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फ्लाईओवर के ऊपर ‘पैदा’ हो गया मज़ार, अवैध अतिक्रमण से घंटों लगता है ट्रैफिक जाम: देश की राजधानी की घटना

दिल्ली के एक फ्लाईओवर पर मजार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उस एक छोटे से अतिक्रमण से लोगों को जिस तरह से परेशानी हो रही है, उसे लेकर विरोध दर्ज कराया जा रहा है। ‘TV9 भारतवर्ष’ ने दिल्ली के इस अतिक्रमण की खबर के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इसे हिन्दू-मुस्लिम के नजरिए से देखने की बजाए विकास के चश्मे से देखने की सलाह दी। आज़ादपुर के इस मजार के कारण ट्रैफिक जाम भी लग रहा है।

दिल्ली हमेशा से ट्रैफिक जाम से पीड़ित रहा है और रोज यहाँ की सड़कों पर लाखों गाड़ियाँ दौड़ती हैं। इसमें लोगों का समय भी बर्बाद होता है। सड़क पर अतिक्रमण के कारण ये परेशानी और बढ़ जाती है। इन्हीं समस्याओं के कारण कई जगह फ्लाईओवर का निर्माण कराया जाता है, ताकि गाड़ियाँ आसानी से निकल सके और स्थानीय लोगों को परेशानी भी न हो। लेकिन, अब ऐसे फ्लाईओवर भी अवैध कब्जे के शिकार हो रहे हैं।

ताज़ा घटना दिल्ली के आज़ादपुर की है। बड़ी सब्जी मंडी होने की वजह से ये इलाका जाना जाता है। यहाँ के एक फ्लाईओवर पर अवैध मजार बना दिया गया है। जहाँ से फ्लाईओवर शुरू होता है, वहीं पर एक मजार जैसी संरचना बना दी गई है। वहाँ के प्रबंधक का कहना है कि ये एक ‘दरगाह’ है। उसने अतिक्रमण के आरोपों को झूठा करार देते हुए कहा कि ये बहुत पुराना है और उसके दादा भी यहाँ बैठते थे।

उसने दावा किया कि साल 2009 के बाद यहाँ कोई निर्माण कार्य नहीं किया गया और सारी संरचनाएँ पहले की ही है। स्थानीय मुस्लिम दावा करते हैं कि पहले फ्लाईओवर के नीचे मजार हुआ करती थी और अब भी फ्लाईओवर के नीच ‘पीर बाबा’ की कब्र है। मजार को 1950 के पहले का बताया जा रहा है। लेकिन, लोगों को इधर से गुजरने में परेशानी हो रही है और घंटों जाम भी लगते हैं। लेकिन, प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

हाल ही में परेशान होकर एक महिला ने दिल्ली के एक मजार को खुद तहस-नहस कर दिया था। 24 जुलाई, 2021 को उक्त महिला ने प्रशासन पर कोई सुनवाई न करने का आरोप लगाते हुए मजार को तोड़ डाला था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। 3 साल पुरानी इस मजार पर लोग चादर भी चढ़ाते हैं। पुलिस ने उक्त महिला को बुला कर पूछताछ भी की थी। कई हिन्दू संगठनों ने उसका समर्थन किया था।

लाल किला के उपद्रवियों को कानूनी सहायता, पैसे भी: पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने बनाई कमिटी, चुनावी फायदे पर नजर?

पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने लाल किला के उपद्रवियों को कानूनी सहायता के साथ-साथ वित्तीय मदद भी देने की योजना बनाई है। याद हो कि गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2021) के दिन किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च के नाम पर लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराया था, महिलाओं के साथ बदसलूकी की थी और सैकड़ों पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था। पंजाब सरकार शुरू से इन उपद्रवियों के समर्थन में है।

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कॉन्ग्रेस अंतर्कलह से पीड़ित रही है और नवजीत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बना कर मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के पर कुतर दिए गए हैं। ऐसे में लाल किला के उपद्रवियों का समर्थन कर कॉन्ग्रेस फिर से ‘किसान आंदोलन’ की मलाई का स्वाद लेने की कोशिश में है। दिल्ली पुलिस ने जिन भी उपद्रवियों पर केस दर्ज किए हैं, उन सबको समर्थन देकर कॉन्ग्रेस अगला चुनाव जीतना चाहती है।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, पंजाब विधानसभा की ओर से कॉन्ग्रेस विधायक कुलदीप वैद की अगुवाई में बनाई गई कमिटी ऐसे लगभग 100 किसानों के बयान दर्ज कर रही है, जो लाल किला उपद्रव में शामिल थे। अब तक 60 ऐसे किसानों के बयान दर्ज भी किए जा चुके हैं और शुक्रवार (30 जुलाई, 2021) को भी 10 किसानों के बयान लिए गए। दीप सिद्धू के नेतृत्व में किसानों ने लाल किला परिसर में हिंसा की थी।

पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के लिए रूट तय कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उपद्रवियों ने पुलिस व आम लोगों के साथ हिंसा की थी। लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहरा कर कई घंटों तक हुड़दंग मचाया जा रहा था। दिल्ली पुलिस ने इन उपद्रवियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। दीप सिद्धू वहाँ से भाग खड़ा हुआ था, लेकिन बाद में उसे धर-दबोचा गया। विधानसभा कमेटी के चेयरमैन कुलदीप वैद तो यहाँ तक दावा कर बैठे कि किसानों के साथ दिल्ली पुलिस ने ज्यादती की है।

उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में किसानों की पिटाई की गई, जबकि वो तो लाल किला की तरफ गए भी नहीं थे। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर किसानों को हिरासत में लेकर यातनाएँ देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जिन 60 किसानों के बयान लिए गए हैं और 40 किसानों के लिए जाने हैं, उनमें से अधिकतर गरीब परिवार के हैं। कमिटी उन्हें कानूनी सहायता देने के साथ-साथ मुआवज़ा देने की भी सिफारिश करेगी।

इस बारे में कमिटी मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह से इस सम्बन्ध में विचार-विमर्श भी करेगी। इस रिपोर्ट को तैयार करने में समय लग सकता है। हाल ही में पंजाब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा था कि कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने किसानों के विरोध को बखूबी सँभाला। यदि कोई और मुख्यमंत्री होता तो किसानों के गुस्से का खामियाजा केंद्र सरकार की जगह पंजाब सरकार को भुगतना पड़ता। वे नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे।

CM हिमंत बिस्वा सरमा सहित असम के 207 पुलिस-प्रशासनिक लोगों पर मिजोरम में FIR, सीमा पर अब भी फोर्स तैनात

असम-मिजोरम सीमा पर हिंसक झड़प को लेकर दोनों राज्यों में तनाव जारी है। इसी बीच खबर है कि मिजोरम पुलिस ने असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ 26 जुलाई को अंतरराज्यीय सीमा पर हुई झड़पों पर हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश के आरोप के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला मिजोरम के कोलासिब में दर्ज किया गया है। इसके अलावा मिजोरम के 6 अन्य अधिकारियों पर मामला दर्ज कर किया गया है। 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मिजोरम पुलिस ने हिमंता बिस्वा सरमा के अलावा असम पुलिस के चार वरिष्ठ अधिकारियों, दो नौकरशाह के नाम भी एफआईआर में शामिल किए हैं। वहीं, 200 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

मिजोरम पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में कहा गया है कि आरोपितों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत शस्त्र अधिनियम, मिजोरम रोकथाम और कोविड-19 अधिनियम 2020 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एफआईआर में मिजोरम पुलिस ने कहा, “हथियारों से लैस 200 असम पुलिसकर्मियों ने आईजीपी के नेतृत्व में उनके 20 पुलिस अधिकारियों पर हमला किया। वहीं हमारी पुलिस कैंप को आरक्षित वन की जमीन पर अतिक्रमण बताते हुए जबरन कब्जा करने की कोशिश की।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में असम पुलिस ने भी मिजोरम के 6 अधिकारियों को समन भेजकर सभी को 2 अगस्त को ढोलाई पुलिस स्टेशन में पेश होने को कहा है। बताया जा रहा है कि असम पुलिस ने मिजोरम पुलिस के डिप्टी कमिश्नर और एसपी रैंक के अधिकारियों को समन भेजा है। उधर, मिजोरम पुलिस ने असम के अफसरों को समन भेजकर 1 अगस्त तक पुलिस के सामने पेश होने को कहा है।

गौरतलब है कि सोमवार (26 जुलाई) को असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद के अचानक खूनी संघर्ष में तब्दील हो जाने से असम पुलिस के 6 जवानों की मौत हो गई और एक पुलिस अधीक्षक समेत 50 अन्य घायल हो गए थे।

मिजोरम के सीएम जोरमथांगा और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए पुलिस और नागरिकों के बीच झड़प का एक वीड‍ियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया था। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गृहमंत्री से इस मामले पर तुरंत कार्रवाई करने की माँग की थी।

ब्रेअकप के बाद भी मेडिकल छात्रा का पीछा करता था राखिल, केस नहीं दर्ज कराना चाहता था परिवार: सिर व छाती में गोली मार की हत्या

केरल के कोतमंगलम में एक डेंटल छात्रा की हत्या के बारे में पता चला है कि हत्यारे ने आक्रोश में इस वारदात को अंजाम दिया था। हत्यारा राखिल और मृतक छात्रा मनसा 1 साल तक रिलेशनशिप में थे। इसके बाद मनसा ने राखिल से दूरी बनाने का मन बना लिया था। इसके बावजूद राखिल उसका पीछा कर रहा था। बता दें कि राखिल ने इस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद खुद को भी गोली मार ली।

करीब एक महीने पहले राखिल ने मनसा के कॉलेज तक उसका पीछा किया था। वो मनसा द्वारा इस रिश्ते को तोड़े जाने के बाद गुस्से में था। उसके इस तरह से पीछा करने से मनसा का परिवार भी परेशान था। छात्रा के पिता बतौर होमगार्ड कार्यरत हैं। इन दोनों ने स्थानीय डीएसपी सदानंद से संपर्क कर के राखिल की शिकायत की थी। पुलिस ने राखिल और उसके परिवार वालों को बुला कर फटकार भी लगाई।

डिप्टी एसपी ने राखिल से कहा कि मनसा उससे संपर्क नहीं रखना चाहतीं, इसीलिए वो उनका पीछा करना बंद कर दे। साथ ही परिवार को भी चेताया था। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि उस वक़्त छात्रा और उसके परिवार ने राखिल या उसके परिवार के खिलाफ कोई FIR नहीं दर्ज कराई थी और वो इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते थे। अतः सिर्फ चेतावनी देकर ही उसे छोड़ दिया गया था।

लेकिन, राखिल इस घटना के बाद ‘परेशान’ रहने लगा था और उसने कोतमंगलम आकर इस घटना को अंजाम दिया। इस घटना में उसने 4 राउंड गोलियाँ चलाईं। हत्या के लिए देशी पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था। एक गोली उसने मिसफायर भी कर दी थी, क्योंकि मृतका के सिर और छाती में एक-एक गोली लगी थी। अंत में राखिल ने खुद के सिर में गोली मारी। कलमस्सेरी मेडिकल कॉलेज में शवों का पोस्टमॉर्टम हुआ है।

ये भी पता चला है की नेल्लीकुझी इंदिरा गाँधी कॉलेज में पढ़ने वाली मेडिकल छात्रा की हत्या से पहले एक महीने तक उसका पीछा किया गया था। राखिल ने कॉलेज के पास ही एक कमरा किराए पर लिया था। हत्या की साजिश रचने से पहले उसने मनसा के कमरे से मात्र 100 मीटर की दूरी पर कमरा लिया था, ताकि उसके हर क्रियाकलाप पर नजर रख सके। उसने मनसा के कमरे में घुस कर उसकी हत्या की

‘छोटी काशी’ का श्री ग्यारह रुद्री मंदिर: भारत का इकलौता जहाँ विराजमान हैं 11 रुद्र, श्रीकृष्ण ने की थी स्थापना

श्रावण के इस पवित्र मास में ऑपइंडिया की मंदिर श्रृंखला में बात करेंगे एक ऐसे शिव मंदिर की, जो पूरे भारत में सबसे अनूठा है। हरियाणा के कैथल में स्थित इस शिव मंदिर को भगवान श्री कृष्ण ने बनवाया था और यहाँ स्थापित किए थे 11 रुद्र। यही कारण है कि मंदिर को श्री ग्यारह रुद्री मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहाँ एक ही स्थान पर 11 रुद्र विराजमान हैं।

श्री कृष्ण द्वारा मृत सैनिकों की आत्मा शांति का प्रयास

महाभारत काल में कौरवों और पांडवों के बीच हुए भयानक युद्ध में दोनों ओर से करोड़ों सैनिकों की मौत हो गई थी। जब महाभारत युद्ध समाप्त हुआ, तब इन मृत सैनिकों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने इस मंदिर की स्थापना की और यहाँ 11 रूद्रों को स्थापित किया। साथ ही पांडवों को अपने स्वजनों की हत्या के पाप से मुक्त करने के लिए श्री कृष्ण ने इस मंदिर में उनसे भी पूजा-अर्चना करवाई। इसके अलावा श्रीकृष्ण के द्वारा नौ कुंड भी स्थापित किए गए थे। हालाँकि मंदिर का लगातार पुनर्निर्माण होता रहा लेकिन श्री कृष्ण द्वारा बनवाया गया प्राचीन मंदिर और उसमें स्थापित किए गए 11 रुद्र आज भी उसी तरह हैं।

मंदिर के विषय में जानकारी

यह माना जाता है कि पूरे देश में कैथल ही एक मात्र स्थान है, जहाँ 11 रुद्र स्थापित हैं। ये 11 रुद्र विलोहित, शास्ता, कपाली, पिंगल, अजपाद, अहिबरुध्न्य, भीम, विरूपाक्ष, चंड, भव व शंभु हैं। इसके अलावा 4 एकड़ में फैले इस मंदिर परिसर में राम दरबार, माता दुर्गा, वैष्णो माता, राधा-कृष्ण मंदिर, महाकाली मंदिर और नवग्रह मंदिर स्थापित हैं।

मंदिर परिसर में ही एक प्राचीन तालाब भी है, जहाँ विभिन्न अवसरों पर श्रद्धालु स्नान करके भगवान शिव के दर्शन करते हैं। मंदिर में भगवान शिव की एक प्रतिमा है और रथ में अर्जुन को उपदेश देते हुए भगवान कृष्ण की चित्रकारी भी की गई है। कैथल के अंतिम शासक उदय सिंह ने श्री ग्यारह रुद्री मंदिर और तालाब का जीर्णोद्धार करवाया था। मंदिर का प्रबंधन अब मंदिर समिति के हाथ में है, जो श्री ग्यारह रुद्री स्कूल भी संचालित करती है, जिसमें शहर भर के कई श्रद्धालु शिक्षा ग्रहण करते हैं।

कैथल और 11 रूद्रों का इतिहास

पौराणिक इतिहास के अनुसार ज्येष्ठ पांडव महाराजा युधिष्ठिर ने कैथल की स्थापना की थी। कैथल का प्राचीन नाम कपिस्थला था, जो बाद में बदलते हुए कैथल हो गया। 11 रूद्रों की उत्पत्ति काशी में हुई थी। ऋषि कश्यप के वरदान माँगने पर भगवान शिव ने 11 रूद्रों के रूप में सुरभि गाय के पेट से जन्म लिया था। काशी में 11 रूद्रों की उत्पत्ति के बाद श्रीकृष्ण ने कैथल में इन 11 रूद्रों को विराजमान किया था, इसलिए कैथल को ‘छोटी काशी’ भी कहा जाता है।

महाशिवरात्रि और श्रावण मास यहाँ का महत्वपूर्ण त्यौहार है। इन दोनों ही अवसरों पर न केवल हरियाणा बल्कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भगवान शिव के 11 रुद्र रूपों के दर्शन के लिए आते हैं। इसके अलावा भक्तगण पौराणिक मान्यताओं के अनुसार 11 रूद्रों का महा-अभिषेक भी करते हैं। मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, श्री रामनवमी, दशहरा और दीपावली जैसे त्यौहार भी मनाए जाते हैं। इस मंदिर में दशहरे के पहले रामलीला का आयोजन भी किया जाता है।

कैसे पहुँचें?

कैथल का निकटतम हवाईअड्डा चंडीगढ़ में स्थित है, जो यहाँ से लगभग 120 किलोमीटर (किमी) की दूरी पर है। साथ ही दिल्ली का अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा यहाँ से लगभग 190 किमी की दूरी पर स्थित है।

कैथल का रेलवे स्टेशन मंदिर से मात्र 1 किमी की दूरी पर है। यहाँ से दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब एवं हरियाणा के प्रमुख शहरों के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं। सड़क मार्ग से भी कैथल हरियाणा के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है और यही कारण है कि श्री ग्यारह रुद्री मंदिर आसानी से पहुँचा जा सकता है।

मिलिए 30 साल की ‘नैंसी भाभी’ से, जानिए कैसे अश्लील फिल्मों के लिए करती थी मजबूर: राज कुंद्रा से लिंक की होगी पड़ताल

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के कारोबारी पति राज कुंद्रा की पोर्न फिल्म बनाने के मामले में गिरफ्तारी के बाद इसी तरह का एक मामला कोलकाता से सामने आया है। युवा मॉडल्स को धमकी और लालच देकर एडल्ट फिल्मों में काम करने के लिए मजबूर करने के मामले में मॉडल-अभिनेत्री नंदिता दत्ता को गिरफ्तार किया गया है।

सेमी-पोर्न कंटेंट में ‘नैंसी भाभी’ के नाम से मशहूर नंदिता के साथ मैनाक घोष नाम के उसके एक सहयोगी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपित युवाओं को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ब्रेक देने का वादा कर उन्हें अश्लील फिल्म बनाने के लिए मजबूर करते थे। जो उनकी बात मानने से इनकार करते थे, उन्हें वे धमका कर चुप करा देते थे।

30 वर्षीय नंदिता दत्ता को पुलिस ने कोलकाता के दमदम से गिरफ्तार किया है, जबकि मैनाक को नकटला स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया। दरअसल, न्यू टाउन पुलिस थाने में दो युवा मॉडल ने 26 जुलाई को दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार किया।

इनमें से एक मॉडल ने आरोप लगाया कि उसे बालीगंज के एक स्टूडियो में न्यूड वीडियो बनाने के दौरान भाग लेने के लिए मजबूर किया गया। इस महिला मॉडल ने आगे बताया कि इन लोगों ने उसकी दोस्त को भी न्यू टाउन होटल में एक पोर्न वीडियो शूट करने के लिए मजबूर किया।

कुछ दिन पहले ही कोलकाता के बिधाननगर पुलिस ने न्यू टाउन और साल्ट लेक में पोर्न रैकेट का भंडाफोड़ किया था। इन दोनों अलग-अलग मामलों में एक फोटोग्राफर और एक मेकअप आर्टिस्ट की गिरफ्तारी भी हुई थी। जाँच के बाद पुलिस ने बताया कि ये ग्रुप निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार की महिलाओं को बहलाकर या धमकी देकर न्यूड फिल्म बनाने के लिए बाध्य करते थे।

पुलिस का कहना है कि वह इस बात की जाँच कर रही है कि इन लोगों के पोर्न रैकेट चलाने वाले कारोबारी राज कुंद्रा से कोई संबंध हैं या नहीं। बिधाननगर कमिश्नरेट के एक अधिकारी ने बताया, “हम उनसे (आरोपियों से) पूछताछ करेंगे और उनके अन्य साथियों के बारे में पता लगाने की कोशिश करेंगे। हम उन जगहों के बारे में भी उनसे पता करेंगे जहाँ वे इन वीडियो की शूटिंग करते थे।”

अधिकारी ने बताया कि पुलिस पता लगाएगी कि पोर्न वीडियो बनाने के बाद आरोपी इन्हें कहाँ बेचते थे और कौन लोग इन्हें खरीदते थे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ये लोग किसी बड़े रैकेट का हिस्सा तो नहीं, इस बात पर पुलिस का विशेष जोर रहेगा और इसकी गहन छानबीन की जाएगी।

भोपाल: बर्थडे पार्टी में छात्रा को आरिफ और सलीम ने मारी ब्लेड, कहा- अब कर लो बात

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक युवती को दो बदमाशों ने ब्लेड से हमला कर लहूलुहान कर दिया। घटना के बाद उसे कुछ लोग लेकर निजी अस्पताल पहुँचे। जहाँ पर उसका उपचार किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इस हमले से उसके गाल व चेहरे पर गंभीर चोट लगी है। आरोपितों की पहचान आरिफ और सलीम उर्फ सुमेर अली के रूप में हुई है।

अस्पताल की सूचना पर एमपी नगर डीएसपी और पुलिस बल मौके पर पहुँच गया। आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आरोपितों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद न्यायालय के आदेश पर दोनों को जेल भेज दिया गया।

एएसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि बुधवार (जुलाई 28, 2021) रात एमपी नगर जोन-2 में होटल में बर्थडे पार्टी चल रही थी। पार्टी में छात्रा के अलावा अशोका गार्डन निवासी आरिफ और उसका दोस्त भी मौजूद था। देर रात तक चली पार्टी में अचानक हंगामा होने लगा। पता चला कि आरिफ ने दोस्त के साथ मिलकर छात्रा के चेहरे पर ब्लेड से हमला कर दिया। हमले के दौरान छात्रा किसी से बात कर रही थी। वारदात के बाद दोनों आरोपित फरार हो गए। बताया जा रहा है कि हमले के बाद आरोपित ने बोला था- अब कर लो बात।

घटना के बाद पुलिस के अधिकारी पीड़िता से बात कर आरोपित के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। पूछताछ में सामने आया है कि आरिफ इवेंट ऑर्गेनाइजर है तो सलीम की सैलून है। उस पर मारपीट समेत कई तरह के अपराध पहले से ही दर्ज हैं। बताया जा रहा है कि घायल युवती बीए फर्स्ट ईयर में पढ़ाई कर रही है। MP नगर में वह अपनी सहेली के साथ हॉस्टल में रहती है। पूछताछ में सामने आया कि आरोपित आरिफ की गर्लफ्रेंड और घायल छात्रा एक-दूसरे को जानते हैं। बता दें कि पहले पीड़िता का कहना था कि वह आरोपितों को नहीं जानती।

एएसपी भदौरिया ने बताया कि आरोपित और लड़की के बयान मेल नहीं खा रहे हैं। पूछताछ में सामने आया कि घटना के समय लड़की आरोपितों के साथ एमपी नगर आई थी। यहाँ उनकी किसी बात को लेकर बहस हो गई। आरिफ ने युवती से मारपीट शुरू कर दिया। सलीम ने ब्लेड निकालकर युवती के गाल पर वार किए। युवती पहले आरोपित के साथ जॉब करती थी। इसी कारण उनकी पहचान भी हुई थी। जानकारी के मुुताबिक पीड़िता की दोस्त और आरिफ की गर्लफ्रेंड का विवाद चल रहा था। इसी को लेकर पीड़िता का आरिफ से विवाद हुआ और आरिफ एवं सलीम ने उस पर हमला कर दिया।

केरल: राखिल ने डेंटल की पढ़ाई कर रही छात्रा को कमरे से खींचकर निकाला, सिर और छाती में मारी गोली; मौत

केरल के कोथामंगलम में एक 24 वर्षीय डेंटल कॉलेज स्टूडेंट की गोली मार कर हत्या कर दी गई। हत्या करने वाले राखिल ने बाद में खुद को भी गोली मार ली। छात्रा की हत्या के पीछे की वजह का पता नहीं चल पाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक छात्रा को 2 गोलियाँ मारी गई।

घटना कोथामंगलम के नेल्लीकुझी की है। कन्नूर की रहने वाली पीवी मानसा इंदिरा गाँधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस की स्टूडेंट थी। वह अपने 3 अन्य दोस्तों के साथ पेइंग गेस्ट में रह रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार (30 जुलाई 2021) की दोपहर लगभग 3:30 बजे राखिल उसके घर में घुस आया और उसे खींचकर दूसरे कमरे में ले गया। इसके बाद मानसा की दोस्तों ने तीन बार गोली चलने की आवाज सुनी। उन्होंने मानसा और राखिल को फर्श पर पड़े पाया।

जब मानसा की दोस्त उसके पास पहुँची तब वह जिंदा थी। उसे अस्पताल ले जाया गया, वहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। राखिल ने खुद को गोली मारने से पहले मानसा को काफी नजदीक से दो गोलियाँ मारी जो उसके सिर और छाती पर लगी। कोथामंगलम एसआई ने दोनों की मौत की पुष्टि की है।

एर्नाकुलम (रुरल) एसपी के कार्तिक ने बताया कि ऐसी संभावना है कि राखिल, मानसा को पहले से जानता था और कुछ दिनों पहले ही कन्नूर से कोथामंगलम पहुँचा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राखिल 04 जुलाई 2021 से उस इलाके में ठहरा हुआ था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच पहले भी बहस हो चुकी थी। पुलिस जाँच में जुटी हुई है और मानसा के दोनों फोन से जरूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

20 से ज्यादा पत्रकारों को खालिस्तानी संगठन से कॉल, धमकी- 15 अगस्त को हिमाचल प्रदेश के CM को नहीं फहराने देंगे तिरंगा

खालिस्तानियों द्वारा पंजाब में शांति भंग करने के प्रयासों के बाद अब हिमाचल प्रदेश में भी अलगाववाद के बीज बोने की तैयारी की जा रही है। शुक्रवार (30 जुलाई 2021) को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे के बीच शिमला के 20 से अधिक पत्रकारों को धमकी भरे फोन कॉल आए, जिसमें यह कहा गया कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को आगामी स्वतंत्रता दिवस के दिन तिरंगा फहराने नहीं दिया जाएगा। ये खालिस्तान समर्थक संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के प्री रिकॉर्डेड कॉल थे और धमकी देने वाला शख्स खुद को SFJ का सदस्य गुरपतवंत सिंह पन्नू बता रहा था।

इस रिकॉर्डेड फोन कॉल में हिमाचल प्रदेश में अलगाववादी आंदोलन शुरू करने की बात की गई। इस फोन कॉल में कहा गया, “हिमाचल प्रदेश भी कभी पंजाब का हिस्सा हुआ करता था। हम पंजाब में रेफरेंडम करवाने की दिशा में बढ़ रहे हैं और जिस दिन पंजाब अलग हो जाएगा, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हिमाचल प्रदेश का जो हिस्सा पंजाब का था वह भी अलग किया जा सके।” पन्नू ने खालिस्तानी समर्थकों और किसानों को भी ट्रैक्टर पर निकलने के लिए उकसाया है ताकि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को तिरंगा फहराने से रोक जा सके। इन पत्रकारों के अलावा कई अन्य लोगों ने भी ऐसे फोन कॉल आने की शिकायत की है।

इन धमकी भरे फोन कॉल पर संज्ञान लेते हुए हिमाचल प्रदेश पुलिस ने ट्वीट कर कहा है, “हमें खालिस्तान समर्थित तत्वों के द्वारा प्री रिकॉर्डेड कॉल के जरिए पत्रकारों को दी जाने वाली धमकी की जानकारी मिली है। हिमाचल प्रदेश पुलिस, केन्द्रीय सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों के संपर्क में है और राष्ट्र विरोधी तत्वों को रोकने एवं राज्य में शांति बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है।” इन धमकी भरे फोन कॉल आने के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है।

हाल ही में हिमाचल प्रदेश में श्री नयना देवी-कोलां वाला टोबा सड़क पर खालिस्तानी आतंकवादी संगठन और जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थन में नारे लिखे देखे गए थे। जगह-जगह पेंट और मार्कर पेन से ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘खालिस्तान में शामिल हों‘ और पंजाबी भाषा में ‘जनमत संग्रह 2021‘ व ‘SFJ में शामिल हों’ लिखा हुआ देखा गया था। हालाँकि रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय पुलिस ने सड़क के मील के पत्थर पर खालिस्तानी नारे लिखने को शरारती तत्वों की करतूत बताया था जो माहौल खराब करने और लोगों में दहशत पैदा करने पर आमादा हैं।

पुलिस ने कहा था कि खालिस्तानी नारों के साथ मील के पत्थर को खराब करने के लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए जाँच के आदेश दिए गए हैं। श्री नयना देवी जी के डीएसपी पूर्ण चंद ने कहा था कि पुलिस जल्द ही दोषी लोगों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार करेगी।

‘हमारे बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेजी’: PM मोदी के खिलाफ पोस्टर पर 25 FIR, रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (जुलाई 30, 2021) को कहा कि कोविड-19 टीकाकरण अभियान के सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना वाले पोस्टर चिपकाने पर दर्ज हुई एफआईआर को किसी तीसरे पक्ष के कहने पर रद्द नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा किया जाता है तो यह गलत नजीर बन जाएगी।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने याचिकाकर्ता वकील प्रदीप कुमार यादव को इस याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही बेंच ने स्पष्ट किया कि याचिका का खारिज किया जाना एफआईआर रद्द करने के लिए अदालत का रुख करने वाले वास्तविक पीड़ित व्यक्ति की राह में आड़े नहीं आएगा।

बेंच ने कहा कि हम तीसरे पक्ष के कहने पर एफआईआर रद्द नहीं कर सकते। यह सिर्फ अपवाद वाले कुछ मामलों में किया जा सकता है, जैसे कि याचिकाकर्ता अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकता हो या उसके माता-पिता यहाँ हों, लेकिन किसी तीसरे पक्ष के कहने पर नहीं। यह आपराधिक कानून में एक गलत मिसाल कायम करेगा।

बेंच ने कहा, “इस प्रकार की जनहित याचिका दायर न करें। हम किसी तीसरे पक्ष के इशारे पर प्राथमिकी कैसे रद्द कर सकते हैं। हम इस पर विचार कर सकते हैं कि क्या परिवार का कोई सदस्य हमारे पास आ रहा है। आप इसे वापस ले लें। यह आपराधिक कानून में एक गलत मिसाल कायम करेगा। आप लाइव केस लेकर आएँ और फिर हम देखेंगे।” इसके बाद याचिका को वापस लेने के लिए कह कर खारिज कर दिया गया।

वकील यादव ने कहा कि उन्होंने अदालत के निर्देशानुसार मामले का विवरण दाखिल किया था। इसके बाद उन्होंने याचिका वापस लेने की माँग की, जिसकी अदालत ने अनुमति दे दी। गौरतलब है कि पीएम के टीकाकरण नीति पर सवाल उठाते हुए पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई गई थी।

यादव ने याचिका दायर कर कोविड-19 टीकाकरण अभियान के सिलसिले में कथित तौर पर पीएम मोदी की आलोचना करने वाले पोस्टर चिपकाने पर दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर रद्द करने की माँग की थी। उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को टीकाकरण अभियान से जुड़े पोस्टर/ विज्ञापन/विवरणिका आदि के सिलसिले में कोई और एफआईआर दर्ज नहीं करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि राजधानी में चिपकाए गए पोस्टरों के सिलसिले में कम से कम 25 एफआईआर दर्ज की गईं और 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह केंद्र की टीकाकरण नीति की आलोचना करने वाले पोस्टर चिपकाने पर एफआईआर नहीं दर्ज करने का पुलिस को आदेश नहीं दे सकता है।