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पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई पड़ी भारी, तुर्की का तेल निकालने में जुटे भारतीय: ‘आतंकियों के साथी’ का मार्बल-सेब नहीं बेचेंगे कारोबारी, टूरिज्म इंडस्ट्री पर भी संकट

तुर्की का जब भी मुश्किल समय आया तो भारत उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा। लेकिन ‘उम्माह’ का नया खलीफा बनने चले तैयब अर्दोगान ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के विरुद्ध खड़ा रहने का फैसला किया। पाकिस्तान ने भारतीय शहरों पर जो बायरकटर टीबी-2 ड्रोन दागे, वह उसे तुर्की से ही मिले थे। ऑपरेशन सिंदूर के बीच इस बात की चर्चा खूब रही कि तुर्की का एक विमान हथियारों के साथ पाकिस्तान में उतरा था।

तुर्की के साथ अजरबैजान की भी आतंकी मुल्क को समर्थन करने में कहीं न कहीं भागीदारी रही है। इन देशों का पाकिस्तान को समर्थन करने की खबर फैलते ही भारत में लोगों ने इनसे किनारा करने की ठान ली। यहाँ तक कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी #BoycottTurkey, #BoycottAzerbaijan और #NoTravelToTurkey जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

भारतीयों में तुर्की के खिलाफ आक्रोश सिर्फ यात्रा तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि भारत का हर वर्ग अब तुर्की को इसकी सजा देने को तैयार है। व्यापारियों ने भी तुर्की के सामानों के आयात से मनाही कर दी है। एक ओर व्यापारियों ने तुर्की से सेब, ग्रेनाइट मार्बल समेत अन्य सामान खरीदने बंद कर दिए तो वहीं आम लोगों ने भी तुर्की और अजरबैजान घूमने के लिए किए टिकट कैंसिल करवा दिए। इससे तुर्की के पर्यटन उद्योग पर काफी असर पड़ सकता है।

कंपनियों ने बंद की ट्रैवेल बुकिंग

तुर्की, अजरबैजान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों के बॉयकॉट के लिए ट्रैवल कंपनियों और उनकी वेबसाइटों ने यात्रियों को पाकिस्तान का समर्थन देने वाले देशों की टिकट न करने की सलाह दी है। कई साइटों पर बुकिंग बंद कर दी गई है।

इक्सिगो, ईजमाईट्रिप और कॉक्स एंड किंग्स जैसी बड़ी ट्रैवल कंपनियों ने पाकिस्तान और तुर्की के लिए टिकट बुक करना बंद कर दिया है। यहाँ तक किसी को ग्रुप के सीईओ आलोक बाजपेई ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह ऐलान कर दिया टिकट नहीं बुक करेंगे।

लोगों ने भी अपना देशप्रेम दिखाया और इन देशों की टिकट कैंसिल कर दी। न्यूज 18 की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईजमाइट्रिप के सह-संस्थापक प्रशांत पिट्टी ने बताया कि तुर्की के लिए 22% और अजरबैजान के लिए 30% लोगों ने अपनी टिकट कैंसिल करवाया है। 2024 में भारत से इन दोनों देशों में 3.8 लाख लोगों ने यात्रा की थी।

MakeMyTrip के प्रवक्ता ने कहा, “अज़रबैजान और तुर्की के लिए बुकिंग में 60% की कमी आई है जबकि इसी अवधि के दौरान करीब 250% बुकिंग कैंसलेशन में बढ़ोतरी हुई है। अपने देश के साथ एकजुटता और अपने सशस्त्र बलों के प्रति गहरे सम्मान के कारण, हम इस भावना का दृढ़ता से समर्थन करते हैं और सभी को अज़रबैजान और तुर्की की सभी गैर-ज़रूरी यात्राओं के खिलाफ सलाह देते हैं।”

तुर्की और अजरबैजान में भारतीयों की यात्रा रद्द करवाने से होने वाले नुकसान पर प्रशांत ने बताया कि अगर औसतन एक यात्री का खर्च 60 से 70 हजार रुपए माना जाए तो इस लिहाज से भारतीयों द्वारा लगभग 2500 से 3000 करोड़ रुपए इन देशों में खर्च किया जाता है।

व्यापारियों में भी गहरा आक्रोश

तुर्की के भारत के बीच व्यापार का एक बड़ा हिस्सा काम करता है। आतंकी मुल्क के साथ तुर्की की नजदीकी व्यापारियों को भी पसंद नहीं आई। तुर्की के बदलते हुए रुख को देखकर भारतीय व्यापारियों ने तुर्की के किसी भी सामान का आयात करने से मना कर दिया है।

इसी कड़ी में उदयपुर मार्बल प्रोसेसर्स कमेटी के अध्यक्ष कपिल सुराणा ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा, “भारत सरकार अकेली नहीं है। अपने देश के साथ हम सभी व्यापारी खड़े हैं।”
भारत में आयात होने वाले मार्बल का 70% हिस्सा तुर्की से आता है।

कपिल सुराणा ने बताया कि उदयपुर एशिया का सबसे बड़ा मार्बल निर्यातक है। उन्होंने आगे कहा, “हमारी समिति ने यह फैसला लिया है कि हम तुर्की के साथ व्यापार बंद कर रहे हैं। अगर हम तुर्की के साथ व्यापार बंद करते हैं तो भारतीय मार्बल की तो माँग बढ़ेगी। साथ में दूसरे देशों को भी ये संदेश पहुँचेगा कि भारत किसी भी फैसले को लेने में सक्षम है।”

तुर्की के सेब व्यापारियों से किनारा

मार्बल से पहले पुणे के व्यापारियों ने तुर्की के सेब व्यापारियों से किनारा किया था। व्यापारियों ने निर्णय लिया के अब तुर्की से सेब आयात नहीं करेगें। इसके बजाय देश में उगाए जा रहे सेब ही बेचे जाएँगे। व्यापारी अब केवल हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और ईरान से सेब खरीद रहे हैं।

तुर्की से आने वाला सेब पुणे में लगभग 3 महीने तक बेचा जाता है। इससे लगभग 1200 से 1500 करोड़ रुपए का कारोबार होता है।

पाकिस्तान से जुड़े हर सामान पर लगे प्रतिबंध

व्यापारियों के संघ कनफेडरेशन का ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय के मंत्री पीयूष गोयल से भारत में पाकिस्तानी झंडा टी-शर्ट समेत अन्य चीजों के बिक्री पर रोक लगाने की माँग की है।

CAIT राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भारतीय ने पीयूष गोयल को पत्र लिखकर कहा है कि ऑनलाइन और ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर पाकिस्तान के झंडा, लोगो, टी-शर्ट समेत कई अन्य चीजें बड़ी आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इन सभी को बैन किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी लिखा कि इस बात की भी जाँच की जानी चाहिए कि पाकिस्तान से जुड़े किन उत्पादों की बिक्री की अनुमति है। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए इस तरह के उत्पाद बेचने वाले प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

भारतीय ने पीयूष गोयल को लिखा, “राष्ट्रीय सुरक्षा और लोगों की भावनाओं को आहत करने वाले सामान बेचने वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।”

CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने भी इस बात पर जोर दिया कि भारतीय नागरिकों को तुर्की और अजरबैजान की यात्रा का बहिष्कार करने से इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं, विशेषकर उनके पर्यटन क्षेत्र पर काफी असर पड़ सकता है।

खंडेलवाल ने बताया कि तुर्की में 2024 में लगभग 6 करोड़ 22 लाख विदेशी पर्यटक गए। इनमें से लगभग 3 लाख पर्यटक सिर्फ भारत से थे। 2023 की तुलना में भारतीय पर्यटकों में 20.7 फीसदी की बढ़ोतरी भी हुई।

CAIT बीते कई वर्षों से चीनी उत्पादों के बहिष्कार के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चला रहा है। अब यह इस आंदोलन को तुर्की और अजरबैजान तक बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

घुटने पर आया तुर्की

भारतीयों के बहिष्कार से जाहिर तौर पर तुर्की को नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसे लेकर तुर्की के पर्यटन विभाग की ओर से कथित तौर पर एक पत्र एक्स पर वायरल हो रहा है। पत्र में अंकारा ने भारतीय पर्यटकों द्वारा बढ़ते बहिष्कार को इस रूप में प्रकाशित किया है कि भारतीयों के लिए तुर्की सुरक्षित है।

इस पत्र में भारतीय पर्यटकों को आश्वस्त किया गया कि भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव का तुर्की के सामान्य जनजीवन या पर्यटन माहौल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। तुर्की की स्थानीय आबादी की एक बड़ी संख्या को इस संघर्ष की जानकारी ही नहीं है। तुर्की में सभी पर्यटन गतिविधियाँ सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।

पत्र में यह भी लिखा गया है कि भारतीय यात्रियों का हमेशा की तरह पूरे सम्मान और आतिथ्य के साथ स्वागत किया जा रहा है। चाहे वह होटल हों, रेस्तरां, दुकानें या अन्य पर्यटन स्थल। सभी यात्रा ऑपरेशन पूर्ववत जारी हैं और भारतीय मेहमानों को लेकर किसी भी प्रकार की सुरक्षा या प्रतिबंध की स्थिति नहीं है।

इस पत्र से तो यह साफ जाहिर हो रहा कि तुर्की पर्यटन के बॉयकॉट को लेकर काफी डरा है और माहौल में नरमी लाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। लेकिन भारतीयों की मंशा साफ है कि जो देश के साथ नहीं, हम उसके साथ नहीं।

‘गाँव के सभी हिंदुओं को खत्म करना चाहते हैं मुस्लिम’: देवी स्थान से पूजा कर लौट रही थी बारात, दावा- मस्जिद के सामने दूल्हे के पिता की हत्या: बिहार पुलिस बता रही DJ का विवाद

बिहार के गया में एक मुस्लिम बहुल गाँव में हिन्दुओं पर बारात निकालने के दौरान हमला हुआ। इस हमले में दूल्हे के पिता की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। हमले में कई लोग घायल हुए हैं। लेकिन पुलिस ने मुस्लिमों के साथ साथ दूल्हे के परिजनों का नाम FIR में डाल दिया है। पुलिस का कहना है कि विवाद बरात में डीजे बजाने को लेकर हुआ, इसके चलते दो पक्षों में हुए पथराव के बाद गाँव में तनाव फ़ैल गया।

पुलिस ने बताया डीजे का विवाद

यह मामला गया जिले के गुरुडु प्रखंड में गुरुआ गाँव का है। ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़ित के परिजनों से भी बात की है। यहाँ 7 मई, 2025 को इसी गाँव में ननकु यादव के घर शादी का कार्यक्रम था। यहाँ बारात की विदाई से पहले गाँव के देवी स्थान पर पूजा करने के लिए बारात समेत तमाम हिन्दू गए हुए थे। वापस आने के दौरान मुस्लिम बहुल इलाके में मुस्लिमों ने उनसे लड़ाई कर दी। पुलिस ने बताया कि यहाँ मुस्लिमों ने हिन्दुओं से डीजे ना बजाने को लेकर दबाव डाला।

पुलिस के अनुसार, मस्जिद के सामने डीजे बजाने को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि पत्थरबाजी चालू हो गई, इसके चलते बारात में कई लोग घायल हो गए। पुलिस ने बताया है कि इस पथराव में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसकी मौत हो गई है। SHO सरफराज इमाम ने ऑपइंडिया को बताया कि वह मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज कर चुके हैं और आगे की कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कुछ लोगों को गिरफ्तार किए जाने की बात भी कही है। उन्होंने अभी का माहौल शान्तिपूर्वक होने की बात कही है।

इस मामले में दर्ज FIR में पुलिस ने चाँद, जाकिर, लुकमान, इलियास, शाइस्ता, राणा, शमीम समेत 25 लोगों को आरोपित बनाया है। इसमें कुछ हिन्दुओं का भी नाम है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी भी मौजूद है। कई लोगों का इलाज चल रहा है।

पीड़ित बोले- डीजे बंद था तब भी हुआ हमला

जहाँ पुलिस ने इस मामले में डीजे बजने पर विवाद होने की बात कही तो वहीं दूल्हे के बड़े भाई गया यादव ने कहा है इस दौरान डीजे बंद था। उन्होंने बताया कि मुस्लिम भीड़ ने उनके पिता की हत्या लाठी डंडों से पीट पीटकर बेरहमी से कर दी। उन्होंने बताया कि उनके दो चाचा भी लगातार लाठी लगने से गंभीर रूप से घायल हैं। यह बातें उन्होंने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिजनों को अस्पताल ले जाने के बजाय पुलिस ने जेल में बंद कर दिया है। उनके साथ मौजूद ग्रामीणों ने बताया है कि यहाँ मुस्लिम हिन्दुओं को ख़त्म कर देना चाहते हैं। एक ग्रामीण ने बताया कि इस्लामी त्योहारों के समय मुस्लिम हिन्दू घरों के सामने आकर चिढ़ाने के अंदाज में हरकतें करते हैं।

ग्रामीणों ने बताया है कि हिन्दुओं के त्योहारों के समय मुस्लिम दबाव बनाते हैं कि किसी भी तरह का जुलुस या DJ नहीं बजना चाहिए। मृतक के परिजन सोनू ने आरोप लगाया कि यह सब कुछ मुस्लिमों ने सुनियोजित ढंग से किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम दूल्हे को मारना चाहते थे लेकिन उसके ना मिलने पर पिता की हत्या कर दी।

सर्च एंड डिस्ट्रॉय… कश्मीर में लश्कर-TRF के कमांडर ढेर, हथियारों का जखीरा मिला: क्या है ‘ऑपरेशन केलर’, भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के साथ शुरू किया नया एक्शन

एक तरफ पहलगाम आतंकी हमले पर कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया है। वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ में आतंकियों को ढूँढ़कर उनका सफाया करने के लिए ‘ऑपरेशन केलर’ चलाया गया है।

‘ऑपरेशन केलर’ के तहत, भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ जिले के शोकल केलर इलाके में भारी गोलीबारी के दौरान 3 खूंखार आतंकवादियों को मार गिराया है। जानकारी के अनुसार मारे गए आतंकियों के पास से गोला असला और बारूद मिला है। इसमें ए के-46, लगभग 200 एके राउंड, कई मैगज़ीन, 3 ग्रेनेड और कुछ नकदी शामिल हैं।

मारे गए तीनों आतंकी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जु़डे़ थे। आतंकियों की पहचान शाहिद अहमद कुट्टे, अदनान शफी डार और अहसान अहमद शेख के रूप में हुई है।

आतंकियों को खत्म करने का मिशन ‘ऑपरेशन केलर’

ऑपरेशन केलर भारतीय सेना का एक खास अभियान है जो जम्मू और कश्मीर के शोपियाँ इलाके में चलाया गया। इस अभियान को 13 मई 2025 को आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत शुरु किया गया है। इस ऑपरेशन का सीधा मतलब है आतंकियों को ढूँढकर मारना यानि ‘सर्च एंड डिस्ट्रॉय’।

जी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक ‘ऑपरेशन केलर’ का नाम शोपियाँ के शोकल केलर क्षेत्र से लिया गया गया है, जहाँ से राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट को आतंकियों की खूफिया जानकारी हाथ लगी थी। केलर गाँव के शुकरू के जंगलों में आतंकी छिपे हुए थे, जिसे भारतीय सेना ने ढूँढ़कर खत्म किया है। इस ‘ऑपरेशन केलर’ की सूचना भारतीय सेना ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से दी।

अन्य जानकारी के अनुसार, भारतीय सेना ने ऑपरेशन केलर के तहत एक एक्शन वाला फोटो जारी किया है। फोटो में बताया कि ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसकी जवाबी कार्रवाई में सेना ने लश्कर-ए-तैयबा के 3 आतंकी ढेर किए।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, शोपियाँ का जंगली इलाका आतंकियों का गढ़ इसलिए बना है, क्योंकि यह इलाका घने जंगलों के बीच है और 100 मीटर की दूरी पर किसी भी हलचल के देख पाना मुश्किल है। शोपियाँ जिला सिर्फ 141 किमी दूर पीर पंजाल की पहाड़ियों से है। पीर पंजाल के आसपास कुपवाड़ा, उरी, तंगधार, पुंछ और राजौरी जैसे इलाके है, जहाँ आतंकी आसानी से घुसपैठ कर सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, शोपियाँ में आतकियों को लोकल सपोर्ट मिलता है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल के अनुसार घना जंगल और सेब का खेत होने की वजह से आतंकियों के लिए यह सेफजोन है।

ऑपरेशन केलर इसलिए चलाया गया ताकि इलाके से आतंकवाद को खत्म किया जा सके और वहाँ शांति बनी रहे। पहलगाम में हुए हमले के बाद लोगों में डर का माहौल था, इसलिए सेना ने यह सख्त कदम उठाया ताकि लोगों को भरोसा हो कि वे सुरक्षित हैं। यह ऑपरेशन दिखाता है कि भारतीय सेना आतंकियों के खिलाफ कितनी सख्त है और उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शने वाली नहीं है। अभी भी इलाके में तलाशी अभियान चल रहा है ताकि बचे हुए आतंकियों को भी पकड़ा जा सके।

अमेरिकी यूनिवर्सिटी को मुस्लिम-ईसाई-यहूदी के आयोजन कबूल, पर हिंदू हेरिटेज मंथ नहीं मनेगा: बर्कले यूनिवर्सिटी छात्र संघ के विरोध ने सनातन घृणा पर छेड़ी नई बहस

अमेरिका में यूसी बर्कले यूनिवर्सिटी छात्र संघ एएसयूसी यानी एसोसिएटेड स्टूडेंट्स ऑफ द यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया ने हिंदू हेरिटेज माह का विरोध किया है। ये हेरिटेज अक्टूबर में मनाने का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन छात्रसंघ ने इसके खिलाफ मतदान किया। दरअसल अलग-अलग महीने में दूसरे कई हेरिटेज मनाने का प्रस्ताव भी था, जो पास हो गया। हिन्दू हेरिटेज माह के प्रस्ताव को कथित तौर पर ‘हिन्दू राष्ट्रवाद’ से जोड़ा गया जो उस प्रस्ताव में भी नहीं था। प्रस्ताव पास नहीं होने से हिन्दू छात्र और संगठनों में काफी निराशा देखी गई।

राजनीति नहीं, सांस्कृतिक उत्सव पर आधारित प्रस्ताव

प्रस्तावित सीनेट प्रस्ताव संख्या 2024/2025-042 एक कैरेबियाई हिंदू छात्र द्वारा पेश किया गया था। यह मुख्य रूप से यूसी बर्कले और अमेरिकी समाज में हिंदुओं के योगदान को सराहने के लिए लाया गया था। प्रस्ताव में विज्ञान और प्रौद्योगिकी से लेकर कला और शिक्षा तक के क्षेत्रों में उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। इसमें कहीं भी भारत का नाम नहीं लिया गया था। इसके बावजूद कई छात्र सीनेटरों ने इस पर आपत्ति जताई। इनका कहना था कि ये हिन्दू राष्ट्रवादी विचारधारा को सही ठहराने की कोशिश है।

उत्तरी अमेरिका के हिंदुओं के गठबंधन (CYAN) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, “भारतीय और गैर-भारतीय मूल के हिंदू छात्रों में कई ऐसे हैं जो हिंदू राष्ट्रवाद के बारे में बहुत कम जानते हैं। ऐसे में हिन्दू हैरिटेज का जश्न मनाकर हम छात्रों को भारतीय राजनीति पर अपना रुख साफ के लिए मजबूर नहीं कर सकते।”

वहीं CYAN ने 5 मार्च 2025 को सार्वजनिक सीनेट बैठक के दौरान छात्र सीनेटरों द्वारा दिए गए “हिंदू विरोधी बयानों” की भी निंदा की। संगठन ने सीनेटर ईशा चंदर की आलोचना की, जिन्होंने कथित तौर पर एक सांस्कृतिक घोषणा का राजनीतिकरण किया और सीनेटर जस्टिन टेलर को धमकाने की कोशिश का विरोध किया। CYAN ने छात्र चुनावों के दौरान फेसबुक से बैठक की रिकॉर्डिंग को अस्थायी रूप से हटाने पर भी चिंता जताई, उन्होने कई सीनेटरों से हिंदू समुदाय और सीनेटर टेलर से माफी माँगने की बात कही।

CYAN ने प्रस्ताव और सीनेटरों के वक्तव्यों को किया साझा

चर्चा का एक वीडियो CYAN ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया है। इसमें अजीबोगरीब बातचीत सुनाई दे रही है, इसमें एक छात्र खुद का गला घोंट रहा है और ऐसे इशारे करता हुआ दिखाई दे रहा है जैसे कि उसे घुटन महसूस हो रही हो।

कुछ वक्ताओं ने कहा कि चूंकि हिंदू हैरिटेज माह दूसरे जगहों पर राजनीतिक आंदोलनों से जुड़ा रहा है, इसलिए सतर्कता जरूरी है। जबकि हिन्दू हेरिटेज माह का समर्थन करने वाले लोगों ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि ये गैर-राजनीतिक है और इसे भारतीय राजनीति के साथ जोड़ कर हिंदू समुदाय को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।

इस प्रस्ताव पर बहस के दौरान विरोधाभास साफ नजर आया। हिन्दू हेरिटेज माह का समर्थन करते हुए एक वक्ता ने कहा कि तीन धर्मों यहूदी, मुस्लिम और ईसाई को ASUC में औपचारिक प्रतिनिधित्व मिला हुआ है जबकि हिंदू अलग-थलग हैं। यूसी बर्कले यहूदी, मुस्लिम, ईसाई और लैटिन पहचान का जश्न मनाने पर गर्व करता है, लेकिन जब हिंदुओं की बात आती है, तो ASUC में विरोध के स्वर उठते हैं। एक सीनेटर ने इसकी तुलना “विचार को शौचालय में फ्लश करने” से की।

रंगीनमिजाजी में हनी ट्रैप हुआ पाकिस्तान का हाई कमिश्नर? होटल के कमरे में लड़की के साथ… किस्सों से बाजार गरम, बांग्लादेश से दुबई वाया इस्लामबाद भागा

बांग्लादेश में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर जैसे सबसे बड़े पद पर बैठे सैयद अहमद मारूफ की कथित रंगीन-मिजाजी की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स की मानें, तो सैयद अहमद मारूफ बांग्लादेश में समंदर के किनारे बसे कॉक्स बाजार इलाके के एक होटल में युवती के साथ रंगरेलियाँ मनाते रंगे-हाथ पकड़ा गया। इसी वजह से सैयद अहमद मारूफ बांग्लादेश से पाकिस्तान भाग गया है। खबरों के मुताबिक, मारुफ रविवार (11 मई 2025) को ढाका से दुबई होते हुए इस्लामाबाद के लिए निकल गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैयद अहमद मारूफ खान छुट्टी पर चला गया है और उसके बांग्लादेश छोड़ने की जानकारी बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय को दे दी गई है। इस दौरान उप उच्चायुक्त मुहम्मद आसिफ कार्यवाहक उच्चायुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहा है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार (9 मई 2025) को कॉक्स बाजार दौरे के दौरान मारूफ जाँच के दायरे में आए।

बीडी डाइजेस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद अहमद मारूफ को कॉक्स बाजार के होटल सी पर्ल में एक युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया। महिला की पहचान हफीजा हक शाह के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि होटल में मारूफ और हफीजा के अवैध संबंधों का खुलासा हुआ, जिससे राजनयिक हलकों में विवाद पैदा हो गया।

विवाद में फँसी बांग्लादेश बैंक की अधिकारी हफीजा हक शाह की फेसबुक प्रोफाइल से पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद अहमद मारूफ के साथ पुरानी तस्वीरें सामने आई। हालाँकि, विवाद बढ़ने के बाद महिला ने अपना फेसबुक अकाउंट डीएक्टिवेट या डिलीट कर दिया है।

बीडी डाइजेस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हफीजा अक्सर पाकिस्तानी दूतावास जाकर मारूफ से मुलाकात करती थी। न्यूज़ पोर्टल का कहना है कि इस मामले से जुड़े सबूत कई मीडिया संस्थानों के पास मौजूद हैं, लेकिन बांग्लादेश की यूनुस सरकार के प्रेस विंग के दबाव के चलते उन्होंने रिपोर्ट प्रकाशित नहीं किया। इस दबाव और बढ़ते विवाद के कारण पाकिस्तान को अपने हाई कमिश्नर को वापस बुलाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

पाकिस्तानी दूतावास ने अभी तक इस मामले पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है।

इस बीच, सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद अहमद मारूफ को कॉक्स बाजार के एक होटल में कथित रूप से आपत्तिजनक हालत में पकड़े जाने की तस्वीरें-वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।

यूज़र्स का दावा है कि मारूफ हनीट्रैप का शिकार हुआ है और उसका एक एमएमएस वीडियो भी सोशल मीडिया पर लीक हुआ है। हालाँकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटनाक्रम को लेकर अटकलें तेज़ हैं और मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।

कुछ यूजर्स का ये भी दावा है कि युवती के साथ रंगे-हाथों पकड़े जाने के बाद मारूफ थाईलैंड जैसे किसी तीसरे देश में भाग गया है।

ऑपइंडिया स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं कर रहा है।

गौरतलब है कि सैयद अहमद मारूफ को दिसंबर 2023 में बांग्लादेश में पाकिस्तान का हाई कमिश्नर बनाया गया था। हाई कमिश्नर का पद किसी भी हाई कमीशन में सबसे बड़ा पद होता है। सैयद अहमद मारूफ बांग्लादेश में पाकिस्तान के अहम एसेट थे, लेकिन उनकी कथित रंगरेलियों की वजह से उन्हें वापस बुलाने के लिए सरकार मजबूर हो गई।

क्या किराना हिल्स के आसपास के गाँव खाली कराए गए, न्यूक्लियर रेडिएशन लीक के सवाल का अमेरिका ने क्यों नहीं दिया जवाब? पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर स्ट्राइक के चर्चे

भारत ने 7 मई, 2025 को पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की कोशिश की। भारत ने इसका तगड़ा जवाब दिया और उसके 11 एयरबेस तबाह कर दिए। इसी के साथ यह भी रिपोर्ट्स सामने आईं कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु हथियार स्टोरेज फैसिलिटी पर हमला किया है। यह फैसिलिटी सरगोधा एयरबेस के साथ बनी किराना हिल्स बताई गई। हालाँकि, भारतीय वायुसेना ने इस हमले से इनकार किया, लेकिन लगातार आ रही सूचनाओं से किराना हिल्स को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं।

इससे पहले सोशल मीडिया में लगातार एक विमान को किराना हिल्स पर हमले से जोड़ कर देखा गया था। यह विमान अमेरिकी एनर्जी विभाग का बीचक्राफ्ट B350 था। इसको लेकर कहा गया था कि यह पाकिस्तान के भीतर परमाणु हथियार फटने के चलते हुए रेडियो विकिरण की जाँच करने आया है। यह भी दावे किए गए थे कि एक अमेरिकी टीम भी यहाँ जाँच करने आई है। इसको लेकर अब अमेरिका ने कोई भी जवाब देने से इनकार कर दिया है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय से 13 मई, 2025 को इस संबंध में प्रश्न किया गया था। इस प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगट से एक पत्रकार ने पूछा, “क्या अमेरिका ने पाकिस्तान में कुछ जगह परमाणु विकिरण के रिसाव की रिपोर्ट के बाद इस्लामाबाद या पाकिस्तान में कोई टीम भेजी है?”

इस पर टॉमी पिगट ने कहा, “मेरे पास इस पर कहने के लिए अभी कुछ नहीं है।” इसी पर पत्रकार ने आगे और भी सवाल जब पत्रकार ने करना चाहा तो प्रवक्ता पिगट ने इस सवाल को टाल दिया। उन्होंने आगे दोनों देशों के बीच सीजफायर पर बात चालू कर दी।

अमेरिका का इस सवाल को टालना इस पूरे मामले को और खिचड़ी बना गया। यदि अमेरिका ने ऐसी कोई टीम पाकिस्तान नहीं भेजी थी तो स्पष्ट रूप से इनकार कर सकता था। हालाँकि, उसने ना स्पष्ट रूप से इस पर इनकार किया और ना ही यह स्वीकार किया कि उसने कोई ऐसी टीम भेजी है।

इस बीच किराना हिल्स को लेकर और भी दावे सामने आ गए हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने बताया है कि पाकिस्तानी फौज किराना हिल्स के आसपास के गाँव खाली करवा रही है। इस संबंध में पाकिस्तान का एक वीडियो का हवाल दिया जा रहा है।

इस वीडियो को बना रहा शख्स एक गाँव दिखाता है जो खाली हो चुका है। इसमें यह व्यक्ति दावा करता है कि वह जिस गाँव में खड़ा है वह पूरी तरह से खाली हो चुका है और यहाँ कोई भी मर्द-औरत नहीं बचे हैं। वह बताता है कि इस गाँव को फ़ौज ने सख्ती से खाली करवा लिया है।

इस वीडियो में बोलने वाला शख्स परमाणु हथियार पर हमले और किराना हिल्स का नाम नहीं लेता। सोशल मीडिया पर दावा है कि यह वीडियो किराना हिल्स के पास गाँव का है। इसको लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन लगातार किराना हिल्स को लेकर आशंकाएँ जताई जा रही हैं।

किराना हिल्स पहाड़ का नाम है। यह इलाका पूरी तरह से पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने अपने कब्जे में ले रखा है। यहाँ पाकिस्तान ने पहाड़ के नीचे अपनी स्टोरेज फैसिलिटी बनाई हुई है, इसमें हथियार रखे जाते हैं। यह भी सामने आया है कि यहाँ पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियार छुपाए हुए हैं। 

सबसे पहले यहाँ के एक धमाके की वीडियो, उसके बाद पाकिस्तान के भीतर अमेरिकी विमान की आमद और फिर ईजिप्ट से कथित तौर पर बोरान लेकर आने वाले विमानों ने परमाणु हथियारों पर हमले की थ्योरी को बल दिया है। हालाँकि, इसको लेकर वायुसेना ने पूरी तरह से इनकार कर दिया था।

‘राजनयिक’ बन दिल्ली के पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात था ISI का एजेंट एहसान उर रहीम, पंजाब में गिरफ्तार जासूसों से मिला कनेक्शन: मोदी सरकार ने भारत छोड़ने का दिया आदेश

भारत ने मंगलवार (13 मई 2025) को नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में कार्यरत पाकिस्तानी नागरिक एहसान उर रहीम उर्फ दानिश को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ यानी आवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दानिश भारत में ISI के लिए जासूसी कर रहा था। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को पाकिस्तान के उच्च आयोग को इस बारे में सूचना दे दी है। साथ ही दानिश को 24 घंटे में भारत छोड़ने के निर्देश दिए हैं।

विदेश मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान में कहा, “भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में कार्यरत एक पाकिस्तानी अधिकारी को अवांछित व्यक्ति घोषित किया है क्योंकि वह भारत में अपने पद के अनुरूप काम नहीं कर रहा था। अधिकारी को 24 घंटे के भीतर भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। इस संबंध में पाकिस्तान उच्चायोग के कार्यवाहक राजदूत को एक विरोध पत्र (डिमार्शे) जारी किया गया।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब पुलिस ने पिछले सप्ताह अमृतसर में रहीम के लिए जासूसी कर रहे दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी की। रहीम इन लोगों के संपर्क में था। पंजाब पुलिस ने केंद्र सरकार को इस बारे में सूचना दी। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने रहीम को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया।

अप्रैल की शुरुआत में, भारत ने पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक साद अहमद वाराइच को दिल्ली में तलब किया और उसके सैन्य राजनयिकों को औपचारिक तौर पर ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ दिया।

भारत की ये कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद की गई है। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। मरने वालों से उनका धर्म पूछा गया और गैर मुस्लिम होने पर मार दिया गया।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि एक्शन के तहत पाकिस्तान उच्च आयोग की कुल संख्या को 55 से घटाकर 30 रह जाएगी।

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ किया। इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में 9 आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया गया।

अब्दुल समद ने पहले लक्ष्मी के पेट में चाकू घोंपा, फिर रेत दिया गला… क्योंकि उससे नहीं रखना चाहती थी रिश्ता: नागपुर से 300 किमी दूर आकर जबलपुर में की हत्या

जबलपुर के देवताल पहाड़ी पर शुक्रवार (9 मई 2025) को 18 साल की लक्ष्मी अहिरवार की बेरहमी से हत्या हुई थी। इस खौफनाक हत्याकांड का खुलासा पुलिस ने कर दिया है और हत्यारोपित अब्दुल समद (19) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करने में 48 से भी कम घंटे लगाए और सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए उसे पकड़ा। हत्यारा नागपुर भागने की फिराक में था। अब्दुल ने अपनी क्रूरता का इकबाल करते हुए बताया कि लक्ष्मी ने उससे दूरी बनाई, जिसके गुस्से में उसने हत्या की साजिश रची और उसे चाकू से गोदकर मौत के घाट उतार दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लक्ष्मी मूल रूप से छतरपुर के खजुराहो की रहने वाली थी। वह अपने परिवार के साथ जबलपुर में देवताल गार्डन के पास मंदिर निर्माण में मजदूरी करने आई थी। जनवरी 2025 में नागपुर में काम के दौरान उसकी मुलाकात अब्दुल से हुई। अब्दुल वहाँ वॉटर प्लांट में काम करता था। दोनों में दोस्ती हुई और फोन पर बातें शुरू हो गईं। लक्ष्मी के खजुराहो लौटने पर अब्दुल ने उसे 10 हजार का मोबाइल गिफ्ट किया। लेकिन मई से लक्ष्मी ने उसकी कॉल्स उठाना बंद कर दिया। अब्दुल को शक हुआ कि लक्ष्मी किसी और लड़के से बात करती है। उसने लक्ष्मी के पुराने फोन की कॉल हिस्ट्री देखी, जिसमें खजुराहो के एक लड़के से बातचीत का पता चला।

लक्ष्मी ने अब्दुल के मुस्लिम होने की वजह से रिश्ता तोड़ने का फैसला किया। यह बात अब्दुल को बर्दाश्त नहीं हुई। उसने ठान लिया कि वह लक्ष्मी को सबक सिखाएगा। 7 और 8 मई को वह लक्ष्मी से मिलने जबलपुर आया। 9 मई को उसने मिठाई लाकर लक्ष्मी से कसम खाने को कहा कि वह किसी और से बात नहीं करती। लक्ष्मी ने मिठाई खाने और कसम लेने से इनकार कर दिया। गुस्से में आगबबूला अब्दुल ने दो चाकू निकाले और लक्ष्मी पर ताबड़तोड़ वार किए। पहले पेट में चाकू घोंपा, फिर उसका गला रेत कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

हत्या के बाद अब्दुल मौके से फरार हो गया और शहर के एक होटल में छिप गया। वह नागपुर भागने की फिराक में था, लेकिन पुलिस ने उसकी मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स के आधार पर अंधमूक बायपास से गिरफ्तार कर लिया। अगर अब्दुल लक्ष्मी का मोबाइल अपने साथ ले गया होता, तो शायद वह पुलिस की पकड़ से बच सकता था। गढ़ा थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा की अगुवाई में बनी विशेष टीम ने सीसीटीवी, तकनीकी साक्ष्य और हत्या में इस्तेमाल चाकू बरामद कर लिया। अब्दुल ने पूछताछ में अपना गुनाह कबूल लिया और उसे केंद्रीय जेल भेज दिया गया।

यह घटना प्रेम में धोखे और धार्मिक अंतर की वजह से बढ़ी नफरत का नतीजा है। अब्दुल की दरिंदगी ने एक मासूम जिंदगी छीन ली।

जिस BSF जवान को छोड़ने पर मजबूर हुआ पाकिस्तान, उसके बदले अपने शौहर को छुड़ाना चाहती थी आतंकी यासीन मलिक की बीवी: अधनंगी पेंटिग्स बनाने वाली मुशाल मलिक का Video

आतंकी यासीन मलिक की पाकिस्तानी बीवी ऑपरेशन सिंदूर के बाद डरी हुई है। वह पाकिस्तान की सरकार से यासीन मलिक को वापस लाने के लिए सौदा करने को कह रही है। आतंकी की बीवी चाहती है कि पाकिस्तान रेंजर्स द्वारा पकड़े गए BSF जवान के बदले यासीन मलिक का सौदा हो। हालाँकि, ऑपरेशन सिंदूर के बाद खौफ में आए पाकिस्तान ने पहले ही BSF जवान को भारत को वापस सौंप दिया है। इस बीच यासीन मलिक की बीवी की वीडियो वायरल हो रही है।

यासीन मलिक का सौदा करने की कही बात

DAWN न्यूज चैनल पर एक पत्रकार के साथ इंटरव्यू में मौजूद आतंकी यासीन मलिक की बीवी मुशाल मलिक ने यह सारी बातें कही हैं। मुशाल मलिक ने इस इंटरव्यू में दावा किया कि उसकी अपने शौहर से बीते 6 सालों से कोई बात नहीं हो रही है क्योंकि सारी फोन लाइनें बंद हो चुकी हैं।

मुशाल मलिक ने इस बात की आशंका जताई कि आतंकी यासीन मलिक को भारत में फाँसी पर लटकाया जा सकता है। वायुसेना अधिकारियों को मारने वाले यासीन मलिक के खिलाफ कोई सबूत नहीं है, यह दावा भी मुशाल मलिक ने किया।

मुशाल मलिक ने इसके बाद यासीन मलिक का सौदा करने की बात चालू की। पहले उसने दावा किया कि एक भारतीय महिला पायलट शिवांगी सिंह पाकिस्तान के कब्जे में है, लेकिन बाद में खुद उसने स्पष्ट किया कि यह मामला नहीं है।

मुशाल मलिक चाहती थी कि कथित तौर पर पाकिस्तान के कब्जे में भारतीय महिला पायलट के बदले यासीन मलिक की माँग करे। हालाँकि, जब उसकी इन उम्मीदों पर पानी फिरा तो वह दूसरे सौदे में जुट गई। उसने कहा कि पाकिस्तान की सरकार रेंजर्स द्वारा हिरासत में लिए गए BSF जवान के बदले यासीन मलिक को रिहा करने की माँग करे।

मुशाल मलिक की यह बातें कुछ-कुछ 1999 के कंधार विमान हाइजैक से मिलती जुलती थीं। तब भी आतंकियों ने एक विमान हाइजैक कर भारतीय नागरिकों को अगवा किया था और उनके बदले आतंकी मौलाना मसूद अजहर को रिहा करवा ले गए थे।

मुशाल का यह पैंतरा हालाँकि इस बार नहीं चलने वाले क्योंकि BSF जवान को बुधवार (14 मई, 2025) को पाकिस्तान से वापस ले आया गया। पाकिस्तान को वैसे भी BSF जवान को छोड़ना ही पड़ता क्योंकि उस पर भारत का काफी दबाव था और वह स्वयं ही ऑपरेशन सिंदूर के बाद डरा हुआ था।

ऐसे में किसी आतंकी के बदले उसका सौदा हो ही नहीं सकता था। यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब मुशाल मलिक भारत के खिलाफ जहर उगलती रही है। वह पाकिस्तान में अपनी बेटी के साथ रहती है। उसका और उसकी बेटी का इस्तेमाल पाकिस्तानी फौज करती है। दोनों से भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चलवाया जाता है।

पाकिस्तानी सरकार में मिली थी जगह

मुशाल मालिक को 2023 में पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल काकर ने अपना सलाहकार बनाया था। उसे मानवाधिकार मामलों पर सलाहकार बनाया गया था। मुशाल को उसके भारत विरोधी प्रोपेगेंडा का इनाम दिया गया था। मुशाल एक आर्टिस्ट भी है जो अक्सर अपनी अधनंगी पेंटिंग्स को लेकर चर्चा में रहती हैं।

यासीन मलिक और मुशाल मलिक की जान पहचान 2005 में हुई थी। दोनों ने साल 2009 में निकाह किया। ये पूरी निकाह सेरेमनी लाइव टेलीकास्ट हुई थी। निकाह के समय मुशाल की उम्र 23 थी और यासीन 42 साल का था। मुशाल हुसैन मलिक अर्धनग्न पेंटिंग बनाती है।

मुशाल 6 साल की उम्र से पेंटिंग बनाती है और उनकी खासियत ही ये है कि वो अधनंगी औरतों की पेंटिंग बनाती है। उनकी कुछ पेंटिंग में जो महिला दिखती है उसे पीठ दिखाते, स्तन छिपाते देखा जा सकता है। वह पेस्टल, चारकोल के अलावा ग्लास पेंटिंग भी करती हैं वरना पहले वो वाटर कलर पेटिंग्स तक सीमित थीं।

कौन है आतंकी यासीन मलिक?

यासीन मलिक वो आतंकी है, जो कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार में सीधे तौर पर शामिल था। यासीन मलिक जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट नामक इस्लामी आतंकी संगठन चलाता था। लेकिन बाद में भारतीय सेना की कार्रवाई के डर से गाँधीवाद का ढोंग करने लगा था।

कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार में उसे खूब भाव दिया जाता था। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक उससे हाथ मिलाते दिखते थे। यासीन मलिक ने 4 भारतीय वायुसेना अधिकारियों की जम्मू-कश्मीर में हत्या कर दी थी। इस मामले में वह वर्तमान में जेल है। उसे उम्रकैद की सजा दी जा चुकी है।

यासीन मलिक सिर्फ इन हत्याओं में ही नहीं बल्कि अनेकों कश्मीरी पंडितों की हत्याओं में भी शामिल था। उसका नाम महबूबा मुफ़्ती की बहन रूबिया सईद के अपहरण में भी शामिल था। यासीन मलिक को मोदी सरकार आने के बाद आतंक के मामलों में प्रभावी रूप से सजा दी गई है।

राकेश बन बहारे आलम ने हिंदू माँ-बेटी को फँसाया, हरियाणा से UP लाकर निकाह-धर्म परिवर्तन की थी तैयारी: पुलिस ने पीड़िताओं को बचाया

उत्तर प्रदेश की शाहजहाँपुर पुलिस ने बहारे आलम और जाने आलम उर्फ छोटू नाम के सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। हिंदू माँ-बेटी को झाँसा देकर ये हरियाणा के फरीदाबाद से लेकर आए थे। नाबालिग लड़की से निकाह कर उसका धर्म परिवर्तन कराने की तैयारी थी।

हिंदू संगठनों से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर पीड़ित माँ-बेटी को बचाया। पीड़ित मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। फरीदाबाद में काम करने के दौरान राकेश बनकर बहारे आलम उनके संपर्क में आया था।

रिपोर्टों के अनुसार मुस्लिम युवक ने पहचान छिपाकर महिला और उसकी नाबालिग बेटी से दोस्ती की थी। बेटी की शादी कराने की बात कह कर महिला को झाँसे में लिया और 11 मई 2025 को उन्हें लेकर शाहजहाँपुर चले आए।

मामला शाहजहाँपुर के खुटार क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन बाद बहारे आलम ने अपने छोटे भाई जाने आलम उर्फ छोटू को भी फरीदाबाद बुला लिया। उसका भी परिचय हिंदू नाम से कराया गया था। लेकिन जब लड़की को छोटू के मुस्लिम होने की भनक लगी तो उसने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों भाई उस पर निकाह और धर्म परिवर्तन का दबाव डालने लगे।

ये बात जब हिन्दू संगठनों को पता चली तो उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस जब आरोपितों के घर पहुँची तो उन्हें हिन्दू महिला और उसकी बेटियाँ मिली। इनमें एक 15 साल की है, जबकि दूसरी 4 साल की है। पुलिस ने मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।