Home Blog Page 3756

‘नया IT नियम संविधान के खिलाफ, सारे मैसेज ट्रेस करना नामुमकिन: मोदी सरकार के खिलाफ WhatsApp पहुँचा दिल्ली HC

इंस्टेंट मैसेजिंग एप Whatsapp ने केंद्र सरकार के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख का रुख किया है। व्हाट्सएप्प ने ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्‍थानों के लिए दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021’ के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके तहत उसे किसी भी संदेश के प्रथम स्रोत का पता लगाना होगा। कंपनी का कहना है कि उसे इसके लिए मध्यस्थ प्लेटफॉर्म्स की ज़रूरत पड़ेगी।

इससे ये पता लगाया जा सकता है किसी भी संदेश को सबसे पहले किसने भेजा था। फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी बार-बार कहती रही है कि ‘Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021’ असंवैधानिक है और लोगों के प्राइवेसी के मूलभूत अधिकारों के खिलाफ है। उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र किया है, जिसमें प्राइवेसी को मूलभूत अधिकार माना गया है।

व्हाट्सएप्प ने कहा है कि अभी वो यूजरों को ‘एन्ड टू एन्ड’ इन्क्रिप्शन की सुविधा प्रदान करता है, जिसके तहत किसी भी मैसेज को बीच में डिकोड नहीं किया जा सकता है और बात संदेश भेजने व पढ़ने वाले के बीच में ही रहती है। उसका कहना है कि भारत सरकार का नया नियम ‘एन्ड तो एन्ड इन्क्रिप्शन’ के खिलाफ जाता है, क्योंकि इससे प्राइवेट कंपनियाँ लोगों का डेटा जुटा कर उसे स्टोर कर के रख लेंगी।

Whatsapp ने कहा कि नए नियम के बाद ‘किसने क्या कहा और किसने क्या शेयर किया’ जैसे सैकड़ों करोड़ संदेशों के डेटा रोज जमा किए जा सकते हैं, ताकि कानूनी एजेंसियों के इस्तेमाल में लाया जा सके। उसने इसे गलत बताया। साथ ही इस नियम के लागू होने पर रोक लगाने की भी अपील की। Whatsapp ने कहा कि इस नियम को न मानने पर उसके कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा हो सकता है, इसीलिए इस पर रोक लगाई जाए।

बता दें कि इस नियम के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मंगलवार (मई 25, 2021) तक का समय दिया गया था। फेसबुक और ट्विटर सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी ये नियम मानने हैं। Whatsapp ने कहा कि यूजर्स बड़े स्तर पर कॉपी-पेस्टिंग में लगे रहते हैं, इसीलिए करोड़ों मैसेज का फिंगरप्रिंट रखना और उनके स्रोत को ट्रेस करना नामुमकिन है। फेसबुक ने कहा कि वो नए IT नियमों का पालन करेगा और इसके लिए भारत सरकार से बात कर रहा है।

बता दें कि ये नियम डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के आम उपयोगकर्ताओं को उनके अधिकारों के उल्लंघन के मामले में उनकी शिकायतों के समाधान होने और इनकी जवाबदेही तय करने के लिए बनाए गए हैं। संसदीय समिति ने भी आपत्तिजनक कंटेंट्स के मूल निर्माता की पहचान को सक्षम बनाने की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी, रेप और गैंगरेप की तस्वीरों, वीडियो तथा साइट को खत्म करने के लिए दिशानिर्देश तय करने को कहा था।

इससे पहले केंद्र सरकार ने एक बार फिर से इंस्टेंट मैसेजिंग एप व्हाट्सएप्प को नोटिस भेजा था। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Whatsapp से एक बार फिर से कहा था कि वो अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी को वापस ले। इससे पहले व्हाट्सएप्प ने बड़ी चालाकी से अपने नए अपडेट को कुछ दिनों के लिए रोक दिया था लेकिन अब इस महीने में वो फिर से उसे वापस लेकर आया है। उसने कहा था कि वो मई 15, 2021 तक इसे रोक रहा है।

‘कोरोना से खतरनाक है सल्लू दादाजी की फिल्म, देख कर डैमेज हो जाएगा दिमाग’: KRK पर सलमान ने किया केस

बॉलीवुड स्टार सलमान खान ने फिल्म राधे: योर मोस्टवांटेड भाई के ‘रिव्यू’ के लिए कमाल आर खान (KRK) के विरुद्ध मुंबई की एक अदालत में मानहानि की शिकायत दाखिल करवाई है। खुद केआरके ने भी नोटिस की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करके इस संबंध में जानकारी दी है। इसमें लिखा है कि केआरके को 27 मई को कोर्ट में सुबह 11 बजे पेश होना होगा।

केआरके ने अपने ट्वीट में लिखा, “प्रिय सलमान खान ये मानहानि का केस आपकी हताशा और निराशा का सबूत है। मैं अपने फॉलोवर्स को अपना रिव्यू दे रहा हूँ और अपना काम कर रहा हूँ। तुम्हें मुझे अपनी फिल्म का रिव्यू करने से रोकने से अच्छा है कि अच्छी फिल्में बनाओ। मैं सच्चाई के लिए लड़ता रहूँगा। मुकदमे के लिए धन्यवाद।”

अगले ट्वीट में केआरके ने कहा कि अब वह सलमान खान की कोई फिल्म रिव्यू नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने  कई बार कहा है कि मैं किसी प्रोड्यूसर या एक्टर की फिल्म का रिव्यू नहीं करूँगा, अगर वह मना कर देगा तो। सलमान खान ने अपनी फिल्म राधे के रिव्यू के लिए मुझपर मानहानि का केस ठोंका। इसका मतलब है कि उसे मेरे रिव्यू ने बहुत आहत किया। मैं उसकी फिल्मों की समीक्षा नहीं करूँगा। मेरी आखिरी वीडियो उसपे आज रिलीज होगी।”

राधे पर KRK का रिव्यू

बता दें कि KRK के यूट्यूब चैनल पर 13 मई 2021 को सलमान खान की हालिया फिल्म राधे का रिव्यू अपलोड हुआ था। इस वीडियो में उसने सलमान खान को हर जगह दद्दू कहकर संबोधित किया। वहीं दिशा पटानी के रोल का मजाक बनाते हुए उन्हें सलमान खान की पोती बताया। इसी तरह जैकी श्रॉफ को कॉमेडी में फेल और रणदीप हुड्डा को हीरो की जगह विलेन की एक्टिंग ही करने की सलाह दी।

KRK के चैनल पर राधे का रिव्यू

KRK ने अपने रिव्यू में दावा किया कि फिल्म में कई सीन्स में VFX का इस्तेमाल करके सलमान खान की पुरानी बॉडी को उनके (बुजुर्ग) चेहरे के साथ जोड़ा गया है। इसके अलावा फिल्म में उनका डुप्लीकेट है जो काफी तेजी से एक्शन सीन करता है। लेकिन जैसे ही कैमरा सलमान को क्लोजअप में लेता है वही सीन धीमे हो जाते हैं।

रिव्यू में बताया गया है कि कैसे सलमान खान दिशा से मिलते हैं और खुद को 20-22 का दिखाते हुए कहते हैं कि वह भी मॉडल बनना चाहते हैं, जिसके बाद दिशा उन्हें ‘भोलू क्यूट ब्वॉय’ बोलती रहती है। केआरके के मुताबिक, फिल्म में गाने राहत देते हैं क्योंकि स्टोरीलाइन इसमें कुछ भी नहीं है। इसलिए यदि गाने आते हैं तो लगता है कि कुछ तो हो रहा है।

रिव्यू में केआरके ने एक्शन को रिक्शावालों, रेहड़ी वालों के लिए ठीक ठाक बताया। इसके बाद कहा है कि ये फिल्म कोरोना की तरह खतरनाक है। कोरोना फेफड़ों को डैमेज करता है, ये फिल्म दिमाग को डैमेज करती है। इस फिल्म को देखना उतना ही रिस्की है जितना भीड़भाड़ वाले इलाके में बिना मास्क के जाना।

केआरके ने इस फिल्म को 1 स्टार दिया है। इसके अलावा ट्विटर पर आज सुबह सलीम खान को टैग करके लिखा, “मैं सलमान खान की फिल्म या करियर खराब नहीं करने आया। मैं सिर्फ मजे के लिए फिल्म रिव्यू करता हूँ। अगर मुझे पता होता कि सलमान पर इतने प्रभावित होंगे तो मैं रिव्यू ही नहीं करता। वह मुझसे रिव्यू न करने को बोल सकते थे। मैं नहीं करता। मुझे रिव्यू करने से रोकने के लिए उन्हें मुझ पर केस करने की जरूरत नहीं थी। सलीम सर, मैं यहाँ किसी को दुख पहुँचाने के लिए नहीं हूँ। मैं उनकी फिल्म रिव्यू ही नहीं करूँगा। उनसे कहिए केस को आगे न बढ़ाएँ। मैं अपने रिव्यू की वीडियो भी डिलीट कर दूँगा। धन्यवाद सलीम साहब।”

गौरतलब है कि राधे फिल्म की रिलीज के बाद से इस फिल्म की जगह-जगह आलोचना हो रही है। फिल्म में कोई स्टोरी लाइन न होने के कारण और सलमान की खराब एक्टिंग की वजह से इसे घेरा जा रहा है। इसके अलावा लोगों ने इस फिल्म के गाने, इसके डायलॉग, सलमान खान को छोटा दिखाने की कोशिश पर भी आपत्ति जताई है।

बाँध कर रखे जाते थे बच्चे, नन खुद को मारती थीं कोड़े: मदर टेरेसा की मिशनरी में ‘मजहबी पागलपन’ पर पॉडकास्ट

क्या मदर टेरेसा सचमुच महान थीं? क्या वो वैसी थी थीं, जैसा उन्हें दिखाया जाता है? असल में ऐसी बात नहीं है। मिशनरी अक्सर ऐसे ही लोगों की मदद कर के उनका धर्मांतरण कराते हैं, या फिर उनसे ईसाई मजहब और जीसस में विश्वास जगाने का कार्य करते हैं। ‘The Turning: The Sisters Who Left’ नामक पॉडकास्ट में मदर टेरेसा के डार्क साइड को दिखाया गया है। इसमें एक महिला की कहानी है, जो अपने समाज की मजहबी व्यवस्था से बाहर निकलना चाहती है और मदर टेरेसा की मिशनरी में फँस जाती है।

कोलकाता के एक डॉक्टर ने भी इसका खुलासा किया था कि कैसे मदर टेरेसा द्वारा चलाए जा रहे ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ में उनके साथ अत्याचार किया जाता था। एक आलोचक का कहना है कि मदर टेरेसा को गरीबी और पीड़ा देखने में मजा आता था, न कि वो इसे ख़त्म करना चाहती थीं। डॉक्टर अरूप चटर्जी ने लिखा है कि अनाथों को मिशनरी होम में बाँध कर रखा जाता था। दर्द के केस में उन्हें एस्पिरिन के अलावा कोई दवा नहीं दी जाती थी।

खर्च बचाने के लिए मदर टेरेसा एक ही इंजेक्शन के नीडल को कई बार प्रयोग में लाती थीं और उनके शेल्टर होम्स में शौचालय तक की व्यवस्था नहीं होती थी, जिससे मरीज एक साथ कहीं बैठ कर एक-दूसरे के सामने ही मलमूत्र का त्याग करते थे। हालाँकि, मदर टेरेसा की मौत के बाद हाइजीन पर ध्यान दिया जाने लगा, लेकिन वो खुद ‘सादगी’ को इस हद तक ले जाती थीं, जिससे मरीजों की जान पर बन आती थी।

सबसे ज्यादा अत्याचार तो उस मिशनरी में ननों के साथ होता था। इस सीरीज में दिखाया गया है कि ननों को मरीजों और बच्चों को छूने तक की मनाही थी और न ही वो किसी से दोस्ती कर सकती थीं। जिन बच्चों की वो देखभाल करती थीं, उन्हें ही छूने की इजाजत नहीं थी। इन ननों को खुद पर ही कोड़े बरसाने का निर्देश दिया जाता था और एक दशक में 1 बार ही वो अपने परिवार से मिलने घर जा सकती थीं।

मदर टेरेसा इसे ‘अनुशासन’ का नाम देती थीं। एक नन ने बताया कि उसका भाई अस्पताल में मर रहा था, लेकिन उसे देखने जाने के लिए मदर टेरेसा ने अनुमति नहीं दी। उसके पास रुपए तक नहीं थे और उसके सिर बालों को पूरी तरह हटा दिया गया था। साथ ही उसे पहनने के लिए कपड़े तक नहीं दिए जाते थे। एकाध जोड़ी कपड़े से काम चलाया जाता था। ननों का ब्रेनवॉश कर के उन्हें उनके परिवार से पूरी तरह काट दिया जाता था।

ये खुलासे उन्हीं महिलाओं ने किए हैं, जिन्हें मदर टेरेसा ने कभी अपने मिशनरी होम्स में रखा हुआ था। वो अनाथालय और शेल्टर होम्स, जो काफी गंदे रहते थे। ननों को काँटों वाली चेन से खुद लो बाँध कर मात्र एक मग पानी से स्नान करना होता था। ननों की भर्ती के बाद उनके बाल शेव कर के जला डाला जाता था। खुद मदर टेरेसा ईसाई मजहब के चमत्कार के सहारे ‘इलाज’ करती थीं। मदर टेरेसा को नोबेल भी मिला था और मरणोपरांत उन्हें ईसाई मजहब में ‘सेंट’ की संज्ञा दी गई।

मदर टेरेसा ननों को रोज खुद को पीटने के लिए इसीलिए कहती थीं, ताकि उन्हें इसका एहसास हो कि वो कितनी ‘पापी’ हैं। उन्हें बाकी लोगों से आइसोलेट कर के रखा जाता था। ननों को ऐसे रखा जाता था, जैसे वो ज्यादा से ज्यादा अकेलापन महसूस करें तो उन्हें एहसास हो कि वो सिर्फ ‘गॉड’ पर निर्भर हैं। मदर टेरेसा खुद कहती थीं कि गरीबों को जानने के लिए गरीब बनना पड़ेगा और सभी पर ऐसा ही दबाव डालती थीं।

मदर टेरेसा ने कम्युनिस्ट तानाशाह एनवर होक्सा की कब्र पर माल्यार्पण भी किया था, जिसने अपने मूल देश अल्बानिया में हिंसक रूप से धर्म का दमन किया था। अपने घर के करीब, टेरेसा ने आपातकाल के क्रूर दौर का समर्थन किया और कहा था, ‘लोग खुश हैं, ज्यादा रोजगार भी हैं। कोई हड़ताल नहीं है।” जेसुइट पादरी डोनल्ड जे मग्वायर मदर टेरेसा का आध्यात्मिक सलाहकार था। उसने 11 साल के एक लड़के का कई बार यौन शोषण किया था।

सलमान से निकाह के लिए धर्म बदलने वाली हिंदू लड़की फंदे से लटकी मिली, परिजनों ने कहा- बेटी को पीट-पीट कर मार दिया

तेलंगाना के कमररेड्डी जिले में मुस्लिम प्रेमी से निकाह (शादी) के लिए इस्लाम में परिवर्तित होने वाली हिंदू लड़की ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। दोनों की शादी कुछ माह पहले ही हुई थी।

न्यूज 18 तेलुगू के अनुसार, सलमान नाम के मुस्लिम युवक से शादी के लिए श्रवंती ने धर्म परिवर्तन के बाद अपना नाम शेख समीरा किया था। मगर, 24 मई को पता चला कि उसका शव घर में लटका मिला।

लड़की के घरवालों ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए सलमान और उसके परिवार पर संदेह जाहिर किया है। श्रवंती के परिजनों का कहना है कि सलमान, उसके चाचा और उसकी चाची को उनकी बेटी के हत्या मामले में गिरफ्तार किया जाना चाहिए। देवुनिपल्ली पुलिस ने इस संबंध में केस दर्ज कर लिया है। मामले में आगे की जाँच चल रही है।

कमररेड्डी जिले के इंदिरा नगर कॉलोनी की निवासी 19 वर्षीय श्रवंती ने सलमान से 7 जनवरी 2021 को शादी की थी। इसके लिए उसने पहले अपना धर्म छोड़कर इस्लाम कबूला, फिर अपना नाम शेख समीरा कर लिया।

24 मई को पता चला कि श्रवंती ने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने बेटी का शव देख कहा कि उनके बेटी के गले के पास चोट के निशान थे। उनका आरोप है कि उनकी बेटी को पीट-पीट कर मारा गया, इसलिए सलमान और उसके परिवार पर श्रवंती को मानसिक व शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करने के लिए मामला दर्ज हो।

प्रीति तलरेजा केस

गौरतलब है कि कुछ समय पहले अंतरधार्मिक विवाह से जुड़ी एक घटना महाराष्ट्र से आई थी। वहाँ एक लड़की ने दूसरे समुदाय के लड़के से शादी करने के बाद अपने पति पर धर्मांतरण, शारीरिक, मानसिक शोषण का आरोप लगाया था। लड़की का नाम प्रीति तलरेजा था। पुलिस के पास जा जा कर थक चुकी तलरेजा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज उठाई थी।

लड़की ने तमाम प्रताड़नाओं से तंग आकर कहा था “…मैं हिन्दू जन्मी हूँ और हिंदू ही मरूँगी। मेरी अपील है अपनी बेटी को अकेला न छोड़ें। मेरा परिवार मेरे साथ है इसलिए हिम्मत करके मैं यहाँ तक पहुँची हूँ। लोगों को जो कहना है कहने दो। लेकिन इसे एक अपनी बेटी, बहन, बीवी और अन्य महिलाओं के लिए अच्छे उदाहरण की तरह लो।”

कौन हैं सीबीआई के नए डायरेक्टर सुबोध कुमार जायसवाल, रॉ से लेकर मुंबई पुलिस कमिश्नर पद पर कर चुके काम, जानिए उनका सफर

सुबोध कुमार जायसवाल को सीबीआई का नया निदेशक नियुक्त किया गया है। 1985 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस अधिकारी सुबोध दो साल के लिए सीबीआई प्रमुख के पद पर रहेंगे। वह इससे पहले महाराष्ट्र पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का पद संभाल चुके हैं। सीबीआई डायरेक्टर नियुक्त किए जाने के पहले तक वह केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसफ) के महानिदेशक का पद संभाल रहे थे।

सीबीआई प्रमुख का पद 2 फरवरी, 2021 को ऋषि कुमार शुक्ला के इस पद से रिटायर होने के बाद से खाली था। नए डायरेक्टर की नियुक्ति तक प्रवीण सिन्हा को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।

सोमवार को प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय पैनल ने 109 नामों में से सीआईएसफ के महानिदेशक सुबोध कुमार जायसवाल, सशस्त्र सीमा बल के महानिदेशक कुमार राजेश चंद्रा और केंद्रीय गृह मंत्रालय में विशेष सचिव वी.एस कौमुदी के नाम शॉर्टलिस्ट किए थे। इस पैनल में पीएम मोदी के अलावा लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमन्ना भी शामिल थे।

सुबोध कुमार जायसवाल महाराष्ट्र कैडर के 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और सीबीआई निदेशक के रूप में नियुक्ति से पहले तक वह केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के महानिदेशक थे, जोकि गृह मंत्रालय के तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) का एक हिस्सा है। सुबोध कुमार जायसवाल का जन्म 1962 में धनबाद में हुआ था और उन्होंने अपनी पढ़ाई झारखंड के डी नोबिली (De Nobil) स्कूल की सीएमआरआई शाखा से की हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीआई के नए डायरेक्टर ने एमबीए भी किया है।

सीआईएसएफ का नेतृत्व करने से पहले, सुबोध कुमार जायसवाल मुंबई पुलिस में शीर्ष पद संभाल चुके थे। वह 2018 में मुंबई पुलिस कमिश्नर नियुक्त किए गए थे। मुंबई पुलिस सीपी के रूप में नियुक्त होने से पहले, जायसवाल महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) का हिस्सा थे। एटीएस में अपने कार्यकाल के दौरान, जायसवाल उस विशेष जाँच दल (SIT) के प्रमुख थे, जिसने 20,000 करोड़ रुपए के नकली स्टांप पेपर घोटाले (तेलगी घोटाला) की जाँच की थी और घोटाले में कुछ शीर्ष अधिकारियों और आरोपियों के बीच संबंधों का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

एटीएस के उप महानिरीक्षक (DIG) के रूप में उन्होंने सितंबर 2006 के मालेगाँव ब्लास्ट मामले की जाँच की थी। इसी दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के माओवाद प्रभावित क्षेत्र में सेवा करते हुए एक महत्वपूर्ण पद संभाला। उन्हें उनकी विशिष्ट सेवा के लिए 2009 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।

मुंबई पुलिस कमिश्नर का पद संभालने के बाद सुबोध जायसवाल महाराष्ट्र पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किए गए थे। डीजीपी के रूप में जायसवाल का कार्यकाल 2022 में समाप्त होने वाला था, लेकिन इसी बीच केंद्र सरकार ने उन्हें सीआईएसएफ प्रमुख के पद पर नियुक्त करने का फैसला किया।

जायसवाल नौ साल तक भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) में भी काम कर चुके हैं, जिसमें से तीन साल उन्होंने रॉ के अतिरिक्त सचिव के रूप में काम किया था।

‘मिटा दिए गए CCTV सबूत, गवाह को नहीं किया गया पेश’: जानिए क्यों बरी हुए तरुण तेजपाल, सरकार पहुँची बॉम्बे HC

हाल ही में गोवा की एक अदालत ने 8 साल पुराने यौन शोषण के मामले में ‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बरी कर दिया, जिसके बाद उन्होंने अपने शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा किया। लेकिन, गोवा कोर्ट ने अपने जजमेंट में ये भी कहा है कि इस मामले की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी (IO) ने कई चूक किए और अभियोजन पक्ष महत्वपूर्ण साक्ष्यों को पेश करने में विफल रहा। यौन शोषण के इस मामले में अब इस फैसले के खिलाफ गोवा सरकार बॉम्बे हाईकोर्ट गई है।

तरुण तेजपाल को बरी किए जाने वाले आदेश में भी लिखा है कि अभियोजन पक्ष इस मामले में अहम CCTV फुटेज को अदालत के समक्ष पेश करने में विफल रहा। एडिशनल सेशन जज क्षमा जोशी ने इस मामले में फैसला सुनाया था। इस मामले में शुक्रवार (मई 21, 2021) को ही फैसला सुनाया गया था, लेकिन जजमेंट की प्रति इसके 4 दिन बाद उपलब्ध कराई गई। जज ने जाँच अधिकारी और पीड़िता के बयानों में कई विरोधाभास पाए।

जाँच अधिकारी और पीड़िता के बयान अलग-अलग थे, लेकिन जाँच अधिकारी ने इस सम्बन्ध में पीड़िता का बयान दर्ज नहीं किया। सबूतों में गड़बड़ी थी। बचाव पक्ष ने इसे अपनी दलीलों में इसका इस्तेमाल करते हुए कहा कि जानबूझ कर ऐसा किया गया है। कोर्ट ने ये भी नोट किया है कि एक गवाह बयान देने के लिए तैयार था, लेकिन फिर भी उसे पेश नहीं किया गया। साथ ही ‘तहलका’ के सर्वर में कुछ जरूरी इमेल्स थे, जिन्हें पेश नहीं किया गया।

जज ने अपने फैसले में कहा कि IO ने जानबूझ कर अपने मातहत कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वो ग्राउंड फ्लोर और सेकेंड फ्लोर का CCTV फुटेज डाउनलोड करें, लेकिन फर्स्ट फ्लोर का नहीं। फैसले के अनुसार, IO ने महत्वपूर्ण गेस्ट लिफ्ट का अहम CCTV फुटेज देखा था, जिसमें तरुण तेजपाल और पीड़िता लिफ्ट से बाहर निकल रहे हैं। जज ने कहा, “जानबूझ कर DVR (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) को सीज करने में देरी की गई और उस CCTV फुटेज को नष्ट कर दिया गया।”

जस्टिस क्षमा जोशी ने कहा कि आरोपित को ‘बेनिफिट ऑफ डाउट (संदेह का लाभ)’ दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि उनके खिलाफ कोई पुष्ट सबूत अदालत के सामने लाया ही नहीं गया। साथ ही IO ने कभी उस कमरे को भी सील तक नहीं किया,जहाँ DVR रखे हुए थे। ये मामले नवंबर 7, 2013 का है, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि अगले दिन फिर उसका यौन शोषण हुआ था। कोर्ट ने अपना आदेश 527 पन्नों में दिया है।

आरोपित के मूलभूत अधिकारों की बात करते हुए कोर्ट ने कहा कि IO ने एक के बाद एक कई गलतियाँ की। लिफ्ट का संचालन करने वाले बॉटम्स को लेकर कोई डेटा नहीं सब्मिट किया गया। साथ ही उस लिफ्ट को बनाने वाली कंपनी से कोई जानकारी नहीं ली गई। आरोपित ने अपने हाथों से लिफ्ट के भीतर क्या किया और उसने बॉटम्स को कैसे दबाए, इस बारे में पीड़िता से कुछ भी जानकारी नहीं ली गई।

कोर्ट के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने आरोपित को दोषी साबित करने के लिए की जाने वाली प्रक्रियाओं को पूरा नहीं किया और यही तरुण तेजपाल के बरी होने का कारण बना। तरुण तेजपाल से इस मामले में 20,000 रुपए का पर्सनल बॉन्ड भी भरवाया गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच अब इस मामले की सुनवाई करेगी। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल जाता, राज्य सरकार केस लड़ती रहेगी।

आरोप है कि उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने अपनी महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न किया था। पीड़िता के अनुसार, ये घटना गोवा के ही फाइव स्टार होटल में हुई थी। तरुण तेजपाल मई 2014 से ही जमानत पर बाहर थे। फरवरी 2014 में उनके खिलाफ 2846 पन्नों की चार्जशीट गोवा पुलिस ने दायर की थी। इस मामले की FIR नवंबर 2013 में ही दर्ज की जा चुकी थी।

प्लेन से उतार रवीश को सरकार ने किया अरेस्ट: बाल्टी पर बरखा ने की रिपोर्टिंग, ‘वल्चर’ राजदीप ने कहा- शाम बन गई

बेलारूस के एक ब्लॉगर/पत्रकार और उसकी गर्लफ्रेंड को वहाँ की सरकार ने अरेस्ट करवा लिया। खबर के अनुसार बेलारूस की सरकार ने फाइटर जेट भेजकर पहले उसकी फ्लाइट को ज़बर्दस्ती लैंड करवाया और फिर उसे अरेस्ट करवा लिया। पत्रकार का नाम रोमन प्रोतसेविच है। शेक्सपीयर ने कहा था नाम में कुछ नहीं रखा। ऐसे में कह सकते हैं कि उसका नाम रोमन प्रोतसेविच न होकर राम दुलार होता तो भी बेलारूस की सरकार उसे अरेस्ट करवा के ही मानती।

पता नहीं क्यों यह खबर पढ़ते समय मेरी स्मृति पटल पर यादों की बरखा हुई और मुझे चैतन्य कुंटे की याद आ गई।

बेलारूस यूरोप का देश है ऐसे में वहाँ भारत की तरह फासिज़्म नहीं है। पर यह खबर पढ़ते हुए मेरे मन में आया कि अगर किसी भारतीय पत्रकार को इस तरह से किसी एयरपोर्ट से कहीं ले जाया जाता तो क्या होता? सोचिये कि रवीश कुमार एयरपोर्ट पर उतरते और उन्हें सिक्युरिटी वालों द्वारा कहीं ले जाया जाता तो क्या होता?

शायद कुछ ऐसा होता:

प्राइम टाइम में टीवी न्यूज़ की स्क्रीन काली कर दी गई है और पीछे से आवाज़ आ रही है; आज दर का माहौल.. माफ कीजियेगा डर का माहौल है। डर के इस माहौल में सच्चाई के हवाई जहाज की लैंडिंग करवा दी गई है और उसमें बैठे सत्यवान को उतार दिया गया है। यह किसी मोदी या तोदी के बारे में नहीं है, यह हमारे और आपके बारे में है। यह भारत के बारे में है। यह उस काल के बारे में है जिसे इतिहास में अँधेरा काल के नाम से जाना जाएगा… विडंबना यह है कि इतिहास लिखने वाले भी वही होंगे जिनके पास कागज़ की मिलें हैं… पर कहानी लिखी जाएगी क्योंकि इस कहानी को कहने वाली आवाज किसी अंबानी या अदानी की नहीं बल्कि उस किसान की है जिसका बैल सफ़ेद न होकर काला है और जो इक्कीसवीं सदी में भी पूस की रात के हलकू की तरह है, वही हलकू जिसके जबरा को अब गायों को देखकर…. माफ़ कीजियेगा नीलगायों को देखकर भौंकने की मनाही है…. आज के हलकू की पहचान कहीं खो गई है…. क्योंकि जो समाज बन रहा है वह केवल किसान को ही नहीं बल्कि उसके काले बैल को भी स्वीकार नहीं करता मगर उसके पगहे को हाथों से छोड़ना भी नहीं चाहता… इसी छोड़ने और पकड़ने के बीच देखना यह होगा कि क्या मेरे बैल की अर्ज़ी…. माफ कीजियेगा बेल की मेरी अर्जी किसान के उसी काले बैल की तरह अस्वीकार कर दी जाएगी या फिर इस पूंजीवादी व्यवस्था में कोई समाजवादी न्यायाधीश मेरी अर्जी स्वीकार कर लेगा!

ट्विटर और फेसबुक पर हड़कंप मचा है। लोग समर्थन और विरोध में वैसे ही उतर आए हैं जैसे रवीश कुमार के हवाई जहाज को उतारा गया था। शेखर गुप्ता पचास शब्दों का एक संपादकीय टाँक चुके हैं। राजदीप सरदेसाई सरकार की तीखी आलोचना करते हुए बता चुके हैं कि; दिस इज फासिज़्म ऐट इट्स नादिर।

बरखा दत्त ने चार ट्वीट का एक थ्रेड लिखकर बताया, “रवीश कुमार हिंदी पत्रकारिता के बरखा दत्त थे… भारत की आवाज़ थे। किसी ने उनसे सवाल पूछा तो जवाब में उन्होंने उसे ब्लॉक कर दिया।” 

वायर में लिखे अपने संपादकीय में वरदराजन ने रवीश को भारत का लैरी किंग बताते हुए लिखा कि; वे ब्राह्मण होते हुए भी ब्राह्मण नहीं थे। 

दूसरे दिन शाम को एक पदयात्रा का आयोजन हुआ। सब साथ इंडिया गेट पहुँचे। तवलीन सिंह ने एक चैनल को बाइट देते हुए कहा, “रवीश इज कॉन्शियस ऑफ जर्नलिज्म। ये सरकार उसी दिन से फासिस्ट हो गई थी जब इसने आतिश का ओसीआई कार्ड कैंसिल किया था। मुझे उसी दिन लगा था कि ये किसी न किसी दिन पत्रकारिता भी कैंसिल कर देगी।” 

राम गुहा ने बयान देने के लिए एक कैमरामैन को रोककर कहा- मेरा बयान ले लो।  

उसने पूछा- योर नेम सार? यह सुनकर गुहा को डेजा वू टाइप कुछ फील हुआ। वे झेंप गए।    

इंडिया गेट पहुँचते ही बरखा दत्त ने साथ लाई प्लास्टिक की बाल्टी औंधे मुँह रखी और उसपर लैपटॉप रख कर पालथी मार के औघड़ी अंदाज़ में बैठ गई। अचानक सब देखते हैं कि उनके पीछे चिता सजने लगी।

पुण्य प्रसून वाजपेयी को समझ नहीं आ रहा था कि बरखा क्या करना चाहती थीं। उन्होंने दोनों हाथ मलते हुए कहा- रिपोर्टिंग में तो खाली बाल्टी हाशिये पर चली जाती है। मैंने यह बात कलावती के घर रिपोर्टिंग करते हुए महसूस की थी।  

बरखा बोली- अरे वो होगा पर जब से मैंने गुजरात से श्मशान में बैठ बाल्टी पर लैपटॉप रख कर रिपोर्टिंग की है, मुझे लग रहा है कि वीडियो अच्छा आता है। अब मुझे जलती लाशों के सामने अघोरी मुद्रा में बैठकर रिपोर्ट लिखने में मज़ा आने लगा है। 

वाजपेयी बोले- पर पीछे सज रही इस लाश का रिपोर्टिंग से क्या सरोकार है?

बरखा ने बताया- अरे यह सिंबॉलिक है। यह फ्रीडम ऑफ स्पीच की लाश है। 

अचानक धारदार कलम जेब में खोंसे आशुतोष आ गए। बोले; यह क्या हो गया है हमारे युग को? एक बार की बात है। मैंने पुष्पेश पंत से कहा कि पत्रकारिता अब कठिन होती जा रही है। ऐसे में प्रश्न यह है कि आज गाँधी जी होते तो क्या कहते? 

राजदीप सरदेसाई ने जवाब दिया- वे कहते खबर हर कीमत पर। 

अचानक सात-आठ लोग राजदीप को घेर कर खड़े हो गए। राजदीप उन्हें बताने लगे; मैं कल शाम स्टूडियो में कॉफ़ी पी रहा था तभी ये खबर आई कि एयरक्राफ्ट को उतार लिया गया। जानते ही हैं कि वी जर्नलिस्ट्स आर लाइक वल्चर्स। मैंने राहुल से कहा; हमारी कल की शाम बन गई। 

आशुतोष ने कहा- ये खबर हर कीमत पर तो बहुत सही कहा राजदीप आपने। इस स्लोगन से मुझे हमारे पुराने दिनों की बात याद दिला दी। याद आ रहा है कि कैसे हम स्टिंग ऑपरेशन करके खबर बनाते थे। यह कहते हुए आशुतोष मुंगेरी लाल की तरह यादों में खो गए। किसी ने झिंझोड़ा और पूछा कहाँ खो गए भाई? आशुतोष बोले- मस्त माहौल था। यादों की आवारागर्दी के लिए आदर्श इसलिए मैं यादों में….. 

उर्मिलेश ने कहा- ये सब तो ठीक है लेकिन रवीश के बेल की सुनवाई के बारे में कुछ लिखा जाएगा या नहीं? मैं कब से अपनी धारदार कलम लिए सोच रहा हूँ कि क्या लिखा जाए? 

पुण्य प्रसून बोले- कहीं न कहीं आवश्यकता है लिखने की। जो भी कुछ लिखेगा, भारतीय पत्रकारिता रहेगी उसकी आभारी। 

पास ही खड़े किसी ट्रॉल ने कहा- बहुत क्रांतिकारी बहुत क्रांतिकारी।

सब आपस में बात कर रहे थे। किसी ने पूछा- अरे कुछ नाश्ते वाश्ते का भी इंतजाम है?

उमा शंकर सिंह बोले- हाँ हाँ है न। चाय समोसे का अच्छा इंतजाम है। समोसा भी ताजा है। चलिए स्टॉल की तरफ चला जाए। 

चलते हुए उमा शंकर बोले- “देखा जाए तो रवीश जी की गिरफ्तारी पूरी तरह से नोटबंदी से देश को हुए नुकसान से ध्यान हटाने के लिए की गई है। चार वर्ष से अधिक हो गए, पता नहीं देश को इस नोटबंदी से कब तक नुकसान उठाना पड़ेगा।”

राजदीप बोले- कब तक क्या? हम जब तक चाहेंगे, देश को नोटबंदी से नुकसान उठाना पड़ेगा। 

अभिशार शर्मा बोले, “देखिए रवीश जी देश में सेकुलरिज्म और पत्रकारिता के लिए ट्रेन के इंजन की उस हेडलाइट की तरह हैं जो पूरी ट्रेन को रास्ता दिखाती है। माने समझिए कि हम लोग उस इंजन के साथ लगे डिब्बे हैं।” 

सब अपनी-अपनी बात और तर्क रखते जा रहे थे तब तक एडिटर्स ‘गिल्ट’ के पूर्व प्रधान शेखर गुप्ता को किसी का कॉल आया। उन्होंने बात की और उदास हो गए। किसी ने पूछा क्या हुआ?

शेखर बोले- अरे वो रवीश का कॉल था। उन्हें कोर्ट से छुट्टी मिल गई है। 

आशुतोष ने कहा- आपका मतलब जमानत मिल गई? 

शेखर बोले- अरे कोई बड़ी समस्या नहीं थी।… वो टर्की के उनके वीजा में किसी ने उनके नाम के साथ उनका सरनेम भी लिख दिया था। ये एजेंसी की गलती थी इसलिए उन्हें एयरपोर्ट से पूछताछ के लिए ले जाया गया था।
        
सब यह सोचते हुए नाराज थे कि फासिस्ट सरकार किसी को अरेस्ट क्यों नहीं करती?

TMC नेता महुआ मोइत्रा ने देश को बताया ‘सुसु पॉटी रिपब्लिक’, लोगों ने याद दिलाई बंगाल हिंसा: कार्रवाई की माँग

तृणमूल कॉन्ग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा ने मंगलवार (मई 25, 2021) को भारत को ‘सुसु पॉटी रिपब्लिक’ कह कर हड़कंप मचा दिया। सोमवार (मई 24, 2021) रात ट्विटर इंडिया के गुरुग्राम कार्यालय में दिल्ली पुलिस की छापेमारी की निंदा करते हुए एक ट्वीट में, मोइत्रा ने कहा, “हमारे सुसु पॉटी रिपब्लिक में आपका स्वागत है! गौमूत्र पियो, गोबर छिड़को और शौचालय में कानून के शासन को फ्लश करो। दिल्ली पुलिस ने ट्विटर को नोटिस जारी किया और भाजपा के फर्जी दस्तावेज को मैनीपुलेटेड मीडिया बताने के सही तरीके के लिए उनके कार्यालयों में छापेमारी की।”

महुआ मोइत्रा के इस ट्वीट पर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही है। एक ट्विटर यूजर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब बंगाल में हिंसा हो रही थी तो मैडम सो रही थी।

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा, “इस कोरोना ने तुमको क्यों नहीं डसा, धरती और पूरे ब्रह्मांड पर बोझ हो तुम।”

विजय कुमार ने लिखा, “संसद में कैसे कैसे नमूने पहुँचे हैं?”

एक यूजर ने लिखा, “आंटी को ही पूछने गई थी दिल्ली पुलिस कि आपके पास क्या सबूत है कि यह मैनिपुलेटेड है और वो सब चूहे के बिल में घुस गए।”

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा, “इसीलिए आपकी सुसु मीडिया पूछ रही थी कि ममता जी कब जाती हैं।” 

वहीं एक यूजर ने लिखा कि रेड ट्विटर के ऑफिस पर पड़ी है, लेकिन तकलीफ तृणमूल को हो रही है। ये रिश्ता क्या कहलाता है?

एक ट्विटर यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “इलाज करा लो मोहतरमा, सुना है ये मुँह से डिसेंटरी वाला डायरिया बहुत लाइलाज होता है।” इसके साथ ही लोग सोशल मीडिया पर सरकार से उन पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ‘कॉन्ग्रेस टूलकिट’ जाँच के सिलसिले में सोमवार (मई 24, 2021) को दिल्ली और गुड़गाँव में ट्विटर इंडिया के दफ्तरों में छापेमारी की थी, जहाँ उनके ऑफिस बंद पाए गए थे।

बता दें कि कल ही कॉन्ग्रेस टूलकिट मामले में दिल्ली पुलिस ने ट्विटर को नोटिस भेजा था। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर से पूछा था कि उनके पास ऐसी कौन सी जानकारी है जिसके आधार पर वो बीजेपी नेताओं और अन्य लोगों के ट्वीट को ‘manipulated media’ यानी भ्रामक न्यूज़ बता रहे हैं।

FIR रद्द करने पर राजी हुआ प्रशासन, ‘किसानों’ ने कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियाँ उड़ाते हुए मनाया जश्न: वीडियो वायरल

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने सोमवार (24 मई 2021) को ट्विटर पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें ‘किसान’ नाचते और जश्न मनाते नजर आ रहे हैं। बीकेयू ने कहा कि हिसार के फरीदपुर गाँव में तब से जश्न चल रहा है, जब से नगरीय प्रशासन ने किसानों के खिलाफ सभी एफआईआर को रद्द करने और उनके क्षतिग्रस्त वाहनों की मरम्मत करवाने के लिए हामी भरी है।

भारत में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन ये तथाकथित किसान इसे लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं दिखाई दिए। वीडियो को करीब से देखने पर पता चलता है कि इनमें से किसी ने भी जश्न के दौरान ना तो मास्क पहना हुआ है और ना ही ये सभी कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते नजर आए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 16 मई को कोविड-19 रोगियों के लिए 500 बिस्तरों वाले अस्पताल के उद्घाटन के लिए हिसार का दौरा किया था। इसी दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी किसान कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, जिसको लेकर पुलिसकर्मियों से उनकी झड़प हो गई। हरियाणा पुलिस के अनुसार, ”हिसार के चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्पताल के बाहर विरोध के बहाने बदमाशों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर पथराव कर दिया था। इस हमले में घायल हुए 5 महिलाओं सहित 20 पुलिसकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।”

इसको लेकर किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। किसान नेताओं और प्रशासन के अधिकारियों ने हिसार में इस मामले पर बैठक की थी। घटना के एक हफ्ते के बाद यानी 24 मई को प्रशासन किसानों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने को राजी हो गया।

इस मामले पर बीकेयू नेता गुरनाम सिंह ने कहा, “उन्होंने एफआईआए वापस लेने के लिए पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक महीने का समय माँगा है।” उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि किसानों के क्षतिग्रस्त वाहनों की मरम्मत भी कराई जाएगी। एसडीएम यहाँ गारंटी देने आए थे कि इसमें कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा। इस दौरान गुरनाम के साथ राकेश टिकैत भी मौजूद थे।

आजम खान की कोरोना से तबीयत नाजुक: फाइब्रोसिस के साथ कैविटी की समस्या, बढ़ाया गया ऑक्सीजन सपोर्ट

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और सांसद आजम खान की तबीयत फिर बिगड़ गई है। आजम खान को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। मेदांता अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर राकेश कपूर ने बताया कि सीटी स्कैन के बाद आजम खान के लंग्स में फाइब्रोसिस नामक बीमारी की शिकायत मिली है। साथ ही साथ कैविटी भी पाई गई है, जिसके चलते आज उनका ऑक्सीजन सपोर्ट बढ़ाया गया है।

फाइब्रोसिस एक ऐसी स्थिति है जो फेफड़ों में जख्म और अकड़न का कारण बनती है। इसके चलते शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, जिससे कारण साँस लेने में दिक्कतें होती हैं। इसके चलते दिल संबंधी विकार और अन्य जटिलताएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। 

जहाँ एक तरफ सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान की हालत गंभीर है और वह क्रिटिकल केयर मेडिसिन के एक्सपर्ट डॉक्टरों की देखरेख में रखे गए हैं। वहीं मेदान्ता हॉस्पिटल में भर्ती ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता जफरयाब जिलानी की तबीयत में सोमवार को सुधार होने पर उनका वेंटिलेटर सपोर्ट हटा लिया गया है।

हालाँकि उन्हें अभी भी आईसीयू में रखा गया है। कोरोना संक्रमण के चलते उन्हें कोविड वार्ड में रखा गया है। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक रहे वरिष्ठ अधिवक्ता जफरयाब जिलानी गुरुवार शाम घर में अचानक गिर गए थे। जिसकी वजह से उनके सिर में गंभीर चोट लग गई थी। जिसके चलते उनके दिमाग के अगले हिस्से में खून का थक्का जम गया था। डॉक्टरों ने 21 मई को जफरयाब जिलानी का सफल ऑपरेशन कर दिमाग मे जम गए खून के थक्के को निकाला गया था। 

वहीं, उनके बेटे मोहम्मद अब्दुल्लाह खान की स्थिति स्टेबल है। हालाँकि उन पर भी सीसीएम के डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। बता दें कि आजम खान 1 मई को सीतापुर जेल में कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। कोरोना के कारण तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके बेटे भी मेंदाता में भर्ती हैं।

आजम खान फरवरी 2020 से सीतापुर जेल में बंद थे। उन पर रामपुर में अवैध जमीन कब्जा करने और फर्जी प्रमा णपत्र बनाने जैसे कई आरोप लगे हैं। आजम खान के बेटे अब्दुल्ला पर भी फर्जी प्रमाणपत्र से जुड़े कई मामले दर्ज हैं और वे भी पिता संग जेल में ही बंद थे।