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COVID-19 अनुसंधान के लिए वुहान लैब को अवॉर्ड दे सकता है चीन, मेडिसिन का नोबेल देने की भी कर चुका है पैरोकारी

कोरोना संक्रमण के बाद से सवालों में घिरे वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को चीन अवॉर्ड दे सकता है। चीनी सरकार की मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में 20 जून को प्रकाशित एक रिपोर्ट से यह बात सामने आई है। इसमें कहा गया है कि ‘विज्ञान वुहान लैब का नाम कोविड-19 वायरस की ‘पहचान’ के लिए ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उत्कृष्ट उपलब्धि’ हेतु शॉटलिस्ट की गई सूची में है। यह सूची चीन की विज्ञान अकादमी (CAS) ने 18 जून को प्रकाशित की थी।

वुहान लैब के वैज्ञानिकों को बताया ‘उत्कृष्ट योगदानकर्ता’

सूची में ‘बैट वुमन’ के नाम से पहचाने जाने वाली प्रयोगशाला निदेशक शी झेंगली और लैब के उप निदेशक युआन झिमिंग को उत्कृष्ट योगदानकर्ता के रूप में स्थान दिया गया है। डॉ. शी की कोविड-19 महामारी की पहचान करने और कोरोना वायरस जीन अनुक्रमण, वायरस आइसोलेशन, रिसेप्टर वेरिफेकेशन, माउस मॉडल स्टेब्लिशमेंट और महामारी की पहचान पर अन्य अध्ययनों को पूरा करने की उपलब्धि के लिए प्रशंसा की गई थी। दूसरी ओर, डॉ’ युआन को ‘कोरोनावायरस गैर-मानव प्राइमेट संक्रमण मॉडल की स्थापना में ‘उत्कृष्ट योगदान’ के लिए चुना गया।

‘वुहान लैब के वैज्ञानिक नोबेल के पात्र’

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने 17 जून को संवाददाताओं से बातचीत में कहा था कि वुहान लैब की टीम की आलोचना करने के बजाय कोविड-19 पर शोध में उनके ‘योगदान’ के लिए उन्हें मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए।

पिछले हफ्ते, डॉ. शी ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को एक इंटरव्यू दिया था और अपने ऊपर लगे आरोपों के बारे में बताया था। उसने दावा किया कि किसी ऐसी चीज के लिए सबूत देना संभव नहीं है, जिसका कोई सबूत नहीं है। उसने कहा, “मैं किसी ऐसी चीज़ के लिए सबूत कैसे पेश कर सकती हूँ जहाँ कोई सबूत नहीं है?”

CAS द्वारा वुहान लैब की प्रशंसा की गई

GT के अनुसार, CAS ने कहा कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने प्रकोप के बाद महामारी की पहचान करने के लिए तुरंत काम करना शुरू कर दिया और कम समय में वायरस जीनोम सीक्वेंसिंग और वायरस आइसोलेशन को पूरा किया। CAS ने कहा, “इसने पुष्टि की कि कोविड-19 वायरस SARS वायरस के समान फंक्शनल रिसेप्टर शेयर करता है, व्यवस्थित रूप से वायरस की बुनियादी जैविक विशेषताओं का विश्लेषण करता है और पता चला है कि चमगादड़ में पाए जाने वाले कोरोनावायरस संभवत: कोविड-19 कोरोनवायरस के विकासवादी पूर्वज हो सकते हैं।”

लैब लीक की आशंका

कुछ वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के अनुसार, वायरस को चीनी वैज्ञानिकों ने ‘गेन ऑफ फंक्शन’ नामक एक प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया था, जो आनुवंशिक हेरफेर के माध्यम से महामारी को सुपरचार्ज करता है। हालाँकि, सिद्धांत को साजिश बताते हुए खारिज कर दिया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि उन 18 वैज्ञानिकों में से एक, अलीना चान, जिन्होंने साइंस जर्नल में एक पत्र प्रकाशित किया था, जिसमें वायरस की उत्पत्ति की गहन जाँच की माँग की गई थी, ने NBC से लैब लीक सिद्धांत पर बात की। उन्होंने कहा, “उस समय ट्रम्प के साथ जुड़ना और नस्लवादियों का एक उपकरण बनना डरावना था, इसलिए लोग प्रयोगशाला में उत्पत्ति की जाँच के लिए लोग सार्वजनिक रूप से नहीं बोलना थे।”

लैब लीक थ्योरी से WHO का इनकार

फरवरी 2021 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 वायरस की उत्पत्ति की जाँच की थी। अपनी जाँच में उसने निष्कर्ष निकाला कि यह पूरी तरह असंभव सा है कि वायरस प्रयोगशाला से लीक हुआ हो। हालाँकि, बहुत से वैज्ञानिक इस सिद्धांत से सहमत नहीं हैं। लैब लीक थ्योरी की अटकलों को गहन जाँच के बिना खारिज किया जाना मुश्किल है।

नए सिरे से जाँच के आदेश

मई 2021 में संयुक्त राज्य सरकार ने अपनी खुफिया एजेंसियों को नई 90 दिवसीय जाँच करने करने का आदेश दिया था, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति और अन्य विश्व नेताओं ने वायरस की उत्पत्ति की और जाँच करने का आग्रह किया था।

कॉन्ग्रेस मित्रमंडली में रघुराम राजन की चाँदी: एस्थर डूफलो, जीन ड्रेज़ के साथ बनाएँगे ‘पेरियार के सपनों का तमिलनाडु’

तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने सोमवार (जून 21, 2021) को राज्य के आर्थिक विकास का खाका पेश किया। मई 2021 में ही राज्य में DMK प्रमुख के नेतृत्व में स्टालिन की सरकार बनी है। तमिलनाडु के आर्थिक विकास के लिए ‘आर्थिक सलाहकार परिषद’ का गठन किया गया है, जो सीधे मुख्यमंत्री के साथ मिल कर काम करेगा। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन सहित दुनिया भर के कई विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।

तमिलनाडु की 16वीं विधानसभा के पहले सत्र को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस परिषद में अमेरिका स्थित MIT के नोबेल विजेता एस्थर डूफलो, प्रोफेसर रघुराम राजन, भारत सरकार के प्रमुख आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यम, बेल्जियम में जन्मे डेवलपमेंट इकोनॉमिस्ट जीन ड्रेज़ और पूर्व वित्त सचिव डॉक्टर एस नारायण को शामिल किया गया है। राज्यपाल ने कहा कि ये सरकार तमिलनाडु को एक आत्म-सम्मान वाला समाज बनाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसा बदलाव किया जाएगा, जहाँ सभी नागरिक सशक्त हों और अपने-अपने अधिकारों का समुचित उपयोग करें। साथ ही हर मामले में समृद्ध एक ऐसे समाज के निर्माण की बात कही गई, जिसका सपना पेरियार ने देखा था। उन्होंने कहा कि एक मजबूत संघ के लिए राज्यों का मजबूत होना ज़रूरी है और ये सरकार राज्य के अधिकारों की न सिर्फ रक्षा करेगी, बल्कि उनके हनन के प्रयासों का संवैधानिक विरोध भी करेगी।

राज्यपाल ने कहा, “हम केंद्र सरकार के साथ एक सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध बना कर रखेंगे। साथ ही सभी साझेदारों के साथ मिल कर हम राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ेंगे। राजनेताओं और अधिकारियों के ऊपर लोकायुक्त को शक्तियाँ दी जाएँगी। भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों को सक्रिय किया जाएगा और पुरानी शिकायतों को निपटाया जाएगा। ‘राइट टू सर्विसेज एक्ट’ आएगा, ताकि सरकारी सुविधाएँ जनता तक पहुँच सके।”

जमीन के नीचे के पानी पर निर्भर किसानों और लोगों के लिए भी उनके हित में नियम बनाने की घोषणा की गई। तमिलनाडु की सरकार ने राज्यपाल के माध्यम से ये घोषणा भी की कि NEET से छात्रों पर बुरा असर न पड़े, इसके लिए राष्ट्रपति की सहमति से कदम उठाए जाएँगे। सब-अर्बन क्षेत्रों में ‘सैटेलाइट टाउन्स’ विकसित किए जाएँगे, ताकि बड़े शहरों का बोझ कम हो। राज्य के लिए रीजनल प्लान्स बनेंगे।

साथ ही तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के लिए तीसरा मास्टर प्लान 2026 से पहले पूरा कर लेने का वादा किया गया है। एक और बड़ी घोषणा ये की गई है कि राज्य के सभी हिन्दू मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएँ बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर एक सलाहकार समिति बनेगी, जो मंदिरों के रख-रखाव से लेकर इससे जुड़े अन्य सलाह देगी। तमिलनाडु को पर्यटन के मामले में अव्वल बनाने के लिए भी इसी साल योजना आएगी।

पंजाब CM के फार्म हाउस के पास पी शराब, फिर वहीं तलवार से सिर काट कर दिया दफन: 2 गिरफ्तार-1 फरार

पंजाब के मोहाली जिले के सिसवान में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के फार्म हाउस के पास एक व्यक्ति को बेरहमी से मारकर दफना दिया गया। 40 वर्षीय व्यक्ति की हत्या तलवार से की गई। पुलिस ने इस संबंध में 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अन्य की तलाश जारी है।

पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान नग्गल गाँव के सुच्चा सिंह के रूप में हुई है, वह बकरी पालता था। उसकी हत्या 12 जून को हुई थी। घटना वाले दिन वह तीन संदिग्धों सतनाम सिंह, देश राज और जागीर सिंह के साथ शराब पीने के लिए मुख्यमंत्री फार्म हाउस के पास गया था।

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुच्चा पर तीन संदिग्धों में से एक के लगभग 60,000 रुपए बकाया थे। जब वह शराब पीने गया तो वहाँ पैसे को लेकर बहस छिड़ गई, जिसके बाद तीनों ने कथित तौर पर सुच्चा का सिर तलवार से काट दिया। बाद में उन्होंने सिर कटे शव को मुख्यमंत्री के फार्महाउस के पास दफना दिया और भाग गए।

देर रात तक जब सुच्चा घर नहीं लौटा तो उसके परिजन उसकी तलाश में निकले। बहुत खोजबीन के बाद जब उसका पता नहीं चला तो पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई।  हत्या का खुलासा इस रविवार (20 जून 2021) को हुआ जब एक राहगीर ने फार्म हाउस के पास दफन शव देखा और इस संबंध में पुलिस को सूचना दी।

शरीर और कपड़ों से सुच्चा को पहचाना गया। बाद में पूछताछ हुई तो तीन में दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। एक की तलाश की जा रही है। शव पोस्टमार्टम के लिए खरार सिविल अस्पताल भेजा गया है।

मृतक के पीछे अब उसकी पत्नी और 3 बच्चे बचे हैं। वह 12 जून को लापता हुआ था। उसकी गाँव में अच्छी साख थी और पड़ोसी बताते हैं कि वो कभी किसी से झगड़ा नहीं करता था। एसएसपी सतिंदर सिंह ने कहा कि सतनाम सिंह और देश राज को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि जागीर सिंह को पकड़ने के प्रयास जारी हैं। एसएसपी ने कहा कि उन पर भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या और सबूत नष्ट करने का मामला दर्ज किया गया है।

बंगाल हिंसा पर हाईकोर्ट ने ममता सरकार की नहीं सुनी, मानवाधिकार आयोग करेगा जाँच

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार को बड़ा झटका देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोमवार (21 जून, 2021) को राज्य में चुनाव के बाद जारी हिंसा की जाँच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से कराने के अपने आदेश को वापस लेने या उस पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को हिंसा की जाँच करने के लिए एक कमेटी गठित करने का आदेश दिया है।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को एनएचआरसी के पैनल को सभी जरूरी सुविधाएँ मुहैया कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि किसी तरह की बाधा इसमें नहीं होनी चाहिए, अन्यथा कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

ममता सरकार को कड़ी फटकार

ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि हिंसा के मामले में ठोस कदम उठाने में राज्य सरकार विफल रही है। इस बीच महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने कोर्ट से आदेश पर 2-3 दिनों के लिए रोक लगाने की माँग की। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस पर कोई कार्रवाई नहीं करने के आरोपों के कारण ही एनएचआरसी को आना पड़ा है।

इससे पहले रविवार (20 जून 2021) को पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट में उसके ही आदेश को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर की थी। दरअसल कोर्ट ने 18 जून 2021 को राज्य में ‘चुनाव के बाद हिंसा’ की जाँच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को आदेश दिया था। इस मामले में पश्चिम बंगाल के गृह एवं पहाड़ी मामलों के विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और गृह सचिव ने हाई कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा के मामलों से निपटने के लिए एक मौका देने का अनुरोध किया था।

याचिका में ममता सरकार ने हाई कोर्ट से एनएचआरसी या किसी दूसरी एजेंसी को हिंसा की जाँच सौंपने से पहले इस मामले में राज्य के अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देने की अनुमति माँगी थी। सरकार ने हिंसा के मामले में कड़े कदम उठाने का दावा किया था।

कोर्ट का पिछला आदेश

कोलकाता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए शुक्रवार (18 जून 2021) को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को मामले की जाँच करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार ने विस्थापितों की शिकायतों का कोई जवाब तक नहीं दिया था।

कोर्ट ने कहा था, “ऐसे मामले में जहाँ आरोप यह है कि चुनाव बाद की कथित हिंसा से राज्य के लोगों की जान और सम्पत्ति को खतरा है। प्रदेश को उसकी पसंद से आगे बढ़ने नहीं दिया जा सकता है। शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और राज्य के निवासियों में विश्वास जगाना राज्य का कर्तव्य है।”

जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने पश्चिम बंगाल हिंसा पर सुनवाई से खुद को अलग किया

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने शुक्रवार (18 जून 2021) को पश्चिम बंगाल में हुई चुनाव बाद की हिंसा पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उस दौरान राज्य में दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या की जाँच सीबीआई और एसआईटी से कराने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई हो रही थी।

जस्टिस बनर्जी ने कहा, “मुझे इस मामले को सुनने में कुछ कठनाई हो रही है।” इस मामले को दूसरी पीठ में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इसी के साथ वो इस मामले की सुनवाई से अलग हो गईं।

1000+ हिन्दुओं को मुस्लिम बनाया, यूपी ATS ने पकड़े 2 मौलाना: ISI से लिंक, विदेश से फंडिंग

यूपी ATS ने मूक बाधिर छात्रों व कमजोर आय वर्ग के गरीबों-असहायों को धन, नौकरी व शादी करवाने का प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने वाले एक बड़े गिरोह के दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर अब तक करीब 1000 मूक बधिर, महिलाएँ और बच्चों को निशाना बनाकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। यही नहीं, इस मामले में यूपी पुलिस ने आईएसआई और विदेशी फंडिंग होने का शक भी जताया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये इस्लामी गिरोह ब्रेनवाश के जरिए हिंदुओं का धर्मांतरण कराते थे। एडीजी (लॉ एंड आर्डर) प्रशांत कुमार के मुताबिक, मजहबी धर्मांतरण करके लोगों को रेडिकलाइज कराया जा रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपित मौलानाओं की पहचान मुफ्ती काजी जहाँगीर आलम कासमी पुत्र ताहिर अख्तर निवासी ग्राम जोगाबाई, जामिया नगर, नई दिल्ली व मोहम्मद उमर गौतम पुत्र धनराज सिंह गौतम निवासी बाटला हाउस, जामिया नगर, नई दिल्ली के रूप में हुई है। मोहम्मद उमर गौतम का खुद इस्लामीकरण हुआ था।

गौरतलब है कि पुलिस महानिदेशक यूपी के निर्देशन में अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था द्वारा चलाए जा रहे एक बड़े अभियान के दौरान यूपी एटीएस को पिछले काफी समय से यह सूचना प्राप्त हो रही थी कि कुछ देश विरोधी व असामाजिक तत्व, मजहबी इस्लामी संगठन या सिंडिकेट पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई व विदेशी संस्थाओं के निर्देश व उनसे प्राप्त फंडिंग के आधार पर गरीब असहाय हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन करा रहे हैं।

इतना ही नहीं ये लोग उनके मूल हिन्दू धर्म के प्रति नफरत फैलाकर उन्हें संगठित अपराध के लिए भड़का रहे थे। इस सूचना पर यूपीएटीएस ने कार्रवाई करते हुए दोनों मौलानाओं को गिरफ्तार किया है। फिलहाल यूपी एटीएस की टीम करीब चार दिन से इनसे पूछताछ करके सुबूत जुटा रही थी। पकड़े गए मौलाना जहाँगीर और उमर गौतम लखनऊ के बड़े मुस्लिम संस्थानों से जुड़े होने की बात भी सामने आई है। 

इस मामले में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई अहम खुलासे किए हैं। एडीजी ने बताया कि पहले विपुल विजयवर्गीय और कासिफ की गिरफ्तारी हुई थी जिनसे पूछताछ में सूचना मिली कि एक बड़ा गैंग है जो प्रलोभन देकर लोगों का धर्म परिवर्तन कराता है। पूछताछ में उमर गौतम का नाम आया, जो बाटला हाउस जामियानगर का रहने वाला है। इन्होंने भी अपना धर्म परिवर्तन किया है। इन्हें तीसरी बार पूछताछ के बाद रविवार को गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने बताया कि पूछताछ में लगभग 1000 लोगों की लिस्ट सामने आई है जिनको प्रलोभन और पैसे देकर धर्मांतरण किया गया। एडीजी ने कहा कि विदेशी फंडिंग के जरिए देश के सौहार्द को बिगाड़ने का काम किया जा रहा है। इन्होंने नोएडा, कानपुर, मथुरा, वाराणसी वगैरह जिलों के गरीबों को निशाना बनाया।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार के अनुसार, “उमर गौतम खुद धर्मान्तरण कर हिंदू से मुस्लिम बना है। जिसने यूपी के अन्य जनपदों के गैर मुस्लिम मूकबधिर, महिलाओं और बच्चों का सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन कराया है। उमर और उसके सहयोगी जामियानगर से एक संस्था चलाते हैं। जिसका मुख्य उद्देश्य गैर मुस्लिमों का धर्म परिवर्तन कराना है। इस कार्य के लिए बैंक खातों और अन्य माध्यमों से भारी पैसे उपलब्ध कराए जाते हैं।

मूक बधिर बच्चों को निशाना बनाने पर एडीजी ने बताया, “डेफ सोसाइटी नोएडा सेंटर 117 जो मूक बधिर का रेजिडेशिंयल स्कूल है। यहाँ छात्रों को नौकरी शादी का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है। छात्र के परिजनों को इसकी जानकारी नहीं होती है। ऐसे ही एक बच्चे आदित्य गुप्ता के माता-पिता से हमने पूछताछ की तो कई खुलासे हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे के परिजनों ने यूपी पुलिस को बताया कि पहले उन्होंने अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट कराई थी जिसे बाद में 364 में परिवर्तित कर दिया गया था। यह भी बताया कि उनका बेटा मूक बधिर है। धर्म परिवर्तन कराकर साउथ के किसी राज्य में ले जाया गया है। इसके बारे में उनके मूकबधिर बच्चे ने वीडियो कॉल से बताया। इसी तरह गुड़गाँव का भी एक केस सामने आया। जिन बच्चों ने धर्म परिवर्तन किया वो इतने डरे हुए हैं कि आगे आकर कुछ बता नहीं पा रहे हैं।

मदरसा, मस्जिद, बगीचा, रेलवे स्टेशन: बिहार में जून में 4 ब्लास्ट, कहीं आपस में जुड़े हुए तो नहीं तार?

बिहार के अलग-अलग जिलों से हाल में विस्फोट की घटना सामने आई है। कहीं मदरसे के भीतर बम ब्लास्ट हुआ तो कहीं मस्जिद के बिलकुल पीछे बम फटा। एक मामले में तो पार्सल के भीतर विस्फोटक पदार्थ था। अररिया में तो एक झोला सरिया से टकरा जाने से धमाका हो गया। इन घटनाओं से न केवल राज्य की सियासत गरम है, बल्कि इनसे कई सवाल भी खड़े हो गए हैं।

7 जून: बांका के नूरी मस्जिद परिसर में ब्लास्ट

बिहार के बांका जिले के नवटोलिया क्षेत्र में नूरी मस्जिद के परिसर में हुआ बम ब्लास्ट इस माह की ऐसी खबर थी जिसने सबको झकझोरा। हाई फ्रीक्वेंसी वाले इस ब्लास्ट में मदरसा पूरी तरह जमींदोज हो गया था। कथित तौर पर अवैध मदरसे के भीतर कंटेनर में रखे देसी बम से धमाका हुआ था, जिसके फटने से मौलाना की मौत हो गई थी। इस केस में बिहार पुलिस की एसआईटी, एटीएस, सेंट्रल आईबी जाँच में जुटे हुए हैं।

10 जून: अररिया में झोले में रखा बम फटा

घटना अररिया जिले के बैरगाछी थाना क्षेत्र के अंतर्गत भुवनेश्वरी रामपुर गाँव की है। वहाँ 10 जून की शाम को आम के बगीचे के पास इतना जोरदार धमाका हुआ कि मोहम्मद अफरोज नाम का शख्स बुरी तरह घायल हो गया। बाद में बताया गया कि अफरोज झोले में बम ले जा रहा था। लेकिन सरिया से टकराकर वह उसके हाथ में ही फट गया। दो जिंदा बम भी बरामद किया गया था।

17 जून: रेलवे जंक्शन पर हुआ विस्फोट

धमाका दरभंगा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर हुआ। पड़ताल में पुलिस ने पाया कि दरभंगा के मोहम्मद सुफियान के लिए सिकंदराबाद से एक रजिस्टर्ड पार्सल आया था। उसी में 17 जून की दोपहर करीब 3.25 पर विस्फोट हुआ। मौके पर पहुँची पुलिस ने आग बुझा दी और घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। लेकिन कपड़ों के बीच रखे गए विस्फोटक को देख पुलिस ने इस मामले में अपनी जाँच शुरू कर दी। इस संबंध में दरभंगा जीआरपी की एक विशेष टीम सिकंदराबाद गई। वहाँ लगातार विभिन्न बिंदुओं पर जाँच की गई। इस मामले में दरभंगा जीआरपी की टीम सिकंदराबाद जीआरपी पुलिस के साथ मिलकर पड़ताल में जुटी है।

20 जून: सिवान में मस्जिद के पीछे विस्फोट

बिहार के सिवान में हुसैनगंज थाना क्षेत्र के जुड़कन गाँव में 20 जून को मस्जिद के पीछे जबरदस्त ब्लास्ट हुआ। जाँच में सामने आया कि घटना के समय विनोद माँझी अपने बेटे सत्यम को लेकर गाँव की दुकान पर बिस्किट खरीदने गए थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात सगीर साई नाम के व्यक्ति से हुई और उसने एक एक झोला दे दिया। सगीर ने किसी व्यक्ति का नाम लेते हुए कहा कि वह आएगा तो ये झोला उसे दे देना है। इसी बीच झोले में रखा बम ब्लास्ट हो गया। दोनो पिता-पुत्र अब अस्पताल में हैं। पुलिस को सगीर की तलाश है।

बता दें कि 15 दिन के भीतर हुई इन घटनाओं से आसपास के इलाकों में दहशत है। पुलिस अब तक इनकी गुत्थी सुलझाने में विफल रही है। सवाल है कि चलते-फिरते लोगों के पास बम आ कहाँ से रहे हैं? विस्फोटक पदार्थों को लेकर इस तरह खुले में लेकर कैसे घूम रहे हैं? उक्त सारी घटनाएँ आम जन को न केवल डराती हैं बल्कि सवाल खड़ा करती हैं कि क्या ये धमाके किसी चेन का हिस्सा तो नहीं हैं? इनके पीछे आतंकी या घुसपैठियों का हाथ तो नहीं? बांका ब्लास्ट के बाद तो कुछ मीडिया रिपोर्टों में बांग्लादेशी कनेक्शन की आशंका जताते हुए इस मामले की जाँच NIA को सुपुर्द करने की संभावना भी जताई गई थी।

फैलने दिया ‘जय श्री राम’ वाला झूठ, यूपी पुलिस के 26 मेल में से एक का भी जवाब नहीं: गाजियाबाद मामले में ट्विटर को फिर जाएगा नोटिस

ट्विटर के रवैये से उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस नाराज़ है। लोनी थाने में अब्दुल समद नामक बुजुर्ग ने जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने का आरोप लगाया, जो झूठा निकला। इस मामले में पुलिस अब ट्विटर को दूसरा नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है। ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक (MD) मनीष माहेश्वरी ने पहली नोटिस के जवाब में कहा है कि वो पूछताछ के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर उपलब्ध हैं। MD माहेश्वरी ने कहा कि इस पूरे प्रकरण से Twitter का कोई लेनादेना नहीं है।

Twitter के जवाब से गाजियाबाद पुलिस संतुष्ट नहीं है और इसीलिए अब फिर से नोटिस भेजा जाएगा। शनिवार (जून 19, 2021) को गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर को कुछ सवालों की सूची भेजी थी, लेकिन अब ट्विटर ने एक दूसरी ईमेल आईडी भेजी है। अब इस ईमेल पर सवाल भेजे जाएँगे। गाजियाबाद पुलिस ने कहा है कि पिछले 1 साल में ट्विटर को 26 इमेल्स भेजे गए, लेकिन उनमें से एक का भी जवाब नहीं आया।

गाजियाबाद में इस मामले में हुई FIR में ट्विटर का नाम भी शामिल है, जिसे इस घटना का फैक्ट-चेक किए बिना अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से झूठ को फैलने दिया। गाजियाबाद के एसपी अमित पाठक ने बताया कि बुलंदशहर के रहने वाले बुजुर्ग पीड़ित ने जून 7, 2021 को दर्ज कराई गई FIR में कहीं भी जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने का उल्लेख नहीं किया है। आरोपितों में मुस्लिम भी थे और ये झगड़ा ताबीज को लेकर हुआ।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ ट्विटर ही भारत में दादागिरी के सहारे अपना नैरेटिव फैलाना चाहता है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप्प जैसे प्लेटफॉर्म्स को भी 401 इमेल्स भेजे गए हैं, जिनमें से 246 मेल का जवाब मिला तो 155 इमेल्स को लेकर कोई प्रत्युत्तर नहीं दिया गया। ऊपर से जिनका जवाब आता है, उसमें 90 दिन लगा दिए जाते हैं। फेसबुक को भेजे गए 255 में से 177 मेल्स का जवाब आया। इंस्टाग्राम को 98 ईमेल भेजे गए थे, जिनमें से मात्र 28 का ही जवाब दिया गया।

गाजियाबाद पुलिस भी समझती है कि ट्विटर इस बार भी आनाकानी में लगा रहेगा और समय खपाते रहेगा, इसीलिए अन्य कानूनी उपायों पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है। उधर इसी मामले में सपा नेता उम्मेद पहलवान को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उसने ही बुजुर्ग से पहली बार फेसबुक लाइव वीडियो के जरिए झूठा बयान दिलवाया था। उम्मेद के वकील अनीस चौधरी ने कोर्ट में पुलिस के पास कोई सबूत न होने की बात कहीं, लेकिन उनकी दलीलें काम न आईं।

उम्मेद पहलवान ने अब सारा ठीकरा बुजुर्ग के ऊपर फोड़ते हुए कहा है कि उसने ही झूठ बोला था। क्षेत्र में अशांति फैला कर वो इसका राजनीतिक लाभ लेना चाहता था। उसके खिलाफ IPC की धारा 153ए (धर्म एवं वर्ग के आधार पर दो समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 295ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य, जिसका उद्देश्य किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वास का निरादर करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करना है), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझ कर किया गया अपमान) और 505 (सार्वजनिक व्यवधान) सहित कई धाराएँ लगाई गई हैं।

इन सबके बावजूद एक विवादास्पद कदम उठाते हुए माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने कुख्यात कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के ट्विटर हैंडल को सत्यापित करते हुए ब्लू टिक मार्क दे दिया है। 16 हजार से अधिक फॉलोवर वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की कर्नाटक इकाई के हैंडल को अब ट्विटर द्वारा ‘ब्लू टिक’ दे दिया गया है। PFI पर भारत में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने और देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़काने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

इधर सिद्धू ने मंत्री पद ठुकरा CM अमरिंदर को बताया ‘झूठा’, उधर अमृतसर में केजरीवाल ‘गो बैक’ के पोस्टर

पंजाब कॉन्ग्रेस में बगावत कई दिनों के मंथन के बाद भी सुलझती नहीं दिख रही है। आलाकमान की कमिटी ने कई दिनों तक राज्य के सभी विधायकों और सांसदों से बातचीत की, लेकिन हाल जस का तस है। अब नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह हर दिन झूठ बोलते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब का सिस्टम राज्य के दो ताकतवर परिवार चला रहे हैं और इसी में बदलाव लाने के उद्देश्य से वो राजनीति में आए हैं।

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को दिए गए इंटरव्यू में सिद्धू ने दावा किया कि उन्होंने राज्य में मंत्री का पद का ऑफर ठुकरा दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि पंजाब के दो ताकतवर परिवार अपना हित साधने के लिए विधायिका को बदनाम कर रहे हैं और राज्य के हित को ताक पर रख रहे हैं। सिद्धू का इशारा बादल परिवार और पटियाला राजघराने की तरफ था। उन्होंने दावा किया कि प्रशांत किशोर ने उनसे 60 बार मुलाकात की थी, तब जाकर उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया था।

उन्होंने कहा, “मैंने प्रशांत किशोर को कह दिया था कि मेरा झुकाव पंजाब की तरफ है। जिन 56 सीटों पर मैंने चुनाव प्रचार किया, उनमें से 54 पर पार्टी को जीत मिली। 10 सालों में रेत की नीलामी में मात्र 10 करोड़ रुपए ही जमा किए गए, जबकि पंजाब में 3 बड़ी नदियाँ हैं। ये रुपया आखिर जा कहाँ रहा है? मैंने कैप्टेन की सरकार से कहा कि वो रेत का दाम तय कर के इसे सरकारी दर पर बेचे, लेकिन सिस्टम ने मुझे ना कह दिया।”

बता दें कि पंजाब कैबिनेट में सिद्धू को रिन्यूएबल एनर्जी ऐंड पावर विभाग का मंत्री बनाया गया था। सिद्धू ने कहा कि पंजाब के विकास को लेकर उनके प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने ये कदम उठाया। उन्होंने कहा कि लोगों को भ्रमित किया गया है। साथ ही पूछा कि पंजाब में अब तक बिजली सस्ती क्यों नहीं हुई? उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री आवास बुला कर उन्हें मंत्रीपद की पेशकश की गई, लेकिन वो पद की इच्छा नहीं रखते हैं।

उन्होंने दो कॉन्ग्रेस विधायकों के बेटों को सरकारी नौकरी देने का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने आलाकमान की कमिटी के सामने अपनी बात रख दी गई। कैप्टेन अमरिंदर ने कहा था कि सिद्धू उप-मुख्यमंत्री और गृह मंत्रालय चाहते हैं, जिसके जवाब में सिद्धू ने सीएम अमरिंदर को झूठा बताते हुए कहा कि उन्होंने AAP के साथ भी उन्हें जोड़ा था, पर साबित नहीं कर पाए। उन्होंने ड्रग्स और कर्जमाफी पर राज्य सरकार से रिपोर्ट कार्ड माँगा।

उधर AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के अमृतसर दौरे से पहले वहाँ यूथ कॉन्ग्रेस ने ‘केजरीवाल वापस जाओ’ के पोस्टर पूरे शहर में लगवा दिए हैं। पूर्व आईजी कुँवर विजयप्रताप सिंह के AAP में शामिल होने की संभावना है। अमृतसर में ‘केजरीवाल पहले दिल्ली सुधारो’ लिखा हुआ है। इधर अकाली दल ने बसपा के साथ गठबंधन किया है। अकाली दल और कॉन्ग्रेस की लड़ाई में भाजपा और AAP राज्य में पाँव जमाने में लगी है।

उधर सिद्धू को अलग-थगल करने के लिए अब सीएम अमरिंदर अपने पुराने विरोधी और पूर्व पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा के साथ नजदीकी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बाजवा से मुलाकात की बात कही, लेकिन बाजवा सिद्धू की तारीफ़ करने में लगे हैं। उन्होंने सिद्धू को ‘बड़ा भाई’ बताते हुए कहा कि सभी चाहते हैं कि उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिले, लेकिन शीर्ष तक पहुँचने में समय लगता है। बता दें कि हाल ही में सीएम अमरिंदर ने AAP के 3 निलंबित विधायकों को पार्टी में शामिल कर अपने खेमा मजबूत किया।

13 साल की बच्ची को अगवा कर इस्लाम कबूल करवाया, 4 बच्चों के बाप शाहिद से निकाह

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की एक और घटना प्रकाश में आई है। गुजरांवाला में पिछले माह एक 13 साल की नाबालिग का अपहरण हुआ था। बच्ची के माता-पिता रो रोकर उसकी वापसी की माँग कर रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि उनकी बेटी इस्लाम कबूल कर चुकी है और मुस्लिम व्यक्ति से उसका निकाह हो गया है।

वायस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी, के अकाउंट पर इस संबंध में एक क्लिप शेयर की गई है। इसमें लिखा है कि नाबालिग का अपहरण कर उससे जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया और बाद में 4 बच्चों के पिता से निकाह के लिए मजबूर किया गया। क्लिप में नाबालिग की माँ रो रोकर अपनी बेटी की बात बता रही है। वहीं पिता बता रहे हैं कि कैसे सद्दाम नाम के एक शख्स ने कुरान पाक की कसम खाकर उनकी बेटी को काम पर लगवाया। लेकिन बाद में उसका अपहरण कर लिया गया।

वीडियो पिता बताते हैं कि सद्दाम ने उनसे कहा, “मेरे पास वर्कर कम हैं। अपनी बेटी को मेरे साथ भेज दिया करें।” लड़की के पिता ने सद्दाम को मना किया कि ऐसे सही नहीं लगता है। इस पर सद्दाम ने कहा कि जैसे उसकी चार बेटियाँ हैं, वैसे ही वो उनकी बेटी को रखेगा। इसके बाद भी पिता नहीं माने। सद्दाम अगली बार लड़की की माँ से मिला और कुरान पाक की कसम खाई और कहा, “जैसे मेरी 4 बेटी है, उसी तरह ये भी मेरी 5वीं बेटी है।”

क्लिप में बताया गया है कि 20 मई 2021 को नाबालिग काम पर गई, लेकिन दोबारा वापस घर पर नहीं आ पाई। घरवालों ने पुलिस में शिकायत लिखवाई। साथ ही सद्दाम से पूछा। लेकिन उसने अंजान बनकर मामले से पल्ला झाड़ लिया। बाद में पुलिस ने बताया कि उनकी बेटी दारुल अमान में है और उसने इस्लाम कबूल कर शाहिद से निकाह कर लिया है।

लड़की के पिता कहते हैं कि बेटी से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। उन्हें नहीं मालूम कि बेटी जिंदा है या मार दी गई। वहीं लड़की की माँ ने बताया, “उसके दादा का देहांत हो गया है। इस बात की जानकारी भी उसे दी गई लेकिन इस पर उसने (लड़की) ने कहा कि ऐसा सोच लें कि जहाँ दादा चले गए हैं, वहीं मैं भी चली गई हूँ।”

गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान में एक हिंदू लड़की के अपहरण का मामला प्रकाश में आया था। वहाँ एक नाबालिग हिंदू लड़की को इ्स्लामी कट्टरपंथियों ने किडनैप कर 4 दिन तक उसके साथ गैंगरेप किया था। बाद में बताया गया था कि जब बच्ची का रेप किया जा रहा था, तो वो कलमा पढ़ रही थी। बलात्कारियों का कहना था कि वो कलमा पढ़ चुकी है, इसलिए उसे अब काफिरों (अपने हिंदू माँ-पिता) के पास लौटने का कोई अधिकार नहीं है। रेप पीड़िता बच्ची को इन्हें ही सौंप दिया जाए।

अब लक्षद्वीप पर पकड़ा गया PTI का झूठ, कहा था- केरल की जगह कर्नाटक हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आने का प्रस्ताव

न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की एक और फेक न्यूज पकड़ी गई है। उसने दावा किया था कि लक्षद्वीप प्रशासन ने केरल हाईकोर्ट की जगह कर्नाटक हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। लक्षद्वीप के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर अस्कर अली ने इसे ‘निराधार और गलत’ बताया है।

पीटीआई ने रविवार (20 जून 2021) को दावा किया कि लोगों के विरोध को देखते हुए लक्षद्वीप प्रशासन ने हाईकोर्ट का अधिकार क्षेत्र कर्नाटक शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा है। अपने दावे को पुख्ता करने के लिए उसने ‘अधिकारियों’ का हवाला दिया। समाचार एजेंसी ने बताया कि केरल उच्च न्यायालय में लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ कई याचिकाएँ दाखिल की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पटेल और पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन की कथित मनमानी के खिलाफ 11 रिट याचिका सहित 23 आवेदन दायर किए गए हैं।

हालाँकि, पीटीआई का यह फेक दावा ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने इसका खंडन किया। उन्होंने लक्षद्वीप के कलेक्टर एस अक्सर अली का हवाला दिया, जिन्होंने पीटीआई की कहानी को पूरी तरह से निराधार और सच्चाई से कोसों दूर बताया है।

फेक न्यूज और पीटीआई

समाचार एजेंसी पीटीआई का झूठी और भ्रामक खबरें फैलाने लंबा इतिहास रहा है। इस साल अप्रैल, 2021 में महामारी के बीच पीटीआई ने दावा किया था कि दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण 25 लोगों की मौत हो गई। एक ट्वीट में, पीटीआई ने कहा कि सूत्रों ने उसे बताया था कि 25 ‘बीमार’ मरीजों की मौत ‘लो प्रेशर ऑक्सीजन’ के कारण हुई थी। उसका यह दावा झूठा निकला। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक ने स्पष्ट किया कि ऑक्सीजन की कमी के कारण कोई मौत नहीं हुई थी।

इससे पहले अगस्त 2020 में पीटीआई को भारत में चीनी कोरोना वायरस के प्रसार पर प्रधानमंत्री मोदी को गलत तरीके से कोट करते हुए पकड़ा गया था। इस गलत ट्वीट का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस ने पीएम मोदी के बारे में झूठ फैलाने के लिए किया था। इसके फेक निकलने पर कॉन्ग्रेस ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया था।

अक्टूबर 2020 में पीटीआई के साथ चीनी राजदूत के इंटरव्यू के बाद पब्लिक ब्रॉडकास्टर प्रसार भारती ने भी सख्त रुख दिखाया था। उस दौरान पीटीआई पर चीनी प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने का आरोप लगा था।