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शिवसैनिकों ने की मशीनों में तोड़फोड़, लगाई आग: राष्ट्रीय राजमार्गों के काम रुकने पर नितिन गडकरी ने CM उद्धव को दी चेतावनी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे को पत्र लिख कर शिवसैनिकों के बर्ताव पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री से उन शिवसैनिकों को नियंत्रित करने को कहा है जो विदर्भा में चल रहे राजमार्ग कार्य को ब्लॉक करके बैठ गए हैं।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शिवसेना के जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं द्वारा राष्ट्रीय महामार्ग के काम में रुकावटें डालने और तोड़-फोड़ किए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री से की है। इस पत्र में नितिन गडकरी ने उल्लेख किया है कि शिवसेना के कार्यकर्ता कॉन्ट्रैक्टरों की मशीनों और सामानों को तोड़-फोड़ और जला कर अधिकारी, कर्मचारी और मजदूरों के दिलों में दहशत पैदा कर रहे हैं। इस तरह वे अक्सर आकर काम बंद करवा देते हैं।

गडकरी ने अपने पत्र में लिखा कि अगर शिवसैनिक ऐसा ही बर्ताव करते रहे तो महाराष्ट्र में नेशनल हाइवे के कार्यों को मंजूरी देने से पहले उनके मंत्रालय को इस पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। उन्होंने सीएम को लिखे अपने पत्र में कहा कि अगर कार्य को आगे बढ़ाना है तो इसमें उनके (सीएम) हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

पत्र के मुताबिक, राज्य में 3 जगह पर नेशनल हाईवे के कार्यों में बाधा डालने का काम किया जा रहा है, ऐसे में अगर कोई भी काम आधे में छोड़ा गया तो इससे दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि अकोला और नांदेड़ के बीच 202 किमी लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण का काम चल रहा है। इनमें मेदाशी से वाशिम और वाशिम शहर के लिए 12 किलोमीटर लंबे बायपास का निर्माण कार्य भी शामिल है। लेकिन शिवसेना के नेताओं और कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप की वजह से बायपास और उसे जोड़ने वाली मुख्य सड़क के काम को रोकना पड़ा।

ऐसे ही मालेगाँव-रिसोड राष्ट्रीय महामार्ग पर पैनगंगा नदी के ऊपर ब्रिज बनाने का काम आधा पूरा हुआ है। यहाँ भी शिवसैनिकों द्वारा कार्य पूरा नहीं होने दिया जा रहा। इसके अलावा वाशिम जिले के सेलू बाजार गाँव से होकर जाने वाली सड़क का काम भी शिवसेना के नेताओं और कार्यकर्ताओं की वजह से रुक गया है। इन शिवसैनिकों ने मशीनों को जलाया है और सामानों को तोड़ दिया है।

अपने पत्र में नितिन गडकरी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से पत्र मिलते ही एक्शन लेने की माँग करते हैं। उन्होंने इस मामले में गृह विभाग से आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। जानकारी के मुताबिक, इस पत्र के मिलने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने तुरंत इस मामले में पहल करते हुए राज्य के गृह विभाग को तत्काल जाँच करने और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दे दिए हैं।

पाकिस्तान के मुँह पर अफगान राष्ट्रपति का तमाचा: अशरफ गनी ने कहा- इस्तीफा नहीं देंगे, सेना को एकजुट करना सर्वोच्च प्राथमिकता

अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते आतंक और मुल्क के प्रमुख प्रांतों पर उसके कब्जों के बीच वहाँ के राष्ट्रपति अशरफ गनी शनिवार (14 अगस्त 2021) को पहली बार सार्वजनिक तौर पर सामने आए। दरअसल, अमेरिका द्वारा अगस्त के अंत तक अफगानिस्तान से अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाने के ऐलान के बाद से तालिबान एक-एक करके अफगानिस्तान के प्रांतों पर कब्जा करता जा रहा है।

अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पहले से रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो संदेश में तालिबान के हाथों बुरी तरह हार का सामना कर रही अफगान आर्मी को फिर से संगठित करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यह अफगान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अशरफ गनी ने कहा, “मौजूदा स्थिति में सुरक्षा और रक्षा बलों को फिर से संगठित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस उद्देश्य के लिए आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार मौजूदा मानवाधिकार संकट को हल करने के लिए ‘स्थानीय नेताओं’ और ‘अंतरराष्ट्रीय भागीदारों’ के संपर्क में है। अफगान राष्ट्रपति ने कहा, “मुझे पता है कि आप अपने वर्तमान और भविष्य के बारे में चिंतित हैं, लेकिन मैं आपको राष्ट्रपति के रूप में आश्वस्त करता हूँ कि मेरा ध्यान मेरे लोगों की अस्थिरता, हिंसा और विस्थापन को रोकने पर है। ऐसा करने के लिए मैंने सरकार के भीतर और बाहर, राजनीतिक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ व्यापक विचार-विमर्श शुरू किया है और मैं जल्द ही लोगों के साथ इसके परिणाम साझा करूँगा।”

राष्ट्रपति ने कहा कि वे देश में हत्याओं के लिए वह अफगानों पर युद्ध थोपने, पिछले 20 वर्षों में अर्जित लाभ को नष्ट करने, सार्वजनिक संपत्ति के विनाश और निरंतर अस्थिरता लाने की अनुमति नहीं देंगे।

राष्ट्रपति ने इस्तीफा देने से इनकार किया

पहले ये कयास लगाए जा रहे थे कि राष्ट्रपति आज (शनिवार 14 अगस्त 2021) अपना इस्तीफा दे देंगे और युद्धग्रस्त देश को अपने परिवार के साथ छोड़ देंगे। लेकिन, धारणाओं के विपरीत अशरफ गनी ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा नहीं दिया। उल्लेखनीय है कि तालिबान से सहानुभूति रखने वाले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने पहले दावा किया था कि इस्लामी आतंकवादी संगठन गनी के कार्यालय छोड़ने तक बातचीत नहीं करेगा।

शुक्रवार को अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने राष्ट्रपति अशरफ गनी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था, “दृढ़ विश्वास और संकल्प के साथ यह तय किया गया कि हम तालिबान आतंकवादियों के खिलाफ मजबूती से खड़े रहेंगे और हर तरह से राष्ट्रीय प्रतिरक्षा को मजबूत करने के लिए सब कुछ करेंगे। हमें अपने ANDSF (अफगान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बल) पर गर्व है।”

मानवीय संकट के कगार पर अफगानिस्तान

अफगानिस्तान में तालिबान के हमले के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर मानवीय आपदा आई है। पिछले दो महीनों में तालिबान ने 2001 में सत्ता से बेदखल होने के बाद से अफगानिस्तान में किसी भी समय की तुलना में सबसे अधिक क्षेत्र पर कब्जा जमा लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले दो महीनों में 34 प्रांतों में युद्ध के कारण 60,000 से अधिक परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है। वहीं, कम से कम 17,000 परिवारों ने अफगान राजधानी काबुल में शरण ली है, जो सुन्नी पश्तून विद्रोहियों ने घेर रखा है।

103 °F बुखार से जूझ रहे ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, CM खट्टर ने ₹6 करोड़, यूपी ने किया था ₹2 करोड़ देने का ऐलान

टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा की तबीयत ठीक नहीं है। वो हाई फीवर (उच्च बुखार) से जूझ रहे हैं। इस कारण वो हरियाणा सरकार के कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हो पाएँगे। हरियाणा सरकार ने ओलंपिक में गए खिलाड़ियों के सम्मान में एक समारोह का आयोजन किया है। हालाँकि, राहत की बात ये है कि नीरज चोपड़ा की कोरोना टेस्टिंग की रिपोर्ट नेगेटिव आई है।

नीरज चोपड़ा ने ‘भाला फेंक’ में स्वर्ण पदक जीता था। अब खबर आई है कि उनके गले में खरास है और उन्हें हाई फीवर है। साथ ही बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा। फ़िलहाल वो आराम कर रहे हैं। ओलंपिक फाइनल में नीरज चोपड़ा के जेवलिन थ्रो को टोक्यो ओलंपिक के शीर्ष-10 क्षणों में शामिल किया गया। ओलंपिक ने इस क्षण को छठे स्थान पर रखा। नीरज चोपड़ा ने समर्थन के लिए भारतीयों का धन्यवाद दिया था।

नीरज चोपड़ा को कल 103 °F फीवर था। हालाँकि, उनके कुछ करीबी सूत्रों का कहना है कि धीरे-धीरे उनकी स्थिति में सुधार होने लगा है। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है क्योंकि पिछले कई महीनों से उनका काफी व्यस्त शेड्यूल था। थकान को उनकी तबीयत खराब होने का कारण माना जा रहा है। ‘राष्ट्रपति भवन’ में होने वाले एक के लिए भारतीय ओलंपिक खिलाड़ी अशोका होटल में रुके हुए हैं। उम्मीद है कि नीरज अपने घर से सीधे वहीं आएँगे।

हरियाणा के पानीपत जिले के खांद्रा गाँव में 24 दिसंबर 1997 को पैदा हुए नीरज चोपड़ा बचपन में भारी-भरकम शरीर वाले बच्चे थे, जिस कारण घर वालों ने उन्हें जिम में दाखिला कराया और फिर खेल की तरफ उनका रुझान शुरू हुआ।  11 साल की उम्र के लड़के ने जब पहली ही बार में 25 मीटर से भी दूर भाला फेंक दिया था तो किसी को भी समझते देर नहीं लगी कि नीरज इसी खेल के लिए बने हैं।

हाल ही में यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन्हें 2 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। इसी तरह हरियाणा सरकार ने 6 करोड़, पंजाब सरकार ने 2 करोड़, BCCI ने 1 करोड़ और CSK ने उन्हें 1 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया है।

केरल आईएस मॉड्यूल में NIA ने किया बड़ा खुलासा: आतंकी बातचीत के लिए Hoop और Rocket APP का कर रहे इस्तेमाल, ट्रेस करना मुश्किल

केरल इस्लामिक स्टेट (IS) मॉड्यूल केस की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने बड़ा खुलासा किया है। एनआईए के मुताबिक, केरल के आईएस मॉड्यूल में शामिल आतंकी अपने ऑपरेटरों से बात करने, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उनकी भर्ती करने के लिए हूप (Hoop App) और रॉकेट चैट (rocket chat app) जैसे मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते थे। बताया जा रहा है कि ये एक सुरक्षित मैसेजिंग एप्लिकेशन हैं, जिनमें शेयर किए गए सभी मैसेज अपने आप डिलीट हो जाते हैं।

मामले की जाँच कर रहे NIA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”केरल आईएस मॉड्यूल मामले में हमने इस साल 5 मार्च को IPC और UAPA की धाराओं के तहत 7 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।” उन्होंने कहा कि केरल आईएस मॉड्यूल का मोहम्मद अमीन उर्फ अबू याह्या और उसके सहयोगी इस्लामिक स्टेट की विचारधारा के प्रसार के लिए विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आईएस का प्रोपेगेंडा चैनल चला रहे हैं।

अधिकारी ने जाँच के दौरान यह पाया गया कि अमीन कम्युनिकेशन के लिए हूप और रॉकेट चैट का इस्तेमाल कर रहा था। उन्होंने बताया कि हूप ऐप में दूसरे सदस्य के साथ शेयर किए गए मैसेज अपने आप डिलीट हो जाते हैं, जबकि रॉकेट चैट में यूजर्स को अपना मोबाइल नंबर या अपनी ईमेल आईडी वैरिफाइड करने की जरूरत नहीं होती है।

मार्च 2021 में जाँच एजेंसी ने तलाशी के दौरान इस मामले में तीन आरोपितों अमीन, रहीस रशीद और मुशाब अनवर को गिरफ्तार किया था। 5 अगस्त 2021 को एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक में 5 स्थानों पर तलाशी ली और श्रीनगर में बेमिना के ओबैद हामिद, बांदीपोरा (कश्मीर) में मुजम्मिल हसन भट उल्लाल, मैंगलोर के अम्मार अब्दुल रहमान और शंकर वेंकटेश पेरुमल उर्फ अली मुआविया को गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है कि इससे पहले NIA की टीम मैंगलोर में दिवंगत कॉन्ग्रेस नेता बीएम इदिनब्बा के घर पर पहुँची थी। NIA की यह छापेमारी की कार्रवाई इदिनब्बा के बेटे बीएम बाशा के ISIS से कथित संबंधों के चलते की गई थी। इस मामले में बाशा के साथ उसकी पत्नी से भी पूछताछ जारी है। रियल एस्टेट का बिजनेस करने वाले बाशा के दो बेटे भी हैं जो विदेश में रहते हैं।

‘ईसाई बन जा तुम्हें किसी चीज की कमी नहीं होने देंगे’, धर्मान्तरण करने वाली महिला परिवार पर बना रही दवाब: CM से लगाई मदद की गुहार

उत्तर प्रदेश के बहराइच में एक के बाद एक करके तीन हिंदू परिवारों ने धर्मांतरण कर ईसाई धर्म अपना लिया है। ताजा मामले में रिसिया थाना क्षेत्र के एक गाँव में परिवार की महिला ने ईसाई धर्म अपना लिया और अब वह परिवार के बाकी लोगों पर धर्मान्तरण करने का दवाब बना रही है। इसके बाद परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिले के कलेक्टर को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, रिसिया थाना क्षेत्र के शाहनवाजपुर गाँव में अब तक तीन परिवारों ने धर्मान्तरण कर लिया है। यहीं के रहने वाले स्थानीय नागरिक बबलू ने जिले के जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपने छोटे भाई की पत्नी के धर्मान्तरण करने और घर के बाकी सदस्यों पर भी धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पन्ने लाल के छोटे भाई की पत्नी अनीता (22) ने ईसाई धर्म अपना लिया है।

पत्र में बबलू ने उल्लेख किया है कि अनीता ने घर से सभी देवी-देवताओं की तस्वीर और मूर्तियों को बाहर फेंक दिया है। उसे रोज रात 12 बजे एक पादरी फोन करता है और उसे परिवार के लोगों को धर्मान्तरण कराने के लिए कहता है। वह उससे धर्मान्तरण कराने का लालच भी देता है। बबलू के मुताबिक, अनीता उसकी पत्नी और उस पर भी धर्मान्तरण करने का दबाव बना रही है।

बबलू ने कहा, “वह कहती है कि इस धर्म (ईसाई) को अपना लो, तुम्हें किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं होने देंगे। मेरी शादी के दो वर्ष हो चुके हैं। मेरे छोटे भाई की पत्नी कहती है कि इस धर्म को नहीं अपनाओगे तो तुम्हें बच्चे नहीं होंगे।” महिला कहती है कि ईसाई उसकी सारी जरूरतें पूरी करते हैं और उसे कभी भी पैसे की कमी नहीं महसूस होने देते हैं।

साभार: एनबीटी

बबलू का कहना है कि उसी गाँव में सुनीता का मायका है और उसके मायके वालों ने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है। हालाँकि, पुलिस और प्रशासन इन खबरों से इनकार कर रहा है, लेकिन हिंदू संगठन धर्मान्तरण किए जाने की पुष्टि कर रहे हैं। पूर्व ग्राम प्रधान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने खुलासा किया है कि क्रिश्चियन मिशनरियों के संपर्क में आकर अब तक 40 परिवारों ने धर्मान्तरण कर लिया है।

वहीं, अपर पुलिस अधीक्षक नगर कुँवर ज्ञानंजय सिंह के मुताबिक, गाँव जाकर जाँच की गई है और ये खबरें गलत पाई गई हैं। हालाँकि, हिंदू संगठनों ने प्रशासन द्वारा धर्मान्तरण की साजिश को दबाने पर नाराजगी जताई है।

बीकानेर के महाराजा ने बनवाई नहर, तो नाम इंदिरा गाँधी का क्यों: PM मोदी से की गई ‘इंदिरा गाँधी नहर’ का नाम बदलने की माँग

राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद खेल रत्न होने के बाद अब कई ऐतिहासिक धरोहरों का नाम बदलने की माँग तेज हो गई है। इसी क्रम में लोगों ने इंदिरा गाँधी नहर का नाम बदलकर गंग नहर करने की माँग उठाई है। भारतीय जन महासभा ने राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित इंदिरा गाँधी नहर को लेकर कहा है कि नहर का नाम गंग नहर किया जाए। बता दें कि 1984 से पहले यही नाम इस नहर का हुआ करता था, लेकिन बाद में इसका नाम इंदिरा गाँधी नहर कर दिया गया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मचंद्र पोद्दार ने बताया कि गंग नहर को बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह जी ने बनवाया था। इसका नाम अचानक सन 1984 में स्वार्थवश इंदिरा गाँधी नहर किया जाना दुखद है। उन्होंने कहा कि महाराजा गंगा सिंह ने जब देखा कि उनकी जनता को पानी की दिक्कतें हो रही हैं, लोगों को पीने के लिए और किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है तो उन्होंने इस नहर का निर्माण करवाया था। अब आज के समय में यह नहर पेयजल, सिंचाई, उद्योग, सेना व ऊर्जा परियोजनाओं के काम आती है।

पोद्दार ने बताया कि भारतीय जन महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माँग की है कि इस नहर का नाम उसके निर्माता बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह के नाम पर ‘गंग नहर’ ही वापस रखा जाए। ऐसा होने से आने वाली पीढ़ी को पता चलेगा कि इस नहर को किसने और क्यों बनाया था। यदि इसका नाम नहीं बदला गया तो लोग यही जानेंगे कि इसे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने बनाया होगा।

उल्लेखनीय है कि इसी नहर के लिए सतलुज नदी के जल को राजस्थान में लाने के लिए 4 सितंबर 1920 को बीकानेर, भावलपुर और पंजाब राज्यों के बीच सतलुज नदी घाटी समझौता हुआ था। इसके बाद गंग नहर की आधारशिला 5 सितंबर 1921 को महाराजा गंगा सिंह ने फिरोजपुर हेडबाक्स पर रखी थी। 26 अक्टूबर 1927 को जाकर श्रीगंगानगर के शिवपुर हेडबॉक्स पर इस नहर का उद्घाटन हुआ। बाद में ये नहर सतलुज नदी से पंजाब के फिरोजपुर के हुसैनीवाला से निकाली गई। इसका प्रवेश स्थान श्रीगंगानगर के सखा गाँव से है। फिरोजपुर शिव हेड तक इसकी लंबाई 129 किमी है। इसका 112 किमी हिस्सा पंजाब और राजस्थान में 17 किमी हिस्सा है।

‘लोल.. विभाजन की त्रासदी कौन याद करना चाहता है?’: PM मोदी के फैसले से भड़का लिबरल गिरोह, बताया ‘ध्रुवीकरण’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान हमारे लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horrors Remembrance Day)’ के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद से ही लिबरल गिरोह का क्रंदन चालू है। बलिदानियों को सम्मान देना उन्हें रास नहीं आ रहा है। हमारे लोगों को जो संघर्ष करना पड़ा, इसे वो याद नहीं करना चाहते।

खुद को स्टैंड-अप कॉमेडियन बताने वाले अतुल खत्री ने लिखा, “लोल.. क्या? भला कौन विभाजन की त्रासदी को याद करना चाहता है?”

अतुल खत्री को रास नहीं आया विभाजन के पीड़ितों को याद करना

हालाँकि, इस तरह की बात लिखने वाले वो अकेले नहीं थे। अर्पिता चटर्जी नाम की ‘पूर्व पत्रकार’ ने लिखा, “इस आदमी की ध्रुवीकरण की क्षमता असाधारण है। इन्होंने ‘स्वतंत्रता दिवस’ को भी नहीं छोड़ा।”

‘पूर्व पत्रकार’ भी विभाजन की त्रासदी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दिए जाने से नाराज़

जैसा कि अपेक्षित है, काफी सारे ऐसे पाकिस्तानी भी हैं जो इस फैसले से खुश नहीं हैं। इसे समझा जा सकता है, क्योंकि इसी दिन वो अपना स्वतंत्रता दिवस भी मनाते हैं। शायद इसीलिए भारत के ‘सेक्युलर’ ब्रिगेड के लोग भी इस निर्णय से नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं। क्योंकि भारत के कथित ‘सेकुलरिज्म’ की नींव ही हिन्दुओं के नरसंहार, हिन्दू महिलाओं के बलात्कार और हमारे मंदिरों को ध्वस्त करने पर आधारित है।

शायद इसीलिए अब तक कॉन्ग्रेस होना इतिहास चलाती रही है, अपने नैरेटिव के हिसाब से। शायद इसीलिए सारी चीजों को महात्मा गाँधी व जवाहरलाल नेहरू के इर्दगिर्द घुमाया गया। सारी अच्छी चीजों के लिए उन्हें। जो बुरी चीजें हुईं, उन्हें या तो भुला दिया गया या फिर उन्हें अच्छा बना कर पेश किया गया। आज भी ऐसे करोड़ों लोग हैं, जिनके पूर्वजों ने विभाजन का दंश झेला है। जिनके परिवार ने इस त्रासदी झेली है।

जहाँ एक तरफ ये लोग कहते हैं कि भारतीय मुस्लिमों का विभाजन से कोई लेनादेना नहीं, वहीं दूसरी तरफ ये भी कहते हैं कि विभाजन की त्रासदी को याद करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इनके हिसाब से दुनिया भर के मुस्लिम पीड़ित ही हैं, भले ही एक बड़े हिस्से पर सैकड़ों वर्षों तक इस्लामी शासन रहा हो। आज भी कई भारतीयों के पूर्वजों की संपत्ति पाकिस्तान-बांग्लादेश में किसी और के कब्जे में हैं, शायद तभी ‘अखंड भारत’ की बातें होती हैं।

भारत-पाकिस्तान विभाजन और इसके बाद हुए दंगों में 20 लाख से भी अधिक लोग मारे गए थे। महिलाओं का बलात्कार हुआ था, बच्चों तक को नहीं बख्शा गया था। किसी सिख महिला ने अपनी इज्जत बचाने के लिए गुरुद्वारे में ही आत्महत्या कर ली थी तो कहीं शरणार्थियों से भरी पूरी ट्रेन में ही नरसंहार हुआ था। जिस देश में राजनेता स्वतंत्रता का जश्न मना रहे थे, वहीं दूसरी तरफ अराजकता का माहौल बना हुआ था।

विदेशों में दिखेगा POCSO का उल्लंघन करने वाले राहुल गाँधी का विवादित ट्वीट: कॉन्ग्रेस के समक्ष नतमस्तक हुए ट्विटर ने खेला तकनीकी खेल

कॉन्ग्रेस पार्टी ने आज (शनिवार 14 अगस्त 2021) अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया सत्यमेव जयते। इसके बाद मिड-डे ने एक रिपोर्ट में संकेत दिया कि राहुल गाँधी के ट्विटर अकाउंट को लॉक करने के कुछ दिनों बाद ही अनलॉक कर दिया गया था। इसमें उन्होंने 9 साल की बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले ट्वीट को डिलीट कर दिया था।

मिड-डे ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि कॉन्ग्रेस के जिन नेताओं ने रेप पीड़िता की पहचान को उजागर करने वाली इमेज को ट्वीट किया था, उनमें से कई के अकाउंट को फिर से बहाल कर दिया गया है।

सामान्यतया राहुल गाँधी का अकाउंट चेक करने पर पता चलता है कि उन्होंने अभी तक ट्वीट नहीं किया है। उनका आखिरी ट्वीट 6 अगस्त का दिखा रहा है। ऐसे में हमें हकीकत में कैसे पता चलेगा कि राहुल गाँधी का अकाउंट अनब्लॉक हो गया है और ट्विटर कॉन्ग्रेस की माँगों के आगे झुक गया?

इससे पहले राहुल गाँधी ने दिल्ली की 9 साल की पीड़िता के माता-पिता से मुलाकात करते हुए एक तस्वीर ट्वीट की थी। हम पहले ही बता चुके हैं कि यह कैसे पॉक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के खिलाफ है, क्योंकि यह नाबालिग पीड़िता और पीड़ित के भाई-बहनों की पहचान को उजागर करता है। इस मामले में NCPCR ने ट्विटर को नोटिस भेजकर राहुल गाँधी के ट्वीट हटाने के लिए कहा था। उसमें आयोग ने सपष्ट किया था कि इससे भारतीय कानूनों का उल्लंघन हुआ है। नोटिस के बाद ट्विटर ने कोर्ट में दावा किया कि उसने ट्वीट को हटा दिया और राहुल गांधी के अकाउंट को बंद कर दिया है।

राहुल गांधी के ट्वीट को हटाने और उनके अकाउंट को लॉक करने के बाद ट्विटर ने जो कहा, उसका स्क्रीनशॉट यहाँ दिया गया है।

राहुल गाँधी के अकाउंट को लॉक करने वाला ट्विटर का नोटिस

ट्विटर द्वारा राहुल गाँधी के ट्वीट को हटाने के बाद नोटिस में कहा गया है कि ‘यह ट्वीट अब उपलब्ध नहीं है’। इस नोटिस का मतलब है कि ट्विटर ने खुद ट्वीट को हटा दिया और इसे जनता के लिए अनुपलब्ध कर दिया। हालाँकि, राहुल गाँधी का अकाउंट बंद कर दिया गया था, लेकिन अगर वो खुद से उस ट्वीट को हटा देते हैं तो यह अनलॉक हो जाएगा।

जब इस तरह का नोटिस दिया जाता है तो यूजर (इस मामले में राहुल गाँधी) को अपने अकाउंट पर एक नोटिस मिलता है जो उसे अपना ट्वीट हटाने के लिए कहता है। ट्वीट डिलीट करने के के बाद उसका खाता अनलॉक हो जाएगा और वह फिर से ट्वीट कर सकेगा। हालाँकि, जब तक राहुल गाँधी अपनी तरफ से ट्वीट को डिलीट नहीं करते तब तक वो ट्वीट नहीं कर पाएँगे।

इस बीच, ट्विटर ने यह महसूस करते हुए कि ट्वीट भारतीय कानूनों का उल्लंघन करता है और खुद ट्विटर के भी नियमों का उल्लंघन करता है, यह सुनिश्चित किया कि ट्वीट किसी और को दिखाई न दे। राहुल गाँधी के ट्वीट के स्थान पर ट्विटर ने नोटिस प्रदर्शित किया, जिसमें कहा गया था कि ट्वीट अब उपलब्ध नहीं है। ट्विटर के नोटिस के कारण अगर कोई भी व्यक्ति राहुल गाँधी के ट्वीट को देखने की कोशिश करता है तो उसे यह नहीं दिखेगा।

हालाँकि, जब कोई व्यक्ति ब्रेव ब्राउजर से आईपी ऐड्रेस जापान कर ट्विटर को एक्सेस करने की कोशिश करता है तो राहुल गाँधी का हटाया गया ट्वीट दिखाई देने लगता है।

दूसरे देशों से दिख रहा राहुल गांधी का ट्वीट

यह बदलाव कैसे हुआ?

जब कोई भारत से राहुल गाँधी के खाते को देखता है तो उनके विवादास्पद ट्वीट के स्थान पर ट्विटर द्वारा लगाए गए नोटिस ‘यह ट्वीट उपलब्ध नहीं है’ के स्थान पर ‘राहुल गाँधी का यह ट्वीट कानून को ध्यान रखते हुए भारत में हटा लिया गया है’ दिखाई देता है।

इंडिया से जब भी कोई राहुल गाँधी का अकाउंट चेक करता है तो उसे नोटिस दिखता है

इस बदलाव से क्या हुआ?

इसका मतलब है कि ट्विटर कॉन्ग्रेस के सामने झुक गया है और अपने पिछले नोटिस से मुकर गया है। खास बात यह है कि इसका मतलब यह है कि ट्विटर ने अब भारतीय कानूनों के जवाब में ट्वीट को रोक दिया है, लेकिन राहुल गाँधी को अब अपने अकाउंट को फिर से एक्सेस करने के लिए अपने ट्वीट को हटाना नहीं पड़ेगा। इसलिए, नाबालिग पीड़िता की पहचान से समझौता करने वाला उनका विवादास्पद ट्वीट भारत के अलावा हर जगह दिखाई देगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की पत्रकार स्वाति माथुर ने ट्वीट कर राहुल गाँधी को ट्विटर पर निशाना बनाए जाने का कथित कारण ट्वीट किया है। वह कहती हैं कि जिस नाबालिग बच्ची की कथित तौर पर रेप और हत्या की गई थी, ट्विटर ने उसके माता-पिता से एक सहमति नोटिस के लिए कहा है कि वे पहचान का खुलासा किए जाने से सहमत हैं।

हालाँकि, भारतीय कानूनों में नाबालिग पीड़ित के परिजनों द्वारा सहमति पत्र देकर कानूनन माफ करने का कोई प्रावधान नहीं है।

क्या कहता है भारतीय कानून

किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 74 किसी भी मीडिया में बच्चे की पहचान को जाहिर करने से रोकती है और पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 23 में यह भी कहा गया है कि बच्चे की कोई भी जानकारी/फोटो मीडिया के किसी भी रूप में प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए, जिससे बच्चे की पहचान उजागर हो। POCSO एक्ट 2012 की धारा 23 के तहत इस जानकारी में पीड़ित का नाम, पता, फोटो, परिवार का विवरण, स्कूल, पड़ोस या कोई अन्य विवरण शामिल है जिससे बच्चे की पहचान का खुलासा हो सकता है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी रूप में नाबालिग पीड़िता की पहचान का खुलासा नहीं किया जा सकता है। इसमें आगे कहा गया है कि केस की जाँच कर रहे समिति या बोर्ड को लगता है कि यह पीड़ित के हित में है तो ही उसके खुलासे की वह इजाजत दे सकता है। अधिकतर मामलों में यह जिला न्यायालय के न्यायाधीश होते हैं।

नाबालिग पीड़िता की पहचान के खुलासे के संबंध में भी पॉक्सो अधिनियम स्पष्ट है। POCSO एक्ट की धारा 23 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति अपने नाम, पता, फोटो, परिवार के विवरण, स्कूल, पड़ोस या किसी अन्य विवरण सहित बच्चे की पहचान का खुलासा नहीं करेगा।

दोनों कानूनों में इस कानून को तोड़ने वालों के लिए कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। साल 2018 में केंद्र सरकार ने ये स्पष्ट किया था कि ये कानून मरने वाले पीड़ितों पर भी लागू होंगे।

एनसीपीसीआर के मीडिया सलाहकार जी मोहंती ने 2018 में कहा था, “यह सरकार द्वारा किया गया एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण है, क्योंकि हमने कई मामलों में देखा है कि बच्चों की बात आती है तो पुलिस और मीडिया घरानों द्वारा संवेदनशील मामलों में भी लापरवाही बरती जाती है। अब यह स्पष्ट है कि उनकी प्रतिष्ठा की रक्षा की जानी है, भले ही वे मर गए हों।”

जेजे अधिनियम के तहत भी कानूनों का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की कैद या दो लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए एनसीपीसीआर के प्रमुख प्रियांक कानूनगो ने कहा कि ये कानून न केवल पीड़िता की सुरक्षा के लिए हैं, बल्कि बच्चे के भाई-बहनों और अन्य जीवित रिश्तेदारों की भी सुरक्षा के लिए भी हैं। यदि पहचान उजागर हो जाती है तो संभव है कि घर के अन्य बच्चों को अपमानित करके पीड़ित और जीवित रिश्तेदारों की प्रतिष्ठा पर दाग लगाया जा सके। इसलिए, भले ही पीड़ित की मृत्यु हो गई हो, किसी भी पहचान के विवरण को सार्वजनिक करना अवैध है। उन्होंने आगे कहा कि अगर जिला सत्र न्यायाधीश को लगता है कि पीड़ित की पहचान को उजागर करना उसके हित में है तो वो इसके लिए निर्णय ले सकते हैं। इसके अलावा माता-पिता को भी कानून को हाथ में लेने और इस तरह की जानकारी को फैलाने की अनुमति देने का कोई अधिकार नहीं है।

इसलिए अगर जिला सत्र न्यायालय के न्यायाधीश को लगता है कि पीड़ित की पहचान को उजागर करना उसके हित में है तो वो उसकी अनुमति दे सकते हैं। लेकिन पीड़िता के माता-पिता या ट्विटर को यह निर्धारित करने का कोई अधिकार नहीं है कि क्या पीड़ित की पहचान का खुलासा किया जा सकता है, भले ही माता-पिता ने सहमति पत्र दिया हो।

कॉन्ग्रेस को लगता है कि उसे अपना ट्वीट डिलीट किए बिना ही ट्विटर द्वारा दिया गया अधिकार मिल गया है, जिससे वो देश के कानून को तोड़कर बच सकती है। दरअसल, अब नाबालिग पीड़ित की पहचान से केवल आईपी सेटिंग बदलकर ही समझौता किया जा सकता है। कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी इसे “सच्चाई की जीत” मानते हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि उन्हें की जरा भी परवाह नहीं है। वे केवल उसके साथ क्रूर बलात्कार और मौत पर क्षुद्र राजनीति कर रहे हैं।

‘बालिग़ हूँ, अपनी मर्जी से आई हूँ, अब पवन ही मेरे पति’: पिता ने दर्ज कराया था अपहरण-धर्मांतरण का मामला, बेटी ने जारी किया वीडियो

उत्तर प्रदेश के बरेली से अपहरण व धर्मांतरण का मामला सामने आया है। ये घटना बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र की है, जहाँ की एक युवती 8 जुलाई, 2021 को गायब हो गई थी। युवती ने पिता ने बताया कि उनकी बेटी को उत्तराखंड की राजधानी देरादून में स्थित ‘शस्त्रधारा मराठा गेस्ट हाउस’ से बरामद किया गया था। इसके बाद उसे वो घर ले आए थे। पिता का आरोप है कि उनकी बेटी को बहला-फुसला कर आरोपित अपने साथ ले गया था।

हालाँकि, उनका कहना है कि उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा की वजह से उस समय कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। NBT की खबर के अनुसार, पिता ने आरोप लगाया है कि 4 अगस्त को गेस्ट हाउस का मालिक आरोपित पवन उनकी बेटी को फिर से बहला-फुसला कर ले गया। साथ ही फोन पर उसने दावा किया कि उसने उनकी बेटी का धर्म-परिवर्तन करा दिया है और उसके साथ शादी भी कर ली है।

आरोप है कि उसने पुलिस में शिकायत करने पर जान से मार डालने की भी धमकी दी। इसके बाद पिता ने प्रेमनगर थाने में अपनी बेटी के अपहरण व धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए तहरीर दे दी। पुलिस ने इसका आधार पर FIR दर्ज कर ली है। इसी बीच गुरुवार (12 अगस्त, 2021) की शाम को युवती का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसने उसने कहा कि वो बालिग़ है और अपनी मर्जी से यहाँ आई है।

आरोपित पवन को युवती ने अपना पति बताते हुए पिता पर ही झूठ बोलने का आरोप लगाया है। उसने कहा कि वो अपने ‘पति’ पवन के साथ देहरादून में रह रही है। युवती ने खुद को बालिग़ दिखाने के लिए अपना आधार कार्ड भी वायरल किया। साथ ही आरोप लगाया कि उसके पिता ने थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई है। साथ ही कहा कि अब वो पवन के साथ अपनी मर्जी से शादी करना चाहती है। पुलिस ने बताया कि आरोपित की तलाश शुरू कर दी गई है।

भव्य राम मंदिर शंक्वाकार नींव पर लेगा आकार, PM मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर नवंबर तक होगा तैयार

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कार्य 2023 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपने ट्विटर हैंडल और वेबसाइट पर लोगों को मंदिर से जुड़ी अहम जानकारियों से अवगत कराता रहता है। राम मंदिर को लेकर अब एक और नई जानकारी सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंदिर नींव का कार्य पूरा होने के बाद यह शंक्वाकार दिखेगा। बताया जा रहा है कि राम मंदिर नींव की ऊपरी सतह का क्षेत्रफल नीचे की सतह से 35 हजार चार सौ वर्ग फीट कम होगा। वहीं, नींव की अंतिम लेयर जब पूरी होगी तो इसकी ऊपरी सतह 84 हजार छह सौ वर्ग फीट ही बचेगी। इसके बाद ही तराशे गए पत्थर इस पर बिछाए जाएँगे, जिसके बाद उसके ऊपर मंदिर आकार लेगा। इन पत्थरों को 12 से 15 फीट ऊँचाई तक लगाया जाना है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मंदिर की नींव की निचली सतह एक लाख 20 हजार क्षेत्रफल में है। इस सतह की लंबाई चार सौ फीट तथा चौड़ाई तीन सौ फीट थी, जो ऊपरी सतह तक आते आते 360 फीट लंबी तथा 235 फीट ही बचेगी।

इससे पहले गुरुवार (12 अगस्त) को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामलला के लिए 21 किलो चाँदी से खास झूला तैयार कराया था। उन्होंने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट और ट्विटर अकाउंट पर इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि इस झूले में बैठकर भगवान राम अपने भक्तों को दर्शन देंगे।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इसी साल 15 नवंबर तक पूरा हो जाएगा। पीएम मोदी द्वारा इस ड्रीम प्रोजेक्ट को विधानसभा चुनाव 2022 से पहले तमाम अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस जनता को समर्पित किया जाएगा। बताया जा रहा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर अर्थात विश्वनाथ धाम का 60 प्रतिशत से अधिक का काम हो चुका है। इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले सभी भवन बन चुके हैं। अभी सिर्फ सुंदरीकरण का कार्य चल रहा है।

बता दें कि दिसंबर 2023 से ही श्रद्धालु राम मंदिर में पूजा शुरू कर सकेंगे। मंदिर परिसर में ही म्यूजियम, डिजिटल आर्काइव और एक रिसर्च सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। म्यूजियम और आर्काइव के माध्यम से लोग अयोध्या और राम मंदिर के इतिहास के बारे में जान सकेंगे। इसके अलावा हिंदू संस्कृति के बारे में भी बताया जाएगा।