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बंगाल में फेसबुक के जरिए 90 हजार लड़कियों का अपहरण, राज्य के ही पुलिस अधिकारी ने किया खुलासा: BJP ने शेयर किया Video, कहा- बेटियाँ अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सोमवार (26 मई 2025) को एक वीडियो साझा किया, जिसमें पश्चिम बंगाल पुलिस ने स्वीकार किया कि फेसबुक के जरिए 90,000 लड़कियों का अपहरण हो चुका है। यह खुलासा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आया है, जिससे ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) सरकार पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बीजेपी ने इस वीडियो के जरिए दावा किया कि राज्य में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा खतरे में है।

वीडियो में एक पुलिस अधिकारी कहते हैं, “फेसबुक के माध्यम से अब तक 90,000 लड़कियों का अपहरण हुआ है।” इसके साथ ही एक अन्य मामले में एक छठी कक्षा की छात्रा को इंस्टाग्राम के जरिए ब्लैकमेल कर फंसाने की बात सामने आई है। बीजेपी ने इसे ममता सरकार की नाकामी बताया और कहा कि “बंगाल की बेटियाँ अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं।”

पश्चिम बंगाल में पहले भी कानून-व्यवस्था को लेकर विवाद हो चुके हैं। बीजेपी नेताओं ने टीएमसी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ममता बनर्जी की सरकार अपराधों पर नियंत्रण में विफल रही है। खासकर, सोशल मीडिया के दुरुपयोग से होने वाले अपराधों ने चिंता बढ़ा दी है। बीजेपी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “यह भयावह सच्चाई है कि बंगाल अब ‘बंगालर मेये’ (बंगाल की बेटियों) के लिए सुरक्षित नहीं है।”

इस वीडियो ने राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर बहस को और तेज कर दिया है। इस वीडियो का बड़ा वर्जन आप यहाँ देख सकते हैं।

छोटी उम्र में ‘प्यार के नाम’ पर सेक्स की आजादी देना चाहता है सुप्रीम कोर्ट, लव जिहाद से लेकर जबरन धर्मांतरण को बढ़ावा मिलने का अंदेशा: इस ‘सलाह’ के खतरे बड़े

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक अहम सलाह दी है। कोर्ट ने कहा है कि किशोरों के बीच सहमति से बनने वाले प्रेम-संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और देश में यौन व प्रजनन स्वास्थ्य शिक्षा (सेक्स एजुकेशन) की नीति बनाने पर विचार करना चाहिए। ऐसा इसलिए ताकि किशोरों को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (पोक्सो) एक्ट के तहत जेल न जाना पड़े।

यह सलाह एक मामले की सुनवाई के दौरान आई, जब कोर्ट ने सरकार को इस मुद्दे पर एक विशेषज्ञ समिति बनाने और 25 जुलाई 2025 तक रिपोर्ट देने को कहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इस रिपोर्ट के आधार पर आगे के निर्देश देगा।

ये मामला अभी क्यों उठा?

यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल की एक महिला की कानूनी लड़ाई से शुरू हुआ। इस महिला के पति को पोक्सो एक्ट के तहत 20 साल की जेल हुई थी, क्योंकि जब वह 14 साल की थीं, तब उनके बीच सहमति से रिश्ता था। महिला अपने पति को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुँची। इस मामले को देखते हुए कोर्ट ने दो वरिष्ठ महिला वकीलों, माधवी दीवान और लिज मैथ्यू, को इस संवेदनशील मुद्दे पर सलाह देने के लिए नियुक्त किया। इन वकीलों ने कहा कि पोक्सो एक्ट का मकसद बच्चों को यौन शोषण से बचाना है, लेकिन किशोरों के बीच सहमति वाले रिश्तों में इसका सख्ती से लागू करना कई बार गलत नतीजे देता है। इससे न सिर्फ किशोरों को, बल्कि उनके परिवारों को भी नुकसान होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पहले तो पति की सजा बरकरार रखी थी, लेकिन सजा के अमल पर रोक लगाकर एक कमेटी का गठन कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट की ‘न्यायमित्र’ कमेटी ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने महिला के पति की सजा खत्म कर दी। इस फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद लचीला रुख अपनाया। सुप्रीम कोर्ट ने महिला के संघर्षों, उसके भविष्य, दोनों के बच्चे और उनके साथ रहने को भी अपने फैसले में शामिल किया। इस मामले के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस अहम मुद्दे पर सोच विचार करने के लिए कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से दो बड़े कदम उठाने को कहा है…

किशोरों के सहमति वाले रिश्तों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना: कोर्ट ने कहा कि पोक्सो एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के किशोरों के बीच सहमति से बने रिश्तों को अपराध न माना जाए। कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह इस मुद्दे की जाँच के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाए। इस समिति में महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और कुछ विशेषज्ञ शामिल हों। कोर्ट ने यह भी कहा कि समिति में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की डॉ. पेखम बसु, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट जयिता साहा, और दक्षिण 24 परगना के जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी संजीब रक्षित को स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल किया जाए। समिति को इस मुद्दे पर विचार करके 25 जुलाई 2025 तक अपनी रिपोर्ट देनी होगी।

यौन और प्रजनन स्वास्थ्य शिक्षा की नीति बनाना: कोर्ट ने यूनेस्को की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि भारत में यौन शिक्षा सिर्फ सेकेंडरी स्कूलों में दी जाती है, और वह भी बहुत सीमित तरीके से। कोर्ट का कहना है कि अगर किशोरों को सही समय पर यौन और प्रजनन स्वास्थ्य की जानकारी दी जाए, तो वे अपने फैसलों के कानूनी और सामाजिक परिणामों को बेहतर समझ सकेंगे। कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह इस दिशा में एक ठोस नीति बनाए।

हाई कोर्ट के फैसलों को लेकर क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कई हाई कोर्ट्स के फैसलों का जिक्र किया, जो इस मुद्दे पर पहले ही संवेदनशील रुख अपना चुके हैं। कोर्ट ने खास तौर पर दिल्ली, मद्रास और कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसलों का उल्लेख किया…

मद्रास हाई कोर्ट: इस कोर्ट ने कई मामलों में कहा कि पोक्सो एक्ट का मकसद सहमति वाले रिश्तों को अपराध बनाना नहीं था। कोर्ट ने यह भी माना कि सहमति वाले रिश्तों में ‘पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ की परिभाषा लागू नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसमें ‘हमला’ जैसी कोई बात नहीं होती। 2001 में भी मद्रास हाई कोर्ट ने सुझाव दिया था कि ऐसे रिश्तों को सजा से बचाने के लिए कानून में बदलाव करना चाहिए।

कलकत्ता हाई कोर्ट: इस कोर्ट ने कहा कि पोक्सो एक्ट में ‘पेनेट्रेशन’ को एकतरफा हरकत माना गया है, यानी इसे सिर्फ आरोपित की हरकत माना जाता है। लेकिन सहमति वाले रिश्तों में यह जिम्मेदारी सिर्फ एक पक्ष पर नहीं डाली जा सकती।

दिल्ली हाई कोर्ट: हाल ही में फरवरी 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक लड़के को राहत देते हुए उसके खिलाफ पोक्सो का मामला रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कानून का मकसद शोषण और दुरुपयोग को रोकना है, न कि प्रेम को सजा देना। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रेम एक बुनियादी मानवीय अनुभव है और किशोरों को भी सहमति से भावनात्मक रिश्ते बनाने का हक है, बशर्ते उसमें कोई दबाव या शोषण न हो।

हाई कोर्ट्स ने यह भी माना कि अगर ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाए, तो इससे पीड़ित (लड़की) और उसके परिवार को भी नुकसान हो सकता है। कई बार हाई कोर्ट्स ने ऐसे मामलों को रद्द किया, जहाँ आगे कार्रवाई करना पीड़ित के लिए ही हानिकारक था।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि ज्यादातर लोग इस बात से अनजान हैं कि सहमति की उम्र (एज ऑफ कंसेंट) को 2012 में 16 साल से बढ़ाकर 18 साल कर दिया गया है। इस अनजानपन की वजह से कई किशोर अनजाने में कानून तोड़ रहे हैं। पोक्सो एक्ट के तहत अगर कोई 18 साल से कम उम्र का व्यक्ति यौन संबंध बनाता है, तो उसे अपराध माना जाता है, भले ही वह सहमति से हो।

इसके अलावा कोर्ट ने माना कि किशोरावस्था में हार्मोनल और जैविक बदलावों की वजह से लड़के-लड़कियाँ रिश्तों की ओर आकर्षित होते हैं। ऐसे में उन्हें सजा देने के बजाय, उनके माता-पिता और समाज को उनका समर्थन और मार्गदर्शन करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि किशोरों के फैसलों को बड़ों के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे उनके प्रति सहानुभूति की कमी हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट की सलाह से साफ है कि पोक्सो एक्ट और यौन शिक्षा को लेकर कुछ बदलाव जरूरी हैं। कुछ अहम बिंदु इस प्रकार हैं-

कानून में लचीलापन: सहमति वाले रिश्तों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए पोक्सो एक्ट में बदलाव की जरूरत है। खासकर 16-18 साल के किशोरों के मामले में कानून को और संवेदनशील करना होगा।

यौन शिक्षा का महत्व: स्कूलों में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य शिक्षा को अनिवार्य करना चाहिए। इससे किशोरों को अपने शरीर, रिश्तों, और कानूनी सीमाओं की सही जानकारी मिलेगी।

समाज की सोच बदलना: समाज को किशोरों के रिश्तों को अपराध की तरह देखने के बजाय, उन्हें समझने और समर्थन देने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट की यह सलाह किशोरों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम है। पोक्सो एक्ट जरूरी है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल किशोरों और उनके परिवारों को नुकसान पहुँचा सकता है। सहमति वाले रिश्तों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और यौन शिक्षा की नीति बनाने से न सिर्फ किशोरों को सही दिशा मिलेगी, बल्कि समाज में यौन शोषण के खिलाफ लड़ाई भी मजबूत होगी।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट की सलाह को देखें, तो ये पश्चिमी देशों की व्यवस्थाओं, सामाजिक बुनियादों, स्वच्छंदता, अपराधिक माइंडसेट… जैसे नजरियों को ध्यान में रख रहा है। माननीय सुप्रीम कोर्ट को इन मुद्दों पर भारत की व्यापकता को देखना होगा। क्योंकि पश्चिमी समाजों में जो नियम चल सकते हैं, वे भारत में भारी नुकसान पहुँचा सकते हैं।

भारत में पहले से ही जबरन बाल विवाह, नाबालिग लड़कियों की निकाह, शादी के नाम पर मानव तस्करी और धर्म परिवर्तन के लिए ग्रूमिंग जैसी गंभीर समस्याएँ हैं। अगर किशोरों के बीच सहमति वाले यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया, तो ये एक कानूनी खामी बन सकती है, जिसका गलत लोग फायदा उठा सकते हैं।

पोक्सो एक्ट का मकसद प्रेम को रोकना नहीं है, लेकिन इसे इसलिए भी बनाया गया था ताकि बड़े लोग नाबालिग लड़कियों के साथ ‘किशोर प्रेम’ के नाम पर शादी या रिश्ते बनाकर उनका शोषण न करें। कई बार निकाह का रास्ता अपनाकर पोक्सो एक्ट से बचा जाता है। उदाहरण के लिए, जून 2022 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने शरिया का हवाला देकर कहा था कि 16 साल की मुस्लिम लड़की निकाह के लिए योग्य है। क्या ऐसी नरमी तस्करों और शोषण करने वालों को और हिम्मत नहीं देगी, जो पहले से ही सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं?

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व चेयरमैन प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “नाबालिग अपनी सरकार नहीं चुन सकते, उन्हें वोट देने का अधिकार भी नहीं है। क्या हम उनसे यह उम्मीद कर रहे हैं कि वे अपने यौन साथी को समझदारी से चुनें? सावधान रहें, इससे नाबालिग लड़कियों के साथ निकाह और बाल विवाह के अन्य रूपों को वैधता मिल सकती है।”

दरअसल, यह सिर्फ कानूनी भाषा का मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जटिलताओं का भी सवाल है। अगर 14 या 15 साल की उम्र के बच्चों के बीच सहमति वाले रिश्तों को कानूनन मंजूरी दे दी गई, तो प्रेम और शोषण के बीच की रेखा और धुँधली हो जाएगी। सहमति की जाँच कौन करेगा? गरीब और हाशिए पर रहने वाली लड़की, जो 14-15 साल की है, क्या वाकई में दबाव या लालच को ‘प्रेम’ समझने की गलती से बच पाएगी?

भारत में बाल विवाह अभी भी एक बड़ी समस्या है। हर साल हजारों, बल्कि लाखों बाल विवाह हो रहे हैं। अगर किशोरों के यौन संबंधों को कानूनन सामान्य कर दिया गया, तो धार्मिक संगठन, खाप पंचायतें और तस्करी करने वाले गिरोह कमजोर लड़कियों को शादी या शोषण की स्थिति में धकेल सकते हैं और वो भी कानूनी तौर पर सुरक्षित होकर।

यह सच है कि कुछ मामलों में पोक्सो एक्ट का गलत इस्तेमाल होता है और इस पर ध्यान देना जरूरी है। लेकिन कानून में बदलाव बहुत सोच-समझकर करना होगा, न कि एकदम से सब कुछ बदल देना चाहिए। कुछ जरूरी कदम हो सकते हैं-

उम्र का अंतर तय करना: रिश्ते में शामिल दोनों लोगों की उम्र में कितना अंतर होना चाहिए, इसका एक नियम बनाया जाए।

बेहतर काउंसलिंग: किशोरों को सही सलाह और मार्गदर्शन देने के लिए काउंसलिंग सिस्टम को मजबूत करना होगा।

माता-पिता की भूमिका: माता-पिता को इस प्रक्रिया में शामिल करके किशोरों को सही दिशा दिखानी होगी।

मजबूत सुरक्षा: किसी भी बदलाव के साथ ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जो शोषण को रोके।

अगर ये सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो ‘युवा प्रेम को बचाने’ का नेक इरादा समाज और खासकर कमजोर लड़कियों के लिए मुसीबत बन सकता है। इसका फायदा वे लोग उठा सकते हैं, जो पहले से ही नाबालिगों का शोषण करते आए हैं।

कोर्ट और कानून बनाने वाले भले ही ‘सहमति’ और ‘प्रेम’ की बात करें, लेकिन सच ये है कि नाबालिगों को वोट देने, गाड़ी चलाने, या कई दूसरी चीजों की इजाजत नहीं है, और इसके पीछे ठोस वजह है। फिर क्या अब हम ये मान लें कि वे यौन संबंधों के लिए सहमति देने के लिए तैयार हैं?

सुप्रीम कोर्ट का इरादा भले ही अच्छा हो, लेकिन भारत जैसे देश में ऐसी सलाह को बहुत सावधानी से लागू करना होगा। पश्चिमी देशों का नजरिया यहाँ काम नहीं करेगा। अगर सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भ को ध्यान में नहीं रखा गया, तो ये फैसले प्रेम को बचाने की बजाय शोषण को वैध कर सकते हैं। सरकार और समाज को मिलकर एक ऐसा रास्ता निकालना होगा, जो किशोरों के हितों की रक्षा करे, लेकिन साथ ही शोषण करने वालों को कोई मौका न दे।

मृत्यु दर घटी, जच्चा-बच्चा की जान बची… घर-घर जब पहुँचा साफ पानी: बुंदेलखंड के 70 गाँवों की ‘जल जीवन मिशन’ ने बदली तस्वीर, रिसर्च में खुलासा

जल जीवन मिशन यानी जेजेएम बुंदेलखंड के विकास में मील का पत्थर साबित हो रहा है। बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी ने अपने स्टडी में इसकी जानकारी दी है। जल जीवन मिशन योजना के तहत हर घर जल परियोजना का फायदा 7 जिलों के 70 गाँवों को हो रहा है। इससे ये पता चलता है कि कैसे पाइप से पीने के पानी ने स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, सामाजिक संरचना और ग्रामीण विकास में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं?

सामाजिक कार्य विभाग ने राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के अनुरोध पर यह अध्ययन किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शोध का निष्कर्ष क्षेत्र- सर्वेक्षण, सामुदायिक साक्षात्कार और जमीनी अवलोकन पर आधारित हैं। अध्ययन में गुणात्मक सुधार और परिवर्तन की मानवीय कहानियों दोनों को शामिल किया गया है।

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी ने अपने अध्य्यन में कहा कि 7 जनपदों में 10-10 गाँवों में सर्वे किया है। इसमें कहा गया है कि इन गाँवों में हर परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। इससे लोगों की सेहत में सुधार आया है। पाचन समेत जल से होने वाली बीमारियों से लोगों को छुटकारा मिल रहा है।

यूनिवर्सिटी की टीम ने ढाई महीने में ये शोध किया है। 4 संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं की एक टीम ने बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, झांसी, जालौन, महोबा और ललितपुर के दस-दस गाँवों को कवर किया। टीम का नेतृत्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. यतींद्र मिश्रा ने किया। अध्ययन में महिलाओं, युवाओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूली शिक्षकों, छात्रों और लाभार्थियों के साथ बातचीत को शामिल किया गया है।

डॉ. यतीन्द्र मिश्रा ने कहा, “हर घर जल पहल ने पानी उपलब्ध कराने से कहीं ज़्यादा काम किया है। इसने उन लोगों को सम्मान, स्वास्थ्य और स्थिरता प्रदान की है जो लंबे समय से पानी की कमी से जूझ रहे थे। लेकिन अब हमें पानी की उपलब्धता से जिम्मेदारी की ओर बढ़ना होगा और संरक्षण और स्थिरता को ग्रामीण प्रगति के अगले चरण का केंद्र बनाना होगा।”

रिपोर्ट में स्वास्थ्य सुधार, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन, सामाजिक सामंजस्य और दृष्टिकोण समेत पाँच बिन्दुओं पर अध्ययन किया गया है।

शिक्षा पर योजनाओं का असर

जल जीवन योजना में हर स्कूल शामिल है। स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और स्कूल छोड़कर जाने वाले बच्चों की संख्या कम हुई है। स्कूल की टंकी में अब पानी रहता है। शौचालय की व्यवस्था होने की वजह से लड़कियों की संख्या स्कूल में बढ़ी है।

मातृ मृत्युदर में कमी

इन गाँवों में माँओं की मृत्युदर में कमी आई है। बच्चे-जच्चे की सेहत में सुधार हुआ है। दूर से जल लाने की वजह से महिलाओं के गर्दन और कमर में दर्द रहता था जिससे निजात मिली है। दूषित जल से ग्रामीणों को मुक्ति मिली है। दुषित जल से हड्डियाँ कमजोर होती है। इसके इलाज में काफी खर्च होता है।

आर्थिक और सामाजिक फायदा

शुद्ध पेयजल की मौजूदगी से रहन-सहन का स्तर ऊपर उठा है। लोगों के बीच भेदभाव में कमी आई है। महिलाएँ सेहतमंद हो रही हैं जिससे खेती-बाड़ी, पशुपालन और दूसरे उत्पाद में भागीदारी बढ़ी है। महिलाओं के रोजगार में वृद्धि हुई है। महिलाओं के चिकित्सा खर्च पर 95 फीसदी कमी आई है।

जातिगत दूरियाँ हुई कम

गाँवों में सामाजिक संबंध मजबूत हुए हैं। लोगों के बीच आपसी सहयोग में वृद्धि हुई है साथ ही सामाजिक तनाव में कमी आई है। महिलाओं का आत्मबल मजबूत हुआ है। ग्रामीण सामाजिक समरसता मजबूत हुई है। बाल विवाह और दहेज प्रथा में 93 फीसदी कमी आई है।

स्वरोजगार में बढ़ोतरी

गाँव में स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं। कृषि लायक जमीन बढ़ी है क्योंकि बंजर जमीन को जल मिल रहा है। इससे फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है। सरकार के स्वरोजगार का काम आगे बढ़ा है जिससे युवाओं का पलायन कम हुआ है। कृषि और पशुपालन के कार्य बढ़ रहे हैं। स्वरोजगार के कारण करीब 92 फीसदी युवाओं ने गाँव में रहने को प्राथमिकता दी है

PM मोदी ने दाहोद को दी ₹24 हजार करोड़ की सौगात, दिखाई पहली ‘इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव’ को हरी झंडी: वडोदरा के रोड शो में कर्नल सोफिया कुरैशी के भाई-बहन से भी मिले

पीएम मोदी दो दिनों के गुजरात दौरे पर हैं। उन्होने दाहोद में पहले इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव संयत्र का उद्धाटन किया। सोमवार (26 मई 2025) को पीएम वडोदरा में रोड शो करने के बाद दाहोद पहुँचे थे। पीएम ने जिस लोकोमोटिव विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया है उससे रेलवे के बुनियादी ढाँचे और माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।

इसके अलावा पीएम मोदी ने 24 हजार करोड़ रुपए की लागत से कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया। गुजरात के इस पहले रेलवे यूनिट से लोकोमोटिव इंजन, बोगियाँ वगैरह बनाई जाएगी। लोकोमोटिव इंजन से 4600 टन के कार्गो का वहन होगा। इस लोकोमोटिव संयंत्र में 10 साल में 1200 इंजन तैयार किए जा सकेंगे। इनमें से कुछ का निर्यात किया जा सकेगा।

यहाँ बनने वाले लोकोमोटिव इंजन से देश की जरूरत पूरी होगी और ‘मेक इन इंडिया’ के तर्ज पर इसे बनाया जाएगा। पीएम मोदी ने न सिर्फ इस संयंत्र का उद्घाटन किया बल्कि इंजन में बैठकर इसकी पूरी जानकारी भी ली। इस दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और गुजरात के सीएम भी मौजूद रहे।

पीएम मोदी के रोड शो में सड़क के दोनों ओर काफी संख्या में लोग मौजूद रहे। रोड शो के दौरान भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी का परिवार भी था जिन्होने पीएम मोदी का पूरे उत्साह के साथ माला पहनाकर स्वागत किया।

कर्नल सोफिया कुरैशी के भाई संजय कुरैशी के मुताबिक “पहली बार पीएम मोदी को देखा। उन्होने इशारों में हमारा अभिवादन किया। मैं रक्षा बलों और भारत सरकार का आभारी हूँ” वहीं उनकी जुड़वाँ बहन शायना सुनसारा ने कहा कि पीएम से मिलकर उन्हें अच्छा लगा। मेरी बहन पूरे देश की बहन है और उससे सबको प्रेरणा मिलती है।

पीएम मोदी सोमवार और मंगलवार गुजरात के दौरे पर हैं। इस दौरान पीएम 77 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाओं की शुरुआत करने जा रहे हैं।

जिनको साथ मिलाकर रची शेख हसीना के तख्तापलट की साजिश, अब वही मोहम्मद यूनुस को कर रहे डंडा: बांग्लादेशी फौज भी नाराज, यूँ ही नहीं भारत के खिलाफ शुरू किया प्रलाप

बांग्लादेश वर्तमान में राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट कर सत्ता में आए मोहम्मद यूनुस की कुर्सी डगमगा रही है। उनकी अंतरिम सरकार और फ़ौज के बीच तनातनी जगजाहिर हो गई है। मोहम्मद यूनुस अपनी सत्ता जाने के डर से भारत विरोधी प्रलाप पर उतर आए हैं। बांग्लादेश में चल रहे राजनीतिक संकट को यूनुस ‘भारत की साजिश’ करार दे रहे हैं। उन्होंने एक मीटिंग में यह बात कही है।

भारत रच रहा ‘बर्बाद’ करने की साजिश: यूनुस

बांग्लादेश में जारी उठापटक के बीच मोहम्मद यूनुस ने रविवार (25 मई, 2025) को एक बैठक बुलाई थी। यह बैठक बांग्लादेश के राजनीतिक दलों एवं अन्य संगठनों के साथ थी। इस बैठक में राजनीतिक दलों ने माँग की कि वह जल्द आम चुनाव करवाएँ। हालाँकि, मोहम्मद यूनुस ने चुनावों को लेकर कोई भी रोडमैप नहीं दिया और भारत के खिलाफ जहर उगला। मोहम्मद यूनुस ने कहा कि भारत जुलाई, 2024 के बाद बांग्लादेश में हुए बदलावों को स्वीकार नहीं कर रहा है।

इस बैठक में शामिल नागरिक ओइक्य परिषद के मुखिया महमूदुर रहमान मन्ना ने बताया, “उन्होंने (यूनुस) चर्चा की शुरुआत यह कहकर की कि हम एक बड़े संकट में हैं। इस संकट से उनका मतलब भारतीय के अपनी बढ़त स्थापित करने से था। भारत हमारे यहाँ आए बदलाव को कतई स्वीकार नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो भारत हमें एक दिन में खत्म करना चाहता हैं और इसके लिए वह हर संभव कोशिश कर रहा है।”

फ़ौज से चल रहा झगड़ा

मोहम्मद यूनुस यह बातें ऐसे समय में कह रहे हैं जब देश की फौज और आवामी लीग के प्रतिबंधित होने के बाद बची प्रमुख पार्टी BNP उनके खिलाफ हो गई है। मोहम्मद यूनुस ने अगस्त, 2025 में सत्ता हथियाई थी। तब लोगों को उम्मीद थी कि कुछ ही महीनों के भीतर चुनाव हो जाएँगे। हालाँकि, यूनुस अब खुद गद्दी पर बने रहना चाहते हैं। उन्होंने लगभग 10 माह बीतने के बाद भी चुनावों को लेकर कोई प्लान नहीं दिया है।

इसके चलते BNP उनसे खफा है। वहीं फ़ौज के मुखिया वकार उज जमाँ भी मोहम्मद यूनुस के खिलाफ हो गए हैं। हाल ही में मोहम्मद यूनुस की सरकार ने म्यांमार के रोहिंग्या की मदद के लिए एक कॉरिडोर संयुक्त राष्ट्र को देने का ऐलान किया था। इसका फ़ौज ने तगड़ा विरोध किया। फ़ौज के मुखिया जमाँ ने इसे सुरक्षा खतरा बताया और ‘बकवास’ करार दिया। इसके बाद मोहम्मद यूनुस की सरकार को पीछे हटना पड़ा।

इस्तीफे की धमकी भी नहीं आई काम

फ़ौज के मुखिया जमाँ ने यह सारी बातें आर्मी कमांडरों की एक कॉन्फ्रेंस में कही थीं। उन्होंने मोहम्मद यूनुस को दिसम्बर, 2025 तक चुनाव करवाने को भी कहा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि देश को चुनी हुई सरकार ही ढंग से चला सकती है ना कि बिना चुनाव के सत्ता में आए हुए लोग। इस सबके बाद मोहम्मद यूनुस ने इस्तीफ़ा देने की धमकी भी दी थी। हालाँकि, यह धमकी शाम तक फर्जी साबित हुई और यूनुस ने सत्ता छोड़ने में कोई ख़ास रुचि नहीं दिखाई।

इन सबके बाद अपनी कुर्सी बचाने को मोहम्मद यूनुस ने भारत पर दोष मढ़ना चालू कर दिया है। हालाँकि, भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह बांग्लादेश में लोकतंत्र समर्थक है और जल्द से जल्द चुनाव देखना चाहता है। बांग्लादेश के भारत विरोधी रवैये के बाद भी भारत ने अभी कोई सख्त कदम उसके खिलाफ नहीं उठाया है। लेकिन यूनुस का यह प्रलाप लगातार जारी है। अभी भारत ने इस पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है।

‘हरियाणवी दख़ल’ पर 2 खेमों में बँटी RJD: ‘मीसा बनाम तेजस्वी’ में बदला तेज प्रताप प्रकरण, बिहार चुनाव से पहले राजद में होना है अध्यक्ष का चुनाव

तेज प्रताप यादव के फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट आया, जिसमें उन्होंने एक नई लड़की को इंट्रोड्यूस करते हुए बताया कि ये अनुष्का यादव हैं और दोनों 12 वर्षों से रिलेशनशिप में हैं। कुछ घंटे बाद ही अकाउंट हैक होने और AI से छेड़छाड़ की बात कही गई। तबतक बात दूर तलाक जा चुकी थी – तेज प्रताप यादव और अनुष्का की कई तस्वीरें वायरल हो चुकी थीं। लालू यादव ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें पार्टी व परिवार से निष्कासित करने का ऐलान कर दिया था। उधर निशु यादव के रूप में तीसरी किरदार आ गईं, अनुष्का यादव के कथित चैट्स में उनका नाम आया।

ऑपइंडिया पर ही प्रकाशित पिछले लेख में हमने समझाया था कि कैसे अनुष्का यादव मानती हैं कि तेज प्रताप यादव को तेजस्वी यादव ने मालदीव भेजा था, निशु यादव के साथ ‘बेबी प्लानिंग’ के लिए। उसी लेख में हमने ये भी बताया था कि कैसे अनुष्का के भाई आकाश यादव छात्र RJD के अध्यक्ष बने थे, फिर उनका प्रभाव बढ़ने लगा तो उन्हें पार्टी से निकाल बाहर किया गया। आकाश यादव ही तेज प्रताप का फेसबुक अकाउंट भी देखा करते थे, ये भी हमने बताया था। हम हम इस खेल के पीछे के सियासी खिलाड़ियों के हिसाब-किताब को देखेंगे।

एक बार फिर से मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं या संस्थान किसी भी दावे की पुष्टि नहीं करते हैं। सियासी हिसाब-किताब इसीलिए, क्योंकि RJD में बड़े स्तर पर परिवर्तन होने जा रहा है। प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक के चुनाव होने जा रहे हैं। ‘बिजुलिया बाबा’ जगदानंद सिंह पिछले 6 वर्षों से बिहार में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, लेकिन अब वो बिस्तर पकड़ चुके हैं। स्वास्थ्य कारणों से वो सक्रिय नहीं हैं। कमोबेस यही स्थिति लालू यादव की भी है, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इतना तो स्पष्ट है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष परिवार से होगा और प्रदेश अध्यक्ष परिवार का कोई क़रीबी।

RJD में होना है बड़ा परिवर्तन, प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक के चुनाव

शेड्यूल कुछ यूँ है कि 21 जून को प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव, 24 जून तक राष्ट्रीय परिषद की सूची की तैयारी, और 5 जुलाई को राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है। तेजस्वी यादव के पुराने क़रीबी और हरियाणा से बिहार में जाकर राज्यसभा सांसद बन बैठे संजय यादव का पूरा ज़ोर इसपर है कि पार्टी की कमान आधिकारिक रूप से तेजस्वी यादव के पास आ जाए। यानी, वो राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें। हालाँकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि परिवार में ही एक और शक्ति का उदय हो गया है।

लालू यादव के 9 बेटे-बेटियों में फ़िलहाल 4 ऐसे हैं जो बिहार में सक्रिय हैं – दो बेटे और दो बेटियाँ। उनमें से एक हैं – मीसा भारती। मीसा 2 बार राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं और 2024 लोकसभा चुनाव में पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुनी गई हैं। इससे पहले 2019 और 2024 में इसी सीट पर उन्हें हार मिली थी। पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि फ़िलहाल मीसा भारती अपने भाई तेज प्रताप यादव को फोन कर-करके समझा रही हैं और शांत रहने के लिए कह रही हैं। ये भी सामने आया है कि पार्टी की कमान दिए जाने के लिए तेज प्रताप यादव की पसंद तेजस्वी न होकर मीसा हैं।

मीसा भारती के पति शैलेश कुमार के बारे में कहा जाता है कि उनकी छवि कुलीन है, लालू परिवार के विपरीत है। उनसे मिलने-जुलने वाले लोग उनके व्यवहार की तारीफ़ करते हैं, साथ ही उनका 4 वर्ष पूर्व तारापुर उपचुनाव में शैलेश को काउंटिंग एजेंट बनाया गया था। वो कम्प्यूटर इंजीनियर हैं, ऐसे में पार्टी ने उनकी इस क्षमता का भी इस्तेमाल किया था और IT वॉररूम उनसे तैयार करवाया था। 2018 में 8000 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED ने शैलेश से पूछताछ की थी, उनका फार्महाउस भी सीज किया गया था।

मीसा भारती और रोहिणी आचार्य – दोनों बहनें अलग-अलग खेमों में

लोकसभा में मीसा भारती की जीत और उनके पति की बुद्धिजीवी वाली छवि से क्या तेजस्वी परेशान हैं? या फिर तेजस्वी यादव के लिए पार्टी में बल्लेबाजी करने वाली ताक़तें परेशान हैं? 2024 लोकसभा चुनाव की तरफ एक बार फिर चलते हैं। याद कीजिए, लालू-राबड़ी की दो बेटियाँ चुनाव लड़ी थीं। पाटलिपुत्र से मीसा और सारण से रोहिणी आचार्य। रोहिणी को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें हराने वाले राजीव प्रताप रूडी इससे पहले उनकी माँ राबड़ी देवी को भी हरा चुके हैं। पिता को किडनी डोनेट करने के कारण रोहिणी को सहानुभूति का भी लाभ मिलेगा, पार्टी में ऐसी भी चर्चा थी।

लालू यादव किडनी प्रत्यर्पण के लिए रोहिणी आचार्य के सिंगापुर स्थित आवास पर जाकर कई दिनों तक चुके थे। इस दौरान रोहिणी आचार्य अपने बच्चों की नाना के साथ तस्वीरें भी साझा करती थीं। परिवार ने उनके लिए सारण में एक तरह से डेरा डाल दिया था। ख़ुद लालू यादव कार्यकर्ताओं से वन-टू-वन मुलाक़ात कर रहे थे, RJD दफ्तर का उद्घाटन करने पहुँचे थे। लालू यादव ने सारण में घूम-घूमकर कहा था कि ये उनका अंतिम चुनाव प्रचार है। लेकिन, पाटलिपुत्र में मीसा भारती की जीत ने उनका क़द बढ़ा दिया। जबकि रोहिणी आचार्य सिर्फ़ सोशल मीडिया तक ही सिमट कर रह गईं।

ध्यान दीजिए, जैसे ही लालू यादव के आधिकारिक ‘X’ हैंडल से तेज प्रताप यादव को पार्टी से 6 वर्ष के लिए निष्कासित किए जाने का ऐलान किया गया, रोहिणी आचार्य ने खुलकर इसका समर्थन किया। तेज प्रताप यादव ने भी मीडिया के सामने आकर इसका समर्थन किया। लेकिन, मीसा भारती की तरफ से अबतक कोई बयान नहीं आया है। उनपर दबाव है बयान देने का, लेकिन माना जा रहा है कि मीसा भारती इस लड़ाई में तेज प्रताप यादव के साथ हैं। कारण – मामला अब तेज प्रताप यादव बनाम संजय यादव का है, पहले भी था।

संजय यादव की ‘हैंडलिंग’ के खिलाफ पार्टी में आक्रोश

तेज प्रताप यादव किसी भी तरह संजय यादव को पटना से बेदखल करना चाहते हैं। कोई व्यक्ति हरियाणा से आकर न केवल राज्यसभा सांसद बन जाए बल्कि परिवार व पार्टी के निर्णयों को भी प्रभावित करने लगे, तो अलग-थलग पड़े तेज प्रताप यादव को परेशानी होनी आश्चर्यजनक नहीं है। यही कारण है कि ये पूरा खेल मीसा बनाम तेजस्वी के रूप में भी परिवर्तित हो रहा है। जब से आकाश यादव को निकाला गया, तभी से तेज प्रताप बागी बने हुए हैं। लालू परिवार के करीबियों ने ये भी खुलासा किया है कि तेज प्रताप के पीछे निशु सिन्हा को मालदीव भेजने वाले तेजस्वी यादव अकेले नहीं थे। इसके पीछे पूरा राबड़ी देवी का दिमाग था।

परिवार के क़रीबी सूत्रों द्वारा हमें ये बताया गया है कि निशु सिन्हा को मालदीव भेजा गया और फिर उसके बाद किसी ने तेज प्रताप व निशु सिन्हा की तस्वीरें वहाँ से अनुष्का को भेज दी और इसके बाद अनुष्का ने बग़ावती तेवर अपना लिए। तो क्या तेज प्रताप यादव ने लड़ाई-झगड़े के बाद अपने प्यार को साबित करने के लिए फेसबुक से अनुष्का के साथ तस्वीर डालकर रिलेशनशिप की बात स्वीकार कर ली? लेकिन, इसके बाद जो तस्वीरें और वीडियो एक-एक करके वायरल हुए, उनके पीछे किनका हाथ था फिर? उनका ही, जिनकी पूरी ‘प्लानिंग’ थी?

जहाँ तक आकाश यादव की बात है, उनसे मिलने-जुलने वाले बताते हैं कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ तो हैं, लेकिन उतनी नहीं जितनी सुभाष यादव या साधु यादव की थी। फ़िलहाल उन्होंने भी चुप्पी ही साध रखी है। उधर तेज प्रताप यादव अब भी परिवार के साथ सबकुछ ठीक करने में लगे हुए हैं, अगर वो असफल रहते हैं तो जल्द ही उनका भी बयान आएगा। इंतज़ार कीजिए!

बिहार चुनाव को देख रहे पक्ष-विपक्ष के राजनीतिक खिलाड़ी

राजद में अब भी कन्फ्यूजन की स्थिति है कि मीडिया में इस पूरे प्रकरण को कैसे पेश किया जाए। वहीं भाजपा की रणनीतिक तैयारी शुरू हो गई है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के सहारे तेज प्रताप यादव को ‘कर्ण’ साबित करने की तैयारी है – उन्हें जितनी सहानुभूति मिलेगी आम जनता में, लालू यादव का परिवार उतना ही कमज़ोर होगा, तेजस्वी यादव उतने ही मजबूत होंगे। यहीं काव्य ‘रश्मिरथी’ की एंट्री होती है और ‘दे दो केवल पाँच ग्राम’ वाली पंक्तियाँ भाजपा के काम आ सकती हैं। तेज प्रातओ यादव BJP में नहीं जा रहे न पार्टी उन्हें ले रही, लेकिन वो अब एक असेट हैं – हर एक लालू परिवार विरोधी के लिए।

दिल्ली में बैठे राजद के बड़े प्रवक्ता भी कह रहे हैं कि मामला अब बिगड़ चुका है। लालू यादव के हैंडल से पोस्ट आना किसी को रास नहीं आ रहा। सबको पता है लालू यादव के हैंडल से किसने पोस्ट किया है, इस ‘बाहरी दखल’ के खिलाफ भीतर ही भीतर राजद में आक्रोश है। परिवार ही नहीं, पार्टी भी दो गुट हो गई है। सोशल मीडिया के कुछ आईटी ट्रॉल्स को छोड़ दें तो पार्टी के भीतर जो एकाध बुद्धिजीवी हैं वो बहुत नाराज़ बताए जा रहे हैं।

ये भी बताया जा रहा है कि लालू यादव का स्वास्थ्य फ़िलहाल वैसा नहीं है कि वो ख़ुद से कोई बड़ा फ़ैसला ले सकें। फिर तेज प्रताप को निष्कासित करवाने में क्या उसी ‘बाहरी ताक़त’ का हाथ था? ख़बर है कि फ़िलहाल लालू परिवार कोलकाता का रुख कर सकता है, जहाँ तेजस्वी यादव की पत्नी राचेल गोडिन्हो (नया नाम – राजलक्ष्मी यादव) अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने वाली हैं। दिल्ली छोड़कर कोलकाता क्यों चुना गया, ये भी राजद के आंतरिक सर्कल में चर्चा का विषय बन रहा है। ख़ैर, ये परिवार का निजी मसला है।

कादिर को पकड़ने पहुँची पुलिस पर भीड़ ने किया हमला, पत्थरबाजी के बाद ताबड़तोड़ गोली चलाई: कॉन्स्टेबल सौरभ की हत्या, बाकियों ने भागकर बचाई जान

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रविवार (26 मई 2025) को कादिर नाम के एक वांटेड को पकड़ने गई पुलिस पर भीड़ ने पत्थरबाजी कर दी और ताबड़तोड़ गोलियाँ भी चलाईं। इस घटना में गोली लगने से एक कॉन्स्टेबल की मौत भी हो गई। कॉन्स्टेबल का नाम सौरभ था। उन्होंने कुछ समय पहले ही पुलिस विभाग ज्वाइन किया था।

नोएडा की क्राइम ब्रांच और फेस तृतीय थाना पुलिस मसूरी ने नहाल गाँव में वांटेड बदमाश कादिर को पकड़ने के लिए छापा मारा था और आरोपित को गिरफ्तार भी कर लिया था। जब पुलिस कादिर को लेकर जाने लगी तभी खेत के पास छिपे कादिर के कुछ परिजनों और साथियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। पुलिस टीम के अन्य सदस्यों ने इधर-उधर भागकर अपनी जान बचाई। मगर, सौरभ इसका शिकार हो गए।

इसमें गौतमबुद्धनगर के थाना फेस-3 में तैनात एक सिपाही सौरभ देशवाल के सिर में गोली लग गई। पुलिस उसे यशोदा हॉस्पिटल लेकर पहुँची, जहाँ जाँच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार इस हमल में सौरभ के अलावा कई अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। वहीं अन्य ने किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई।

घटना की सूचना मिलने के बाद जब भारी संख्या में पुलिस बल वहाँ पहुँचा, तो आरोपित कादिर भागने की फिराक में था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले को लेकर नोएडा के एक सब-इंस्पेक्टर की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, अन्य आरोपितों को जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कुछ जगह दावे हो रहे हैं कि हिस्ट्रीशीटर कादिर पर 23 साल की उम्र में 24 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

पहली से तलाक़, दूसरी की बदले की फुफकार, तीसरी से ‘बेबी प्लानिंग’… तेज प्रताप यादव की शादियों की शतरंज में पर्दे के पीछे कई खिलाड़ी, सियासी है बिसात

विवाह निजी जीवन का मसला होता है। कहते हैं, मियाँ-बीवी राज़ी तो क्या करेगा क़ाज़ी। लेकिन, हमने प्राचीन काल से लेकर अबतक, राजा-महाराजाओं से लेकर नेताओं तक को कूटनीति व राजनीति के लिए विवाह संबंध स्थापित करते हुए देखा है। भारत में विवाह सिर्फ़ एक लड़का और एक लड़की का नहीं होता है, दो परिवारों का होता है। तेज प्रताप यादव के विषय में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती और चन्द्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से उनकी शादी भी शायद दो राजनीतिक घरानों द्वारा एक और एक को मिलाकर ग्यारह बनाने की कोशिश थी।

हालाँकि, इस ‘ग्यारह’ ने अब बिहार के सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार के चेहरे पर ‘बारह’ बजा दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कंटेंट तो अबतक आपने देख ही लिए होंगे, इसीलिए बहुत कुछ दोहराने की ज़रूरत नहीं है। संक्षेप में ये समझिए कि तेज प्रताप यादव के फेसबुक हैंडल से एक पोस्ट होता है जिसमें वो अनुष्का यादव के साथ अपनी तस्वीर डालकर 12 वर्षों से रिलेशनशिप में होने की बात स्वीकार करते हैं। हंगामा होने पर ‘अकाउंट हैक होने’ और ‘AI से छेड़छाड़ कर तस्वीर बनाने’ जैसे बहाने मारकर यू-टर्न ले लिया जाता है।

इस दौरान लोग पूछते हैं कि अगर 12 वर्षों से तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव रिलेशनशिप में थे तो फिर उन्होंने 2018 में ऐश्वर्या राय से विवाह करके उनका जीवन क्यों ख़राब किया? ऐश्वर्या राय फिलहाल अलग रह रही हैं। तेज प्रताप पर उन्होंने घरेलू हिंसा और अजीबोगरीब व्यवहार का आरोप लगाकर ऐश्वर्या राय ने तलाक़ का मामला दायर कर रखा है। ख़ुद तेज प्रताप यादव एक पॉडकास्ट में बता चुके हैं कि ये शादी पॉलिटिक्स के लिए हुई थी। सारण के परसा में राय परिवार का प्रभाव है। पिता-पुत्र अबतक 13 बार MLA रह चुके हैं।

आइए, अब सोशल मीडिया पर चल रही इस कहानी को और अधिक न पेरते हुए सीधे शतरंज की उस बिसात पर चलते हैं जहाँ हर किरदार अपने-अपने मोहरे लेकर तैयार है और जो दिख रहा है उसे समझना उतना आसान नहीं है। पर्दे के पीछे जो खेल चल रहे हैं वो बिहार के विधानसभा चुनाव तक कई बड़े उथल-पुथल मचाने वाले हैं। लालू परिवार के क़रीबी दबी ज़ुबान से कह रहे हैं कि एक तरह से इस पूरे मामले में तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने के अरमान पर पानी फेर दिया है। वो अरमान, जो बीमार लालू यादव की अंतिम इच्छा मानी जाती है।

मैं यहाँ जो भी लिखने जा रहा हूँ, उसकी पुष्टि न मैं करता हूँ और न ही संस्थान। ये बता देना इसीलिए आवश्यक है, क्योंकि इस खेल में कोई भी टीम खुलकर अपना स्कोरकार्ड प्रदर्शित करने की इच्छुक नहीं है और दूसरी बात ये कि अभिषेक मिश्रा को अब तक न्याय नहीं मिला है ये याद रखा जाना चाहिए। अभिषेक मिश्रा, उसी BIT मेसरा का होनहार छात्र जिससे मैं पढ़ा हूँ। इसपर हम आगे चर्चा करेंगे लेकिन उससे पहले एक भविष्यवाणी ये नोट करके रख लीजिए कि इस पटकथा में क्लाइमैक्स तभी आएगा जब संजय यादव की पटना से विदाई होगी।

अनुष्का यादव के चैट्स, निशु सिन्हा नामक नई महिला की एंट्री

आइए, बातों को अधिक न घुमाते हुए सीधे तथ्यों पर चलते हैं। आजकल चैट्स बहुत कुछ बोलते हैं, उन चैट्स को ही देखते हैं। कथित चैट में बेचैन अनुष्का यादव किसी को मैसेज बताती हैं कि तेज प्रताप यादव और निशु सिन्हा मालदीव जा रहे हैं। इंस्टाग्राम पर मालदीव में ध्यान करते हुए तेज प्रताप यादव का वीडियो भी आया था। अब पता चल रहा है कि उनका विदेश जाना अनायास नहीं था। अनुष्का यादव को पहले ही पता था कि वो मालदीव जाने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार, असल में जाना अनुष्का को ही मालदीव था तेज प्रताप के साथ, लेकिन इस खेल में थोड़ा बदलाव हुआ।

तभी बेचैन अनुष्का यादव उस चैट में कहती हैं कि अब उन्हें मीडिया में आना होगा। साथ ही वो जानकारी देती हैं कि अभी उनकी तबीयत ख़राब है और वो अस्पताल में दाखिल हैं। ख़ैर, बात आगे बढ़ती है तो वो ख़ुद ही बताती हैं कि तेज प्रताप यादव 17 मई, 2025 को मालदीव जा रहे हैं और 23 को लौटने की योजना है। तभी बीच में एक और किरदार की बात आ जाती है – निशु सिन्हा। निशु सिन्हा कौन हैं, इस बारे में अनुष्का यादव को पहले से ही आईडिया था, तभी वो जिससे चैट कर रही होती हैं उनको बताती हैं कि निशु सिन्हा का तेज प्रताप के साथ क्या रिश्ता है?

हमें सूत्रों से मिले इस कथित चैट में वो ये भी कहती हैं कि तेजस्वी यादव ने ही तेज प्रताप और निशु सिन्हा को मालदीव भेजा है। क्यों? तो ‘बेबी प्लानिंग’ के लिए। इसके बाद इस चैट में जो आता है वो और चौंकाने वाला है, जो ये कहता है कि कभी शिवलिंग से लिपट कर दुग्ध स्नान करने तो कभी वृन्दावन में बाँसुरी बजाने वाले तेज प्रताप यादव ने एक नहीं बल्कि तीन-तीन शादियाँ कर रखी हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते, लेकिन सामने वाले शख्स ने जब तेज प्रताप और निशु के बीच रिश्ते के बारे में पूछा तो अनुष्का ने जो जवाब दिया वो गौर करने लायक है।

इस कथित चैट में अनुष्का यादव ने बताया, “तेज प्रताप यादव और निशु सिन्हा के बीच पति-पत्नी का रिश्ता है। वो शादीशुदा हैं।” सामने वाला शख्स चौंक कर पूछता है कि इसकी कितनी शादियाँ हैं भाई! इसपर जवाब दिया जाता है कि पहली ऐश्वर्या राय, दूसरी अनुष्का यादव यानी वो ख़ुद और तीसरी निशु सिन्हा। हम एक और दावा सूत्रों के हवाले से कर रहे हैं – जिस शख्स से अनुष्का यादव का ये चैट वायरल हो रहा है उसका नाम है – वो परिवार की ही रिश्तेदार हैं। राबड़ी देवी जब मुख्यमंत्री थीं, तब पूरे बिहार में उनके दोनों भाइयों साधु और सुभाष का दबदबा चलता था। सत्ता गई तो दोनों से लालू परिवार के रिश्ते भी तल्ख़ हो गए और अब तो दोनों भाई खुलेआम मीडिया के सामने ही जीजा से लेकर भतीजे तक पर गंभीर आरोप लगाते हैं।

तो चलिए, कहानी को आगे बढ़ाते हैं। महाभारत में द्रौपदी बदले की आग में जली थी, रामायण में सूर्पनखा बदले की आग में जली थी, सन् 2025 में फिर से एक नारी की बदले की आग धधक उठती है। अनुष्का यादव ने आगे लिखा, “शाम से लेकर सुबह तक न्यूज़ देख लीजिएगा दीदी। मैं बोली थी न बदला लूँगी। वो मालदीव गए हैं निशु सिन्हा के साथ।” जब सामने वाले शख्स ने कहा कि उन्होंने कोई न्यूज़ नहीं देखी है, तो अनुष्का ने फुँफकारा, “न्यूज़ अब चलेगी।” इस चैट में तेजस्वी यादव का नाम आना ये बताता है कि लालू परिवार को सबकुछ पहले से पता था, वरना बात ‘बेबी प्लानिंग’ तक नहीं पहुँचती। ध्यानार्थ, ये सब सूत्रों के हवाले से है और हम पुष्टि नहीं करते। चलिए, आगे बढ़ें?

जिन निशु सिन्हा का जिक्र आ रहा है, बताया जाता है कि उनका घर बिहार के ही खगौल में है। वहीं जिन अनुष्का यादव का जिक्र आ रहा है, उनकी कहानी BN कॉलेज से शुरू होती है जहाँ वो और तेज प्रताप एक साथ पढ़ाई करते थे। प्रेम कहानी में एक तीसरा किरदार भी है – आकाश यादव, अनुष्का का भाई। कहते हैं, आकाश की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ आकाश में पतंगों की तरह ऊँची उड़ती हैं। तेज प्रताप का हाथ सर पर पड़ा तो पार्टी में तेज़ी से उदय भी होने लगा। लेकिन, तथ्य तो ये है कि लालू यादव का अपनी राजनीतिक विरासत को लेकर हमेशा अपने छोटे बेटे तेजस्वी पर ही भरोसा रहा और दिल्ली में हुई कार्यकारिणी तक में वो ये ऐलान कर चुके हैं।

अनुष्का यादव के चैट्स
अनुष्का यादव के चैट्स
अनुष्का यादव के चैट्स
अनुष्का यादव के चैट्स

आकाश को बिहार छात्र राजद के अध्यक्ष पद से नवाज़ा गया। हालाँकि, इसे लेकर राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और तेज प्रताप के बीच टकराव भी सामने आया। कहते हैं, पार्टी के एक कार्यक्रम में उन्होंने पोस्टरों में तेज प्रताप को मुख्य बनाकर तेजस्वी को गोल कर दिया था। परिणामस्वरूप, गाज गिरी और हटा दिए गए। तेज प्रताप ने बगावत कर दी। 2021 की इन घटनाओं की कड़ी को आप आज से जोड़िए, बहुत कुछ समझ आ जाएगा। अब हम आपको इससे भी आगे की जानकारी देते हैं।

आकाश यादव अपने मेंटर तेज प्रताप यादव का सोशल मीडिया भी देखा करते थे। यानी, जैसे लालू-तेजस्वी के सोशल मीडिया हैंडल्स पर संजय यादव की छाप दिखती है वैसे ही तेज प्रताप यादव के फेसबुक पोस्ट आकाश यादव लिखा करते थे। एक और चीज गौर कीजिए – सामान्यतः ऐसे बड़े ऐलान ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से किए जाते रहे हैं, लेकिन तेज प्रताप यादव का ये पोस्ट फेसबुक से हुआ। खैर, ये चिंतन का विषय है। पोस्ट फेसबुक से ही क्यों हुआ, ‘X’ से क्यों नहीं?

भाई आकाश के लिए बहन ‘अनुष्का प्रताप यादव’ का इंस्टाग्राम पोस्ट

आकाश यादव को पार्टी के हटाए जाने के बाद बागी तेज प्रताप यादव इतने नाराज़ हो गए थे कि उन्होंने जगदानंद सिंह के खिलाफ न्यायपालिका का दरवाजा तक खटखटाने का ऐलान कर दिया था। उन्होंने घोषणा की थी कि जगदानंद सिंह पर जबतक कार्रवाई नहीं होगी तबतक वो पार्टी की किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। आकाश यादव ने भी खुलकर तेजस्वी यादव पर हमला बोलना शुरू कर दिया था। बाद में वो पशुपति कुमार पारस की LJP में शामिल हो गए थे।

निशु सिन्हा की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें वो लालू परिवार के साथ बिलकुल सहज नज़र आ रही हैं। एक तस्वीर में तो वो तेजस्वी यादव के साथ बैठी हुई हैं और एकदम सहज हैं। निशु सिन्हा पटना स्थित डॉन बॉस्को स्कूल में बतौर शिक्षक कार्यरत थीं। उनका नाम सामने आने के बाद इंस्टाग्राम पर ख़ुद को ‘अनुष्का प्रताप यादव’ लिखने वाले लड़की को समस्या होनी ही थी, सो हुई। निशु सिन्हा के भाई को भी दिल्ली में तमाम तरह की संपत्तियाँ दिए जाने की बातें चर्चा में हैं।

निशु सिन्हा (लाल ड्रेस में), जो डाउन बॉस्को स्कूल में पढ़ा चुकी हैं

अभिषेक मिश्रा को अबतक नहीं मिला न्याय, बोलने से डरते हैं लोग

बिहार में राजद से जुड़े कई लोगों को ये चीजें पहले से पता थीं, लेकिन कोई बोल नहीं रहा था। कभी लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य राँची स्थित BIT मेसरा में पढ़ती थीं और दोस्तों के साथ दशम जल-प्रपात घूमने गई थीं, इसी दौरान अचानक से उनकी मृत्यु हो जाती है। 15 मिनट में ऑटोप्सी हो जाती है और डूबने से मौत की बात कही जाती है। लड़का कोई साधारण परिवार से नहीं था। पिता डॉ सुभाष मिश्रा दिल्ली स्थित राममनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी थे। भाजपा नेताओं के मित्र थे।

अभिषेक के चेहरे पर एक गहरे कट का निशान था, ऊपर का एक दाँत टूटा हुआ था, उनके दाहिने पाँव पर जख्म था, पीछे से खोपड़ी भी फैक्चर्ड थी – लेकिन नहीं, ये तो ‘डूबने की दुर्घटना से हुई मौत’ थी। रागिनी वहाँ मौजूद थी, लेकिन कभी कुछ नहीं कहा इस पर। भ्रष्टाचार में जेल में बंद मधु कोड़ा 2006 में झारखंड के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, उनकी सरकार को लालू यादव की RJD का समर्थन था। खुद लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। रागिनी-अभिषेक के साथ जो 2 दोस्त भरत और विशाल थे, उन्हें मौके पर से सीधे मुख्यमंत्री आवास ले जाया गया। वहाँ से दोनों कहाँ गायब हुए, किसी को पता नहीं चला।

3 दिनों बाद जब वो सामने आए तो उन्होंने बताया कि अभिषेक मिश्रा और रागिनी यादव शादी की योजना बना रहे थे, दोनों परिवारों को इनकी दोस्ती के बारे में पता था। रागिनी कई बार अभिषेक के माता-पिता से मिल चुकी थी। कई बार उनके घर भी गई। जब डॉ मिश्रा अपने परिवार के साथ राँची पहुँचे तो राजद नेताओं ने उनलोगों को घेरे रखा। आज रागिनी अपने जीवन में ख़ुश हैं, जमकर राजनीतिक पोस्ट भी करती हैं। ससुर जितेंद्र यादव और पति राहुल यादव सपा के नेता हैं। जमीन के बदले नौकरी का जो रेलवे घोटाला है, इसमें दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में ₹150 करोड़ के मकान-प्लॉट सिर्फ ₹4 लाख में लालू परिवार ने खरीद ली। ‘AB एक्सपोर्ट्स’ नामक इस कंपनी के अधिकतर शेयर तेजस्वी यादव के नाम हैं, जबकि रागिनी यादव कंपनी में डायरेक्टर हैं। ED उनसे पूछताछ भी कर चुकी है।

तो बात ये है कि अभिषेक मिश्रा के साथ जो हुआ, वैसा किसी और के साथ हो जाए इसका डर बना रहता है। यही कारण है कि बिहार में पत्रकारों से लेकर नेताओं तक को बहुत सोच-समझकर बोलना पड़ता है।

तेज प्रताप यादव के मालदीव जाने से लेकर तस्वीरें लीक होने तक: ये सब एक्सीडेंटल नहीं

तेज प्रताप यादव का मालदीव जाना या उन्हें भेजा जाना, निशु सिन्हा का उनके साथ जाना, अनुष्का यादव को सब पता होना, तस्वीरें लीक होना, फिर चैट लीक होना और तेज प्रताप यादव को पार्टी व परिवार से निष्कासित किया जाना – RJD से जुड़े क़रीबी सूत्र बताते हैं कि ये सब महज संयोग नहीं है, ये क्रोनोलॉजी अपने भीतर कई राज़ छुपाए हुए है। राजद ने शुरुआत में वायरल हो रही तस्वीरों को सोशल मीडिया से हटवाने में रुचि नहीं दिखाई, ये भी हमारे सूत्र बताते हैं। ये सब पार्टी में फ़िलहाल संजय यादव ही देख रहे हैं। हरियाणा वाले संजय यादव तेजस्वी के पुराने रिश्तेदार हैं, पार्टी में फ़िलहाल जितनी उतनी चलती है उतनी किसी की नहीं, ख़ासकर के जगदानंद सिंह के बिस्तर पकड़ने के बाद से।

अब तीन-तीन लड़कियों से शादी कर उनका जीवन बर्बाद करने वाले तेज प्रताप यादव को दोषी बताया जाए या फिर उनके खिलाफ परिवार और पार्टी में ही बड़े स्तर पर साजिश के दावे को सही मानकर उनसे सहानुभूति जताई जाए? दोनों ही बातें हैं शायद, लेकिन लालू यादव और उनका पूरा परिवार इस प्रकरण में दोषी ही दोषी नज़र आ रहा है। सबकुछ पता होने के बावजूद निष्कासन का ड्रामा तब खेला गया, जब चीजें सार्वजनिक हुईं (या करवाई गईं?)। सुभाष यादव भी कह रहे हैं कि केवल लालू यादव ही नहीं, पूरे परिवार और समाज को इसके बारे में पता था।

बिहार की राजनीति में ऐश्वर्या राय और अनुष्का यादव – अहीर परिवार की दो-दो लड़कियों के साथ अन्याय का मामला तूल पकड़ने वाला है। BJP जल्द ही इस मामले को आगे बढ़कर उठाती हुई दिखेगी। उसके अन्य घटक दल भी इस मुद्दे को लेकर लालू परिवार को निशाना बनाएँगे। पटना से लेकर मालदीव तक हुई इस हलचल के कारण दिल्ली में भी गहमागहमी है। इसी साल अक्टूबर में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। अभी इस प्रकरण की कई परतों का उधड़ना बाकी है, इंतज़ार कीजिए!

लालू जी, इधर-उधर की बात न करिए, ये बताइए कि ऐश्वर्या राय का तमाशा क्यों बनाया?

शुक्र है कि सोशल मीडिया का दौर है! शुक्र है कि बिहार जंगलराज से काफी आगे निकल चुका है! वरना इंतजाम तो तेज प्रताप यादव की ‘लव स्टोरी’ को हैकिंग और AI के दावों में दफना देने की थी। आशंका अनुष्का के अभिषेक हो जाने की थी। पर नेटिजन्स ने तेज प्रताप यादव और अनुष्का की तस्वीरों/वीडियो की बाढ़ लाकर लालू प्रसाद यादव और राजद को मजबूर कर दिया।

सवाल यह नहीं है कि ये तस्वीरें/वीडियो लीक कैसे हुई? किसने की? क्यों की? सवाल है कि सब कुछ जानते हुए भी ऐश्वर्या राय के जीवन को तमाशा क्यों बनाया गया? इसी सवाल को दबाने के लिए लालू यादव ने ‘नैतिकता’ और ‘पारिवारिक मूल्यों’ का बुर्का ओढ़कर तेज प्रताप यादव को परिवार और पार्टी से ‘बेदखल’ करने का ऐलान किया है।

संभव है कि बिहार में विधानसभा चुनाव के पूर्ण होते ही इस बेदखली की समय सीमा भी समाप्त हो जाए। लेकिन लालू यादव का पाखंड इस बात से भी उजागर होता है कि जिस नैतिकता और पारिवारिक मूल्यों का हवाला देकर वे स्वजातीय अनुष्का यादव को ठुकरा रहे हैं, उन्हीं नैतिकता और पारिवारिक मूल्यों के साथ उन्होंने अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव की पत्नी के तौर पर ईसाई महिला रचेल गोडिन्हो को राजश्री बनाकर कबूल किया है। फिर अपने ही स्वजातीय अनुष्का यादव को सार्वजनिक तौर पर बड़े बेटे की पत्नी के तौर पर स्वीकार करने में उनकी कौन सी नैतिकता, कौन से पारिवारिक मूल्य आड़े आ गए?

इस रिश्ते को स्वीकार करने से तो उनकी कथित नैतिकता और पारिवारिक मूल्य के साथ-साथ राजद की आधार जाति को भी मजबूती मिलती। यदि ऐसा न भी होता तो सब जानते हैं कि राजनीतिक तौर पर तेज प्रताप यादव को न तो लालू यादव के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता है और न ही उनका वैसा राजनीतिक प्रभाव है। उन्होंने कुछ मौकों पर पार्टी को हाँकने की कोशिश की, इस कोशिश में जगदानंद से लेकर रघुवंश बाबू तक को रेल गए, फिर भी खुद को न पार्टी में और न जनता की नजर में एक नेता के तौर पर स्थापित कर पाए। आश्चर्यजनक तौर पर जब राजद के इन बुजुर्ग नेताओं को सार्वजनिक तौर पर तेज प्रताप यादव ने अपमानित किया, तब भी लालू यादव की नैतिकता और पारिवारिक मूल्यों को कोई खतरा नहीं दिखा।

लालू यादव की यह नैतिकता और पारिवारिक मूल्य तब भी न जगे जब चंदा बाबू के बेटों को तेजाब से नहला दिया गया। नहलाने वाले को वे संसद में भेजते रहे। तब भी न जगी जब जंगलराज में फल-फूल रहे अपहरण उद्योग को खाद-पानी देने के लिए बिहार के लोगों के बच्चे उठाए गए। तब भी न जगी जब एक शादी के लिए शो रूम से फर्नीचर से लेकर गाड़ी तक जबरन उठा लिए गए और कारोबारी बिहार को छोड़कर चले गए। तब भी न जगी जब एक जाति को दूसरी जाति के खिलाफ खड़ा कर नरसंहार करवाए गए और सैकड़ों बच्चे अनाथ हो गए।

फिर अचानक से सजायाफ्ता लालू यादव के पारिवारिक मूल्य और नैतिकता एक प्रेम की स्वीकारोक्ति पर क्यों और कैसे जग उठी? इन्हीं सवालों का जब आप जवाब खोजते हैं तो पता चलता है कि लालू यादव जिस नैतिकता और पारिवारिक मूल्य की बात कर रहे हैं, असल में वह खोट पर खड़ी है। तेजस्वी यादव से लेकर रोहिणी आचार्य तक पप्पा के जिस मूल्यों की दुहाई दे रहे हैं, वह पारिवारिक राजनीति में एक काँटा के साफ होने की खुशी से अधिक कुछ भी नहीं दिखती।

सब जानते हैं कि बेटे ही नहीं, बल्कि बेटियों को भी राजनीति में सेट करने का लालू यादव पर भारी दबाव है। मीसा भारती के बाद अब रोहिणी आचार्य को विरासत में हिस्सा चाहिए। चंदा यादव, रागिनी यादव, हेमा यादव, अनुष्का राव और राज लक्ष्मी यादव भी अपना हिस्सा पाने के लिए लाइन में लगी हुई हैं। सबको सेट करने के लिए चाहिए सत्ता। बिहार की सत्ता।

ऐसे में जिस तरह से तेज प्रताप यादव की लव स्टोरी सार्वजनिक हुई, जिस तरह यह तथ्य सामने आया कि वे 12 साल से अनुष्का यादव के साथ रिलेशन में हैं, उसने लालू परिवार के उस छल को भी चर्चा में ला दिया जो उसने 12 मई 2018 को बिहार की ही अपनी एक स्वजातीय बेटी ऐश्वर्या राय के साथ किया था।

न किसी से प्रेम करना गुनाह है। न पति-पत्नी के रिश्तों में कड़वाहट आने के बाद उनका अलग हो जाना असामान्य है। इसलिए 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद जब ऐश्वर्या राय को ससुराल से बेइज्जत कर निकाला गया, तब बिहार के लोग इसे लालू यादव का पारिवारिक मामला मान आगे बढ़ गए। लेकिन आज अनुष्का के साथ 12 साल पुराने रिश्ते की सच्चाई सामने आई है तो इसने बताया है कि असल में लालू यादव का पारिवारिक मूल्य अपनी राजनीति के लिए किसी की भी बेटी की जिंदगी को तमाशा बना देना ही है।

आज राजनीति पर चोट पहुँचते देख उन्होंने तेज प्रताप यादव को बेदखल किया है, क्योंकि ‘माई-बहिन’ की बात कर बिहार की सत्ता में लौटने का ख्वाब पाल रही राजद और लालू परिवार को इस प्रकरण ने ‘माई-बहिन’ की नजरों में ही नंगा कर दिया है। लालू नहीं चाहते कि बिहार की ‘माई-बहिन’ इस चुनावी मौसम में ऐश्वर्या के न्याय की बात करें। पर लालू यादव और उनके कुनबे को पता होना चाहिए कि ये वो बिहार है, जिसकी नैतिकता और पारिवारिक मूल्य उनके तरह खोटे नहीं हैं। इन सवालों के बोझ तले दफन हो जाना ही अब उनकी नियति है।

1 पाकिस्तान के कितने अब्बा? भारत से सिंधु जल समझौता रद्द करने का बदला चीन से लेने की लगाई गुहार, लाहौरी पत्रकार ने अमेरिकी मैगजीन में लिखा- ब्रह्मपुत्र का पानी रोक दो

पाकिस्तान के लोग या तो अपनी ही दुनिया में जीते हैं या फिर कुछ ऐसा चटक लेते हैं जो इतना तगड़ा है कि दिमाग सातवें आसमान पर चला जाता है। वरना कोई बताए, लाहौर के ‘पत्रकार’ उमैर जमाल ने जो तमाशा मचाया है, उसे क्या कहेंगे? इन्होंने अमेरिका की मैगजीन ‘द डिप्लोमैट’ में एक ऐसा लेख ठोंक दिया है, जो हकीकत (मुमकिन) कम और पाकिस्तानी फसाना (फैंटेसी) ज्यादा लगता है।

बात ये है कि भारत ने इंडस वाटर ट्रीटी (IWT) यानी सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी का समझौता रद्द करने की बात कही, तो जमाल साहब को मिर्ची लग गई। और इस मिर्ची का इलाज करने के लिए इन्होंने न तो पाकिस्तानी नेताओं से बात की, न पाकिस्तानी आवाम से कुछ कहा.. बल्कि सीधे चीन को बुला लिया कि “भाई, आके भारत से बदला ले!”

हाँ, सही पढ़ा! जिस दुनिया में देश अपने झगड़े आपस में या कूटनीति से सुलझाते हैं, वहाँ पाकिस्तान… जो हमेशा का ‘टीनएजर’ है, अपने दो-दो ‘बापों’ को बुलाने की सोच रहा है। एक तो चीन, दूसरा अमेरिका। ये तो वही ‘तू जानता नहीं मेरा बाप कौन है’ वाला डायलॉग है, लेकिन मज़े की बात ये है कि जमाल साहब को शायद खुद नहीं पता कि उनका ‘बाप’ है कौन। अरे नहीं… हम असल बाप की बात नहीं कर रहे, बल्कि उस ‘डिप्लोमैटिक बाप’ की बात कर रहे हैं, जिसे पाकिस्तान हर बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर बुलाता है। और अभी-अभी उसके एक बाप ने भारत के हाथ-पैर तोड़कर उसे मरने से बचाया है और माफी माँग कर सीजफायर कराया है।

आतंकवाद पर सिल लिया मुँह, लेकिन भारत पर लगा दिया इल्जाम

दरअसल, जमाल साहब ने अपने लेख में एकदम फिल्मी स्टाइल में भारत को विलेन बनाया। लेकिन पहलगाम आतंकी हमले का ज़िक्र तक नहीं किया, जिसमें 26 बेगुनाह हिंदुओं की जान चली गई। ये हमला ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ ने किया, जो पाकिस्तान से चलने वाले लश्कर-ए-तैयबा का ‘हमशक्ल भाई’ है। लेकिन जमाल साहब को ये सब छोड़कर बस भारत की बुराई करनी थी। और कर भी दिया… कि “अरे, भारत ने पानी का समझौता तोड़ा, ये तो गलत है!”

अरे भाई, पहले अपने घर में पनप रहे आतंकवाद को तो देख लो! 26 लोगों की जान गई और तुम्हें एक लाइन भी निंदा के लिए नहीं सूझी? ये तो वही बात है कि कोई चोर चोरी करे और जब पकड़ा जाए, तो उल्टा असली मालिक को ही गाली दे।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दबाकर रेले गए पाकिस्तान से उम्मीद थी कि वो अपने यहाँ आतंकवाद पर लगाम लगाएगा, लेकिन जमाल साहब को लगता है कि भारत का जवाब देना गलत है। ये है उनकी ‘पत्रकारिता’! और वो भी कहाँ? अमेरिका की मैगजीन में! जैसे भारत से पंगा हुआ तो सीधे ‘मम्मी-पापा’ (यानी अमेरिका) को चिट्ठी लिख दी। और साथ में ‘मौसेरे भाई’ चीन (चोर-चोर मौसेरे…. समझ तो गए ही होंगे) को भी धमकी देने के लिए बुला लिया। अरे यार… ये क्या बात हुई? थोड़ा तो शर्म करो!

चीन को बुलाया, लेकिन…

जमाल साहब का लेख तो एकदम घटिया पाकिस्तानी सीरियलों वाले मसाले की तरह है। वो लेख में कहते हैं कि अगर भारत ने इंडस नदियों का पानी रोका, तो चीन ब्रह्मपुत्र नदी का पानी रोक देगा। अरे, ये तो वही बात हुई कि स्कूल में पिटने वाला बच्चा अपने बड़े भाई को बुलाए – “भाई आजा, इसे ठोक दे!”

वैसे, चीन तो कोई तुम्हारा पक्का यार भी नहीं है। चीन तो बस अपना बिजनेस देखता है। वो पाकिस्तान को कर्ज़ा देता है, ब्याज वसूलता है और अपने प्रोजेक्ट्स चलाता है। तुम्हारे कहने पर वो भारत से पंगा क्यों लेगा? और वैसे भी भारत ब्रह्मपुत्र पर चीन की हरकतों पर पहले से नजर रख रहा है। ये धमकी तो वैसी है जैसे कोई कहे, “मैं तुझे रेलने(मारने) वाला हूँ”, लेकिन उसके पास लाठी भी नहीं है!

जमाल साहब ये भी भूल गए कि भारत कोई कमजोर मुल्क नहीं है। भारत ने पहले ही चीन की दादागिरी का जवाब दिया है। तो ये सोचना कि चीन आएगा और भारत को डराएगा, ये तो एकदम खुली आँखों से देखे जाने वाला सपना(फैंटेसी) है। वो भी ऐसी-जैसे कोई नौसिखिया लेखक लिखे.. और फिर वो सोचे कि वही सबसे बड़ा उस्ताद है।

अमेरिकी मैगजीन में क्यों चिट्ठी?

अब सवाल ये है कि जमाल साहब ने ये सारी बातें पाकिस्तान के किसी अखबार में क्यों नहीं लिखीं? क्यों अमेरिका की मैगजीन में जाकर रोना रो रहे हैं? ऐसा लगता है कि पाकिस्तान अपनी बात को दुनिया के सामने ले जाकर भारत को घेरना चाहता है। शायद वो चाहते हैं कि अमेरिका या कोई और ‘बड़ा बाप’, बीच में आए और भारत को डाँट दे। ये वही पुराना तरीका है, जिसमें पाकिस्तान कश्मीर और पानी जैसे मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाता है। लेकिन भारत ने तो साफ कर दिया है, “सुन… ये मेरा और तेरा मसला है, इसमें किसी तीसरे को मत ला।”

वैसे, हम आपको बता दें कि भारत ने पाकिस्तान ही नहीं सारी दुनिया को बता रखा है कि अभी कोई ‘सीजफायर’ नहीं हुआ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना के बड़े अधिकारी बार-बार कह रहे हैं कि ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ अभी भी चल रहा है। मतलब साफ ही है कि भारत अपनी शर्तों पर काम करेगा, किसी के दबाव में नहीं।

पाकिस्तान खौरियाया कुत्ता – न घर का, न घाट का

जमाल साहब अपने कपड़े फाड़ के बार-बार धमकी दे रहे हैं कि अगर भारत ने पानी रोका, तो पाकिस्तान में ‘अराजकता’ फैल जाएगी। वो ये भी कहते हैं कि पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी ने ‘पानी के हितों’ की रक्षा की बात कही है। खैर, इसका हम क्या ही करें… तू पहले अपनी हालत सुधार.. फिर लड़ने की बात कर।

पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था IMF के कर्ज पर चल रही है। बिजली का बिल भरने के लिए कर्ज लेना पड़ता है। बाँध बनाने के लिए चीन से उधार माँगते हो। और फिर भारत को युद्ध की धमकी दे रहे हो? ये तो वैसी ही बात है जैसे कोई बर्बाद आदमी अपने पड़ोसी को धमकाए कि वो उसका पानी काट देगा, जबकि उसका अपना नल पहले ही बंद है।

बता दें कि पाकिस्तान ने हाल ही में IMF से 1 बिलियन डॉलर का कर्ज लिया और वो उस पर जश्न मना रहा है। पर कर्ज लेकर जश्न मनाना.. ऐसा सिर्फ पाकिस्तान और पाकिस्तानी ही कर सकते हैं। खैर, जमाल साहब.. अपने बरखुरदारों से तो जरा कह देते कि जनाब.. पहले अपना घर संभालो, पड़ोसी से बाद में लड़ लेंगे।

पानी पर भारत ने की मेहरबानी, लेकिन पाकिस्तान ने अच्छा सिला दिया

इंडस वाटर ट्रीटी कोई बंधन नहीं था, बल्कि भारत की मेहरबानी थी। 1960 में ये समझौता हुआ था ताकि भारत और पाकिस्तान के बीच पानी का बँटवारा शांति से हो। लेकिन जब पाकिस्तान की तरफ से आतंकवादी हमले हो रहे हैं, तो भारत क्यों चुप बैठे? भारत ने अभी तक पानी पूरी तरह रोका नहीं है, लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो वो ऐसा कर सकता है। और ये भारत का हक है। जमाल साहब को ये बात समझ नहीं आ रही। वो बस धमकी दे रहे हैं, लेकिन उनकी धमकियों में कोई दम नहीं है।

जमाल की पत्रकारिता पाकिस्तानी ड्रामे की तरह

जमाल का लेख पत्रकारिता कम, ड्रामा ज़्यादा है। ऐसा लगता है जैसे वो कोई पर्चा बाँट रहे हों, जिसमें लिखा हो, ‘दुनिया वालो, हमें बचा लो!’ वो भारत को डराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी बातें हवा में तीर छोड़ने जैसी हैं। अगर पाकिस्तान आतंकवाद को रोकने में मेहनत करता, अपनी अर्थव्यवस्था को ठीक करता, तो शायद उसे ऐसी चिट्ठियाँ लिखने की ज़रूरत न पड़ती। लेकिन इसके बजाय, वो दुनिया भर में जाकर रो रहा है। कभी अमेरिका से मदद माँगता है, कभी चीन को उकसाता है।

आखिर में… पाकिस्तान की ये आदत पुरानी है कि वो अपनी कमज़ोरियों को छुपाने के लिए भारत को दोष देता है। जमाल साहब ने तो पूरी कोशिश कर ली कि दुनिया भारत को विलेन माने और पाकिस्तान को बेचारा। लेकिन भारत अब वो पुराना भारत नहीं, जो चुपचाप सब सह ले। भारत ने साफ कर दिया है कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देगा, तो उसे इसका जवाब मिलेगा। और अगर पानी का समझौता तोड़ने की नौबत आई, तो भारत वो भी करेगा, बिना किसी डर के।

तो जमाल साहब, धमकी देना छोड़ो। अपने ‘बाप’ को बुलाने की बजाय, पहले अपने घर को संभालो। और हाँ, अगली बार अगर धमकी देनी हो, तो पहले ये पक्का कर लो कि तुम्हारा ‘बाप’ तुम्हारा है भी या नहीं!

(मूल रूप से ये लेख अंग्रेजी में लिखी गई है, जिसका भावानुवाद किया है श्रवण शुक्ल ने।)