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‘हिंदू औरतों के जिस्म के हर छेद में इस्लाम का अजाब भर दिया जाएगा’ – आतंकियों को छोड़ने के लिए धमकी भरा लेटर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पुराने हनुमान मंदिर में एक संदिग्ध पत्र भेजा गया है, जिसमें 14 अगस्त के पहले गिरफ्तार किए गए अलकायदा के आतंकियों को छोड़ने की बात की गई है और ऐसा न करने पर प्राचीन मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। साथ ही पत्र में आरएसएस कार्यालय और वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।

शुक्रवार (30 जुलाई 2021) की शाम को लखनऊ के अलीगंज इलाके में पुराने हनुमान मंदिर में रजिस्टर्ड डाक से भेजा गया एक धमकी भरा पत्र पहुँचा। पत्र में लिखा हुआ है, ‘अल्लाह के पाक नाम पर काफिर हुकूमत के खिलाफ जिहाद का ऐलान’। पत्र में लखनऊ के काकोरी इलाके से गिरफ्तार किए गए अलकायदा समर्थित आतंकियों की रिहाई की बात कही गई है। पत्र में कहा गया है कि जिन मुजाहिदों को गिरफ्तार किया गया है, उनकी रिहाई के लिए 14 अगस्त तक का समय दिया जा रहा है। इस तारीख तक आतंकियों की रिहाई न होने पर लखनऊ के बड़े मंदिरों को निशाना बनाया जाएगा।

हनुमान मंदिर में भेजा गया धमकी भरा पत्र (फोटो: दैनिक जागरण)

इसके अलावा, पत्र में यह भी लिखा गया है कि जिहादियों के निशाने पर आरएसएस कार्यालय और 10 हिन्दू समाजसेवी भी हैं। इन सब के गले रेतने और हिन्दू महिलाओं के साथ अत्याचार करने की बात लिखी गई है। साथ ही पुलिसकर्मियों से भी हिसाब लिए जाने के बारे में कहा गया है। हनुमान मंदिर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अनिल तिवारी ने बताया कि पत्र मिलते ही इसकी सूचना पुलिस को दे दी गई। इसके बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए मंदिर में तलाशी अभियान शुरू की और मौके पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। धमकी की सूचना मिलते ही एटीएस समेत क्राइम ब्रांच भी जाँच में जुट गई है। पत्र भेजने वाले ने अपना नाम जोगिंदर सिंह लिखा है।

ज्ञात हो कि इस पत्र में जिन आतंकियों को रिहा करने की माँग की गई है, उन्हें लखनऊ के काकोरी इलाके से एटीएस के द्वारा 11 जुलाई 2021 को गिरफ्तार किया गया था। अलकायदा समर्थित अंसार गजवातुल हिंद से जुड़े इन आतंकियों के नाम मशीरुद्दीन उर्फ मुशीर और मिनहाज अहमद हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बताया था कि आतंकियों के मॉड्यूल के प्रमुख सदस्यों में मिनहाज, मशीरुद्दीन उर्फ मुशीर व शकील का नाम सामने आया है। ये सभी अलकायदा के निर्देश पर अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर 15 अगस्त से पहले मानव बम बनकर यूपी के लखनऊ समेत देश के विभिन्न शहरों के महत्वपूर्ण स्थानों, स्मारकों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने के ​तैयारी कर रहे थे। इसके लिए हथियार तथा विस्फोटक भी जमा कर लिया गया था।

पेगासस: ‘खोजी’ पत्रकारिता का भ्रमजाल, जबरन बयानबाजी और ‘टाइमिंग’- देश के खिलाफ हर मसाले का प्रयोग

सत्य के नाम पर असत्य का भ्रमजाल खड़ा कर देना आजकल एक चलन हो गया है। इसे लेकर जयशंकर प्रसाद ने ‘कामायनी’ में बड़ी सुन्दर पंक्तियाँ लिखी हैं:

“और सत्य! यह एक शब्द तू कितना गहन हुआ है?
मेधा के क्रीड़ा-पंजर का पाला हुआ सुआ है।
सब बातों में खोज तुम्हारी रट-सी लगी हुई है,
किन्तु स्पर्श से तर्क-करों के बनता ‘छुईमुई’ है।“

सरल शब्दों में कहा जाए तो प्रसाद जी ने लिखा है कि आजकल सत्य के नाम पर लोग शोर बहुत मचाते हैं। अपनी बुद्धि और शब्दों की कसरत से सत्य के नाम पर अनेक ‘खोज’ कर लेते हैं। लेकिन यथार्थ तो ये है कि ‘सत्य’ अब बुद्धि के भ्रम जाल का पाला हुआ तोता बन कर रह गया है। ये ‘बुद्धिशाली’ जन, तर्कों के सहारे जब भी अपनी बात को सच ठहराने की कोशिश करते हैं तब सत्य ‘छुईमुई’ बनकर गायब हो जाता है।

पेगासस कांड की खबर भी कुछ कुछ ऐसी ही लगती है। इस समाचार में तथ्य बहुत कम और होहल्ला बहुत ज्यादा है। इस समाचार को दुनिया भर में फैलाने वाले दावा कर रहे हैं कि इजरायल की कम्पनी एनएसओ के बनाए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर भारत सहित कोई 50 देशों ने अपने हज़ारों नागरिकों की गैरकानूनी तरीके से जासूसी की है। हमारा भी मानना है कि हमारी जैसी लोकतान्त्रिक व्यवस्था में किसी अवैध तरीके से नागरिकों की निजता का अतिक्रमण करने का किसी भी सरकार को कोई हक़ नहीं है। पर इस बात की परख राजनीतिक बयानबाजी और स्वार्थपरक होहल्ले से दूर होकर सिर्फ तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। 

आइए सिर्फ तथ्यों के आईने में पेगासस के सच को जानने की कोशिश करते हैं। यह खबर सबसे पहले पिछली 18 जुलाई 2021 को अमेरिका के अखबार ‘वाशिंगटन पोस्ट‘ में प्रकाशित हुई। इस खबर में दावा किया गया कि इजरायल के पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके 50 देशों के अंदर हजारों लोगों के फोन की निगरानी की गई। इस मूल खबर में भारत का भी जिक्र किया गया। यहाँ यह बताना जरूरी है कि 19 जुलाई 2021 को ही भारत में संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा था। 

ये मूल खबर थी जिसके आधार पर भारत सहित दुनिया में अनेकों समाचार विभिन्न जगहों पर बाद में प्रकाशित/प्रसारित हुए। इसमें बताया गया कि पेगासस सॉफ्टवेयर की फोन में घुसपैठ की जाँच के लिए लिए दुनिया भर में 65 स्मार्टफोन की जाँच की गई। इनमें से 30 फोन के बारे में जानकारी अपूर्ण रही यानी कुछ नहीं मिला। बाकी बचे 37 फोन में से 23 में पेगासस सॉफ्टवेयर पाया गया है और बाकी बचे 14 फोन में इस सॉफ्टवेयर को डालने की असफल कोशिश की गयी। इस पूरी खबर में इस बात का जिक्र नहीं किया गया है कि ये 67 फोन किस देश में थे और किन व्यक्तियों और संस्थाओं से सम्बंधित थे।

इस मूल समाचार में लिखा है,

“इस सूची से ये ज़ाहिर नहीं है कि किसने इसमें फोन नंबर जोड़े और क्यों जोड़े। यह भी ज्ञात नहीं है कि कितने फोन निशाना बनाए गए या उनकी निगरानी की गई। लेकिन 37 फोन की फॉरेन्सिक जाँच में पाया गया है कि सूची में नाम होने और कई फोन की टाइम स्टेम्प और उसकी निगरानी शुरू होने में गहरा सम्बन्ध है। कुछ में तो ये कुछ ही सेकंड रही।”

यानी स्वयं इस मूल खबर में ही 37 फोन नंबर को लेकर खासी ग़लतफ़हमी है। अब इन 37 में से 23 को लेकर ये खबर कहती है कि इनमें पेगासस सॉफ्टवेयर पाया गया। इनमें भी कई में कुछ सेकंड ही निगरानी पाई गयी। इस छोटी सी जानकारी के आधार पर दुनिया में 50 हज़ार फोन की पेगासस द्वारा निगरानी का एक बड़ा सा आँकड़ा इस खबर में पेश कर दिया गया। ये 50 हज़ार की सूची किसने दी, कहाँ से आई, किसने जाँच की – इस बारे ये और बाद में प्रसारित सभी खबरें मौन हैं। इसका कोई प्रमाण या तथ्य कहीं नहीं मिलता।

आप इस मसले से जुडी खबरें पढ़ लीजिए। कहीं भी कोई सूची ऐसी नहीं है जो प्रमाणिकता के साथ ताल ठोक कर कहती हो कि अमुक व्यक्ति के अमुक नंबर से जुड़े अमुक फोन में ये सॉफ्टवेयर डाला गया। टेक्नोलॉजी के इस युग में जहाँ हर फोन के आईईएमआई नंबर को जानना अब हर व्यक्ति के लिए संभव है, वहाँ सिर्फ हवा में बातें करने को खोजी पत्रकारिता मान लेना कुछ हास्यास्पद सा ही लगता है। दुनिया भर में कुल जमा 23 स्मार्टफोन में ‘संभावित निगरानी’ को लेकर ऐसा बड़ा हल्ला मचा दिया गया है, मानो 50 देशों की सरकारें पेगासस के ज़रिए बड़े पैमाने पर अपने नागरिकों की साइबर जासूसी में लगी हों।

खबर के मुताबिक इस ‘खोजी खबर’ को जुटाने में विश्व के 16 मीडिया संस्थानों ने मिलकर काम किया। ये बात कुछ असंगत और अजीब सी लगती है। इतने छोटे से तथ्य को पता लगाने के लिए इतने सारे संस्थान क्यों लगे? भारत में इस खबर पर कुछ जगह कुछ ज्यादा ही शोर हो रहा है। ऐसा कहा जा रहा है देश के हज़ारों नेताओं, पत्रकारों, अफसरों व अन्य नागरिकों के फोन में पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर की गैरकानूनी घुसपैठ कर दी गई है। वैसे गौर किया जाए तो पेगासस कांड में भारत को निशाना बनाए जाने की वजह इतनी छिपी हुई भी नहीं हैं।

खबर के मुताबिक इन 37 फोन की फोरेंसिक जाँच एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक लैब में की गई। ये अलग बात है बाद में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इसकी जाँच के कई पहलुओं से अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की। वैसे भी एमनेस्टी इंटरनेशनल का इतिहास और उसका नजरिया भारत को लेकर जगजाहिर है। भारत में उसके खिलाफ उसके संसाधन जुटाने के तरीकों पर बाकायदा कार्रवाई हुई है। अपनी अवैध प्रतिक्रियाओं के बाद उसको यहाँ अपनी दुकान बंद करने को विवश होना पड़ा। इसे लेकर मोदी सरकार से उसे खास खुन्नस है। इसलिए भारत सरकार पर एमनेस्टी और उसके समर्थकों के रवैए की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक ही है।

इसके अलावा पेरिस स्थित एक और संस्था इसकी जाँच में शामिल हुई। ‘फोर्बिडन स्टोरीज़’ नाम की ये संस्था मुख्यतः धनपति जॉर्ज सोरोस के संस्थान ‘ओपन सोसायटी फाउंडेशन’ की सहायता से चलती है। जॉर्ज सोरोस कश्मीर में धारा 370 समाप्त करने से लेकर नागरिकता कानूनों जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार की खुलकर आलोचना कर चुके हैं। वे सिर्फ आलोचना तक ही नहीं रुके हैं, बल्कि पिछले साल उन्होंने घोषणा की थी कि वे भारत जैसे देशों की अंदरूनी राजनीति को बदलने के लिए एक अरब डॉलर का फंड बनाएँगे। तो क्या एमनेस्टी और फोर्बिडन स्टोरीज़ दोनों ने ही मोदी सरकार से हिसाब चुकता करने के लिए पेगासस को औज़ार बनाया है?

इसलिए संसद के मानसून सत्र के ठीक एक रोज़ पहले इस खबर का अख़बारों में आना अगर एक संयोग भर है तो फिर ये बड़ा दिलचस्प संयोग ही है। इसकी टाइमिंग को लेकर एक बात और ध्यान रखने वाली है। देश में कोरोना की दूसरी लहर ढलान पर है। अगर केरल, महाराष्ट्र तथा एक दो अन्य राज्यों को छोड़ दिया जाए तो देश के बाकी हिस्सों में लोग दूसरी कोरोना लहर के तांडव के बाद थोड़ी राहत की साँस ले रहे है। जुलाई महीने के अंत तक कोई 46 करोड़ से अधिक भारतीय कोरोना के टीके का कम से कम एक डोज़ लगवा चुके हैं। आने वाले समय को लेकर देश में आशा के कुछ दीप तो जलने शुरू हो ही चुके हैं। भारत विरोधी ताकतें आशा की इन किरणों को निराशा के अँधियारे में बदलने को ज़रूर आतुर होंगी। पेगासस सॉफ्टवेयर की खबर को लेकर पाकिस्तान के मंत्रियों की अनाप-शनाप बयानबाजी क्या इस ओर इशारा करती नहीं दिखाई देती?

जिस रफ़्तार से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसकी जाँच के लिए एक समिति गठित कर दी और राहुल गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस ने संसद में होहल्ला करके काम रुकवा दिया वह इसके पीछे की राजनीतिक मंशा को भी रेखांकित करते हैं।

यहाँ यह कह देना भी समीचीन होगा कि सरकारों को यह अधिकार है कि वह देश के अंदर अपराधी तथा आतंकवादी गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए हर संभव आधुनिक तौर-तरीके अपनाएँ। इसके लिए इजरायल सहित किसी भी देश से आधुनिकतम तकनीक को लेना उसका दायित्व है। उसकी अपेक्षा ये देश सरकार से करता है। इसलिए अगर भारत सरकार ने इजरायल की कंपनी से कोई सॉफ्टवेयर लिया है। और, वह कानूनी प्रक्रिया के तहत कुछ फोन, सोशल मीडिया एकाउंट्स आदि पर निगाह रखती है या उनकी निगरानी करती है तो इसमें कुछ भी अन्यथा नहीं है। देश के आम नागरिकों की सुरक्षा, सीमाओं की रक्षा और राष्ट्र के दूरगामी आर्थिक-रणनीतिक हितों की रक्षा करना सरकार का वैधानिक दायित्व है। देश के कानूनों को धता बताने वाले ड्रग माफिया, आतंकवादियों, करचोरों तथा देश के अन्य दुश्मनों के साथ गठजोड़ रखने वाले हर व्यक्ति की निगरानी होनी ही चाहिए। फिर चाहे वह राजनेता हो, अफसर हो या फिर मीडिया कहलाने वाला कोई व्यक्ति या संस्था। देश, उसकी सुरक्षा और कानून से परे कोई भी नहीं हो सकता।  

कुल मिलाकर इस कथित खोजी खबर का जो गुब्बारा फुलाया गया वह इसे लिखने वाले पत्रकारों के मुताबिक कुल मिलाकर 23 स्मार्टफोन में पेगासस सॉफ्टवेयर पाए जाने के तथ्य को लेकर है। अब इन 23 फोन को लेकर भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में अनगिनत कहानियाँ फैला दी गई हैं। यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि जब आपके अपने कथन के अनुसार ही दुनिया भर में सिर्फ 23 फोनों की जाँच में पेगासस की निगरानी पाई गई तो फिर आप किस आधार पर कह सकते हैं कि भारत में ही हजारों लोगों की निगरानी हो रही है। कोई अगर ये भी बताता कि इन 23 में से अमुक संख्या भारत के नागरिकों की है तो भी इसमें कोई गंभीरता होती। बस सब कुछ राजनीतिक बयानबाजी पर चल रहा है। शायद इसी को कहते हैं, ‘सूत न कपास जुलाहे से लट्ठम लट्ठा’। 

याद रखिए सत्य को तर्क की आवश्यकता नहीं होती। वह स्वयं सिद्ध होता है। जब तथ्य नहीं होते हैं तो तर्क का भ्रम जाल और बयानबाजी का मकड़जाल बुना जाता है ताकि उसके पीछे के धुँधलके में किसी को कुछ दिखाई ही ना दें। पेगासस की गाथा भी कुछ ऐसी ही लगती है।

भगवा ध्वज के अपमान पर उठाई थी आवाज, सुदर्शन टीवी के संपादक सुरेश चव्हाणके के खिलाफ राजस्थान में FIR

राजस्थान आदिवासी मीणा सेवा संघ के सदस्य गिरिराज मीणा की शिकायत पर जयपुर पुलिस ने सुदर्शन टीवी के संपादक सुरेश चव्हाणके के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। उन पर आदिवासियों और मीणा समुदायों की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके खिलाफ शुक्रवार (30 जुलाई) को जयपुर के ट्रांसपोर्ट नगर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सुरेश चव्हाण पर साम्प्रदायिक घृणा फैलाने का आरोप

गिरिराज मीणा ने अपनी शिकायत में सुदर्शन टीवी के संपादक पर अमरगढ़ किले की घटना के बाद से अपने चैनल के माध्यम से भड़काऊ टिप्पणी करके आदिवासियों और मीणा समुदाय की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया। मीणा समुदाय द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया है, ”23 जुलाई की शाम को सुदर्शन टीवी पर सुरेश चव्हाणके ने पूरे आदिवासी समुदाय को गाली दी थी और एक साजिश के तहत ये धार्मिक उन्माद फैलाना चाहते हैं।” गिरिराज मीणा ने एफआईआर में आगे चव्हाणके पर सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित करने के लिए अराजकता और दंगे फैलाना का आरोप लगाया।

चव्हाणके ने ट्विटर पर कहा- वह 1 अगस्त को अमरगढ़ जाएँगे

एसीपी आदर्श नगर नील काम ने कहा, “इस मामले में एक एफआईआर दर्ज की गई है और चव्हाणके आरोपित हैं।” आईटी अधिनियम की धारा 67 के साथ आईपीसी की धारा 295 (किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को चोट पहुँचाना या अपवित्र करना) और 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके साथ ही एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराएँ भी लगाई गई हैं।

गौरतलब है कि जयपुर के अमरगढ़ किले में एक निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा द्वारा ‘जय श्री राम’ लिखा हुआ भगवा झंडा फाड़ने के बाद सुदर्शन टीवी के संपादक ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई थी और वहाँ पर जाने की कसम खाई थी। वह 1 अगस्त को जयपुर और अमरगढ़ किले का दौरा करेंगे। चव्हाणके के इस बयान पर मीणा-मुस्लिम समुदाय ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे ‘भड़काऊ’ बताया है।

सुरेश चव्हाणके ने एफआईआर पर प्रतिक्रिया दी

इस बीच, सुदर्शन टीवी के संपादक सुरेश चव्हाणके ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर की खबर को ट्विटर पर साझा किया है। चव्हाणके ने ट्वीट किया, “राजस्थान पुलिस ने मुझ पर SC-ST एक्ट के तहत FIR दर्ज की है, वह भी जो मैंने कहा ही नहीं।”

राजस्थान आदिवासी मीणा सेवा संघ को ‘टीपू सुल्तान की पार्टी’ के रूप में संदर्भित करते हुए चव्हाणके ने कहा कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार के इशारे पर काम कर रही स्थानीय पुलिस ने उनके खिलाफ ‘टीपू सुल्तान की पार्टी’ द्वारा फैलाई गई अफवाहों के आधार पर एफआईआर दर्ज की है।

उन्होंने आगे लिखा, ”देश #Arrest_Ramkesh_Meena कह रहा है, सरकार मुझ पर उल्टी कार्रवाई कर रही है। पर संघर्ष जारी रहेगा।”

अमरगढ़ किले की घटना

मालूम हो कि सोशल मीडिया पर 22 जुलाई को हुई उस घटना के वीडियो मौजूद हैं, जिनमें निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा के साथ भीड़ ने पहले जयपुर के अमरगढ़ किले के ऊपर फहराए गए झंडे को नीचे उतारा और फिर उसे फाड़ दिया। तभी मीणा समुदाय और हिंदू संगठनों के बीच विवाद शुरू हुआ था। कॉन्ग्रेस के विश्वासपात्र रामकेश मीणा की हरकत पर हिंदू संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने कॉन्ग्रेस भाई-बहन की जोड़ी पर हमला करते हुए इस वीडियो को शेयर करते हुए कहा था कि इस तरह की हरकतों को भुलाया नहीं जाएगा। वहीं, सुदर्शन टीवी के संपादक सुरेश चव्हाणके ने भी इस घृणित कृत्य का कड़ा विरोध किया था।

इस बीच, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने राजस्थान के अमरगढ़ किले की ओर जाने वाले पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। पुलिस ने बताया कि अमरगढ़ विवाद को लेकर अब तक तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिनकी जाँच जारी है। ऑपइंडिया ने भी पूरी घटना के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर पुलिस स्टेशन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

पिता ने उधार लेकर करवाई हॉकी की ट्रेनिंग, निधन के बाद अंतिम दर्शन भी छोड़ा: अब ओलंपिक में इतिहास रच दी श्रद्धांजलि

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने दक्षिण अफ्रीका को हरा कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसमें सबसे बड़ा योगदान रहा उत्तराखंड की रहने वाली वंदना कटारिया का, जिन्होंने एक के बाद एक लगातार तीन गोल दाग कर अपनी टीम को विजय दिलाई। ये कारनामा करने वाली वो पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी हैं। हॉकी इंडिया ने भी उन्हें बधाई दी है। उत्तराखंड में उनके घर पर जश्न का माहौल है।

देवभूमि हरिद्वार के रोशनाबाद से ताल्लुक रखने वाली वंदना कटारिया ने जब इस छोटे से गाँव में बचपन में हॉकी खेलना शुरू किया था, तब कई लोग उनका मजाक बनाते थे। उनके परिवार पर भी छींटाकशी करते थे। हरिद्वार भेल से सेवानिवृत्त के बाद वंदना के पिता ने दूध का कारोबार शुरू किया था। उन्होंने बेटी के सपने को पूरा करने में उसका साथ दिया। पिता नाहर सिंह और माता सोरण देवी हमेशा उनके साथ रहे।

अब वंदना के पिता इस दुनिया में नहीं हैं। इसी साल उनके पिता का निधन हुआ है, जब वो ओलंपिक की तैयारियों में व्यस्त थीं। इस कारण वो अपने पिता के निधन के बाद घर भी नहीं जा सकी थीं। 15 अप्रैल, 1992 को जन्मीं वंदना कटारिया ने पहली बार जूनियर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में 2006 में भाग लिया था। 2013 में वो देश में सबसे ज्यादा गोल करने वाली महिला खिलाड़ी थीं। जर्मनी में हुए जूनियर महिला विश्वकप में भी उन्हें मेडल मिला।

भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रहीं वंदना कटारिया के पिता का जब मई 2021 में निधन हुआ था, तब वो बेंगलुरु में ओलंपिक की तैयारियों में व्यस्त थीं। वो गाँव नहीं जा सकी थीं। अब उन्होंने हैट्रिक गोल लगा कर अपने दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि दी हैभारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रहीं वंदना कटारिया के पिता का जब मई 2021 में निधन हुआ था, तब वो बेंगलुरु में ओलंपिक की तैयारियों में व्यस्त थीं। वो गाँव नहीं जा सकी थीं।

अब उनके प्रदर्शन के बाद उनके गाँव में जश्न का माहौल है। ग्रामीण उनके घर जाकर शुभकामनाएँ दे रहे हैं। स्थानीय खेल अधिकारी भी बधाई दे रहे हैं। वंदना का सपना है कि वो अपने पिता के लिए ओलंपिक में मेडल जीतें। पिता के निधन की जब उन्हें खबर मिली थी, तब वो असमंजस में थीं कि पिता के सपने को पूरा करें या उनके अंतिम दर्शन के लिए घर जाएँ। लेकिन, उनकी माँ और भाई पंकज ने तब उनका साथ दिया।

वेदना कटारिया की माँ सोरणी देवी ने बेटी से कहा कि पहले वो अपने उद्देश्य को पूरा करे, जिसके लिए वो गई हैं। साथ ही कहा कि पिता का आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा। वंदना कटारिया के पिता की इच्छा थी कि भारतीय महिला हॉकी टीम ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते। बता दें कि वंदना ने प्रोफेशन हॉकी की शुरुआत मेरठ से की थी। वो लखनऊ स्पोर्ट्स हॉस्टल पहुँचीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अच्छी हॉकी स्टिक और किट नहीं खरीद पा रही थीं।

कई बार ऐसे मौके भी आए जब हॉस्टल में बाकी के खिलाड़ी तो घर चले जाते थे, लेकिन वो पैसे के अभाव में घर नहीं जा पाती थीं। कोच पूनम लता राज और विष्णुप्रकाश शर्मा ने उनकी काफी मदद की थी। वो पहले खो-खो खेलना चाहती थीं, लेकिन रनिंग स्पीड बेहतर होने के कारण हॉकी को चुना। 2005 में उनके पिता ने उधर लेकर बेटी के हॉकी प्रशिक्षण की व्यवस्था की थी। वो अपने 7 भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं।

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उनके 5 भाई-बहन खेल से ही जुड़े हैं। बड़ी बहन रीना कटारिया भोपाल एक्सीलेंसी में हॉकी कोच और छोटी बहन अंजलि कटारिया हॉकी खिलाड़ी हैं। भाई पंकज कराटे और सौरभ फुटबॉल खिलाड़ी एवं कोच हैं। 2010 में राष्ट्रीय हॉकी टीम में चुने जाने के बाद अगले ही साल स्पोर्टस कोटे से रेलवे में जूनियर TC पद पर उनकी जॉब लगी, तब जाकर आर्थिक तंगी कम हुई। अर्जेंटीना की लुसियाना आयमार को वो अपनी पसंदीदा खिलाड़ी मानती हैं।

यूपी गेट पर राकेश टिकैत करते रह गए इंतजार, बिना मिले ही बंगाल लौट गईं ममता बनर्जी

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत कार्यकर्ताओं के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इंतजार करते रहे, लेकिन वह कथित किसानों से मिलने प्रदर्शन स्थल नहीं पहुँची और अपना दिल्ली दौरा खत्म कर वापस पश्चिम बंगाल लौट गईं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के यूपी गेट पर पहुँचने की सूचना के बाद दिल्ली पुलिस के अधिकारी सुबह से ही सतर्क रहे। लोकल इंटेलिजेंस यूनिट की टीम, बम स्क्वॉयड और डॉग स्क्वॉयड आंदोलन स्थल की लगातार निगरानी करते रहे। हालाँकि, ममता का दौरा रद्द होने के बाद अधिकारियों ने राहत की साँस ली।

प्रदर्शन स्थल पर ममता बनर्जी के नहीं पहुँचने के क्या कारण रहा यह तो स्पष्ट हो पाया है, लेकिन इससे राकेश टिकैत को निराशा हाथ लगी है। इस बारे में जब राकेश टिकैत से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आने की कोई जानकारी नहीं थी। जब ममता बनर्जी राकेश टिकैत से नहीं मिलीं तो अपनी सफाई में उन्होंने कहा कि उन्हें मीडियाकर्मियों से उनके यहाँ आने की सूचना मिली थी। उनकी ओर से कोई न्योता नहीं था। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी किसान नेताओं से मिलने की इच्छुक नहीं थीं और ना ही उनके कार्यक्रम में ऐसा कोई प्लान था।

बता दें कि यूपी गेट पर बड़ी संख्या में किसान अपनी माँग को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। वहीं, विपक्षी दलों के नेता भी किसान आंदोलन को अपना समर्थन दे चुके हैं। ममता बनर्जी पिछले पाँच दिनों से दिल्ली दौरे पर थीं और विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात कर ऐंटी बीजेपी फ्रंट तैयार करने की कोशिश में जुटी थीं। चर्चा थी कि शुक्रवार (जुलाई 30, 2021) को ममता यूपी गेट पहुंँचकर बीकेयू नेता राकेश टिकैत से मुलाकात कर सकती हैं। जैसे ही यूपी गेट बॉर्डर पर ममता बनर्जी के आने की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को मिली तो कई सुरक्षा एजेंसी बॉर्डर पर अलर्ट हो गईं। हालाँकि, ममता बनर्जी किसानों से मिले बिना ही पश्चिम बंगाल रवाना हो गईं।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी की जीत के बाद राकेश टिकैत और कई किसान नेता बंगाल जाकर ममता बनर्जी से मुलाकात कर चुके हैं। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल चुनाव में कई किसान नेताओं ने ममता बनर्जी के पक्ष में प्रचार भी किया था। अलग-अलग समय पर किसान नेताओं से ममता बनर्जी फोन पर बात करती रहती हैं, लेकिन इस बार दिल्ली आने के बावजूद ममता बनर्जी किसानों और उनके नेताओं से मिलने नहीं पहुँचीं।

उल्लेखनीय है कि बंगाल चुनाव से पहले नरेश टिकैत ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को धमकी दी थी कि उसकी पार्टी के कैंडिडेट्स के ख़िलाफ़ किसान पश्चिम बंगाल की ओर कूच करेंगे। अयोध्या में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था, “हम भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार करेंगे। हम पश्चिम बंगाल के लोगों से भाजपा को छोड़कर किसी भी राजनीतिक दल को वोट देने का अनुरोध करेंगे, क्योंकि यह झूठे वादों पर चुनाव जीतते हैं।”

बता दें कि ममता बनर्जी ने 5 दिन के दौरे पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल सहित विपक्ष के कई नेताओं से मिलीं तो एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से फोन पर बात की। ममता ने विपक्षी नेताओं के साथ 2024 में बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए रणनीति बनाई। हालाँकि, उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी उन्होंने मुलाकात की।

‘सबको नहीं मारा, भाग्यशाली हैं… अब आए तो सबको मार देंगे’ – असम पुलिस को खुलेआम धमकी देने वाले मिजोरम सांसद दिल्ली से ‘गायब’

मिजोरम के सांसद के. वनलालवेना असम पुलिस को जान से मारने की धमकी देने के बाद से लापता हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, असम पुलिस दिल्ली में उनके आवास और मिजोरम हाउस भी गई, लेकिन वह कहीं भी नहीं मिले। दरअसल, असम पुलिस ने असम-मिजोरम अंतरराज्यीय सीमा पर हुई हिंसा की साजिश में कथित संलिप्तता को लेकर पूछताछ के लिए वनलालवेना को 2 अगस्त को ढोलाई पुलिस स्टेशन बुलाया है। ऐसे में उनका लापता होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

मी​डिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली आई असम पुलिस और सीआईडी की एक टीम वनलालवेना को ढूंढने उनके आवास और मिजोरम हाउस गई, लेकिन वह वहाँ नहीं मिले। ऐसे में माना जा रहा है कि वनलालवेना टीम से बच रहे हैं। वहीं, मिजोरम के रेजिडेंट कमिश्नर ने असम पुलिस की जाँच में शामिल होने के लिए वनलालवेना को दिए गए नोटिस को लेने से इनकार कर दिया, इसलिए असम पुलिस ने उनके आवास पर नया नोटिस चिपका दिया है।

नोटिस में कहा गया, ”पता चला है कि आपने घटना के संबंध में मीडिया में सिविल और पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाते हुए धमकी भरा बयान दिया है, जो जाँच का विषय है। इसलिए, तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए आपसे पूछताछ की जानी है।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, असम पुलिस और सीआईडी की एक टीम गुरुवार (29 जुलाई 2021) को दिल्ली पहुँची थी। उस दौरान उन्होंने मिजोरम के सांसद के. वनलालवेना के खिलाफ नोटिस जारी किया था। असम के स्पेशल डीजीपी जीपी सिंह ने कहा, ”असम पुलिस की एक टीम CID अधिकारियों के साथ असम-मिजोरम सीमा विवाद को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले सांसद वनलालवेना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए दिल्ली के लिए रवाना हो रही है।”

गौरतलब है कि संसद के बाहर वनलालवेना ने बुधवार (28 जुलाई) को कहा था, “200 से अधिक असम के पुलिसकर्मियों ने हमारे क्षेत्र में प्रवेश किया और उन्होंने हमारे पुलिसकर्मियों को हमारी ही चौकियों से पीछे धकेल दिया और हमसे पहले उन्होंने फायरिंग के आदेश दिए।” उन्होंने कहा था, ”वे भाग्यशाली हैं कि हमने उन सभी को नहीं मारा। यदि वे फिर आएँगे तो हम उन सबको मार डालेंगे।”

बता दें कि 26 जुलाई को मिजोरम पुलिस की ओर से असम के अधिकारियों की एक टीम पर की गई गोलीबारी में असम पुलिस के 5 जवान और एक आम व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके साथ ही एक पुलिस अधीक्षक सहित 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

‘वेब सीरीज में काम के बहाने बुलाया, 3 बौनों ने कपड़े उतार किया यौन शोषण’: गहना वशिष्ठ ने दायर की अग्रिम जमानत याचिका

विवादित अभिनेत्री वंदना तिवारी उर्फ़ गहना वशिष्ठ के खिलाफ मुंबई पुलिस ने 3 FIR दर्ज किए हैं। फरवरी 2021 में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। अब पोर्न फ़िल्में बना कर एप पर बेचने के मामले में गिरफ्तार राज कुंद्रा से भी उनके लिंक्स को लेकर आरोप लगे हैं। अब एक महिला ने खुद को गैंग रेप पीड़िता बताते हुए गहना वशिष्ठ पर गम्भीर आरोप लगाए हैं। गहना वशिष्ठ को पुलिस ने राज कुंद्रा पोर्न मामले में पूछताछ के लिए समन भी भेजा था। एक महिला ने उन पर यौन शोषण करवाने के आरोप भी लगाए थे।

हालाँकि, गहना वशिष्ठ ने खराब तबीयत की बात करते हुए मुंबई पुलिस के समक्ष पेश होने से इनकार कर दिया था। 27 जुलाई, 2021 को एक महिला ने गहना वशिष्ठ के खिलाफ नया केस दर्ज कराया है। इसमें उनके अलावा कुछ अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। वहीं जिस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था, उसमें भी एक महिला ने ही शिकायत दर्ज कराई थी। वेब सीरीज में काम के बहाने यौन शोषण करवाने के आरोप लगे थे।

मार्च में गहना वशिष्ठ की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी गई थी, लेकिन जून में वो जमानत पाने में कामयाब रही थीं। गहना वशिष्ठ ने अब अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। वहीं उनके वकील ने मुंबई पुलिस को ये तय करने की सलाह दी है कि गहना वशिष्ठ पोर्न मामले में गवाह हैं या फिर आरोपित। शिकायतकर्ता महिला ने बताया था कि वो 2016 से ही हिंदी और मराठी सीरियल्स में काम करती रही हैं।

इसी दौरान वो अजीत नाम के एक व्यक्ति के संपर्क में आईं, जो अभिनेता-अभिनेत्रियों को काम दिलाता था। उक्त महिला ने भी अजीत को अपनी प्रोफ़ाइल व तस्वीरें भेज कर वेब सीरीज में काम दिलाने के लिए कहा। अजीत ने नरेश और मिथुल नाम के दो व्यक्तियों ने उनका परिचय कराते हुए बताया कि ये कास्टिंग प्रोफेशनल्स हैं। वेब सीरीज में रोल दिलाने के लिए उन्हें महिला का नंबर दे दिया गया।

इन दोनों ने उक्त महिला को फोन कर के मड आइलैंड आने को कहा। उन्होंने बताया कि वहाँ एक वेब सीरीज की शूटिंग चल रही है। ‘रानी’ का किरदार निभाने का लालच देकर महिला को वहाँ स्थित एक बँगले में बुलाया गया। आरोप है कि ‘ग्रीन पार्क बंगलो’ में शूट हो रही इस फिल्म की डायरेक्टर-प्रोड्यूसर गहना वशिष्ठ थीं। महिला ने बताया कि शूटिंग के दौरान तीन बौनों ने उनके कपड़े हटा दिए और उनका यौन शोषण किया।

शिकायत करने पर गहना वशिष्ठ ने कहा कि उन्होंने शूट पर 10 लाख रुपए खर्च किए हैं, इसीलिए ये सब तो करना ही पड़ेगा। बाद में उस वीडियो को Nueflix पर अपलोड कर दिया गया, जिसके बाद महिला ने केस दर्ज कराया। बचाव में गहना वशिष्ठ के वकील का कहना है कि उनके मुवक्किल का कंटेंट एरॉट‍िक होता है, पोर्नोग्राफ‍िक नहीं। उन्होंने कहा कि महिलाएँ खुद अपनी तस्वीरें भेजती हैं और एग्रीमेंट के बाद ही शूटिंग होती है।

सूअरों की बलि से प्रदूषण, मानसिक शांति भंग… प्रतिबंध लगे: कट्टू नायक्कर समुदाय के हिंदू रीति-रिवाजों के खिलाफ मुस्लिम

डीएमके के सत्ता में आने के बाद से तमिलनाडु में हिंदुओं को अपने त्यौहार, रीति-रिवाजों को निभाने के अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। ताजा घटना पुदुकोट्टई जिले की है। बताया जा रहा है कि तमिलनाडु के पुदुकोट्टई जिले में मुस्लिमों ने हिंदुओं द्वारा सूअरों की बलि देने की परंपरा का कड़ा विरोध जताते हुए इस पर रोक लगाने की माँग की है।

हिंदू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना एक बड़े विवाद को जन्म दे सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तमिलनाडु के पुदुकोट्टई जिले के अरंथंगी शहर के मुस्लिमों ने हिंदुओं को अपने अनुष्ठानों में सूअरों को मारने को अपराध बताया है। उन्होंने हिंदुओं को इस तरह के अनुष्ठान करने से रोकने के लिए जिला प्रशासन से शिकायत भी दर्ज कराई है।

कथित तौर पर, कट्टू नायक्कर समुदाय मदुरै वीरन स्वामी की पूजा के रूप में सूअरों की बलि देता है, जो कि उनके कुल देवता हैं। वे आमतौर पर नगर कार्यालय और अरंथंगी में आँगनवाड़ी के पास सूअरों की बलि देते हैं।

हालाँकि, क्षेत्र के स्थानीय मुस्लिमों ने हिंदू रीति-रिवाजों के खिलाफ आपत्ति जताते हुए कहा है कि सार्वजनिक रूप से जानवरों के कत्ल करने से वातावरण प्रदूषित होता है और उनकी मानसिक शांति भी भंग होती है। मुहिदीन अंदावर जमात (Muhideen Andavar Jamat) के प्रमुख ने स्थानीय अधिकारियों से सूअरों के वध पर प्रतिबंध लगाने की माँग की है।

इस इलाके के मुस्लिम हिंदुओं द्वारा सूअरों की बलि देने के विरोध में हैं, इसलिए यहाँ स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। स्थानीय पुलिस और राजस्व मंडल अधिकारी ने इस मामले को सुलझाने के लिए शांति बैठक की। हालाँकि, शांति बैठक को लेकर आरडीओ (RDO) की ओर से भेजा गया नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है , जिससे लोगों में आक्रोश पैदा हो गया।

सोशल मीडिया यूजर्स ने मुस्लिमों की इस कट्टरता को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम अपने त्यौहारों के दौरान सड़कों पर लाखों बेजुबान जानवरों का कत्ल करते हैं, जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है। वहीं, अगर हिंदू इस तरह के धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, तो वे इसका विरोध करते हैं। दरअसल, बकरीद अभी एक हफ्ते पहले ही मनाई गई थी, तब मुस्लिमों ने लाखों जानवरों की कुर्बानी दी थी।

माँ का किडनी ट्रांसप्लांट, खुद की कोरोना से लड़ाई: संघर्ष से भरा लवलीना का जीवन, ₹2500/माह में पिता चलाते थे 3 बेटियों का परिवार

भारत की बेटी लवलीना बोरगोहेन ने जापान की राजधानी टोक्यो में चल रहे ओलंपिक के खेलों के लिए अपना मेडल पक्का कर लिया है। उनकी कहानी बड़ी भरी रही है। वो असम के गोलाघाट स्थित एक छोटे से गाँव की रहने वाली हैं। पिछले मैच में जब उन्हें जीत मिली थी और मेडल पक्का हुआ था, तब उनके पिता टिकेन बोरगोहेन के दरवाजे पर भले ही पूरे ग्रामीणों की भीड़ लगी थी, लेकिन वो खुद टहलने निकल गए थे।

जब बेटी का ओलंपिक मेडल पक्का होने की खबर सुन ली, तब जाकर वो वापस आए। उनका कहना था कि कहीं उनके वहाँ रहने से वो हार जातीं तो? लवलीना बोरगोहेन (69 किलोग्राम) ने पूर्व चैंपियन निएन चिन चेन को हराया। इसके साथ ही वो टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुँच गईं। ऐसे करने वाली वो तीसरी भारतीय महिला बॉक्सर हैं। इससे पहले 2008 में विजेंद्र सिंह और 2012 में मैरी कॉम ने ये कारनामा किया था।

एक और बात जानने लायक है कि ये साल भी लवलीना बोरगोहेन के लिए काफी संघर्ष भरा रहा है। इसी साल लवलीना की माँ मैमोनी बोरगोहेन का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। डॉक्टरों ने बताया था कि उनकी दोनों किडनियाँ काम करने लायक नहीं बची हैं। इसके बाद लवलीना ने खुद डोनर खोजा था और अपनी कैश प्राइज से माँ का इलाज कराया। इस दौरान वो प्रैक्टिस भी करतीं और अस्पताल में माँ की सेवा भी। किडनी ट्रांसप्लांट में 25 लाख रुपए लग गए थे

अस्पताल में समय व्यतीत करने के कारण उन्हें कोरोना वायरस संक्रमण ने भी अपनी चपेट में ले लिया था। इसी बीच उन्हें 52 सदस्यीय दल के साथ ओलंपिक गेम्स की ट्रेनिंग के लिए यूरोप भी जाना था। कोरोना ने दुनिया भर में जैसा आतंक मचाया, भारत में भी उसका असर देखने को मिला। बॉक्सरों को प्रैक्टिस के लिए समय नहीं मिल पाया, इसीलिए ये ट्रेनिंग कैम्प ज़रूरी था। सरकार ने लवलीना बोरगोहेन की मदद की और असम में उनके लिए एक व्यक्तिगत ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया।

लेकिन, तब भी अपने बाकी साथियों से दूर रह कर मेहनत करना उनके लिए कठिन था। पिछले महीने हुए एशियन चैम्पियनशिप में इसका असर भी देखने को मिला, जब उन्हें पहले ही मुकाबले में हार मिली थी मिली थी। लेकिन, एक कठिन ड्रॉ के बाद वो रजत पदक जीतने में कामयाब रही थीं। उनके पिता का कहना है कि लोग कहते हैं कि लड़के अपने माता-पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हैं, लेकिन तीन बेटियों के पिता होकर उन्हें एहसास हुआ है कि लड़कियाँ किसी से कम नहीं हैं।

उन्होंने बताया कि जब माँ का किडनी फेलियर हुआ था, तब लवलीना रात-रात भर जगी रहती थीं। वो चट्टान की भाँति अपनी माँ के साथ खड़ी थीं। तभी तो उनके पिता उन्हें परिवार की रीढ़ की हड्डी बताते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी को दूसरा जीवन मिला है बेटी को ओलंपिक में मेडल मिलने की खबर से वो और तेज़ी से ठीक होंगी। लवलीना बोरगोहेन के पिता गाँव के ही एक चाय बागान में काम करते थे।

लवलीना की दोनों बहनें लीचा और लीमा भी किक बॉक्सर्स हैं। कम संसाधन होने के बावजूद माता-पिता तीनों बेटियों को खेल के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए पूरा प्रोत्साहन देते रहे हैं। तीनों बेटियों के सपने को पूरा करने के लिए माँ स्थानीय कोऑपरेटिव से लोन लिया करती थीं। अब टिकेन के पास एक छोटा सा चाय का बागान भी है। लेकिन, कभी वो मात्र 2500 रुपए का महीना ही कमाते थे। उन्होंने कहा कि फिर भी वो कभी रुपयों की कमी को बेटियों के करियर के आड़े नहीं आने देना चाहते थे।

23 साल की लवलीना बोरगोहेन के गाँव का नाम बारोमुखिया है। जब उनकी माँ बीमार हुई थीं, तब वो आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टिट्यूट में प्रशिक्षण ले रही थीं। अपनी बीमार माँ के साथ उसी समय उन्होंने अंतिम बार समय बिताया था, क्योंकि तब से अब तक उन्हें घर जाने की फुरसत ही नहीं मिली है। लवलीना अब तक कई अंतरराष्ट्रीय मेडल जीत चुकी हैं। वो सब-जूनियर नेशनल चैंपियन भी रही हैं। 2016 में वो 75 किलोग्राम सीनियर कैटेगरी में आई थीं।

ममता बनर्जी दिल्ली में बना रहीं ‘रास्ता’… बंगाल में उनके 2 विधायक कर रहे हड्डियाँ तोड़ने और मगरमच्छ की बात

पश्चिम बंगाल की तृणमूल कॉन्ग्रेस में अंतर्कलह शुरू हो गई है। मुर्शिदाबाद जिले में शुक्रवार (30 जुलाई) को पार्टी के विधायकों के बीच कलह खुलकर सामने आई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वायरल वीडियो में भरतपुर से तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर पार्टी के एक कार्यक्रम में अन्य विधायक को यह धमकी देते दिखाई दे रहे हैं कि अगर रास्ते में आने की कोशिश की तो हड्डियाँ तोड़ दूँगा। बताया जा रहा है कि हुमायूं कबीर जिले के वरिष्ठ नेता हैं और इससे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी में भी रह चुके हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कबीर ने कहा, ”रेजीनगर विधायक रबीउल आलम चौधरी बहुत घमंडी हो गए हैं। अगर आप मेरे रास्ते में आने की कोशिश करेंगे तो मैं आपको सबक सिखाऊँगा, मैं आपकी हड्डियाँ तोड़ दूँगा।” कबीर ने यह भी कहा, “आप और मैं दोनों एक ही पार्टी से जुड़े हुए हैं। अगर आप पानी में रहते हैं तो मगरमच्छ से लड़ने की हिम्मत न करें।”

इसको लेकर तृणमूल कॉन्ग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधायक हुमायूं कबीर को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। चटर्जी ने मीडियाकर्मियों को बताया, “पार्टी में अन्य विधायकों के बारे में उन्होंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया है, वह उचित नहीं है। उन्होंने रेजिनगर के विधायक रबीउल आलम चौधरी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया है। पार्टी को यह मंजूर नहीं है।”

उन्होंने कहा कि कबीर को नोटिस का जल्द से जल्द जवाब देने को कहा गया है। वहीं, रबीउल ने भी पार्टी के शीर्ष नेताओं से न्याय की माँग की है। चौधरी ने कहा, “मैंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सूचित कर दिया है, अब इस मामले पर क्या कार्रवाई करनी है, ये उन्हें तय करना है।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी की कलह को दूर करने की बजाए इन दिनों जावेद अख्तर, शबाना आजमी व अन्य लोगों से मुलाकात कर रही हैं। उन्होंने हाल ही में कहा कि बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दलों को फिर से एकजुट होकर एक मजबूत ताकत के रूप में लड़ना होगा। उन्होंने कहा, “बीजेपी को हराने के लिए सभी का साथ आना जरूरी है… अकेले, मैं कुछ भी नहीं हूँ, सबको मिलकर काम करना होगा। मैं नेता नहीं हूँ, मैं एक कैडर हूँ। सोनिया गाँधी भी विपक्ष की एकता चाहती हैं। कॉन्ग्रेस को क्षेत्रीय दलों पर और क्षेत्रीय दलों को कॉन्ग्रेस पर भरोसा है।”