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लाल बिकनी पहन कट्टरपंथियों के निशाने पर आईं थी, अब दे रहीं तालिबान को चुनौती: पूर्व ‘मिस अफगानिस्तान’ का भारत से भी कनेक्शन

तालिबान के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए हिम्मत चाहिए होती है। खासकर तब, जब आपका जन्म अफगानिस्तान में हुआ हो। कोई मुस्लिम महिला अगर तालिबान के खिलाफ आवाज़ उठाए, तो इसकी प्रशंसा की ही जानी चाहिए। ‘मिस अफगानिस्तान’ रह चुकीं विदा समदज़ई एक ऐसा ही नाम है। कभी उनके बिकनी पहनने पर अफगानिस्तान में बवाल हो गया था। अब वो अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे से मर्माहत हैं।

जैसा कि हमें पता है, तालिबान शरिया कानून के हिसाब से शासन चलाता रहा है। तालिबानी शासन में कला, फिल्मों और संगीत पर प्रतिबंध रहता है। पिछले 20 वर्षों में इस क्षेत्र में जो भी काम हुआ था, अफगानिस्तान में अब उन सबका भविष्य अधर में दिख रहा है। वो 2011 में ‘बिग बॉस’ के 5वें सीजन का भी हिस्सा रही थीं। वो 2003 में ‘मिस अफगानिस्तान’ चुनी गई थीं। साथ ही वो 1974 के बाद किसी अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी पीजेंट में शामिल होने वाली पहली अफगानी महिला हैं।

वो 2003 में ही ‘मिस अर्थ’ कार्यक्रम में लाल बिकनी में दिखी थीं। इसके बाद अफगानिस्तान में उनकी खूब आलोचना हुई थी। वहाँ के सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके बिकनी पहनने पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि एक महिला को अपने शरीर का इस तरह प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। पश्तून परिवार से ताल्लुक रखने वाली विदा समदज़ई 1996 में ही अमेरिका में शिफ्ट हो गई थीं। उन्होंने कैलिफोर्निया के फुलरटन में स्थित स्टेट यूनिवर्सिटी से स्नातक किया। वो अमेरिका की नागरिकता पाने में भी कामयाब रहीं।

1974 में ज़ोहरा दाऊद के अलावा किसी अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी पीजेंट में हिस्सा लेने वाली वो पहली अफगानिस्तानी महिला हैं। विदा समदज़ई के बिकनी पहनने को अफगानिस्तान में इस्लामी कानून के खिलाफ और अफगानिस्तान की संस्कृति का अपमान बताया गया था। विवाद के बाद उन्होंने भारत आकर बॉलीवुड में हाथ आजमाए। उन्होंने 2009 में ‘रनवे’ नामक फिल्म में भी काम किया। फ़िलहाल चैरिटी चलाने वाली 43 वर्षीय विदा समदज़ई अफगानिस्तान में महिला शिक्षा को लेकर मुखर हैं।

हाल ही में जब तालिबान ने काबुल पर कब्ज़ा किया तो विदा समदज़ई ने इंस्टाग्राम के माध्यम से विरोध जताते हुए कहा कि इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जा सकती है। उन्होंने एक अफगानिस्तानी शिक्षा कार्यकर्ता का बयान शेयर किया, जिसने कहा था कि उसके पास रोने के लिए कोई आँसू ही नहीं बचे हैं। पूर्व ‘मिस अफगानिस्तान’ विदा समदज़ई ने अपने पोस्ट में लिखा था – “अंधकार, बर्बरता, शिक्षा का अभाव, मेरा अफगानिस्तान!”

वहीं उन्होंने अपने ताज़ा इंस्टाग्राम पोस्ट में उस वीडियो को शेयर किया है, जिसमें बेचैन अफगान नागरिकों को काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिका की फ्लाइट का पीछे करते हुए देखा जा सकता है। इस भगदड़ में कइयों की जान भी चली गई थी। विदा समदज़ई ने इस घटना पर लिखा – “निराशा, अविश्वसनीय, उदासी, निराशा, युद्ध से पीड़ित मुल्क, मेरा अफगानिस्तान।” उधर अफगानिस्तान से बड़े पैमाने पर पलायन चालू है।

देवबंद में ATS कमांडो सेंटर के विरोध में कॉन्ग्रेस, नेता शाहनवाज आलम ने कहा – ‘बदनाम करने की साजिश’

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने देवबंद में ATS (Anti-Terrorism Squad) का सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया। इसका समाजवादी पार्टी (सपा) ने विरोध किया था और अब कॉन्ग्रेस भी इसके विरोध में आ गई है। UP कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष शाहनवाज आलम ने योगी सरकार के इस निर्णय को देवबंद को बदनाम करने की साजिश बताया है।

शाहनवाज आलम ने कहा कि देवबंद की छवि बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। आलम ने कहा कि देवबंद से निकले हजारों उलेमाओं ने कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया और शहादत दी लेकिन अब देवबंद को बदनाम करने की साजिश वही लोग कर रहे हैं, जिनके पूर्वज अंग्रेजों से माफी माँगते थे और कॉन्ग्रेस नेताओं की जासूसी करते थे।

आलम ने मालेगाँव, मक्का मस्जिद, समझौता एक्सप्रेस आदि में हुए आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग खुद देश विरोधी गतिविधियों के चलते ATS की जाँच के दायरे में हैं, वही अंग्रेजों से लड़ने वाले देशभक्त संस्थानों पर पहरा लगाने की बात कर रहे हैं। इससे पहले योगी सरकार के इस फैसले का समाजवादी पार्टी ने भी विरोध किया था।

समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार पर मुस्लिमों को डराने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। सपा के विधायक दल के नेता रामगोविंद चौधरी का कहना था कि देवबंद इस्लामिक शिक्षा का बड़ा केंद्र है, जो कि दुनियाभर में धार्मिक शिक्षा के लिए प्रसिद्ध है, ऐसे में ATS कमांडो सेंटर स्थापित कर योगी सरकार मुस्लिमों को डरा रही है। रामगोविंद का आरोप था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों की जनसंख्या काफी अधिक है इसीलिए ऐसा किया जा रहा है। बता दें कि देवबंद में ही ‘दारुल उलूम’ स्थापित है, जहाँ से इस्लामी देवबंदी अभियान शुरू हुआ था। तालिबान को भी इसी विचारधारा से प्रेरित बताया जाता है।

ज्ञात हो कि योगी सरकार के देवबंद में ATS कमांडो सेंटर बनाने के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने इसको लेकर जानकारी देते हुए बताया था कि आतंकवाद निरोधी अभियानों में तेजी लाने के लिए केवल देवबंद में ही नहीं, बल्कि मेरठ, बहराइच और श्रावस्ती व जेवर में भी एटीएस की इस तरह की इकाइयों की स्थापना की जा रही है। देवबंद से पहले लखनऊ और नोएडा में ATS का कमांडो ट्रेनिंग सेंटर खोलने की तैयारी चल रही है। ऐसे में देवबंद में ATS कमांडो सेंटर का विरोध मात्र राजनैतिक स्वार्थ और मुस्लिम तुष्टिकरण से प्रेरित नजर आता है।

तालिबान ने भारत के साथ आयात-निर्यात पर लगाई रोक: FIEO; ₹10000 करोड़ का कारोबार व ₹22000 करोड़ का निवेश प्रभावित

तालिबान ने रविवार (15 अगस्त, 2021) को अफगानिस्तान पर कब्जे के साथ ही भारत के साथ आयात-निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। ‘फेडरेशन ऑफ इंडिया एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO)’ के डायरेक्टर जनरल (DG) डॉक्टर अजय सहाय ने कहा कि पाकिस्तान से ट्रांजिट रूट के जरिए कार्गो की आवाजाही को तालिबान ने रोक दिया है। इससे भारत के साथ उसके आयात-निर्यात पर रोक लग गई है।

उन्होंने कहा, “हमने अफगानिस्तान की प्रतिस्थितियों व घटनाक्रम पर करीबी नजर रखी हुई है। पाकिस्तान के ट्रांजिट रूट के जरिए ही वहाँ से वस्तुएँ आती थीं। फ़िलहाल तालिबान ने पाकिस्तान के रास्ते से कार्गो की आवाजाही पर रोक लगाई हुई है। इसीलिए, वहाँ से आयात फ़िलहाल रुका हुआ है।” बता दें कि कारोबार और निवेश के मामले में भारत व अफगानिस्तान का रिश्ता काफी पुराना रहा है।

सहाय ने आगे जानकारी दी, “वस्तुतः हम अफगानिस्तान के सबसे बड़े साझीदारों में से एक हैं। 2021 में हमारा अफगानिस्तान को निर्यात 835 मिलियन डॉलर (6208.39 करोड़ भारतीय रुपए में) का रहा था। हमने अफगानिस्तान से 510 मिलियन डॉलर (3791.95 करोड़ रुपए) के सामान आयात किए। सिर्फ कारोबार ही नहीं, अफगानिस्तान में हमारा बड़ा निवेश भी है। वहाँ हमने 300 करोड़ डॉलर (22 हजार करोड़ रुपए) का निवेश कर रखा है।”

उन्होंने जानकारी दी कि फ़िलहाल अफगानिस्तान में 400 ऐसी परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनसे भारत जुड़ा हुआ है और जिनमें भारत का निवेश है। कुछ समान नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से आयात किए जाते हैं, जो अभी चालू है। दुबई के माध्यम से आने-जाने वाले सामानों को भी कोई दिक्कत नहीं हो रही। चीनी, दवाइयाँ, कपड़े, चाय, कॉफी, मसाले और ट्रांसमिशन टॉवर जैसी वस्तुएँ अफगानिस्तान में भारत से जाती हैं।

वहीं वहाँ से मुख्यतः फल वगैरह भारत आते हैं। ड्राई फ्रूट्स, गम और प्याज अफगानिस्तान से भारत आते हैं। हालाँकि, FIEO को उम्मीद है कि भारत-अफगानिस्तान का कारोबार चलता रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए वो लोग कारोबार नहीं रोकेंगे। उन्होंने कहा कि अगर नई सत्ता को राजनीतिक मान्यता चाहिए तो इसमें भारत का बड़ा किरदार होगा। अगले कुछ दिनों में भारत में ड्राई फ्रूट्स के दाम काफी बढ़ने की आशंका है।

ये उन लोगों को करारा तमाचा है, जो ये कह रहे हैं कि तालिबान से भारत को क्या नुकसान है। आयात-निर्यात रुकने से न सिर्फ भारत को नुकसान है, बल्कि अफगानिस्तान के लोगों को भी इसके दुष्परिणाम झेलने पड़ेंगे। भारतीय और अफगानिस्तानी, दोनों जगह के कारोबारियों को नुकसान होगा। साथ ही हजारों करोड़ रुपयों का भारतीय निवेश भी आधार में लटक गया है। इससे भी दोनों देशों का नुकसान है।

‘अगला राम मंदिर मक्का में, लड़ाई के लिए तैयार’ – अब्दुल भाइयों ने लिखा, 604 दिन जेल में रहे हरीश, अब लौटे भारत

कर्नाटक के उडुपी जिले के रहने वाले हरीश बांगेरा बुधवार (18 अगस्त 2021) को आखिरकार अपने घर वापस आ ही गए। पेशे से AC मैकेनिक बांगेरा को सऊदी अरब में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और इस्लामिक तीर्थस्थल मक्का को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के गलत आरोप में 604 दिन जेल में बिताने पड़े थे। दो भाइयों अब्दुल हुएज और अब्दुल थुएज ने बांगेरा के नाम से फेसबुक पर फर्जी एकाउंट बनाकर ये टिप्पणियाँ की थीं।

बांगेरा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने सऊदी अरब में रहते हुए अपने फेसबुक एकाउंट पर भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और NRC के समर्थन में पोस्ट किया था, जिसके बाद उनकी आलोचना शुरू हो गई थी और उन्होंने पोस्ट हटा कर अपना फेसबुक एकाउंट ही डिलीट कर दिया था लेकिन उसी दौरान उनके नाम से बनाए गए फेसबुक एकाउंट से सऊदी अरब में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और इस्लामिक तीर्थस्थल मक्का को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। इन टिप्पणियों के बाद 22 दिसंबर 2019 को बांगेरा को गिरफ्तार कर लिया गया था।

21 दिसंबर 2019 को हरीश बांगेरा के नाम से चलाए जाने वाले एकाउंट से इस्लाम और सऊदी अरब के प्रिंस के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। ऐसी ही एक पोस्ट में मक्का की तस्वीर पोस्ट की गई और साथ में कैप्शन दिया गया, “अगला राम मंदिर मक्का में होगा। लड़ाई के लिए तैयार हो जाओ।” इसके अलावा भी फोटो पोस्ट की गई थी। जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, तुरंत कार्रवाई करते हुए हरीश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और सऊदी अरब पुलिस ने कुछ घंटों के अंदर ही हरीश को गिरफ्तार कर लिया।

इधर हरीश की पत्नी ने भी उडुपी पुलिस स्टेशन में हरीश के निर्दोष होने और उनके खिलाफ की गई साजिश की आशंका के चलते शिकायत दर्ज कराई। बाद में इस मामले में जाँच करने पर यह पता चला कि अब्दुल हुएज और अब्दुल थुएज ने 19 दिसंबर 2019 को फेसबुक में हरीश के नाम से फर्जी एकाउंट बनाया और दो दिन बाद उस एकाउंट से आपत्तिजनक पोस्ट कर दिए। पुलिस ने वह मोबाइल फोन को भी ट्रेस कर लिया, जिसका इस्तेमाल फर्जी एकाउंट बनाने के लिए किया गया था। फोन अब्दुल थुएज के नाम पर रजिस्टर्ड था। जाँच के बाद पुलिस ने मूदाबिदरी के रहने वाले दोनों भाइयों को अक्टूबर 2020 में गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने जानकारी दी कि बांगेरा के द्वारा CAA और NRC का समर्थन करने के कारण अब्दुल भाइयों ने बदला लेने के उद्देश्य से यह सब किया था।

गिरफ्तार हो सकते हैं मुनव्वर राना, वाल्मीकि पर घटिया कमेंट कर फँसे: राखी सांवत को करना पड़ा था पुलिसवालों को सरेंडर

शायर मुनव्वर राना ने भगवान वाल्मीकि पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। अभिनेत्री राखी सावंत ने भी कभी इसी तरह की टिप्पणी की थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2017 में पंजाब पुलिस ने मुंबई जाकर राखी सावंत को गिरफ्तार किया था। उन्होंने ‘रामायण’ के रचयिता पर टिप्पणी कर के वाल्मीकि समाज की भावनाओं को आहत किया था। शिकायत में कहा गया था कि इससे बड़ी संख्या में लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं।

राखी सावंत ने महर्षि वाल्मीकि को ‘हत्यारा’ बता दिया था और कहा था कि इसके बावजूद उन्होंने रामायण लिखा। अभिनेत्री उस समय उदाहरण दे रही थीं कि कैसे लोगों का व्यवहार और परिस्थितियाँ बदल जाती हैं। 2014 में एक जन्मदिन की पार्टी में गायक मीका सिंह ने राखी सावंत को जबरन किस किया था। इसी क्रम में उन्होंने मीका सिंह की तुलना महर्षि वाल्मीकि से कर डाली। उन्होंने दावा किया था कि महर्षि वाल्मीकि की तरह मीका भी बदल गए हैं और निर्दोष हो गए हैं।

राखी सावंत ने बाद में इसका बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने बचपन से ये कहानी पढ़ी है कि कैसे वाल्मीकि डाकू से संत बन गए। उन्होंने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा था कि उन पर आरोप तय कर के किसी को कुछ नहीं मिलेगा। बाद में उन्होंने महर्षि वाल्मीकि और वाल्मीकि समुदाय के सम्मान की बात कही थी। लुधियाना के एक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें क्यों निशाना बनाया जा रहा, ये नहीं पता।

हालाँकि, तब पंजाब पुलिस ने राखी सावंत की गिरफ़्तारी की बात से इनकार करते हुए कहा था कि उन्होंने खुद ही आत्मसमर्पण किया है। अब शायर मुनव्वर राना ने भी कुछ इसी तरह का बयान दिया है, जिससे उनकी गिरफ़्तारी हो सकती है। मुनव्वर राना ने ‘न्यूज़ नेशन’ पर पत्रकार दीपक चौरसिया से बात करते हुए कहा, “वाल्मीकि रामायण लिख देता है तो वो देवता हो जाता है, उससे पहले वो डाकू होता है।”

उन्होंने महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान से करते हुए कहा, “इंसान का कैरेक्टर बदलता रहता है। वाल्मीकि का जो इतिहास था, उसे तो हमें निकालना पड़ेगा न। हमें तो अफगानी अच्छे लगते हैं। वाल्मीकि को आप भगवान कह रहे हैं, लेकिन आपके मजहब में तो किसी को भी भगवान कह दिया जाता है। वो लेखक थे। उनका काम था रामायण निकला, जो उन्होंने किया।” हालाँकि, इस पर दीपक चौरसिया ने उन्हें टोका भी था।

आपने भी काफी बार ये सुना होगा कि महर्षि वाल्मीकि पहले रत्नाकर नाम के डाकू थे, जो तपस्या के बाद ऋषि बन गए। वाल्मीकि समुदाय का ऐसा नहीं मानना है। पंजाब में बड़ी संख्या में वाल्मीकि समुदाय के लोग रहते हैं। 2009 में ‘विदाई’ नाम के टीवी सीरियल में भी इसी तरह की बात कही गई थी। तब भी विरोध हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निर्माताओं को राहत नहीं दी। हाईकोर्ट ने भी कहा कि महर्षि वाल्मीकि के डकैत होने के कोई पुष्ट सबूत नहीं।

नौवीं शताब्दी तक के किसी भी वैदिक साहित्य में महर्षि वाल्मीकि के डाकू होने की बात नहीं लिखी है। ये बात खुद जज ने कही थी। इसी तरह अरशद वारसी की फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ माइकल मिश्रा’ को भी पंजाब में प्रतिबंधित किया गया था, क्योंकि उसमें भी इसी कहानी को दोहराया गया था। महर्षि वाल्मीकि के ‘अपराधी’ होने की बात से वाल्मीकि समाज के लोग इत्तिफ़ाक़ नहीं रखते और वो इसे अपमानजनक बताते हैं।

ज्वाला देवी मंदिर: अनंतकाल से प्रज्वलित ज्वालाएँ, अकबर ने जिसे हिंदू घृणा के कारण बुझाने की कोशिश की, हुई थी हार

चमत्कार कभी तर्कों और तथ्यों के मोहताज नहीं होते। जिनकी आस्था धर्म में होती है वो इसे स्वीकार कर लेते हैं और जिन्हें विज्ञान में भरोसा है वो कोई न कोई कारण ढूँढ ही लेते हैं, चमत्कारों को परिभाषित करने का। हालाँकि भारत के कई ऐसे मंदिर हैं, जिनके चमत्कार आज भी रहस्य ही बने हुए हैं। ऐसा ही एक मंदिर हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में स्थित है, जहाँ अनंत काल से अग्नि की ज्वालाएँ प्रज्वलित हैं लेकिन इसके पीछे का कोई पुख्ता कारण किसी को ज्ञात नहीं है। इसी चमत्कार के कारण यह ज्वाला देवी जी मंदिर मुगल आक्रांताओं और अंग्रेजों की नजर में चढ़ा, जिन्होंने हिन्दू घृणा के चलते इन ज्वालाओं को बुझाने की बहुत कोशिश की लेकिन हर बार असफल रहे और हिन्दुओं की आस्था की यह ज्योति आज भी जल रही है।

ज्वाला जी का इतिहास

काँगड़ा जिले के ज्वालामुखी कस्बे में स्थित ज्वाला देवी जी मंदिर का इतिहास माता सती के अग्निदाह और भगवान शिव के क्रोध से जुड़ा हुआ है। अपने पिता महाराजा दक्ष के द्वारा जब भगवान शिव का अपमान किए जाने के बाद जब माता सती ने अग्निदाह कर लिया तब उनकी मृत देह को लेकर भगवान शिव क्रोध में आकर तांडव करने लगे। उनके क्रोध को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता की मृत देह को कई भागों में विभक्त कर दिया था तब माता सती की जीभ इस स्थान पर गिरी थी। माना जाता है कि जीभ के साथ माता की दिव्य ज्योति भी इस स्थान पर गिरी, इसी कारण है कि यहाँ 9 ज्वालाएँ प्रकट हुईं, जो आज भी निरंतर प्रज्ज्वलित हैं।

इस मंदिर का वर्णन महाभारत समेत कई अन्य हिन्दू ग्रंथों में किया गया है। मंदिर के गर्भगृह में कुल 9 ज्वालाएँ प्रज्वलित हैं, जिनमें से सबसे बड़ी ज्योति माँ ज्वाला देवी के नाम से जानी जाती हैं। इसके अलावा 8 अन्य ज्वालाएँ माँ अन्नपूर्णा, माँ विध्यवासिनी, माँ चण्डी देवी, माँ महालक्ष्मी, माँ हिंगलाज माता, माँ सरस्वती, माँ अम्बिका देवी एवं माँ अंजी देवी हैं।

माँ ज्वाला देवी के इस मंदिर का सर्वप्रथम निर्माण राजा भूमिचंद के द्वारा कराया गया। इसके बाद 1835 में महाराजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने इस मंदिर का निर्माण कराया। माँ ज्वाला देवी लखनपाल, ठाकुर, गुजराल और भाटिया समुदाय की कुलदेवी मानी जाती हैं, ऐसे में इन सभी के द्वारा भी मंदिर में लगातार निर्माण कार्य कराए जाते रहे हैं।

चमत्कार को झुठलाने के प्रयास

यह हम सभी जानते हैं कि हजारों वर्षों से भारत विदेशी आक्रांताओं का गुलाम रहा, जिनके मन में हिन्दू धर्म के प्रति मात्र घृणा का भाव ही था। इसी भाव से ग्रसित होकर मुस्लिम आक्रांताओं ने हजारों हिन्दू मंदिरों को नुकसान पहुँचाने का कार्य किया। इसी क्रम में ये आक्रांता ज्वाला जी मंदिर भी पहुँचे। मुगल शासक अकबर तो अपनी सेना लेकर ज्वाला जी मंदिर पहुँचा, जिसने मंदिर में सहस्त्राब्दियों से प्रज्वलित इन ज्वालाओं को पानी डालकर बुझाने की कोशिश की। इसके अलावा इन ज्वालाओं को लोहे के तवे से भी ढका गया लेकिन ज्वाला के प्रभाव से तवे में भी छेद हो गया, अंततः उसे हार मान कर ज्वाला जी मंदिर से वापस लौटना पड़ा।

ब्रिटिश काल में अंग्रेजों ने भी उस ऊर्जा का पता लगाने का बहुत प्रयास किया जिसके कारण ये ज्वालाएँ कई वर्षों से लगातार प्रज्वलित हैं लेकिन वो भी असफल रहे। हालाँकि बाद में कई भू-गर्भ विशेषज्ञों ने भी जमीन के अंदर किसी ऊर्जा के भंडार की संभावना जताते रहे लेकिन वो भी कभी इसका पुख्ता प्रमाण नहीं दे सके। ऐसे ही कई प्रयास लगातार किए जाते रहे लेकिन विज्ञान के इस युग में हिन्दुओं की आस्था आज भी ज्वाला जी मंदिर में उसी प्रकार बनी हुई है, जैसे सदियों पहले हुआ करती थी।

कैसे पहुँचें?

गग्गल यहाँ का नजदीकी हवाईअड्डा है, जो ज्वाला जी मंदिर से 46 किलोमीटर (किमी) दूर है। इसके अलावा अमृतसर और चंडीगढ़ के हवाईअड्डे, ज्वाला जी मंदिर से क्रमशः 205 किमी और 195 किमी दूर हैं।

ज्वाला जी मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन कांगड़ा है, जो यहाँ से लगभग 31 किमी दूर है। इसके अलावा पर्यटकों की पसंदीदा जगह होने के कारण ज्वाला जी मंदिर तक पहुँचने के लिए शिमला, धर्मशाला और दूसरी अन्य जगहों से परिवहन के साधन आसानी से उपलब्ध हैं। यहाँ तक कि दिल्ली, लुधियाना, चंडीगढ़ और जम्मू जैसे शहरों से भी ज्वाला जी पहुँचने के लिए यातायात के साधन उपलब्ध हो जाते हैं।

‘वाल्मीकि डाकू था… तालिबान आज़ादी के लिए लड़े’, मुनव्वर राना ने कहा – यहाँ मुस्लिमों को कातिल बताया जाता है

शायर मुनव्वर राना अक्सर अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। अब उन्होंने तालिबान का महिमामंडन किया है। उन्होंने कहा है कि तालिबान ने अपने मुल्क को आज़ाद कराया। इसके बाद ‘न्यूज नेशन’ चैनल पर दीपक चौरसिया से बात करते हुए मुनव्वर राना ने कहा कि दो बड़े दुश्मनों को, जो रूस और अमेरिका से ज़िंदगी भर लड़े हों, तो उन पर कितने जुल्म हुए होंगे इसका भी हिसाब निकाला जाना चाहिए। उन्होंने भगवान वाल्मीकि से तालिबान की तुलना कर डाली।

मुनव्वर राना ने कहा कि तालिबान के जुल्म को लेकर हमें परेशान होने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन अफगानिस्तान के हजार वर्ष का इतिहास कहता है कि हिंदुस्तान ने उनसे हमेशा मोहब्बत की है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ संसद भवन बनाया और कई परियोजनाएँ चलाई, क्या इसे ‘तालिबान फरामोश’ कह देंगे? उन्होंने कहा कि बंदूक तो हमारे आदमी भी लेकर बैठे रहते हैं।

उन्होंने दावा किया कि बलिया के एक नेता ने कहा कि मुनव्वर राना का एनकाउंटर करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ये समझना पड़ेगा कि आतंकवाद क्या है। साथ ही दावा किया कि तालिबान ने भारतीयों के खिलाफ कोई खराब कदम नहीं उठाया और उन्हें जाने के लिए नहीं कहा, लेकिन हालात बिगड़ने पर लोग आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाद में हिंदुस्तानी वहाँ वापस चले जाएँगे। तालिबानी आतंकी हैं या नहीं, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी तक वो आतंकी ही हैं।

‘न्यूज नेशन’ के दीपक चौरसिया से शायद मुनव्वर राना की बातचीत

लेकिन, साथ ही कहा, “वाल्मीकि रामायण लिख देता है तो वो देवता हो जाता है, उससे पहले वो डाकू होता है। इंसान का कैरेक्टर बदलता रहता है। वाल्मीकि का जो इतिहास था, उसे तो हमें निकालना पड़ेगा न। हमें तो अफगानी अच्छे लगते हैं। वाल्मीकि को आप भगवान कह रहे हैं, लेकिन आपके मजहब में तो किसी को भी भगवान कह दिया जाता है। वो लेखक थे। उनका काम था रामायण निकला, जो उन्होंने किया।”

मुनव्वर राना ने कहा कि अफगानियों पर क्या जुल्म हुआ और क्या नहीं हुआ, इस कहानी को बाद के लिए रख कर मौजूदा हालात में क्या होना है ये सोचना चाहिए। उन्होंने पूछा कि भारत तालिबान को क्यों दुश्मन बना रहा है? उन्होंने तालिबानियों को ‘अफगानी’ कहने की वकालत करते हुए कहा कि कल को वो बादशाह होंगे तो हमारा दूतावास वहाँ खुलेगा और वहाँ हमारे लोग व्यापार करेंगे। उन्होंने ‘तालिबान’ को एक ‘अच्छा लफ्ज’ बताते हुए कहा कि इसका मतलब होता है ‘छात्र’, अर्थात पढ़ने वाला।

मुनव्वर राना ने कहा कि जितनी बहस अफगानिस्तान व तालिबान पर हो रही है, उसे हिंदुस्तान की मॉब लिंचिंग और कानपुर में गुंडागर्दी पर होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भारत में मुस्लिमों को कातिल बोला जाता है। उन्होंने इस पर बहस करने को कहा कि क्या कानपुर की वारदात पर बहस हुई, शर्मिंदगी का इजहार किया गया? उन्होंने दीपक चौरसिया से कहा कि आपकी ड्यूटी भारत के लोगों की हिफाजत है, विदेश की बातें करना नहीं।

मुनव्वर राना ने ये भी कहा कि अभी तालिबान ने आपको नहीं सताया न। 9/11 और कंधार हाइजैकिंग में तालिबान का नाम आने पर उन्होंने कहा कि दुनिया ने कुछ साबित नहीं किया न, ये सब तो इल्जाम हैं और ये भी कहा जा सकता है कि सब मुनव्वर राना ने करवाया है। उन्होंने उदाहरण दिया कि सद्दाम हुसैन को आतंकी बताया गया और उसके मुल्क में परमाणु बम होने की बात कही गई, लेकिन वहाँ से कुछ नहीं निकला।

उन्होंने पूछा कि इस पर अमेरिका की आलोचना क्यों नहीं की गई? वहीं ‘नवभारत टाइम्स’ से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अपने मुल्क के लिए लड़ने वाले को आतंकी कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने कहा कि इसे समझने के लिए दूर तक जाना पड़ेगा और हिंदुस्तानी होकर नहीं सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि तालिबान ने अपने मुल्क को आज़ाद कराया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान हजारों वर्षों से हिंदुस्तान का दोस्त है और उनका वीजा भी नहीं लगता।

NBT से बात करते हुए मुनव्वर राना का बयान

उन्होंने अमेरिका और रूस पर अफगानों को परेशान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हमें इससे कोई मतलब नहीं होना चाहिए, हमारा इसमें कोई रोल नहीं। उन्होंने भारत को सही समय का इंतजार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान कभी हिंदुस्तान का हिस्सा रहा था। उन्होंने कहा कि तालिबान का जो व्यवहार है, उसे आतंकी नहीं कह सकते।, वो बस आक्रामक हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में आतंकी की कोई परिभाषा ही नहीं तय की गई है।

मुनव्वर राना ने कहा, “जो पीड़ित लोग हैं वो यही हैं जो अब तक अशरफ गनी के साथ थे, अमेरिका के साथ लड़ रहे थे। आम अफगानी क्यों वहाँ से भागेगा? जो वहाँ ऐश कर रहे थे, इसीलिए उन्हें भागना पड़ा। हिंदुस्तान जल्दबाजी में फैसले करता है। इससे ताल्लुकात खराब होंगे। अफगानिस्तान में बड़ी फ़िल्में बनीं। ‘काबुलीवाला’ एक कहानी है। हिंदुस्तान से वो क्यों झगड़ा मोल लेंगे? किसी से क्यों झगड़ा मोल ले गए?”

वाल्मीकि पर घटिया कमेंट क्यों?

मुनव्वर राना को शायद कानून का ज्ञान नहीं। शायद वो अखबार भी नहीं पढ़ते होंगे। इसी वजह से ऋषि वाल्मिकी की तुलना तालिबान से कर दी, उन्हें डकैत बोल दिया। ज्ञान होता तो ऐसा नहीं करते। राखी सावंत वाले मामले को जरूर जानते। वो मामला, जिसमें राखी सावंत को पंजाब पुलिस के सामने जाकर सरेंडर करना पड़ा था क्योंकि उन्होंने भी ऋषि वाल्मिकी को डकैत और हत्यारा कह दिया था।

‘पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने की देश में खेल की संस्कृति बनाने की बात’: PM मोदी के मुरीद हुए कपिल देव, कहा- आपने दिल जीत लिया

टोक्यो ओलंपिक 2020 में देश का नाम रौशन करने वाले खिलाड़ियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुलाकात करने और उनकी हौसला अफजाई करने की तारीफ पूर्व भारतीय क्रिकेट दिग्गज कपिल देव ने की है। उन्होंने पीएम मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी खेल जगत के खिलाड़ियों का दिल जीत लिया। पीएम मोदी ने ओलंपिक खिलाड़ियों से मुलाकात के दौरान खिलाड़ियों को स्कूलों में जाकर स्टूडेंट्स का हौसला बढ़ाने की सलाह भी दी।

उनके इस ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए प्रधानमंत्री ने उन्हें धन्यवाद दिया औऱ कहा कि वो (कपिल देव) हमेशा खेल को पसंद करने वालों के प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं। इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि हम सभी को मिलकर भारतीय खेलों को एक नई ऊँचाई पर पहुँचाना है।

द स्टेट्समैन में लिखे एक कालम में पूर्व क्रिकेटर ने कहा, “यह पता नहीं कि कभी किसी प्रधानमंत्री ने कहा हो कि वो देश में खेल की संस्कृति बनाना चाहते हैं अथवा नहीं औऱ खेल के इच्छुक युवाओं के माता-पिता से उनके बच्चों को प्रोत्साहित करने की अपील की। ऐसा करने वाले पीएम मोदी शायद पहले व्यक्ति हो सकते हैं। उन्होंने यह दिखाया कि हमारे एथिलीटों में एक्टिव इंट्रेस्ट लेकर ऐसा कैसे किया जाता है।”

पूर्व क्रिकेटर के मुताबिक, जिस तरीके से ओलंपिक के दौरान पीएम ने खिलाड़ियों से बात की उसमें न तो कहीं कोई औपचारिकताएँ थी और न ही कोई भाषण था। चोट के बाद भी रवि दहिया के कुश्ती लड़ने या रवि दहिया के दाँत काटने की घटना के बारे में सवाल करना काफी कठिन था। इसके अलावा पीएम मोदी ने खिलाड़ियों को इस बात की सलाह दी कि एथिलीटों को अपना ध्यान खेल पर लगाना चाहिए।

कपिलदेव ने कहा कि जिस तरह से खिलाड़ियों से बात की, उदाहरण के लिए विनेश फोगाट मेडल नहीं जीत पाने पर गुस्सा हो गई थीं, लेकिन पीएम ने उन्हें अपने गुस्से को काबू करने की सीख दी। उन्होंने ये बताया कि सफलता को सिर पर मत चढ़ने दो और असफलता को अपने दिल पर मत लो। पूर्व क्रिकेट कप्तान के मुताबिक, पीएम की यह सलाह कई पदक नहीं जीतने वाले लोगों के लिए एक बड़ी सीख थी।

‘वो औरतों को मार कर कुत्तों को खिलाते हैं, इंसान नहीं समझते’: तालिबानियों की बर्बरता की कहानी अफगानी महिला की जुबानी

अफगानिस्तान में तालिबान के घुसने के बाद कई लोगों के पुराने जख्म हरे हो गए हैं। इसी सूची में एक नाम अफगानी महिला खटेरा (khatera) का भी है। वर्तमान में दिल्ली में रहने वाली अफगानी महिला खटेरा बताती हैं कि ये तालिबानी महिला के अंगों को कुत्तों को खिलाते हैं। न्यूज 18 से बात करते हुए खटेरा कहती हैं, “तालिबान की नजर में, महिलाएँ जीवित नहीं हैं और न ही इंसानों की तरह साँस ले रही हैं। उनके लिए महिलाएँ सिर्फ माँस हैं, जिसे हमेशा पीटा जाना चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि 33 वर्षीय खटेरा को पिछले वर्ष तालिबानियों ने आँख में चाकू मार कर हमेशा के लिए अंधा बना दिया था। उनकी गलती बस ये थी कि वो घर से निकल कर जॉब करने जाती थीं। तालिबानियों को उनकी यही आत्मनिर्भरता नागवार गुजरी और एक दिन उनके दफ्तर से घर लौटते हुए उनपर हमला बोल दिया।

पूरी घटना अफगानिस्तान के गजनी प्रांत में हुई थी। खटेरा नाम की 33 वर्षीय महिला ने घटना से कुछ समय पहले क्राइम ब्रांच में एक अधिकारी के तौर पर काम करना शुरू किया था। एक दिन पुलिस थाने से काम पूरा करके वह घर लौट रही थीं तभी तालिबानियों ने उन्हें पकड़ा और उनपर गोली चला दी। इसके बाद उनकी आँख में चाकू घोपे गए।

जब महिला को होश आया तो वह अस्पताल में थीं। उन्होंने होश आने पर डॉक्टरों से पूछा कि आखिर वह देख क्यों नहीं पा रहीं? इस पर डॉक्टर्स का जवाब था कि आँख में चोट लगने के कारण बैंडेज लगी हुई है इसलिए वह देखने में असमर्थ हैं। हालाँकि, खटेरा को एहसास हो चुका था कि उनकी आँखें निकाल ली गई हैं। 

खटेरा ने अपने साथ हुई बर्बरता के लिए तालिबानियों के साथ उनके पिता को जिम्मेदार बताया था। उनका कहना था कि उनके पिता ने ही तालिबानियों को उनकी आईडी कार्ड की कॉपी दी थी ताकि यह साबित कर सकें कि वो पुलिस में काम करती हैं। जिस दिन हमला हुआ उस दिन भी महिला के पिता उसे लगातार कॉल कर रहे थे और उससे उसकी लोकेशन पता कर रहे थे।

गजनी पुलिस ने भी यह माना था कि इस हमले के पीछे तालिबानियों का ही हाथ था। उन्होंने खटेरा के पिता को कस्टडी में भी लिया। हालाँकि, तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि उनके समूह को पूरे मामले का पता था लेकिन उनका इसमें कोई हाथ नहीं है क्योंकि यह पारिवारिक मामला था।

पीड़िता खटेरा कहती हैं, “तालिबान पहले हमें (महिलाओं को) प्रताड़ित करते हैं और फिर सजा के नमूने के रूप में दिखाने के लिए हमारे शरीर के साथ बर्बरता करते हैं। कभी-कभी हमारे शरीर को कुत्तों को खिलाया जाता है। मैं भाग्यशाली थी कि मैं इससे बच गई। अफगानिस्तान में तालिबान के अधीन रहना पड़ता है। कल्पना करना मुश्किल है कि वहाँ महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों पर क्या-क्या अत्याचार हुए हैं।” 

वह अपने साथ हुई दिल दहला देने वाली घटना को याद करते हुए कहती हैं कि उनके लिए इलाज के लिए काबुल और दिल्ली जाना संभव था क्योंकि उन पर पैसे थे। लेकिन हर किसी को ऐसी सुविधा नहीं मिलतीं। वहाँ महिलाएँ या जो कोई भी तालिबान की बातें नहीं मानता वह सड़कों पर मारा जाता है।

खटेरा पूछती हैं, “तालिबान महिलाओं को पुरुष डॉक्टरों के पास जाने की अनुमति नहीं देता है, और साथ ही, महिलाओं को पढ़ने और काम करने नहीं देता है। तो फिर एक महिला के लिए क्या बचा है? मरने के लिए छोड़ना? अगर आपको ये भी लगता है कि हम सिर्फ बच्चे पैदा करने की मशीन हैं, तो भी ये कोई कॉमन सेंस नहीं बल्कि शुद्ध नफरत है। बिना चिकित्सीय देखभाल के इन पुरुषों के हुक्म के अनुसार एक महिला अपने बच्चे को कैसे जन्म दे सकती है।”

अपना दर्द बयां करते हुए वो बोलती हैं, “दुनिया के लिए यह कल्पना करना भी कठिन है कि हमने पिछले 20 वर्षों में क्या बनाया है। हमने सपने बुने, जो अब खत्म हो गए हैं। हमारे लिए सब खत्म हो गया है। तालिबान के देश पर अधिकार करने से पहले ही सरकार या पुलिस के साथ काम करने वाली महिलाओं का शिकार किया जा रहा था और उन्हें धमकाया जा रहा था। अब, चिंता महिलाओं को काम करने देने से आगे निकल गई है। इस समय, मुझे डर है कि क्या वे इन महिलाओं को जीवित छोड़ देंगे। वे सिर्फ महिलाओं को मारते नहीं हैं बल्कि जानवरों को उसे खिलवाते हैं। वे इस्लाम पर एक धब्बा हैं।”

वह कहती हैं, “हमारी महिलाओं और युवाओं ने इन 20 वर्षों में कहीं पहुँचने के लिए, एक स्थिर आजीविका खोजने के लिए, उचित शिक्षा प्राप्त करने के लिए, एक लंबा सफर तय किया है। महिलाएँ विश्वविद्यालयों में जा रही थीं। लड़कियों को स्कूल जाते हुए देखना बहुत ही खूबसूरत नजारा था। एक हफ्ते में ही सब गर्त में चला गया। मैंने अपने रिश्तेदारों से यहाँ तक ​​सुना है कि परिवारों ने लड़कियों को तालिबान से बचाने के लिए उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों को जलाना शुरू कर दिया है।”

पीड़ित महिला चिंता जताती हैं कि उनके साथ ये सब उस दौरान हुआ था जब देश में पुलिस काम करती थी। अब तालिबानियों का राज है और उनके बच्चे गजनी में हैं। एंबेसियों ने वीजा देने बंद कर दिए हैं। खटेरा को डर है कि उनके पिता उनके बच्चों को हथियार उठवाने पर मजबूर करके उनकी जिंदगी तबाह कर देंगे।

स्वरा भास्कर के खिलाफ शिकायत दर्ज: हिन्दुओं की भावना को ठेस पहुँचाने का मामला, ‘हिंदुत्व’ की तालिबान से की थी तुलना

बॉलीवुड अभिनेत्री और वामपंथी विचारधार की पोषक स्वरा भास्कर के खिलाफ ‘तालिबानी आतंक’ से हिंदुत्व की तुलना करने वाले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। उन पर धर्म के आधार पर विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और अपने ट्वीट के जरिए सामाजिक शांति को भंग करने का आरोप लगाया गया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील आशुतोष दुबे ने एक ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वरा भास्कर के खिलाफ मुंबई पुलिस और पालघर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आगे कहा कि वह जल्द ही स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी अभिनेत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएँगे।

उनके ट्वीट पर पालघर पुलिस ने जवाब देते हुए मामले की जाँच करने और उचित कार्रवाई करने की बात कही है।

साभार: ट्विटर

दुबे ने साइबर सेल में शिकायत भी दर्ज कराई थी। उन्होंने इस मामले की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी। दुबे ने कहा कि पालघर साइबर पुलिस ने मामले में कार्रवाई करने के बारे में उनकी शिकायत को आगे बढ़ा दिया है। उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए एसपी कार्यालय बुलाया गया है। महाराष्ट्र साइबर सेल ने दुबे की शिकायत का जवाब देते हुए उन्हें दस्तावेजों के साथ निकटतम पुलिस स्टेशन से संपर्क करने को कहा है।

स्वरा भास्कर ने हिंदुत्व और तालिबान के बीच अनुचित तुलना की

हिंदुत्व के खिलाफ किए गए अपमानजनक ट्वीट के कारण भास्कर के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। इससे पहले कल अभिनेत्री ने हिंदुत्व की तुलना तालिबानी विचारधारा से करते हुए उसे अपमानित करने की कोशिश की थी। भास्कर ने हिंदुत्व और उसके फॉलोवर्स के खिलाफ जहर उगलने के लिए तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जे के अवसर का इस्तेमाल किया।

स्वरा भास्कर ने अपने ट्वीट में लिखा था, “हम तालिबान के आतंक पर हैरानी और दुःख जताते हुए ‘हिंदुत्व आतंकवाद’ की तारीफ नहीं कर सकते। ऐसा भी नहीं हो सकता कि हम तालिबान के आतंक पर चुप बैठें और ‘हिंदुत्व आतंकवाद’ पर आक्रोश जताएँ। हमारे मानवीय व नैतिक मूल्य इस पर आधारित नहीं होने चाहिए कि अत्याचारी कौन है और पीड़ित कौन है।” स्वरा भास्कर के इस तरह से हिन्दू धर्म को आतंकवाद व तालिबान से जोड़ने से लोग नाराज़ हो गए।

साभार: ट्विटर

हालाँकि, अभिनेत्री के तालिबान और हिंदुत्व के बीच अनुचित तुलना करने के तुरंत बाद, हिंदुओं और हिंदुत्व विचारधारास को मानने वाले लोगों ने स्वरा को हिंदुत्व के खिलाफ झूठे आरोप लगाने और तालिबान की केवल निंदा करने के लिए रीढ़ की हड्डी नहीं होने का आरोप लगाया। कई अन्य लोगों ने बताया कि कैसे हिंदुत्व की विचारधारा तालिबान द्वारा समर्थित विचारधारा से मौलिक रूप से भिन्न है, यह देखते हुए कि हिंदुओं ने केवल अफगानिस्तान ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के सताए हुए लोगों को स्वीकार किया है और उन्हें अपने में समाहित किया।

तालिबान ने अफगानिस्तान पर किया कब्जा

गौरतलब है कि अफगान सेना के खिलाफ एक महीने तक चले युद्ध के बाद इस्लामी संगठन तालिबान रविवार (15 अगस्त) को काबुल के द्वार पर पहुँच गया था। राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश से भाग जाने के कुछ घंटे बाद वो अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन में भी घुस गया।

तभी से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिनमें लोग अपनी जान बचाने के लिए देश से भागने की कोशिश कर रहे हैं। हवाई जहाज के पहियों पर लटककर भागने की कोशिश कर रहे अफगान लोगों के आसमान से गिरने के दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। तालिबानियों को मनोरंजन पार्क के साथ-साथ अन्य असली दृश्यों में खुद ही मजे लेते हुए भी देखा गया है।