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ये नंगे, इनके हाथ अपराध में सने, फिर भी शर्म इन्हें आती नहीं… क्योंकि ये है बॉलीवुड

छत्तीसगढ़ का एक जिला है कोरिया। इसी जिले में एक जगह है चिरमिरी, जो कोयला खदानों के कारण विशेष पहचान रखता है। राजधानी रायपुर से चिरमिरी की दूरी करीब 300 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से इस यात्रा को पूरे करने में छह घंटे के करीब लगते हैं।

2018 के विधानसभा चुनावों से पहले जब मैं रायपुर से चिरमिरी के लिए निकला था तो शुरुआत में सब कुछ दुरुस्त ही लगा था। लेकिन चिरमिरी में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह को पानी की समस्या, उनके आगमन से पहले सड़कों के गड्ढे भरे जाने जैसे सवालों से जूझते देखा तो यह भ्रम टूटा कि दिल्ली के वातानुकूलित दफ्तर में बैठ छत्तीसगढ़ में विकास का जो अनुमान लगाया जाता है, जमीनी हकीकत उससे इतर है।

दिलचस्प यह था कि रमन सिंंह ने ऐसे किसी भी सवाल को खारिज नहीं किया था, बल्कि कहा था कि वे समस्याओं को ही जानने निकले हैं। इस यात्रा ने जिन निष्कर्षों तक पहुँचाया, चुनावी नतीजे आने के बाद वे सही साबित हुए और ‘चाउर वाले बाबा’ के नाम से मशहूर रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा की बुरी हार हुई थी।

इसी चिरमिरी से आती हैं वंदना तिवारी। जिन्हें आज आप गहना वशिष्ठ के नाम से जानते हैं। पोर्न रैकेट मामले में राज कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद से वे लगातार चर्चा में हैं। हालाँकि उनकी गिरफ्तारी कुंद्रा से पहले हो चुकी थी और अभी वे जमानत पर हैं। वंदना उर्फ गहना के चिरमिरी लिंक को लेकर नई दुनिया और दैनिक भास्कर ने हाल ही में स्टोरी की है। बताया है कि कैसे वह बचपन में मेधावी छात्रा थीं। इंजीनयरिंग करते-करते मॉडलिंग करने लगीं। फिर क्या-क्या करने लगीं वो अब आपके सामने है।

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर बॉलीवुड के गटर पर से पर्दा उठा दिया है। बीते साल सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद इसी समय इंडस्ट्री की ऐसी ही कई नग्न परतें खुलकर सामने आई थी। अमूमन बॉलीवुड की चकाचौंध के पीछे छिपी नग्न सच्चाइयाँ तभी सामने आती हैं, जब पीड़ित/आरोपित आउटसाइडर होते हैं। लेकिन उससे भी शर्मनाक यह है कि देश-दुनिया की हर फटी में टाँग घुसेड़ने वाली बॉलीवुड की जमात अपनों की करतूतों पर अजीब तरह की खामोशी ओढ़ लेती है।

चिरमिरी में बैठ गहना ने मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री को वैसे ही जाना होगा, जैसे मैं दिल्ली में बैठ छत्तीसगढ़ के विकास को समझ रहा था। जिस तरह चिरमिरी की धरती पर मेरा जमीन से साक्षात्कार हुआ था, वैसे ही गहना जैसों का मुंबई पहुँच एक अलग हकीकत से साक्षात्कार होता होगा। फिर इनमें से कुछ उसका हिस्सा बन जाती हैं और कुछेक जो ऐसा नहीं कर पाते उनके साथ दिव्या भारती या सुशांत सिंह राजपूत जैसी अनहोनी हो जाती है। पिछले साल हमने सुशांत के मामले में न्याय को लेकर जिस तरह का शोर सुना था, कुछ-कुछ वैसा ही सोशल मीडिया के न रहते हुए भी दिव्या भारती के मामले में भी हुआ था। अफसोस इसके बावजूद ऐसा कोई भी मामला आज तक अपनी मंजिल पर नहीं पहुँच पाया।

संजय दत्त से लेकर सलमान खान तक कई मामले हैं, जिन्होंने सिस्टम पर आम आदमी के भरोसे को डगमगाने का काम किया है। ऐसे किसी भी मामले में आम आदमी का भरोसा बहाल करने के लिए कभी सिस्टम ने सक्रियता नहीं दिखाई, पर याद कीजिए विदेशी एयरपोर्ट पर एक सितारे को रोके जाने के बाद कैसे उस समय की सरकार सक्रिय हो गई थी।

यह वह बॉलीवुड है जो अपनी हिंदूफोबिया और पिछले कुछ सालों से मोदीफोबिया भी, को बोलने की आजादी बताता है। पर अपनी ही इंडस्ट्री के गुनाहों को निजी बता बोलने से कन्नी काट जाता है। यहाँ तक कि आवाजों को खामोश कराने के लिए निजता का हनन और मानहानि जैसे तर्कों के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाने से भी परहेज नहीं करता। राज कुंद्रा प्रकरण में शिल्पा शेट्टी का पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट जाना इसी कड़ी का हिस्सा था। अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को सार्वजनिक मंचों पर बेचकर खुद की ब्रांड वैल्यू बनाने वाला यह जमात नग्नता के सामने आते ही आखिर निजता का ढाल क्यों ले लेता है? उसके इस खेल में मीडिया का भी एक वर्ग कैसे शामिल हो जाता है? जैसे रिया चकवर्ती के मामले में हमने राजदीप सरदेसाई को करते देखा था। सिस्टम अमूमन इनके मामलों में वैसी ही तत्परता क्यों नहीं दिखा पाता है, जैसे हमारे-आपके घर से एके 47 मिलने पर वह दिखाएगा?

इन सवालों के जवाब मिलने ही चाहिए, क्योंकि हमें सपने दिखाने के नाम पर ही ये स्विट्जरलैंड की वादियों में सिफॉन की साड़ी में अभिनेत्रियों को नचाते हैं। हमारी गाढ़ी कमाई से खर्च किए गए पैसे से ये स्टार का स्टेटस हासिल करते हैं। यह दूसरी बात है कि हम अपनी प्रेमिका/पत्नी के साथ स्विट्जरलैंड तो दूर गाँव के अपने ही सरसों के खेत में कभी सपनों में भी नृत्य नहीं कर पाते! अपनी गाढ़ी कमाई इन कथित सपनों को पूरा करने पर लुटाने का साहस नहीं जुटा पाते हैं!

असल में बॉलीवुड जो कुछ भी समाज की हकीकत, मध्यमवर्ग के सपने बताकर बेचता है, दरअसल यह खुद उसके भीतर का सत्य है। हिंसा, अकाल मौत, ड्रग्स, अंडरवर्ल्ड समेत तमाम गोरखधंधे इस इंडस्ट्री के हिस्सा हैं। हिंदूफोबिया इनमें कितनी कूट-कूटकर भरी है, इसे @GemsOfBollywood जैसे ट्विटर हैंडल लगातार बेनकाब करते रहते हैं। अब वक्त इस इंडस्ट्री की सफाई का है। वरना कहने वाले तो कहते ही हैं कि मुंबई पुलिस के सालाना जलसे में बॉलीवुड का जमावड़ा ही इसलिए लगता है कि मुश्किल वक्त ‘कानून’ काम आए।

बंगाल में मारे जा रहे BJP कार्यकर्ताओं के समय ‘कार पर हमला’ से लेकर ‘बाबुल की विदाई’ तक: सोशल मीडिया पर लोग ऐसे कर रहे याद

पूर्व केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से दूसरी बार BJP सांसद बाबुल सुप्रियो ने राजनीति से संन्यास ले लिया है। उन्होंने शनिवार (जुलाई 31, 2021) को सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर राजनीति छोड़ने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वो 1 महीने के अंदर सांसद के पद से इस्तीफा देकर सरकारी आवास खाली कर देंगे। 

पिछले कुछ दिनों से उनके राजनीति से संन्यास लेने के कयास लगाए जा रहे थे। वे सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट लिख ये इशारा कर रहे थे। बाबुल सुप्रियो ने अपने फेसबुक अकाउंट पर बांग्ला में राजनीति से संन्यास का ऐलान किया है। सुप्रियो के संन्यास लेने की घोषणा के साथ ही सोशल मीडिया पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ आ रही है।

एक सोशल मीडिया यूजर ने इस पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “असली जिंदगी में ‘बाबुल की विदाई’, क्योंकि बाबुल सुप्रियो ने राजनीति छोड़ दिया।”

वहीं एक अन्य ने लिखा, “ऐसे लोगो के भरोसे बंगाल जितने चले थे….और वर्षो से त्याग भावना के साथ काम कर रहे कार्यकर्ताओं को उपेक्षित किया था…..भुगतो अब…. ये लोग सिर्फ सत्ता की लालसा के कारण पार्टी में थे….कोई विचारधारा नहीं होती इन लोगो की।”

एक ने लिखा, “जा जाधवपुर यूनिवर्सिटी में घुस कर मारपीट और चप्पल खा कर डूबो चुल्लू भर पानी में।”

एक अन्य ने लिखा, “बताओ यार, एक तो बंगाल की एक यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बाबुल सुप्रियो को बर्तनों की तरह धोया और अब ऊपर से बीजेपी ने ऐसी लात मारी कि बेचारे को राजनीति ही छोड़नी पड़ गई। बेचारा न घर का रहा न घाट का। बड़ा बे आबरू होकर नरेंद्र मोदी के कूचे से ये निकला।”

एक यूजर ने लिखा, “बेचारे बाबुल सुप्रियो को अपनी कार की इतनी चिंता है कि राजनीति से ही संन्यास ले लिया। देखते जाइए साल भर के भीतर ये TMC में होगा।”

अन्य सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “बाबुल की दुआएँ लेती जा, जा तेरी संसार बसे।”

बाबुल सुप्रियो ने संन्यास की घोषणा करते हुए लिखा कि उन्होंने सब की बातें सुनीं – माता-पिता, पत्नी, बेटी और दोस्तों की। उन्होंने आश्वासन दिया कि वो सब सुन कर कहते हैं कि वो किसी और पार्टी में नहीं जा रहे। उन्होंने कहा कि वो तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC), कॉन्ग्रेस या CPI(M) में नहीं जा रहे, कहीं नहीं। उन्होंने बताया कि किसी ने उन्हें फोन नहीं किया। उन्होंने कहा कि वो एक टीम के खिलाड़ी हैं और हमेशा एक टीम का समर्थन करते हैं।

‘मुुस्लिम महिला अधिकार दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा 1 अगस्त: इसी दिन तीन तलाक घोषित हुआ था कानूनन अपराध

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने शनिवार (जुलाई 31, 2021) को कहा कि ‘तीन तलाक’ (तलाक-ए-बिद्दत) विरोधी कानून बनने के बाद तीन तलाक के मामलों में कमी आई है और मुस्लिम महिलाओं का संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकार सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून के अस्तित्व में आने वाले दिन एक अगस्त को ‘मुस्लिम महिला अधिकार दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा और इस मौके पर कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, जुलाई 2019 में संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस विधेयक को एक अगस्त 2019 को मंजूरी दी थी और इसी के साथ यह कानून अस्तित्व में आ गया था।

नकवी ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 1 अगस्त 2019 के दिन ‘तीन तलाक’ को कानूनी अपराध घोषित किया था। ‘तीन तलाक’ को कानूनी अपराध बनाए जाने के बाद इस तरह के मामलों में बड़े पैमाने पर कमी आई है। देश भर की मुस्लिम महिलाओं ने इसका स्वागत किया है।’’

नई दिल्ली में एक अगस्त को ‘मुस्लिम महिला अधिकार दिवस’ पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री नकवी और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव उपस्थित रहेंगे।

नकवी ने कहा, “तीन तलाक” को कानूनन अपराध बना कर मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के ‘आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान, आत्मविश्वास’ को पुख्ता कर उनके संवैधानिक-मौलिक-लोकतांत्रिक एवं समानता के अधिकारों को सुनिश्चित किया है।

गौरतलब है कि लोकसभा में 25 जुलाई 2019 को दिन भर चली चर्चा के बाद बहुप्रतिक्षित मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक यानी तीन तलाक पर रोक सम्बन्धी बिल पास हो गया। मत विभाजन के दौरान पक्ष में 303 और विपक्ष में 82 वोट पड़े। बिल में संशोधन के लिए विपक्षी दलों के तरफ से लाए गए प्रस्ताव भी ख़ारिज हो गए।

कॉन्ग्रेस, डीएमके, एनसीपी समेत कई विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया जबकि टीएमसी और सरकार की सहयोगी जेडीयू ने सदन से वॉक आउट कर दिया। इससे पहले फरवरी में भी लोकसभा में बिल को मंजूरी मिल गई थी, लेकिन राज्यसभा ने इसे मंजूरी नहीं दी थी। सत्ता मैं लौटने के बाद सरकार ने विधेयक को दोबारा लोकसभा में पेश किया था। 

‘द प्रिंट’ ने डाला वामपंथी सरकार की नाकामी पर पर्दा: यूपी-बिहार की तुलना में केरल-महाराष्ट्र को साबित किया कोविड प्रबंधन का ‘सुपर हीरो’

इस समय देश भर में कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक मामले केरल से सामने आ रहे हैं। देश के अन्य राज्यों की तुलना में यहाँ हर रोज कोरोना के रिकॉर्ड मामले सामने आने के बाद भी अधिकांश लेफ्ट-लिबरल चुप्पी साधे हुए हैं। हालाँकि, उनमें से कुछ तथा​कथित बुद्धिजीवी कम्युनिस्ट शासित राज्य का बचाव करने के लिए आगे आए हैं। ‘द प्रिंट’ उन्हीं में से एक है, जो गलत तरीके से सीरो सर्वेक्षण के आँकड़ों का उपयोग करता है यह दावा करने के लिए कि अन्य राज्यों में कोविड-19 के मामले कम बताए जा रहे हैं। ‘द प्रिंट’ ने 30 जुलाई को तथ्यों से परे ऐसे ही विश्लेषण का इस्तेमाल करते हुए एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि अन्य राज्य कोरोना के नए मामलों को छिपा रहे हैं।

प्रिंट की पत्रकार अबंतिका घोष ने एक तथाकथित ‘स्वास्थ्य अर्थशास्त्री’ रिजो जॉन (Rijo John) के ट्वीट को आधार बनाते हुए अपना लेख लिखा और इसमें उन्होंने दावा किया कि आईसीएमआर द्वारा किए गए ताजा सीरो सर्वे के परिणाम इस बात को साबित भी करते हैं। जॉन के अनुसार, बिहार ने 134 में से केवल 1 मामलों का पता लगाया, यूपी ने 100 में से 1 का पता लगाया, लेकिन केरल ने 6 कोविड-19 मामलों में से 1 का पता लगाया। कोरोना से बुरी तरह प्रभावित एक और राज्य महाराष्ट्र, प्रिंट के लेख के अनुसार 12 मामलों में से 1 की रिपोर्ट कर रहा है। इस तरह पूरे भारत में यह आँकड़ा 33 में से 1 का है।

इस प्रकार, लेख में दावा किया गया है कि पूरे देश में मामलों की कम रिपोर्टिंग की जा रही है, लेकिन बिहार और यूपी जैसे राज्यों में यह कुछ अधिक ही है, जहाँ प्रति दिन आने वाले मामले 100 से भी कम हो गए हैं। प्रिंट ने दावा किया है कि केरल में मामले अधिक हैं, क्योंकि वहाँ नए मामलों को छिपाया नहीं जा रहा है। लेख में ‘वास्तविक संख्या’ की गणना करने के लिए कथित छिपाए गए कारकों को राज्य-वार कोविड-19 संक्रमणों की आधिकारिक संख्या के साथ गुणा किया गया है।

इस गणना के अनुसार, मई 2021 तक देश में वास्तविक कोरोना संक्रमितों की संख्या 92.65 करोड़ थी, ना कि उस समय के आधिकारिक संख्या के अनुसार 2.82 करोड़ थी। इस गणना के तहत राज्यों का आँकड़ा बेहद अधिक था। जैसे यूपी में 16.89 करोड़, बिहार में 9.47 करोड़, मध्य प्रदेश में 6.74 करोड़, राजस्थान में 6.17 करोड़, गुजरात में 4.81 करोड़, पश्चिम बंगाल में 6.07 करोड़ आदि। इस गणना के तहत केरल और महाराष्ट्र में मामले क्रमशः 1.59 करोड़ और 7.14 करोड़ हैं। जॉन का दावा है कि इन दोनों राज्यों यानी केरल और महाराष्ट्र पर इसलिए सवाल उठाए जाते हैं, क्योंकि वे कोविड-19 मामलों का बेहतर तरीके से पता लगा रहे हैं।

गौरतलब है कि सीरो सर्वे संख्या वास्तव में आईसीएमआर द्वारा National Sero-Prevalence Survey के चौथे सर्वेक्षण पर आधारित है। दरअसल, इस तरह से संक्रमण की ‘वास्तविक’ संख्या की गणना करना बेहद मुश्किल है। sero prevalence survey एक नमूना सर्वेक्षण है, जो कोविड-19 एंटीबॉडी वाले लोगों के अनुमानित प्रतिशत को मापता है, जबकि रिपोर्ट की गई कोविड-19 संख्या लोगों की जाँच की कुल संख्या पर आधारित होती है। सर्वेक्षणों से अनुमानित संख्याओं का वास्तविक परिणाम हमेशा त्रुटिपूर्ण होता है, क्योंकि ये सटीक नहीं होते हैं।

‘बंगाल में लंबा रास्ता तय करेगी BJP, मैं हमेशा रहूँगा समर्थक’: बाबुल सुप्रियो ने राजनीति को कहा – अलविदा

भाजपा नेता बाबुल सुप्रियो ने कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया के जरिए राजनीति छोड़ने का इशारा किया था। उनके खुद के ही फेसबुक पोस्ट की मानें तो पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की है। वो पश्चिम बंगाल के आसनसोल से लगातार दूसरी बार सांसद हैं। बाबुल सुप्रियो ने फेसबुक के जरिए लिखा ‘अलविदा’। इस दौरान उन्होंने आश्वासन दिया कि वो किसी और पार्टी में नहीं जा रहे।

बाबुल सुप्रियो ने लिखा कि उन्होंने सब की बातें सुनीं – माता-पिता, पत्नी, बेटी और दोस्तों की। उन्होंने आश्वासन दिया कि वो सब सुन कर कहते हैं कि वो किसी और पार्टी में नहीं जा रहे। उन्होंने कहा कि वो तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC), कॉन्ग्रेस या CPI(M) में नहीं जा रहे, कहीं नहीं। उन्होंने बताया कि किसी ने उन्हें फोन नहीं किया। उन्होंने कहा कि वो एक टीम के खिलाड़ी हैं और हमेशा एक टीम का समर्थन करते हैं।

उदाहरण के रूप में गिनाते हुए उन्होंने कहा कि फुटबॉल में वो सिर्फ क्लब ‘मोहन बागान’ का समर्थन करते हैं और राजनीति में सिर्फ भाजपा की। उन्होंने कहा कि अगर सामाजिक कार्य करना है तो बिना राजनीति के भी कर सकते हैं। साथ ही थोड़ा पहले खुद को थोड़ा संगठित करने की भी बात की। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताते हुए कहा कि वो उनके प्यार को कभी नहीं भूलेंगे।

बाबुल सुप्रियो ने फेसबुक पोस्ट लिख राजनीति को कहा अलविदा

बाबुल सुप्रियो ने भाजपा के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि आज बंगाल में भाजपा मुख्य विपक्षी दल है। उन्होंने कहा कि आज पार्टी में कई नए चमकीले युवा तुर्क नेता भी हैं और कई पुराने भी हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि उनके नेतृत्व में पार्टी यहाँ से एक लंबा सफर तय करेगी। बाबुल सुप्रियो ने ये भी कहा कि पार्टी में कुछ आंतरिक मुद्दे थे और नेताओं के बीच थोड़े-बहुत मतभेद थे।

51 वर्षीय बाबुल सुप्रियो गायक भी रहे हैं। 90 के दशक के मध्य में हिंदी, बंगाली और उड़िया गानों के जरिए उन्होंने अपनी पहचान बनाई थी। 2014 में वो राजनीति में आए थे और उन्हें शहरी विकास राज्यमंत्री बनाया गया था। उन्हें भारी उद्योग मंत्रालय राज्यमंत्री भी बनाया गया था। संगीत उन्हें विरासत में मिली थी। उनके दादा भी संगीतकार थे। हालाँकि, हाल ही में उनके विधानसभा चुनाव हारने के बाद हुए मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जगह नहीं मिल सकी थी।

मुंबई पुलिस ने पोर्नोग्राफी मामले में गिरफ्तारी से बचाने के लिए माँगे थे ₹15 लाख: गहना वशिष्ठ का दावा

इस साल की शुरुआत में पोर्नोग्राफी के मामले में गिरफ्तार हुईं अभिनेत्री गहना वशिष्ठ ने दावा किया है कि उन्हें गिरफ्तार करने आई मुंबई पुलिस की टीम ने गिरफ्तारी से बचने के लिए उनसे 15 लाख रुपए की रिश्वत की माँग की थी। गहना वशिष्ठ को फरवरी 2021 में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें करीब चार महीने की जेल हुई थी।

शनिवार (जुलाई 31, 2021) को इंडिया टुडे से खास बातचीत में गहना वशिष्ठ ने कहा कि पुलिस ने उनसे 15 लाख रुपए देने की माँग की। गहना ने आरोप लगाया “वे मुझे रिहा करने के लिए 15 लाख रुपए लेना चाहते थे। उन्होंने मुझसे पैसे देने को कहा। लेकिन जब मैंने कहा कि मैं गलत नहीं हूँ तो उन्होंने कहा कि हम किसी के भी खिलाफ मामला बना सकते हैं।”

अभिनेत्री ने मामले के दो आरोपितों के बीच एक व्हाट्सएप चैट का भी हवाला दिया, जिनकी पहचान यश ठाकुर उर्फ अरविंद कुमार श्रीवास्तव और तनवीर हाशमी के रूप में हुई है। गहना वशिष्ठ ने कहा कि चैट से पता चलता है कि दोनों 8 लाख रुपए की व्यवस्था कर रहे हैं। गहना वशिष्ठ ने कहा, “ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस ने पैसे की माँग की थी।”

मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा अपने खिलाफ पोर्नोग्राफी मामले में एक नई FIR दर्ज करने पर, अभिनेत्री गहना वशिष्ठ ने दावा किया कि शिकायतकर्ता ने दो से तीन एडल्ट वीडियो में काम किया था। गहना वशिष्ठ ने पूछा, “यह कैसे संभव है कि उसे अलग-अलग लोगों द्वारा कई बार मजबूर किया गया और इसके लिए भुगतान किया गया?”

मामले में गहना वशिष्ठ के साथ व्यवसायी राज कुंद्रा की कंपनी के निर्माता भी शामिल हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को अपराध शाखा ने 19 जुलाई को कथित तौर पर अश्लील फिल्में बनाने और उन्हें ऐप्स के जरिए प्रकाशित करने के मामले में गिरफ्तार किया था।

पिछले दिनों अरविंद श्रीवास्तव उर्फ यश ठाकुर ने दावा किया था कि राज कुंद्रा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए क्राइम ब्रांच को 25 लाख रुपए की घूस दी थी। उसने खुद से भी रिश्वत माँगे जाने का दावा किया था। यश ठाकुर ने दावा किया था कि पुलिस पहले ही राज कुंद्रा को गिरफ्तार कर सकती थी, लेकिन इससे बचने के लिए उन्‍होंने क्राइम ब्रांच के अध‍िकारी को 25 लाख रुपए घूस दिए थे।

मिड डे की रिपोर्ट के अनुसार ठाकुर ने दावा किया कि इस मामले में उन्होंने मार्च में महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो से शिकायत भी की थी। उन्होंने इस बारे में एक ईमेल लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि क्राइम ब्रांच अधिकारी ने राज कुंद्रा से 25 लाख रुपए रिश्वत ली है। साथ ही उनसे भी घूस की माँग की गई। 

कॉन्ग्रेस नेता के भतीजे ने दलित छात्रा से किया रेप, शादी का झाँसा दे 4 महीनों से रह रहा था लिव इन रिलेशन में, FIR दर्ज

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले से दलित छात्रा के साथ शादी का झाँसा देकर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। इस कुकृत्य को अंजाम देने वाला शख्स कॉन्ग्रेस नेता का भतीजा बताया जा रहा है। मामला प्रकाश में आने के बाद से ही आरोपित फरार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता ने होशंगाबाद के महिला थाने में पहुँचकर पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद इटारसी निवासी 20 वर्षीय अक्षत जायसवाल के खिलाफ दुष्कर्म व एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने बताया कि पीड़िता इटारसी के MGM कॉलेज में बीकॉम सेकेंड ईयर की छात्रा है और आरोपित उसका सहपाठी है। यहीं से दोनों पहले दोस्त बने और फिर धीरे-धीरे दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया। आरोपित ने युवती को पूरी तरह अपने विश्वास में लिया और 16 फरवरी 2021 को वह इटारसी-होशंगाबाद के बीच नेशनल हाईवे स्थित ‘द पार्क रिसोर्ट’ में युवती को ले गया। वहाँ कोल्ड ड्रिंक में नशीली दवा मिलाकर उसने युवती को पिलाई और जब युवती बेहोश हो गई तब अक्षत ने उसके साथ रेप किया। इस दौरान उसने युवती के फोटो और वीडियो भी बना लिया। युवती का आरोप है कि जब उसने इसका विरोध किया तो अक्षत उसे शादी का झाँसा देकर भोपाल में किराए के मकान में उसके साथ लिव इन में रहने लगा और लगातार 4 महीने तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा।

नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष व कॉन्ग्रेस नेता के भतीजे पर युवती ने आरोप लगाया कि अक्षत ने नौकरी के लिए दूसरे शहर जाने का झूठ बोलकर उसे हॉस्टल में भेज दिया। इसके बाद वह फरार हो गया। कई दिन बीतने के बाद भी जब आरोपित युवती के पास नहीं लौटा तो युवती ने इस संबंध में होशंगाबाद महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई।

बताया जा रहा है कि पीड़िता ने 26 जुलाई को होशंगाबाद महिला थाने में जाकर पूरा मामला बताया था। महिला थाना प्रभारी सुरेखा निमोदा ने बताया कि युवती से दोस्ती कर शारीरिक शोषण व दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

बता दें कि आरोपित अक्षत जायसवाल कॉन्ग्रेस नेता व नगरपालिका इटारसी के पूर्व अध्यक्ष रवि जायसवाल का भतीजा है। हालाँकि, आरोपित और इनका परिवार अलग-अलग रहता है। वहीं, अक्षत के परिवारवालों का कहना है कि युवती ने उनके बेटे से 5 लाख रुपए की माँग की थी। वह उसे डेढ़ लाख रुपए का चेक 28-29 जून को दे चुके हैं।

शिवाजी से सीखा, 60 साल तक मुगलों को हराते रहे: यमुना से नर्मदा, चंबल से टोंस तक औरंगज़ेब से आज़ादी दिलाने वाले बुंदेले की कहानी

बुंदेलखंड साम्राज्य की स्थापना और इसे मुगलों के चंगुल से निकालने का श्रेय जाता है महाराजा छत्रसाल को। आपने इनके बारे में इतिहास की पाठ्य-पुस्तकों में नहीं पढ़ा होगा, लेकिन औरंगज़ेब को ज़रूर पढ़ा होगा। 4 मई, 1649 को जन्मे महाराजा छत्रसाल 56 वर्षों तक बुंदेलखंड पर शासन किया। उनका निधन 20 दिसंबर, 1731 को हुआ था। वो बुंदेला राजपूत थे। राजकाज उनके खून में था, क्योंकि वो ओरछा के राजा रूद्र प्रताप सिंह के वंशज थे।

दिल्ली में था औरंगज़ेब का शासन, इधर बुंदेलखंड में धधकी एक ज्वाला

जब औरंगज़ेब ने उनके पिता चंपत राय की हत्या करवा दी थी, तब महाराजा छत्रसाल की उम्र मात्र 12 वर्ष ही थी। ये वो समय था, जब पूरे देश में छत्रपति शिवाजी के कारनामे गूँज रहे थे। वो आततायी अफ़ज़ल खान का वध कर चुके थे और पवन खिंड के युद्ध में जिस तरह की बहादुरी का परिचय मराठा सेना ने दिया था, उससे बड़े-बड़े लोग हैरान थे। अतः, छत्रसाल ने महाराष्ट्र जाकर शिवाजी का दिशानिर्देश प्राप्त किया।

महाराजा छत्रसाल ने 1671 में मात्र 22 वर्ष की उम्र में विशाल और क्रूर मुग़ल साम्राज्य के खिलाफ स्वतंत्रता का बिगुल फूँक दिया। उस समय उनके पास मात्र 5 घुड़सवारों और 25 तलवारबाजों की सेना थी। लेकिन, उनकी वीरता और साहस का प्रभाव था कि ये संख्या बढ़ती चली गई और अगले एक दशक में पूर्व में चित्रकूट, छत्तरपुर व पन्ना और पश्चिम में ग्वालियर तक उनका शासन हो गया। उत्तर में कालपी से लेकर दक्षिण में सागर, घरकोटा, शाहगढ़ और दमोह तक उन्होंने अपने साम्राज्य का विस्तार किया।

जब 1671 में शिवाजी से सीख कर छत्रसाल बुंदेलखंड लौटे थे, तब उनके पास कोई सेना नहीं थी। उन्होंने ओरछा के राजा सुजान सिंह से मदद माँगी तो उन्होंने इनकार कर दिया। लेकिन, तभी औरंगज़ेब ने मंदिरों के ध्वंस के क्रम में ओरछा अपनी सेना भेजी। तब सुजान सिंह को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने छत्रसाल की तरफ मैत्री का हाथ बढ़ाया। सबसे पहले उन्होंने अपने पिता की हत्या करने वाे धन्धेरों पर आक्रमण कर उन्हें हराया।

इसके बाद उन्होंने सिरोंज, चंद्रपुर और मैहर पर विजय प्राप्त की। धामोनी के बाद उन्होंने सागर को जीता। 1673 में औरंगज़ेब ने रुहल्ला खान को धामोनी का फौजदार नियुक्त किया, जिसने 22 सरदारों को छत्रसाल का दमन करने के लिए भेजा। ओरछा, दतिया और चंदेरी की सेना को साथ लेकर भी वो छत्रसाल को नहीं हरा सका। उसे पीछे हटना पड़ा। फिर छत्रसाल ने नरहर और फिर सुजान सिंह की मृत्यु के बाद ओरछा पर आक्रमण किया।

बुंदेलखंड के महाराजा छत्रसाल से काँपती थी औरंगज़ेब की फौज

राजा छत्रसाल ने तत्पश्चात पन्ना को जीत कर अपनी राजधानी बनाया। महोबा और मऊ को उन्होंने अपनी सैनिक छावनी में तब्दील किया। बुंदेलखंड के 70 छोटे-बड़े जमींदारों ने उन्हें अपना राजा मान लिया। कई हिन्दू राजाओं ने भी मुगलों का गुट बना कर छत्रसाल पर आक्रमण किया, लेकिन उनका हौसला नहीं डिगा। औरंगज़ेब ने इख़्लासा खान को धामोनी भेजा। छत्रसाल ने एक रणनीति के तहत मुगलों से संधि में ही अपनी भलाई समझी, क्योंकि उनका लक्ष्य बड़ा था।

लेकिन, जब उन्होंने देखा कि उनके पीठ पीछे मुग़ल उनसे धोखा करते हुए बुंदेलखंड के हिस्सों को फिर गुलाम बना रहे हैं तो उन्होंने मुगलों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। अंत में फिर संधि हुई और औरंगज़ेब ने छत्रसाल को ‘राजा’ की उपाधि दी। छत्रसाल ने अपने बेटे को भेजे गए एक पत्र में एक संत का जिक्र किया था। वो संत उन्हें पन्ना जाते समय मिले थे। उनका नाम था – प्राणनाथ। उन्होंने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि उन्हें एक बड़े साम्राज्य का राजा बनना है।

मुगलों ने समय-समय पर रोहिल्ला खान, कलिक, मुनव्वर खान, सदरुद्दीन, शेख अनवर, सैयद लतीफ़, बहलोल खान और अब्दुस अहमद जैसे सैन्य कमांडरों को भेजा, लेकिन इन सभी को छत्रसाल के हाथों हार झेलनी पड़ी। उन्होंने बुंदेलखंड में 25,000 लोगों की सेना तैयार कर ली। दिसंबर 1728 में किस तरह 79 वर्ष की उम्र में उन्होंने मुहम्मद खान बंगश के खिलाफ सेना का नेतृत्व किया था, ये आज भी इतिहास में दर्ज हैं।

बुंदेलखंड को बचाने के लिए दौड़े आए थे बाजीराव, महाराजा छत्रसाल का वो पत्र

ये बहुत मशहूर किस्सा है कि किस तरह मराठा क्षत्रप बाजीराव पेशवा तब वृद्ध राजा की मदद के लिए आए थे। उन्होंने बाजीराव को पत्र में लिखा था, “क्या आपको पता है बाजीराव, मैं अभी ठीक उसी स्थिति में हूँ जिसमें वो हाथी था, जब मगरमच्छ ने उसके पाँव अपने जबड़े में जकड़ लिए थे। मेरा वीर वंश ख़त्म होने की ओर है। आइए, मेरी प्रतिष्ठा बचा लीजिए।” इसके बाद बाजीराव वहाँ पहुँचे और बुंदेलखंड व मराठा सेना ने आक्रांता को वहाँ से निकाल बाहर किया।

प्राणनाथ ने ये भी भविष्यवाणी की कि छत्रसाल 100 वर्ष के करीब जिएँगे और अपने पोते-पोतियों का मुँह देखेंगे। उस समय छत्रसाल का कोई बेटा नहीं था, लेकिन प्राणनाथ ने भविष्यवाणी की कि उन्हें एक बहादुर बेटा होगा। उनकी शुरू से इच्छा थी कि वो एक साम्राज्य की नींव रखें। उनके साम्राज्य के बारे में एक साहित्य में कहा गया है, “इत जमना उत नर्मदा इत चंबल उत टोंस। छत्रसाल से लरन की रही न काह होंस।”

इसका अर्थ है कि यमुना से लेकर नर्मदा तक और चम्बल नदी से लेकर टोंस तक राजा छत्रसाल का राज्य है। उनसे लड़ने का हौसला अब किसी में नहीं बचा। 1707 में मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब की मौत के बाद बुंदेलखंड को राहत मिली। कोई और मुग़ल इसे जीत न पाया। लेकिन, वृद्धावस्था में बंगश खान ने उन पर आक्रमण किया। लेकिन, जीत के खुमार में डूबे खान को जब बाजीराव के आने की बात पता चली तो उसके होश उड़ गए।

अपने जीवन में कभी कोई युद्ध न हारने वाले बाजीराव की सेना चपल गति से चलती थी। इससे पहले कि बंगश को खतरे का एहसास हुआ, उसकी फ़ौज चारों तरफ से घिर चुकी थी और रसद-पानी बंद होने से अफरातफरी का माहौल था। बंगश को आत्म-समर्पण करना पड़ा। छत्रसाल ने बाजीराव को बेटे की तरह सम्मान दिया। अपनी पुत्री मस्तानी की शादी बाजीराव से की। उनके निधन के धुबेला में उनके बेटों और मराठों ने मिल कर उनका स्मारक बनवाया।

वो कला एवं संगीत के प्रेमी थे। उन्होंने अपने राज्य में कई कवियों को शरण दे रखी थी। संत प्राणनाथ ने ही छत्रसाल को बताया था कि पन्ना में हीरा मिलने के कारण उनका साम्राज्य समृद्ध होगा। कवि भूषण, लाल कवि और बख्शी हंसराज जैसे कवियों ने महाराजा छत्रसाल के बारे में लिखा है। अंतिम समय में छत्रसाल ने अपने राज्य का एक हिस्सा बाजीराव को देकर बाकियों की जिम्मेदारी अपने बेटों में बाँट दी थी।

हिंदू मंदिरों की संपत्तियों का दूसरे धर्म के कार्यों में नहीं होगा उपयोग, कर्नाटक में HRCE ने लगाई रोक

कर्नाटक सरकार ने हिन्दू रिलीजियस एण्ड चैरिटेबल एंडोवमेंट्स (मुजराई) विभाग के फंड को मंदिर के अतिरिक्त किसी अन्य कार्य के लिए उपयोग में लाने से प्रतिबंधित करने का आदेश जारी किया है। राज्य सरकार द्वारा यह आदेश 23 जुलाई 2021 को जारी किया गया।

स्वराज्य की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक के हिन्दू रिलीजियस एण्ड चैरिटेबल एंडोवमेंट्स (HRCE) विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि हिन्दू मंदिरों से प्राप्त किए गए धन और संपत्तियों का उपयोग किसी भी तरह के गैर-हिन्दू कार्य अथवा गैर-हिन्दू संस्था के लिए नहीं किया जाएगा। पिछले कई दिनों से हिन्दू मंदिरों से प्राप्त फंड को वार्षिक आधार पर अन्य धार्मिक संस्थाओं को दिए जाने का विरोध हो रहा था। इस विरोध में प्रमुख रूप से राज्य एवं जिला धार्मिक परिषद के सदस्य शामिल थे। इन धार्मिक सदस्यों की मांगों को ध्यान में रखते हुए HRCE विभाग द्वारा ‘तास्तिक’ अथवा वार्षिक ग्रांट के तौर पर मंदिरों के फंड के स्थानांतरण पर रोक लगा दी गई।

पिछले महीने कर्नाटक सरकार ने HRCE विभाग के तहत ‘सी’ श्रेणी के मंदिरों में सेवा करने वाले पुजारियों के साथ-साथ इमामों और मुअज्जिनों को 3,000 रुपए का राहत पैकेज देने की घोषणा की थी। मंदिर के फंड का किसी दूसरी जगह इस्तेमाल किए जाने पर विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने कड़ी आपत्ति जताई थी। विहिप ने इस संबंध में प्रदेश के मुजराई मंत्री कोटा श्रीनिवास पुजारी को एक ज्ञापन सौंपा था। इसमें कहा गया था, “हिंदू मंदिरों से प्राप्त धन का उपयोग केवल मंदिरों और हिंदू समुदाय के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।” इसके बाद सरकार ने फैसला वापस ले लिया था।

इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद मुजराई मंत्री पुजारी ने इस फैसले को वापस लेने का आश्वासन दिया था। एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए पुजारी ने कहा था कि विभिन्न हिंदू संगठनों से प्राप्त अनुरोधों के बाद अधिकारियों को धार्मिक बंदोबस्ती विभाग से दूसरे धार्मिक संस्थानों को दिए जाने वाले सभी पैकेज को तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया है। मंत्री पुजारी ने बताया कि राज्य में कुल 764 अन्य धार्मिक संस्थानों को हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती विभाग से फंडिंग की गई थी, जिसे रोक दिया जाएगा।

पुलवामा में सेना ने ढेर किए 2 दहशतगर्द: जैश-ए-मोहम्मद आतंकी ‘लंबू’ अदनान की मौत, मसूद अजहर का था रिश्‍तेदार

जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा स्थित फॉरेस्‍ट एरिया दाचीगाम के नामीबिया और मार्सर में शनिवार (जुलाई 31, 2021) सुबह सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 2 आतंकियों को मार गिराया। मारे गए आतंकियों में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का खूंखार आतंकी भी शामिल है। 

कश्‍मीर के आईजी विजय कुमार ने बताया कि शनिवार के एनकाउंटर में मारे गए आतंकवादी का नाम मोहम्‍मद इस्‍माइल अलवी उर्फ लंबू उर्फ अदनान है। वह पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हमले की साजिश में शामिल था। उन्‍होंने बताया कि फिदायीन हमले वाले दिन तक यह आदिल डार के साथ रुका रहा। उसे मसूद अजहर का रिश्तेदार भी बताया जा रहा है।

इस्‍माइल अलवी का नाम पुलवामा के लेथपोरा में हुए इस आत्‍मघाती हमले के बाद एनआईए की चार्जशीट में भी आया था। जानकारी के मुताबिक वह वाहन से चलने वाले IED का विशेषज्ञ था, जिसका अफगानिस्तान में नियमित रूप से उपयोग किया जाता है और 2019 के पुलवामा हमले में भी इसी का उपयोग किया गया था। यह हमला 14 फरवरी 2019 को हुआ था। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की मौत हुई थी। अधिकारियों ने बताया कि वह तालिबान से भी जुड़ा था। वह तल्हा सैफ और उमर का करीबी था, जिसे मार दिया गया है। 

सुरक्षा बलों को लंबे समय से इसकी तलाश थी। मुठभेड़ में मारे गए दूसरे आतंकी की पहचान अभी नहीं हुई है। कश्‍मीर जोन पुलिस ने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बल मोर्चे पर हैं। इलाके में सेना का तलाशी अभियान जारी है।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर शनिवार सुबह दक्षिण कश्मीर के नागबेरान-तारसार वनक्षेत्र में घेराबंदी कर तलाश अभियान शुरू किया। उन्होंने बताया कि तलाशी कर रहे दल पर आतंकवादियों ने गोलियाँ चलाई जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की।

शोपियां, अनंतनाग सहित कई जगहों पर NIA की छापेमारी

शनिवार को टेरर फंडिंग और आतंकवाद से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर में कुछ जगहों पर छापा मारा। मिली जानकारी के अनुसार NIA ने शोपियां जिले में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की। गिरफ्तार आतंकी हिदायत अहमफ के शरतपोरा शोपियां स्थित घर में भी छापेमारी की गई है। उसे पिछले साल जम्मू में सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया था।

मिली जानकारी के अनुसार NIA ने दो अलग-अलग मामलों में छापेमारी की है। एक मामला जम्मू में आईईडी रिकवरी से संबंधित है तो वहीं दूसरा लश्कर-ए-मुस्तफा आतंकवादी संगठन का है। शोपियां, अनंतनाग, बनिहाल व जम्मू क्षेत्र सहित 14 ठिकानों पर छापेमारी चल रही है।

ग्रेनेड हमले में 4 घायल

इससे पहले जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में शुक्रवार (जुलाई 30, 2021) को एक आतंकवादी ग्रेनेड हमले में सीआरपीएफ के 4 जवान और एक नागरिक सहित तीन लोग घायल हो गए। पुलिस ने कहा कि आतंकवादियों ने बारामूला शहर के खानपोरा इलाके में सीआरपीएफ की एक पार्टी पर ग्रेनेड फेंका।