छत्तीसगढ़ के कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर हुए पुलिस ऑपरेशन में 31 नक्सली मार गिराए गए हैं। पुलिस ने उनकी लाशें बरामद की हैं। उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं। नक्सलियों के लिए सुरक्षित गढ़ रही इस पहाड़ी को सुरक्षाबलों ने 10 हजार जवानों के साथ घेरा था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 21 अप्रैल 2025 को चालू हुए ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने 31 नक्सली मारे हैं, इनके शव बरामद हुए हैं। 20 शवों की पहचान कर ली गई है और इनमें 11 को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। बाक़ी 11 की पहचान की जा रही है।
सुरक्षाबलों ने कर्रेगुट्टा पहाड़ी में 24 अप्रैल को 4 नक्सली मारे थे जबकि 7 मई को 27 नक्सलियों का सफाया किया। इसके बाद चलाए गए सफाई अभियान से पुलिस को कर्रेगुट्टा पहाड़ी से 400 से अधिक IED बम और 40 हथियार बरामद हुए हैं। यहाँ से 2 टन विस्फोटक भी बरामद हुआ है।
कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर यह नक्सली 35 अलग-अलग मुठभेड़ में मारे गए हैं। यहाँ लगातार सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच लड़ाइयाँ हुई हैं। इस लड़ाई में सुरक्षाबलों के तीन जवाब बलिदान भी हुए हैं। इस ऑपरेशन को CRPF, छत्तीसगढ़ पुलिस, DRG समेत बाकी सुरक्षाबलों ने अंजाम दिया है।
छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा पर मौजूद इस पहाड़ी पर अब सुरक्षाबलों का कब्जा है। इससे पहले इसे नक्सली छुपने के लिए इस्तेमाल करते थे। यह भी खबर सामने आई थी कि यहाँ नक्सलियों के टॉप कमांडर रहा करते थे। यहाँ मोस्ट वांटेड नक्सली हिडमा की मौजूदगी का भी पता चला था।
लगातार मारे जा रहे नक्सली
गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च, 2026 का समय सुरक्षाबलों को नक्सलियों का सफाया करने के लिए दिया है। इसे लिए लगातार ऑपरेशन हो रहे हैं। 2024 में सुरक्षाबलों ने 290 नक्सली मारे थे। वहीं 2025 में यह संख्या लगभग 130 पहुँच चुकी है। सैकड़ों की संख्या में नक्सली सरेंडर कर चुके हैं।
वर्ष 2025 में सुरक्षाबलों को नक्सलियों के खिलाफ लगातार बड़ी सफलताएँ हाथ लगी हैं। अब तक कई ऐसे ऑपरेशन छत्तीसगढ़ में हो चुके हैं, जिनमें एक दर्जन से ज्यादा नक्सली एक साथ मार गिराए गए हों। एक रिपोर्ट बताती है कि अब तक 2025 के भीतर छत्तीसगढ़ में 120 से अधिक नक्सली मार गिराए गए हैं।
2025 के पहले दिन से ही सुरक्षाबलों ने नक्सलियों पर शिकंजा कसना चालू कर दिया था। 2 जनवरी, 2025 को बीजापुर में हुई मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए थे। उसके बाद यह सिलसिला चलता ही रहा। 16 जनवरी को हुई एक मुठभेड़ में 18 नक्सली मार गिराए गए थे।
21 जनवरी, 2025 को गरियाबंद पहाड़ी पर हुई एक मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें नक्सलियों का टॉप कमांडर चलापति भी था। चलापति ₹1 करोड़ का इनामी नक्सली था। उसके साथ ही एक-दो और भी बड़े कमांडर मारे गए थे।
इस वर्ष की सबसे बड़ी मुठभेड़ 9 फरवरी को हुई थी। नेशनल पार्क क्षेत्र में हुए ऑपरेशन के दौरान यहाँ 31 नक्सली मार गिराए गए थे। यह ऑपरेशन महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सुरक्षाबलों ने मिलकर किया था। यह हमला नक्सलियों की एक मीटिंग पर हुआ था। इसी तरह के बड़े ऑपरेशन के चलते नक्सलियों की अब कमर टूट गई है।
सुरक्षाबल अब उन इलाकों में घुस रहे हैं, जहाँ पहले नक्सली एकक्षत्र राज कर रहे थे। उन्हें ग्रामीणों से मिलने वाला समर्थन भी अब कम हो चुका है। दुर्गम इलाकों में चौकियाँ बनाने के चलते सुरक्षाबल उनकी हर एक मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (13 मई, 2025) को पंजाब स्थित आदमपुर एयरबेस पहुँचे हैं। उन्होंने आदमपुर एयरबेस का यह दौरा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाक़ात में जवानों से उनके अनुभव सुने हैं और उनके साहस और शौर्य की प्रशंसा की है।
PHOTO | Today early morning, Prime Minister Narendra Modi (@narendramodi) went to the Adampur Air Base. He was briefed by Air Force personnel and he also interacted with our brave Jawans. pic.twitter.com/Tc4WKTh89v
पीएम मोदी 13 मई सुबह 7 बजे दिल्ली के पालम एयरपोर्ट से उड़ान भरकर आदमपुर एयरबेस पहुँचे। वह यहाँ लगभग 1 घंटे मौजूद रहे। उनकी यहाँ जवानों से मिलने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। इनमें से एक तस्वीर भी वायरल हो रही है।
इसमें पीएम के पीछे भारतीय लड़ाकू विमान MiG-29 की फोटो दिखाई दे रही है। इस पर लिखा है, “क्यों दुश्मनों के पायलट ठीक से सो नहीं पाते?” इस फोटो में पीएम मोदी ने एयरफोर्स की ही कैप भी लगा रखी है। प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे से पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा ध्वस्त हो गया है।
पाकिस्तान ने इससे पहले फर्जी दावा किया था कि उसने भारत के सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुँचाया। उसने आदमपुर एयरबेस पर भी प्रोपेगेंडा किया था। हालाँकि, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस वार्ता में तस्वीर साझा करते हुए कहा था कि पाकिस्तान के यह दावे बिल्कुल गलत हैं। पीएम मोदी के इस दौरे ने पाकिस्तान को और भी बेनकाब कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले सोमवार (13 मई 2025) रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर भारतीय सेना को बधाई दी थी। साथ ही पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया था।
उन्होंने कहा कि भारत का एक्शन अभी सिर्फ स्थगित हुआ है, खत्म नहीं। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान अगर आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा, तो भारत उसकी हर हरकत का हिसाब लेगा। पीएम मोदी ने कहा था कि टेरर और टॉक एक साथ नहीं चलते।
भारत में पाकिस्तान से जारी तनाव के बीच बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों पर कार्रवाई जारी है। भारत ने इन्हें गिरफ्तार करने के बाद वापस भी भेजना चालू कर दिया है। ऐसी ही एक कार्रवाई में असम के एक डिटेंशन कैम्प से रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को वापस बांग्लादेश भेजा गया है। कुछ रोहिंग्याओं को अंडमान निकोबार से समुद्र के रास्ते भी भेजा गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने राज्य के एक डिटेंशन कैंप से घुसपैठियों के भेजे जाने की पुष्टि की है। इस मामले में रोहिंग्या घुसपैठियों के समर्थक सुप्रीम कोर्ट भी पहुँच गए हैं।
डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, असम के मटिया डिटेंशन कैम्प में रखे गए 102 रोहिंग्या को बांग्लादेश के रास्ते भेजा गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्हें पहले बसों में भर कर त्रिपुरा ले जाया गया और इसके बाद बांग्लादेश में भेज दिया गया। मटिया कैम्प असम के गोलपाड़ा जिले में हैं और देश का सबसे बड़ा डिटेंशन कैम्प है।
इस कार्रवाई की पुष्टि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में की थी। शनिवार (9 मई, 2025) को CM सरमा ने कहा था कि मटिया कैम्प में अब मात्र 30-40 लोग बचे हैं और बाकी को बांग्लादेश में वापस भेज दिया गया है।
उन्होंने कहा, “अब मटिया में केवल वही लोग हैं जिन्हें विदेशी घोषित किया जा चुका और उनका मुकदमा चल रहा है। उनके अलावा कैम्प से बाकी सभी लोग बांग्लादेश वापस चले गए हैं। यह भारत सरकार द्वारा किया गया एक ऑपरेशन था। असम ने भी इसमें हिस्सा लिया था।”
उन्होंने आगे बताया, “देश के अलग-अलग हिस्सों में पहचाने गए लोगों के साथ-साथ असम में घुसपैठिए के रूप में पहचाने गए लोगों को भी वापस धकेल दिया गया है। रोहिंग्या भी वापस चले गए हैं… मटिया अब लगभग मुक्त हो गया है और 30-40 लोग बचे हैं।”
सरमा ने बताया कि अब कानूनी दांवपेंच से छुटकारा पाने को उन्हें बॉर्डर से ही वापस भेज दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “पहले हम उन्हें हिरासत में लेते थे, मामला दर्ज करते थे, अदालत में पेश करते थे और जेल में डाल देते थे। लेकिन अब हमने फैसला किया है कि हम उन्हें अंदर नहीं लाएँगे और उन्हें सीमा से ही वापस खदेड़ देंगे।”
वहीं डेक्कन हेराल्ड की ही रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली पुलिस ने भी रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के खिलाफ ऑपरेशन चालू कर रखा है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ने 40 रोहिंग्या घुसपैठियों को पकड़ कर अंडमान के रास्ते समुद्र में छोड़ दिया हैं ताकि वह म्यांमार वापस पहुँच सकें। रिपोर्ट में बताया गया कि यह कार्रवाई 7 मई, 2025 को की गई।
इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालाँकि, इसको लेकर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में पड़ गई है। रोहिंग्या घुसपैठियों के समर्थन में मोहम्मद इस्माइल ने यह याचिका दायर की है। मोहम्मद इस्माइल ने दावा किया है कि दिल्ली पुलिस ने 43 रोहिंग्या को बायोमेट्रिक जानकारी लेने के नाम पर अपने साथ लिया और बाद में उन्हें अंडमान के रास्ते समुद्र में भेज दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को लेकर अभी कोई आदेश नहीं दिए हैं। इस पर सुनवाई 31 जुलाई, 2025 को होनी है। एक और रिपोर्ट में बताया गया है कि BSF ने 78 बांग्लादेशी घुसपैठियों को सुंदरबन के जंगल में छोड़ दिया है और उन्हें बांग्लादेशी सुरक्षाबलों ने बरामद किया है।
दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के मामले में नया मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई आंतरिक जाँच समिति (इन-हाउस इन्क्वायरी) ने बताया है कि जस्टिस वर्मा के आवास पर काम करने वाले कर्मचारी इस नकदी को रहस्यमई ढंग से ठिकाने लगाने में शामिल हो सकते हैं।
जाँच समिति ने 14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना के बाद नकदी बरामदगी की सूचना दी थी। उस समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में जज के पद पर कार्य कर रहे थे।
जला हुआ कैश था ‘गायब’
जानकारी के अनुसार, जब जस्टिस वर्मा से इस घटना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कथित तौर पर झूठ बोला और भ्रामक जानकारी दी। बरामद नकदी की वास्तविक मात्रा अभी तक स्पष्ट नहीं है, क्योंकि जला हुआ कैश पहले ही “गायब” हो गया था। इसके अलावा बताया गया कि जिस कमरे में जला हुआ कैश मिला था, वह कमरा अंदर से बंद था और उसे तोड़कर खोलना पड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित आंतरिक जाँच समिति ने इस घटना के बाद जस्टिस वर्मा को उनके पद से हटाने की सिफारिश की थी। जस्टिस वर्मा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना को भेजे अपने जवाब में इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।
बाद में CJI ने जाँच रिपोर्ट और जस्टिस वर्मा के जवाब की एक प्रति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दी थी। आपको बता दें, जब भी हाई कोर्ट के किसी जज के खिलाफ आंतरिक जाँच प्रक्रिया की जाती है और जज इस्तीफा देने से इनकार करता है, तो ऐसे में CJI राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखता है।
कैश मिलने के बाद जस्टिस वर्मा पर कई कार्रवाईयाँ भी हुईं। इसमें दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने प्रारंभिक जाँच समिति स्थापित की। फिर जस्टिस वर्मा से न्यायिक कार्य तुरंत वापस लिए गए और बाद में वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में बिना किसी न्यायिक जिम्मेदारी के ट्रांसफर कर दिया गया।
जस्टिस वर्मा ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि जिस कमरे से कैश मिला था, वह कमरा सभी के लिए खुला था। जस्टिस वर्मा ने कहा था कि कमरे में कैश उनके द्वारा रखा गया था, यह बयान पुरी तरह से बेतुका है।
फिलहाल, यह मामला अभी भी जाँच के अधीन है और आगे की जानकारी का इंतजार है।
बुलंदशहर के खुर्जा में एक पूरे परिवार ने ईसाई धर्म को छोड़ कर हिंदू धर्म को अपना लिया है। 20 साल पहले राजू ने हिंदू धर्म त्याग कर ईसाई धर्म को अपना लिया था। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों का नाम भी बदल दिया गया था। अब बेटे एंथनी जॉन ने अपने पूरे परिवार के साथ हिंदू धर्म में घर वापसी कर ली है।
एंथनी अपने परिवार के साथ गाजियाबाद के दीनागढ़ी में रहते हैं। उनकी पत्नी यशोदा पहले ही हिंदू हैं। खुर्जा की रहने वाली पत्नी को एंथनी ने बताया कि 20 वर्ष पहले अनुसूचित जाति से आने वाले पिता राजू ने धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपनाया था। उसके बाद राजू ने अपने नाम राजू जॉन कर लिया और पूरे परिवार के नाम भी बदल दिए गए।
यशोदा ने इसकी जानकारी विश्व हिंदू परिषद के प्रांत परावर्तन प्रमुख धर्म प्रसार ने सुनील सोलंकी को दी। सुनील सोलंकी ने एंथनी से बात की तो उसने सनातन धर्म में वापस आने की बात कही। इसके बाद एंथनी को परिवार को खुर्जा बुलाया। गांधी मार्ग स्थित आर्य समाज मंदिर में बुलाया गया। रविवार (11 मई 2025) को आर्य समाज मंदिर में एंथनी के पूरे परिवार के साथ शुद्धि यज्ञ किया। इसके बाद हवन और शुद्धिकरण संस्कार करवाया गया।
कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं के साथ आस पास के लोग और स्थानीय समाजसेवी भी शामिल रहे। सनातन धर्म में वापसी के बाद एंथनी का नाम टीटू कुमार रखा गया। पत्नी का नाम यशोदा और बेटे का नाम पहले से ही ओम है। नामकरण के बाद टीटू कुमार के यज्ञोपवीत संस्कार समेत अन्य धार्मिक विधियां भा करवाईं गईं।
पिछले कुछ दिनों से भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सोमवार (12 मई 2025) रात करीब 9 बजे पाकिस्तान ने लगातार तीसरे दिन सीजफायर (गोलीबारी न करने की सहमति) का उल्लंघन किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के सांबा, पंजाब के जालंधर और पठानकोट, और राजस्थान के बाड़मेर इलाकों में संदिग्ध ड्रोन (बिना पायलट वाले विमान) देखे गए।
#WATCH | J&K: Red streaks seen and explosions heard as India's air defence intercepts Pakistani drones amid blackout in Samba.
भारतीय वायु रक्षा प्रणाली तुरंत हरकत में आई और सांबा तथा पठानकोट में इन ड्रोन को मार गिराया। पंजाब के होशियारपुर में भी धमाकों की आवाज सुनाई दी, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। हालांकि, भारतीय सेना ने सोमवार (12 मई 2025) रात करीब 11:30 बजे स्पष्ट किया कि अब किसी भी दुश्मन के ड्रोन की सूचना नहीं है और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
No enemy drones are being reported at present. The situation is calm and under full control: Indian Army pic.twitter.com/kutpFyVnRO
इन घटनाओं के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। सोमवार (12 मई 2025) रात को पंजाब के अमृतसर में भी ब्लैकआउट (बिजली बंद) कर दिया गया था। अमृतसर के जिला उपायुक्त (डीसी) ने लोगों से घरों की बत्तियां बंद रखने और खिड़कियों से दूर रहने की अपील की थी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। इसी तरह, होशियारपुर जिले में भी कुछ इलाकों में एहतियात के तौर पर आंशिक ब्लैकआउट किया गया था।
इन तनावपूर्ण हालातों के बीच, सोमवार (12 मई 2025) शाम 5 बजे भारत और पाकिस्तान के बड़े सैन्य अधिकारियों (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स – DGMO) के बीच बातचीत हुई। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य सीमा पर शांति बनाए रखना और गोलीबारी को पूरी तरह से रोकना था। दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि भविष्य में सीमा पर किसी भी तरह की गोलीबारी नहीं की जाएगी।
दोनों देशों के बीच 10 मई 2025 की शाम से ही सीजफायर लागू है। इसके बावजूद, सीमा पर ड्रोन की गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। पिछले कुछ दिनों से हमारी सेना के बड़े अधिकारी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं, जो सीमा पर सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई से संबंधित है।
ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ था और तब से लेकर अब तक पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलीबारी में हमारे 5 सैनिक, 2 BSF जवान शहीद हो गए हैं, जबकि 60 जवान घायल हुए हैं। इसके अलावा, दुर्भाग्य से 27 आम नागरिकों की भी जान चली गई है।
सीमा पर लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण स्थानीय लोगों में डर का माहौल है, लेकिन भारतीय सेना पूरी तरह से मुस्तैद है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद राष्ट्र के नाम संबोधन में पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि भारत का एक्शन अभी सिर्फ स्थगित हुआ है, खत्म नहीं। पाकिस्तान अगर आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा, तो भारत उसकी हर हरकत का हिसाब लेगा।
पीएम मोदी ने दोहराया कि टेरर और टॉक एक साथ नहीं चल सकते। अगर पाकिस्तान से कोई बात होगी, तो वो सिर्फ आतंकवाद और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर होगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि व्यापार और आतंक, पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकते।
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला दिया था। आतंकियों ने मासूम पर्यटकों को धर्म पूछकर बेरहमी से मार डाला। इस बर्बरता का जवाब देने के लिए भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ शुरू किया। 6 मई की रात और 7 मई की सुबह भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। पीएम ने कहा कि ये आतंकी दशकों से पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे थे और भारत के खिलाफ साजिश रच रहे थे।
मोदी ने पाकिस्तान की बौखलाहट का भी जिक्र किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारत ने इन हमलों को आसमान में ही नाकाम कर दिया। पीएम ने कहा कि इससे पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हो गया। उन्होंने भारत की सेनाओं, खुफिया एजेंसियों और वैज्ञानिकों की तारीफ की, जिन्होंने इस ऑपरेशन को कामयाब बनाया।
जवाबी कार्रवाई सिर्फ स्थगित, उसका रवैया नहीं बदला तो…
पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया ने देखा कि कैसे पाकिस्तान के ड्रोन्स और पाकिस्तान की मिसाइलें, भारत के सामने तिनके की तरह बिखर गईं। भारत के सशक्त एयर डिफेंस सिस्टम ने, उन्हें आसमान में ही नष्ट कर दिया। पाकिस्तान की तैयारी सीमा पर वार की थी, लेकिन भारत ने पाकिस्तान के सीने पर वार कर दिया। भारत के ड्रोन्स, भारत की मिसाइलों ने सटीकता के साथ हमला किया। पाकिस्तानी वायुसेना के उन एयरबेस को नुकसान पहुँचाया, जिस पर पाकिस्तान को बहुत घमंड था। भारत ने पहले तीन दिनों में ही पाकिस्तान को इतना तबाह कर दिया, जिसका उसे अंदाजा भी नहीं था। इसलिए भारत की आक्रामक कार्रवाई के बाद पाकिस्तान बचने के रास्ते खोजने लगा।
उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान दुनिया भर में तनाव कम करने की गुहार लगा रहा था। और बुरी तरह पिटने के बाद इसी मजबूरी में 10 मई की दोपहर को पाकिस्तानी सेना ने हमारे DGMO को संपर्क किया। तब तक हम आतंकवाद के इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर तबाह कर चुके थे, आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया था, पाकिस्तान के सीने में बसाए गए आतंक के अड्डों को हमने खंडहर बना दिया था।”
पीएम मोदी ने कहा, “भारत से पिटने के बाद पाकिस्तान की तरफ से गुहार लगाई गई। पाकिस्तान की तरफ से जब ये कहा गया, कि उसकी ओर से आगे कोई आतंकी गतिविधि और सैन्य दुस्साहस नहीं दिखाया जाएगा। तो भारत ने भी उस पर विचार किया। और मैं फिर दोहरा रहा हूँ, हमने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर अपनी जवाबी कार्रवाई को अभी सिर्फ स्थगित किया है। आने वाले दिनों में हम पाकिस्तान के हर कदम को इस कसौटी पर मापेंगे, कि वो क्या रवैया अपनाता है।”
पीएम मोदी ने कहा, “पाकिस्तानी फौज, पाकिस्तान की सरकार, जिस तरह आतंकवाद को खाद-पानी दे रहे है, वो एक दिन पाकिस्तान को ही समाप्त कर देगा। पाकिस्तान को अगर बचना है तो उसे अपने टैरर इंफ्रास्ट्रक्चर का सफाया करना ही होगा। इसके अलावा शांति का कोई रास्ता नहीं है।”
उन्होंने कहा कि भारत का मत एकदम स्पष्ट है—
टैरर और टॉक, एक साथ नहीं हो सकते
टैरर और ट्रेड, एक साथ नहीं चल सकते।
और पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकता।
मैं आज विश्व समुदाय को भी कहूँगा, हमारी घोषित नीति रही है..
अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो टेरेरिज्म पर ही होगी।
अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर, PoK उस पर ही होगी।
भारत ने तय कर दिया है तीन पैमाना
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की तीनों सेनाएँ, हमारी एयरफोर्स, हमारी आर्मी, और हमारी नेवी, हमारी बॉर्डर सेक्योरिटी फोर्स- BSF, भारत के अर्धसैनिक बल, लगातार अलर्ट पर हैं। सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद, अब ऑपरेशन सिंदूर आतंक के खिलाफ भारत की नीति है। ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में एक नई लकीर खींच दी है, एक नया पैमाना, न्यू नॉर्मल तय कर दिया है।
भारत पर आतंकी हमला हुआ तो मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हम अपने तरीके से, अपनी शर्तों पर जवाब देकर रहेंगे। हर उस जगह जाकर कठोर कार्रवाई करेंगे, जहाँ से आतंक की जड़ें निकलती हैं।
कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत नहीं सहेगा। न्यूक्लियर ब्लैकमेल की आड़ में पनप रहे आतंकी ठिकानों पर भारत सटीक और निर्णायक प्रहार करेगा।
हम आतंक की सरपरस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने पाकिस्तान का वो घिनौना सच फिर देखा है, जब मारे गए आतंकियों को विदाई देने, पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े अफसर उमड़ पड़े। स्टेट स्पॉन्सरड टेरेरिज्म का ये बहुत बड़ा सबूत है। हम भारत और अपने नागरिकों को किसी भी खतरे से बचाने के लिए लगातार निर्णायक कदम उठाते रहेंगे।
ऑपरेशन सिंदूर न्याय की प्रतिज्ञा
पीएम ने ऑपरेशन सिंदूर को देश की हर बेटी, बहन और माँ को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि न्याय की प्रतिज्ञा है। भारत अब किसी भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल को नहीं सहेगा। मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन शांति के लिए शक्ति जरूरी है। उन्होंने भगवान बुद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि शांति का रास्ता शक्ति से होकर जाता है।
पीएम मोदी ने कहा, “आज बुद्ध पूर्णिया है। भगवान बुद्ध ने हमें शांति का मार्ग दिखाया है। शांति का मार्ग शक्ति से होकर जाता है। मानवता शांति और समृद्धि की तरफ बढ़े। हर भारतीय शांति के साथ जी सके। विकसित भारत के सपने को पूरा कर सके, इसके लिए भारत का शक्तिशाली होना बहुत जरूरी है। और आवश्यकता पड़ने पर इस शक्ति का इस्तेमाल भी जरूरी है। पिछले कुछ दिनों में भारत ने यही किया है।”
पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए पीएम ने कहा कि भारत की सेना पूरी तरह अलर्ट है। अगर पाकिस्तान ने फिर से कोई गलती की, तो भारत उसका मुँहतोड़ जवाब देगा। मोदी ने देशवासियों की एकजुटता की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि जब पूरा देश एक साथ खड़ा होता है, तो फौलादी फैसले लिए जाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कितना सख्त है।
पीएम ने साफ किया कि भारत का लक्ष्य आतंकवाद को जड़ से खत्म करना है। पाकिस्तान के वादों को अब भारत कसौटी पर कसेगा। अगर पाकिस्तान आतंकवाद को नहीं रोकता, तो भारत का अगला कदम और सख्त होगा।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में 150 किलोमीटर अंदर तक घुसकर कराची के मलिर कैंट में सैन्य ठिकानों पर हमला किया। यह हमला पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। भारतीय वायुसेना (आईएएफ) ने बताया कि मलिर कैंट में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल साइट को निशाना बनाया गया। इसके अलावा चकलाला, रफीक, रहीम यार खान, सरगोधा, भुलारी और जैकोबाबाद के हवाई अड्डों पर भी सटीक हमले किए गए। इन हमलों में रडार साइट, कमांड सेंटर और हथियार डिपो तबाह हुए।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में एक वीडियो दिखाया गया। वीडियो में पाकिस्तान वायु सेना का मिराज फाइटर जेट टुकड़ों में बिखरा हुआ दिख रहा था। भारतीय वायु रक्षा प्रणालियों ने पाकिस्तानी हमलों को विफल कर इस जेट को भी मार गिराया।
भारतीय वायुसेना की ओर से सोमवार (12 मई 2025) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के सबूत पेश किए। एयर मार्शल एके भारती ने बताया कि भारत की मजबूत वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम किया। खास तौर पर स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम ने शानदार प्रदर्शन किया। एक वीडियो में पाकिस्तानी मिराज लड़ाकू विमान के टुकड़े दिखाए गए, जिसे ऑपरेशन के दौरान नष्ट किया गया। भारती ने कहा, “हमारी लड़ाई आतंकियों और उनके ढाँचे के खिलाफ थी, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने उनका साथ दिया, जिसके चलते उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।”
#WATCH | Delhi | #OperationSindoor | Air Marshal AK Bharti says, "…It is a pity that the Pakistani military chose to intervene and that for terrorists, and hence we chose to respond…" pic.twitter.com/c3sHHKaRKI
आईएएफ ने सैटेलाइट तस्वीरें जारी कीं, जिनमें बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों को तबाह करने के सबूत थे। रहीम यार खान हवाई अड्डे पर हमले से रनवे में बड़ा गड्ढा बन गया, जो भारत के हथियारों की सटीकता को दर्शाता है। भारतीय सेना ने साफ किया कि हमले आतंकी ढाँचे पर केंद्रित थे, नागरिकों को नुकसान नहीं पहुँचाया गया।
पाकिस्तान के जवाबी हमलों में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ। हालाँकि भारत की एस-400 और आकाश जैसी रक्षा प्रणालियों ने इन्हें नाकाम कर दिया। शनिवार को दोनों देशों ने संघर्षविराम पर सहमति जताई, लेकिन पाकिस्तान ने इसका उल्लंघन किया। भारतीय सेना ने कहा कि सीमा पर शांति बनी हुई है, लेकिन सतर्कता जारी है।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की फौज को भी भारतीय सेनाओं ने बुरी तरह धूल चटाई। भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस तक तबाह कर दिए। इन सबके बीच पाकिस्तान को अपनी इज्जत बचाना मुश्किल हो गया।
इस काम के लिए पाकिस्तान ने अपने फौज के अधिकारी अहमद शरीफ चौधरी को लगाया। चौधरी DG ISPR है, जो कि पाक फौज का आधिकारिक प्रवक्ता होता है। चौधरी एक ग्लोबल आतंकी का बेटा भी है और इस्लामी कट्टरपंथी है।
भारत के ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ अपने जवाबी ऑपरेशन का नाम पाकिस्तानी फ़ौज ने कुरान की आयत के नाम पर ‘ऑपरेशन बनयान-उन-मर्सूस’ रखा था। इसका मतलब है अभेद्य दीवार। 11 मई, 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, एक पाकिस्तानी पत्रकार ने DG ISPR से पूछा कि कुरान की आयत के नाम अभियान का नाम रखने का ख्याल किसका था।
— Sensei Kraken Zero (@YearOfTheKraken) May 12, 2025
इसके जवाब में अहमद शरीफ ने कहा कि ईमान, तक़वा, जिहाद फ़ि-सबिलिल्लाह पाकिस्तानी सेना का आदर्श वाक्य है। ईमान का मतलब है आस्था, तक़वा का मतलब है अल्लाह से डरना और जिहाद फ़ि-सबिलिल्लाह का मतलब है अल्लाह के बताए रास्ते पर लड़ना।
चौधरी ने कहा, “इस्लाम न केवल हमारे मजहबी विश्वास का हिस्सा है, बल्कि यह हमारे ट्रेनिंग का भी हिस्सा है। ईमान, तक़वा, जिहाद फ़ि-सबीलिल्लाह, यही हमें लड़ने के लिए प्रेरित करता है और यही हमारा आदर्श वाक्य है।”
चौधरी ने आगे कहा कि मोमिन जो अल्लाह की लड़ाई में लड़ते हैं वे उस स्टील की दीवार की तरह हैं जैसे हमने एक स्टील की दीवार की तरह काम किया। किसी इस्लामी आतंकी संगठन के सरगना की तरह चौधरी का बातें करना किसी को आश्चर्य में नहीं डाल गया। दरअसल, वह खुद ही एक आतंकी का बेटा है।
उसके बाप का नाम सुल्तान बशीरुद्दीन महमूद था। महमूद आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन का सहयोगी था। उसका नाम संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधों की सूची में था। चौधरी का बाप भी जिंदगी भर काफिरों के खिलाफ ‘जिहाद’ करने में जुटा रहा था।
महमूद पाकिस्तान के परमाणु प्रोग्राम का हिस्सा था और इस्लामी आतंकी भी था। अमेरिका ने अपनी जाँच में पाया था कि महमूद ने उम्माह तामीर ए-नौ (यूटीएन) की सह-स्थापना की थी। उसने अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन से मुलाकात की थी और उसे केमिकल, बायोलॉजिकल और परमाणु हथियारों के बारे में जानकारी दी थी।
9/11 के हमलों के बाद अहमद शरीफ चौधरी के अब्बू को दिसंबर 2001 में UNSC द्वारा आधिकारिक रूप से आतंकवादी के रूप में पंजीकृत किया गया था। UNSC की प्रतिबंध समिति ने महमूद को ओसामा बिन लादेन, अल-कायदा और तालिबान के साथ मिलकर हथियारों की आपूर्ति करने को लेकर प्रतिबंधित किया था।
चौधरी का बाप महमूद अल कायदा और तालिबान जैसे इस्लामी आतंकी संगठनों को परमाणु बम से लैस करना चाहता था। अब उसका बेटा भी उसी जिहादी काम को आगे बढ़ाना चाहता है लेकिन इसके लिए उसने पाकिस्तान की फ़ौज की वर्दी पहन ली है।
चौधरी का जिहाद के प्रति समर्पण उसके हाफिज अब्दुल रऊफ को ‘पारिवारिक आदमी’ और ‘मौलाना’ बताने से ही साफ़ हो जाता है। रऊफ असल में एक आतंकी है और उस पर भी सैक्शन लगाए गए हैं। चौधरी की इस परिभाषा के हिसाब से ओसामा और उसका बाप भी मासूम होने चाहिए।
भारत के सिंगापुर में उच्चायुक्त (हाई कमिश्नर) शिल्पक अंबुले ने सोमवार (12 मई 2025) को कहा कि भारत-पाकिस्तान के हाल के झगड़े में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की कोई बात नहीं है। सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त शिल्पक अंबुले ने सोमवार (12 मई 2025) को ब्लूमबर्ग टीवी पर हसलिंदा अमीन से बातचीत में कहा, “हमारे लिए कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है, न कि अंतरराष्ट्रीय। कश्मीर के मामले में मध्यस्थता शब्द हमारे लिए काम नहीं करता।”
ऑपरेशन सिंदूर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पहले हमला शुरू किया था। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान की 11 वायुसेना ठिकानों पर जोरदार हमले किए, जिसके बाद पाकिस्तान को सीजफायर (युद्धविराम) के लिए मजबूर होना पड़ा। यह बयान तब आया जब अमेरिका ने कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की इच्छा जताई थी। भारत ने हमेशा से कश्मीर को अपने और पाकिस्तान के बीच का मामला माना है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को सिरे से खारिज किया है।
अंबुले ने कहा कि भारत नहीं चाहता था कि मामला बढ़े। लेकिन पाकिस्तान ने भारत के नागरिक और सैन्य ठिकानों, जैसे अस्पतालों और धार्मिक स्थलों पर हमले शुरू किए। उन्होंने कहा, “अब पाकिस्तान को सोचना है। हमने सिर्फ सीमा पार आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए जवाब दिया। लेकिन पाकिस्तान ने नागरिकों पर हमले करके मामला और बिगाड़ा, तो हमें भी जवाबी हमला करना पड़ा।”
उन्होंने बताया कि कई दिनों की सीमा पर गोलीबारी के बाद पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) ने भारत के DGMO से बात की। अंबुले ने कहा, “पाकिस्तान का DGMO हमारे DGMO के पास गिड़गिड़ाने आया, जब हमने उनके 11 वायुसेना ठिकानों को तबाह कर दिया। तब जाकर उन्होंने सीजफायर माना।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि उन्होंने सीजफायर में भूमिका निभाई। लेकिन अंबुले ने इन दावों को साफ नकार दिया। उन्होंने कहा, “कश्मीर का मसला भारत और पाकिस्तान के बीच का है। हम दूसरों से अपनी बात समझाते हैं, लेकिन मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं। कश्मीर कोई अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं है।”
सिंधु जल समझौते और पीओके पर भी रखी बात
इंडस वाटर ट्रीटी (सिंधु जल समझौता) के बारे में अंबुले ने कहा कि पाकिस्तान के आतंकवाद को बढ़ावा देने की वजह से भारत ने इस समझौते को रोक दिया है। इस मुद्दे पर अंबुले ने कहा, “यह समझौता पहले से ही पाकिस्तान की तरफ ज्यादा झुका था। जब तक सीमा पार आतंकवाद चलता रहेगा, यह समझौता लागू नहीं होगा।” पाकिस्तान के साथ बातचीत के सवाल पर उन्होंने भारत का पुराना रुख दोहराया, “आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं हो सकते। एकमात्र मुद्दा है – पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) जो गैरकानूनी है।”
इससे पहले, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार (10 मई 2025) को दावा किया था कि दोनों देश तटस्थ स्थान पर बातचीत के लिए सहमत हुए हैं। लेकिन अंबुले ने इसे साफ तौर पर खारिज करते हुए कहा, “भारत ने कभी ऐसा नहीं किया। आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।” यह बयान भारत की उस नीति को दर्शाता है, जो आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और कश्मीर पर अपनी संप्रभुता को प्राथमिकता देती है।
अंबुले ने कहा कि भारत तब तक पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखेगा, जब तक वह सीमा पार आतंकवाद को बंद नहीं करता। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों खासकर DGMO के बीच बातचीत जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान आतंकवाद रोक दे, तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं। लेकिन ध्यान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और 22 अप्रैल 2025 के हमले के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने पर रहेगा।”
गौरतलब है कि चार दिन की तीखी झड़पों के बाद शनिवार (10 मई 2025) को दोनों देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई। युद्धविराम (Ceasefire) से पहले भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तानी वायुसेना की कमर तोड़ दी और आतंक के ठिकानों को चुन-चुन कर नष्ट कर दिया। भारत के आक्रमण से घबराए पाकिस्तान ने ही सीजफायर की गुहार लगाई। सिंगापुर में भारत के हाई कमिश्नर शिल्पक अंबुले ने भी इस बात को दोहराया।
शिल्पक अंबुले ने कहा कि पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस ने अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया, जिसके बाद यह युद्धविराम संभव हुआ। इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत ने “आतंकी ठिकानों को नष्ट करने” का अपना उद्देश्य हासिल कर लिया।