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सीएम योगी ने पंजाब में बिजली संकट से घिरे उद्योगपतियों को दिया बड़ा ऑफर, कम दरों पर 24 घंटे बिजली सहित कई पेशकश

पंजाब इन दिनों एक बड़े बिजली संकट का सामना कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कॉन्ग्रेस शासित राज्य में बड़े उद्योग लगभग बंद हो गए हैं। सभी उद्योगों को बिजली की आपूर्ति न मिलने से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंजाब के उद्योगपतियों को कम दरों पर 24 घंटे बिजली देने की पेशकश की है। यदि वे यूपी में नई इकाइयों को शिफ्ट करते हैं या स्थापित करते हैं, तो उन्हें इस ऑफर का लाभ मिलेगा। लुधियाना के उद्योगपतियों की सोमवार (12 जुलाई 2021) को इस संबंध में उत्‍तर प्रदेश के सीएम के साथ लखनऊ में बैठक हुई, जो 3 घंटे तक चली।

फेडरेशन ऑफ डाइंग फैक्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष व बिजनेसमैन टीआर मिश्रा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, ”रविवार (11 जुलाई) को मुझे यूपी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का फोन आया, जिन्होंने मुझे बताया कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ लुधियाना के उद्योगपतियों से मिलना चाहते हैं। उद्योगपति उत्तर प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। हम इस प्रस्ताव से सहमत हुए और हमने लखनऊ के लिए उड़ान भरी। यहाँ हमने सीएम के साथ बैठक की, जो लगभग तीन घंटे तक चली।”

उन्होंने आगे कहा, “सीएम योगी ने वादा किया है कि पंजाब की तुलना में उद्योगों को 24 घंटे निर्बाध बिजली दी जाएगी, वह भी सस्ती दरों पर। इसके अलावा, यूपी सरकार औद्योगिक इकाइयों की उचित सुरक्षा और अधिक निश्चित करेगी। हमें आने वाले नोएडा अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निकट यमुना एक्सप्रेस वे जैसे प्रमुख क्षेत्रों में औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करने के लिए अतुलनीय प्रोत्साहन और विकल्प का वादा किया गया है, जो भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा।”

लुधियाना की फैक्ट्रियों में 90% मजदूर यूपी से हैं

यूपी सरकार द्वारा निर्धारित प्रस्तावों पर औद्योगिक संघ और व्यवसायी चर्चा कर रहे हैं। उनके द्वारा जल्द ही सामूहिक निर्णय लिया जाएगा। मिश्रा ने सीएम द्वारा दिए गए प्रस्तावों को आकर्षक बताते हुए कहा, “सबसे बड़ा फायदा यह है कि लुधियाना के कारखानों में काम करने वाले लगभग 90% श्रमिक यूपी से हैं।”

उद्योग जगत के लिए शांतिपूर्ण माहौल का सीएम योगी ने किया वादा

सीएम से मिले प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख गुरमीत सिंह कुलार ने कहा कि बैठक काफी अच्छी रही। उन्होंने कहा, ”यूपी सरकार ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए समर्थन और फास्ट ट्रैक की अनुमति देने का वादा किया है। सीएम योगी ने कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से बनाए रखते हुए उद्योग जगत के लिए पूरी तरह से शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया।” उन्होंने कहा कि यूपी ईस्टर्न कॉरिडोर का हिस्सा है, जो सस्ते और आसान माल की आवाजाही सुनिश्चित करेगा।

अतिरिक्त मुख्य सचिव अरविंद कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। कुलार ने कहा कि सरकार ने इच्छुक व्यवसायियों को पूर्ण विकसित औद्योगिक क्षेत्र उपलब्ध कराने का वादा किया है। यूपी सरकार द्वारा प्रस्तावित जमीन की कीमत 5,000 रुपए प्रति वर्ग गज (per square yard) बताई गई थी। इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं औद्योगिक विकास सचिव नीना शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को निवेशकों को मिलने वाले वित्तीय लाभों की जानकारी दी।

गौरतलब है कि पंजाब के उद्योगपति इस साल मार्च से ही यूपी के सीएम योगी से मिलने की योजना बना रहे थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण बैठक में देरी हुई। मिश्रा ने कहा, “यह महज संयोग है कि यह ऐसे समय में हुआ जब पंजाब बिजली संकट से जूझ रहा है।”

RSS पर चर्च को रिपोर्ट करने आए इंडोनेशिया के पादरी रॉबर्ट बने संघ प्रचारक डा. सुमन: 8000 की करा चुके हैं ‘घर वापसी’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक व हिन्दू जागरण मंच बिहार-झारखंड के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ. सुमन कुमार कभी पादरी थे, जो ईसाई धर्म का प्रचार करते थे। सुमन कुमार को लोग पहले पादरी राबर्ट सॉलोमन के नाम से जानते थे। ये लोगों का धर्मांतरण कराते थे। हालाँकि, जब वे आरएसएस की विचारधारा और संघ के अधिकारियों से मिले तो उनसे इतने प्रभावित हुए कि खुद का धर्म परिवर्तन कर अपना नाम बदलकर डॉ. सुमन कुमार रख लिया और संघ के प्रचारक बन गए।

आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में आर्गेनिक रसायन में रिसर्च करने के दौरान ही वे पादरी बन गए थे। धर्मांतरण के काम को लेकर इनका भारत के दक्षिण राज्य तमिलनाडु के चेन्‍नई में 1982 से आना-जाना शुरू हो गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, संघ की गतिविधियों को नजदीक से समझने के लिए ईसाई मिशनरियों ने 25 वर्ष की उम्र में यानी साल 1984 में इन्हें भारत भेजा था। वे यहाँ दो वर्षों में संघ के कामों और हिंदू चिंतन व दर्शन से इतने प्रभावित हुए की खुद हिंदू धर्म को ही अपना लिया। इन्होंने 1986 में धर्मांतरण के बाद आर्य समाज पद्धति से हिंदू सनातन धर्म स्वीकार कर लिया और उसी वर्ष संघ के प्रचारक बन गए। इस दौरान इन्हें हिंदू जागरण मंच के काम में लगा दिया गया।

बताया जाता है कि संघ ने नया प्रयोग करते हुए ईसाई होने के कारण इन पर विश्‍वास किया और वे भी संघ की विचारधारा में पूरी तरह रंग गए। सुमन कुमार ने भाषा की समस्या को दूर करने के लिए वर्तमान अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वांत रंजन से काफी सहयोग लि‍या। आज वे हिंदू जागरण मंच के उत्तर पूर्व क्षेत्र (झारखंड-बिहार) के संगठन मंत्री का दायित्व निभा रहे हैं और संघ के तृतीय वर्ष में प्रशिक्षित हैं।

सुमन कुमार सबसे पहले बुंदेलखंड के उरई जिला में संघ के संपर्क में आए थे। उन्होंने बताया कि मैं वहीं पास में संघ की शाखा में जाने लगा। यह सभी वर्ग के लोगों के लिए शुरू से ही खुला है। मैंने यहाँ स्वयंसेवकों के कामों को करीब से देखा और बेहद प्रभावित हुआ। हालाँकि, उस दौरान मेरे समक्ष भाषा की समस्या आड़े आ रही थी। मुझे हिंदी नहीं आती थी। इसके बावजूद मुझे संघ की अंग्रेजी में पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। मैंने स्वामी विवेकानंद की पुस्तकों को पढ़ा। फिर संघ के कामों को देखने के बाद मैंने तीन माह में ही मिशनरी को अपनी रिपोर्ट भेज दी।

मुझे बताया गया था कि संघ के लोग चर्च को तोड़ देते हैं, बाइबिल को जला देते हैं

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा, “मुझे भारत में भेजने से पहले बताया गया था कि संघ के लोग चर्च को तोड़ देते हैं। बाइबिल को जला देते हैं। पादरियों पर हमला करते हैं, लेकिन संघ की शाखा में जाने के बाद मुझे ऐसा कुछ भी नहीं दिखा।” उन्होंने मिशनरियों को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में आगे लिखा कि जिनका आप धर्मांतरण कराते हैं उनका राष्ट्रांतरण हो जाता है। ये लोग पादरियों को परेशान नहीं करते हैं। संघ विध्वंसक काम नहीं करता है। ये लोग भारत को कर्म भूमि, देव भूमि मानते हैं। इनका कहना है कि ईसा मसीह का प्रचार करो, लेकिन धर्मांतरण मत करो। भारत में रहना है तो भारत को समझिए, भारत को जानिए और भारतीयता में रंगिए।

8000 लोगों की घर वापसी करवा चुके हैं

उस समय के सरकार्यवाहक और वर्तमान में सरसंघचालक मोहन भागवत ने उन्हें 2004 में झारखंड भेजा था। वे अब तक 8000 लोगों की घर वापसी करवा चुके हैं। आज झारखंड के सभी जिलों में हिंदू जागरण मंच का काम चल रहा है। वे 2015 से झारखंड-बिहार के क्षेत्र संगठन मंत्री हैं। बता दें कि दैनिक जागरण में प्रकाशित डॉ. सुमन कुमार की दिलचस्प कहानी को सुनने के बाद हर कोई अपने जीवन में एक बार आरएसएस की विचारधारा को करीब से जानना चाहेगा।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सेना पर आतंकवादी हमला, कैप्टन अब्दुल बासित समेत 11 जवानों की मौत

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत स्थित खुर्रम में आंतकी हमला हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंंगलवार (13 जुलाई 2021) को आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सेना पर हमला बोला दिया है। इस हमले में पाकिस्तानी सेना के कैप्टन अब्दुल बासित समेत 11 जवानों की मौत हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह दावा किया जा रहा है कि इस हमले में कई जवान घायल हो गए हैं और कुछ जवानों को आतंकवादियों ने अगवा भी कर लिया है। वहीं, आतंकी हाफिज दौलत खान ने 6 टेलीकॉम ऑपरेटर्स को बंधक भी बना लिया है। इस हमले के पीछे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को जिम्मेदार माना जा रहा है। 

बताया जा रहा है कि TTP के आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना द्वारा खुर्रम इलाके में ऑपरेशन चलाया जा रहा था। इस मिशन को कैप्टन अब्दुल बासित खान लीड कर रहे थे। इस दौरान इन आतंकियों ने पाकिस्तानी सेना पर हमला कर दिया। ये हमला हंगू क्षेत्र में हुआ है। 

पाकिस्तान में TTP आतंकी संगठन की शुरुआत दिसंबर 2007 में 13 आतंकी गुटों ने मिलकर की थी। इनका मकसद पाकिस्तान में शरिया पर आधारित एक कट्टरपंथी इस्लामी शासन कायम करना है।

गौरतलब है कि आतंकियों को संरक्षण देने के लिए पाकिस्तान विख्यात है। हाल ही में तालिबान को पाकिस्तान पोषित आतंकियों ने समर्थन देना शुरू कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों को खबर मिली है कि अमेरिका के साथ शांति समझौते का उल्लंघन करते हुए पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैय्यबा (LeT) और जमात-उल-दावा के आतंकियों को अफगानिस्तान में तालिबान के साथ लड़ने के लिए भेजा है।

ये आतंकी अफगानिस्तान के ज्यादा से ज्यादा इलाके पर कब्ज़ा दिलाने में तालिबान की मदद कर रहे हैं। अफगानिस्तान की सरकार को कभी भी किनारे किया जा सकता है और आशंका है कि वो दिन दूर नहीं, जब अफगानिस्तान के महत्वपूर्ण इलाकों पर भी तालिबान का ही कब्ज़ा होगा। पूर्वी अफगानिस्तान में स्थित कोनार और नंगहर के अलावा दक्षिण-पश्चिमी भाग के हेलमंड और कंधार में पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय हैं।

डॉन खान मुबारक से जुड़ी अवैध संपत्ति पर चली JCB, रिश्तेदारों को भी नहीं बख्शेगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में माफियाओं की संपत्ति पर योगी सरकार की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में अब जेसीबी चली है अंडरवर्ल्ड डॉन खान मुबारक से जुड़ी अंबेडकरनगर वाली अवैध संपत्ति पर। ये जानकारी मेघ अपडेट्स के जरिए मिली है। उन्होंने अपने ट्वीट पर खान की ध्वस्त होती संपत्ति की वीडियो जारी की है।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, संपत्ति को ध्वस्त होता देखने के लिए सैंकड़ों की भीड़ इकट्ठा हुई, लेकिन प्रशासन के काम में रुकावट डालने की किसी ने जुर्रत नहीं की। बताया जा रहा है कि बसखारी थाने के मकोइया में यह घर खान मुबारक की काली कमाई से बनाया गया था।

PWD का दावा है कि खान के बहनोई ने विभाग की जमीन पर अतिक्रमण कर मकान बनवाया था। इन्हीं आरोपों के चलते हंसवर और बसखारी पुलिस तथा पीडब्ल्यूडी के संयुक्त अभियान में मकोइया में बड़ी कार्रवाई की गई। 

इस दौरान मौके पर एसडीएम टांडा अभिषेक पाठक, सीओ सिटी अशोक कुमार सि‍ंह, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मौजूद रहे। थानाध्यक्ष हंसवर प्रदीप सि‍ंह ने बताया कि खान मुबारक के अन्य सहयोगियों की संलिप्तता का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। जल्द ही उन संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले माफिया खान की अंबेडकरनगर जिले की संपत्ति पर पिछले साल भी कार्रवाई की थी। उस दौरान एसपी आलोक प्रियदर्शी ने आधा दर्जन फोर्स के साथ जाकर हंसवर बाजार में खान मुबारक के 20 कमरों के कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त करवाया था। इसके अलावा पौने दो एकड़ अवैध जमीन में लगी फसल ट्रैक्टर द्वारा नष्ट की गई थी। मगर, अब उसके रिश्तेदारों के घरों पर भी कार्रवाई हो रही हैं।

मंगलवार (जुलाई 13, 2021) को पुलिस ने मकोइया में बने उसके बहनोई के मकान को ध्वस्त कराया। इससे पहले जो कार्रवाई हुई थी वो उसकी बहन शब्बो के नाम पर हंसवर में बने कॉम्प्लेक्स तथा खान मुबारक के पुश्तैनी मकान पर थी। साथ ही उसकी तमाम चल-अचल संपत्तियाँ भी सील की गई थी। हाल में लखनऊ में स्थित कॉम्प्लेक्स को भी पुलिस ने सील कर दिया था।।

उल्लेखनीय है कि खान मुबारक अंडरवर्ल्ड डॉन जफर सुपारी का भाई है। उसका नाम प्रदेश के टॉप 10 अपराधियों में आता है। उसके विरुद्ध थाने में हत्या, लूट, डकैती, अपहरण, और रंगदारी समेत 35 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और इन्हीं के चलते वह वह हरदोई जिले की जेल में बंद है।

जनसंख्या नियंत्रण कानून: बिहार के मंत्री सम्राट चौधरी ने भी की टू चाइल्ड पॉलिसी की माँग, जानें कौन से राज्यों में तेज हुई मुहिम

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण नीति को लाने के बाद से ही कई अन्य राज्यों में इसको लेकर जोरो शोरों से चर्चा शुरू हो गई है। इसी कड़ी में बिहार के पंचायती राज्य मंत्री सम्राट चौधरी ने भी सख्त जनसंख्या कानून की माँग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जिन लोगों के दो या दो से अधिक संतान हो तो उन्हें पंचायत चुनाव लड़ने से वंचित कर देना चाहिए। मंत्री ने माँग की है कि नगर निकायों की तर्ज पर ग्राम निकायों में भी यह सुविधा लागू होनी चाहिए।

मंत्री ने जनसंख्या नियंत्रण कानून की माँग करते हुए कहा कि जहाँ भी पढ़े-लिखे लोग हैं वहाँ जन्म दर कम है। देश आजादी के 75 साल पूरे करने जा रहा है ऐसे में उससे पहले ही यह कानून लागू हो जाना चाहिए।

हालाँकि, बिहार सरकार इस पर एक मत नहीं है। इस मामले में बिहार के सीएम और डिप्टी सीएम रेणु देवी आमने-सामने आ गए हैं। जनसंख्या नियंत्रण कानून का नीतीश कुमार ने विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि कानून बनाने से कुछ नहीं होगा अगर घर की महिलाएँ पढ़ी-लिखी होंगी तो जनसंख्या पर नियंत्रण खुद ही हो जाएगा। हालाँकि, उनके इस जवाब पर पलटवार करते हुए राज्य की उप मुख्यमंत्री रेणु देवी ने कहा था, “जनसंख्या नियंत्रण के लिए पुरुषों को जागरुक करना ज्यादा जरूरी है, क्योंकि पुरुषों में नसबंदी को लेकर काफी डर देखा जाता है।” भाजपा नेता रेणु देवी ने यह भी कहा कि अक्सर देखा गया है कि बेटे की चाहत में पति और ससुरालवाले महिलाओं पर अधिक बच्चे पैदा करने का दबाव बनाते हैं, जिससे परिवार बड़ा होता जाता है।

किन-किन राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण कानून पर हो रही चर्चा

असम:

इससे पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा था कि वो मुस्लिम समुदाय से बातचीत करते रहेंगे, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण नीति और परिवार नियोजन को लेकर उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट है। रिपोर्ट के मुताबिक सीएम सरमा ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार ‘दो बच्चों की नीति’ को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी। इसे राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ लेने में इस्तेमाल किया जाएगा। इसी कानून के आधार पर लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

उत्तर प्रदेश:

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य जनसंख्या नियंत्रण के ड्राफ्ट तैयार कर चुकी है। राज्य विधि आयोग ने यूपी जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण व कल्याण) विधेयक-2021 को लेकर लोगों से सुझाव भी माँगा है। इस ड्राफ्ट के मुताबिक दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन से लेकर स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा सरकारी योजनाओं का भी लाभ न दिए जाने का जिक्र है। इसके अलावा इसमें नसबंदी कराने पर इंक्रीमेंट और प्रमोशन का जिक्र है।

मध्य प्रदेश:

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार भी जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की तैयारी में है। राज्य के भाजपा विधायक डॉ रामेश्वर शर्मा ने जनसंख्या कानून लाए जाने की माँग को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है।

रामेश्वर शर्मा का पत्र (साभार: ट्विटर)

उन्होंने कहा है कि कई पश्चिमी देश, जो हमसे साधन और संसाधनों में आगे हैं, उनकी जनसंख्या एमपी से काफी कम है। विधायक ने दावा किया है कि बीते 10 साल में राज्य की आबादी में 1.5 करोड़ का इजाफा हुआ है। शर्मा ने कहा, “मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है और उसमें आग्रह किया है कि राज्य में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू होना चाहिए, क्योंकि ये सुरक्षा, विकास और सुशासन के लिए अति आवश्यक है। जनसंख्या वृद्धि के कारण प्रदेश में लगातार आबादी का अनुपात बढ़ता जा रहा है।”

कर्नाटक:

जनसंख्या नियंत्रण कानून लाए जाने की तरफ कर्नाटक के गृह मंत्री बासवराज बोम्मई ने भी इशारा किया है। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून और परिवार नियोजन को अलग-अलग बताते हुए कहा है कि हमें पहले इस पर चर्चा करके निर्णय लेना होगा। हम इस पर प्रोत्साहन के साथ आगे बढ़ेंगे।

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सी टी रवि ने भी राज्य में जनसंख्या नियंत्रण कानून की वकालत करते हुए कहा है कि भविष्य में सीमित जनसंख्या विस्फोट होने पर सीमित प्राकृतिक संसाधनों में आबादी का पेट भरना मुश्किल होगा। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अब वक्त आ गया है कि कर्नाटक अपनी बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए असम और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर एक नई जनसंख्या नीति लाए। 

NASA ने कर दिया साइंस का नाश: ‘मिशन अंबेडकर’ के ट्वीट को पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने किया बोल्ड

हाल में अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) द्वारा शेयर किए गए ट्वीट में हिंदू देवी-देवताओं के साथ ‘प्रतिमा रॉय’ को देखने के बाद जिस तरह हिंदू विरोधी ताकतों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू किया, उसने सोशल मीडिया पर एक नए विवाद को जन्म दे दिया। इसी क्रम में पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने भी अब ट्वीट किया है।

दरअसल, NASA के अकॉउंट पर शेयर हुई अलग-अलग इंटर्न्स की तस्वीर पर ‘मिशन अंबेडकर’ नाम के ट्विटर अकॉउंट से ट्वीट किया गया था। इसमें लिखा था, “ये देखने के बाद हम कह सकते हैं- साइंस का नाश कर दिया नासा ने।” इस ट्वीट पर तमाम प्रतिक्रिया आई जिसमें वेंकटेश ने भी अपनी टिप्पणी की।

वेंकटेश प्रसाद ने बाबा साहब अंबेडकर का नाम इस्तेमाल करने वाले ट्विटर अकॉउंट के लिए लिखा, “उसकी (प्रतिमा रॉय) उपलब्धि पर खुश होने और उसके श्रद्धालु होने पर मखौल उड़ाया जा रहा है। दूसरी ओर डॉ अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर की अच्छी सेहत के लिए शिवलिंग पर दूध अर्पित किया जा रहा है। बाबा साहेब शर्मिंदा होंगे कि ये हैंडल उनका नाम इस्तेमाल कर रहा है।”

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले NASA ने उन प्रतिभागियों की फोटो शेयर की थी, जिन्हें उनके साथ इंटर्नशिप करने का मौका मिला। हालाँकि, NASA द्वारा फोटो शेयर करने के बाद उसकी आलोचना शुरू हो गई, क्योंकि उन प्रतिभागियों में भारतीय-अमेरिकी इंटर्न प्रतिमा रॉय की तस्वीर भी थी। प्रतिमा रॉय की टेबल पर हिन्दू देवियों की मूर्तियाँ और दीवार पर हिन्दू देवी-देवताओं की फोटो दिखाई दे रही हैं।

प्रतिमा की इस धर्मपरायणता ने कुछ बुद्धिजीवियों को नाराज कर दिया, क्योंकि ये बुद्धिजीवी प्रतिमा द्वारा अपनी भक्ति दिखाए जाने पर खुश नहीं हैं। इन्होंने प्रतिमा के ‘वैज्ञानिक स्वभाव’ पर भी प्रश्न उठाया। हालाँकि, प्रतिमा ने अपने उसी वैज्ञानिक स्वभाव के कारण NASA के साथ इंटर्नशिप करने का मौका अर्जित किया है। कुछ लोगों ने NASA पर विज्ञान को बर्बाद करने का आरोप लगाया और कुछ ने कहा कि एक हिन्दू को देवी-देवताओं से खुद को घिरे हुए रहने की क्या जरूरत है?

बंगाल हिंसा के शिकार बीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत सरकार के शव का होगा DNA टेस्ट: कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया आदेश

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा में मारे गए भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश जारी किया है। हाई कोर्ट की पाँच जजों की बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए अभिजीत सरकार का डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने DNA टेस्ट कमांड अस्पताल में कराने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही इसकी जाँच की रिपोर्ट को 7 दिन के अंदर कोर्ट में जमा करने का आदेश भी प्रशासन को दिया गया है। इसके अलावा सीएफएसएल कोलकाता में किया जाएगा। बता दें कि कोर्ट ने यह फैसला अभिजीत सरकार के भाई की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

गौरतलब है कि 2 मई 2021 को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के साथ ही वहाँ टीएमसी के गुंडों ने हिंसा शुरू कर दी थी। इसी कड़ी में भाजपा की ट्रेड यूनियन के नेता रहे अभिजीत सरकार की हत्या कर दी गई थी। बीजेपी ने आरोप लगाया था कि चुनाव परिणाम आने के बाद टीएमसी के गुंडों ने उनकी गला दबाकर हत्या कर दी थी। इस मामले में शनिवार (11 जुलाई 2021) को पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार ( 2 मई 2021) को हत्या से पहले अभिजीत सरकार ने फेसबुक लाइव कर टीएमसी के गुंडों की हरकतों के बारे में खुलासा किया था। उन्होंने रोते हुए बताया था कि वो कुत्तों से काफी प्यार करते हैं, इसलिए उन्होंने कई आवारा कुत्तों को पाल रखा था। लेकिन, गुंडों ने कुत्ते के बच्चों तक को नहीं बक्शा था। वीडियो अपलोड होने के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। अभिजीत सरकार ने खुलासा किया था कि राज्य में यह हिंसा कोलकाता के बेलिहाता में वॉर्ड संख्या 30 से हिंसा की शुरुआत हुई थी और परेश पॉल व स्वप्न समंदर जैसे तृणमूल नेताओं के नेतृत्व में ये सब हुआ था।

‘आतंकवाद के आरोपित जेल में बंद मुस्लिमों का केस वापस’ – चुनाव के समय अखिलेश यादव ने कहा था, चुनाव फिर आने वाला है

उत्तर प्रदेश के ATS ने अपने एक ऑपरेशन में काकोरी से अल क़ायदा के दो आतंकवादियों को गिरफ्तार कर लिया। इन आतंकवादियों के पास से हथियार और गोला बारूद बरामद किए गए। उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार पूछताछ के बाद अल क़ायदा द्वारा आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की एक वृहद योजना का पता चला। जानकारी के अनुसार इन आतंकवादियों द्वारा प्रदेश के कई शहरों में बम ब्लास्ट करने की योजना का पर्दाफाश हुआ।

सूचना यह भी मिली कि पकड़े गए आतंकवादियों के तार और प्रदेशों में जुड़े हुए हैं। इन आतंकवादियों के पास से जो गाड़ी बरामद हुई, वह जम्मू कश्मीर में पंजीकृत है। इस गिरफ्तारी के बाद से प्रदेश के कई और शहरों में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया और कई जगहों पर कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू हो गए। एक आतंकवादी ने पुलिस को जानकारी दी कि वह प्रेशर कुकर बम बनाने में माहिर है और केवल तीन हज़ार रुपयों में बम बना सकता है – कारीगरी के लिहाज से यह प्रोफेशनल कॉम्पिटेंन्स के दायरे में आएगा।

किसी भी राज्य के ATS के लिए यह एक सामान्य ऑपरेशन है पर इस ऑपरेशन पर आने वाली राजनीतिक प्रतिक्रिया सामान्य नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जब आतंकवादियों की गिरफ्तारी पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रश्न पूछा गया तो उनक कहना था कि उत्तर प्रदेश पुलिस पर उन्हें भरोसा नहीं है और भाजपा सरकार पर तो बिलकुल नहीं है।

ऐसा नहीं कि अखिलेश यादव से इस बयान की उम्मीद बिलकुल नहीं की जा सकती, पर यह बयान इस मामले में सामान्य नहीं है कि पुलिस की यह कार्रवाई एक लोकतान्त्रिक सरकार की पुलिस कर रही है। अखिलेश यादव खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उसी प्रदेश के जहाँ उनकी सरकार के ऊपर यह आरोप था कि पुलिस की भर्ती के दौरान उनकी सरकार ने एक जाति के लोगों को दरोगा के पद पर नियुक्त किया। ऐसे में आज यदि वही अखिलेश यादव कहें कि उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस पर भरोसा नहीं है तो यह बात कितनी तार्किक है?

अखिलेश यादव और उनका दल उत्तर प्रदेश की राजनीति के महत्वपूर्ण किरदार हैं। अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों में वर्तमान सरकार और उसके मुखिया योगी आदित्यनाथ के लिए सबसे बड़ी चुनौती शायद अखिलेश और उनके ही दल से आएगी। ऐसे में प्रश्न यह है कि यादव के लिए इस तरह के बयान देना कितना सही है, वो भी तब जब आधुनिक राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था में आतंकवाद को विश्व भर में सबसे बड़े खतरे के रूप में देखा जाता है?

एक बार के लिए उनका बयान भले असामान्य लगता है पर ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखने पर लगता है कि उनके इस बयान में आश्चर्यजनक बात नहीं है। वर्ष 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय उनके दल ने अपने चुनावी वादों में एक वादा यह भी किया था कि; सत्ता में आते ही मुस्लिम समुदाय के उन लोगों का केस वापस लिया जाएगा, जो आतंकवाद के आरोप में जेल में बंद हैं। सत्ता प्राप्ति के बाद उनकी सरकार ने अपना यह वादा निभाया भी था।

अखिलेश यादव के बयान के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का बयान भी आया, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें ATS द्वारा की गई इन गिरफ्तारियों की टाइमिंग पर शंका है। मायावती ने अपने बयान में अखिलेश की तरह साफ़-साफ़ अपनी बात नहीं कही, पर उन्होंने दूसरे शब्दों के सहारे पुलिस और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े कर दिए। मायावती का बयान आश्चर्यचकित करता है, खासकर इसलिए कि ऐसी आम धारणा है कि उनके शासन काल में कानून व्यवस्था की स्थिति समाजवादी सरकार की तुलना में बेहतर थी। वैसे भी पिछले कई महीनों में राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर मायावती के सार्वजनिक बयान अपेक्षाकृत सुलझे हुए रहे हैं।

अखिलेश यादव और मायावती के इन बयानों को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है। 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने जब POTA जैसा कानून पास किया, तभी से उसके विरुद्ध आवाज़ें उठने लगीं। कहीं अल्पसंख्यक समुदाय के ‘बुद्धिजीवियों’ की ओर से तो कभी सिविल सोसाइटी की ओर से। कानून के गलत इस्तेमाल के बारे में पुलिस सुधारों की बात नहीं की गई बल्कि उसे आगे रख कर एक माहौल बनाया गया कि कानून ही खराब है। माहौल बनाने की जो शुरुआत कॉन्ग्रेस ने की थी, उसमें और राजनीतिक दल शामिल होते गए। बड़ा आसान था यह विमर्श चलाना कि भाजपा अल्पसंख्यक विरोधी है, इसलिए ऐसा कानून ले आई है।

2004 के लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणा की कि यदि वह सत्ता में आई तो POTA को रद्द कर देगी। UPA की सरकार बनी और आतंकवाद के विरुद्ध कानून रद्द कर दिया गया। उसके बाद पूरे देश में किस स्तर की आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दिया गया, यह इतिहास का हिस्सा है। आतंकवाद के विरुद्ध देश की लड़ाई किस तरह से प्रभावित हुई, वह किसी से छिपा नहीं है। UPA के शुरुआती पाँच वर्ष ऐसे थे, जिस दौरान आतंकवादी घटनाओं की बाढ़ आ गई थी। यह वही समय था, जब हिन्दू आतंकवाद को लेकर विमर्श चलाने की भरपूर कोशिश की गई और उसी समय मुंबई में 26/11 हुआ।

ये घटनाएँ ऐसी थीं जिनकी वजह से एक बार UPA को भी लगा कि सरकार को आतंकवाद विरोधी कानून की सख्त आवश्यकता है और इसीलिए वीरप्पा मोइली को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि वे इसके बारे में एक रिपोर्ट दें। वीरप्पा मोइली ने रिपोर्ट दी कि आतंकवाद से लड़ाई लड़ने के लिए एक सख्त कानून की आवश्यकता है क्योंकि बिना किसी सख्त कानून के आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई कमजोर पड़ गई थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उनके द्वारा अनुशंसित कानून के ड्राफ्ट में आतंकवाद की घटनाओं पर गिरफ्तारी और जमानत की प्रक्रिया POTA से भी अधिक सख्त थी। POTA यानी वही कानून जिसके विरुद्ध माहौल बनाकर उसे हटाने का काम UPA ने किया था।

UPA के दौर की इन घटनाओं का जिक्र यहाँ इसलिए आवश्यक है ताकि आतंकवाद और उसके विरुद्ध लड़ाई को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा सके। हमें समझने की जरूरत है कि आतंकवाद से खतरा कोई कहानी नहीं है और न ही इस सरकार या उस सरकार या इस समुदाय और उस समुदाय की बात है। यह खतरा काल्पनिक नहीं है, इसलिए इससे लड़ाई किसी दल के दर्शन पर नहीं बल्कि सरकार और प्रशासन पर निर्भर होनी चाहिए। ऐसे में आवश्यक है कि आतंकवाद को लेकर बयान योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्रीत्व या भाजपा की सरकार पर भरोसा या आस्था की बात से प्रभावित न हो बल्कि देश की नीति के आधार पर हो, फिर बयान सत्ताधारी दल के किसी नेता का हो या सत्ता से बाहर दल के नेता का।

राहुल गाँधी से मिले प्रशांत किशोर, सियासी अटकलों के बीच बड़ा सवाल- क्या बनेंगे कॉन्ग्रेस के तारणहार?

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने मंगलवार (13 जुलाई 2021) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी से दिल्ली में उनके आवास पर मुलाकात की। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक के दौरान प्रियंका गाँधी, केसी वेणुगोपाल और पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

यह बैठक पंजाब, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस इकाई में अंदरूनी कलह और उथल-पुथल को लेकर की गई। बीते कुछ महीनों से यहाँ सियासी संकट गहराया हुआ है। इसके अलावा उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर और गुजरात में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राहुल गाँधी से प्रशांत किशोर की मुलाकात को अहम माना जा रहा है।

हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली में सीएम के आवास कपूरथला हाउस में किशोर से मुलाकात की थी। अमरिंदर ने किशोर को प्रधान सलाहकार नियुक्त किया था। हाल ही में पश्चिम बंगाल सहित कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान प्रशांत किशोर पंजाब गए थे। हालाँकि, नतीजे आने के तुरंत बाद, उन्होंने एक राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में अपने पद से हटने की इच्छा व्यक्त की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स में कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी का लखनऊ दौरा टलने की वजह पीके की राहुल से मुलाकात के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, प्रियंका का यह दौरा 14 जुलाई को होने वाला था, लेकिन अब इसे टालकर 16 जुलाई को कर दिया गया है।

बता दें कि 2014 में नरेंद्र मोदी के राजनीति प्रचार-प्रसार की जिम्‍मेदारी प्रशांत ने ली थी। इसके बाद उन्‍होंने बिहार चुनाव में नीतीश कुमार, पंजाब में अमरिंदर सिंह, आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी और बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के लिए काम किया था।

वसीम दूसरों जैसा नहीं… कह कर परिवार को ठुकराया, 3 साल बाद जहर खाकर मरी कीर्ति

मध्य प्रदेश के गुना जिले में एक जैन लड़की ने दूसरे समुदाय के युवक से निकाह करने के कुछ साल बाद आत्महत्या करके अपनी जान दे दी। मृतिका के परिजनों ने आरोप लगाया कि ये सब कुछ उससे जबरदस्ती करवाया गया। 11 जुलाई 2021 को परिजनों ने इस बाबत युवक और उसके परिवार के ख़िलाफ़ दहेज प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज करवाया है।

स्वराज्य मैग्जीन की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने अपने ट्विटर अकॉउंट पर कीर्ति जैन नाम की लड़की की पूरी कहानी शेयर की है। उनके ट्वीट के मुताबिक, कीर्ति 3 साल पहले (2018 में) वसीम कुरैशी नाम के लड़के के साथ भाग गई थी और अब तीन दिन पहले खबर आई कि उसने सलफास खाकर आत्महत्या कर ली।

लड़की, गुना जिले के एक मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखती थी, लेकिन वसीम के परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी। वह कीर्ति के घर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर रहता था और तबसे उसका पीछा करता था, जब वह एक नाबालिग थी और बस स्कूल जाया करती थी।

3 साल पहले कीर्ति जब 18 साल की पूरी हुई तो वसीम उसे अपने साथ भगा ले गया। उसके भाई कुलदीप ने बताया कि वसीम उन लोगों से कभी नहीं मिला था। मगर, जब उन्हें कीर्ति के साथ उसके संबंधों का मालूम हुआ तो उन्होंने उसका पता लगाया और मामला कोर्ट पहुँचने से पहले बाहर सुलझा लिया गया।

कुलदीप बताते हैं कि उन्होंने अपनी बहन को समझाने की बहुत कोशिश की थी। उनके समुदाय की साध्वियों ने भी उससे मुलाकात करके उसे समझाया। लेकिन कीर्ति यही दोहराती रही कि वह अब बालिग है और अपनी इच्छा से कुछ भी करने के लिए आजाद है। कुलदीप ने उसे समझाने के लिए ‘लव जिहाद’ के बारे में भी बताया, मगर उस पर वसीम का भूत सवार था।

अपने परिवार की बातों को नजरअंदाज करके उसने कहा कि वह लोग (परिवार वाले) वसीम को जानते ही नहीं हैं। वो तो मीट माँस भी छोड़ने को तैयार था। कीर्ति ने अपने घरवालों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भले ही वसीम मुस्लिम है लेकिन इस वजह से उसका नाम या जीवनशैली पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

घटना के कुछ माह बाद कीर्ति फिर घर से भाग गई। दूसरी बार घरवालों ने पुलिस में शिकायत दी, लेकिन आखिर में उन्हें अपने हाथ बाँधने पड़े क्योंकि कोर्ट में लड़की ने ये कह दिया था कि वह अपनी मर्जी से भागी है। इसके बाद सोशल मीडिया पर उसकी एक वीडियो सामने आई जिसमें उसे कहते सुना गया कि उसने वसीम से निकाह कर लिया है।

स्वाति गोयल के ट्विट्स के अनुसार, कीर्ति ने जैनब बनने के बाद वसीम से निकाह किया था और फिर वह गुना से दूर रहने लगी। कुछ माह बाद उसने अपने घरवालों से संपर्क किया और बेहद परेशान हालत में बताया कि वसीम का परिवार तो बहुत ज्यादा गरीब है और वह खुद भी कुछ नहीं कमाता।

जब कीर्ति ने अपने परिजनों को संपर्क किया था उस समय वह गर्भ से थी। उसकी स्थिति जानकर घरवालों ने उसे 2 लाख रुपए डिलिवरी और उसकी तबीयत का ध्यान रखने के लिए दिए। लेकिन बाद में कीर्ति को परिजनों से मिलने से मना कर दिया गया। परिजनों ने दोबारा कहा कि अगर वह वसीम को छोड़कर लौटना चाहती है तो आ जाए। वह सब उसके साथ हैं।

हालाँकि, कीर्ति ने यह कदम नहीं उठाया। निकाह के एक साल में उसने बेटी को जन्म दिया और बाद में पैसों के लिए अपने मायके फोन करती रही। परिजनों से बात करते हुए उसने कहा कि उसे समझ नहीं आता कि जब वसीम कुछ कमाता ही नहीं है तो आखिर वह शादी से पहले उसे महंगी बाइक पर कैसे जगह-जगह घुमाता था।

कोरोना की दूसरी लहर में कीर्ति का अपने परिवार वालों से बातचीत बिलकुल बंद हो गई और इस हफ्ते उन्हें आत्महत्या का तब पता चला जब पुलिस ने कुलदीप से अस्पताल आने को कहा। वह वहाँ पहुँचे लेकिन कीर्ति तब तक दम तोड़ चुकी थी।

कुलदीप व उनके घरवालों ने उसका दाह संस्कार जैन रिवाजों से किया, जिसमें वसीम व उसके परिजन बीच में आ गए और कहने लगे कि कीर्ति मुसलमान बन गई थी, इसलिए उसे दफनाया जाना चाहिए। उनकी बात सुनकर पुलिस ने सबूत माँगा लेकिन वह ये सब साबित नहीं कर पाए।

अब वसीम और उसके परिवार के ख़िलाफ़ गुना पुलिस में मृतिका के परिजनों ने दहेज प्रताड़ना (498ए) व दहेज के लिए हत्या (304बी) का मामला दर्ज करवाया है। इस संबंध में पुलिस ने भी 11 जुलाई को बयान जारी किया है। वसीम की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस बीच कीर्ति की एक वीडियो सामने आई है। इसमें वह सलफास खाने के बाद अस्पताल में है। बयान में वह कह रही है कि उसने गलती से जहर खाया जबकि कुलदीप का कहना है कि शायद उसे जहर पीने को मजबूर किया गया हो और ऐसा बयान देने के लिए दबाव बनाया गया हो।