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24 जून, सुबह 10:30 तक गाजियाबाद के लोनी थाना पहुँचो ट्विटर इंडिया MD: फर्जी वीडियो मामले में UP पुलिस का आदेश

गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर को दूसरा नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में कहा गया कि ट्विटर जाँच में सहयोग नहीं कर रहा है और उसके द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण औचित्य पूर्ण नहीं है। इसके साथ ही यूपी पुलिस ने ट्विटर इंडिया के MD महेश महेश्वरी को 24 जून 2021 को 10:30 बजे तक गाजियाबाद के लोनी थाना में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। उक्त तारीख पर उपस्थित न होने पर इसे विवेचना को असफल करने का प्रयास माना जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यूपी पुलिस द्वारा दिए गए नोटिस में कहा गया है कि जनता और राज्य की सुरक्षा एवं सद्भाव बनाए रखने क लिए ट्विटर इंडिया को इस तरह के फर्जी ट्वीट को हटाया जाना चाहिए। इसकी शक्ति उनके पास है। ट्विटर प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित विद्वेषपूर्ण ट्वीट के कारण समाज में तनावपूर्ण माहौल पैदा हो गया। इसके साथ ही देश-प्रदेश के विभिन्न समूहों के मध्य शत्रुता बढ़ी एवं सामाजिक सौहार्द को खतरा उत्पन्न हो गया। नोटिस में कहा गया कि ट्विटर इस फर्जी खबर को रोकने में असफल रहा।

गौरतलब है कि ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक (MD) मनीष माहेश्वरी ने पहली नोटिस के जवाब में कहा कि वो पूछताछ के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर उपलब्ध हैं। MD माहेश्वरी ने कहा था कि इस पूरे प्रकरण से Twitter का कोई लेना-देना नहीं है। Twitter के जवाब से गाजियाबाद पुलिस संतुष्ट नहीं है और इसीलिए अब फिर से नोटिस भेजा गया। शनिवार (जून 19, 2021) को गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर को कुछ सवालों की सूची भेजी थी, लेकिन अब ट्विटर ने एक दूसरी ईमेल आईडी भेजी थी। 

ऐसा नहीं है कि सिर्फ ट्विटर ही भारत में दादागिरी के सहारे अपना नैरेटिव फैलाना चाहता है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप्प जैसे प्लेटफॉर्म्स को भी 401 इमेल्स भेजे गए हैं, जिनमें से 246 मेल का जवाब मिला तो 155 इमेल्स को लेकर कोई प्रत्युत्तर नहीं दिया गया। ऊपर से जिनका जवाब आता है, उसमें 90 दिन लगा दिए जाते हैं। फेसबुक को भेजे गए 255 में से 177 मेल्स का जवाब आया। इंस्टाग्राम को 98 ईमेल भेजे गए थे, जिनमें से मात्र 28 का ही जवाब दिया गया।

‘उनके हाथ पहले ही खून से सने थे, अब महिलाओं पर अत्याचार के दाग भी हैं दामन पर’: स्मृति ईरानी ने ममता पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा ममता बनर्जी सरकार को फटकार लगाए जाने के बाद अब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बंगाल सीएम पर निशाना साधा है। उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस फैसले से उन लोगों में न्याय का विश्वास जगेगा जिन्हें प्रताड़ित किया गया, जिन्हें घर से निकाला गया, या जिनकी हत्या हुई और महिलाएँ जिनका बलात्कार हुआ।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने कहा,

“मैं हमारे लोकतंत्र में पहली बार देख रही हूँ कि शायद सीएम लोगों को मरते हुए देख रही हैं क्योंकि उन्होंने उन्हें वोट नहीं दिया था। पहली बार ऐसा हुआ है हमारे देश में कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद, हजारों लोग अपने घरों/गाँवों को छोड़कर सीमा पार कर रहे हैं और रहम की भीख माँग रहे हैं कि हम धर्म बदलने के लिए तैयार हैं। लेकिन ममता बनर्जी और तृणमूल हमें बख्स दे। महिलाओं को उनके घरों से उठाकर खुलेआम बलात्कार किया जा रहा है, चाहे वह दलित हो या आदिवासी महिला हो। एक 60 वर्षीय महिला यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँची कि उसके 6 साल के पोते के सामने सिर्फ इसलिए बलात्कार किया गया क्योंकि वह एक भाजपा कार्यकर्ता थी। सीएम चुप रहकर और कितने रेप देखेंगी? पहले तो उनके हाथ खून से सने हुए थे अब दामन पर भी महिला के साथ होते अत्याचार के दाग हैं।”

उल्लेखनीय है कि आज कलकत्ता उच्च न्यायालय ने चुनाव के बाद हिंसा के मामले में राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दिया। इस याचिका में हाईकोर्ट से उनके 18 जून वाले आदेश को वापस लेने को कहा गया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को कई शिकायतें की गई हैं, लेकिन राज्य का कहना है कि कोई शिकायत नहीं मिली है। 

बता दें कि इससे पहले इस संबंध में 18 जून को हाईकोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को एक कमेटी गठित कर राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा में कथित मानवाधिकार उल्लंघन की सभी घटनाओं की जाँच करने का निर्देश दिया था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति आई पी मुखर्जी, न्यायमूर्ति हरीश टंडन, न्यायमूर्ति सौमेन सेन और न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार की पीठ ने 18 जून को मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को निर्देश दिया था कि वह चुनाव बाद हुई हिंसा के दौरान मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों की जाँच के लिए एक समिति गठित करें।

टीनएज में सेक्स, पोर्न, शराब, वन नाइट स्टैंड, प्रेग्नेंसी… अनुराग कश्यप ने बेटी को कहा- जैसी तुम्हारी मर्जी

फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप की बेटी आलिया कश्यप ने फादर्स डे के मौके पर अपने पिता से हर मुद्दे पर बात की। आलिया एक यूट्यूब चैनल चलाती हैं, जहाँ उन्होंने अपने पिता से कई सवाल पूछे। उन्होंने सेक्स, वन नाइट स्टैंड और प्रेग्नेंसी से लेकर शराब पीने तक को लेकर सवाल पूछे। उनके हर सवालों का जवाब अनुराग कश्यप ने दिया।

इस बातचीत के दौरान आलिया ने अनुराग से पूछा, “क्या वीड (ड्रग्स) एक्सेप्टेबल है?” इसके जवाब में अनुराग ने कहा कि इस बारे में डॉक्टर ही बता सकते हैं। कोई भी चीज अच्छी या बुरी नहीं होती है। ये उसके रिजल्ट पर निर्भर करता है। लेकिन मैं सभी को यही कहूँगा कि जिसे जो पसंद हो उसे वो करना चाहिए।”

आलिया ने अगला सवाल किया कि क्या अनुराग उसके ब्वॉयफ्रेंड को पसंद करते है? इस सवाल के जवाब में फिल्म निर्माता ने कहा, “शेन (शेन ग्रीगोइरे, आलिया का अमेरिकी ब्वॉयफ्रेंड है) अच्छा लड़का है। मुझे तुम्हारे दोस्तों और खास करके लड़कों को लेकर पसंद काफी पसंद है। शेन बहुत अच्छा है। वह बहुत आध्यात्मिक है, बहुत शांत है, उसके पास बहुत सारी खासियत हैं जो 40 साल के पुरुषों में नहीं हैं। मुश्किल परिस्थितियों में होने के मामले में भी वह अच्छा है।”

आलिया ने सवाल किया कि अगर आपकी बेटी टीनएज में सेक्सुअली एक्टिव रहती तो आपके लिए सही रहेगा? इस सवाल के जवाब में फिल्म निर्माता ने इस पर अपनी सहमति जताते हुए कहा कि उन्हें केवल इस बात की चिंता रहेगी कि उनकी बेटी सुरक्षित रहे। उसे किसी तरह की कोई दिक्कत न हो। बाकी उसकी अपनी मर्जी है।

अपने अगले सवाल में आलिया ने पूछा कि अगर वो शराब पीती हैं तो उनका रिएक्शन क्या होगा? अनुराग ने जवाब दिया तुम पहले ही ऐसा कर चुकी हो। तुम हर बार बहुत ज्यादा पी लेती हो। इसके बाद मुझे तुम्हारे सारे फ्रेंड्स को कॉल कर पूछना पड़ता है।

ब्वॉयफ्रेंड के साथ सोने के सवाल पर अनुराग ने कहा, “यह तुम्हारा अपना डिसीजन है कि तुम किसके साथ रहती हो। मैं केवल इतना चाहता हूँ कि तुम सेफ रहो। जब भी ऐसा हो अपना फोन ऑन रखना ताकि तुमसे बात कर सकूँ।”

आलिया कश्यप ने पिता अनुराग कश्यप से अगला सवाल अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर किया कि अगर वह कभी प्रेग्नेंट होती हैं और उनको आकर इस बारे में बताती हैं तो उनका कैसा रिएक्शन होगा। इस सवाल के जवाब में फिल्म निर्माता ने कहा, “मैं देखूँगा और तुमसे पूछूँगा कि क्या तुम यह चाहती हो। और फिर जो तुम चाहोगी, तुम जो कुछ भी करना चाहोगी, मैं हमेशा उसके साथ जाऊँगा, यह बात तुम जानती हो।”

इस पर स्टार किड्स ने पूछा कि आप क्या उम्मीद करेंगे और क्या कहेंगे? इस पर अनुराग कश्यप ने कहा, “तुम्हें जो भी पसंद होगा वो मुझे स्वीकार होगा। मैं तुमको बिल्कुल बताऊँगा कि इसके लिए एक कीमत चुकानी होगी, लेकिन इसके आखिरी मैं अभी भी वहीं रहूँगा।”

वहीं ‘वन नाइट स्टैंड’ के सवाल कश्यप ने कहा कि ये उन्हें समझ आना चाहिए कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। वहीं शादी से पहले शरीरिक संबंध बनाने को उन्होंने सामान्य सी बात करार दिया है। फिल्म निर्माता ने कहा कि वही करो जो आप करना चाहते हो।

आलिया ने सवाल किया अगर वो उसे पोर्न देखते पकड़ लेते हैं तो क्या करेंगे? इस पर अनुराग कश्यप ने कहा कि वो उसे करने देंगे।

अमेरिका में रहती हैं आलिया

हाल ही में अनुराग कश्यप की तबीयत खराब होने के बाद आलिया अमेरिका से लौटी हैं। वो वहीं पढ़ाई करती हैं। 14 जून 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, वह मुंबई में अपने ब्वॉयफ्रेंड की इंडियन तरीके से खातिरदारी करती देखी गई थीं। उन्होंने उसे छोले-भठूरे, समोसा, भेल-पूरी और गोलगप्पे जैसे भारतीय फ़ास्ट-फूड्स खिलाया।

इससे पहले उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर खुलासा किया था कि वह अपने पेरेंट्स से कभी भी कोई भी बात नहीं नहीं छिपाती हैं। यहाँ तक कि डेटिंग और ड्रिंक करने की बात भी वह उनसे शेयर करती हैं।

सिंगापुर ने चीन की कोरोना वैक्सीन को दी मंजूरी, शीर्ष अधिकारियों ने जताया प्रभावी होने पर संदेह

सिंगापुर के लोगों को शुक्रवार (18 जून 2021) से प्राइवेट क्लीनिकों में चीनी कंपनी साइनोवैक की कोरोना वैक्सीन दी जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जून की शुरुआत में चीनी वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। डब्ल्यूएचओ की मंजूरी के बाद सिंगापुर प्रशासन द्वारा इसे 24 प्राइवेट हेल्थ क्लीनिक में देने की अनुमति दी गई है। ध्यान देने की बात है कि सिंगापुर के एक शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा चीन की वैक्सीन के प्रभाव पर संदेह व्यक्त करने के बावजूद इसे मंजूरी दी गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समय वैक्सीन की माँग बहुत अधिक है, लेकिन सरकार इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में जोड़ने से हिचकिचा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इस वैक्सीन की माँग उन लोगों के बीच अधिक है, जो मुख्यत: चीन के रहने वाले हैं या फिर वहाँ जाने की योजना बना रहे हैं। सिंगापुर में अधिक प्रभावी टीके उपलब्ध हैं, इसके बावजूद वे लोग चीनी वैक्सीन को लेना बेहतर मान रहे हैं।

सिंगापुर के चिकित्सा सेवाओं के निदेशक केन्नेथ माक ने शुक्रवार (18 जून 2021) को कहा कि वह टीके के प्रभाव को लेकर चिंतित थे, क्योंकि अन्य देशों से आने वाली रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जिन लोगों को साइनोवैक का शॉट दिया गया था, वे अभी भी कोविड-19 से संक्रमित हो रहे हैं।

उन्होंने इंडोनेशिया के मामलों का उल्लेख किया, जहाँ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और डॉक्टरों को साइनोवैक का टीका लगाया गया था। इसके बावजूद वे कोरोना से संक्रमित हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, ”इससे यह आभास होता है कि विभिन्न टीकों का प्रभाव भी काफी भिन्न होगा।”

सिंगापुर नेशनल वैक्सीनेशन प्रोग्राम के तहत फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना द्वारा निर्मित टीके उपलब्ध करा रहा है। स्टडी के अनुसार, ये टीके संक्रमण को रोकने में 90 प्रतिशत तक प्रभावी हैं। केवल दुर्लभ मामलों में ये टीके लगाने के बाद किसी में कोरोना के लक्षण दिखाई दिए।

साइनोवैक द्वारा निर्मित वैक्सीन कोरोनावैक पर की गई स्टडी की रिपोर्ट बताती है कि शॉट का प्रभाव 50 से 84 प्रतिशत के बीच है। डब्ल्यूएचओ ने साइनोवैक के टीके को मंजूरी देते हुए कहा कि यह संक्रामक रोगों से जुड़े रोगों को रोकने में केवल 51 प्रतिशत प्रभावी था। डब्ल्यूएचओ से मंजूरी के लिए न्यूनतम आवश्यकता 50 प्रतिशत है। हालाँकि, चीन के टीकों को गंभीर बीमारी के खिलाफ अधिक प्रभावी माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि फाइजर या मॉडर्न की बजाय साइनोवैक को चुनने वाले देश भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण परेशान हो सकते हैं।

सिंगापुर में कोविड-19

सिंगापुर में कोरोना संक्रमण के अब तक कुल 62,403 मामले सामने आए हैं। वहीं 62,023 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 34 लोगों की कोविड-19 से मौत हो चुकी है। लगभग 50 लाख आबादी वाले इस देश में 19 लाख से अधिक लोगों को पूरी तरह से टीका लगाया जा चुका है। वहीं, देश में करीब 47 लाख लोगों को पहली डोज दी जा चुकी है।

कोरोना के चलते दूसरी बार रद्द हुई अमरनाथ यात्रा, इस तारीख से हिमलिंग के ऑनलाइन दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु

कोरोना महामारी के कारण अमरनाथ यात्रा लगातार दूसरी बार रद्द कर दी गई है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस साल लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमरनाथ यात्रा को रद्द करने का फैसला किया है।

मी​डिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 जून से भक्तों के लिए हिमलिंग के ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। उपराज्यपाल ने कहा, “कोरोना को देखते हुए अमरनाथ यात्रा रद्द करने का फैसला जनता के व्यापक हित में लिया गया।”

कोरोना से उपजे हालात के कारण श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने पहले ही एडवांस पंजीकरण को बीच में बंद कर दिया था हालांकि एडवांस पंजीकरण एक अप्रैल से शुरू हुआ था। यात्रा को लेकर पिछले काफी दिनों से असमंजस बना हुआ था उपराज्यपाल ने यात्रा के मुद्दे पर इससे पहले दिल्ली में अपनी दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय गृह सचिव से मुलाकात की थी। पिछले साल की तरह इस साल भी बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा से आरती का सीधा प्रसारण किया जाएगा। 

अमरनाथ मंदिर भारत के जम्मू-कश्मीर में हिमालय की एक गुफा में 3888 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक हिंदू मंदिर है। यह हिंदूओं के पवित्र मंदिरों में से एक है और 51 शक्तिपीठों में से एक है। 2020 में भी कोरोना वायरस महामारी के कारण तीर्थयात्रा रद्द कर दी गई थी।

हाल ही में जम्मू-शहर के त्रिकुटा नगर और जीआरपी पुलिस स्टेशन के बाहर आतंकी संगठन तहरीक-उल-मुजाहिदीन का कथित धमकी भरा पोस्टर चस्पा मिला। इसमें अमरनाथ यात्रा पर न आने की लोगों को धमकी दी गई। आतंकी हमले की धमकी देने वाला पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पिछले हफ्ते एजेंसियों ने सुरक्षा बढ़ा दी थी। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में पवित्र अमरनाथ यात्रा के दौरान कई बार आतंकी हमले हो चुके हैं। इसमें कई यात्री अपनी जान गँवा चुके हैं।

मोदी के खिलाफ 2024 के लिए एकजुट हुईं विपक्षी पार्टियाँ, NCP प्रमुख शरद पवार के घर होगी राष्ट्र मंच की बैठक

नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के सुप्रीमो शरद पवार अभी से 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुट गए हैं। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से मुलाकात होने के बाद उन्होंने 22 जून को दोपहर 4 बजे राष्ट्र मंच की बैठक बुलाई। इस मंच की नींव मोदी सरकार की नीतियों के विरुद्ध यशवंत सिन्हा ने साल 2018 में रखी थी।

राष्ट्र मंच की बैठक में NCP प्रमुख पहली बार हिस्सा लेने वाले हैं। ये बैठक आमने-सामने बैठ कर होगी, जिसमें 15 नेता शामिल हो सकते हैं। इनमें संभवत: यशवंत सिन्हा, AAP नेता संजय सिंह, पवन वर्मा, एनसीपी नेता मजीद मेनन, समाजवादी पार्टी के नेता घनश्याम तिवारी और कई अन्य नेता शामिल होंगे।

इस बैठक को बुलाने से पहले एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार 15 दिन में प्रशांत किशोर से 2 बार मिल चुके हैं। एक मीटिंग 11 जून को पवार के मुंबई स्थित आवास पर हुई थी और दूसरी बैठक सोमवार को हुई। दोनों ही बैठकों में आधे घंटे चर्चा हुईं। मीडिया में कयास लग रहे हैं कि ये चर्चा 2024 में पीएम मोदी के ख़िलाफ़ विपक्ष को इकट्ठा करने का एक प्रयास है। 

बता दें कि साल 2018 में यशवंत सिन्हा ने देश की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर चर्चा के लिये राष्ट्र मंच शुरू किया था। इसमें विपक्षी दलों के विभिन्न नेताओं के अलावा गैर राजनीतिक लोग भी हिस्सा लेते रहे है। राष्ट्र मंच का मकसद केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना रहा है।

हालाँकि, अभी तक राष्ट्र मंच कोई राजनीतिक मोर्चा नहीं है लेकिन भविष्य में इसके तीसरे मोर्चा बनने की संभावना से इंकार नहीं कर सकते। शरद पवार के इस तरह बैठक बुलाने और उसमें शामिल होने की बात से माना जा रहा है कि इसे तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है जिसमें मोर्चे के संयोजक के रूप में शरद पवार नजर आएँगे। यही वजह है कि इस बैठक से कॉन्ग्रेस नेताओं ने दूरी बनाई हैं। 

वहीं राष्ट्र मंच की स्थापना करने वाले यशवंत सिन्हा अब टीएमसी के उपाध्यक्ष हैं, जो कल बैठक में मौजूद होंगे। ऐसे में जाहिर है कि वह टीएमसी का प्रतिनिधित्व करेंगे। वैसे भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तो पहले ही इस मंच को अपनी मंजूरी दे चुकी हैं। उन्होंने पहले भी ये कहा था कि अगर विपक्षी पार्टियाँ एक होकर लड़ें तो 2024 में मोदी सरकार को हराया जा सकता है।

‘संविदा=बंधुआ मजदूरी’: राजस्थान में लागू नहीं होता प्रियंका गाँधी का UP वाला फॉर्मूला, गहलोत को ‘अपमान’ की छूट

कॉन्ग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की जिन भी कारणों से आलोचना करती है, राजस्थान में वही चीजें आलोचना से परे हो जाती हैं। ये अलग बात है कि यूपी में कॉन्ग्रेस को जबरन हाथरस जैसे मामले ‘क्रिएट’ कर के मीडिया आउटरेज कराना पड़ता है। अब संविदा पर कर्मचारियों की बहाली को लेकर भी प्रियंका गाँधी की राय बदल सकती है, क्योंकि ये राजस्थान में हो रहा है।

खबर के अनुसार, राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने निर्णय लिया है कि शिक्षा विभाग में कुल 9862 बेसिक कम्प्यूटर शिक्षकों तथा 591 वरिष्ठ कम्प्यूटर शिक्षकों के पद सृजित किए जाएँगे। बेसिक कम्प्यूटर अनुदेशक की सैलरी सूचना सहायक पद के समकक्ष और और वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक का वेतनमान सहायक प्रोग्रामर के पद के बराबर होगा। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के इन दोनों पदों की जो योग्यता है, कम्प्यूटर वाली संविदा की बहाली में भी यही सैलरी होगी।

अगर इसे प्रियंका गाँधी के ही शब्दों में समझें तो राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार युवाओं के दर्द पर मरहम लगाने की जगह उनका दर्द बढ़ाने की तैयारी कर रही है। चौंक गए? असल में जब उत्तर प्रदेश में संविदा पर बहाली हो रही थी तो प्रियंका गाँधी ने कुछ इसी तरह का बयान दिया था। अब उम्मीद करना बेमानी है कि प्रियंका गाँधी राजस्थान के लिए अपने इस बयान को दोहराएँगी, लेकिन कम से कम बता तो देतीं कि वो अपने उस बयान पर अब भी कायम हैं या नहीं।

दरअसल, हुआ कुछ यूँ था कि सितंबर 2020 में योगी सरकार समूह ‘ख’ व समूह ‘ग’ की भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही थी। इसके तहत प्रस्ताव लाया गया था कि चयन के बाद शुरुआती 5 वर्ष तक कर्मियों को संविदा के आधार पर नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद छँटनी होगी और जो बचेंगे, उन्हें स्थायी नियुक्ति दी जाएगी। परफॉर्मेंस के आधार पर किसी को नौकरी देना कहाँ तक गलत है?

लेकिन, तब प्रियंका गाँधी ने इसका विरोध करते हुए कहा था, “संविदा = नौकरियों से सम्मान विदा। 5 साल की संविदा = युवा अपमान कानून। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी इस तरह के कानून पर अपनी तीखी टिप्पणी की है। इस सिस्टम को लाने का उद्देश्य क्या है? सरकार युवाओं के दर्द पर मरहम न लगाकर दर्द बढ़ाने की योजना ला रही है। नहीं चाहिए संविदा।” अफ़सोस कि राजस्थान वाले मुद्दे पर उनका कोई ट्वीट नहीं आया है।

प्रियंका गाँधी से अनुरोध है कि वो हमें नहीं तो कम से कम राजस्थान की जनता की तो सुने। राज्य में स्थायी भर्ती के लिए बेरोजगार कम्प्यूटर शिक्षक लम्बे समय से आंदोलन चला रहे हैं और अभी भी सोशल मीडिया के जरिए अभियान निरंतर जारी है। ऐसे में इस फैसले के बाद राज्य के ‘बेरोजगार महासंघ’ ने संविदा पर बहाली का विरोध किया है। महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव ने इसे गलत निर्णय करार देते हुए कहा कि नियमित आधार पर भर्तियाँ निकाल कर बेरोजगारों को राहत दी जाए।

प्रियंका गाँधी के लिए ये कोई नई बात नहीं है। जब दिल्ली और मुंबई ने यूपी-बिहार-झारखंड के मजदूरों को छोड़ दिया था तो वो अपने-अपने राज्य वापस आ गए थे। तब उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके आवागमन की मुफ्त व्यवस्था की। उस समय प्रियंका गाँधी योगी सरकार को मजदूरों के खिलाफ बताते हुए आलोचना में लगी थीं, जबकि राजस्थान में मजदूरों का बुरा हाल था लेकिन कॉन्ग्रेस के किसी भी नेता ने इस पर चूँ तक नहीं किया।

ये कॉन्ग्रेस के प्रथम परिवार का दोहरा मापदंड है। प्रियंका गाँधी उत्तर प्रदेश में ऐसा प्रस्ताव भर आता है तो इसे ‘5 साल युवाओं का अपमान’ बताते हुए ‘बंधुआ मजदूरी’ से संविदा की तुलना करती है, जबकि राजस्थान में पूरा फैसला ही लागू हो जाता है फिर भी चूँ तक नहीं करतीं। उन्होंने तब गुजरात में यही सिस्टम होने की बात कहते हुए कहा था कि इससे युवाओं का आत्मसम्मान छिन जाता है। फिर, क्या राजस्थान के युवाओं का उनकी नजर में कोई आत्मसम्मान नहीं?

इसी तरह बोर्ड परीक्षा के मामले में भी केंद्र सरकार की आलोचना करने वाली प्रियंका गाँधी ने राजस्थान में अपनी सरकार की तरफ से आँख मूँद लिया था। राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा बार-बार घोषणा करते रहे कि परीक्षाएँ होंगी, और इधर प्रियंका केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिख कर CBSE की परीक्षाएँ रद्द कराने की माँग कर रही थीं। उन्होंने एक पत्र अशोक गहलोत के नाम क्यों नहीं लिखा?

वो तो भला हो कि बाद में आनन-फानन में बैठक बुला कर राजस्थान में भी परीक्षाएँ रद्द कर दी गईं। संविदा वाले मामले में दिक्कत सिर्फ प्रियंका गाँधी का दोहरा रवैया नहीं है, बल्कि चुनाव पूर्व किया गया कॉन्ग्रेस का वादा भी है। ये कॉन्ग्रेस का चुनावी वादा था कि वो संविदा कर्मियों को स्थायी करेगी। सरकार बनने के बाद समिति भी बनी। 8 बैठकें हो गई हैं लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात। प्रदेश के 11,000 स्कूलों में कम्प्यूटर लैब हैं, ऐसे में मामला संवेदनशील है।

हाथरस मामला, जिसमें पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई थी, उसे लेकर कॉन्ग्रेस ने अच्छा-खासा हंगामा मचाया था। दोषियों को सज़ा दिलाने की माँग की जगह इस घटना का तमाशा बना दिया गया। जबकि राजस्थान में कानून के रखवालों पर ही यौन शोषण और रेप के आरोप लगने के बावजूद उन्होंने कुछ नहीं कहा। राजस्थान से तो उत्तर प्रदेश की सीमा भी लगती है, ऐसे में प्रियंका गाँधी तक ये खबरें जल्दी पहुँचनी चाहिए।

संविदा की बहाली का मुद्दा हो या फिर अपराध का, प्रियंका गाँधी को एक पर रहना चाहिए, ‘घोड़ा-चतुर’ नहीं खेलना चाहिए। लेकिन, ये कॉन्ग्रेस के DNA में है। राहुल गाँधी तो बार-बार अपना बयान और आँकड़े बदलने के लिए मशहूर हैं। वामपंथी दल बंगाल में इनके दोस्त और केरल में दुश्मन हो जाते हैं। जब कोई विचारधारा ही नहीं है तो किसी चीज पर वो कायम कैसे रहेंगे? फिलहाल, चुनौती न सिर्फ राजस्थान में पायलट-गहलोत की कलह सुलझाने की है, बल्कि बेरोजगारों के क्रोध को शांत करने की भी है।

चीन को जोरदार झटका: नोएडा में सैमसंग का कारखाना तैयार, यूपी में 1500 लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार

दक्षिण कोरिया की दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक कंपनी सैमसंग ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में डिस्प्ले (Display) का कारखाना तैयार कर लिया है। साल 2020 में इस कारखाने को चीन से हटाकर यूपी में लाया गया था। सैमसंग (Samsung) के साउथ-वेस्ट एशिया प्रेसिडेंट एवं सीईओ केन कांग के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार (20 जून 2021) को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने कहा, ”बेहतर इंडस्ट्रियल इन्वॉयरमेंट और इन्वेस्टर्स फ्रेंडली पॉलिसी के कारण सैमसंग ने चीन में स्थित डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को भारत शिफ्ट करने का फैसला किया है। अब इसे नोएडा में स्थापित करने का काम पूरा हो गया है। यह सैमसंग की भारत के लिए और यूपी को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने कहा, ”सैमसंग की नोएडा फैक्ट्री ‘मेक इन इंडिया‘ कार्यक्रम की सफलता का एक बेहतरीन उदाहरण है। इससे राज्य के युवाओं को रोजगार हासिल करने में मदद मिलेगी।” साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार भविष्य में भी सैमसंग कंपनी की मदद करती रहेगी।

गौरतलब है कि दुनिया की दिग्गज आईटी कंपनियों में शुमार सैमसंग अब उत्तर प्रदेश में मोबाइल और आईटी डिस्प्ले उत्पादों का निर्माण करेगी। सैमसंग की यह यूनिट इससे पहले चीन में स्थापित थी। सैमसंग के इस नए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना से प्रदेश में करीब 4,825 करोड़ रुपए का निवेश होगा। यही नहीं भारत ओएलईडी तकनीक से निर्मित से मोबाइल डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग करने वाला दुनिया का तीसरा देश भी बन जाएगा।

1500 लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार

बता दें सैमसंग की नोएडा में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है, जिसका उद्घाटन साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। दिसंबर 2020 में सैमसंग ने घोषणा की थी कि वह अपने डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को चीन से नोएडा में स्थानांतरित करेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नया प्लांट पहली उच्च तकनीक परियोजना है, जिसे चीन से स्थानांतरित करने के बाद भारत में स्थापित किया जा रहा है। नई परियोजना से 1500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा और हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना है।

सिद्धू पर फिर डोरे डाल रही AAP: केजरीवाल ने कहा- सिख होगा CM कैंडिडेट, पूरे पंजाब को होगा गर्व

पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले एक बार फिर आम आदमी पार्टी (AAP) राज्य में अपनी उम्मीदों को हवा देने में जुट गई है। इस कड़ी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एक बयान से सियासी अटकलें गर्म हो गई है।

‘गो बैक’ के पोस्टर और अकाली कार्यकर्ताओं के ‘काले झंडे’ के बीच केजरीवाल ने सोमवार (21 जून 2021) को कहा कि पंजाब में पार्टी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार कोई सिख ही होगा और उस पर पूरे राज्य को गर्व होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि वे कॉन्ग्रेस नेता सिद्धू का सम्मान करते हैं।

उल्लेखनीय है कि सिद्धू और पंजाब के कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के बीच अरसे से तकरार चल रही है। सिद्धू ने राज्य कैबिनेट में मंत्री का पद ठुकराते हुए मुख्यमंत्री को झूठा भी करार दिया है। ऐसे में केजरीवाल के बयान को उनको आप में लाने की कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है। वैसे इस तरह के प्रयास आप ने 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले भी किए थे जब सिद्धू ने बीजेपी छोड़ी थी। लेकिन, उस वक्त उन्होंने कॉन्ग्रेस का हाथ थाम लिया था।

अमृतसर के सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केजरीवाल ने कहा कि AAP बहुत जल्द मख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान करेगी और जिस चेहरे का ऐलान किया जाएगा उस पर पूरे पंजाब को मान होगा। केजरीवाल ने यह भी खुलासा किया कि आम आदमी पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा सिख समुदाय से होगा। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में से पंजाब ही एक ऐसा राज्य है, जिसका सीएम सिख समाज से है, लेकिन हमारा मानना है कि यह सिख समाज का हक है और यह उनके पास ही रहना चाहिए।

इस दौरान अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में पूर्व आईपीएस विजय प्रताप सिंह ने आम आदमी पार्टी ज्वाइन की। बता दें कि कुंवर विजय प्रताप सिंह की गिनती पंजाब सरकार के भरोसमंद अफसरों में होती रही है, लेकिन कोटकपूरा और बहिबल कलां गोलीकांड की जाँच के लिए बनी SIT के प्रमुख कुंवर विजय प्रताप सिंह ने कुछ महीनों पहले इस्तीफा दिया था

कुंवर विजय प्रताप पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब का बच्चा-बच्चा कुंवर विजय प्रताप और इनकी ईमानदारी को जानता है। केजरीवाल ने कहा कि कोटकपूरा और बहिबल कलां गोलीकांड में इंसाफ दिलाने के लिए कुंवर प्रताप ने बड़ी मेहनत की है। उन्होंने कहा कि बेअदबी से मास्टरमाइंड अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। सारा सिस्टम कुंवर विजय प्रताप के खिलाफ खड़ा हुआ, इसी से दुखी होकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

केजरीवाल ने ऐलान किया कि कुंवर प्रताप का अधूरा काम AAP की सरकार बनने पर पूरा किया जाएगा और बेअदबी के दोषियों को सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी और इसके नेता कुत्ते-बिल्लियों की तरह लड़ रहे हैं। जनता की कोई नहीं सुन रहा है। ये लड़ाई भ्रष्टाचार और पैसों के लिए हो रही है। जब पंजाब में लोग कोरोना से मर रहे थे तो कॉन्ग्रेस सरकार और इसके मंत्री आपस में कुर्सी के लिए लड़ रहे थे।

लोनी केस में राणा अय्यूब को बॉम्बे HC ने दी 4 हफ्तों की अग्रिम जमानत, कोर्ट को बताया- अभी हुई है स्पाइनल सर्जरी

गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग की पिटाई वाले प्रकरण में बिन तथ्यों को जाने ट्वीट करने के बाद यूपी पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर मामले में पत्रकार राणा अय्यूब को कोर्ट से 4 सप्ताह के लिए ट्रांजिट अंतरिम जमानत मिली है।

बार एंड बेंच के ट्वीट के अनुसार, “गाजियाबाद मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने राणा अय्यूब को गिरफ्तारी से 4 हफ्तों की अंतरिम राहत दी।”

कोर्ट के आदेश में कहा गया, “हालाँकि, अभी जाँच संबंधित पुलिस द्वारा की जा रही है और संबंधित अदालत निष्कर्षों के आधार पर मामले से निपटेगी। लेकिन, आवेदक को न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए, 4 सप्ताह की अस्थाई अवधि दी जा सकती है।”

बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस पीडी नायक की पीठ के सामने अय्यूब का मामला वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई ने पेश किया। इस मामले में एफआईआर 15 जून को दायर हुई थी। यूपी पुलिस ने इस केस को धारा 153, 153ए, 295ए, 505 और 120 बी के तहत दायर किया था।

कोर्ट के सामने पेश हुए अय्यूब के वकील ने बताया कि जो एफआईआर में लगाए गए आरोपों हैं उन पर 3 साल की सजा है। कोर्ट को उन्होंने ये भी बताया कि जैसे ही मामले में उन्हे ताबीज वाली बातें पता चलीं उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

मालूम हो कि गिरफ्तारी से राहत माँगते हुए राणा अय्यूब के वकील की ओर से तर्क दिया गया कि आवेदक एक पत्रकार हैं। वह तहलका की एडिटर रही हैं और उन्हें पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए संस्कृति अवार्ड दिया गया। इसके अलावा उन्हें कई और अवार्ड भी मिले हैं।

इसके बाद कोर्ट ने सारी बातें सुनकर उनके पूछा कि वह अंतरिम राहत कितने समय की चाहते हैं। देसाई ने जवाब दिया कि सिर्फ 3-4 हफ्ते की, क्योंकि राणा की स्पाइनल सर्जरी हुई है और उनके रीढ़ में अभी दर्द है। कोर्ट ने अंत में आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को एक या ज्यादा जमानत के लिए 25000 रुपए के पीआर बांड पर रिहा किया जाएगा। यह 4 सप्ताह की अवधि के लिए है।

उल्लेखनीय है कि गाजियाबाद में अब्दुल नाम के बुजुर्ग की पिटाई मामले में सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने के लिए यूपी पुलिस ने अय्यूब के अलावा 8 के विरुद्ध एफआईआर की थी। इस संबंध में ट्विटर पर भी केस दर्ज हुआ था। वहीं द वायर, मोहम्मद जुबैर, सबा नकवी, सलमान निजामी का नाम भी इसमें शामिल था