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‘एक बार तो अल्लाह भी माफ कर देता है…’: नोमान इलाही के लिए भी चाहिए ‘माफी’, ISI जासूस के कैराना से पानीपत तक के लिंक ऑपइंडिया ने खँगाले

छोड़ दो बच्चा है। पता नहीं क्या फितूल आ गया उसके। एक बार तो अल्लाह ताला भी माफ कर देता है। अगर नहीं छोड़ते तो रोटी कपड़ा तो देगी उसे सरकार?

ये बात ISI जासूस नोमान इलाही के लिए ऑपइंडिया से कैराना की एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला ने कही। इलाही का घर कैराना के बेगमपुरा इलाके में है। बुजुर्ग महिला हमें इलाही के तालाबंद घर के बाहर ही मिली थीं।

कैराना, उत्तर प्रदेश की वह जगह है जो सुर्खियों में गलत वजहों से ही आती है। अभी हरियाणा के पानीपत से नोमान इलाही की गिरफ्तारी ने उसे चर्चा में ला दिया है। 2014 में यह जगह हिंदू व्यापारियों की हत्या और 2016 में हिंदुओं के पलायन को लेकर चर्चा में आया था। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनने के बाद इस माहौल में बदलाव आया और पलायन कर चुके कई हिंदू फिर से वापस लौटे हैं।

नोमान इलाही की हकीकत जानने के लिए ऑपइंडिया के रिपोर्टर दिल्ली से करीब 125 किलोमीटर दूर कैराना तक गए। लोगों से पूछते-पूछते कैराना के उस बेगमपुरा तक भी पहुँचने में कामयाब हुए. जहाँ नोमान इलाही का घर है।

मैं बाहर नहीं आ सकती, पर्दा है: नोमान इलाही की पड़ोसन

मिश्रित आबादी के बीच एक संकरी गली में नोमान इलाही के घर के दरवाजे पर ताला लटका हुआ था। हमने पड़ोसियों का दरवाजा खटखटाया। एक महिला ने नाम न बताते हुए जालीदार दरवाजे के अंदर से (पहचान छिपाते हुए) कहा, “इनके सारे काम गलत हैं। ये किसी के पैसे लेकर भागते हैं तो किसी का कुछ। इन लोगों से हमारा कोई मतलब नहीं है। ये कई सालों से यहाँ नहीं रहते हैं।” बाहर आकर बात करने के अनुरोध पर महिला ने कहा, “मैं बाहर नहीं आ सकती। पर्दा है। मैं अपना नाम नहीं बताऊँगी। इसे (नोमानी) खत्म कर दीजिए या जेल में डाल दीजिए।”

नोमान इलाही की गली में सन्नाटा, कोई पहचान बताने को तैयार नहीं

जिस गली में नोमान इलाही का घर है, सन्नाटा पसरा हुआ था। लोग बात करने से बच रहे थे। अपनी पहचान भी नहीं बता रहे थे। ऐसी ही एक महिला ने अपना नाम न बताते हुए कहा, “करीब 2 साल से नोमान के घर पर ताला लगा है। इसके भाई मजदूरी करते हैं और बहनों की शादी हो चुकी है। नोमान जब यहाँ रहता था तो बहुत अच्छा था बाहर जाने के बाद पता नहीं।” इस दौरान अन्य महिलाएँ अपने खिड़कियों से झाँक रहीं थी। लेकिन कैमरा सामने आते ही घर के अंदर चली जा रहीं थीं। इसी बीच एक युवक ने कहा, “नोमान के कारण कैराना बदनाम हुआ है। उसने जो भी किया है, गलत किया है।”

नोमान इलाही के लिए माफी चाहती हैं बुजुर्ग महिला

नोमान के घर के पास हाथ में चिप्स लिए खड़ी एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “जब यहाँ रहता था तो अच्छा था। अब पता नहीं। जैसा उसने किया है, वैसा वह भरेगा। वह एक-दो बार पाकिस्तान गया होगा। उसके वहाँ रिश्तेदार हैं।” इस महिला का यह भी कहना था कि उनके रिश्तेदार भी पाकिस्तान में रहते हैं, लेकिन वे कभी गईं नहीं, क्योंकि पासपोर्ट नहीं बन सका। इसी बुजुर्ग महिला ने नोमान इलाही को माफ कर देने की बात की, जिसका हमने अपनी रिपोर्ट की शुरुआत में जिक्र किया है। उन्होंने यह भी बताया कि नोमान की गिरफ्तारी के बाद इस गली में लोगों का आना बढ़ गया है। इसी दौरान नोमान के घर के सामने वाले मकान में मौजूद एक लड़के ने बताया, “वह (नोमान इलाही) जब भी यहाँ आता था तो अकेला ही घर में रहता था और फिर ताला लगाकर चला जाता था।”

जिस मस्जिद में जाता था नमाज पढ़ने, उसके इमाम बोले- मैं नोमान इलाही को नहीं जानता

हमने गली के सामने वाली मस्जिद के उस इमाम से भी बात करने की कोशिश की जहाँ नोमान इलाही नमाज पढ़ने के लिए जाता था। लेकिन मस्जिद के इमाम ने कैमरे के सामने आने से इनकार कर दिया। इमाम शहजाद ने कहा, “मैं उसे नहीं जानता। उसने गलत किया है। उसे सजा मिलनी चाहिए।”

इसी मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले दानिश ने बताया, “नोमान ने शहर का नाम बदनाम किया है। पहले (जब वह कैराना रहता था) वह अक्सर नमाज के लिए मस्जिद आता था। मैंने उसे देखा है। अब वह अपनी बहन के यहाँ पानीपत रहता है। इसका बाप भी नकली पासपोर्ट बनाने का काम करता था। उसने देश के साथ गद्दारी की है। उसे फाँसी की सजा होनी चाहिए।” वहीं बैठे एक बुजुर्ग ने कहा, “मैं उसे नहीं जानता। लेकिन उसे अपने किए की सजा जरूर मिलनी चाहिए।”

सपा राज में ‘मिनी पाकिस्तान’ कहलाता था कैराना

कैराना व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रदीप गोयल ने बताया कि सपा सरकार में कैराना ‘मिनी पाकिस्तान’ के नाम सा जाना जाता था। योगी सरकार के बाद छवि सुधरी है। लेकिन नोमान की गिरफ्तारी ने फिर से कैराना की छवि को धूमिल किया है।

हमें देखते ही भड़क उठी नोमान इलाही की बहन

नोमान इलाही की गिरफ्तारी पानीपत से हुई है। यहाँ के सेक्टर-29 स्थित मोहन नगर में वह अपनी बहन के घर रहता था। यहाँ हमें कैमरा के साथ देखते हुए नोमान इलाही के रिश्तेदार भड़क उठे। करीब 75-80 गज के पुराने से मकान के फर्श पर बैठी नोमान की बहन जीनत ने कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई घर में अंदर आने की। किससे पूछकर घर के अंदर आए। हमें किसी से बात नहीं करनी। अपना कैमरा बंद करो।”

हमने नोमान के जीजा इरफान से बात करने की कोशिश की तो उसने कहा कि हम मीडिया से तंग आ चुके हैं। मीडिया पूछती कुछ है और दिखाती कुछ है। हमें किसी से बात नहीं करनी। उसने कहा, “अब हमारा नोमान से कोई नाता नहीं है। उसने हमारी 35 साल की कमाई हुई इज्जत को मिट्टी में मिला दिया है।”

उल्लेखनीय है कि 3 बहन और 3 भाइयों में नोमान सबसे छोटा है। उसका निकाह नहीं हुआ है। उसका जीजा इरफान पानीपत में कार धुलाई सेंटर के साथ साथ बाइक लेमिनेशन और लकड़ी का भी काम करता है।

‘घास भारत का खा रहा, दूध पाकिस्तान में दे रहा’

जिस गली में नोमान की बहन का घर है, उसके बाहर दुकान करने वाली एक महिला ने ऑपइंडिया को बताया, “वह कभी-कभी बीड़ी का बंडल लेने के लिए दुकान पर आता था। हमें कभी शक ही नहीं हुआ कि वह ऐसा भी कुछ करता है। अगर वह गुनहगार है तो कानून उसे सजा दे।”

पड़ोस की एक अन्य लड़की का कहना था कि यदि उनलोगों को पता होता तो वे पहले ही नोमान इलाही की खबर पुलिस को देकर उसे पकड़वा देते। उसने कहा, “ऐसे बंदे तो गोली मार देनी चाहिए। घास भारत का खा रहा है और दूध पाकिस्तान में दे रहा है।”

‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू होने के 10 घंटों में ही भारत ने हवाई हमलों से तोड़ दी कमर, घुटने पर आ गया था पाकिस्तान: जानिए फौजी ठिकानों पर हमलों के बाद क्यों माँगने लगा सीजफायर की भीख?

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसके बारे में हर दिन नई-नई बातें सामने आ रही हैं। ये ऑपरेशन कितना कामयाब रहा और इसे कैसे अंजाम दिया गया, इसकी जानकारी हाल ही में स्ट्रैट न्यूज ग्लोबल पर नेशनल सिक्योरिटी एनालिस्ट नितिन ए गोखले की एक रिपोर्ट से मिली। इस रिपोर्ट में 10 मई को 10 घंटे तक चले भारत के हवाई हमलों का पूरा ब्योरा है।

ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेनाओं द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 हिंदुओं की जान चली गई थी। पहलगाम आतंकी हमले को पाकिस्तान बेस्ड आतंकी संगठन लश्कर ए तैय्यबा के मुखौटा संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ)’ ने अंजाम दिया था। उसने इस हमले की जिम्मेदारी भी ली थी। इस हमले के बाद भारत ने युद्ध जैसी तैयारियाँ की और फिर पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकी कैंपों पर सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया।

भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में हमला किया और कई आतंकी लॉन्च पैड्स को तबाह कर दिया, जिसमें 100 से अधिक आतंकी भी मारे गए। ये हमला आतंकी ठिकानों पर थी, न कि आम जनता या पाकिस्तानी फौजी ठिकानों पर। हालाँकि पाकिस्तान ने आतंकी ठिकानों पर हमलों को खुद पर हमले की तरह लिया और भारत पर जवाबी हमले की तैयारी की। पाकिस्तान ने पूरी ताकत से भारत पर मिसाइल और ड्रोन्स से हमला बोला, लेकिन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने उन हमलों को बुरी तरह से नाकाम कर दिया।

पाकिस्तानी हमलों के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर का दूसरा हिस्सा शुरू किया। 10 मई को रात 2.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक भारत ने जवाबी हमले किए और पाकिस्तानी एयर डिफेंस नेटवर्क की कमर तोड़ दी। इस बार भारत ने पाकिस्तान के अहम फौजी ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके कुछ ही घंटों के भीतर पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए और सीजफायर की रहम माँगने लगा।

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता सिर्फ भारत के हमलों की ताकत और पैमाने की बात नहीं है, बल्कि एक बेहद कड़े संदेश की तरह भी रहा, जो सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि उसके समर्थकों तक भी गया। मैसेज साफ था- भारत अब आतंकी हमलों को चुपचाप सहन नहीं करेगा। इस ऑपरेशन की सफलता से साफ है कि भारत ने अपनी रक्षा, जवाब देने की नीति और दुश्मनों को तबाह करने की रणनीति को बदला है, जो उसके दुश्मनों की साँसे रोक देने वाला है।

अमेरिका की चेतावनी और भारत का जवाब

ऑपरेशन सिंदूर के पहले चरण के बाद 9 मई की रात को एक बड़ा घटनाक्रम शुरू हुआ। रात करीब 10:30 बजे अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान कुछ ही घंटों में बड़ा हमला करने वाला है।

पीएम मोदी का जवाब साफ और सख्त था। भारत न सिर्फ हमला झेलने को तैयार है, बल्कि उसका जवाब और तेजी से देगा। यह बात पहले ही पहलगाम हमले के बाद सार्वजनिक तौर पर कही जा चुकी थी, लेकिन वेंस का फोन अंतिम इशारा था।

इसके बाद भारत के युद्ध परिषद (War Council) की बैठक हुई। बैठक में एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुख आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी शामिल हुए। बैठक में हमले की रणनीति पर बात हुई। पीएम मोदी ने साफ निर्देश दिए कि अब सिर्फ योजना नहीं बनानी, बल्कि पाकिस्तान के हमलों का करारा जवाब देना है और उसकी ताकत को पूरी तरह खत्म करना है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद ये नतीजे मिले भी।

पाकिस्तान का हमला, भारत का करारा जवाब

10 मई की रात 1:30 बजे पाकिस्तान ने अपनी चाल चली। उसने भारत के उत्तरी और पश्चिमी हवाई अड्डों पर बड़ा हमला किया। लेकिन भारत के मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम, खासकर आदमपुर जैसे ठिकानों पर तैनात S-400 ने ज्यादातर हमलों को नाकाम कर दिया। उन्होंने न सिर्फ पाकिस्तान से आने वाली मिसाइलों-ड्रोन्स को ट्रैक किया, बल्कि उन्हें नष्ट भी कर दिया। भारत इस हमले के लिए पहले से ही तैयार था और उसकी यह तैयारी पूरी तरह से रंग लाई।

…और फिर भारत का जवाबी हमला शुरू

पाकिस्तान के हमलों के बाद भारत ने जवाबी हमला बोला। सुबह 2:30 बजे भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस, स्कैल्प और क्रिस्टल मेज मिसाइलों के साथ-साथ स्वदेशी हारोप और नगास्त्र जैसे हथियारों से हमला किया। ये हमले इतने सटीक और ताकतवर थे कि पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली शुरू से ही घुटनों पर आ गई। चूँकि पाकिस्तान को इस ताकतवर हमले का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था, ऐसे में पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों में अफरा-तफरी मच गई।

पहले ही हमले में रावलपिंडी के पास नूर खान हवाई अड्डा भारतीय हमलों का निशाना बना, जो पाकिस्तान की फौज के हेडक्वॉर्टर के करीब है। भारत ने पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में हमला किया, जिसे रोकने के लिए पाकिस्तान के पास कोई सिस्टम नहीं था, क्योंकि उसका एयर डिफेंस सिस्टम शुरू में ही बर्बाद हो चुका था। भारत के हमले में पाकिस्तान के दो मोबाइल कमांड सेंटर तबाह कर दिए गए, एक C-130 विमान जमीन पर ही नष्ट हो गया। दक्षिण में रहीमयार खान हवाई अड्डे का रनवे और बाकी हिस्से पूरी तरह बर्बाद कर दिए गए।

इसके साथ ही नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात भारतीय सेना ने M-777 हॉवित्जर तोपों और एक्सकैलिबर गोला-बारूद से पाकिस्तानी ठिकानों पर हमला किया, जिससे इस्लामाबाद पर और दबाव बढ़ गया।

भारत के हमले हुए और तेज, तो बढ़ गई पाकिस्तान में घबराहट

भारत यहीं नहीं रुका। दूसरी लहर के हमलों ने पाकिस्तान को और डराया। सरगोधा और मुरीदके जैसे F-16 स्क्वाड्रन तैनात की तैनाती वाले महत्वपूर्ण हवाई अड्डों को सटीक निशाना बनाया गया। पाकिस्तान में इतने गंभीर और अंदर तक जाकर किए गए हमलों की वजह से इस्लामाबाद से लेकर वाशिंगटन तक हड़कंप मच गया।

सुबह 9:30 बजे तक पाकिस्तान में घबराहट फैल चुकी थी। दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के जरिए बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि बात सिर्फ सैन्य हॉटलाइन पर होगी। इस बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर अमेरिकी अधिकारियों से बात कर रहा था और ये कह रहा था कि वो सीजफायर के लिए तैयार है।

हमलों के आखिरी चरण में भारत ने तोड़ी पाकिस्तानी डिफेंस की कमर

एक तरफ पाकिस्तान हमले रोकने के लिए भीख माँग रहा था और सीजफायर के लिए गिड़गिड़ा रहा था, तो भारत रुका नहीं था, बल्कि वो अपने ऑपरेशन के तीसरे और चौथे चरण को अंजाम दे रहा था। इस चरण में भारतीय बलों ने रफीकी, सुक्कुर, जैकोबाबाद, भोलारी, चुनिया, पसरूर, अरिफवाला और मुरिद जैसे हवाई अड्डों और रडार ठिकानों को निशाना बनाया। नूर खान पर बार-बार हमले से पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम बुरी तरह से चरमरा गया और वो अपनी रक्षा करने की जगह ऑपरेशनल तौर पर पंगु हो गया।

तड़के जनरल मुनीर ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फोन किया। अब तक पाकिस्तान को नुकसान की भयानकता समझ आ चुकी थी।

भारत का ‘अपर हैंड’ और पाकिस्तान ने पीछे खींचे कदम

भारत ने करीब दोपहर 12 बजे अपने हमले रोके। 12:30 बजे पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन 3:30 बजे तक बात नहीं हो पाई। भारत ने अपनी नीति के मुताबिक शाम 5 बजे से हमले रोक दिए, लेकिन यह तभी हुआ जब पाकिस्तान ने सैन्य हॉटलाइन के जरिए औपचारिक अनुरोध किया।

ऑपरेशन सिंदूर को शुरू और खत्म हुए दो हफ्ते बीत चुके हैं। बंदूकें खामोश हैं। जंग की आवाजें थम गई हैं, लेकिन इस ऑपरेशन ने वो कर दिखाया, जो कागजी कार्रवाई या बयानबाजी नहीं कर पाई। इसने साफ कर दिया कि भारत अब आतंकवाद का जवाब सिर्फ बयानों या आत्मरक्षा से नहीं देगा। अब वो आतंकी हमलों का करारा जवाब देगा और वो सिर्फ आतंकियों ही नहीं, आतंकियों के साथियों को भी बर्बाद कर देगा।

बता दें कि भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद से परेशान रहा है। ऑपरेशन सिंदूर एक साहसिक कदम है, जिसने साफ संदेश दिया कि भारत न सिर्फ अपनी रक्षा करेगा, बल्कि उकसावे का जवाब जोरदार तरीके से देगा। भले ही अभी सीजफायर (युद्धविराम) हो, भारत ने साफ कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है। अब कोई भी आतंकी हमला युद्ध माना जाएगा।

आतंकवाद पर कड़ा वार, शेरों की बढ़ती दहाड़ और ड्रोन उड़ाती महिलाएँ: PM मोदी ने 122वीं बार की ‘मन की बात’, ऑपरेशन सिंदूर पर बोले- ये सैन्य मिशन नहीं, भारत की बदलती तस्वीर है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (25 मई 2025) रेडियो शो ‘मन की बात’ के 122वें एपिसोड को संबोधित किया। ऑपरेशन सिंदूर के सफल होने के बाद ये उनका पहला रेडियो कार्यक्रम है। देश की जनता को संबोधित करते हुए इस दौरान उन्होंने देश के सैन्य मिशन पर बात की।

उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य मिशन नहीं है, ये हमारे संकल्प, साहस और बदलते भारत की तस्वीर है और इस तस्वीर ने पूरे देश को देश-भक्ति के भावों से भर दिया है, तिरंगे में रंग दिया है।”

पीएम ने कहा, “आज पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, संकल्पबद्ध है। आज हर भारतीय का यही संकल्प है, हमें आतंकवाद को खत्म करना ही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारी सेनाओं ने जो पराक्रम दिखाया है, उसने हर हिंदुस्तानी का सिर ऊँचा कर दिया है।”

पीएम मोदी ने एक बार फिर से देश को बताया कि किस सटीकता के साथ हमारी सेनाओं ने आतंकी मुल्क के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया। उन्होंने कहा कि भारत के द्वारा छेड़े गए ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया भर में आतंक के खिलाफ लड़ाई को एक नया विश्वास दिया है।

ऑपरेशन सिंदूर ने आत्मनिर्भर भारत के हथियारों और तकनीक की ताकत को भी प्रदर्शित किया है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में देशभक्ति की लहर तेज हुई है।

वह बोले कि इस ऑपरेशन ने लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई। लोग इसके बाद कविताएँ, संकल्प गीत लिखते दिखे। बच्चों ने ऐसी पेंटिंग बनाई जिनमें बड़े संदेश थे। देश के गाँव-कस्बों में तिरंगा यात्राएँ निकाली गईं।

पीएम मोदी ने इसके बाद महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के उस गाँव का भी जिक्र किया जो कुछ समय पहले नक्सल हिंसा के कारण बुनियादी चीजों से अछूता था। उन्होंने कहा कि माओवाद प्रभावित क्षेत्र काटेझरी में पहली बार बस सेवा शुरू होने से सामाजिक व आर्थिक विकास की नई उम्मीदें जगी हैं। साथ ही छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में शिक्षा के नतीजे बेहतर होने से भी सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं।

गुजरात की बात करते हुए उन्होंने कहा कि गिर वन्यजीव क्षेत्र में पिछले पाँच वर्षों में शेरों की संख्या 674 से बढ़कर 891 हो गई है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। इसके साथ ही, सिक्किम के ‘Crafted Fibers’ प्रोजेक्ट ने स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाकर सांस्कृतिक समृद्धि बढ़ाई है।

तेलंगाना की महिलाओं की प्रशंसा करते हुए, महिलाओं द्वारा ड्रोन तकनीक का उपयोग कर खेती में क्रांति लाने की बात कही, जबकि आयुर्वेद को वैश्विक मान्यता मिलने से परंपरागत चिकित्सा क्षेत्र को नई दिशा मिली है। साथ ही CBSE द्वारा ‘शुगर बोर्ड’ जैसी पहल से बच्चों में स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा दिया है।

इसके बाद उन्होंने योग दिवस पर बात की और याद दिलाया कि कैसे 21 जून 2015 को शुरू किए गए इस प्रयास पर लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम में उन्होंने गुजरात में पाँच सालों में बढी शेरों की संख्या का जिक्र किया।

‘एक ही धर्म (हिंदुओं को) के लोगों को चुन-चुन कर मारा’: मोदी सरकार के ऑल पार्टी मिशन पर गए शशि थरूर ने खोली पाकिस्तान की पोल, पहलगाम आतंकी हमले को रखा दुनिया के सामने

पहलगाम आतंकी हमले में हिंदुओं के नरसंहार को कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने दुनिया के सामने बयाँ किया। थरूर उस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, जिसे मोदी सरकार ने अलग-अलग देशों में भेजा है ताकि इस हमले और ऑपरेशन सिंदूर के रूप में भारत की प्रतिक्रिया के बारे में दुनिया को बताया जाए।

न्यूयॉर्क में भारतीय दूतावास में बोलते हुए थरूर ने आतंकियों के इरादों को पूरी दुनिया को बताया। शशि थरूर ने आतंकियों के इरादों को साफ करते हुए बताया कि आतंकियों ने पहले लोगों की धर्म की पहचान की और फिर सिर्फ उसी आधार पर उनकी हत्या की। जो हिंदू थे-वो मार दिए गए, जो मुस्लिम थे – उन्हें छोड़ दिया गया।

कश्मीर की तरक्की को रोकने की साजिश

शशि थरूर ने बताया कि इस हमले का समय और क्रूरता सोची-समझी थी, ताकि कश्मीर की बढ़ती साख को नुकसान पहुँचे। कश्मीर अब एक सुरक्षित और समृद्ध पर्यटन स्थल बन रहा है। उन्होंने कहा, “पिछले साल कश्मीर में अमेरिका के ऐस्पन, कोलोराडो से ज्यादा पर्यटक आए। यह सिर्फ सामान्य स्थिति नहीं, बल्कि समृद्धि का प्रतीक है।” अनुच्छेद 370 हटने के बाद मोदी सरकार के विकास कार्यों से कश्मीर में शांति और प्रगति दिख रही थी, जिसे आतंकी रोकना चाहते थे।

थरूर ने जोर देकर कहा कि यह हमला कोई सामान्य आतंकी घटना नहीं थी। यह सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ने की सुनियोजित कोशिश थी। उन्होंने कहा, “यह ऐसा नहीं था कि कोई बम धमाके में अंधाधुंध लोगों को मार रहा था। आतंकियों ने धर्म के आधार पर लोगों को चुना और उनकी हत्या की।”

सिर्फ हिंदुओं को निशाना बनाया गया

इस आतंकी हमले में मारे गए 26 लोगों में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक थे। शशि थरूर ने बताया कि सभी मृतक हिंदू थे और उन्हें उनके धर्म के कारण मारा गया। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जिसमें एक हिंदू प्रोफेसर ने इस्लामी कलमा पढ़कर अपनी जान बचाई, क्योंकि आतंकियों ने उन्हें मुस्लिम समझ लिया।

थरूर ने कहा, “कुछ मामलों में पति को गोली मारी गई और पत्नी को कहा गया कि वह जाकर दुनिया को बताए कि उसे उसके धर्म के कारण मारा गया।” फिर भी उन्होंने भारत की जनता की तारीफ की कि इस उकसावे के बावजूद देश में कोई जवाबी हिंसा नहीं हुई। उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि भारत में कोई जवाबी हिंसा नहीं हुई।” भारतीय समाज ने एकजुट होकर दुख और दृढ़ता दिखाई।

आतंकी संगठन ने ली जिम्मेदारी

आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने हमले के एक घंटे के भीतर इसकी जिम्मेदारी ले ली। थरूर ने कहा, “भारत को इस बात पर कोई शक नहीं था कि यह हमला कहाँ से हुआ।” हालाँकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया।

मोदी सरकार ने तुरंत एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाकर दुनिया के सामने भारत का पक्ष रखने का फैसला किया। थरूर इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। हालांकि कुछ विपक्षी नेताओं को इस प्रतिनिधिमंडल और थरूर जैसे नेताओं के चयन पर आपत्ति थी, लेकिन सरकार ने सभी विचारधाराओं को शामिल करके भारत की बात को और विश्वसनीय बनाया। ऑपरेशन सिंदूर के विवरण को वैश्विक मंचों पर प्रभावी ढंग से रखा गया।

पुलिस को देख भागे ‘लव जिहादी’, पैंट से गिरी पेन ड्राइव से सामने आया रेप-ब्लैकमेलिंग का नेटवर्क: सूफियान चला रहा था गैंग, MP के नागदा में भी टारगेट पर थी हिंदू लड़कियाँ

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा से लव जिहाद का मामला सामने आया है, पुलिस जाँच में खुलासा हुआ है कि कुछ युवक हिंदू नाम रखकर लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाते थे, फिर उनके साथ दुष्कर्म कर अश्लील वीडियो बनाते और बाद में उन्हें ब्लैकमेल करते थे।

इस मामले में पुलिस ने छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपित फरार है। गिरफ्तारी का यह मामला गुरुवार (22 मई 2025) की रात तब सामने आया, जब बिरलाग्राम थाना पुलिस की टीम बीसीआई परिसर के खंडहर क्षेत्र में गश्त कर रही थी।

वहाँ कुछ संदिग्ध युवक घूमते नजर आए जो पुलिस को देखकर भागने लगे। इसी दौरान उनके मोबाइल और पेन ड्राइव मौके पर गिर गए। जब इनकी जाँच की गई, तो उनमें कई लड़कियों के अश्लील वीडियो मिले। जिसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई जिसके बाद जाँच शुरू हुआ। पुलिस का मानना है कि अगर यह डिवाइस न मिलते, तो यह अपराध लंबे समय तक दबा रहता।

पकड़े गए आरोपितों में मुख्य आरोपित सूफियान इंदिरा कॉलोनी का निवासी है, जहाँ अन्य आरोपितों में सोहेल उर्फ वासीद, उस्मान, तौहिद और वीरू एक अन्य सोहेल शामिल हैं। सभी को शुक्रवार (23 मई 2025) को कोर्ट में पेश किया जाना था, लेकिन संभावित हमले की आशंका के चलते उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। कोर्ट ने सभी आरोपितों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जहाँ पुलिस अब इनसे पूछताछ कर रही है।

इस बीच बार एसोसिएशन की पुस्तकालय सचिव कांता सरोज ने जानकारी दी कि संघ ने निर्णय लिया है कि कोई भी वकील इन आरोपितों की पैरवी नहीं करेगा। साथ ही, यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा ताकि पीड़िताओं को शीघ्र न्याय मिल सके।

पुलिस की प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपित वीडियो बनाकर उन्हें पेन ड्राइव में सुरक्षित रखते थे ताकि मोबाइल चेकिंग के दौरान पकड़े न जाएँ। आरोपितों का दावा है कि उन्होंने वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड नहीं किए, लेकिन पुलिस हर पहलू से जाँच कर रही है।

एसपी प्रदीप शर्मा ने खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 10,000 रुपए का इनाम देने की घोषणा की है। मामले का खुलासा पुलिस की सतर्क गश्त के कारण संभव हो सका। फिलहाल, एक आरोपित अरुण वर्मा फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की एक टीम केदारनाथ भेजी गई है। पुलिस ने इस पूरे मामले में सुफियान पर तीन अपराध धारा 376 (2), 376(3), 376, 506,64 (2), 70(1), 351(3), 3(5), 66 में केस दर्ज किया है।

‘लव जिहादी’ पत्रकार उमर राशिद के खिलाफ NHRC ने लिया स्वत: संज्ञान, ‘द वायर’ से भी कई सवालों के जवाब माँगे: पीड़िता ने किया था मिलीभगत की ओर इशारा, कहा था- नहीं हो रही निष्पक्ष जाँच

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने ‘द वायर’ के पत्रकार उमर राशिद के खिलाफ स्वतः संज्ञान लिया है, जब एक वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में एक महिला ने उन पर गंभीर आरोप लगाए। आरोपों में बलात्कार, यौन शोषण, शारीरिक हमला, मानसिक उत्पीड़न, तथा धार्मिक और सांस्कृतिक अपमान शामिल हैं। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कदम उठाया है।

एनएचआरसी ने उमर रशीद के खिलाफ लगाए गए विस्फोटक आरोपों पर एटीआर माँगी

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए 5 जून 2025 तक कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह कदम इंस्टाग्राम पर वायरल हुए बयान की समीक्षा के बाद उठाया गया, जिसमें पत्रकार उमर राशिद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आयोग ने इन दावों को ‘गंभीर’ और ‘बेहद परेशान करने वाला’ करार देते हुए मानवाधिकार उल्लंघन की जाँच के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल किया है।

शिकायतकर्ता ने ‘द वायर’ की मिलीभगत की ओर इशारा किया

एनएचआरसी में दर्ज शिकायत में शिकायतकर्ता ने ‘द वायर’ के संपादकीय तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत में ‘द वायर न्यूज पोर्टल के प्रबंधन’ द्वारा की जा रही आंतरिक जाँच पर अविश्वास जताते हुए कहा गया है कि जाँच निष्पक्ष नहीं है और यह सिर्फ औपचारिकता भर है, जिसका उद्देश्य आरोपितों को बचाना है। साथ ही, शिकायत में हितों के टकराव और संगठन की छवि बचाने के लिए संभावित दबाव और दमन की भी आशंका जताई गई है।

एनएचआरसी ने उमर रशीद पर बलात्कार, यातना और जबरन गोमांस खिलाने के गंभीर आरोपों के संबंध में द वायर से जवाब माँगा

यह मामला ‘द वायर’ की संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लंबे समय से इस पोर्टल पर प्रतिगामी दृष्टिकोणों को ‘असहमति की राय’ के रूप में पेश करने के आरोप लगते रहे हैं। अब यह संस्थान एक कथित सीरियल यौन अपराधी को बचाने के आरोपों के चलते खुद जाँच के दायरे में है, जिससे उसकी नीयत और जवाबदेही दोनों पर संदेह गहराता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने ‘द वायर’ पोर्टल के मैनेजमेंट को निम्नलिखित प्रश्न जारी किए हैं।

पुलिस शिकायत के संबंध में:

क्या द वायर न्यूज़ पोर्टल के प्रबंधन ने आरोपित के खिलाफ लगाए गए यौन, शारीरिक और मानसिक शोषण के गंभीर आरोपों के जवाब में औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज की?

अगर कोई शिकायत दर्ज की गई थी, तो वह किस तारीख को दर्ज की गई थी और किस पुलिस स्टेशन में?

शिकायत दर्ज होने के बाद से संबंधित कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की है?

क्या अधिकारियों को बलात्कार और गंभीर शारीरिक हमले के गंभीर आरोपों के बारे में विशेष रूप से सूचित किया गया था, जैसा कि पीड़िता ने अपने वायरल सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है?

पीओएसएच जाँच के संबंध में:

क्या कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (पीओएसएच अधिनियम) के प्रावधानों के तहत द वायर न्यूज पोर्टल के प्रबंधन द्वारा औपचारिक जाँच शुरू की गई है?

यदि हाँ, तो जाँच की वर्तमान स्थिति क्या है? मामले को संभालने के लिए गठित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के सदस्य कौन हैं?

क्या शिकायतकर्ता/पीड़ित से आईसीसी ने संपर्क किया है, और जाँच के दौरान उसकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

इंस्टाग्राम पर आई गवाही से पूरे देश में गुस्सा फैल गया

एक अज्ञात महिला की वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में ‘द वायर’ के पत्रकार उमर राशिद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें यौन हिंसा, शारीरिक शोषण और मानसिक उत्पीड़न का विस्तृत विवरण शामिल है। महिला ने आरोप लगाया कि राशिद ने दिल्ली के लिब्रल मीडिया जगत में अपनी प्रभावशाली स्थिति का इस्तेमाल कर उसे फंसाया। वह बताती है कि राशिद ने प्रगतिशील राजनीति पर बातचीत और लोधी गार्डन में सैर जैसे प्रतीकात्मक इशारों के ज़रिए उसका विश्वास जीता और दावा किया कि उसने यही रणनीति कई अन्य महिलाओं के साथ भी अपनाई।

उसके अनुसार, भावनात्मक रूप से जुड़ने के बाद रिश्ता हिंसक और अपमानजनक बन गया। उसने आरोप लगाया कि उसे बार-बार बलात्कार, थप्पड़, लात मारने और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, विशेषकर तब जब वह भावनात्मक रूप से कमज़ोर अवस्था में होती थी।

उसने लिखा “जब मैं बीमार थी, तब उसने मेरा बलात्कार किया, जब मैंने उससे ऐसा करने से मना किया। उसने सुरक्षा का उपयोग करने से इनकार कर दिया। मैं क्लीनिक में गई, गर्भपात करवाया, परीक्षण करवाया।”

मानसिक उत्पीड़न और धार्मिक अपमान

पीड़िता ने बहुत भावुक होते हुए अपने साथ हुए अपमान की भी बात की, जिसमें उसके पैरों पर भीख माँगने के लिए मजबूर होना भी शामिल है, जबकि राशिद ने कथित तौर पर उसकी माँ के काल्पनिक यौन शोषण का विस्तृत विवरण दिया है।

उसने आगे आरोप लगाया कि राशिद ने उसे जबरदस्ती गोमाँस खिलाया, जबकि वह उसकी धार्मिक और व्यक्तिगत घृणा से पूरी तरह वाकिफ था। उसने कहा कि ऐसा उसने अपनी कश्मीरी मुस्लिम पहचान को स्थापित करने और उसे एक गैर-मुस्लिम महिला के रूप में अपमानित करने के लिए किया था। पीड़ित के मुताबिक “मैंने इसे उगल दिया, उसने मुझे इसे फिर से खाने को कहा, वह जानता था कि मुझे यह पसंद नहीं है।”

नेट FDI में गिरावट पर कॉन्ग्रेस और मीडिया ने फैलाया भ्रम: जानें 2014 से 2025 के बीच कैसे मजबूत हुई भारतीय अर्थव्यवस्था, मोदी सरकार के प्रयासों से विदेशी कंपनियों का विश्वास बढ़ा

कॉन्ग्रेस पार्टी और भारत के कई मीडिया संस्थानों ने शुक्रवार, (23 मई 2025) को देश में फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट (FDI) में आई ‘भारी’ गिरावट को लेकर रिपोर्ट्स की। इन रिपोर्टों में उन्होंने ऐसे दिखाया जैसे भारत में FDI का गिरना मतलब मोदी सरकार की नीतियों में बड़ी गड़बड़ी है जिसके कारण विदेशी कंपनियाँ अब विश्वास नहीं कर रहीं।

कॉन्ग्रेस की केरल इकाई ने मौके का फायदा उठाते हुए इस पर प्रतिक्रिया दी। एक ट्वीट में उन्होंने कहा, “भारत में विदेशी निवेशकों और देश के भीतर भारतीय निवेशकों के भरोसे में गिरावट एक गंभीर तस्वीर पेश करती है। सभी ने भारत से उम्मीदें छोड़ दी हैं, यह 11 वर्षों की विभाजनकारी राजनीति और अविवेकपूर्ण नीति निर्माण का नतीजा है।”

कॉन्ग्रेस के केरल हैंडल द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

वामपंथी प्रचार आउटलेट ‘द वायर’ से जुड़ी पत्रकार सीमा चिश्ती ने आरोप लगाया कि भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 96.5% की भारी गिरावट के साथ रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया है।

टीएमसी के पूर्व सांसद जवाहर सरकार, जिन्हें फर्जी खबरें फैलाने के लिए जाना जाता है, उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “विदेशी निवेशक संघियों, भक्तों और गोदी मीडिया के दुष्प्रचार से प्रभावित नहीं होते। वे निवेश से पहले देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का आँकलन करते हैं। मोदी के भारत में उनका विश्वास खत्म हो चुका है, यह नेट एफडीआई में आई भारी गिरावट से साफ झलकता है।”

नेट एफडीआई में 96% की गिरावट की खबर मुख्यधारा मीडिया में व्यापक रूप से छाई रही, लेकिन आम पाठकों को इसके प्रभावों और अर्थ को लेकर बहुत कम या कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कुछ रिपोर्टों में यह आरोप लगाया गया कि भारत की अर्थव्यवस्था गिरावट की ओर बढ़ रही है और मौजूदा मोदी सरकार के तहत आर्थिक प्रगति की कोई आशा नहीं बची है।

‘नेट एफडीआई’ में गिरावट के बारे में समाचार रिपोर्टों का स्क्रीनशॉट

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

इन्वेस्टोपेडिया के अनुसार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किसी कंपनी या सरकार द्वारा किसी विदेशी परियोजना या फर्म में किया गया दीर्घकालिक और महत्वपूर्ण निवेश होता है। भारत में इसका मतलब भारतीय कंपनियों में किया गया विदेशी निवेश है।

वित्तीय वर्ष 2014-2015 से भारत में FDI प्रवाह लगातार बढ़ा है। ऑपइंडिया ने RBI और PIB के आँकड़ों के आधार पर जो चार्ट तैयार किया है, उसके अनुसार 2014-2015 में भारत में FDI प्रवाह 45.15 बिलियन डॉलर (3.75 लाख करोड़) था, जो 2024-2025 में बढ़कर 81 बिलियन डॉलर (6.72 लाख करोड़) हो गया।

वर्ष दर वर्ष तुलना करें तो वित्तीय वर्ष 2015-2016 में FDI में 23.05% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 2024-2025 में यह वृद्धि 13.60% रही।

(स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रकाशित आंकड़े – यहाँ, यहाँ और यहाँ)

वित्तीय वर्ष 2022-2023 और 2023-2024 में शुद्ध एफडीआई में गिरावट देखी गई, हालाँकि इन वर्षों में सकल एफडीआई प्रवाह अभी भी महत्वपूर्ण था।

इसके बावजूद, कुल मिलाकर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मजबूत बना हुआ है और दीर्घकालिक प्रवृत्ति के अनुसार यह साल-दर-साल बढ़ रहा है, जो दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और बेहतर स्थिति में है।

आरबीआई के अनुसार, “लगभग सभी क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीके से 100% एफडीआई के लिए खोल दिया गया है। अब लगभग 90% एफडीआई स्वचालित मार्ग के तहत आता है। हाल के वर्षों में हमने रक्षा, बीमा, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, दूरसंचार और अंतरिक्ष जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उदारीकरण के कई उपाय लागू किए हैं, ताकि अर्थव्यवस्था को और अधिक खोला जा सके।”

‘नेट एफडीआई’ को लेकर विवाद

नेट एफडीआई वह अंतर होता है जो ग्रोस एफडीआई फ़्लो और भारतीय कंपनियों द्वारा किए गए विदेशी निवेश, विनिवेश तथा विदेशी संस्थाओं द्वारा धन की वापसी के बाद बचता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मई 2025 के लिए जारी अपने बुलेटिन में बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-2025 में शुद्ध एफडीआई 0.4 बिलियन डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2023-2024 में यह 10.1 बिलियन डॉलर था।

कुछ मीडिया रिपोर्टों ने इन दोनों आँकड़ों के बीच के अंतर को निकालते हुए दावा किया है कि नेट एफडीआई में 96.5% की गिरावट आई है, और इसे भारत की आर्थिक स्थिति में गंभीर गिरावट के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

आरबीआई द्वारा जारी मई 2025 बुलेटिन का स्क्रीनशॉट

जैसा कि दिए गए ग्राफ से स्पष्ट है, वित्तीय वर्ष 2024-2025 में ग्रोस एफडीआई पफ़्लो 81 बिलियन डॉलर रहा, जो कि 2023-2024 के 71.3 बिलियन डॉलर की तुलना में 13.6% अधिक है।

इसी समय अंतराल में भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी निवेश और विनिवेश में भी वृद्धि देखी गई। यह दर्शाता है कि भारतीय कंपनियाँ अब विदेशों में रणनीतिक निवेश और अधिग्रहण कर रही हैं, और भारत में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए भी निकालना आसान हुआ है, यह दोनों ही आर्थिक परिपक्वता और मजबूती के संकेत हैं।

RBI ने अपने बुलेटिन में बताया, “इस अवधि में नेट FDI फ़्लो में गिरावट अधिक प्रत्यावर्तन और बाहरी निवेश के कारण हुई, जो इस बात का संकेत है कि भारत एक परिपक्व बाजार बन चुका है, जहाँ विदेशी निवेशक आसानी से प्रवेश और निकास कर सकते हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की सकारात्मक स्थिति को दर्शाता है।”

निष्कर्ष

उल्लेखनीय ग्रोस एफडीआई फ़्लो भारत में निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है, जो इस तथ्य से और भी पुष्ट होता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 686.1 बिलियन डॉलर (56.95 लाख करोड़) है, जो 11 महीने से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी, उससे जुड़े पत्रकारों और मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र ने भारत में एफडीआई फ़्लो की साल-दर-साल वृद्धि की अनदेखी की। उन्होंने केवल शुद्ध एफडीआई में आई गिरावट को अलग-थलग करके प्रस्तुत किया और इसके आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था की नकारात्मक तस्वीर पेश करने की कोशिश की।

इन चुनिंदा और भ्रामक दावों के बावजूद, सच ये है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है और देश दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

अमेरिका में जिसने की 2 इजरायलियों की हत्या, उसके लिंक PM मोदी विरोधी गैंग से: वही नेविल राय सिंघम करता है फंडिंग जो भारत में चीनी प्रोपेगेंडा के लिए ‘न्यूजक्लिक’ को देता था पैसे

वाशिंगटन डीसी में बुधवार (22 मई 2025) को हमला हुआ, जिसमें इजरायली दूतावास में काम करने वाले 2 कर्मचारियों की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड ने पूरी दुनिया का ध्यान खीँचा है। इस हत्याकांड को इलियास रोड्रिगेज (31) ने अंजाम दिया, जब उसने कैपिटल ज्यूइश म्यूजियम के बाहर दोनों की हत्याएँ की और ‘फ्री, फ्री फिलिस्तीन’ के नारे लगाए। इस घटना ने न केवल इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव को बढ़ाया है, बल्कि भारत के खिलाफ भी एक गहरी साजिश की ओर इशारा किया है।

दरअसल, हमलावर रोड्रिगेज का कथित संबंध एक ऐसे संगठन से है, जो न सिर्फ इजरायल का कट्टर विरोधी है, बल्कि भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी अभियान चलाता रहा है। इस संगठन का नाम है पार्टी फॉर सोशलिज्म एंड लिबरेशन (पीएसएल), जिसके तार अमेरिकी करोड़पति और कथित चीनी समर्थक नेविल रॉय सिंघम और उसकी बीवी जोडी इवांस से जुड़े हैं।

रोड्रिगेज काफी समय से अमेरिकी नीतियों की खिलाफत करता रहा है, यहाँ तक कि उसने अपने पिता का भी विरोध किया था, जब वो इराकी सैनिक की वर्दी से मिनी झंडा लाए थे। रोड्रेगेज ने इसे अमेरिकी सैनिक ‘नरसंहारकारी साम्राज्यवादी युद्धों’ की ट्रॉफी करार दिया था। वो साल 2017-18 में शिकागो में एएनएसडब्ल्यूईआर कोएलिशन के प्रदर्शनों में भी शामिल रहा था।

इस हत्याकांड में इलियास रोड्रिगेज का नाम सामने आते ही पीएसएल सुर्खियों में आ गया। संगठन ने तुरंत सफाई दी कि रोड्रिगेज का उनके साथ संबंध 2017 में खत्म हो चुका था और इस हमले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। हालाँकि संदेह है कि रोड्रिगेज अभी भी पीएसएल का सक्रिय सदस्य हो सकता है।

भारत-अमेरिका दोस्ती के समर्थक और सीनेट इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कार्निन ने इस मामले में गहरी जाँच की माँग की है। कार्निन ने एटॉर्नी जनरल पामेला बोंडी और एफबीआई प्रमुख काश पटेल से पीएसएल और अन्य वामपंथी संगठनों की फंडिंग की जाँच करने को कहा है। उनका कहना है कि यह जानना जरूरी है कि कहीं ये संगठन घरेलू आतंकवाद को बढ़ावा तो नहीं दे रहे।

भारत के खिलाफ चलाता रहा है अभियान

पीएसएल और इसके सहयोगी संगठनों का भारत विरोध भी पुराना है। जून 2023 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की यात्रा पर गए थे, तब पीएसएल ने उनकी यात्रा का कड़ा विरोध किया था। संगठन ने अपनी एक्स पोस्ट में छह कारण गिनाए थे, जिनमें मोदी सरकार पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और अल्पसंख्यकों के खिलाफ नीतियों के आरोप शामिल थे।

इसके अलावा अक्टूबर 2023 में जब भारत में न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ को चीनी हितों के लिए काम करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, तब पीएसएल ने न्यूयॉर्क में न्यूयॉर्क टाइम्स के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में संगठन से जुड़े लोगों ने मोदी सरकार और अखबार के खिलाफ नारेबाजी की थी। न्यूज़क्लिक को भी सिंघम की फंडिंग का हिस्सा माना जाता है, जिसके जरिए वह भारत में चीनी प्रचार को बढ़ावा दे रहा था।

ब्रॉन्क्स एंटी-वॉर कोएलिशन ने बताया था एंटी जायनिज्म की अभिव्यक्ति

इजरायली दूतावास कर्मियों की हत्या के बाद ब्रॉन्क्स एंटी-वॉर कोएलिशन ने एक्स पर एक पोस्ट में रोड्रिगेज की कार्रवाई को ‘एंटी-जायनिज्म की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति’ बताया। इस संगठन की स्थापना डी नाइट ने की थी, जो एक कट्टर समाजवादी और चीन समर्थक कार्यकर्ता हैं। नाइट की किताब ‘बेफ्रेंडिंग चाइना: पीपल टू पीपल पीसमेकिंग’ का भी जोडी इवांस ने समर्थन किया था। यह संगठन भी पीपल्स फोरम के साथ काम करता है और सिंघम के नेटवर्क का हिस्सा है।

कौन है चीनी एजेंडा चलाने वाला नेविल रॉय सिंघम

श्रीलंकाई मूल का अमेरिकी नागरिक नेविल रॉय सिंघम अब चीन शंघाई में रहता है। वो इस मामले के केंद्र में है। उसकी बीवी जोडी इवांस कोड पिंक नाम का संगठन चलाती है, वो भी चीनी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देती है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सिंघम चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के लिए काम करता है और दुनिया भर में चीनी प्रचार को बढ़ाने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च कर रहा है। उनकी फंडिंग गैर-लाभकारी संगठनों और शेल कंपनियों के जरिए दी जाती है, ताकि यह छिपा रहे कि पैसा कहाँ से आ रहा है।

सिंघम का नेटवर्क पीपल्स फोरम, एएनएसडब्ल्यूईआर कोएलिशन और ब्रॉन्क्स एंटी-वॉर कोएलिशन जैसे संगठनों तक फैला है। ये सभी संगठन इजरायल विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रहे हैं। पीपल्स फोरम को सिंघम ने गोल्डमैन सैक्स फिलैंथ्रॉपी फंड के जरिए 20 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग दी है। नेटवर्क कॉन्टैजियन रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये संगठन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर अमेरिका में फिलिस्तीन समर्थक आंदोलनों को हाईजैक कर रहे हैं, ताकि एक व्यापक अमेरिका-विरोधी, लोकतंत्र-विरोधी और पूँजीवाद-विरोधी एजेंडा चलाया जा सके।

न्यूजक्लिक फंडिंग के खिलाफ भारत में हो चुकी है कार्रवाई

नेविल रॉय सिंघम ने साल 1993 में थॉटवर्क्स नाम की आईटी कंपनी बनाई, जिसे उसने 2017 में 785 मिलियन डॉलर में बेच दिया। इसके बाद वह तेजी से राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गया और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थक बन गया। वह लीग ऑफ रिवॉल्यूशनरी ब्लैक वर्कर्स जैसे माओवादी संगठनों से भी जुड़ा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की के अनुसार, सिंघम का नेटवर्क दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और भारत जैसे देशों में चीनी प्रचार को बढ़ावा देता है। भारत में न्यूज़क्लिक को दी गई फंडिंग इसका एक उदाहरण है। जिसके खिलाफ भारत सरकार कार्रवाई भी कर रही है।

इजरायली दूतावास के 2 कर्मचारियों की हत्या और इलियास रोड्रिगेज का इसमें नाम आना बेहद खतरनाक बात है। यह घटना न केवल इजरायल और अमेरिका के लिए बल्कि भारत के लिए भी एक चेतावनी है। नेविल रॉय सिंघम जैसे लोग अपने धन और प्रभाव का इस्तेमाल कर वैश्विक स्तर पर चीनी एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं।

उसके फंड किए पीएसएल और पीपल्स फोरम जैसे संगठन इजरायल और भारत जैसे देशों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। यह जरूरी है कि इन संगठनों की फंडिंग और गतिविधियों की न सिर्फ गहरी जाँच हो, बल्कि उन पर बैन भी लगाया जाए, ताकि वो भारत और इजरायल विरोधी कार्रवाईयों को अंजाम न दे सकें।

7 बेटियों के पिता लालू यादव को बताना चाहिए कि बिहार की 1 बेटी की जिंदगी का ‘तमाशा’ क्यों बना दिया?

बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव विधायक होते हुए भी राजनीतिक कारणों से कम ही चर्चा में रहते हैं। मालदीव में ‘ध्यान’ लगाने गए तेज प्रताप यादव अब अनुष्का यादव के साथ अपनी ‘लव स्टोरी’ को सार्वजनिक कर चर्चा में हैं।

इश्क के इस सार्वजनिक कबूलनामे ने बिहार की ही एक बेटी और राजद की राजनीति के आधार समाज (यादव) से आने वाली बेटी ऐश्वर्या राय को दिए उन ‘जख्मों’ की याद भी ताजा कर दी है, जिसे उसके ससुराल से बेआबरू कर निकाला था। अपने पोस्ट में तेज प्रताप ने 12 साल से चल रही लव स्टोरी के बारे में बताया है। लेकिन बाद में इसे डिलीट या शायद हाइड कर दिया गया। थोड़ी देर बाद पोस्ट फिर से दिखने लगा।

तेज प्रताप यादव ने अपने पोस्ट में लिखा है;

मैं तेज प्रताप यादव और मेरे साथ इस तस्वीर में जो दिख रही हैं, उनका नाम अनुष्का यादव है। हम दोनों पिछले 12 सालों से एक-दूसरे को जानते हैं और प्यार भी करते हैं। हमलोग पिछले 12 सालों से एक रिलेशनशिप में रह रहे हैं। मैं बहुत दिनों से आपलोगों से यह बात कहना चाहता था, पर समझ नहीं आ रहा था कैसे कहूँ… इसलिए आज इस पोस्ट के माध्यम से अपने दिल की बात आप सबके बीच रख रहा हूँ। आशा करता हूँ आप लोग मेरी बातों को समझेंगे।

इस पोस्ट के एक-एक शब्द पर गौर करिए। राजद विधायक तेज प्रताप यादव कबूल रहे हैं कि वे 12 साल से एक लड़की के साथ रिलेशनशिप हैं। दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं। उन्होंने मई 2025 में यह पोस्ट किया है। यानी इनका संबंध 2013 से है। फिर 12 मई 2018 को उन्होंने ऐश्वर्या राय जो बिहार के ही एक पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय की पौत्री और राजद के पूर्व नेता चंद्रिका राय की बेटी हैं, के साथ शादी क्यों की?

वे कौन से दबाव थे जिसके कारण उन्हें इस संबंध के लिए तैयार होना पड़ा? लालू परिवार को इस रिश्तेदारी से कौन राजनीतिक समीकरण सधने की उम्मीद थी जो 2019 के लोकसभा चुनाव में चंद्रिका राय की हार से पूरी होती नहीं दिखी और ऐश्वर्या राय को घर से निकाल दिया गया?

वैसे भी जिस तरीके से लालू यादव और राबड़ी देवी के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने एक ईसाई महिला से शादी की है, उससे तो लगता नहीं कि यह परिवार सामाजिक या रूढ़िवादी कारणों से प्रेम विवाह का विरोधी है। राजनीतिक तौर पर भी बिहार में ईसाइयों का ऐसा कोई प्रभाव नहीं है, जिससे MY समीकरण को विस्तार मिलने की दूर-दूर तक संभावना भी दिखे। ऐसे में तेजस्वी यादव के प्रेम विवाह के लिए रजामंदी जताने के पीछे लालू और राबड़ी का राजनीतिक कारण तो यकीनी तौर पर नहीं रहा होगा।

फिर तेज प्रताप की लव स्टोरी परिवार को कबूल क्यों नहीं थी? क्या तेज प्रताप ने परिवार को इसके बारे में नहीं बताया था? इन सवालों को घरेलू मामले बताकर खारिज नहीं किया जा सकता है। इनके जवाब बिहार का अधिकार है। वैसे भी प्रेम गुनाह नहीं है। लेकिन एक रिश्ते में रहते हुए किसी और लड़की से शादी (शायद राजनीतिक कारणों से) करना और फिर उसके जीवन को तमाशा (शायद किसी और से प्रेम में होने के कारण) बना देना, कानूनी तौर पर भले अपराध न हो, लेकिन भारत का समाज जिस नैतिकता के धरातल पर खड़ा है, अवश्य ही पाप है।

यह सही है कि बिहार में जंगलराज लाने वाले, पशुओं का चारा गटक जाने वाले, सरकारी नौकरी के बदले जमीन लिखवा लेने वाले, कथित तौर पर बेटी की शादी में शोरूम से गाड़ियों से लेकर फर्नीचर तक उठा लेने वाले परिवार से नैतिकता की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। लेकिन मीसा भारती, रोहिणी आचार्य, चंदा यादव, रागिनी यादव, हेमा यादव, अनुष्का राव और राज लक्ष्मी यादव के माता-पिता से यह तो जरूर पूछा जाना चाहिए सात बेटियों के रहते हुए भी उन्होंने बिहार की एक बेटी की जिंदगी को तमाशा क्यों बना दिया?

क्या ऐश्वर्या लालू परिवार की राजनीतिक चौसर की केवल चाल मात्र थीं? जिससे अपेक्षित नतीजे नहीं मिलने पर जैसा कि ऐश्वर्या ने खुद मीडिया को बताया था राबड़ी देवी ने उन्हें बाल खींचकर मारा। राबड़ी देवी के आवास में सुरक्षाकर्मी ने उन्हें मारा। राबड़ी देवी ने उनका फोन छीन लिया। उनके माँ-बाप को जलील किया।

जिस तरीके से इस पोस्ट को डिलीट/हाइड किया गया, संभव है कि फिर से ऐसा कुछ देखने को मिले। यह बात भी फैलाई जा सकती है कि तेज प्रताप यादव का अकाउंट हैक हो गया था। विधानसभा चुनाव तक अनुष्का यादव के साथ रिश्ते को नाम नहीं देने का तेज प्रताप पर दबाव बनाया जाए। लेकिन बिहार को बार-बार कलंकित करने वाले इस परिवार को पता होना चाहिए कि सोशल मीडिया के इस दौर में जब बात निकली है तो दूर तलक जाएगी ही। उस आधार (MY) के Y को हिलाकर जाएगी, जिसकी तेल से लालटेन की लौ अब भी बची हुई है।

(अपडेट: इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के कुछ घंटों बाद तेज प्रताप यादव ने एक्स/ट्विटर पर एक पोस्ट करते हुए अपना अकाउंट हैक होने का दावा किया। कहा कि AI के इस्तेमाल से उनकी तस्वीरों से छेड़छाड़ की है। उनका फेसबुक पोस्ट फिर से डिलीट हो चुका है।)

बांग्लादेश में हिंदुओं पर फिर टूटा मुस्लिम भीड़ का कहर, घरों में लगाई आग-मचाई लूटमार: इस बार लोकल नेता की मौत को बनाया हिंसा का बहाना

बांग्लादेश के जेसोर जिले के मशीहाटी गाँव में गुरुवार (22 मई 2025) को मुस्लिम भीड़ ने हिंदू समुदाय के घरों में आग लगा दी। यह घटना मछली के बाड़े के अधिकार को लेकर हुए विवाद के बाद हुई, जिसमें किसान दल के नेता तारिकुल इस्लाम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दरअसल, तारिकुल इस्लाम की हत्या को बहाना बनाकर गाँव के हिंदू (मतुआ समुदाय) समाज को निशाना बनाया गया और चुन-चुन कर उनके घरों को आग लगा दी गई।

बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, तारिकुल इस्लाम के दौरान मशीहाटी गाँव में एक कार्यक्रम चल रहा था। उसी दौरान एक हिंदू के घर में तारिकुल इस्लाम की हत्या की जानकारी सामने आई। इस हत्या को बहाना बनाकर इस्लामी दंगाइयों ने हिंसा भड़का दी। कट्टरपंथियों के झुँड ने गाँव में 20 से अधिक हिंदुओं के घरों में आग लगा दी, 4 दुकानों में तोड़फोड़ की और 2 दुकानों को आग के हवाले कर दिया। इस हमले में 10 से ज्यादा हिंदू लोग घायल हो गए।

जानकारी के मुताबिक, मृतक तारिकुल इस्लाम का मछली पालने के लिए बनाए गए तालाब (बाड़बंदी वाला क्षेत्र) को लेकर पिल्टू बिस्वास नाम के व्यक्ति से तनाव चल रहा था। इसी विवाद की वजह से तारिकुल की हत्या कर दी गई। ये तालाब पहले किसी और के पास था, लेकिन अब तारिकुल इस तालाब पर किसी भी तरह से कब्जा करना चाहता था, ये विवाद उसके लिए जानलेवा साबित हुई। लेकिन इस हत्या को बहाना बनाकर हिंदुओं के घरों को फूँका गया और एक सागर बिश्वास नाम के युवक को भी अगवा कर लिया।

इस हिंसा के दौरान मुस्लिमों ने हिंदू समुदाय के घरों और दुकानों को निशाना बनाया। जिनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं।

मुस्लिमों के हमले के बाद गाँव के ज्यादा हिंदू पुरुष अपना घर छोड़कर भागने को विवश हो गए। ऐसे में इस्लामी कट्टरपंथियों को हिंसा करने की पूरी छूट मिल गई, क्योंकि उस भीड़ का सामना करने के लिए हिंदू मर्द वहाँ थे ही नहीं। ऐसे में इस्लामी कट्टरपंथियों ने 6 गाड़ियों (एक वैन और 5 बाइकों) को भी आग के हवाले कर दिया।

हिंसा पीड़ित लोग मतुआ समुदाय से हैं। एक पीड़ित ने बताया कि करीब 150 लोगों की भीड़ ने उनके घरों में तोड़फोड़ की, सारा सामान लूट लिया और आग लगा दी। सागर बिस्वास नामक 25 वर्षीय हिंदू युवक को भी मुस्लिम हमलावरों ने अगवा कर लिया। पुलिस, सेना के अधिकारी और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी घटना के करीब दो घंटे बाद पहुँचे।

अभयनगर थाने के प्रभारी अब्दुल आलिम ने बताया कि मछली के घेर (तालाब) को लेकर विवाद में तारीकुल की गोली मारकर और काटकर हत्या की गई। अभी तक इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि डहर मशियाहाटी में स्थिति नियंत्रण में है और वहाँ पुलिस तैनात की गई है। वहीं, सागर बिश्वास को बरामद कर लिया गया है।

गौरतलब है कि 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के केवल तीन दिनों के भीतर ही बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों, दुकानों और व्यवसायों पर कम से कम 205 हमले हुए। इतना ही नहीं 60 हिंदू शिक्षक, प्रोफेसर और सरकारी अधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए भी मजबूर किया गया।

चिन्मय कृष्ण दास प्रभु और उनके सहयोगियों की हालिया गिरफ्तारी, इस्कॉन जैसे हिंदू संगठनों पर प्रतिबंध की कोशिशें और ‘देशद्रोह’ के आरोपों का इस्तेमाल कर हिंदू आवाजों को दबाने के प्रयास, ये सब मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत हिंदुओं के प्रति संगठित और योजनाबद्ध उत्पीड़न को उजागर करते हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा देश में अस्थिरता का लाभ उठाया जा रहा है। वो ‘ईशनिंदा‘ के नाम पर हिंदुओं का दमन कर रहे हैं। ईशनिंदा के नाम पर कई हिंदुओं पर हमलों की रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं।