Home Blog Page 3751

नाम: मीनू हांडा, कंपनी: गूगल (डायरेक्टर, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन), काम: PM मोदी के खिलाफ घृणा दिखाना

सोशल मीडिया पर गुरुवार (27 मई) को मीनू हांडा का एक पोस्ट वायरल होता रहा। इस पोस्ट में हांडा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक आपत्तिजनक ग्राफिक शेयर किया था। हांडा गूगल में कॉरपोरेट कम्युनिकेशन की डायरेक्टर बताई जा रही है।

यह पोस्ट सबसे पहले एलेन शॉ नाम के एक यूजर ने शेयर किया था। उसने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए जारी नई गाइडलाइंस पर पीएम मोदी को निशाने पर लिया। शॉ ने लिखा, “डियर गवर्नमेंट, प्लीज एक पब्लिक टॉयलेट को अपने सिंहासन के साथ कन्फ्यूज मत करो।“

एलेन शॉ का पोस्ट (सोर्स : ट्विटर)

पोस्ट के वायरल होने के बाद मीनू हांडा ने अपना ट्विटर अकाउंट लॉक कर दिया। हालाँकि हांडा के सोशल मीडिया प्रोफाइल को जाँचने के बाद कई ऐसे पोस्ट मिले जिसमें पीएम मोदी और वर्तमान केंद्र सरकार के लिए आलोचना और घृणा ही दिखाई दी। इसके अलावा हांडा ने फेक न्यूज फैलाने वाले प्रशांत भूषण और कुणाल कामरा, लिबरल पत्रकार शेखर गुप्ता और कॉन्ग्रेस के नेताओं श्रीवत्स वाईबी और गौरव पाँधी जैसे लोगों के ट्वीट, रीट्वीट किए हैं।

प्रशांत भूषण का ट्वीट (सोर्स : ट्विटर)
कोविड केस के लिए मोदी को जिम्मेदार ठहराने वाला पोस्ट (सोर्स : ट्विटर)
(सोर्स : ट्विटर)
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर मीनू हांडा की पोस्ट (सोर्स : ट्विटर)
(सोर्स : ट्विटर)
रिपब्लिक चैनल के अर्नब गोस्वामी पर आपत्तिजनक पोस्ट को हांडा द्वारा रीट्वीट किया जाना (सोर्स : ट्विटर)

हाल ही में हांडा ने राणा आयूब की एक पोस्ट को रीट्वीट किया जिसमें उमर खालिद का लिखा हुआ लेख था। खालिद फरवरी 2020 में हुए दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगों के आरोप में जेल में है। राणा आयूब, पीएम मोदी के खिलाफ लगातार प्रोपेगेंडा चलाने के लिए जानी जाती है।

राणा आयूब द्वारा शेयर किए गए उमर खालिद के लेख को हांडा द्वारा रीट्वीट किया जाना (सोर्स : ट्विटर)

बड़ी कंपनियों के उच्च अधिकारियों का राजनैतिक द्वेष

यह पहली बार नहीं है जब किसी कंपनी के किसी बड़े अधिकारी ने अपने राजनैतिक द्वेष का प्रदर्शन किया हो। 2018 में ट्विटर इंडिया की पॉलिसी हेड महिमा कौल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट शेयर किए थे। जून 2020 में फेसबुक ने सिद्धार्थ मजूमदार को पॉलिसी हेड के तौर पर नियुक्त किया। मजूमदार का ट्विटर अकाउंट पीएम मोदी के लिए घृणा वाले पोस्ट से भरा हुआ था। इसके अलावा मजूमदार ने केन्द्रीय मंत्रियों की पोस्ट पर भी अस्वीकार्य भाषा में कमेन्ट किए थे।

अगस्त 2020 में यह सामने आया था कि फेसबुक की कर्मचारी विजया मूर्ति मोदी विरोधी और कॉन्ग्रेस पार्टी की एक समर्पित फॉलोवर हैं। मूर्ति की लिंक्डइन प्रोफाइल में पोस्ट के तौर पर फेसबुक इंडिया में पॉलिसी मैनेजर लिखा हुआ था। इसके अलावा फेसबुक इंडिया के पूर्व पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अँखी दास, जिन्हें विपक्ष ने भाजपा का एजेंट कहा था, टीएमसी की ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के लिए अपना खुला समर्थन जाहिर कर चुके हैं।  

व्हाइट फंगस से बड़ी आँत, छोटी आँत और भोजन की नली में कई छेद, विश्व का पहला ऐसा मामला: कोरोना संक्रमित महिला की हुई सर्जरी

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अपनी तरह का एक पहला मामला सामने आया है, जहाँ व्हाइट फंगस की वजह से एक मरीज की बड़ी और छोटी आँत में कई छेद पाए गए। उक्त मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित भी है। अस्पताल में ‘इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी ऐंड पैनक्रिएटिकोबिलेरी साइंसेस’ के अध्यक्ष डॉक्टर अनिल अरोड़ा ने बताया कि White Fungus (Candida) के कारण भोजन की नली, छोटी आँत या बड़ी आंत में छेद का कोई मामला अब तक सामने नहीं आया था।

उन्होंने जानकारी दी कि एक 49 वर्षीय महिला को पेट में बहुत अधिक दर्द, उल्टी तथा कब्ज की शिकायत के कारण सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उक्त मरीज मई 13, 2021 को अस्पताल में एडमिट हुई थी। उक्त महिला को स्तन कैंसर भी हो चुका है और इस कारण दिसंबर 2020 में उनका स्तन निकाला गया था। चार सप्ताह पहले तक उनकी कीमोथेरेपी भी हुई थी। मरीज की सर्जरी हुई है।

डॉक्टर अरोड़ा के अनुसार, उक्त महिला मरीज के पेट का सीटी स्कैन किया गया तो पता चला कि उनके पेट में पानी और हवा है, जो आंत में छेद के कारण होता है। सर्जरी के दौरान पाया गया कि भोजन की नली के निचले हिस्से में भी छेद था। छोटी आँत के एक हिस्से में गैंगरीन (खून की सप्लाई रुक जाने के साथ टिसूज का मर जाना) होने की वजह से उस हिस्से को निकाल दिया गया। उक्त महिला के शरीर में कोविड-19 की एंटीबॉडी का स्तर काफी अधिक पाया गया।

महिला में व्हाइट फंगस की शिकायत पाए जाने के बाद उन्हें एंटी फंगल दवाएँ दी गईं और बताया जा रहा है कि अब उनकी हालत ठीक है। इससे पहले ब्लैक फंगस के कारण कई राज्यों में पहले से ही स्थिति गंभीर है। असल में डॉक्टरों का कहना है कि महिला के कैंसर पीड़ित होने, उनकी कीमोथैरेपी होने और फिर इसके बाद कोरोना वायरस संक्रमण होने के कारण महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर हो चुकी थी।

व्हाइट फंगस से आँत में छेद होने का ये भारत ही नहीं बल्कि दुनिया का पहला मामला है। बता दें कि व्हाइट फंगस का असली नाम कैंडिडियासिस है और ये अधिकतर ICU में दाखिल मरीजों में पाया जाता है। जो लोग कई दिनों से एंटीबायोटिक दवाएँ ले रहे हैं, उनमें भी इसका खतरा ज्यादा है। इसी तरह अब ‘येलो फंगस’ भी आ गया है, जो कई अनुभवी डॉक्टरों के लिए भी नया है। ये नाक के घाव को भरने नहीं देता है, जिससे खून रिसता रहता है।

व्हाइट फंगस हाई रिजोल्यूशन सिटी (HRCT) स्कैन से पकड़ में आता है। अगर इसका संक्रमण फैलता है तो फिर देश के स्वास्थ्य व्यवस्था को तीन मोर्चों पर लड़ाई लड़नी पड़ेगी। जैसे कोरोना मुख्यतः मरीज के फेंफड़ों को निशाना बनाता है, ये भी वैसा ही करता है लेकिन कई अन्य अंगों पर भी दुष्प्रभाव छोड़ता है। मुँह के भीतर ये घाव का कारण बन जाता है। पटना में सामने आए मामलों को भी कोरोना समझ कर भर्ती किया गया था, लेकिन वो ‘व्हाइट फंगस’ के निकले।

सऊदी अरब में नमाज के दौरान ‘लाउडस्पीकर’ पर रोक: इस्लामी स्कॉलरों ने कहा- मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को नुकसान

सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने एक नोट जारी करते हुए नमाज के दौरान मस्जिदों में बाहरी लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहाँ की स्थानीय मीडिया के मुताबिक, देश के इस्लामिक मामलों के मंत्री इस्लामी मामलों के मंत्री, शेख डॉ अब्दुल्लातिफ बिन अब्दुलअज़ीज़ अल-शेख द्वारा जारी सर्कुलर में मस्जिदों को केवल अजान और इकामत (सामूहिक प्रार्थना) के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है।

सर्कुलर के अनुसार, नमाज के दौरान लाउडस्पीकर का इस्तेमाल मस्जिद के अंदर ही किया जा सकेगा और आवाज लाउडस्पीकर डिवाइस के लेवल का एक तिहाई होना चाहिए। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी सऊदी प्रशासन ने दी है।

सर्कुलर में पैगंबर मोहम्मद की हदीस का हवाला

सर्कुलर के अनुसार, नया फैसला पैगंबर मोहम्मद (PBUH) की हदीस पर आधारित है जिसमें उन्होंने कहा: “लो! तुम में से हर एक चुपचाप अपने रब को पुकार रहा है। नमाज पढ़ते समय या इबादत करते समय आवाज को दूसरों की आवाज से ऊँचा नहीं करनी चाहिए।”

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रालय द्वारा शरिया नियमों को लागू किए जाने के बाद शेख मुहम्मद बिन सालेह अल-उथैमीन और सालेह बिन फवजान अल-फवजान जैसे इस्लामिक स्कॉलर ने भी इसका समर्थन करते हुए फतवा जारी किया है। इसमें भी अजान और इकामत के अलावा मस्जिद में बाहरी लाउड स्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसमें बताया गया है कि इससे मस्जिदों के आसपास के घरों में मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को नुकसान पहुँचता है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नमाज में इमाम की आवाज को मस्जिद के अंदर तक ही सीमित रखना है, इसे लोगों तक पहुँचाने की कोई आवश्यकता नहीं है। सर्कुलर में कहा गया है कि बाहरी एम्पलीफायरों पर कुरान पढ़ना कुरान के लिए अपमानजनक है। जब कोई इसकी आयतों को न सुन रहा हो और न ही इस पर विचार कर रहा हो।

इससे पहले भी सऊदी ने स्पीकर की आवाज पर दिया था बयान

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब-जब सऊदी मंत्रालय ने देश में मस्जिदों में लाउडस्पीकर के बारे में बात की है। इससे पहले भी इस्लामिक मामलों के मंत्री ने 2019 में रमजान के महीने के दौरान मस्जिदों में मस्जिदों में लाउडस्पीकर की आवाजन कम करने को कहा था।

अप्रैल 2019 में मंत्रालय द्वारा जारी एक वीडियो में सऊदी मंत्री ने इमामों और मुअज्जिनों से ‘लोगों को नुकसान पहुंचाने वाली आवाजों को कम करके अपनी मस्जिदों के उपासकों और आस-पड़ोस के लोगों के प्रति दयालु रहने’ को कहा था।

नेहरू के समलैंगिक संबंध, बायसेक्सुअल मानसिकता और यौन संक्रामक बीमारी के कारण निधन: विदेशी मीडिया की रिपोर्ट और सच्चाई

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का विलासिता पूर्ण जीवन अक्सर सुर्खियों में छाया रहता है। कभी सोशल मीडिया के माध्यम से तो कभी पत्र-पत्रिकाओं के जरिए। आप जब कभी नेहरू को पढ़ेंगे तो आपको लगेगा कि उनके न शौक कम थे और न ही उनसे जुड़े विवाद। 

नेहरू के जीवन मरण से जुड़ी कई ऐसी बातें अब भी आमजन में इतनी अस्पष्ट हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी कभी तो कुछ बातों पर सफाई दे देती है, लेकिन कुछ जरूरी बातों पर, बिलकुल मौन धारण कर लेती है।

ऐसी ही बात उनकी मृत्यु को लेकर भी उठती रहती है। आज उनकी 57 वीं पुण्यतिथि है। ऐसे में ये जानना प्रासंगिक तो है ही कि आखिर देश के पहले प्रधानमंत्री का निधन किन कारणों से और किस स्थिति में हुआ। 

इसके अलावा ये बात भी बहुत दिलचस्प है कि कैसे उनके जीवन से जुड़ी बातों ने मृत्यु के बाद भी लोगों को ये सोचने पर मजबूर किया कि शायद मौत का कारण कुछ और था।

पंडित नेहरू का निधन और सिफलिस होने के दावे

मीडिया रिपोर्ट्स को पढ़ेंगे तो मालूम होगा कि आजादी के 17 वर्ष बाद 27 मई 1964 की सुबह नेहरू का निधन हार्ट अटैक के कारण हुआ और इसी के बाद दोपहर 2 बजे संसद में ऐलान किया गया कि 74 वर्षीय नेहरू अब नहीं रहे। 

द न्यूयॉर्क में प्रकाशित नेहरू के निधन की खबर

द न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित मेडिकल वाली भाषा में कहें तो नेहरू का निधन कोरोमरी थ्रोम्बिसिस  के कारण हुआ था। इसका मतलब होता है कि हृदय की धमनी में थक्के जमना और समय से हृदय को रक्त की आपूर्ति न हो पाना।

द गार्जियन की रिपोर्ट में नेहरू के किसी परिजन के हवाले से कहा गया कि उनकी मौत का कारण इंटरनल हैमरेज, पैरालाइटिक स्ट्रोक और एक हार्ट अटैक था।

अखबारों में नेहरू की मौत की वजह स्पष्ट थी। हर जगह कहा जा चुका था कि नेहरू का निधन हार्टअटैक के कारण हुआ। बावजूद इन तथ्यों के एक बात जगह-जगह फैल गई कि आधुनिक भारत के निर्माता और देश के पहले पीएम की मृत्यु सिफलिस से हुई… इस बात में कितनी सच्चाई है, इसके प्रमाण नहीं मिलते। लेकिन लोगों ने इसे भी एक वजह की तरह देखा, इसका कारण यही है कि नेहरू के लोगों ने (कॉन्ग्रेसियों) कभी इन अटकलों पर विराम नहीं लगाया और उनकी बीमारी पर खुल कर कोई बात नहीं रखी। 

बस कह दिया गया कि चीन से युद्ध हारने के बाद उनकी तबीयत 1962 से गिरने लगी थी। इसके बाद 1963 में नेहरू ने अपना समय कश्मीर में बिताया। फिर कुछ दिन देहरादून में रहे और 1964 में देहरादून से लौटने के कुछ समय बाद उनका देहांत हो गया। 

कहते हैं 26 मई 1964 की रात नेहरू जब सोए, तो उनकी तबीयत बिलकुल ठीक थी। अगली सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर नेहरू ने बाथरूम से लौट कर पीठ में दर्द की शिकायत की। डॉक्टर बुलाए गए। उन्होंने नेहरू से बात भी की। लेकिन तभी नेहरू बेहोश हो गए और बेहोशी की हालत में ही उन्होंने प्राण त्याग दिए।

नेहरू की मृत्यु को लेकर उड़ी बातों पर कुछ नेहरू समर्थक लेख लेकर आए, जिन्होंने संक्रमण की फैलती अफवाह को काटने का प्रयास किया। मगर, फर्क नहीं पड़ा। पिछले कुछ दशकों में तो ऐसी बात आग की तरह लोगों के बीच पहुँची।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि सिफलिस एक ऐसा संक्रमण होता है, जो लैंगिक संबंध बनाने से फैलता है। 16वीं शताब्दी में इसके बारे में पहली बार पता चला था। भारत में इसे पुर्तगाली रोग भी कहा गया। बाद में जैसे-जैसे ये देश में फैला, उसे देख स्पैनिश लेखकों ने भारतीयों को कामुक तक की संज्ञा दे दी थी।

अब चूँकि कुछ बातें पहले ही कई जगह मौजूद थीं कि नेहरू अय्याश किस्म की शख्सियत थे, तो लोगों को ये मानने में भी देर नहीं लगी कि हो सकता है कि मौत का असली का कारण सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिसीज सिफलिस ही रही हो।

एडविना माउंटबेटन और नेहरू के संबंधों पर होती बातें

पता नहीं आपने इस बारे में सुना है या नहीं, लेकिन साल 2017 में राजीव दीक्षित नाम के शख्स ने अपनी एक यूट्यूब वीडियो में नेहरू की मृत्यु पर चौंकाने वाले दावे किए थे। दीक्षित ने कहा था कि लुईस माउंटबेटन की एडविना माउंटबेटन से शादी एक साजिश थी। एडविना को वास्तव में भारत के दो भाग करने के लिए लाया गया था। यहाँ उन्होंने जिन्ना और नेहरू से संबंध बनाए और बाद में 3 जुलाई 1947 को नेहरू की कुछ तस्वीरें खींचकर उन्हें ब्लैकमेल किया, जिसके बाद भारत के विभाजन को मंजूरी मिली।

राजीव दीक्षित की कही इस बात के कहीं से सबूत नहीं मिलते हैं। लेकिन ये सच जरूर है कि लेडी माउंटबेटन के चलते नेहरू के चरित्र पर काफी सवाल उठे थे। कई लेखों में इसका उल्लेख था कि दोनों के बीच बेइंतहा प्यार था, जो एडविना के मरने तक रहा। दोनों के संबंधों पर नेटफ्लिक्स पर द क्राउन नाम से एक सीरीज भी है। 

इतना ही नहीं, स्वयं एडविना के बेटी पामेला इस बात को लिखती हैं, “मेरी माँ के पहले भी प्रेमी थे। मेरे पिता को इसका आभास भी था। शुरू में उनका दिल टूटा, लेकिन नेहरू के मामले में सब अलग था।” पामेला की किताब में नेहरू और उनकी माँ का प्रेम बेहद आध्यात्मिक कहा गया है।

लेडी माउंटबेटन से करीबियों ने दी अटकलों को हवा

मालूम हो कि एडविना से नेहरू के संबंध कैसे भी रहे, लेकिन दोनों की करीबियाँ एक मुख्य वजह ऱहीं कि लोगों ने दोनों की ही मौत के पीछे सिफलिस को वजह माना। ट्विटर पर डॉ वेदिका नाम की यूजर हैं। वह बताती हैं कि कैसे नेहरू और एडविना दोनों एक जैसी परिस्थिति में अलविदा हुए। वह लिखती हैं कि दोनों के ही बहुत सारे प्रेमी थे। एडविना को भी अटैक, स्ट्रोक आया था और वह भी नेहरू की तरह ही मरी थीं।

अपने ट्वीट में डॉ वेदिका नेहरू की मृत्यु का कारण Syphillitic Aortic Aneurysm कहती हैं और समझाती हैं कि हार्टअटैक भी STD से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा इंटरनेट पर ब्लॉग हैं, जो बताते हैं कि नेहरू की मौत के पीछे SYPHILIS-AORTIC ANEURYSM कारण था। वहीं एडविना की मौत के स्पष्ट कारण नहीं हैं। बस ये लिखा गया है कि उनका देहांत सोते में हुआ था।

लुईस माउंटबेटन को भी पसंद करते थे नेहरू?

एडविना के साथ रिलेशन्स को छोड़ दें तो कई जगह लुईस माउंटबेटन से भी नेहरू के समलैंगिक संबंधों पर बात सामने आती है। डेलीमेल में 2009 में प्रकाशित लेख बताता है कि नेहरू दोनों पति-पत्नी को (माउंटबेटन दंपत्ति) को पसंद करते थे और कुछ लोगों को संदेह था कि उनमें बायसेक्शुअल टेंडेंसी थी। वहीं लुईस माउंटबेटन थे, जो अपनी पत्नी की ओर आकर्षित थे लेकिन वह उनके साथ हमबिस्तर नहीं हो पाते थे।

डेलीमेल के लेख से लिया गया स्क्रीनशॉट

लुईस और नेहरू के समलैंगिक संबंधों को तूल इसलिए भी मिलता है क्योंकि भले ही नेहरू के बायसेक्सुअल होने का जिक्र चंद जगहों पर है मगर, लुईस के होमोसेक्सुअल होने के प्रमाण गूगल पर हर दूसरी रिपोर्ट में मिल जाते हैं। 2019 में प्रकाशित द वीक की रिपोर्ट बताती है कि Andrew Lownie नाम के लेखक की एक किताब है – The Mountbattens: Their Lives & Loves, जिसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के उन दस्तावेजों को एक्सेस करने का जिक्र है। इसमें माउंटबेटन को बायसेक्सुअल कहा गया है। साथ ही ये भी बताया गया है कि वह यूनिफॉर्म वाले लड़कों की ओर आकर्षित होते थे और स्कूली लड़के उन्हें सुंदर लगते थे। मालटा में रहते हुए उनके ड्राइवर ने भी इस बात का खुलासा किया था कि वह ऐसे वैश्यालय का इस्तेमाल करते थे, जहाँ समलैंगिक संबंध बनाए जाते थे।

AIDS तक होने की कही गई बात

यहाँ एक चीज उल्लेखनीय है कि कुछ लोग नेहरू की मौत के पीछे HIV-AIDS को भी कारण मानते हैं। किंतु, इन दावों में सच्चाई नहीं है, क्योंकि एड्स नेहरू की मौत के दो दशक बाद 1986 में चेन्नई की सेक्स वर्कर्स में पाया गया (भारत का पहला केस) था। इसके बाद कई अन्य महिलाएँ भी इससे संक्रमित पाई गई थीं।

रही बात नेहरू से जोड़कर इसे देखने की तो यहाँ भी वहीं थ्योरी काम करती है कि उनके प्रेम संबंधों को लेकर जो चर्चा फैली थी, उसके आधार पर कोई कुछ भी विश्वास कर रहा था। आज भी ट्विटर पर यदि खोजा जाए तो ऐसी बातें पढ़ने को मिलती हैं कि नेहरू को जो हार्टअटैक आया, उसके पीछे मुख्य वजह syphlis था। लेकिन मौजूदा प्रमाण इन दावों की पुष्टि नहीं करते।

ट्विटर पर नेहरू के निधन के पीछे सिफलिस को कारण मानने वाले यूजर

मुस्लिम से हिन्दू बनी, आर्य समाज मंदिर में शादी; अब्बा और समुदाय के लोग दे रहे धमकी: महिला को सुरक्षा देने का HC का ​निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम से हिन्दू बनी महिला को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश पुलिस को दिया है। महिला ने हिन्दू रीति-रिवाज से शादी की थी और उसके बाद से उसका अब्बा उसे लगातार धमकी दे रहा था। इसको लेकर महिला ने हाई कोर्ट से गुहार लगाई थी। उसकी याचिका पर गौर करने के बाद अदालतने ने बुधवार (26 मई 2021) को यह निर्देश दिया

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर ने मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को आदेश देते हुए कहा कि याचिककर्ता (महिला) की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। आदेश में कहा गया है कि पुलिस को सुनिश्चित करना होगा कि महिला और उसके पति को, महिला के घर के सदस्य, उसके समुदाय के लोग और स्थानीय पुलिस द्वारा कोई नुकसान न पहुँचाया जाए। कोर्ट ने कहा कि मेरठ SSP को यह देखना होगा कि महिला के पिता के कहने पर स्थानीय पुलिस महिला के शादीशुदा जीवन में कोई समस्या उत्पन्न न करे।

इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि महिला के परिवार या समुदाय के सदस्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम या शारीरिक माध्यम से महिला या उसके पति को नुकसान न पहुँचाए। साथ ही कोर्ट ने राज्य को इस मामले में जवाब देने के लिए 4 हफ्तों का समय भी दिया है। मामले में अगली सुनवाई 23 जून को होगी।

कोर्ट को दी गई सूचना के अनुसार मेरठ की रहने वाली 19 वर्षीय मुस्लिम महिला ने अपनी मर्जी से हिन्दू धर्म स्वीकार किया और मेरठ के आर्य समाज मंदिर में 16 अप्रैल 2021 को हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की। महिला का कहना है कि वह जन्म से मुस्लिम थी, किन्तु हिन्दू धर्म में आस्था होने के कारण उसने अपनी मर्जी से हिन्दू धर्म अपनाया और अपना हिन्दू नाम रखा है। महिला ने कोर्ट को बताया कि वह अपने पति के साथ अपनी मर्जी से रह रही है।

इसके बाद से ही महिला के धर्म परिवर्तन और हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करने के कारण उसके पिता, परिवार और समुदाय के लोगों से जान से मारने की धमकी मिल रही है। महिला ने बताया कि उसने इचौली थाना क्षेत्र में सुरक्षा की माँग की, लेकिन उसे सुरक्षा नहीं मिली। इसके बाद ही उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपनी और अपने पति की सुरक्षा के लिए आवेदन दिया।

भगवा कपड़ों में ‘यीशु दरबार’ लगाने वाला कुलपति, जो कोरोना को ‘हुक्म देकर’ भगाता है: ₹23 Cr के घोटाले में जा चुका है जेल भी

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष JA जयलाल ने जीसस से प्रार्थना करने पर कोरोना ख़त्म होने की बात कही थी, जिस पर हुआ विवाद अभी थमा भी नहीं है कि ऐसे ही ‘चमत्कार’ की बात करने वाले एक कुलपति का वीडियो सामने आया है। प्रयागराज के शैक्षिक संस्थान SHUATS के कुलपति प्रोफेसर डॉक्टर राजेंद्र बिहारी लाल यूनिवर्सिटी कैम्पस में स्थित चर्च के माध्यम से ही अंधविश्वास को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं।

उक्त मीडिया संस्थान ‘सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय’ (Sam Higginbottom University of Agriculture, Technology and Science)’ प्रयागराज के नैनी के रेवा रोड में यमुना नदी से कुछ ही दूसरी पर स्थित है। इसके कुलपति भगवा कपड़ों में ‘यीशु दरबार’ लगाते हैं। ऐसे ही एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “यीशु के नाम से हम इस तूफ़ान को, इस महामारी को डाँटते हैं – थम जा और हमारे लोगों पर अब कोई आक्रमण न कर।”

वायरल वीडियो में राजेंद्र बी लाल कहते दिख रहे हैं, “हम तेरे (कोरोना) अधिकार को समाप्त करते हैं। जहाँ से तू आया है, तुझे हम वहीं भेज देते हैं यीशु के नाम से। आज से और इसी घड़ी से इसी समय से ये शैतानी शक्ति देश को छोड़ दे।” इस दौरान उनकी वेशभूषा ऐसी रहती है, जैसे वो कोई हिन्दू साधु हों। गले में माला, शरीर पर भगवा कपड़े और सिर भी भगवा टोपी – एक नजर में देख कर किसी को भी लगे कि वो कोई हिन्दू संत हैं।

वीडियो में वो कहते दिख रहे हैं, “तूफ़ान को डाँटिए। बीमारों को चंगा कीजिए। दुष्ट आत्माओं को निकालिए। यीशु मसीह के नाम से वो निकल जाएगा।” बता दें कि हर सप्ताह रविवार के दिन राजेंद्र बी लाल ईसाई ‘चमत्कार’ करते हैं और ईसाई कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। ‘Indix Online’ के अनुसार, उनके निशाने पर आसपास के गरीब हिन्दू परिवार होते हैं जिन्हें वो कार्यक्रमों में बुलाते हैं और बरगलाते हैं।

कुलपति राजेंद्र बी लाल का ‘यीशु दरबार’ (वीडियो साभार: Indix Online)

उस कार्यक्रम में उन्होंने कोरोना वायरस को ‘आज्ञा और हुक्म’ देने की बात करते हुए कहा कि वो चला जाए। यूट्यूब पर ‘यीशु दरबार’ नाम का एक चैनल भी मौजूद है, जिसमें उनके भाषण अपलोड होते हैं। इस चैनल पर उनके 400 के करीब वीडियोज उपलब्ध हैं। इनमें वो ‘परमेश्वर’ और यीशु की बातें करने के साथ-साथ भगवा कपड़ों में ही ईसाई मजहब का महत्व समझाते हैं। इस वीडियोज में उनके कार्यक्रमों में लोगों की भारी भीड़ देखी जा सकती है।

इतना ही नहीं, SHUATS कुलपति राजेंद्र बिहारी लाल कई करोड़ रुपयों के एक बैंक घोटाले में भी फँसे हुए हैं और इस मामले में जेल भी जा चुके हैं। अप्रैल 2016 के मध्य में उन्हें जुडिशल कस्टडी में लेकर जेल भेजा गया था, जब उनकी जमानत याचिका खारिज हो गई थी। 23 करोड़ के घोटाले का ये मामला नवंबर 2014 से नवंबर 2016 तक सिविल लाइंस स्थित एक्सिस बैंक में हुआ। राजेंद्र बी लाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं।

‘यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं’: स्मृति ईरानी पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले प्रोफेसर शहरयार अली को अग्रिम जमानत नहीं

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोपित प्रोफेसर डॉ. शहरयार अली की अग्रिम जमानत याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस जेजे मुनीर की एकल पीठ ने प्रोफेसर की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि उनके द्वारा पोस्ट की गई सामग्री विभिन्न समुदायों के बीच घृणा को बढ़ावा देती है।

हाई कोर्ट ने कहा कि एक प्रोफेसर जो इतिहास विभाग का विभागाध्यक्ष है, उसके द्वारा दो समुदाय के बीच घृणा फैलाने वाले आचरण के लिए अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। इसे अभिव्यक्ति की आजादी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने ये भी कहा कि फेसबुक पर पोस्ट की गई सामग्री को सह आरोपित हुमा नकवी ने भी शेयर किया था, जबकि वास्तव में वह पोस्ट विभिन्न समुदायों  के बीच द्वेष या घृणा को बढ़ावा देने या सभी आशंका को बढ़ावा दे सकती है।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री ईरानी पर आपत्तिजनक पोस्ट किए जाने के संबंध में भारतीय जनता पार्टी के एक जिला मंत्री ने अली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 505 (2), आईटी एक्ट की धारा 67 ए के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी।

अली के वकील ने कोर्ट में जमानत पाने के लिए कहा कि उनका फेसबुक अकाउंट हैक कर लिया गया था। उन्हें उस पोस्ट के लिए खेद है जो स्मृति ईरानी के संबंध में लिखा गया। आरोपित ने यह भी कहा कि भाजपा के जिला मंत्री के कहने पर उन्हें फँसाया जा रहा है। वह पोस्ट के संबंध में माफी माँग चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर न ही अकाउंट हैक होने की बात है और न ही माफी माँगने के लिए कोई पोस्ट है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, मामले में पैरवी कर रहे वकील शशि शेखर तिवारी ने कहा कि फेसबुक पोस्ट में केंद्र सरकार की एक मंत्री और राजनीतिक दल की वरिष्ठ नेता के बारे में अश्लील टिप्पणी की गई है। एक प्रोफेसर से ऐसी पोस्ट करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। दो समुदाय के बीच घृणा फैलाने की कोशिश क्षम्य नहीं है। वह अग्रिम जमानत पाने के हकदार नहीं है।

संक्रमण से तेज टीके पर अफवाह: कोरोना वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर किए जा रहे 7 भ्रामक दावों की हकीकत जानिए

एक ओर कोरोना वायरस संक्रमण से नागरिकों की रक्षा के तमाम प्रयास हो रहे, दूसरी ओर कुछ लोग अफवाहों के जरिए इन प्रयासों पर पानी फेरने की कोशिश में हैं। कोरोना वैक्सीन पर भ्रामक दावों को देखते हुए सरकार ने लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) और टीकाकरण कार्यक्रम के एक्सपर्ट ग्रुप (NEGVAC) के प्रमुख डॉ. विनोद पाल ने देश में टीकाकरण पर आधारित कुछ ऐसे ही मिथकों के बारे में तथ्य पूर्ण जानकारी दी है।

मिथक 1 : विदेशों से वैक्सीन खरीदने के लिए केंद्र सरकार के प्रयास नाकाफी

यह कहना पूरी तरह गलत है कि सरकार विदेशी वैक्सीन निर्माताओं के संपर्क में नहीं है। 2020 के मध्य में ही इन वैक्सीन निर्माता कंपनियों से बातचीत शुरू हो गई थी। लेकिन जिस प्रकार हमारे वैक्सीन निर्माता पहले भारत को प्राथमिकता देते हैं, ठीक उसी प्रकार सभी वैक्सीन कंपनियों की अपनी प्राथमिकताएँ हैं। सरकार लगातार फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन एण्ड जॉनसन के संपर्क में थी। यह सरकार का ही प्रयास था कि रूस की वैक्सीन स्पूतनिक V के ट्रायल को मँजूरी मिली और वैक्सीन अप्रूव कर दी गई। हाल ही में फाइजर ने वैक्सीन की उपलब्धता के विषय में जानकारी दी है, जिसके बाद सरकार कंपनी के साथ वैक्सीन आयात करने पर बात आगे बढ़ा रही है।

मिथक 2 : केंद्र ने विदेशी वैक्सीनों को भारत में अनुमति नहीं दी

तथ्य तो यह है कि केंद्र सरकार ने देश में अप्रैल में ही अमेरिका की FDA, EMA, यूके के MHRA, जापान की PMDA और WHO में आपातकाल उपयोग के लिए सूचित सभी वैक्सीनों के लिए नियमों में आसानी प्रदान कर दी थी। किसी भी विदेशी वैक्सीन का भारत में अप्रूवल पेंडिंग नहीं है।

मिथक 3 : केंद्र सरकार वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने के लिए नहीं कर रही प्रयास

भारत में सिर्फ एक ही कंपनी ‘भारत बायोटेक’ है जिसके पास बौद्धिक संपदा अधिकार हैं लेकिन भारत सरकार के प्रयासों के कारण अब तीन और कंपनियाँ भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का उत्पादन करेंगी। भारत बायोटेक की क्षमता भी अक्टूबर तक बढ़कर 10 करोड़ डोज प्रतिमाह हो जाएगी। इसके अलावा सरकार ने कोविशील्ड को भी सहायता प्रदान की जिसके कारण कंपनी की क्षमता बढ़कर 11 करोड़ डोज प्रतिमाह हो जाएगी। इन दो कंपनियों के अलावा रूस की स्पूतनिक भी भारत में 6 कंपनियों द्वारा उत्पादित की जाएगी। भारत सरकार कोविड सुरक्षा योजना के तहत जायडस कैडिला, बायोई और जेनोवा जैसी कंपनियों को न केवल फंडिंग, बल्कि तकनीकी सहायता भी कर रही है। सरकार के इन्हीं प्रयासों के कारण 2021 के अंत तक भारत में 200 करोड़ डोज उपलब्ध होंगे।

मिथक 4 : केंद्र को कंपल्सरी लाइसेंसिंग का समर्थन करना चाहिए

इसके विषय में सरकार का कहना है कि कंपल्सरी लाइसेंस उतना मायने नहीं रखता है। मायने रखता है ‘फॉर्मूला’। तकनीकी हस्तांतरण शोध और विकास कार्य करने वाली कंपनियों के हाथ में होता है। भारत सरकार ने कंपल्सरी लाइसेंसिंग से आगे बढ़ते हुए भारत बायोटेक के अलावा तीन और कंपनियों को कोवैक्सीन निर्माण की अनुमति दी है। स्पूतनिक के साथ भी इसी प्रक्रिया का पालन किया गया है।

मिथक 5 : केंद्र ने राज्यों के प्रति जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा

जनवरी से अप्रैल तक केंद्र सरकार ने मई की तुलना में बेहतर तरीके से देश में टीकाकरण कार्यक्रम चलाया। राज्यों को देश में वैक्सीन उत्पादन और विदेशों से वैक्सीन खरीद की प्रक्रिया में होने वाली कठिनाइयों की पूरी जानकारी है, लेकिन फिर भी राज्य पहले से ज्यादा विकेन्द्रीकरण की माँग कर रहे हैं। स्वास्थ्य राज्य का विषय है और राज्यों की निरंतर माँग पर ही एक उदार वैक्सीन नीति अपनाई गई। हालाँकि पिछले 3 महीने में राज्य स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को भी टीकाकरण कार्यक्रम में कवर कर पाने में असमर्थ रहे हैं। फिर भी राज्यों को वैक्सीन प्रक्रिया में अधिक शक्तियाँ चाहिए।

मिथक 6 : केंद्र, राज्यों को पर्याप्त वैक्सीन नहीं दे रहा

केंद्र सरकार, राज्यों को पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से पर्याप्त टीके उपलब्ध करा रही है। अब यह भी निश्चित है कि आगे आने वाले समय में टीकों की उपलब्धता और राज्यों को वितरण भी बढ़ेगा लेकिन कुछ नेता रोज टीवी पर आकर लोगों के सामने भय का माहौल बनाते हैं। सरकार ने कहा कि राज्य टीकों के वितरण की प्रक्रिया से पूरी तरह से परिचित हैं। यह समय राजनीति करने का नहीं है। सरकार ने बताया कि भारत सरकार के कोटे के अलावा राज्यों को 25% टीके मिलते हैं और 25% निजी अस्पतालों को।

मिथक 7 : बच्चों के टीकाकरण में केंद्र प्रयासरत नहीं

इसके विषय में डॉ. पाल ने बताया कि विश्व के न तो किसी देश में और न ही डबल्यूएचओ के द्वारा बच्चों के टीकाकरण को लेकर कोई अधिसूचना जारी की गई है। जहाँ तक रही बात भारत में बच्चों के टीकाकरण की तो देश में बच्चों पर ट्रायल शुरू होने वाला है। हालाँकि यह फैसले वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के द्वारा लिया जाएगा, व्हाट्सऐप पर प्रसारित सूचनाओं और राजनीति करने वाले नेताओं के दबाव में आकर नहीं।  

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार भारत में अब तक 20,26,95,874 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। साथ ही पूरी तरह से वैक्सीनेट (जिन्हें दोनों डोज लग चुके हुए) लोगों की संख्या भी बढ़कर 4 करोड़ से अधिक हो चुकी है।  

अलवर में पतंजलि सरसों तेल मिल पर छापा, कॉन्ग्रेसी CM अशोक गहलोत के आदेश पर कार्रवाई की मीडिया रिपोर्ट

पतंजलि और आईएमए के बीच जारी विवाद के बीच राजस्थान के अलवर कलेक्ट्रेट के अधिकारियों ने पतंजलि की सरसों तेल निर्माता कंपनी सिंघानिया तेल मिल पर बुधवार (26 मई 2021) को छापा मारा।

रिपब्लिक वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आदेश पर मिल पर छापा मारा गया। अधिकारियों ने कथित तौर पर मिल से बड़ी मात्रा में पतंजलि के पैकिंग पाउच बरामद करने के बाद उसे सील कर दिया। हालाँकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह छापेमारी क्यों की गई थी।

अलवर कलेक्ट्रेट ने एक जाँच समिति का गठन किया है और संकेत दिया है कि मामले की जाँच सीबी-सीआईडी ​​को सौंपी जा सकती है।

आईएमए और बाबा रामदेव के बीच विवाद

इससे पहले बुधवार को, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर माँग की कि योग गुरु रामदेव पर टीकाकरण पर कथित गलत सूचना अभियान चलाने और कोविड-19 के इलाज के लिए सरकारी प्रोटोकॉल को चुनौती देने के लिए राजद्रोह के आरोपों के तहत तुरंत मामला दर्ज किया जाए। आईएमए की उत्तराखंड इकाई ने बाबा रामदेव को अगले 15 दिनों के भीतर लिखित माफी माँगने या 1000 करोड़ रुपये के मानहानि के नोटिस का सामना करने को कहा है।

सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो में, रामदेव को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया था कि एलोपैथी एक खोखली प्रथा है और एलोपैथिक दवाओं के कारण कई लोगों की जान चली गई है। इस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने कड़ी आपत्ति जताई थी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रामदेव की टिप्पणी पर संज्ञान नहीं लेने पर कोर्ट जाने की धमकी भी दी थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने रामदेव को पत्र जारी कर उन्हें अपने बयान वापस लेने का निर्देश दिया था। अपने बयान को वापस लेने के बाद रामदेव ने एलोपैथी के उपचार को लेकर आईएमए और फार्मा कंपनियों से 25 सवाल पूछे थे।

आईएमए ने बाबा रामदेव को भेजा है 1000 करोड़ रुपए मानहानि का नोटिस

गौरतलब है कि बाबा रामदेव का एलोपैथी पर बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आईएमए ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए हुए सरकार को उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा था। इतना ही नहीं आईएमए ने बाबा रामदेव के बयानों को आधार बनाकर उनपर 1000 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भी भेजा है। योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा एलोपैथिक उपचार की प्रभावशीलता को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और फार्मा कंपनियों से 25 सवाल पूछे जाने के कुछ दिनों बाद IMA ने उन्हें ये मानहानि का नोटिस भेजा है।

बाबा रामदेव के बयान के बाद से आईएमए ने उनके संगठन पतंजलि के खिलाफ हमले को तेज कर दिया है। भारत में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए मेडिकल फैसिलिटीज के लिए इस्तेमाल के लिए आईएमए अध्यक्ष के खुले समर्थन पर हालिया रिपोर्टों के बाद यह विवाद और तेज हो गया था। आईएमए के अध्यक्ष जेए जयलाल को कई इंटरव्यू के दौरान और बयानों में धर्मान्तरण के लिए आह्नान करते हुए पाया गया था। इतना ही नहीं उन्होंने कोरोना काल को भगवान यीशु को स्वीकार करने के एक अवसर के रूप में बताया था।

यूट्यूबर ने गुब्बारों के साथ बाँध पालतू कुत्ते को हवा में उड़ाया, दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया

दिल्ली का यूट्यूबर गौरव शर्मा (32) (आज तक की रिपोर्ट के अनुसार गौरव जॉन) सोशल मीडिया पर कुत्ते को हीलियम गुब्बारे के साथ बाँधकर हवा में उड़ाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। आरोपित और उसकी माँ के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 188, 269, 34 के तहत कार्रवाई की गई है।

दोनों के खिलाफ पशु कल्याण संगठन पीपल फॉर एनिमल्स (पीएफए) ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद दिल्ली की मालवीय नगर थाना पुलिस ने एक्शन लेते हुए गौरव और उसकी माँ के खिलाफ कार्रवाई की।

समाचार एजेंसी एएनआई ने डीसीपी साउथ अतुल ठाकुर के हवाले से बताया, “यूट्यूबर गौरव शर्मा को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करने के बाद जानवर के साथ क्रूरता के मामले में गिरफ्तार किया गया है। आरोपित ने एक पालतू कुत्ते की पीठ पर हाइड्रोजन के गुब्बारे बाँधकर उसे हवा में उड़ा दिया था।”

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

यूट्यूबर ने इस घटना का वीडियो अपने YouTube चैनल ‘गौरवज़ोन’ पर अपलोड किया था। वीडियो में पंचशील विहार निवासी गौरव शर्मा अपनी कार की छत पर बैठे नजर आ रहा है। इस दौरान वह अपने डॉलर नाम के पालतू कुत्ते को उठाता है। कुत्ते को उसने पहले से ही हाइ़ड्रोजन के गुब्बारों से बाँध रखा होता है और तीन गिनने के बाद हवा में उछाल देता है।

वीडियो में गौरव कहता है कि “उसके शरीर के ऊपरी भाग ने उड़ना शुरू कर दिया है।” गुब्बारे की डोर को पकड़े हुए वह कुत्ते को ऊपर उठाता है और कुछ ही देर में कुत्ता हवा में तैरने लगता है। यह देखकर गौरव और उसकी माँ खुशी से ताली बजाने लगते हैं।

आरोपित ने माँगी माफी

गौरव शर्मा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नेटिज़न्स ने जानवरों के प्रति असंवेदनशीलता को लेकर बेहद नाराजगी दिखाई। विरोध के बाद गौरव शर्मा उर्फ गौरव जॉन ने वीडियो हटा दिया और माफी माँगते हुए कहा कि उसने सभी सुरक्षा उपाय किए थे।

गौरव ने कहा, “वीडियो बनाने से पहले, मैंने सुरक्षा के सभी उपाय किए थे। मैंने वीडियो में कहा था, लेकिन उसका रॉ मेटेरियल इसलिए अपलोड नहीं किया, क्योंकि इससे वीडियो लंबा खींच सकता था। यह मेरी ओर से एक गलती थी। मैं केवल इतना कहना चाहता हूँ कि मैंने सभी सुरक्षा उपायों के साथ वीडियो बनाया था। मैंने बाहरी लोगों के प्रभाव में गलत सामग्री पोस्ट की थी। ऐसा नहीं होना चाहिए था।”

यूट्यूबर ने खुद को पशु प्रेमी बताते हुए कहा, “अगर मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है तो मैं माफी माँगता हूँ। मैं एक पशु प्रेमी हूँ और डॉलर को एक बच्चे की तरह मानता हूँ। जो लोग ऐसी चीजों से प्रभावित हुए हैं प्लीज इसका असर खुद पर न पड़ने दें। मैं फिर से ऐसी चीजों की कोशिश नहीं करूँगा।”