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‘कपड़े बदल रही थी तो ससुर कमरे में घुस गए, छाती पर हाथ फेरा’: हनी सिंह की पत्नी ने कहा- डर में जी रही थी

पंजाबी गायक व मशहूर रैपर यो यो हनी सिंह (हृदेश सिंह) की पत्नी शालिनी तलवार ने हाल में अपने पति और ससुराल वालों के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज कराया था। अब इसी मामले में कुछ नई बातें सामने आई हैं। ताजा रिपोर्ट्स से पता चला है कि शालिनी ने प्रोटेक्शन ऑफ वीमेन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट के तहत मुकदमा दायर करवाते हुए 10 करोड़ रुपए मुआवजे की माँग की है और साथ में गायक पर और उनके पिता पर गंभीर आरोप मढ़े हैं।

तलवार का कहना है कि पिछले कुछ सालों में उनसे साथ कई बार मारपीट हुई। वह लगातार डर में जी रही थीं। उनके वकीलों ने कोर्ट में मजिस्ट्रेट तान्या सिंह के सामने कहा कि मानसिक तौर पर शोषण होने के कारण शालिनी डिप्रेशन में हैं और दवाई लेती हैं। अपनी याचिका में तलवार ने बताया कि कैसे उनके साथ जानवरों सा बर्ताव हुआ और उनके पति ने उन्हें धोखा दिया।

शालिनी तलवार का आरोप है कि उनका पति कई अलग-अलग महिलाओं के साथ सेक्स करता है, अपनी शादी की अंगूठी नहीं पहनता है और शादी की तस्वीरें जारी करने पर मारता है। इसके अलावा तलवार का ये भी कहना है कि उनके ससुर ने भी उनके साथ बदसलूकी की हुई है।

उनका आरोप है कि एक बार उनके ससुर भी शराब की हालत में उनके कमरे में घुसे, वो भी तब जब वह कपड़े बदल रही थीं, इसके बाद वह छाती पर हाथ फेरने लगे। शालिनी का कहना है कि उनके पास घरेलू हिंसा को साबित करने वाले सबूत हैं। उन्होंने अदालत से घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत गायक के खिलाफ आदेश जारी करने का अनुरोध किया।

तलवार ने अदालत से यह निर्देश देने की माँग की कि वह उनके पति को घरेलू हिंसा के लिए अंतरिम मुआवजे के रूप में 10 करोड़ रुपए का भुगतान करने के लिए कहें। इसके अलावा, उन्होंने अदालत से गायक को दिल्ली में पूरी तरह से सुसज्जित आवास के लिए हर महीने 5 लाख रुपए का किराया देने का आदेश देने का अनुरोध किया, ताकि वह खुद से रह सके और अपनी विधवा माँ पर निर्भर न रहें।

बता दें कि शालिनी की याचिका पर मजिस्ट्रेट तानिया सिंह ने सुनवाई की। उनके समक्ष शालिनी की ओर से वकील संदीप कपूर, अपूर्वा पांडे और जीजी कश्यप ने यह याचिका रखी थी। इसके बाद तलवार के पक्ष में निर्देश पास किए गए। कोर्ट ने उनका स्त्रीधन उन्हें वापस देने और जो प्रॉपर्टी उनके और हनी सिंह के नाम पर है उसे भी बेचने पर रोक लगाई और सिंगर को नोटिस जारी करते हुए उनसे 28 अगस्त से पहले जवाब माँगा।

‘5 अगस्त की तारीख बहुत विशेष’: PM मोदी ने हॉकी में ओलंपिक मेडल, राम मंदिर भूमिपूजन और 370 हटाने का किया जिक्र

उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के लाभार्थियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 05 अगस्त को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि जहाँ इस बार भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ओलंपिक में पदक जीता, वहीं पिछले दो सालों में 05 अगस्त को भारत के लिए दो ऐसे महत्वपूर्ण क्षण आए जिनकी प्रतीक्षा कई सालों से की जा रही थी। एक तो 05 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर के कलंक अनुच्छेद 370 को हटाया गया, वहीं साल 2020 में इसी दिन बहुप्रतीक्षित भव्य राम मंदिर का भूमिपूजन हुआ।

पीएम मोदी ने ओलंपिक में लगभग 4 दशकों बाद हॉकी में पदक जीतने पर खिलाड़ियों को बधाई दी और कहा कि खिलाड़ियों द्वारा इस प्रदर्शन के कारण आज देश में उल्लास का माहौल है और लोग हॉकी टीम द्वारा किए गए गोल का जश्न मना रहे हैं। पीएम मोदी ने इस ऐतिहासिक घटना से वर्तमान राजनीति को जोड़ा और कहा कि जहाँ एक ओर हॉकी टीम के गोल का उत्साह है, वहीं यहाँ देश के कुछ लोग सेल्फ-गोल में व्यस्त हैं और संसद की कार्रवाई रोककर देश के विकास को अवरुद्ध करना चाहते हैं। लेकिन जनता इसे सहन नहीं करेगी।

पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 के उन्मूलन का जिक्र करते हुए कहा कि आज से दो साल पहले (05 अगस्त 2019) देश ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और भी सशक्त किया था। उन्होंने कहा कि 05 अगस्त को ही अनुच्छेद-370 हटाकर जम्मू और कश्मीर के हर नागरिक को सभी सुविधाओं और सभी अधिकारों का भागीदार बनाया गया था।

पीएम मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम को याद किया और कहा कि पिछले साल यह 05 अगस्त का ही दिन था जब कोटि-कोटि भारतीयों ने सैकड़ों वर्षों के बाद भव्य राम मंदिर के निर्माण की ओर पहला कदम बढ़ाया था। उन्होंने यह भी बताया कि राम मंदिर का निर्माण तेजी से हो रहा है। ज्ञात हो कि 05 अगस्त 2020 को पीएम मोदी ने ही अयोध्या में श्री रामजन्मभूमि में राम मंदिर का भूमि पूजन किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत यूपी के अलग-अलग जिलों के लाभार्थियों से चर्चा की और उनसे योजना के अंतर्गत मिले लाभ के बारे में पूछा और यह संतुष्टि जताई कि अन्न का एक-एक दाना लाभार्थियों तक पहुँच रहा है जो बताता है कि भ्रष्टाचार अब अपनी अंतिम साँसे गिन रहा है। साथ ही पीएम मोदी ने यह भी की कि सभी लाभार्थी बिना अफवाहों पर ध्यान दिए Covid-19 वैक्सीन अवश्य लें।

इस्लामिक बैंक के नाम पर 4,000 करोड़ का घोटाला, ED ने IMA घोटाले में कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री रोशन बेग व MLA जमीर के ठिकानों पर की छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार (5 अगस्त 2021) को आईएमए पॉन्जी घोटाला मामले में कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक जमीर अहमद खान और पूर्व विधायक रोशन बेग के ठिकानों पर छापेमारी की। बेंगलुरू में ईडी की टीम सुबह से ही कई जगहों पर लगातार तलाशी कर रही है। अधिकारियों ने बताया है कि आईएमए घोटाले में आईएमए समूह ने अधिक रिटर्न का लालच देकर 1,00,000 से अधिक निवेशकों से करीब 4,000 करोड़ रुपए इकट्ठे किए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से आए करीब 100 अधिकारियों की टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। अभी तक शिवाजी नगर में बेग के दो आवासों और खान के चामराजपेट आवास पर तलाशी की गई है। इसके अलावा मुंबई में भी कुछ जगहों पर छापे मारे गए हैं।

दरअसल, सीबीआई ने 27 अप्रैल को आईएमए पॉन्जी घोटाला मामले में कर्नाटक के पूर्व मंत्री बेग के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया था। बेग 2014 से 2018 तक कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में शहरी विकास मंत्री थे। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में आईएमए ग्रुप के तत्कालीन एमडी मोहम्मद मंसूर खान, कंपनी, बेग की कंपनी दानिश पब्लिकेशन समेत अन्य को नामजद किया था।

रोशन बेग पर आरोप है कि उन्होंने चुनावी खर्च के लिए के लिए आईएमए के फंड से कई करोड़ रुपये लिए थे। सीबीआई के आरोपपत्र के मुताबिक, आरोपी उस राशि का इस्तेमाल प्रतिदिन के खर्च और कर्मचारियों का वेतन देने के लिए किया था। इसके अलावा, पूर्व मंत्री ने अपनी पब्लिसिटी के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र में उसी पैसे से कई सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किए थे। मंसूर खान ने आरोप लगाया था कि बेग ने उससे 400 करोड़ रुपए लिए थे। गौरतलब है कि रोशन बेग को इस मामले में गिरफ्तार भी किया गया था और वो फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

बता दें कि आईएमए मोहम्मद मंसूर खान द्वारा संचालित एक इस्लामिक बैंक था। इसमें उसने निवेशकों को 14 से 18 फीसदी के भारी भरकम रिटर्न का लालच दिया था, जिससे बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने इसमें निवेश भी किया। लेकिन, जब मार्च 2019 में IMA ने निवेशकों को रिटर्न देना बंद कर दिया तो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में की। इसके बाद जून 2019 में कर्नाटक सरकार ने निवेशकों द्वारा दर्ज की गई 51,500 से अधिक शिकायतों की जाँच के लिए एक SIT का गठन किया था।

आर्टिकल 370 के खात्मे का भारत स्वप्न, जिसे मोदी सरकार ने पूरा किया: जानिए इससे कितना बदला जम्मू-कश्मीर और लद्दाख

स्वतंत्र भारत के के इतिहास में 5 अगस्त वह तारीख है जब नामुमकिन से लगने वाले एक काम को मोदी सरकार ने 2019 में हकीकत बना दिया। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन 5 अगस्त 2019 को जब गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा, ‘संविधान के अनुच्छेद 370 के सभी खंड अब से जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होंगे’, उस क्षण ने सारी तस्वीर को बदल दिया। भारत में जहाँ मोदी-मोदी गूँज रहा था। वहीं विदेश में बैठे निर्वासित कश्मीरी पंडितों के आँसू रोके नहीं रुक रहे थे।

उस दिन से पहले वीर रस के कवि हरिओम पंवार अपनी कविता में लिखते थे:

 “वे घाटी से खेल रहे हैं गैरों के बलबूते पर
जिनकी नाक टिकी रहती है पाकिस्तानी जूतों पर
काश्मीर को बँटवारे का धंधा बना रहे हैं वो
जुगनू को बैसाखी देकर चंदा बना रहे हैं वो
फिर भी खून-सने हाथों को न्योता है दरबारों का
जैसे सूरज की किरणों पर कर्जा हो अँधियारों का।”

कश्मीर की पूर्व स्थिति को बयां करने वाली हरिओम पंवार की कविता से ली गई यह पंक्तियाँ उन लोगों के बारे में बताती हैं जिन्होंने अपनी राजनीति साधने के लिए कश्मीर को हमेशा विवाद का कारण बनाए रखा और जब मोदी सरकार ने 5 अगस्त को एक नई उम्मीद दी तो भी यही लोग जगह-जगह बिलबिला उठे। उस फैसले को 2 साल हो गए हैं। इनका सवाल रहता है कि बदलाव क्या आया। आज हम इस लेख में आपको उन्हीं सवालों का जवाब देंगे। बताएँगे कि आर्टिकल 370 के हटने के बाद घाटी में बदलाव की बयार चलने के लिए दो साल का समय नहीं लगा, बल्कि कई काम तो वहाँ साल 2020 के शुरुआती महीनों और दिनों में ही दिख गए थे।

तिरंगे की बढ़ी शान

राष्ट्रभक्ति के लिहाज से देखें तो जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद वहाँ सबसे महत्वपूर्ण काम तिरंगा को सम्मान दिलाने का हुआ। 25 अगस्त 2019 यानी ऐतिहासिक फैसले के मात्र 20 दिन बाद श्रीनगर सचिवालय में आजादी के बाद पहली बार तिरंगा शान से लहराया और घोषणा हुई कि अब कश्मीर की अन्य इमारतों से कोई भी दूसरा झंडा हटाकर सिर्फ भारत का झंडा लहराया जाएगा। 

2021 तक वहाँ कई बार तिरंगा यात्राएँ भी कई बार देखी गईं, लोगों के मन में राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान देखा गया।
आज जब देश स्वतंत्रता के 75 साल पूरे करने जा रहा है तो कश्मीर में फैसला लिया गया है कि प्रदेश के 3300 गाँवों में तिरंगे लगाए जाएँगे और सबसे ऊँचा तिरंगा लहराएगा गुलमर्ग में।

आतंक की टूटी कमर

अनुच्छेद 370 के हटने से घाटी में आतंक में जो कमी आई है उसे नजरअंदाज शायद ही कोई कर सके। इसी वर्ष मार्च में केंद्रीय गृह राज्य जीके रेड्डी ने लिखित जवाब में बताया था कि अनुच्छेद 370 हटने से वहाँ आतंकी घटनाओंं में कमी आई। आँकड़े देते हुए उन्होंने बताया कि 2019 में जहाँ आतंकी घटनाओं की संख्या 594 थी। वहीं 2020 में ये गिनती 244 रह गई और फिर 2021 के मार्च तक मात्र 21 घटनाएँ दर्ज की गईं।

इसी तरह कश्मीर में 1 जुलाई से 15 जुलाई 2019 तक जहाँ 51 ग्रेनेड अटैक हुए थे वहीं 2020 में ये संख्या 21 हो गई। 2019 में 1 जुनवरी से 15 जुलाई के बीच में 75 सुरक्षाबल की जान गई थी। मगर, आर्टिकल 370 के हटने के एक साल बाद इसी समय में ये संख्या घटकर 35 जवानों की रह गई।

स्थानीय नेताओं का घटा कद

अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद जिस तरह फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे राजनेताओं का कद प्रदेश में घटा, उसका पता इस बात से चलता है कि उन्हें वहाँ चुनाव लड़ने के लिए (गुपकार) गठबंधन तक करने की जरूरत पड़ गई, जिसमें कई राजनीतिक प्रतिद्वंदी एक साथ आए और मिलकर चुनाव लड़ते दिखे, तब जाकर उन्हें 280 में से 110 सीटें मिली थीं।

आतंक के रास्ते जाने वाले घटे

साल 2020 की रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार के इस फैसले और सुरक्षाबलों की कड़ी निगरानी के कारण आतंकवादी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी में एक ही साल में 40% की कमी आ गई  और 2020 में केवल 67 ऐसे युवा मिले जिनका ब्रेनवॉश करके आतंकी संगठन उनसे भारत के ख़िलाफ़ बंदूक उठवा पाए।

डोमिसाइल सर्टिफिकेट

अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल व्यवस्था शुरू की तो उसमें यह व्यवस्था रखी गई थी कि केवल 15 वर्ष तक जम्मू-कश्मीर में रहने, निर्धारित अवधि तक प्रदेश में सेवाएँ देने और विद्यार्थियों के लिए निर्धारित नियमों के अधीन आने वाले लाभार्थी ही डोमिसाइल सर्टिफिकेट के हकदार होंगे। इसके बाद प्रदेश में अब तक 4 लाख से ज्यादा लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट मिल गया। इनमें 3, 68, 500 जम्मू में और कश्मीर घाटी में 79, 300 सर्टिफिकेट जारी हुए हैं।

लड़कियों को अधिकार

केंद्र सरकार के इस फैसले ने प्रदेश की कई लड़कियों को वह अधिकार और सम्मान दिलाया जिसे आर्टिकल 370 के कारण नकारा जाता था। पहले पुरुषों को तो कई अधिकार थे कि वह किसी से भी शादी करें और अपना हक बनाए रखें, लेकिन महिलाओं के पास विकल्प नहीं था। डोमिसाइल सर्टिफिकेट के लिए रखी गई शर्तों में ऐसे परिवारों को राहत मिली है, जिनकी बेटियों ने बाहरी युवक से शादी की थी और अपने अधिकार खो दिए थे। उनसे शादी करने वाले युवकों पर भी यह अधिकार नहीं था कि वह प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकें या अपने नाम से संपत्ति ही खरीद सकें।

जॉब के अवसर

अनुच्छेद 370 के हटने के बाद वहाँ नौकरी के अवसरों में भी बढ़ौतरी हुई। हाल में प्रदेश के प्रधान सचिव रोहित कंसल ने कहा था कि पहले चरण में विभिन्न विभागों में भर्ती के लिए सभी स्तरों पर 10,000 से अधिक रिक्तियों की पहचान की गई है। विशेष रूप से, प्रशासनिक परिषद ने चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों को भरने के लिए एक सरल और कुशल प्रक्रिया को मंजूरी दी है।

कश्मीरी पंडितों की वापसी

प्रदेश में कश्मीर पंडितों की वापसी के लिए भी केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। अभी हाल में उनके पुनर्वास के क्रम में केंद्र ने बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें जॉब के अवसर दिए थे। मार्च 2021 में घोषणा हुई थी कि अब तक 3,800 माइग्रेंट कैंडिडेट्स कश्मीर में जॉब पाने के बाद वापसी कर चुके हैं। इसमें से 520 आर्टिकल 370 हटने के बाद ही लौट आए थे।

मालूम हो कि जम्मू और कश्मीर में उपराज्यपाल का प्रशासन कश्मीर में 6,000 पारगमन आवासों पर काम में तेजी ला रहा है और देश के विभिन्न हिस्सों से घाटी में प्रवासी समुदाय की वापसी को प्रोत्साहन देने के प्रयास में कश्मीरी पंडितों को पंजीकृत कर रहा है।

आरक्षण का दायरा बढ़ा

केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने पहाड़ी भाषी लोगों (चार फीसदी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (10 फीसदी) को आरक्षण देने का फैसला किया। अभी तक केवल नियंत्रण रेखा पर गाँवों में रहने वाले लोगों के लिए आरक्षण उपलब्ध था, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वालों के लिए बढ़ा दिया गया है, जिससे लगभग 70,000 परिवारों को लाभ हुआ है।

7वें पे कमीशन और अन्य योजनाओं का फायदा

जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद वहाँ 3 लाख सरकारी कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के तहत फायदा मिला। इसके अलावा केंद्र ने वहाँ कई विकास योजनाएँ लॉन्च की, जिसमें पीएम किसान, पीएम किसान पेंशन, प्रधानमंत्री जनधन योजना आदि शामिल हैं। कई विकास योजनाओं की आधारशिला भी प्रदेश में रखी जा चुकी है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अन्य काम

उल्लेखनीय है कि उक्त बिंदु केवल कुछ चुनिंदा बदलाव हैं जिन्हें मीडिया में कवरेज मिली। इसके अलावा वहाँ पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी, पुलिस पर हमले, शांत वातावरण में चुनाव संपन्न होना, लोगों के मन से आंतक का भय खत्म होना, कुछ ऐसे मामले हैं जिन पर निश्चित तौर पर आर्टिकल 370 के हटने से कमी आई है।

केंद्र सरकार का फोकस वहाँ के विकास पर है। सितंबर 2019 में 15 पावर प्रोजेक्ट का उद्घाटन हुआ था वहीं  10,000 करोड़ रुपए की 20 अन्य परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई थी। कश्मीर पंडित जिन्हें 30 साल तक नकारा जाता रहा था। उनके लिए प्रदेश में 3000 नौकरियाँ निकाली गईं और 1781 पोस्ट पर 604 अभ्यार्थियों ने विभिन्न विभागों को ज्वाइन भी किया।

इसके अलावा मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 निरस्त करने के साथ कश्मीर के किसानों का भी ख्याल रखा। पिछले साल की बात करें तो बताया गया था कि  जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध पानी उपलब्ध कराने और बिजली उत्पादन के लिए फरवरी 2020 में लगभग 6,000 करोड़ रुपए की बहुउद्देश्यीय परियोजना को मंजूरी दी है। ऐसे ही एक समय जहाँ अलगाववादी नेता सत्ता पर काबिज हुए रहते थे। वहाँ भाजपा सदस्यों की गिनती में बढ़ौतरी हुई और लोग भयमुक्त होकर अपना समर्थन भारत को दिखाते नजर आए। 

इसी तरह यदि लद्दाख की बात करें तो जम्मू कश्मीर से अलग एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनने पर वहाँ खुशी थी। उनकी यह माँग बहुत पहले से थी कि उन्हें अलग किया जाए। लेकिन यह माँग पूरी हुई 5 अगस्त 2019 को। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इस बाबत कहा भी था कि जो भी विकास के रास्ते में स्पीड ब्रेकर थे वे अब दूर हो गए हैं। अब विकास का काम चल रहा है।

अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद वहाँ नई सुरंगों और सड़कों का निर्माण हुआ। वहाँ टेलीफोन की सुविधा सुधरी, फाइबर इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुँच पाई। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए लद्दाख के विकास के लिए 60 अरब रुपए निर्धारित किए गए। साथ ही 214 अरब रुपए की परियोजनाओं को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में स्थानांतरित किया गया है। ऐसे ही लद्दाख में अन्य कई योजनाओं पर काम हो रहा है। जम्मू-कश्मीर की तरह आरक्षण के लिहाज से भी यहाँ कई बदलाव हुए हैं। स्थानीयों को नौकरियों में रूप से आरक्षित किया गया है। शिक्षा की बात करें तो लद्दाख को अपना पहला विश्वविद्यालय और एक बौद्ध अध्य्यन केंद्र मिल गया है। टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है।

स्थानीय लोगों की बात करें तो एएनआई की 2020 की एक रिपोर्ट बताती है कि कैसे लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद वहाँ विकास कार्यों को तेजी मिली और हर नागरिक को समानता का अधिकार मिला। लेह में शिया समुदाय के अध्यक्ष अशरफ अली बच्चा ने खुद कहा था कि भारतीय संविधान ने उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की है। यही चीज लद्दाख में भी है। उन्हें स्वतंत्रता महसूस हो रही है और कोई दिक्कत नहीं है। वह अपना मजहब मानते हैं और सारे त्योहार भी मनाते हैं। बता दें कि लद्दाख में लेह के बाद कारगिल सबसे बड़ा नगर है जहाँ 80 फीसद शिया रहते हैं।

पोलैंड: लाइब्रेरी की दीवार पर उकेरे गए उपनिषद के छंद, यूजर्स बोले- दुनिया हिंदू धर्म अपना रही है

पोलैंड के पुस्तकालय की दीवार पर उकेरे गए उपनिषद के छंदों की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। यह तस्वीर पोलैंड के भारतीय दूतावास के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट की गई है, जो खासा चर्चा में हैं। ट्वीट में लिखा गया है, ”ये कितना सुखद नजारा है। यह वॉरसॉ यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी की दीवारें हैं, जहाँ उपनिषद के छंद उकेरे गए हैं। उपनिषद हिंदू दर्शन के वैदिक संस्कृत के मूलपाठ हैं, जो हिंदू धर्म का आधार है।”

बताया जा रहा है कि ये वॉरसॉ यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी की दीवारें हैं और यह फोटो 9 जुलाई 2021 की है। वॉरसॉ यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देसी नेटिजन्स गर्व महसूस कर रहे हैं।

एक यूजर ने कहा, “शानदार! जानकर गर्व और खुशी हुई। पूरी दुनिया ने हिंदू दर्शन को मान्यता देना शुरू कर दिया है, जबकि हम भारतीय अपनी महान संस्कृति को भूल रहे हैं। खासतौर पर युवाओं में इसके प्रति रुचि पैदा करने के लिए कुछ करना होगा।”

एक अन्य ने यूजर्स ने लिखा, “बाहर के देशों में भारतीय संस्कृति/उपनिषदों का दिल खोल के स्वागत किया जा रहा।” एक तीसरे यूजर ने कमेंट किया, “जब दुनिया हिंदू धर्म को अपना रही है, हम भारतीय पश्चिमी सभ्यता की ओर आकर्षित हो रहे हैं।” किसी ने पूछा, “उत्तम… क्या भारत का कोई विश्वविद्यालय ऐसा करने की हिम्मत करेगा?” एक अन्य ने पोस्ट किया, “अद्भुत है भारतीय संस्कृति को किस प्रकार लोग अपना रहे हैं, ये उसका सीधा सादा उदाहरण है।”

उपनिषद हिंदू धर्म के सबसे पुराने ग्रंथ हैं। उपनिषदों को आमतौर पर वेदांत के रूप में जाना जाता है। बताया जाता है कि विद्वानों ने उपनिषद शब्द की व्युत्पत्ति उप+नि+षद के रूप में मानी है। अर्थात् जो ज्ञान बिना किसी व्यवधान के निकट आए, जो ज्ञान विशिष्ट व संपूर्ण हो और जो ज्ञान सच्चा हो वह निश्चित ही उपनिषद कहलाता है।

‘पूरी कॉलोनी की जान खतरे में’: लखनऊ में टैक्सी ड्राइवर को थप्पड़ मारने वाली प्रियदर्शिनी यादव का एक और वीडियो वायरल

लखनऊ में टैक्सी ड्राइवर को थप्पड़ मारकर ‘लखनऊ ट्रैफिक गर्ल’ के नाम से चर्चा में आई प्रियदर्शिनी नारायण यादव एक बार फिर सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं, इस बार अपने पड़ोसियों से लड़ाई को लेकर।

वायरल वीडियो में प्रियदर्शिनी अपने पड़ोसी पर चिल्लाते हुए दिखाई दे रहीं हैं। वीडियो में उन्हें एक पुलिसकर्मी से अपने पड़ोसी के घर का काला रंग बदलने के लिए कहते हुए सुना गया, क्योंकि इस रंग के कारण ‘इंटरनेशनल ड्रोन’ आते हैं और कॉलोनी में रहने वालों की जान को खतरा हो जाता है। वीडियो में प्रियदर्शिनी पुलिसकर्मी से कह रही हैं, “इन्हें बोलें कि ये दीवार पर एंटी-ब्लैक पेंट करें, क्योंकि इनकी वजह से यहाँ इंटरनेशनल ड्रोन घूमते हैं और पूरी कॉलोनी की जान खतरे में है।”

प्रियदर्शिनी ने पड़ोसी पर आरोप लगाया कि वो उन्हें गाली देते हैं और उन्हें बराक हुसैन ओबामा की बेटी कहते हैं। प्रियदर्शिनी ने यह भी कहा कि जब उन्होंने दीवारों पर चढ़े काले रंग को हटाने की बात कही तो उनके पड़ोसियों ने उन्हें मारने की धमकी दी और दूसरे पड़ोसियों को भी डंडे लेकर उन्हें मारने के लिए कहा। उन्होंने एक पड़ोसी की ओर इशारा करते हुए कहा कि उसने कहा है कि वह भारत के प्रधानमंत्री से भी ऊपर है।

प्रियदर्शिनी यादव वही हैं जिन्होंने लखनऊ में एक टैक्सी ड्राइवर को थप्पड़ मारे थे। उसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें गिरफ्तार करने की माँग भी उठी। इस मामले में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई। इसके बाद से इस मामले से सम्बंधित कई मीडिया रिपोर्ट्स प्रकाशित हुई जिनमें कुछ ने टैक्सी ड्राइवर का पक्ष रखा तो कुछ प्रियदर्शिनी की बात जानने पहुँचे।

जी न्यूज से बात करते हुए प्रियदर्शिनी ने दावा किया कि लगभग 100 लोगों ने उनके साथ मारपीट की और 300 मीटर तक उन्हें घसीटते रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ये लोग लगभग 2 सालों से उनके साथ छेड़खानी करते आ रहे हैं। प्रियदर्शिनी ने कहा कि जब वो जॉगिंग के लिए जाती हैं तो ये लड़के उन्हें घूरते हैं और उन्हें अपशब्द भी कहते हैं और ऐसा ही कुछ 30 जुलाई की रात को भी हुआ था जब टैक्सी ड्राइवर उन्हें टक्कर मारने ही वाला था। इसलिए उन्होंने आत्मरक्षा में मारपीट की।

वहीं दूसरी ओर टैक्सी ड्राइवर सादत अली ने कहा कि जब वह लड़की उसकी कार के सामने आई तो उसने कार रोक दी। लेकिन इसके बाद वह लड़की मारपीट करने लगी। अली ने कहा कि पहले उसे लगा कि वह सिविल ड्रेस में कोई पुलिसकर्मी है। अली ने कहा कि उस लड़की ने न केवल उसके साथ मारपीट की बल्कि उसका फोन और कार के कुछ हिस्से भी तोड़ दिए और साथ ही कार के डैशबोर्ड पर रखे 600 रुपए भी ले लिए। अली ने कहा है कि अगर उस लड़की के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वह आत्महत्या कर लेगा।

‘जेहाद से होगी जन्नत’: कश्मीर में 10-15 साल के लड़कों को हुर्रियत कैसे बनाता था पत्थरबाज, बता रहा जुबैर-सुनिए आप

आज से दो साल पहले (2019) आज ही के दिन यानी 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद हिंसाग्रस्त जम्मू-कश्मीर में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। जो युवक सुरक्षाबलों पर जिहाद के नाम पर पत्थर बरसाते थे, वे अब उसे अपनी गलती मान रहे हैं। इसी क्रम में 370 की वापसी की दूसरी बरसी पर रिपब्लिक टीवी ने एक ऐसे कश्मीरी युवक की कहानी को बताया है, जो कभी पत्थरबाज हुआ करता था। सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी के कारण जुबैर नाम के इस युवा को साल 2018 में हिरासत में लिया गया था। पुनर्वास के बाद वह युवा उस घटना को बुरा सपना बता रहा है।

रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद इन दो वर्षों में घाटी क्षेत्र में न केवल आतंकियों की भर्ती में गिरावट आई है, बल्कि कानून-व्यवस्था के उल्लंघन की घटनाओं में भी भारी गिरावट देखी गई। पत्थरबाजी को लेकर 21 साल के जुबैर ने बताया कि किस तरह से कश्मीर के कम उम्र के किशोरों को टारगेट कर उनका ब्रेनवॉश किया जाता है और फिर जेहाद की आग में झोंक दिया जाता है।

जुबैर ने बताया, “उस समय (2016) हुर्रियत के लोग कश्मीर में रैलियाँ करते थे। उस दौरान मेरे जैसे कई युवाओं का ब्रेनवॉश किया था। हमें बताया गया कि इससे हमें जन्नत मिलेगी और यही जिहाद है। हमें यह भी कहा गया था कि भारत से आजादी मिलेगी और हम पाकिस्तान के साथ रहेंगे।”

जुबैर ने कहा, “मुझे याद है कि उन रैलियों में 90 फीसदी लोग 10 से 15 साल की उम्र के किशोर हुआ करते थे। हुर्रियत के लोग उन्हें पत्थरबाजी करने के लिए भड़काते थे। क्योंकि बड़े लोग जो इसे जानते थे वो इसमें शामिल ही नहीं होते थे।” उसने बताया कि वह साल 2016 से पत्थरबाजी कर रहा था।

उसने आगे कहा, “यह 2016 की बात है जब मैं बहुत छोटा था और बुरहान वानी की मौत हो गई थी। मैं सुरक्षा बलों पर पथराव कर बहुत गलत कर रहा था, लेकिन मेरा ब्रेनवॉश किया गया था। हमें बताया गया था कि इसके माध्यम से हमें जन्नत (स्वर्ग) मिलेगी।”

जुबैर की गिरफ्तारी से बदला उसका नजरिया

सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी करने के मामले में साल 2018 में जुबेर को गिरफ्तार किया गया था। उसने इसके लिए सुरक्षाबलों को धन्यवाद दिया है। इस कश्मीरी युवा ने आगे बताया, “मैं आईपीएस संदीप साहब और डीएसपी माजिद साहब का बहुत आभारी हूँ। ये दो अधिकारी थे, जिन्होंने मुझे और मेरे साथ जेल में बंद दूसरे लोगों को समझाया कि हम जो कर रहे थे वह बेहद गलत था। अगर इन दोनों ने हमसे बात नहीं की होती तो मैं आज जीवित नहीं होता। उस समय बहुत से लोग अपनी गलतियों को समझ चुके थे। हालाँकि, बावजूद इसके कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने इन गलत कामों को जारी रखा।”

जवानों पर पत्थरबाजी और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने के मामले में जुबैर को 3 महीने 10 दिन की सजा हुई थी। जुबैर ने कहा, “गिरफ्तारी के बाद जेल में रहने के दौरान ये समझ आया कि हम क्या कर रहे थे? क्या सही औऱ क्या गलत था?”

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ही खत्म कर दिया था। दरअसल, अगस्त 2017 से जुलाई 2019 तक घाटी में कानून और व्यवस्था को चुनौती देने की 1,394 घटनाएँ हुई थीं, जबकि अगस्त 2019 से जुलाई 2021 तक ऐसी केवल 382 घटनाएँ दर्ज की गईं है। यानि कि 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर में कानून तोड़ने की घटनाओं में कमी आई है।

आखिरी बाजी हार कर भी छा गए रवि दहिया, ओलंपिक में सिल्वर मेडल पाने वाले दूसरे भारतीय पहलवान बने

टोक्यो ओलंपिक 2020 में पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में रेसलर रवि दहिया ने भारत को सिल्वर मैडल दिलाया है। मैच शुरू होने से पहले गोल्ड की उम्मीदें थीं, लेकिन भारतीय पहलवान पर रूसी पहलवान जावुर युगुऐव भारी पड़ गए और दहिया को 4-7 से हार का सामना करना पड़ा।

रेसलर रवि दहिया के अंतिम मैच में हारने के बावजूद भारत के लिए ये गौरवान्वित क्षण है। 2012 के बाद पहली बार है कि कोई अकेला पुरुष भारत के लिए सिल्वर लेकर आया हो। इससे पहले सुशील कुमार थे। उन्होंने 2012 में लंदन ओलंपिक में सिल्वर जीता था और बीजिंग ओलंपिक में भारत के लिए कास्य पदक लेकर आए थे। रवि दहिया की मेहनत ने भारत को टोक्यो ओलंपिक में 2 दूसरा रजत पदक दिया जबकि कुल मिलाकर अब तक भारत के खाते में पाँच पदक आ चुके हैं।

कुश्ती के फाइनल मैच के बाद पहलवान रवि दहिया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुभकामनाएँ दी है। उन्होंने लिखा, “रवि कुमार दहिया एक शानदार पहलवान हैं। उनकी जी जान लगाने की भावना और मेहनत उत्कृष्ट है। टोक्यो ओलंपिक 2020 में रजत पदक जीतने के लिए उन्हें बधाई। भारत को उनकी उपलब्धियों पर बहुत गर्व है।”

उल्लेखनीय है कि रवि दहिया ने 4 अगस्त को सेमीफाइनल मैच में कजाकिस्तान के नूरइस्लाम सानायेव को मात दी थी। इसी के साथ ओलंपिक्स में कुश्ती के फाइनल में पहुँचने वाले दहिया दूसरे भारतीय बने थे। इससे पहले यहाँ तक सुशील कुमार पहुँचे थे। उससे पूर्व उन्होंने कोलंबिया के टिगरेरोस उरबानो आस्कर एडवर्डो को 13-2 से हराने के बाद बुल्गारिया के जॉर्जी वेलेंटिनोव वेंगेलोव को 14-4 से हराया था

आज के मैच की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि रवि और युगुऐव दोनों शानदार फॉर्म में थे। ये पहली बार नहीं था कि दोनों के बीच मुकाबला हुआ हो। इससे पहले 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी दोनों का आमना-सामना हुआ था। उस समय रूसी के रेसलर ने भारत के पहलवान को 6-4 से हराया था। उस चैंपियनशिप में रवि को ब्रॉन्ज हासिल हुआ था। इसके बाद वह 2020 और 2021 में एशियन चैंपियनशिप के दौरान भारत को गोल्ड दिलवा चुके हैं। 2018 में उन्होंने अंडर-23 चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था।

दीपर पुनिया और विनेश फोगाट हारे

मालूम हो कि एक ओर जहाँ रवि दहिया की हार के बाद भी भारत में सिल्वर पदक आने की खुशी है। वहीं पहलवान दीपक पुनिया के पुरुष फ्रीस्टाइल कुश्ती 86 किग्रा में हार के बाद एक पदक हाथ से जाने की निराशा भी है। इसके अलावा महिला कुश्ती में भी भारत को बड़ा झटका मिला है। भारत की दिग्गज रेसलर विनेश फोगाट को 53 किलोग्राम वेट कैटेगरी के क्वार्टर फाइनल मैच में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें बेलारूस की वेनेसा कालाजिंसकाया ने 9-3 से हराया।

UP: ‘जोगिंदर सिंह’ के नाम से पत्र भेजकर हनुमान मंदिर उड़ाने की धमकी देने वाला शफीक गिरफ्तार, धर्मांतरण रैकेट से जुड़ रहे हैं तार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्राचीन हनुमान मंदिर समेत जिले के अन्य बड़े मंदिरों एवं आरएसएस कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले शफीक को गिरफ्तार कर लिया गया है। शफीक मूल रूप से दिल्ली के सीलमपुर इलाके का रहने वाला है। उसके धर्मांतरण गिरोह से भी सम्बन्ध सामने आए हैं।

ज्ञात हो की हाल ही में लखनऊ के अलीगंज इलाके में पुराने हनुमान मंदिर में रजिस्टर्ड डाक से भेजा गया एक धमकी भरा पत्र पहुँचा। पत्र में लिखा हुआ था, “अल्लाह के पाक नाम पर काफिर हुकूमत के खिलाफ जिहाद का ऐलान”। पत्र में लखनऊ के काकोरी इलाके से गिरफ्तार किए गए अलकायदा समर्थित आतंकियों की रिहाई की माँग की गई थी। पत्र में कहा गया था कि जिन मुजाहिदों को गिरफ्तार किया गया है, उनकी रिहाई के लिए 14 अगस्त तक का समय दिया जा रहा है। इस तारीख तक आतंकियों की रिहाई नहीं होने पर लखनऊ के बड़े मंदिरों को निशाना बनाया जाएगा।

हनुमान मंदिर में भेजे गए इस धमकी भरे पत्र के मिलने के बाद क्राइम ब्रांच और एटीएस जाँच में जुट गई थी। इसी क्रम में पुलिस टीम ने त्रिवेणी नगर उप डाकघर (जहाँ से पत्र भेजा गया था) के आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज की जाँच की। इसके बाद संदिग्ध गतिविधि के आधार पर पुलिस ने बुधवार (04 अगस्त 2021) की रात आरोपित शफीक को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को शफीक के पास से धमकी भरे पत्र की कॉपी भी मिली है, जो हनुमान मंदिर भेजी गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स (दैनिक जागरण की रिपोर्ट में आरोपित का नाम शकील बताया गया है) के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपित शफीक के संबंध धर्मान्तरण गिरोह से हैं और वह देवबंद से भी जुड़ा हुआ है। पुलिस को उसके पास से रजिस्ट्री की रसीद, संदिग्ध दस्तावेज, किताबें एवं कई अन्य वस्तुएँ भी मिली हैं। एटीएस और खुफिया विभाग की टीम शफीक से पूछताछ कर रही है। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए उसकी कॉल डिटेल भी चेक की जा रही है कि कहीं शफीक के संबंध किसी आतंकी मॉड्यूल से तो नहीं हैं।

शफीक के बारे में यह जानकारी भी सामने आई है कि वह दूसरे धर्मों से नफरत करता था और लोगों को अपने मजहब में शामिल करने के लिए उनका माइंडवॉश करता था। उससे पूछताछ करके उसके गिरोह और लखनऊ समेत अन्य स्थानों में उसके संपर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। यहाँ एक बात ध्यान देने वाली यह है कि शफीक ने हनुमान मंदिर में भेजे गए धमकी भरे पत्र में भेजने वाले का नाम जोगिंदर सिंह लिखा था।

जब मनमोहन सिंह PM थे, कॉन्ग्रेस+ की सरकार थी… तब हॉकी टीम के खिलाड़ियों को जूते तक नसीब नहीं थे

41 साल का सूखा समाप्त कर भारतीय हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में पदक हासिल किया है। इसी तरह कई और खेलों में खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से देश को फख्र का मौका दिया है। इन सफलताओं के पीछे से जो कहानियाँ निकलकर आ रही हैं उसमें खिलाड़ियों के मेहनत, जज्बे और संघर्ष के साथ-साथ सरकार की तरफ से उन्हें मिला प्रोत्साहन भी है।

ऐसा नहीं है कि देश में खेल को लेकर हमेशा से सरकार का रवैया ऐसा ही रहा है। जिस तरह से इन पलों को हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जीते देखा है, ऐसा शायद ही उनके किसी पूर्ववर्ती ने किया हो। मसलन, हॉकी टीम के खिलाड़ियों से सीधे बात करना, ओलंपिक दल को 15 अगस्त पर लाल किले पर विशेष अतिथि के तौर पर बुलाना वगैरह वगैरह।

कुछ समय पहले टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने कहा भी था कि अब खेलों में पहले से बेहतर सुविधाएँ मिल रही हैं। हमारे खिलाड़ियों ने सरकारी उपेक्षा और अपमान का दंश सालों तक देखा है। कई मौकों पर उनकी यह पीड़ा बाहर भी आई। एक दशक पहले साल 2011 हॉकी टीम के कप्तान ने ऐसे ही अपनी निराशा जताई थी। उस समय मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस नीत यूपीए की सरकार चल रही थी और हॉकी खिलाड़ियों को जूते भी नसीब नहीं थे।

उस समय भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे राजपाल सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था, ”खिलाड़ियों के पास जूते भी नहीं हैं और वे घटिया किट का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।” टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में सिंह ने कहा था, “यह हर कोई देख सकता है कि हॉकी टीम के खिलाड़ियों के पास पहनने के लिए जूते भी नहीं हैं। टीम को जो किट इस्तेमाल करने के लिए दी जाती हैं, वे बेहद घटिया होती हैं। क्रिकेटरों और हॉकी खिलाड़ियों के बीच काफी अंतर है।”

बताया जाता है कि राजपाल सिंह के लिए वह दौर बे​हद उतार-चढ़ाव वाला था। पाकिस्तान को हराकर एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद हॉकी इंडिया को मात्र 25,000 रुपए का इनाम दिया गया था। अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित राजपाल ने इस इंटरव्यू में कई बड़े खुलासे किए थे। उन्होंने कहा था, “हम अपने देश के लिए खेलते हैं। क्या हम सम्मान के लायक नहीं हैं? अगर आप सम्मान नहीं दे सकते हैं, तो कम से कम खिलाड़ियों को अपमानित भी न करें।”

पूर्व कप्तान उस समय हॉकी टीम के साथ हो रहे भेदभाव से बेहद निराशा थे। उन्होंने कहा था, ”फेडरेशन हमारी उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल रहा है। राष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ इस तरह का व्यवहार करना उचित नहीं है।” जब हॉकी इंडिया ने उनके लिए 25,000 रुपए के पुरस्कार की घोषणा की तो उन्हें और खिलाड़ियों को कैसा लगा? इस सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा था, “बात पैसों की नहीं है। 25,000 रुपए देकर उन्होंने हमारी उपलब्धि का मजाक उड़ाया है। युवाओं की एक टीम जो सभी प्रकार की बाधाओं को पार करती है और इस तरह एक प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जीतने के लिए आगे बढ़ती है। उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जा सकता है।”

राजपाल सिंह ने कहा, “अधिकारियों का हमें तुच्छ दिखाने वाला रवैया बेहद निम्न स्तरीय ​​है। यह उस टीम के आत्मविश्वास को तोड़ता है, जो हॉकी इंडिया (एचआई) को अपने अभिभावक के रूप में देखती है।” उन्होंने कहा था, “अगर हमारा प्रबंधन ही हमारे साथ इस तरह का व्यवहार करता है, तो आप दूसरों से हमारे प्रति सम्मान की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?” उस समय पूरी टीम ने खुद को निराश और अपमानित महसूस किया था।”