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साओ जैसिंटो द्वीप के ईसाइयों में नौसेना के विरुद्ध NCP नेता ने भरा जहर, कॉन्ग्रेस ने ‘तिरंगा फहराने’ पर जताई आपत्ति

गोवा में नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष ‘जोस फिलिप डिसूजा (Jose Phillip D’Souza)’ द्वारा ईसाई बहुल साओ जैसिंटो द्वीप (Sao Jacinto Island) के निवासियों को नौसेना के ख़िलाफ़ भड़काने का मामला सामने आया है। उन्होंने वहाँ के लोगों को उकसाते हुए कहा कि वो स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय नौसेना को द्वीप पर तिरंगा किसी कीमत पर फहराने न दें। राजनेता का दावा था कि भारतीय नौसेना द्वीप पर कब्जा करना चाहती है।

विरोध के कारण नेवी ने ड्रॉप किया प्लॉन

दरअसल, देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर आजादी के अमृत महोत्सव के तहत देश के सभी आईलैंड पर तिरंगा फहराया जाना था। इस क्रम में भारतीय नौसेना गोवा के साओ जैसिंटो द्वीप पर तिरंगा फहराने वाली थी, लेकिन एनसीपी नेता द्वारा ब्रेनवॉश किए जाने पर स्थानीय लोग भड़क गए और उनके विरोध के बाद नौसेना ने अपनी योजना को स्थगित कर दिया। 

रिपोर्ट के मुताबिक, इस द्वीप पर रहने वाले स्थानीय लोगों ने केंद्र सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए कहा था कि वे केंद्र या राज्य सरकार की किसी गतिविधि को द्वीप पर नहीं होने देना चाहते हैं। इसके बाद इंडियन नेवी ने अपने प्लान को ड्रॉप कर दिया। हालाँकि, यहाँ के लोगों का दावा है कि वे तिरंगा फहराने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन वे खुद झंडा फहराएँगे।

NCP नेता ने पूछा- कार्यक्रम की क्या जरूरत?

उल्लेखनीय है कि भारतीय नौसेना को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर द्वीप पर झंडा फहराना था और इसे लेकर पहले बताया भी गया था, लेकिन एनसीपी अध्यक्ष जोस फिलिप डिसूजा द्वीप पर पहुँचे और अपने अजीब दावे कर दिए। नेवी की घोषणा के कुछ दिन बाद ही एनसीपी नेता द्वीप पर पहुँचे थे और वहीं उन्होंने ईसाई जनता को भड़काया और पूछा कि आखिर झंडा फहराने के कार्यक्रम की जरूरत ही क्या है।

एक राष्ट्रीय कार्यक्रम को साम्प्रदायिक रंग देते हुए उन्होंने कहा, “उदाहरण के लिए बैट द्वीप पर हमारी धार्मिक परंपराओं को लें, जिन्हें नौसेना ने हमें, मछुआरों को आने और हमारी परंपराओं को जारी रखने से रोक दिया है। हम केंद्र या नौसेना को इस द्वीप पर कब्जा नहीं करने देंगे।”

डिसूजा ने चर्च स्क्वायर के बाहर द्वीप के निवासियों को इकट्ठा किया, जिनमें ज्यादातर ईसाई थे। इन सबको एनसीपी नेता ने नौसेना अधिकारियों द्वारा नियोजित ध्वजारोहण समारोह के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए कहा। साओ जैसिंटो द्वीप के निवासियों ने दावा किया है कि भारतीय नौसेना ने ध्वजारोहण समारोह आयोजित करने के लिए स्थानीय अधिकारियों से कोई औपचारिक अनुमति नहीं माँगी है।

कॉन्ग्रेस की आपत्ति

बता दें कि सिर्फ एनसीपी ही नहीं, बल्कि कॉन्ग्रेस ने भी द्वीप पर तिरंगा फहराए जाने पर अपनी आपत्ति जाहिर की है। दरअसल, जब गोवा के मुख्यमंत्री ने स्थानीय निवासियों द्वारा नौसेना का विरोध देख उनकी हरकत की निंदा की, तो कॉन्ग्रेस नेता शमीला सिद्दीकी सामने आईं और ऐसा जताया कि अगर भारतीय नौसेना द्वीप पर कब्जा नहीं चाहती तो बताया जाए कि वो क्या कर रही है।

शमीला ने लिखा कि भारतीय नौसेना के द्वीपों पर तिरंगा फहराने के बजाय कलेक्टर झंडा क्यों नहीं फहरा सकते। उन्होंने गोवा के मुख्यमंत्री पर एक टकराव पैदा करने का आरोप लगाते हुए हमला किया, जिसका गोवा के लोगों पर भारी असर होगा।

राहुल गाँधी पर फिर आफत: NCPCR ने फेसबुक को किया तलब, रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले पोस्ट का मामला

दिल्ली में 9 साल की बच्ची के रेप और हत्या के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) द्वारा कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी के खिलाफ कार्रवाई के लिए फेसबुक को नोटिस भेजे जाने के कुछ दिनों बाद अब एनसीपीआर ने फेसबुक इंडिया के प्रमुख (ट्रस्ट एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट) सत्या यादव को समन जारी किया है। उन्हें वीडियो साक्ष्य के साथ विभाग के समक्ष पेश होने का आदेश दिया गया है। उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने 9 वर्षीय लड़की के माता-पिता के वीडियो पोस्ट करके POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम का उल्लंघन किया था।

शुक्रवार (13 अगस्त 0221) को एनसीपीसीआर ने सत्या यादव को राहुल गाँधी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर एक और पत्र लिखा। इससे पहले 10 अगस्त को आयोग ने पत्र लिखा था। आयोग ने जोर देकर कहा कि वह न केवल बाल अधिकारों के संरक्षण से संबंधित मामलों को देख रहा है, बल्कि उसने संरक्षण और बाल विकास के लिए कानूनों को लागू न करने से संबंधित मामलों का भी स्वत: संज्ञान लिया है।

NCPCR के मुताबिक, “आयोग ने राहुल गाँधी के इंस्टाग्राम पोर्टल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो पर संज्ञान लिया था, जिसमें नाबालिग लड़की पीड़िता के माता-पिता की पहचान का खुलासा किया गया था। पोस्ट को हटाने और राहुल गाँधी के इंस्टाग्राम प्रोफाइल के खिलाफ 3 दिनों के भीतर कार्रवाई करने के लिए मामले को फेसबुक इंक को भी भेज दिया गया था। हालाँकि, 03 दिन बीत जाने के बाद भी आपके द्वारा कोई जवाब अथवा कार्रवाई करने की रिपोर्ट सामने नहीं आई है।”

एनसीपीसीआर द्वारा फेसबुक इंक को लिखे गए पत्र का स्क्रीनशॉट

कानूनी निकाय ने सोशल मीडिया साइट्स को अपनी ताकत का अहसास कराते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि सीपीसीआर (बाल अधिकार संरक्षण आयोग) अधिनियम की धारा 14 के तहत किसी व्यक्ति को समन जारी करने / उसे पेश होने और उसकी जाँच करने, दस्तावेज पेश करने से संबंधित मामलों में एक दीवानी अदालत की सभी शक्तियाँ उसके पास हैं। वह किसी भी अदालत से साक्ष्य प्राप्त कर सकता है और गवाहों के दस्तावेजों की भी जाँच कर सकता है।

एनसीपीसीआर ने सत्या यादव को दिए अपने निर्देश में कहा, “आयोग सीपीसीआर अधिनियम-2005 की धारा 13 और 14 के तहत कार्यों और शक्तियों के अनुसरण में आपको वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए व्यक्तिगत रूप से इस मामले में की गई कार्रवाई के बारे में के विवरण के साथ मंगलवार, 17 अगस्त 2021 को शाम 5 बजे चंद्रलोक भवन स्थित आयोग के कार्यालय में उपस्थित होने की आवश्यकता है। ताकि कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने और देरी के कारणों की व्याख्या की जा सके।” इसके अलावा आयोग ने फेसबुक इंक को सिविल प्रक्रिया संहिता-1908 के नियम 10 और 12 आदेश XVI के तहत आदेश का पालन नहीं करने पर ‘परिणाम’ भुगतने की भी चेतावनी दी है।

एनसीपीसीआर द्वारा फेसबुक इंक को लिखे गए पत्र का स्क्रीनशॉट

फेसबुक को राहुल गाँधी द्वारा इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए वीडियो को हटाने का निर्देश

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के मालिक माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट फेसबुक इंक को 10 अगस्त को लिखे एक पत्र में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की रजिस्ट्रार अनु चौधरी ने कहा है कि आयोग को गाँधी के इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर एक वीडियो मिला है। उसमें राहुल ने नाबालिग पीड़िता के परिवार की पहचान का खुलासा किया गया था। NCPCR द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, राहुल गाँधी द्वारा इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में POCSO अधिनियम, 2012 की धारा 23 और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 74 का उल्लंघन किया गया था।

इसलिए, एनसीपीसीआर ने फेसबुक से राहुल गाँधी द्वारा इंस्टाग्राम पर डाले गए वीडियो को हटाने के लिए कहा है क्योंकि यह बाल अधिकारों का उल्लंघन था। एनसीपीसीआर ने फेसबुक इंक को सूचित किया कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 74 किसी भी प्रकार के मीडिया में बच्चे की पहचान को उजागर करने को प्रतिबंधित करती है। इसके अलावा पोक्सो अधिनियम 2012 की धारा 23 में पीड़ित की पहचान को गुप्त रखने के बारे में कहा गया है।

एनसीपीसीआर ने निपुण सक्सेना बनाम भारत सरकार (2019) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए सुझाव दिया कि शीर्ष अदालत ने पीड़ितों की मृत्यु के बाद भी उनके विवरण का खुलासा नहीं करने के संबंध में विशिष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसलिए, बाल अधिकार निकाय ने माँग की है कि फेसबुक इंक राहुल गाँधी के खिलाफ पॉक्सो और जेजे अधिनियम का उल्लंघन करने के मामले में उचित कार्रवाई करे।

‘महिला सुरक्षा के लिए अपनाएँ यूपी मॉडल’: कॉन्ग्रेस MP के नेतृत्व वाले पैनल की राज्यों को सलाह, प्रियंका-राहुल के प्रोपेगेंडा को तगड़ा झटका

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को अपने कामकाज के लिए विपक्ष से भी सराहना मिल रही है। कॉन्ग्रेस के सांसद आनंद शर्मा ने नेतृत्व वाली एक संसदीय समिति ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर काबू पाने के लिए उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। आनंद शर्मा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं और साथ ही यूपीए काल में उन्हें केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया था।

हाल ही में उनके नेतृत्व वाली संसदीय समिति ने यूपी में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए कई विभागों को मिला कर एक ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ की स्थापना से लेकर उठाए गए अन्य क़दमों की सराहना की। संसदीय समिति ने अन्य राज्यों को भी सलाह दी है कि वो यूपी सरकार से सीखते हुए महिलाओं व अच्छों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए इससे सम्बंधित सभी विभागों के बीच तालमेल बिठाएँ, ताकि वो समन्वय बना कर कार्य कर सकें।

यूपी सरकार के एक नेता ने कहा कि इससे ये स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश अब अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण पेश कर रहा है। राज्य ने हर जिले में ‘वन स्टॉप सेंटर्स’ की स्थापना कर रखी है, ताकि हिंसा पीड़ित महिलाओं को जल्द से जल्द न्याय दिलाई जा सके। इससे 1,04,859 महिलाओं को अब तक लाभ हुआ है। इन सेंटर्स में अस्थायी शेल्टर और मानसिक काउंसिलिंग से लेकर कानूनी मदद व मेडिकल इलाज की भी व्यवस्था की जाती है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में सज़ा भी कड़ी से कड़ी दिलाई जाती है, जिससे बलात्कार जैसी घटनाओं में कमी आए। लेकिन, इन सबके बावजूद कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और महासचिव प्रियंका गाँधी उत्तर प्रदेश का मजाक बनाते हुए ‘बेटी बचाओ’ की तर्ज पर ‘अपराधी बचाओ’ कह कर आलोचना करते हैं। उन्नाव में 2 लड़कियों की हत्या के बाद उन्होंने ‘दलित कार्ड’ खेलने की कोशिश की थी।

उन्होंने यूपी सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए थे। हाथरस मामले में भी प्रियंका गाँधी व राहुल ने जम कर राजनीति की थी। प्रियंका ने तब कहा था कि महिला सुरक्षा के लिए सीएम योगी ने कुछ नहीं किया है। योगी सरकार ‘कन्या सुमंगल योजना’ भी चला रही है, जिसका फायदा 7.8 करोड़ लड़कियों को मिला है। ‘मिशन शक्ति’ के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वो अपनी आय अर्जित कर सकें।

साथ ही महिलाओं के खिलाफ अपराध की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को ‘ऑपरेशन दुराचारी’ चलाने की सलाह दी है। इसके तहत महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले हिस्ट्रीशीटर्स के पोस्टर्स सड़कों पर लगाए गए। सीएम योगी ने कहा कि लोगों को ऐसे अपराधियों के हरकतों के बारे में पता चलना चाहिए, ताकि इन अपराधियों का ‘नेम एंड शेम’ हो सके। महिलाओं का पीछा करने वालों के लिए एंटी-रोमियो स्क्वाड भी बनाया गया था।

‘बेटियों को सुबह 4 बजे उठा देता था मौलवी, रेप करने के बाद पढ़ाता था कुरान’: एक्टिविस्ट ने शेयर किया वीडियो

पाकिस्तान में एक इस्लामी मौलवी ने कई वर्षों तक अपनी ही बेटियों का रेप किया। एक्टिविस्ट व अधिवक्ता राहत ऑस्टिन ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर कर के इस घटना की जानकारी दी है। पीड़ित लड़कियों के अनुसार, मौलवी उन्हें नींद से जगाता था और फिर उनका बलात्कार करता था। इसके बाद वो उन्हें स्नान कर के नमाज पढ़ने को कहता था। फिर वो बैठ कर उन्हें कुरान की शिक्षा देता था।

पीड़ित लड़कियों ने बताया कि आपत्ति जताने पर मौलवी कहता था कि दुनिया का हर अब्बा अपनी बेटियों के साथ यही सब करता है। इसके बाद लड़कियों ने अपनी अम्मी को इस बारे में बताया। उन्होंने बताया कि विरोध करने पर मौलवी धमकाता था कि किसी को बताने पर उनका बुरा हाल करेगा। उक्त मौलवी ने दो शादियाँ कर रखी हैं। 2 बीवियों से उसकी 6 बेटियाँ हैं। इनमें से एक बेटी के साथ तो वो 5 साल तक दरिंदगी करता रहा।

इसके लिए वो सुबह 4 बजे ही उठा दिया करता था। कभी-कभी वो रात को 2-3 बजे ही बुला कर उसका रेप करता था। रात को जब मौका मिलता, तभी वो उठा देता था। कभी-कभी रात के 12 बजे ही वो उठा दिया करता था। एक पीड़िता अपने मामा के साथ सोती थी, लेकिन उसके मामा को इस बारे में कुछ भी पता नहीं चला क्योंकि घर में बाकी सब नींद से सोए रहते थे। ये साफ़ नहीं है कि ये वीडियो और ये मामला कब का है।

अगस्त 2020 में पाकिस्तान के सिंध प्रान्त स्थित कंदियारो की एक मस्जिद में बच्ची से रेप का मामला सामने आया था। आरोपित मौलवी अब्बास फरार हो गया था। अब पाकिस्तान में एक मौलवी द्वारा अपनी ही बेटियों का रेप किए जाने की घटना सामने आई है।

गोवा का साओ जैसिंटो द्वीप, ईसाई आबादी ने किया आजादी पर तिंरगा फहराने का विरोध: सीएम सावंत ने नौसेना को दिया ‘फ्री हैंड’

देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर आजादी के अमृत महोत्सव के तहत देश के सभी आईलैंड पर तिरंगा फहराया जाना था। इस क्रम में भारतीय नौसेना गोवा के साओ जैसिंटो द्वीप पर तिरंगा फहराने वाली थी, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के बाद नौसेना ने अपनी योजना को स्थगित कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस द्वीप पर रहने वाले स्थानीय लोगों ने केंद्र सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए कहा था कि वे केंद्र या राज्य सरकार की किसी गतिविधि को द्वीप पर नहीं होने देना चाहते हैं। इसके बाद इंडियन नेवी ने अपने प्लान को ड्रॉप कर दिया। हालाँकि, यहाँ के लोगों का दावा है कि वे तिरंगा फहराने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन वे खुद झंडा फहराएँगे।

नौसेना ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत रक्षा मंत्रालय ने 13 से 15 अगस्त 2021 के बीच देश भर के द्वीपों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने की योजना बनाई है।

भारतीय नौसेना ने अपने बयान में कहा, “गोवा नौसेना क्षेत्र की एक टीम ने इस अखिल भारतीय पहल के तौर पर साओ जैसिंटो द्वीप सहित गोवा के द्वीपों का दौरा किया। हालाँकि, जैसिंटो द्वीप पर योजना को रद्द करना पड़ा, क्योंकि निवासियों ने इसका विरोध किया था। नौसेना ने कहा कि देशभक्ति की भावना पैदा करने और आजादी के 75वें वर्ष का जश्न मनाने के लिए यह पहल देश भर में की गई है।”

गौरतलब है कि सैन जैसिंटो द्वीप पणजी के दक्षिण में स्थित है। द्वीप पर अधिकतर ईसाई लोग रहते हैं। यहाँ पोलैंड के सेंट हयासिंथ (साओ जैसिंटो) और सेंट डोमिनिक (साओ डोमिंगो) को समर्पित दो चर्च हैं। द्वीप के निवासियों ने प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है, और पर्यटकों को यात्रा करने की अनुमति नहीं है।

इस द्वीप पर पले-बढ़े डैरेल डिसूजा ने कहा कि इस द्वीप में लगभग 200 परिवार हैं जो हर साल राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। हालाँकि, ये लोग गोवा में तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजना और संसद द्वारा पारित प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण विधेयक-2020 के विरोध में द्वीप पर नौसेना की उपस्थिति को लेकर डरे हुए हैं।

डिसूजा ने कहा, “हम झंडा फहराने के बिल्कुल खिलाफ नहीं हैं। हकीकत में हमने यही बात नौसेना के उन अधिकारियों से भी कही है, जो 15 अगस्त को झंडा फहराने के लिए हमारे साथ द्वीप पर आना चाहते थे।”

उन्होंने दावा किया कि यहाँ के द्वीपवासी, पारंपरिक मछुआरे द्वीप के हितों के खिलाफ होने वाली राजनीतिक चालों को लेकर काफी चिंतित हैं। डिसूजा ने कहा कि द्वीपवासियों को डर है कि द्वीप को सरकारी अधिकारियों द्वारा अपने कब्जे में ले लिया जाएगा और बंदरगाह की सीमा के तहत लाए जाने के बाद विकास के लिए इसे निजी पार्टियों को सौंप दिया जाएगा।

एक गैर सरकारी संगठन से राजनीतिक दल बने गोएंचो आवाज़ के कैप्टन विराटो फर्नांडीस ने भी द्वीपवासियों का बचाव करते हुए कहा कि उनके पास द्वीप में नौसेना की उपस्थिति का विरोध करने के लिए मजबूत कारण हैं। उनका दावा है कि तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजना (सीजेडएमपी) और प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण विधेयक-2020 के पारित होने के बाद द्वीप के निवासियों के बीच एक ‘अविश्वास’ है, जिसके तहत इस द्वीप को मोरमुगाओ पोर्ट ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया है।

फर्नांडीस ने कहा, “हाल ही में सीजेडएमपी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे। सरकार ने बंदरगाह की सीमाओं को दर्शाया है, जिसके तहत साओ जैसिंटो द्वीप का अधिकार क्षेत्र बंदरगाह के अंतर्गत आ गया है। हम इन बंदरगाह सीमाओं का विरोध करते रहे हैं। हम ये कहते आ रहे हैं कि द्वीप में 1731 की धार्मिक संरचनाएं हैं, और हमने कहा है कि यह बंदरगाह की सीमा के अंतर्गत नहीं आ सकता है। हालाँकि, उस घटना के बाद से लोग सतर्क हो गए हैं और इसी सतर्कता के कारण नौसेना की उपस्थिति ने उसे और अधिक संदिग्ध बना दिया है। बिल और सीजेडएमपी ने अविश्वास पैदा किया है और इसी कारण द्वीप पर रहने वाले लोगों को किसी के भी आगमन पर संदेह होता है। यही मुख्य वजह है।”

देश की आजादी के 75वें साल में भारत सरकार ‘अमृत महोत्सव’ को ‘जन आंदोलन’ के रूप में मनाने की योजना बना रही है। मोदी सरकार ने 75वीं वर्षगांठ समारोह की तैयारी पहले ही शुरू कर दी है और ऐतिहासिक आयोजन के उपलक्ष्य में कई कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। इन सभी कार्यक्रमों के प्रबंधन की जिम्मेदारी एक राष्ट्रीय कार्यसमिति की होगी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने नौसेना को दी मंजूरी

साओ जैसिंटो द्वीप पर तिरंगा फहराने को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ट्विटर पर घोषणा की कि इस तरह के षडयंत्रों की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसको लेकर उन्होंने दो ट्वीट्स किए। सावंत ने कहा कि उन्होंने भारतीय नौसेना को द्वीप पर भारतीय ध्वज फहराने की अपनी मूल योजना को जारी रखने की अनुमति दी है।

सीएम ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि सेंट जैसिंटो द्वीप पर कुछ व्यक्तियों ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय नौसेना द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर आपत्ति जताई है। मैं इसकी निंदा करता हूँ और रिकॉर्ड में कहना चाहता हूँ कि मेरी सरकार इस तरह के कृत्यों को बर्दाश्त नहीं करेगी।”

सीएम सावंत ने आगे कहा, “मैंने भारतीय नौसेना से अपनी मूल योजना पर आगे बढ़ने का अनुरोध किया है और गोवा पुलिस से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। भारत विरोधी गतिविधियों की इन कोशिशों से सख्ती से निपटा जाएगा। यह हमेशा नेशन फर्स्ट रहेगा।”

बँटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता, 14 अगस्त को मनाया जाएगा ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’: PM मोदी का बड़ा ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान हमारे लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horrors Remembrance Day)’ के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि देश के बँटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने याद किया कि किस तरह नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गँवानी पड़ी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आशा जताई कि ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horrors Remembrance Day)’ का यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएँ भी मजबूत होंगी। बता दें कि 14 अगस्त ही वो दिन है, जिस दिन भारत के बँटवारे पर मुहर लगी थी और बड़ी मात्रा में खूनखराबा हुआ था।

इसी दिन पाकिस्तान अपना आज़ादी दिवस भी मनाता है। 14 अगस्त, 1947 के बाद दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा माइग्रेशन देखने को मिला था, जब लाखों लोगों को अपनी घर-संपत्ति छोड़ कर भागना पड़ा था। जबरदस्त दंगे हुए थे। खासकर पंजाब और बंगाल में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला था, क्योंकि इन दोनों राज्यों का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में चला गया था। इस पूरे प्रकरण में 1.5 करोड़ लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा।

भारत-पाकिस्तान विभाजन और इसके बाद हुए दंगों में 20 लाख से भी अधिक लोग मारे गए थे। महिलाओं का बलात्कार हुआ था, बच्चों तक को नहीं बख्शा गया था। किसी सिख महिला ने अपनी इज्जत बचाने के लिए गुरुद्वारे में ही आत्महत्या कर ली थी तो कहीं शरणार्थियों से भरी पूरी ट्रेन में ही नरसंहार हुआ था। जिस देश में राजनेता स्वतंत्रता का जश्न मना रहे थे, वहीं दूसरी तरफ अराजकता का माहौल बना हुआ था।

विभाजन से पहले ही भारत में नरसंहार शुरू हो गया था। महात्मा गाँधी ने ‘खिलाफत आंदोलन’ का समर्थन किया था। मालाबार में 28 अप्रैल, 1920 को एक प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद से ही हिन्दुओं का नरसंहार शुरू हो गया था। 1921-22 में केरल में खिलाफत की स्थापना की माँग लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों ने लाखों हिन्दुओं का नरसंहार किया। जिन्ना ने बंगाल में हिन्दुओं को मार के उसे इस्लामी मुल्क बनाने की बात कही थी।

गौहत्या बैन, मंदिर के 5 Km के दायरे में माँस बिक्री पर प्रतिबंध, गैर जमानती कार्रवाई: असम विधानसभा में मवेशी संरक्षण विधेयक पास

असम में मवेशियों की हत्या, उपभोग और उनके परिवहन पर रोकथाम के लिए हिंमंत बिस्वा सरमा सरकार ने शुक्रवार (13 अगस्त 2021) को मवेशी संरक्षण विधेयक-2021 पारित करा लिया। विधानसभा में जैसे ही अध्यक्ष ने इस बिल के पारित होने की घोषणा की तो सत्तापक्ष के सदस्यों के ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे से पूरा सदन गूँज उठा।

इस कानून के पारित होने के बाद हिंदू, जैन, सिख और अन्य गैर-बीफ खाने वाले समुदायों या मंदिर और किसी भी अन्य संस्थान के पाँच किलोमीटर के दायरे में पशु हत्या नहीं की जा सकेगी। कानून तोड़ने वालों के खिलाफ गैर जमानती धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि, सरकार के इस फैसले से विपक्ष पूरी तरह से नाखुश दिखा।

असम में विपक्षी कॉन्ग्रेस, एआईयूडीएफ और सीपीआई (एम) ने सरमा सरकार के इस विधेयक को विधानसभा चयन समिति के पास भेजने की माँग की थी, लेकिन मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बिल पर चर्चा के दौरान इसे चयन समिति के पास भेजने से इनकार कर दिया।

बिल के पास होने पर खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने ट्वीट कर कहा, “ऐतिहासिक असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2021 के पारित होने के साथ अपने चुनावी वादे को पूरा करने पर बेहद खुशी और गर्व है। मुझे यकीन है कि यह अवैध पशु व्यापार और असम के माध्यम से पारगमन को भारी झटका देगा, जिससे हमारी परंपरा में सदियों से चली आ रही मवेशियों की उचित देखभाल सुनिश्चित होगी।”

विधेयक पर चर्चा के दौरान माकपा के मनोरंजन तालुकदार का कहना था कि इस बिल से लोगों के खाने के अधिकार का हनन होगा, खासकर जहाँ अल्पसंख्यक लोग बीफ खाते हैं। हालाँकि, उनकी इस बात को ही सीएम ने खारिज कर दिया। सरमा ने कहा कि इससे साम्प्रदायिक सद्भाव होगा। इसका उद्येश्य किसी को खाने से रोकना नहीं है। बीफ खाने वालों को दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

मुस्लिम भी साम्प्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने में योगदान दें

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने मुस्लिमों को लेकर कहा, “केवल हिंदू ही साम्प्रदायिक सद्भाव को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार बनें ये संभव नहीं है। मुस्लिमों को भी इसमें सहयोग करना चाहिए।” सरमा ने कहा कि हम गायों की पूजा करते हैं यही सबसे अहम बात है।

‘बच्ची की हत्या से पहले रेप की पुष्टि के कोई सबूत नहीं’: दिल्ली कैंट मामले में पुलिस ने अदालत को बताया, कोर्ट ने रोका मुआवजा

दिल्ली पुलिस ने एक स्थानीय अदालत को बताया है कि अभी तक ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जिससे इसकी पुष्टि हो कि राजधानी के दक्षिणी-पश्चिमी स्थित दिल्ली कैंटोनमेंट में 9 साल की लड़की का बलात्कार हुआ था। बता दें कि दिल्ली कैंट इलाके में 9 साल की लड़की की हत्या के बाद उसके साथ रेप किए जाने के आरोप भी लगे थे। पूर्व सांसद उदित राज समेत कई लोगों ने इस मामले में विरोध प्रदर्शन किया था।

इस मामले की जाँच कर रहे इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर (IO) ने अदालत को बताया कि चारों आरोपितों के बयानों से इसका खुलासा हुआ है कि श्मशान के 55 वर्षीय कर्मचारी राधेश्याम और कुलदीप सिंह ने बच्ची का बलात्कार किया था और फिर हत्या कर दी थी। इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। वहीं दो अन्य आरोपितों सलीम अहमद और लक्ष्मी नारायण ने मृतका के शव का अंतिम संस्कार कराने में इन दोनों आरोपितों की मदद की थी।

ये दोनों भी उसी श्मशान में बतौर कर्मचारी कार्यरत हैं। कोर्ट ने 12 अगस्त को दिए गए एक आदेश में नोट किया, “IO ने स्वीकार किया है कि किसी भी प्रत्यक्ष गवाहों के बयान या फिर अन्य सबूतों, या फिर ऐसे मेडिकल साइंटिफिक सबूत नहीं जुटाए जा सके हैं, जिनसे इसकी पुष्टि हो कि बच्ची का रेप हुआ था या नहीं। IO ने कहा है कि वो फ़िलहाल स्पष्ट रूप से इसकी पुष्टि नहीं कर सकते कि बच्ची का बलात्कार हुआ था या नहीं।”

बता दें कि आरोपितों के बयानों को तब तक कोर्ट में मान्यता नहीं दी जाती है, जब तक उसकी पुष्टि के लिए कोई अन्य सबूत न मिल जाए। स्पेशल जज आशुतोष कुमार ने मृत बच्ची की माँ को ‘अंतरिम राहत’ के रूप में 2.5 लाख रुपए देने का आदेश दिया। हालाँकि, कोर्ट ने इसके अलावा अंतरिम मुआवजा देने का आदेश नहीं दिया और कहा कि अभी जाँच एजेंसी ही इसे लेकर निश्चित नहीं है कि मृतका का बलात्कार हुआ था या नहीं, इसीलिए फ़िलहाल इसके लिए मुआवजे की अनुमति नहीं है।

अदालत ने पीड़ित पक्ष को इसकी छूट दी है कि वो रेप के लिए मुआवजे के लिए आगे याचिका दायर कर सकते हैं। अगर जाँच एजेंसी के पास आगे ऐसा कोई सबूत मिलता है तो फिर से याचिका दायर की जा सकती है। मौत की एवज में अधिकतम 10 लाख रुपए के सरकारी मुआवजे का प्रावधान है। कोर्ट ने इसका 25% देने का आदेश दिया। अदालत ने चारों आरोपितों को 14 दिन के जुडिशल कस्टडी में भेज दिया।

चारों आरोपित बच्ची की माँ के परिचित ही हैं। FIR में कहा गया है कि आरोपितों ने न सिर्फ बच्ची का बलात्कार कर के उसकी हत्या कर दी, बल्कि माता-पिता की अनुमति के बिना ही उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। मृतका की माँ की शिकायत के आधार पर ये FIR दर्ज हुई थी। इस मामले में IPC की हत्या, रेप व आपराधिक धमकी की धाराओं के अलावा POCSO एक्ट व SC/ST एक्ट भी लगाया गया है।

तालिबान की गोली खाने वाली नोबल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई ने अफगानिस्तान में तालिबानी आतंक पर साधी चुप्पी

अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकी एक के बाद एक प्रांतों पर कब्जा करते जा रहे हैं। लेकिन तालिबान के खिलाफ हमेशा मुखर होकर अपनी आवाज उठाने वाली शांति की नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई अफगानिस्तान में आतंकवादी संगठन के बढ़ते हमले पर एकदम चुप्पी साधे हुए हैं। तालिबान के अमानवीय हमलों का विरोध करना और उस पर रोना तो छोड़िए एक फुसफुसाहट तक नहीं नजर आ रही है।

अफगानिस्तान में तालिबान के हमले तेज होते जा रहे हैं। उसने अब तक 10 से अधिक प्रांतीय राजधानियों को अपने कब्जे में ले लिया है। तालिबानियों की क्रूर हिंसा के कारण लोग सामूहिक रूप से विस्थापन के लिए मजबूर हैं। लेकिन पाकिस्तान की मलाला युसुफजई उनके पड़ोसी देश में क्या हो रहा है उससे पूरी तरह से बेपरवाह हैं।

अफगानिस्तान में पूरी तरह से अराजकता का साम्राज्य फैल गया है। तालिबान लगातार वहाँ की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंकने और अपने प्रतिगामी इस्लामी शासन को स्थापित करने की धमकी दे रहा है। लेकिन नोबेल पुरस्कार विजेता को अब तक इस हिंसा की निंदा करना तक उचित नहीं लगा। खास बात यह है कि मलाला ट्विटर सहित तमाम सोशल मीडिया काफी सक्रिय रहती हैं। बावजूद इसके तालिबानी आतंक पर उन्होंने एक भी पोस्ट नहीं किया है।

खास बात यह है कि ये वही मलाला हैं, जिन्हें अक्टूबर 2012 में पाकिस्तान की स्वात घाटी में महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर तालिबान ने गोली मारी थी। गंभीर रूप से घायल हालत में उन्हें पहले पाकिस्तान के आर्मी अस्पताल में ले जाया गया औऱ फिर वहाँ से यूके रेफर किया। वहाँ इलाज के बाद वह चमत्कारिक रूप से ठीक हो गई थीं।

कंधार पर किया कब्जा

रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबानी आतंकियों ने अफगानिस्तान में गुरुवार (12 अगस्त 2021) रात एक और प्रांतीय राजधानी कंधार पर कब्जा कर लिया था। कंधार अफगानिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और देश की 34 में से 12वीं प्रांतीय राजधानी भी है।

इससे पहले बुधवार (11 अगस्त) को तालिबानी आतंकियों ने अफगान के कुंदुज प्रांत के अधिकतर हिस्से पर कब्जा जमा लिया था। यहीं के कुंदुज एयरपोर्ट पर भारतीय वायु सेना द्वारा अफगान सेना को गिफ्ट किया गया Mi-35 हिंद अटैक हेलिकॉप्टर था, जिसे तालिबानी आतंकियों ने अपने कब्जे में ले लिया था। एमआई-35 को रूस द्वारा डिजाइन किया गया था।

अफगानिस्तान में तालिबान कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब काबुल से मात्र 50 किलोमीटर की दूरी पर ही है। इसके बाद ही तालिबान द्वारा मुल्क में पूर्ण कब्जा करने की आशंकाएँ बढ़ गई हैं।

‘तेरी इज्जत लूट कर धर्मांतरण कराऊँगा’: दलित बहनों का दुपट्टा खींचा, थप्पड़ मारे- जानिए कानपुर पिटाई वीडियो से पहले क्या हुआ

उत्तर प्रदेश के कानपुर में अफसार अहमद नाम के एक रिक्शा चालक की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। यूपी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारियाँ भी की। इस मामले में अब तक 3 FIR दर्ज की जा चुकी है। अफसार अहमद ने 5 नामजद व 8-10 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने कहा है कि पिटाई के वीडियो के आधार पर आरोपितों की पहचान की गई है। ये पूरा मामला एक दलित महिला व उनकी बेटियों पर इस्लामी धर्मांतरण के दबाव से जुड़ा है।

शुक्रवार (13 अगस्त, 2021) को पुलिस ने इस मामले में 3 और आरोपितों को गिरफ्तार किया। शेष की धर-पकड़ के लिए छापेमारी जारी है। बर्रा के कच्ची बस्ती के निवासी अंकित वर्मा उर्फ गदुम्मा, केशू और शिवम को पुलिस ने गिरफ्तार किया। अन्य आरोपितों के बारे में पूछताछ जारी है। उधर गुरुवार देर शाम गिरफ्तार किए गए विहिप के नगर मंत्री अमन गुप्ता समेत तीनों लोगों को थाने से जमानत दे दी गई।

इससे पहले पुलिस तीनों के रिमांड पेपर के साथ अदालत पहुँची थी। कोर्ट में मुकदमे की स्थिति देखी गई तो पुलिस को वापस कर दिया गया, क्योंकि अफसार अहमद की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में ऐसी कोई धारा नहीं लगी थी जिसमें 7 वर्ष से अधिक की सजा हो। अतः, इन्हें फिर एसीपी कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ जमानत प्राप्त हुई। असल में ये पूरा मामला एक दलित परिवार की प्रताड़ना से जुड़ा हुआ है।

एक दलित महिला ने सद्दाम और सलमान सहित बस्ती के ही कुछ पड़ोसियों पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने बलवा, मारपीट और धमकी की धाराओं में FIR दर्ज भी की थी। धर्मांतरण की धारा न जोड़ने का आरोप लगा हिन्दू कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। दलित महिला के परिवार ने भी सुरक्षा की माँग की है। सपा नेता ओमप्रकाश मिश्रा ने पार्टी के निर्देश पर अफसार अहमद के घर जाकर वित्तीय मदद भी की। अफसार अहमद इस मामले में आरोपित नहीं है। आरोपितों का रिश्तेदार होने के कारण उसे निशाना बनाया गया था।

उक्त महिला की बेटी का कहना है कि वो अपनी माँ समेत कई बार पुलिस का चक्कर लगा चुकी हैं। 18 वर्षीय पीड़िता ने आरोप लगाया है कि 3 अगस्त की रात वह बहन के साथ राम गोपाल चौराहे के पास मेडिकल स्टोर से दवा लेकर घर जा रही थी। तभी सलमान और उसके तीन अन्य साथी पहुँच गए और जबरन बहन का नंबर माँगने लगे। आरोप है कि उन्होंने दुपट्टा भी खींचा और कई थप्पड़ मारे। आरोप है कि इसके 5 दिन बाद आरोपितों ने घर में घुस कर पीटा था।

सद्दाम और सलमान पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता से कहा, “तेरी इज्जत लूट कर तेरा धर्मांतरण कराऊँगा।” पीड़ित बहनों की माँ ने थाने में दी गई शिकायत में कहा है कि उनकी बेटियाँ जब हैंडपंप पर पानी भरने गई थीं, तब ये घटना हुई। जानकारी मिलते ही ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला सांप्रदायिक होने के कारण महल खराब होने का डर था, इसीलिए पुलिस के साथ-साथ CRPF को भी तैनात किया गया।