Home Blog Page 3703

₹1064 करोड़ का बैंक फ्रॉड: टीआरएस सांसद नागेश्वर राव के घर-दफ्तर पर ED ने मारा छापा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार (11 जून 2021) को 1,064 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड के मामले में तेलंगाना के खम्मम से टीआरएस के सांसद नामा नागेश्वर राव और ‘राँची एक्सप्रेस वे लिमिटेड’ के निदेशकों के घर और दफ्तर पर छापेमारी की।

तलाशी अभियान सुबह 7 बजे शुरू हुआ। इस दौरान ईडी ने 6 स्थानों पर सर्च अभियान चलाया, जिसमें सांसद नामा नागेश्वर राव के आवास व दफ्तर, हैदराबाद के जुबली हिल्स स्थित मधुकॉन इंफ्रा के ऑफिस, ‘राँची एक्सप्रेस वे’ के सीएमडी के. श्रीनिवास राव एवं इस कंपनी के दो अन्य निदेशकों – एन. सीतैया व पृथ्वी तेजा के आवास पर छापेमारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक से लोन दिलाने के मामले में नामा नागेश्वर राव पर्सनल गारंटर बने थे और पृथ्वी तेजा उनके बेटे हैं।

2019 में सीबीआई ने दर्ज की थी एफआईआर

साल 2019 में सीबीआई ने राँची एक्सप्रेस वे लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद केंद्रीय जाँच एजेंसी ने इस मामले में कंपनी और इसके निदेशकों के खिलाफ 2020 में चार्जशीट दाखिल की थी। सीबीआई की एफआईआर में उस दौरान मधुकॉन प्रोजेक्ट, मधुकॉन इंफ्रा, मधुकॉन टॉली हाईवे, ऑडिटर्स और बैंकों के एक कंसोर्टियम के अधिकारियों के भी नाम शामिल थे।

अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच कर रहा है। दरअसल, केनरा बैंक के नेतृत्व में बैंक्स प्रमोटरों के 503 करोड़ रुपए के सहयोग से 1,151 करोड़ की फंडिंग के लिए सहमत हुए थे।

इस केस में गंभीर धोखाधड़ी जाँच कार्यालय (एसएफआईओ) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रमोटरों ने 50 करोड़ रुपए में हेराफेरी कर रख-रखाव के रूप में 98 करोड़ रुपए का दावा किया और 94 करोड़ जुटाने के लिए एडवांस का इस्तेमाल कर लिया। इसके बाद 22 करोड़ रुपए को डायवर्ट कर दिया। इस तरह से कंपनी ने कुल 264 करोड़ रुपए का घालमेल किया।

सीबीआई ने कहा है कि अभी तक परियोजना में कोई प्रगति नहीं हुई है और आरोपितों ने 1,029 करोड़ रुपए का कर्ज हासिल करने के लिए धोखाधड़ी की है। 2018 में इस लोन को नॉन परफॉर्मिंग एसेट यानी एनपीए में डाल दिया गया था।

कंपनी को राँची से जमशेदपुर को जोड़ने वाले एनएच-33 पर 163 किलोमीटर लंबी फोर लेन सड़क का ठेका मिला था। मार्च 2011 में ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने मधुकॉन प्रोजेक्ट लिमिटेड को इसका ठेका दिया था। इसके बाद मधुकॉन लिमिटेड ने इस विशेष परियोजना के लिए राँची एक्सप्रेस वे लिमिटेड शुरू किया था।

हालाँकि, जनवरी 2019 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने अपने एग्रीमेंट को खत्म कर दिया था और कंपनी के 73 करोड़ रुपये को जब्त कर लिया था।

हिंदू पड़ोसी की पूजा में सिंगापुर की महिला ने तेज-तेज घंटा बजाकर डाला विघ्न, देखें Video

एक हिंदू व्यक्ति की पूजा पाठ में विघ्न डालने के मामले में सिंगापुर पुलिस 48 साल की एक महिला से पूछताछ कर रही है। महिला पर आरोप है कि उसका पड़ोसी जब अपने फ्लैट के बाहर पूजा कर रहा था, तभी महिला उसे तंग करने के लिए घंटा बजाने लगी। ऐसा करते महिला का एक वीडियो भी सामने आया है।

पुलिस ने बताया है कि शिकायत दर्ज होने के बाद महिला पूछताछ में सहयोग कर रही है। द स्ट्रेट्स टाइम्स के मुताबिक, 19 सेकंड के इस वीडियो को लिवानेश रामू ने बुधवार को फेसबुक पर पोस्ट किया था। वीडियो में दिख रहा है कि चश्मा पहना हुआ एक व्यक्ति अपने अपार्टमेंट यूनिट से बाहर आकर घण्टी बजा रहा है। यह हिन्दू पूजा-पाठ के दौरान बेहद आम है। लेकिन, कुछ देर बाद एक महिला अगले फ्लैट से बाहर निकलती है और करीब 15 सेकेंड तक घंटे को पीटती रहती है। 

इसके बाद आदमी जब नीचे बैठता है और घंटी बजाना बंद कर देता है, उस समय भी वह महिला लगातार घंटा पीटती रहती है। लिवानेश अपने फेसबुक पोस्ट में कहते हैं, “कई अन्य हिंदुओं की तरह हमारा परिवार हफ्ते में दो बार पाँच मिनट के लिए प्रार्थना करते हुए घंटी बजाता है। इस घर में हम 20 से अधिक वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन कभी कोई परेशानी हुई। मुझे लगता है कि कोविड-19 के कारण चीजें बदल गई हैं।’’ लिवनेश कहते हैं कि वह पुलिस की जाँच का इंतजार कर रहे हैं। वह अपनी पड़ोसी की हरकत पर पहले से कुछ नहीं कहना चाहते। इस असहिष्णुता पर सिंगापुर के लोगों का साथ पाकर उन्होंने खुशी जताई है।

इस बीच, गृह मामलों और कानून मंत्री के. षणमुगम ने कहा, “आपको नस्लवाद के ख़िलाफ आवाज उठानी चाहिए। इसका विरोध करना चाहिए और यदि कोई कानून का उल्लंघन करता है तो आपको कदम उठाना चाहिए। ये कैंसर है, विभाजनकारी है, जो हमारे सामाजिक मूल्यों को कम करता है।”

गौरतलब है कि इससे पहले पिछले शनिवार को 60 वर्षीय पॉलिटेक्निक लेक्चरर टैन बून ली ने सार्वजनिक रूप से एक अंतरजातीय जोड़े को फटकार लगाई थी। उनका कहना था कि भारतीय पुरुषों को चीनी लड़कियों का शिकार नहीं करना चाहिए। 26 वर्षीय बिजनेस ओनर दवे प्रकाश और 27 वर्षीया उनकी प्रेमिका जैकलीन हो पर यह टिप्पणी की गई थी। बाद में इसे रिकॉर्ड करके फेसबुक पर डाल दिया गया था।

झोले में रखकर बम ले जा रहा था मोहम्मद अफरोज, सरिया से टकरा फटा? अब बिहार के अररिया में ब्लास्ट

बांका के मदरसे के बाद अब बिहार के अररिया जिले के एक गाँव में जबरदस्त विस्फोट की खबर सामने आई है। घटना में मोहम्मद अफरोज नाम का एक व्यक्ति घायल हुआ है। पुलिस को घटनास्थल से दो जिंदा बम भी मिले हैं। पुलिस ने बताया है कि घटना की हर एंगल से जाँच की जा रही है।

घटना अररिया जिले के बैरगाछी थाना क्षेत्र के अंतर्गत भुवनेश्वरी रामपुर गाँव की है। मीडिया खबरों के मुताबिक गुरुवार (10 जून) की शाम को रामपुर गाँव में आम के बगीचे के पास एक जोरदार धमाका हुआ। गाँव के लोगों ने इस धमाके की सूचना पुलिस को दी जिसके बाद बैरगाछी थाना प्रभारी हरेन्द्र कुमार मौके पर पहुँचे। मौके पर मोहम्मद अफरोज घायल पड़ा था।

पुलिस ने अफरोज को अवस्था में अस्पताल पहुँचाया और मामले की छानबीन शुरू की। पुलिस अफरोज के परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैरगाछी थाना प्रभारी हरेन्द्र कुमार ने आशंका व्यक्त की है कि संभवतः अफरोज झोले में बम लेकर कहीं जा रहा था, लेकिन रास्ते में निर्माणाधीन मकान की सरिया से टकरा कर बम वहीं फट गया।

इससे पहले बांका जिले के नवटोलिया क्षेत्र में बने मदरसे में विस्फोट की खबर आई थी। वहाँ नूरी मस्जिद इस्लामपुर परिसर के आगे एक मदरसे में 7 जून को विस्फोट से आसपास का इलाका थर्रा उठा था। मदरसा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था और मौलाना की मौत हो गई थी।

घटना के संबंध में मीडिया रिपोर्टों में डीएम और एसपी के हवाले से बताया गया था कि यह मदरसा अवैध था। धमाका कंटेनर में रखे एक देसी बम के फटने से हुआ था। डीएम ने बताया था कि मदरसे का रजिस्ट्रेशन नहीं था। यह 18-20 वर्षो से रैयती जमीन पर चल रहा था और यहाँ 50-60 बच्चों को तालीम दी जा रही थी।

इससे पहले भी साल 2020 में बिहार के दरभंगा जिले के आजमनगर मोहल्ले में मोहम्मद नजीर नदाफ के घर पर बम विस्फोट हुआ था। घटना तब हुई जब नजीर अपने घर पर ही बम बना रहा था। घटना में नजीर के ही तीन बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, लेकिन नजीर और उसकी पत्नी अफशाना खातून उन्हें छोड़कर फरार हो गए थे। हालाँकि पुलिस ने बाद में दोनों को पकड़ लिया था।

‘असम में मियाँ-मुस्लिम माँग रहे अलग देश, क्योंकि CM हिमंत बिस्वा सरमा ने पुलिस से करवाई ठुकाई’: वायरल वीडियो का फैक्टचेक

सोशल मीडिया में एक वीडियो धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि मियाँ-मुस्लिम (बांग्लादेशी मुस्लिम) असम में अलग देश की माँग कर रहे हैं। साथ ही इसकी वजह बताते हुए कहा जा रहा है​ कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनके खिलाफ एक्शन लिया है और पुलिस से उनकी पिटाई करवाई है।

सोशल मीडिया पर इसे तरह-तरह से शेयर किया जा रहा है। कुछ लोग इसे हिमंत सरकार की वाहवाही के लिए शेयर कर रहे हैं और कुछ उन पर सवाल उठाने के लिए। हालाँकि, सच्चाई ये है कि ये वीडियो अभी की है ही नहीं।

फैक्ट चेक करने पर पता चलता है कि ये वीडियो साल 2017 की है। असम के गोलपारा में ये प्रदर्शन उस समय किया गया था जब एक मुस्लिम युवक को सरकार ने अवैध प्रवासी घोषित किया था और उसे डी वोटर (डाउटफुल वोटर) की श्रेणी में रख दिया था।

गूगल पर रिवर्स इमेज और कीवर्ड सर्च के माध्यम से यही वीडियो ‘टाइम्स ऑफ ढुबरी’ नाम के यूट्यूब चैनल पर 2 जुलाई 2017 को अपलोड हुई मिलती है। टाइटल में भी लिखा है, “GOALPARA INCIDENT- POLICE KILLED A YOUNG PROTESTER YAQUB ALI”

जानकारी के अनुसार, वीडियो में नजर आने वाले प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि सरकार ने जो उनके समुदाय के युवक पर डाउटफुल सिटिजन होने का टैग लगाया है उसे हटाया जाए। इनका कहना था कि कई असली भारतीयों पर भी सरकार ऐसे टैग लगा रही है।

स्क्रॉल पर प्रकाशित लेख

इस संबंध में स्क्रॉल पर 3 जुलाई 2017 को एक आर्टिकल पब्लिश हुआ था। इसमें कहा गया था कि 30 जून को प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद हुई पुलिस फायरिंग में एक मुस्लिम प्रदर्शन की मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार वीडियो को रिकॉर्ड करने वाले का नाम हुसैन अली मदानी था और उसने ही सबसे पहले इसे 30 जून को अपलोड किया था।

हुसैन अहमद द्वारा अपलोड वीडियो

ऐसी ही एक रिपोर्ट पब्लिश हुई थी न्यूजक्लिक पर। इसमें बताया गया था कि प्रदर्शनकारी डी वोटर्स जारी किए जाने के ख़िलाफ़ अपना प्रोटेस्ट कर रहे थे। उनकी माँग थी कि आखिर इसकी आड़ में असली प्रदर्शनकारियों को क्यों सताया जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने 30 जून को नेशनल हाईवे को ब्लॉक कर अपना प्रोटेस्ट किया था।

न्यूज क्लिक की रिपोर्ट की फीचर इमेज

इससे जाहिर है कि यह वीडियो हाल का नहीं है। न ही उस समय हिमंत असम के मुख्यमंत्री थे और न उन्होंने पुलिस को इस तरह की कार्रवाई के कोई निर्देश दिए थे।

चीनी घुसपैठिए ने बांग्लादेश की सोना मस्जिद में ली थी पनाह, 1300 भारतीय सिम कार्ड चीन भेजे गए: मालदा में यूपी एटीएस भी

बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने गुरुवार (10 जून 2021) को एक चीनी नागरिक को बंगाल के मालदा से गिरफ्तार किया था। वह बांग्लादेश से अवैध रूप से दाखिल होने की कोशिश कर रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक पूछताछ में इस चीनी नागरिक ने बताया है कि पिछले 2 सालों में 1300 भारतीय सिम कार्ड चीन भेजे गए हैं। उत्तर प्रदेश एटीएस की एक टीम भी उससे पूछताछ करने मालदा पहुँची है।  

मीडिया खबरों के मुताबिक मालदा से गिरफ्तार किया गया जुनवेई हान (36) चीन के हुबेई प्रांत का रहने वाला है। BSF को उसके पास से चीनी पासपोर्ट, बांग्लादेश का वीजा, एप्पल लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, बांग्लादेश, भारत और चीन के सिम कार्ड, दो पेन ड्राइव, 5 मनी ट्रांजेक्शन मशीन, दो एटीएम कार्ड और अमेरिका, भारत और बांग्लादेश की करेंसी प्राप्त हुई।    

BSF के मुताबिक अपराधिक मामला दर्ज होने के कारण हान को चीन में भारत का वीजा नहीं मिल सका, इसलिए उसने भारत आने के लिए नेपाल और बांग्लादेश के वीजा का उपयोग किया। BSF ने बताया कि हान 2 जून को बांग्लादेश पहुँचा। वहाँ वह अपने एक दोस्त के साथ रहा और बाद में बांग्लादेश में ही किसी सोना मस्जिद में भी 10 जून तक रहा। इसके बाद ही उसने भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने का प्रयास किया जहाँ से उसे BSF ने धर लिया। BSF ने यह भी कहा है कि हान के पास से बरामद हुए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जाँच हो रही है। इससे उसके भारत में घुसने का मकसद पता चल सकता है।

हान के बिजनेस पार्टनर सन जियांग को हाल ही में उत्तर प्रदेश एटीएस ने गिरफ्तार किया था। जियांग ने हान और उसकी पत्नी पर अवैध गतिविधियों का आरोप लगाया था। इसी के चलते हान और उसकी पत्नी के खिलाफ लखनऊ में यूपी एटीएस ने केस दर्ज किया था। हान के मालदा से गिरफ्तार होने के बाद यूपी एटीएस भी शुक्रवार (11 जून) को मालदा पहुँच गई। 4 सदस्यीय यूपी एटीएस की टीम हान से पूछताछ करेगी।

पूछताछ के दौरान हान ने बताया कि गुरुग्राम में वह ‘स्टार स्प्रिंग’ नाम का एक होटल भी चलाता है और उसने कई चीनी नागरिकों को काम भी दे रखा है। उसने यह भी बताया कि 2010 से वह 4 बार भारत आ चुका है और हैदराबाद, दिल्ली और गुरुग्राम में रह चुका है। हालाँकि BSF के डीआईजी ने कहा कि हान के बयान को वैरिफाई किया जा रहा है।

इसके पहले मार्च में भी दो चाइनीज नागरिक फेक आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के साथ बागडोगरा एयरपोर्ट से पकड़े गए थे। ये हैदराबाद जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट में सवार होने वाले थे, लेकिन सीआईएसएफ के सुरक्षाकर्मियों ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था। खबरों के अनुसार ये चीनी नागरिक हैदराबाद से तिरुपति जाने की फिराक में थे। गिरफ्तार किए गए झांग जुन और काईलेंग नेपाल के रास्ते भारत आए थे।

बेटे संग फिर ‘दीदी’ की गोद में मुकुल रॉय, BJP में शुभेंदु अधिकारी के बढ़ते कद से थे बेचैन

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय ने ‘घर-वापसी’ करते हुए वापस तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का रुख किया है। कोलकाता स्थित पार्टी मुख्यालय में वो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि ताज़ा परिस्थिति ऐसी है कि कोई भी भाजपा में नहीं रहना चाहता है। उन्होंने सितंबर 2017 में TMC से इस्तीफा दिया था। पार्टी ने उन्हें 6 वर्ष के लिए निलंबित भी कर दिया था।

इस दौरान TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा कि मुकुल रॉय पार्टी में एक बड़ा किरदार अदा करेंगे। हालाँकि, इस दौरान उन्होंने अन्य ऐसे नेताओं को चेतावनी भी दी जो विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़ कर चले गए थे। ममता बनर्जी ने कहा कि जिन्होंने पार्टी को धोखा दिया है और पैसे के लिए पार्टी की आलोचना की, उनके वापस आने पर विचार नहीं किया जाएगा। बंगाल सीएम से पूछा गया था कि क्या और लोग TMC में वापस आ सकते हैं?

कभी तृणमूल में नंबर-2 माने जाने वाले मुकुल रॉय को मई 2011 में भारत का रेल मंत्री बनाया गया था। मार्च 2012 में उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्रीय राज्यमंत्री से कैबिनेट मंदतरी के रूप में प्रमोट किया। यूथ कॉन्ग्रेस के दिनों से ही वो ममता बनर्जी के करीबी रहे हैं। ताज़ा चुनाव में वो नादिया के कृष्णानगर से बतौर भाजपा उम्मीदवार विधायक चुने गए थे। 2015 में ही ममता से उनकी खटपट चालू हो गई थी, जब शारदा और नारदा स्कैम में उनका नाम आया।

उनके कुछ करीबी नेताओं ने ये भी कहा है कि वो भाजपा में शुभेंदु अधिकारी के बढ़ते कद से नाराज़ थे। शुभेंदु को बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। ‘आउटलुक’ ने अपनी खबर में बताया है कि उनसे मिलने वाले कुछ नेताओं ने इस बात की जानकारी दी है कि भाजपा आलाकमान उनकी नजर में शुभेंदु अधिकारी को ज्यादा महत्व दे रहा था, जिससे वो असहज महसूस कर रहे थे। मुकुल रॉय के साथ उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने भी टीएमसी ज्वाइन की है।

शुभ्रेन्दु रॉय नॉर्थ 24 परगना के बीजपुर से 2 बार विधायक रहे हैं। मई 2019 में उन्होंने भाजपा का रुख किया था। तृणमूल ने उन्हें भी 6 वर्षों के लिए पार्टी से सस्पेंड किया था। वहीं उनके पिता मुकुल रॉय 2 बार राज्यसभा सांसद रहे हैं।

मोइली-सिब्बल ने कॉन्ग्रेस में बड़े सुधार की जरूरत बताई, कहा- नहीं हुई ‘मेजर सर्जरी’ तो खत्म हो जाएगी पार्टी

उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने के बाद कॉन्ग्रेस के भीतर सुधार की माँग उठने लगी है। कॉन्ग्रेस के ही वरिष्ठ नेता पार्टी में सुधार की माँग कर रहे हैं। इनमें कपिल सिब्बल और पूर्व केन्द्रीय मंत्री एम. वीरप्पा मोइली प्रमुख रूप से शामिल हैं। दोनों नेताओं ने कॉन्ग्रेस में संभावित सुधारों पर बल दिया और कहा कि कॉन्ग्रेस को एक ‘मेजर सर्जरी’ की जरूरत है। कपिल सिब्बल और वीरप्पा मोइली उन 23 नेताओं में से हैं, जिन्होंने अगस्त 2020 में कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर पार्टी में सुधार किए जाने की माँग की थी।

मोइली ने जितिन प्रसाद पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने निजी महत्वकांक्षाओं को सबसे ऊपर रखा। मोइली ने पार्टी को यह सलाह भी दी कि किसी भी नेता को जिम्मेदारी प्रदान करने से पहले उसके वैचारिक समर्पण को प्राथमिकता देनी चाहिए। मोइली ने कहा कि जितिन प्रसाद को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन वहाँ पार्टी का प्रदर्शन शून्य रहा। इससे पता चलता है कि जितिन प्रसाद ऐसी किसी भी बड़ी जिम्मेदारी के लिए अयोग्य थे।

मोइली ने 2019 के लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद कॉन्ग्रेस को खुद में सुधार करने के लिए एक मेजर सर्जरी करने की सलाह दी थी और कहा था कि कॉन्ग्रेस ने उस सर्जरी में देर कर दी है और अब उसकी तत्काल आवश्यकता है। मोइली ने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस को सिर्फ अपनी विरासत पर टिके नहीं रहना चाहिए, बल्कि नरेंद्र मोदी द्वारा की जाने वाली प्रतिस्पर्धात्मक राजनीति के लिए खुद को तैयार करना चाहिए।

वीरप्पा मोइली के अलावा कपिल सिब्बल ने भी कॉन्ग्रेस के भीतर सुधारों पर बल दिया। सिब्बल ने कहा कि कॉन्ग्रेस को उसी पुरानी पार्टी के रूप में लौटना होगा जैसी वो थी, लेकिन इसके लिए पार्टी में बड़े बदलाव और सुधार करने की आवश्यकता है। सिब्बल ने भी जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने को वैचारिक समझौता बताया। उन्होंने कहा कि हम अपनी ही व्यवस्था के अंदर लड़ रहे हैं और हमें लगातार ये मुद्दे उठाने होंगे। सिब्बल ने कहा, “यदि हमारा मुखिया ही हमें नहीं सुनेगा तो पार्टी लगातार गिरती चली जाएगी, इसलिए कॉन्ग्रेस पार्टी को हमारे सुझाव सुनने चाहिए।“ सिब्बल ने कहा कि यदि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं की ही नहीं सुनेगी तो उसका बुरा समय निश्चित है।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के प्रश्न पर कपिल सिब्बल ने कहा कि वो पक्के कॉन्ग्रेसी हैं और यदि पार्टी उन्हें छोड़कर जाने को कहती है तो वो विचार कर सकते हैं, लेकिन अपने जीते जी कभी भाजपा में शामिल नहीं होंगे।

कॉन्ग्रेस के नेताओं द्वारा आलोचना किए जाने पर भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद ने कहा था कि वो ऐसे बयानों पर ध्यान नहीं देते हैं। उन्होंने कहा, “मैं उन सभी लोगों का स्वागत करता हूँ जो मेरी आलोचना कर रहे हैं। इसे मैं प्रसाद के रूप में स्वीकार करता हूँ।

कॉन्ग्रेस छोड़ने के प्रश्न पर प्रसाद ने कहा था वैचारिक मतभेदों के चलते और अपने अंतर्मन की आवाज सुनके उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों के भाव और विचारों को देखते हुए ही वो इस निष्कर्ष पर पहुँचे थे।

ज्ञात हो कि जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने के बाद कॉन्ग्रेस नेता लगातार उनकी आलोचना कर रहे हैं। मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस इकाई ने तो उनकी तुलना कूड़े से एवं भाजपा की तुलना कूड़ेदान से कर दी है।

महाराष्ट्र की राजनीति पर 8 मजेदार वीडियो, जिनसे नाराज़ होकर सेंसरशिप पर उतरी उद्धव सरकार: ट्विटर ने भी यूजर को भेजा नोटिस

राजनीति में हँसी-मजाक का दौर चलता रहता है और जब तक ये किसी के व्यक्तिगत जीवन को निशाना नहीं बनाता तब तक ये मान्य है। हाँ, तानाशाहों ने ज़रूर अपनी सरकार बनते ही सबसे पहले अपने कार्टूनों पर प्रतिबंध लगाने का कार्य किया है। अब ऐसा ही कुछ वाकया महाराष्ट्र सरकार को लेकर हुआ है। ‘Political Keeda’ नामक ट्विटर हैंडल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लेकर हँसी-मजाक क्या किया, ट्विटर ने उन्हें नोटिस भेज दी।

ट्विटर ने अपनी नोटिस में कहा है कि उसे भारत (महाराष्ट्र सरकार) से एक निवेदन प्राप्त हुआ है, जिसमें बताया गया है कि उनके 8 ट्ववीट्स ऐसे हैं जो भारतीय कानून का उल्लंघन करते हैं। ट्विटर ने अपनी इस नोटिस के पीछे ‘पारदर्शिता’ का बहाना बनाया है। हालाँकि, अभी तक उसने इन ट्वीट्स के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया है लेकिन जब उसे किसी प्रशासनिक व्यवस्था से कोई सूचना मिलती है तो वो यूजर्स को इस बारे में बताता है।

ट्विटर ने कहा है कि ऐसी सूचनाओं के मिलने के बाद वो यूजर से उस कंटेंट को हटाने के लिए कहता है, भले ही यूजर उस देश में रहता हो या नहीं। साथ ही उसने यूजर्स की आवाज़ का बचाव करने और इसके सम्मान करने की बात भी कही है। यहाँ हम आपको बता रहे हैं कि ऐसे कौन से 8 शॉर्ट वीडियो स्पूफ हैं, जिसे महाराष्ट्र की शिवसेना सरकार और ट्विटर को नाराज़ कर दिया। ये सारे के सारे वीडियो बड़े ही मजेदार हैं।

8 शॉर्ट वीडियो, जिससे नाराज़ होकर सेंसरशिप पर उतरी MVA सरकार

देवेंद्र फड़नवीस और अजीत पवार को लेकर ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के डायलॉग्स के आधार पर ये मीम बनाया गया:

तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ नरेंद्र मोदी की मुलाकात के दौरान राहुल गाँधी, उद्धव ठाकरे और शरद पवार की तस्वीरें एडिट कर वीडियो बनाया गया:

बॉलीवुड कैसे हमेशा उद्धव ठाकरे की वाहवाही करता है, इसे दर्शाने के लिए ‘ओम शांति ओम’ फिल्म के दृश्य का कुछ यूँ सहारा लिया गया:

किस तरह वामपंथी मीडिया शिवसेना सुप्रीमो का गुणगान करता है, वो देखिए:

महाराष्ट्र में कोरोना स्थिति कितनी बदतर हुई ये सभी को पता है, लेकिन फिर भी लिबरल गिरोह ने उद्धव ठाकरे का गुणगान करते हुए उनकी कोरोना प्रबंधन रणनीति की प्रशंसा की। ‘पोलिटिकल कीड़ा’ ने उद्धव ठाकरे की ‘मेहनत’ को कुछ यूँ दिखाया:

बालासाहब ठाकरे खुद इसके विरोधी थे कि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर के पत्रकारों को तंग किया जाए, क्योंकि वो खुद एक बड़े कार्टूनिस्ट थे। लेकिन, अर्णब गोस्वामी के खिलाफ FIR दर्ज कर के उन्हें जिस तरह से घर से उठाया गया और जेल भेज दिया गया, वो सबने देखा। कुछ इस तरह सीएम उद्धव को उनके पिता के बयान की याद दिलाई गई:

महाराष्ट्र की बदतर स्थिति के बावजूद कोरोना काल में किस तरह सरकार की तारीफें की गईं, इसे महाराष्ट्र की MVA सरकार के 1 वर्ष पूरे होने पर बनाए गए इस वीडियो से समझिए:

महाराष्ट्र में किस तरह कोरोना ने तबाही मचाई और इस दौरान सरकार क्या करती रही, इसे दिखाने के लिए इस वीडियो का सहारा लिया गया:

इसी तरह सीएम उद्धव ठाकरे को ‘बेस्ट सीएम’ बताए जाने को लेकर राजनीतिक कार्टूनिस्ट और व्यंग्यकार विकासो (Vikaso) , यूजनरनेम @vikasopikaso ने एक कार्टून बनाया था, जिस पर उन्हें ट्विटर ने को नोटिस भेज दिया था। ट्विटर ने कहा था, ‘यह भारत के कानून का उल्लंघन करता है।’ वामपंथ से इतर विचार रखने वाले यूजर्स के अकाउंट मनमाने ढंग से सस्पेंड करने का ट्विटर का इतिहास रहा है।

‘यह हिंदुत्व बोल रहा है… कोई जनसंख्या विस्फोट नहीं’: असम में आबादी कंट्रोल की बात से ओवैसी चिढ़े

गरीबी दूर करने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय से जनसंख्या नियंत्रित करने की असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अपील पर सियासत तेज हो गई है। इसे सियासी रंग देने के अगुआ समुदाय के वही नेता हैं जिनसे सरमा ने इस संबंध में जागरूकता फैलाने में मदद की अपील की थी। पहले असम के राजनीतिक दल AIUDF के विधायक रफीकुल इस्लाम ने इस बयान को लेकर मुख्यमंत्री पर राजनीतिक टिप्पणी की। अब हैदराबाद के सांसद एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इसे हिंदुत्व से जोड़ दिया है।

ओवैसी ने ट्वीट कर कहा, “असम के मुख्यमंत्री ने फिर से ‘जनसंख्या नियंत्रण’ की बात शुरू की है। यह हिंदुत्व बोल रहा है जो गरीब और शोषित लोगों पर आरोप लगा रहा है।” ओवैसी ने दावा किया कि असम ने पहले ही टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) 2.1 के स्तर को हासिल कर लिया है, जबकि राष्ट्रीय जन्मदर 2.2 है। साथ ही यह भी कहा कि किसी भी तरह का कोई जनसंख्या विस्फोट नहीं है।

द हिंदू की दिसंबर 2020 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि केंद्र सरकार ने जबरदस्ती परिवार नियोजन करवाने का विरोध करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में इसे गैर जरूरी बताया था। उन्होंने दावा किया कि सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 में कहा गया था कि दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल, पंजाब, ओडिशा, असम और हिमाचल में जनसंख्या 1 फीसदी से भी कम की दर से बढ़ रही है।

CM ने क्या कहा था

बता दें कि बतौर मुख्यमंत्री 30 दिन पूरे होने पर गुरुवार (10 जून 2021) को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गरीबी कम करने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय से आबादी कंट्रोल करने को कहा था। सरमा ने अल्पसंख्यक समुदाय से अपील करते हुए कहा कि वे जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन की नीति अपनाएँ। उन्होंने कहा कि गरीबी का मुख्य कारण लगातार आबादी बढ़ना है। लिहाजा समुदाय के सभी प्रतिनिधियों को आगे आकर इस दिशा में सरकार का समर्थन करना चाहिए।

उन्होंने कहा था, “सरकार गरीबों की सुरक्षा और उनके लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन सरकार को भी जनसंख्या वृद्धि से निपटने के लिए अल्पसंख्यकों का पूरा सहयोग चाहिए क्योंकि इसी के कारण गरीबी और अशिक्षा की समस्या उत्पन्न हुई है। इसके पीछे एक ही कारण है, फैमिली प्लानिंग की कमी।” सरमा ने यह भी कहा था कि उनकी सरकार अल्पसंख्यकों महिलाओं को शिक्षित करने का भी काम करेगी जिससे समस्याओं का हल प्रभावी तरीके से निकाला जा सके। अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों से कहा है कि वे जनसंख्या नियंत्रण के मामले में अपने लोगों को जागरूक करने का कार्य करें।

मदरसे का 50 साल का मौलाना, 2 बच्चे और बीवी भी; 2 साल से नाबालिग छात्रा से कर रहा था सेक्स

वह नाबालिग है। 10वीं की छात्रा है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के एक मदरसे में पढ़ाने वाले एक मौलाना ने उससे दो साल से अवैध संबंध बना रखा है। मौलाना की उम्र करीब 50 साल है। वह शादीशुदा और दो बच्चों का बाप है। ऐसा मामला जब सामने आए तो क्या करना चाहिए? जाहिर है कानून है जो बताता है कि नाबालिग के यौन शोषण के लिए मौलाना को दंड मिलना चाहिए।

लेकिन यह मामला जब सामने आया तो पिपराइच क्षेत्र एक गाँव के पंचों ने शादीशुदा मौलाना के साथ नाबालिग के निकाह का फरमान सुना दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बदनामी के डर से पीड़ित परिवार निकाह के लिए राजी भी हो गया।

यह मदरसा पिपराइच थाना क्षेत्र के एक गाँव में है। मौलाना भी गाँव का ही है और पीड़ित छात्रा भी। बताय जाता है कि पढ़ाई के दौरान मौलाना ने छात्रा को अपने जाल में फँसा लिया। उसका नाबालिग से बीते दो साल से अवैध संबंध चल रहा है। यह बात जब पूरे गाँव में फैल गई तो गुरुवार (10 जून 2021) को इस मामले में पंचायत बुलाई गई।

अस्थायी पुलिस पिकेट से चंद कदम की दूरी पर ही ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में दोनों पक्ष के लोगों की पंचायत हुई। इस दौरान पंचों ने नाबालिग से मौलाना की शादी का फरमान सुना दिया। मौलाना के पिता ने ये कहते हुए इसका विरोध किया कि निकाह के बाद छात्रा और उससे होने वाले बच्चों को उनकी सारी प्रॉपर्टी मिल जाएगी। इसलिए उसने पंचों से कहा कि मौलाना को पहले अपने हिस्से की आधी संपत्ति अपनी पहली पत्नी के बच्चों के नाम रजिस्टर्ड करनी होगी, उसके बाद ही वह निकाह की सहमति देगा। मौलाना इसके लिए तैयार हो गया और नाबालिग छात्रा से निकाह करने की बात तय होने पर पंचायत खत्म हुई।

पुलिस को सूचना तक नहीं दी

इतना सब कुछ होने के बाद भी गाँव के किसी भी व्यक्ति ने पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी। इस मामले को लेकर पिपराइच इंस्पेक्टर सूर्यभान सिंह ने कहा, “मुझे किसी पंचायत की जानकारी नहीं है। लड़की पक्ष या गाँव के किसी भी व्यक्ति ने पुलिस को अभी तक सूचना नहीं दी है। लड़की नाबालिग है और उसके बाद भी उसकी शादी की जा रही है तो कानूनन गलत है। इस पर स्वत: संज्ञान लेकर जाँच की जाएगी। लड़की पक्ष की तरफ से शारीरिक शोषण की तहरीर शिक्षक के खिलाफ दी जाती है तो कार्रवाई भी की जाएगी।”

बता दें कि इस मामले को लेकर कुछ जिम्मेदार लोगों का कहना है कि इस पूरी घटना से मदरसा से कोई लेना-देना नहीं है। एक सप्ताह पहले ही यह बात सामने आई है। मौलाना लड़की के घर पर भी पढ़ाने जाता था। लॉकडाउन की वजह से 12 महीने से मदरसा बंद है।