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अफगानिस्तान में पहला तालिबानी फतवा: लड़के-लड़कियाँ नहीं पढ़ सकेंगे साथ, 70 ‘भारतीयों’ को काबुल एयरपोर्ट से लौटाया वापस

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद तालिबानी शासन ने पहला फतवा जारी कर दिया है। तालिबान ने देश के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों और दूसरे शिक्षण संस्थानों में लड़के-लड़कियों के साथ पढ़ने पर रोक लगा दी है। सरकारी और निजी संस्थानों के साथ तीन घंटे की बैठक करने के बाद तालिबान ने कहा है कि इन सब का कोई मतलब है। को एड एजुकेशन को बंद किया जा रहा है।

दरअसल, अफगानिस्तान में को एड एजुकेशन प्रणाली लागू है। हेरात प्रांत में हुई बैठक के दौरान तालिबान की ओर से अफगानिस्तान इस्लामिक अमीरात के उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख मुल्ला फरीद ने सह शिक्षा व्यवस्था को समाज में बुराइयों की जड़ करार दिया औऱ कहा कि इसे बंद होना होगा। वहीं इस मामले में हेरात के व्याख्याताओं का कहना है कि सरकार विश्वविद्यालय या संस्थान तो अलग-अलग कक्षाओं की व्यवस्था कर सकते हैं, लेकिन जिन निजी संस्थानों में कम लड़कियाँ पढ़ रहीं हैं उनके लिए अलग से कक्षाओं की व्यवस्था करना कठिन है।

हालाँकि, इसके विकल्प के तौर पर फरीद का कहना है कि महिला व्याख्याता अथवा गुणी बुजुर्ग पुरुष लड़कियों को पढ़ा सकते हैं। उन्हें इसकी इजाजत रहेगी। गौरतलब है कि अफगानिस्तान में 40,000 विद्यार्थियों पर 2000 व्याख्याता हैं।

तालिबान ने 70 भारतीयों के जत्थे को भारत आने से रोका

इस बीच खबर सामने आई है कि तालिबान ने भारत आने की कोशिश कर रहे हिंदुओं और सिखों के 70 लोगों के समूह को काबुल एयरपोर्ट से वापस कर दिया है। तालिबान का कहना है कि ये सभी अफगानी नागरिक हैं, इसलिए ये देश नहीं छोड़ सकते हैं। जिन लोगों को वापस लौटाया गया है उनमें अफगानिस्तान संसद के दो अल्पसंख्यक सदस्य भी हैं। इनके नाम सांसद नरिंदर सिंह खालसा और अनारकली कौर मानोयार हैं। विश्व पंजाबी संगठन के अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह के मुताबिक, एयरपोर्ट से वापस किए जाने के बाद लोगों का समूह वापस काबुल के गुरुद्वारे में आ गया है।

मुजफ्फरपुर में एक ही जगह मुर्हरम और सुअरिया मेला: बलि वाले सुअर को पुलिस ने भगाया, आक्रोशित हिंदुओं ने किया हमला

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के देवरिया के रामलीला गाछी बाजार में शुक्रवार (20 अगस्त) को ताजिया जुलूस और सुअरिया मेला के आयोजन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। इसी बीच मेले में पशु बलि रोकने पहुँची पुलिस पर आक्रो​शित हिंदूओं ने लाठी-डंडे व बाँस से हमला कर दिया। इसमें देवरिया थानेदार समेत 5 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए हैं। एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में एक दर्जन से ज्यादा ग्रामीण भी घायल हो गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुहर्रम पर ताजिया जुलूस व सुअरिया मेला के आयोजन को लेकर दो पक्षों में तनाव उत्पन्न हो गया। दोनों तरफ से सैकड़ों लोग वहाँ पर जमा हो गए। दोनों पक्ष के लोगों ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप ​लगाया है।

बताया जा रहा है कि एक पक्ष ने बुधवार (18 अगस्त) की रात जुलूस निकाला था। इसके बाद दूसरे पक्ष ने मेले के आयोजन के लिए पंडाल का निर्माण कराया। इसको लेकर वहाँ तनाव पैदा हो गया था। स्थिति बिगड़ते देख पारू के सीओ और थानाध्यक्ष ने स्थानीय लोगों के साथ बैठक कर किसी को भी आयोजन करने की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन दोनों पक्षों ने इसे मानने से इनकार कर दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि इन्होंने बलि के लिए सुअर लेकर जा रहे ग्रामीण के हाथों से सुअर को छीनकर भगा दिया। इसकी वजह से हिन्दू ग्रामीण आक्रोशित हो गए और पुलिस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। ग्रामीणों ने पुलिस को वहाँ से भगाने के लिए उन पर पथराव करना शुरू कर दिया, जिसमें थानाध्यक्ष संजय स्वरूप, पारु इंस्पेक्टर दिगंबर प्रसाद समेत 5 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए हैं।

इसके बाद पुलिस ने आक्रोशित ग्रामीणों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसमें एक दर्जन ग्रामीण घायल हो गए हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो पुलिस की तरफ से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चार राउंड हवाई फायरिंग भी की गई। हालाँकि, पुलिस इन सभी आरोपों से इनकार कर रही है। इस घटना के बाद घटनास्थल पर भारी तनाव है। घटनास्थल पर पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है।

बता दें कि घायल थानेदार संजय स्वरूप, जमादार निशार अहमद खान, महिला सिपाही संध्या कुमारी, राधा कुमारी समेत पाँचों पुलिसकर्मियों का स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया है। एसएसपी जयंतकांत ने बताया कि दो पक्षों में आयोजन को लेकर तनाव हो गया था। फिलहाल स्थिति काबू में है। हमला करने वालों को चिह्नित कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

रेप में प्यार, जिहाद में आजादी… हिंदू-दलित लड़कियों के जबरन धर्मांतरण-निकाह पर ऐसे डाला जाता है पर्दा

हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अपनी फर्जी पहचान बताकर मुस्लिम युवक हिन्दू दलित लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फँसाकर इस्लाम में जबरन कन्वर्ट करवा रहे हैं।

इससे पहले के वीडियो में हमने आपको बताया था कि कैसे दलित लड़की कविता को इमरान मलिक ने राहुल बनकर अपने झूठे प्यार के जाल में फँसाकर जबरन निकाह कर लिया था। इसको लेकर नितिन ‘रिवाल्डो’ गुप्ता ने अपने नए वीडियो में कविता के साथ क्या-क्या हुआ, इसके बारे में बताया है।

कविता से जोया बनी दलित लड़की के साथ इमरान आए दिन अपने घरवालों से रेप करवाने लगा। कविता ने बताया उसके दो भाई और अब्बा को जब भी मौका मिलता, वो रेप करके चले जाते थे। लड़की के अनुसार, जब उसने रेप के बारे में इमरान को बताया तो उसने भी उसके साथ जबरदस्ती की और उसे पीटा।

इमरान ने उससे कहा, ”अब तो तेरे साथ यही होगा, क्योंकि हम तुझे लाए ही इसलिए हैं चमा₹न।” दलित लड़की ने बताया इमरान रोज अपने साथ तीन से चार दोस्तों को लाने लगा, जो रेप करते थे। इसके लिए वो पैसे भी लेता था।

विस्तार से बताते हुए नितिन गुप्ता ने वीडियो में कहा कि दलितों के इस्लाम में धर्मांतरण के लिए ब्राह्मणों को दोषी ठहराया जाता है, जिसका उद्देश्य वास्तविकता को छुपाना है। जबकि सच तो यह है कि भारत में इस्लामी आक्रमण के बाद अधिकांश धर्मांतरण दबाव में हुए, न कि अपनी इच्छा से।

पूरी वीडियो को इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

नोट: यह एक सीरीज है। इसी सब्जेक्ट (हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन) पर और भी वीडियो आप हमारे यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं।

BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का निधन, CM योगी ने की 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा

उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम कल्याण सिंह का आज (21 अगस्त 2021) शनिवार को निधन हो गया हैं। पीजीआई ने एक बयान जारी करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल माननीय कल्याण सिंह जी का एक लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया। उन्हें 4 जुलाई को संजय गाँधी पी जी आई के आईसीयू में गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था। लंबी बीमारी और शरीर के कई अंगों के धीरे-धीरे फेल होने के कारण आज उन्होंने अंतिम साँस ली।

बता दें कि कल्याण सिंह की तबीयत करीब दो महीने से खराब थी। लखनऊ के एसजीपीजीआई में उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था। कल्याण सिंह की तबियत नाजुक होने की खबर मिलने के बाद सीएम योगी ने अपना गोरखपुर दौरा निरस्त कर दिया था और PGI पहुँच गए थे। CM योगी ने कल्याण सिंह के निधन के बाद प्रदेश में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा के साथ ही श्रद्धांजलि अर्पित की।

कल्याण सिंह यूपी के सीएम रहने के अलावा राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके हैं। उनके निधन की सूचना मिलने पर बीजेपी के मंत्री, सांसद और कई कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। कल्याण सिंह का पार्थिव शरीर लखनऊ में उनके निवास स्थान पर अंतिम दर्शनों के लिए पहुँच गया है।

‘न गम, न पश्चाताप’: राम मंदिर के लिए सरकार बलिदान करने वाला नायक, आसान नहीं है कल्याण सिंह होना

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश जनसंख्या के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा राज्य है। वहीं राजस्थान क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा राज्य है। पहले राज्य के कल्याण सिंह मुख्यमंत्री रहे हैं तो दूसरे राज्य में उन्होंने राज्यपाल का पद संभाला। भाजपा नेता कल्याण सिंह को राम मंदिर के कारसेवकों पर गोली चलवाने का आदेश न देने के लिए भी जाना जाता है। साथ ही हिन्दू धर्म के प्रति उनकी जो प्रतिबद्धता थी, उसके कारण वो जीवन भर कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के रूप में कल्याण सिंह का कार्यकाल एक बार मात्र डेढ़ साल (जून 1991 से दिसंबर 1992) तो एक बार मात्र 5 महीने (सितंबर 1997 से फरवरी 1998) तो तीसरी और अंतिम बार मात्र 1 वर्ष और 9 महीने (फरवरी 1998 से नवंबर 1999) का रहा। टुकड़ों में उनका मुख्यमंत्री का कार्यकाल राजनीतिक व सामाजिक उथल-पुथल के हिसाब से उत्तर प्रदेश के इतिहास के सबसे संवेदनशील अवधियों में से एक गिना जा सकता है।

उनके पहले कार्यकाल के दौरान ही बाबरी विध्वंस हुआ। मुख्यमंत्री बनने के बाद ही उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या जाकर ये संकल्प लिया था कि वहाँ एक भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। अयोध्या को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद उन्होंने तभी शुरू कर दी थी और इसके लिए भूमि अधिग्रहण भी किया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान ही राम मंदिर की ‘आधारशिला’ रखी गई थी।

कल्याण सिंह ऐसे नेता रहे हैं, जिन्होंने बाबरी विध्वंस के बाद राम मंदिर के लिए अपनी सरकार को कुर्बान करने से भी गवारा नहीं किया। उन्होंने भाजपा को 1991 विधानसभा चुनाव में 57 से 221 सीटों तक पहुँचाया। पूर्ण बहुमत की सरकार में वो मुख्यमंत्री थे। लेकिन, उन्होंने बाबरी विध्वंस के बाद इस्तीफा देकर जनता के दरबार में जाना उचित समझा। उनके इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने राज्य की सरकार को भंग कर दिया।

उनका प्रभाव कुछ ऐसा था कि 1993 में उन्होंने अलीगढ़ के अतरौली और कासगंज, दो अलग-अलग जिलों के विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा, और दोनों जगह जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। अतरौली से उनका खास नाता था, जहाँ से वो 10 बार (मार्च 1967 से फरवरी 1980, मार्च 1985 से मई 2007 तक) विधायक रहे। 22 वर्षों तक उन्होंने इस विधानसभा क्षेत्र की सेवा की। वहीं अपने अंतिम संसदीय कार्यकाल के लिए उन्होंने 2009 में एटा को चुना।

ये दोनों क्षेत्र आज भी उन्हें सिर-आँखों पर रखते हैं, तभी उनके बेटे राजवीर सिंह लगातार दो बार से एटा से सांसद हैं और पोते संदीप सिंह 2017 में अतरौली से जीत दर्ज कर के योगी आदित्यनाथ की सरकार में शिक्षा मंत्री का दायित्व संभाल रहे हैं। स्कूलों में भारत माता की प्रार्थना के साथ छात्रों को राष्ट्रवाद की भावना जगाने का काम हो या रोल कॉल के समय ‘यस सर’ की जगह ‘वंदे मातरम्’ कहने पर जोर, उन्होंने छात्रों में देश के प्रति प्यार जगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

दूसरी बार उनकी सरकार कांशीराम और मायावती की पार्टी बसपा के समर्थन से बनी थी। बसपा ने अक्टूबर 1997 में अपना समर्थन वापस ले लिया। लेकिन, कॉन्ग्रेस के 21 असंतुष्ट विधायकों ने अलग पार्टी बना कर कल्याण सिंह की सरकार को समर्थन दिया, जिससे उनकी सरकार बच गई। हालाँकि, जिस नरेश अग्रवाल के नेतृत्व में ये विधायक आए थे, उन्होंने कॉन्ग्रेस को समर्थन दे दिया और जगदंबिका पाल की सरकार में वो उप-मुख्यमंत्री बन बैठे।

लेकिन, इलाहांबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद वो सदन में बहुमत साबित करने में सफल रहे और नरेश अग्रवाल भी वापस भाजपा के साथ आ गए। कल्याण सिंह ने 2004 का लोकसभा चुनाव बुलंदशहर से लड़ा था। इस तरह उन्होंने 4 अलग-अलग जिलों से कई चुनाव लड़े और सभी में जीत दर्ज की। भाजपा के अलावा उन्होंने अपनी पार्टी और निर्दलीय भी चुनाव लड़ा, लेकिन हारे नहीं। बीच में कुछ दिनों के लिए भाजपा से उनका मोहभंग हुआ था, लेकिन जनवरी 2004 में फिर पार्टी में वापस आ गए।

2009 में भी उन्होंने भाजपा से किनारा कर लिया था और अगले ही साल ‘जन क्रांति पार्टी’ का गठन किया, लेकिन 2013 में उन्होंने इस पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें पहले हिमाचल प्रदेश और फिर राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने राजस्थान के राज्यपाल के रूप में 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया। राज्यपाल का कार्यकाल पूरा करते वो फिर भाजपा में शामिल हुए।

कल्याण सिंह राम मंदिर के कारसेवकों पर गोली न चलवाने के अपने फैसले पर हमेशा कायम रहे और कभी भी इसे लेकर कोई दुःख नहीं जताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाबरी विध्वंस को लेकर उनके मन में न कोई पछतावा है, न कोई शोक है, न कोई खेद है और न ही कोई पश्चाताप का भाव है। उन्होंने ये ज़रूर कहा कि बाबरी को बचाने के लिए पूरे सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे, लेकिन अधिकारियों को स्पष्ट आदेश था कि एक भी श्रद्धालु पर गोली नहीं चलनी चाहिए।

कल्याण सिंह लोधी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और उन्हें राजनीति में लाने का श्रेय 1977 में जनता पार्टी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हरिश्चंद्र श्रीवास्तव को जाता है। उनके बेटे सौरभ श्रीवास्तव वाराणसी के कैंट से भाजपा विधायक हैं। बहुत कम लोगों को पता है कि अतरौली में जन्मे कल्याण सिंह को 1962 में ही जनसंघ से विधानसभा का टिकट मिल गया था, लेकिन पहले चुनाव में ुनेहँ हार मिली थी।

मात्र एक बार कॉन्ग्रेस के अनवर खान ने उन्हें 1980 में अतरौली से हराया था, लेकिन 1985 में उन्होंने जोरदार वापसी की। कल्याण सिंह को एक कड़ा प्रशासक माना जाता था। उन्होंने हमेशा कहा कि वो किसी भी जाँच या कार्रवाई के लिए तैयार हैं, लेकिन राम मंदिर का संकल्प बना रहेगा। उन्हें एक दिन के लिए तिहाड़ जेल में भी रखा गया था। विश्लेषक कहते हैं कि अगर परिस्थितियाँ हल्की अलग होतीं तो अटल बिहारी वाजपेयी के बाद भाजपा की जिम्मेदारी उनके कंधे ही आती।

आम आदमी पार्टी के पार्षद का भाई तलाकशुदा महिला से रेप के मामले में गिरफ्तार, लाइसेंस दिलाने के बहाने ले गया था नवसारी

गुजरात के सूरत जिला में आम आदमी पार्टी के पार्षद धर्मेंद्र वावलिया के भाई मेहुल वावलिया को तलाकशुदा महिला के बलात्कार के मामले में मामले में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में पीड़िता की शिकायत के बाद कपोदरा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेहुल ने महिला को उस वक्त अपने जाल में फँसाया जब उसे पता चला कि वह गाड़ी चलाना सीख रही है। मेहुल ने कथित तौर पर महिला से झूठ बोलकर उसे नवसारी चलने के लिए मनाया था। उसने महिला को वहाँ पर लाइसेंस दिलाने का वादा किया था। हालाँकि, नवसारी जाते समय मेहुल ने महिला के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया।

घटना के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने पीड़िता को न्याय दिलाने की माँग को लेकर सूरत के हीराबाग इलाके में आम आदमी पार्टी कार्यालय के बाहर रैली निकाली। बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता सड़कों पर जमा हो गए और पार्षद को उनके भाई द्वारा कथित रूप से किए गए यौन उत्पीड़न के लिए फटकार लगाई। इस बीच भाजपा की महिला विंग भी विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरी और मेहुल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

वहीं इस मामले पर आरोपित मेहुल के भाई आप पार्षद धर्मेंद्र वावलिया ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। धर्मेंद्र ने अपने भाई से दूरी बनाते हुए कहा कि हालाँकि, मेहुल उसका भाई है, लेकिन दोनों सालों से एक-दूसरे के संपर्क में नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर मेहुल दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

धर्मेंद्र ने कहा, “मेहुल मेरा भाई है और वह अब कई सालों से मेरे साथ नहीं है। मैं अपने भाई के लिए कड़ी सजा की माँग करता हूँ, अगर वह किसी भी गलत काम का दोषी पाया जाता है। अगर उसके खिलाफ आरोप सही साबित होते हैं तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। मैं कपोदरा पुलिस और पुलिस आयुक्त से इस तरह के कृत्यों के अपराधियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आग्रह करता हूँ।”

हिंदू आर्मी चीफ सुशील तिवारी को दिल्ली पुलिस ने लखनऊ से किया गिरफ्तार: जंतर-मंतर पर भड़काऊ नारे लगाने का मामला

दिल्ली के जंतर-मंतर पर नारेबाजी करने के मामले में हिंदू आर्मी के प्रमुख सुशील तिवारी (43) को दिल्ली पुलिस ने शनिवार (21 अगस्त 2021) को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। उन पर इसी महीने की 8 तारीख को प्रदर्शन के दौरान मुस्लिमों के खिलाफ नारेबाजी करने का आरोप लगाया गया है।

इस मामले में पुलिस का कहना है कि सुशील तिवारी ने न केवल नारे लगाए थे, बल्कि लोगों को लामबंद भी किया था। हालाँकि, इस मामले में तिवारी ने पूछताछ के दौरान बताया है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय का मैसेज व्हाट्सएप पर देखा था, जिसके बाद ही वो वहाँ पर गए थे।

गौरतलब है कि अश्विनी उपाध्याय समेत इन 6 लोगों को दिल्ली पुलिस ने 10 अगस्त 2021 को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने पुलिस में शिकायत की थी। हालाँकि, बाद में कोर्ट ने उपाध्याय को जमानत दे दी थी। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने अपने फैसले में कहा था कि ऐसा कोई प्रमाण है ही नहीं, जिससे ये पता चल सके के नारे उपाध्याय के कहने पर लगे हों या उनकी उपस्थिति में लगे हों।

अपने फैसले में जस्टिस उद्भव कुमार ने कहा था कि जिस वीडियो को आधार बनाकर अश्विनी उपाध्याय के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, उसमें कहीं भी उपाध्याय के विरोध में कुछ भी नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने माना था कि बंद दरवाजों के पीछे साजिश हुई है और कहा कि चूँकि जाँच अभी अपनी प्रारंभिक अवस्था में है ऐसे में केवल संभावनाओं के आधार पर किसी की स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

बता दें कि नारेबाजी किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153A (विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया था। जबकि, अंग्रेजों के जमाने के कानूनों को ख़त्म करने की माँग करते हुए उक्त विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था।

जन्नत की चाहत में मुहर्रम पर खुदकुशी! 15 साल की राबिया ने अम्मी से शहादत पर पूछा एक सवाल, जवाब ने ले ली उसकी जान

मध्य प्रदेश के इंदौर में मोहर्रम (20 अगस्त) के दिन एक नाबालिग लड़की ने फाँसी लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या करने से पहले से 15 साल की लड़की ने अपनी अम्मी से पूछा था, ”क्या इमाम हुसैन आज ही के दिन शहीद हुए थे? क्या आज जिन लोगों की मौत होगी उन्हें शहादत मिलेगी? वह जन्नत में जाएँगे?” इस सवाल के जवाब में अम्मी ने कहा- हाँ। इस दौरान उसकी अम्मी को इसका बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि उसकी बेटी कुछ ही देर बाद फाँसी लगाकर खुदकुशी कर लेगी। परिवार के लोग उसे फंदे से उतारकर तुरंत अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

यह घटना शहर के रावजी बाजार क्षेत्र के चंपा बाग स्थित हाथीपाला की बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 15 वर्षीय राबिया शेख मोहर्रम पर शुक्रवार देर शाम को अपने पूरे परिवार के रोजा खोलने बैठी थी। अम्मी ने राबिया की पसंद का खाना बनाया था, लेकिन उन्हें कहाँ पता था कि यह खुशी का पल कुछ देर में मातम में बदल जाएगा। परिवार वालों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि रोजा खोलने से पहले केवल एक सवाल उनकी बेटी को हमेशा के लिए उनसे दूर कर देगा। इस घटना के बाद से राबिया के परिवार वाले सदमे में है।

राबिया के अम्मी-अब्बू का कहना है कि कुछ दिन पहले ही उसका 11वीं क्लास में दाखिला करवाया था और दो दिन पहले उसके लिए कॉपी-किताबें खरीद कर लाए थे। वो इससे बहुत खुश थी। हमें समझ नहीं आ रहा है कि उसने ऐसा क्यों किया।

परिजनों ने आगे बताया कि कुछ साल पहले राबिया और उसकी सहेली स्कूल की तरफ से पिकनिक मनाने राऊ सर्कल के पास नखराली धाणी गई थी, जहाँ उसकी सहेली की झूले से गिरने से मौत हो गई थी। इसके बाद से हमारी बेटी बहकी-बहकी बातें करने लगी थी। वो हमेशा कहती रहती थी कि जिंदगी और मौत क्या है? हम कभी भी मर सकते हैं। हालाँकि, ऐसी बातों पर हम उसे डांटते थे, लेकिन सहेली की मौत के बाद से वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थी।

तालिबान एक जंगली कौम, पीएम मोदी से इश्क, योगी की तारीफ: मुनव्वर राना ने FIR दर्ज होने के बाद लिया तगड़ा यू-टर्न

मशहूर विवादित उर्दू शायर मुनव्वर राना ने तालिबान मामले में लखनऊ में केस दर्ज होने के बाद अब यू-टर्न लिया है। राना ने अपने विवादित बयान पर पलटी मारते हुए कहा है कि उनका तालिबान से ज्यादा हथियार भारत में माफियाओं के पास होने वाले बयान को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वह एक शायर हैं और उन्होंने शायराना अंदाज में यह बयान दिया था। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इश्क करते हैं।

समाचार चैनल ‘आजतक’ से बातचीत में शायर मुनव्वर राना ने अपने हथियार वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा, ”ये बात मैंने कही थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि तालिबान एक जंगली कौम है और हिंदुस्तान एक मुल्क! अगर भारत में 10-20 हथियार भी निकलते हैं तो ये मुल्क के लिए बुरी बात है।”

मोदी सरकार में देश के विकास के सवाल पर उन्होंने कहा, ”मैं मोदी जी को बेहद पसंद करता हूँ। मेरी कमजोरी है कि मैं मोदी जी से इश्क करता हूँ। जब मैंने अवॉर्ड वापस किया था तो वो मुझसे काफी नाराज थे, लेकिन मेरी माँ के निधन पर उन्होंने मुझे पत्र लिखा था और मैं काफी शर्मिंदा हुआ।”

गौरतलब है कि अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए राना के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में SC/ST एक्ट और धारा 153A, 295A और 501(1)(B) के अंतर्गत केस दर्ज कर किया था। बीते दिनों मुनव्वर राना ने महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान से की थी। इसके बाद अखिल भारतीय हिन्दू महासभा और सामाजिक सरोकार फाउंडेशन की शिकायत पर केस दर्ज किया था। मुनव्वर राना द्वारा महर्षि वाल्मीकि पर की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए वाल्मीकि समाज ने इसे हिन्दुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया था।

बता दें कि शायर ने महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान से करते हुए कहा था, ”इंसान का कैरेक्टर बदलता रहता है। वाल्मीकि का जो इतिहास था, उसे तो हमें निकालना पड़ेगा न। हमें तो अफगानी अच्छे लगते हैं। वाल्मीकि को आप भगवान कह रहे हैं, लेकिन आपके मजहब में तो किसी को भी भगवान कह दिया जाता है।” राना ने न्यूज नेशन पर पत्रकार दीपक चौरसिया से बात करते हुए कहा था कि वाल्मीकि रामायण लिख देता है तो वो देवता हो जाता है, उससे पहले वो डाकू होता है।

‘हमारी परीक्षा मत लो, सुधर जाओ, पाकिस्तान से बात करो’: महबूबा ने केंद्र को दी अफगानिस्तान जैसा हाल करने की धमकी

जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की अम्मी गुलशन नजीर को प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ के लिए तलब किया था। एजेंसी ने उनसे तीन घंटे तक लगातार पूछताछ की, जिस पर महबूबा ने केंद्र सरकार को अफगानिस्तान जैसा हाल करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका को देखो अफगानिस्तान से बोरिया-बिस्तर बाँधकर भागने पर मजबूर हो गया। इसलिए हम कश्मीरियों की परीक्षा मत लो।

महबूबा का कहना कि कश्मीरी बड़े बहादुर औऱ सहनशील हैं, लेकिन उनके सहनशीलता का बाँध टूटा तो सरकार हार जाएगी। उन्होंने यह बयान घाटी के कुलगाम में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, महबूबा मुफ्ती ने चेतावनी दी है कि अगर पूर्व पीएम अटल बिहारी की डॉक्ट्रिन के तहत पाकिस्तान से बातचीत शुरू नहीं करते हो तो बर्बाद होने में समय नहीं लगेगा।

हिलोरें ले रहा महबूबा का पाकिस्तान प्रेम

पीडीपी नेता ने मोदी सरकार को पाकिस्तान के साथ बातचीत को दोबारा से शुरू करने की नसीहत देते हुए कहा, “मैं बार-बार कहती हूँ कि सुधर जाओ। पड़ोस में देखो क्या हो रहा है। बातचीत शुरू करो नहीं तो देर हो जाएगी।” उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का माँग की। साथ ही कहा कि जम्मू-कश्मीर के टुकड़े करके जो गलती की है उसे सुधारो। अगर लोग सोचते हैं कि ये क्या करेगी तो वे ये जान लें कि एक चीटी हाथी की सूँड में घुस जाए तो उसका हाल बुरा कर देती है।

महबूबा के इस तालिबानी बयान पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उन्हें इस तरह के बयान से बचने की सलाह दी है।

वहीं बीजेपी नेता रवीन्द्र रैना ने कहा कि भारत काफी मजबूत राष्ट्र है और यहाँ पीएम मोदी हैं न कि जो बाइडेन। हम सभी आतंकियों का सफाया करेंगे। बीजेपी नेता ने मुफ्ती को देशद्रोही करार दिया औऱ कहा कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के देशभक्त लोगों का अपमान किया है, वो राज्य में तालिबानी शासन चाहती हैं, लेकिन हमारी सरकार सभी का खात्मा करेगी।

बिना इजाजत निकला मुहर्रम का जुलूस, रास्ता माँगने पर सैकड़ों की भीड़ ने स्कॉर्पियो पर किया हमला, कैश मोबाइल लूटे: देखें वीडियो

बिहार के कटिहार जिले से मुर्रहम के मौके पर उन्मादी इस्लामी भीड़ द्वारा एक स्कॉर्पियो को निशाना बनाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस दौरान लाठी-डंडों से भीड़ ने स्कॉर्पियों पर जमकर हमले किए। उसमें सवार लोगों को पीटा गया। स्कॉर्पियो सवारों की गलती केवल इतनी थी कि उसने इस उन्मादी भीड़ से रास्ता छोड़ने को कह दिया।

स्कॉर्पियो चालक के इतना कहते ही इस्लामी भीड़ को उनके मातम में ये खलल डालना प्रतीत हुआ। इसके बाद जिसको जो मिला उसने उसी से हमला किया। घटना कटिहार के कोढ़ा थाना क्षेत्र में मूसापुर के पास स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या NH-31 की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, डूमर निवासी पीड़ित मोहम्मद मसूद आलम का कहना है कि वह अपनी अम्मी का इलाज कराने के लिए पूर्णिया गया हुआ था। इलाज करा के लौटते वक्त मूसापुर चौक के पास मुहर्रम का जुलूस चल रहा था। जब उनसे रास्ता माँगा गया तो उन लोगों ने लाठियाँ बरसानी शुरू कर दीं। इस बीच उपद्रवियों ने 7000 रुपए नकद औऱ मोबाइल भी लूट लिया। हमले में मसूद की अम्मी समेत उसके तीन अन्य परिजन घायल हुए हैं, जिन्हें कोढ़ा सीएचसी में इलाज के लिए भर्ती कराया गय़ा है।

इस घटना का वीडियो वायरल हो गया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सैकड़ों की संख्या में मुस्लिमों की भीड़ लाठी-डंडों के साथ एक स्कॉर्पियो को घेरकर उस पर डंडे बरसा रही है।

इस बीच घटना का जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँचे पुलिस बल ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। एसडीपीओ अमरकांत झा ने कहा कि मामला अब नियंत्रण में है। उन्होंने जुलूस निकालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। पीड़ित शिकायत पर कोढ़ा थाने में केस दर्ज किया गया है। वहीं जिले के एसपी विकास कुमार ने कहा, “वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। राज्य सरकार द्वारा रोक लगाए जाने के बाद भी सैकड़ों की भीड़ कैसे सड़क पर आ गई इसकी जाँच कराई जाएगी।”