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हमास के ‘मदरसा’ में प्रोपेगेंडा की ट्रेनिंग ले रहा पाकिस्तान, जानिए कैसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से हुई तबाही के बाद भी फैलाया गया आतंकी मुल्क की ‘जीत’ का झूठ: NCRI की स्टडी से खुलासा

अमेरिका में रहने वाला हमास समर्थक और यहूदी विरोधी एक्टिविस्ट जैक्सन हिंकल, हाल ही में भारत के खिलाफ चलाए जा रहे पाकिस्तान प्रायोजित दुष्प्रचार अभियान में अग्रणी भूमिका निभाता पाया गया। यह अभियान विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद तेज़ हुआ।

‘द न्यूयॉर्क पोस्ट’ में सोमवार, (19 मई 2025) को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंकल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को भारत के खिलाफ झूठी और भ्रामक खबरें फैलाने में सक्रिय रूप से मदद कर रहा है।

इस रिपोर्ट में नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (NCRI) द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला दिया गया है, जिसमें हिंकल की भारत-विरोधी गतिविधियों और पाकिस्तानी एजेंसियों से उसकी संभावित साँठगाँठ को उजागर किया गया है।

इसमें नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनसीआरआई) द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला दिया गया।

द न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

न्यूयॉर्क पोस्ट ने रिपोर्ट किया, “हिंकल ने भारत में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित के साथ उनके कार्यक्रम लेजिटिमेट टारगेट पर साक्षात्कार के एक सप्ताह बाद भारत पर कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ़ झूठा अभियान चलाने का आरोप लगाया। एनसीआरआई अध्ययन में दावा किया गया है कि यह पाकिस्तान की प्राथमिक खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस द्वारा फैलाया गया दुष्प्रचार था।”

रिपोर्ट के अनुसार, जैक्सन हिंकल द्वारा फैलाए गए झूठ को सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी बॉट्स द्वारा बढ़ावा दिया गया। एनसीआरआई द्वारा किए गए अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया।

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में बताया गया है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने के लिए अप्रमाणिक नेटवर्क सक्रिय हो गए। इन नेटवर्क्स ने जनरेटिव एआई और बॉट्स का इस्तेमाल करते हुए ऐसे भड़काऊ मीम्स तैयार किए और प्रसारित किए, जिनमें भारतीय प्रतीकों, राजनीतिक नेताओं और भड़काने वाले नारों के ज़रिए झूठी कहानी को बढ़ावा दिया गया।

नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (NCRI) के अनुसार, ये ‘अप्रमाणिक’ बॉट्स जैक्सन हिंकल के भारत-विरोधी संदेशों को लाखों सोशल मीडिया यूज़र्स तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

जैक्सन हिंकल के झूठ को पाकिस्तानी बॉट्स द्वारा बढ़ावा दिया गया, छवि न्यूयॉर्क पोस्ट से ली गई

ऑपइंडिया, द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है कि जैक्सन हिंकल की सोशल मीडिया गतिविधियों, खासकर एक्सपर, ऑपरेशन सिंदूर के बाद अचानक तेज़ी आई। उसने अपने पोस्ट्स में ‘भारत पर पाकिस्तान की जीत’ का झूठा दावा किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन फर्जी कहानियों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों का मजबूत समर्थन मिला, जो वास्तविकता में भारतीय सेना द्वारा अपने सैन्य ठिकानों और आतंकी शिविरों पर किए गए हमलों को रोकने में असफल रही थीं।

जैक्सन हिंकल के कुछ ट्वीट

  1. “भारत ने बहुत बड़ी गलती की”
  2. “भारत, पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं से इतना हैरान था कि उसने कल रात ट्रम्प से युद्ध विराम की भीख माँगी। ऐसा युद्ध शुरू न करें जिसे आप जीत न सकें…।”
  3. “ब्रिक्स के साथ डॉलरीकरण को आगे बढ़ाने के बजाय, भारत ने पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू कर दिया। पश्चिमी वित्तीय पूंजी के अच्छे गुलाम।”
  4. “शायद भारत के पास बेहतर हवाई सुरक्षा होती अगर उनके सभी इंजीनियर अमेरिका में न होते…।”
  5. “पाकिस्तान भारत को अपमानित कर रहा है…मोदी को ऐसा कभी नहीं करना चाहिए था।”
  6. “भारत ने पाकिस्तान को कम आंका…।”
  7. “ट्रम्प ने भारत को शांति के लिए सहमत होने के लिए मजबूर नहीं किया। चीनी हवाई सुरक्षा ने भारत को अधीनता में आने के लिए मजबूर किया।”
  8. “पाकिस्तान जीता, भारत हारा।”
  9. “पाकिस्तान ने भारत को शर्मिंदा किया।”
जैक्सन हिंकल द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि जैक्सन हिंकल के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल को भारतीय अधिकारियों द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। हालाँकि, भारत में उसकी पहुँच पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध सोमवार, (19 मई 2025) को हटा लिया गया।

जैक्सन हिंकल के झूठ का पर्दाफाश

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत अपनी सैन्य शक्ति का जोरदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को गहरी क्षति पहुँचाई। इस अभियान में भारतीय सशस्त्र बलों ने 9 पाकिस्तानी आतंकी शिविरों, कई वायु रक्षाप्रणालियों, 10 सैन्य ठिकानों, और 2 रेडियो स्टेशनों को निशाना बनाया।

यह सैन्य अभियान 7 मई 2025 को शुरू हुआ और पाकिस्तान को इतना बड़ा नुकसान हुआ कि उसे संयुक्त राज्य अमेरिका से मदद की गुहार लगानी पड़ी। भारत की सैन्य कार्रवाई ने पाकिस्तान की सेना को इस कदर हिला दिया कि उसे तुरंत युद्धविराम  की अपील करनी पड़ी।

ऑपइंडिया की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया कि कैसे भारत ने इस हमले से पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से झुका दिया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और सेना की क्षमताओं खासकर दुश्मन क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों ने पाकिस्तानी सेना और उसके जनरलों में गहरी दहशत पैदा कर दी।

भारत पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार को नष्ट करने के बेहद करीब पहुँच गया था वही रणनीतिक सौदेबाजी की चिप जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान लंबे समय से, खासकर 2014 से पहले की भारतीय सरकारों पर दबाव बनाने और छद्म आतंकवादी हमलों के बाद भारत की सैन्य प्रतिक्रिया को रोकने के लिए करता रहा है।

जब पाकिस्तान ने महसूस किया कि वह युद्ध में हार की कगार पर है और उसके महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने तबाह होने वाले हैं, तो उसे मजबूरन अमेरिका के माध्यम से भारत से ‘युद्धविराम समझौते’ के लिए संपर्क करना पड़ा।

पाकिस्तानी सेना द्वारा लिया गया यह समय पर फैसला उन्हें न केवल घरेलू स्तर पर शर्मिंदगी से बचाने में मददगार रहा, बल्कि अपनी असफलताओं के लिए जवाबदेही से भी बचा।

इस तरह, उन्हें 1971 की तरह सार्वजनिक आत्मसमर्पण और जनता के आक्रोश का सामना करने की नौबत नहीं आई। यह पूरी स्थिति इस सदियों पुरानी सच्चाई की पुष्टि करती है कि शांति केवल ताकत के आधार पर ही संभव है।

जब तक भारत आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक रूप से  मजबूत बना रहेगा, तब तक वह क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपनी क्षमता को कायम रखेगा हर बार पाकिस्तान को उसकी सीमा दिखाकर, जो अब भी आतंक और अस्थिरता फैलाने के लिए कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों  पर निर्भर है।

जैक्सन हिंकल का अकाउंट भारत में हो चुका बैन

जैक्सन हिंकल अमेरिका में रहने वाले एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जिनके एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर 3 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं। झूठी खबरें और षड्यंत्र के सिद्धांत फैलाने के लिए बदनाम हिंकल को इंस्टाग्राम, यूट्यूब और ट्विच जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स से प्रतिबंधित किया जा चुका है।

हिंकल ने यमन में हौथियों द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में भाषण दिया था और बेरूत में हिज़्बुल्लाह के आतंकवादी नेता हसन नसरल्लाह के अंतिम संस्कार में भी भाग लिया। उन्होंने हिज़्बुल्लाह के नियंत्रण वाले चैनलों अल-मनार टीवी और चैनल3 को इंटरव्यू दिए, और हमास के आतंकवादी बासम नैम का भी साक्षात्कार लिया।

एंटी डिफेमेशन लीग (ADL) ने हिंकल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इज़राइल-हमास युद्ध की शुरुआत से ही लगातार यहूदी विरोधी और इज़राइल विरोधी बयानबाज़ी फैलाई है।

भारत के लड़ाकू विमानों की आवाज सुनते ही बंकर में घुस गया था मुल्ला मुनीर, अब खुद को ही दे दिया प्रमोशन: जानिए क्या होता है ‘फील्ड मार्शल’ जो बन गया पाकिस्तानी आर्मी चीफ

पाकिस्तान की फौज का मुख्या जनरल आसिम मुनीर, जिसे मुल्ला मुनीर भी कहते है, ने खुद को फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट कर लिया है। यह सर्वोच्च फौजी पद होता है। मुल्ला मुनीर का खुद को प्रमोशन देना चौकाने वाला नहीं है, क्योंकि पाकिस्तानी फौज चुनी गई सरकारों का तख्तापलत करने के लिए कुख्यात रही है। लेकिन इस समय का चयन बेहद हास्यस्पद है।

उल्लेखनीय है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर 9 आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। हमले में बहावलपुर और मुरीदके के शिविरों में पुलवामा हमले और IC-814 अपहरण के मास्टरमाइंड सहित 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया और इसमें पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ। भारतीय सेना के इस सटीक हमले में करीब 40 पाकिस्तानी फौजी भी मारे गए और पाकिस्तान की हवाई रक्षा प्रणाली भी पस्त हो गई थी। 

युद्ध के दौरान बंकर में छिप गया था मुल्ला मुनीर!

जानकारी के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जब भारतीय मिसाइलें और ड्रोन पाकिस्तान के घर में घुसकर एयरबेस पर कहर बरपा रही थी, तब पाकिस्तानी फौज प्रमुख आसिम मुनीर कथित तौर पर एक बंकर में छिपे हुए थे। उनकी इस ‘वीरता’ के बावजूद, उन्हें फील्ड मार्शल जैसे प्रतिष्ठित पद पर प्रमोट करना पाकिस्तान की फौजी और राजनीतिक प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सोशल मीडिया पर इसकी खिल्ली उड़ाई जा रही है। एक यूजर ने लिखा कि ‘फील्ड मार्शल ऑफ सरेंडर।’ इसके अलावा एक अन्य यूजर ने पूछा, “क्या उन्होंने उसे छिपने के लिए सबसे गहरा बंकर खोजने के लिए प्रमोट किया?”

इसके अलावा एक यूजर ने पोस्ट शेयर कर लिखा कि ‘इजरायल ने सभी युद्ध जीते मगर कोई मेडल नहीं।’ दूसरी फोटो में लिखा है, “पाकिस्तान सभी युद्ध हारे, मेडल लाहौर मार्केट से लिया।”

दूसरे मीम में रणवीर सिंह की फिल्म पद्मावत की एक फोटो है जिसमें रणवीर सिंह कहते हैं, “यह तोहफा हमने खुद को दिया है।” इसे शेयर करते हुए लिखा है कि फील्ड मार्शल रैंक पर आसिम मुनीर ऐसा कह रहा होगा।

तीसरे मीम में आसिम मुनीर खुद को प्रमोट करते नजर आ रहे हैं।

क्या होता है फील्ड मार्शल का पद?

दरअसल फील्ड मार्शल सेना का सर्वोच्च पद होता है, जिसे अक्सर ‘5 स्टार’ रैंक के रूप में जाना जाता है। यह एक सम्मानजनक पद होता है, जो आमतौर पर युद्ध में असाधारण जीत या देश के लिए विशेष योगदान के लिए दिया जाता है। इस पद को प्राप्त करने वाला अधिकारी जीवन भर सक्रिय सूची में रहता है, हालाँकि सेवानिवृत्ति के बाद उसे कोई सक्रिय कमांड भूमिका नहीं निभानी होती। यह ब्रिटिश सैन्य परंपराओं का हिस्सा है, जिसे पाकिस्तान ने भी अपनाया है।

वैसे तो आधिकारिक तौर पर किसी भी फील्ड मार्शल का चुनाव देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के द्वारा होता है, लेकिन पाकिस्तान में सभी तंत्रों पर वहाँ की फौज हावी रही है और सभी फैसले भी फौज खुद कर लेती है।

क्या इससे पहले भी पाकिस्तान में कोई फील्ड मार्शल था?

जी हाँ, आसिम मुनीर से पहले पाकिस्तान के इतिहास में केवल एक ही व्यक्ति फील्ड मार्शल रहा है। वह थे जनरल मुहम्मद अयूब खान, जिन्होंने 1958 में सैन्य तख्तापलट के बाद सत्ता संभाली और 1959 में खुद को यह पद दिया था। अयूब खान पाकिस्तानी फौज के कमांडर-इन-चीफ और बाद में देश के राष्ट्रपति भी बने।

आसिम मुनीर का मामला अलग है, क्योंकि उन्हें नागरिक सरकार द्वारा प्रमोट किया गया है, और वह 2027 में अपनी सेवानिवृत्ति तक सेवारत सेना प्रमुख बने रहेंगे।

भारत ने जिस नेतृत्व वाली फौज को धूल चटाई है, उसके मुखिया को खुद को प्रमोट कर लेना बताता है, कि पाकिस्तान एक मुल्क के तौर पर कितना असफल है। माना जा रहा है कि मुल्ला मुनीर ने आंतरिक चुनौतियों से बचने और फौज में बगावत की स्थिति पर काबू करने के मकसद से यह फैसला किया है।

गिफ्ट-गाड़ियों से बिछाया जाल, फिर ड्रग्स देकर लड़कियों को बनाया शिकार: NCW की रिपोर्ट से खुलासा, हिंदू लड़कियों से रेप को ‘सवाब’ मानता था भोपाल का ‘मुस्लिम गैंग’

भोपाल के कॉलेज में ‘मुस्लिम गैंग’ ने कई छात्राओं से रेप किया। उनका वीडियो बनाया। वायरल करने की धमकी दी। इस मामले की शिकायत के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने जाँच कमेटी बनाई। उनकी रिपोर्ट में धर्मांतरण और फंडिंग जैसी कई गंभीर बातें सामने आई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, NCW ने अपना जाँच रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल को सौंप दी है। इसमें बताया गया कि लड़कियों को महंगे तोहफे दिए जाते थे। लग्जरी गाड़ियों में घुमाया जाता था। फिर नशा देकर उनके साथ रेप किया गया।

NCW का कहना है कि ये पूरा मामला सिर्फ उत्पीड़न का नहीं बल्कि धर्मांतरण, ड्रग तस्करी और संगठित अपराध के नेटवर्क की फंडिंग से जुड़ा हुआ भी लगता है।

क्या है पूरा मामला

भोपाल में 11 अप्रैल 2025 को कुछ छात्राओं ने बागसेवनिया में पुलिस में शिकायत की कि उनके साथ मुस्लिम गैंग ने रेप कर वीडियो वायरल करने को लेकर ब्लैकमेल किया।

इसके बाद से आरोपितों की गिरफ्तारी शुरू की गई। इसमें फरहान, साद, साहिल, अली और नबी को जाँच के दौरान गिरप्तार किया गया। पुलिस जाँच के दौरान फरहान को स्पॉट वेरिफिकेशन के लिए ले जाया गया जहाँ उसने भागने और पुलिस वालों से रिवाल्वर छीनने की भी कोशिश की। इस दौरान SI की बंदूक से गोली चल गई और फरहान घायल हो गया।

फरहान ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसे हिन्दू लड़कियों का रेप करने, उन्हें फँसाने और वीडियो के बहाने धमकाने का कोई भी पछतावा नहीं है। इस्लाम के हिसाब से ये सब उसके लिए सवाब का काम है।

फरहान ने यह भी बताया है ‘मुस्लिम गैंग’ हिन्दू लड़कियों का जीवन बर्बाद करना चाहता था और इस काम को जिहाद मानता था, इसलिए हिंदू लड़कियों को ही निशाना बनाया जाता था। फरहान ने तो पुलिस से ये तक कहा कि हिन्दू लड़कियों को फँसा कर रेप करने का उसे गर्व है।

इसके बाद 3 मई 2025 को NCW ने पूरे मामले की जाँच शुरू की। 5 मई 2025 तक भोपाल दौरे पर रही टीम ने पीड़ितों और उनके घरवालों के साथ कॉलेज प्रशासन और पुलिस कर्मियों से भी बात की।

क्या है NCW की रिपोर्ट

महिला आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आरोपितों ने छात्राओं को महँगे गिफ्ट और लग्जरी गाड़ियों का लालच देकर उन्हें फँसाया। उनका रेप कर वीडियो वायरल करने की धमकी दकर अन्य लड़कियों कोभी इस कृत्या का मोहरा बनाया।

NCW ने रिपोर्ट में ये भी शामिल किया कि आरोपित सामान्य आर्थिक स्थिति से थे लेकिन उनके रहन- सहन, महँगी बाइक, गैजेट्स का इस्तेमाल को देख कर उनके ड्रग रैकेट या किसी तरह की आपराधिक गतिविधियों से जुड़े होने का भी अंदेशा जताया जा सकता है।

NCW ने राज्य सरकार को यह सुझाव दिया है कि इस पूरे मामले की गहन पड़ताल करवाई जाए। इसके तहत किसी तरह की फंडिंग, धर्मांतरण के दबाव और सरकारी संस्थानों द्वारा शिक्षा निधियों और सरकारी योजनाओं के दुरूपयोग के पहलुओं पर भी जाँच की जाए।

आयोग ने कहा है कि पीड़ित छात्राओं को न्याय मिले इसे पूरी तरह से सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही दोषियों को अधिकतम दंड देने तक NCW मामले से जुड़ा रहेगा। फिलहाल ये रिपोर्ट सीएम और राज्यपाल तक पहुँची है। अब इस पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी ये प्रशासन तय करेगा।

‘सोनिया-राहुल गाँधी ने बनाए ₹142 करोड़’: नेशनल हेराल्ड केस में ED ने कोर्ट को बताया, 2 जुलाई से मनी लॉन्ड्रिंग मामले की होगी रोजाना सुनवाई

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई बुधवार (21 मई 2025) को हुई। इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कॉन्ग्रेस नेताओं सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईडी ने कोर्ट को बताया कि आरोपितों ने अपराध की आय से 142 करोड़ रुपए का फायदा उठाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह राशि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से प्राप्त किराये की आय से जुड़ी है। ईडी के विशेष वकील जोहेब हुसैन ने कोर्ट में दावा किया कि यंग इंडियन के 76% मालिक सोनिया और राहुल गाँधी ने केवल 50 लाख रुपए का भुगतान करके 90.25 करोड़ रुपए की संपत्ति हासिल की।

ईडी ने जबतक संपत्तियाँ जब्त नहीं की, तब तक सोनिया-राहुल ने उठाया फायदा

ईडी ने कोर्ट में यह भी कहा कि गाँधी परिवार ने न सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग की, बल्कि अपराध की आय को अपने पास रखकर इस अपराध को और बढ़ाया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि यंग इंडियन ने एजेएल के शेयरों का दुरुपयोग किया, जिसके जरिए भारी मुनाफा कमाया गया।

नवंबर 2023 में ईडी ने नेशनल हेराल्ड से जुड़ी 751.9 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त किया था, जिसके बाद यह मामला और सुर्खियों में आ गया। राजू ने कोर्ट में यह भी स्पष्ट किया कि आरोपितों ने तब तक इस आय का लाभ उठाया, जब तक ईडी ने कार्रवाई नहीं की।

साल 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी ने की थी शिकायत

यह मामला मूल रूप से 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू हुआ था। स्वामी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि गाँधी परिवार ने यंग इंडियन के जरिए एजेएल को धोखाधड़ी, आपराधिक दुरुपयोग और विश्वासघात के जरिए हासिल किया। 2010 में एजेएल में 1,057 शेयरधारक थे, लेकिन स्वामी का दावा है कि यंग इंडियन ने गलत तरीके से कंपनी पर नियंत्रण हासिल कर लिया।

ईडी ने इस मामले की जाँच 2014 में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शुरू की थी, जब एक ट्रायल कोर्ट ने स्वामी की निजी आपराधिक शिकायत के आधार पर आयकर जाँच में अनियमितताओं का संज्ञान लिया।

राहुल-सोनिया के वकील ने समय माँग कर मामले को आगे बढ़वाया

कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ वकीलों अभिषेक मनु सिंघवी और आरएस चीमा ने दस्तावेजों की जाँच के लिए और समय माँगा। उन्होंने कहा कि उन्हें हाल ही में करीब 5,000 पन्नों के दस्तावेज मिले हैं और मई का महीना कोर्ट और वकीलों के लिए व्यस्त रहता है। इसलिए उन्होंने जून के अंत या जुलाई के पहले सप्ताह तक का समय माँगा। कोर्ट ने उनकी माँग को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मामले को 2 जुलाई से 8 जुलाई तक रोजाना सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला एमपी-एमएलए कोर्ट के दायरे में आता है, इसलिए नियमित सुनवाई जरूरी है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने माँगी चार्जशीट और अन्य दस्तावेजों की कॉपी

इसके अलावा कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका को भी मंजूरी दे दी, जिसमें उन्होंने नेशनल हेराल्ड केस की चार्जशीट और अन्य दस्तावेजों की कॉपी माँगी थी। ईडी ने सुनवाई के दौरान यह दलील दी कि सरकारी मँजूरी की जरूरत नहीं है, क्योंकि चार्जशीट एक अधिकृत अधिकारी के जरिए दायर की गई है, जो ईडी में सहायक निदेशक के पद पर है। राजू ने एक सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सरकार किसी अधिकारी को धारा 45 के तहत शिकायत दायर करने के लिए अधिकृत कर सकती है।

रामपुर के कई युवाओं को पाकिस्तान में मिली आतंकी ट्रेनिंग, भेजता था शहजाद: सिरसा के जिस एयरबेस पर दागी मिसाइल, उसकी जानकारी तारीफ ने भेजी थी सीमा पार

पाकिस्तान के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर एयर स्ट्राइक के बाद से हरियाणा और पंजाब से अब तक 8 पाकिस्तानी जासूस पकड़े जा चुके हैं। इस कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से पकड़े गए जासूस शहजाद को लेकर एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (ATS) ने बड़ा खुलासा किया है।

ATS के अनुसार, शहजाद भारत में एक बड़े आतंकी हमले की तैयारी में था। कई दिनों तक निगरानी रखने के बाद उसे पकड़ा गया।

शहजाद को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में 18 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शहजाद भारत-पाकिस्तान की सीमा पर अवैध रूप से कॉस्मेटिक, मसाले, कपड़े समेत अन्य चीजों के तस्करी करता था।

इसी दौरान वह ISI एजेंट के संपर्क में आया और पाकिस्तान के लिए काम करने लगा। शहजाद के साथ-साथ 17 मई 2025 को हरियाणा के नूँह से पकड़े गए मोहम्मद तारीफ का भी बयान सामने आया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एक वायरल वीडियो में तारीफ ने इस बात को माना है कि पाकिस्तानी दूतावास में काम करने वाले आसिफ बालौच और जाफर से उसने भारतीय सिम कार्ड के जरिए बातचीत की और व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क में था ताकि सुरक्षा एजेंसी के सर्विलांस पर न आ सके।

तारीफ ने यह बात भी मानी है कि आसिफ बालौच और जाफर के कहने पर ही उसने पाकिस्तान को सिरसा एयरपोर्ट स्टेशन की जानकारी भेजी।

नूँह से ही राजाका गाँव से सुरक्षा जाँच एजेंसी टीम ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले अरमान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद बावला गाँव से मोहम्मद तारीफ को गिरफ्तार किया गया। दोनों को पुलिस टीम ने सप्ताह भर की रिमांड पर लिया है। उनसे और जानकारियाँ जुटाई जा रही हैं।

लोगों का नेटवर्क तैयार कर रहे थे शहजाद और तारीफ

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का मानना है कि तारीफ और अरमान स्लीपर सेल की तरह काम करते थे और ISI का नेटवर्क बढ़ाने के लिए लोगों को तैयार करते थे। सुरक्षा एजेंसियाँ उस दुकान की भी खोज में हैं जहाँ से अरमान और तारीफ ने सिमकार्ड खरीदे थे।

एटीएस की मानें तो शहजाद रामपुर के कई युवाओं को पाकिस्तान भेज चुका था। वहाँ उन्हें जासूसी और हिंसक गतिविधियों की ट्रेनिंग दी गई। इन सभी का वीजा खुद शहजाद ने लगवाया जिसमें ISI एजेंट्स की उसे मदद मिली।

पुलिस को यह भी पता चला है कि शहजाद पाकिस्तान उच्चायोग में काम करने वाले अधिकारी एहसान उर रहीम उर्फ दानिश के संपर्क में था। दानिश का नाम पहले ही ISI एजेंट के तौर पर काम करने में सामने आ चुका है। उसके संपर्क में हरियाणा की ज्योति मल्होत्रा भी रही है जिसे गिरफ्तार किया गया है।

तस्करी के बहाने जासूसी की तैयारी

शहजाद कॉस्मेटिकेस, नकली आभूषण, महिलाओं के कपड़े जैसे तस्करी का काम करता था। इसमें उसने रामपुर के कुछ युवकों को भी शामिल किया और धीरे-धीरे सभी को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजने की पूरी तैयारी की।

पाकिस्तान जासूसी एजेंसियों ने सोशल मीडिया और इंक्रिप्टेड एप्लीकेशंस का भरपूर उपयोग किया। व्हाट्सएप के कॉल और इंक्रिप्टेड मैसेज के जरिए जासूसी करने से लेकर सोशल मीडिया को लोगों से जुड़ने का जरिया बनाया जिससे सुरक्षा एजेंसी के रडार पर न आ सकें। सुरक्षा एजेंसियाँ इस पर भी अपनी जाँच कर रही हैं।

लश्कर ए तैय्यबा का को-फाउंडर और हाफिज सईद का करीबी आमिर हमजा गिन रहा है अंतिम साँस: पिछले दो साल में 17 आतंकियों का पाकिस्तान में हुआ सफाया

भारत का मोस्ट वॉन्टेड आतंकी और हाफिज सईद का करीबी अमीर हमजा अस्पताल में अंतिम साँसें गिन रहा है। हमजा लश्कर ए तैय्यबा का को-फाउंडर है और उसे अमेरिका ने 2012 में ग्लोबल टेरेरिस्ट घोषित किया था।

आमिर हमजा बुरी तरह घायल अवस्था में लाहौर के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वो घायल कैसे हुआ है? इसके बारे में कोई पक्की खबर नहीं है। हालाँकि दावा किया जा रहा है कि अज्ञात लोगों ने उसे गोलियों से भून दिया है जबकि कई लोग उसके दुर्घटना में बुरी तरह घायल होने की बात कह रहे हैं। घायल अवस्था में उसे घर से अस्पताल लाया गया था।

भारत में हुए कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा हमजा

पाकिस्तान के गुजरांवाला का रहने वाला आमिर हमजा लश्कर ए तैय्यबा का को फाउंडर है और उसे हाफिज सईद के साथ साथ अब्दुल रहमान मक्की का करीबी बताया जाता है। अपने भड़काऊ भाषण में वो भारत के खिलाफ जहर उगलता है। हमजा और सैफुल्लाह ने मिलकर साल 2005 में बेंगुलुरु में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस पर हमले की साजिश रची थी। अबू सैफुल्लाह की अज्ञात बंदूकधारियों ने हाल ही में हत्या कर दी।

कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ और टेरर फंडिंग में आमिर हफजा का बड़ा हाथ है। हामिद सईद के साथ मिलकर 1990 में उसने लश्कर ए तैय्यबा का नींव रखी। सईद के साथ मतभेद के बाद उसने 2018 में जैश ए मनकफा नाम से संगठन बनाया था और आतंकवाद को फैलाने के लिए फंड इक्ठ्ठा करता था। इसके बाद वो फिर हाफिज सईद से दोस्ती कर ली और लगातार भारत में आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश कर रहा था। आतंकी नेटवर्क फैलाने में हमजा की बड़ी भूमिका रही है।

पाकिस्तान में लगातार आतंकियों के खातमे की खबरें आ रही हैं। पिछले दो साल में अब तक 17 आतंकियों की पाकिस्तान के अलग अलग जगहों पर मौत हो चुकी है। हाल ही में अबू सैफुल्लाह को मौत के घाट उतार दिया गया था। वह नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय पर हमले की योजना में शामिल था।

इस घटना के अगले दिन यानी 19 मई 2025 को लश्कर ए तैय्यबा का एक और अहम आतंकी अब्दुल वाहिद मारा गया। दोनों को ही सिंध में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियों से भून दिया। गौरतलब है कि पाकिस्तान में मारे गए पिछले दो साल में 17 आतंकियों की गोली लगने से ही मौत हुई है।

मार्च 2025 में फैजल नदीम उर्फ अबु किताल मारा गया जो लश्कर का अहम कमांडर था। मार्च में ही मुफ्ती शाह मारा गया जो आईएसआई का एजेंट था। फरवरी 2025 में मौलाना काशिफ मारा गया जो लश्कर के ही कमांडर था। नवंबर 2023 में तीन आतंकी रहीम उल्लाह तारिक मारा गया जो मसूद अजहर का करीबी था। इसके अलावा लश्कर का आतंकी अकरम गाजी और ख्वाजा शाहिद मारा गया।

सितंबर 2023 में मौलाना जियाउर रहमान मारा गया जो लश्कर का अहम कमांडर था। इससे पहले 2023 को मसूद अजहर का एक और करीबी काजी एजाज आबिद मारा गया। 2023 मसूद अजहर के करीबियों के लिए अच्छा नहीं रहा। इस साल दाउद मलिक भी मारा गया। लश्कर का आतंकी अदनान अहमद दिसंबर 2023 में मारा गया।

हिजबुल मुजाहिद्दीन का आतंकी बशीर अहमद पीर फरवरी 2023 में गोलियों से भून दिया गया। सितंबर 2023 में लश्कर ए तैय्यबा का आतंकी रियाज अहमद जबकि मई 2023 में खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह पंजवार मारा गया

2022 में जिन आतंकियों को मारा गया उनमें जैश ए मोहम्मद का आतंकी जहूर इब्राहिम अहम है।

मकान बेचना है… सागर के शनिचरी-शुक्रवारी से हिंदू कर रहे पलायन: किसी के घर के बाहर फेंक देते थे माँस के टुकड़े, कोई बेटी से ‘लव जिहाद’ के बाद हुआ मजबूर

दैनिक भास्कर की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के सागर शहर के शनिचरी और शुक्रवारी इलाकों से हिंदू परिवार बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं। पिछले 10 सालों में यहाँ की हिंदू आबादी में 4.88 प्रतिशत की कमी आई है, जो गहरी चिंता का विषय है।

रिपोर्ट बताती है कि पिछले 5 सालों में 41 हिंदू परिवारों ने अपने मकान बेचकर ये इलाके छोड़ दिए हैं, और चौंकाने वाली बात ये है कि ये सभी मकान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खरीदे हैं। कुल मिलाकर, पिछले एक दशक में 63 हिंदू परिवारों के 228 लोग यहाँ से जा चुके हैं, और अभी भी कई घरों पर ‘बिकाऊ’ के बैनर लगे हुए दिख रहे हैं।

पलायन के पीछे की दर्दनाक कहानियाँ

दैनिक भास्कर की टीम ने कुछ ऐसे परिवारों से बात की जिन्होंने अपने पुश्तैनी मकान छोड़कर जाने को मजबूर हुए हैं:

उमाशंकर शर्मा ने बताया कि उनके 150 साल पुराने पुश्तैनी मकान को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने घेर लिया और परेशान करने लगे। घर पर केवल महिलाएँ थीं। मजबूरी में उन्हें अपना 18 लाख रुपये का मकान मात्र 5.30 लाख रुपये में बेचना पड़ा।

राजपाल सिंह ने बताया कि उनके घर के बाहर मीट के टुकड़े और अंडे के छिलके फेंके जाते थे, जिससे वहाँ रहना मुश्किल हो गया था। उनका 625 वर्गफीट का मकान दो साल तक नहीं बिका, आखिर में उन्हें कम कीमत में बेचना पड़ा।

एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उसकी बेटी को मुस्लिम युवक ने प्रेम-प्रसंग में फँसाया, जिससे मजबूरन उसे अपनी बेटी की शादी उस युवक से करानी पड़ी। बाद में बेटी को प्रताड़ित किया गया और मकान बेचने पर मजबूर किया गया।

संतोष कुमार साहू ने बताया कि उनके आसपास सिर्फ 1-2 हिंदू परिवार बचे थे। मुस्लिम लोगों के मकान अधिक होने से उनके बच्चों की शादियाँ नहीं हो रही थीं। वहाँ के माहौल के चलते रिश्ते नहीं आ रहे थे। उन्हें अपने 30 लाख रुपये के मकान को 22 लाख रुपये में बेचना पड़ा।

शनिचरी चौगना इलाके की एक हिंदू महिला ने बताया कि पति के न होने पर उन्हें अपनी दो बेटियों की सुरक्षा का डर रहता था। मुस्लिम समुदाय के लोगों से विवाद के बाद उन्होंने अपने 22 लाख रुपये के मकान को 14 लाख रुपये में बेचा।

विश्व हिंदू परिषद की अपील और प्रशासन की भूमिका

विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष अजय दुबे का कहना है कि क्षेत्र में माहौल खराब होने के कारण हिंदू परिवार अपने मकान बेचकर जा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से इस पलायन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है और कहा है कि उनका संगठन भी परेशान परिवारों की मदद के लिए तैयार है।

यह रिपोर्ट सागर के शनिचरी-शुक्रवारी क्षेत्र में एक गंभीर सामाजिक समस्या की ओर इशारा करती है, जहाँ जनसांख्यिकीय बदलाव और सामाजिक ताना-बाना खतरे में दिख रहा है। यह मुद्दा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

‘पाकिस्तान की अवाम से काफी मोहब्बत मिली’: यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ने डायरी में लिखे थे आतंकी मुल्क को लेकर ‘दिल की बात’, दानिश संग चैट मोबाइल फोन से डिलीट

हरियाणा के हिसार से पाकिस्तान की जासूसी के आरोप में पकड़ी गई यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान से खूब प्रेम है। ऐसा ज्योति ने अपनी पर्सनल डायरी में लिखा है। पुलिस ने उसकी डायरी को बरामद कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, ज्योति अक्सर अपनी अतंराराष्ट्रीय यात्राओं के अनुभवों को निजी डायरी में लिखा करती थी। अधिकारियों का मानना है कि डायरी से जाँच में काफी हद तक मदद मिल सकती है। डायरी में पाकिस्तान को लेकर काफी बातें लिखी हुई हैं।

ज्योति ने दो बार पाकिस्तान का दौरा किया। साल 2024 में जब वह 10 दिन के लिए पाकिस्तान गई थी, तब ज्योति ने भारत लौटने के बाद निजी डायरी में पाकिस्तान के बारे में दो पेज लिखे थे। इसमें पाकिस्तान की काफी तारीफें लिखी हुई हैं। साथ ही भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्तों को लेकर भी विचार लिखे गए हैं।

ज्योति ने लिखा है, “10 दिन की पाकिस्तान यात्रा पूरी करने के बाद, आज मैं वापस भारत आ गई हूँ। हमें नहीं जानते कि सरहदों की दूरियाँ कब तक रहेंगी, लेकिन दिलों की शिकायतें मिट जाएँ। हम सब एक ही जमीन, एक ही मिट्टी के हैं।” आगे लिखा कि लाहौर घूमने के लिए दो दिन का वक्त काफी कम था।

ज्योति ने आगे अपनी डायरी में पाकिस्तान में मिले आतिथ्य की प्रशंसा की और उम्मीद जताई कि अधिक भारतीय हिंदू वहाँ अपने पूर्वजों से मिल सकें। इसी के साथ यूट्यूबर ने 1947 के विभाजन के दौरान पाकिस्तान में बसे परिवारों के लिए मंदिर और गुरुद्वारों के रास्ते खोलने की इच्छा भी लिखी। इसके अलावा लिखा, “पाकिस्तान की बस और ट्रक के बारे में जितना कहूँ, उतना कम। क्रेजी और कलरफुल।”

मोबाइल फोन से हो सकता है खुलासा, फोरेंसिक जाँच को भेजा

बता दें कि यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा 5 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं। उनसे लगातार NIA, IB जाँच एजेंसिया और हरियाणा पुलिस पूछताछ कर रही है। इस दौरान रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस का कहा है कि ज्योति जाँच में अड़चन पैदा करने के लिए कुछ गुमराह बयान भी दे रही है।

ज्योति ने पाकिस्तान उच्चायोग में काम करने वाले ISI एजेंट दानिश के साथ अपने रिश्तों को नकार दिया है। यूट्यूबर ने अपने और दानिश के व्हाट्सएप चैट्स भी डिलीट किए हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह चैट्स पाकिस्तान को शेयर की गई खुफिया जानकारी का हिस्सा हो सकती हैं। इसीलिए उसके मोबाइल फोन को फोरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है।

मुर्शिदाबाद में केवल हिंदू थे टारगेट, सोई रही बंगाल पुलिस: HC जाँच कमेटी की रिपोर्ट से TMC बेनकाब, बताया- MLA अमीरुल इस्लाम के आते ही घरों को फूँका

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में पिछले महीने हुई हिंसा की जाँच के लिए हाई कोर्ट ने कमेटी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट दे दी है। कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा बनाई गई जाँच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस हिंसा में ममता बनर्जी की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के स्थानीय नेताओं की अहम भूमिका रही।

यह हिंसा वक्फ संशोधन बिल के पास होने के दौरान शुरू हुई थी, जिसें हिंदुओं को निशाना बनाया गया। जब पीड़ित लोगों ने मदद के लिए पुलिस को फोन किया, तो पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया और पूरी तरह निष्क्रिय रही।

रिपोर्ट में बताया गया कि हिंसा में बड़े पैमाने पर आगजनी और लूटपाट हुई। दुकानों और मॉल्स को बेरहमी से नष्ट किया गया। जाँच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “हमले स्थानीय पार्षद मेहबूब आलम के इशारे पर हुए। स्थानीय पुलिस गायब रही और उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।” यह रिपोर्ट एनडीटीवी ने हासिल की है।

रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य हमला शुक्रवार (11 अप्रैल 2025) को दोपहर 2:30 बजे के बाद हुआ। जिसमें बताया गया है कि “यहाँ स्थानीय पार्षद मेहबूब आलम हमलावरों के साथ आया। उसके साथ समसेरगंज, हिजलतला, शिउलीतला और डिगरी के नकाबबंद मुस्लिम थे। उन्होंने हमला कर सबकुछ जला दिया। इसके बाद विधायक अमीरुल इस्लाम आया और उसने देखा कि कौन से घर अभी तक नहीं जले। इसके बाद हमलावरों ने उन घरों में आग लगा दी।”

हिंसा पीड़ित बेटबोना गाँव के लोगों ने पुलिस को फोन किया, लेकिन पश्चिम बंगाल पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि स्थानीय विधायक अमीरुल इस्लाम वहीं मौजूद था, लेकिन उसने हिंसा रोकने की कोशिश तक नहीं की, बल्कि वो चुपचाप वहाँ से खिसक गया।

हिंसा पीड़ित ग्रामीणों के जख्मों पर नमक डालते हुए हमलावरों ने पानी की पाइपलाइन भी काट दी, ताकि वो अपने घरों में लगी आग को बुझा तक न सकें। इसी बेटबोना गाँव में 113 घर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। इन घरों को इतना नुकसान हुआ कि अब वे रहने लायक नहीं हैं। इन्हें पूरी तरह दोबारा बनाना होगा। गाँव की महिलाएँ डर के मारे अपने रिश्तेदारों के पास रहने को मजबूर हैं।

मुर्शिदाबाद हिंसा के अगले दिन शनिवार (12 अप्रैल 2025) को हिंदू पिता-पुत्र की उनके मुस्लिम पड़ोसियों ने ही हत्या कर दी।इसके बाद हुई हिंसा में इलाके की दुकानें और बाजार पूरी तरह तबाह हो गए। किराना स्टोर, हार्डवेयर की दुकानें, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़े की दुकानों को नष्ट कर दिया गया। मंदिरों को भी नहीं बख्शा गया। यह सब स्थानीय पुलिस स्टेशन से सिर्फ 300 मीटर की दूरी पर हुआ।

इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि घोषपारा (मुर्शिदाबाद का इलाका) में 29 दुकानें फूँकी गई या तोड़फोड़ की शिकार हुई। इस दौरान एक शॉपिंग मॉल जैसा बाजार लूट लिया गया और उसे बंद कर दिया गया।
जाँच समिति में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और न्यायिक सेवा के सदस्य शामिल थे। इस समिति ने गाँवों का दौरा किया और हिंसा के शिकार लोगों से बात की। इसके बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई, जिसे मंगलवार (20 मई 2025) को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने पेश किया गया।

बता दें कि ऑपइंडिया ने मुर्शिदाबाद हिंसा की विस्तृत कवरेज की थी। हमने बताया था कि किस तरह से पिता-पुत्र को इस्लामी कट्टरपंथियों ने काट डाला, इसके बाद उन दोनों के अंतिम संस्कार तक से लोगों ने दूरी बनाकर रखी। यही नहीं, पीड़ित महिलाओं को भी धमकियाँ दी गई।

हमने अपनी रिपोर्ट में ये भी बताया था कि मुर्शिदाबाद हिंसा में न सिर्फ मंदिरों पर हमले किए गए, बल्कि मंदिरों के सामने पेशाब किए गए और हिंदुओं को कलमा पढ़ने तक के लिए मजबूर किया। हमारी एक रिपोर्ट में ये बात साफ तौर पर लिखी गई है, जिसमें हिंदुओं के घरों पर निशान लगाकर उन्हें हिंसा का शिकार बनाया गया।

डोनाल्डुद्दीन अब्दुल बिन ट्रंपुद्दीन… अमेरिकी राष्ट्रपति को मुस्लिम बनने का मिला न्योता, नेटिजन्स ने नामों की कर दी बौछार: मिस्र के मौलाना का Video वायरल, कहा- अल्लाह को समर्पित हो जाओ ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस्लाम मजहब कबूल करने का न्यौता मिला है। मिस्र के मौलाना अल-अदावी ने वीडियो में ट्रंप के लिए संदेश भेजा। वीडियो में मौलाना कहते हैं, ‘अल्लाह के आगे समर्पण करो और मोक्ष पाओ।’ अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। नेटिजन्स डोनाल्ड ट्रंप को नया मुस्लिम नाम दे रहे हैं।

वीडियो में अल-अदावी ने डोनाल्ड ट्रंप के नाम संदेश जारी कर उन्हें ‘महान अमेरिकी’ बताया। उन्होंने कहा, “अल्लाह के प्रति समर्पित हो जाओ और तुम्हें मुक्ति मिलेगी। इस्लाम स्वीकार करो और अल्लाह तुम्हें दोगुना ईनाम देगा। अच्छे कर्म करो, अल्लाह पर भरोसा रखो, क्योंकि अल्लाह एक है और उसका कोई साझीदार नहीं है।”

मौलाना ने कहा कि अल्लाह ने ही ट्रंप को साम्राज्य दिया है और वही है जो इसे उनसे छीन सकता है। कहा, राष्ट्र या राष्टपति पद से धोखा मत खाओ, क्योंकि जो लोग तुमसे पहले आए थे वे मर चुके हैं। जॉनसन कहाँ है? निक्सन कहाँ है? कैनेडी कहाँ है?” अल-अदावी ने चेतावनी दी कि एक दिन ट्रंप को उनके कर्मों का फल मिलेगा, इसीलिए उन्हें अल्लाह की राह पर चलना चाहिए।

मौलाना ने ट्रंप से कहा है कि उन्हें अपने देश लौटकर लोगों को बताना कि अल्लाह के अलावा कोई नहीं है। वो कहता है, “इस्लाम को अपनाओ और मुक्ति पाओ। अल्लाह तुम्हें दोगुना इनाम देगा। मुसलमानों द्वारा तुम्हें दिए जाने वाले सबसे महान उपहार के साथ अपने देश लौटो। इस गवाही के साथ कि अल्लाह के अलावा कोई नहीं है, और यह कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।”

यह वीडियो डोनाल्ड ट्रंप के हाल में किए गए खाड़ी दौरे के बाद सामने आया है। पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुँचे थे। राष्ट्रपति बनने का बाद यह उनका पहला विदेशी दौरान था। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले कुछ मुस्लिम बहुल देशों को चुना।

ट्रंप के इस विदेशी दौरे के कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप का जोरदार स्वागत किया जा रहा है। UAE पहुँचे ट्रंप के स्वागत की एक वीडियो काफी वायरल हुई, जिसमें सफेद कपड़े पहने महिलाएँ अपने बालों को हिला रही हैं। यह सऊदी अरब का सांस्कृतिक नृत्य है, जिसे अनोखा स्वागत बताया गया। वहीं, इस वीडियो को लेकर ट्रंप को ट्रोल भी किया गया।

सऊदी अरब के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति कतर पहुँचे थे, जहाँ कतर के अमीर ने उन्हें खुद दोहा एयरपोर्ट पर रिसीव किया। ट्रंप का स्वागत पारंपरिक ऊँटों और उनके रेड साइबर ट्रक के साथ किया गया, जो काफी चर्चा में रहा। इस दौरान ट्रंप की दिलचस्पी अरब संस्कृति में काफी अधिक दिखाई दी।

ट्रंप के अरब देशों में दौरे के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग ट्रंप को मुस्लिम समर्थक होने का दावा कर रहे हैं। इसी दौरे के बाद मिस्र के मौलाना अल-अदावी ने ट्रंप को इस्लाम मजहब कबूल करने का न्यौता देने वाली वीडियो वायरल हुई।

वीडियो को रूस की मीडिया संस्था रशिया टाइम्स के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया गया है। इसके बाद से यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। हालाँकि यह साफ नहीं है कि यह वीडियो कब का है और किस मामले में बनाया गया है। लेकिन वीडियो में मौलाना राष्ट्रपति को इस्लाम अपनाने का आग्रह कर रहे हैं।

रूस की मीडिया रशियन टाइम्स द्वारा जारी की गई पोस्ट का कैप्शन (साभार: @RT_com)

वीडियो में ट्रंप की शपथ ग्रहण समारोह की एक क्लिप भी जोड़ी गई है, जिसमें वे प्रार्थना सभा में मुस्लिम अजान को ध्यान से सुनते दिखाई दे रहे हैं। इसका अर्थ माना जा रहा है कि ट्रंप इस्लाम से काफी प्रभावित हैं। वहीं, वीडियो पर काफी नेटिजंस चुटकी भी लेते नजर आ रहे हैं।

कुछ इस्लामी ने डोनाल्ड ट्रंप को मुस्लिम नाम भी दे दिया है। ट्रंप को दाऊद याह्या अल-ट्रंफी, डोनालडुद्दीन अब्दुल-बिन-ट्रंपुद्दीन-अमेरिकास्तानी, अबु मुहम्मद डोन-अल-उद्दीन ज़कारिया, मुफ्ती अल शेख अल ट्रंप जैसे मुस्लिम नाम रखने का सुझाव दिया जा रहा है। एक यूजर ने ट्रंप की मुस्लिम टोपी पहने फोटो भी शेयर की है।