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एकता कपूर ने नाबालिग रेप मामले गिरफ्तार पर्ल वी पुरी को बताया निर्दोष, पुलिस ने कहा- उनके खिलाफ पूरे सबूत

टीवी अभिनेता पर्ल वी पुरी को मुंबई में नाबालिग से रेप व छेड़छाड़ के आरोप में पॉक्सो एक्ट के तहत शुक्रवार (04 जून 2021) देर रात गिरफ्तार किया गया था। पुरी समेत 6 लोगों पर मामला दर्ज किया गया। हालाँकि शनिवार (05 जून) को एकता कपूर ने दावा किया कि पुरी निर्दोष हैं। जिस पर पुलिस ने कहा कि पुरी पर लगे आरोप पूरी तरह सही हैं और उनके खिलाफ सबूत भी हैं।

शनिवार को एकता कपूर ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर इस पूरे मामले से संबंधित एक बड़ा पोस्ट लिखा जिसमें उन्होंने पीड़िता की माँ के हवाले से यह दावा किया कि अभिनेता पुरी निर्दोष हैं। एकता ने कहा कि पीड़िता की माँ ने खुद उनसे बात की।

एकता कपूर के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

एकता कपूर ने अपने पोस्ट में लिखा कि पीड़िता की माँ ने खुले तौर पर यह कहा है कि पुरी निर्दोष है। एकता ने यह भी बताया कि पीड़िता की माँ ने अपने पति पर ही आरोप लगाया है कि उसके पति के द्वारा यह पूरी कहानी सिर्फ इसलिए रची गई कि माँ पर यह आरोप लगाया जा सके कि सेट पर ही काम करने के बावजूद एक माँ अपनी बेटी की सुरक्षा नहीं कर सकी। एकता के अनुसार पीड़िता की माँ ने बताया कि पीड़िता के पिता उसे अपने पास रखना चाहते हैं इसलिए उन्होंने यह सब किया है।

इसके बाद पोस्ट में एकता कपूर ने लिखा कि दोषी कौन है यह तय करना, कोर्ट का काम है लेकिन वह वही सब कह रही हैं जो पीड़िता की माँ ने बताया। एकता ने दावा किया कि उनके पास सभी मैसेज और वॉयस नोट्स हैं जिनमें पीड़िता की माँ पुरी को निर्दोष बता रही है।

हालाँकि शनिवार को ही वसई कोर्ट के द्वारा पुरी को न्यायिक हिरासत में भेजने के बाद वसई डीसीपी संजय कुमार पाटिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अभिनेता पर्ल वी पुरी के खिलाफ लगाए गए आरोप आधारहीन नहीं बल्कि सही हैं और पुलिस के पास पुरी के खिलाफ सबूत भी हैं। यही कारण है कि पुलिस ने पुरी को गिरफ्तार भी किया है। पुलिस के अनुसार पीड़िता की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई।

ज्ञात हो कि इस मामले में 16 वर्षीय पीड़िता ने बताया था कि पहले एक शख्स ने कार में उसके साथ रेप किया, फिर इसमें शामिल अन्य आरोपितों ने बारी-बारी से उसके साथ रेप किया। इसके बाद पुलिस ने सभी छह आरोपितों को हिरासत में ले लिया था।  

1000+ बंदर और खरगोश पर जीन-परिवर्तित वायरस का इंजेक्शन: वुहान लैब पर चीनी सरकार की पोल खोल रिपोर्ट

चीन हमेशा से वुहान लैब से कोरोना वायरस के लीक होने की थ्योरी को झुठलाता आया है। लेकिन अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स से लेकर ऐसी कई रिपोर्ट्स हैं जो कोरोना के वुहान के जानवरों के बाजार से फैलने के दावों को नकारते रहे हैं। चीन में करीब ढाई दशक तक संवाददाता की भूमिका निभा चुके पत्रकार जैस्पर बेकर (Jasper Becker) ने डेली मेल के लिए लिखे अपने एक हालिया लेख में विस्तार से उन कारणों को गिनाया है, जो इन दावों को मजबूत बनाते हैं कि कोरोना वायरस न केवल चीन की लैब से लीक हुआ बल्कि शायद चीन ने जानबूझकर जैव हथियार की तरह इसका इस्तेमाल भी किया।

बेकर ने लिखा है, चीनी शहर वुहान, जहाँ कोविड -19 महामारी की उत्पत्ति हुई, वहाँ की लैब में वैज्ञानिकों ने बंदरों और खरगोशों समेत 1,000 से अधिक आनुवंशिक रूप से इंजीनियर जानवर बनाए हैं। लैब जानवरों को भी जीन-परिवर्तित वायरस का इंजेक्शन लगाया जाता है, जो बहुत हद तक उस जीव के समान होते हैं जो कोविड -19 का कारण बनते हैं।

खास बात ये है कि चीन इस बात के लिए कुख्यात रहा है कि वह उन सभी प्रकार के प्रयोगों को लापरवाही से प्रोत्साहित करता है, जिनकी दुनिया में कहीं और करने की अनुमति भी नहीं है।

चीनी लैब करते हैं दुनिया का सबसे घातक प्रयोग!

जब से ग्लोबल बायोटेक निवेश में आकर्षक उछाल आना शुरू हुआ, चीनी शोधकर्ता जानवरों पर प्रयोगों से आगे बढ़कर इंसानों पर भी प्रयोग का जोखिम उठा रहे हैं, जिन्हें अधिकांश पश्चिमी देशों में अनैतिक माना जाएगा। बेकर लिखते हैं कि इस तरह के शोध के पीछे की चीन की मंशा संभावित रूप से बहुत लाभदायक क्षेत्र में व्यावसायिक लाभ प्राप्त करने से प्रेरित है। लेकिन इसका एक और भयावह कारण भी है।

चीनी लैब में किए जाने वाले इन अधिकांश कार्यों की देखरेख पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा की जाती है, जो दो क्षेत्रों की बारीकी से निगरानी करती है। पहला- कोई भी जीन संशोधन (जीन मोडिफिकेशन) जो बेहतर सैनिक बना सकता है, और दूसरा सूक्ष्म जीव जिनअहें नए जैविक हथियार बनाने के लिए जीन-परिवर्तित (जीन-एडिटेड) किया जा सकता है, ऐसे जैव हथियार जिनसे बचने के लिए लोगों के पास कोई उपाय न हों।

चीन की इन लैबोरेटीज को जैव सुरक्षित होना चाहिए, लेकिन जीवित जानवरों की मौजूदगी जबर्दस्त सुरक्षा चुनौतियाँ पैदा करती हैं। टेस्ट ट्यूब में रखे गए रोगजनक के विपरीत, बंदर इधर-उधर भागते हैं, काटते और खरोंचते हैं। वे उत्सर्जित भी करते हैं, उनमें परजीवी होते हैं और वे त्वचा और फर को भी गिराते हैं। यह सब प्रदूषण के जोखिम को बढ़ाता है।

दो चीनी शिक्षाविदों के 2019-nCoV कोरोनावायरस के संभावित मूल शीर्षक वाले एक लेख में कहा गया है कि वुहान सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने अपनी लैब में रोग ग्रस्त जानवरों को रखा, जिनमें 605 चमगादड़ शामिल हैं। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि चमगादड़ ने एक बार एक शोधकर्ता पर हमला किया था और ‘चमगादड़ का खून उसकी त्वचा पर था’। अन्य चीनी लेखों में वर्णन किया गया है कि कैसे वुहान के एक शोधकर्ता ने बिना सुरक्षात्मक उपायों के एक गुफा में चमगादड़ को पकड़ लिया और ‘उसके सिर के ऊपर से बारिश की बूंदों की तरह चमगादड़ का मूत्र टपक रहा था’।

चीन की ‘बैट वुमन’: कोविड-19 की उत्पत्ति में सबसे कुख्यात?

कोविड -19 की संभावित उत्पत्ति के बारे में अनगिनत कहानियों में सबसे प्रसिद्ध चीन की चमगादड़ विशेषज्ञ वुहान वायरोलॉजिस्ट शी झेंगली हैं, जिनका – उपनाम बैट वुमन है। झेंगली ने चमगादड़ पर रिसर्च के लिए दूरस्थ गुफाओं का दौरा किया था। 2015 में, उन्होंने नेचर मेडिसिन में संयुक्त रूप से चमगादड़ कोरोनावायरस के बारे में एक पेपर प्रकाशित किया, जिसमें उसके ‘मानव में उद्भव होने की क्षमता दिखाई गई’।

इस रिसर्च पेपर में एक अत्यधिक संक्रामक वायरस बनाने के लिए उनकी टीम के प्रयासों का वर्णन किया जिसने horseshoe चमगादड़ से मानव के ऊपरी श्वसन अंग को लक्षित किया। इसके बाद, उन्होंने यह देखने के लिए एक जीवित चूहे पर प्रयोग करने की कोशिश की कि क्या यह मानव निर्मित वायरस एक चूहे के फेफड़ों में प्रवेश कर सकता है और उसे संक्रमित कर सकता है। और इस वायरस ने ऐसा किया भी। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि इससे साबित होता है कि चमगादड़ से सार्स (SARS) वायरस इंसानों को संक्रमित कर सकता है।

तो क्या यह संभव था कि झेंगली ने अपनी लैब में कोविड-19 बनाया हो? वह और उसकी टीम वुहान में और क्या करती रही है?

पत्रकार के रूप में चीन पर ढाई दशक से ज्यादा समय से लिखने वाले जैस्पर बेकर ने कहा कि इस लैब के साझेदार के रूप में काम कर चुके फ्रांस के शोधकर्ताओं के हवाले से फ्रेंच सेक्रेट सर्विस और चीन के बायोलॉजिकल वीपेंस वायरफेयर प्रोग्राम को लेकर इजरायली विशेषज्ञों डैनी शोहम ने दावा किया कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एक दोहरे उद्देश्य वाला सैन्य/नागरिक संस्थान है, और यहां तक ​​कि यह भी सुझाव दिया है कि 2003 की सार्स महामारी चीन के गुप्त जैव-युद्ध कार्यक्रम का एक एक्सिडेंटल प्रॉडक्ट था।

बेकर लिखते हैं कि फिर भी, इस बात की संभावना बहुत अधिक है कि सार्स या कोविड -19 जैव बहुत कम सुरक्षा स्तर वाले बायोमेडिकल लैब से निकले हों। पिछले साल, चीन में लगभग 90 ऐसी प्रयोगशालाएँ चल रही थीं, जिनमें कि वुहान सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन भी है, जोकि शहर के ‘वेट’ सीफूड मार्केट से सिर्फ 300 गज की दूरी पर है, जिसे महामारी के एपिसेंटर के रूप में जाना जाता है।

वुहान की वो लैब, जहाँ कोविड -19 के समान चमगादड़ कोरोनावायरस का अध्ययन किया गया था, उस केंद्रीय अस्पताल से सटा हुआ है, जहाँ डॉक्टरों का पहला समूह कोविड-19 से हुआ संक्रमित था और जहाँ के सीफूड बाजार के एक झींगा-विक्रेता की पहचान 16 दिसंबर, 2019 को कोरोनावायरस के पहले मरीज के रूप में गई थी।

क्यों झूठा लगता है चीन का सीफूड मार्केट से कोरोना फैलने का दावा?

चीन के तमाम दावों के बावजूद सच्चाई यह है कि विज्ञान इस परिकल्पना का समर्थन नहीं करता है कि महामारी सीफूड बाजार से शुरू हुई थी। एक जाँच से पता चला कि बाजार के व्यापारी चमगादड़ नहीं बेचते थे, जिसे कोरोना वायरस का अनुमानित स्रोत माना जाता रहा है। हालाँकि एक फोरेंसिक जाँच में पूरे बाजार में कोरोनावायरस के कण मिले, जो जीवित हाथी, बेजर, सांप और पक्षी बेचते थे, लेकिन कभी भी कोई संक्रमित जानवर नहीं मिला।

यह स्पष्ट नहीं है कि वायरस के वे कण जानवरों से निकले थे, या वहाँ घूमने वाले इंसानों से वहाँ पहुँचे थे। इसके अलावा, कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए पहले समूह में से केवल 20 प्रतिशत लोग ही उस बाजार के संपर्क में आए थे।

बेकर ने लिखा है कि कोरोनावायरस महामारी के बारे में एक बात निश्चित है कि चीनी सरकार ने लगातार वायरस की उत्पत्ति, प्रसार और प्रभाव के बारे में झूठ बोला है। लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार, बीजिंग के अधिकारियों ने जानबूझकर यह छिपाने की कोशिश की कि क्या हो रहा था। उन्होंने कहा कि 2019 में केवल 44 कोविड मामले थे, लेकिन वास्तव में 200 केस दर्ज किए गए थे। 10 फरवरी, 2020 को, उन्होंने 2,478 नए मामले घोषित किए, जबकि लीक हुए डेटा से पता चलता है कि 5,918 मामले दर्ज हुए थे। 10 फरवरी तक छह स्वास्थ्य कर्मियों की मौत का कभी भी सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया गया। इस बीच, बीजिंग सरकार ने उस हॉस्पिटल वीचैट सोशल मीडिया ग्रुप को बंद कर दिया, जिसने एक नए सार्स (SARS) जैसे वायरस की चेतावनी दी थी।

वहाँ कई मामले पाए जाने बाद गीले बाजार को बंद करने के बाद, अधिकारियों ने बाजार पर प्रकोप को दोष देने की कोशिश की और फिर अमेरिकी सैनिकों पर जिम्मेदारी की उंगली की ओर इशारा करते हुए सार्वजनिक अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया, जो एक एथलेटिक्स घटना के लिए शरद ऋतु 2019 में वुहान में थे। तो चीनी वास्तव में क्या छिपाने की कोशिश कर रहे थे

गौरतलब है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने 15 जनवरी को एक फैक्ट-शीट जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि वुहान लैब ने नागरिक और सैन्य दोनों तरह के शोध किए, और उसके कर्मचारी सैन्य अनुशासन के अधीन थे। इसमें कहा गया: ‘खुद को एक नागरिक संस्थान के रूप में पेश करने के बावजूद, अमेरिका सुनिश्चित है कि वुहान लैब ने चीन की सेना के साथ प्रकाशन और गुप्त परियोजनाओं पर सहयोग किया है।’ ‘यह कम से कम 2017 से चीनी सेना की ओर से प्रयोगशाला में जानवरों पर प्रयोगों सहित वर्गीकृत अनुसंधान में लगा हुआ है।’

बेकर ने लिखा है कि जब अमेरिकी दूतावास की अधिकारी रिक स्वित्जर (Rick Switzer) ने लैब का दौरा किया, तो उनके 19 अप्रैल, 2018 के मेमो में कहा गया, इसके शोध ‘दृढ़ता से बताते हैं कि चमगादड़ से सार्स जैसे कोरोनावायरस मनुष्यों में सार्स जैसी बीमारी का कारण बन सकते हैं।’

महत्वपूर्ण रूप से, मेमो में यह पाया गया कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के ब्रोशर में एक राष्ट्रीय सुरक्षा भूमिका पर प्रकाश डाला गया, जिसमें कहा गया था कि यह ‘राष्ट्रीय जैव सुरक्षा के मामले चीन की उपलब्धता में सुधार के लिए एक प्रभावी उपाय है यदि संभावित जैविक युद्ध या आतंकवादी हमला होता है’।

बेकर ने लिखा है कि ‘बैट वुमन’ झेंगली ने चीनी कम्युनिस्ट सरकार के इशारे पर वुहान लैब से कोरोना वायरस लीक की थ्योरी को झुठलाने पर काम किया और इस साल फरवली में दावा किया उन्होंने एक नए चमगादड़ वायरस को खोज निकाला है जिसमें कोविड-19 से 96 फीसदी समानता है। साथ ही इसमें वह रिसेप्टर भई है जो वायरस को मानव कोशिका में प्रवेश की इजाजत देता है। उन्होंने इस वायरस के कोविड-19 के सबसे करीबी पूर्वज होने का अनुमान व्यक्त किया। हालाँकि झेंगली के इस दावे पर दुनिया भर में सवाल उठे और कहा गया कि इसका उद्देश्य उस दावे का समर्थन करना था कि कोविड-19 की उत्पत्ति जानवरों से हुई न कि ये लैब में इंसानों द्वारा तैयार हुआ।

बेकर कहते हैं कि सच्चाई यह है कि बीजिंग कभी भी एक नया वायरस बनाने की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करेगा, जिसने दुनिया भर में अब तक 35 लाख लोगों को मौत की आगोश में पहुँचा दिया है। अगर शी जिंनपिंग ऐसा करते हैं तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ऐसा करना चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 70 साल के शासन के अंत की वजह बन सकती है।

एक तरफ जहाँ दुनिया कोरोना के कहर से जूझ रही है तो वहीं चीन की अर्थव्यवस्था में पुनरुत्थान हुआ है और मजबूत निर्यात के साथ चीन में सबकुछ सामान्य स्थिति की और लौट आया है। शायद कोरोना वायरस की उत्पत्ति से चीन यही चाहता भी था!

काली मंदिर में मांस के टुकड़े मिलने से तनाव, असम पुलिस ने किया 5 लोगों को गिरफ्तार

असम के धुबरी जिले में शनिवार (5 जून 2021) को मंदिर के अंदर कथित रूप से मांस के टुकड़े रखने के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया। एक पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) रोसीरानी सरमा ने बताया कि गोलाकगंज थाना क्षेत्र के जिंकाता भाग-2 गाँव में शुक्रवार को काली मंदिर में मांस के टुकड़े मिलने के बाद तनाव पैदा हो गया। स्थानीय लोग दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग को लेकर सड़कों पर उतर आए। एएसपी ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्काल पुलिस बल को मौके पर भेजा गया।

सरमा ने बताया कि घटना को अंजाम देने वाले आरोपितों की तलाश करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया और एक दिन बाद ही यानी शनिवार को इस मामले में संलिप्त 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

उन्होंने आगे कहा कि इलाके में कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए कड़ी निगरानी की जा रही है। मंदिर से प्राप्त मांस के टुकड़ों को जाँच के लिए राज्य की फोरेंसिक लैब में भेजा गया है।

PETA वाली महिला गोरिल्ला के वीर्य से हुई गर्भवती… प्रजाति बचाने के लिए उठाया कदम – Fact Check

“कई सालों तक मैंने अपनी योनि पर गोरिल्ला का वीर्य रगड़ा। असफल रही। फिर मुझे एहसास हुआ कि मैं IVF (in vitro fertilization) से गोरिल्ला के शुक्राणु और अंडाणु का उपयोग कर इस लुप्त होते जानवर की सरोगेट माँ बन सकती हूँ। ऐसा करके मैं इस लुप्त होते जानवर की प्रजाति को बचा सकती हूँ।”

सैन डिएगो चिड़ियाघर की पूर्व जीवविज्ञानी मौली हीथर ने मीडिया से ऊपरोक्त बातें कहीं। मौली हीथर सिर्फ 23 साल की हैं। इतनी कम उम्र में लुप्त होते जानवर की प्रजाति को बचाने के लिए इतना बड़ा त्याग उन्होंने किया, इस खबर को मीडिया ने लपक लिया।

worldnewsdailyreport के अनुसार मौली हीथर IVF के माध्यम से किसी अन्य प्रजाति के जानवर को सफलतापूर्वक जन्म देने वाली पहली औरत हो सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार सैन डिएगो चिड़ियाघर में रहने वाले 12 साल के मध्य-पूर्वी अफ्रीकी गोरिल्ला (इसका नाम है – जॉर्ज, गोरिल्ला जॉर्ज) को मौली हीथर के गर्भ में पल रहे भ्रूण का पिता माना जा रहा है।

विदेशी मीडिया में प्रकाशित हुई इस खबर को देशी मीडिया ने भी लपक लिया। sirfnews में भी यह खबर प्रकाशित की गई। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मौली हीथर समलैंगिक हैं और उन्होंने अपने जीवन में कभी किसी पुरुष के साथ यौन संबंध नहीं बनाए हैं।

सैन डिएगो चिड़ियाघर की पूर्व जीवविज्ञानी मौली हीथर ने अपने ऊपर लगे भयंकर आरोप को स्वीकारते हुए कहा – “मैंने गोरिल्ला के साथ संभोग भी किया था… लेकिन यह सिर्फ उसकी प्रजाति को संरक्षित करने के लिए किया गया था न कि यौन संतुष्टि के लिए। मध्य-पूर्वी अफ्रीकी गोरिल्ला गंभीर रूप से विलुप्त होने के खतरे में है, मेरा मानना ​​है कि प्रजातियों को बचाने के लिए क्रॉस-प्रजाति संकरण ही एकमात्र तरीका है।”

ऊपर एक आम खबर है। पढ़ने लायक, उत्सुकता जगाने लायक। नीचे इस खबर की चीर-फाड़ की गई है… आपको सच बतलाने के लिए।

महिला गोरिल्ला के वीर्य से हुई गर्भवती?

जहाँ से यह खबर ली गई है, पहले उसे जाँचते हैं। क्यों? क्योंकि अपनी देशी मीडिया भी वहीं से माल उठाई है – वाक्य-2-वाक्य, शब्द-बाइ-शब्द!

worldnewsdailyreport – ऐसी वेबसाइट जो व्यंग्य प्रकाशित करती है

कौन हैं महिला, जिसकी फोटो लगा मीडिया चला रही?

जिस महिला की फोटो खबरों में लगा कर मीडिया चला रही है, उनका नाम है कर्स्टी हेंडरसन (Kirsty Henderson)… जबकि रिपोर्ट में उनका नाम मौली हीथर बताया जा रहा है।

ऊपर आप कर्स्टी हेंडरसन (Kirsty Henderson) की वीडियो देख सकते हैं।

फैक्ट चेक: PETA वाली महिला गोरिल्ला से नहीं हुई गर्भवती

मीडिया जिस महिला की फोटो लगा कर खबर चला रही है, उस महिला का नाम तक गलत लिखा गया है। जिस वेबसाइट से यह खबर सब जगह फैली, वो वेबसाइट अपने-आप में खबरों की वेबसाइट न होकर व्यंग्य की वेबसाइट है। इसलिए पाठकों को बता दें कि सैन डिएगो चिड़ियाघर की पूर्व जीवविज्ञानी और PETA की कार्यकर्ता मौली हीथर गोरिल्ला के वीर्य से गर्भवती नहीं हुई हैं।

बंगाल में ‘नया खेला’: शुभेन्दु अधिकारी और उनके भाई पर राहत सामग्री चोरी के आरोप में FIR, BJP कार्यालय के बाहर 51 बम

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से हराने वाले भाजपा नेता शुभेन्दु अधिकारी और उनके भाई सोमेंदु अधिकारी के खिलाफ कांठी में एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन पर नगरपालिका से राहत सामग्री की कथित चोरी का आरोप लगाया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कांठी नगरपालिका प्रशासन बोर्ड के सदस्य रत्नदीप मन्ना ने कांठी पुलिस स्टेशन में 1 जून 2021 को शुभेन्दु और उनके भाई सोमेंदु के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया है कि 29 मई को दोपहर में शुभेन्दु और उनके भाई के कहने पर नगर पालिका कार्यालय का ताला जबरदस्ती खोला गया और यहाँ से सरकारी तिरपाल को ले जाया गया जिसकी कीमत लगभग 1 लाख रुपए है। शिकायत में सेंट्रल आर्म्ड फोर्स की सहायता लेने की बात भी कही गई है।

आपको बता दें कि शुभेन्दु अधिकारी बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी नेता भी हैं। इसके अलावा उनके भाई सोमेंदु अधिकारी कांठी नगरपालिका के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। शुभेन्दु और उनके भाई सोमेंदु ने तृणमूल कॉन्ग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में शुभेन्दु अधिकारी को नंदीग्राम में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के प्रतिद्वंदी के रूप में उतारा गया था जहाँ शुभेन्दु ने ममता बनर्जी को 1956 वोटों से पराजित किया था।   

शुभेन्दु और उनके भाई पर हुई एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह भाजपा के खिलाफ साजिश है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी लोकतंत्र में बिल्कुल भी भरोसा नहीं करती और उनकी मंशा विपक्ष को समाप्त कर देने की है।

इससे पहले शनिवार (05 जून) को कोलकाता में भाजपा कार्यालय के बाहर 51 क्रूड बम मिले थे। बम एक फल की बोरी में रखे हुए थे।

सेना की खुफिया जानकारी के बाद रात में पुलिस ने हेस्टिंग्स में भाजपा कार्यालय के बाहर रखे इन क्रूड बमों को बरामद किया था। पुलिस स्थानीय सीसीटीवी फुटेज की सहायता से आरोपितों की तलाश कर रही है।

ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर कंगना ने खालिस्तानियों को लताड़ा, कॉन्ग्रेस के साथ उनके साँठगाँठ पर उठाया सवाल

ऑपरेशन ब्लू स्टार की 37वीं बरसी पर बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने खालिस्तानियों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल नेटवर्किंग ऐप ‘कू’ पर कहा, “आज के दिन #ऑपरेशनब्लूस्टार पंजाब में कॉन्ग्रेस के शासनकाल के दौरान हुआ… ये हमारे देश और उसके लोगों के बारे में बहुत कुछ कहता है… कथित खालिस्तान का एक बड़ा हिस्सा कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा पाकिस्तान को दे दिया गया था, लेकिन आतंकवादी इसे पूछने की हिम्मत तक नहीं करते, आतंकवाद सुविधा को देखते हुए अपनी आवाज उठाता है… दुनिया का इतिहास परस्पर विरोधी है क्रूरता और मनोरंजन…।”

कंगना ने खालिस्तानियों से सहानुभूति रखने वालों पर वाजिब सवाल उठाए, जो दिखाता है कि उनके इरादे बेहद नेक हैं। एक्ट्रेस ने पहला सवाल यह उठाया था कि पंजाब की सत्तारूढ़ कॉन्गेस सरकार यहाँ शासन कैसे चलाती है, क्योंकि ऑपरेशन ब्लू स्टार उस समय केंद्र में कॉन्ग्रेस के कार्यकाल के दौरान ही हुआ था।

उन्होंने दूसरा सवाल खालिस्तानी ताकतों के गलत इरादों को लेकर उठाया। खासतौर पर कथित खालिस्तान (सिखों या पंजाब की भूमि) का एक बड़ा हिस्सा विभाजन के समय पाकिस्तान को दिया गया था। प्रारंभिक वर्षों में देश पर शासन करने वाले कॉन्ग्रेस नेताओं ने विभाजन की शर्तों पर सहमति जताई थी। हालाँकि, इसके बाद भी खालिस्तानी आतंकवादियों और उनके चाहने वालों ने कभी भी पड़ोसी देश से पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के अपने ‘अहम हिस्से’ को लेकर कुछ भी नहीं पूछा।

कथित खालिस्तान क्षेत्र का नक्शा

जैसा कि इस नक्शे में देखा जा सकता है कि ‘खालिस्तान’ क्षेत्र भारत और पाकिस्तान के बीच में आता है, लेकिन खालिस्तान समर्थक अपनी आवाज केवल भारत में ही और भारत के खिलाफ ही बुलंद करते हैं। इस तरह के कई विरोध विदेशों में भारतीय दूतावासों के बाहर हुए हैं, लेकिन पाकिस्तानी दूतावास के बाहर कभी नहीं हुए।

खालिस्तानी अराजक तत्वों ने भारतीय दूतावास के बाहर विदेशों में अनगिनत बार विरोध किया है, लेकिन उन्होंने कभी भी पाकिस्तान के दूतावास के बाहर ऐसा करने की हिम्मत नहीं की। सच तो यह है कि खालिस्तानियों को कई मामलों में भारत और उसकी सरकार के खिलाफ भड़काऊ भाषण व नारे लगाने के लिए पाकिस्तानियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मार्च करते हुए देखा गया है।

किसान आंदोलन में खालिस्तानी ताकतों की कथित भूमिका

कथित तौर पर खालिस्तानी ताकतों ने सितंबर 2020 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन में घुसपैठ की। ऐसे कई सबूत हैं जो इस ओर इशारा करते हैं कि सिख फॉर जस्टिस (Sikhs For Justice) जैसे खालिस्तानी संगठनों ने ट्रैक्टर रैली के दौरान दंगा भड़काने के लिए ‘इनाम‘ के नाम पर फंड मुहैया कराया है।

एसएफजे (SFJ) के प्रमुख पन्नू ने लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को इनाम देने की घोषणा की थी और 26 जनवरी को कथित किसानों के एक समूह ने लाल किले पर सिखों के पवित्र त्रिकोणीय ध्वज के साथ दो झंडे फहराए थे।

शिवलिंग तोड़ा, शिव मंदिर को किया छतिग्रस्त: सोशल मीडिया में खबर वायरल, जाँच में जुटी UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के आलमपुर गाँव में एक स्थानीय मंदिर का ताला तोड़ने और मंदिर के बाहर स्थापित शिवलिंग को अपनी जगह से हटाने का मामला सामने आया। जिसको लेकर वहाँ के स्थानीय लोगों में रोष है। बता दें कि आलमपुर गाँव सहारनपुर जिले के मिर्जापुर थाने के अंतर्गत आता है।

सोशल मीडिया पर इस घटना से संबंधित कुछ फोटो वायरल होने पर लोगों के अंदर आक्रोश देखा गया है, साथ ही कई कयास लगाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर हलचल देखकर ऑपइंडिया ने गाँव के स्थानीय लोगों से संपर्क किया और शिव मंदिर मामले में गाँव के लोगों और पुलिस से जानकारी ली।

गाँव में ही दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति ने ऑपइंडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आलमपुर गाँव में भगवान शिव का एक मंदिर है। यह मंदिर लगभग 40-50 साल पुराना है। शनिवार (05 जून) की दोपहर को पत्थर मारकर मंदिर का ताला तोड़ दिया गया और मंदिर परिसर में स्थापित शिवलिंग को उसकी जगह से हटा दिया गया था।

जिसे किसी अराजक तत्व की हरकत बताया जा रहा है। इससे आलमपुर गाँव थोड़ा तनाव का माहौल था। जानकारी देने वाले व्यक्ति ने हमें बताया कि चूँकि घटना के बाद उसी शाम को यूपी पुलिस घटनास्थल पर पहुँच गई थी। जिससे गाँव में अभी स्थिति नियंत्रण में है। हालाँकि, यह हरकत किसकी थी इसके बारे में पुलिस पता रही है।

ऑपइंडिया ने इस मामले में जानकारी लेने के लिए मिर्जापुर थाने के SO अमरदीप लाल से संपर्क किया। SO लाल ने बताया कि किसी शरारती तत्व ने मंदिर के बाहर विराजित शिवलिंग को उसकी जगह से हटा दिया था।

जब SO अमरदीप लाल से संपर्क किया गया तब वो घटना स्थल पर ही मौजूद थे और उनके साथ मंदिर के पुजारी, गाँव के प्रधान और अन्य नागरिक भी मौजूद थे। लाल ने आश्वासन दिया कि घटना गंभीर नहीं है और शिवलिंग को पुनः स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है।   

स्वर्ण मंदिर में खालिस्तानी झंडे और भिंडरावाले के पोस्टर: ऑपरेशन ब्लू स्टार की 37वीं बरसी पर दीप सिद्धू भी अंदर

1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार की आज (6 जून 2021) 37वीं बरसी है। इस मौके पर अमृतसर के श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में खालिस्तानी समर्थकों द्वारा नारे लगाए गए। समाचार न्यूज एजेंसी एएनआई ने कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिसमें खालिस्तानी समर्थक जरनैल भिंडरावाले के पोस्टर और खालिस्तानी झंडे प​कड़े हुए नजर आ रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गणतंत्र दिवस दंगे के मुख्य आरोपितों में से एक एक्टर दीप सिद्धू को भी इस दौरान परिसर के अंदर देखा गया। फिलहाल, वह अभी जमानत पर बाहर है।

अकाल तख्त परिसर में खालिस्तान समर्थक दल खालसा ने 6 जून को ‘खालिस्तान दिवस’ के रूप में मनाने की माँग करते हुए स्वर्ण मंदिर तक मार्च निकाला।

ऑपरेशन ब्लू स्टार

बता दें कि ऑपरेशन ब्लू स्टार 1 जून से 8 जून 1984 के बीच अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में किया गया था। भारतीय सेना ने 6 जून 1984 को ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार’ चलाया था। उस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार’ का आदेश दिया था, जिसे अमृतसर में स्थित हरमंदिर साहिब कॉम्प्लेक्स में कराया गया था। इस ऑपरेशन में कई लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी। इतना ही नहीं, स्वर्ण मंदिर के कुछ हिस्से को भी नुकसान पहुँचा था।

सिख विरोधी दंगे

ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान खालिस्तान समर्थकों ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर स्थित अकाल तख्त परिसर को अपने कब्जे में ले लिया था। आधिकारिक रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरे ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना के 83 जवान और 492 नागरिक हताहत हुए थे।

इसके कुछ महीने बाद 31 अक्टूबर, 1984 को ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेने के लिए इंदिरा गाँधी की उनके सिख बॉडीगॉर्ड द्वारा हत्या कर दी गई थी। इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद दिल्ली में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे, जिनमें लगभग 3000 सिखों को मौत के घाट उतार दिया गया था। वहीं, कॉन्ग्रेस नेताओं पर सिखों के खिलाफ भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप लगाया गया था।

‘केवल हिंदी/अंग्रेजी में बात करें नर्स, मलयालम पर रोक’: भारी विरोध के बाद दिल्ली के सरकारी अस्पताल ने वापस लिया आदेश

दिल्ली सरकार द्वारा संचालित जीबी पंत हॉस्पिटल ने नर्सिंग स्टाफ द्वारा ड्यूटी के दौरान मलयालम भाषा के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाला अपना आदेश रविवार (6 जून) को वापस ले लिया।

दिल्ली के सरकारी अस्पताल गोविंद बल्लभ पंत इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (GIPMER) ने इससे पहले जारी अपने एक आदेश में नर्सों को ड्यूटी के दौरान केवल हिंदी और अंग्रेजी में बात करने और मलयालम भाषा का प्रयोग न करने का निर्देश जारी किया था।

अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की ओर से मेमो जारी किए जाने के बाद उनकी जानकारी के बिना सर्कुलर जारी किया गया था। अस्पताल ने पहले स्पष्ट किया था कि नर्सों को मलयालम में एक-दूसरे से बात करने की अनुमति है, लेकिन उन्हें रोगियों के साथ हिंदी में बात करनी चाहिए।

अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की ओर से मेमो जारी किए जाने के बाद उनकी जानकारी के बिना सर्कुलर जारी किया गया था। अस्पताल ने पहले स्पष्ट किया था कि नर्सों को मलयालम में एक-दूसरे से बात करने की अनुमति है, लेकिन उन्हें रोगियों के साथ हिंदी में बात करनी चाहिए।

क्या था मलयालम भाषा को लेकर जीबी पंत अस्पताल का सर्कुलर?

GIPMER ने एक शिकायत प्राप्त होने के बाद नर्सिंग स्टाफ के लिए हिंदी या अंग्रेजी को संचार की भाषा के रूप में अनिवार्य करते हुए शनिवार (5 जून) को एक सर्कुलर जारी किया था।

दिल्ली के सरकारी अस्पताल GIPMER ने अपने इस परिपत्र में नर्सिंग स्टाफ को ड्यूटी के दौरान मलयालम भाषा का इस्तेमाल नहीं करने को कहा था क्योंकि अस्पताल का कहना था कि ‘ज्यादातर रोगी मलयालम नहीं समझते हैं’ और ‘असहाय महसूस कर रहे थे।’ मलयालम केरल की प्रमुख भाषा है और ये आदेश वहाँ से आने वाले मलयाली नर्सिंग स्टाफ के लिए था।

इसके बाद अस्पताल द्वारा जारी आदेश में नर्सिंग स्टाफ को निर्देश दिया कि वे हिंदी या अंग्रेजी में ही बात करें, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। नर्सों ने इस कदम की आलोचना की और कहा है कि वे हमेशा मरीजों से हिंदी में बात करती हैं।

भारी विरोध के बाद जीबी पंत अस्पताल ने वापस लिया सर्कुलर

दिल्ली के सरकारी अस्पताल के इस कदम पर आपत्ति जताते हुए, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा कि केजरीवाल सरकार अब यूपी और बिहार के लोगों को निशाना बनाने के बाद केरल की नर्सों को निशाना बना रही है। केजरीवाल की तुलना पीएम मोदी से करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक मलयाली नर्स से कोविड वैक्सीन की पहली खुराक ली थी, जिससे एकता को बढ़ावा मिला था। वहीं इस मामले पर केरल की सत्तारूढ़ पार्टी, सीपीआई (एम) ने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है।

अस्पताल के इस कदम को भेदभाव बताते हुए राहुल गाँधी, जयराम रमेश समेत कई कॉन्ग्रेसी नेताओं ने तीखी आलोचना की थी। केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी ने ट्वीट कर कहा, ‘मलयालम किसी भी अन्य भारतीय भाषा की तरह ही भारतीय है। भाषा का भेदभाव बंद करो!’, वहीं जयराम रमेश ने इसे विचित्र बताया। इसी तरह, कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे ‘अस्वीकार्य, असभ्य, आक्रामक और भारतीय नागरिकों के बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन’ बताया।

वहीं इस विवाद पर जीबी पंत नर्सेज एसोसिएशन अध्यक्ष लीलाधर रामचंदानी ने दावा किया कि यह आदेश एक मरीज द्वारा दिल्ली स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल में मलयालम भाषा के इस्तेमाल के संबंध में भेजी गई शिकायत के बाद जारी किया गया था। उन्होंने हालाँकि कहा कि ”नर्सिंग एसोसिएशन सर्कुलर में इस्तेमाल किए गए शब्दों से असहमत है।”

योगी सरकार की सख्त कार्रवाई: भ्रष्टाचार में लिप्त यूपी के तीन SDM को डिमोट कर फिर से बनाया तहसीलदार

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अलग-अलग ज़िलों में ज़मीन घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ताजा मामले में जमीन घोटाले में धाँधली के आरोपित तीन उप जिलाधिकारियों (SDM) को तहसीलदार के पद पर डिमोट कर दिया है।

नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग की तरफ से इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया है। जिन तीन उपजिलाधिकारियों (SDM) पर कार्रवाई की गई है वे प्रयागराज, श्रावस्ती और मुरादाबाद में तैनात थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों एसडीएम पर जमीन के मामले में नियम को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से गलत फैसला लेने का दोषी पाया गया है। तीनों को तहसीलदार बनाने के बाद राजस्व परिषद से सम्बद्ध किया गया है।

तीनों एसडीएम पर जमीन के संबंध में धाँधली करने का दोषी पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, श्रावस्ती के एसडीएम जेपी चौहान पर पीलीभीत में तहसीलदार के पद का गलत फायदा उठाते हुए महँगी जमीन की कीमत को कम आँकने आरोप था। वहीं मुरादाबाद के एसडीएम अजय कुमार पर ये गंभीर आरोप है कि उन्होंने ग्रेटर नोएडा की जमीन को किसी पावरफुल व्यक्ति को देने के लिए अधिग्रहण कर मनमाने तरीके से छोड़ दिया था। जिस केस में हुई जाँच में अजय कुमार को दोषी पाया गया है।

जबकि, प्रयागराज के एसडीएम रामजीत मौर्य जब तहसीलदार के पद पर नियुक्त थे। तब उन्होंने नियम को न मानते हुए। करोड़ों की जमीन पर मनमाने ढंग से बेतहाशा फैसले लिए, फिलहाल जाँच में तीनों एसडीएम को दोषी पाया गया। इसी वजह से योगी सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एसडीएम को तहसीलदार बना दिया गया है।

मीडिया में आई रिपोर्ट के अनुसार, एसडीएम प्रयागराज रामजीत मौर्य ने मीरजापुर में तहसीलदार के पद पर तैनाती के दौरान जमीन संबंधी एक मामले में नियमों को दरकिनार करते हुए मनमाने तरीके से निर्णय लिया था। बताया जा रहा है कि यह जमीन कई एकड़ में है और इसकी कीमत करोड़ों रुपए आँकी जा रही है। बता दें कि इन तीनों मामले की जाँच कराई गई और जाँच के बाद इन्हें दोषी पाया गया।

गौरतलब है कि लोक सेवा आयोग ने दो अधिकारियों को पदावनत करने संबंधी राज्य सरकार के प्रस्ताव पर सहमति दी, लेकिन अजय कुमार की दो वेतन वृद्धि रोकने की प्रस्ताव पर सहमत नहीं दी है। आयोग ने अजय कुमार के दोष के सापेक्ष दंड कम होने का तर्क देते हुए उन्हें भी डिमोट करने की संस्तुति कर दी है। इस तरह तीनों ही अधिकारियों को पदावनत करने का फैसला हुआ। जो योगी भ्रष्टाचार पर सख्त रवैये को दर्शाता है।