Home Blog Page 369

बांग्लादेश में हिंदुओं पर फिर टूटा मुस्लिम भीड़ का कहर, घरों में लगाई आग-मचाई लूटमार: इस बार लोकल नेता की मौत को बनाया हिंसा का बहाना

बांग्लादेश के जेसोर जिले के मशीहाटी गाँव में गुरुवार (22 मई 2025) को मुस्लिम भीड़ ने हिंदू समुदाय के घरों में आग लगा दी। यह घटना मछली के बाड़े के अधिकार को लेकर हुए विवाद के बाद हुई, जिसमें किसान दल के नेता तारिकुल इस्लाम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दरअसल, तारिकुल इस्लाम की हत्या को बहाना बनाकर गाँव के हिंदू (मतुआ समुदाय) समाज को निशाना बनाया गया और चुन-चुन कर उनके घरों को आग लगा दी गई।

बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, तारिकुल इस्लाम के दौरान मशीहाटी गाँव में एक कार्यक्रम चल रहा था। उसी दौरान एक हिंदू के घर में तारिकुल इस्लाम की हत्या की जानकारी सामने आई। इस हत्या को बहाना बनाकर इस्लामी दंगाइयों ने हिंसा भड़का दी। कट्टरपंथियों के झुँड ने गाँव में 20 से अधिक हिंदुओं के घरों में आग लगा दी, 4 दुकानों में तोड़फोड़ की और 2 दुकानों को आग के हवाले कर दिया। इस हमले में 10 से ज्यादा हिंदू लोग घायल हो गए।

जानकारी के मुताबिक, मृतक तारिकुल इस्लाम का मछली पालने के लिए बनाए गए तालाब (बाड़बंदी वाला क्षेत्र) को लेकर पिल्टू बिस्वास नाम के व्यक्ति से तनाव चल रहा था। इसी विवाद की वजह से तारिकुल की हत्या कर दी गई। ये तालाब पहले किसी और के पास था, लेकिन अब तारिकुल इस तालाब पर किसी भी तरह से कब्जा करना चाहता था, ये विवाद उसके लिए जानलेवा साबित हुई। लेकिन इस हत्या को बहाना बनाकर हिंदुओं के घरों को फूँका गया और एक सागर बिश्वास नाम के युवक को भी अगवा कर लिया।

इस हिंसा के दौरान मुस्लिमों ने हिंदू समुदाय के घरों और दुकानों को निशाना बनाया। जिनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं।

मुस्लिमों के हमले के बाद गाँव के ज्यादा हिंदू पुरुष अपना घर छोड़कर भागने को विवश हो गए। ऐसे में इस्लामी कट्टरपंथियों को हिंसा करने की पूरी छूट मिल गई, क्योंकि उस भीड़ का सामना करने के लिए हिंदू मर्द वहाँ थे ही नहीं। ऐसे में इस्लामी कट्टरपंथियों ने 6 गाड़ियों (एक वैन और 5 बाइकों) को भी आग के हवाले कर दिया।

हिंसा पीड़ित लोग मतुआ समुदाय से हैं। एक पीड़ित ने बताया कि करीब 150 लोगों की भीड़ ने उनके घरों में तोड़फोड़ की, सारा सामान लूट लिया और आग लगा दी। सागर बिस्वास नामक 25 वर्षीय हिंदू युवक को भी मुस्लिम हमलावरों ने अगवा कर लिया। पुलिस, सेना के अधिकारी और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी घटना के करीब दो घंटे बाद पहुँचे।

अभयनगर थाने के प्रभारी अब्दुल आलिम ने बताया कि मछली के घेर (तालाब) को लेकर विवाद में तारीकुल की गोली मारकर और काटकर हत्या की गई। अभी तक इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि डहर मशियाहाटी में स्थिति नियंत्रण में है और वहाँ पुलिस तैनात की गई है। वहीं, सागर बिश्वास को बरामद कर लिया गया है।

गौरतलब है कि 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के केवल तीन दिनों के भीतर ही बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों, दुकानों और व्यवसायों पर कम से कम 205 हमले हुए। इतना ही नहीं 60 हिंदू शिक्षक, प्रोफेसर और सरकारी अधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए भी मजबूर किया गया।

चिन्मय कृष्ण दास प्रभु और उनके सहयोगियों की हालिया गिरफ्तारी, इस्कॉन जैसे हिंदू संगठनों पर प्रतिबंध की कोशिशें और ‘देशद्रोह’ के आरोपों का इस्तेमाल कर हिंदू आवाजों को दबाने के प्रयास, ये सब मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत हिंदुओं के प्रति संगठित और योजनाबद्ध उत्पीड़न को उजागर करते हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा देश में अस्थिरता का लाभ उठाया जा रहा है। वो ‘ईशनिंदा‘ के नाम पर हिंदुओं का दमन कर रहे हैं। ईशनिंदा के नाम पर कई हिंदुओं पर हमलों की रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं।

दिल्ली, मुंबई, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक… तेजी से पैर पसार रहा कोरोना का नया वेरिएंट, अस्पतालों में बेड-ऑक्सीजन-दवाओं को लेकर BJP सरकार का अलर्ट: संक्रमितों की होगी जीनोम सीक्वेंसिंग

कोरोना महामारी ने तीन वर्ष के बाद एशिया में एक बार फिर तेजी से पैर पसारना शुरू कर दिया है। दिल्ली में भी कोविड-19 के संक्रमित की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यहाँ कोरोना के 23 सक्रिय मामले मिले हैं।

कोविड-19 के मामलों में लगातार वृद्धि के बाद दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने शनिवार (24 मई 2025) को संक्रमण की स्थिति के बारे में समीक्षा की। मीडिया ब्रीफिंग में उन्होंने कहा कि दिल्ली में अभी तक सामने आए कोरोना संक्रमितों की जाँच रिपोर्ट निजी टेस्टिंग लैब से आई है।

दिल्ली में स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों में आने वाले संक्रमितों में कोरोना के वेरिएंट की पहचान के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग की जाएगी। इसके लिए संक्रमितों के नमूने लोकनायक अस्पताल में भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली स्टेट हेल्थ डेटा मैनेजमेंट पोर्टल पर भी कोरोना से जुड़ी सभी जानकारियों की दैनिक रिपोर्टिंग को अनिवार्य कर दिया गया है।

अस्पतालों में जारी किया गया अलर्ट

दिल्ली सरकार की ओर से सभी सरकारी और निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को कोविड-19 को लेकर सतर्क रहने के साथ दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत अस्पतालों में बिस्तरों, ऑक्सीजन, कंसंट्रेटर, वेंटिलेटर, दवाइयाँ, बाय-पैप, समेत अन्य जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने की बात शामिल की गई है।

अस्पताल परिसर में मास्क पहनने और अन्य कोरोना के बचाव संबंधी अन्य कदम लागू करने के निर्देश भी शामिल किए गए हैं। बढ़ते मामलों के साथ कोविड ड्यूटी के लिए अस्पताल के कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण देने की एडवाइजरी जारी की गई है।

आईसीएमआर के द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार ही कोरोना संदिग्ध संक्रमितों की जाँच किए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके तहत इंफ्लुएंजा लाइक इंफेक्शन (ILI) के 5% और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (SARI) के 100% मामलों की जाँच अनिवार्य कर दी गई है। इन मामलों की दैनिक रिपोर्टिंग इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पोर्टल पर दिए जाने की बात भी कही गई है।

कहाँ कितने मामले

दिल्ली के साथ साथ भारत के अन्य राज्यों में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्य शामिल हैं। केरल में अब तक कोविड के 182 मामले सामने आ चुके हैं। 21 मई तक कर्नाटक में 16 सक्रिय मामले थे। बेंगलुरू में 9 महीने के बच्चे में भी संक्रमण मिला है। 22 मई तक गुजरात में कोरोना के 15 नए मामले सामने आए। हरियाणा के गुरुग्राम और फरीदाबाद में तीन मामले मिले हैं।

वेरिएंट की जानकारी नहीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने JN.1 को दिसंबर 2023 में ‘वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया था। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच नए वेरिएंट को ओमिक्रॉन का सब-वेरिएंट JN.1 और इसके भी उप-वैरिएंट्स LF.7 और NB.1.8 को जिम्मेदार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि JN.1 वैरिएंट ज्यादा संक्रामक है, लेकिन खतरनाक नहीं है। इसके लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश और शरीर में दर्द और कुछ में डायरिया जैसी परेशानी देखी जा रही है।

एक साबुन के लिए सोशल मीडिया पर फूट रही ‘तमन्ना’, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार का निकला झाग: जानिए एक हिरोइन को मैसूर सैंडल का ‘ब्रांड एंबेसडर’ बनाने पर विवाद क्यों?

कर्नाटक में मैसूर सैंडल सोप को लेकर ताजा विवाद ने क्षेत्रीय अस्मिता और कन्नड़ भाषा की भावनाओं को फिर से हवा दे दी है। कर्नाटक सरकार की कंपनी कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (KSDL) ने बॉलीवुड अभिनेत्री तमन्ना भाटिया को दो साल के लिए 6.2 करोड़ रुपये की डील के साथ मैसूर सैंडल सोप का ब्रांड एंबेसडर बनाया।

इस फैसले ने कन्नड़ समुदाय और विपक्षी दलों में नाराजगी की लहर पैदा कर दी है। आलोचकों का कहना है कि साल 1916 में मैसूर के राजा द्वारा शुरू किया गया मैसूर सैंडल सोप ब्रांड एक सांस्कृतिक प्रतीक है, उसका चेहरा कोई स्थानीय कन्नड़ कलाकार होना चाहिए था।

विरोध का मुख्य कारण तमन्‍ना का कर्नाटक से नाता न होना है। मुंबई में जन्मी तमन्ना ने भले ही दक्षिण भारतीय सिनेमा में काम किया हो, लेकिन कन्नड़ संगठनों का कहना है कि यह नियुक्ति कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत का अपमान है।

कर्नाटक डिफेंस फोरम के प्रमुख नारायण गौड़ा ने इसे ‘अनैतिक’ करार देते हुए कहा कि कर्नाटक में रुक्मिणी वसंत जैसी कई प्रतिभाशाली कन्नड़ अभिनेत्रियाँ हैं, जो इस ब्रांड को बेहतर ढंग से रिप्रेजेंट कर सकती थीं। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब ‘सैंडलवुड’ (कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री) में इतना टैलेंट है, तो बाहरी अभिनेत्री को क्यों चुना गया? कुछ यूजर्स ने तो यहाँ तक कहा कि कई स्थानीय कलाकार मुफ्त में भी यह काम कर सकते थे।

स्थानीय संगठनों का ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। उन्होंने सरकार पर कन्नड़ गौरव को ठेस पहुँचाने और स्थानीय प्रतिभाओं की अनदेखी का आरोप लगाया। आलोचकों का यह भी कहना है कि 6.2 करोड़ रुपये की भारी रकम को शिक्षा, स्वास्थ्य या रोजगार जैसे जरूरी क्षेत्रों में खर्च करना चाहिए था। कन्नड़ रक्षण वैदिके जैसे संगठनों ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर तमन्ना की नियुक्ति रद्द करने की माँग की है।

दूसरी ओर कर्नाटक सरकार ने अपने फैसले का बचाव किया है। उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने कहा कि यह निर्णय मार्केटिंग विशेषज्ञों की सलाह पर लिया गया। तमन्ना के 2.8 करोड़ सोशल मीडिया फॉलोअर्स के जरिए ब्रांड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का लक्ष्य है। पाटिल ने बताया कि रश्मिका मंदाना, दीपिका पादुकोण और कियारा आडवाणी जैसे नामों पर भी विचार हुआ, लेकिन तमन्ना को उनकी उपलब्धता और लोकप्रियता के आधार पर चुना गया। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार का कहना है कि मैसूर सैंडल सोप की 82% बिक्री कर्नाटक के बाहर होती है, इसलिए ब्रांड को वैश्विक बनाने के लिए यह रणनीति जरूरी थी।

यह विवाद कन्नड़ भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता की जिद को फिर से सामने लाया है। पहले भी कर्नाटक में भाषाई और क्षेत्रीय पहचान को लेकर बहस होती रही है। बीते कुछ समय में कन्नड़ के नाम पर कई विवाद चर्चा में रहे हैं, खासकर सत्ताधारी कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से। ऐसे में एक तरफ तो सत्ताधारी लोग कन्नाडिगा मुद्दा उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ कथित ‘बाहरी’ लोगों को ब्रांड एंबेसडर बनाकर खुद ही बैकफुट पर जा रहे हैं।

खुद Video कॉल पर काशी देखती थी ‘नफीसा’, तुफैल से करवाती थी रेकी… ‘बाबरी का बदला’ लेने को भड़काती रहती थी: 4 मुस्लिम देशों में फैला है ISI एजेंट का नेटवर्क

वाराणसी में पकड़े गए ISI एजेंट तुफैल को लेकर एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (ATS) की जाँच में रोजाना नई बातें सामने आ रही हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, तुफैल ने चार देशों में आतंकी नेटवर्क फैला रखा था।

ATS तुफैल के मोबाइल के जरिए कई अहम सुरागों तक पहुँची है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एटीएस ने तुफैल के मोबाइल से लगभग 70% तक डेटा रिकवर किया है। इसमें उसके आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने की कई बातें सामने आई हैं। इसके अलावा तुफैल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बने अकाउंट्स की भी जाँच की जा रही है।

सोशल मीडिया की जाँच में पता चला कि तुफैल सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि 4 अन्य मुस्लिम देशों से भी जुड़ा हुआ है। वहाँ के लोगों से लगातार संपर्क में था। गौरतलब है कि तूफैल एक पाकिस्तानी फौजी की बीवी नसीफा के हनीट्रैप में भी फँसा था।

नफीसा ने वीडियो कॉल के जरिए वाराणसी देखा था। उसके लिए तुफैल ने कपड़े भी पाकिस्तान भिजवाए थे। इन्हें भिजवाने के लिए तुफैल ने नेपाल और पंजाब के रास्ते चुने। पुलिस जाँच में तुफैल के साथ जुड़े 4-5 लोगों के नाम सामने आए हैं। ATS उनसे भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।

विदेशी दोस्तों ने तोड़ा नाता

उत्तर प्रदेश एटीएस ने वाराणसी से तुफैल को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गुरुवार (22 मई 2025) को गिरफ्तार किया। एटीएस का शिकंजा जैसे ही तुफैल पर कसा, वैसे ही उसके विदेशी दोस्तों ने उससे सारे संपर्क तोड़ दिए हैं। इसकी जानकारी भी उसके मोबाइल से ही मिली है।

उसने तहरीक-ए-लब्बैक के नेता मौलाना शाह रिज़वी के वीडियो वॉट्सऐप ग्रुप में साझा किए। इन संदेशों में ‘गज़वा-ए-हिंद’ (भारत पर इस्लामी कब्ज़ा), बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने और भारत में शरिया कानून लागू करने जैसी भड़काऊ बातें शामिल थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसके गिरफ्तार होने के बाद व्हाट्सएप पर 19 ग्रुपों से में से 7 से उसे हटा दिया गया। साथ ही इस ग्रुप की पूरी हिस्ट्री और चैट्स डिलीट कर दी गई हैं। हालाँकि ATS के पास इसका क्लोन मौजूद है।

इसके अलावा ATS को ये भी पता चलास कि तुफैल ने पाकिस्तान के व्हाट्सएप ग्रुप का लिंक वाराणसी के अन्य लोगों को भी भेजा था। इसके जरिए वह मुस्लिम लोगों से समर्थन माँग रहा था। उसने राजघाट, नमोघाट, ज्ञानवापी, रेलवे स्टेशन, जामा मस्जिद, लाल किला, निजामुद्दीन औलिया की तस्वीरें और उनसे जुड़ी जानकारियों पाकिस्तान के कुछ नंबरों पर शेयर की हैं।

इसी तरह नफीसा से तुफैल की दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई। वाराणसी से जुड़े भारतीय होने पर नफीसा ने तुफैल को अपना नंबर दिया और उसे कुछ पाकिस्तानी ग्रुप में जुड़वाया। इसके बाद तुफैल कुछ और लोगों के संपर्क में आ गया। जाँच में सामने आया कि तुफैल 600 से अधिक पाकिस्तानी नंबरों के संपर्क में था। 

तुफैल का संबंध पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक से था। वह संगठन के नेता मौलाना शाद रिजवी का समर्थक था और उसके वीडियो व्हाट्सएप ग्रुपों में भेजा करता था। वह ‘गजवा -ए – हिन्द’, शरीयत लागू करने और बाबरी मस्जिद का बदला लेने जैसे उत्तेजक और भड़काऊ मैसेज शेयर करता था।

ऑपरेशन सिंदूर में महिला पायलटों ने लहराया परचम, पाकिस्तान में घुसकर मारे 200+ आतंकी: रिपोर्ट्स; PM भी बोले- जिन्होंने सिंदूर मिटाया, उन्हें हमने मिट्टी में मिलाया

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले का जवाब देने के लिए भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस मिशन में 200 से अधिक आतंकवादी और पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया गया। दिलचस्प बात ये है कि भारतीय वायु सेना की महिला पायलटों ने इसमें अहम भूमिका निभाई।

सीएनएन न्यूज18 ने अपनी एक एक्लुसिव रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से बताया है कि ऑपरेशन सिंदूर में किए गए हमलों से कम से कम 42 पाकिस्तानी सैनिक और 170 आतंकवादी मारे गए हैं।

भारतीय सेना की सभी विंग्स ने मिलकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बसे 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइलों से हमला किया। इसमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लगभग 100 आतंकी खाक में मिल गए। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें महिला पायलटों ने आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करने वाली सटीक हवाई कार्रवाई की।

इसके बाद 9 और 10 मई को पाकिस्तान के रहीम यार खान, सरगोधा और नूर खान एयरबेस पर हमले किए गए। इन हमलों से पाकिस्तान के सैन्य प्रणाली को काफी तगड़ा नुकसान हुआ था।

ऑपरेशन सिंदूर अपनी तरह का पहला अभियान था, जिसमें कई भारतीय महिला पायलटों ने सक्रिय भूमिका निभाई। सैन्य दृष्टिकोण के साथ-साथ सशस्त्र बलों के बीच के समन्वय के लिहाज से भी यह मिशन काफी महत्वपूर्ण रहा।

कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जब पाकिस्तान की ओर से भारतीय शहरों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले कर रहे थे तो उन हमलों को नाकाम करने की जिम्मेदारी दो महिला सीओ के पास थी। इनमें से एक ने राजस्थान के सूरतगढ़ में और दूसरी सीओ ने पंजाब के पठानकोट में मोर्चा संभाल रखा था।

22 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीकानेर में भी राष्ट्र के नाम संबोधन में इस बात की पुष्टि की कि भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर जैसी निर्णायक कार्रवाई की। अपने संबोधन में उन्होंने सशस्त्र बलों की सराहना करते हुए इसे भारतीय सुरक्षा की ‘नई रणनीति’ बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “22 अप्रैल के बदले में 7 मई को सिर्फ 22 मिनट में हमने पाकिस्तान के 9 बड़े आतंकी ठिकानों को मिटा दिया। जब सिंदूर बारूद बन जाता है, तो इसका अंजाम क्या होगा ये दुनिया ने देख लिया। जिन्होंने हमारा सिंदूर मिटाने की कोशिश की, हमने उन्हें मिट्टी में मिला दिया।”

पीएम मोदी में भारतीयों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि हमारी सेनाओं ने एक चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसके कारण पाकिस्तान घुटनों पर आ गया।”

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ कुछ समय के लिए रुका है। अगर पाकिस्तान आगे कोई प्रतिक्रिया करता है तो भारत से भी तुरंत जवाब मिलेगा।

छत्तीसगढ़ से लेकर झारखंड तक वामपंथी आतंकियों पर स्ट्राइक, लातेहार में 2 नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया: बीजापुर में 24 ने किया सरेंडर, ₹87 लाख का था इनाम

झारखंड में सुरक्षाबलों ने शनिवार (24 मई 2025) को 2 बड़े नक्सलियों को मार गिराया है। वहीं छत्तीसगढ़ में 24 नक्सलियों ने हथियार डाले है। इससे पहले 21 मई 2025 को यहाँ 27 नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था।

झारखंड में मारे गए नक्सलियों में झारखंड जन मुक्ति परिषद (JJMP) का सदस्य पप्पू लोहरा शामिल है, जिस पर 10 लाख रुपये का इनाम था। दूसरा नक्सली प्रभात गंझू था, जिस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस मुठभेड़ में एक और नक्सली घायल हुआ, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से एक इंसास राइफल बरामद की है और इलाके में तलाशी अभियान अभी भी जारी है।

वहीं, छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में शनिवार (24 मई 2025) को 24 हार्डकोर नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इन नक्सलियों पर कुल ₹87.5 लाख का इनाम घोषित था, जिसमें से 20 नक्सलियों पर ₹50 हजार से लेकर ₹10 लाख तक का इनाम था।

सरकार ने इसे अपनी पुनर्वास नीति और ‘नियद नेल्ला नार’ योजना की सफलता बताया है। सरकार ने मार्च 2026 तक ‘लाल आतंक’ के समूल नाश का संकल्प दोहराया है।

वहीं, छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-दंतेवाड़ा बॉर्डर पर देश का सबसे बड़ा मोस्ट वांटेड नक्सली बसवा राजू मारा गया। बसवा राजू पर 10 करोड़ रुपये का भारी इनाम घोषित था और छह राज्यों की पुलिस को उसकी तलाश थी।

वह नक्सल संगठन में पोलित ब्यूरो मेंबर और महासचिव जैसे बड़े पदों पर था। इस सफलता के बाद DRG के जवानों ने जंगल में ही नाच-गाकर और रंग गुलाल खेलकर जश्न मनाया। नारायणपुर शहर में भी आतिशबाजी की गई।

इससे पहले बुधवार (21 मई 2025) को बीजापुर-नारायणपुर जिले की सीमा पर अभुजमाड़ के जंगलों में एक और बड़ी मुठभेड़ हुई थी, जिसमें सुरक्षा बलों ने 27 नक्सलियों को मार गिराया था। इन नक्सलियों पर कुल 3.33 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें जिला रिजर्व गार्ड के जवान जश्न मनाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

मारे गए नक्सलियों में 12 महिला नक्सली भी शामिल थीं। इस कार्रवाई को नक्सलियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। इस ऑपरेशन में माओवादियों के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ ​​बसवराजू भी मारा गया, जिस पर छत्तीसगढ़ में 1.5 करोड़ रुपये का इनाम था।

इस ऑपरेशन में DKSZCM (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर) जंगू नवीन भी मारा गया, जिस पर 25 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा चार कंपनी पार्टी समिति सदस्य (CYPCM) संगीता, भूमिका, सोमली और रोशन उर्फ ​​टीपू भी मारे गए, जिन पर 10-10 लाख रुपये का इनाम था।

मारे गए अन्य 21 नक्सलियों में तीन प्लाटून पार्टी समिति सदस्य और PLGA कंपनी नंबर 7 के 18 सदस्य शामिल थे, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था।

मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं, जिनमें 3 AK-47 राइफलें, 4 SLR, 6 इंसास राइफलें और विस्फोटक शामिल हैं। इस ऑपरेशन में राज्य पुलिस के दो DRG जवान भी शहीद हो गए थे।

आज हुए कर्नाटक में चुनाव, तो BJP बना लेगी अपनी सरकार: सर्वे ने बताया- भाजपा को मिलेगी 150+ सीटें, कॉन्ग्रेस सिमट जाएगी 60-80 के बीच

कर्नाटक सरकार ने हाल ही में अपने दो साल पूरे किए और ‘भू गारंटी’ योजना शुरू की। लेकिन ‘पीपुल्स पल्स’ के सर्वे में पता चला है कि महंगाई और सरकारी योजनाओं में देरी के कारण कॉन्ग्रेस सरकार से लोगों की नाराज़गी बढ़ रही है।

हैदराबाद की ‘पीपुल्स पल्स पॉलिटिकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन’ और ‘कोडेमो टेक्नोलॉजीज’ ने मिलकर ‘पल्स ऑफ कर्नाटक’ सर्वे किया। 17 अप्रैल से 18 मई तक चले इस सर्वे में गाँव और शहर के 10,481 लोगों से बात की गई।

सर्वे में पता चला कि अगर आज चुनाव होते हैं, तो बीजेपी को 136-159 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कॉन्ग्रेस को सिर्फ 62-82 सीटें मिलेंगी। जेडी(एस) को 3-6 सीटें मिलने का अनुमान है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा की घटनाओं के बाद बीजेपी को और भी ज़्यादा समर्थन मिला है।

हालाँकि, 48.4 प्रतिशत लोगों ने कॉन्ग्रेस सरकार के काम को ‘अच्छा’ या ‘बहुत अच्छा’ बताया, जबकि 32 प्रतिशत ने ‘खराब’ या ‘बहुत खराब’ कहा। 20 प्रतिशत लोगों ने इसे ‘औसत’ बताया।

सर्वे में यह भी पता चला कि 55 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि अगली सरकार बीजेपी बनाए, जबकि 39.1 प्रतिशत कॉन्ग्रेस के साथ हैं।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अभी भी लोगों की पहली पसंद हैं, लेकिन उनकी पार्टी में अंदरूनी झगड़े और भ्रष्टाचार के आरोपों से कॉन्ग्रेस की छवि खराब हुई है।

सर्वे में यह भी पता चला कि कॉन्ग्रेस की ‘गृह लक्ष्मी‘ योजना सबसे ज़्यादा पसंद की जा रही है, जबकि ‘युवा निधि’ को बहुत कम लोग पसंद कर रहे हैं। जाति जनगणना को लेकर भी लोगों की अलग-अलग राय है।

सर्वे के अनुसार, सरकारी योजनाओं में देरी, कर्ज माफी में दिक्कतें, महंगाई और भ्रष्टाचार के आरोपों से कॉन्ग्रेस सरकार की छवि खराब हुई है। सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं, जबकि राहुल गांधी उनसे पीछे हैं।

कुल मिलाकर, सर्वे में पता चला है कि कॉन्ग्रेस सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, और बीजेपी को इसका फायदा मिल रहा है। हालाँकि, सिद्धारमैया की लोकप्रियता कॉन्ग्रेस के लिए एक उम्मीद की किरण है।

‘महापाखंडी मुल्क है पाकिस्तान… लोगों की सुरक्षा पर न करे बात’: भारत ने UNSC में आतंकी मुल्क को धोया; US जाने से पहले थरूर बोले- अब नहीं बैठेंगे शांत, Pak को करेंगे बेनकाब

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसारन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमलों के बाद भारत पाकिस्तान को चौतरफा झटके दे रहा है। भारत ने अब इस आंतकी मुल्क के लिए किसी भी तरह से नरमी न लाने मन बना लिया है। इसी के चलते संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में भारतीय राजदूत हरीश पुरी ने पाकिस्तान को खूब खरी-खोटी सुनाई।

इसी के साथ कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर को भी मोदी सरकार अमेरिका, पनामा, गुयाना, ब्राजील और कोलंबिया के दौरे पर भेज रही है ताकि भारत के पक्ष को वे अधिक मजबूती से रख सकें और आतंकवाद के खिलाफ भारत की स्थिति साफ कर सकें।

UNSC की बैठक में ‘सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा’ विषय पर खुली बहस हुई। इसमें भारत ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। भारत के स्थाई प्रतिनिधि और राजदूत हरीश पुरी ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा पर चर्चा में पाकिस्तान का भाग लेना अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ही अपमान है। असल में भारत से पहले पाकिस्तान ने आतंकवाद पर अपना उपदेश दिया था।

पाकिस्तान के उपदेश पर उसकी पोल खोलते हुए हरीश ने कहा, “पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने कई मुद्दों पर हम पर निराधार आरोप लगाए जिसका जवाब देने के लिए मुझे मजबूर होने पड़ा है। भारत ने दशकों से पाकिस्तान में पोषित आतंकवादी हमलों का सामना किया है, चाहे वो 26/11 के मुंबई हमले हों या फिर 2025 का पहलगाम हमला।'”

हरीश पुरी ने कहा कि पाकिस्तान अपना नागरिकों और आतंकवादियों के बीच कोई भेदभाव नहीं रखता। ऐसे में उसका नागरिकों की सुरक्षा वाली बहस में भाग लेने या बोलने का कोई औचित्य ही नहीं बनता। ये मुल्क नागरिकों की आड़ लेकर आतंकवाद को बढ़ावा देता है।

हरीश ने कहा कि इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान ने भारत के सीमा से लगे क्षेत्रों को अपना निशाना बनाया। मंदिर, कॉन्वेंट्स और गुरुद्वारों के साथ अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक को अपना निशाना बनाया। ऐसे में यहाँ पर ज्ञान की बात करके पाकिस्तान को अपना पाखंड बंद करना चाहिए।

हमने 40,000 लोगों को खोया

बैठक में जब पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के स्थगन का मुद्दा उठाया तो इसके जवाब के लिए भी हरीश ने पूरी तैयारी रखी थी। हरीश ने UNSC में आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने भारत पर 3 युद्ध और हजारों आतंकी हमले किए। ऐसा करके उसने संधि भावना को तार-तार कर दिया। पिछले 40 वर्षों में हुए आतंकी हमलों में 20,000 से भी अधिक भारतीय मारे गए। इश दौरान भी हमने असाधारण धैर्य बनाए रखा। पर इसकी भी सीमा है।

इसके अलावा आतंकवाद पर भारत की स्थिति दुनिया के सामने मजबूती से रखने और पाकिस्तान की सच्चाई सबके सामने लानेके लिए भारत की ओर से सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विदेश दौरे पर जा रहा है। इसकी अध्यक्षता कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर कर रहे हैं। पाँच देशों की यात्रा पर जाने से पहले थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया है।

वीडियो में थरूर ने कहा, “मैं प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता करते हुए पाँच देशों की यात्रा पर जा रहा हूँ। इनमें गुयाना, पनामा, कोलंबिया, ब्राजील और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। हम वहाँ इसलिए जा रहे हैं ताकि देश की बात सबके सामने रख सकें। देश पर आए इस संकट पर बोल सकें, जिसमें हमारे देश पर आतंकवादियों ने क्रूरता के साथ हमला किया। हम आतंकवाद पर चुप नहीं रहेंगे। न ही हम चाहेंगे कि विश्व इस विषय पर हमें अनदेखा करे।”

अपनी बात बढ़ाते हुए थरूर ने कहा, “हमारा लक्ष्य उन मूल्यों को सामने लाना है जिसके भारत हमेशा से ही समर्थन करता आया है और जिन्हें आज के युग में सहेजे जाने की जरूरत है।ये एक मिशन है जो दुनिया को याद दिलाता रहेगा कि भारत शांति, लोकतंत्र, स्वतंत्रता जैसे मूल्यों के लिए खड़ा है, न कि नफरत, आतंक या लोगों की हत्या करने के लिए। जय हिंद।”

कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा नाम न दिए जाने के बाद भी सरकार ने उन पर भरोसा जताते हुए उनको इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया है। इस दौरे पर अमेरिका में 9/11 वाले हमले कराने वाले अलकायदा आतंकी संगठन के साथ पाकिस्तान के संबंधो पर भी बात की जा सकती है।

बहन को राजदूत बनाने के लिए माउंटबेटन और लियाकत अली पर चिल्लाए थे नेहरू, आज़ादी से पहले ही बनवा दिया था मंत्री: भारतीय राजनीति में ऐसे बोया गया वंशवाद का बीज

भारत में जब भी राजनीति में वंशवाद का जिक्र आता है, हमें नेहरू-गाँधी परिवार का स्मरण सबसे पहले आता है। एक ही परिवार से इतने लोग देश के उच्च पदों तक शायद ही किसी देश में गए हों। वर्तमान में देखा जाए तो सोनिया गाँधी राज्यसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। उनके पुत्र राहुल गाँधी अमेठी से सांसद हैं। राहुल गाँधी की बहन प्रियंका गाँधी, अपने भाई द्वारा छोड़ी गई वायनाड सीट से सांसद हैं। प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा भी प्रत्यक्ष राजनीति में आने की इच्छा कई बार जता चुके हैं। इसके अतिरिक्त कॉन्ग्रेस का एक बड़ा धड़ा प्रियंका गाँधी और रॉबर्ट वाड्रा के पुत्र रेहान में भी अपना भविष्य देख रहा है।

वंशवाद के इस वटवृक्ष की जड़ों को जब हम खँगालते हैं, तो हमें जवाहर लाल नेहरू इसके केंद्र में दिखते हैं। भारत के स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व जिन नेताओं ने किया, उनमें जवाहरलाल नेहरू एक प्रमुख नाम हैं। वे न केवल महात्मा गाँधी के प्रिय शिष्य थे, बल्कि गाँधीजी द्वारा उन्हें स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में भी नियुक्त किया गया। कई वामपंथी इतिहासकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि नेहरू आधुनिक भारत के निर्माता थे। 

यदि हम इतिहास को सिर्फ इन भावनाओं की दृष्टि से न देखकर, निष्पक्ष विवेक से देखें, तो नेहरू युग का एक ऐसा पक्ष भी उभर कर सामने आता है, जो भारतीय लोकतंत्र की जड़ों में वंशवाद का पहला बीज बोने वाला था। यह बीज केवल उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले 1930 के दशक में ही उनके द्वारा अंकुरित हो चुका था।

यह सर्वविदित है, कि जवाहरलाल नेहरू का राजनीतिक जीवन उनके पिता मोतीलाल नेहरू की विरासत से शुरू हुआ। मोतीलाल स्वयं भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रह चुके थे और अपने पुत्र को राजनीति में स्थापित करने में उनकी बड़ी भूमिका रही। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मोतीलाल नेहरू ने कॉन्ग्रेस को नेहरू परिवार का राजनीतिक मंच बना दिया था। राजनीति में वंशवाद कोई रातों-रात उत्पन्न हुआ विकार नहीं था, बल्कि यह एक सुविचारित प्रक्रिया के तहत पनपा, और इस प्रक्रिया के पहले उत्पाद जवाहरलाल नेहरू ही थे।

जवाहर लाल नेहरू जब कॉन्ग्रेस की मुख्यधारा की राजनीति में आए तो धीरे-धीरे उनका कद बढ़ने लगा। स्वतन्त्रता से पूर्व ही वह इतने प्रभावशाली हो गए थे कि कॉन्ग्रेस की नीतियाँ और उन नीतियों का क्रियान्वयन उनके इर्द-गिर्द घूमने लगा था। इसकी बानगी हमें 1930 के दशक से ही दिखनी शुरू हो गई थी।

1937 में देश में प्रांतीय चुनाव हुए। कॉन्ग्रेस ने 11 में से 8 प्रांतों में अपनी सरकार बनाई। उत्तर प्रदेश में भी गोविंद बल्लभ पंत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस ने सरकार बनाई। इस सरकार में जवाहर लाल नेहरू की बहन, विजयलक्ष्मी पंडित को मंत्री पद दिया गया। ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ (PCI) के संस्थापक अध्यक्ष व पत्रकार दुर्गा दास अपनी पुस्तक, ‘इंडिया फ्रॉम कर्जन टू नेहरू एंड आफ्टर’ में लिखते हैं कि नेहरू के पास विजयलक्ष्मी पंडित को मंत्री बनाने की सिफारिश लेकर खुद गोविंद बल्लभ पंत और रफी अहमद किदवई गए थे, लेकिन इसके पीछे का वास्तविक उद्देश्य यह था, ‘यदि हम नेहरू के परिवार के किसी सदस्य को मंत्री बना देते हैं, तो इससे हमें नेहरू का आशीर्वाद मिलेगा और नेहरू अकारण हमें किसी बात पर परेशान भी नहीं करेंगे।’

इंडिया फ्रॉम कर्जन टू नेहरू एंड आफ्टर, दुर्गा दास: पृष्ठ संख्या 184

यह तथ्य इस बात को प्रमाणित करता है कि उस दौर में भी नेहरू के राजनीतिक हस्तक्षेप से बचने के लिए लोग उनके पारिवारिक संबंधों को महत्व देने लगे थे। यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं था, बल्कि यह दर्शाता था कि नेहरू का प्रभाव किसी भी तर्क, योग्यता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ऊपर था।

आज़ादी के बाद तो नेहरू ने स्थापित रूप से वंशवाद का बीज भारत की राजनीति में बो दिया। इससे संबंधित एक किस्सा है, जिसे जानना उन लोगों के लिए आवश्यक है, जो नेहरू को लोकतंत्र और समावेशिता का ध्वजवाहक मानते हैं। इस किस्से का जिक्र अमेरिकी इतिहासकार स्टैनली वॉलपर्ट की किताब, ‘नेहरू: ए ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ में मिलता है। 

किस्सा कुछ यूँ है कि जब देश स्वतंत्र हुआ, तो जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ। उस अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री नेहरू थे, वित्त मंत्री लियाकत अली खान थे और गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन थे। माउंटबेटन और लियाकत अली खान के सामने नेहरू ने अपनी बहन विजयलक्ष्मी पंडित को सोवियत संघ में भारत की प्रथम राजदूत नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा। लियाकत अली खाँ ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे निरंकुश वंशवाद की संज्ञा दी।

लियाकत अली खान के अनुसार, यह केवल एक राजनयिक नियुक्ति का मामला नहीं था, बल्कि यह उस समय भारत की सबसे बड़ी पार्टी के मुखिया द्वारा सत्ता का निजीकरण करने का प्रारंभिक संकेत था। नेहरू ने लियाकत के विरोध को नजरअंदाज करते हुए अपने प्रस्ताव पर अड़े रहने का न केवल दुस्साहस दिखाया, बल्कि चिल्लाते हुए माउंटबेटन को यह धमकी भी दे डाली, कि यदि माउंटबेटन ने इस मुद्दे पर लियाकत का पक्ष लिया तो वह इस्तीफा दे देंगे।

नेहरू: ए ट्रिस्ट विद डेस्टिनी, स्टैनली वॉलपर्ट पृष्ठ संख्या 398

यह एक लोकतांत्रिक नेता का नहीं, बल्कि एक सामंती मानस का संकेत था, जो यह मान बैठा था कि राज्य की सम्पूर्ण सत्ता उसके निर्णयों में निहित है। राजनीति में परिवारवाद उस समय और भी चिंताजनक हो जाता है जब वह लोकतंत्र की आड़ लेकर उसकी आत्मा का गला घोंटने लगे। नेहरू के उदाहरण में यह स्थिति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। उन्होंने कभी सार्वजनिक रूप से वंशवाद का समर्थन नहीं किया, लेकिन व्यवहार में वह ठीक उसी दिशा में काम करते रहे।

यह तर्क दिया जा सकता है कि भारतीय राजनीति में परिवारवाद बाद में एक आम चलन बन गया – गाँधी परिवार, यादव परिवार, अब्दुल्ला परिवार, करुणानिधि परिवार, पवार परिवार, आदि। लेकिन यह प्रवृत्ति आरंभ कहाँ से हुई, यह जानना आवश्यक है। जब देश के पहले प्रधानमंत्री स्वयं वंशवादी नीति को व्यवहार में अपनाएँ, तो नीचे के स्तर पर उसका अनुकरण होना अवश्यंभावी था। कॉन्ग्रेस पार्टी स्वयं को लोकतंत्र, समाजवाद और पंथनिरपेक्षता की पोषक बताती रही, लेकिन वास्तविकता यह थी कि नेहरू युग में इन मूल्यों के स्थान पर एक छिपी हुई कुलीनता और वंशवाद का विस्तार हुआ।

विश्व के अन्य लोकतांत्रिक देशों में जब परिवारवाद बढ़ा, तो स्वयं वहाँ की जनता ने इसका विरोध किया। अमेरिका में, भले ही बुश और क्लिंटन परिवार राजनीति में रहे हों, लेकिन कोई भी राजनीतिक दल उन्हें ‘राजवंश’ नहीं बना सका। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, हर जगह संस्थाएं व्यक्ति से बड़ी रहीं। लेकिन भारत में संस्थाएँ व्यक्ति और परिवार के आगे बौनी साबित होती रहीं, और यह परंपरा जवाहर लाल नेहरू से ही शुरू हुई।

पीलीभीत में 500 ने की घर वापसी, नेपाल से आकर पादरियों ने बना दिया था ईसाई: VHP ने बॉर्डर पर डाला डेरा, DM ने 3000+ सिखों के धर्मांतरण के जाँच के दिए आदेश

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में भारत-नेपाल सीमा से सटे गाँवों में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक कार्यक्रम में करीब 500 सिखों की घर वापसी हुई है। ये लोग पहले सिख धर्म छोड़कर ईसाई बन गए थे। शुक्रवार (23 मई 2025) को बेल्हा और टाटरगंज गाँवों में आयोजित इस समारोह में सिख समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

रिपोर्ट के मुताबिक, विहिप ने इन गाँवों में दो दिन तक कैंप लगाकर लोगों को सिख धर्म में वापस लाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया।

विहिप के संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ ने बताया कि नेपाल सीमा से सटे गाँवों में जाकर लोगों से मुलाकात की गई और उन्हें सिख धर्म की महत्ता समझाई गई। कई परिवारों ने स्वेच्छा से घर वापसी का फैसला लिया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भी अमृतपान जैसे धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए 160 परिवारों को सिख धर्म में वापस ला चुकी है। वहीं, कुछ लोगों का सामाजिक बहिष्कार भी किया गया, जो दूसरों को धर्मांतरण के लिए उकसा रहे थे।

घर वापसी कार्यक्रम में शामिल हुए लोग

बता दें कि पीलीभीत के हजारा थाना क्षेत्र के गाँवों जैसे बेल्हा, टाटरगंज, बमनपुरी और सिंघाड़ा में लंबे समय से धर्मांतरण की शिकायतें सामने आ रही थीं। स्थानीय सिख संगठनों का दावा है कि नेपाल से आए पादरियों और कुछ स्थानीय पास्टरों ने आर्थिक लालच और चंगाई सभाओं के जरिए सिखों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया। ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में 3,000 से ज्यादा सिखों का धर्म परिवर्तन हुआ। इनमें से 160 परिवारों की सूची प्रशासन को सौंपी गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नवनियुक्त डीएम ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने धर्मांतरण के आरोपों की जाँच के लिए विशेष जाँच टीम (एसआईटी) गठित की है। पुलिस ने एक सिख महिला मंजीत कौर की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, जिन पर धर्मांतरण के लिए दबाव डालने और खेतों को नुकसान पहुँचाने का आरोप है। मंजीत ने बताया कि उनके पति को पहले ही ईसाई बनाया गया था और अब उन पर और उनके बच्चों पर भी दबाव बनाया जा रहा था।