूर रंगारेड्डी जिले में उस्मान सागर के किनारे स्थित है। चिल्कुर बालाजी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि यहाँ भक्तों की ‘वीजा’ प्राप्त करने की इच्छा पूरी होती है और यही कारण है कि इस मंदिर को ‘वीजा बालाजी’ मंदिर भी कहा जाता है।

इतिहास

भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित चिल्कुर बालाजी मंदिर का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है। कहा जाता है कि बीते समय में भगवान वेंकटेश्वर के एक ऐसे भक्त हुए थे जो पैदल ही भगवान के दर्शनों के लिए तिरुपति चले जाया करते थे। काफी समय बीत जाने के बाद जब बालाजी के भक्त असहाय हो गए और भगवान के दर्शन के लिए नहीं जा सके तो खुद बालाजी ने उनकी सहायता की।

भगवान वेंकटेश्वर अपने भक्त के सपने में आए और कहा कि उन्हें अब पैदल तिरुपति आने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि अब वो खुद अपने भक्त के पास जंगल में रहते हैं। भगवान की बताई जगह पर जब लोग पहुँचे तो वहाँ उभरी हुई भूमि दिखाई दी। इसके बाद आकशवाणी हुई और भगवान के आदेशानुसार उस भूमि को दूध से नहलाकर वहाँ भगवान बालाजी की प्रतिमा स्थापित की गई।

द्रविड़ वास्तुशैली में बने इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा स्थापित है। काले पत्थर से निर्मित की गई यह प्रतिमा, तिरुपति में स्थित बालाजी भगवान की ही प्रतिरूप नजर आती है। तिरुपति बालाजी मंदिर के समान ही यहाँ भी कई उत्सवों का आयोजन किया जाता है। अनाकोटा, ब्रह्मोत्सवम और पूलंगी यहाँ के प्रमुख त्योहार हैं।

नौकरी के लिए आते हैं भक्त

किसी के भी जीवन में कुछ सपने बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। कुछ लोग अच्छी नौकरी की इच्छा रखते हैं, कुछ लोगों को राजनीति में अपना बेहतर भविष्य चाहिए तो कई लोग ऊँची तनख्वाह के चलते विदेश जाना चाहते हैं। ऐसे लोग रंगारेड्डी के इस मंदिर जरूर पहुँचते हैं। माना जाता है कि यहाँ भगवान बालाजी के दर्शन करने और उनसे आशीर्वाद माँगने के बाद आसानी से वीजा मिल जाता है। यही कारण है कि चिल्कुर बालाजी मंदिर को वीजा बालाजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

इस मंदिर में लोगों की आस्था इतनी है कि लोग यहाँ अपने पासपोर्ट तक लेकर पहुँचते हैं और बालाजी भगवान की 11 परिक्रमा करते हुए एक चिट में संख्या अंकित करते जाते हैं। इसके बाद जब उन्हें वीजा मिल जाता है तब वापस आकर भगवान की 108 परिक्रमा करते हैं। हालाँकि न केवल वीजा बल्कि सरकारी नौकरी, ऊँचे पदों और ऐसी ही दूसरी अन्य इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी भक्त चिल्कुर बालाजी मंदिर पहुँचते हैं।

कैसे पहुँचे?

हैदराबाद का राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मंदिर से लगभग 29 किमी दूर है। रंगारेड्डी और हैदराबाद के रेलवे स्टेशन चिल्कुर बालाजी मंदिर तक पहुँचने के लिए सबसे आसान रेल यातायात के केंद्र हैं। मंदिर से सिकन्दराबाद जंक्शन की दूरी मात्र 32 किमी है। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी मंदिर पहुँचना बहुत आसान है, क्योंकि हैदराबाद और रंगारेड्डी, दोनों ही कई राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े हुए हैं।

नाबालिग लड़के को मंगलसूत्र पहनाया, बिंदी लगाई: जेंडर एक्टिविस्ट ग्रुप की ओछी हरकत पर नेटिजन्स भड़के

जेंडर एक्टिविस्ट ग्रुप इक्वल कम्युनिटी फाउंडेशन ने रक्षा बंधन के मौके पर ट्विटर पर एक नाबालिग लड़के का वीडियो शेयर किया है। इसमें वह लड़का बिंदी और मंगलसूत्र पहने हुए नजर आ रहा है। ट्वीट में ग्रुप ने लिखा, “हमारे #ActionForEqualilty प्रतिभागी श्रेयस लड़कियों पर टिप्पणी नहीं करने और उन्हें किसी भी तरह से असहज नहीं करने का संकल्प लेते हैं। महिलाओं को विवाहित दिखने या अपने पतियों की संपत्ति होने का विरोध करने के लिए उन्होंने जो बिंदी और मंगलसूत्र पहना है, उस पर ध्यान दें।”

ईसीएफ द्वारा शेयर किए गए वीडियो का स्क्रीनशॉट।

#रक्षाबंधन त्योहार की बजाय इक्वल कम्युनिटी फाउंडेशन ने ‘पितृसत्ता को खत्म करने’ के लिए #रक्षाबंध का इस्तेमाल किया है। वीडियो में नाबालिग लड़के का इस्तेमाल करने और उसे ट्वीट करने पर सोशल मीडिया पर NGO की काफी आलोचना हो रही है। कुछ ट्विटर यूजर्स ने महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी को विवादित ट्वीट को देखने के लिए टैग किया है, वहीं अन्य लोगों ने ग्रुप की आलोचना की और वीडियो को बेतुका बताया।

स्मिता देशमुख ने लिखा, “लड़कों को बिंदी क्यों पहनना और क्या मंगलसूत्र से सुनिश्चित होगा कि वे महिलाओं के साथ समानता का व्यवहार करेंगे? यह बेतुका है। ये बकवास बंद करो। पुरुषों को उन्हें समझने के लिए महिलाओं की तरह होने की जरूरत नहीं है। शिक्षा और नैतिक मूल्य महत्वपूर्ण हैं। ऐसा लगता है कि सोशल मीडिया Woke कैंपेन है।”

एक अन्य यूजर ने सवाल किया कि वे अपने प्रचार के लिए वीडियो में एक छोटे बच्चे का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? राज नाम के यूजर ने कहा, “ईसीएफ इंडिया पागल हो गया है! किशोर लड़कों के माध्यम से अपना एजेंडा फैला रहा है! शर्मनाक!”

Source: Twitter

एक ट्विटर यूजर ने हैशटैग रक्षाबंध लिखकर हिंदू त्योहारों को नीचा दिखाने के लिए इक्वल कम्युनिटी फाउंडेशन की आलोचना की। उसने लिखा, “क्या बकवास है। रक्षाबंध टैग बनाकर हमारे रक्षाबंधन पर्व को बदनाम कर रहे हो। हमारे पवित्र मंगलसूत्र, बिंदी को नीचा दिखा रहे हो। एक मासूम लड़के को अपनी कट्टरता के लिए इस्तेमाल करना गलत है।”

तन्मय ने सवाल किया कि क्या ये ग्रुप अन्य धर्मों के अनुष्ठानों पर सवाल उठाने को तैयार है? उसने आगे कहा, “बच्चों को नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों की शिक्षा दें, उन्हें बेहतर इंसान बनाएँ और अपने एजेंडा के लिए प्रयोग ना करें। हमें नीचा दिखाने के लिए सांस्कृतिक प्रतीकों का प्रयोग ना करें। बिंदी और मंगलसूत्र पसंद है, ऐसा नहीं है कि इसे लगाने के बाद एक महिला किसी पुरुष की संपत्ति हो जाती है। क्या आप ईसाइयों के बीच शादी की रिंग को लेकर इस बारे में कुछ कह सकते हैं।”

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Dextrocardiac1 ने कहा, “स्त्रियों का सम्मान कैसे किया जाता है, इसे समझाने के लिए बच्चे को जेंडर डिस्फोरिया से पीड़ित करने की आवश्यकता नहीं है, इसे घटिया ड्रामेबाजी की तुलना में अधिक सम्मानजनक तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।”

Source: Twitter

बता दें कि ईसीएफ की वेबसाइट के अनुसार, संगठन की स्थापना 2009 में हुई थी। अपनी संगठनात्मक रणनीति में इस समूह का दावा है कि भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के 23 करोड़ लड़कों में से 11.5 करोड़ शारीरिक हिंसा में और 6 करोड़ यौन हिंसा में शामिल हैं, जिनमें बलात्कार भी शामिल है।

UP में मिशन शक्ति: महिलाओं को सम्मानित कर बोले CM योगी- स्वावलंबी और सशक्त नारी ही नए उत्तर प्रदेश की नींव

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ‘मिशन शक्ति’ के तीसरे चरण का शुभारम्भ किया, जिसे सोशल मीडिया पर काफी सराहना मिली है। यह चरण 31 दिसंबर 2021 तक चलेगा। इस दौरान यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में मिशन शक्ति के पहले व दूसरे चरण में बेहतर प्रदर्शन करने वाली एवं कोरोना संक्रमण के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 75 महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिए प्रतिबद्ध ‘मिशन शक्ति‘ के तीसरे चरण के शुभारंभ के दौरान कहा कि स्वावलंबी, सुरक्षित तथा सशक्त नारी ही नए उत्तर प्रदेश की नींव है। हम इस नींव को मजबूत करने के लिए मिशन शक्ति का तीसरा चरण शुरू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को नजरअंदाज कर कोई भी समाज, प्रदेश व देश तरक्की नहीं कर सकता है। इस चरण में महिलाओं को रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनकी सुरक्षा के लिए काम होगा।

मिशन शक्ति कार्यक्रम में महिलाओं, महिला पुलिसकर्मियों आदि को उनके सराहनीय कार्य व महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए DM व SSP द्वारा वरिष्ठ जनप्रतिनिधिगण, पुलिस/प्रशासनिक अधिकारीगण की उपस्थिति में सम्मानित किया गया।

इस दौरान मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व की सरकारों पर इशारों इशारों में तंज कसते हुए कहा, ”महिला सुरक्षा को लेकर इससे पहले के वातावरण से हर व्यक्ति परिचित है। महिलाओं में असुरक्षा के इसी भाव को दूर करने के लिए मिशन शक्ति को सरकार ने आगे बढ़ाया है। जिन महिलाओं को आज सम्मान मिला है वह दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकती हैं।”

उन्होंने कहा पिछली सरकारों में @Uppolice में बालिकाएँ भर्ती तो होती थीं, लेकिन उन्हें फील्ड-ड्यूटी नहीं दी जाती थी। इससे बालिकाओं के मन में ‘पुरुषों से कम होने का’ भाव रहता था। हम लोगों ने प्रदेश की बेटियों को प्रोत्साहित करते हुए 10,000 से अधिक महिला बीट पुलिस अधिकारियों की तैनाती की है।

उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति के तीसरे चरण को हम सभी सकारात्मक सहभागिता से सफल बनाने में सहयोग करें और एक समतामूलक समाज के निर्माण में सहभागी बनें। 

बता दें कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 1.55 लाख बेटियों के खातों में 30.12 करोड़ रुपए भेजे गए हैं। 10 हजार से अधिक महिला आरक्षियों की बीट अधिकारी पद पर तैनाती की गई है। वहीं, महिला बटालियनों के लिए 2982 पदों के लिए विशेष भर्ती होगी। इस दौरान 84.79 करोड़ की लागत से 1286 थानों में पिंक टॉयलेट के निर्माण का शिलान्यास किया गया।

अनिल धर्मे ने उज्जैन की उस जगह पर लहराया तिरंगा-लगाए भारत के जयकारे, जहाँ मोहर्रम पर लगे थे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में जहाँ पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी हुई ठीक उसी स्थान पर एक व्यक्ति ने अकेले पहुँचकर तिरंगा लहराया और ‘वंदे मातरम’ एवं ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष करते हुए पाकिस्तान के विरोध में नारे भी लगाए।

तिरंगा लहराने वाले व्यक्ति का नाम अनिल धर्मे है। रविवार (22 अगस्त 2021) को अनिल अकेले ही उज्जैन के उसी इमामबाड़े पर पहुँच गए जहाँ मुहर्रम के दिन ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगे थे। अनिल ने उस स्थान पर तिरंगा लहराया और वंदे मातरम एवं भारत माता का जयकार लगाते हुए पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा भी लगाया। अनिल के अकेले ही वहाँ पहुँचने के बाद कुछ और लोग भी पहुँचे, जिन्होंने हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए।

अनिल ने कहा कि मुहर्रम के दिन जो भी हुआ वह गलत था और वह इमामबाड़े के सामने मुहर्रम के दिन हुई भारत विरोधी नारेबाजी का सांकेतिक विरोध किया है। उन्होंने कहा कि कानून के दायरे में रहकर इसका विरोध करना आवश्यक था और इसीलिए वह अकेले ही उस स्थान पर तिरंगा लेकर पहुँच गए। उन्होंने यह भी कहा कि तिरंगा लहरा कर उन्होंने भारत का विरोध करने वालों को जवाब दिया है, साथ ही उन्होंने सरकार से माँग की है कि पाकिस्तान के समर्थकों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

ज्ञात हो कि गुरुवार (19 अगस्त 2021) को उज्जैन में मोहर्रम के अवसर पर देश विरोधी नारे लगाने का मामला सामने आया था। गीता कॉलोनी में मोहर्रम का ताजिया उठ रहा था, इसी दौरान देश विरोधी नारे लगे और कई युवक पाकिस्तान जिंदाबाद चिल्लाने लगे। रिपोर्ट्स के अनुसार उक्त स्थान पर मोहर्रम के चलते काफी भीड़ थी, जिसे देखते हुए अतिरिक्त पुलिस फोर्स भी तैनात किया गया था। लेकिन रात के करीब 10.15 बजे जफर, अनीस, अजीज, हारून कुरैशी का भांजा, अज्जू, शानू, अब्दुल, कालू, राजू, ‘शगुन गार्डन’ के पास बने ‘बड़े साहब’ पहुँचे और फिर आपत्तिजनक नारेबाजी करने लगे।

सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपितों की पहचान की थी और 15 लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में शनिवार की शाम तक 12 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।

अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू-सिख पहुँचे भारत, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा- इसीलिए जरूरी था CAA

अफगानिस्तान में जारी भारी अस्थिरता के बीच अफगानिस्तान में रह रहे दुनिया भर नागरिकों (के साथ-साथ भारत के नागरिकों को भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। ऐसे में वहाँ रहने वाले हिंदू, सिख और बौद्ध जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों की हालात और भी दयनीय नजर आ रही है। ऐसी स्थिति को देखते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) की वकालत की है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अफगानिस्तान से 168 नागरिकों को भारत लाए जाने से सम्बंधित मीडिया रिपोर्ट को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा कि हमारे अस्थिर पड़ोस में घट रही घटनाओं और हिन्दू एवं सिख जिस बुरे दौर से गुजर रहे हैं, उसे देखते हुए यह सामने आता है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) कितना जरूरी था। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि भारतीय वायु सेना का विमान 168 यात्रियों को लेकर रविवार (22 अगस्त 2021) को हिंडन एयरबेस पर पहुँचा। इन 168 यात्रियों में 107 भारतीय और 23 अफगानी सिख भी शामिल थे। साथ ही इन यात्रियों में अफगानिस्तान के दो अल्पसंख्यक सांसद नरेंदर सिंह खालसा और अनारकली कौर होनारयार भी शामिल थे।

सिखों को बचा कर लाए जाने पर अफगान सांसद खालसा ने पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने अफगानिस्तान से उन्हें व सिख समुदाय के अन्य लोगों को बचा कर भारत लाए जाने पर भारतीय वायुसेना और केंद्र सरकार को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से अल्पसंख्यकों को इस बुरे समय में निकाला जाना आवश्यक था। उन्होंने बुरे समय में साथ खड़े रहने के लिए भारत सरकार का धन्यवाद दिया।

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में शासन स्थापित किए जाने के बाद काबुल एयरपोर्ट पर लोगों की भीड़ देश छोड़कर जाने के लिए कई दिनों से जुटी हुई है। अफगानिस्तान में रह रहे हिन्दू और सिख भी तालिबान के बढ़ते प्रभाव के चलते देश छोड़ना चाहते हैं। कई सिखों ने काबुल के निकट गुरुद्वारे में शरण ले रखी है। ऐसे में कुछ दिनों पहले ही केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा था भारतीय अधिकारी सिख नेताओं और अफगानिस्तान में फँसे हुए सिखों के संपर्क में हैं और इन सभी को शीघ्रता से भारत लाया जाएगा।

ज्ञात हो कि पिछले कुछ समय में अफगानिस्तान में बदले हालातों के मद्देनजर एक बार फिर CAA चर्चा में आया है, क्योंकि तालिबान अपने इस्लामी कट्टरपंथ के कारण जाना जाता है। यही कारण है कि अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों के मन में तालिबान के शासन के बाद डर पैदा हो गया है और इन अल्पसंख्यकों को यहाँ अपना भविष्य धुँधला दिखाई दे रहा है। ऐसे में अफगानी अल्पसंख्यक, खासकर हिन्दू और सिख प्रमुख रूप से भारत पर ही निर्भर हैं और CAA हिन्दू एवं सिख अल्पसंख्यकों की सहायता कर सकता है।

हालाँकि, CAA कानून को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को लगातार निशाने पर लिया गया। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दिसंबर 2019 में संसद से पास होने के साथ ही देश में उसके खिलाफ माहौल बनाया जाने लगा और उसके विरोध के नाम पर देश की राजधानी दिल्ली में दंगे तक प्रायोजित कराए गए। बता दें कि CAA के द्वारा भारत में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के प्रवासियों के लिए नागरिकता की शर्तों को आसान बनाया गया है।

‘हिंदू जन्मी हूँ हिंदू ही मरूँगी… ईसाई नहीं बनूँगी’: परिजनों ने बदल लिया धर्म, पर 75 साल की आदिवासी महिला की नहीं डिगी आस्था

देश भर में हर रोज धर्मांतरण के नए मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला झारखंड के हजारीबाग जिले के दारू प्रखंड क्षेत्र का है। यहाँ कोरोना महामारी का लाभ उठाते हुए ईसाई मिशनरियों द्वारा बड़े पैमाने पर साजिश के तहत हिंदूओं का धर्मांतरण किया गया। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में यहाँ 200 से अधिक लोगों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर हिंदू धर्म से ईसाई में कन्वर्ट किया गया। बताया जा रहा है कि ज्यादातर घरों के सभी सदस्यों का धर्मांतरण हो चुका है। वहीं, कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो विषम परिस्थितियों के बावजूद ईसाई बनने को तैयार नहीं हैं।

दारू प्रखंड की दिग्वार पंचायत की 75 वर्षीय मंझली मरांडी भी उन्हीं लोगों में शामिल हैं, जो किसी भी तरह के प्रलोभन को स्वीकार नहीं कर रही हैं। मंझली अपने परिवार की सबसे बुजुर्ग सदस्य हैं। वह खुद को बजरंग बली का भक्त बताती हैं।

मंझली मरांडी का कहना है कि उन्हें छोड़कर उनके परिवार के अन्य 9 लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया है। वह अपने घर में ईसाई बने लोगों के साथ रहती हैं और हनुमान जी व अन्य हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करती हैं, जबकि परिवार के अन्य लोग ईसाई धर्म के अनुसार प्रार्थना करते हैं। अकेली होने के बावजूद वह परिवार के सभी सदस्यों से वापस हिंदू धर्म अपनाने का अनुरोध करती हैं, लेकिन सब उनकी बात को अनसुना कर देते हैं।

मंझली कहती हैं, ”मैं जन्म से हिंदू हूँ और मरते दम तक हिंदू ही रहूँगी। बजरंग बली हमारे देवता हैं। हम आजीवन हिंदू ही रहेंगे। मुझे मेरे धर्म से कोई डिगा नहीं सकता। लोभ में पड़कर किसी को भी अपना धर्म नहीं बदलना चाहिए।” मंझली मरांडी के दोनों बेटे बादल मरांडी और मोहन मरांडी 18 महीने पहले ही ईसाई बने हैं। बादल की पत्नी, चार बच्चे और मोहन व उसके दो बच्चे भी ईसाई बन चुके हैं।

गौरतलब है कि दारू प्रखंड क्षेत्र में ईसाई मिशनरियों के द्वारा पिपचो में स्थित मिशन विद्यालय की आड़ में वर्षों से बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन का खेल खेला जा रहा है। प्रखंड के दिग्वार पंचायत के चानो खुर्द, अककुम्बा, बंधु टोला, पिपरा टोला, झरना आदि जगहों से अब तक दर्जनों परिवार के सैकड़ों लोगों (करीब 200 लोग) को ईसाई धर्म में कन्वर्ट किया जा चुका है। दारू थाना से मात्र 100 मीटर की दूरी पर मिशन स्कूल मौजूद है। इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन इस खबर से पूरी तरह से बेखबर हैं।

अमेरिका समर्थित अफगान सरकार में चरम पर था भ्रष्टाचार, सैनिकों की विधवाओं को पेंशन पाने के लिए बनाने पड़ते थे यौन संबंध: रिपोर्ट

तालिबानी शासकों के अफगानिस्तान की सत्ता पर फिर से काबिज होने के बाद अफगान नागरिक आतंक के साए में जी रहे हैं। इसी बीच यह खबर सामने आई है कि अमेरिका समर्थित सरकार के अधीन अफगान सैनिकों की विधवाओं को पेंशन पाने के लिए यौन संबंध बनाने पड़े थे।

पत्रकार माइकल ट्रेसी की रिपोर्ट के अनुसार, अपने पतियों की पेंशन पाने के लिए अफगान सैनिकों की विधवाओं को यौन संबंध बनाने पड़े थे। उन्होंने 2017 में एक सरकारी अधिकारी द्वारा की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए यह बात कही। इस दौरान अफगानिस्तान पुनर्निर्माण को लेकर विशेष महानिरीक्षक (एसआईजीएआर) जॉन एफ सोपको ने कई सवाल उठाये थे।

सरकारी अधिकारी को चार साल पहले कह रहे थे, “एक अमेरिकी अधिकारी ने यह जानने के लिए COPS और NCIS जैसे टीवी शो देखे कि उसे अफगान पुलिस रंगरूटों को क्या सिखाना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “हमने अफगान सैनिकों की विधवाओं के बारे में भयावह किस्से सुने हैं। जैसे उन्हें पेंशन पाने के लिए कैसे पहले यौन संबंध बनाना पड़ा।”

जॉन सोपको ने आगे कहा, “क्या कोई अमेरिकी इसके साथ खड़ा होगा? इसलिए हम अफगान लोगों का दिल और दिमाग जीतने की कोशिश कर रहे हैं। हमें सबसे पहले अफगान सैनिकों का दिल और दिमाग जीतना है।”

उस वर्ष Sopko की रिपोर्ट ने अमेरिका समर्थित सत्तारूढ़ शासन में व्यापक भ्रष्टाचार को उजागर किया था। रिपोर्ट में कहा गया था, “एएनडीएसएफ नेताओं द्वारा किए कुछ उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार से निचले स्तर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की संभावना है, क्योंकि बचाव की संस्कृति शीर्ष से शुरू होती है और फिर पूरे सिस्टम के भीतर भ्रष्टाचार को सामान्य करती है।” इस तरह साल 2017 में यह पता चला था कि पूरे अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा बलों में भ्रष्टाचार अपने चरम पर था।

इसमें कहा गया है, “भ्रष्टाचार की रिपोर्ट्स व्यापक और विविध रही हैं, जिनमें नशीली दवाओं के व्यापार में भागीदारी, जबरन वसूली, पद के लिए भुगतान, रिश्वतखोरी, भूमि हथियाने, अमेरिका व नाटो द्वारा आपूर्ति किए गए उपकरणों की बिक्री आदि तक शामिल हैं।”

SIGAR ने अपनी ताजा रिपोर्ट में उन सभी बातों का उल्लेख किया है, जो अमेरिका को अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के 20 वर्षों के संघर्ष से सीखना चाहिए। उनमें शामिल हैं, “बहुत महँगा है। उदाहरण के लिए पिछले दो दशकों में अफगानिस्तान, इराक और पाकिस्तान में अमेरिका के युद्ध संबंधी सभी लागत 6.4 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है।

इस महीने की शुरुआत में जारी ताजा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, “यह बड़े पैमाने पर कहा जाता है कि वे बेहद खराब तरीके से चलते हैं, अमेरिकी अधिकारियों को उनके पीछे जाने से नहीं रोका गया।”

असम के कोकराझार में 3 बैंक डकैतों का एनकाउंटर, CM सरमा ने कहा राज्य को अपराध मुक्त बना कर रहेंगे

असम के कोकराझार जिले में पुलिस ने एनकाउंटर में 3 बैंक डकैतों को मार गिराया है। बैंक में डकैती डालने जा रहे इन अपराधियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी थी, जिसके बाद पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घटना पर कहा कि असम को अपराध मुक्त बनाया जाएगा।

असम पुलिस को कोकराझार जिले के भोटगाँव में इलाहबाद बैंक में डाली जाने वाली डकैती की गुप्त सूचना मिली थी, जिस पर पुलिस ने भोटगाँव के पास चेंगमारी में रविवार (22 अगस्त 2021) को तड़के ढाई बजे इन डकैतों को घेर लिया। पुलिस से घिरने के बाद डकैतों ने आत्मसमर्पण करने की जगह पुलिस पर ही फायरिंग शुरू कर दी, जिस पर पुलिस को जवाबी कार्रवाई करते हुए डकैतों पर गोलियाँ चलनी पड़ी। इस एनकाउंटर में तीन डकैत घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और वहाँ उनकी मौत हो गई। असम के डीजीपी से मिली जानकारी के अनुसार, इन डकैतों के पास से वाहन, गैस कटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, 2 पिस्टल और अन्य उपकरण बरामद हुए हैं। इस एनकाउंटर के बाद 3 अन्य डकैतों की तलाश की जा रही है।

सीएम सरमा ने पुलिस कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए कहा कि डकैतों के एक गैंग को कोकराझार में पुलिस द्वारा मार गिराया गया, जिससे एक बड़ी बैंक डकैती टल गई। सीएम सरमा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा, ”असम को अपराध मुक्त बनाना है और हत्या, बलात्कार एवं लूट को राज्य से खत्म करना है। हम तब तक काम करते रहेंगे जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते।” इससे पहले तालिबान के समर्थन में सोशल मीडिया में पोस्ट करने पर 14 लोगों की गिरफ्तारी पर भी उन्होंने कहा था कि असम पुलिस को बिना किसी भय के कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया है।

ज्ञात हो कि सोशल मीडिया पर तालिबान के समर्थन में पोस्ट करने पर शुक्रवार (20 अगस्त 2021) की रात 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों में मौलाना भी शामिल हैं। इसके अलावा, नदीम अख्तर लश्कर नाम के एक मेडिकल स्टूडेंट और बरपेटा से मजीदुल इस्लाम और फारुख हुसैन खान को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार किए गए लोगों पर UAPA, IT एक्ट और सीआरपीसी की विभिन्न धाराएँ लगाई गईं।

‘शवों के साथ भी सेक्स करते हैं तालिबानी’: अफगान पुलिस में थी महिला, भागकर भारत आई

अफगानिस्तान से भारत आई एक महिला ने खुलासा किया है कि तालिबानी शवों के साथ भी सेक्स करते हैं। अफगानी महिला मुस्कान ने News18 के साथ बातचीत में यह खुलासा किया है। मुस्कान अफगानिस्तान में पुलिस फोर्स में काम करती थीं। वह काबुल में तैनात थीं, लेकिन तालिबान के खौफ से उन्हें देश छोड़ना पड़ा। वह फिलहाल तालिबान के डर से भारत आई है और नई दिल्ली में रह रही है। 

मुस्कान ने खुलासा किया कि तालिबान या तो महिलाओं को उठा कर ले जाते थे या फिर उसे गोली मार देते थे। वह डायरेक्टली शूट करते थे। मुस्कान ने बताया कि तालिबान ने कल ही एक महिला को उठाया था। उनके मुताबिक, तालिबान को हर परिवार से महिलाएँ चाहिए।

अफगानिस्तान में मुस्कान की जान को खतरा था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अपनी नौकरी छोड़कर देश से भागना पड़ा। मुस्कान ने कहा, “जब हम वहाँ थे, हमें कई चेतावनी मिली। यदि आप काम पर जाते हैं तो आप खतरे में हैं, आपका परिवार खतरे में है। एक के बाद वे कोई चेतावनी नहीं देते थे। वे या तो उठा कर ले जाते थे या फिर सीधा गोली मार देते थे।”

उन्होंने आगे कहा, “वे शवों का भी बलात्कार करते हैं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह व्यक्ति जिंदा है या नहीं… क्या आप इसकी कल्पना कर सकते हैं?” मुस्कान ने कहा कि अगर कोई महिला सरकार के लिए पुलिस फोर्स में काम करेगी तो उसका यही हाल होगा।

2018 में भारत आई एक अन्य महिला ने कहा कि उसके पिता की तालिबानियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, क्योंकि वह पुलिस के लिए काम करते थे। उसके चाचा को भी गोली मार दी गई, क्योंकि वह अफगान सेना में एक डॉक्टर के रूप में काम करते थे।

इससे पहले, यह बताया गया था कि अफगानिस्तान में लड़कियों के बोर्डिंग स्कूल के सह-संस्थापक ने तालिबान द्वारा कब्जे के बाद देश में महिलाओं के उत्पीड़न के डर के बीच अपनी छात्राओं और उनके परिवारों की रक्षा करने की माँग करने वाले अपने सभी दस्तावेजों को आग लगा दी। स्कूल ऑफ लीडरशिप अफगानिस्तान (SOLA) की प्रिंसिपल शबाना बसिज-रसिख ने कहा कि उनका उद्देश्य उन्हें खत्म करना नहीं था, बल्कि छात्रों और उनके परिवारों को तालिबान से बचाना था।

8 साल तक यौन शोषण, धर्मांतरण के बाद हिंदू महिला को घर से निकाला, ताला लगे 16 गेट को पार कर पुलिस ने इब्राहिम को दबोचा

मध्य प्रदेश के सीधी जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है, जहाँ इब्राहिम खान नाम के एक शख्स ने एक शादीशुदा महिला का 8 साल तक यौन उत्पीड़न किया और फिर उसका जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया। इस मामले में पुलिस ने आरोपित इब्राहिम खान को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक, सीधी जिले के शिकरी थाना के मझौली की रहने वाली 30 वर्षीय सुनीता साहू ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पीड़िता के द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में बताया गया कि करीब 8 साल पहले वह आरोपित इब्राहिम खान ने संपर्क में आई। इन 8 सालों के दौरान इब्राहिम लगातार पीड़िता का यौन शोषण करता रहा और उसका धर्म परिवर्तन भी करा लिया। आरोपित ने पीड़िता के परिचय पत्र में भी उसका नाम सुनीता की जगह शिफा बेगम करवा दिया और साथ ही पीड़िता के पति की जगह अपना नाम शामिल करा दिया।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि जब उसने आरोपित इब्राहिम से कोर्ट मैरिज करने की बात कही तो उसने पीड़िता और उसकी 9 साल की बच्ची को जान से मारने की धमकी दी। साथ ही आरोपित ने पीड़िता को अपने पास से भगा दिया और कहा कि अब उसका काम पूरा हो चुका है और उसे (पीड़िता) जहाँ जाना है, चली जाए। इसके बाद पीड़िता ने अंततः पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जहाँ आरोपित इब्राहिम खान को आईपीसी की धारा 376, 506 एवं धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया।

हालाँकि आरोपित इब्राहिम खान को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को बड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मुखबिर से सीधी पुलिस को सूचना मिली कि आरोपित इब्राहिम सीधी छोड़कर गुजरात भागने की फिराक में है तब पुलिस ने उसके गुफानुमा घर की घेराबंदी की। तीन आँगन, बड़े-बड़े हॉल और 16 दरवाजों को तोड़ने के बाद आरोपित इब्राहिम खान की गिरफ्तारी की जा सकी। पुलिस ने 15 दरवाजों का ताला खोलते हुए अंततः 16वें कमरे से आरोपित को गिरफ्तार किया।