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‘धर्म के खिलाफ नफरत नहीं करेंगे बर्दाश्त’: स्वरा भास्कर पर असम में FIR, तालिबानी ‘प्रेम’ में ‘हिंदुत्व’ के लिए उगला था जहर

तालिबानियों के आतंक की तुलना ‘हिंदुत्व’ से किए जाने पर बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर के ख़िलाफ़ अब हिंदू आईटी सेल ने एफआईआर दर्ज करवाई है। ये एफआईआर असम के हाथीगाँव (Hatigaon) थाने में हुई है। इस मामले पर समूह के रिक्रूटमेंट हेड सांतनु साकिया (Santanu Sakia) द्वारा तहरीर दी गई थी।

असम में हुई एफआईआर की कॉपी

इस मामले में शिकायत मिलने के कुछ घंटे के बाद पुलिस ने एफआईआर कर ली। जानकारी के मुताबिक, स्वरा भास्कर के ख़िलाफ़ धारा 67 ए और 295 ए के तहत केस दर्ज हुआ है। असम के अलावा हिंदू आईटी सेल की ओर से इस मामले पर एक एफआईआर गुजरात में भी दर्ज हुई है।

गुजरात से हुई शिकायत

हिंदू आईटी सेल के सोशल मीडिया कॉर्डिनेटर अक्षित सिंह बताते हैं कि समूह कानूनी तरीके से धर्म के लिए काम करता है। अभी तक इस समूह ने तकरीबन 500 शिकायतें करवाई हैं और इनमें 24 में एफआईआर भी हुई है। इस प्लेटफॉर्म के फाउंडर विकास पांडे और रमेश सोलंकी हैं। स्वरा भास्कर मामले में हिंदू आईटी सेल का पक्ष साफ है कि वो अपने धर्म के विरुद्ध किसी भी प्रकार की नफरत को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

बता दें कि अफगानिस्तान में तालिबानियों के कब्जे के बाद स्वरा भास्कर ने अपने ट्वीट में लिखा था, “हम तालिबान के आतंक पर हैरानी और दुःख जताते हुए ‘हिंदुत्व आतंकवाद’ की तारीफ नहीं कर सकते। ऐसा भी नहीं हो सकता कि हम तालिबान के आतंक पर चुप बैठें और ‘हिंदुत्व आतंकवाद’ पर आक्रोश जताएँ। हमारे मानवीय व नैतिक मूल्य इस पर आधारित नहीं होने चाहिए कि अत्याचारी कौन है और पीड़ित कौन है।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील आशुतोष दुबे ने भी स्वरा भास्कर के खिलाफ मुंबई पुलिस और पालघर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा था कि वह जल्द ही स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी अभिनेत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएँगे। उनके ट्वीट पर पालघर पुलिस ने जवाब देते हुए मामले की जाँच करने और उचित कार्रवाई करने की बात कही थी।

‘माफियाओं का साथ देने वालों के पीछे हमारा बुलडोजर रहेगा’: CM योगी ने कहा, कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों पर गरीबों के बनेंगे आवास

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (19 अगस्त 2021) को राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान गरीबों के लिए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि माफिया के अवैध कब्जे से जिन जमीनों को छुड़ाया गया है, उन पर गरीबों और दलितों के लिए आवास का निर्माण किया जाएगा। यही सच्चा सामाजिक न्याय होगा। सीएम ने कहा कि माफियाओं और अपराधियों के बोझ को राज्य की भाजपा सरकार नहीं ढोएगी।

सदन में अनुपूरक बजट पर भाषण देते हुए मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि खतरनाक अपराधियों और माफियाओं को शरण देने वाले लोग आज महिला सुरक्षा की बात करते हैं, लेकिन वो लोग ये जान लें कि माफियाओं के साथ जो भी रहेगा, उसके पीछे हमारा बुल्डोजर रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, “परिस्थितियाँ अब बदल गई हैं। हमारी सरकार ने 1500 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियों की जब्ती ही नहीं की, बल्कि उन्हें ध्वस्त भी किया है। इन माफियाओं ने जिन जमीनों पर कब्जा किया हुआ था वो राज्य की संपत्ति थीं, गरीबों की संपत्ति थी। अब अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करके गरीबों के लिए आवास बनाए जाएँगे।”

प्रदेश में सत्ता संभालने के तुरंत बाद योगी सरकार प्रदेश में भू-माफियाओं पर नकेल कसने लगी थी। कई भू-माफिया स्वयं राजनीतिक नेता हैं या किसी ना किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं। रामपुर में सांसद आजम खान, मुख्तार अंसारी, विकास दुबे जैसे माफिया सरगनाओं, कई विधायकों और स्वयंभू धर्मगुरुओं द्वारा अवैध रूप से कब्जा की गई सैकड़ों एकड़ भूमि को सरकारी कब्जे में ले लिया गया है।

इसी साल 23 फरवरी 2021 को विधान परिषद के अपने संबोधन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया था कि उनकी सरकार ने 2017 में सत्ता में आने के बाद राज्य में 67,000 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को भू-माफिया के चंगुल से मुक्त कर दिया है।

तालिबान समर्थकों को भी लताड़ा

विधानसभा में सीएम योगी ने अपने भाषण के दौरान अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे का समर्थन करने वालों को जमकर लताड़ा। वहाँ तालिबान महिलाओं और बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहा है। फिर भी यहाँ कुछ लोग बेशर्मी से उसका समर्थन कर रहे हैं। ऐसे लोगों का असली चेहरा सामने लाने की जरूरत है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर रहमान बर्क ने आतंकवादी संगठन को अपना समर्थन दिया था। मंगलवार, 17 अगस्त को सपा सांसद ने कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को वैध बनाने की कोशिश की, क्योंकि उनका मत था कि तालिबानियों ने केवल उस जमीन पर कब्जा कर लिया है, जो मूल रूप से उनकी थी। उनके इस बयान के अगले दिन योगी आदित्यनाथ सरकार ने तालिबान को खुले समर्थन के लिए देशद्रोह, दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में शफीकुर रहमान बर्क के खिलाफ केस दर्ज कर दिया।

योगी सरकार ने 7,301.52 करोड़ रुपए के अनुपूरक बजट की घोषणा की

राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत राज्य सरकार ने राज्य के अतिरिक्त व्यय को पूरा करने के लिए 7,301.52 करोड़ रुपए के अनुपूरक बजट की घोषणा की है। इसमें से 3,000 करोड़ रुपए युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए उन्हें डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के लिए आवंटित किए गए हैं।

वकीलों के कल्याण के लिए भी फंड की व्यवस्था की गई है। जबकि, प्रयागराज में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 5.01 करोड़ रुपए व बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के नाम पर एक स्मारक और सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण के लिए धन आवंटित किया गया है।

राज्य सरकार ने जुलाई 2021 से सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को बढ़ाकर 28% (केंद्र के आदेश के अनुसार) कर दिया है। सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं / आंगनबाड़ी सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि करेगी। इसके अलावा, यूपी सरकार 3 हजार करोड़ रुपए की योजना के तहत एक करोड़ छात्रों का चयन करेगी। छात्रों को पढ़ाई के लिए टैबलेट या स्मार्टफोन दिए जाएँगे।

राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार का ₹7301.52 करोड़ का अनुपूरक बजट ₹ 5.50 लाख करोड़ के वार्षिक बजट का केवल 1.33% है। उन्होंने गुरुवार 19 अगस्त 2021 को बजट पेश करने के बाद कहा, “युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ लोक कल्याणकारी योजनाओं, चल रही परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।”

‘तालिबान में कुछ न कुछ बात तो है’: देवबंद के मुफ्ती से लेकर मंत्री रहे मौलाना तक… भारत में बढ़ रहे मुरीद

अफगानिस्तान में तालिबान का शासन लौट आया है। साथ लौटा है इस्लामी कट्टरपंथ का दौर। औरतों के अधिकारों का दमन। सरेआम आम नागरिकों पर फायरिंग, बुर्का नहीं पहनने पर हत्या, सेक्स स्लेव बनाने के लिए लड़कियों को घरों से उठाने की खबरें लगातार आ रही हैं। जान बचाने के लिए अफगानी नागरिक किसी भी कीमत पर मुल्क से निकलना चाहते हैं। दूसरी ओर देवबंद से प्रभावित बताए जाने वाले तालिबान के मुरीद भारत में बढ़ते जा रहे हैं।

सपा के सांसद हों या ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता या फिर देवबंद के मुफ्ती अथवा मंत्री रहे मौलाना, सब के सब तालिबान की खुलकर प्रशंसा करने में लगे हैं। तालिबान की पीठ थपथपाने वाले ताजा नाम हैं- देवबंद के मुफ्ती और फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना अरशद फारुकी और पूर्व मंत्री मौलाना मसूद मदनी।

सुनिए, मुफ्ती अरशद फारुकी को (साभार: आजतक)

फारुकी ने तालिबान पर गर्व करते हुए कहा कि जिस तरीके से तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी सत्ता स्थापित कर ली है वह बड़े ताज्जुब की बात है। उन्होंने कहा कि तालिबानियों की संख्या साठ से पैंसठ हजार है, लेकिन सामने साढ़े तीन लाख अफगानियों की एक ऐसी फ़ौज थी जिसे अमेरिका ने ट्रेनिंग दी थी, ऐसे में अमेरिका और अफगानी फौजों की हार यह बताती है कि तालिबान में कुछ न कुछ बात तो है।

पूर्व मंत्री मौलाना मसूद मदनी ने भी तालिबान का समर्थन किया है और कहा है कि तालिबान इस बार बदलकर आए हुए हैं। मदनी यह कहना चाह रहे थे कि इस बार जो तालिबान अफगानिस्तान में है वह पहले से अलग है। इसके अलावा मदनी ने यह भी कहा कि भारत को तालिबान से बात करनी चाहिए और उनको मान्यता देनी चाहिए। मदनी ने काबुल एयरपोर्ट पर देखे गए भगदड़ के दृश्यों पर कहा कि कुछ लोगों ने इस घटना का हौव्वा बना दिया है और एयरपोर्ट पर जो भी हुआ उसकी जिम्मेदारी अमेरिका की है।

उनसे पहले सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी ने भी तालिबान का समर्थन किया था। नोमानी ने कहा कि एक निहत्थी कौम ने सबसे मजबूत फौजों को शिकस्त दी है। काबुल के महल में वे दाखिल होने में कामयाब रहे और उनके दाखिले का अंदाज पूरी दुनिया ने देखा। नोमानी ने तालिबान की तारीफों के पुल बाँधते हुए आगे कहा, “उनके कोई बड़े बोल नहीं थे। ये नौजवान काबुल की सरजमीं को चूम रहे हैं। मुबारक हो। आपको दूर बैठा हुआ यह हिंदी मुसलमान सलाम करता है। आपके हौसले को सलाम करता है। आपके जज्बे को सलाम करता है।”

सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क तो और भी आगे निकल गए और उन्होंने तालिबानियों की तुलना भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों से कर डाली। बर्क ने कहा था, ”तालिबान एक ऐसी ताकत है, जिसने रूस और अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों को भी अपने देश पर कब्जा नहीं करने दिया। अब तालिबान अपने देश को आजाद कर उसे चलाना चाहता है, यह उसका आंतरिक मामला है। भारत में भी अंग्रेजों से पूरे देश ने लड़ाई लड़ी थी।”

आपको बता दें कि देवबंद में ही ‘दारुल उलूम’ स्थापित है, जहाँ से इस्लामी देवबंदी अभियान शुरू हुआ था। तालिबान को भी इसी विचारधारा से प्रेरित बताया जाता है। देवबंदी स्कॉलर समी-उल-हक को ‘फादर ऑफ तालिबान’ कहा जाता है और यही समी-उल-हक, दारुल उलूम हक्कानिया के दूसरे चांसलर थे। दारुल उलूम हक्कानिया की स्थापना भी देवबंदी विचारधारा के आधार पर हुई थी।

11 साल पहले इरफान के लिए रिजवाना बनी थी अंतिमा शेखावत, अब बीच सड़क चाकुओं से गोद डाला

राजस्थान के कोटा के दादाबाड़ी इलाके में अंतरधार्मिक विवाह के 11 साल बाद समुदाय विशेष के युवक ने अपनी 27 वर्षीय बीवी की बीच सड़क पर चाकू घोंप कर हत्या कर दी। घटना बुधवार (अगस्त 18, 2021) शाम की है। पुलिस आरोपित को आज (अगस्त 19, 2021) सुबह गिरफ्तार कर चुकी है। मृतक की बहन ने दावा किया है कि इरफान नामक युवक उसकी बहन अंतिमा शेखावत उर्फ रिजवाना को शादी करके प्रताड़ित कर रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 11 साल पहले विज्ञान नगर निवासी अंतिमा शेखावत ने घर से भाग कर इरफान से निकाह किया था। बाद में उसका नाम रिजवाना हो गया। दोनों के तीन बच्चे हुए। लेकिन, कुछ समय बाद इरफान उससे मारपीट करके उसे तंग करने लगा। रोज-रोज झगड़े से तंग आकर 2 माह पहले ही अंतिमा उर्फ रिजवाना ने इरफान से अलग रहने का फैसला किया और तलाक फाइल करके बालाकुण्ड इलाके में किराए पर रहने लगी।

बुधवार को जब अंतिमा अपनी बहन के घर दादाबाड़ी गई तो वहाँ से अपनी 12 साल की भतीजी को लेकर किसी काम से बाहर निकली। इसी दौरान इरफान स्कूटी से आया और किराने की दुकान के सामने उसने चाकू से उस पर हमला कर दिया। खून से लथपथ अंतिमा वहीं पर गिर गई। इरफान ने उसके गले और छाती पर चाकू घोंपा। इस घटना में अंतिमा के साथ खड़ी बच्ची के हाथ पर भी चोटें आईं। आनन-फानन में उन्हें पास के अस्पातल ले जाया गया लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत करार दे दिया। 

अंतिमा की बहन अनीता बताती हैं कि 2 महीने पहले भी इरफान ने उसके सिर पर बल्ले से मारा था, जिसके कारण उसके सिर पर काफी चोटें आईं। इसके अलावा वह उस पर बीड़ी सिगरेट फेंकता था, उसके शरीर पर काफी जलने के निशान थे। अनीता के मुताबिक अंतिमा को इरफान इतनी बुरी तरह पीटता था कि उसके दाँत भी टूट गए थे। इतना ही नहीं दो साल पहले तो इरफान ने अंतिमा को गोवा में 1.2 लाख रुपए में बेचने की कोशिश भी की थी। लेकिन तब उसने इरफान को माफ कर दिया और उसके साथ रहना जारी रखा।

जानकारी के मुताबिक, अंतिमा 10 बहनों में 9वें नंबर पर थीं। 17 साल की उम्र में उसने इरफान से शादी की थी। घटना को लेकर अनीता कहती हैं, “अंतिमा नाबालिग थी इसलिए चंगुल में फँस गई। जब वह भागी थी तो हम दुखी थे। हम क्या करते हमारी बहन थी। हमने उसे गले लगा लिया था। पैसे भी देते थे, खर्चा भी चलाते थे। इरफान, उसको परेशान करता था और बहनों से पैसे लाने के लिए दबाव डालता था। फिर भी वह उसके साथ ही रही।” 

इंडिया टुडे ने तालिबान के बारे में बोलते हुए अरविंद केजरीवाल की तस्वीर दिखाई, नेटिजन्स ने राजदीप सरदेसाई को दी बधाई: देखें वीडियो

इस्लामिक आतंकी संगठन तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में कब्जे के बाद वहाँ महिलाओं के साथ किस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, इसी को लेकर इंडिया टुडे समूह एक शो चला रहा था, लेकिन शो के दौरान इंडिया टुडे ने एक गलती कर दी। इसके बाद से ही उसे ट्विटर पर ट्रोल किया जा रहा है। दरअसल, राजदीप सरदेसाई ने तालिबान के शासन में महिला अधिकारों पर एक शो की मेजबानी करते हुए गलती से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की एक तस्वीर इस सवाल के तहत दिखा दी कि “क्या तालिबान महिलाओं पर लगाए अपने पहले के प्रतिबंधों को कम करेगा?”

न्यूज चैनल की इस गलती को लोकप्रिय ट्विटर हैंडल ‘बेफिटिंग फैक्ट्स’ द्वारा उजागर किया गया। इसके बाद से नेटिज़न्स को एक कंटेंट मिल गया और वो केजरीवाल और ‘पत्रकार’ राजदीप सरदेसाई दोनों का मज़ाक उड़ाते हुए मज़ेदार प्रतिक्रियाएँ पोस्ट कर रहे हैं।

जगजीत नाम के एक ट्विटर हैंडल ने कहा, “तालिबान भी मुफ्त बिजली दे रहा है, इसलिए राजदीप कंफ्यूज हो गया होगा (राजदीप कंफ्यूज हो गए होंगे)।”

एक अन्य यूजर ने राजदीप को सच दिखाने के लिए बधाई दी।

आलोक शर्मा नाम के एक नेटिजन ने कहा कि लगता है कि केजरीवाल ने वहाँ भी विज्ञापन देना शुरू कर दिया।

इस बीच एक अन्य ट्विटर यूजर सत्यम सिंह ने हिटलर और ओसामा बिन लादेन के मानवीय पक्ष को उजागर किया। उन्होंने ट्वीट किया, “हिटलर भी मानवता में विश्वास करते थे, केजरीवाल दिल्ली के कल्याण के लिए लगातार काम कर रहे हैं, ओसामा बिन लादेन परोपकारी थे, राजदीप सरदेसाई पत्रकारिता कर रहे हैं।”

हालाँकि, इससे पहले भी इसी महीने की शुरुआत में राजदीप सरदेसाई को उनकी ‘रसगुल्ला’ वाली टिप्पणी के लिए नेटिज़न्स द्वारा बेरहमी से ट्रोल किया गया था। सरदेसाई से जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कड़े सवाल नहीं पूछने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि अगर उन्होंने ममता बनर्जी से बंगाल में चुनाव के बाद हुए जनसंहार के बारे में पूछा होता, तो उन्हें ममता की जीत के जश्न के तौर पर ‘रसगुल्ला’ (एक पारंपरिक बंगाली मिठाई) खाने को नहीं मिलता।

‘भूतपूर्वं न किल्विषम्’: 8वीं सदी के बाद प्रचलित हुई वाल्मीकि को ‘डाकू’ बताने वाली कथा, अलग-अलग थे ‘रत्नाकर’ और ‘अग्निशर्मा’

ये विवाद आज का नहीं है। ये सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसने ‘रामायण’ के बारे में न सुना हो। भारत व भारत से जुड़े कई देशों में सदियों से राम-रावण और सीता की कथा सुनाई जाती रही है। ‘रामलीला’ हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग रहा है। महर्षि वाल्मीकि, जिन्हें आदिकवि भी कहा गया है – उन्होंने ‘रामायण’ की रचना की थी। विवाद इस पर होता रहा है कि क्या महर्षि वाल्मीकि पहले डाकू थे?

सबसे पहले तो ये जान लीजिए कि जो डाकू वाली कथा प्रचलित है, उस तरह की कई कथाएँ हमें पुराणों व हिन्दू साहित्य में मिलती हैं। किसी ब्राह्मण का पापी हो जाना, फिर किसी घटना के कारण पश्चाताप और फिर उसका कुछ श्रेष्ठ कर्म कर के यशस्वी हो जाना – इस तरह की कथाएँ पुराणों में भी हैं। अब वाल्मीकि एक आदिकवि ही थे या डाकू वाले कोई अलग ऋषि थे, इस पर भी संशय है। फिर भी, जो प्रमाण हैं उन्हें देखना चाहिए।

‘दलित साहित्य’ पर शोध कर चुके दिवंगत लेखक ओमप्रकश वाल्मीकि की मानें तो महर्षि वाल्मीकि पहले डाकू नहीं हुआ करते थे। पंजाब में आपको कई जगह ‘वाल्मीकि मंदिर’ मिलेंगे। इस समाज के लोगों ने विदेशों में भी ऐसे मंदिर बनवाए हैं। यहाँ तक कि ‘रामायण’ में उन्होंने उन्होंने अपने जीवन के बारे में कुछ नहीं बताया है। ‘रामायण’ का रचनाकाल क्या है, यहाँ हम इस विवाद में भी नहीं पड़ेंगे क्योंकि इसे लेकर इतिहासकारों व सनातन विद्वानों में अलग-अलग राय हैं।

यहाँ तक कि ‘तैत्तिरीय प्रशिशाख्य’ में भी तीन जगह वाल्मीकि का जिक्र मिलता है। कई इतिहासकारों ने पाया है कि ये आदिकवि से भिन्न हैं। इस आधार पर ओमप्रकाश वाल्मीकि अंदाज़ा लगाते हैं कि उस समयकाल में ये नाम प्रचलित रहा होगा। महाभारत में कई जगह वाल्मीकि का उल्लेख है और उन्हें कवि कहा गया है। सबसे पहले हम बात करते हैं कि महर्षि वाल्मीकि के पहले डाकू होने की प्रचलित कथा क्या कहती है।

महर्षि वाल्मीकि का असली नाम अधिकांश साहित्य में ‘अग्निशर्मा’ ही मिलता है, ‘रत्नाकर’ नहीं। लोकप्रिय कवि नाभादास द्वारा लिखित ‘भक्तमाल’ में 200 भक्तों की कहानी है। सन् 1585 में लिखी गई इस पुस्तक में जो वाल्मीकि की कहानी है, उसमें बताया गया है कि अग्निशर्मा के परिवार को अकाल की वजह से पलायन करना पड़ा था, जिसके बाद जंगल में उनकी संगत डाकुओं से हो गई। उसने वहाँ से गुजर रहे सप्तर्षियों को भी लूटना चाहा।

लेकिन, सप्तर्षियों में से एक अत्रि मुनि ने उससे पूछा कि जिस परिवार के लिए वो ये सब कर रहा है, क्या वो उसके पाप में भागीदारी लेंगे? पूछने पर परिवार के सभी सदस्यों ने इसे नकार दिया। तब ‘अग्निशर्मा’ की आँखें खुलीं और उसे मंत्र दिया। घोर तपस्या से उसके चारों तरफ ‘वल्मीक’, अर्थात दीमक का आवरण हो गया। ऋषियों ने उन्हें इस आवरण से निकाल कर इसीलिए उनका नाम ‘वाल्मीकि’ रखा। उन्होंने शिव की आराधना की और ‘रामायण’ की रचना की।

एक अन्य कथा है जिसमें वाल्मीकि राम की जगह ‘मरा-मरा’ जपते हैं और इस कथा में अत्रि मुनि की जगह नारद होते हैं। लेकिन, जिस काल की ये बात है उस समय संस्कृत में ‘मरा’ कोई इस तरह का शब्द ही नहीं था, ऐसे में इस कथा पर संशय उत्पन्न होना स्वाभाविक है। हाँ, ये ज़रूर है कि इन कथाओं में ‘वल्मीक (दीमक)’ के आवरण की बात ज़रूर पता चलती है। श्रीभागवतानंद गुरु ने अपनी पुस्तक ‘उत्तरकाण्ड प्रसंग एवं संन्यासाधिकार विमर्श‘ में इन कथाओं की चर्चा की है।

इसी तरह की एक कथा ‘वैशाख’ नाम के ब्राह्मण की भी है, जिसके पापमुक्त होने के बाद उसके ‘वाल्मीकि’ नाम से प्रसिद्ध होने का आशीर्वाद दिया गया। अब आते हैं इस बात पर कि खुद रामायण में इसके बारे में क्या लिखा है। श्रीभागवतानंद गुरु ने तो लिखा है कि बाल कांड में ही महर्षि वाल्मीकि ने उत्तर कांड की तरफ भी इशारा कर दिया है, इसीलिए ये प्रक्षेपित नहीं है। वो उत्तर कांड को आदिकवि की ही रचना मानते हैं।

‘उत्तर कांड’ में माता सीता की पवित्रता का परिचय देते हुए महर्षि वाल्मीकि ने राम दरबार में खुद का कुछ यूँ परिचय दिया है, जिसका भावार्थ है – हे राम! मैं प्रचेता मुनि का दसवाँ पुत्र हूँ और मैंने अपने जीवन में कभी भी मन, क्रम या वचन से कोई पापपूर्ण कार्य नहीं किया है। प्रचेता परमपिता ब्रह्मा के पुत्र थे। उन्हें कहीं-कहीं वरुण भी कहा गया है। इस तरह से महर्षि वाल्मीकि भी ब्रह्मा के पौत्र हुए। हाँ, उनके ब्राह्मण होने की कथा तो हर जगह है।

प्रेचेतसोऽहं दशमः पुत्रो राघवनंदन।
मनसा कर्मणा वाचा भूतपूर्वं न किल्विषम्।।

ओमप्रकाश वाल्मीकि की मानें तो वाल्मीकि के डाकू होने की कथा में किसी भी प्रकार की तार्किकता या प्रमाणिकता का अभाव है। अपनी पुस्तक ‘सफाई देवता‘ में उन्होंने लिखा है कि ‘स्कंद पुराण’ में ही डाकू वाली कथा का विकसित रूप पहली बार दिखाई देती है और इसका अधिकांश लेखन कार्य 8वीं शताब्दी में हुआ। पुराणों में समय-समय पर बहुत से प्रक्षेप जोड़े गए हैं, इसमें कोई दो मत नहीं हो सकता।

इसी तरह अब डॉक्टर मंजुला सहदेव के शोध की बात करते हैं। उन्होंने पाया कि छठी शताब्दी से पहले के किसी भी साहित्य में वाल्मीकि के पहले डाकू होने का जिक्र नहीं है। उन्होंने अपने समय के विद्वान, दूरदर्शी व क्रांतिकारी ऋषि वाल्मीकि का जिक्र किया है। महर्षि वाल्मीकि के बारे में बताया जाता है कि उन्होंने तमसा नदी के तट पर रामायण की रचना की थी। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी माना है कि वाल्मीकि पहले डाकू नहीं थे।

लीलाधर शर्मा ‘पर्वतीय’ ने अपनी पुस्तक ‘भारतीय संस्कृति कोष‘ में लिखा है कि ऋषि भृगु भी वाल्मीकि के भाई थे और दोनों ही परम ज्ञानी थे। उन्होंने लिखा है कि जिन वाल्मीकि के डाकू होने की बात कही जाती है, वो कोई अलग थे और पौराणिक मत है कि वो रामायण के रचयिता से भिन्न थे। आजकल की कुछ कहानियों में तो इतना हेरफेर किया गया है कि अंगुलिमाल डाकू, जिसे बुद्ध के काल का बताया जाता है, उसे भी वाल्मीकि बता दिया जाता है।

फिर भी तुलसीदास ने ‘रामचरितमानस’ में ‘उल्टा नाम जपत जग जाना, बाल्मीकि भए ब्रह्म समाना’ नामक चौपाई का उदाहरण दिया जाता है। लेकिन, ये भी जान लीजिए कि रामायण के कई वर्जन हैं और ‘अध्यात्म रामायण’ में भी ऐसी ही एक कहानी है, जो ‘कृतिवास रामायण’ से लेकर इसके अन्य वर्जनों तक है। लेकिन, ये सब बाद में लिखी गई। वाल्मीकि के बारे में प्रामाणिक वही होगा, जो रामायण के रचनाकाल के समय का स्रोत होगा।

गुजरात में कॉन्ग्रेस की रैली, 2 महिला नेता आपस में खूब लड़ीं, गला पकड़ा-थप्पड़बाजी: Video वायरल

गुजरात में कॉन्ग्रेस की दो महिला नेताओं के बीच मारपीट का वीडियो वायरल हो रहा है। घटना भावनगर में पार्टी रैली के दौरान हुई। बीजेपी का विरोध में शहर में रैली निकाली गई थी। इसी दौरान शहर की महिला कॉन्ग्रेस प्रमुख नीताबेन राठौड़ और पूर्व मेयर पारुलबेन त्रिवेदी के बीच तू-तू मैं-मैं से शुरू हुई बहसबाजी मारपीट में बदल गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, भावनगर की कंसारा नदी पर राज्य सरकार की ओर से रिवरफ्रंट का निर्माण किया जाना है। ऐसे में नदी के सात किलोमीटर के दायरे में स्थित 3000 घरों को वहाँ से हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया है। इसी का विरोध करने के लिए कॉन्ग्रेस ने रैली निकाली थी। लेकिन भाजपा को घेरना के लिए किया गया आयोजन कॉन्ग्रेस नेताओं के आपस में भिड़ने की वजह से चर्चा में है।

रैली में शामिल दोनों महिला नेता की बहसबाजी देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। बताया जाता है कि दोनों के बीच बहुत पहले से विवाद चल रहा था। रैली में मारपीट के दौरान दोनों महिला नेता ने एक दूसरे का गला पकड़ लिया। फिर थप्पड़बाजी हुई। हाथापाई के दौरान पूर्व मेयर पारुलबेन त्रिवेदी की आँख में चोट लग गई। बाद में वहाँ मौजूद दूसरे नेताओं ने दोनों को अलग किया। इस घटना के कारण सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस की खूब किरकिरी हो रही है।

इस मामले में शहर की पूर्व मेयर पारुलबेन त्रिवेदी ने पुलिस में शिकायत भी की है। बहरहाल कॉन्ग्रेस की दो वरिष्ठ महिला नेताओं के बीच इस तरह से बीच सड़क पर हुई मारपीट के मामले में पार्टी के सीनियर नेताओं ने चुप्पी साध ली है। कोई भी इस मामले में बोलने को तैयार नहीं है।

‘मस्जिद में राष्ट्रगान गाना हराम, अल्लाह के कहर को दावत ना दें’: आगरा के शाही मस्जिद के मौलवी पर मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित शाही जामा मस्जिद में बीजेपी नेता और अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अशफाक सैफी द्वारा 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने पर विवाद गहरा गया है। इस मामले में शहर के मुफ्ती मजदूल खुबैब रूमी द्वारा राष्ट्रगान को हराम और गैर-इस्लामिक बताने पर उनके और उनके बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में जामा मस्जिद के इमाम खुबैब रूमी का एक ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमें मस्जिद इंतजामिया के चेयरमैन असलम कुरैशी से बातचीत के दौरान राष्ट्रगान, को हराम बताते हुए कहा कि ‘अल्लाह के कहर को दावत’ न दें।

इस मामले में असलम कुरैशी की शिकायत पर 75 वर्षीय मौलवी और उनके बेटे और मदरसे के सह-अध्यापक हम्मदुल कुद्दुस के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इस मामले में कुरैशी ने कहा, “स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम का विरोध करते हुए एक ऑडियो जारी कर मुफ्ती रूमी ने सार्वजनिक शांति और सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास किया है।”

शिकायत के मुताबिक, मस्जिद के अंदर तिरंगा फहराए जाने के बाद राष्ट्रगान गया जा रहा था। इसी दौरान शहर मुफ्ती रूमी और उनका बेटा हम्मदुल कुद्दुस आ गए और राष्ट्रगान का विरोध करते हुए उसे हराम बताते हुए रोकने की कोशिश की। इतना ही नहीं मौलवी ने उस वीडियो को व्हाट्सएप ग्रुप पर वायरल भी करवाया।

फिलहाल ऑडियो वायरल होने के बाद से ही शङर मुफ्ती मजदुल खुबैब रूमी अंडर ग्राउंड हो गए हैं। कहा जा रहा है उन्हें शहर मुफ्ती के पद से भी हटा दिया गया है।

जामा मस्जिद के इमाम खिलाफ मंटोला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई है। इस मामले में वहाँ के एसएचओ विनोद कुमार ने कहा, “एफआईआर आईपीसी की धारा 153-बी, 505 (जनता को गुमराह करने वाला बयान), 508 और राष्ट्रीय सम्मान को ठेस पहुँचाने से रोकथाम अधिनियम 1971 की धारा 3 के तहत केस दर्ज किया गया है।”

‘एक कपड़े उतारता… दूसरा खींचता’: 2:30 घंटे तक 300-400 पाकिस्तानी मर्दों के लिए थी ‘खिलौना’, आयशा को सुनिए

पाकिस्तान में 14 अगस्त के मौके पर मीनार-ए-पाकिस्तान के पास आयशा अकरम नामक टिकटॉकर महिला से बदसलूकी का मामला सामने आया। सैंकड़ों (300-400) की तादाद में कई पाकिस्तानी पुरुषों ने उनके साथ बेहूदगी की और बाद में उनके कपड़े फाड़ कर उनको हवा में उछाला जाने लगा। यह सब करीब ढाई घंटे तक चला।

अब डेली पाकिस्तान को दिए अपने इंटरव्यू में पीड़िता आयशा ने आपबीती सुनाई है। उन्होंने बताया है कि लाहौर के ग्रेटर इकबाल पार्क में वह अपने साथियों के साथ वीडियो बनाने पहुँची थीं। वहीं शुरू में कुछ लोग उनके साथ सेल्फी लेने आए, जिसमें कोई बुराई नहीं थी, लेकिन बाद में भीड़ बढ़ती गई और खींचतान शुरू हो गई। भीड़ ने उन्हें और ग्रुप को तंग करना शुरू कर दिया। एक समय आया जब उन्हें एक छोटा तालाब मिला और उन्होंने सोचा कि अगर उन्हें बचना है तो उनको पानी में कूदना पड़ेगा। उनके साथी भी बोल रहे थे कि वह कूद जाएँ, लेकिन वह ऐसा न कर सकीं। उनके मुताबिक, “भीड़ में जो बचा रहा था वही उछाल रहा था। एक कपड़े उतारता था तो दूसरा बाकी बचे खींचने की कोशिश कर रहा था।”

पीड़िता कहती हैं कि उनके ग्रुप ने पुलिस को फोन भी किया था, लेकिन कोई वहाँ मौजूद ही नहीं था। उनके अनुसार, “मुझे 6:30 बजे से 9 बजे तक परेशान किया गया…भीड़ बाल खींच रही थी, मुझको उछाल रही थी।” अपने साथ हुई घटना को लेकर आयशा कहती हैं, “अगर महिला पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं है तो फिर कहाँ सुरक्षित होगी।” उनके मुताबिक भीड़ में मौजूद लोग उन्हें लगातार छू रहे थे और उन्हें एक खेलने की वस्तु समझ रहे थे। शरीर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं था जहाँ खरोंच न लगी हो।

महिला बताती हैं कि उनके साथ हुई घटना ऐसी भी नहीं थी कि उन्होंने कोई आपत्तिजनक ड्रेस पहनी हुई हो, जिससे उनके साथ ये सब हुआ। उनके मुताबिक तो वो प्रॉपर ड्रेस में थीं, तब भी ये सब हुआ। उन्होंने कहा, “मैंने अश्लील कपड़े नहीं पहने हुए थे। मैंने कभी नहीं पहने और न ही मैं गंदे वीडियोज बनाती हूँ। मैं प्रॉपर कपड़ों में थी। मैंने उन्हें 14 अगस्त के लिए ही सिलवाया था। लेकिन मैं जब तक सब जान पाती उन्होंने उसे फाड़ दिया।”

पीड़िता याद करती हैं कि उन्होंने कैसे बार-बार मदद के लिए गुहार लगाई लेकिन घंटों तक कोई उन्हें बचाने नहीं आया। वह पूछती हैं, “ये सब क्यों हुआ, मैंने किसी का बुरा नहीं किया। कोई मुझे जानता भी नहीं था। क्या यही सजा है पाकिस्तान की बेटी होने की।”

वह कहती हैं कि उन्होंने जिंदा बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। वह करीब 6:30 बजे पार्क पहुँची थीं और मात्र 15 मिनट में ये सब शुरू हो गया। उन्होंने मीनार-ए-पाकिस्तान में जाकर शरण ली, लेकिन भीड़ ने वहाँ भी खोज लिया। उन्हें हवा में उछाला गया और पानी फेंका गया। उनका दुपट्टा कब गायब हुआ और चप्पलें कहाँ गई कुछ पता नहीं चला। हालत ऐसी हो गई थी कि उनको साँस नहीं आ रही थी। उन्होंने जीने की आस छोड़ दी थी। अब पीड़िता बस यही चाहती हैं कि आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई हो और वह खुद उन लोगों की कोर्ट में पहचान करें।

घटना की वीडियो वायरल

बता दें कि महिला टिकटॉकर के साथ पाकिस्तान में हुई इस बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद भीड़ में शामिल लोगों की जमकर आलोचना हुई। घटना के बारे में बताते हुए महिला ने कहा कि हमला करने वाले लोगों की भीड़ उन्हें धक्का दे रही थी और खींच रही थी और उन्हें हवा में उछाला जा रहा था। महिला ने बताया कि उनके कपड़े भी फाड़ दिए गए थे, साथ ही उसकी अँगूठी और कानों की बालियाँ भी छीन ली गईं। इसके अलावा महिला के साथियों पर भी हमला किया गया और उनमें से एक का मोबाइल फोन और लगभग 15,000 रुपए भी छीन लिया गया। इस मामले में पुलिस ने महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और पुलिस को संदिग्धों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दे दिया गया है। पुलिस द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि वीडियो फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है और महिला के साथ बदसलूकी कर उसके सम्मान को ठेस पहुँचाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गुजरात हाईकोर्ट ने ‘लव जिहाद’ के खिलाफ बने कानून की कई धाराओं पर रोक लगाई, जमीयत उलेमा-हिंद ने डाली थी याचिका

गुजरात में ‘लव जिहाद’ के खिलाफ बने कानून की कुछ धाराओं पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इस कानून में इसी साल संशोधन किया गया था और धोखाधड़ी से शादी करने और इसके लिए धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ कड़ी धाराएँ लगाई गई थीं। गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार (19 अगस्त, 2021) को अपने अंतरिम आदेश में धोखा देकर अंतरधार्मिक विवाह करने वालों के खिलाफ बने इस कानून की कुछ धाराओं को रोक दिया।

गुजरात हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2021 की कुछ धाराओं पर रोक लगाई। मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ इस खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहे थे। 15 जून, 2021 को नए संशोधन के सम्बन्ध में अधिसूचना जारी की गई थी। गुजरात हाईकोर्ट ने सुनवाई ख़त्म होने तक 3,4, 4a से लेकर 4c, 5, 6, और 6a धाराओं को लागू होने से रोक दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी शादी कराने वालों को प्रताड़ना से बचाने के लिए ये आदेश जारी किया गया है।

गुजरात सरकार ने उच्च-न्यायालय को बताया था कि ये कानून सिर्फ शादी के लिए धर्मांतरण से संबंधित है और दूसरे धर्मों में विवाह करने से नहीं रोकता है। ‘जमीयत उलेमा-हिंद’ ने इस कानून से आपत्ति जताते हुए इसके खिलाफ गुजरात उच्च-न्यायालय में याचिका दायर की थी। गुजरात सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि राज्य में अंतरधार्मिक विवाह पर कोई प्रतिबंध नहीं है। साथ ही कहा कि शादी को जबरन धर्मांतरण का जरिया नहीं बनाया जा सकता।

गुजरात सरकार ने अपने एडवोकेट जनरल के जरिए हाईकोर्ट में अपनी बात रखी थी। सरकार ने पूछा था कि इस कानून से आम लोगों को क्यों डरने की ज़रूरत है? सरकार के अनुसार, अगर धर्मांतरण स्वेच्छा से और वैध तरीके से हो रहा है तो डरने की कोई ज़रूरत ही नहीं है। इस कानून के तहत धोखाधड़ी, लालच, और बल का इस्तेमाल कर के महज शादी के लिए किसी का धर्मांतरण कराने पर कार्रवाई की बात है।