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एक का छत से लटका मिला शव, दूसरे की तालाब से मिली लाश: बंगाल में फिर भाजपा के 2 कार्यकर्ताओं की हत्या

पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ हिंसा का दौर अभी थमा नहीं हैं। मंगलवार (अगस्त 3, 2021) को वहाँ फिर दो अलग-अलग जगहों पर दो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के शव मिले हैं। भाजपा ने इन मौतों का इल्जाम भी तृणमूल कॉन्ग्रेस के ऊपर लगाया है। इनमें एक मामला बीरभूम का है और दूसरा मेदिनीपुर का। भाजपा का कहना है कि टीएमसी समर्थित गुंडों ने उनके कार्यकर्ताओं की हत्या की जबकि टीएमसी इन आरोपों से किनारा कर रही है।

बीरभूम जिले के खोइरासोल में मिले भाजपा कार्यकर्ता के शव के बारे में पुलिस ने बताया कि भाजपा कार्यकर्ता इंद्रजीत सूत्रधार का शव उन्हें एक लंबे समय से खाली पड़ी इमारत के एक कमरे की छत से लटका मिला और उनके हाथ भी दोनों बँधे मिले। पुलिस ने सूत्रधार का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। प्राथमिक जाँच में यह मामला पूरी तरह से हत्या का लग रहा है। आगे जाँच की जा रही है। मृतक के परिजनों का कहना है कि इंद्रजीत सोमवार रात से गायब थे और उनकी कुछ स्थानीय लोगों से कहासुनी भी थी।

दूसरा शव तपन खटुआ का मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी के 45 वर्षीय कार्यकर्ता तपन खटुआ का शव पूर्व मेदिनीपुर जिले के एगरा इलाके में स्थित एक तालाब से मिला। बीजेपी और खटुआ के परिवार ने उनकी मौत के लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया। वहीं टीएमसी के स्थानीय नेताओं ने आरोपों को खारिज किया है। टीएमसी के नेताओं ने उलटे बीजेपी पर ही इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं पर राजनीति का आरोप लगाया है। 

टीएमसी बता रही है कि इंद्रजीत सूत्रधार की मौत रंजिश के कारण हुई, जबकि तपन ने सुसाइड की है। दोनों ही मामलों में जाँच चल रही है। लेकिन एक ही दिन में दो अलग-अलग जगहों से एक ही पार्टी कार्यकर्ताओं की मौत के मामलों ने तनाव बढ़ा दिया है। इससे पहले भी राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत के कई मामले रिपोर्ट किए गए हैं।

हाल में वहाँ काकद्वीप विधानसभा क्षेत्र में माधवनगर के सक्रिय भाजपा पदाधिकारी 36 वर्षीय समरेश पाल 26 जुलाई 2021 को मृत पाए गए थे। भाजपा ने दावा किया था कि पाल की हत्या सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी के गुंडों ने की है। भाजपा ने ट्वीट कर कहा था कि इस घटना से साबित होता है कि राज्य में कोई कानून-व्यवस्था नहीं है।

मुख्तार अंसारी की बीवी और उसके सालों की ₹2 करोड़ 18 लाख की संपत्ति जब्त: योगी सरकार ने गैंगस्टर एक्ट के तहत की कार्रवाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार राज्य के माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में मंगलवार (03 अगस्त 2021) को राज्य सरकार द्वारा कुख्यात माफिया और अपराधी मुख्तार अंसारी से जुड़ी लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपए मूल्य की संपत्ति की कुर्की की गई। यह संपत्ति अंसारी की बीवी और उसके सालों के नाम पर थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने जानकारी दी है कि गाजीपुर जिलाधिकारी के द्वारा बीते 02 अगस्त 2021 को गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के अंतर्गत अपराधिक गैंग आईएस-191 के लीडर अंसारी की बीवी आफसा अंसारी और उसके सालों सरजील रजा और अनवर शहजाद की संपत्ति को कुर्क करने का आदेश जारी किया गया था।

जिस संपत्ति को कुर्क करने का आदेश जारी हुआ उनका मूल्य लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपए है। आदेश मिलने के बाद सबसे पहले गाजीपुर के सैय्यदबाड़ा इलाके में स्थित आवासीय भवन को कुर्क करने की कार्रवाई की गई। इसकी अनुमानित कीमत 1 करोड़ 18 लाख रुपए बताई जा रही है। इसके अलावा लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आवासीय भवन की कुर्की के लिए भी लखनऊ पुलिस की एक टीम रवाना हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अंसारी की बीवी और उसके साले संगठित आपराधिक गिरोह के रूप में अपराध करते थे। अंसारी की गिरफ्तारी होने के कुछ समय बाद से ही उसके रिश्तेदारों और गिरोह सदस्यों के खिलाफ योगी सरकार की कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें अवैध निर्माण को ध्वस्त करना, अवैध संपत्ति को जब्त करना और शस्त्रों के निलंबन से सम्बंधित कार्रवाई भी सम्मिलित है।

ज्ञात हो कि बीते एक साल में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी समेत 25 माफियाओं की 11 अरब 28 करोड़ 23 लाख 97 हजार 846 रुपए की संपत्तियाँ जब्त की गई हैं। एडिशनल डीजीपी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने आँकड़ा जारी करते हुए बताया था कि कुख्यात अपराधियों की सूची में शामिल अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की सबसे ज्यादा संपत्तियाँ जब्त की गई हैं।

उन्होंने कहा कि जनवरी 2020 से अप्रैल 2021 के बीच 25 माफियाओं के 22259 सहयोगियों के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के 5558 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही उनकी संपत्तियाँ जब्त करने की कार्रवाई की गई। अवैध तरीके से बनाई गई संपत्तियों को जब्त करके इन माफियाओं की कमर तोड़ दी गई है। आर्थिक चोट पहुँचने की वजह से अब यह माफिया भविष्य में अपराध करने के काबिल नही रहेंगे।

मारा-पीटा, बाल खींचा, दीवार में लड़ाया सिर: हनी सिंह के ख़िलाफ़ पत्नी शालिनी तलवार ने करवाया घरेलू हिंसा का केस दर्ज

मशहूर रैपर और सिंगर यो यो हनी सिंह (हृदेश सिंह) के ख़िलाफ़ उनकी पत्नी शालिनी तलवार ने घरेलू हिंसा का मुकदमा दायर करवाया है। शालिनी ने ‘द प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट’ के तहत तीस हजारी कोर्ट में याचिका दी। इसके बाद कोर्ट ने हनी सिंह के ख़िलाफ़ एक नोटिस जारी किया। नोटिस में सिंगर को 28 अगस्त से पहले जवाब देने को कहा गया है।

जानकारी के मुताबिक, शालिनी की याचिका पर मजिस्ट्रेट तानिया सिंह ने सुनवाई की। उनके समक्ष शालिनी की ओर से वकील संदीप कपूर, अपूर्वा पांडे और जीजी कश्यप ने यह याचिका रखी थी। इसी के बाद तलवार के पक्ष में निर्देश पास किए गए। कोर्ट ने उनका स्त्रीधन उन्हें वापस देने और जो प्रॉपर्टी उनके और हनी सिंह के नाम पर है उसे भी बेचने पर रोक लगाई।

कहा जा रहा है कि शालिनी ने अपनी याचिका में हनी सिंह समेत उनके परिवार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इसमें हनी सिंह के माता पिता और उनकी बहन का भी नाम शामिल है। शालिनी ने कोर्ट में कई घटनाओं का जिक्र किया है जब उनके साथ ज्यादती हुई। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें मारा पीटा जाता रहा, उनके बाल खींचे गए, दीवार में सिर मारा गया। उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें हनी सिंह से शादी के बाद कभी घर में आने वाला कोई पैसा नहीं मिला। सब कुछ सिंगर के माता पिता पर जाता था।

उल्लेखनीय है कि हनी सिंह की शादी शालिनी तलवार से 20 साल की दोस्ती के बाद साल 2011 में हुई थी। दोनों ने सिख रीति रिवाजों से शादी की थी। मगर, अब शालिनी का आरोप है कि उन्हें मारा पीटा जा रहा है और साथ में उनका मानसिक तौर पर शोषण भी हो रहा है। बता दें कि इस मामले में अभी तक हनी सिंह की ओर से कोई स्टेटमेंट नहीं आया है।

500 साल बाद चाँदी के पालने में झूलेंगे रामलला, गर्भगृह को सोने से बनाने की उठी माँग: PM मोदी को लिखा गया पत्र

रामनगरी में श्री राम जन्मभूमि पर बन रहे रामलला के मंदिर को भव्यतम रूप देने की माँग उठ रही है। नींव के निर्माण का 60% काम पूरा हो चुका है। इस बार यहाँ 11 अगस्त से शुरू हो रहे सावन मेले को भी खास बनाने की तैयारी की जा रही है। दैनिक भास्कर ने इस पर एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें लेखक रमेश मिश्र ने बताया कि इस बार के सावन मेला में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामलला को चाँदी के पालने पर झुलाने का फैसला लिया है। ऐसा 500 साल बाद हो रहा है। बता दें कि यह मेला सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से शुरू होकर 12 दिन तक चलता है।

500 वर्षों के बाद भगवान रामलला का मंदिर निर्माण हो रहा है और यह जिम्मेदारी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिली है। जिसके लिए देश के करोड़ों राम भक्तों ने सहयोग राशि समर्पित कर रहे हैं। ऐसे में देश का हर राम भक्त चाहता है कि विश्व का सबसे सुंदर व भव्य मंदिर बने। जिसको लेकर अब श्री रामलला के गर्भगृह को सोने से सजाए जाने की माँग किया गया है।

राम जन्मभूमि पर श्री रामलला के मंदिर में गर्भगृह को सोने से बनाए जाने की माँग को लेकर बाबरी विध्वंस के आरोपित संतोष दुबे और शिवसेना पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। जिसमे कहा गया है कि राम मंदिर निर्माण के लिए लाखों लोगों ने अपने प्राण गँवाए हैं। जिसमे बाद अब यह मधुर बेला आया है। इसलिए देश के राम भक्तों की मंशा के अनुरूप बनाया जाए।

संतोष दुबे ने कहा कि अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर बन रहा राम मंदिर लाखों लोगों के बलिदान का परिणाम है। राम मंदिर आंदोलन में लाखों लोगों ने अपने प्राण गँवाए और कई विकलांग हुए। बड़ी संख्या में माँ बहनों के सुहाग उजड़ गए। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद यह शुभ अवसर आया है कि भगवान राम के जन्म स्थान पर मंदिर का निर्माण हो रहा है। दुबे का कहना है कि राम मंदिर के भूमि पूजन को 5 अगस्त को एक साल पूरा हो रहा है। प्रधानमंत्री को उसी दिन सोने का गर्भगृह बनाने का ऐलान कर देना चाहिए।

बताया जा रहा है कि 15 सितंबर के पहले मंदिर के लिए बुनियाद भरे जाने का काम पूरा हो जाएगा। वहीं 2023 में मंदिर निर्माण का काम पूरा होगा। राम मंदिर निर्माण के लिए बुनियाद भरी जा रही है। बुनियाद की मोटाई करीब 1 इंच तक 44 परतों की भरी जानी है। इसमें अभी तक 25 परतों की भराई हो चुकी है। ये बुनियाद भरने का काम 15 सितंबर तक राम मंदिर ट्रस्ट के द्वारा कारदायी संस्था को सौंपी गई है।

संस्था के अधिकारी 12-12 घंटे की दो शिफ्ट में मंदिर की बुनियाद का निर्माण कार्य करवा रहे है। जिसके चलते मंदिर निर्माण के लिए अक्टूबर माह से मंदिर के बेस का निर्माण होगा। इसमें मिर्जापुर के बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट स्टोन का उपयोग किया जाना है।

‘मेरा मियाँ, मेरा कल्चर’ कहकर ट्रोल हुईं पाकिस्तानी एक्ट्रेस सदफ कंवल, यूजर्स बोले- ‘इसे शौहर की नौकरानी बनकर रहना पसंद है’

फेमिनिज्म को लेकर पाकिस्तानी अभिनेत्री और मॉडल सदफ कंवल का अजीबोगरीब बयान आने के बाद सोशल मीडिया पर ‘मेरा मियाँ, मेरा कल्चर’ ट्रेंड पर है। सदफ ने एक इंटरव्यू में अपने शौहर के जूते उठाने, उन्हें खाना देने, उनकी जरूरतों का ख्याल रखने को नारीवाद का नाम दिया था। लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स को उनके ख्याल और उनके द्वारा गढ़ी गई नारीवाद की परिभाषा पसंद नहीं आई और उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। 

दरअसल, एक टीवी इंटरव्यू में सदफ से पूछा गया था कि क्या पाकिस्तानी महिलाएँ मजलूम हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा, “औरत मजलूम बिल्कुल नहीं है वो बहुत मजबूत हैं, मैं तो खुद को बिल्कुल भी मजलूम नहीं मानती। आप भी बहुत मजबूत होंगी। औरत बेचारी नहीं है।” इसके बाद आगे उन्होंने कहा,

“हमारा कल्चर क्या है? हमारे मियाँ है, मैंने शादी की है, मुझे उसके जूते उठाने हैं उसके कपड़े प्रेस करने हैं। हालाँकि ये काम मैं कम करती हूँ, लेकिन मुझे ये बात तो पता होनी ही चाहिए कि मेरे पति के कपड़े कहाँ हैं। मुझे पता होना चाहिए कि उनकी चीज़ें कहा हैं, क्या खाना है, क्योंकि मैं उसकी पत्नी हूँ और औरत हूँ पति से ज्यादा, मुझे उसके बारे में पता होना चाहिए। मैं यही देखकर बड़ी हुईं हूँ। आजकल काफी लिबरल्स आ गए हैं। लेकिन मेरा फेमिनिज्म यही कहता है।”

सदफ के इसी इंटरव्यू के बाद ‘मेरा मियाँ, मेरा कल्चर’ ट्रेंड कर रहा है। यूजर्स उन पर निशाना साध रहे हैं। शिराज हसन नाम के यूजर ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा, “भारत की पुरुष और महिला टीम टोक्यो ओलंपिक्स के सेमीफाइनल्स में पहुँच गई हैं और हम मेरा मियाँ मेरा कल्चर कर रहे हैं।”

मॉडल सबीका इमाम लिखती हैं, “जब आप फेमीनिज्म के बारे में नहीं जानती हैं तभी अपने पति के कपड़े इस्त्री करने के बारे में सोचती हैं।”

शोएब लिखते हैं, “सदफ को अपने शौहर की नौकरानी बनकर रहना पसंद हैं। यही उसके लिए अच्छा है। मैं अपनी बेटी की सोच अभी इसके जैसी नहीं चाहता।”

ईमान लिखते हैं, “मैं सच में बहुत सॉरी फील कर रहा हूँ। काश वह अपनी अहमियत समझ पाए और फिर लोगों को प्रभावित करे। ये सच बताऊँ बहुत दुखद है कि वह अपने आप को एक इंसान के तौर पर नहीं देखती जिसे केयर और बराबरी का हक है।”

बता दें कि इस इंटरव्यू के दौरान सदफ के पति शहरोज भी वहाँ पर मौजूद थे। उन्होंने भी अपनी पत्नी का समर्थन किया और कहा कि औरतें जो काम कर सकती हैं उसे मर्द कभी नहीं कर सकतें। जरूरी ये है कि दोनों को एक दूसरे की रेस्पेक्ट करनी चाहिए।

अमित शाह ने बना दी असम-मिजोरम के बीच की बिगड़ी बात, अब विवाद के स्थायी समाधान की दरकार

सार्वजनिक तौर पर कई दिनों के आक्रामक आचरण के बाद असम और मिजोरम के बीच हाल में हुआ गंभीर आंतरिक सीमा विवाद शांति की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रशासन की ओर से आए बयान और कार्रवाई इसी ओर इशारा कर रहे हैं। विश्वास बहाली की दिशा में उठाए गए कदम के तहत मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने अपने राज्य प्रशासन को उस एफआईआर को खारिज करने का आदेश दिया है जिसमें असम के 200 अज्ञात नागरिकों, 6 प्रशासनिक अधिकारी और मुख्यमंत्री हिमंत बिश्व सरमा को नामजद किया गया था। मिजोरम के मुख्यमंत्री द्वारा विश्वास बहाली के दिशा में उठाए गए कदम के बाद असम के मुख्यमंत्री ने भी अपने प्रशासन को आदेश देकर मिजोरम के अधिकारियों और राज्यसभा के सांसद के खिलाफ दायर एफआईआर खारिज करवाई।

दोनों राज्यों की ओर से की गई कार्रवाई इस बात को दर्शाती है कि राज्यों के बीच आंतरिक सीमा विवाद का निकट भविष्य में कोई स्थायी हल न भी निकल पाए तो भी राज्यों द्वारा उठाए गए सकारात्मक कदम फिलहाल बढ़े तनाव को कम करने में सहायक होंगे। असम के मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर यह भी बताया कि आगामी 5 अगस्त को वे अपने दो मंत्रियों को मिजोरम की राजधानी आइजॉल भेज रहे हैं ताकि आतंरिक सीमा विवाद का हल निकालने की दिशा में उचित कदम उठाया जा सके। दोनों राज्यों की ओर से उठाए गए ये कदम तब और महत्वपूर्ण हो जाते हैं जब पूरे देश की निगाहें दोनों राज्यों के बीच चल रहे विवाद पर टिकी थी।

ऐसा नहीं कि उत्तर-पूर्वी राज्यों के बीच सीमा विवाद कोई नई बात है। अलग-अलग राज्यों के बीच यह विवाद बहुत पुराना है पर हाल में हुए असम और मिज़ोरम के बीच हुए विवाद में जो बात महत्वपूर्ण है वो यह है कि इस विवाद और उसके परिणामस्वरूप हुई गोलीबारी में असम के नागरिकों की जान चली गई। यह ऐसी घटना थी जिसका उत्तर-पूर्वी राज्यों में चल रहे पुराने सीमा विवाद पर ही नहीं, बल्कि देश के इस भूभाग में पिछले कई वर्षों से चल रहे प्रशासनिक और आर्थिक बदलाव पर असर पड़ सकता है। ऐसे में दोनों राज्यों की ओर से उठाए गए कदमों को देखते हुए कहा जा सकता है कि ये कदम उचित और आवश्यक थे। शान्ति के लिए उठाए गए इन कदमों से केंद्र सरकार ने भी राहत की साँस ली होगी, क्योंकि विवाद शांत करने की दिशा में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी तरफ से काफी प्रयास किए थे।

वर्तमान परिस्थितियाँ इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाती हैं क्योंकि यह तब पैदा हुई जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तर-पूर्वी राज्यों के बीच चल रहे पुराने आंतरिक सीमा विवाद का हल निकालने की दिशा में एक कदम उठाते हुए राज्यों के बीच एक बैठक का आयोजन किया। यह बैठक शिलांग में थी। इसी के चलते यह अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों राज्यों के बीच शुरू हुआ ताजा विवाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रयासों को पटरी से उतारने के उद्देश्य से किया गया है। इस घटना के पीछे जो भी कारण रहा हो, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रशासन की ओर से अलग-अलग कारण बताए गए। असम के मुख्यमंत्री की ओर से यह तर्क भी दिए गए कि उनके राज्यों में हुए प्रशासनिक सुधारों की वजह से मिजोरम की ओर के कई ग्रुप नाराज़ हैं।

वर्तमान विवाद की वजह से पैदा हुए तनाव को शांत करने में केंद्र सरकार की प्रमुख भूमिका रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रयासों के पश्चात दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एक-दूसरे के प्रति अपने बयानों में जिस तरह की सतर्कता और संयम दिखाया है उसका स्वागत होना चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रयासों ने केंद्र सरकार की भूमिका को महत्वपूर्ण बना दिया है। केंद्र सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्यों में हो रहा प्रशासनिक और आर्थिक बदलाव उत्तर-पूर्व का बाकी के देश के साथ एकीकरण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण अंग हैं। ऐसे में राज्यों के बीच सीमा विवाद का हल निकालने में केंद्र सरकार के प्रयास और हस्तक्षेप इसलिए आवश्यक है, क्योंकि एकीकरण की जो प्रक्रिया पिछले सात वर्षों से चल रही है उसमें किसी तरह की अड़चन न आ सके। वर्तमान परिस्थितियों में ऐसी कोई संभावित अड़चन न तो केंद्र सरकार चाहेगी और न ही उत्तर-पूर्वी राज्य और उनके नेतृत्व।

दोनों राज्यों के वर्तमान मुख्यमंत्री अपने राज्य के नागरिकों के बीच लोकप्रिय हैं। हिमंत बिस्व सरमा ने हाल ही में एक बड़ी जीत के उपरांत मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। असम गण परिषद उनके साथ सत्ता में शामिल है। असम सरकार के पास उसके नेतृत्व की लोकप्रियता के साथ-साथ जनता एक वृहद समर्थन है। ये बातें न केवल दोनों मुख्यमंत्रियों के पक्ष में जाती है पर उन्हें यह विश्वास भी दिलाती है कि सीमा विवाद का हल निकालने की दिशा में उनके प्रयासों और फैसलों को जनता का समर्थन मिलेगा। राज्यों में बदल रही आर्थिक स्थिति भी इन प्रयासों के पक्ष में रहेगी। ऐसे में केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकारों के पास भी मौका है कि वे पुराने सीमा विवादों को सुलझाने की दिशा में कदम उठाएँ जिससे स्थायी हल निकल सके और ये राज्य अपनी सही प्राथमिकताओं पर काम कर सकें।

वे POK क्रिकेट लीग के चीयरलीडर्स, इधर कश्मीर पर भी बजाते हैं ‘अमन’ का झुनझुना: Pak वालों से ही सीख लो सेलेब्रिटियों

पाकिस्तान ने अपने अवैध कब्जे वाले कश्मीर में ‘कश्मीर प्रीमियर लीग’ के आयोजन का ऐलान किया है। 6 अगस्त, 2021 से इसका आयोजन होना है। इसे ‘अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC)’ की मान्यता नहीं है। ये एक अवैध कब्जे वाले प्रदेश में हो रहा। लेकिन, इसके बावजूद रहत फ़तेह अली खान, शाहिद अफरीदी और शोएब अख्तर जैसे बड़े नाम इससे जुड़े हुए हैं। असल में भारत के सेलेब्स को इनसे सीखने की ज़रूरत है। आइए, बताते हैं क्यों।

राहत फ़तेह अली खान: KPL के एंथम को दी है आवाज़

सबसे पहले बात करते हैं राहत फ़तेह अली खान की। बड़े गायक हैं, जिन्हें बॉलीवुड ने खूब प्यार दिया है। बॉलीवुड ही नहीं, भारत के लोग भी उनके गानों पर खूब थिरके हैं। खासकर सलमान खान की फिल्मों में उनके गाने ‘तेर-मेरी’, ‘तेरे मस्त-मस्त दो नैन’, ‘तेरे नैना बड़े कातिल’, ‘सुरीली अँखियों वाले’ और ‘जग घुमया’ काफी लोकप्रिय हुए। कहते हैं जब वो मुंबई में उपलब्ध नहीं होते थे कि भारतीय संगीतकार उनसे गवाने के लिए दुबई तक जाया करते थे।

राहत फ़तेह अली खान के बारे में बता दें कि उन्होंने ही KPL का एंथम गाया है। ये वही गायक हैं, जिन्होंने 2010 में 15 और 2012 में 12 भारतीय फिल्मों ने गाने दिए थे। जिस देश ने उन्हें लगभग दो दशकों तक दाना-पानी दिया, उसके खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाने के लिए उसकी ही अवैध कब्जे वाली जमीन पर हो रहे एक क्रिकेट लीग में गाने से पहले उन्होंने पल भर भी नहीं सोचा। क्यों? उनकी उनकी श्रद्धा इस्लाम और पाकिस्तान पर है।

राहत फ़तेह अली खान को अब भी भारत में गाने मिलते रहेंगे, ऐसा नहीं है कि भारत के खिलाफ प्रोपेगंडा को अपनी आवाज़ देने के बाद भारतीय संगीतकार उनकी आवाज़ से तौबा कर लेंगे। बिलकुल नहीं। ‘अरे, संगीत का कोई मजहब और सीमा थोड़े होती है’ कह कर उनके कई गाने बॉलीवुड में अब भी लाए जा सकते हैं। सिर्फ आवाज़ ही नहीं, ‘खेलो आज़ादी से’ वाले KPL के एंथम वीडियो में राहत फ़तेह अली खान खुद भी हैं।

वो मस्ती में शाहिद अफरीदी के साथ थिरकते हुए दिख रहे हैं। जब उनका जिक्र हो रहा है तो ये याद दिलाना ज़रूरी है कि जब भारत के गायन में उनका सबसे अच्छा समय चल रहा था, तब फरवरी 2011 में उन्हें दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। ये वही साल था, जब फिल्मफेयर वालों ने उन्हें ‘इश्किया’ के गाने ‘दिल तो बच्चा है जी’ के लिए साल के सर्वश्रेष्ठ गायक का ख़िताब दिया था।

लेकिन, उन्हें हिरासत में क्यों लिया गया था? उनके पास $1,24,000 (आज की तारीख़ में 92.07 लाख रुपए) मिले थे। उनके साथ उनके ट्रूप के कई साथी भी थे। नियम था कि एक विदेशी नागरिक $5,000 से ज्यादा कैश लेकर यात्रा नहीं कर सकता। भारतीय रुपयों को अमेरिकी डॉलर में बदलने के लिए भी अवैध माध्यमों का इस्तेमाल किया गया था। उससे पहले भी उन्हें लेकर विवाद हुआ था, जब गुरगाँव में एक शो में करार कर के भी वो नहीं आए थे।

शोएब अख्तर: KPL के ‘पीस एम्बेसडर’

शोएब अख्तर को ‘कश्मीर प्रीमियर लीग (KPL)’ का ‘पीस एम्बेसडर’ बनाया गया है। कभी अपनी तेज़ गति की गेंदबाजी के लिए मशहूर रहे शोएब अख्तर भले ही क्रिकेट से रिटायर हो गए हों, लेकिन बात जब अपने मुल्क का समर्थन करने की हो तो वो ये नहीं देखेंगे कि क्या सही है और क्या गलत। पाकिस्तान गलत है, लेकिन तब भी वो इस आयोजन का हिस्सा बने हैं। उनका कहना है कि वो लड़ने-लड़ाने से ज्यादा खेल-कूद में विश्वास रखते हैं।

भारत सही भी रहता है तो भी यहाँ के सेलेब्स अपने देश का समर्थन करने से हिचकिचाते हैं। वो हजार बार सोचेंगे कि कैसे पोलिटिकली करेक्ट रहा जाए, पाकिस्तान को नाराज़ न करने वाले बयान नहीं दिए जाएँ और एक कूटनीतिज्ञ की तरह व्यवहार किया जाए। न पाकिस्तान से उन्हें एक ढेला कमाई होती है और न ही वो उनका अपना देश है, लेकिन पाकिस्तान की आतंकी हरकतों की निंदा की जगह ‘फर्जी शांति’ का संदेश देने में बॉलीवुड और भारतीय सेलेब्स पास हैं।

शोएब अख्तर ये सब नहीं सोचते। उनके पास पाकिस्तान और इस्लाम से इतर कुछ भी करने के लिए समय नहीं। जो इन दोनों को स्वीकार्य नहीं, वो शोएब अख्तर को भी स्वीकार नहीं। अब वो ज्ञान दे रहे हैं कि वो नफरत से ज्यादा मोहब्बत पर विश्वास रखते हैं, इसीलिए ‘पीस एम्बेसडर’ रहे हैं। अब तो उन्होंने BCCI पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि KPL तो शांति के एक पुल की तरह है। ज़ाहिर है, वो शांति की बात तभी करेंगे जब प्रोपेगंडा उनका देश फैला रहा हो।

शाहिद अफरीदी: कट्टर मुस्लिम, कट्टर पाकिस्तानी

शाहिद अफरीदी के बारे में बात करने से पहले उनके बारे में एक रोचक बात बता दें कि उन्होंने अपनी बेटियों को हिंदुस्तानी सीरियल देखने और हिंदू धर्म के अनुसार आरती किए जाने का अनुसरण करने पर गुस्से में अपने घर का टीवी ही तोड़ दिया था। यानी, इस्लाम से समझौता नहीं, भले ही कोई कुछ अच्छा ही क्यों न कर रहा हो। ये उस बॉलीवुड के लिए सबक है, जो आज तक ब्राह्मणों/साधुओं को नकारात्मक दिखाता आ रहा है और मौलानाओं को इंसानियत की मूरत।

शाहिद अफरीदी को KPL की टीम ‘रावलकोट हॉक्स’ का कप्तान बनाया गया है। राजनीति के लिए एक लीग का आयोजन हो रहा है और जो उसका विरोध कर रहे हैं, उन पर ही शाहिद अफरीदी ने खेल और राजनीति को मिक्स करने का आरोप मढ़ दिया। इसे कहते हैं आत्मविश्वास। और भारतीय सेलेब्स क्या करते हैं? हरभजन सिंह और युवराज सिंह जैसे लोग अपने प्रशंसकों को कहते हैं कि शाहिद अफरीदी के NGO को रुपए दान करो।

कश्मीर को लेकर तो शाहिद अफरीदी हमेशा से अपने मुल्क के वैश्विक प्रोपेगंडा का हिस्सा रहे हैं। क्या आप सोच भी सकते हैं कि आमिर खान कभी किसी अंतररष्ट्रीय मंच पर जाकर ये कहें कि पाकिस्तान कश्मीर से अपना अवैध कब्ज़ा हटाए? हमारी जमीन होने के बावजूद वो ऐसा कभी नहीं कहेंगे। लेकिन, शाहिद अफरीदी को पता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, लेकिन वो वही बात बोलेंगे जो पाकिस्तान का रुख होगा।

शाहिद अफरीदी को KPL का ब्रांड एम्बेसडर भी बनाया गया है। उनका कहना है कि BCCI कुछ भी कह ले, इससे इस शो के आयोजन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वो तो मुजफ्फराबाद भी पहुँच गए हैं, लीग के आयोजन से पहले। वहाँ से तस्वीरें भी पोस्ट कर रहे। उन्हें चिंता नहीं कि भारत में मुझे जानने वाला फलाँ क्या सोचेगा, क्योंकि सवाल मुल्क के प्रोपेगंडा का है। भारतीय सेलेब्स देश के लिए सही बात बोलने के लिए भी सोचेंगे कि पाकिस्तान के किसी गाँव में बैठा उनका कोई फैन नाराज़ न हो जाए।

पाकिस्तानी सेलेब्स से सीखने की ज़रूरत है भारत के सेलेब्स को

कम से कम इन पाकिस्तानी सेलेब्रिटीज से बॉलीवुड व भारतीय क्रिकेट के लोग ये तो सीख ही सकते हैं कि अपने देश के लिए मुखर होकर आगे कैसे आया जाता है। जब वो गलत का बचाव कर सकते हैं, हमें तो भला सच्चाई का बचाव करना है। अभी एक KPL की निंदा करते हुए आपने किसी एक भारतीय क्रिकेटर या बॉलीवुड हस्ती की ट्वीट देखी? नहीं न। बस, यही तो अंतर है। पाकिस्तान को भला वो कैसे नाराज़ कर सकते हैं?

भारत विरोधी गतिविधियों का हब बन चुके तुर्की में अपनी फिल्म की शूटिंग कर के आमिर खान वहाँ के पर्यटन को बढ़ावा देते हैं और वहाँ की फर्स्ट लेडी से मुलाकात करते हैं। लेकिन, यही आमिर खान इजरायल के प्रधानमंत्री से इसीलिए मिलने नहीं जाते हैं, क्योंकि इनकी कौम नाराज़ हो जाएगी। इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री जनवरी 2018 में भारत आए थे तो तीनों खानों ने उनसे मुलाकात करने से इनकार कर दिया था। इससे इस देश को लेकर उनकी सोच पर क्या असर पड़ेगा, उन्होंने ये नहीं सोचा।

अंतर ये है कि देशहित के मुद्दों पर पाकिस्तानी सेलेब्स बहस वगैरह में नहीं पड़ते, जो रुख उनके मुल्क का है वही उनका भी होता है। भारत के खिलाफ बोलने के लिए वो ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ या फालतू की बहस में नहीं पड़ते, भले ही उनका देश आतंकवाद का निर्यातक ही क्यों न हो। हम पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद से दशकों से पीड़ित हैं, लेकिन फिर भी कोई भारतीय सेलेब पाकिस्तान पर उँगली नहीं उठा सकता।

हमारे सेलेब तो पाकिस्तानी कलाकारों के पक्ष में उतरने में सरकार और देश के आधिकारिक बयान के विरोध में भी खड़े हो जाते हैं, लेकिन पाकिस्तान का कोई भी सेलेब्रिटी कभी भी आर्थिक मोर्चा हो या फिर राजनीतिक, अपने मुल्क व वहाँ की सरकार का साथ नहीं छोड़ सकता। भारत में किस तरह से पाकिस्तानी कलाकारों की पैरवी की जाती है, ये किसी से छिपी नहीं है। भले ही सीमा पर जवान उसी पाकिस्तान के कारण बलिदान हो रहे हों।

‘जेंडर जिहाद’ एक्टिविस्ट ने कायदे-ए-आजम के स्मारक के सामने दिया ‘बोल्ड ड्रेस’ में पोज: पाकिस्तानी आवाम ने की गिरफ्तारी की माँग

पाकिस्तानी सोशल मीडिया में 02 अगस्त 2021 को बवाल खड़ा हो गया जब पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के स्मारक के सामने ‘बोल्ड ड्रेस‘ पहने हुए एक जोड़े (couple) के कुछ फोटो वायरल हुईं। हालाँकि पाकिस्तानी आवाम इन तस्वीरों से आहत दिखी और फोटो में दिखाई दे रहे मॉडल्स की गिरफ्तारी की माँग भी की गई।

इस फोटो को एएनआई की स्मिता प्रकाश द्वारा ट्विटर पर शेयर किया गया और उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि इस जोड़े को प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।

ये फोटो इमान महसूद द्वारा क्लिक की गई हैं और जोड़े ने जो ड्रेस पहनी थी उसे राजा वासे ने डिजाइन किया था। सोशल मीडिया पर इन फोटो को लेकर विवाद होने के बाद मिस्टिकल शायरी और इमान ने अपने एकाउंट्स डिलीट कर दिए हैं जबकि वासे ने अपना एकाउंट प्राइवेट कर दिया। मिस्टिकल शायरी के इंस्टाग्राम बायो के अनुसार वो ‘जेंडर जिहाद’ का हिस्सा हैं। उनके द्वारा डिलीट पोस्ट में लिखा गया है कि यह पाकिस्तानी पितृसत्ता को दिया गया जवाब है। पोस्ट में लिखा गया है, “अल्लाह हमारे साथ है और हमें मरना स्वीकार है लेकिन हम मानव अधिकारों और लैंगिक समानता के लिए लड़ना बंद नहीं करेंगे।”

डिलीट किया गया पोस्ट (फोटो : ट्विटर/ahsanah37240024)

इन फोटो का पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर गहरा असर पड़ा और लोगों ने दोनों मॉडल्स पर कार्रवाई करने की माँग की। सोशल मीडिया पर #ArrestTheCouple भी ट्रेंड करता रहा और कार्रवाई की माँग करने वालों में आम नागरिकों के अलावा पत्रकार और नेता भी शामिल रहे।

इस्लामाबाद के डेप्युटी कमिश्नर ने भी दोनों मॉडल्स की जानकारी माँगी है लेकिन फ़िलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि क्या उस जोड़े पर कोई कार्रवाई की गई है या नहीं।

अंडरवियर, गंदी बात, दुर्गंध: चंडीगढ़ लेक क्लब के नाम से सोशल मीडिया में क्या चल रहा

सोशल मीडिया पर चंडीगढ़ लेक क्लब के नाम पर एक नोटिस शेयर किया जा रहा है। इस नोटिस में दावा है कि क्लब के नए नियमों के मुताबिक वहाँ मंजूरी प्राप्त अंडरवियर और कुछ चुनिंदा गलत शब्द बोलने होंगे। इसके अलावा मोजे रोज धोने की बात, दुर्गंध आने पर जुर्माना देने की शर्त और शॉर्ट्स पहनने वालों को पैर शेव कराने की भी बात भी इस नोटिस में हैं।

लेक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम से वायरल हो रहे नोटिस पर कई लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों की हँसी नहीं रुक रही। इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार शिव अरूर ने इसे शेयर किया है। उन्होंने कहा है कि चंडीगढ़ के लेक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रबंधन प्रभारी वेतन वृद्धि का पात्र है। उन्होंने अपने फॉलोवर्स से नोटिस की हर पंक्ति को पढ़ने को कहा है। उनका कहना है कि अगर ये प्रैंक नहीं है तो हर नोटिस ऐसा ही लिखा जाना चाहिए।

इसे देखने के बाद कुछ यूजर कह रहे हैं, ‘अमृतसर में आपका स्वागत है।’ कुछ पूछ रहे हैं कि आखिर दूसरों के मोजे सूँघने के लिए क्लब किसे अपॉइंट करेगा। एक यूजर कहते हैं, “मैं इसे अप्रूव करता हूँ। इसे प्रिंट करवाकर हर जगह हर ऑफिस में पेस्ट किया जाना चाहिए। बस मैं इस बात को लेकर श्योर नहीं हूँ कि कौन की गंध को अप्रूव किया जाएगा और क्या होगा अगर कोई अंडरवियर ही न पहनता हो।”

महिला यूजर कहती हैं कि क्या ये सच है, अगर हाँ तो फिर जो इन नियमों को मानकर आए उसे सम्मान दिया जाना चाहिए। एक यूजर लिखता है कि उसने ये लेटर जिम के मालिक को भेजा है और चुनौती दी है कि वो ऐसा नोटिस अपने सदस्यों के लिए निकाल कर दिखाए।

लेटर में क्या हैं शर्तें

वायरल नोटिस में लिखे बिंदुओं के मुताबिक क्लब की गतिविधियों में शामिल सदस्यों को सही कपड़े पहनना जरूरी होगा। जिम करने वालों को जिम सूट पहनना होगा। इस दौरान सबसे ज्यादा ध्यान अंडरगार्मेंट्स का रखा जाएगा। सदस्य केवल मंजूरी प्राप्त अंडरगार्मेंट्स ही पहन सकेंगे। नोटिस के मुताबिक सदस्य ऑफिस से अंडरगारमेंट्स के सैंपल प्राप्त कर सकते हैं और अपने गारमेंट्स लाकर मंजूरी के लिए स्टांप करवा सकते हैं।

लेटर के दूसरे बिंदु में सदस्यों को साफ-सफाई का ध्यान रखने को कहा गया है। इसमें अपील की गई है कि सदस्यों को जुराबें रोज धोने होंगे। अगर कोई सदस्य गंदे या बदबूदार मोजे पहनता है और स्मेल टेस्ट में फेल होता है, तो उसे जुर्माना देना होगा। शरीर की स्मेल पर भी यही शर्त लागू होगी।

वायरल नोटिस

तीसरे बिंदु में भारी वजन उठा रहे लोगों को तेज आवाज निकालने की परमिशन नहीं दी गई है। इसके साथ ही गलत भाषा के इस्तेमाल के लिए पंजाबी शब्दों की सूची दी गई है और कहा गया है कि इसी सूची में से शब्द इस्तेमाल करने हैं। चौथे प्वाइंट में शॉर्ट्स पहनकर आए सदस्यों को पैर शेव कराने को कहा गया है।

नोटिस पर क्लब ट्रेनर की प्रतिक्रिया

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, क्लब के ट्रेनर अनमोल दीप का कहना है कि ये नोटिस उनके क्लब से जारी नहीं किया गया। किसी ने शरारत की है। सोमवार को क्लब बंद होता है। सीसीटीवी फुटेज चेक करके पता लगाया जा रहा है। उनके मुताबिक, उन्हें इस बारे में सुबह मालूम हुआ था लेकिन जनरल मैनेजर के साइन नहीं थे। उन्होंने सीनियर्स को बताया जिन्होंने ऐसे किसी नोटिस को जारी करने की बात मना की। इसके बाद नोटिस हटा दिया गया।

उल्लेखनीय है कि अभी इस नोटिस को लेकर केवल क्लब के ट्रेनर का बयान आया है। इसलिए ऑपइंडिया ये पुष्टि नहीं करता कि ये किसी ने कोई मजाक किया था या फिर हकीकत में ये नोटिस जारी हुआ था।

‘खालिस्तान ओलंपिक टीम’ ने जारी किया अपना बैनर-पोस्टर: सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर उड़ाया मजाक

इंटरनेट पर एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें लड़कों के एक छोटे समूह को ‘खालिस्तान ओलंपिक टीम’ का बैनर पकड़े देखा जा सकता है। इस तस्वीर का लोगों ने सोशल मीडिया पर खूब मजाक बनाया है। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी से हमें पता चला कि इसे ‘कैलिफोर्निया सिख यूथ अलायंस’ नाम के एक ग्रुप ने बनाया है।

उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर भी बैनर का एक क्रॉप्ड वर्जन शेयर किया है। उनके अनुसार, वे अपने वार्षिक ‘सिख पावरलिफ्टिंग टूर्नामेंट’ में ऐसा बैनर वितरित करते हैं।

उनकी वेबसाइट के अनुसार, “कैलिफ़ोर्निया सिख यूथ एलायंस युवा सिखों का एक समूह है जो स्वयंसेवी अवसरों, मनोरंजन और सामुदायिक सेवा के माध्यम से लोगों से जुड़ने का प्रयास करता है। कैलिफ़ोर्निया सिख यूथ अलायंस का दावा है कि रचनात्मक खेल और मनोरंजन कार्यक्रमों के माध्यम से वे सिंह और कौर को बढ़ावा देने का काम करते हैं।”

इसमें आगे कहा गया है, “सीएसवाईए मूल रूप से दुनिया भर में सिख एथलीटों के लिए सिख धर्म पर आधारित मनोरंजक स्थान प्रदान करने में विश्वास करता है। सीएसवाईए ने सैकड़ों युवा सिंह और कौर को खेल और अन्य सामुदायिक निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़ा है।”

वेबसाइट में यह भी कहा गया है, “सीएसवाईए सीएसवाईए सेवादारों से बना है जो पूरे कैलिफोर्निया में इवेंट्स और चर्चाओं के आयोजन में मदद करते हैं। CSYA एंबेसडर ऐसे व्यक्ति होते हैं जो शीर्ष कंटेंट निर्माता और कलाकार होते हैं जो खेल और एथलेटिक्स के अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं।” ‘खालिस्तान ओलंपिक टीम’ का बैनर उनकी वेबसाइट पर प्रमुखता से दिखाई देता है।

समूह का आगे कहना है, “सीएसवाईए का लक्ष्य ऐसे प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है जिसमें युवा सिख अपनी महत्वाकांक्षाओं पर विजय प्राप्त कर सकें। सेवादारों को एक ऐसा वातावरण तैयार करने की उम्मीद है जहाँ कैलिफोर्निया के सिख एक साथ आ सकें और अपने समुदाय के साथ जश्न मना सकें। फंड रेजिंग, नेटवर्किंग, और युवा सिंह और कौर के बीच मेल-जोल की सुविधा हमारे कैलिफोर्निया समुदाय को दिन-ब-दिन मजबूत बनाती जा रही है।”

बता दें कि भारत की केंद्र सरकार के अनुरोध पर इस समूह के शुरुआती ट्विटर अकाउंट को भारत में ब्लॉक कर दिया गया था। यही सीएसवाईए गणतंत्र दिवस के दंगों के दौरान तोड़फोड़ और अराजकता में सबसे आगे था, जिसमें खालिस्तानियों की प्रमुख भूमिका नजर आई थी। इस मौके पर उन्होंने मिठाइयाँ बाँटकर जश्न भी मनाया था।

समूह ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा के साथ हुई बर्बरता की तस्वीरें भी साझा की थीं, जो उसका भी जश्न मना रही थी। CYSA के सदस्यों ने भी गाँधी प्रतिमा की स्थापना का विरोध किया था। सीवाईएसए ने यह भी कहा कि वे प्रतिमा की पुन: स्थापना के खिलाफ पैरवी करेंगे।