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बड़े टास्कमास्टर हैं दिल्ली पुलिस के नए कमिश्नर राकेश अस्थाना: चारा घोटाले की जाँच से हुए थे चर्चित

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के स्पेशल डायरेक्टर रहे गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को दिल्ली पुलिस का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिया है। 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी अस्थाना वर्तमान में सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक थे।

राकेश अस्थाना इसी महीने की 31 तारीख को रिटायर होने वाले थे, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सेवा विस्तार देते हुए उन्हें दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्ति दी है। इस पद पर वह 31 जुलाई 2022 तक रहेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख 31 जुलाई 2021 थी, लेकिन इसे ‘जनहित में एक विशेष मामले के तौर पर’ एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है।

एसएन श्रीवास्तव के रिटायर होने के बाद से वर्तमान में आईपीएस अधिकारी एसएस बालाजी दिल्ली के पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त कार्यभार सँभाल रहे थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आधिकारिक आदेश में यह भी कहा गया है कि भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के डीजी एसएस देसवाल अगले आदेश तक बीएसएफ के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार सँभालेंगे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश

पहले इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि राकेश अस्थाना को सीबीआई चीफ नियुक्त किया जा सकता है। हालाँकि, केंद्र सरकार ने इसी साल मई 2021 में महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस अधिकारी सुबोध जायसवाल को सीबीआई प्रमुख के रूप में नियुक्त कर दिया था।

राकेश अस्थाना ने भ्रष्टाचार के कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जाँच की है। उन्होंने सीबीआई में एसपी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 1997 में चारा घोटाले के मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया था। अस्थाना ने पहले नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के महानिदेशक के रूप में काम किया था। वो नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डीजी भी रह चुके हैं। उन्हीं के नेतृत्व में NCB ने बॉलीवुड में ड्रग्स के मामले का खुलासा किया गया था। इसी कारण से एनसीबी काफी सुर्खियों में भी रहा था।

साल 2018 में राकेश अस्थाना सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर थे। उस दौरान ‘सीबीआई बनाम सीबीआई‘ विवाद के कारण वो सुर्खियों में छाए हुए थे। उनके और तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के बीच विवाद हुआ था। बाद में अस्थाना के खिलाफ रिश्वतखोरी और जबरन वसूली का मामला दर्ज होने के किया गया था और उन्हें 2018 में ही सीबीआई से हटा दिया गया था। चारा घोटाले के अलावा साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे में आग लगने और कारसेवकों की मौत, 2008 के अहमदाबाद बम धमाके, अगस्ता वेस्टलैंड केस, एयरसेल-मैक्सिस घोटाला जैसे कई हाई प्रोफाइल मामलों की जाँच से वे जुड़े रहे हैं।

दामाद के परिवार का दिवालिया कॉलेज खरीदेगी भूपेश बघेल सरकार: ₹125 करोड़ का कर्ज, मान्यता भी नहीं

छत्तीसगढ़ में एक मेडिकल कॉलेज को राज्य सरकार द्वारा खरीदने के फैसले को लेकर बवाल मचा हुआ है। कॉन्ग्रेस सरकार ने एक असामान्य फैसला लेते हुए कानून बना कर एक ऐसे मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण की तैयारी शुरू कर दी है, जो वित्तीय रूप से लगभग दिवालिया हो चुका है। सबसे बड़ी बात तो ये कि ये मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दामाद के परिवार से जुड़ा हुआ है।

इस कॉलेज के मालिकाना हक़ उस परिवार के पास हैं, जिसमें भूपेश बघेल की बेटी की शादी हुई है। ये मामला दुर्ग में स्थित चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है। इस कॉलेज का स्वामित्व चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल हॉस्पिटल (CCMH) के पास है, जो एक ग़ैर-सूचीबद्ध कंपनी है। इस कंपनी का रजिस्ट्रेशन मार्च 1997 में हुआ था। दुर्ग से 5 बार सांसद रहे कॉन्ग्रेस नेता चंदूलाल चंद्राकर का निधन 1995 में 74 वर्ष की अवस्था में हुआ था।

वो एक बड़े पत्रकार भी रहे थे। साथ ही वो केंद्रीय मंत्री भी रहे थे। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन हेतु आंदोलन चलाने के लिए भी उन्हें जाना जाता है। CCMH के निदेशक मंगल प्रसाद चंद्राकर और चंद्राकर समुदाय की माँग के बाद इस अस्पताल को विकसित किया गया था। मंगल प्रसाद चंद्राकर इस अस्पताल के 5% शेयर्स के मालिक हैं। इसके कुल 59 शेयरधारक हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ड्राफ्ट किए गए बिल में इस अस्पातल के अधिग्रहण की योजना है, क्योंकि ये वित्तीय रूप से कमजोर हो चुका है।

बिल में बताया गया है कि जनहित में इस मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण आवश्यक है। छत्तीसगढ़ सरकार कॉलेज की चल-अचल संपत्तियों का अधिग्रहण करेगी और बदले में रुपए CCMH को देगी। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, इस ड्राफ्ट को तैयार कर रहे अधिकारी भी असहज हैं, क्योंकि सीएम भूपेश बघेल की बेटी दिव्या की शादी मंगल प्रसाद चंद्राकर के भतीजे से हुई है। क्षितिज के पिता विजय, मंगल प्रसाद के छोटे भाई हैं।

भूपेश बघेल ने इस मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण करने की घोषणा फरवरी में ही सोशल मीडिया पर कर दी थी। CCMH पर फ़िलहाल 125 करोड़ रुपए का कर्ज है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा अनसिक्योर्ड है। अप्रैल 2018 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने इस कॉलेज को धोखाधड़ी में लिप्त पाया था। 2017 के बाद से इस कॉलेज के पास कोई मान्यता ही नहीं है। अधिकारीगण कह रहे हैं कि बिल के विधानसभा में आने से पहले वो कुछ नहीं कह सकते।

भूपेश बघेल के दामाद क्षितिज चंद्राकर ‘ऑल इंडिया प्रोफेसनल कॉन्ग्रेस’ की छत्तीसगढ़ यूनिट के अध्यक्ष भी हैं। वो कहते हैं कि उनके पिता और चाचा 6-7 वर्ष पहले ही सौहार्दपूर्ण तरीके से अलग हो गए हैं। लेकिन, फिर वो भी कॉलेज के अभिग्रहण का समर्थन करते हैं। उनका कहना है कि इससे 300 छात्रों का भला होगा। साथ ही ये भी मानना है कि सरकार को नए कॉलेज बनाने में जितने रुपए लगेंगे, उससे काफी कम में एक बना-बनाया कॉलेज मिलना अच्छी बात है।

CCMH के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर लक्ष्मण चंद्राकर के पास इस मेडिकल कॉलेज के 3.75% शेयर्स हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय समास्याओं के बाद बोर्ड ने सरकार से हस्तक्षेप की माँग की थी। उन्होंने कहा कि ये किसी से छिपा नहीं है कि कॉलेज कर्ज में डूबा है, इसीलिए हमने सरकार से इसे बचाने का निवेदन किया। बिल की मानें तो एक विशेष अधिकारी को कॉलेज की संपत्ति का अनुमान लगाने के लिए नियुक्त किया जाएगा।

कॉन्ग्रेस में भी इसे लेकर विरोध के स्वर उठ रहे हैं। चंदूलाल चंद्राकर के बड़े भाई चुन्नीलाल चंद्राकर के पोते और छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के जॉइंट सेक्रेटरी अमित ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने दामाद को इस बिल के जरिए फायदा पहुँचाना चाहते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इसे लेकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल अपने दामाद का निजी महाविद्यालय बचाने के लिए उसे सरकारी कोष से खरीदने की कोशिश में हैं।

सिंधिया ने आरोप लगाया कि प्रदेश की राशि का उपयोग अपने दामाद के लिए किया जा रहा है, वो भी एक ऐसा मेडिकल कॉलेज जिस पर धोखाधड़ी के आरोप MCI द्वारा लगाए गए थे। साथ ही उन्होंने कहा कि कौन बिकाऊ है और कौन टिकाऊ, इसकी परिभाषा अब साफ है! मुख्यमंत्री बघेल ने इसे छात्रों का भविष्य बचाने वाला फैसला करार देते हुए आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने दावा किया कि इससे प्रदेश में नया मेडिकल कॉलेज बनाने का खर्च बचेगा और हर साल 150 नए डॉक्टर मिलेंगे।

उन्होंने कहा, “जहाँ तक रिश्तेदारी और निहित स्वार्थ का सवाल है तो मैं अपने प्रदेश की जनता को यह बताना चाहता हूँ कि भूपेश बघेल उसके प्रति उत्तरदायी है और उसने हमेशा पारदर्शिता के साथ राजनीति की है, सरकार में भी हमेशा पारदर्शिता ही होगी। सौदा होगा तो सब कुछ साफ हो जाएगा। यह खबर कल्पनाशीलता की पराकाष्ठा से उपजा विवाद है, जिसे मैं चुनौती देता हूँ। जनहित का सवाल होगा तो सरकार निजी मेडिकल कॉलेज भी ख़रीदेगी और नगरनार का संयंत्र भी।”

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हम सार्वजनिक क्षेत्र के पक्षधर लोग हैं और रहेंगे, साथ ही ये भी दावा किया कि हम ‘उनकी’ तरह जनता की संपत्ति बेच नहीं रहे हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज इसे लेकर हंगामा भी होने की उम्मीद है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव अपनी ही सरकार से नाराज़ होकर एक दिन पहले सदन से वॉकआउट कर गए थे। उन पर एक अन्य विधायक ने जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाया है। छत्तीसगढ़ में भी कॉन्ग्रेस कलह से जूझ रही है।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और असम: हर जगह वही लव जिहाद, कहीं जबरन इस्लाम कबूल करवाया तो कहीं देह के धंधे में धकेला

हाल के दिनों में कई राज्यों में लव जिहाद के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में दिलशेर ने दिनेश बनकर पहले 13 वर्षीय हिंदू नाबालिग लड़की को झूठे प्रेम के जाल में फँसाया और शुक्रवार (23 जुलाई 2021) को उसका अपहरण कर लिया। इसके बाद वह उसे अपनी कार में अलीगढ़ ले गया, जहाँ उसने लड़की का जबरन धर्मान्तरण कर उसे इस्लाम कबूल करवाने की योजना बनाई थी। वह उससे निकाह करने वाला था।

मामले में हिंदू जागरण मंच ने पुलिस को कार्रवाई के लिए मजबूर करने के लिए विरोध-प्रदर्शन भी किया। जाँच के दौरान दिलशेर और नाबालिग लड़की दोनों अलीगढ़ में मिले। नाबालिग ने खुलासा किया कि आरोपित जबरदस्ती उसे वहाँ ले गया था। रिपोर्ट के मुताबिक दिलशेर एक स्थानीय महिला नेता का भाई है औऱ कथित तौर पर उसी ने उसे यह करने के लिए उकसाया था।

लड़की बन भेजी फ्रेंड रिक्वेस्ट

एक अन्य मामले में कानपुर में सिराज अली ने हिंदू लड़की को फँसाने के लिए लक्ष्मी नाम की लड़की बनकर फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। लड़की का नाम देख पीड़िता ने फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लिया और दोनों की बातचीत होने लगी।

कुछ दिन बात करने के बाद जब दोनों की दोस्ती हो गई तो अली ने हिंदू लड़की को बताया कि वह लक्ष्मी नहीं बल्कि लक्ष्मीकांत है। इस दौरान लड़की से मिलने के लिए वह बार-बार कानपुर आने लगा। एक दिन पीड़िता के भाई ने उसे लक्ष्मीकांत (सिराज अली) के साथ देख लिया तो वो उसके साथ भाग गई।

अली लड़की को सुरक्षित ठिकाने का वादा करके मुंबई ले गया, जहाँ पहुँचने के बाद उसे (लड़की) पता चला कि वो लक्ष्मीकांत नहीं बल्कि सिराज अली था। रिपोर्ट के मुताबिक, सिराज अली ने मुंबई में हिंदू लड़की का जबरन धर्मान्तरण कराकर उसे इस्लाम कबूल करवाया और निकाह कर लिया। आरोपित ने पीड़िता को मुंबई में ही रखा ताकि वो भाग न सके।

लड़की की कॉल डिटेल्स निकाली गई तो पता चला कि वो मुंबई में है। इसके बाद उसे वहाँ से रेस्क्यू कराने के बाद उसे उसके परिवार को सौंप दिया गया। वहीं आरोपित अली के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।

आलम खान बन गया आलम सिंह

मध्य प्रदेश के रीवा में लव जिहाद के एक मामले में आलम खान ने हिंदू महिला से शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसे शादी का झाँसा दिया। उसने महिला को अपना नाम आलम सिंह बताया। खान ने न केवल अपनी पहचान बल्कि अपने निवास और बैकग्राउंड को भी पीड़ित से छिपाकर रखा।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, वह लड़की को अपने काम के लिए अलग-अलग जगहों पर ले जाता था। इसी कड़ी में कानपुर में लड़की को उसकी नकली पहचान के बारे में पता चला। पुलिस ने खान के खिलाफ केस दर्ज कर लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया है।

प्यार में बहकाया, देह के धंधे में धकेला

एक अन्य घटना में असम में हुसैन नाम के आरोपित ने 21 वर्षीय लड़की को देह व्यापार के धंधे में धकेलने के लिए झूठे प्रेम जाल में फँसाया। हुसैन ने असम के एक गाँव की रहने वाली लड़की से शादी कर ली और पीड़िता को बिहार के बहादुरगंज लाकर जबरन देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया। एक दिन मौका मिलते ही पीड़िता ने अपने परिवार से संपर्क किया जिसके बाद पुलिस द्वारा गठित सर्च टीम ने उसे छुड़ाया। पुलिस अधिकारी संजय कुमार के अनुसार, यह अपनी तरह का दूसरा मामला है। फिलहाल वेश्यावृति के धंधे की सांठगांठ का पर्दाफाश करने के लिए पूछताछ की जा रही है।

इससे पहले हमने बताया था कि कैसे उत्तराखंड के अल्मोड़ा के बगवलीपोखर के चार मुस्लिमों को स्थानीय लोगों द्वारा लव जिहाद का आरोप लगाने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुस्लिम आरोपितों ने हिंदू लड़की का अपहरण करने के इरादे से उसे बहलाया-फुसलाया था। पीड़िता के पिता ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, इसलिए पुलिस आरोपितों को थाने ले गई। 19 से 27 साल की उम्र के चारों आरोपित हरिद्वार और मुरादाबाद के रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों आरोपितों में से एक ने कुछ महीने पहले ही सोशल मीडिया के जरिए लड़की से दोस्ती की थी।

5 या अधिक हुए बच्चे तो हर महीने पैसा, शिक्षा-इलाज फ्री: जनसंख्या बढ़ाने के लिए केरल के चर्च का फैसला

केरल के सायरो-मालाबार चर्च ने अपने क्षेत्र में रहने वाले उन सभी परिवारों को वित्तीय मदद देने की घोषणा की है, जिनके पाँच या उससे अधिक बच्चे हैं। इसे ईसाई समुदाय की जनसंख्या बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि, ईसाई संस्था इसे ‘जन-कल्याणकारी योजना’ बता रहा है। एक तरफ जहाँ पूरे देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रयास चल रहे हैं और बहस छिड़ी हुई है, दूसरी तरफ केरल के चर्च का फैसला विवादों में आ गया है।

केरल के चर्च के प्रचार विभाग द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार, 2000 के बाद शादी करने वाले जिन भी जोड़ों के 5 या उससे अधिक बच्चे हैं, उन्हें प्रत्येक माह 1500 रुपए की मदद दी जाएगी। साथ ही चौथे और उससे आगे होने वाले बच्चों के लिए पाला स्थित ‘सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एन्ड टेक्नोलॉजी’ में मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था भी की जाएगी। साथ ही गर्भ सम्बंधित समस्याओं के इलाज के लिए ‘मार स्लीवा मेडिसिटी हॉस्पिटल’ में मुफ्त इलाज की भी व्यवस्था होगी।

चौथे या उससे अगले बच्चों के जन्म के समय इस अस्पताल में ईसाई माँओं का मुफ्त इलाज किया जाएगा और बच्चे के जन्म के बाद देखभाल भी की जाएगी। पादरी जोसेफ कल्लारंगत्त द्वारा बुलाई गई एक ऑनलाइन बैठक में ये फैसला लिया गया था। जिन क्षेत्रों के ईसाईयों के लिए ये योजना है, वो हैं – मीनाचिल तालुका, कोट्टायम तालुका के कुछ हिस्से, एर्नाकुलम जिले में कुठाटुकुल्लम और पिरवोम क्षेत्र का कुछ भाग।

साथ ही अरक्कुलम पंचायत और इडुक्की जिले के वेल्लीयमत्तम इलाके को भी इस योजना के तहत कवर किया गया है। इस योजना को ईसाई मजहब में परिवार की संख्या बढ़ाने के लिए लाया गया है। चर्च के साथ-साथ उसके समर्थकों ने भी एक से अधिक बच्चे पैदा करने पर जोर दिया। चर्च ने कहा कि इसीलिए इस योजना को लाया गया है। चर्च का कहना है कि कई परिवार कोरोना व लॉकडाउन के कारण पहले से ही वित्तीय समस्याओं से जूझ रहे हैं, इसीलिए उन्हें मदद मिलेगी।

चर्च ने कहा, “हमें हमारे समुदाय को आगे ले जाने की ज़रूरत है। भले ही ये जनसंख्या वृद्धि की दर बढ़ाने के लिए नहीं हो, लेकिन कम से कम मौजूदा जनसंख्या वृद्धि की दर को बरकरार रखने के लिए तो इसे लाया ही गया है। हम ईसाई परिवारों को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह देते हैं। वर्तमान में हमारे समुदाय की जनसंख्या वृद्धि दर घट रही है। इसके लिए कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया गया है, क्योंकि इसकी ज़रूरत नहीं। पादरियों के साथ चर्चा के बाद पता चला कि यही स्थिति है।

एक शक्तिपीठ जहाँ गर्भगृह में नहीं है प्रतिमा, जहाँ हुआ श्रीकृष्ण का मुंडन संस्कार: गुजरात का अंबाजी मंदिर

भारत और उसके आसपास के दूसरे देशों में स्थित शक्तिपीठों का महत्व देश के दूसरे देवस्थानों से कहीं अधिक माना जाता है। ऐसा ही एक शक्तिपीठ गुजरात के बनासकांठा जिले में राजस्थान की सीमा पर अरासुर पर्वत पर स्थित है। हम बात कर रहे हैं श्री अरासुरी अंबाजी मंदिर की, जहाँ गर्भगृह में कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है। इस पौराणिक स्थान की मान्यता इसलिए भी है क्योंकि यहाँ भगवान श्री कृष्ण का मुंडन संस्कार सम्पन्न हुआ था।

इतिहास

अंबाजी मंदिर का इतिहास युगों पुराना है क्योंकि यह वही स्थान है जहाँ माता सती का हृदय गिरा था, जिस कारण यह शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इस दिव्य स्थान का वर्णन तंत्र चूड़ामणि में भी मिलता है। मंदिर के निर्माण के बारे में कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन हाल में हुए कुछ अध्ययनों से यह पता चला है कि मंदिर का निर्माण वल्लभी शासक सूर्यवंश सम्राट अरुण सेन के चौथी शताब्दी में कराया गया था। हालाँकि मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1975 में शुरू हुए जीर्णोद्धार के बाद प्राप्त हुआ है।

शक्ति के उपासकों के लिए यह मंदिर बहुत महत्व रखता है क्योंकि इसे ब्रह्मांड की शक्ति का केंद्र माना जाता है। श्री अरासुरी अंबाजी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ मंदिर के गर्भगृह में कोई प्रतिमा नहीं है। गर्भगृह में एक गुफा उपस्थित हैं जहाँ स्वर्ण निर्मित ‘श्री यंत्र’ स्थापित है। इस श्री यंत्र को इस प्रकार से सजाया जाता है कि उसे देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि साक्षात श्री अंबा माई विराजमान हैं। माँ के इसी स्वरूप को देश भर से आने वाले श्रद्धालु पूजते हैं। मंदिर का महत्व इसलिए भी और बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ भगवान श्री कृष्ण का मुंडन संस्कार संपन्न हुआ था।

संरचना

अंबाजी मंदिर में होने वाले सभी प्रकार के पूजा अनुष्ठान चाहर चौक में सम्पन्न कराए जाते हैं। इसी चाहर चौक के दक्षिण-पश्चिमी भाग में एक प्रमुख हवन कुंड एवं 8 छोटे कुंड स्थित हैं जहाँ हवन कार्य सम्पन्न होते हैं। मंदिर 103 फुट ऊँचा है और मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश स्थापित किया गया है। इस स्वर्ण कलश का वजन 3 टन है और यह एक ही मार्बल पत्थर से बनाया गया है। इस स्वर्ण कलश के निर्माण के लिए अरासुर पर्वत की खदानों से ही मार्बल उत्खनित किया गया। इसके बाद मार्बल से कलश का निर्माण किया गया जिस पर स्वर्ण परत चढ़ाई गई। मंदिर तक पहुँचने के लिए 999 सीढ़ियों की चढ़ाई चढ़नी होती है।

अंबाजी मंदिर से 3 किमी की दूरी पर गब्बर पर्वत है जहाँ एक प्राचीन माँ दुर्गा का मंदिर स्थापित है। कहा जाता है कि मंदिर में एक पत्थर में माँ दुर्गा के पदचिह्न और रथचिह्न बने हुए हैं। अंबाजी के दर्शन करने के बाद श्रद्धालु हमेशा ही गब्बर पर्वत पर स्थित माता के दर्शन करने जरूर जाते हैं। गुजरात में एक तरह से यह परंपरा बन चुकी है है कि गब्बर पर्वत पर माता के दर्शन किए बिना अंबाजी के दर्शन पूरे नहीं होते हैं।

त्योहार

गुजरात के इस प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर का प्रमुख त्योहार नवरात्रि है। इस दौरान न केवल गुजरात से बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु माँ का आशीर्वाद लेने के लिए पहुँचते हैं। इस दौरान मंदिर प्रांगण में ही गरबा का आयोजन होता है। गुजरात भर से किसान अपने परिवार के साथ माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि के दौरान गरबा के साथ भवई का भी प्रबंध किया जाता है और साथ ही मंदिर में दुर्गा सप्तशती के पाठ का भी आयोजन किया जाता है।

इसके अलावा भाद्रपद मास की पूर्णिमा को भी यहाँ त्योहार जैसा ही माहौल होता है। साथ ही प्रत्येक महीने की पूर्णिमा एवं अष्टमी तिथि को भी मंदिर में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ देखने को मिलती है।

कैसे पहुँचे

बनासकांठा स्थित श्री अरासुरी अंबाजी मंदिर पहुँचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा अहमदाबाद का सरदार वल्लभ भाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। यह अंबाजी मंदिर से करीब 186 किलोमीटर दूर है। इस दिव्य स्थान से नजदीकी रेलवे स्टेशन अबू रोड स्टेशन है जो मंदिर से मात्र 20 किमी की दूरी पर है। अबू रोड रेलमार्ग से दिल्ली, अहमदाबाद समेत देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। राजस्थान की सीमा में स्थित इस मंदिर तक पहुँचने के लिए सड़क मार्ग से भी कई साधन उपलब्ध हैं। गुजरात एवं राजस्थान के प्रमुख शहरों से अंबाजी मंदिर तक पहुँचने के लिए दोनों ही राज्यों की परिवहन सेवाएँ यात्रियों की सुविधा के अनुसार संचालित होती हैं।

‘बद्रीनाथ नहीं, वो बदरुद्दीन शाह हैं…मुस्लिमों का तीर्थ स्थल’: देवबंदी मौलाना पर उत्तराखंड में FIR, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में बने दारुल उलूम देवबंद के मौलाना अब्दुल लतीफ कासमी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उत्तराखंड के देहरादून में उसके विरुद्ध एफआईआर हुई है। मौलाना के खिलाफ़ आईपीसी की धारा 153ए, 505, और आईटी एक्ट की धारा 66F के तहत केस किया गया है। एफआईआर में मौलाना का नाम नहीं है। इसमें सिर्फ ‘मौलाना’ ही लिखा है।

मौलाना अब्दुल लतीफ कासमी के विरुद्ध हुई एफआईआर

बुधवार (27 जुलाई 2021) को दर्ज FIR में शिकायतकर्ता आचार्य जगदंबा प्रसाद पंत ने मौलवी पर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कासमी पर हिंदू मंदिर के खिलाफ झूठे और आपत्तिजनक दावे करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा है कि मौलवी ने मंदिर पर दावा करके सांप्रदायिक तनाव को भड़काने का प्रयास किया है, जो कि उनके और उनके परिवार सहित कई हिंदुओं के लिए अत्यंत पवित्र है।

मौलाना अब्दुल लतीफ कासमी के विरुद्ध हुई एफआईआर

आचार्य जगदंबा ने अपनी शिकायत के साथ मौलाना की वीडियो संलग्न करते हुए उसके दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि वीडियो में इस्तेमाल हुई भाषा से वह और उनके परिजन आहत हुए हैं और उनके विश्वास को भी चोट लगी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मौलवी के दावे उत्तराखंड और उसके बाहर सांप्रदायिक दंगों को भड़काने के लिए काफी हैं। शिकायतकर्ता ने देहरादून पुलिस से मामले में संज्ञान लेने को कहा है। उनकी माँग है कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों से वीडियो हटाई जाए और मौलाना के विरुद्ध कार्रवाई हो।

मौलाना की वीडियो में हिंदुओं के तीर्थ स्थल बद्रीनाथ को लेकर टिप्पणी

उल्लेखनीय है कि जिस वीडियो को लेकर शिकायत की गई है, वह साल 2017 की है। उसमें  देवबंदी मौलाना अब्दुल लतीफ़ कहता दिख रहा है कि बद्रीनाथ धाम हिन्दुओं का नहीं तीर्थ स्थल, मुस्लिमों का है। वह कहता है, “असली बात तो ये हैं कि वो बद्रीनाथ नहीं, बदरुद्दीन शाह हैं। ये मुस्लिमों का धार्मिक स्थल है, इसीलिए इसे मुस्लिमों के हवाले कर दिया जाना चाहिए। ये बद्रीनाथ नहीं हैं। नाथ लगा देने से वो हिन्दू हो गए क्या? वो बदरुद्दीन शाह हैं। तारीख़ उठा कर देखिए। इतिहास का अध्ययन कीजिए, फिर बकवास कीजिए। मुस्लिमों को उनका धार्मिक स्थल चाहिए।”

इतना ही नहीं, उक्त मौलाना इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से भी माँग करता है कि मुस्लिमों को बद्रीनाथ धाम सौंप दिया जाए। साथ ही उसने मंदिर प्रबंधन से भी मंदिर को खाली करने के लिए कहा। अंत में धमकाते हुए वो कहता है, “अगर मुस्लिमों को उनका धार्मिक स्थल नहीं मिला तो हम बद्रीनाथ धाम की तरफ मार्च करेंगे। मुस्लिम वहाँ मार्च कर के बद्रीनाथ धाम पर कब्ज़ा करेंगे।”

किन्नौर भूस्खलन में खून से लथपथ जीवित बचे दो लोगों ने साझा किया त्रासदी का आखिरी वीडियो, बताया क्या हुआ था उस दिन

आपने ये कहावत तो सुनी ही होगी, जाको राखे साइयाँ मार सके ना कोई। अर्थात, जिसके साथ भगवान है उसका कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के इस वीडियो को देखने के बाद आपको भी इस बात पर विश्वास हो जाएगा। मौत के बिल्कुल पास होकर भी दो शख्स अपनी किस्मत से या यूँ कहें कि अपनी सतर्कता के कारण बच निकले। वीडियो में आप देख सकते हैं कि ये दोनों शख्स भयंकर दुर्घटना के बाद भी कैसे बाल-बाल बच निकले, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है।

दरअसल, किन्नौर जिले में बटसेरी के पास रविवार (25 जुलाई) को भूस्खलन के कारण 9 पर्यटकों की मौत हो गई थी और 3 लोग घायल हो गए थे। उनमें से बचे दो लोगों में से एक ने दुर्घटना के तीसरे दिन यानी मंगलवार (27 जुलाई) को एक वीडियो शेयर किया है। इस ​वीडियो को दुर्घटना के कुछ ही मिनटों के बाद शूट किया गया था। दोनों युवक वीडियो में खून से लथपथ नजर आ रहे हैं।

YouTube चैनल ‘Wave Hikers’ पर साझा किए गए वीडियो में जीवित बचे लोगों में से एक नवीन को भूस्खलन के कारण होने वाले नुकसान और अपनी पीड़ा को व्यक्त करते हुए देखा जा सकता है। उनके सिर पर काफी चोटें आई हुई हैं और लगातार खून भी बह रहा है।

मलबे और पत्थरों के एक टीले की ओर इशारा करते हुए नवीन कहते हैं, “हमारी गाड़ी (टेम्पो ट्रैवेलर) भूस्खलन के कारण मलबे में दब गई। मैं ड्राइवर की बगल वाली सीट पर बैठा था और किसी तरह बाहर झटका गया। मैं उस चट्टान पर फँस गया और घायल हो गया। मेरे सिर में गंभीर चोटें आई हैं।” उन्होंने आगे कहा कि भूस्खलन के समाप्त होने तक उन्होंने एक बड़े पेड़ के पीछे शरण ली थी।

वीडियो में नवीन फिर पहाड़ों की ओर इशारा करते हैं, जहाँ दूसरा जीवित व्यक्ति शिरिल ओबेरॉय फँस गया था। वह उसे कहते हैं मैं वहाँ आ रहा हूँ। रुको। वह उस शख्स को कहते हैं कि तुम आराम से नीचे उतरो। नवीन ने कहा कि उसने मदद के लिए पुलिस को बार-बार फोन किया और आखिरकार उनसे संपर्क करने में सफल रहा।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के बटसेरी (Batseri) के पास भूस्खलन होने के ​कारण दिल्ली और चंडीगढ़ से हिमाचल घूमने आए 9 पर्यटकों की मौत हो गई थी, जबकि 3 घायल हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बटसेरी के गुंसा के पास छितकुल से सांगला की ओर आ रही पर्यटकों की गाड़ी भूस्खलन में फँस गई थी। इस दौरान पहाड़ी के टूटने और भारी-भरकम पत्थर को गिरते देख किसी स्थानीय ने इसे रिकॉर्ड कर लिया था। प्रसार भारती ने अपने ट्विटर हैंडल से इस वीडियो को शेयर किया था। वीडियो में आप स्पष्ट तौर पर भूस्खलन और उसके खौफनाक दृश्यों को देख सकते हैं।

कंटेनर में छिपाकर कॉन्ग्रेस सांसद के ठिकाने पर उतारा गया राहुल गाँधी के लिए आया ट्रैक्टर, दिल्ली पुलिस को भी दिया गया झाँसा

दिल्ली की सड़कों पर ट्रैक्टर लेकर उतरे राहुल गाँधी ने कल सबको हैरान किया। वहीं दिल्ली पुलिस ने इसे सुरक्षा का बड़ा उल्लंघन करार देते हुए मामले में जाँच शुरू की। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व वायनाड से सांसद राहुल गाँधी संसद के पास ट्रैक्टर चलाकर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे और कथित किसान आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता दिखा रहे थे। हालाँकि, विरोध के बावजूद उन्हें उनका ट्रैक्टर अंदर (संसद परिसर) ले जाने की अनुमति नहीं मिली क्योंकि वहाँ सिर्फ वैध पास वाले वाहनों को एंट्री मिलती है।

अब दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले में अपनी शुरुआती जाँच के बाद यह पाया है कि राहुल गाँधी जिस ट्रैक्टर पर सवार होकर नई दिल्ली जा रहे थे, उसे लाने के लिए एक कंटेनर का इस्तेमाल किया गया था, क्योंकि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को पता था कि नई दिल्ली में पुलिस अलर्ट है और सदन के भीतर और आसपास विभिन्न स्थानों पर जगह-जगह पुलिस तैनात है।

पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि कैसे कॉन्ग्रेस नेता ने कंटेनर को एक जगह रोके जाने पर पुलिस को बरगलाया। पुलिस का कहना है कि उन्होंने उस कंटेनर को रोका था जिसमें ट्रैक्टर था, लेकिन उनके सामने कॉन्ग्रेस के एक सांसद का पत्र दिखा दिया गया जिसमें लिखा था कि कंटेनर में संसद की सामग्री है। दिल्ली पुलिस ने आगे बताया कि संसद से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मोती लाल नेहरू मार्ग पर स्थित कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी के कार्यालय में ट्रैक्टर को चोरी-छिपे उतारा गया था। इमारत के अंदर ट्रैक्टर में जरूरी बदलाव किए गए और होर्डिंग लगाई गई।

यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि सेंट्रल दिल्ली में ट्रैक्टरों का प्रवेश फिलहाल के लिए निषेध है। खासकर लुटियंस जोन में। ये रोक पिछले साल सितंबर से ही लगी हुई है जब पंजाब युवा कॉन्ग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा इंडिया गेट पर ट्रैक्टर में आग लगा दी गई थी। एक पुलिस अधिकारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा कि बहुत मना करने के बावजूद कॉन्ग्रेस सदस्यों ने ट्रैक्टर को संसद क्षेत्र में घुसा दिया था।

पुलिस ने बताया कि ट्रैक्टर मोतीलाल नेहरू मार्ग-सुनेहरी बाग चौराहे से लाया जा रहा था। उसके बाद पुलिस ने ट्रैक्टर को मोतीलाल नेहरू मार्ग पर रोका, उसे रफी ​​मार्ग लाया गया और रेल भवन चौराहे से रेड क्रॉस रोड होते हुए संसद भवन ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि राहुल गाँधी के नेतृत्व में निकाली गई यह रैली सीआरपीसी धारा 144 का उल्लंघन है। संसद का सत्र चल रहा है। पुलिस या किसी खुफिया एजेंसी को इस रैली की जानकारी नहीं थी और न ही स्थानीय पुलिस से इसके लिए परमिशन ली गई थी।

इस रैली में राहुल गाँधी के साथ रणदीप सुरजेवाला, रवनीत सिंह बिट्टू, दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी शामिल थे। पुलिस ने इस तरह सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होता देख सुरजेवाला और यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बीएस श्रीनिवास और अन्य लोगों को हिरासत में लिया। राहुल गाँधी को छोड़ा गया क्योंकि वह संसद में चल रहे सत्र में शामिल होने जा रहे थे। बताया जा रहा है कि इस तरह मानसून सत्र को लगातार डिस्टर्ब करने के लिए पीएम मोदी ने अपने सांसदों से जनता और मीडिया के सामने इन्हें उजागर करने को कहा है। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने पार्टी सांसदों से कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी जानबूझकर संसद को परेशान कर रही है। वे न तो बहस में रुचि रखते हैं और न ही संसद को सुचारू रूप से चलने दे रहे हैं।

सिराज अली- हिन्दुओं के नाम से 12 फेसबुक ID, शिवम बनकर फँसाया, अगवा कर जबरन निकाह: अब्बू गफ्फार ने भी दिया साथ

उत्तर प्रदेश के कानपुर से धर्मांतरण का नया मामला सामने आया है। कानपुर की बाबूपुरवा पुलिस ने 4 महीने पहले अगवा हुई युवती को मुंबई से बरामद कर लिया है। बताया जा रहा है कि जौनपुर के रहने वाले मुस्लिम युवक ने हिंदू बनकर फेसबुक पर पहले युवती से दोस्ती की। नजदीकी होने पर एक दिन सिराज ने उसे मिलने के लिए बुलाया और युवती को अगवा कर लिया। इसके बाद उसका जबरन धर्मांतरण कराकर निकाह कर लिया और उसे अपने साथ मुंबई ले गया। पुलिस ने आरोपित सिराज अली और उसकी मदद करने वाले उसके अब्बा अब्दुल गफ्फार को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबूपुरवा थाना प्रभारी देवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि 16 मार्च को इस क्षेत्र में रहने वाली 19 वर्षीय युवती लापता हो गई थी। उसके पिता ने थाने में बेटी के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से युवती को मुंबई से बरामद कर लिया।

युवती ने पुलिस को बताया कि जौनपुर के रहने वाले सिराज अली ने फेसबुक पर उससे शिवम बनकर दोस्ती की। इसके बाद उसे अपने प्रेमजाल में फँसाकर उसका अपहरण कर लिया।

पीड़िता ने बताया कि सिराज ने जबरन उसका धर्म परिवर्तन कराने के बाद उससे निकाह कर लिया। इसके बाद वो हर रोज उसका बलात्कार करने लगा। युवती को आशंका है कि वह गर्भवती है। उसका मेडिकल परीक्षण समेत अन्य जाँच कराई जा रही है। जाँच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस काम में आरोपित के अब्बू अब्दुल गफ्फार ने भी उसका साथ दिया था। पुलिस ने अब्बू और उसके बेटे को गिरफ्तार कर लिया।

बता दें कि सिराज अली हिंदू लड़कियों को अपने जाल में फँसाने के लिए कई अलग-अलग नामों से अपना फेसबुक अकाउंट चला रहा था। थाना प्रभारी ने बताया कि जाँच के दौरान सामने आया है कि सिराज अली ने शिवम, सत्यम, राज समेत अलग-अलग नाम से 12 से ज्यादा अकाउंट्स बना रखे थे। इसी के जरिए वह लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फँसाता और उन्हें अगवाकर उनका धर्म परिवर्तन करवा देता था।

बसवराज बोम्मई होंगे कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री: पिता भी थे CM, राजीव गाँधी के जमाने में गवर्नर ने छीन ली थी कुर्सी

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के दो साल पूरे होने पर बीएस येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के ऐलान के बाद शुरू हुई हलचल अब शांत है। मंगलवार (जुलाई 27, 2021) शाम हुई विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए बसवराज बोम्मई का नाम सर्वसम्मति से पास कर दिया है।

कहा जा रहा है कि बैठक में स्वयं बीएस येदियुरप्पा ने ही इस नाम का प्रस्ताव रखा और फिर बाकी नेताओं ने इस पर सहमति दी। इससे पहले बसवराज, येदियुरप्पा सरकार में गृह मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बुधवार यानी 28 जुलाई को वह 3 बजकर 20 मिनट पर सीएम पद की शपथ लेंगे।

बता दें कि बसवराज के पिता एस आर बोम्मई भी राज्य में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वहीं बसवराज ने भी जनता दल के साथ राजनीति की शुरुआत की थी। साल 1998 और 2004 में वह धारवाड़ से दो बार विधान परिषद के लिए चुने गए। लेकिन साल 2008 में वह भाजपा में शामिल हो गए और इसी वर्ष उन्होंने हावेरी जिले के शिगगाँव से विधायक पद पर जीत हासिल की।

28 जनवरी 1960 को जन्मे बसवराज बोम्मई फिलहाल कर्नाटक के गृह मंत्री हैं। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की हुई है। राज्य में कई सिंचाई प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए उनकी तारीफ होती रही है। इसके अलावा वह येदियुरप्पा के करीबी माने जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में दो साल सरकार चलाने के बाद मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने एक कार्यक्रम में ऐलान किया था कि वह अपना सीएम का पद छोड़ रहे हैं। हालाँकि आज उन्होंने बोम्मई का नाम पास होने पर कहा, “हमने सर्वसम्मति से बसवराज एस बोम्मई को भाजपा विधायक दल का नेता चुना है। मैं पीएम मोदी को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूँ। पीएम के नेतृत्व में वह (बोम्मई) कड़ी मेहनत करेंगे।”

गौरतलब है कि केंद्र की कॉन्ग्रेस सरकार ने एसआर बोम्मई की सरकार को 21 अप्रैल 1989 को संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत कर कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। उन्हें बहुमत साबित करने का भी मौका नहीं दिया गया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। एसआर बोम्मई बनाम भारत सरकार नाम से मशहूर इस मामले में 1994 में शीर्ष अदालत का फैसला आया था। इसमें अदालत ने उनकी सरकार की बर्खास्तगी को अनुचित बताया था। कहा था कि उन्हें बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए था। इसी फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 356 लागू करने में केंद्र सरकार की मनमानी शक्ति को सिमित करने के लिए कई शर्तें जोड़ी थी।