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नशे की हालत में हामिद शेख पहुँचा राम की दुकान, बहसबाजी के बाद चलने लगे चाकू: अरविंद गुप्ता समेत 3 की मौत, 4 घायल; मुंबई के गणपत पाटिल का मामला

मुंबई के दहिसर के गणपति पाटिल में दो परिवारों के बीच खूनी संघर्ष हुआ है। दहिसर वेस्ट इलाके में गणपति पाटिल की झोपड़पट्टी में रहना वाला हामिद शेख और राम नवल गुप्ता के परिवार ने एक दूसरे पर हमला कर दिया। इस दौरान तीन लोगों की मौत हो गई जबकि 4 लोग घायल हो गए।

बताया गया है कि 18 मई 2025 को शाम करीब साढ़े चार बजे राम नवल गुप्ता और हामिद शेख के बीच कहासुनी के बाद उनके बेटों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस दौरान चाकू और दूसरे धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया। घटना में राम नवल गुप्ता, उनके बेटे अरविंद गुप्ता और हामिद शेख की मौत हो गई। राम नवल के दो बेटों और हामिद शेख के दो बेटे चाकूबाजी में बुरी तरह घायल हो गए । इनलोगों को नजदीक की अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मारे गए राम नवल गुप्ता उनके बेटे अरविंद गुप्ता और हामिद शेख के शवों को पोस्टमॉटम के लिए भेज दिया है।

दोनों परिवार गणपति नगर के झोपड़पट्टी में रहता है और 2022 से इनके बीच दुश्मनी थी। दोनों परिवारों ने एक-दूसरे के खिलाफ केस भी दर्ज कराया था।

क्या है पूरा मामला

रविवार (18 मई 2025) को हामिद शेख नशे में गली नंबर 14 में मौजूद राम नवल गुप्ता के दुकान के सामने पहुँचा। राम नवल गुप्ता की नारियल की दुकान है जहाँ कुछ लोग भी थे। हामिद नशे में था इसलिए पुरानी बातें शुरू कर दी और दोनों में बहस शुरू हो गयी। बहसबाजी के बीच दोनों ने अपने-अपने बच्चों को बुलाया। एक तरफ राम नवल गुप्ता और उसके बेटे अमर गुप्ता, अरविंद गुप्ता और अमित गुप्ता थे जबकि दूसरी तरफ हामिद शेख और उसका बेटा अरमान शेख और हसन शेख थे। दोनों तरफ से बहसबाजी फिर शुरू हुई और चाकू जैसे दूसरे हथियारों से जानलेवा हमला हुआ जिसमें राम नवल गुप्ता, अरविंद गुप्ता और हामिद शेख की जान चली गई।

पुलिस ने घटना की जानकारी देते हुए कहा है कि दोनों की ओर से हत्या का केस दर्ज किया गया है। आरोपित बेटों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है इसलिए गिरफ्तार नहीं किया गया है।

30 दिन के भीतर करो पहचान, दस्तावेज देखो और निकालो देश से बाहर: बांग्लादेशी और म्यांमार के घुसपैठियों पर गृह मंत्रालय हुआ और सख्त, राज्यों से कहा- इन्हें ढूँढकर रखो डिटेंशन सेंटर में

भारत का केंद्रीय गृह मंत्रालय बांग्लादेशी और म्यांमार के घुसपैठियों के खिलाफ और सख्त हो गया है। मंत्रालय ने घुसपैठियों की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 30 दिन की समय सीमा निर्धारित की है। गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि सभी राज्यों को अपनी वैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए घुसपैठियों की पहचान करनी होगी और उनकी जाँच के बाद निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

इसके साथ ही, हर राज्य को जिला स्तर पर पर्याप्त डिटेंशन सेंटर स्थापित करने का आदेश दिया गया है, जहाँ संदिग्ध प्रवासियों को निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने तक रखा जाएगा। इन केंद्रों में उनकी बायोमेट्रिक जानकारी भी ली जाएगी ताकि आगे भी ये लोग किसी तरह की धोखाधड़ी न करें। सीमा सुरक्षा बल (BSF) और असम राइफल्स जैसे सुरक्षा बलों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है ताकि सीमाओं पर अवैध घुसपैठियों पर नजर रखी जा सके।

अपने निर्देश में मंत्रालय ने कहा है कि जिन लोगों पर संदेह है कि वो घुसपैठिए हैं, उनके दस्तावेजों का वेरिफिरेशन 30 दिन के भीतर होना जारूरी है। यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक होने का दावा करता है, तो उस राज्य की सरकार का दायित्व होगा कि वो उसकी पहचान और पृष्ठभूमि की जानकारी एकत्र करनी होगी।

गौरतलब रहै कि पिछले कुछ समय से भारत में घुसैठियों को पकड़कर वापस भेजने की दिशा में जाँच एजेंसिया लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में राजस्थान में 30 अप्रैल 2025 से शुरू हुए विशेष अभियान में अब तक 1,000 से ज्यादा घुसपैठिए पकड़े गए हैं। यही संख्या गुजरात से भी सामने आई थी। इसी तरह हरियाणा के तीन जिलों- नूहँ, झज्जर और हाँसी में 237 से अधिक बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में लिए गए हैं। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में पिछले कुछ दिनों में 300 से अधिक घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया है। मुंबई में 1 जनवरी 2025 से अब तक 650 से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

पाकिस्तान घूमने नहीं, ISI से ट्रेनिंग लेने गए थे गौरव गोगोई: असम CM का दावा, कॉन्ग्रेस सांसद की पत्नी के भी आतंकी मुल्क से कनेक्शन को लेकर उठा चुके हैं सवाल

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रविवार (18 मई 2025) को कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि गोगोई पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के निमंत्रण पर वहाँ गए थे। गुवाहाटी में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में सरमा ने कहा कि गोगोई का पाकिस्तान दौरा पर्यटन के लिए नहीं, बल्कि ट्रेनिंग के उद्देश्य से था। उन्होंने कहा कि गोगोई को पाकिस्तान के गृह मंत्रालय से निमंत्रण मिला था, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक है।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “कॉन्ग्रेस के सांसद गौरव गोगोई पाकिस्तान में ISI के निमंत्रण पर गए थे। हमारे पास निमंत्रण पत्र से संबंधित दस्तावेज़ उपलब्ध हैं।” उन्होंने कहा, “अभी तक मैंने इतना खुलकर कभी नहीं कहा, लेकिन आज पहली बार मैं साफ कह रहा हूँ कि गौरव गोगोई पाकिस्तान आईएसआई के निमंत्रण पर गए थे। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि उन्हें वहाँ पर ट्रेनिंग मिली। गौरव गोगोई को पाकिस्तान के गृह मंत्रालय से पत्र मिला, इसके बाद ही वो पाकिस्तान गए।”

हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “एक विदेशी यूनिवर्सिटी से निमंत्रण मिलना अलग है, लेकिन इसमें विदेशी सरकार के विभाग से उन्हें बुलावा आया था। वो भी विदेश मंत्रालय या कल्चरल मामलों के मंत्रालय से नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सरकार के सबसे महत्वपूर्ण होम मिनिस्ट्री से उन्हें बुलावा आया, जो ये बताता है कि गौरव गोगोई का ये कदम देश की सुरक्षा के लिए कितना खतरनाक है। ये बेहद गंभीर मामला है और इस पर एक्शन होगा। ये कोई मजाक का मामला नहीं है।” उन्होंने कहा कि वो इस बारे में सबकुछ 10 सितंबर को कहेंगे। इस बयान को उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया है।

सरमा ने दावा किया कि उनके पास इस बात के दस्तावेजी सबूत हैं, जिन्हें 10 सितंबर तक जनता के सामने पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मामला गंभीर है और इस पर कार्रवाई होगी। सरमा ने यह भी आरोप लगाया कि गोगोई ने पाकिस्तान की सत्ता के साथ मिलकर काम किया और वापस लौटकर राफेल सौदे का विरोध किया। उन्होंने चुनौती दी कि अगर उनका एक भी शब्द गलत साबित हुआ, तो वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे।

इससे पहले, सरमा ने कॉन्ग्रेस नेतृत्व से गौरव गोगोई को सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से हटाने की माँग की थी। यह प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को वैश्विक मंच पर बेनकाब करने के लिए बनाया गया है। कॉन्ग्रेस ने गौरव समेत 4 नाम भेजे थे। सरमा ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गोगोई का नाम इस लिस्ट में शामिल करना ठीक नहीं है।

गौरव पर हिमंता के आरोप गंभीर, पत्नी का पाकिस्तान से जुड़ाव

बता दें कि हिमंता बिस्वा सरमा खुलकर गौरव गोगोई और उनकी ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई के आईएसआई से लिंक्स को लेकर आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि मामले की जाँच चल रही है और मामले की जाँच पूरी होने के बाद दोनों की असलियत पूरे देश के सामने लाई जाएगी।

असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने 15 फरवरी 2025 को कहा, “हमारे पास पक्की जानकारी है कि एलिजाबेथ गोगोई अपनी शादी के बाद भी पाकिस्तान गई हैं। वह सांसद के साथ गई थीं या अकेली, इन बातों की पुष्टि हो जाएगी। कई नई जानकारियाँ भी सामने आ रही हैं।”

CM सरमा ने स्पष्ट किया है कि यह जाँच मात्र एलिजाबेथ कोलबर्न तक ही नहीं बल्कि उसने जुड़े लोगों और बाकी इकोसिस्टम को भी दायरे में लेकर की जाएगी। उन्होंने कहा है कि जाँच के लिए एक केस दर्ज किया जाएगा, इसके बाद उनके पासपोर्ट और वीजा की जानकारी जुटाई जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई है कि क्या गौरव गोगोई के पिता तरुण गोगोई के मुख्यमंत्री रहते हुए ISI का मुख्यमंत्री दफ्तर तक दखल था। उन्होंने इसकी जाँच भी करवाने की बात कही है।

सीएम हिमंता बिस्वा ने गौरव गोगोई की पाकिस्तानी हाई कमिश्नर अब्दुल बासित से मुलाक़ात को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न का एक पुराना ट्वीट दिखाया है, जिसमें वह इस्लामाबाद में होने सम्बन्धित बात लिखी थी।

एलिजाबेथ कोलबर्न की नागरिकता को लेकर भी CM बिस्वा सरमा ने सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि विवाह के 12 साल के बाद भी कोलबर्न के पास भारतीय नागरिकता क्यों नहीं और वह अपनी ब्रिटिश नागरिकता क्यों बनाए हुए हैं। विवाह के पहले और बाद भी जिन संगठनों के साथ कोलबर्न ने काम किया, उनको लेकर सवाल उठे हैं।

कोलबर्न 2011-15 के बीच क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क (CDKN) के लिए काम किया था। दावा है कि वह इस दौरान अधिकतर समय पाकिस्तान में रहीं। CDKN से ही जुड़े एक संगठन LEAD के लिए वह पाकिस्तान में काम करती थीं। उनके पाकिस्तान सरकार की एक टास्क फ़ोर्स में भी शामिल रहने का दावा किया गया है।

यह टास्क फ़ोर्स कथित तौर पर पाकिस्तान के लिए पैसा जुटाती थी। इसके ISI का एक मुखौटा होने का दावा है। इसी को लेकर उन पर ISI लिंक के आरोप लगाए गए हैं। पाकिस्तान और भारत में काम करने के दौरान कोलबर्न का सुपरवाइजर एक पाकिस्तानी अली तौकीर शेख था। उसका भारत विरोधी प्रोपेगेंडा भी अब सामने आया है।

दादा पाकिस्तान का पैरोकार, अब्बा रहे कॉन्ग्रेस MLA, खुद सपा का प्रवक्ता… जानिए कौन है ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर जहर उगलने वाला प्रोफेसर अली खान

हरियाणा के सोनीपत में स्थित अशोका यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी से जुड़ा है, जिन्हें 18 मई 2025 को दिल्ली से हिरासत में लिया गया। प्रोफेसर अली खान पर ऑपरेशन सिंदूर और इसमें शामिल महिला सैन्य अधिकारियों कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है।

यह घटना अशोका यूनिवर्सिटी के कथित वामपंथी और वोक विचारधारा वाले माहौल को लेकर चल रही बहस को और आगे बढ़ा दिया। यही नहीं, अब अली खान के परिवार के मोहम्मद अली जिन्ना से कथित करीबी रिश्ते और पाकिस्तान के निर्माण में उनके परिवार की भूमिका भी एक बार फिर से चर्चा में आ गई है।

ऑपरेशन सिंदूर और महिला अधिकारियों पर टिप्पणी के मामले में गिरफ्तारी

हरियाणा पुलिस ने प्रोफेसर अली खान को रविवार (18 मई 2025) को दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके से गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई बीजेपी युवा मोर्चा के एक नेता की शिकायत पर हुई, जिसमें अली खान की ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणियों को आपत्तिजनक और सांप्रदायिक बताया गया। ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना की कार्रवाई थी। इस ऑपरेशन की जानकारी देने के लिए कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।

अली खान ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘दिखावा और पाखंड’ करार दिया। उन्होंने लिखा कि सरकार कर्नल सोफिया को सिर्फ मीडिया में दिखाने के लिए आगे लाई है, जबकि वह मुस्लिम समुदाय के खिलाफ काम करती है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के कुछ ‘पागल फौजी’ लोग सीमा पर तनाव पैदा करते हैं, जिससे बेकसूर लोग मरते हैं।

हरियाणा राज्य महिला आयोग ने 12 मई को उसकी टिप्पणियों को सेना की महिला अधिकारियों का अपमान और सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने वाला माना। आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा, लेकिन अली खान जवाब देने नहीं गए। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ राजद्रोह सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया और उन्हें हिरासत में ले लिया।

अली खान ने अपने बचाव में कहा कि उनकी बातों को गलत समझा गया। वह महिला अधिकारियों की तारीफ कर रहे थे और सिर्फ यह कहना चाहते थे कि मुस्लिम समुदाय को भी बराबर सम्मान मिलना चाहिए।

कौन हैं प्रो. अली खान महमूदाबाद?

अली खान महमूदाबाद अशोका यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर है। उसका जन्म दिसंबर 1982 में हुआ था। खान ने लखनऊ के ला मार्टिनियर कॉलेज से शुरुआती पढ़ाई की, फिर यूके के किंग्स कॉलेज और विनचेस्टर कॉलेज में पढ़े। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से खान ने इतिहास और राजनीति विज्ञान में एमफिल और पीएचडी की डिग्री हासिल की। इसके अलावा, अली खान ने सीरिया की दमिश्क यूनिवर्सिटी में अरबी की पढ़ाई भी की। अली खान उत्तर प्रदेश के महमूदाबाद राजघराने से ताल्लुक रखते हैं, जिसका इतिहास ब्रिटिश भारत और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है।

प्रोफेसर अली खान समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता भी है, जिसके चलते उसकी राजनीतिक सक्रियता अक्सर सुर्खियों में रहती है। उनके परिवार की संपत्ति की बात करें तो यह 30-50 हजार करोड़ रुपये की बताई जाती है। इसमें लखनऊ का आधा हजरतगंज, उत्तराखंड में 396 संपत्तियाँ, और इराक, पाकिस्तान जैसे देशों में प्रॉपर्टी शामिल हैं।

अली खान के परिवार का जिन्ना और भारत के बँटवारे से खास नाता

अली खान के परिवार का इतिहास ऑल इंडिया मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना से गहराई से जुड़ा है। उनके दादा, मुहम्मद अमीर अहमद खान, जिन्हें राजा महमूदाबाद के नाम से जाना जाता था, उत्तर प्रदेश के महमूदाबाद के नवाब थे। वह जिन्ना के इतने करीबी थे कि जिन्ना उन्हें अपने बेटे की तरह मानते थे। राजा महमूदाबाद ने मुस्लिम लीग में कई अहम भूमिकाएँ निभाईं।

जिन्ना ने उन्हें मुस्लिम लीग की छात्र ईकाई का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। बाद में वह मुस्लिम लीग के कोषाध्यक्ष बने। उन्होंने मुस्लिम लीग को भारी मात्रा में चंदा दिया और लीग के प्रचार अखबार डॉन को आर्थिक मदद दी। पाकिस्तान के निर्माण में उन्होंने तन, मन, धन से पूरा योगदान दिया। कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

परिवार ने दे दिया पाकिस्तान को सबकुछ दान, फिर भी भारत में रह गए कब्जेदार

साल 1947 में भारत के बंटवारे के समय राजा महमूदाबाद इराक में रह रहे थे। 1957 में उन्होंने पाकिस्तान की नागरिकता ले ली और अपनी सारी संपत्ति पाकिस्तान को दान दे दी। इस वजह से भारत में उनकी संपत्तियों को शत्रु संपत्ति के तौर पर सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया। 1966 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर महमूदाबाद का किला उनके परिवार को वापस मिला। 1973 में राजा महमूदाबाद की लंदन में मृत्यु हो गई।

राजा महमूदाबाद के बेटे मुहम्मद अमीर मुहम्मद खान (उर्फ सुलेमान) (अली खान के अब्बू) बँटवारे के बाद पाकिस्तान नहीं गए। वह भारत में रहे और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में अपनी संपत्तियों की देखभाल करते रहे। 1981 में इंदिरा गाँधी सरकार ने उनकी 25% संपत्ति लौटाने की पेशकश की, लेकिन वह सहमत नहीं हुए। उन्होंने लखनऊ सिविल कोर्ट में केस लड़ा और 2001 में जीत गए। हालाँकि 2002 में सरकार ने अपील की और यह मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है। सुलेमान 1985 और 1989 में कॉन्ग्रेस के टिकट पर महमूदाबाद से विधायक बने।

राजा महमूदाबाद के पोते और सुलेमान के बेटे प्रोफेसर अली खान ने समाजवादी पार्टी जॉइन की और राष्ट्रीय प्रवक्ता बने। वह अक्सर पार्टी के विचारों को सार्वजनिक मंचों पर रखते हैं। लेकिन उनकी ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणियाँ पार्टी के लिए भी मुश्किल खड़ी कर सकती हैं, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा है।

अशोका यूनिवर्सिटी बन चुका है वामपंथी-वोक का गढ़?

अशोका यूनिवर्सिटी की स्थापना 2014 में हुई थी। यह एक निजी विश्वविद्यालय है, जो अपनी लिबरल आर्ट्स एजुकेशन के लिए जाना जाता है। हालाँकि बीते कुछ सालों में अशोका यूनिवर्सिटी बार-बार विवादों में घिरा है। कई लोग इसे वामपंथी और वोक विचारधारा का अड्डा कहते हैं, क्योंकि इसके छात्र और प्रोफेसर अक्सर ऐसे बयान या प्रदर्शन करते हैं, जो देश की मुख्यधारा की सोच से टकराते हैं।

अशोका यूनिवर्सिटी में हुई हिंदू विरोधी नारेबाजी

बीते साल 26 मार्च 2024 को यूनिवर्सिटी के छात्रों ने एक प्रदर्शन में ‘ब्राह्मण-बनियावाद मुर्दाबाद‘, ‘जय भीम-जय मीम’, और ‘जय सावित्री-जय फातिमा’ जैसे नारे लगाए। ये लोग राहुल गाँधी से प्रभावित होकर छात्र जाति जनगणना और यूनिवर्सिटी में आरक्षण की माँग कर रहे थे। सोशल मीडिया पर इन नारों को हिंदू विरोधी बताया गया। कई लोगों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। इस घटना ने अशोका की छवि को और धक्का पहुँचाया।

यूनिवर्सिटी में प्रो-फिलिस्तीन प्रदर्शन

मई 2024 में यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में छात्रों ने ‘फ्री फिलिस्तीन‘ और ‘स्टॉप जेनोसाइड’ लिखे प्लेकार्ड दिखाए। छात्रसंघ ने इजराइल की तेल अवीव यूनिवर्सिटी से रिश्ते तोड़ने की माँग की। इस प्रदर्शन को कुछ लोग वोक विचारधारा का हिस्सा मानते हैं, जो वैश्विक मुद्दों पर एकतरफा रुख अपनाता है।

इजराइल विरोधी बयानबाजी

अशोका के छात्रसंघ ने इजराइल के गाजा में सैन्य कार्रवाई को ‘नरसंहार’ बताया। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के आतंकी हमले को उन्होंने सिर्फ ‘इवेंट्स’ कहा, जिसकी खूब आलोचना हुई। कई लोगों ने इसे वामपंथी प्रोपेगैंडा करार दिया।

ईवीएम में हेराफेरी का भी किया था फर्जी दावा

इस यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर सब्यसाची दास ने अपने शोधपत्र में दावा किया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने ईवीएम में हेराफेरी की। उनके शोध में खामियां पाई गईं, जिसके बाद उनकी आलोचना हुई। दबाव बढ़ने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

नेताजी की तस्वीर पर विवाद

इसी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर नीलांजन सरकार ने दावा किया था कि राष्ट्रपति भवन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर असल में बंगाली अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी की है। उन्होंने बीजेपी और भगवान राम का भी मजाक उड़ाया था।

यूनिवर्सिटी के संस्थापक धोखाधड़ी में जा चुके हैं जेल

यूनिवर्सिटी के संस्थापक विनीत गुप्ता और प्रणव गुप्ता पर 1,626 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का आरोप है। सीबीआई ने 2021 में उनकी कंपनी पैराबोलिक ड्रग्स के खिलाफ केस दर्ज किया। ईडी ने 28 अक्टूबर 2023 को दोनों को गिरफ्तार किया। उन पर जाली दस्तावेजों से बैंकों से कर्ज लेने और पैसे का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि उसका इस कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन इन आरोपों ने उसकी साख को नुकसान पहुँचाया।

यूनिवर्सिटी ने अली खान के बयानों से किया खुद को अलग

अली खान की टिप्पणियों से यूनिवर्सिटी ने खुद को अलग कर लिया। उसने कहा कि यह प्रोफेसर का निजी बयान था और यूनिवर्सिटी भारतीय सेना का समर्थन करती है। लेकिन बार-बार होने वाले विवादों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम न उठाने की आलोचना हो रही है।

अशोका यूनिवर्सिटी के छात्र और प्रोफेसर अक्सर जाति, धर्म, लिंग, और वैश्विक मुद्दों पर मुखर रहते हैं। उनके प्रदर्शन और बयान लिबरल और वामपंथी विचारधारा से प्रेरित दिखते हैं। हालाँकि यह वोक संस्कृति एकतरफा है और देश की भावनाओं को ठेस पहुँचाती है। खासकर हिंदू विरोधी नारे और इजराइल विरोधी बयान को कई लोग भारत विरोधी मानते हैं।

ऐसे में क्या यह यूनिवर्सिटी वाकई वामपंथी और वोक विचारधारा का गढ़ बन चुकी है? या यह सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा दे रही है? इन सवालों का जवाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को देना होगा, ताकि इसका शैक्षणिक सम्मान बरकरार रहे।

एक ज्योति, नकाब कई… क्या दानिश पर मर मिटी थी पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाली भारत की यूट्यूबर?

यदि आपका सोशल मीडिया से वास्ता है तो शायद यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा (Youtuber Jyoti Malhotra) को जानते होंगे। शायद उसके चैनल ‘ट्रैवल विद जो (Travel with JO)’ का वीडियो भी देखा हो। अब खुलासा हुआ है कि यह ज्योति मल्होत्रा पाकिस्तान की जासूस है।

सोशल मीडिया से ही ज्योति ने नाम बनाया। सोशल मीडिया की गतिविधियों से ही वह एजेंसियों की रडार पर आई। उसका सोशल मीडिया प्रोफाइल खँगालते ही आपको एहसास हो जाएगा कि उसके लिए पाकिस्तान जाना और वहाँ के बड़े लोगों से मिल लेना कोई बड़ी बात नहीं थी।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि उसके पीछे किसका हाथ है? अब उसके ही एक वीडियो से पता चला है कि वह दिल्ली के पाकिस्तानी उच्चायोग में राजनयिक बनकर तैनात उस ISI जासूस एहसान उर रहीम उर्फ दानिश के सीधे संपर्क में थी, जिसे हाल ही में भारत ने देश छोड़ने का आदेश दिया था। दावा यह भी है कि दानिश पर ज्योति मर मिटी थी। यह भी कहा जा रहा है कि दानिश ही ज्योति के पाकिस्तान आने-जाने का खर्च उठाया करता था।

आश्चर्यजनक तौर पर ज्योति को पाकिस्तान का वीजा आसानी से मिल जाता था। वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ की बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज से उनके बगल में ऐसे खड़ी होकर बतियाती थी, जैसे गहरी यारी हो।

आश्चर्यजनक यह भी है कि जिस पहलगाम में हिंदुओं की इस्लामी आतंकियों ने धर्म पूछ-पूछकर हत्या की थी, वहाँ की उसने अटैक से कुछ महीने पहले ही यात्रा की थी और वीडियो बनाए थे। पहलगाम अटैक के बाद एक वीडियो में उसने पीड़ितों और भारत सरकार को ही इसका जिम्मेदार ठहराने की कोशिश भी की थी।

सोशल मीडिया पर ट्रैवल व्लॉगर ज्योति के कई चेहरे हैं। कभी वह लग्जरी लाइफ जीती नजर आती है। कभी वह मस्त​क पर चंदन किए धार्मिक स्थल की यात्रा करती दिखती है। लेकिन यह तथ्य बार-बार खटकता है कि हरियाणा के हिसार में 55 गज के एक घर में पली-बढ़ी लड़की अचानक से इतनी शान-शौकत वाली जिंदगी कैसे जीने लगी? भारत के दुश्मन मुल्क की हर जगह उसके पहुँच में कैसे आ गई?

दिल्ली में 20 हजार की नौकरी की, पिता कारपेंटर

ज्योति के यूट्यूब चैनल ‘ट्रैवल विद जो‘ के 3.77 लाख सब्सक्राइबर हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर उसे 1.31 लाख फॉलो करते हैं। उसके वीडियो को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है इन्हें बनाने में मोटा खर्च हुआ होगा।

दुबई घूमने गई ज्योति। यह तस्वीर 25 अक्टूबर 2024 की है। (फोटो साभार: Instagram-travelwithjo)

ज्योति हरियाणा की रहने वाली एक सामान्य घर की लड़की है। उसके पिता हरीश कुमार अभी भी सामान्य नौकरी करते हैं। यूट्यूबर ज्योति का हिसार की न्यू अग्रसेन कॉलोनी में सिर्फ 55 गज का घर है। इसमें तीन छोटे-छोटे कमरे बने हैं। पिता कारपेंटर की नौकरी करते हैं, मगर इस कमाई से घर नहीं चल पाता है। घर का खर्च चाचा की पेंशन से चलता था। ज्योति के माता-पिता का तलाक 20 साल पहले हो चुका है।

हरियाणा के हिसार स्थित अग्रेसन कॉलोनी में ज्योति का घर (साभार: DainikBhaskar)

कभी दिल्ली में ज्योति 20 हजार की नौकरी करती थी। कोरोना में नौकरी छूटी और वह हिसार लौट आई। इसके बाद उसने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना शुरू किया और अचानक से उसकी जिंदगी बदल गई।

सोशल मीडिया पर ‘धार्मिक-देशभक्त’ का नकाब

सोशल मीडिया पर ज्योति खुद को धार्मिक और देशभक्त दिखाने की पूरी कोशिश करती रही है। भारत के लगभग सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के वीडियो बनाए हैं। देशभक्ति गीतों पर तिरंगे के साथ रील्स भी पोस्ट की है। लेकिन विदेश जाते ही उसका नकाब उतर जाता था।

पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर से लेकर भूटान के फर्टिलिटी टैंपल और ‘कंडोम कैफे‘ तक के उसने आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए हैं। इन वीडियो के थंबनेल भी अश्लील हैं।

इस फोटो में ज्योति केरल एक होटल में हैं। तस्वीर इसी साल 19 फरवरी की है (साभार: Instagram-travelwithjo)

यूट्यूब चैनल पर पाकिस्तान के वीडियो की भरमार

ज्योति के यूट्यूब चैनल ‘ट्रैवल विद जो’ पर पाकिस्तान के कई वीडियो हैं। इनमें वहाँ की बस, ट्रेन, बाजार और संस्कृति को दिखाया गया है। इनमें ‘Indian Girl in Pakistan‘, ‘Indian Girl Exploring Lahore‘,’Indian Girl Ek Qatal Raaz Temple‘, ‘Indian Girl Rides Luxury Bus in Pakistan‘नाम से कई वीडियो हैं।

पाकिस्तान में कैसे बनाया नेटवर्क?

ज्योति ने पुलिस पूछताछ में कबूला है कि वह साल 2023 में पाकिस्तान का वीजा लगवाने दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन गई थी। वहाँ उसकी मुलाकात पाकिस्तानी अधिकारी अहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई। दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और बातचीत शुरू हो गई। इसके बाद ज्योति ने दो बार पाकिस्तान की यात्रा की। वहाँ दानिश के जानकार अली अहयान से मिली, जिसने उसके ठहरने और घूमने-फिरने का इंतजाम किया।

पाकिस्तान में अली अहयान ने उसे पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया अधिकारियों से मिलवाया। यहीं पर ज्योति की मुलाकात शाकिर और राणा शहबाज से भी हुई। शाकिर का नंबर उसने भारत लौटकर ‘जट रंधावा’ नाम से सेव कर लिया ताकि किसी को शक न हो। भारत लौटने के बाद वह व्हाट्सएप, स्नैपचैट और टेलीग्राम जैसे ऐप्स से लगातार पाकिस्तान से संपर्क में रही और देशविरोधी सूचनाएँ साझा करती रही।

दानिश की इफ्तार पार्टी की ‘खास मेहमान’

साल 2024 में ज्योति को पाकिस्तान हाई कमीशन से इफ्तार पार्टी का खास निमंत्रण मिला। वहाँ वह चीनी अधिकारियों से भी मिली। ज्योति ने इस कार्यक्रम का वीडियो खुद शेयर किया था, जिसमें वह दानिश के काफी नजदीक नजर आई। दानिश ने उसे पार्टी में रिसीव किया। वहाँ मौजूद अन्य मेहमानों से परिचय कराया और अपनी बीवी से भी मिलवाया।

इस 15 मिनट के वीडियो में ज्योति पाकिस्तान की व्यवस्था की तारीफ करती दिख रही है। वहाँ मौजूद भारतीयों से बातचीत कर रही है और पूछ रही है कि पाकिस्तान जाकर कैसा अनुभव रहा। आखिर में वीडियो का समापन दानिश और ज्योति मिलकर करते हैं। इसमें दानिश ने पार्टी में आने के लिए ज्योति का आभार भी जताया।

इफ्तार पार्टी में दानिश के साथ यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा (साभार: Youtube/Travel with JO)

ज्योति की पाकिस्तान हाई कमीशन में तैनात दानिश से बार-बार मुलाकात होती रही। पूछताछ में यह सामने आया कि दानिश, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का एजेंट था। भारत सरकार ने 13 मई 2025 को उसे अवांछित व्यक्ति घोषित कर देश छोड़ने का आदेश दिया था।

दानिश के हाथों में खेल रही थी ज्योति?

दानिश का मकसद सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान की अच्छी छवि दिखाना और भारत विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देना था। इसी काम में उसने ज्योति का इस्तेमाल किया। ज्योति ने अपने सोशल मीडिया चैनलों पर ऐसे वीडियो और पोस्ट डाले हैं जिनका मकसद पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाना है।

खुलासा हुआ कि दानिश भारत के कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के संपर्क में भी था, जिन्हें उसने पैसे और सुविधाएँ देकर अपने पक्ष में किया। खासकर पहलगाम हमले के बाद जब भारत में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा था, तब दानिश की रणनीति थी कि सोशल मीडिया पर पाकिस्तान को शांतिप्रिय देश बताया जाए। ज्योति ने इस प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

जब मरियम नवाज की बगलगीर बनी ज्योति

पाकिस्तान पंजाब की पहली महिला मुख्यमंत्री मरियम नवाज का इंटरव्यू भी ज्योति ले चुकी है। गुरुद्वारा करतारपुर साहिब कॉरिडोर में मरियम नवाज के बगल में वह दिखाई पड़ती है।

गुरुद्वारा करतारपुर साहिब कॉरिडोर में सीएम मरियम नवाज का इंटरव्यू लेती ज्योति (साभार: Youtube/Travel with JO)

दोनों काफी सहज अंदाज में बातचीत करते नजर आते हैं। 42 मिनट का यह वीडियो अप्रैल 2024 का है, जिसे 7.53 लाख दर्शक देख चुके हैं और करीब दो हजार कमेंट आए हैं। वीडियो में ज्योति कहती नजर आ रही कि वह यहाँ दूसरी बार आई हैं और यहाँ आकर उन्हें बहुत अच्छा महसूस होता है।

पाकिस्तान-चीन यात्रा के बाद हुआ शक

साल 2024 में ज्योति ने दो महीने के भीतर पाकिस्तान और चीन का दौरा किया। इसके बाद वह सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आई। वह 17 अप्रैल को पाकिस्तान गई। 15 मई को भारत वापस लौटी। पाकिस्तान से लौटने के 25 दिन बाद ही 10 जून 2024 को वह चीन चली गई। 09 जुलाई 2024 तक चीन में रही। फिर वहीं से 10 जुलाई को नेपाल में काठमांडू पहुँच गई।

चीन की यात्रा के दौरान फ्लाइट में एयर होस्टेस के साथ ज्योति ने ली तस्वीर (साभार:  Instagram-travelwithjo)

इन यात्राओं के देखते हुए जाँच एजेंसी के अधिकारी अलर्ट हो गए। वह ज्योति को ट्रैक करने लगे। पुख्ता सबूत मिलते ही 15 मई 2025 को सुबह 9 बजे पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा। पिता और चाचा के मोबाइल जब्त कर लिए। ज्योति को थाने लेकर आई और पूछताछ की। रात 9 बजे उसे घर वापस भेज दिया। 17 मई को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

ISI के संपर्क में थी ज्योति?

फिलहाल ज्योति को पाँच दिन की रिमांड में लेकर पूछताछ की जा रही है। हिसार DSP कमलजीत ने बताया कि ज्योति पर अधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और BNS 152 के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा उसके मोबाइल और लैपटॉप से कई संदिग्ध सामग्री मिली है।

SP शशांक कुमार सावन ने पुष्टि की कि ज्योति ISI के संपर्क में थी। उसकी आय और खर्च में भारी अंतर है। बैंक खाते और सोशल मीडिया गतिविधियाँ खंगाली जा रही हैं। कुछ और सोशल मीडिया यूज़र्स भी जाँच के घेरे में है।

धार्मिक यात्रा पर पाकिस्तान गया देवेंद्र, युवती ने हुस्न के जाल में फँसाकर बना दिया ISI जासूस: पैसे-लड़कियों का दिया लालच, हथियारों संग फोटो से खुला भेद

हरियाणा पुलिस की विशेष जासूस इकाई (एसडीयू) ने कैथल जिले में छापेमारी की और मस्तगढ़ गाँव के देवेंद्र सिंह ढिल्लों को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया। उसे आईएसआई ने हनी ट्रैप में फँसाकर जासूसी के लिए तैयार किया था। वो आईएसआई के 5 एजेंट्स के संपर्क में था। उसे आईएसआई ने लड़की का लालच भी दिया था, जिसके बदले में उसने सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़ी तस्वीरें भी भेजी थी। इस मामले में स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट ने कैथल के मस्तगढ़ गाँव से उसे पकड़ा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब के पटियाला में रहकर देवेंद्र पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करता था और वो खालसा कॉलेज में पढ़ रहा था। राजनीति शास्त्र के छात्र देवेंद्र पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने का आरोप है। जाँच में पता चला कि नवंबर 2024 में वह करतारपुर कॉरिडोर के जरिए सिख श्रद्धालुओं के साथ पाकिस्तान गया था। वहाँ उसने करतारपुर साहिब, ननकाना साहिब और लाहौर जैसे धार्मिक स्थलों का दौरा किया, जहाँ उसकी मुलाकात आईएसआई एजेंटों से हुई।

पुलिस के मुताबिक, देवेंद्र पाँच से ज्यादा पाकिस्तानी एजेंटों के संपर्क में था। उसकी दोस्ती फेसबुक पर एक पाकिस्तानी युवती से हुई, जो बाद में आईएसआई एजेंट निकली। हनी ट्रैप में फँसकर उसने पटियाला के सैन्य क्षेत्र की तस्वीरें खींचकर एजेंटों को भेजीं। जब पुलिस जाँच की आहट मिली, तो उसने अपने मोबाइल का सारा डाटा डिलीट कर दिया। साइबर यूनिट अब डाटा रिकवरी में जुटी है।

देवेंद्र मध्यमवर्गीय परिवार से है, जिसमें माता-पिता और एक बहन हैं। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन हथियारों के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालने से पुलिस का ध्यान उसकी ओर गया। ये हथियार गाँव के मालक सिंह के थे, जिसके आधार पर पुलिस ने डर फैलाने का आरोप भी जोड़ा।

डीएसपी वीरभान सिंह के अनुसार, देवेंद्र करतारपुर साहिब दर्शन के बहाने पाकिस्तान गया था, जहाँ वह ISI एजेंटों के संपर्क में आया और भारत की सैन्य जानकारी पाकिस्तान को भेजने लगा।

एसपी आस्था मोदी ने कहा कि देवेंद्र के अन्य संपर्कों की जाँच जारी है। यह मामला आईएसआई के सोशल मीडिया हनी ट्रैप नेटवर्क को फिर उजागर करता है, जिसने पहले भी कई भारतीय कर्मचारियों को निशाना बनाया है।

यह मामला एक बार फिर आईएसआई द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाए गए हनी ट्रैप नेटवर्क को सामने ला रहा है, जिससे पहले भी DRDO और विदेश मंत्रालय के कर्मचारियों को निशाना बनाया गया है।

जिनके लादेन से कनेक्शन…उन्हें ट्रंप प्रशासन ने ‘सलाहकार बोर्ड’ में किया नियुक्त: पत्रकार के खुलासे से मचा बवाल

व्हाइट हाउस में पूर्व आतंकियों की एंट्री हुई है। ये खुलासा एक पत्रकार लॉरा लूमर ने किया। उन्होंने बताया कि 16 मई 2025 को व्हाइट हाउस की ओर से जारी प्रेस रिलीज में जिन दो लोगों को ‘ले लीडर्स के सलाहकार बोर्ड’ में नियुक्त किया गया है उनकी पृष्ठभूमि आतंकवाद से जुड़ी है। इन दोनों के नाम- इस्माइल रॉयर और शेख हमजा यूसुफ है। पत्रकार के अनुसार ये लोग पूर्व में जिहादी गतिविधियों में शामिल थे और एक तो आतंकी कैंपों में ट्रेनिंग के लिए गया था।

इस्माइल रॉयर, जिसे पहले रैंडल रॉयर के नाम से जाना जाता था, उसने पाकिस्तान जाकर एक इस्लामी आतंकी शिविर में प्रशिक्षण लिया था। उसे जिहादी आतंकी गतिविधियों में शामिल होने, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक साजिश रचने, हिंसक अपराधों के दौरान विस्फोटक और हथियार इस्तेमाल करने के आरोप में दोषी पाया गया था। इसके चलते उसे 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। इस नियुक्ति को लेकर सुरक्षा और नैतिकता से जुड़े कई सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

जनवरी 2004 में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी एक दस्तावेज़ में कहा गया है,

“अपनी दलील समझौते में, रॉयर ने सह-प्रतिवादी मसूद खान, योंग की क्वोन, मुहम्मद आतिक और ख्वाजा महमूद हसन को लश्कर-ए-तैयबा द्वारा संचालित पाकिस्तान में एक आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर में प्रवेश पाने में सहायता करने और उकसाने की बात स्वीकार की, जहाँ उन्होंने अर्ध-स्वचालित पिस्तौल सहित विभिन्न हथियारों के उपयोग का प्रशिक्षण लिया। रॉयर ने सह-प्रतिवादी इब्राहिम अहमद अल-हमदी को लश्कर-ए-तैयबा शिविर में प्रवेश पाने में मदद करने की बात भी स्वीकार की, जहाँ अल-हमदी ने भारत के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने की साजिश को आगे बढ़ाने के लिए रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड के इस्तेमाल का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

रॉयर ने स्वीकार किया कि उसने 16 सितंबर, 2001 को एक बैठक के बाद अन्य जिहादियों को लश्कर-ए-तैयबा प्रशिक्षण शिविर में प्रवेश पाने में मदद करने के लिए अपने प्रयासों को प्रतिबद्ध किया, जिसमें एक अज्ञात साजिशकर्ता ने कहा कि 11 सितंबर, 2001 को आतंकवादी हमलों का इस्तेमाल वैश्विक युद्ध को गति देने के बहाने के रूप में किया जाएगा। इस्लाम के खिलाफ़, और अब समय आ गया है कि वे विदेश चले जाएँ और अगर संभव हो तो मुजाहिदीन में शामिल हो जाएँ। उस बैठक में शामिल दो अन्य व्यक्ति, योंग क्वोन और ख्वाजा हसन, जिन्होंने पहले ही अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा शिविर में जाने का एक उद्देश्य अफ़गानिस्तान सहित अन्य जगहों पर जिहाद में शामिल होने के उद्देश्य से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करना था”।

यह जानकारी सामने आई है कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा नियुक्त इस्माइल रॉयर पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक शिविर में प्रशिक्षण ले चुका है और वो भारत को निशाना बनाने की साजिश में भी भागीदार रहा था।

पत्रकार लॉरा लूमर के अनुसार, इस्लामी आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के चलते रॉयर ने 2004 से 2017 के बीच 13 साल जेल में बिताए। लूमर का दावा है कि रॉयर न केवल अमेरिका के खिलाफ युद्ध छेड़ना चाहता था, बल्कि उसने ओसामा बिन लादेन के नेतृत्व वाले आतंकी संगठन अल कायदा को भी समर्थन दिया था।

इन गंभीर आरोपों और पृष्ठभूमि के बावजूद, उसे अमेरिकी प्रशासन के की सलाहकार भूमिका में नियुक्त किया जाना बड़े सवाल खड़े करता है। इस्लामी आतंकवादी अफगानिस्तान में तालिबान का समर्थन भी करना चाहता था और ‘वर्जीनिया जिहाद नेटवर्क’ में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।

लॉरा लूमर के मुताबिक, “अमेरिका द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित लश्कर-ए-तैयबा के साथ उसकी गतिविधियों में दुष्प्रचार, कश्मीर में भारतीय ठिकानों पर गोलीबारी और हथियार रखना शामिल था, जो हिंसक जिहादी उद्देश्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

शेख हमजा यूसुफ की आतंकी पृष्ठभूम

शेख हमजा यूसुफ कैलिफोर्निया स्थित ज़ायतुना कॉलेज का सह-संस्थापक है, जो शरिया कानून की शिक्षा देता है। पत्रकार लॉरा लूमर के अनुसार, यूसुफ की पृष्ठभूमि भी विवादित रही है। उनका दावा है कि शेख हमजा यूसुफ ‘पूर्व’ इस्लामी आतंकवादी रहा है और उनका संबंध हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे कट्टरपंथी संगठनों से रहा है। इन आरोपों ने उनकी हालिया नियुक्ति को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं।

लूमर ने बताया, “9/11 से दो दिन पहले, यूसुफ ने जमील अल-अमीन के लिए एक फंडरेजर में भाषण दिया था, जिस पर एक पुलिस अधिकारी की हत्या का मुकदमा चल रहा था। अपने भाषण के दौरान, यूसुफ ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर नस्लवादी देश होने का आरोप लगाया और सुझाव दिया कि अल-अमीन को फँसाया गया था। अल-अमीन को अगले वर्ष हत्या का दोषी ठहराया गया था।”

लॉरा लूमर ने कहा, “यूसुफ ने यह भी कहा कि 1990 के दशक में न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक स्थलों पर बम विस्फोट की साजिश में दोषी ठहराए गए शेख उमर अब्देल-रहमान पर अन्यायपूर्ण तरीके से मुकदमा चलाया गया।”

आईपीटी की एक रिपोर्ट की (12 पेज) की पीडीएफ फाइल  में कहा गया है, “इस्लामिक सर्किल ऑफ नॉर्थ अमेरिका को दिए गए भाषण में यूसुफ ने चेतावनी दी कि अमेरिका इस्लाम के साथ युद्ध की ओर बढ़ रहा है। एक ऐसा संघर्ष जिसमें अमेरिका के हारने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीतियाँ ईरान और पाकिस्तान के साथ टकराव की राह पर हैं, और इससे इस्लाम के साथ एक बड़ा युद्ध हो सकता है।”

यूसुफ़ ने कहा, “यह देश इस्लाम के साथ युद्ध नहीं जीत सकता – मैं खुदा की कसम खाता हूँ। इसे रोका जाना चाहिए।” इसमें आगे कहा गया है कि अमेरिकी विदेश नीति “अल-कायदा के लिए भर्ती का सबसे बड़ा साधन है।”

शेख हमजा यूसुफ से अलकायदा द्वारा किए गए 9/11 हमलों के बाद संघीय जाँच ब्यूरो (एफबीआई) ने पूछताछ की थी। ‘ब्रिटिश इस्लाम’ बनाने की उनकी कल्पना लगभग सफल हो गई है।

शेख हमजा यूसुफ़ ने ब्रिटेन सरकार द्वारा यहूदी राज्य इज़रायल को हथियार बेचने का भी विरोध किया है। यही कारण है कि उससे दुनिया के शीर्ष 500 प्रभावशाली मुसलमानों में स्थान दिया गया है। अपनी आतंकवादी पृष्ठभूमि के बावजूद, शेख हमजा यूसुफ को ट्रम्प प्रशासन द्वारा व्हाइट हाउस के आम नेताओं के सलाहकार बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया है।

डोनाल्ड ट्रंप की पूर्व आतंकी नेता अहमद अल-शरा से मुलाकात

डोनाल्ड ट्रंप पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए हैं, जिन्होंने पूर्व आतंकी नेता से सार्वजनिक रूप से मुलाकात की है। उन्होंने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा (पूर्व में अबू मोहम्मद अल-जोलानी), पूर्व HTS प्रमुख और अल-कायदा से जुड़े आतंकी से मुलाकात की। HTS को अमेरिका पहले आतंकी संगठन घोषित कर चुका है।

यह मुलाकात तब हुई जब अमेरिका ने सऊदी अरब के दबाव में सीरिया पर वर्षों पुराने प्रतिबंध हटा दिए। ट्रंप ने अल-शरा को ‘युवा, आकर्षक और सख्त’ बताया, जिससे उनका सार्वजनिक समर्थन जाहिर हुआ।

‘ये हिंदू सुधरेंगे नहीं, इनके हाथ पैर तोड़ दो, औरतों की इज्जत लूट लो’: दलित लड़की की शादी में 500+ मुस्लिमों का उपद्रव, पाइप-लाठियों से हमला; मंदिर को भी बनाया निशाना

गुजरात के पाटण जिले में मुस्लिमों ने अनुसूचित जाति के लोगों पर हमला कर दिया। जानकारी के मुताबिक, सरस्वती तालुका के भीलवण गाँव में गुरुवार (15 मई 2025) को एक अनुसूचित जाति के परिवार की शादी के जश्न के दौरान स्थानीय मुस्लिमों ने उन पर हमला किया। यह घटना डीजे बजाने को लेकर शुरू हुई, लेकिन पीड़ित परिवार का कहना है कि इसके पीछे 15 साल पुराना मंदिर निर्माण का विवाद भी है।

मुस्लिमों के इस हमले में 8 लोग घायल हुए, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और गहनों की लूट की शिकायत भी सामने आई। पुलिस ने 14 मुस्लिम हमलावरों के खिलाफ अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया और ज्यादातर आरोपितों को हिरासत में ले लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला अहमदाबाद से आए अनुसूचित जाति के परिवार की बेटी की शादी से जुड़ा है, जो भीलवण गाँव में हो रही थी। शादी की तैयारियों के तहत 15 मई को स्थानीय माताजी मंदिर के पास रास-गरबा का आयोजन था, जिसमें डीजे बजाया जा रहा था। परिवार के अनुसार, डीजे की टेस्टिंग चल रही थी तभी हफीजा माणसिया नाम की महिला ने आपत्ति जताई। उसने कहा, “अजान के समय डीजे क्यों बजा रहे हो?” इसके बाद उसने मुस्लिमों की भीड़ इकट्ठी कर ली।

पीड़ितों के अनुसार, हफीजा ने न केवल डीजे बंद करने के लिए कहा, बल्कि जातिसूचक गालियाँ भी दीं। उसने कहा, “यहाँ #$$%^&* (दलितों) के घर कम हैं, फिर भी डीजे बजा रहे हो।” इसके बाद 400-500 लोगों का मुस्लिम टोला इकट्ठा हो गया, जिसमें पुरुष और महिलाएँ दोनों शामिल थे। उन्होंने लोहे की पाइप, लाठियाँ और पत्थरों से हमला बोल दिया। इस हमले में 8 लोग घायल हुए, जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। इस मामले की एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

FIR के मुताबिक, हमलावरों ने न केवल मारपीट की, बल्कि महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और उनकी आबरू लूटने की कोशिश भी की। एक पीड़िता ने बताया कि एक हमलावर ने उसे बाँह पकड़कर छेड़ने की कोशिश की, जबकि दूसरी महिला के गहने छीन लिए गए। परिवार का दावा है कि करीब 4 लाख रुपये के गहने लूटे गए। हमलावरों ने जातिगत गालियाँ दीं और कहा, “ये हिंदू सुधरेंगे नहीं, इनके हाथ-पैर तोड़ दो, इनकी औरतों की इज्जत लूट लो।”

हमलावरों ने यह भी कहा कि दलित परिवार ने मंदिर के सामने रास-गरबा आयोजित करके मुस्लिमों के वर्चस्व को चुनौती दी है। उन्होंने मंदिर के सामने बने मंडप में तोड़फोड़ की और मेहमानों पर हमला किया। हालात इतने बिगड़ गए कि परिवार को अपने घरों में छिपना पड़ा, लेकिन टोला वहाँ भी पहुँच गया और हमले जारी रखे।

डीजे सिर्फ बहाना, मंदिर निर्माण का बदला ले रहे थे मुस्लिम

पीड़ित परिवार का कहना है कि डीजे तो केवल बहाना था। असल विवाद भीलवण गाँव में अनुसूचित जाति के समुदाय द्वारा बनाए जा रहे मंदिर को लेकर है। करीब 15 साल पहले जब अनुसूचित जाति के समाज ने गाँव में माताजी मंदिर बनाने की योजना बनाई, तो मुस्लिम समुदाय ने इसका विरोध किया। मामला कोर्ट तक गया और 15 साल बाद अदालत ने मंदिर निर्माण की अनुमति दी। मौजूदा समय में वो मंदिर निर्माणाधीन है। इस शादी का रास-गरबा उसी मंदिर के सामने आयोजित किया जा रहा था, जिसकी कसक मुस्लिमों के दिलों में थी और उन्होंने पूरे समाज पर हमला कर अपनी भड़ास निकाली।

पीड़िता ने ऑपइंडिया को बताया कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग मंदिर निर्माण से नाराज थे। उन्होंने पहले भी अनुसूचित जाति के परिवार को धमकी भी दी थी कि वे गाँव में मंदिर न बनाएँ और वहाँ से गुजरें नहीं। पीड़ितों का मानना है कि मंदिर को लेकर मुस्लिमों के मन में जो गुस्सा था, इसकी वजह से ये हमला किया गया।

साल 2009 में हुई थी हिंदू की हत्या, इसी गाँव के थे हत्यारे

FIR में दर्ज बयानों के अनुसार, हमलावरों ने 2009 की एक घटना का जिक्र भी किया। उस साल भीलवण गाँव में शिवसेना के तालुका प्रमुख रमेश प्रजापति की हत्या कर दी गई थी। हत्या के दोषी गाँव के ही कुछ मुस्लिम लोग थे। हमलावरों ने धमकी दी, “रमेश प्रजापति को मारने से भी तुम्हें सबक नहीं मिला। तुम्हारे हाथ-पैर तोड़ देंगे।” यह धमकी दर्शाती है कि हमले के पीछे पुरानी रंजिश भी थी।

घटना की सूचना मिलते ही वागडोद पुलिस स्टेशन की टीमें मौके पर पहुँचीं और स्थिति को नियंत्रित किया। रातभर पुलिस ने परिवार को सुरक्षा दी और अगली सुबह पुलिस सुरक्षा में वरघटो निकाला गया। शादी की रस्में पूरी करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

पुलिस ने 14 नामजद आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें हफीजा माणसिया, आसिफ बादरपुरा (गाँव का उपसरपंच), आमीन मढिया, अब्दुल वहीद माणसिया, जावेद मरेडिया, रहीम मढिया, परोड मढिया, टूलियो मढिया, सईद अकबर, मोहम्मद मरेडिया, साबेदा वहीद मढिया, इम्तियाज, अशफाक उमर और मोहम्मद सईद चारोलियाँ शामिल हैं। इसके अलावा 400-500 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई।

वागडोद पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि SC/ST एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। ज्यादातर आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है और पाटण SC/ST सेल इसकी जाँच कर रही है।

पीड़ित परिवार ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि हमलावरों में कई लोग नकाब पहने थे, जिससे उनकी पहचान मुश्किल थी। हमले में बच्चों को भी चोटें आईं। एक महिला ने कहा, “हम शादी का जश्न मना रहे थे, लेकिन हमें अपमानित किया गया, हमारे गहने लूटे गए और हमारी इज्जत पर हमला हुआ।” परिवार ने माँग की है कि सभी दोषियों को सख्त सजा दी जाए।

376 मर्द, 284 औरत… राजस्थान में 1000+ बांग्लादेशी-रोहिंग्या पकड़े गए, प्लेन से भेजे जाएँगे पश्चिम बंगाल: हरियाणा में 237 घुसपैठिए ‘बंगाली’ बनकर काम कर रहे थे

राजस्थान और हरियाणा में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। राजस्थान में 30 अप्रैल 2025 से शुरू हुए विशेष अभियान में अब तक 1,000 से ज्यादा घुसपैठिए पकड़े गए हैं, जबकि हरियाणा के तीन जिलों- नूहँ, झज्जर और हाँसी में 237 बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में लिए गए हैं। इनमें से कई ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुद को भारत का नागरिक बताने की कोशिश की थी। अब घुसपैठियों को खास प्लेन से पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है, जहाँ से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) इन्हें बांग्लादेश और म्यांमार वापस भेजेगा।

राजस्थान में पकड़े गए घुसपैठियों में 341 बच्चे, 284 महिलाएँ और 376 पुरुष शामिल हैं। राजस्थान में सबसे ज्यादा घुसपैठिए सीकर जिले से पकड़े गए हैं, जहाँ 394 लोग हिरासत में हैं। जयपुर (218), अलवर (103), कोटपूतली-बहरोड़ (117) और भिवाड़ी (67) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में घुसपैठिए पकड़े गए।

बनवा लिए थे फर्जी निवास प्रमाण पत्र

जाँच में पता चला कि ये लोग फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और निवास प्रमाण पत्र बनवाकर राजस्थान के मूल निवासी होने का दावा कर रहे थे। कई महिलाएँ घरेलू सहायिका के रूप में काम कर रही थीं, जबकि पुरुष ईंट भट्टों, खान मजदूरी, कबाड़ बीनने और बेलदारी जैसे कामों में लगे थे। कुछ के खिलाफ चोरी और अन्य अपराधों के मामले भी सामने आए हैं।

राजस्थान सरकार ने 8 मई 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर हर जिले में विशेष टास्क फोर्स और होल्डिंग सेंटर बनाए। इन सेंटरों में घुसपैठियों को अस्थायी रूप से रखा जा रहा है। 15 मई 2025 को 148 लोगों का पहला जत्था विशेष विमान से पश्चिम बंगाल भेजा गया। अगले कुछ दिनों में और लोगों को भेजने की तैयारी है। गृह विभाग इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहा है ताकि कोई चूक न हो।

हरियाणा में भी अवैध घुसपैठियों के खिलाफ अभियान

हरियाणा के मेवात इलाके में अब तक 237 से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा जा चुका है। इनमें से नूहँ जिले में पुलिस ने 125 बांग्लादेशियों को पकड़ा, जो बिना वैध दस्तावेजों के ईंट भट्टों पर काम कर रहे थे। झज्जर के भदानी गाँव में 47 और हाँसी में 26 घुसपैठिए हिरासत में लिए गए। 12 मई को भी हाँसी में 39 लोग पकड़े गए थे। इनमें से कई ने खुद को बंगाली मजदूर बताकर भट्टा मालिकों को गुमराह किया था।

पुलिस अब उन मालिकों पर भी कार्रवाई की योजना बना रही है, जो बिना दस्तावेज जाँच के अवैध मजदूरों को काम दे रहे हैं। नूहँ पुलिस ने स्थानीय कारोबारियों से कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराने की अपील की है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ₹40000 करोड़ का खरीदेगा रक्षा सामान: PAF के परखच्चे उड़ाने वाले ब्रह्मोस और स्काल्प क्रूज की बढ़ेगी आपूर्ति, तीनों सेनाओं के पास पहले से अधिक होगा गोला-बारूद

पाकिस्तान के साथ जंग की स्थिति के बीच भारतीय सरकार ने सेना को अधिक मजबूत करने का फैसला लिया है। जहाँ ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तानी वायुसेना को नेस्तनाबूद करने के लिए भारत के अहम मिसाइलों का इस्तमाल किया गया। अब उन्हीं की स्पलाई बढ़ाने के लिए सरकार ने अधिक पैसे दिए हैं। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने आपातकालीन शक्तियों (EP) का इस्तमाल करते हुए सेनाओं के हथियार और गोला बारूद खरीदने के लिए ₹40,000 करोड़ की मंजूरी दी है।

दरअसल, शनिवार (17 मई 2025) को इससे संबंधित बैठक आयोजित की गई, जिसमें रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में बताया गया कि आपातकालीन शक्तियों में सेनाएँ नजर रखने वाले ड्रोन, आत्मघाती (फिदायीन) ड्रोन, लॉन्ग रेंज लूटरिंग म्यूनिशन और तोप, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए गोला बारूद खरीद सकेंगी। इस कदम से पाकिस्तान पर हुए हमलों में इस्तमाल हुई मिसाइलों जैसे ब्रह्मोस और स्काल्प क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति और तेज हो जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन सभी हथियार और उपकरण को खरीदने के लिए समय सीमा तय की गई है। इसके भीतर ही सभी खरीदारी होनी चाहिए। इसमें डिलीवरी के लिए एक साथ के भीतर ही आश्वासन देना होगा। इन शक्तियों का उपयोग केवल तीनों सनाओं के उप अधिकारी द्वारा ही किया जाएगा। साथ ही यह 5वीं बार है, जब सेनाओं को इस तरह की आपातकालीन खरीद के लिए मंजूरी मिली है।

इस खरीद प्रक्रिया में रक्षा मंत्रालय के वित्त सलाहकार भी शामिल होंगे। रक्षा मंत्रालय ने निजी और सरकारी उद्योगों के साथ दूर तक की योजनाओं पर भी बातचीत शुरू कर दी है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड नाम की कंपनी को ड्रोन डिटेक्शन के लिए 10 नए लो-लेवल रडार का ऑर्डर मिलने की संभावना जताई गई हैं। इससे पहले 6 रडारों के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है। इसके अलावा कुछ अन्य ड्रोन निर्माण वाली भारतीय कंपनियों को भी तीनों सेनाओं से बड़ा ऑर्डर मिल सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि नई EP के तहत बजट की 15 प्रतिशत सीमा होगी और अनुबंधों को 40 दिनों के भीतर अंतिम रूप देना होगा। साथ ही EP खरीद वित्तीय सलाहकारों की सहमति से की जाएगी और किसी भी आयात या वैश्विक खरीद के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी।

बता दें कि इससे अतिरिक्त भारत सरकार बजट के आवंटन में अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सेना की धनराशि को बढ़ाने पर भी विचार कर सकती है। यह EP मंजूरी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिली है, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान वायु सेना को भारी नुकसान पहुँचाया है।