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जिनके लादेन से कनेक्शन…उन्हें ट्रंप प्रशासन ने ‘सलाहकार बोर्ड’ में किया नियुक्त: पत्रकार के खुलासे से मचा बवाल

व्हाइट हाउस में पूर्व आतंकियों की एंट्री हुई है। ये खुलासा एक पत्रकार लॉरा लूमर ने किया। उन्होंने बताया कि 16 मई 2025 को व्हाइट हाउस की ओर से जारी प्रेस रिलीज में जिन दो लोगों को ‘ले लीडर्स के सलाहकार बोर्ड’ में नियुक्त किया गया है उनकी पृष्ठभूमि आतंकवाद से जुड़ी है। इन दोनों के नाम- इस्माइल रॉयर और शेख हमजा यूसुफ है। पत्रकार के अनुसार ये लोग पूर्व में जिहादी गतिविधियों में शामिल थे और एक तो आतंकी कैंपों में ट्रेनिंग के लिए गया था।

इस्माइल रॉयर, जिसे पहले रैंडल रॉयर के नाम से जाना जाता था, उसने पाकिस्तान जाकर एक इस्लामी आतंकी शिविर में प्रशिक्षण लिया था। उसे जिहादी आतंकी गतिविधियों में शामिल होने, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक साजिश रचने, हिंसक अपराधों के दौरान विस्फोटक और हथियार इस्तेमाल करने के आरोप में दोषी पाया गया था। इसके चलते उसे 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। इस नियुक्ति को लेकर सुरक्षा और नैतिकता से जुड़े कई सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

जनवरी 2004 में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी एक दस्तावेज़ में कहा गया है,

“अपनी दलील समझौते में, रॉयर ने सह-प्रतिवादी मसूद खान, योंग की क्वोन, मुहम्मद आतिक और ख्वाजा महमूद हसन को लश्कर-ए-तैयबा द्वारा संचालित पाकिस्तान में एक आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर में प्रवेश पाने में सहायता करने और उकसाने की बात स्वीकार की, जहाँ उन्होंने अर्ध-स्वचालित पिस्तौल सहित विभिन्न हथियारों के उपयोग का प्रशिक्षण लिया। रॉयर ने सह-प्रतिवादी इब्राहिम अहमद अल-हमदी को लश्कर-ए-तैयबा शिविर में प्रवेश पाने में मदद करने की बात भी स्वीकार की, जहाँ अल-हमदी ने भारत के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने की साजिश को आगे बढ़ाने के लिए रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड के इस्तेमाल का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

रॉयर ने स्वीकार किया कि उसने 16 सितंबर, 2001 को एक बैठक के बाद अन्य जिहादियों को लश्कर-ए-तैयबा प्रशिक्षण शिविर में प्रवेश पाने में मदद करने के लिए अपने प्रयासों को प्रतिबद्ध किया, जिसमें एक अज्ञात साजिशकर्ता ने कहा कि 11 सितंबर, 2001 को आतंकवादी हमलों का इस्तेमाल वैश्विक युद्ध को गति देने के बहाने के रूप में किया जाएगा। इस्लाम के खिलाफ़, और अब समय आ गया है कि वे विदेश चले जाएँ और अगर संभव हो तो मुजाहिदीन में शामिल हो जाएँ। उस बैठक में शामिल दो अन्य व्यक्ति, योंग क्वोन और ख्वाजा हसन, जिन्होंने पहले ही अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा शिविर में जाने का एक उद्देश्य अफ़गानिस्तान सहित अन्य जगहों पर जिहाद में शामिल होने के उद्देश्य से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करना था”।

यह जानकारी सामने आई है कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा नियुक्त इस्माइल रॉयर पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक शिविर में प्रशिक्षण ले चुका है और वो भारत को निशाना बनाने की साजिश में भी भागीदार रहा था।

पत्रकार लॉरा लूमर के अनुसार, इस्लामी आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के चलते रॉयर ने 2004 से 2017 के बीच 13 साल जेल में बिताए। लूमर का दावा है कि रॉयर न केवल अमेरिका के खिलाफ युद्ध छेड़ना चाहता था, बल्कि उसने ओसामा बिन लादेन के नेतृत्व वाले आतंकी संगठन अल कायदा को भी समर्थन दिया था।

इन गंभीर आरोपों और पृष्ठभूमि के बावजूद, उसे अमेरिकी प्रशासन के की सलाहकार भूमिका में नियुक्त किया जाना बड़े सवाल खड़े करता है। इस्लामी आतंकवादी अफगानिस्तान में तालिबान का समर्थन भी करना चाहता था और ‘वर्जीनिया जिहाद नेटवर्क’ में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।

लॉरा लूमर के मुताबिक, “अमेरिका द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित लश्कर-ए-तैयबा के साथ उसकी गतिविधियों में दुष्प्रचार, कश्मीर में भारतीय ठिकानों पर गोलीबारी और हथियार रखना शामिल था, जो हिंसक जिहादी उद्देश्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

शेख हमजा यूसुफ की आतंकी पृष्ठभूम

शेख हमजा यूसुफ कैलिफोर्निया स्थित ज़ायतुना कॉलेज का सह-संस्थापक है, जो शरिया कानून की शिक्षा देता है। पत्रकार लॉरा लूमर के अनुसार, यूसुफ की पृष्ठभूमि भी विवादित रही है। उनका दावा है कि शेख हमजा यूसुफ ‘पूर्व’ इस्लामी आतंकवादी रहा है और उनका संबंध हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे कट्टरपंथी संगठनों से रहा है। इन आरोपों ने उनकी हालिया नियुक्ति को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं।

लूमर ने बताया, “9/11 से दो दिन पहले, यूसुफ ने जमील अल-अमीन के लिए एक फंडरेजर में भाषण दिया था, जिस पर एक पुलिस अधिकारी की हत्या का मुकदमा चल रहा था। अपने भाषण के दौरान, यूसुफ ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर नस्लवादी देश होने का आरोप लगाया और सुझाव दिया कि अल-अमीन को फँसाया गया था। अल-अमीन को अगले वर्ष हत्या का दोषी ठहराया गया था।”

लॉरा लूमर ने कहा, “यूसुफ ने यह भी कहा कि 1990 के दशक में न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक स्थलों पर बम विस्फोट की साजिश में दोषी ठहराए गए शेख उमर अब्देल-रहमान पर अन्यायपूर्ण तरीके से मुकदमा चलाया गया।”

आईपीटी की एक रिपोर्ट की (12 पेज) की पीडीएफ फाइल  में कहा गया है, “इस्लामिक सर्किल ऑफ नॉर्थ अमेरिका को दिए गए भाषण में यूसुफ ने चेतावनी दी कि अमेरिका इस्लाम के साथ युद्ध की ओर बढ़ रहा है। एक ऐसा संघर्ष जिसमें अमेरिका के हारने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीतियाँ ईरान और पाकिस्तान के साथ टकराव की राह पर हैं, और इससे इस्लाम के साथ एक बड़ा युद्ध हो सकता है।”

यूसुफ़ ने कहा, “यह देश इस्लाम के साथ युद्ध नहीं जीत सकता – मैं खुदा की कसम खाता हूँ। इसे रोका जाना चाहिए।” इसमें आगे कहा गया है कि अमेरिकी विदेश नीति “अल-कायदा के लिए भर्ती का सबसे बड़ा साधन है।”

शेख हमजा यूसुफ से अलकायदा द्वारा किए गए 9/11 हमलों के बाद संघीय जाँच ब्यूरो (एफबीआई) ने पूछताछ की थी। ‘ब्रिटिश इस्लाम’ बनाने की उनकी कल्पना लगभग सफल हो गई है।

शेख हमजा यूसुफ़ ने ब्रिटेन सरकार द्वारा यहूदी राज्य इज़रायल को हथियार बेचने का भी विरोध किया है। यही कारण है कि उससे दुनिया के शीर्ष 500 प्रभावशाली मुसलमानों में स्थान दिया गया है। अपनी आतंकवादी पृष्ठभूमि के बावजूद, शेख हमजा यूसुफ को ट्रम्प प्रशासन द्वारा व्हाइट हाउस के आम नेताओं के सलाहकार बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया है।

डोनाल्ड ट्रंप की पूर्व आतंकी नेता अहमद अल-शरा से मुलाकात

डोनाल्ड ट्रंप पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए हैं, जिन्होंने पूर्व आतंकी नेता से सार्वजनिक रूप से मुलाकात की है। उन्होंने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा (पूर्व में अबू मोहम्मद अल-जोलानी), पूर्व HTS प्रमुख और अल-कायदा से जुड़े आतंकी से मुलाकात की। HTS को अमेरिका पहले आतंकी संगठन घोषित कर चुका है।

यह मुलाकात तब हुई जब अमेरिका ने सऊदी अरब के दबाव में सीरिया पर वर्षों पुराने प्रतिबंध हटा दिए। ट्रंप ने अल-शरा को ‘युवा, आकर्षक और सख्त’ बताया, जिससे उनका सार्वजनिक समर्थन जाहिर हुआ।

‘ये हिंदू सुधरेंगे नहीं, इनके हाथ पैर तोड़ दो, औरतों की इज्जत लूट लो’: दलित लड़की की शादी में 500+ मुस्लिमों का उपद्रव, पाइप-लाठियों से हमला; मंदिर को भी बनाया निशाना

गुजरात के पाटण जिले में मुस्लिमों ने अनुसूचित जाति के लोगों पर हमला कर दिया। जानकारी के मुताबिक, सरस्वती तालुका के भीलवण गाँव में गुरुवार (15 मई 2025) को एक अनुसूचित जाति के परिवार की शादी के जश्न के दौरान स्थानीय मुस्लिमों ने उन पर हमला किया। यह घटना डीजे बजाने को लेकर शुरू हुई, लेकिन पीड़ित परिवार का कहना है कि इसके पीछे 15 साल पुराना मंदिर निर्माण का विवाद भी है।

मुस्लिमों के इस हमले में 8 लोग घायल हुए, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और गहनों की लूट की शिकायत भी सामने आई। पुलिस ने 14 मुस्लिम हमलावरों के खिलाफ अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया और ज्यादातर आरोपितों को हिरासत में ले लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला अहमदाबाद से आए अनुसूचित जाति के परिवार की बेटी की शादी से जुड़ा है, जो भीलवण गाँव में हो रही थी। शादी की तैयारियों के तहत 15 मई को स्थानीय माताजी मंदिर के पास रास-गरबा का आयोजन था, जिसमें डीजे बजाया जा रहा था। परिवार के अनुसार, डीजे की टेस्टिंग चल रही थी तभी हफीजा माणसिया नाम की महिला ने आपत्ति जताई। उसने कहा, “अजान के समय डीजे क्यों बजा रहे हो?” इसके बाद उसने मुस्लिमों की भीड़ इकट्ठी कर ली।

पीड़ितों के अनुसार, हफीजा ने न केवल डीजे बंद करने के लिए कहा, बल्कि जातिसूचक गालियाँ भी दीं। उसने कहा, “यहाँ #$$%^&* (दलितों) के घर कम हैं, फिर भी डीजे बजा रहे हो।” इसके बाद 400-500 लोगों का मुस्लिम टोला इकट्ठा हो गया, जिसमें पुरुष और महिलाएँ दोनों शामिल थे। उन्होंने लोहे की पाइप, लाठियाँ और पत्थरों से हमला बोल दिया। इस हमले में 8 लोग घायल हुए, जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। इस मामले की एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

FIR के मुताबिक, हमलावरों ने न केवल मारपीट की, बल्कि महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और उनकी आबरू लूटने की कोशिश भी की। एक पीड़िता ने बताया कि एक हमलावर ने उसे बाँह पकड़कर छेड़ने की कोशिश की, जबकि दूसरी महिला के गहने छीन लिए गए। परिवार का दावा है कि करीब 4 लाख रुपये के गहने लूटे गए। हमलावरों ने जातिगत गालियाँ दीं और कहा, “ये हिंदू सुधरेंगे नहीं, इनके हाथ-पैर तोड़ दो, इनकी औरतों की इज्जत लूट लो।”

हमलावरों ने यह भी कहा कि दलित परिवार ने मंदिर के सामने रास-गरबा आयोजित करके मुस्लिमों के वर्चस्व को चुनौती दी है। उन्होंने मंदिर के सामने बने मंडप में तोड़फोड़ की और मेहमानों पर हमला किया। हालात इतने बिगड़ गए कि परिवार को अपने घरों में छिपना पड़ा, लेकिन टोला वहाँ भी पहुँच गया और हमले जारी रखे।

डीजे सिर्फ बहाना, मंदिर निर्माण का बदला ले रहे थे मुस्लिम

पीड़ित परिवार का कहना है कि डीजे तो केवल बहाना था। असल विवाद भीलवण गाँव में अनुसूचित जाति के समुदाय द्वारा बनाए जा रहे मंदिर को लेकर है। करीब 15 साल पहले जब अनुसूचित जाति के समाज ने गाँव में माताजी मंदिर बनाने की योजना बनाई, तो मुस्लिम समुदाय ने इसका विरोध किया। मामला कोर्ट तक गया और 15 साल बाद अदालत ने मंदिर निर्माण की अनुमति दी। मौजूदा समय में वो मंदिर निर्माणाधीन है। इस शादी का रास-गरबा उसी मंदिर के सामने आयोजित किया जा रहा था, जिसकी कसक मुस्लिमों के दिलों में थी और उन्होंने पूरे समाज पर हमला कर अपनी भड़ास निकाली।

पीड़िता ने ऑपइंडिया को बताया कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग मंदिर निर्माण से नाराज थे। उन्होंने पहले भी अनुसूचित जाति के परिवार को धमकी भी दी थी कि वे गाँव में मंदिर न बनाएँ और वहाँ से गुजरें नहीं। पीड़ितों का मानना है कि मंदिर को लेकर मुस्लिमों के मन में जो गुस्सा था, इसकी वजह से ये हमला किया गया।

साल 2009 में हुई थी हिंदू की हत्या, इसी गाँव के थे हत्यारे

FIR में दर्ज बयानों के अनुसार, हमलावरों ने 2009 की एक घटना का जिक्र भी किया। उस साल भीलवण गाँव में शिवसेना के तालुका प्रमुख रमेश प्रजापति की हत्या कर दी गई थी। हत्या के दोषी गाँव के ही कुछ मुस्लिम लोग थे। हमलावरों ने धमकी दी, “रमेश प्रजापति को मारने से भी तुम्हें सबक नहीं मिला। तुम्हारे हाथ-पैर तोड़ देंगे।” यह धमकी दर्शाती है कि हमले के पीछे पुरानी रंजिश भी थी।

घटना की सूचना मिलते ही वागडोद पुलिस स्टेशन की टीमें मौके पर पहुँचीं और स्थिति को नियंत्रित किया। रातभर पुलिस ने परिवार को सुरक्षा दी और अगली सुबह पुलिस सुरक्षा में वरघटो निकाला गया। शादी की रस्में पूरी करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

पुलिस ने 14 नामजद आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें हफीजा माणसिया, आसिफ बादरपुरा (गाँव का उपसरपंच), आमीन मढिया, अब्दुल वहीद माणसिया, जावेद मरेडिया, रहीम मढिया, परोड मढिया, टूलियो मढिया, सईद अकबर, मोहम्मद मरेडिया, साबेदा वहीद मढिया, इम्तियाज, अशफाक उमर और मोहम्मद सईद चारोलियाँ शामिल हैं। इसके अलावा 400-500 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई।

वागडोद पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि SC/ST एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। ज्यादातर आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है और पाटण SC/ST सेल इसकी जाँच कर रही है।

पीड़ित परिवार ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि हमलावरों में कई लोग नकाब पहने थे, जिससे उनकी पहचान मुश्किल थी। हमले में बच्चों को भी चोटें आईं। एक महिला ने कहा, “हम शादी का जश्न मना रहे थे, लेकिन हमें अपमानित किया गया, हमारे गहने लूटे गए और हमारी इज्जत पर हमला हुआ।” परिवार ने माँग की है कि सभी दोषियों को सख्त सजा दी जाए।

376 मर्द, 284 औरत… राजस्थान में 1000+ बांग्लादेशी-रोहिंग्या पकड़े गए, प्लेन से भेजे जाएँगे पश्चिम बंगाल: हरियाणा में 237 घुसपैठिए ‘बंगाली’ बनकर काम कर रहे थे

राजस्थान और हरियाणा में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। राजस्थान में 30 अप्रैल 2025 से शुरू हुए विशेष अभियान में अब तक 1,000 से ज्यादा घुसपैठिए पकड़े गए हैं, जबकि हरियाणा के तीन जिलों- नूहँ, झज्जर और हाँसी में 237 बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में लिए गए हैं। इनमें से कई ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुद को भारत का नागरिक बताने की कोशिश की थी। अब घुसपैठियों को खास प्लेन से पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है, जहाँ से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) इन्हें बांग्लादेश और म्यांमार वापस भेजेगा।

राजस्थान में पकड़े गए घुसपैठियों में 341 बच्चे, 284 महिलाएँ और 376 पुरुष शामिल हैं। राजस्थान में सबसे ज्यादा घुसपैठिए सीकर जिले से पकड़े गए हैं, जहाँ 394 लोग हिरासत में हैं। जयपुर (218), अलवर (103), कोटपूतली-बहरोड़ (117) और भिवाड़ी (67) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में घुसपैठिए पकड़े गए।

बनवा लिए थे फर्जी निवास प्रमाण पत्र

जाँच में पता चला कि ये लोग फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और निवास प्रमाण पत्र बनवाकर राजस्थान के मूल निवासी होने का दावा कर रहे थे। कई महिलाएँ घरेलू सहायिका के रूप में काम कर रही थीं, जबकि पुरुष ईंट भट्टों, खान मजदूरी, कबाड़ बीनने और बेलदारी जैसे कामों में लगे थे। कुछ के खिलाफ चोरी और अन्य अपराधों के मामले भी सामने आए हैं।

राजस्थान सरकार ने 8 मई 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर हर जिले में विशेष टास्क फोर्स और होल्डिंग सेंटर बनाए। इन सेंटरों में घुसपैठियों को अस्थायी रूप से रखा जा रहा है। 15 मई 2025 को 148 लोगों का पहला जत्था विशेष विमान से पश्चिम बंगाल भेजा गया। अगले कुछ दिनों में और लोगों को भेजने की तैयारी है। गृह विभाग इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहा है ताकि कोई चूक न हो।

हरियाणा में भी अवैध घुसपैठियों के खिलाफ अभियान

हरियाणा के मेवात इलाके में अब तक 237 से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा जा चुका है। इनमें से नूहँ जिले में पुलिस ने 125 बांग्लादेशियों को पकड़ा, जो बिना वैध दस्तावेजों के ईंट भट्टों पर काम कर रहे थे। झज्जर के भदानी गाँव में 47 और हाँसी में 26 घुसपैठिए हिरासत में लिए गए। 12 मई को भी हाँसी में 39 लोग पकड़े गए थे। इनमें से कई ने खुद को बंगाली मजदूर बताकर भट्टा मालिकों को गुमराह किया था।

पुलिस अब उन मालिकों पर भी कार्रवाई की योजना बना रही है, जो बिना दस्तावेज जाँच के अवैध मजदूरों को काम दे रहे हैं। नूहँ पुलिस ने स्थानीय कारोबारियों से कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराने की अपील की है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ₹40000 करोड़ का खरीदेगा रक्षा सामान: PAF के परखच्चे उड़ाने वाले ब्रह्मोस और स्काल्प क्रूज की बढ़ेगी आपूर्ति, तीनों सेनाओं के पास पहले से अधिक होगा गोला-बारूद

पाकिस्तान के साथ जंग की स्थिति के बीच भारतीय सरकार ने सेना को अधिक मजबूत करने का फैसला लिया है। जहाँ ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तानी वायुसेना को नेस्तनाबूद करने के लिए भारत के अहम मिसाइलों का इस्तमाल किया गया। अब उन्हीं की स्पलाई बढ़ाने के लिए सरकार ने अधिक पैसे दिए हैं। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने आपातकालीन शक्तियों (EP) का इस्तमाल करते हुए सेनाओं के हथियार और गोला बारूद खरीदने के लिए ₹40,000 करोड़ की मंजूरी दी है।

दरअसल, शनिवार (17 मई 2025) को इससे संबंधित बैठक आयोजित की गई, जिसमें रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में बताया गया कि आपातकालीन शक्तियों में सेनाएँ नजर रखने वाले ड्रोन, आत्मघाती (फिदायीन) ड्रोन, लॉन्ग रेंज लूटरिंग म्यूनिशन और तोप, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए गोला बारूद खरीद सकेंगी। इस कदम से पाकिस्तान पर हुए हमलों में इस्तमाल हुई मिसाइलों जैसे ब्रह्मोस और स्काल्प क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति और तेज हो जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन सभी हथियार और उपकरण को खरीदने के लिए समय सीमा तय की गई है। इसके भीतर ही सभी खरीदारी होनी चाहिए। इसमें डिलीवरी के लिए एक साथ के भीतर ही आश्वासन देना होगा। इन शक्तियों का उपयोग केवल तीनों सनाओं के उप अधिकारी द्वारा ही किया जाएगा। साथ ही यह 5वीं बार है, जब सेनाओं को इस तरह की आपातकालीन खरीद के लिए मंजूरी मिली है।

इस खरीद प्रक्रिया में रक्षा मंत्रालय के वित्त सलाहकार भी शामिल होंगे। रक्षा मंत्रालय ने निजी और सरकारी उद्योगों के साथ दूर तक की योजनाओं पर भी बातचीत शुरू कर दी है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड नाम की कंपनी को ड्रोन डिटेक्शन के लिए 10 नए लो-लेवल रडार का ऑर्डर मिलने की संभावना जताई गई हैं। इससे पहले 6 रडारों के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है। इसके अलावा कुछ अन्य ड्रोन निर्माण वाली भारतीय कंपनियों को भी तीनों सेनाओं से बड़ा ऑर्डर मिल सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि नई EP के तहत बजट की 15 प्रतिशत सीमा होगी और अनुबंधों को 40 दिनों के भीतर अंतिम रूप देना होगा। साथ ही EP खरीद वित्तीय सलाहकारों की सहमति से की जाएगी और किसी भी आयात या वैश्विक खरीद के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी।

बता दें कि इससे अतिरिक्त भारत सरकार बजट के आवंटन में अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सेना की धनराशि को बढ़ाने पर भी विचार कर सकती है। यह EP मंजूरी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिली है, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान वायु सेना को भारी नुकसान पहुँचाया है।

कपड़े से लेकर खाने तक और रुई से लेकर प्लास्टिक तक… अब बांग्लादेश अपना माल रखे अपने पास: मोदी सरकार ने सबके आयात पर लगाया बैन, अधिसूचना जारी

भारत की मोदी सरकार ने बांग्लादेश को एक बड़ा झटका दिया है। 17 मई 2025 को एक अधिसूचना जारी कर मोदी सरकार ने बांग्लादेश से आने वाले रेडिमेड कपड़ों, प्रोसेस्ड फुड और फ्रूट ड्रिंक्स आदि पर पाबंदी लगा दी। अधिसूचना में कहा गया कि बांग्लादेश की ये सारी चीजें केवल मुंबई के न्हावा शेवा और कोलकाता के समुद्री बंदरगाहों के माध्यम से आएँगी और किसी बंदरगाह से नहीं।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के अंतर्गत विदेश व्यापार महानिदेशालय ने शनिवार (17 मई 2025) को एक अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी। यह फैसला बांग्लादेश सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनुस के चीन में दिए गए विवादास्पद बयान के बाद लिया गया। जहाँ युनुस ने कहा था कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य समुद्र से कटे हुए हैं और उन्हें समुद्र तक पहुँचने के लिए बांग्लादेश पर निर्भर रहना पड़ता है।

इसी बयान के बाद अधिसूचना जारी हुई। अब भारत के बंदरगाहों (न्हावा शेवा और कोलकाता बंदरगाहों को छोड़कर) पर बांग्लादेश से आने वाले सभी प्रकार के रेडिमेड कपड़ों, फल और फलों के स्वाद वाले और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड फुड, प्लास्टिक और पीवीसी तैयार सामान और लकड़ी के फर्नीचर के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

अधिसूचना के अनुसार, फल और फलों के स्वाद वाले कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, बेक्ड सामान, स्नैक्स, चिप्स और कन्फेक्शनरी, कपास और कॉटन याम अपशिष्ट, प्लास्टिक और पीवीसी से तैयार सामान और लकड़ी के फर्नीचर के आयात को असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में किसी भी भूमि सीमा शुल्क स्टेशनों (LCS) / एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) और पश्चिम बंगाल में चंगराबांधा और फुलबारी के भूमि सीमा शुल्क स्टेशनों के माध्यम से अनुमति नहीं दी जाएगी।

इससे पहले 09 अप्रैल 2025 को भारत सरकार ने भारतीय बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर भीड़भाड़ का हवाला देते हुए बांग्लादेश को पहले दी गई ट्रांसशिपमेंट सुविधा को वापस लेने की घोषणा की थी। इस सुविधा के तहत बांग्लादेश को भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित पेट्रापोल लैंड पोर्ट से कंटेनर ट्रक भेजने की अनुमति दी गई थी, जो दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा लैंड पोर्ट है। यह कोलकाता बंदरगाह, कोलकाता एयरपोर्ट के एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स, महाराष्ट्र के न्हावाशेवा पोर्ट और दिल्ली एयरपोर्ट तक जाता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के हाथ लगा ‘खजाना’, दुनिया की बड़ी ताकतें हमारे सामने फैला रही हाथ: रिवर्स इंजीनियरिंग के कमाल से चीन-पाक को पीछे छोड़ देगा हिंदुस्तान

भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से दागी गई चीनी पीएल-15ई मिसाइल को नष्ट कर एक बड़ा कारनामा किया। भारत ने न सिर्फ इन मिसाइलों को मार गिराया, बल्कि मलबा भी बरामद किया है। अब इस मिसाइल के मलबे ने वैश्विक ताकतों का ध्यान खींचा है।

फाइव आईज देश (ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका), फ्रांस और जापान इस मलबे को हासिल करने में रुचि दिखा रहे हैं। चूँकि पंजाब के होशियारपुर में 9 मई 2025 को इस मिसाइल के न सिर्फ टुकड़े मिले, जिसमें मिसाइल लगभग पूरी तरह से सुरक्षित भी मिली है। अब इसके पीछे वैश्विक ताकतें भी आ चुकी हैं।

भारतीय वायु सेना के एयर मार्शल भारती ने 12 मई 2025 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पाकिस्तान ने जे-10सी और जेएफ-17 लड़ाकू विमानों से ये मिसाइलें दागी थीं, लेकिन भारत की एस-400 और आकाश तीर एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें नाकाम कर दिया।

पीएल-15ई एक अत्याधुनिक लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसे चीन ने बनाया है। यह 300 किलोमीटर तक की रेंज और मैक 5 की गति के साथ दुश्मन के विमानों को निशाना बना सकती है। हालाँकि, निर्यात संस्करण पीएल-15ई की रेंज थोड़ी कम है। इसमें एक्टिव रडार सीकर, जाम-प्रतिरोधी विशेषताएँ और ड्यूल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर जैसे उन्नत फीचर्स हैं।

होशियारपुर में मिला मलबा इसमें मौजूद प्रणोदन प्रणाली, डेटा लिंक, रडार सीकर और इनर्शियल रेफरेंस यूनिट की जानकारी दे सकता है, जो चीन की सैन्य तकनीक को समझने के लिए अहम है।

वैश्विक ताकतों की भी इस मलबे में रुचि इसीलिए है, क्योंकि यह फाइव आईज, फ्रांस और जापान को चीन की मिसाइल तकनीक की गहराई से जाँच करने का मौका देगा। राफेल विमान को फ्रांस से बनाया है। चूँकि भारत राफेल का इस्तेमाल करता है और उसके आमने-सामने चीन और पाकिस्तान ही हैं, ऐसे में वो इस मिसाइल को समझना चाहता है। वहीं, जापान जो चीन के साथ क्षेत्रीय तनाव का सामना कर रहा है, वह भी इस मिसाइल की तकनीक को समझना चाहता है।

भारत इस मलबे को डीआरडीओ लैब में विश्लेषण के लिए भेज रहा है और माना जा रहा है कि अमेरिका जैसे मित्र देशों को भी इस डेटा तक पहुँच मिल सकती है।

रिवर्स इंजीनियरिंग का इतिहास पुराना

रिवर्स इंजीनियरिंग यानी किसी तकनीक को तोड़कर उसकी बनावट और कार्यप्रणाली समझना, सैन्य और तकनीकी क्षेत्र में क्रांति ला चुका है। दुनिया भर में देशों ने दुश्मन की तकनीक को रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए कॉपी किया और अपनी ताकत बढ़ाई। इसे इस बात से समझ सकते हैं कि जब ओसामा बिन लादेन को मारने के दौरान अमेरिकी हेलीकॉप्टर पाकिस्तान के एटबाबाद में खराब हो गया था, तब अमेरिकी सेना ने उसे वहीं पर पूरी तरह से नष्ट कर दिया, ताकि पाकिस्तान-चीन उसकी रिवर्स इंजीनियरिंग न कर सकें।

चीन की रिवर्स इंजीनियरिंग

चीन ने रिवर्स इंजीनियरिंग का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। उदाहरण के लिए, उसने सोवियत संघ के मिग-21 जेट को कॉपी कर जे-7 फाइटर जेट बनाया। मिग-21 के डिज़ाइन को समझकर चीन ने इसे अपने हिसाब से बदला और बड़े पैमाने पर उत्पादन किया। इसी तरह रूस के सु-27 जेट की रिवर्स इंजीनियरिंग से चीन ने जे-11 और जे-16 जैसे फाइटर जेट विकसित किए। चीन का पहला विमानवाहक पोत लियाओनिंग भी सोवियत युग के वारयाग जहाज को खरीदकर रिवर्स इंजीनियरिंग से बनाया गया।

इसके अलावा चीन ने अमेरिकी स्टील्थ तकनीक को भी रिवर्स इंजीनियरिंग से समझने की कोशिश की, जब 1999 में सर्बिया में एक अमेरिकी एफ-117 स्टील्थ जेट नष्ट हुआ था।

अमेरिका और मिग-25

अमेरिका ने भी रिवर्स इंजीनियरिंग का सहारा लिया। 1976 में सोवियत पायलट विक्टर बेलेनको ने मिग-25 जेट को जापान में उतारकर शरण माँगी। अमेरिका और जापान ने मिलकर इस जेट के पुर्जे-पुर्जे को खोल लिया और इसकी तकनीक का गहरा अध्ययन किया।

इस घटना ने जापान को सोवियत तकनीक की गहरी समझ दी, जिससे उसने अपने रक्षा तंत्र को मजबूत किया। वहीं, मिग-25 की रडार, इंजन और स्टील्थ विशेषताओं को समझने के बाद अमेरिका ने अपने एफ-15 और एफ-16 जेट्स को बेहतर बनाया। हालाँकि, दबाव में जेट को सोवियत संघ को लौटाना पड़ा, लेकिन इस रिवर्स इंजीनियरिंग ने जापान और अमेरिका को तकनीकी बढ़त दी।

पीएल-15ई की रिवर्स इंजीनियरिंग से भारत को फायदा

पीएल-15ई मिसाइल की रिवर्स इंजीनियरिंग से भारत और फाइव आईज देशों को कई फायदे हो सकते हैं। सबसे पहले…

  1. इस मिसाइल के एक्टिव रडार सीकर और ड्यूल-पल्स मोटर की तकनीक को समझकर भारत अपनी मिसाइल रक्षा प्रणालियों को और मजबूत कर सकता है। डीआरडीओ इस डेटा का इस्तेमाल आकाश, बराक-8 और नई मिसाइलों को बेहतर बनाने में कर सकता है।
  2. यह मिसाइल की जाम-प्रतिरोधी विशेषताओं को समझने से भारत को इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में बढ़त मिलेगी। पाकिस्तान के पास जे-10सी और जेएफ-17 जैसे विमान हैं, जो पीएल-15ई ले जा सकते हैं। इस तकनीक को समझकर भारत अपनी वायु सेना को इन खतरों से निपटने के लिए तैयार कर सकता है।
  3. चीन के खिलाफ भारत को रणनीतिक लाभ मिलेगा। चीन की जे-20 और जे-16 जैसी स्टील्थ विमान इस मिसाइल का इस्तेमाल करते हैं। पीएल-15ई की कमजोरियों को जानकर भारत अपनी राफेल, सुखोई-30 और तेजस विमानों की रक्षा रणनीति को मजबूत कर सकता है।

फाइव आईज देशों के लिए यह मलबा चीन की सैन्य ताकत को समझने का सुनहरा मौका है। अमेरिका, जो पहले ही मिग-25 जैसी रिवर्स इंजीनियरिंग कर चुका है, इस डेटा से अपनी मिसाइल रक्षा प्रणालियों को अपग्रेड कर सकता है। फ्रांस अपने राफेल जेट्स को पीएल-15ई के खिलाफ बेहतर बना सकता है, जबकि जापान को दक्षिण चीन सागर में चीन के खतरे से निपटने में मदद मिलेगी।

पीएल-15ई मिसाइल का मलबा भारत के लिए एक तकनीकी खजाना है। रिवर्स इंजीनियरिंग से भारत न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन के खिलाफ भी अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत कर सकता है। साथ ही फाइव आईज, फ्रांस और जापान जैसे देशों के साथ सहयोग से भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को और सशक्त करेगा। रिवर्स इंजीनियरिंग का इतिहास बताता है कि ऐसी तकनीकों ने देशों को सैन्य और तकनीकी रूप से सशक्त बनाया है, और भारत के पास अब ऐसा ही मौका है।

कैराना का नोमान इलाही निकला ISI का जासूस, 4 बार जा चुका पाकिस्तान: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन मुल्क को दे रहा था अहम सूचनाएँ

उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ बेगमपुरा मोहल्ले का नोमान इलाही पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करते पकड़ा गया। नोमान पहले बेरोजगार था और अपने अब्बू के साथ पासपोर्ट और दस्तावेज बनवाने का काम करता था। अब्बू की मौत के बाद उसने यह धंधा संभाला, लेकिन लालच में आकर ISI के जासूसी नेटवर्क से जुड़ गया।

जाँच एजेंसियों के अनुसार, नोमान पासपोर्ट सेवा केंद्र की आड़ में उन लोगों के दस्तावेज तैयार करता था, जो सऊदी अरब, पाकिस्तान या अन्य देशों में जाने की योजना बनाते थे। नोमान के घर से आठ संदिग्ध पासपोर्ट बरामद हुए हैं।

पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़कर दस्तावेजों को बनवाने के दौरान ही नोमान ISI एजेंट इकबाल काना के संपर्क में आया और देश की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने लगा। नोमान चार बार पाकिस्तान जा चुका है, जहाँ उसने ISI हैंडलरों से मुलाकात की। उसकी बुआ और मौसी पाकिस्तान में रहती हैं, जिसका बहाना बनाकर वह वहाँ जाता रहा। हाल ही में हरियाणा पुलिस ने उसे पानीपत से गिरफ्तार किया, जहाँ वह चार महीने से अपनी बहन के घर रहकर फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा था।

पूछताछ में नोमान ने खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ISI सक्रिय थी और वह भारतीय सेना की गतिविधियों की जानकारी मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए भेजता था। उसके घर से आठ संदिग्ध पासपोर्ट बरामद हुए हैं। जाँच में पता चला कि वह जन सुविधा केंद्र के जरिए फर्जी दस्तावेज भी बनवाता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद जाँच यूपी, हरियाणा, दिल्ली, देहरादून और पानीपत तक फैल गई है।

जाँच एजेंसियों का मानना है कि यह अकेले नोमान का मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा जासूसी नेटवर्क है, जिसमें कैराना, शामली और अन्य क्षेत्रों के युवक शामिल हो सकते हैं। यह नेटवर्क फेरीवालों, प्राइवेट नौकरी करने वालों और दस्तावेज सेवाओं से जुड़े लोगों के जरिए चल रहा है। नोमान को यूपी पुलिस को सौंप दिया गया है और उसके सभी संपर्कों की जाँच जारी है।

ऑपरेशन सिंदूर में ISRO की भूमिका रही निर्णायक, लक्ष्यों की पहचान से लेकर दुश्मन मिसाइलों की ट्रैकिंग तक: जानें – कैसे आसमानी कमाल से भारत ने पाकिस्तान को दी शिकस्त

भारत अपनी अंतरिक्ष और रक्षा क्षमताओं को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) रविवार (18 मई 2025) सुबह 5:59 बजे अपनी 101वीं मिशन के तहत ईओएस-09 उपग्रह लॉन्च करने जा रहा है। यह उपग्रह पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी-सी61) के जरिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित होगा। जो भारत की निगरानी क्षमता को और भी मजबूत करेगा।

इसरो ने ऑपरेशन सिंदूर में निभाया अहम रोल

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की सुरक्षा में इसरो की भूमिका अभूतपूर्व रही। इसरो के सैटेलाइट खासतौर पर RISAT और कार्टोसेट का बड़ा रोल रहा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन सैटेलाइट ने भारतीय सेना को दुश्मन की लोकेशन, मूवमेंट और ठिकानों की सटीक जानकारी दी। इसी वजह से भारतीय वायुसेना ने 23 मिनट में टारगेट को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया, वो भी बिना लाइन ऑफ कंट्रोल पार किए।

इसरो की तकनीक की वजह से भारत को आतंकियों और दुश्मन की तकनीकी चाल, डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट, रडार, एयर डिफेंस सिस्टम और हथियारों की लोकेशन और स्ट्रैटेजिक तैयारी की पहले से जानकारी मिल गई। इन सेटेलाइट्स की हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग और अंधेरे में भी काम करने की क्षमता ने पूरे ऑपरेशन सिंदूर को सफल बनाया।

इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में 10 उपग्रहों ने भारतीय सेना की मदद की, जिससे पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम किया गया।

इसरो प्रमुख ने इम्फाल में सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में कहा, “हमारे कम से कम 10 उपग्रह लगातार देश की सुरक्षा के लिए काम कर रहे थे। हमारे 7,000 किलोमीटर के समुद्री तट और उत्तरी सीमाओं की निगरानी के लिए उपग्रह और ड्रोन तकनीक जरूरी है।” उन्होंने बताया कि इसरो के बनाए भारतीय उपग्रहों ने पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों की सटीक जानकारी दी, जिससे अकाशतीर और अन्य स्वदेशी वायु रक्षा प्रणालियों ने इन्हें नष्ट कर दिया।

इसरो के उपग्रहों की कैमरा रिजॉल्यूशन 26 सेंटीमीटर तक है, जो दुनिया में सबसे बेहतरीन है। नारायणन ने कहा, “हमारे सभी उपग्रह सटीकता के साथ काम करते हैं और देश की सुरक्षा व विकास के लिए हैं।”

नारायणन ने गुरुवार (15 मई 2025) को चेन्नई में पत्रकारों से कहा, “हमने जनवरी में श्रीहरिकोटा से 100वाँ रॉकेट लॉन्च किया था। अब 101वां उपग्रह ईओएस-09 लॉन्च होने जा रहा है।” उन्होंने बताया कि इसरो के सभी मिशन देश की जरूरतों के हिसाब से बनाए जाते हैं। “हम किसी देश से प्रतिस्पर्धा नहीं करते। हमारे मिशन देश की सुरक्षा और विकास के लिए हैं।”

बता दें कि इसरो अब अपने 101वें मिशन में जुटा है। इस मिशन में इसरो ईओएस-09 उपग्रह, जिसे रिसैट-1बी को लॉन्च करेगा। जो भारत की पृथ्वी अवलोकन क्षमता को और मजबूत करेगा। इसका वजन 1,696.24 किलोग्राम है और यह सी-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) से लैस है। यह रडार दिन-रात और हर मौसम में उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरें ले सकता है। यह उपग्रह कृषि, वन, आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मदद करेगा। इसकी मिशन अवधि 5 साल है और इसमें मिशन खत्म होने के बाद सुरक्षित डी-ऑर्बिटिंग के लिए ईंधन भी है। यह उपग्रह सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित होगा।

गौरतलब है कि इसरो ने 1979 में अपनी अंतरिक्ष यात्रा शुरू की थी। 1980 में पहला सफल लॉन्च हुआ था। आज इसरो के 50 से ज्यादा उपग्रह टीवी प्रसारण, दूरसंचार और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर में इसरो की तकनीक ने भारत को पाकिस्तान पर निर्णायक बढ़त दिलाई। ईओएस-09 की लॉन्चिंग के साथ भारत और इसरो अब अपनी अंतरिक्ष तकनीक को और मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

दिमाग में भर रहे कट्टरपंथ, तालीम दे रहे आतंकवाद की: समझें कैसे पंजाब-हरियाणा के युवाओं को निशाना बना रहा पाकिस्तान, ISI कर रहा ‘खालिस्तान प्लान’ एक्टिव

पंजाब और हरियाणा में बीते कुछ समय से खालिस्तानी और पाकिस्तान की ISI की गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि ISI की मदद से खालिस्तानी आतंकी भारत में घुसपैठ कर रहे हैं। वे ड्रोन और दूसरे तरीकों से पंजाब-हरियाणा में हथियार और गोला-बारूद भेज रहे हैं।

खालिस्तानी आतंकियों की गिरफ्तारियाँ और बरामदगी

हरियाणा के कैथल में 17 मई 2025 को देवेंद्र नाम के एक जासूस को पकड़ा गया। वह भारत-पाक संघर्ष और ऑपरेशन सिंदूर की गोपनीय जानकारी पाकिस्तानी सेना और ISI को देता था। उसके पास से कई उपकरण मिले, जिनकी पुलिस जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, NIA ने शुक्रवार (16 मई 2025) को पंजाब में बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से जुड़े 15 ठिकानों पर छापा मारा। ये ठिकाने गैंगस्टर हैप्पी पासियाँ से जुड़े थे, जो पाकिस्तान में बैठे आतंकी रिंदा का करीबी है। गुरदासपुर में 2023 में पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड हमले की साजिश रचने वाले हैप्पी से मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस और कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज मिले। जाँच में पता चला कि हैप्पी ने रिंदा के कहने पर पंजाब और हरियाणा में ग्रेनेड हमलों की योजना बनाई थी। उसके साथी विदेशों से हथियार और पैसे भेज रहे थे। NIA इसकी और जाँच कर रही है।

मई 2022 में हरियाणा पुलिस ने करनाल से चार खालिस्तानी आतंकियों को पकड़ा था। ये लोग ड्रोन से पाकिस्तान से हथियार लाकर तेलंगाना जा रहे थे। इनसे हथियार और विस्फोटक बरामद हुए। कई अभियानों में पंजाब और हरियाणा पुलिस के साथ NIA ने कई खालिस्तानी समर्थकों को गिरफ्तार किया। इनमें नाभा जेल ब्रेक का मुख्य साजिशकर्ता और खालिस्तानी आतंकी कश्मीर सिंह उर्फ बलबीर सिंह भी शामिल है। वह 2016 के जेल ब्रेक मामले में फरार था और उस पर 10 लाख का इनाम था।

खालिस्तानियों से AK-47, पिस्तौल, विस्फोटक उपकरण, ड्रोन, मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण, आपत्तिजनक दस्तावेज और नकदी जैसी चीजें बरामद हुईं।

स्थानीय युवाओं की आतंकी गतिविधियों के लिए भर्ती

सोशल मीडिया और दूसरे तरीकों से स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा में फँसाकर आतंकी गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है। पाकिस्तान वैध दस्तावेजों से युवाओं को ट्रेनिंग के लिए भेज रहा है। ये युवा लौटकर हमले करते हैं। खासकर मजहबी सोच वाले युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है।

भारत-पाक तनाव कम होने के बावजूद ISI भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रही है। युद्धविराम के बाद ISI खालिस्तानी समर्थकों को भड़का रही है। सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का चीफ गुरपतवंत सिंह पन्नू पंजाब और हरियाणा में आतंकी नेटवर्क को फिर से सक्रिय कर रहा है। वह पुलिस और सरकारी इमारतों पर हमले की साजिश रच रहा है। खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है। NIA और राज्य पुलिस इस पर कार्रवाई कर रही हैं। पाकिस्तान से चलने वाले खालिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट पकड़े गए, जिनमें बॉट अकाउंट भी शामिल हैं। केंद्र ने 100 भड़काऊ वीडियो और पन्नू के 50 से ज्यादा फर्जी अकाउंट ब्लॉक कर दिए।

इसके अलावा पन्नू ने वीडियो जारी कर दावा किया था कि पटियाला आर्मी स्कूल की दीवारों पर खालिस्तान और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे उसने ही लिखवाए थे। वीडियो में पन्नू ने कथित तौर पर दीवार पर ये नारे दिखाते हुए स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी भड़काया था। पन्नू ने बच्चों को कहा था कि अपने परिवारों को बचाने की जिम्मेदारी आर्मी स्कूल के बच्चों की है।

एक रिपोर्ट की मानें तो मुख्य संदिग्ध आदिल अहमद थोकर, जिसने आतंकियों की मदद की, 2024 में पाकिस्तान से आतंकी ट्रेनिंग लेकर लौटा था। सुरक्षा बलों के अनुसार, 2014 के बाद से, पाकिस्तान वैध दस्तावेजों का उपयोग कर कश्मीरी युवाओं को भर्ती कर रहा है। लगभग 40 स्थानीय युवा वैध यात्रा दस्तावेजों पर पाकिस्तान जाकर आतंकी प्रशिक्षण ले चुके हैं। आदिल भी इसी बदली रणनीति का हिस्सा है, जो धार्मिक कट्टरता के कारण 2018 में पाकिस्तान जाकर लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया था।

पाकिस्तान में में बैठे आतंकी संगठन युवाओं को आतंकवाद की ओर धकेल रहे हैं। जो युवा अकेलापन महसूस करते हैं, भेदभाव का शिकार हैं या भावनात्मक रूप से कमजोर हैं, उन्हें झूठा अपनापन और पहचान का एहसास दिलाया जाता है। उन्हें ऐसे समुदाय का हिस्सा बनाया जाता है, जहाँ उन्हें स्वीकार किया जाता है।

कट्टरपंथी संगठन और मदरसे युवाओं को ‘शहीद’ होने के फायदे बताते हैं, जैसे जन्नत में जगह, परिवार के लिए सम्मान और पैसे। कुछ मामलों में युवाओं को धमकाया जाता है या उनके परिवारों को नुकसान की धमकी दी जाती है, ताकि वे आतंकी समूहों में शामिल हों। कुछ मदरसा या स्कूलों में कट्टरपंथी विचारधारा पढ़ाई जाती है, जिससे युवाओं का ब्रेनवॉश करके उन्हें हिंसा के लिए तैयार किया जाता है।

बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी फौज ने दावा किया था कि भारत ने पाकिस्तान पर हमले के बहाने पंजाब, सिखों और गुरुद्वारों को निशाना बनाया। ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कैसे खालिस्तानी आतंकवाद का पूरा नेटवर्क ही पाकिस्तान ने खड़ा किया था। ऐसे में ISI का एक बार फिर से युवाओं को आतंकवाद की तरफ ढकेलने की कोशिश उसी नाकाप एजेंडे का हिस्सा है, जो वो पहले से अंजाम देता आया है।

चूँकि भारत जानता है कि खालिस्तानी समर्थकों और ISI की पंजाब-हरियाणा में आतंकी गतिविधियाँ उसकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियाँ इसे रोकने के लिए लगातार काम कर रही हैं। जिसका नतीजा आतंकवादियों के स्लीपर सेल के जाल को तोड़ने और आतंकियों की धर-पकड़ के रूप में सामने आ रहा है।

240 पुस्तकें, 50 रिसर्च पेपर… स्वामी रामभद्राचार्य को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ क्यों? जो 500 सालों में नहीं हुआ वो भी कर दिखाया: संत नहीं, पुरस्कृत हुआ है पुरस्कार

क्या विद्वान केवल एक ही समूह में होते हैं? क्या सिर्फ़ वही व्यक्ति विद्वान कहा जाएगा जो अमेरिका और यूरोप के लेखकों को उद्धृत करता हो, भारतीय तत्व-मीमांसा में रत व्यक्ति को विद्वता का प्रमाण-पत्र पाने का कोई अधिकार नहीं है? प्रमाण-पत्र इसीलिए, क्योंकि भारत में एक विशेष गिरोह है जो इसे बाँटता फिरता है। वो गिरोह ये तय करता है कि कौन लेखक है और कौन नहीं, कौन बुद्धिजीवी है और कौन नहीं, कौन विद्वान है और कौन नहीं। स्वामी रामभद्राचार्य को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ मिलने के बाद ये साफ़ हो गया है कि वो इस गिरोह द्वारा कल्पित विद्वानों की सूची में नहीं आते हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार (16 मई, 2025) को रामानंदी संप्रदाय के जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को 58वें ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार‘ से सम्मानित किया। उद्योगपति साहू शांति प्रसाद द्वारा 1944 में स्थापित ‘भारतीय ज्ञानपीठ’ द्वारा प्रतिवर्ष साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लेखकों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाता रहा है। 1965 से इस अवॉर्ड की शुरुआत हुई थी। सुमित्रानंदन पंत, रामधारी सिंह दिनकर, अमृता प्रीतम, महाश्वेता देवी, निर्मल वर्मा, केदारनाथ सिंह और कृष्णा सोबती जैसे बड़े नामों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। अब इस सूची में चित्रकूट स्थित ‘तुलसी पीठ’ के संस्थापक स्वामी रामभद्राचार्य का नाम भी जुड़ गया है।

स्वामी रामभद्राचार्य को क्यों मिला ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’?

जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ मिलने के बाद एक प्रश्न जो बार-बार पूछा जा रहा है वो ये है कि उन्हें ये सम्मान क्यों? ये सवाल पूछने वालों में अधिकतर वो हैं जिन्हें पता तक नहीं है कि भारतीय साहित्य के बड़े नाम कौन से हैं, महत्वपूर्ण पुस्तकें कौन सी हैं अथवा भारतीय साहित्य के क्षेत्र में विभिन्न कालों में किन-किन प्रकार की रचनाओं का प्रभुत्व रहा है। अब जो जागरूक ही नहीं है, वो सोशल मीडिया के आधार पर अपनी राय बनाएगा। उसने सोशल मीडिया पर स्वामी रामभद्राचार्य के साहित्यिक कार्यों को देखा ही नहीं, तो वो सवाल पूछेगा ही।

ऐसा नहीं है कि ये सवाल पूछने वाले लोग धन अथवा मुख्यधारा तक अपनी पहुँच न होने के कारण अनभिज्ञ हैं, उन्होंने अनभिज्ञता के कुएँ में रहना स्वयं ही चुना है। कारण – भारतीय संस्कृति, परंपराओं एवं इतिहास से उन्हें घृणा है। ये घृणा उन्हें अविद्या की तरफ ले जाती है और ये अविद्या उन्हें हर गंभीर कार्य करने वाले का विरोध करने के लिए उकसाती है। मैं इस लेख में उन्हें जवाब नहीं देने जा रहा, बल्कि उन आम लोगों को समझाने जा रहा हूँ, जिन्हें अपने भ्रमजाल में फँसाने के लिए वो अनभिज्ञ गिरोह सारा कुचक्र रचता है।

फिर वही सवाल – एक भगवा वस्त्र धारण करने वाले एक नेत्रहीन साधु को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ क्यों? क्या भारत में अब सेक्युलरिज्म नाम की कोई चीज नहीं बची, आखिर राष्ट्रपति के हाथ से हिन्दू धर्म का साधु कैसे सम्मानित हो सकता है? ऐसे ही सभी सवालों के जवाब मैं इस लेख के जरिए देने जा रहा हूँ। पहले सवाल का सीधा जवाब है – 22 भाषाओं के विद्वान स्वामी रामभद्राचार्य 240 से अधिक पुस्तकें और 50 से अधिक शोधपत्र लिख चुके हैं। दूसरे सवाल का सीधा जवाब – भारत-भूमि पर इस भूमि के धर्म एवं संस्कृति को आगे बढ़ाने वाले व्यक्ति का सम्मान किए जाने को किसी भी शब्द की दुहाई देकर रोकी नहीं जा सकती है।

साहित्य के क्षेत्र में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का योगदान

स्वामी रामभद्राचार्य अधिकतर संस्कृत में लिखते हैं, एक ऐसी भाषा जिसमें हमारे वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण और महाभारत लिखे गए। वो भाषा जिसे संरक्षण की आवश्यकता है। वो भाषा जिसमें रचित साहित्य कई पीढ़ियों की परवरिश के तौर-तरीकों को प्रभावित करते आए हैं। माता-पिता-गुरु के सम्मान से लेकर धर्म की रक्षा के लिए युद्ध तक की प्रेरणा हमें इन्हीं साहित्यों से मिली है। स्वामी रामभद्राचार्य इसी संस्कृति भाषा के मौजूदा युग के विरले विद्वानों में से एक हैं।

वो हिंदी में भी लिखते हैं, जो भारत की राजभाषा है और देश के अधिकतर लोगों द्वारा बोली और समझी जाती है। वो देश में सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्यों उत्तर प्रदेश-बिहार की स्थानीय भाषाओं अवधी और भोजपुरी में भी साहित्य रचते आए हैं। यानी, स्वामी रामभद्राचार्य के कार्य शोधार्थियों के भी काम आते हैं, आम लोगों को भी प्रभावित करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास पर उनका अध्ययन इतना व्यापक है कि उन्हें रामचरितमानस पर अघोषित अंतिम प्राधिकरण माना जाता है। जिज्ञासा, समीक्षण, श्रद्धा एवं विश्वास की सनातन नीति पर चलते हुए उन्होंने रामचरितमानस का प्रामाणिक संस्कार प्रस्तुत किया। रामचरितमानस ही वो काव्य है जिसने उत्तर भारत में रामकथा को पुनः हमारे जीवन में स्थापित किया।

बचपन से लेकर अबतक लगभग 5000 बार जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य रामचरितमानस कथा का प्रवचन देश-विदेश में कर चुके हैं। 8 वर्षों के गहन शोध एवं इस अमर साहित्य के 27 संस्करणों के अध्ययन के बाद उन्होंने ‘तुलसी पीठ’ के माध्यम से अपना संस्करण पेश किया। हालाँकि, पुस्तक से छेड़छाड़ के कारण 2008-09 में उनके विरुद्ध विरोध प्रदर्शन भी हुए, लेकिन भारतीय इतिहास में शास्त्रार्थ की परंपरा रही है और शंकराचार्य भी जगद्गुरु तभी हुए जब उन्होंने वाद-विवाद के माध्यम से देश भर के विद्वानों का हृदय जीता। अतः, महत्वपूर्ण ये है कि हमारे प्राचीन साहित्य विलुप्त न हों और उनपर श्रद्धाभाव से शोधकार्य होता रहे।

9000 पृष्ठ, 50000 श्लोक और 9 खंड… पाणिनि द्वारा रचित संस्कृत व्याकरण ‘अष्टाध्यायी’ पर उन्होंने जो महाभाष्य लिखा है वैसा आजतक नहीं लिखा गया। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका अनावरण किया। ‘अष्टाध्यायी’ साधारण पुस्तक नहीं है, पतंजलि ने इसे ‘सर्ववेद-परिषद्-शास्त्र’ कहकर संबोधित किया है। फरवरी 2025 में चित्रकूट पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी रामभद्राचार्य की 3 पुस्तकों का अनावरण किया – पाणिनि का ‘अष्टाध्यायी’ महाभाष्य, रामानंदाचार्य चरितम और राष्ट्रलीला ऑफ लॉर्ड श्री कृष्णा। पीएम मोदी ‘विकास भी, विरासत भी’ की नीति लेकर चलते हैं, ऐसे में उस ‘विरासत’ के मुख्य स्तंभ बनकर स्वामी रामभद्राचार्य के कार्य स्वतः ही स्थापित हो जाते हैं।

‘अष्टाध्यायी’ ईसा के जन्म से भी सैकड़ों वर्ष पूर्व लिखी गई संस्कृत व्याकरण की पुस्तक है, जिसके आधार पर वैदिक काल के बाद के साहित्य रचे गए। यहाँ तक कि ग्रीक और लैटिन जैसी प्राचीन विदेशी भाषाओं में भी इस तरह के किसी पुस्तक का कोई उदाहरण नहीं मिलता। स्वामी रामभद्राचार्य को तो केवल एक इस कार्य के लिए ज्ञानपीठ जैसे कई पुरस्कार मिल जाने चाहिए थे। उन्होंने इसका कई गुना कार्य कर दिया।

रामचरितमानस के क्रिटिकल एडिशन और ‘अष्टाध्यायी’ महाभाष्य के अलावा उनका एक और महत्वपूर्ण कार्य है – ब्रह्मसूत्र, भगवद्गीता और 11 उपनिषदों पर आधारित ‘श्रीराघवकृपाभाष्यम्’। जो लोग आज स्वामी रामभद्राचार्यजी पर निशाना साध रहे हैं उनमें से अधिकतर आज से 27 वर्ष पूर्व या तो पैदा भी नहीं हुए होंगे या डायपर में खेल रहे होंगे, तब अप्रैल 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस पुस्तक को लॉन्च कर रहे थे। ब्रह्मसूत्र, उपनिषद और गीता को मिलाकर ‘प्रस्थानत्रयी’ कहते हैं, 500 वर्षों से इनपर कोई संस्कृत भाष्य नहीं लिखा गया था, ये कार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने किया।

धर्म एवं संस्कृति के साथ-साथ दिव्यांगों के लिए भी चलाते हैं यूनिवर्सिटी

रामकथा के माध्यम से कई दशकों से वो समाज को ऐतिहासिक व आध्यात्मिक ज्ञान से लाभान्वित कर रहे हैं, ये योगदान भी कम है क्या? और हाँ, ये सब उन्होंने प्रज्ञाचक्षु होने के बावजूद किया है। नेत्र चले गए, लेकिन दृष्टि उन्होंने श्रम व साधना से अर्जित की। 1991 में उन्होंने PhD की और 1998 में DLitt – उनको गाली देने वाले अधिकतर अबतक टैक्स के पैसों से ही पल रहे हैं। और हाँ, पोस्ट डॉक्टरेट की डिग्री उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति KR नारायणन के हाथों मिली थी, जो दलित समाज से थे। हिन्दू एकता को खंडित करने के लिए द्रविड़ बनाम आर्य का कुचक्र रचने वालों को ये पसंद नहीं आएगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि मामले के अंतिम जजमेंट में उनकी गवाही और उनके द्वारा दिए गए साक्ष्यों का जिक्र हुआ। राम मंदिर को लेकर उन्होंने शास्त्रों से ऐसे-ऐसे साक्ष्य दिए कि जज भी दंग रह गए। दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए उन्होंने एक पूरी की पूरी यूनिवर्सिटी खोल की। अध्यात्म व समाज की सेवा के लिए ‘तुलसी पीठ’ की स्थापना की। भारत क्या, पूरी दुनिया में दिव्यांगों के लिए कोई विश्वविद्यालय नहीं था। ‘विकलांग सेवा संघ’ के जरिए उन्होंने दिव्यांग पुरुषों-महिलाओं के कल्याण के लिए कई कार्यक्रम शुरू करवाए।

रामभद्राचार्य जी की इतनी रचनाएँ कि उनपर बात करते-करते ही सुबह से शाम हो जाए। उन्हें पढ़ने, समझने और उनकी मीमांसा या उनपर टीका करने में कितने साल लग जाएँगे ये स्वयं ही सोच लीजिए। सोचिए, जिन्होंने स्वामी रामभद्राचार्य के साहित्य का क-ख-ग भी नहीं पढ़ा है, वो उनके योगदान को लेकर सवाल उठा रहे हैं। साहित्य, समाज और संस्कृति – तीनों क्षेत्र में उनका योगदान अभूतपूर्व है। जिस ‘तुलसी पीठ सेवा न्यास’ की उन्होंने स्थापना की है वो आगे भी कई वर्षों तक उनके द्वारा शुरू किए गए अभियान जो जारी रखेगा। स्वामी रामभद्राचार्य के कार्य सनातन पर हैं, सनातन हैं।

स्वामी रामभद्राचार्य के रचनाओं की तालिका

यहाँ मैं स्वामी रामभद्राचार्य की रचनाओं को विवरण के साथ पेश कर रहे हैं:

वर्षशीर्षकभाषाप्रकाशकसारांश
1994अरुन्धतीहिन्दीश्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वारवसिष्ठ और अरुंधति के जीवन पर आधारित 15 सर्गों में विभाजित 1,279 श्लोकों की महाकाव्यात्मक कविता।
2002श्रीभार्गवराघवीयम्संस्कृतजगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय21 सर्गों, 2,121 श्लोकों का महाकाव्य। हिंदी व्याख्या सहित। कई पुरस्कार प्राप्त।
2010अष्टावक्रहिन्दीजगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय8 सर्गों में 864 श्लोकों में रचित, अष्टावक्र ऋषि पर आधारित।
2011गीतरामायणम्संस्कृतजगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय28 सर्गों में 1,008 गीतों द्वारा रामायण की संगीतमय प्रस्तुति।
1980काका विदुरहिन्दीश्री गीता ज्ञान मंदिर, राजकोटमहाभारत के विदुर पर लघुकाव्य।
1980मुकुन्दस्मरणम्संस्कृतश्री गीता ज्ञान मंदिर, राजकोटकृष्ण की स्तुति में दो भागों में लघुकाव्य।
1982मा̐ शबरीहिन्दीगिरिधर कोशलेंद्र चिन्तन समिति, दरभंगारामायण की पात्रा शबरी पर आधारित लघुकाव्य।
1996आजादचन्द्रशेखरचरितम्संस्कृतश्री तुलसी पीठ सेवा न्यासक्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद पर लघुकाव्य। हिंदी टीका सहित।
2000सरयूलहरीसंस्कृतश्री तुलसी पीठ सेवा न्याससरयू नदी पर आधारित लघुकाव्य।
2001लघुरघुवरम्संस्कृतश्री तुलसी पीठ सेवा न्यासबाल राम पर लघुकाव्य, केवल लघु वर्णों में।
2004भृङ्गदूतम्संस्कृतजगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालयमंदाक्रान्ता छंद में, राम द्वारा सीता को भेजे संदेश का चित्रण।
1991राघवगीतगुञ्जनहिन्दीश्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वारगीतात्मक कविता।
1993भक्तिगीतसुधाहिन्दीश्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वारराम और कृष्ण पर आधारित 438 गीतों की कविता।
1997श्रीरामभक्तिसर्वस्वम्संस्कृतश्री तुलसी पीठ सेवा न्यास100 श्लोकों की कविता।
आर्याशतकम्संस्कृतआर्या छंद में 100 श्लोकों की कविता।
चण्डीशतकम्संस्कृतदेवी चंडी की स्तुति में 100 श्लोकों की कविता।
राघवेन्द्रशतकम्संस्कृतराम की स्तुति में 100 श्लोकों की कविता।
गणपतिशतकम्संस्कृतगणेश की स्तुति में 100 श्लोकों की कविता।
श्रीराघवचरणचिह्नशतकम्संस्कृतराम के चरणचिह्नों की स्तुति में 100 श्लोक।
1987श्रीजानकीकृपाकटाक्षस्तोत्रम्संस्कृतश्री तुलसी पीठ सेवा न्याससीता की कृपा दृष्टि की स्तुति।
1992श्रीरामवल्लभास्तोत्रम्संस्कृतश्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वारसीता की स्तुति।
1994श्रीगङ्गामहिम्नस्तोत्रम्संस्कृतश्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वारगंगा नदी की महिमा पर स्तुति।
1995श्रीचित्रकूटविहार्यष्टकम्संस्कृतश्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वारराम के चित्रकूट विहार की 8 श्लोकों में स्तुति।
2002श्रीराघवभावदर्शनम्संस्कृतश्री तुलसी पीठ सेवा न्यासराम के जन्म की उपमाओं द्वारा स्तुति; हिंदी टीका सहित।
2003कुब्जापत्रम्संस्कृतजगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालयकुब्जा द्वारा कृष्ण को लिखा गया पत्र।
2008श्रीसीतारामकेलिकौमुदीहिन्दीजगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय327 पदों में बाल लीलाओं पर आधारित रीति काव्य।
2009श्रीसीतारामसुप्रभातम्संस्कृतजगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालयसीता-राम को समर्पित सुप्रभातम्। हिंदी अनुवाद सहित।
1996श्रीराघवाभ्युदयम्संस्कृतश्री तुलसी पीठ सेवा न्यासराम के उदय पर आधारित एकांकी नाटककाव्य।
उत्साहहिन्दीश्री तुलसी पीठ सेवा न्यास

स्वामी रामभद्राचार्य की कुछ अन्य रचनाएँ यहाँ देखिए:

वर्षशीर्षकविषयप्रकाशकटिप्पणी
1998श्रीब्रह्मसूत्रेषु श्रीराघवकृपाभाष्यम्ब्रह्मसूत्रश्री तुलसी पीठ सेवा न्यासप्रस्थानत्रयी पर संस्कृत में भाष्य
1998श्रीमद्भगवद्गीतासु श्रीराघवकृपाभाष्यम्भगवद्गीताश्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1998कठोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम्कठोपनिषद्श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1998केनोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम्केनोपनिषद्श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1998माण्डूक्योपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम्माण्डूक्य उपनिषद्श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1998ईशावास्योपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम्ईशावास्य उपनिषद्श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1998प्रश्नोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम्प्रश्न उपनिषद्श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1998तैत्तिरीयोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम्तैत्तिरीय उपनिषद्श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1998ऐतरेयोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम्ऐतरेय उपनिषद्श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1998श्वेताश्वतरोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम्श्वेताश्वतर उपनिषद्श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1998छान्दोग्योपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम्छांदोग्य उपनिषद्श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1998बृहदारण्यकोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम्बृहदारण्यक उपनिषद्श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1998मुण्डकोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम्मुण्डक उपनिषद्श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1991श्रीनारदभक्तिसूत्रेषु श्रीराघवकृपाभाष्यम्नारद भक्ति सूत्रश्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1997अष्टाध्याय्याः प्रतिसूत्रं शाब्दबोधसमीक्षणम्अष्टाध्यायी सूत्रों पर शोधराष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (प्रकाशनाधीन)डी.लिट् शोधप्रबंध
2001श्रीरामस्तवराजस्तोत्रे श्रीराघवकृपाभाष्यम्श्रीराम स्तवराज स्तोत्रश्री तुलसी पीठ सेवा न्यास
1983महावीरीहनुमान चालीसा पर टीकाश्री कृष्ण जन्म सेवा संस्थान, मथुरा
1985श्रीगीतातात्पर्यभगवद्गीताश्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वार
2005भावार्थबोधिनीरामचरितमानसजगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय
श्रीराघवकृपभाष्य (९ खण्डों में)रामचरितमानस
1981अध्यात्मरामायणे अपाणिनीयप्रयोगानां विमर्शःअध्यात्मरामायण की पाणिनि–विरुद्ध प्रवृत्तियों की समीक्षापीएचडी शोधप्रबंध
1982मानस में तापस प्रसंगरामचरितमानस के अयोध्या काण्ड में एक तपस्वी के प्रसंग की विवेचनाश्री गीता ज्ञान मंदिर, राजकोट
1988सनातनधर्म की विग्रहस्वरूप गोमातागोमाता की सनातन धर्म में स्थिति पर विवेचनश्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वार
1988श्रीतुलसीसाहित्य में कृष्णकथातुलसीदास कृत साहित्य में कृष्ण चरित्र की समीक्षाश्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वार
1990सीता निर्वासन नहींवाल्मीकि रामायण में सीता निर्वासन को उत्तरकाण्ड की कलपना सिद्ध करने वाला आलोचनात्मक ग्रंथश्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वार
2007श्रीरासपञ्चाध्यायीविमर्शःभागवत के रासपंचाध्यायी पर विवेचनजगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय
1980भरत महिमारामायण में भरत जी की महिमा पर नवाह्निक प्रवचनश्री गीता ज्ञान मंदिर, राजकोट
1985सुग्रीव का अघ और विभीषण की करतूतिरामायण के दो पात्रों पर नवाह्निक प्रवचनश्री कृष्ण जन्म सेवा संस्थान, मथुरा
1989मानस में सुमित्रारामचरितमानस में सुमित्रा की भूमिका पर नवाह्निक प्रवचनश्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वार
1992प्रभु करि कृपा पाँवरी दी…अपूर्ण प्रवचन ग्रंथ

सोचिए, मात्र 2 महीने की उम्र में जिस शिशु को अपनी आँखें खोनी पड़ी थीं, उसने विद्वता के शिखर को छूकर ये सन्देश दिया कि कोई भी सफल न होने के पीछे कोई भी बहाना नहीं होता। श्रम एवं साधना से सबकुछ संभव है। जिस बच्चे को अपशकुन मानकर परिवार-समाज के शादी-विवाह व अन्य शुभ कार्यक्रमों में हिस्सा तक नहीं लेने दिया जाता था, वो शुभ-लाभ का चलता-फिरता प्रतीक बन गया। तभी अपनी शुरुआती रचनाओं के दौरान वो स्वयं को ईश्वर के समक्ष ‘अनाथं जडं मोहपाशेन बद्धं’ कहकर संबोधित करते हैं, अर्थात – “जो अनाथ है, जड़ है, और मोह के बंधन में जकड़ा हुआ है।”