हरियाणा के हिसार से पाकिस्तान के लिए देश की जासूसी के आरोप में पकड़ी गई यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के पाकिस्तान प्रेम को लेकर सोशल मीडिया का बाजार गर्म है। ज्योति की पर्सनल डायरी से लेकर पाकिस्तान में शादी करने की कई खबरें सोशल मीडिया पर चल रही हैं। इसे लेकर हिसार पुलिस ने एक प्रेस नोट जारी किया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा का दिया हवाला
हिसार पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी किए अपने प्रेस नोट में कहा है कि यह जाँच राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और सोशल मीडिया के लोगों से अनुरोध है कि किसी भी तरह की रिर्पोटिंग में संयम बरतें और आधिकारिक प्रेस नोट के तथ्यों को ही मानें। साथ ही लिखा है कि किसी भी तरह के भ्रामक खबरों को फैलाने से बचा जाना चाहिए।
ज्योति 18 मई से 5 दिन के लिए पुलिस रिमांड पर है। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के लिए पुलिस ने प्रेस नोट में कुछ बिंदुओं में अफवाहों का खंडन किया है। पुलिस ने लिखा कि आरोपी ज्योति अभी भी हिसार पुलिस की हिरासत में है। केंद्रीय जाँच संस्थाएँ उससे पूछताछ तो कर रही हैं, लेकिन किसी भी एक संस्था को उसे सौंपा नहीं गया है।
सैन्य जानकारियों से पुलिस का इंकार
पुलिस ने कहा है कि आरोपी ज्योति मल्होत्रा के पास से सेना के कोई तथ्य या किसी भी सैन्य, रक्षा या रणनीतिक जानकारी की पहुँच होने पर कोई सबूत नहीं मिला है। हालाँकि प्रेस नोट में ये जरूर लिखा गया है कि ज्योति पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑफिसर्स (PIOs) के संपर्क में थी और सूचनाओं का आदान प्रदान किया था।
उसके पास से 3 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और कुछ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी बरामद किए गए हैं। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की जाँच के लिए उसे फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। साथ ही ज्योति के 4 बैंक अकाउंट की भी पड़ताल की जा रही है।
वीजा दिलाने वाले से भी हो रही पूछताछ
ज्योति कई बार पाकिस्तान का दौरा कर चुकी है। उसके ब्लॉग्स और वीडियो में पाकिस्तानी की चर्चा कई तरह से दिखती है। उशमें वह पाकिस्तान की बड़ाई करती हुई नजर आती है।
पुलिस ने ज्योति को वीजा दिलवाने वाले कुरुक्षेत्र के एजेंट हरकीरत को भी पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया है। हरकीरत के पास से भी 2 मोबाइल फोन और गैजेट्स मिले हैं। हालाँकि उसे अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है। ज्योति के साथ उसके फोन को भी फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है।
वायरल चैट और डायरी को पुलिस ने नकारा
ज्योति के साथ एक पाकिस्तानी जासूस की व्हाट्सएप चैट भी वायरल हुई थी। इस व्हाट्सएप चैट के बारे में हिसार पुलिस ने कहा है कि इसकी सत्यता प्रमाणित नहीं हुई है। इसके अलावा ज्योति ने पाकिस्तान से वापस आने के बाद एक डायरी लिखी थी जिसमें उनका पाकिस्तान प्रेम खुलकर सामने आया था।
हिसार पुलिस ने इस डायरी को लेकर भी भ्रामक खबरों के बारें में स्पष्ट किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की कथित डायरी के जो पन्ने सार्वजनिक रूप से दिखाए जा रहे हैं, वह पुलिस के पास है ही नहीं।
धर्म बदलने की जानकारी नहीं
इसके अलावा ज्योति के किसी पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑफिसर के साथ शादी या धर्म परिवर्तन के बारे में भी अभी तक कोई पुख्ता तथ्य सामने नहीं आया है। हालाँकि इस प्रेस नोट में हिसार पुलिस ने ज्योति के पाकिस्तान जासूसों के संपर्क में होने की बात साफ तौर पर लिखी है।
पुलिस ने कहा है कि ज्योति यह जानती थी कि जिन लोगों के साथ वह संपर्क में है उनमें से कुछ लोग पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑफिसर्स हैं। इसके अलावा इस तरह का कोई तथ्य नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके की ज्योति किसी आतंकवादी संगठन के संपर्क में थी और उसके आतंकवादी घटनाओं में भी ज्योति की संलिप्ता के तथ्य सामने नहीं आए हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार (20 मई 2025) को ‘गोल्डन डोम’ नामक एक नई और उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली शुरू करने की घोषणा की। यह प्रणाली अंतरिक्ष से आने वाले खतरों को रोकने में सक्षम होगी। ट्रम्प ने अनुमान लगाया कि इस परियोजना की लागत लगभग 175 बिलियन डॉलर (लगभग 1,460 करोड़ रुपए) होगी और इसे तीन वर्षों के भीतर चालू किया जाएगा। उन्होंने यह भी वादा किया कि यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 2029 तक पूरी हो जाएगा, जो उनके संभावित दूसरे कार्यकाल का अंतिम वर्ष होगा।
इस नई प्रणाली का उद्देश्य हाइपरसोनिक मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और उन्नत क्रूज मिसाइलों को नष्ट करना है। ट्रम्प ने कहा कि इसके लिए ‘आधिकारिक रूप से एक आर्किटेक्चर का चयन’ किया जा चुका है। यह प्रणाली मौजूदा अमेरिकी रक्षा बुनियादी ढांचे के साथ उन्नत तकनीकों को एकीकृत करेगी, जिससे अंतरिक्ष से प्रक्षेपित मिसाइलों समेत सभी विदेशी मिसाइल खतरों से देश की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
ट्रम्प ने जनवरी में ‘गोल्डन डोम’ कार्यक्रम की शुरुआत रूस और चीन से बढ़ते मिसाइल खतरों को विफल करने के लक्ष्य के साथ की थी। इस परियोजना का उद्देश्य ऐसा उपग्रह नेटवर्क स्थापित करना है, जो संभवतः सैकड़ों की संख्या में आने वाली मिसाइलों का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें रोकने में सक्षम हो।
व्हाइट हाउस की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने घोषणा की कि अमेरिकी अंतरिक्ष बल के जनरल माइकल गुएटलीन इस रणनीतिक कार्यक्रम के प्रमुख कार्यक्रम प्रबंधक होंगे। ट्रम्प ने यह भी बताया कि निर्माण कार्य शुरू करने के लिए अगले वर्ष के बजट में 25 बिलियन डॉलर (लगभग 208.75 करोड़) दिए जाएंगे।
यह प्रणाली इतनी शक्तिशाली होगी कि यह मिसाइलों को दुनिया के किसी भी हिस्से से या अंतरिक्ष से दागे जाने पर भी उन्हें रोकने में सक्षम होगी। ट्रंप ने कहा कि यह प्रणाली अब तक की सबसे बेहतरीन मिसाइल रक्षा प्रणाली होगी और यह उनके उस लंबे समय से किए गए चुनावी वादे को पूरा करेगी, जिसमें उन्होंने उड़ान के किसी भी चरण में मिसाइलों को नष्ट करने वाली अत्याधुनिक सुरक्षा ढाल बनाने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि गोल्डन डोम अमेरिका की मातृभूमि की रक्षा करेगा। कनाडा ने भी इस परियोजना में शामिल होने की इच्छा जताई है। ट्रंप ने इस संदर्भ में पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा प्रस्तावित अंतरिक्ष-आधारित मिसाइल रक्षा प्रणाली “स्टार वार्स” का भी उल्लेख किया।
इस परियोजना की प्रेरणा उन्हें 2024 में ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान मिली, जब इजरायल की आयरन डोम प्रणाली ने 300 से अधिक हमलों को विफल कर दिया था। ट्रंप ने अमेरिका में भी एक ऐसी ही प्रणाली की बात शुरू की। उन्होंने इस पहल को अमेरिका की सफलता और अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
गोल्डन डोम और इसका महत्व
गोल्डन डोम एक अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली होगी जिसमें अंतरिक्ष और जमीन दोनों सुरक्षित होंगे। यह सिस्टम चार महत्वपूर्ण चरणों में मिसाइल खतरों से निपटने के लिए बनाया जा रहा है, प्रक्षेपण से पहले ही खतरे को पहचानना और नष्ट करना, शुरुआती रोकथाम, रास्ते में कार्रवाई, और अंतिम समय में रोकथाम। इसका मतलब है कि यह प्रणाली मिसाइलों को उनके लॉन्च होते ही चाहे वे ज़मीन से दागी गई हों या अंतरिक्ष से ट्रैक, नष्ट और रोकने में सक्षम होगी।
यह प्रणाली विशेष रूप से हाइपरसोनिक मिसाइलों जैसे खतरों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। हाइपरसोनिक मिसाइलें अपनी बेहद तेज गति और ग्लाइड चरण में कम ऊँचाई पर उड़ने के कारण पारंपरिक रडार सिस्टम से ट्रैक नहीं होता है। इसलिए उन्हें जमीन या समुद्र से रोकना मुश्किल होता है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरिक्ष-आधारित ट्रैकिंग और अवरोधन प्रणालियाँ अधिक प्रभावी साबित होती हैं, क्योंकि वे मिसाइलों को उनके बूस्ट चरण में ही पहचान सकती हैं, जब उनका उड़ान मार्ग पहले से ही पता होता है, जिससे लक्ष्य साधने और समय पर प्रतिक्रिया संभव हो पाती है।
पेंटागन के प्रमुख पीट हेगसेथ के अनुसार, गोल्डन डोम का डिज़ाइन मौजूदा जमीनी रक्षा क्षमताओं के साथ ताल मेल में काम करेगा और यह क्रूज़ मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक मिसाइलों और ड्रोन से, चाहे वे पारंपरिक हों या परमाणु, अमेरिका की रक्षा करने में सक्षम होगा। पेंटागन के योजनाकार पिछले कई महीनों से इस प्रणाली के विभिन्न संस्करणों पर काम कर रहे हैं, जिनमें लागत के हिसाब से ‘मध्यम’, ‘उच्च’ और ‘अतिरिक्त उच्च’ श्रेणियाँ शामिल हैं। इन संस्करणों में अंतरिक्ष आधारित इंटरसेप्टर को भी शामिल किया गया है, और उनकी कुल लागत और क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने सेंसर और उपग्रह तैनात किए जाते हैं। एक अमेरिकी योजना अधिकारी ने बताया कि इस समय आवश्यकताओं और प्रणाली की जटिलता को लेकर चर्चाएँ चल रही हैं।
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार अमेरिका अंतरिक्ष आधारित इंटरसेप्टर खरीदेगा। कॉन्ग्रेस के बजट कार्यालय ने अनुमान लगाया है कि गोल्डन डोम प्रणाली के अंतरिक्ष आधारित घटकों की लागत अगले 20 वर्षों में 542 बिलियन डॉलर (लगभग 45.25 लाख करोड़ रुपए) तक पहुँच सकती है। ट्रंप के प्रस्तावित कर राहत विधेयक में इस कार्यक्रम के लिए शुरुआती चरण में 25 बिलियन डॉलर (लगभग 2.075 लाख करोड़ रुपए) की राशि की माँग की गई है, जो फिलहाल कॉन्ग्रेस में लंबित है।
पेंटागन लंबे समय से चेतावनी देता आ रहा है कि चीन और रूस की अत्याधुनिक मिसाइल क्षमताओं के चलते अमेरिका को नए प्रकार की प्रतिरक्षा प्रणाली की आवश्यकता है। गोल्डन डोम के अतिरिक्त उपग्रह और अंतरिक्ष आधारित इंटरसेप्टर इन परिष्कृत मिसाइलों को उनकी उड़ान के शुरुआती या मध्य चरण में ही नष्ट करने में सक्षम होंगे। यही अंतरिक्ष तत्व इस परियोजना की सबसे अधिक लागत के लिए ज़िम्मेदार माने जा रहे हैं।
अमेरिकी अंतरिक्ष बल के प्रमुख जनरल चांस साल्ट्ज़मैन ने सांसदों को बताया कि गोल्डन डोम में इस्तेमाल होने वाले हथियार ऐसी नई और उभरती हुई आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्हें अब तक किसी सैन्य संगठन ने पूरा नहीं किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि रूस और चीन पहले ही अंतरिक्ष में आक्रामक हथियार तैनात कर चुके हैं, जिनमें ऐसे उपग्रह शामिल हैं जो अमेरिकी उपग्रहों को निशाना बनाकर गिरा सकते हैं, जिससे अमेरिका की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
गोल्डन डोम की आवश्यकताओं को पेंटागन द्वारा अभी भी विकसित किया जा रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, पेंटागन और अमेरिकी उत्तरी कमान वर्तमान में एक ‘प्रारंभिक क्षमता दस्तावेज़’ पर काम कर रहे हैं, जो यह निर्धारित करेगा कि इस प्रणाली से क्या-क्या हासिल किया जाना चाहिए। उत्तरी कमान, जो अमेरिका की मातृभूमि की रक्षा के लिए ज़िम्मेदार है, इस बात को परिभाषित कर रही है कि उसे किस प्रकार की क्षमताओं की आवश्यकता है।
ट्रंप ने वादा किया है कि गोल्डन डोम प्रणाली का पूरा निर्माण संयुक्त राज्य अमेरिका में ही किया जाएगा, जिसमें जॉर्जिया, अलास्का, फ्लोरिडा और इंडियाना जैसे राज्यों में प्रमुख सुविधाएँ स्थापित की जाएँगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अमेरिकी संस्करण इज़राइल की आयरन डोम प्रणाली से प्रेरित होगा, लेकिन इसे कहीं अधिक व्यापक और शक्तिशाली बनाया जाएगा ताकि यह चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे दुश्मनों से आने वाले लंबी दूरी के मिसाइल खतरों का मुकाबला कर सके।
गौरतलब है कि इज़राइल की आयरन डोम वायु रक्षा प्रणाली 2011 में सक्रिय हुई थी और तब से उसने हमास और अन्य विरोधियों द्वारा दागे गए हजारों कम दूरी के रॉकेट और प्रोजेक्टाइल को सफलतापूर्वक रोकने का काम किया है।
ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया कि पूरी प्रणाली का निर्माण पूरी तरह स्वदेशी होगा। इस परियोजना के लिए रेथियॉन, एल-3 हैरिस टेक्नोलॉजीज और लॉकहीड मार्टिन जैसे प्रमुख रक्षा ठेकेदारों को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। पेंटागन उपग्रहों, सेंसर और इंटरसेप्टर सहित विभिन्न घटकों का परीक्षण जल्द शुरू करने की योजना बना रहा है और इन तकनीकों के सफल परीक्षण के बाद उन्हें बड़े पैमाने पर गोल्डन डोम नेटवर्क के तहत खरीदा जाएगा।
ट्रंप ने वादा किया है कि गोल्डन डोम प्रणाली का पूरा निर्माण संयुक्त राज्य अमेरिका में ही किया जाएगा, जिसमें जॉर्जिया, अलास्का, फ्लोरिडा और इंडियाना में प्रमुख निर्माण और संचालन स्थल होंगे। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी प्रणाली इज़राइल की आयरन डोम से प्रेरित होगी, लेकिन इसे कहीं अधिक व्यापक और शक्तिशाली रूप में विकसित किया जाएगा ताकि यह चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों से आने वाले लंबी दूरी के मिसाइल खतरों का प्रभावी रूप से सामना कर सके।
इज़राइल की आयरन डोम प्रणाली, जो 2011 से सक्रिय है, हमास और अन्य दुश्मनों द्वारा दागे गए हजारों कम दूरी के रॉकेट और प्रोजेक्टाइल को रोकने में सक्षम रही है। ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि गोल्डन डोम की पूरी उत्पादन प्रक्रिया स्वदेशी होगी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए संभावित प्रमुख ठेकेदारों में रेथियॉन, एल-3 हैरिस टेक्नोलॉजीज और लॉकहीड मार्टिन शामिल हैं। पेंटागन उपग्रहों, सेंसर और इंटरसेप्टर जैसे कई प्रमुख तत्वों का परीक्षण शुरू करने की योजना बना रहा है, और इन तकनीकों की सफल जाँच के बाद उन्हें गोल्डन डोम नेटवर्क के तहत बड़े पैमाने पर खरीदा जाएगा।
गोल्डन डोम और रोनाल्ड रीगन का स्टार वॉर्स कार्यक्रम
ट्रंप के गोल्डन डोम प्रस्ताव का एक प्रमुख हिस्सा ऐसे मिसाइल पहचानने वाले यंत्र और मिसाइल मारक यंत्र उपग्रहों का नेटवर्क बनाना है, जिन्हें पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इस प्रणाली में हजारों छोटे उपग्रह शामिल होंगे, जो किसी मिसाइल के पनडुब्बी या साइलो से लॉन्च होते ही, महज कुछ सेकंड के भीतर उस पर हमला करने में सक्षम होंगे। कुछ साल पहले तक इतने बड़े उपग्रह नेटवर्क की कल्पना भी मुश्किल थी, लेकिन अब यह तकनीकी रूप से संभव होता नजर आ रहा है।
इस दिशा में एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स पहले ही अग्रणी भूमिका निभा रही है, जिसने स्टारलिंक नामक एक विशाल इंटरनेट संचालित उपग्रह नेटवर्क तैनात करना शुरू किया है। स्पेसएक्स के अनुसार, स्टारलिंक नेटवर्क में इस समय लगभग 7,000 उपग्रह कक्षा में सक्रिय हैं। जो कि अंतरिक्ष आधारित मिसाइल रक्षा के लिए आवश्यक उपग्रहों की संख्या के अधिकांश अनुमान के करीब है।
दिलचस्प बात यह है कि एक अरबपति, जो हाल ही में बने यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) के प्रमुख हैं और ट्रंप प्रशासन में सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं, वो गोल्डन डोम परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी सहयोगी के रूप में भी जाना जाता है। पलांटिर और एंडुरिल जैसी प्रमुख रक्षा टेक कंपनियों के साथ, स्पेसएक्स अब सिस्टम के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष घटकों के निर्माण के लिए एक प्रमुख दावेदार बन गई है।
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) में मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट के निदेशक टॉम कराको ने कहा कि गोल्डन डोम प्रयास ‘काफी समय से विचाराधीन’ है और इसे अब सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी माना कि अंतरिक्ष से आने वाली मिसाइलों को रोकना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भविष्य का अगला बड़ा सैन्य संघर्ष संभवतः पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपर, अंतरिक्ष में ही लड़ा जाएगा।
उनका मानना है कि गोल्डन डोम की क्षमताएँ संयुक्त राज्य अमेरिका को एक मजबूत और बहुआयामी रक्षा प्रदान करेंगी, जिसका उपयोग आवश्यकता पड़ने पर उपग्रह विरोधी युद्ध जैसी स्थितियों में भी किया जा सकेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “अंतरिक्ष में मौजूद और अंतरिक्ष से गुजरने वाली बहुत सी चीजों से निपटने की आवश्यकता है,” जो इस प्रणाली की व्यापक उपयोगिता को दर्शाता है।
गोल्डन डोम और रोनाल्ड रीगन की स्टार वार्स
कई वर्षों से, अमेरिकी राजनेता अंतरिक्ष आधारित मिसाइल रक्षा प्रणाली का सपना देखते आए हैं। इस दिशा में पहली बड़ी पहल 1983 में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने की थी, जब उन्होंने सोवियत संघ से आने वाली मिसाइलों को रोकने के लिए एक प्रणाली की योजना की घोषणा की थी। इस योजना को रणनीतिक रक्षा पहल (Strategic Defense Initiative – SDI) कहा गया, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष-आधारित लेजर और इंटरसेप्टर के माध्यम से परमाणु हमले से अमेरिका की रक्षा करना था।
रीगन ने एक ऐसी रक्षात्मक ढाल की परिकल्पना की थी, जो दुश्मन की मिसाइलों को उनके उड़ान के हर चरण में पहचान कर नष्ट कर सके, भले ही उस समय ऐसी तकनीकें उपलब्ध न थीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया, “मुझे पता है कि यह एक कठिन कार्य है, जिसे इस सदी के अंत से पहले पूरा नहीं किया जा सकता है। इसमें कई मोर्चों पर वर्षों, शायद दशकों का प्रयास लगेगा।”
रणनीतिक रक्षा पहल (SDI) की आलोचना करने वालों ने इसे ‘स्टार वार्स’ कहा, यह तर्क देते हुए कि यह योजना व्यावहारिक रक्षा प्रणाली से अधिक विज्ञान कथा जैसी थी। फिर भी, इसने 1980 के दशक की रणनीतिक चर्चाओं को गहराई से प्रभावित किया और अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हथियारों की संख्या घटाने की चर्चा को दिशा दी। उस समय SDI की अनुमानित लागत 60 बिलियन डॉलर से $100 बिलियन डॉलर (लगभग 4.98 लाख करोड़ से 8.30 लाख करोड़) के बीच आँकी गई थी। हालाँकि यह प्रणाली पूरी तरह साकार नहीं हो सकी, सोवियत संघ उसके पहले ही बिखर गया।
रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति रीगन की SDI को बनाए रखने की जिद के कारण सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव के साथ कई अहम हथियार वार्ताएँ रुक गई थीं। अब ट्रंप का गोल्डन डोम उसी उद्देश्य को दोहराता है। एक ऐसी मिसाइल रक्षा प्रणाली जो अमेरिकी मातृभूमि को अंतरिक्ष से आने वाले खतरों से बचा सके।
गोल्डन डोम और SDI दोनों ही ऐसे ऐतिहासिक क्षणों का प्रतीक हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ऐसी सैन्य प्रौद्योगिकियों की योजना बनाई जो उस समय की क्षमताओं से कहीं आगे थीं। यदि गोल्डन डोम सफल होता है, तो यह पहले के ‘स्टार वार्स’ कार्यक्रम की तरह वैश्विक हथियार नियंत्रण, सैन्य अंतरिक्ष नीति और परमाणु निरोध की अमेरिकी रणनीति को मौलिक रूप से बदल सकता है।
ट्रंप ने दावा किया, “रोनाल्ड रीगन (40वें अमेरिकी राष्ट्रपति) इसे कई साल पहले चाहते थे, लेकिन उनके पास उस समय तकनीक नहीं थी। यह अब कुछ ऐसा है जो हमारे पास होने जा रहा है। हम इसे उच्चतम स्तर पर बनाए रखेंगे और हम वास्तव में वह काम पूरा करेंगे जिसे राष्ट्रपति रीगन ने 40 साल पहले शुरू किया था।” उन्होंने यह भी जोर दिया कि गोल्डन डोम प्रणाली कीकनीक ‘जितनी हो सके उतनी परिपूर्ण है,’ हालाँकि इसके कुछ हिस्सों का अभी तक परीक्षण नहीं किया गया है।
ट्रंप का सपना
अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी अंतरिक्ष बल की स्थापना का समर्थन किया, जिसे 20 दिसंबर 2019 को औपचारिक रूप से सेना की एक नई शाखा के रूप में गठित किया गया। इसका उद्देश्य चीन और रूस द्वारा अंतरिक्ष में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के जवाब में अमेरिका की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना था। अब ट्रंप द्वारा प्रस्तावित गोल्डन डोम, अंतरिक्ष में तैनात की जाने वाली पहली अमेरिकी रक्षा प्रणाली बनने जा रही है। उन्होंने कहा, “मैंने अमेरिकी लोगों से वादा किया था कि मैं अपनी मातृभूमि को विदेशी मिसाइल हमले के खतरे से बचाने के लिए अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा कवच का निर्माण करूँगा।”
पिछले साल सैन्य अधिकारियों ने कहा था कि उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका की रक्षा के लिए गोल्डन डोम जैसी मिसाइल ढाल की तत्काल आवश्यकता का संकेत नहीं दिया था, क्योंकि मौजूदा मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ पहले से ही सक्रिय थीं। इसके बावजूद, ‘ट्रंप की सबसे श्रेष्ठ रक्षा कवच’ बनाने की टिप्पणी को उनकी रैलियों में भारी समर्थन मिला। इस जनसमर्थन के चलते रिपब्लिकन पार्टी ने 2024 के चुनावों से पहले इस मिसाइल ढाल परियोजना को अपने आधिकारिक पार्टी मंच का हिस्सा बना लिया।
जनवरी में ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी किया, जिसमें अमेरिकी रक्षा सचिव पीटर हेगसेथ से इस परियोजना को पूरा करने का आग्रह किया गया। 27 जनवरी को जारी आदेश में कहा गया, “बैलिस्टिक, हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों तथा अन्य उन्नत हवाई हमलों से होने वाले खतरे संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बने हुए हैं।”
पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता और रक्षा सचिव पीटर हेगसेथ के वरिष्ठ सलाहकार सीन पार्नेल ने कहा, “रक्षा विभाग ने मौजूदा अमेरिकी मिसाइल रक्षा तकनीक और अत्याधुनिक नवाचारों की समीक्षा के लिए देश के सबसे प्रतिभाशाली दिमागों और सर्वोत्तम तकनीकी विशेषज्ञों को एकत्र किया है, ताकि हमारी मातृभूमि के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा छतरी को तेजी से विकसित और तैनात किया जा सके।”
हालाँकि, इस प्रणाली की असली कसौटी यह होगी कि क्या यह अपने भविष्य के वादों को राजनीतिक जाँच और तकनीकी सीमाओं के सामने टिकाए रख सकेगी, जैसा कि 1980 के दशक में रणनीतिक रक्षा पहल (SDI) के साथ हुआ था।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हिंदुओं को चुन-चुन कर निशाना बनाया गया। कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा गठित जाँच समिति ने भी अपनी विस्तृत रिपोर्ट में इस हिंसा की क्रूरता को उजागर किया है, जिसमें सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के पार्षद और विधायक की संलिप्तता की बात सामने आई है। यह हिंसा वक्फ संशोधन बिल के पास होने के दौरान शुरू हुई, जिसके विरोध की आड़ में हिंदुओं को निशाना बनाया गया। हिंदुओं के घरों को फूँकने के बाद उन घरों के पानी के कनेक्शन भी काट दिए गए, ताकी जलते घरों की आग को बुझाया न जा सके।
ऑपइंडिया ने इन घटनाओं की विस्तृत कवरेज पहले ही की थी और अब हाई कोर्ट की जाँच कमेटी की रिपोर्ट ने इन दावों पर मुहर लगा दी है।
कलकत्ता हाई कोर्ट की जाँच कमेटी की रिपोर्ट में हिंदुओं को निशाना बनाने की घटनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा की शुरुआत 11 अप्रैल 2025 को शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे के बाद हुई और यह 12 अप्रैल 2025 को भी जारी रही। यह हिंसा मुर्शिदाबाद के बेटबोना गाँव, धूलियान, पालपारा (वार्ड नंबर 16), समसेरगंज, हिजलतला, शिउलीतला, डिगरी और घोषपारा जैसे क्षेत्रों में हुई। बेटबोना गाँव में 113 घर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जो अब रहने लायक नहीं बचे हैं और इन्हें पूरी तरह से दोबारा बनाना होगा।
पानी का कनेक्शन काट दिया गया, ताकि बुझाई न जा सके आग
हमलावरों ने सुनियोजित तरीके से पानी की पाइपलाइन काट दी, पानी के टैंक और सबमर्सिबल पंप को नष्ट कर दिया ताकि पीड़ित आग बुझा न सकें। मिट्टी का तेल डालकर घरों में आग लगाई गई, जिससे सारी संपत्ति जलकर राख हो गई। मुर्शिदाबाद में हिंदुओं के घर में रखे सभी कपड़ों को जला दिया गया, ताकि घर की महिलाओं के पास अपने शरीर को ढकने के लिए कुछ भी न बचे
रिपोर्ट में कई पीड़ितों के बयान दर्ज किए गए हैं, जो इस हिंसा की क्रूरता को बयान करते हैं। सभी पीड़ित हिंदू समुदाय से हैं और उन्होंने बताया कि कैसे उनके घरों को जलाया गया, संपत्ति लूटी गई और उनके परिवार पर जानलेवा हमले किए गए।
प्रतिमा मंडल (बेटबोना): प्रतिमा मंडल ने बताया कि उनके घर के पास एक जिंदा बम पाया गया था। हमलावरों ने उनके घर से सोने के गहने और फर्नीचर लूट लिया। इस हमले में कई अन्य प्रभावित लोग भी शामिल हैं। हमला पीड़ितों मनोज रॉय, आकाश मंडल, बिकाश मंडल, निखिल मंडल, चित्ता रॉय, बाबूल मंडल, निबारून मंडल, शम्पा मंडल, भबानंदा घोष, बसुदेब मंडल, राम मंडल, अर्जुन मंडल और लतिका मंडल शामिल हैं।
प्रशांत मंडल और सरस्वती मंडल: इस दंपति ने बताया कि उनके टोटो वैन, मोटरसाइकिल, साइकिल और एक ट्रैक्टर को लूट लिया गया और उनमें आग लगा दी गई।
फूलचंद मंडल और पलाश मंडल: इन पीड़ितों ने बताया कि वह तीन सदस्यों वाला परिवार हैं, जिसमें उनकी पत्नी और एक छोटा बच्चा शामिल है। हमलावरों ने उनके घर को तबाह कर दिया और उस जगह को रहने लायक नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि हमलावरों ने उनकी पत्नी और बच्चे को बचाने के लिए भागने की कोशिश करने वालों पर चाकू से हमला किया। चाकू उनकी गर्दन और नाभि पर मारा गया, जिससे उनकी जान खतरे में पड़ गई।
(रिपोर्ट की कॉपी, फोटो साभार: X_PadmajaJoshi)
परूल दास: परूल दास ने बताया कि हमलावरों ने उनके घर का दरवाजा तोड़ दिया, खिड़कियाँ तोड़ दीं, और बोतलें व पत्थर फेंके। उन्होंने उनकी पत्नी और बेटे को अगवा कर लिया। हमलावरों ने अपने चेहरे कपड़ों से ढके हुए थे ताकि उनकी पहचान न हो सके।
हरगोविंदा दास और चंदन दास: सबसे भयावह घटना में 74 वर्षीय हरगोविंदा दास और उनके 40 वर्षीय बेटे चंदन दास को उनके मुस्लिम पड़ोसियों ने कुल्हाड़ी से काट डाला। एक व्यक्ति वहां तब तक खड़ा रहा जब तक कि दोनों की मौत नहीं हो गई। यह घटना 12 अप्रैल को हुई। ऑपइंडिया ने बताया कि इस हत्या के बाद इलाके में इतना डर फैल गया कि दोनों के अंतिम संस्कार में भी लोगों ने दूरी बनाकर रखी।
(रिपोर्ट की कॉपी, फोटो साभार: X_PadmajaJoshi)
कृष्णा चंदा पाल: कृष्णा चंदा पाल ने बताया कि हमलावरों ने उनके घर से 17 लाख रुपये की कीमत के सोने के गहने और फर्नीचर लूट लिया। हमलावरों ने घर के पिछले दरवाजे से घुसकर परिवार के सदस्यों पर हमला किया।
जय राम पाल: जय राम पाल ने बताया कि उनकी मिट्टी के बर्तनों की दुकान और साइबर कैफे को जलाकर राख कर दिया गया।
अपुर्बा के.आर. पाल और कृपा सिंधु पाल: इन पीड़ितों ने बताया कि उनकी एक साइकिल और 32 इंच का रंगीन टीवी के साथ ही करीब 2 लाख रुपये भी लूट लिए गए।
नबीन चंदा पाल और संकर पाल: नबीन चंदा पाल ने बताया कि उनके बेटे की शादी के लिए रखे गए 80 हजार रुपये और दो सोने के गहने चोरी कर लिए गए। उनके घर की सारी संपत्ति नष्ट कर दी गई।
When houses of people were set ablaze in Murshidabad, ‘miscreants’ cut off water supply, destroyed the water tank and submersible pump so the desperate victims couldn’t even extinguish the fire.
-They burnt all the clothes in the house so *women didn’t have anything to cover… pic.twitter.com/8R5p0cEtfA
बता दें कि मुर्शिदाबाद की हिंदू विरोधी हिंसा की जाँच के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक समिति का गठन किया था, जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और न्यायिक सेवा के सदस्य शामिल थे। इस समिति ने प्रभावित गाँवों का दौरा किया, पीड़ितों से बात की और अपनी रिपोर्ट तैयार की। यह रिपोर्ट 20 मई 2025 को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने पेश की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, यह हिंसा स्थानीय पार्षद मेहबूब आलम के इशारे पर शुरू हुई। मेहबूब आलम हमलावरों के साथ समसेरगंज, हिजलतला, शिउलीतला और डिगरी से आए नकाबपोश मुस्लिमों के साथ मौके पर मौजूद था। हमलावरों ने हिंदुओं के घरों, दुकानों और मंदिरों को निशाना बनाया। इसके बाद स्थानीय विधायक अमीरुल इस्लाम भी वहाँ पहुँचा। उसने उन घरों की पहचान की जो अभी तक नहीं जले थे, और हमलावरों ने उन घरों में भी आग लगा दी। अमीरुल इस्लाम ने हिंसा को रोकने की कोई कोशिश नहीं की, बल्कि चुपचाप वहाँ से खिसक गया।
रिपोर्ट के अनुसार, यह हिंसा स्थानीय पार्षद मेहबूब आलम के इशारे पर शुरू हुई। मेहबूब आलम हमलावरों के साथ समसेरगंज, हिजलतला, शिउलीतला और डिगरी से आए नकाबपोश मुस्लिमों के साथ मौके पर मौजूद था। हमलावरों ने हिंदुओं के घरों, दुकानों और मंदिरों को निशाना बनाया। इसके बाद स्थानीय विधायक अमीरुल इस्लाम भी वहाँ पहुँचा। उसने उन घरों की पहचान की जो अभी तक नहीं जले थे, और हमलावरों ने उन घरों में भी आग लगा दी। अमीरुल इस्लाम ने हिंसा को रोकने की कोई कोशिश नहीं की, बल्कि चुपचाप वहाँ से खिसक गया।
रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि इस हिंसा में सत्ताधारी पार्टी TMC के स्थानीय नेताओं की अहम भूमिका थी। जाँच समिति ने यह भी बताया कि स्थानीय पुलिस पूरी तरह निष्क्रिय रही। जब पीड़ितों ने मदद के लिए पुलिस को फोन किया, तो कोई जवाब नहीं मिला। यह सब स्थानीय पुलिस स्टेशन से महज 300 मीटर की दूरी पर हुआ।
हिंसा के दौरान लूटपाट और मंदिरों पर भी किए गए हमले
हिंसा के दौरान बड़े पैमाने पर आगजनी और लूटपाट हुई। घोषपारा इलाके में 29 दुकानें या तो जला दी गईं या तोड़फोड़ की शिकार हुईं। एक शॉपिंग मॉल जैसा बाजार लूट लिया गया और उसे बंद कर दिया गया। किराने की दुकानें, हार्डवेयर की दुकानें, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़े की दुकानों को नष्ट कर दिया गया। महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जलाए गए। मंदिरों को भी नहीं बख्शा गया। ऑपइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिरों के सामने पेशाब किया गया और हिंदुओं को कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। हिंदुओं के घरों पर निशान लगाकर उन्हें हिंसा का शिकार बनाया गया।
हिंसा के बाद बेटबोना गाँव की स्थिति दयनीय हो गई है। 113 घरों को इतना नुकसान हुआ कि वे अब रहने लायक नहीं हैं। गाँव की महिलाएँ डर के मारे अपने रिश्तेदारों के पास रहने को मजबूर हैं। पीड़ित महिलाओं को धमकियाँ भी दी गईं।
रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि स्थानीय पुलिस ने हिंसा के दौरान कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पीड़ितों ने पुलिस को फोन किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। यह सब स्थानीय पुलिस स्टेशन से सिर्फ 300 मीटर की दूरी पर हुआ। जांच समिति ने इसे पुलिस की घोर लापरवाही और निष्क्रियता करार दिया।
ऑपइंडिया ने इस हिंसा को लगातार कवर किया। हमारी रिपोर्ट्स ने बताया था कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों ने पिता-पुत्र को काट डाला, मंदिरों पर हमले किए गए, और हिंदुओं को कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। ऑपइंडिया ने यह भी उजागर किया था कि कैसे हिंदुओं के घरों पर निशान लगाकर उन्हें निशाना बनाया गया।
यह हिंसा पश्चिम बंगाल में हिंदू समुदाय के खिलाफ एक सुनियोजित हमला था, जिसमें स्थानीय मुस्लिम समुदाय, पड़ोसियों और TMC के नेताओं की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है। कलकत्ता हाई कोर्ट की जाँच कमेटी की यह रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि कैसे वक्फ संशोधन बिल के विरोध की आड़ में हिंदुओं को निशाना बनाया गया। इसके बावजूद इस घटना पर उन लोगों की चुप्पी है जो रोज़ ‘अघोषित आपातकाल‘ की बात करते हैं। यह सवाल उठता है कि क्या पीड़ितों को न्याय मिल पाएगा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गैरकानूनी धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए बनाए गए कानून – उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर सामूहिक धर्म परिवर्तन जबरदस्ती, प्रलोभन या धोखाधड़ी से किया जा रहा हो, तो पुलिस अधिकारी बिना किसी पीड़ित या उनके रिश्तेदार की शिकायत के भी FIR दर्ज कर सकता है।
यह फैसला जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने सुनाया, जिसमें जौनपुर जिले में दर्ज एक FIR को रद्द करने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुर्गा यादव नाम के आरोपित ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उस पर आरोप है कि उसने जौनपुर के विक्रमपुर में एक चर्च में गरीब ग्रामीणों को मुफ्त इलाज और पैसे का लालच देकर ईसाई मजहब अपनाने के लिए प्रेरित किया। यह काम कथित तौर पर ईसाई प्रार्थना सभाओं के नाम पर किया जा रहा था। इस मामले में थाने के SHO (थानाध्यक्ष) ने FIR दर्ज की थी, जिसमें दुर्गा यादव और कुछ अन्य लोगों पर गैरकानूनी धर्मांतरण के आरोप लगाए गए थे।
दुर्गा यादव के वकील ने दलील दी कि 2021 के कानून की धारा 4 के तहत केवल ‘पीड़ित व्यक्ति’ या उनके नजदीकी रिश्तेदार ही शिकायत दर्ज कर सकते हैं। उसका कहना था कि SHO द्वारा दर्ज FIR गैरकानूनी है, क्योंकि वह इस मामले में ‘पीड़ित व्यक्ति’ नहीं है।
हाई कोर्ट ने खींच दी लकीर
जस्टिस विनोद दिवाकर ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि धारा 4 में ‘किसी भी पीड़ित व्यक्ति’ का मतलब केवल पीड़ित या उनके रिश्तेदारों तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने माना कि इस शब्द का दायरा व्यापक है और इसमें पुलिस अधिकारी जैसे लोग भी शामिल हो सकते हैं, जो सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कार्रवाई करते हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर इस शब्द को संकीर्ण अर्थ में लिया जाए, तो यह कानून अपने मकसद को पूरा करने में नाकाम हो जाएगा, खासकर तब जब बात सामूहिक धर्म परिवर्तन की हो, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निशाना बनाता हो।
कोर्ट ने 2024 में इस कानून में हुए संशोधन का भी जिक्र किया, जिसमें अब ‘कोई भी व्यक्ति’ इस तरह के अपराध की शिकायत कर सकता है। कोर्ट ने इसे स्पष्ट करने वाला संशोधन माना और कहा कि यह पुराने मामलों पर भी लागू होता है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गैरकानूनी धर्म परिवर्तन न केवल व्यक्ति या उनके परिवार के खिलाफ अपराध है, बल्कि यह समाज और सामाजिक व्यवस्था के लिए भी खतरा है। खासकर तब, जब सामूहिक धर्म परिवर्तन धोखाधड़ी, जबरदस्ती, प्रलोभन या गलत तरीकों से किया जाए। कोर्ट ने कहा, “ऐसे मामलों में राज्य मूकदर्शक नहीं रह सकता।”
हाई कोर्ट के ऑर्डर की कॉपी का हिस्सा (फोटो साभार: lawbeat)
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति जबरदस्ती, धोखे या लालच से धर्म परिवर्तन करा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह कानून सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए बनाया गया है, जो संविधान के अनुच्छेद 25 के अनुरूप है।
हाई कोर्ट के ऑर्डर की कॉपी का हिस्सा (फोटो साभार: lawbeat)
कोर्ट ने जाँच रोकने की अपील भी की खारिज
FIR में कहा गया था कि दुर्गा यादव और अन्य लोग गरीब ग्रामीणों को मुफ्त इलाज और पैसे का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए उकसा रहे थे। गवाहों के बयानों में भी इसकी पुष्टि हुई थी। कोर्ट ने माना कि FIR और गवाहों के बयान ऐसे अपराध को दर्शाते हैं, जिनकी जाँच जरूरी है। इसलिए कोर्ट ने जाँच में दखल देने से इनकार कर दिया। हालाँकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमानत का लाभ देते हुए कहा कि निचली अदालत उनके जमानत के नियम और शर्तें तय करेगी।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “गैरकानूनी धर्म परिवर्तन न केवल व्यक्ति या उनके रिश्तेदारों के खिलाफ अपराध है, बल्कि यह समाज और सामुदायिक एकता के लिए भी बड़ा खतरा है। खासकर तब जब सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों का धर्म परिवर्तन गलत तरीकों से किया जाए। ऐसे में राज्य को चुप नहीं रहना चाहिए।”
कोविड-19 के मामलों ने एक बार फिर से दस्तक दे दी है। इस बार इसका एक नया वेरिएंट JN.1 एशिया में तेजी से फैल रहा है। हालाँकि कोरोना को लेकर देशभर के चिकित्सक और विशेषज्ञ पहले ही यह कह चुके हैं कि इससे अब डरने की आवश्यकता नहीं है।
कोविड-19 के प्रति हमारे शरीर में प्रतिरोधी क्षमता विकसित हो चुकी है। इसके बावजूद दुनिया में हजारों की संख्या में बढ़ रहे मामले चिंता का विषय बन रहे हैं।
सबसे ज्यादा मामले थाइलैंड में, सबसे अधिक मौतें ब्रिटेन में
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंगापुर में अप्रैल के अंतिम सप्ताह में कोरोना के संक्रमण के मामले 11,100 थे जो मई 2025 की शुरुआत में 14,000 से भी अधिक हो गए।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट की मानें तो थाईलैंड के आपदा नियंत्रण विभाग ने बताया कि 11 मई से 17 मई के बीच देश में 33,030 मामले सामने आए थे। इनमें से सिर्फ बैंकॉक में ही कम से कम 6,000 मामले मिले थे।
इसी तरह हांगकांग में 6 अप्रैल के बाद महज चार हफ्तों में ही कोरोना से संक्रमित मामलों की संख्या 6.21% से बढ़कर 13.6% तक हो गई।
एशिया के अलावा ब्रिटेन में कोरोना के मामले सबसे अधिक डरा रहे हैं। ब्रिटेन सरकार के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2 मई को 101 लोगों की मौत कोविड-19 के कारण हुई। उससे पहले जनवरी में एक सप्ताह के अंदर 111 लोगों की मौत हुई।
भारत में मामले कम पर हुईं 2 मौतें
भारत की बात की जाए तो ज्यादातर मामले भारत के दक्षिण राज्यों में मिले हैं। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, भारत में फिलहाल कोरोना वायरस के 257 सक्रिय मामले हैं। इनमें से 53 मामले मुंबई में हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 21 मई 2025 तक 95 मामलों के साथ केरल में सबसे अधिक संक्रमण देखा गया है। इसके बाद तमिलनाडु में 66, महाराष्ट्र में 56 और कर्नाटक में 13 मामले मिले हैं। इन सब के साथ पुडुचेरी में 10, गुजरात में 7, दिल्ली में 5, और राजस्थान में 2 समेत हरियाणा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में एक-एक नए मामले सामने आए हैं।
मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल के एक अस्पताल में ही हाल ही में कोरोना से संक्रमित दो मरीजों की मौत हो चुकी है। हालाँकि डॉक्टरों का कहना है कि इन दोनों रोगियों को कोरोना के साथ कई गंभीर चिकित्सकीय परेशानियाँ थी जिसके कारण उनकी मौत हुई।
54 वर्षीय एक रोगी कैंसर का मरीज था तो वहीं 14 वर्षीय दूसरा मरीज नेफ्रोटिक सिंड्रोम यानी गुर्दे में परेशानी से ग्रस्त था। इन्हें कोरोना का संक्रमण हुआ जिससे हालत और अधिक खराब हो गई और दोनों की मृत्यु हो गई।
VIDEO | On fresh COVID-19 cases in India, Maharashtra Health Minister Prakash Abitkar says, "Two people have been found positive in Mumbai. I appeal to people not to panic. If needed take advice from the family doctor and take precautions."
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा है कि मुंबई के एक हॉस्पिटल में कोरोना के दो मरीज भर्ती हैं लेकिन इससे डरने की जरूरत नहीं है। हमारे शरीर में इसकी प्रतिकार शक्ति मौजूद है। फिर भी किसी तरह की परेशानी हो तो स्वास्थ्य विभाग या अपने फैमिली डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या है नया वैरिएंट
कोरोना के मामलों के तेजी से बढ़ने के पीछे नया वेरिएंट JN.1 जिम्मेदार है। असल में यह ओमिक्रोन वैरिएंट का ही सब-वेरिएंट है। एक दिलचस्प बात ये भी है कि JN.1 खुद एक सब-वेरिएंट है पर इसके भी उप-वेरिएंट के तौर पर LF.7 और NB.1.8 आ चुके हैं जिनके मामले सिंगापुर और हांगकांग में सबसे अधिक आए हैं। भारत में इसे जुड़े मामले अभी तक सामने नहीं आये हैं।
सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, “मौजूदा समय में LF.7 और NB.1.8 ही सिंगापुर में तेजी से फैल रहे हैं। जीनोम सीक्वेंसिंग किए गए मामलों में से दो तिहाई मामले इसी से जुड़े हैं। JN.1 वो वेरिएंट भी है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा कोविड-19 वैक्सीन के फॉर्मुलेशन में भी किया गया है।”
जानकारों का कहना है कि ये वेरिएंट पहले की अपेक्षा गंभीर नहीं है लेकिन इसके तेजी से फैलने से चिंता बढ़ रही है।
कोविड के नए वेरिएंट के लक्षण क्या हैं
कोरोना वायरस के इस वेरिएंट के लक्षण पहले के लक्षणों की तरह ही है। संक्रमित मरीजों को गला खराब, थकान, सिरदर्द और खाँसी जैसे लक्षण हो रहे हैं। हालाँकि, JN.1 के कुछ बड़े लक्षणों में डायरिया या सिरदर्द भी देखने को मिल रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंगापुर और हांगकांग में लगातार बढ़ रहे कोविड-19 के मामलों को देखते हुए भारत में सोमवार को स्वास्थ्य मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक की गई।
बैठक में नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल, इमरजेंसी मेडिकल रिलीफ डिविजन, डिजास्टर मैनेजमेंट सेल, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और केंद्र सरकार से जुड़े अस्पतालों के विशेषज्ञ शामिल रहे।
पीटीआई ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया, “बैठक में ये साफ तौर पर कहा गया है कि भारत में कोरोना-19 की मौजूदा स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है। 19 मई 2025 तक कोविड-19 के 257 मामले हैं। देश की इतनी बड़ी आबादी को देखते हुए ये संख्या बहुत कम है। इनमें भी ज्यादातर मामले गंभीर नहीं हैं, ऐसे में परेशानी या गंभीर होने वाली कोई बात अब तक नहीं है।”
इन बातों का जरूर रखें खयाल
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एक बार फिर बचाव रखने का जरूरत आन पड़ी है। घर से बाहर निकने वालों के लिए जरूरी है कि वे बचाव करते चलें ताकि अपने साथ वे अपने परिजनों की सेहत बी सुरक्षित रह सकें।
जब भी किसी भीड़भाड़ वाले या मेट्रो, बस, ट्रेन जैसी बंद रहने वाले वातावरण में जाएँ तो मास्क जरूर पहनें। इसके अलावा कुछ और बातों जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए वो ये हैं:
जब सार्वजनिक क्षेत्रों में जाएँ ऐसा मास्क पहनें जो ठीक से फिट हो।
बार-बार मुँह को छूने से परहेज करें।
थोड़ी-थोड़ी देर पर हाथ धोएँ।
बीमार महसूस होने पर भीड़-भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें।
वैक्सीनेशन की बूस्टर खुराक अगर पहले से नहीं लिया है तो अब लें।
अगर कोरोना से संक्रमित पाए जाते हैं तो घर पर रहें और अलग-थलग रहें।
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में भारत-नेपाल सीमा से सटे सिख बहुल गाँवों में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर धर्मांतरण का मामला सामने आया है। यह मुद्दा न केवल धार्मिक पहचान से जुड़ा है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित एक सुनियोजित साजिश की आशंका को भी जन्म देता है। ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल के अनुसार, बीते कुछ साल में 3,000 से ज्यादा सिखों का धर्मांतरण कर उन्हें ईसाई बनाया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीलीभीत के हजारा थाना क्षेत्र के गाँवों – बैल्हा, टाटरगंज, बम्मनपुरा भगीरथ और सिंघाड़ा में सिख समुदाय की बड़ी आबादी निवास करती है। इन गाँवों में लगभग 20,000 से 30,000 सिख रहते हैं, जो मुख्य रूप से खेती और छोटे-मोटे व्यवसायों पर निर्भर हैं। स्थानीय लोगों और सिख संगठनों के अनुसार, 2020 से नेपाल सीमा से सटे इन क्षेत्रों में धर्मांतरण की गतिविधियाँ तेज हुई हैं। इन गतिविधियों का केंद्र नेपाल से आए प्रोटेस्टेंट पादरी और कुछ स्थानीय लोगों को बनाए गए पास्टर हैं, जो कथित तौर पर आर्थिक प्रलोभन, अंधविश्वास और रोग निवारण सभाओं के जरिए सिखों को ईसाई मजहब अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
मामले का खुलासा तब हुआ जब बैल्हा गाँव की एक सिख महिला मंजीत कौर ने 13 मई 2025 को पीलीभीत के हजारा थाने में शिकायत दर्ज कराई। मंजीत ने आरोप लगाया कि उसके पति को पहले ही बहला-फुसलाकर ईसाई बनाया जा चुका है, और अब उस पर और उसके बच्चों पर भी धर्म परिवर्तन का दबाव डाला जा रहा है। उसने बताया कि जब उसने धर्म परिवर्तन से इनकार किया, तो उसके खेतों को नुकसान पहुँचाया गया और बच्चों के साथ मारपीट की गई। मंजीत के अनुसार, आरोपितों ने सरकारी योजनाओं का लाभ और दो लाख रुपये का लालच दिया, लेकिन कोई वादा पूरा नहीं किया गया। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने आठ नामजद और दर्जनों अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष हरपाल सिंह जग्गी ने इस मामले को गंभीरता से उठाया। उन्होंने स्थानीय गुरुद्वारा श्री सिंह सभा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि पीलीभीत के सिख बहुल गाँवों में करीब 3,000 सिखों का धर्म परिवर्तन हो चुका है। उन्होंने जिला प्रशासन को 160 परिवारों की सूची सौंपी, जिनके धर्म परिवर्तन की पुष्टि हुई है। जग्गी ने आरोप लगाया कि नेपाल से आए पादरी और कुछ स्थानीय पास्टर गरीबी, अशिक्षा और अंधविश्वास का फायदा उठाकर सिखों को ईसाई बना रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ परिवारों के घरों पर क्रॉस के निशान बनाए गए हैं, जो धर्मांतरण का प्रतीक माने जा रहे हैं। हालाँकि, प्रशासनिक सख्ती के बाद कई परिवारों ने इन निशानों को हटा लिया है, लेकिन वे अब भी ईसाईयत का पालन कर रहे हैं। जग्गी ने कहा कि यह सिख समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर हमला है और इसके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है, जो नेपाल के रास्ते इस साजिश को अंजाम दे रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जाँच और सख्त कार्रवाई की माँग की।
आजतक की एक ग्राउंड रिपोर्ट ने इस मामले को और गहराई से उजागर किया। उनकी टीम ने बैल्हा गाँव का दौरा किया और स्थानीय लोगों, पीड़ितों और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से बातचीत की। इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। स्थानीय लोगों ने बताया कि नेपाल से आने वाले पास्टर और पंजाब के कुछ मिशनरी लोग ‘चंगाई प्रार्थना सभाओं’ के जरिए सिखों को लुभा रहे हैं। ये सभाएँ बीमारी ठीक करने और आर्थिक मदद का वादा करती हैं, जिससे गरीब और अशिक्षित लोग आसानी से प्रभावित हो जाते हैं।
रिपोर्ट में एक पीड़ित परमिंदर सिंह ने बताया कि मिशनरी लोग बाहरी तौर पर यह नहीं दिखाते कि कोई धर्म परिवर्तन कर चुका है। वे सिखों को उनकी पारंपरिक वेशभूषा और नाम बरकरार रखने की सलाह देते हैं, ताकि धर्मांतरण का पता न चले। फिर भी कई लोग ‘उपचार सत्रों’ और आर्थिक लालच के कारण ईसाईयत की ओर झुक रहे हैं। हालाँकि लखविंदर सिंह और बलजीत सिंह जैसे लोग धर्म परिवर्तन के बाद ‘घर वापसी’ कर सिख धर्म में लौट आए हैं। लखविंदर ने बताया कि उनके बेटे की बीमारी ठीक न होने पर वे प्रार्थना सभाओं में गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, जिसके बाद उन्होंने सिख धर्म में वापसी की।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बताया कि अब तक 160 परिवारों की ‘घर वापसी’ कराई जा चुकी है। इसके लिए कमेटी ने ‘अमृतपान’ जैसे धार्मिक कार्यक्रम शुरू किए हैं। साथ ही नौ ऐसे लोगों की सूची सार्वजनिक की गई है, जो सिख से ईसाई बनकर अब दूसरों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इन लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने के लिए गुरुद्वारे में उनकी सूची लगाई गई है।
पीलीभीत की भौगोलिक स्थिति इस मामले को और जटिल बनाती है। नेपाल सीमा से सटा होने के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से सीमापार गतिविधियों का केंद्र रहा है। जाँच एजेंसियों को शक है कि नेपाल से संचालित कुछ एनजीओ और मिशनरी संगठन धर्मांतरण की गतिविधियों में लिप्त हैं। हरपाल सिंह जग्गी ने दावा किया कि 2012 से नेपाल के पादरी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और विदेशी ताकतों के इशारे पर सिखों को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि यह केवल धार्मिक मामला नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
स्थानीय सिख नेताओं ने शिक्षा की कमी और गरीबी को धर्मांतरण का प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से हाशिए पर रहने वाले लोग आसानी से प्रलोभनों का शिकार हो जाते हैं। कई पीड़ितों ने शपथपत्र देकर बताया कि उन्हें दो लाख रुपये, आवास, शौचालय और अन्य सरकारी योजनाओं का लालच दिया गया, लेकिन बाद में कोई लाभ नहीं मिला।
पीलीभीत प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। डीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि एक विशेष जाँच टीम (SIT) गठित की गई है, जो मामले की तह तक जाएगी। एसपी अभिषेक यादव ने कहा कि मंजीत कौर की शिकायत पर आठ नामजद और दर्जनों अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही एक अवैध चर्च को भी हटाया गया है। प्रशासन ने उन गाँवों में काउंसलिंग कैंप शुरू किए हैं, जहाँ धर्मांतरण की शिकायतें मिली हैं।
हालाँकि, पूरनपुर तहसील के SDM अजीत प्रताप सिंह का कहना है कि बड़े पैमाने पर सुनियोजित धर्मांतरण का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। उनका कहना है कि कुछ लोग अपनी आस्था के कारण प्रार्थना सभाओं में जा रहे हैं, जिन्हें रोका नहीं जा सकता। हालाँकि लोगों के शपथपत्र और गुरुद्वारा कमेटी की सूची इस दावे को चुनौती देते हैं।
इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का संज्ञान लिया है और सभी सीमावर्ती जिलों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ‘उत्तर प्रदेश धर्म स्वतंत्रता कानून’ के तहत सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है, जिसके तहत जबरन या प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण पर रोक लगाई गई है।
सिख संगठनों का कहना है कि यह मामला उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर हमला है। वे माँग कर रहे हैं कि जिन लोगों ने खुद अपनी मर्जी से धर्मांतरण किया है, उन्हें अपने दस्तावेजों में धर्म बदलने की जानकारी दर्ज करानी चाहिए। साथ ही वे दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और उच्चस्तरीय जाँच की माँग कर रहे हैं। गुरुद्वारा कमेटियों ने ‘घर वापसी’ के लिए बड़े पैमाने पर धार्मिक जागरूकता अभियान शुरू किया है।
बता दें कि ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट्स में बताया था कि कैसे नेपाल से सटे सीमावर्ती जिलों में ईसाई मिशनरियाँ धर्मांतरण का जाल फैला रही हैं। नेपाल से सटे 7 सीमावर्ती जिलों में ईसाई धर्मांतरण के मामलों के मामलों पर कार्रवाई भी हो चुकी है। बीते साल यूपी से लोगों को नेपाल ले जाने का मामला सामने आया था, जिसमें हिंदू संगठनों ने आरोपित पादरियों को पकड़कर न सिर्फ पीटा था, बल्कि उनके चेहरों पर कालिख भी पोत दी थी। ईसाई मिशनरियों के अयोध्या तक फैले जाल पर भी हमने रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
बुधवार (21 मई 2025) को, छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। एक एंटी-नक्सल ऑपरेशन में पुलिस ने नक्सलियों के चीफ नम्बाला केशव राव उर्फ बसवराजू उर्फ गगन्ना को मार गिराया है। यह भारत में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक मील का पत्थर है, क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब नक्सलियों के सर्वोच्च नेता को सुरक्षाबलों ने ढेर किया है।
कौन था बसवराजू?
बसवराजू (असली नाम नम्बाला केशव राव) भारत में नक्सली संगठन सीपीआई-माओवादी का चीफ और मास्टरमाइंड था।उसे नक्सली आंदोलन की रीढ़ माना जाता था और पूरे देश में नक्सल संगठन के संचालन की जिम्मेदारी उसी पर थ।. जिस तरह अलकायदा का चीफ ओसामा बिन लादेन या लिट्टे का चीफ प्रभाकरण था, उसी तरह भारत में नक्सलियों का चीफ बसवराजू था। उसकी मौत को अबूझमाड़ में नक्सलवाद पर सुरक्षाबलों की सबसे गहरी चोट माना जा रहा है।
कितने करोड़ का था इनाम?
भारत सरकार ने बसवराजू पर 1.5 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था, हालाँकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार यह इनाम 1 करोड़ तक था। यह राशि उसकी खतरनाक गतिविधियों और देश के लिए खतरे को दर्शाती है।
कहाँ की थी पढ़ाई?
बसवराजू एक पढ़ा-लिखा माओवादी था। उसने वारंगल के रिजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (REC) से B.Tech (इंजीनियरिंग) की पढ़ाई की थी। यह विरोधाभास है कि एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट देश के सबसे बड़े आंतरिक सुरक्षा खतरों में से एक का नेतृत्व कर रहा था।
किन हथियारों का करता था इस्तेमाल?
बसवराजू हमेशा अपनी सुरक्षा के लिए AK-47 राइफल साथ रखता था। वह छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के इलाकों में एक्टिव था। उसे युद्ध कला (वारफेयर) में माहिर माना जाता था और वह सैन्य कमान संभालने और आक्रामक हमलों की रणनीति बनाने में विशेषज्ञ था। वह पार्टी के केंद्रीय सैन्य आयोग के प्रभारी के तौर पर भी काम करता रहा था।
संगठन में भूमिका और अन्य नाम
बसवराजू 24 सालों से पोलित ब्यूरो सदस्य के तौर पर काम कर रहा था। 2018 में गणपति के बाद उसे संगठन के महासचिव की जिम्मेदारी मिली थी। उसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता था, जैसे नंवबल्ला केशव राव गनगन्ना, विजय, दरपू नरसिम्हा रेड्डी, नरसिम्हा, प्रकाश और कृष्णा. बताया जाता है कि उसने साल 1970 में अपना घर छोड़ दिया था।
ऑपरेशन का परिणाम
इस मुठभेड़ में बसवराजू सहित कुल 27 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें कई अन्य (CC) सेंट्रल कमेटी के सदस्य भी शामिल हैं। इस ऑपरेशन में पुलिस बल का 1 सहयोगी शहीद हुआ है, जबकि 1 जवान घायल हुआ है, जिसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त होगा भारत – अमित शाह
गृहमंत्री अमित शाह ने X (पहले ट्विटर) पर इस सफलता की सराहना की है और कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त होगा भारत।
A landmark achievement in the battle to eliminate Naxalism. Today, in an operation in Narayanpur, Chhattisgarh, our security forces have neutralized 27 dreaded Maoists, including Nambala Keshav Rao, alias Basavaraju, the general secretary of CPI-Maoist, topmost leader, and the…
अमित शाह ने लिखा, “यह पिछले तीन दशकों में पहली बार है जब भारत में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में महासचिव स्तर का कोई शीर्ष नेता सुरक्षाबलों के हाथों मारा गया है. यह हमारे बहादुर सुरक्षाबलों और एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ी सफलता है।”
निकालो इसको साले को, हटा…बहन चो% कौन? कौन साला हरामजा#$ बोल रहा था? कौन कुत्त& बोल रहा था? कौन था वो? मालूम है मैं कौन हूँ? कौन कह रहा था? मादरचो% तुम समझते क्या हो अपने आप को, मादरचो% सिंधी…पागल समझ रहे हो? तेरी माँ चो% दूँगा मैं, बहनचो%…
ये शब्द रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के पूर्व चीफ अमरजीत सिंह दुलत के हैं। ‘भारत रफ्तार टीवी’ के पत्रकार जितेश जेठानंदानी ने हाल में उनका पॉडकास्ट किया। इस दौरान उनसे उनके पाकिस्तान जाने को लेकर भी प्रश्न हुआ, जिसे सुन दुलत विफर गए।
नाराजगी इतनी बढ़ गई कि ऑन कैमरा उन्होंने हाथापाई और गाली-गलौच शुरू कर दिया। वीडियो अब चैनल पर मौजूद है। देख सकते हैं कि पत्रकार ने दुलत से पाकिस्तान के अलावा POK समेत अन्य मुद्दों पर भी सवाल पूछे, जिसे देते हुए वह हिचकते दिखे और पाकिस्तान जाने वाली बात पर भड़क गए।
पॉडकास्ट में पत्रकार ने एएस दुलत से पहला सवाल पूछा, “आप राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा में दिखाई दिए, कैसे आप उस यात्रा में जुड़े थे, क्या कारण थे?” इस पर दुलत जवाब देते हैं, “राहुल गाँधी जी का फोन आया था। मैं यात्रा में गया था। हाँ, मेरा विचार कॉन्ग्रेस से मिलता है। कॉन्ग्रेस राज के अंदर ही मैंने नौकरी की है। हम तो हमेशा कॉन्ग्रेस के साथ थे।”
अगला सवाल पूछा जाता है, “90 के दशक में कट्टपंथियों ने कश्मीरी पंडितों का नरसंहार किया था, उस पर आपका क्या कहना है?” दुलत कहते हैं, “वो यही लोग थे, जो दिल्ली से खफा थे और सिर्फ पंडितों को नहीं मारा है। मुसलमान ज्यादा मारे गए थे तब।” जवाब से लगता है कि उनकी नजर में मारने वाले इस्लामी कट्टरपंथी नहीं थे।
POK के मुद्दे पर सवाल किया जाता है तो दुलत कहते हैं, “कोई मुद्दा नहीं, क्या मुद्दा है?” फिर पत्रकार विस्तारित करते हैं, तब एएस दुलत जवाब देते हैं, “अगर कोई हल है तो वही है, LOC पर समझौता कर लो। जो आपके पास है, वो आपका है। जो हमारे पास है वो हमारा है।”
अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में पर्यटन बढ़ने के सवाल पर दुलत कहते हैं, “हाँ-हाँ… पर्यटन बढ़ा है, मैंने तो कहा था कि कश्मीर के स्थानीय नेताओं की बात सुननी चाहिए थी।” बताया जाए कि उस समय कश्मीर के स्थानीय नेता अनुच्छेद 370 हटने का विरोध कर रहे थे। दुलत अपने जवाब में इसका समर्थन करते हैं और कहते हैं कि पर्यटन बढ़ना परेशानी है।
हाल ही में भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी पत्रकार ने सवाल किए। पूछा गया “10-15 दिन पहले भारत-पाकिस्तान में तनाव थे”…इतने में दुलत कहते हैं, “मैं तो कहता हूँ। लाहौर ले लेना चाहिए था। मुझे तो लाहौर पसंद है।”
इससे अगला सवाल दुलत के पाकिस्तान में संपर्क को लेकर होता है। दुलत जवाब में कहते हैं कि उनके संपर्क तो हैं। कुछ दिन पहले पाकिस्तान जाने के सवाल पर दुलत विफर जाते हैं और मारपीट शुरू कर देते हैं। पत्रकार का यह सवाल एएस दुलत की हाल ही की किताब ‘स्पाय क्रॉनिकल्स रॉ ISI’ के संबंध में पूछा गया था। यह किताब दुलत ने पूर्व पाकिस्तानी जासूस असद दुर्रानी संग मिलकर लिखी है।
जब कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को प्रोपेंगेडा करार दिया
बता दें कि एएस दुलत हमेशा देश में गलत कारणों से जाने जाते रहे हैं। उन्होंने अक्सर कॉन्ग्रेस के बीजेपी विरोधी और पाकिस्तान समर्थक प्रचार का समर्थन किया है। साल 2023 में कॉन्ग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गाँधी के हाथों में हाथ डालकर फोटो भी खिंचवाई।
इसके अलावा साल 2019 में निर्मित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’, जिसमें कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को दिखाया गया। दुलत ने फिल्म को प्रोपेगेंडा करार दिया। उन्होंने घाटी से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन को धो-पोंछने का काम किया था। यह कहते हुए कि कश्मीरी हिंदुओं के पलायन की लोकप्रिय धारणा वास्तविकता से अलग है।
एएस दुलत ने पुलवामा आतंकी हमले को लेकर बीजेपी पर सवाल उठाए थे। साल 2019 में आम चुनावों से पहले दुलत ने पुलवामा आतंकी हमले को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए तोहफा बताया। इसके बाद उनकी खूब आलोचना हुई थी।
पुलगाम आतंकी हमले के बाद और ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के बाद कई राज्यों से 13 जासूस गिरफ्तार किए गए हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के इशारे पर काम करने वाले एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पता लगाया है। अब तक की जाँच में पता चला है कि जासूसी से लेकर सीमा पार तस्करी और दुश्मन के अभियानों में सहायता पहुँचाने का काम इनलोगों ने किया है।
शहजाद, बिजनेस के नाम पर तस्करी और जासूसी
19 मई को यूपी एसटीएफ ने मुरादाबाद से शहजाद को गिरफ्तार किया। एटीएस के मुताबिक शहजाद भारत में आतंकी हमले की साजिश में शामिल था। भारत- पाक सीमा पर अवैध रूप से वह कॉस्मेटिक, मसाले, कपड़े और दूसरे सामान की तस्करी करता था। इसी दौरान आईएसआई के संपर्क में आया। शहजाद रामपुर के कई युवाओं को पाकिस्तान भेज चुका है। वहाँ उन्हें जासूसी और हिंसक गतिविधियों की ट्रेनिंग दी गई। इन सभी का वीजा खुद शहजाद ने लगवाया जिसमें ISI एजेंट्स की उसे मदद मिली। शहजाद पाकिस्तान उच्चायोग में काम करने वाले अधिकारी एहसान उर रहीम उर्फ दानिश के संपर्क में था। दानिश का नाम हरियाणा की ज्योति मल्होत्रा समेत कई जासूसों से संपर्क सूत्र के तौर पर आ चुका है और भारत सरकार ने 13 मई 2025 को उसे भारत छोड़ने का आदेश जारी कर दिया था।
ज्योति मल्होत्रा, यूट्यूबर
यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा हरियाणा की ट्रेवल ब्लॉगर है जिसके यूट्यूब पर 3.7 लाख और इंस्टाग्राम पर 1.3 लाख फॉलोवर्स हैं। ज्योति को हिसार के सिविल लाइन से गिरफ्तार किया गया। पाकिस्तान जाने के लिए वीजा बनवाने के दौरान ज्योति पाकिस्तान हाई कमीशन में अहसान उर रहीम उर्फ दानिश से मिली। दो बार ज्योति पाकिस्तान गई और दानिश के कहने पर अली हसन से मिली जिसने पाकिस्तानी अधिकारी और आईएसआई के अधिकारियों से मुलाकात करवाई।
इस दौरान शाकिर और राणा शहबाज से मिली। शाकिर का नंबर जट रंधावा के नाम से सेव कर ज्योति उसे सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सएप, स्नैप चैट और टेलीग्राम के माध्यम से देश से जुड़ी सूचनाएं और खुफिया जानकारी शेयर करने लगी। ज्योति और पंजाब के सीएम मरियम नवाज के साथ का वीडियो भी सामने आया है। उसने अपनी डायरी में भी पाकिस्तान जाने का जिक्र किया है।
गजाला एक विधवा महिला जिसे दानिश ने फँसाया
एक और महिला जिसने देश से गद्दारी की है वो है पंजाब की 32 साल की विधवा महिला गजाला। 2025 में पाकिस्तानी वीजा के लिए आवेदन करने के दौरान वो दिल्ली स्थित पाकिस्तानी हाईकमीशन गई थी जहाँ वो दानिश से मिली। पुलिस जाँच में पता चला है कि आरोपित गजाला खुफिया जानकारियाँ आईएसआई को देती थी।
गजाला के पैसों की लेनदेन से जुड़ी जानकारियाँ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जाँच की जा रही है। उसका पाकिस्तानी अधिकारी एहसान उर रहीम से कनेक्शन भी सामने आया है। गजाला की गिरफ्तारी के बाद ज्योति मल्होत्रा का पता पुलिस को चला।
मजदूर शेर मसीह और सूरज मसीह
जासूसी के मामले में सबसे पहले 3 मई 2025 को पंजाब के अमृतसर से पलक शेर मसीह और सूरज मसीह की गिरफ्तारी हुई। इनलोगों को अमृतसर की सेना छावनी इलाके में वायु सेना के अड्डों की संवेदनशील सूचनाएँ और तस्वीरें लीक करने पर गिरफ्तार किया गया।
जाँच में पाया गया कि दोनों के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध थे। अमृतसर की जेल में बंद हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी ने इनका संपर्क करवाया था। ये दोनों दिहाड़ी मजदूर हैं।
यासीन मोहम्मद
8 मई 2025 को पंजाब के मलेरकोटला से यासीन मोहम्मद को गिरफ्तार किया गया। ये पाकिस्तानी हाई कमीशन के अधिकारी दानिश के संपर्क में था। यासीन ऑनलाइन पैसे लेकर खुफिया जानकारियाँ दानिश से शेयर करता था। इतना ही नहीं वो दूसरे लोगों को भी पैसे लेकर दानिश से संपर्क कराने का काम करता था।
उसने भी गजाला के खाते में 10,000 ट्रांसफर किए थे। यासीन कीटनाशक का कारोबार करता था। वो 2013 में पहली बार पाकिस्तान गया। वीजा लेने के लिए जब वो पाकिस्तान हाई कमीशन पहुँचा तो उसकी मुलाकात दानिश से हुई। दानिश की मदद से उसे तीन और वीजा मिले। दानिश के कहने पर उसने सिम उपलब्ध करवाए। वह दानिश को क्लाइंट लाकर देता था जो पाकिस्तानी वीजा बनवाने के इच्छुक होते थे। उन सब से दानिश एक वीजा के बदले 5000 रुपए लेता था।
देवेंदर सिंह ढिल्लों, छात्र
25 साल का देवेन्दर सिंह ढिल्लों को पंजाब से गिरफ्तार किया गया। उसने पटियाला छावनी के बाहर की तस्वीरें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को भेजी थी। अधिकारी उसके स्नैपचैट अकाउंट से डिलीट किए गए डेटा को फिर से प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, हालाँकि उसके इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप प्रोफाइल से पहले ही आपत्तिजनक सबूत बरामद मिल चुके हैं।
उसे दूसरे केस में गिरफ्तार किया गया था जिसमें फेसबुक पर उसने बंदूक की तस्वीर पोस्ट की थी , लेकिन पूछताछ में उसके जासूस होने का पता पुलिस को चला। उसे आईएसआई ने हनी ट्रैप में फँसाकर जासूसी के लिए तैयार किया था। वो आईएसआई के 5 एजेंट्स के संपर्क में था। उसे आईएसआई ने लड़की का लालच भी दिया था, जिसके बदले में उसने सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़ी तस्वीरें भी भेजी थी।
मोहम्मद मुर्तजा अली, मोबाइल ऐप डेवलपर
मोहम्मद मुर्तजा अली को जालंधर से गुजरात पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर गिरफ्तार किया। उसने मोबाइल ऐप डेवलप किया था जिसके द्वारा वो खुफिया जानकारियाँ आईएसआई तक पहुँचाता था। उसके पास से चार मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। इनसे कई आपत्तिजनक खुफिया जानकारियाँ शेयर करने के सबूत मिले हैं।
मोहम्मद तारीफ 2018 में आईएसआई के संपर्क में आया
17 मई 2025 को हरियाणा के नूँह से मोहम्मद तारीफ को गिरफ्तार किया है। तारीफ पाकिस्तानी हाई कमीशन के आसिफ बलौच और जाफर के संपर्क में था। उसने यह बात भी मानी है कि आसिफ बालौच और जाफर के कहने पर उसने पाकिस्तान को सिरसा एयरपोर्ट स्टेशन की जानकारी भेजी। तारीफ 2018 में वीजा के लिए पाकिस्तान हाई कमीशन गया था और इस दौरान उससे फोन नंबर और डीटेल लिया गया। उसे फोन आया और उसे वीजा के बदले दो सिम देने के लिए कहा गया। सिम देने के बाद वीजा दिया गया। इस तरह वो आईएसआई के संपर्क में भी आया।
अरमान
हरियाणा के नूँह के राजाका गाँव से सुरक्षा जाँच एजेंसी टीम ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले अरमान को गिरफ्तार किया। पुलिस का मानना है कि अरमान स्लीपर सेल की तरह काम करता था और आईएसआई का नेटवर्क बढ़ाने में लगा था। भारतीय सिम कार्ड खरीदकर पाकिस्तानी अधिकारियों तक भी इनलोगों ने पहुँचाया था। पुलिस ने कई व्हाट्सएप चैट, तस्वीरें और वीडियो भी बरामद किये हैं जिन्हें पाकिस्तानी नंबर पर शेयर किये गए थे। उसने भारतीय सैन्य एक्टिविटज की जानकारी भी उन नंबरों पर दी थी।
अरमान पाकिस्तानी वीजा बनाने के लिए पाकिस्तान हाई कमीशन गया था। इस दौरान वो दानिश के संपर्क में आया। दानिश के कहने पर वो आईएसआई के लिए काम करने लगा।
नोमान इलाही
15 मई को हरियाणा के पानीपत से नोमान इलाही को पुलिस ने गिरफ्तार किया और उससे पूछताछ की। वह 5 बार पाकिस्तान जा चुका है। माँ-बाप की मौत के 5 साल बाद भी उनके पासपोर्ट इलाही के पास हैं। उत्तर प्रदेश का रहनेवाला इलाही पानीपत में एक फैक्ट्री में सुरक्षा गार्ड का काम करता था और पाकिस्तान को संवेदनशील जानकारियाँ भेजता था। उसके फोन से कई संवेदनशील सैन्य जानकारियाँ भी मिली हैं जिसे जब्त कर लिया गया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ISI सक्रिय थी और वह भारतीय सेना की गतिविधियों की जानकारी मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए भेजता था।
नोमान पहले बेरोजगार था और अपने अब्बू के साथ पासपोर्ट और दस्तावेज बनवाने का काम करता था। अब्बू की मौत के बाद उसने यह धंधा संभाला, लेकिन लालच में आकर ISI के जासूसी नेटवर्क से जुड़ गया। जाँच एजेंसियों के अनुसार, नोमान पासपोर्ट सेवा केंद्र की आड़ में उन लोगों के दस्तावेज तैयार करता था, जो सऊदी अरब, पाकिस्तान या अन्य देशों में जाने की योजना बनाते थे।
सुखप्रीत सिंह और करणबीर सिंह
पंजाब पुलिस ने गुरदासपुर से सुखप्रीत सिंह और करणबीर सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों नशे की तस्करी करते- करते आईएसआई हैंडलर्स के संपर्क में आए। इनलोगों ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को मुहैया करवाई। इसके बदले में इनलोगों को 1लाख रुपए मिले। उसके मोबाइल की फोरेंसिक जाँच से खुफिया जानकारी के भेजे जाने की पुष्टि हुई है। दोनों 2018 से पाकिस्तानी हाई कमीशन के संपर्क में था।
पाकिस्तान के लिए जासूसी करती पकड़ी गई भारत की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को लेकर नया खुलासा हुआ है। ज्योति पाकिस्तान के व्यक्ति से शादी करना चाहती थी। यूट्यूबर की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) एजेंट अली हसन के साथ व्हाट्सएप चैट्स सामने आई हैं, जिसमें वह पाकिस्तान के प्रति अपना लगाव जाहिर कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हसन से बात करते हुए यूट्यूबर कहती है, “मेरी शादी पाकिस्तान में ही किसी से करवा दो।” पुलिस के मुताबिक ज्योति से अली हसन लगातार संपर्क बनाए हुए थीं। उनके बीच लंबी बातचीत के सबूत मिले हैं। एक चैट में हसन ज्योति से कहता है, “जो (ज्योति) यार, मैं दिल से दुआ करता हूँ कि तुम हमेशा खुश रहो, तुम हमेशा मुस्कुराती रहो और तुम्हें जिंदगी में कभी भी निराशा हासिल न हो।”
ये चैट्स तब सामने आई है जब सोशल मीडिया पर नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में काम करने वाले दानिश और ज्योति के बीच संबंधों के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन अब लगता है कि ISI एजेंट अली हसन के साथ भी यूट्यूबर की काफी नज़दीकियाँ बनी हैं। हालाँकि, ये व्हाट्एप चैट्स किस समय की हैं, इसको लेकर पुख्ता जानकारी नहीं है।
इससे पहले यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की पर्सनल डायरी सामने आई थी, जिसमें उसका पाकिस्तान प्रेम नजर आया था। ज्योति ने लाहौर की तारीफ की थी और भारत-पाकिस्तान के बीच सरहदों की दूरी खत्म होने की इच्छा जताई थी। लिखा था, “पाकिस्तान की बस और ट्रक के बारे में जितना कहूँ, उतना कम। क्रेजी और कलरफुल।” पुलिस ने ज्योति की पर्सनल डायरी को हिरासत में ले लिया है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय भी ज्योति पाकिस्तान से लगातार संपर्क में थी। उसने भारत में ब्लैकआउट और मॉक ड्रिल से संबंधित सभी जानकारी पाकिस्तान को दी थी। पुलिस का कहना बै कि ऑपरेशन के दौरान वह दानिश के संपर्क में थी। जाँच में सामने आया है कि ज्योति ने दानिश के साथ कथित कुछ चैट्स को डिलीट भी किया है। फोन में आखिरी बातचीत मार्च 2025 की हैं।
गौरतलब है कि यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को 17 मई 2025 को जासूसी के आरोप में हरियाणा के हिसार जिले से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उसे 5 दिन की रिमांड में हिरासत में लिया है। NIA, IB और हरियाणा पुलिस लगातार उससे पूछताछ कर रही हैं। ज्योति के तीन मोबाइल फोन और लैपटॉप को भी सीज कर लिया गया है। इनका डाटा खंगाला जा रहा है।