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मिलिए पाकिस्तान के ‘आजम खान’ से: कुत्ता गुम हुआ तो लाउडस्पीकर से करवाया ऐलान, तलाश में पूरी सरकारी मशीनरी लगा दी

उत्तर प्रदेश की पिछली अखिलेश सरकार में मंत्री रहे आजम खान याद हैं! सपा नेता आजम खान फिलहाल बीमार हैं और अस्पताल में दाखिल हैं। जब मंत्री थे तो उनकी भैंस गुम हो गई थी और उसकी तलाश में पूरा अमला जुट गया था। ऐसा लगता है कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को भी उसका आजम खान मिल गया है।

पाकिस्तान के गुजरांवाला के संभागीय आयुक्त जुल्फिकार अहमद घुमन का पालतू कुत्ता मंगलवार (27 जुलाई 2021) को लापता हो गया। इसके बाद उसे खोजने के लिए उन्होंने पूरी सरकारी मशीनरी लगा दी। कुत्ते के गायब होने का लाउडस्पीकर से ऐलान करवाने के अलावा डोर टू डोर तलाशी तक ली गई।

सार्वजनिक घोषणाओं से लेकर डोर-टू-डोर तलाशी करने लिए गुजरांवाला का पूरा पुलिस महकमा औऱ नगर निगम के अधिकारी कुत्ते की तलाश में हर घर में गए। इतना ही नहीं कमिश्नर ने एक ऑटो ड्राइवर को भी कुत्ते को खोजने के मिशन पर लगा दिया।

इसका वीडियो भी सामने आया है। इसमें देख सकते हैं कि ऑटो-रिक्शा के ऊपर एक लाउडस्पीकर लगा है और ड्राइवर शहर के हर नुक्कड़ पर जाकर कमिश्नर के कुत्ता गुम होने का ऐलान कर रहा है। लाउडस्पीकर के जरिए कुत्ते का अपहरण करने वाले खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

इतना ही नहीं पाकिस्तान के स्थानीय मीडिया घरानों और पत्रकारों ने ये खबर भी प्रकाशित की कि कमिश्नर जुल्फिकार घुमन का कुत्ता लापता हो गया है। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि जिसे भी वह कुत्ता मिले वो उसे कमिश्नर के घर पहुँचाकर आए, अन्यथा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पाकिस्तानी मीडिया हाउस डॉन के मुताबिक, घर का दरवाजा खुला छोड़ दिया गया था, जिस कारण गुजरांवाला के कमिश्नर जुल्फिकार घुमन का कुत्ता भाग गया है। कुत्ते के लापता होने के बाद आयुक्त ने ‘घर-घर तलाशी’ की माँग करते हुए एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।

इस घटना से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि कमिश्नर के कुत्ते की कीमत 4,00,000 रुपए थी, जो कि भारतीय मुद्रा के हिसाब से करीब 1,84,000 रुपए है। इस बीच घर का दरवाजा खुला छोड़ने के कारण कमिश्नर ने घर के नौकरों को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, घर का मुख्य दरवाजा खुला छोड़ दिया गया था, जिससे कुत्ता वहाँ से भाग गया।

बहरहाल, पूरे शहर को लॉकडाउन कर दिया गया। सारे सरकारी कामकाज को दरकिनार कर स्टेट मशीनरी मंगलवार को दिनभर कुत्ते को तलाश करती रही। हम टीवी के मुताबिक, फिर भी कुत्ते को खोजा नहीं जा सका है।

आजम खान की भैंस

31 जनवरी 2014 को उत्तर प्रदेश में सपा सरकार में मंत्री रहे आजम खान की रामपुर में पसियापुरा स्थित डेयरी फार्म से 7 भैंसें चोरी हुई थी। इस मामले में उन्होंने केस दर्ज कराया और वारदात के 24 घंटे बाद ही 1 फरवरी की रात पुलिस ने भैंसें बरामद भी कर लीं। लेकिन 2 फरवरी को SP रामपुर ने चौकी प्रभारी समेत 3 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। घटना के डेढ़ साल बाद जून 2015 में इसके आरोपित को भी पुलिस ने अरेस्ट कर लिया था।

‘इरादे नेक, काम अनेक’: CM योगी ने किया यूपी में चुनावी अभियान का शंखनाद, नड्डा ने सभी BJP सांसदों को बुलाया

उत्तर प्रदेश में भाजपा ने चुनावी शंखनाद कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ‘इरादे नेक, काम अनेक’ नाम के साथ 2022 विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत कर दी। भाजपा ने ‘विकास और विश्वास’ को आधार बना कर इस बार का चुनाव लड़ने का मन बनाया है। 2022 में सत्ता में वापसी के बाद भाजपा कोरोना से लड़ाई, किसान हित रोजगार और माफिया के खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाएगी।

किस तरह से गरीबों को मुफ्त में राशन दी जा रही है, सरकार ने ये बात भी जन-जन तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया है। केंद्र सरकार के ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत नवंबर तक गरीबों को मुफ्त राशन दिया जाना है। इसके साथ-साथ जून 2021 में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपनी राशन योजना भी लॉन्च की है। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया है कि उनकी पार्टी अबकी चुनाव में 400 में 351 सीटें अपने नाम करेगी।

साथ ही उन्होंने भाजपा का सफाया हो जाने की भी भविष्यवाणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने पिछले चुनाव के अपने संकल्प-पत्र को कचरे के डब्बे में फेंक दिया है। साथ ही उन्होंने भाजपा पर लोगों से किए गए वादों को पूरा न करने का भी आरोप मढ़ा। उन्होंने पूछा कि जब ‘लोगों को गुहार कर के’ भाजपा 324 सीटें जीत सकती है तो विकास के मुद्दे पर सपा 351 क्यों नहीं जीत सकती?

उधर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी यूपी चुनाव की तैयारियाँ शुरू करते हुए राज्य के सभी भाजपा सांसदों को बैठक के लिए बुलाया है। इस बैठक में चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, स्टेट जनरल सेक्रेटरी (संगठन) सुनील बंसल के अलावा भाजपा उपाध्यक्ष व राज्य में पार्टी के प्रभारी राधा मोहन सिंह भी उपस्थित रहेंगे। आज पश्चिमी यूपी, ब्रज और कानपुर के सांसदों की बैठक होगी।

इसके अगले दिन अवध, काशी और गोरखपुर के सांसदों की बैठक बुलाई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद वाराणसी से सांसद हैं, ऐसे में उनके इस बैठक में शामिल होने को लेकर पुष्टि नहीं हुई है। सांसदों से उनके इलाकों में जनता का मूड पूछा जाएगा और उनके सुझावों पर विचार-विमर्श के बाद आगे की रणनीति तैयार होगी। वहीं ‘मैटराइज न्यूज़’ द्वारा किए गए सर्वे में पता चला है कि 43% लोग भाजपा की सरकार चाहते हैं, जबकि 21% लोग बसपा की। सपा 20% के साथ सर्वे में तीसरे स्थान पर है।

24 साल में BMC ने गड्ढे भरने पर खर्चे ₹21000 करोड़: RTI से खुलासा, फिर भी मुंबई की सड़कें खस्ताहाल

शिवसेना शासित बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने करीब दो दशकों में मुंबई की सड़कों के गड्ढे भरने में 21000 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं। यह जानकारी भाजपा विधायक द्वारा दायर सूचना के अधिकार (RTI) आवेदन के जवाब से सामने आई है। इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद मुंबई की सड़कें खस्ताहाल हैं। खासकर मॉनसून में गड्ढे और सड़क का फर्क ही मिट जाता है।

आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि 1997 से अब तक बीएमसी ने सड़कों की मरम्मत, निर्माण और गड्ढों को भरने के लिए 21,000 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं। 2013 से 2014 के बीच सिर्फ एक साल में सबसे ज्यादा 3,201 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। उल्लेखनीय है कि कुछ साल पहले भी मुंबई में रोड स्कैम सामने आया था जिससे बीएमसी के खर्च पर सवाल उठे थे।

सड़कों में गड्ढों को लेकर टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के आधार पर अंधेरी (पश्चिम) से भाजपा विधायक अमित साटम ने आरटीआई के जरिए मुंबई में गड्ढों को ठीक करने पर हुए खर्च को लेकर जवाब माँगा था। साटम ने कहा कि बीएमसी ने अपने सड़क विभाग में 1997 से अब तक 21,000 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं।

साटम ने आगे कहा, “खराब सड़कें इस शहर की सबसे विकट समस्याओं में से हैं, फिर भी दशकों से उनकी स्थिति नहीं बदली है। इसके कई कारण हैं, एक कई यूटिलिटी एजेंसियों और बीएमसी के बीच समन्वय की कमी है। जब कोई नई सड़क बनाई जाती है, तो अगले ही साल उसे केबल बिछाने के लिए खोदा जाता है।”

आरे मिल्क कॉलोनी में गड्ढे। photo: midday

उन्होंने कहा, ”एक और समस्या यह है कि कोई भी बड़ी सड़क निर्माण कंपनी काम करने के लिए आगे नहीं आती है, क्योंकि उनके लिए निविदा का आकार बहुत छोटा है (कहीं भी 1 करोड़ रुपए से 6 करोड़ रुपए के बीच)। दूसरे, वे हिचकिचाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें कई स्तरों पर लोगों को पैसा देना होगा।”

गड्ढों के गायब होने का मामला

इन गड्ढों ने एक बार फिर से मुंबईवासियों की रफ्तार धीमी कर दी है। बीएमसी के पोथोल ट्रैकिंग सिस्टम का कहना है कि मुंबई की सड़कों में 500 से अधिक क्रेटर हैं, जो हर मोड़ पर आपको दिखाई दे जाएँगे। ट्रैकिंग सिस्टम का यह भी दावा है कि 520 क्रेटरों में से 307 की मरम्मत पहले ही की जा चुकी है। इस महीने की शुरुआत में बीएमसी ने यह दावा किया था कि शहर में केवल 11 ही गड्ढे हैं। इसके लिए नेटिजन्स ने उन्हें ट्रोल भी किया था।

मुंबई में रहने वालों की हर मॉनसून में परेशानी बढ़ जाती है। उन्हें मजबूर किया जाता है कि वे बीएमसी को टैग करने वाले गड्ढों की तस्वीरें लगातार ट्वीट करें।

अंधेरी लोखंडवाला रेजिडेंट्स एसोसिएशन के धवल शाह ने कहा, “नगर निकाय की अपनी वार्ड स्तर की टीमें हैं। उन्हें इस पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके वार्ड में कोई गड्ढा तो नहीं है या कोई खराब सड़क तो नहीं है, जिसकी मरम्मत की जानी चाहिए।”

नेहरू नगर, कुर्ला पूर्व में गड्ढे। photo: midday

उन्होंने कहा, ”लगातार बारिश बीएमसी द्वारा अब तक किए गए कार्यों की गुणवत्ता को उजागर कर रही है। दो दिन पहले राम मंदिर के पास एसवी रोड और मृणालताई गोरे फ्लाईओवर के बीच एक जोड़ने वाले पुल की पूरी सड़क की सतह बह गई थी और अब अधिकारियों ने इसे कच्ची सड़क की तरह बनाकर लोगों के आने-जाने के लिए खोल दिया है।”

बीजेपी का शिवसेना पर हमला

भाजपा विधायक आशीष शेलार ने शिवसेना नेता संजय राउत पर तंज कसा है, जो मुंबई के अमीरों को राहत कार्य के लिए दान देना चाहते थे। उन्होंने कहा, ”आरटीआई के जवाब के अनुसार बीएमसी ने अपने पसंदीदा ठेकेदारों के माध्यम से 20 से अधिक वर्षों में मुंबई में रहने वालों के लिए गड्ढे भरने और सड़क निर्माण कार्यों के लिए 21,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।” उन्होंने कहा, ”क्या बीएमसी करोड़पति/अरबपति सड़क ठेकेदार शिवसेना नेता की अपील का सम्मान करेंगे और महाराष्ट्र के लिए 1,000 करोड़ रुपए दान करेंगे?”

बीएमसी ने घटिया काम की तस्वीरें पोस्ट की

गड्ढों की घटिया “फिक्स्ड” तस्वीरें लगाने के लिए बीएमसी के ट्विटर हैंडल को बार-बार लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा है। अधिकतर लोग यह कहते हुए कमेंट करते हैं कि उन्हें पहले और बाद की तस्वीरों में कोई अंतर नहीं दिखा है।

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि गड्ढों को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मिश्रण बारिश में एक बार भी नहीं टिक पाता है।

हालाँकि, अपने काम का बचाव करते हुए, मेट्रोपॉलिटन कमिश्नर एसवी आर श्रीनिवास ने कहा, “हमारे पास बेहतर मशीनें हैं और हमारी टीम आवश्यकता पड़ने पर गड्ढों की मरम्मत करती है। यदि सड़क पर गड्ढे या असमान सतह हैं, तो बारिश खत्म होने के बाद उनकी मरम्मत की जाएगी।”

‘विधानसभा में संपत्ति नष्ट करना बोलने की स्वतंत्रता नहीं’: केरल की वामपंथी सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, ‘हुड़दंगी’ MLA पर चलेगा केस

केरल विधानसभा में 2015 में हुए हंगामे के मामले में तत्कालीन एलडीएफ ​विधायकों पर केस चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (28 जुलाई 2021) को केरल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि विधानसभा में संपत्ति नष्ट करने की घटना को सदन में बोलने की स्वतंत्रता के बराबर नहीं माना जा सकता है। केरल की वामपंथी सरकार ने राज्य के 6 प्रमुख सीपीएम नेताओं और शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी सहित पूर्व विधायकों के खिलाफ मामले को वापस लेने की अनुमति माँगी थी।

यह मामला मार्च 2015 का है। उस समय सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला एलडीएफ विपक्ष में था। कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में यूडीएफ सरकार चल रही थी। तत्कालीन वित्त मंत्री केएम मणि को बजट भाषण पेश करने से रोकने की कोशिश में तत्कालीन माकपा विधायकों ने सदन में जबर्दस्त हंगामा किया था।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने केरल राज्य और आरोपितों की विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज करते हुए केरल हाईकोर्ट के 12 मार्च के फैसले को कायम रखा। पीठ ने कहा, “विधानसभा में संपत्ति को नष्ट करने को सदन में बोलने की स्वतंत्रता के बराबर नहीं किया जा सकता है। इन परिस्थितियों में वापसी की अनुमति देना नाजायज कारणों से न्याय की सामान्य प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान होगा।” याचिका में राज्य सरकार ने दावा किया था कि सदन में हुई घटना के लिए सदन के अध्यक्ष की मँजूरी के बिना ही केस दर्ज किया गया था।

शीर्ष कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा, “विशेषाधिकार और प्रतिरक्षा आपराधिक कानून से छूट का दावा करने का प्रवेश द्वार नहीं है और यह नागरिकों के साथ विश्वासघात होगा। संपूर्ण वापसी आवेदन अनुच्छेद 194 की गलत धारणा के आधार पर दायर किया गया था।” जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “प्रथम दृष्टया हमें इस तरह के व्यवहार पर सख्त नजरिया रखना होगा। यह स्वीकार्य व्यवहार नहीं है। फर्श पर माइक फेंकने वाले विधायक का व्यवहार देखिए। उन्हें मुकदमे का सामना करना होगा।”

इससे पहले 5 जुलाई 2021 को मामले में सुनवाई करते हुए आरोपित विधायकों को किसी भी तरह की राहत देने से मना कर दिया था। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में 15 जुलाई को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया था। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने केरल सरकार से पूछा था, “क्या लोकतंत्र के मंदिर में चीजों को फेंकना और उन्हें बर्बाद करना न्याय के हित में है?”

संसद में फाड़े पेपर, बेंच पर फेंकी फाइलें: पेगासस की आड़ ले विपक्ष ने फिर किया हंगामा

संसद में चल रहे मानसून सत्र के दूसरे हफ्ते (8वें दिन) विपक्ष ने आज (जुलाई 28, 2021) पेगासस जासूसी मामले और कृषि कानून के विरोध में जमकर हंगामा किया। सामने आई तस्वीरों में देख सकते हैं कि विपक्षी नेता कैसे संसद की कार्यवाही को बाधित करके वहाँ हल्ला कर रहे हैं और विरोध करने के नाम पर पर्चे उछाल रहे हैं। एक तस्वीर में देख सकते हैं कि संसदीय मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी को निशाना बनाते हुए विपक्षी सांसद ने उनपर कागज और फाइलें फेंकीं।

सदन में विपक्षी नेताओं का आक्रमक रवैया देखते हुए सदन को 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। हल्ला करने वालों में कॉन्ग्रेस और टीएमसी के सांसद थे। उन्होंने ही कागजों को फाड़कर बेंच पर फेंका। इस माहौल को देख सत्ताधारी पार्टी के कई नेताओं ने आपत्ति भी जताई। नेता बोले कि इस तरह के ‘अनियंत्रित’ व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और लोगों के ज्ञान में लाया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, “कॉन्ग्रेस और टीएमसी सांसदों ने कोशिश की कि आज संसद न चलने दें। वे अपना विरोध दर्ज करवा सकते हैं लेकिन उसकी भी एक सीमा होती है। उन्होंने स्पीकर, मंत्रियों और यहाँ तक ​​कि मीडिया गैलरी पर भी कागज फेंके और तख्तियाँ दिखाईं। विपक्ष चर्चाओं से क्यों भाग रहा है?”

उल्लेखनीय है कि सदन में दिखा विपक्ष का अमर्यादित रवैया पहली दफा नहीं है। इससे पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के सांसद शांतनु सेन को अनुशासनहीनता दिखाने के कारण राज्यसभा के मानसून सत्र से निलंबित कर दिया गया था। सेन ने गुरुवार (22 जुलाई 2021) को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के हाथ से स्टेटमेंट पेपर छीना था और फाड़ कर फेंक दिया था।

उस दिन आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव पेगासस मामले पर स्टेटमेंट देने के लिए खड़े हुए थे। उस दौरान राज्यसभा में तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसदों ने भारी हंगामा शुरू कर दिया। इसी बीच टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने आईटी मंत्री के हाथ से स्टेटमेंट पेपर छीनकर फाड़ दिया। इतना ही नहीं, सेन ने पेपर फाड़ने के बाद उसके टुकड़े उपसभापति की कुर्सी की तरफ उछाल दिए। इसके बाद मार्शल को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा। वहीं, कुछ अन्य विपक्षी सांसद सदन के वेल में पहुँचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

जाति है कि जाती नहीं… यूपी में अब विकास दुबे और फूलन देवी भी नायक? चुनावी मेंढक कर रहे अपराधियों का गुणगान

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए अब मात्र लगभग 6 महीने का समय ही बचा है, ऐसे में अब सभी क्षत्रप एक-एक कर जाति के नाम पर राजनीति खेलने में लग गए हैं। जाति के नाम पर भी उन्हें कोई अच्छे लोग नहीं, बल्कि अपराधी ही याद आ रहे हैं। किसी को ब्राह्मण के नाम पर विकास दुबे और श्रीप्रकाश शुक्ला तो किसी को निषाद के नाम पर फूलन देवी याद आ रही है। आगे बढ़ने से पहले कुछ ताज़ा घटनाक्रम देखते हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब जब मायावती की ‘बहुजन समाज पार्टी (BSP)’ ब्राह्मणों को रिझाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है और हर जिले में ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित करवा रही है, उधर कुछ अन्य गुट भी ब्राह्मणों का वोट पाने के लिए बेताब हैं। ‘अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा’ के अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कानपुर के चौबेपुर स्थित बरुआ गाँव में भगवान परशुराम मंदिर के भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम में विकास दुबे और श्रीप्रकाश शुक्ला का महिमामंडन किया।

आगे बढ़ने से पहले बता देते हैं कि ये दोनों कौन थे। विकास दुबे कानपुर का एक ऐसा अपराधी था, जिस पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में 60 से भी अधिक मामले दर्ज थे। उस पर एक मंत्री की हत्या का आरोप था। जुलाई 2020 में उसने 8 पुलिसकर्मियों को मार डाला था। 90 के दशक में उसने बसपा जॉइन की थी और स्थानीय चुनाव भी जीते थे। उस पर बल-प्रयोग के आरोप लगे। हालाँकि, बिकरू गाँव में पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद वो बच नहीं सका और एक एनकाउंटर में मारा गया।

वहीं श्रीप्रकाश शुक्ला की बात करें तो वो एक शार्प शूटर था, जिसने कई हत्याएँ की थीं। और तो और, उसने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी ले ली थी। 1998 में पटना में मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या में उसका नाम आया था। उससे पहले वो कई हत्याएँ व फिरौती के लिए अपहरण की घटनाओं को अंजाम दे चुका था। उसकी तलाश में यूपी पुलिस को 1 करोड़ से अधिक रुपए खर्च करने पड़े थे और 1 लाख किलोमीटर खाक छाननी पड़ी थी।

सितंबर 1998 में गाजियाबाद स्थित वसुंधरा में STF के साथ एनकाउंटर के दौरान उसकी मौत हो गई। आश्चर्य तब होता है जब राजेंद्र नाथ त्रिपाठी जैसे नेताओं को विकास दुबे तो याद आते हैं लेकिन देवेंद्र मिश्रा नहीं। वही DSP देवेंद्र मिश्रा, जो विकास दुबे को गिरफ्तार करने गए थे। उन्हें दुबे व उसके गुर्गों ने बेरहमी से मार डाला था। त्रिपाठी जैसे लोगों को राकेश तिवारी नहीं याद आते। ये वही व्यक्ति थे, जिनकी सबसे पहले श्रीप्रकाश शुक्ला ने हत्या की थी।

क्या इन अपराधियों ने हत्या से पहले देवेंद्र मिश्रा और राकेश तिवारी की जाति पूछी? नहीं। फिर दर्जनों निर्दोषों को मार गिरा चुके इन अपराधियों के लिए जाति के ठेकेदारों के मन में प्यार क्यों उमड़ता है? जब बात ब्राह्मणों की ही हो तो इन्हें बलिया में जन्मे मंगल पांडे क्यों नहीं याद आते? लेकिन नहीं, ये तो वोट की राजनीति है और स्वतंत्रता सेनानियों का नाम लेकर उन्हें लगता है कि वोट नहीं मिलेंगे और अपराधियों का महिमामंडन कर पब्लिसिटी और फुटेज, दोनों मिलेगी।

इन स्वयंभू ठेकेदारों ने कभी जाकर देवेंद्र मिश्रा के परिवार का हाल नहीं लिया होगा। अगर जातिवाद करना ही है तो इन्हें उन निर्दोषों के हित में करना चाहिए, जो अपराध का शिकार हो गए – न कि अपराधियों के लिए। इसी तरह विकास दुबे के मारे जाने के बाद भी उसके समर्थन में माहौल बनाया गया था और योगी आदित्यनाथ की सरकार को बदनाम करने के प्रयास हुए थे। विकास और श्रीप्रकाश के बारे में त्रिपाठी का कहना है कि वो महापुरुष और वीरता के प्रेरणास्रोत थे।

ये भी कहा गया कि इन दोनों के साथ अन्याय हुआ। साथ ही पूछा गया कि अगर वो दोषी थे तो फिर न्यायालय सज़ा देती, सरकार ने क्यों दी? कोई इनसे पूछे कि जो अपराधी पुलिस की पकड़ में नहीं आते थे, जिन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था और जो तमाम तरह के तिकड़म कर के न्यायपालिका की आँखों में धूल झोंकते थे, उन्हें कैसे कोई कोर्ट सज़ा दे सकते है? पकड़ कर तो पुलिस ही लाएगी। इन्होंने हथियार उठाया, ये मारे गए।

इसी तरह खुद को ‘सन ऑफ मल्लाह’ कहने वाले बिहार के नेता और ‘विकासशील इंसान पार्टी (VIP)’ के अध्यक्ष मुकेश सहनी भी सोच रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में डकैत फूलन देवी की प्रतिमा लगा कर ही वोट मिलेंगे। फूलन देवी के साथ शुरुआत में जो अत्याचार हुआ, उसे लेकर अक्सर जातिवादी माहौल बनाने की कोशिश होती है। वो मिर्जापुर से 2 बार सांसद ज़रूर रही, लेकिन उस पर एक गाँव में 22 लोगों के नरसंहार सहित 48 आपराधिक मामले दर्ज थे।

वाराणसी से लेकर बाँदा तक, VIP ने फूलन देवी की प्रतिमा लगा कर माहौल बिगाड़ने की साजिश रची थी, लेकिन पुलिस ने समय रहते इन्हें रोका। मुकेश सहनी वही हैं, जो बिहार में एक अदद विधानसभा चुनाव में भी अपनी सीट से हार गए थे। इसी तरह जालौन के कालपी तहसील के शेखपुर गुड़ा गाँव में फूलन देवी की मौत की बरसी पर श्रद्धांजलि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद विशम्भर प्रसाद निषाद पहुँच गए

उन्होंने फूलन देवी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और शॉल ओढ़ाकर उनकी माँ और बहन का सम्मान किया। उन्होंने फूलन देवी को ‘शहीद’ बताते हुए कहा कि सपा की सरकार आते यहाँ की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसी तरह निषाद पार्टी के राज्य महासचिव और 2018 बुलंदशहर हिंसा के मुख्य आरोपियों में से एक शिखर अग्रवाल पर लोगों के एक समूह को फूलन को गोली मारने वाले व्यक्ति को मारने के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। ये घटना बुलंदशहर की है।

कुछ दिनों पहले कॉन्ग्रेस नेता जतिन प्रसाद भाजपा में शामिल हुए, जिसके बाद से ही अन्य दलों ने रिझाने की राजनीति शुरू कर दी है क्योंकि उन्हें डर है कि जिस तरह से भाजपा को हिन्दुओं का हाथ मिल रहा है, ब्राह्मणों को तोड़े बिना वो उसे नहीं रोक पाएँगे। अब तो सपा ने भी बलिया से ब्राह्मण सम्मेलन शुरू करने का ऐलान कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इससे पहले 5 ब्राह्मण नेताओं से मुलाकात भी की।

ओमप्रकश राजभर पहले से ही अपनी पार्टी को राजभर समुदाय का ठेकेदार मानते हैं। साथ ही वो असदुद्दीन ओवैसी के साथ उस गाजी मियाँ की मजार पर भी जाते हैं, जिसे राजा सुहेलदेव ने मार गिराया था। राजभर समुदाय राजा सुहेलदेव को अपने समाज का मानता है और उनका अत्यधिक सम्मान करता है। ओवैसी भी मुस्लिम वोटों की जुगत में हैं। सपा किस तरह यादवों और बसपा दलितों से खुद को जोड़ती रही है, ये छिपा नहीं है।

‘लालच में आकर बने थे ईसाई, लेकिन कम नहीं हुई परेशानी’: VHP ने 21 परिवारों की करवाई घर वापसी

गुजरात के वापी में ईसाई धर्म स्वीकार कर चुके 21 परिवारों ने एक बार फिर से सनातन धर्म में वापसी की है। धर्मपुर और कपराडा तहसील के इन 21 परिवारों ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान घर वापसी की। इन सभी को लालच देकर ईसाई बनाया गया था।

देश गुजरात की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये परिवार लालच में आ गए थे। लेकिन वापी में बापा सीताराम आश्रम के नेतृत्व वाले कार्यक्रम में इन्होंने एक बार फिर से सनातन धर्म को स्वीकार किया। इसको लेकर वापी के भाजपा विधायक कनुभाई देसाई ने कहा, “विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित हिंदू जागरण मंच के कार्यक्रम में हिंदू समाज और वलसाड जिले से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की गई।”

बीजेपी विधायक ने यह भी कहा कि उन्होंने जागरूकता पैदा करने के लिए सरकार द्वारा शुरू किए गए जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून पर भी चर्चा की है।

सफलतापूर्वक घर वापसी करने वाले एक व्यक्ति ने स्वीकार किया है कि दूसरे धार्मिक संगठनों ने उसकी परेशानियों को दूर करने का लालच देकर धर्मान्तरण करवाया था। उसने कहा, “धर्मांतरण किए हुए हमें पाँच साल हो गए थे, लेकिन हमारी मुश्किलें बनी रहीं। हमें नहीं पता था कि कौन सा धर्म अच्छा है या बुरा। हमने लालच के कारण इसे स्वीकार कर लिया था।”

यूपी में तीन युवकों की हिंदू धर्म में वापसी

बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर धोखे से धर्म परिवर्तन के शिकार हुए तीन युवाओं की घर वापसी के लिए उत्तर प्रदेश में इसी सप्ताह की शुरुआत में ही हिंदू जागरण मंच ने एक कार्यक्रम आय़ोजित किया था।

हिंदू धर्म में घर वापसी के बाद रोशन लाल ने रोते हुए खुलासा किया कि कैसे उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया था। रोशन लाल के मुताबिक, जिन लोगों ने उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया था, उन्होंने ही धमकी देकर उनकी संपत्ति पर भी कब्जा कर लिया था।

इसी तरह हर्बल दवाओं की एक दुकान के मालिक अरविंद के पास खालिद और नदीम अक्सर आते थे। दोनों ने उसे 10 लाख रुपए औऱ एक खूबसूरत लड़की से उसकी शादी करवाने का लालच देकर धर्मान्तरण करवाया था। अरविंद ने कहा कि जैसा उन दोनों ने कहा उसने वैसा ही किया, लेकिन न तो रुपए मिले और न ही उसकी शादी करवाई गई।

वर्ष 2014 में अमित का भी मुस्लिमों ने ब्रेनवॉश किया था। बहकावे में आकर वह धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बन गया और अपना नाम अब्दुल रख लिया। लेकिन, अब जब उसने एक बार फिर से हिंदू धर्म स्वीकार किया तो उनके पिता खुश हो गए।

विश्व हिंदू परिषद जबरन धर्मान्तरण कर इस्लाम में परिवर्तित किए गए परिवारों और व्यक्तियों को हिंदू धर्म में वापस लाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

‘बिहारियों के पास ज्यादा दिमाग नहीं होता’: तमिलनाडु के मंत्री KN नेहरू, DMK ने प्रशांत किशोर को बनाया था रणनीतिकार

तमिलनाडु के नगरपालिका प्रशासन मंत्री KN नेहरू ने बिहारियों को लेकर विवादित बयान दिया है। राज्य की सत्ताधारी पार्टी ‘द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) नेता ने कहा कि बिहारियों के पास हमारी तरह ज्यादा दिमाग नहीं होता। त्रिची के ‘कलाई अरंगम कन्वेंशन सेंटर’ में आयोजित DMK के एक ‘रोजगार कैंप’ में उन्होंने ये बातें कहीं। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री रहते लालू यादव ने रेलवे में बिहारियों को भर दिया।

KN नेहरू ने आरोप लगाया कि इससे जो नौकरियाँ तमिलनाडु वालों को मिलने वाली थीं, वो बिहारियों को मिल गई। बता दें कि तमिलनाडु में भी बड़ी संख्या में बिहार और उत्तर प्रदेश से मजदूर जाते हैं। उनके इस बयान से इन मजदूरों के लिए असुरक्षा का माहौल पैदा होने और दो राज्यों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। KN नेहरू केंद्र सरकार की नौकरियों को लेकर इस तरह का बयान दिया।

उन्होंने कहा, “बिहारियों के पास ज्यादा दिमाग नहीं होता है। लेकिन आप त्रिची पोनमलाई रेलवे वर्कशॉप को ही देख लीजिए, जहाँ 4000 बिहारी काम कर रहे हैं। इसी तरह पूरे तमिलनाडु में आप रेलवे में गेटकीपर के रूप में बिहारियों को देख सकते हैं।” साथ ही उन्होंने तमिलनाडु के नागरिकों को भी ये कहते हुए फटकार लगाई कि यहाँ के लोगों ने केंद्र सरकार की सरकारी नौकरियों को लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और कोशिश नहीं की।

उन्होंने ‘डायरेक्टिंग त्रिची’ नाम से एक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत जिले के 15,000 नागरिकों को नौकरी देने का वादा किया गया है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन तैयार किया गया है। रजिस्टर करने वालों को 23 जुलाई से इंडस्ट्रियल विशेषज्ञों द्वारा यूट्यूब से प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। उन्हें इंटरव्यू के लिए तैयार किया जाएगा। कुल 150 कंपनियों ने इस अभियान में हिस्सा लिया है। लेकिन, इसके माध्यम से तमिलनाडु के नेता भाषाई अनेकता को जन्म देने से बाज नहीं आ रहे।

KN नेहरू ने लालू यादव को रेलवे की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि तमिलनाडु के लोगों को केंद्रीय फोर्स से लेकर रेलवे और बैंक तक में नौकरी लेनी चाहिए। साथ ही उन्होंने दक्षिण भारतीयों में केरल व तमिलनाडु के युवाओं को सबसे प्रतिभावान करार दिया। KN नेहरू ने कहा कि दिवंगत करूणानिधि ने एक बार उन्हें सांसद बनने का ऑफर दिया था तो उन्होंने हिंदी-अंग्रेजी न आने के कारण इसे ठुकरा दिया था।

उन्होंने कहा कि उन्हें उनकी वरिष्ठता को देखते हुए दिल्ली जाने का ये ऑफर दिया गया था, लेकिन आज वो इसे ठुकरा कर पछताते हैं। सत्ता में आने के बाद ‘भीतरी बनाम बाहरी’ का खेल खेलने में लगी DMK शायद ये भूल गई है कि इस साल हुए जिस विधानसभा चुनाव के बाद उसे सत्ता मिली, उसमें उसने बिहार के प्रशांत किशोर को अपना चुनावी रणनीतिकार बना रखा था। अब सरकारी नौकरियों को लेकर वो बिहारियों के खिलाफ बोल रही।

हर्षिता के पति का राज कुंद्रा से हुआ कनेक्शन, 610 दिन में बन गई करोड़पति: कानपुर के बंद पड़े बैंक खाते में हर महीने आते थे लाखों रुपए

पोर्नोग्राफी के मामले में गिरफ्तार अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा की कंपनी के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया गया है। एक मॉडल की शिकायत पर दर्ज इस एफआईआर में कुंद्रा की कंपनी हॉटशॉट, गहना वश‍िष्ठ और चार प्रोड्यूसर्स के नाम शामिल हैं। इस बीच कानपुर से कुंद्रा के कनेक्शन लगातार सामने आ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कानपुर में एक बैंक खाते फ्रीज किया गया है जो हर्षिता श्रीवास्तव के नाम से है। हर्षिता, कुंद्रा के राजदार बताए जा रहे अरविंद श्रीवास्तव उर्फ राज ठाकुर की पत्नी है। हर्षिता का पंजाब नेशनल बैंक में अरसे से बंद पड़ा खाता एक्टिव कराकर कई महीनों से उसमें लाखों रुपए डाले जा रहे थे। रिर्पोटों के अनुसार इसके कारण करीब 610 महीने में ही हर्षिता करोड़पति बन चुकी है। इस खाते में 2.36 करोड़ रुपए जमा हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक कानपुर के श्याम नगर निवासी नर्वदा श्रीवास्तव के बेटे अरविंद श्रीवास्तव ने आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की। वह फिलहाल पत्नी हर्षिता के साथ सिंगापुर में रहता है औऱ राज कुंद्रा के प्रोडक्शन का काम सँभालता है। उसकी पत्नी का मायका कानपुर के बर्रा में है। यहीं पर पीएनबी में साल 2008 में हर्षिता और उसकी माँ के नाम से ज्वाइंट अकाउंट खोला गया था। उस दौरान खाते में केवल 20 हजार रुपए थे। बाद में कम बैलेंस होने के कारण खाता निष्क्रिय कर दिया गया था।

13 दिसंबर 2016 में अऱविंद ने पैसे जमा कराकर अकाउंट का केवाईसी कराया और उसे दोबारा से एक्टिव कराया। उसके बाद यूपाआई के जरिए उसमें शुरुआत में कुछ महीने तक तो 50-50 हजार रुपए जमा कराए गए। लेकिन साल 2019 से इसमें अचानक काफी पैसे जमा होने लगे। हर्षिता के खाते में हर महीने एनईएफटी के जरिए करीब 10 लाख रुपए की धनराशि जमा कराई जाने लगी। फिलहाल इस अकाउंट को मुंबई क्राइम ब्रांच ने होल्ड पर डाल दिया है। एक्टिव कराए जाने के बाद इस अकाउंट में करीब ढाई करोड़ रुपए जमा किए। लेकिन इसमें से करीब 14 लाख रुपए ही निकाले गए। हर्षिता की माँ का कहना है कि इस कहते में जमा पैसे के बारे में उन्हें कुछ पता ही नहीं है।

गौरतलब है कि पोर्न फ़िल्में बनाने और फिर उन्हें कुछ एप्स के जरिए बेचने के आरोप में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कारोबारी राज कुंद्रा को 18 जुलाई 2021 को गिरफ्तार किया गया था। कुंद्रा के खिलाफ IPC और IT एक्ट के अलावा ‘स्त्री अशिष्ट रूपण प्रतिषेध अधिनियम (Indecent Representation of Women (Prohibition) Act)’ के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।

बसवराज बोम्मई ने ली कर्नाटक CM की शपथ, ‘जंजीर’ देख रहे थे पिता जब मिली थी मुख्यमंत्री चुने जाने की खबर

भाजपा नेता बसवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) ने बुधवार (28 जुलाई, 2021) को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राजनीति का उनका लंबा अनुभव है। वरिष्ठ नेता येदियुरप्पा की सरकार में वो गृह, कानून और संसदीय मामलों के मंत्री थे। साथ ही वो उडुपी और हावेरी जैसे जिलों के प्रभारी मंत्री भी थे। उनका राजनीतिक करियर जनता दल से शुरू हुआ था। वो हावेरी के शिग्गओं से लगातार तीसरी बार विधायक बने हैं।

उनके पिता एसआर बोम्मई भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे थे। उन्हें बीएस येदियुरप्पा का करीबी माना जाता है। जुलाई 2011 में जब येदियुरप्पा पर अवैध खनन मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, तब उनके दो मंत्री बसवराज बोम्मई और मुरुगेश निरानी उनकी तरफ से बयान देने आए थे। येदियुरप्पा भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने से खुश न हों, लेकिन बसवराज बोम्मई का नाम उन्होंने ही सुझाया है और उनके लिए शायद यही सबसे सुरक्षित विकल्प भी था।

वो भी येदियुरप्पा की तरह लिंगायत समुदाय से आते हैं। जहाँ येदियुरप्पा लिंगायत के बनजिगा समाज से आते हैं, बसवराज बोम्मई सदर समाज से। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय की जनसंख्या 17% है और वहाँ की राजनीति पर लिंगायत मठों का काफी प्रभाव है, इसीलिए उनका चुनाव किया गया। उन्होंने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए पश्चिमी कर्नाटक के धारवाड़ से 1998 और 2004 में ‘जनता दल’ से विधान पार्षद का चुनाव जीते थे। उनके पिता को जब CM बनने की खबर मिली थी, तब वो ‘जंजीर’ फिल्म देख रहे थे।

उन्होंने 2008 में भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया और भाजपा नेताओं ने धूमधाम से स्वागत किया। उत्तरी कर्नाटक में पार्टी को मजबूत करने में उनका बड़ा योगदान रहा है। 2008 में उन्हें जल-संसाधन मंत्रालय दिया गया था। प्रोफेशन से वो मैकेनिकल इंजिनियर हैं। युवावस्था में उन्होंने पुणे में टेल्को कंपनी में जॉब भी किया है। 1995 में उन्हें ‘जनता दल’ का जनरल सेक्रेटरी नियुक्त किया गया था। अगले ही वर्ष वो तत्कालीन मुख्यमंत्री जेएच पटेल के राजनीतिक सचिव बनाए गए।

हालाँकि, अधिकतर भाजपा नेताओं की तरह वो RSS से नहीं जुड़े हुए हैं। कई दलों में उनके अच्छे सम्बन्ध हैं और एक कुशल प्रशासक के रूप में वो पहले भी अपना लोहा मनवा चुके हैं। उन्होंने पूरे कर्नाटक के सिचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। उनका जन्म 18 जनवरी, 1960 को हुआ था। वो एक कृषि विशेषज्ञ भी हैं। हावेरी में उन्होंने भारत का पहले शत-प्रतिशत सिंचाई परियोजना का निर्माण करवाया और उसे लागू करवाया।

बसवराज बोम्मई ने कहा है कि उनकी सरकार जनता के हित में काम करेगी और ये गरीबों की सरकार होगी। उनके पास एचडी देवेगौड़ा और रामकृष्ण हेगड़े जैसे बड़े नेताओं के साथ करीब से काम करने का अनुभव है। उन्होंने कहा है कि कोरोना की स्थिति को संभालने को भी वो एक नई चुनौती के रूप में लेंगे। उन्हें शांत स्वाभाव का माना जाता है, जो मजबूत निर्णय तो लेते हैं लेकिन उससे पहले लंबा विचार-विमर्श करते हैं।

सदन में जब-जब तनाव हुआ, भाजपा ने उन्हें स्थिति को संभालने के लिए लगाया। राज्य के गृह मंत्री के रूप में उन्होंने बेंगलुरु में इस्लामी दंगे को नियंत्रित किया। साथ ही पार्टी का आलाकमान भी उनसे खुश रहा है। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनके परिवार में पत्नी और दो संतान हैं। हाल ही में उनके पालतू कुत्ते की मौत के बाद पूरे परिवार को भावुक देखा गया था। अब वो कर्नाटक के मुख्यमंत्री हैं।

याद हो कि केंद्र की राजीव गाँधी की कॉन्ग्रेस सरकार ने उनके पिता एसआर बोम्मई की सरकार को 21 अप्रैल 1989 को संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत कर कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। उन्हें बहुमत साबित करने का भी मौका नहीं दिया गया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। एसआर बोम्मई बनाम भारत सरकार नाम से मशहूर इस मामले में 1994 में शीर्ष अदालत का फैसला आया था। इसमें अदालत ने उनकी सरकार की बर्खास्तगी को अनुचित बताया था।