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भारत-पाक विभाजन के लिए 10 दिन में राजी हुई थी कॉन्ग्रेस, पंडित नेहरू ने हाथ खड़ा करके दिया समर्थन, तस्वीर वायरल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर मनाने का ऐलान करने के बाद इंटरनेट पर भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की एक तस्वीर शेयर हो रही है। ये तस्वीर कथित तौर पर उस समय की है जब भारत के विभाजन को लेकर कॉन्ग्रेसी अपना वोट दे रहे थे और नेहरू ने भी सबके बीच में अपना हाथ ऊँचा किया हुआ था।

इस तस्वीर को ट्विटर यूजर @IndiaHistorypic ने शेयर किया है। ट्विटर पर इस हैंडल को इतिहास से जुड़ी तस्वीरें पोस्ट करने के लिए पहचाना जाता है। इस हैंडल से शेयर तस्वीर में कई कॉन्ग्रेसी हैं, जो भारत के विभाजन पर हाथ उठा करके अपनी सहमति दे रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, यह तस्वीर 14 जून 1947 को दिल्ली में हुए कॉन्ग्रेस अधिवेशन की है। इसी दौरान भारत के विभाजन का प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में माउंटबेटन योजना को स्वीकार किया गया था, जिसमें बंगाल और पंजाब के विभाजन के साथ भारत के विभाजन का निर्णय था। माउंटबेटन योजना की घोषणा 3 जून को की गई थी। इसका सीधा मतलब यही है कि भारत के विभाजन की योजना को कॉन्ग्रेस पार्टी ने केवल 10 दिनों में स्वीकार कर लिया था।

शेयर की गई तस्वीर में बैकग्राउंड में जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गाँधी, डॉ राजेंद्र प्रसाद और गोविंद बल्लभ पंत नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर उन्हीं होमाई व्यारावाला (Homai Vyarawala) ने खींची थी, जो उस दौर की कई ऐतिहासिक तस्वीरें खींचने के लिए जाने जाते हैं।

PM मोदी का बड़ा ऐलान

बता दें कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान हमारे लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horrors Remembrance Day)’ के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि देश के बँटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने याद किया कि किस तरह नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गँवानी पड़ी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आशा जताई कि ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horrors Remembrance Day)’ का यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएँ भी मजबूत होंगी। बता दें कि 14 अगस्त ही वो दिन है, जिस दिन भारत के बँटवारे पर मुहर लगी थी। उसके बाद बड़े पैमाने पर खून-खराबा हुआ था।

इसी दिन पाकिस्तान अपना आजादी दिवस भी मनाता है। 14 अगस्त 1947 के बाद दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा माइग्रेशन देखने को मिला था, जब लाखों लोगों को अपनी घर-संपत्ति छोड़ कर भागना पड़ा था। उस दौरान भयानक दंगे हुए थे, खासकर पंजाब और बंगाल में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला था, क्योंकि इन दोनों राज्यों का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में चला गया था। इस पूरे प्रकरण में 1.5 करोड़ लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था।

चीनियों पर किसने किया अत्याचार- OK, भारतीयों पर क्या-क्या जुल्म हुए- NOT OK: खूनी इतिहास को पढ़ना इसलिए जरूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 14 अगस्त को अपने एक ट्वीट में लिखा, देश के बँटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गँवानी पड़ी। उन लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आगे लिखा; #PartitionHorrorsRemembranceDay का यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएँ भी मजबूत होंगी।

प्रधानमंत्री बनने के सात वर्षों के बाद उनका यह वक्तव्य इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बहुत हद तक भारत के सामाजिक भविष्य के प्रति उनकी सोच को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य के अलग-अलग भावार्थ निकाले जाएँगे। उन्होंने जो नहीं लिखा उसका विश्लेषण किया जाएगा। उनकी तथाकथित मंशा और सोच की बात भी की जाएगी। कुछ विश्लेषक उनके इस वक्तव्य में राजनीतिक ‘सरोकार’ खोजेंगे। ऐसा करने के पीछे विशेषज्ञ और बुद्धिजीवियों के अपने कारण होंगे पर एक आम भारतीय की दृष्टि से देखा जाए तो ऐसे वक्तव्य की आवश्यकता थी।

ऐसे में कहा जा सकता है कि देर से ही सही, किसी प्रधानमंत्री ने तो यह कहा। अगले दो-चार दिन उनका यह वक्तव्य चर्चा में रहेगा। उन पर आरोप भी लगाए जाएँगे, पर इस बात से केवल प्रधानमंत्री के विरुद्ध प्रोपेगेंडा चलाने वाले ही असहमत होंगे कि बिना इतिहास देखे या बिना उस पर विचार किए कोई भी राष्ट्र अपने भविष्य के प्रति आशावान नहीं रह सकता। उसके लिए यह समझना लगभग असंभव होगा कि भविष्य में उसे क्या-क्या नहीं होने देना है।

हमारे देश के प्रधानमंत्री से ऐसे किसी वक्तव्य की आवश्यकता क्यों थी? यह ऐसा प्रश्न है जिसके अलग-अलग उत्तर हो सकते हैं, पर मेरे विचार से सबसे सटीक उत्तर एक प्रश्न की शक्ल में होगा कि आवश्यकता क्यों नहीं थी? हम वही देखते हैं जो देखना चाहते हैं। ऐसे में मानव इतिहास की सबसे भीषण त्रासदियों में से एक भारतवर्ष के विभाजन को हमें सबसे अधिक रूमानियत और नास्टैल्जिया की तरह दिखाया गया। दशकों तक हम उसे ही देख पाए जो दिखाया गया। इस पार से गए और उस पार से आए साहित्यकारों, कथाकारों और कवियों ने भी अपने कथ्य को लाहौर की ओस वाली शामें और दिल्ली में दोस्त से गिफ्ट में मिले पश्मीना शॉलों और सिगरेट के पैकेट्स में टाँक दिया। हमारे इतिहासकारों की बात करें तो वे मानवता की इतनी बड़ी त्रासदी को वन लाइनर में ढालते हुए largest political migration in human history बताकर निकल लिए।

इतिहासकारों के इस वन लाइनर को दशकों तक इतनी बार कोट किया गया, जिससे आज लगता है कि इन इतिहासकारों ने किसी नेता द्वारा उन्हें गिफ्ट की गई कलम से हर भारतवासी के हृदय पर लिख दिया कि भारत का विभाजन कोई त्रासदी नहीं थी। ये बस धार्मिक जनसंख्या के आवन-जावन की बात थी, जिसे तुम्हारी तुच्छ बुद्धि जबरदस्ती त्रासदी समझती है। ये बस कुछ ‘मिलियन’ के इधर से उधर जाने की और कुछ ‘मिलियन’ के उधर से इधर आने की बात थी। इतिहासकारों के समर्थन में उनके भाई समाजशास्त्री उतर आए और देशवासियों को बताया कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। मनुष्य के लिए आवश्यक है कि वो भूत की ओर पीठ करके केवल भविष्य की ओर देखे। यही मनुष्य और मानवता के उत्तर-जीवन का मूल आधार है।

हमारे विद्वानों ने अपनी कला से हमारे मनों पर चूना पोतकर ऐसी सफेदी पैदा की कि सब कुछ धुल गया। भूत को याद करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हम चाहते हैं कि तुम्हारा भविष्य सही न रहे। इन इतिहासकारों को चीनियों द्वारा अपने ऊपर हुए अत्याचार को याद करवाने में बहुत मजा आता है, पर भारतीयों द्वारा भूतकाल की ओर देखने मात्र से ये असहज हो जाते हैं। इनके अनुसार चीन यदि जापानियों द्वारा उन पर किए गए अत्याचार को याद रखना चाहता है तो सही कर रहा है, पर भारतवासी यदि विदेशी आक्रांताओं द्वारा किए गए अत्याचार को याद रखना चाहता है तो वह गलत कर रहा है। ऐसे में हम भविष्य की राह तय करने के लिए भूत की ओर जब-जब देखेंगे ये लोग शोर ही मचाएँगे। पर यह समय का चक्र है। देर से ही सही, सत्य उजागर होता ही है।

सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से राष्ट्र आज जहाँ खड़ा है, वहाँ प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य महत्वपूर्ण है। ऐसे में किसी के द्वारा भी जब देश के टुकड़े होने की बात होती है तो पूरे देश को यह याद करने की आवश्यकता है कि 14 अगस्त 1947 को क्या हुआ था? दशकों तक हमारे नेता और बुद्धिजीवी पाकिस्तान उच्चायोग में जाकर पाकिस्तान दिवस मनाते रहे और भारत भर को विश्वास दिलाते रहे, “अरे और कुछ नहीं हुआ था। बस उस दिन पाकिस्तान बना था और चूँकि पाकिस्तान हमारा पड़ोसी है इसलिए हम यहाँ आए हैं।”

जब देश के अलग-अलग राज्यों में जाति, धर्म और इलाके के नाम पर अलगाववादी आंदोलन खड़े किये जा रहे हैं तो हमारे लिए देश के विभाजन की विभीषिका को याद करते रहना आवश्यक है। क्या हुआ और किन कारणों से हुआ, यह भूल जाने का अर्थ से केवल भूत ही नहीं, भविष्य से आँख मूँद लेना है। हम यदि यही भूल जाएँगे तो फिर यह याद कैसे करेंगे कि हमें क्या नहीं करना है? इसलिए 14 अगस्त को उन्हीं बातों के लिए याद रखना आवश्यक है, जो 1947 में उस दिन हुई थीं।

हमारे ऐसा करने से किसी को असहज होने की आवश्यकता जान नहीं पड़ती पर यदि कोई असहज होता है तो फिर यह उसकी समस्या है। प्रधानमंत्री का आज का वक्तव्य हमें आशावान बनाता है कि हम भविष्य में दशकों से प्रोपेगेंडा का हिस्सा रहीं कई और स्थापित धारणाओं और मान्यताओं को ध्वस्त होते हुए देखेंगे। 

‘देश में लड़कियाँ सिर्फ मनोरंजन के लिए सेक्स नहीं करतीं’: सहमति से यौन संबंध और बलात्कार मामले में एमपी HC का फैसला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार (13 अगस्त) को कहा कि देश में अविवाहित लड़कियाँ सिर्फ मनोरंजन के लिए शारीरिक संबंध नहीं बनाती हैं। अदालत ने आगे कहा कि अविवाहित लड़कियाँ केवल तभी सेक्स करती हैं, जब उन्हें उनके साथी द्वारा शादी का आश्वासन दिया जाता है। अदालत ने शादी का वादा करने वाली लड़की के साथ सहमति से यौन संबंध बनाने और बाद में शादी करने से इनकार करने वाले बलात्कार के आरोपित की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर बेंच) के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने कहा कि एक लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाते समय लड़के को इसके परिणाम का सामना करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

अदालत ने कहा कि भारत एक रूढ़िवादी समाज है। कुछ अपवाद छोड़कर देश अभी तक सभ्यता के ऐसे स्तर (निम्न या उच्च) पर नहीं पहुँचा है, जहाँ लड़कियाँ सिर्फ मनोरंजन के लिए लड़कों के साथ कामुक गतिविधियों में शामिल हों।” उन्होंने कहा कि जब तक लड़कियों से शादी का वादा नहीं किया जाता है, तब तक वह शारीरिक संबंध नहीं बनाती हैं। अपनी बात को साबित करने के लिए हर बार पीड़िता द्वारा आत्महत्या का प्रयास करना जरूरी नहीं है, जैसा कि इस मामले में है।

कोर्ट ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा कि उसने बलात्कार के अधिकांश मामलों में देखा है कि बचाव पक्ष का तर्क होता है कि ‌शिकायतकर्ता की सहमति से संबंध बने थे, जबकि ज्यादातर मामलों में आरोपित ही शादी का झूठा वादा कर इसका फायदा उठाते हैं।

आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 376(2)(एन), 366 और बच्चों के यौन शोषण से रोकथाम अधिनियम की धारा 3, 4, 5-1, 6 के तहत मामला दर्ज किया गया था। उस पर आरोप था कि उसने शादी का झाँसा देकर पीड़िता के साथ बलात्कार किया। वहीं, कोर्ट के समक्ष आरोपित के वकील ने दलील दी कि पीड़िता उस समय बालिग थी और दोनों इसके लिए सहमत थे।

आरोपित के ​वकील ने कहा कि लड़की के माता-पिता शादी का विरोध कर रहे थे, क्योंकि दोनों के धर्म अलग-अलग हैं। आरोपित हिंदू है, जबकि शिकायकर्ता मुस्लिम है। आरोपित ने कहा कि उसे इस मामले में फँसाया जा रहा है।

दूसरी ओर, मध्य प्रदेश सरकार ने तर्क दिया है कि लड़के ने अक्टूबर 2018 से शादी के बहाने लड़की के साथ बार-बार बलात्कार किया और बाद में उससे शादी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद जब उसने पीड़िता को बताया कि उसकी शादी किसी और से हो रही है तो पीड़िता ने आत्महत्या का प्रयास किया, हालाँकि वह बच गई।

होनहार बेटियाँ, गगनयान मिशन, कोरोना, अमर सेनानी… : जानें स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश से क्या कहा

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 75 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार (अगस्त 14, 2021) को सभी अमर सेनानियों को नमन करते हुए उनके बलिदान को याद किया। उन्होंने देश को संबोधित करते हुए बताया कि कैसे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से ही देश की आजादी का सपना साकार हुआ। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों से लेकर टोक्यो ओलंपिक में देश का नाम रौशन करने वाले खिलाड़ियों की भी सराहना की।

आज देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाषण की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • -स्वतंत्रता दिवस के 75 वीं वर्षगाँठ की शुभकामना देते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि इसी वर्ष देश अपनी आजादी की 75वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है।
    – उन्होंने संबोधन के दौरान कई पीढ़ियों के ज्ञात और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानी, जिनके कारण आजादी का सपना साकार हुआ, उन सबको श्रद्धापूर्वक नमन किया।
    – टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से देश का जो गौरव बढ़ा, उस पर भी राष्ट्रपति ने बात की, और सभी माता-पिता से आग्रह किया कि वे होनहार बेटियों के परिवारों से शिक्षा लें और – अपनी बेटियों को भी आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें।
    – राष्ट्रपति ने कोरोना वायरस की दूसरी लहर में स्वास्थ्यकर्मियों के योगदान की सराहना की और देशवासियों से प्रोटोकॉल के अनुरूप वैक्सीन लगवाने का आग्रह किया।
    – कृषि क्षेत्र में होती बढ़ौतरी पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा- “ईज़ ऑफ डुइंग बिजनेस’ की रैंकिंग में सुधार होता है, तब उसका सकारात्मक प्रभाव देशवासियों की ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ पर भी पड़ता है।”
    – जम्मू-कश्मीर के नवजागरण पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “मैं जम्मू-कश्मीर के निवासियों, विशेषकर युवाओं से इस अवसर का लाभ उठाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से अपनी आकाँक्षाओं को साकार करने के लिए सक्रिय होने का आग्रह करता हूँ। अब जम्मू-कश्मीर में नव-जागरण दिखाई दे रहा है। सरकार ने लोकतंत्र और कानून के शासन में विश्वास रखने वाले सभी पक्षों के साथ परामर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है।”
    – राष्ट्रपति ने संसद को लोकतंत्र का मंदिर बताते हुए कहा, “स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर इस नए भवन के उदघाटन को विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक प्रस्थान बिंदु माना जाएगा। हमारा लोकतंत्र संसदीय प्रणाली पर आधारित है, अतः संसद हमारे लोकतंत्र का मंदिर है। यह सभी देशवासियों के लिए बहुत गर्व की बात है कि हमारे लोकतंत्र का यह मंदिर निकट भविष्य में ही एक नए भवन में स्थापित होने जा रहा है।”
    – इस दौरान राष्ट्रपति ने भारत के अभियानों पर बात की और गगनयान मिशन को विशेष अभियान बताया। पेरिस जलवायु समझौते और जलवायु की रक्षा के लिए तय की गई प्रतिबद्धता से भी अधिक भारत के प्रयासों की सराहना हुई।
    – देश को दिए अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा, “ ‘मेरा हर काम, देश के नाम’ यह आदर्श-वाक्य हम सभी देशवासियों को मंत्र के रूप में आत्मसात कर लेना चाहिए तथा राष्ट्र के विकास के लिए पूरी निष्ठा व समर्पण से कार्य करना चाहिए।”
    – उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों के वीर जवानों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि इनके कारण ही देश की स्वतंत्रता की रक्षा हो रही है और इन्हीं लोगों ने आवश्यकता पड़ने पर सहर्ष बलिदान भी दिया है।
    – सभी प्रवासी भारतीयों की भी प्रशंसा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “उन्होंने जिस देश में भी घर बसाया है, वहाँ अपनी मातृभूमि की छवि को उज्ज्वल बनाए रखा है।”

‘गाड़ी पर किसान एकता जिंदाबाद का झंडा?’: पंजाब में अराजक कार सवार ने पुलिसकर्मी को टक्कर मार दूर तक घसीटा: VIDEO वायरल

पंजाब के पटियाला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक कार सवार जाँच से बचने के लिए ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को कार से धक्का मार दिया और उसे घसीटते हुए काफी दूर तक ले गया। इस हादसे में पुलिसकर्मी बाल-बाल बचा। समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के मुताबिक, पुलिसकर्मियों द्वारा पंजाब में 15 अगस्त से पहले सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए वाहनों को रोककर उनकी जाँच की जा रही है।

जब पुलिसकर्मी ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर यानी शनिवार (14 अगस्त) को कार चालक को जाँच के लिए वाहन रोकने को कहा तो वह पुलिसकर्मी को जोरदार टक्कर मार कर भाग गया। डीएसपी सिटी हेमंत शर्मा ने बताया, ”कार चालक चेकिंग से बचने के लिए पुलिसकर्मी को कार से घसीटते हुए काफी दूर तक ले गया। कार का पता लगा लिया गया है, आगे की जाँच जारी है।”

वीडियो वायरल ​होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने किसानों को लेकर अपनी भड़ास निकाली है। उनका कहना है कि कार में किसान एकता जिंदाबाद का झंडा लगा हुआ है।

एक अन्य यूजर ने पंजाब पुलिस को टैग करते हुए कहा कि आपसे सादर अनुरोध है कि दोषी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की कृपा करें, जिससे आगे से अपना कर्तव्य निभा रहे जवानों के खिलाफ कोई ऐसा करने की जुर्रत ना कर सके।

सुनील हटवाल नाम के यूजर ने लिखा, ”कॉन्ग्रेस से क्या अपना राज्य संभल नहीं रहा है? कानून-व्यवस्था अर्थात लोगों में डर खत्म हो गया है? अगर यूपी में ऐसा होता तो अभी तक आतंकी की तरह गाड़ी चलाने वाले को जेल छोड़ने तक मीडिया की गाड़ियाँ live दिखाती कि अपराधी सही-सलामत जेल की कोठरी में पहुँच गया है।”

अयोध्या में राम जन्मभूमि को दहलाने की बड़ी साजिश नाकाम, 4 खूंखार आतंकी गिरफ्तार: जम्मू में JeM मॉड्यूल का भंडाफोड़

जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले पुलिस ने बड़े आतंकी हमले का प्लान ध्वस्त कर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के 4 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार (14 अगस्त) को अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। पुलिस ने कहा कि जम्मू में आतंकवादियों की मौजूदगी को जड़ से खत्म करने की कार्रवाई के तहत जम्मू पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने कहा, “वे ड्रोन से गिराए गए हथियारों को इकट्ठा कर उन्हें कश्मीर घाटी में जैश के सक्रिय आतंकवादियों तक पहुँचने की योजना बना रहे थे। इसके अलावा, आतंकवादियों का 15 अगस्त को जम्मू में वाहन IED धमाका करने का प्लान था। वे देश के अन्य हिस्सों में महत्वपूर्ण जगहों की रेकी करने में भी लगे थे।”

एडीजीपी, जम्मू ने बताया कि आतंकियों की गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता है। इससे एक बड़े आतंकी हमले को टाला गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस आतंकियों से पूछताछ करने में लगी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने सबसे पहले आतंकी मुंतजिर मंजूर उर्फ सैफुल्ला पुत्र मंजूर अहमद भट निवासी पुलवामा को गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ के बाद जैश के तीन अन्य आतंकवादियों तौसीफ अहमद शाह, आतंकी इजहार खान उर्फ सोनू खान पुत्र इंतेजार खान निवासी मिरदान मोहल्ला कंडाला शामली (उत्तर प्रदेश) और जहाँगीर अहमद भट पुत्र मुश्ताक अहमद भट निवासी बांदजू पुलवामा को गिरफ्तार किया गया।

मंजूर अहमद भट आतंकवादी संगठन जैश का एक प्रमुख सदस्य है, जिसके पास से पुलिस को एक पिस्तौल, एक मैगजीन, 8 लाइव राउंड और दो चीनी हैंड ग्रेनेड बरामद हुए हैं। उसके पास से कश्मीर घाटी में हथियार सप्लाई के लिए इस्तेमाल होने वाले उसके ट्रक को भी जब्त कर लिया गया है।

श्रीराम जन्मभूमि की रेकी करने से पहले ही हुए गिरफ्तार

गौरतलब है कि गिरफ्तार हुए आतंकी इजहार खान ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान में बैठे कमांडर मुनाजिर उर्फ शाहिद ने उसे अमृतसर के पास ड्रोन से गिराए गए हथियार को इकट्ठा कर आतंकियों को सौंपने के लिए कहा था। उसने बताया कि उसे पानीपत तेल रिफाइनरी की रेकी करने के लिए भी कहा गया था, जिसके वीडियो उसने पाकिस्तान को भेजे थे। फिर उसे अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि की रेकी करने का काम सौंपा गया, लेकिन इस काम को पूरा करने से पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

शिवसैनिकों ने की मशीनों में तोड़फोड़, लगाई आग: राष्ट्रीय राजमार्गों के काम रुकने पर नितिन गडकरी ने CM उद्धव को दी चेतावनी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे को पत्र लिख कर शिवसैनिकों के बर्ताव पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री से उन शिवसैनिकों को नियंत्रित करने को कहा है जो विदर्भा में चल रहे राजमार्ग कार्य को ब्लॉक करके बैठ गए हैं।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शिवसेना के जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं द्वारा राष्ट्रीय महामार्ग के काम में रुकावटें डालने और तोड़-फोड़ किए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री से की है। इस पत्र में नितिन गडकरी ने उल्लेख किया है कि शिवसेना के कार्यकर्ता कॉन्ट्रैक्टरों की मशीनों और सामानों को तोड़-फोड़ और जला कर अधिकारी, कर्मचारी और मजदूरों के दिलों में दहशत पैदा कर रहे हैं। इस तरह वे अक्सर आकर काम बंद करवा देते हैं।

गडकरी ने अपने पत्र में लिखा कि अगर शिवसैनिक ऐसा ही बर्ताव करते रहे तो महाराष्ट्र में नेशनल हाइवे के कार्यों को मंजूरी देने से पहले उनके मंत्रालय को इस पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। उन्होंने सीएम को लिखे अपने पत्र में कहा कि अगर कार्य को आगे बढ़ाना है तो इसमें उनके (सीएम) हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

पत्र के मुताबिक, राज्य में 3 जगह पर नेशनल हाईवे के कार्यों में बाधा डालने का काम किया जा रहा है, ऐसे में अगर कोई भी काम आधे में छोड़ा गया तो इससे दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि अकोला और नांदेड़ के बीच 202 किमी लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण का काम चल रहा है। इनमें मेदाशी से वाशिम और वाशिम शहर के लिए 12 किलोमीटर लंबे बायपास का निर्माण कार्य भी शामिल है। लेकिन शिवसेना के नेताओं और कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप की वजह से बायपास और उसे जोड़ने वाली मुख्य सड़क के काम को रोकना पड़ा।

ऐसे ही मालेगाँव-रिसोड राष्ट्रीय महामार्ग पर पैनगंगा नदी के ऊपर ब्रिज बनाने का काम आधा पूरा हुआ है। यहाँ भी शिवसैनिकों द्वारा कार्य पूरा नहीं होने दिया जा रहा। इसके अलावा वाशिम जिले के सेलू बाजार गाँव से होकर जाने वाली सड़क का काम भी शिवसेना के नेताओं और कार्यकर्ताओं की वजह से रुक गया है। इन शिवसैनिकों ने मशीनों को जलाया है और सामानों को तोड़ दिया है।

अपने पत्र में नितिन गडकरी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से पत्र मिलते ही एक्शन लेने की माँग करते हैं। उन्होंने इस मामले में गृह विभाग से आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। जानकारी के मुताबिक, इस पत्र के मिलने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने तुरंत इस मामले में पहल करते हुए राज्य के गृह विभाग को तत्काल जाँच करने और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दे दिए हैं।

पाकिस्तान के मुँह पर अफगान राष्ट्रपति का तमाचा: अशरफ गनी ने कहा- इस्तीफा नहीं देंगे, सेना को एकजुट करना सर्वोच्च प्राथमिकता

अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते आतंक और मुल्क के प्रमुख प्रांतों पर उसके कब्जों के बीच वहाँ के राष्ट्रपति अशरफ गनी शनिवार (14 अगस्त 2021) को पहली बार सार्वजनिक तौर पर सामने आए। दरअसल, अमेरिका द्वारा अगस्त के अंत तक अफगानिस्तान से अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाने के ऐलान के बाद से तालिबान एक-एक करके अफगानिस्तान के प्रांतों पर कब्जा करता जा रहा है।

अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पहले से रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो संदेश में तालिबान के हाथों बुरी तरह हार का सामना कर रही अफगान आर्मी को फिर से संगठित करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यह अफगान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अशरफ गनी ने कहा, “मौजूदा स्थिति में सुरक्षा और रक्षा बलों को फिर से संगठित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस उद्देश्य के लिए आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार मौजूदा मानवाधिकार संकट को हल करने के लिए ‘स्थानीय नेताओं’ और ‘अंतरराष्ट्रीय भागीदारों’ के संपर्क में है। अफगान राष्ट्रपति ने कहा, “मुझे पता है कि आप अपने वर्तमान और भविष्य के बारे में चिंतित हैं, लेकिन मैं आपको राष्ट्रपति के रूप में आश्वस्त करता हूँ कि मेरा ध्यान मेरे लोगों की अस्थिरता, हिंसा और विस्थापन को रोकने पर है। ऐसा करने के लिए मैंने सरकार के भीतर और बाहर, राजनीतिक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ व्यापक विचार-विमर्श शुरू किया है और मैं जल्द ही लोगों के साथ इसके परिणाम साझा करूँगा।”

राष्ट्रपति ने कहा कि वे देश में हत्याओं के लिए वह अफगानों पर युद्ध थोपने, पिछले 20 वर्षों में अर्जित लाभ को नष्ट करने, सार्वजनिक संपत्ति के विनाश और निरंतर अस्थिरता लाने की अनुमति नहीं देंगे।

राष्ट्रपति ने इस्तीफा देने से इनकार किया

पहले ये कयास लगाए जा रहे थे कि राष्ट्रपति आज (शनिवार 14 अगस्त 2021) अपना इस्तीफा दे देंगे और युद्धग्रस्त देश को अपने परिवार के साथ छोड़ देंगे। लेकिन, धारणाओं के विपरीत अशरफ गनी ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा नहीं दिया। उल्लेखनीय है कि तालिबान से सहानुभूति रखने वाले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने पहले दावा किया था कि इस्लामी आतंकवादी संगठन गनी के कार्यालय छोड़ने तक बातचीत नहीं करेगा।

शुक्रवार को अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने राष्ट्रपति अशरफ गनी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था, “दृढ़ विश्वास और संकल्प के साथ यह तय किया गया कि हम तालिबान आतंकवादियों के खिलाफ मजबूती से खड़े रहेंगे और हर तरह से राष्ट्रीय प्रतिरक्षा को मजबूत करने के लिए सब कुछ करेंगे। हमें अपने ANDSF (अफगान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बल) पर गर्व है।”

मानवीय संकट के कगार पर अफगानिस्तान

अफगानिस्तान में तालिबान के हमले के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर मानवीय आपदा आई है। पिछले दो महीनों में तालिबान ने 2001 में सत्ता से बेदखल होने के बाद से अफगानिस्तान में किसी भी समय की तुलना में सबसे अधिक क्षेत्र पर कब्जा जमा लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले दो महीनों में 34 प्रांतों में युद्ध के कारण 60,000 से अधिक परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है। वहीं, कम से कम 17,000 परिवारों ने अफगान राजधानी काबुल में शरण ली है, जो सुन्नी पश्तून विद्रोहियों ने घेर रखा है।

103 °F बुखार से जूझ रहे ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, CM खट्टर ने ₹6 करोड़, यूपी ने किया था ₹2 करोड़ देने का ऐलान

टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा की तबीयत ठीक नहीं है। वो हाई फीवर (उच्च बुखार) से जूझ रहे हैं। इस कारण वो हरियाणा सरकार के कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हो पाएँगे। हरियाणा सरकार ने ओलंपिक में गए खिलाड़ियों के सम्मान में एक समारोह का आयोजन किया है। हालाँकि, राहत की बात ये है कि नीरज चोपड़ा की कोरोना टेस्टिंग की रिपोर्ट नेगेटिव आई है।

नीरज चोपड़ा ने ‘भाला फेंक’ में स्वर्ण पदक जीता था। अब खबर आई है कि उनके गले में खरास है और उन्हें हाई फीवर है। साथ ही बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा। फ़िलहाल वो आराम कर रहे हैं। ओलंपिक फाइनल में नीरज चोपड़ा के जेवलिन थ्रो को टोक्यो ओलंपिक के शीर्ष-10 क्षणों में शामिल किया गया। ओलंपिक ने इस क्षण को छठे स्थान पर रखा। नीरज चोपड़ा ने समर्थन के लिए भारतीयों का धन्यवाद दिया था।

नीरज चोपड़ा को कल 103 °F फीवर था। हालाँकि, उनके कुछ करीबी सूत्रों का कहना है कि धीरे-धीरे उनकी स्थिति में सुधार होने लगा है। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है क्योंकि पिछले कई महीनों से उनका काफी व्यस्त शेड्यूल था। थकान को उनकी तबीयत खराब होने का कारण माना जा रहा है। ‘राष्ट्रपति भवन’ में होने वाले एक के लिए भारतीय ओलंपिक खिलाड़ी अशोका होटल में रुके हुए हैं। उम्मीद है कि नीरज अपने घर से सीधे वहीं आएँगे।

हरियाणा के पानीपत जिले के खांद्रा गाँव में 24 दिसंबर 1997 को पैदा हुए नीरज चोपड़ा बचपन में भारी-भरकम शरीर वाले बच्चे थे, जिस कारण घर वालों ने उन्हें जिम में दाखिला कराया और फिर खेल की तरफ उनका रुझान शुरू हुआ।  11 साल की उम्र के लड़के ने जब पहली ही बार में 25 मीटर से भी दूर भाला फेंक दिया था तो किसी को भी समझते देर नहीं लगी कि नीरज इसी खेल के लिए बने हैं।

हाल ही में यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन्हें 2 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। इसी तरह हरियाणा सरकार ने 6 करोड़, पंजाब सरकार ने 2 करोड़, BCCI ने 1 करोड़ और CSK ने उन्हें 1 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया है।

केरल आईएस मॉड्यूल में NIA ने किया बड़ा खुलासा: आतंकी बातचीत के लिए Hoop और Rocket APP का कर रहे इस्तेमाल, ट्रेस करना मुश्किल

केरल इस्लामिक स्टेट (IS) मॉड्यूल केस की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने बड़ा खुलासा किया है। एनआईए के मुताबिक, केरल के आईएस मॉड्यूल में शामिल आतंकी अपने ऑपरेटरों से बात करने, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उनकी भर्ती करने के लिए हूप (Hoop App) और रॉकेट चैट (rocket chat app) जैसे मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते थे। बताया जा रहा है कि ये एक सुरक्षित मैसेजिंग एप्लिकेशन हैं, जिनमें शेयर किए गए सभी मैसेज अपने आप डिलीट हो जाते हैं।

मामले की जाँच कर रहे NIA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”केरल आईएस मॉड्यूल मामले में हमने इस साल 5 मार्च को IPC और UAPA की धाराओं के तहत 7 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।” उन्होंने कहा कि केरल आईएस मॉड्यूल का मोहम्मद अमीन उर्फ अबू याह्या और उसके सहयोगी इस्लामिक स्टेट की विचारधारा के प्रसार के लिए विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आईएस का प्रोपेगेंडा चैनल चला रहे हैं।

अधिकारी ने जाँच के दौरान यह पाया गया कि अमीन कम्युनिकेशन के लिए हूप और रॉकेट चैट का इस्तेमाल कर रहा था। उन्होंने बताया कि हूप ऐप में दूसरे सदस्य के साथ शेयर किए गए मैसेज अपने आप डिलीट हो जाते हैं, जबकि रॉकेट चैट में यूजर्स को अपना मोबाइल नंबर या अपनी ईमेल आईडी वैरिफाइड करने की जरूरत नहीं होती है।

मार्च 2021 में जाँच एजेंसी ने तलाशी के दौरान इस मामले में तीन आरोपितों अमीन, रहीस रशीद और मुशाब अनवर को गिरफ्तार किया था। 5 अगस्त 2021 को एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक में 5 स्थानों पर तलाशी ली और श्रीनगर में बेमिना के ओबैद हामिद, बांदीपोरा (कश्मीर) में मुजम्मिल हसन भट उल्लाल, मैंगलोर के अम्मार अब्दुल रहमान और शंकर वेंकटेश पेरुमल उर्फ अली मुआविया को गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है कि इससे पहले NIA की टीम मैंगलोर में दिवंगत कॉन्ग्रेस नेता बीएम इदिनब्बा के घर पर पहुँची थी। NIA की यह छापेमारी की कार्रवाई इदिनब्बा के बेटे बीएम बाशा के ISIS से कथित संबंधों के चलते की गई थी। इस मामले में बाशा के साथ उसकी पत्नी से भी पूछताछ जारी है। रियल एस्टेट का बिजनेस करने वाले बाशा के दो बेटे भी हैं जो विदेश में रहते हैं।