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ये है योगी मॉडल: कोरोना मुक्त हुए यूपी के 17 जिले, 53 जिलों में एक भी नया केस नहीं, रिकवरी रेट पहुँची 98.6%

आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश कोरोना महामारी को मात देकर लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के 17 जिले कोविड मुक्त हो चुके हैं। वहीं, 18 अगस्त 2021 को राज्य में कोविड-19 के 35 नए मामले सामने आए, जबकि 75 में से 53 जिलों में कोरोना का एक भी नया मामला सामने नहीं आया है। राज्य में अब तक 6 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि राज्य ने अब तक 6.97 करोड़ कोरोना केस की जाँच की है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 6.14 करोड़ से अधिक कोविड-19 वैक्सीन के डोज दिए जा चुके हैं। इनमें से 5.18 करोड़ लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है, जबकि करीब 96 लाख लोगों को वैक्सीन की दोनों खुराक मिल चुकी हैं।

प्रसाद ने कहा, “बुधवार (18 अगस्त 2021) तक राज्य में 419 एक्टिव केस थे। बुधवार को 35 नए मामले सामने आए, जबकि 34 मरीज ठीक हो गए। राज्य में एक व्यक्ति की मौत की भी जानकारी सामने आई, जो कि मेरठ का रहने वाला था।” वहीं, राज्य में अब तक 16,85,819 लोग कोरोना को मात दे चुके हैं।

17 जिलों में एक भी एक्टिव केस नहीं

स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 17 जिले ऐसे हैं, जिनमें बुधवार तक शून्य सक्रिय मामले थे। इनमें अलीगढ़, अमेठी, बदायूँ, बलिया, चित्रकूट, देवरिया, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, हमीरपुर, हरदोई, कासगंज, कौशांबी, महोबा, संतकबीर नगर, शामली और श्रावस्ती शामिल हैं।

साभार: Covid 19.org

इसके अलावा 18 अगस्त को जिन जिलों में कोरोना के नए मामले सामने आए हैं, उनमें प्रयागराज में सबसे अधिक(6), उसके बाद आगरा (3) शामिल हैं। बाकी जिलों में या तो एक या दो नए संक्रमित मिले थे। जबकि मुरादाबाद, अलीगढ़, बलिया, सोनभद्र, हापुड़, सीतापुर, रामपुर और बस्ती समेत 53 जिलों में कोई भी नया मामला सामने नहीं आया है।

प्रसाद ने कहा कि भले ही राज्य में कोविड-19 के नए और सक्रिय केसों की संख्या में काफी कमी आई है, लेकिन लोगों को प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए, क्योंकि वायरस कमजोर हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह से समाप्त नहीं किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य में मरीजों के ठीक होने की दर 98.6% है, जबकि एक्टिव केस की दर 0.01% है।

वहीं, अब तक राज्य में 17,09,025 कोविड-19 के मामले दर्ज किए हैं। 16,85,472 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 22,787 लोगों की मौत बीमारी से जुड़ी जटिलताओं से हुई है। इसके अलावा प्रदेश में 419 एक्टिव केस हैं।

देश भर की बात करें तो पूरे देश में 3.5 लाख से अधिक कोरोना के एक्टिव मामले हैं, जिनमें से 1.78 लाख अकेले केरल में हैं। इसका मतलब यह है कि इस दक्षिणी राज्य में देश के आधे से अधिक सक्रिय मामले हैं। वहीं, 58 हजार एक्टिव केस के साथ इस मामले में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर बना हुआ है।

‘तालिबान का समर्थन करने वालों को बेनकाब किया जाना चाहिए’: विधानसभा में गरजे CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में सम्बोधन देते हुए भारत में तालिबान का समर्थन कर रहे लोगों को भी ललकारा। महिलाओं एवं बच्चों के साथ तालिबान की क्रूरता का जिक्र करते हुए यूपी सीएम ने कहा कि ऐसे संगठन का समर्थन करने वालों को समाज के सामने एक्सपोज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी लोग बेशर्मी से महिलाओं एवं बच्चों के साथ क्रूरता करने वाले तालिबान का समर्थन कर रहे हैं, उनके चेहरे एक्सपोज किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक साथ महिलाओं के उत्थान की बात और तालिबान का समर्थन करने वाले लोगों को बेनकाब किया जाना ज़रूरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सम्बोधन में कई विकास योजनाओं की भी बात की। उत्तर प्रदेश में बदली हुई परिस्थितियों की बात करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि सरकार ने भू-माफियाओं से ₹1500 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त करने के साथ ध्वस्त भी की है, क्योंकि यह राज्य की संपत्ति थी।

उन्होंने बड़ी घोषणा की कि भू-माफियाओं ने जहाँ अवैध कब्जे से हवेली खड़ी की थी, वहाँ अब गरीबों के लिए आवास बनेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने किसी की जाति, क्षेत्र, मत और मजहब नहीं देखा, बल्कि गरीबों के हित में कार्य किए। मार्च 2017 से अक्टूबर 2019 तक 2.61 करोड़ शौचालय बनवाए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत वर्तमान यूपी सरकार द्वारा अब तक 40 लाख आवास मुहैया कराए जा चुके हैं।

यूपी सीएम ने कहा कि युवाओं की प्रतिभा से देश नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा, “हमने युवाओं को रोजगार दिया है। उनके स्वावलंबन के लिए प्रदेश का माहौल अच्छा किया है। अब प्रदेश का युवा कहीं भी जाएगा तो गर्व से कहेगा कि हम उत्तर प्रदेश से हैं। गंगा मैया की कृपा प्रदेश पर बरसती है। भगवान श्रीराम व भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ। देश की स्वाधीनता आंदोलन का केंद्र बिंदु उत्तर प्रदेश रहा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने याद दिलाया कि कैसे पर्यटन के क्षेत्र में चौथे-पाँचवें स्थान पर रहा उत्तर प्रदेश आज पूरे देश में अव्वल है। बता दें कि हाल ही में यूपी के कुछ लोगों द्वारा तालिबान का समर्थन करने वाले बयान सामने आए थे। जहाँ सपा सांसद शफीकुर्ररहमान बर्क ने स्वतंत्रता सेनानियों से तालिबान की तुलना कर दी, AIMPLB के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी ने तालिबान को ‘सलाम’ करते हुए बधाई दी।

बंगाल हिंसा पर राजनीतिक बयानों की बेला खत्म: हाईकोर्ट ने दिखाया रास्ता, अब आनाकानी ममता बनर्जी को पड़ सकती है भारी

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद हुई हिंसा के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में हिंसा के दौरान हुई हत्या और बलात्कार की घटनाओं की सीबीआई (CBI) जाँच के आदेश दिए हैं। साथ ही पाँच न्यायाधीशों वाली पीठ ने एक एसआईटी (SIT) के गठन का आदेश दिया है, जो हिंसा के दौरान हुई अन्य आपराधिक घटनाओं की जाँच करेगी। सीबीआई और एसआईटी जाँच न्यायालय की निगरानी में होगी।

उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को आदेश दिया है कि राज्य सरकार जल्द से जल्द हिंसा से प्रभावित नागरिकों के लिए राहत की व्यवस्था करे। साथ ही न्यायालय ने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) पर पक्षपात का आरोप लगाया था। न्यायालय ने सीबीआई और एसआईटी को जाँच की स्टेटस रिपोर्ट 6 हफ्ते के भीतर दाखिल करने का आदेश दिया है।

इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 3 अगस्त को अपने निर्णय को सुरक्षित रख लिया था। न्यायालय ने तीन सदस्यीय एसआईटी की घोषणा भी कर दी जिसके अनुसार आईपीएस अधिकारी सुमन बाला साहू, सोमेन मित्रा और रणवीर कुमार टीम के सदस्य रहेंगे। एसआईटी जाँच की निगरानी उच्चतम न्यायालय के एक अवकाश प्राप्त न्यायाधीश करेंगे।

न्यायालय के इस निर्णय के बाद राज्य में चुनाव के उपरांत हुई हिंसा को लेकर सत्ताधारी और विपक्षी दल के बीच चल रहे आरोपों और प्रत्यारोपों को एक विराम मिलना चाहिए। हिंसा प्रभावित नागरिकों को राज्य सरकार द्वारा राहत की जल्द से जल्द व्यवस्था के लिए मिला न्यायालय का आदेश यह बताने के लिए पर्याप्त है कि ममता बनर्जी की सरकार अब हिंसा को केवल विपक्षी दल का आरोप बताकर खारिज नहीं कर सकती।

न्यायालय के आदेशों और निर्णय से साफ़ हो जाता है कि अदालती कार्रवाई के दौरान राज्य सरकार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पर पक्षपातपूर्ण रवैए का आरोप का कोई ठोस आधार नहीं है। अब यह देखने वाली बात होगी कि उच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद राज्य सरकार का अगला कदम क्या होगा।

ऐसा पहली बार हुआ है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और चुनावी हिंसा पर न्यायालय ने किसी उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं। इसके पहले राज्य में चुनावी और राजनीतिक हिंसा को दशकों से राज्य की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बताकर नजरअंदाज किया जाता रहा है। बहुत समय से इसकी आवश्यकता थी कि चुनाव दर चुनाव हो रही हिंसा पर न केवल बहस हो, बल्कि उस पर लगाम लगाने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच एक न्यूनतम सामंजस्य बने जो राज्य में होनेवाली राजनीतिक हिंसा पर पूरी तरह से लगाम लगाने की दिशा में पहला कदम हो।

ऐसे में इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि न केवल राजनीतिक दल, बल्कि मीडिया और बुद्धिजीवी कभी ऐसी बहस चला ही नहीं सके जो राजनीतिक हिंसा को रोकने की दिशा में पहला कदम होती। आम भारतीय के लिए यह आश्चर्य की बात है कि राजनीतिक विमर्शों के साझेदार कभी इसे लेकर गंभीर दिखे ही नहीं और बड़े आराम से चुनाव के दौरान होनेवाली हिंसा को पश्चिम बंगाल के राजनीतिक संस्कृति बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

उच्च न्यायालय का निर्णय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए क्या लेकर आया है, इस पर बहस होगी और भविष्य में राज्य सरकार के लिए पैदा होने वाली संभावित मुश्किलों की बात होगी पर अब यह आवश्यक है कि मुख्यमंत्री राज्य में एक भयमुक्त राजनीतिक माहौल तैयार करने के प्रयासों में अपना योगदान दें। यह दुखद है कि चुनाव के बाद हुई भीषण हिंसा को रोकने का पहला प्रयास न्यायपालिका के सौजन्य से हुआ। ऐसे में यदि सत्ताधारी दल और सरकार इस प्रयास में अपना योगदान देते हैं तो वह स्वस्थ लोकतान्त्रिक माहौल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

इस दिशा में सत्ताधारी दल की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि लगातार हो रही हिंसा को बार-बार झूठा बताने के सारे प्रयास उसकी ओर से हुए हैं। उसके ऊपर जिम्मेदारी इस वजह से भी बढ़ जाती है, क्योंकि दस वर्षों तक शासन में रहने के बावजूद दल ने वामपंथियों द्वारा शुरू की गई राजनीतिक हिंसा की संस्कृति को रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।

इस वर्ष विधानसभा में मिली जीत के बाद से ममता बनर्जी अपने लिए राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका की खोज में प्रयासरत हैं। इसी मंशा के साथ उन्होंने न केवल दिल्ली की यात्रा की, बल्कि विपक्षी दलों के साथ किसी तरह का सामंजस्य बनाने के लिए काम भी शुरू कर दिया है। आज आए न्यायालय के इस निर्णय के बाद पूरे भारत की दृष्टि उनके अगले कदम पर होगी। सब यह देखना चाहेंगे कि वे न्यायालय के इस निर्णय पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं या क्या कदम उठाती हैं। उन्हें समझने की आवश्यकता है कि चुनाव खत्म हो चुके हैं और वे अब राज्य की मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उन्हें अब जनता से नहीं बल्कि न्यायपालिका से मुखातिब होना है। ऐसे में इस मामले में राजनीतिक बयान महत्वहीन रहेंगे। 

आज साफ़ हो गया है कि ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में यदि अपने राजनीतिक कद को बढ़ाना चाहती हैं तो उनके लिए आवश्यक है कि वे न केवल न्यायालय के निर्णय और आदेशों का पालन करें, बल्कि सीबीआई और एसआईटी की जाँच में पूर्ण सहयोग दें। उनके ऐसा करने के परिणाम क्या होंगे, वह अनुमान और बहस का विषय होगा पर वे यदि ऐसा नहीं कर सकेंगी तो राष्ट्रीय राजनीति में अपने लिए बड़ी भूमिका खोजने के उनके प्रयासों को धक्का अवश्य लगेगा।

‘किसी भी खेल से पहले सेक्स करने से आती है विस्फोटक शक्ति’: 3 स्विमिंग गोल्ड मेडलिस्ट रूस की शिश्किना का दावा

तीन बार की ओलंपिक चैम्पियन रही रूस की अल्ला शिश्किना (32) ने सेक्स को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। स्विमिंग चैम्पियन शिश्किना ने कहा है कि किसी भी प्रतिस्पर्धा से पहले सेक्स करना आपके प्रदर्शन को काफी बेहतर बना देता है। शिश्किना ने दावा किया है कि बढ़ी हुई उत्तेजना से टेस्टोस्टेरोन महिलाओं की मांसपेशियों के लिए काफी फायदेमंद होता है।

अल्ला शिश्किना ओलंपिक खेलों के बाद रूसी मीडिया आउटलेट स्पोर्ट एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया। शिश्किना ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के डॉक्टर से इस बारे में बात की थी कि सेक्स करने पर उनके प्रदर्शन पर क्या असर पड़ सकता है।

एथिलीट ने कहा, “सेक्स को लेकर मैंने डॉक्टरों के शोध पर भरोसा किया और हमारी टीम के डॉक्टर डेनिस से इसको लेकर सलाह भी ली। वैज्ञानिक समुदाय का कहना है कि अगर आपको विस्फोटक शक्ति की आवश्यकता है तो आपको सेक्स अवश्य करना चाहिए।” शिश्किना के मुताबिक, “हर जीव की अपनी खासियतें होती हैं। इसलिए सबसे पहले खुद को सुनने की जरूरत है। इसके बाद अगर आपको लगता है कि सेक्स आपकी मदद करता है तो आगे बढ़ें।”

ज्ञात हो कि शिश्किना ने टोक्यो ओलंपिक में वीमेंस संक्रोनाइज स्विमिंग में गोल्ड मेडल जीता है।

साभार: इंस्टाग्राम

ऑर्गेज्म के बिना सेक्स प्रतियोगिता में करता है मदद

रूसी खिलाड़ी का कहना है कि किसी भी प्रतियोगिता से पहले ऑर्गाज्म के बिना सेक्स करना उन लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है, जिन्हें मांसपेशियों में ताकत की जरूरत होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन तथाकथित ‘खेल क्रोध’ और ‘आक्रामकता’ के लिए भी ज़िम्मेदार है। अगर आपको लगता है कि यह रवैया आपको बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करता है, तो सेक्स से दूर रहने की आवश्यकता है।

मॉस्को में जन्मी ओलंपियन इस मिथक को खारिज करते हुए कहा कि जिन लोगों को लगता है कि बड़े स्तन पानी के ऊपर टिके रहने में मदद करते हैं, वे गलत हैं। एथिलीट ने कहा, “बड़े स्तनों के कारण ट्रेनिंग के दौरान कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।” हालाँकि, बड़े स्तन वाली महिलाओं द्वारा सर्जरी कराने पर असहमति जताते हुए खिलाड़ी ने कहा कि लोगों को ऐसे व्यायाम करने चाहिए, जिनसे मांसपेशियाँ मजबूत हों।

तालिबान राज में बच्चों को कंटीली तारों के पार फेंक रहीं माँ, बर्खास्त हो रहीं महिला एंकर

अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद कैमरे पर ‘समान अधिकारों’ की बात करने वाला तालिबान अब अपना असली चेहरा दिखाने लगा है। काबुल एयरपोर्ट से लेकर जलालाबाद की सड़कों पर तालिबानियों का कहर देखा जा सकता है। इसके अलावा महिलाओं की आजादी को लेकर भी जो बातें तालिबान ऑन टीवी कर रहा है, जमीनी सच्चाई उसके उलट है।

अफगानी लोग, खासकर महिलाएँ वहाँ मजबूर हैं अपनी जिंदगी की भीख माँगने को। इसकी कुछ तस्वीरें काबुल एयरपोर्ट पर देखने को मिली, जहाँ महिलाएँ इतनी भयभीत थीं कि वो बदहवास हालात में विदेशी सैनिकों से अपील कर रही थीं कि उन्हें तालिबान से बचा लिया जाए। वह अपने बच्चे को काँटेदार तार के दूसरी ओर फेंक रही थीं, बिन ये सोचे कि इससे उन्हें चोट लग सकती है।

एयरपोर्ट पर तैनात एक अधिकारी कहते हैं, “सभी माँ(एँ) बहुत परेशान थीं, उन्हें तालिबान मार रहा था। वह चिल्ला रही थीं ‘मेरे बच्चे को बचाओ’ और इतना कहकर वह अपने बच्चे हमारे पास फेंक रहीं थीं। कुछ बच्चे कांटेदार तार पर गिर रहे थे। ये सब बहुत अजीब था। रात होते-होते स्थिति ऐसी हो गई कि शायद ही कोई एक आदमी हो जो उस समय रो न रहा हो।”

द सन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, घटना से जुड़ी वीडियोज भी सामने आई हैं। इनमें देख सकते हैं कि कैसे एक माँ अपना बच्चा तार के दूसरी ओर उछाल रही है, शायद उसे यकीन है दूसरी ओर खड़े विदेशी सैनिक उन्हें बचा लेंगे। मालूम हो कि इससे पहले तालिबानियों ने जलालाबाद में ओपन फायरिंग की थी, जिसमें कम से कम 3 लोगों के मरने और 6 के घायल होने की बात सामने आई थी। इस दौरान कई पत्रकारों से भी मारपीट की गई थी।

महिला एंकर्स से छीनी जा रही नौकरी

गौरतलब है कि तालिबान का आतंक सिर्फ सार्वजनिक स्थलों पर ही नहीं देखने को मिल रहा, बल्कि कार्यस्थलों से लेकर न्यूज चैनलों तक में हड़कंप मचा हुआ है। हाल में तालिबान ने कहा था कि वो महिलाओं को समान अधिकार देने के पक्ष में हैं। हालाँकि, इस दावे की सच्चाई तब सामने आई जब सरकारी टीवी चैनल की एंकर खादिजा अमीन को उनके महिला होने के कारण बर्खास्त कर दिया गया और उनकी जगह पुरुष तालिबानी एंकर को बैठने को कहा गया।

खादिजा अमीन कहती हैं कि तालिबान ने उन्‍हें और अन्‍य महिला कर्मचारियों को हमेशा के लिए नौकरी से निकाल दिया है। 28 साल की अमीन ने कहा, “मैं एक पत्रकार हूँ और मुझे काम करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। अब मैं आगे क्‍या करूँगी। अगली पीढ़ी के लिए कुछ भी नहीं है। हमने पिछले 20 साल में जो कुछ भी हासिल किया है, वह सब खत्‍म हो गया। तालिबान तालिबान हैं, उनके अंदर कोई बदलाव नहीं आया है।”

इसी तरह एक अन्य महिला एंकर शबनम दावरान ने बताया कि हिजाब पहनने और आईडी कार्ड लाने के बाद भी उनको ऑफिस में घुसने नहीं दिया गया। उनसे कहा गया कि अब तालिबान राज आ गया है और उन्‍हें घर जाना होगा। यहाँ ज्ञात रहे कि अफगानिस्तान में तालिबान की एंट्री के बाद लाखों अफगानी महिलाओं को अपना भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है। उन्हें न तो बाहर निकलने की आजादी है और न ही काम करने की। अगर वह बाहर आती हैं तो साथ में कोई पुरुष होना जरूरी है। कहा जाता है कि तालिबानियों का कानून महिलाओं के लिए इतना सख्त कि अगर कोई उसे न माने तो सजा के तौर पर उस पर कोड़े मारे जाते हैं।

‘कानून-व्यवस्था में CBI दखल राज्य के अधिकारों का उल्लंघन’: बंगाल हिंसा मामले में HC के फैसले से TMC नाराज, BJP ने किया स्वागत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की जीत के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर हुई राजनीतिक हिंसा के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) की सरकार के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। उच्च न्यायालय ने हिंसा के दौरान हुए हत्या, बलात्कार और महिलाओं के साथ अपराधों की जाँच सीबीआई को सौंपी है और छह सप्ताह के अंदर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। वहीं, अन्य अपराधों की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीआई जाँच और एसआईटी जाँच की निगरानी वह स्वयं करेगा। हाईकोर्ट के इस फैसले का भाजपा ने स्वागत किया है, जबकि सत्ताधारी टीएमसी ने सीबीआई के दखल को गलत बताया है।

टीएमसी के सांसद सौगात राय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट भी जा सकती है। उन्होंने कहा है, “अगर लॉ एंड ऑर्डर के हर मामले में सीबीआई आती है तो यह राज्य के अधिकारों का उल्लंघन है।” उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकार स्थिति पर सही फैसला करेगी और जरूरत पड़ी तो सरकार सुप्रीम कोर्ट भी जाएगी।”

वहीं, हाईकोर्ट के फैसले का केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। बकौल अनुराग ठाकुर, “सभी को अपनी विचारधारा के प्रसार का अधिकार है लेकिन किसी को भी हिंसा फैलाने की इजाजत नहीं है।”

इस मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल, न्यायाधीश आई पी मुखर्जी, न्यायाधीश हरीश टंडन, न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार की पीठ ने फैसला सुनाया। वहीं, उच्च न्यायालय द्वारा गठित एसआईटी में भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी महानिदेशक (दूरसंचार) सुमन बाला साहू, कोलकाता पुलिस आयुक्त सौमेन मित्रा और रणवीर कुमार को शामिल किया गया है।

राज्य में 2 मई को चुनाव परिणाम तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के पक्ष में आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं व समर्थकों के खिलाफ जम कर हिंसा हुई थी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि अपराध के ऐसे अन्य मामलों की जाँच के लिए एक विशेष टीम करेगी, जिसकी कार्यवाही की निगरानी खुद उच्च-न्यायालय करेगा।

अगले आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को इस जाँच की निगरानी के लिए नियुक्त किया जाएगा। साथ ही अदालत ने पश्चिम बंगाल की TMC सरकार को चुनाव बाद हुए हिंसा के पीड़ितों के लिए तत्काल मुआवजे की व्यवस्था करने के भी आदेश दिए हैं। साथ ही ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)’ के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति को भी अदालत ने नकार दिया।

अदालत के आदेश पर ही NHRC ने एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी का गठन कर के पश्चिम बंगाल भेजा था। अगले 6 सप्ताह के भीतर CBI को SIT को अदालत को अवगत कराना होगा कि उनकी जाँच कहाँ तक पहुँची और जाँच की क्या स्थिति है। डिवीजन बेंच 24 अक्टूबर को इस मामले की अगली सुनवाई करेगा। साथ ही मारे गए भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की ऑटोप्सी रिपोर्ट भी सीलबंद लिफाफे में CBI को सौपे जाने का आदेश दिया गया है।

‘ज्ञानवापी मस्जिद में मिले पूजा का अधिकार, स्थापित हो मूर्तियाँ’: महिलाओं की याचिका पर मस्जिद कमिटी से कोर्ट ने माँगा जवाब

अयोध्या में बाबरी मस्जिद के ध्वस्त होने और राम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला आने के बाद राम मंदिर के निर्माण के साथ ही काशी और मथुरा का मामला भी गरमाता जा रहा है। काशी में बाबा विश्वनाथ की जमीन का अतिक्रमण कर के बनाई गई ज्ञानवापी मस्जिद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि में शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर विवाद जारी है। इसी बीच महिलाओं द्वारा अदालत में याचिका डाल कर काशी के ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा की अनुमति माँगी गई है।

पाँच हिन्दू महिलाओं ने अदालत से अनुमति माँगी है कि उन्हें पुराने मंदिर परिसर में प्रतिमाएँ रख कर पूजा की अनुमति दी जाए। उन्होंने मुग़ल काल में मंदिर की स्थिति में परिवर्तन कर इसे मस्जिद बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि औरंगज़ेब के शासनकाल में बाबा विश्वनाथ के मंदिर को क्षतिग्रस्त किया गया था। वाराणसी सीनियर सिविल जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत में ये मामला दायर किया गया।

अब इस मामले में सिविल कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार, ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंध कमिटी और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट से जवाब माँगा है। ये याचिका अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णुशंकर जैन के जरिए दायर की गई है। रखी सिंह याचिकाकर्ता महिलाओं का नेतृत्व कर रही हैं। इसमें दावा किया गया है कि चूँकि ये मंदिर का ही परिसर है, यहाँ हिन्दू श्रद्धालुओं को दृश्य व अदृश्य देवी-देवताओं की पूजा का अधिकार है।

वकीलोंने कहा कि देवी गौरी के साथ ही भगवान गणेश और हनुमान की मूर्तियों को सजा कर मंदिर में नंदी जी की पूजा करने का अधिकार माँगा गया है। उन्होंने इसे वादी का मूलभूत अधिकार बताते हुए कहा कि इसमें दखल नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वादी की तरफ से एक और याचिका दायर की गई है, जिसमें एडवोकेट कमिश्वर से ऑन द स्पॉट निरीक्षण की रिपोर्ट का निवेदन किया गया है।

इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को भी प्रतिवादी बनाया गया है, इसीलिए कोर्ट ने कहा कि उनका पक्ष सुनना भी ज़रूरी है। प्रतिवादियों पर नोटिस जारी करने की अपील वादी द्वारा 3 दिनों के भीतर की जाएगी। तत्पश्चात आपत्तियों पर विचार किया जाएगा। इसके लिए 10 सितम्बर, 2021 की तारीख़ मुकर्रर की गई है। याचिकाकर्ताओं में लक्ष्मी देवी, सीता शाहू, मंजू व्यास व रेखा पाठक शामिल हैं।

24 सितम्बर को वाद के बिंदुओं का निर्धारण किया जाएगा। ‘विश्व वैदिक सनातन संघ’ के प्रमुख जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी है कि सनातन धर्म पर लगे कलंकों को मिटाने के क्रम में अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत ये मुकदमा दाखिल किया गया है। उन्होंने कहा कि ताजमहल की मुक्ति के लिए भी याचिका दाखिल की जा रही है। ‘माँ श्रृंगार गौरी’ की रोजाना पूजा की अनुमति मिलती है या नहीं, ये देखने लायक है।

याचिका में माँग की गई है कि ‘माँ श्रृंगार गौरी’ का दैनिक दर्शन-पूजन के अलावा अन्य अनुष्ठानों के लिए भी अनुमति मिले। साथ ही मंदिर परिसर में स्थित भगवान गणेश, हनुमान, नंदी एवं अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों को सुरक्षित रखे जाने की भी विनती की गई है। आरोप लगाया गया है कि इन प्रतिमाओं को क्षति पहुँचाई जा रही है, जिस पर तत्क्षण रोक लगनी चाहिए। याचिके के अनुसार, मंदिर परिसर में ही बने ढाँचे को मस्जिद कहा जा रहा है।

CBI और SIT करेगी बंगाल हिंसा की जाँच, हाईकोर्ट करेगा निगरानी: कलकत्ता HC के आदेश से ममता बनर्जी को झटका

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को बड़ा झटका दिया। उच्च-न्यायालय ने गुरुवार (19 अगस्त, 2021) को पश्चिम बंगाल में हुई राजनीतिक हिंसा के मामले की जाँच ‘राष्ट्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)’ को सौंप दी। हत्या, बलात्कार और महिलाओं के साथ हुए अपराधों के इन मामलों की जाँच अब CBI करेगी। मई 2021 में हुई इन घटनाओं की CBI जाँच कलकत्ता उच्च-न्यायालय की निगरानी में होगी।

राज्य में 2 मई को चुनाव परिणाम तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के पक्ष में आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं व समर्थकों के खिलाफ जम कर हिंसा हुई थी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि अपराध के ऐसे अन्य मामलों की जाँच के लिए एक विशेष टीम करेगी, जिसकी कार्यवाही की निगरानी खुद उच्च-न्यायालय करेगा। IPS अधिकारीगण सुमन बाला साहू, सौमेन मित्र और रणबीर कुमार को इस SIT का सदस्य बनाया गया है।

अगले आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को इस जाँच की निगरानी के लिए नियुक्त किया जाएगा। साथ ही अदालत ने पश्चिम बंगाल की TMC सरकार को चुनाव बाद हुए हिंसा के पीड़ितों के लिए तत्काल मुआवजे की व्यवस्था करने के भी आदेश दिए हैं। साथ ही ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)’ के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति को भी अदालत ने नकार दिया।

अदालत के आदेश पर ही NHRC ने एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी का गठन कर के पश्चिम बंगाल भेजा था। अगले 6 सप्ताह के भीतर CBI को SIT को अदालत को अवगत कराना होगा कि उनकी जाँच कहाँ तक पहुँची और जाँच की क्या स्थिति है। डिवीजन बेंच 24 अक्टूबर को इस मामले की अगली सुनवाई करेगा। साथ ही मारे गए भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की ऑटोप्सी रिपोर्ट भी सीलबंद लिफाफे में CBI को सौपे जाने का आदेश दिया गया है।

अदालत में ऐसी कई याचिकाएँ गई थीं, जिनमें TMC के गुंडों पर भाजपा कार्यकर्ताओं व समर्थकों के खिलाफ हिंसा के आरोप लगाए गए थे। इस मामले में 3 अगस्त को ही जजमेंट रिजर्व कर लिया गया था। केंद्र सरकार ने कहा था कि वो अदालत के आदेश पर CBI व NIA जैसी जाँच एजेंसियों की सेवा मुहैया करा सकती है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी NHRC की रिपोर्ट के बाद माना था कि राज्य में चुनाव परिणाम आने के बाद जम कर हिंसा हुई है।

कबाड़ी इमरान को पुलिस ने गाजियाबाद से दबोचा: होटल में पार्टी के बाद दीक्षा मिश्रा की हत्या कर नैनीताल से भागा था

नोएडा की रहने वाली दीक्षा मिश्रा की नैनीताल के एक होटल में हत्या के मामले में फरार आरोपित इमरान खान को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया है। कबाड़ का काम करने वाले इमरान ने अपना नाम ऋषभ तिवारी बताया था और रियल इस्टेट कंपनी में उच्च पद पर काम करने वाली दीक्षा के साथ काफी समय से संपर्क में था।

इमरान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जानकारी दी कि पिछले कुछ महीनों से दीक्षा और इमरान के बीच पैसों को लेकर अक्सर बहस होती थी। 16 अगस्त 2021 को भी इसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई, जिसके बाद इमरान ने गुस्से में आकर दीक्षा की हत्या कर दी। इसके बाद इमरान नोएडा पहुँचा, जहाँ दीक्षा के फ्लैट से उसने अपना सामान लिया और अपने घर गाजियाबाद चला गया।

इमरान की गिरफ्तारी के लिए उत्तराखंड पुलिस ने एक टीम बनाई। इस टीम ने घटना स्थल पर मिली इमरान की आईडी के आधार पर उसे ट्रैक किया और गाजियाबाद के सिहानी गेट के पास स्थित एक फार्मेसी से गिरफ्तार कर लिया।

ज्ञात हो कि नोएडा के होराइजन होम्स एक्सटेंशन की रहने वाली दीक्षा मिश्रा 14 अगस्त 2021 को इमरान और अपने दो अन्य दोस्तों के साथ नैनीताल घूमने गई थी। 15 अगस्त को दीक्षा का जन्मदिन मनाने के बाद सभी ने एक ही कमरे में पार्टी की और उसके बाद अपने-अपने कमरे में चले गए। इसी दौरान इमरान ने दीक्षा की हत्या कर दी और दीक्षा का फोन लेकर फरार हो गया था।

हालाँकि दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार दीक्षा के परिजनों ने लव-जिहाद का आरोप लगाते हुए कहा है कि आरोपित इमरान ने अपना नाम ऋषभ तिवारी बताया था। दीक्षा के भाई अंकुर मिश्रा का कहना है कि जब वह आरोपित इमरान से मिला था तब उसने अपना नाम ऋषभ तिवारी बताया था साथ ही दोस्तों ने भी यह आरोप लगाया है कि आरोपित की फेसबुक आईडी भी ऋषभ तिवारी के नाम से ही थी।

लाल बिकनी पहन कट्टरपंथियों के निशाने पर आईं थी, अब दे रहीं तालिबान को चुनौती: पूर्व ‘मिस अफगानिस्तान’ का भारत से भी कनेक्शन

तालिबान के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए हिम्मत चाहिए होती है। खासकर तब, जब आपका जन्म अफगानिस्तान में हुआ हो। कोई मुस्लिम महिला अगर तालिबान के खिलाफ आवाज़ उठाए, तो इसकी प्रशंसा की ही जानी चाहिए। ‘मिस अफगानिस्तान’ रह चुकीं विदा समदज़ई एक ऐसा ही नाम है। कभी उनके बिकनी पहनने पर अफगानिस्तान में बवाल हो गया था। अब वो अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे से मर्माहत हैं।

जैसा कि हमें पता है, तालिबान शरिया कानून के हिसाब से शासन चलाता रहा है। तालिबानी शासन में कला, फिल्मों और संगीत पर प्रतिबंध रहता है। पिछले 20 वर्षों में इस क्षेत्र में जो भी काम हुआ था, अफगानिस्तान में अब उन सबका भविष्य अधर में दिख रहा है। वो 2011 में ‘बिग बॉस’ के 5वें सीजन का भी हिस्सा रही थीं। वो 2003 में ‘मिस अफगानिस्तान’ चुनी गई थीं। साथ ही वो 1974 के बाद किसी अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी पीजेंट में शामिल होने वाली पहली अफगानी महिला हैं।

वो 2003 में ही ‘मिस अर्थ’ कार्यक्रम में लाल बिकनी में दिखी थीं। इसके बाद अफगानिस्तान में उनकी खूब आलोचना हुई थी। वहाँ के सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके बिकनी पहनने पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि एक महिला को अपने शरीर का इस तरह प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। पश्तून परिवार से ताल्लुक रखने वाली विदा समदज़ई 1996 में ही अमेरिका में शिफ्ट हो गई थीं। उन्होंने कैलिफोर्निया के फुलरटन में स्थित स्टेट यूनिवर्सिटी से स्नातक किया। वो अमेरिका की नागरिकता पाने में भी कामयाब रहीं।

1974 में ज़ोहरा दाऊद के अलावा किसी अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी पीजेंट में हिस्सा लेने वाली वो पहली अफगानिस्तानी महिला हैं। विदा समदज़ई के बिकनी पहनने को अफगानिस्तान में इस्लामी कानून के खिलाफ और अफगानिस्तान की संस्कृति का अपमान बताया गया था। विवाद के बाद उन्होंने भारत आकर बॉलीवुड में हाथ आजमाए। उन्होंने 2009 में ‘रनवे’ नामक फिल्म में भी काम किया। फ़िलहाल चैरिटी चलाने वाली 43 वर्षीय विदा समदज़ई अफगानिस्तान में महिला शिक्षा को लेकर मुखर हैं।

हाल ही में जब तालिबान ने काबुल पर कब्ज़ा किया तो विदा समदज़ई ने इंस्टाग्राम के माध्यम से विरोध जताते हुए कहा कि इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जा सकती है। उन्होंने एक अफगानिस्तानी शिक्षा कार्यकर्ता का बयान शेयर किया, जिसने कहा था कि उसके पास रोने के लिए कोई आँसू ही नहीं बचे हैं। पूर्व ‘मिस अफगानिस्तान’ विदा समदज़ई ने अपने पोस्ट में लिखा था – “अंधकार, बर्बरता, शिक्षा का अभाव, मेरा अफगानिस्तान!”

वहीं उन्होंने अपने ताज़ा इंस्टाग्राम पोस्ट में उस वीडियो को शेयर किया है, जिसमें बेचैन अफगान नागरिकों को काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिका की फ्लाइट का पीछे करते हुए देखा जा सकता है। इस भगदड़ में कइयों की जान भी चली गई थी। विदा समदज़ई ने इस घटना पर लिखा – “निराशा, अविश्वसनीय, उदासी, निराशा, युद्ध से पीड़ित मुल्क, मेरा अफगानिस्तान।” उधर अफगानिस्तान से बड़े पैमाने पर पलायन चालू है।