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पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने धर्म पूछकर हिंदुओं को गोली मारी, दरभंगा में मजहबी लोगों ने राह चलते हिंदुओं पर धर्म पूछ लाठी-तलवार से किए हमले: 21 पर केस, 4 गिरफ्तार

पहलगाम आतंकी हमले में 22 अप्रैल को हिंदुओं को धर्म पूछकर मौत के घाट उतारा गया और अब बिहार के दरभंगा में धर्म पूछकर हिंदुओं पर हमला करने का मामला सामने आया है। पीड़ितों ने बताया है कि सड़क किनारे खड़े होकर कुछ मजहबी लोगों ने उनसे पहले उनका धर्म पूछा और फिर बाद में उनपर लाठी-डंडा और तलवार से हमला किया।

इस घटना में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की बात सामने आई है और पुलिस द्वारा 4 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पूरी घटना जाले थाना क्षेत्र की है। पीड़ितों की पहचान राजकिशोर यादव, रामसागर यादव, अमित कुमार, सुमित कुमार, रंजीत यादव, ऋतिक यादव, मिथिलेश यादव, लक्ष्मण यादव, सोनू कुमार, दिनेश मांझी के तौर पर हुई है।

पीड़ितों ने बताया कि वो लोग 6 मई को शाम 7 बजे बहेड़ा पोखर के पास मुस्लिम समुदाय के युवक लाठी, भाला, तलवार, रॉड और पिस्टल लेकर खड़े थे। जैसे ही वो लोग उस रास्ते से गुजरे वहाँ उनसे पहले उनका धर्म पूछा गया और फिर जानलेवा हमला कर दिया गया।

घायलों में एक अमित कुमार भी हैं। अमित ने बताया कि उन लोगों ने पहले धर्म पूछा और जैसे ही हमने खुद को हिंदू बताया, उन लोगों ने हमला कर दिया। वो लोग बस हिंदुओं को मार रहे थे।

वहीं, धर्म पूछकर निशाना बनाने वाली जानकारी स्थानीयों ने भी दी है। साफ बताया गया है कि मुस्लिम युवक धर्म पूछ-पूछकर हिंदुओं को निशाना बना रहे थे।

घटना में कुल 11 लोग घायल हुए हैं। इनमें एक इन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाले में भर्ती कराया गया है। कुछ लोगों की हालत गंभीर है। वहीं कुछ को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।

घटना के संबंध में लक्ष्मण कुमार यादव, मनोज कुमार यादव, सोनू यादव, दिनेश यादव, संजय यादव ने थाने में शिकायत दी है।

एफआईआर में 21 आरोपितों का नाम दिया गया है। इनमें कुरबान कुरैशी इरफान कुरैशी, सलमान इब्रान कुरैशी, पप्पू कुरैशी, मेराज, रेयाज, आसिफ, इम्तियाज, सरफरराज, एजाज, शहनवाज, दर्जी रिजवान के नाम हैं।

इस पूरे मामले में बता दें कि ये भी कहा जा रहा है कि ये विवाद स्कूटी में टक्कर लगने के बाद शुरू हुआ। टक्कर ऋतिक और दर्जी नूर आलम की बेटे की स्कूटी के बीच हुई थी। ऋतिक ने जब नुकसान का मुआवजा माँगा तो नूर का बेटा आनाकानी करने लगा। ऋतिक ने स्कूटी अपने पास रख ली और कहा स्कूटी अगले दिन मिलेगी।

इसके बाद दोनों को समझाया गया और मामला शांत कराकर उन्हें वापस भेज दिया गया। लेकिन, अगले दिन मुस्लिम भीड़ इकट्ठा हुई और फिर हिंदुओं को निशाना बनाने लगी।

पुलिस कार्रवाई की बात करें तो यही पता चला है कि इस केस में 4 लोग गिरफ्तार हुए हैं और आगे की कार्रवाई के लिए जाँच जारी है। पूरे मामले में पुलिस ने शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना परिसर में शांति समिति की बैठक कराई। थानाध्यक्ष ने बताया कि अन्य आरोपितों की तलाश के लिए छापेमारी जारी है।

सिद्धार्थनगर में 1990 में थे 16 मदरसे, 2023 आते-आते हो गए 597: खाड़ी देशों से आ रहा धड़ाधड़ पैसा, नेपाल बॉर्डर पर अब योगी सरकार का चल रहा ‘समतल अभियान’

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार नेपाल सीमा पर बने अवैध मस्जिद-मदरसों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। उत्तर प्रदेश और नेपाल के बीच 7 जिलों की 570 किलोमीटर की सीमा पर रोज अवैध ढाँचे समतल किए जा रहे हैं। महराजगंज से लेकर सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी में इन कब्जों को चिन्हित किया जा रहा है। बीते लगभग एक माह में सैकड़ों ऐसे अवैध ढाँचे गिराए गए हैं।

सिद्धार्थनगर में तेजी से हो रही कार्रवाई

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट बताती है कि सिद्धार्थनगर जिले में वर्ष 1990 में केवल 16 मान्यता प्राप्त मदरसे थे। यह साल 2000 तक बढ़कर 147 हो गए, लेकिन तब इनमें से केवल 45 को ही सरकारी मान्यता मिली थी। यह आँकड़ा 2023 तक बढ़ते-बढ़ते यह संख्या 597 तक पहुँच गई। इनमें से 452 ही रजिस्टर्ड हैं जबकि 145 मदरसे अभी भी गैर-मान्यता प्राप्त हैं।

सबसे अधिक मदरसे सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज तहसील में हैं। यहाँ 152 मदरसे संचालित हो रहे हैं जबकि इटवा तहसील में 134, नौगढ़ तहसील में 119 और शोहरतगढ़ तहसील में 102 और बांसी तहसील में 90 मदरसों का संचालन हो रहा है।

यहाँ सिर्फ मदरसों की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि इन पर कई गंभीर आरोप भी हैं। कुछ मदरसों में नकली नोट छापने जैसी गतिविधियों के सबूत मिले हैं। इसके साथ ही, इन संस्थानों को विदेश से फंडिंग मिलने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे मामलों को देखते हुए प्रशासन को कई जगहों पर अवैध मदरसों पर कार्रवाई की है।

सिद्धार्थनगर में योगी सरकार ने 17 अवैध मदरसे चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा 4 अवैध मजहबी स्थल भी चिन्हित किए गए हैं। इन पर भी कार्रवाई जारी है। इनमें से कई पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है। इनके अलावा कई मजहबी स्थल भी हैं।

सबसे बड़ी कार्रवाई श्रावस्ती में

श्रावस्ती जिला भी नेपाल से लम्बी सीमा साझा करता है। यहाँ प्रशासन सबसे अधिक सख्त है। यहाँ बीते कुछ वर्षों में तेजी से मस्जिद-मदरसे बढ़े हैं। इस बढ़ोतरी को लेकर सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने गंभीर चिंता जताई है और इसे संभावित डेमोग्राफिक बदलाव का संकेत बताया है।

SSB अधिकारियों के अनुसार, इन इलाकों में 15 किलोमीटर के दायरे में मजहबी संरचनाओं की संख्या में 26% तक का इजाफा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2018 में इन सीमावर्ती इलाकों में कुल 738 मस्जिदें थीं, जो 2021 तक बढ़कर 1000 हो गईं। वहीं, मदरसों की संख्या 500 से बढ़कर 645 हो गई है।

श्रावस्ती में प्रशासन अब सख्त हो गया है। श्रावस्ती में योगी सरकार ने 100 से अधिक मदरसे सील कर दिए हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि श्रावस्ती में लगभग आधे दर्जन मदरसे गिराए भी जा चुके हैं। कई जगह मजारों पर भी कार्रवाई हुई है।

बहराइच में भी मदरसे सील, कब्जे खाली

बहराइच जिले की नेपाल सीमा के आसपास भी उत्तर प्रदेश सरकार कार्रवाई कर रही है। यहाँ 24 अवैध मदरसे चिन्हित किए गए हैं जिनमे से 9 को सील कर दिया गया है। इन पर बुलडोजर कार्रवाई भी चालू हो गई है। बहराइच में 384 अतिक्रमण के मामले चिन्हित किए गए हैं। इनमें से कुल 89 कब्जे ध्वस्त किए जा चुके हैं। आगे और भी ऐसे ही कब्जों पर कार्रवाई चल रही है।

बहराइच में नेपाल सीमा के पास बड़ी संख्या में बीते वर्षों में कई अवैध ढाँचे बन गए थे। इनसे डेमोग्राफी चेंज का खतरा भी बढ़ा है। इसके बाद योगी सरकार ने चिन्हित करना चालू किया था। अब इन पर सिलसिलेवार ढंग से कार्रवाई चालू हो गई है।

बलरामपुर जिले में भी 25 मदरसों पर कार्रवाई

बलरामपुर जिले में भी योगी सरकार ने 25 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे ढूंढ निकाले हैं। इनमें से 23 को सील कर दिया गया है। बाकी 2 मदरसों को नोटिस जारी किए गए हैं। कई लोग कार्रवाई के डर से अपने अवैध कब्जे खुद ही हटा लिए हैं। बलरामपुर जिले में बाकी ढाँचे भी तोड़े जा रहे हैं।

बलरामपुर जिले से नेपाल जिले की खुली सीमा है। इस जिले में जंगल का इलाका भी है। बीते कुछ वर्षों में तेजी से इन इलाकों में मस्जिद-मदरसे बढे थे। जहाँ पहले कोई नहीं रहता था, वहाँ भी मुस्लिम आबादी दिखने लगी थी। इस तेजी से होते बदलाव को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता भी जताई है।

इनके अलावा महाराजगंज, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में भी दर्जनों मदरसे सील किए गए हैं। इन पर प्रशासन बुलडोजर कार्रवाई कर रहा है। इसकी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी जा रही है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से नेपाल सीमा के 15 किलोमीटर के इलाके तक हो रही है।

नेपाल सीमा से सटे इन जिलों में मजहबी ढांचे और मदरसों की तेजी से बढ़ती संख्या न केवल सामाजिक संतुलन के लिए चुनौती बन रही है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय है। 2023 में पुलिस की जाँच में सामने आया था कि इन जिलों में मस्जिद -मदरसे बनाने के लिए ₹150 करोड़ की फंडिंग खाड़ी देशों से आई थी।

उत्तराखंड के नेपाल सीमा वाले जिले भी प्रभावित

नेपाल सीमा से लगे सिर्फ उत्तर प्रदेश के ही नहीं बल्कि उत्तराखंड के जिले भी प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में भी मुस्लिम आबादी में 2.5 गुना इजाफा हुआ है। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर, चम्पावत और पिथौरागढ़ जिलों को गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। खास तौर पर पिथौरगढ़ के धारचूला और जौलजीवी कस्बों को अतिसंवेदनशील घोषित किया गया है।

उत्तराखंड में बनबसा और टनकपुर जैसे इलाकों से नेपाल में काफी आवाजाही होती है। इस आवाजाही पर कोई विशेष रोकटोक नहीं रही है। यह दोनों बॉर्डर चम्पावत जिले हैं। चम्पावत की सीमा उत्तराखंड के US नगर और उत्तर प्रदेश के पीलीभीत-बरेली जैसे जिलों से मिलती है। यहाँ बड़ी मुस्लिम आबादी है।

मुस्लिम पट्टी बसाने की है योजना

इन बढ़ती गतिविधियों को लेकर बीते वर्ष दैनिक जागरण में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उत्तर भारत में एक ‘मुस्लिम पट्टी‘ बनाने की साजिश चल रही है, जिसमें पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्य शामिल होंगे।

यह पट्टी बांग्लादेश से सटे पश्चिम बंगाल से शुरू होकर पाकिस्तान तक जाएगी। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि असम में घुसपैठियों के खिलाफ हुए आंदोलनों के बाद कई मुस्लिमों को इस संभावित ‘पट्टी’ में बसाने की रणनीति अपनाई गई है।

ऐसे में भारत के लिए यह सीमावर्ती क्षेत्र रणनीतिक और सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बन गया है। नेपाल से लगे यूपी और उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों और मदरसों की संख्या में वृद्धि, मुस्लिम आबादी में इजाफा और पड़ोसी देशों की संदिग्ध गतिविधियाँ इन सभी कारकों ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को बढ़ा दिया है।

‘ग्लोबल टाइम्स’ को भारतीय दूतावास ने लताड़ा, DW और Bloomberg ने चलाया पाकिस्तानी प्रोपेगंडा: इस्लामी आतंकियों को आतंकवाद कहने में फिर झिझका विदेशी मीडिया

पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकी हमला होता है, जिसमें 26 निर्दोष लोगों को उनका धर्म पूछ-पूछकर मार डाला जाता है। इसके बाद विदेशी मीडिया उन आतंकवादियों के लिए ‘बंदूकधारी’ और ‘बाग़ी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करता है। फिर इस घटना के 13 दिन बाद भारत पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों पर हमला कर उन संरचनाओं को तबाह कर देता है, जहाँ वर्षों से भारत की धरती पर ख़ून बहाने की साजिशें रची जा रही थीं। इनमें मसूद अजहर के ठिकाने भी शामिल थे, जिसे छुड़ाने के लिए 1999 में एक भारतीय विमान को हाईजैक करके कंधार ले जाया गया था।

जर्मनी के DW को फिर आतंकी को आतंकी कहने में आई शर्म

अब विदेशी मीडिया का वही धड़ा एक बार फिर से भारत के विरुद्ध प्रपंच फैलाने में लग गया है। अब जर्मन मीडिया संस्थान DW को ही ले लीजिए। वो अपने शीर्षक में लिखता है, “भारत ने कहा कि उसने पाकिस्तान में ‘आतंकी’ ठिकानों को निशाना बनाया”। यानी, एक बार फिर से उसने आतंकी को आतंकी कहने में हिचक दिखाई है। जिस शख्स को छुड़ाने के लिए विमान हाईजैक कर लिया जाता है, वो आतंकी नहीं? साथ ही इस ख़बर में उसने पाकिस्तानी एजेंडा चलाते हुए कहा है कि भारत ने नागरिकों को निशाना बनाया।

DW ने पाकिस्तान के एजेंडे को आगे बढ़ाया

जबकि भारत स्पष्ट कर चुका है कि उसने न नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है और न ही सैन्य ठिकानों को। साथ ही इसे DW द्वारा ‘तथाकथित ऑपेरशन सिंदूर’ नाम दिया गया। सबसे पहले उसके वीडियो में यही कहा गया कि पाकिस्तान ने 26 नागरिकों के मारे जाने की बात कही है। साथ ही इसकी दिल्ली ब्यूरो चीफ सैंड्रा पीटर्समैंन ने कहा कि भारत के प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछने की अनुमति नहीं थी। साथ ही लश्कर-ए-तैय्यबा को सीधे आतंकी संगठन कहने की बजाए घुमा-फिर कर उन्होंने कहा कि ये एक ‘समूह’ है जिसे UN ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है।

ब्लूमबर्ग ने बिना तथ्य जाँचे चलाया पाकिस्तानी एजेंडा

ब्लूमबर्ग भी पीछे नहीं रहा। उसने ख़बर चला दी कि पाकिस्तान ने भारत के 5 लड़ाकू विमानों को मार गिराया गया है। ये विशुद्ध रूप से पाकिस्तान का एजेंडा था। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री तक से जब इसके सबूत माँगे गए तो उन्होंने कह दिया कि सोशल मीडिया पर देखकर उन्होने ये दावा किया है।

फिर भी, बिना पुष्टि किए Bloomberg ने इस ख़बर को चला दिया। जब भारत के विमानों ने सीमा पार किया ही नहीं, फिर कैसे ये संभव हो सकता है कि पाकिस्तान ने उन्हें मार गिराया हो। इस तरह ब्लूमबर्ग ने ख्वाजा मोहम्मद आसिफ के बयान का फैक्ट-चेक करने की भी जहमत नहीं उठाई।

भारतीय दूतावास ने चीन के ‘ग्लोबल टाइम्स’ को लताड़ा

वहीं चीन के प्रोपेगंडा पोर्टल ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने तो ऐसा झूठ चलाया कि भारतीय दूतावास को इसका खंडन करना पड़ा। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने उसे चेताया कि भ्रामक ख़बरों को प्रकाशित करने से पहले वो कम से कम तथ्यों की जाँच कर ले या उनकी पुष्टि तो कर ले। ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एक तस्वीर पोस्ट करके दावा किया था कि पाकिस्तान ने भारत के 3 लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। उसने कुछ ऐसे झूठ फैलाया कि ‘X’ को उसके पोस्ट पर ‘कम्युनिटी पोस्ट’ में नोट डालकर सही करना पड़ा।

‘ग्लोबल टाइम्स’ की पोस्ट के नीचे लगाए गए नोट में स्पष्ट कहा गया है कि ख़ुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ ने कहा है कि भारतीय विमानों ने सीमा पार नहीं किया, फिर उन्हें मार गिराने की बात ही झूठी है। साथ ही ये भी कहा गया कि पाकिस्तान TV चैनलों ने पाकिस्तान में स्ट्राइक की पुष्टि की है। नोट में बताया गया कि ‘ग्लोबल टाइम्स’ के दावे की पुष्टि का कोई आधार नहीं है। असल में कई पाकिस्तानी हैंडल ये झूठ फैला रहे थे, जिसे उठाकर चीन के मीडिया संस्थान ने प्रकाशित कर दिया।

जिस ‘सालार गाजी’ ने की थी सोमनाथ में लूटपाट, हिंदुओं को उतारा था मौत के घाट… बहराइच में नहीं लगेगा अब उसके नाम से मेला: योगी सरकार का फैसला, HC ने भी राहत देने से किया मना

उत्तर प्रदेश के बहराइच में इस्लामी आक्रान्ता सैयद सलार मसूद गाजी की दरगाह पर होने वाले जेठ मेला को लेकर अनुमति देने से प्रशासन ने मना कर दिया है। इसके विरोध में इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुँची मस्जिद कमिटी को भी कोई राहत नहीं मिली है। इस मेले में लाखों की भीड़ हर साल जुटा करती थी। इससे पहले उत्तर प्रदेश के संभल में सालार मसूद के नाम पर होने वाले मेले को भी अनुमति देने से प्रशासन ने इनकार कर दिया था।

क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश के बहराइच में इस्लामी आक्रान्ता सालार मसूद की बड़ी दरगाह है। यहीं पर उसे वीर हिन्दू राजा सुहेलदेव ने मौत के घाट उतार दिया था। सालार मसूद की इसी दरगाह पर प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ महीने (मई-जून) में एक बड़ा मेला लगता आया है। यह मेला एक महीने चलता है। इस मेले में लगभग 15 लाख लोग शामिल होते रहे हैं।

इस मेले में इस एक महीने के भीतर हर शनिवार को सालार मसूद की बारात देश-विदेश के अलग-अलग हिस्से से जायरीन लाते हैं और रविवार को दरगाह पर जाते हैं। इसके बाद वह सोमवार को लौटते हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ऐसी लगभग 200 प्रतीकात्मक बारातें आक्रान्ता सालार मसूद की दरगाह पर लाई जाती हैं।

कई और भी दरगाहों से यहाँ आक्रान्ता मसूद की बारात आती है। इन बारातों में मुस्लिम शेरवानी, पलंग और शादी से जुड़ा और भी सामान लाते हैं। यहाँ आने से पहले लोग बाराबंकी में स्थित एक बूढ़े बाबा की मजार पर जाते हैं जो असल में सालार मसूद के बाप की मजार है। उसका नाम सैयद सालार साहू गाजी उर्फ बूढ़े बाबा की दरगाह है।

हिन्दू संगठन इस मेले का लगातार विरोध करते आए हैं। हिन्दू संगठन इस मेले के दौरान पास में ही महाराजा सुहेलदेव के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित करते हैं। वह इस दौरान हिन्दुओं को इस आक्रान्ता की सच्चाई से भी अवगत करवाते हैं। हिन्दू संगठन माँग करते आए हैं कि इस मेले पर रोक लगाई जाए।

प्रशासन ने नहीं दी अनुमति

2025 में भी दरगाह वालों ने मेले का आयोजन करने का प्लान बनाया था। हालाँकि, हिन्दू संगठनों के विरोध और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इससे मना कर दिया। प्रशासन ने हवाला दिया कि संभल में पहले ही एक ऐसे ही मेले की अनुमति नहीं दी गई थी और यहाँ भी विरोध चल रहा है।

बहराइच प्रशासन ने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोग भी इस मेले के आयोजन के पक्ष में नहीं हैं। उसने हाल ही में हुई हिंसक घटनाओं के विषय में भी जानकारी देते हुए मेले ना करवाने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने इसे कानून व्यवस्था के लिए एक समस्या बताया है। इसी के चलते दरगाह कमिटी को इसकी अनुमति नहीं दी गई।

हाई कोर्ट से भी झटका

प्रशासन के इनकार करने के बाद बाद दरगाह कमिटी इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुँची थी। इस मामले पर बुधवार (7 मई, 2025) को इस मामले में सुनवाई हुई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में दरगाह कमिटी को अंतरिम तौर पर राहत देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि वह अब सब पक्षों को सुनने के बाद ही कोई आदेश देगा।

अब इस मामले में 12 मई, 2025 को सुनवाई होगी। हाई कोर्ट में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि दरगाह कमिटी ने उनसे कोई अनुमति नहीं माँगी बल्कि सिर्फ सुरक्षा इंतजाम करने को ही कहा। प्रशासन ने स्पष्ट तौर पर बताया कि स्थिति को देखते हुए वह आयोजन करवाने में अभी सक्षम नहीं है।

प्रशासन ने कहा, “दरगाह परिसर के अंदर मजहबी गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है… जिस चीज को अनुमति नहीं दी गई है, वह है दरगाह परिसर के बाहर मेला आयोजित करने की अनुमति, जिसमें मुख्य रूप से व्यावसायिक गतिविधियाँ शामिल हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उसने किसी भी संवैधानिक या कानूनी अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया है।

इससे पहले संभल में मार्च, 2025 में संभल में आयोजित होने वाले नेजा मेला को भी अनुमति नहीं दी गई थी। यह मेला भी सालार मसूद गाजी के लिए होता था। इसकी अनुमति माँगने पर ASP श्रीश चन्द्र दीक्षित भड़क गए थे और स्पष्ट किया था कि आक्रान्ताओं की याद में लगने वाले किसी मेले को अनुमति नहीं दी जाएगी।

कौन था सैयद सालार मसूद गाजी

सैयद सालार मसूद गाजी का जन्म 11वीं सदी में सन 1014 ईस्वी में राजस्थान के अजमेर में हुआ था। हालाँकि, सालार के जन्म को लेकर भी संशय है और इतिहासकारों में एकमत नहीं है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सालार का जन्म अफगानिस्तान में हुआ था और वह महमूद गजनवी के साथ भारत आया था। खैर, उसका जन्म जहाँ कहीं भी हुआ हो, लेकिन वह बेहद ही क्रूर और हिंदुओं से नफरत करने वाला था।

यह प्रमाणित सत्य है कि अफगानिस्तान के गजनी के शासक महमूद गजनवी का भाँजा था। इसके साथ ही वह गजनवी के सेना का सेनापति भी था। यह वहीं गजनवी है, जिसने सबसे पहले सन 1001 में भारत पर हमला किया था। इसके बाद उसने एक-के-बाद एक करके लगातार 17 बार हमले किए और भारत के सोमनाथ मंदिर सहित भारत के कई मंदिरों को लूटा और उन्हें ध्वस्त कर दिया था।

सन 1930 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से छपी ‘द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ सुल्तान महमूद ऑफ गाजना’ नाम की पुस्तक में इतिहासकार मोहम्मद नाजिम ने इसके बारे में बताया है। उन्होंने लिखा है कि वह गजनी के नेतृत्व में सन 1026 ईस्वी में सैयद सालार मसूद गाजी ने सबसे बड़ा हमला सोमनाथ मंदिर पर किया था। रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों, रियासतों और हिंदुओं का नरसंहार करता आया।

‘अनवार-ए-मसऊदी’ नाम की अपनी किताब में बहराइच के रहने वाले और इतिहासकार मौलाना मोहम्मद अली मसऊदी ने लिखा है कि सोमनाथ और आसपास की रियासतों पर लूटने-पाटने केबाद सैयद सालार गाजी आगे बढ़ा। वह 1030 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के सतरिख पहुँचा। वहाँ से वह श्रावस्ती पहुँचा और वहाँ के राजा सुहेलदेव से उसका मुकाबला हुआ।

सन 1034 ईस्वी में बहराइच जिला मुख्यालय के पास सालार मसूद का मुकाबला महाराजा सुहेलदेव से हुआ। कहा जाता है कि महाराजा सुहेलदेव ने 21 अन्य छोटे-बड़े राजाओं के साथ मिलकर उसका सामना किया और आखिरकार इस गाजी का उपाधि धारण करने वाले इस आक्रांता को मार गिराया। इसके बाद स्थानीय मुस्लिमों ने उसके शव को दफना दिया।

इसके बाद उस जगह पर मेला लगने लगा जिसे अब रोक दिया गया है।

कितनों से भी हों महिला के संबंध… गैंगरेप-गैंगरेप होता है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने वसीम खान और कादिर शेख को सुनाई 20 साल की सजा, पहले मिली थी उम्रकैद

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2014 के गैंगरेप मामले में दोषी वसीम खान और कादिर शेख की सजा बरकरार रखा है। बुधवार (7 मई 2025) को बॉम्बे हाइकोर्ट ने कहा कि एक महिला का चरित्र इस बात पर निर्भर नहीं करता कि उसके कितने लोगों से संबंध हैं। अगर उसने संबंधों के लिए न बोला तो इसका मतलब न ही है। उसकी तथाकथित किसी भी तरह की अनैतिक गतिविधियों के आधार पर न को हाँ नहीं कहा जा सकता।

बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस नितिन सूर्यवंशी और जस्टिस एम डब्ल्यू चंदवानी की खंडपीठ ने वसीम खान और कादिर शेख के साथ और एक नाबालिग किशोर को महिला के साथ गैंगरेप करने के मामले में सजा सुनाई। आरोपितों ने लोअर कोर्ट में मिली सजा को चुनौती दी थी। सत्र न्यायालय ने गैंगरेप के लिए आईपीसी की धारा 376 डी के तहत दोषियों को सजा सुनाई थी।

महिला अपने पति को तलाक दिए बिना दिनेश नाम के व्यक्ति के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रही थी। आरोपित वसीम ने कोर्ट में कहा कि शादीशुदा होने के बावजूद वह दिनेश के साथ रहने चली गई जिसकी वजह से उसका पारिवारिक जीवन प्रभावित हुआ।

इस पूरे मामले पर बॉम्बे हाइकोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि किसी भी महिला के साथ उसकी सहमति के बिना या जबरदस्ती दुष्कर्म करना अपराध है। बलात्कार को केवल यौन अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता बल्कि इसे आक्रामकता से जुड़ा अपराध भी मानना चाहिए क्योंकि यह महिला की निजता के अधिकार का हनन है।

कोर्ट में जजों ने कहा एक महिला यदि किसी पुरुष के साथ यौन संबंधों की सहमति देती है तो इसका मतलब यह नहीं है कि पुरुष कभी भी महिला के साथ यौन संबंधों के लिए तैयार हो जाए। यह माहिला की सहमति पर निर्भर है।

लोअर कोर्ट ने वसीम और कादिर को कठोर कारावास के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसे हाईकोर्ट ने 20 साल के सश्रम कारावास में बदल दिया।

क्या था मामला

गैंगरेप पीड़िता पति से अलग एक अन्य व्यक्ति के साथ किराए के कमरे में रह रही थी। 5 नवंबर 2014 को वसीम, कादिर और एक नाबालिग अपराधी घर में घुसे। पीड़िता को संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। साथ ही उसे हिंदू व्यक्ति दिनेश के साथ संबंधों पर आपत्ति जताई।

पीड़िता और दिनेश ने जब इसका विरोध किया तो वसीम और कादिर ने दिनेश और पीड़िता पर हमला किया। दिनेश को जबरदस्ती शराब पिलाकर रेलवे ट्रैक पर फेंकने की कोशिश भी की लेकिन वह नशे में होने के बावजूद बचकर भाग निकला। इसके बाद तीनों आरोपियों ने पीड़िता को जंगल ले जाकर बारी-बारी से उसके साथ रेप किया।

तिलक-कलावा हटाने को कह रहा था मदर टेरेसा नर्सिंग कॉलेज, विरोध में पहुँचे हिन्दू कार्यकर्ता तो मुस्लिम लड़की ने लगाया ‘अल्लाह हू अकबर’ का नारा: हो गई निलंबित, सहारनपुर का मामला

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक नर्सिंग कॉलेज में हिन्दू छात्रों से कलावा उतारने और तिलक ना लगाने को कहा गया। ऐसा करने पर छात्रों को परेशान भी किया गया। इस शिकायत पर हिन्दू संगठन पहुँचे तो कॉलेज प्रशासन ने गलती नहीं मानी। इसी बीच एक मुस्लिम छात्रा ने इस्लामी नारे लगाने चालू कर दिया और वहाँ मौजूद लोगों को भड़काया। मामले में मुस्लिम छात्रा को कॉलेज ने निष्कासित किया है और उससे स्पष्टीकरण तलब किया है।

यह पूरा वाकया बुधवार (7 मई, 2025) का है। सहारनपुर की दिल्ली रोड स्थित स्थित मदर टेरेसा कॉलेज में कुछ हिन्दू छात्रों को लगातार परेशान किया जा रहा था। यहाँ आने वाले छात्रों को कॉलेज का स्टाफ तिलक लगाने को लगातार मना करता था। कलावा बाँधने को लेकर भी परेशान किया जाता था एक छात्र पर तिलक लगाने के लिए कार्रवाई भी की गई थी।

पीड़ित छात्र की माँ ने इस संबंध में बात भी की थी। मामले की सूचना के बजरंग दल और अन्य हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता मदर टेरेसा कॉलेज पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने पीड़ित छात्र के साथ न्याय की माँग की। उन्होंने कॉलेज स्टाफ को स्पष्ट तौर पर कहा कि वह हिन्दू छात्र-छात्राओं को परेशान ना करें।

यहाँ इस बातचीत के बीच हिन्दू कार्यकर्ताओं को देख कर एक मुस्लिम छात्रा भड़क गई। उसने यहाँ ‘अल्लाह-हू-अकबर’ और बाकी इस्लामी नारे लगाने चालू कर दिए। उसने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को भड़काना चालू कर दिया। मुस्लिम छात्रा ने कई बार यहाँ यह नारे लगाए। उसका नाम महविश राव है।

इस दौरान घटनास्थल पर मौजूद हिन्दू कार्यकर्ता नाराज हो गए और उन्होंने प्रदर्शन करना चालू कर दिया। उन्होंने इस छात्रा को निलंबित करने की माँग की। ऑपइंडिया ने इस मामले में प्रदर्शन नेतृत्व कर रहे बजरंग दल के पदाधिकारी हरीश कौशिक से बात की।

उन्होंने बताया, “हम तो तिलक ना लगाने देने की शिकायत को लेकर मदर टेरेसा कॉलेज गए थे। हम कॉलेज में स्टाफ से बात कर रहे थे। वहाँ मौजूद मुस्लिम लड़की से इसका कोई लेना-देना नहीं था। वह आकर जबरदस्ती इस्लामी नारे लगाने लगी। इस पर हमारे कार्यकर्ता नाराज हो गए और उसके निलंबन की माँग की।”

बजरंग दल के विरोध प्रदर्शन के बाद कॉलेज प्रशासन ने महविश राव को निलंबित कर दिया। कॉलेज प्रशासन ने इस विषय में स्पष्टीकरण भी महविश से माँगा है। कॉलेज ने चेतावनी दी है कि अगर महविश ने स्पष्टीकरण नहीं दिया तो उसके खिलाफ और भी कार्रवाई की जाएगी। ऑपइंडिया के पास कॉलेज की कार्रवाई का पत्र मौजूद है।

हिन्दू कार्यकर्ताओं ने कॉलेज में तिलक लगाने वाले छात्रों पर की गई करवाई को भी वापस करवा लिया। मामले में पुलिस ने भी संज्ञान लिया है। पुलिस ने कॉलेज पहुँच कर हिन्दू कार्यकर्ताओं को समझाया बुझाया है और विवाद को शांत करवाया है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने दी ‘परमाणु युद्ध’ की गीदड़भभकी, PM शहबाज शरीफ ने सेना पर बोला झूठ: रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा- इंडिया के सैन्य ठिकानों को बनाएँगे निशाना

पाकिस्तान ने माना है कि ऑपरेशन सिंदूर में उसके 26 लोग मारे गए हैं और 40 से ज्यादा घायल हैं। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने भारत को ‘भारी कीमत चुकाने’ की धमकी दी है। शहबाज शरीफ ने कहा “भारत ने जो गलती पिछली रात (7 मई) की, उसे इसकी कीमत चुकानी होगी” पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भारत की सेना सीमा के अंदर घुसने की कोशिश की थी लेकिन उसे कुछ ही घंटों के भीतर खदेड़ दिया गया।

पाकिस्तान का बड़बोलापन

पाकिस्तानी पीएम के बड़बोलेपन को मात देते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने और भी ज्यादा बड़ा दावा कर दिया। उनका कहना है कि अगर भारत-पाकिस्तान के बीच गतिरोध ज्यादा लंबा चला तो परमाणु युद्ध की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान न्यूज चैनल जियो न्यूज को दिये एक साक्षात्कार में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान सिर्फ भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा।

पाकिस्तान ने फैलाई अफवाह

इस बीच पाकिस्तान ने 8 मई को फिर गुजरांवाला में ड्रोन अटैक की अफवाह फैलाई है। पाकिस्तान के अधिकारी ने एक और झूठ बोलते हुए कहा है कि एक दिन पहले यानी 7 मई को फाइटर से जंग हुई थी यानी पाकिस्तानी सेना ने भारत का मुकाबला किया। जबकि भारत ने जो अटैक पाकिस्तान स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर किया उस पर पाकिस्तानी फौज सकते में आ गई और कुछ नहीं कर पाई।

पंजाब के कई शहरों में छाया अँधेरा

इस बीच भारत में पाक से लगे सीमा क्षेत्रों पर अलर्ट जारी है। बुधवार देर रात पंजाब के अमृतसर, जालंधर, लुधियाना जैसे शहरों में ब्लैक आउट हुआ। अमृतसर में तीन धमाके सुनाई दिए और फिर ब्लैक आउट हो गया। यहाँ लोगों को घरों में ही रहने के आदेश दिए गये हैं। एयरपोर्ट खाली करा दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक अमृतसर में रात करीब 2 बजे धमाके सुनाई दिए जिसके बाद ब्लैक आउट हो गया। प्रशासन ने लोगों को संयम बरतने की अपील की है। 7 मई को भी पंजाब के गुरदासपुर में धमाके हुए थे और लोग डर के कारण घरों में दुबक गए थे। ये धमाका खेत में हुआ था।

जिस भारत ने दी पहचान, उसी से घृणा दिखा रहीं मंदाना करीमी: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बिलबिला कर निकल रहे ‘पैरासाइट’, खाएँगे यहाँ का पर हिन्दू घृणा में गाएँगे पाकिस्तान का

मई 2019 में एक कोरियन फ़िल्म आई थी, जिसका अंग्रेजी शीर्षक था – ‘पैरासाइट’। जिन्होंने प्राथमिक स्तर की भी शिक्षा ली है, वो Parasite का अर्थ जानते हैं। ऐसे जीवाणु जो किसी अन्य जीव के शरीर में रहते हैं और उसी शरीर से न्यूट्रिएंट्स ग्रहण कर उसे नुकसान पहुँचाते हैं, वो होते हैं पैरासाइट्स – रोगाणु या विषाणु। मानव शरीर में रहकर दाना-पानी पाते हैं, फिर उसे रोगी बना देते हैं। हिंदी में एक कहावत भी है – जिस थाली में खाना, उसी थाली में छेद करना। ये सब गद्दारी के लक्षण हैं।

‘पैरासाइट’ फ़िल्म, पहलगाम आतंकी हमला और ‘ऑपरेशन सिंदूर’

92वें एकेडमी अवॉर्ड्स समरोह के दौरान ‘पैरासाइट्स’ को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का ऑस्कर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था। फ़िल्म की कहानी एक ऐसे युवक की है, जो एक अमीर परिवार में नौकरी करने के लिए हायर किया जाता है। बाद में उसके पिता, माँ और बहन सभी उस परिवार में किसी न किसी रूप में नौकरी कर रहे होते हैं। किम इंग्लिश ट्यूटर, उसकी बहन आर्ट थेरेपिस्ट, इनके पिता ड्राइवर और इनकी माँ हाउसकीपर बनकर उस परिवार में नौकरी कर रहे होते हैं। चारों एक-दूसरे को न जानने का दिखावा भी करते हैं।

खैर, ये तो थी फिल्म की कहानी। अब आते हैं वास्तविकता पर। 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान पोषित आतंकियों ने 26 पर्यटकों को निशाना बनाया। धर्म पूछ-पूछकर हिन्दुओं को मारा गया। पैंट खोल-खोलकर चेक किया गया कि खतना हुआ है या नहीं। घटना के 13 दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के 9 ठिकानों पर हमला कर आतंकियों को नेस्तनाबूत किया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत उन महिलाओं के सिंदूर उजाड़ने का बदला लिया गया, जिनके पतियों को मारने के बाद आतंकियों ने कहा था – “मोदी को जाकर बता देना।”

भारत ने किसी भी नागरिक ठिकानों रिहायशी इलाक़ों को निशाना नहीं बनाया, केवल उन्हीं आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया जिन्होंने 2001 में दिल्ली के संसद भवन से लेकर 2016 में पठानकोट, 2019 में पुलवामा और 2025 में पहलगाम को दहलाया। मौलाना मसूद अज़हर के परिवार के 14 लोग मारे गए। इसी मसूद अज़हर को छुड़ाने के लिए आतंकियों ने 1999 में एक पूरा का पूरा विमान हाईजैक कर लिया था। इस तरह की कार्रवाई से कोई भारतीय ख़ुश ही होगा।

लेकिन, कुछ ऐसे लोग हैं जो इससे दुःखी हैं। कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी ने तंज कसने के अंदाज़ में पूछा कि क्या चुन-चुनकर आतंकियों को निशाना बनाया गया है। इसी तरह कॉन्ग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने दावा कर दिया कि इससे पहले जो सर्जिकल व एयर स्ट्राइक्स हुई थीं उनसे भारत की दुनिया भर में खिल्ली उड़ी, केवल चील-कौवे ही मरे। जब कॉन्ग्रेस नेता मीडिया के सामने आए तो उनके चेहरे उतरे हुए थे। इन सबसे पता चलता है कि भारत को बाहर के दुश्मनों की आवश्यकता नहीं है, दिवंगत जनरल विपिन रावत ने ठीक कहा था कि देश ढाई मोर्चे पर लड़ रहा है (पाकिस्तान, चीन और आधा मोर्चा देश के भीतर)।

मंदाना करीमी: भारत ने दी पहचान और कमाई

अब हम आपको ऐसी ही एक ‘पैरासाइट’ के बारे में बताने जा रहे हैं। ईरान मूल की एक अभिनेत्री व मॉडल हैं – मंदाना करीमी। 2015 में फिल्म ‘भाग जॉनी’ और रियलिटी शो ‘बिग बॉस 9’ से सुर्ख़ियों में आईं मंदाना करीमी तेहरान में पली-बढ़ी हैं, एयर होस्टेस से लेकर उन्होंने यहाँ तक का सफर तय किया है। 2018 में ‘इशकबाज’ के जरिए उन्हें छोटे पर्दे के दर्शकों ने जाना और 2022 में कंगना रनौत के शो ‘लॉक अप’ से डिजिटल की दुनिया ने उन्हें देखा। यानी, मंदाना करीमी भारतीय मनोरंजन की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम बन गईं।

स्पष्ट है, मंदना करीमी ने भारत के दर्शकों से कमाई की। वरना, आज भी वो एक एयर होस्टेस ही होतीं, सेलेब्रिटी नहीं। 2017 में उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड गौरव गुप्ता के साथ हिन्दू रीति-रिवाज से विवाह किया। ये भी ख़बर आई कि उन्होंने इस्लाम मजहब छोड़कर हिन्दू धर्म अपना लिया है। उसी साल अचानक से इन दोनों का रिश्ता बिगड़ गया और उन्होंने अपने पति के विरुद्ध घरेलू हिंसा का केस कर दिया। बाद में उन्होंने सेटलमेंट के लिए मामला वापस ले लिया। फिर 2022 में दोनों का तलाक़ हो गया।

ऐसा लगता है, तलाक़ के साथ ही मंदाना करीमी ने वापस इस्लामी कट्टरपंथी सोच को अपना लिया है और भारत से घृणा करने लगी हैं। या फिर हो सकता है कि भारत में अब काम न मिलने की वजह से वो वापस भागकर ईरान में काम चाह रही होंगी, वो ईरान जहाँ और मुल्ला का शासन है, जहाँ सुप्रीम लीडर मौलवी होता है। ऐसा सुप्रीम लीडर जो महिलाओं की आज़ादी का विरोधी है। जहाँ हिजाब न पहनने पर महासा अमीनी नामक महिला को मार डाला जाता है, लाखों महिलाएँ सड़क पर उतरती हैं फिर भी इस्लामी मुल्क़ अपनी कट्टरपंथी विचारधारा को नहीं छोड़ता।

पाकिस्तान का एजेंडा चलातीं मंदाना करीमी

अब ईरान के मुल्लाओं को ख़ुश करने और वहाँ काम के लिए भारत को गाली देने का उपक्रम शुरू कर पड़ेगा न। तो मंदाना करीमी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक स्टोरी साझा किया। इस स्टोरी में उन्होंने न्यूयॉर्क की कट्टर इस्लामी लेखिका हेब जमाल का एक पोस्ट साझा किया। सवाल ये है कि उस पोस्ट में क्या था, तो आइए बताते हैं। उस पोस्ट में लिखा था कि दुनिया जल रही है और भारत ने पाकिस्तान में बमबारी करके महिलाओं-बच्चों की जान ले ली है।

उस पोस्ट में आगे लिखा है, “इज़रायल ने खान यूनिस में एक पूरे परिवार को मार डाला। अमेरिका ने यमन पर हमला कर आम नागरिकों को निशाना बनाया। ये सारी हत्याएँ उन सामूहिक विनाशकारी शक्तियों की देन हैं जिन्होंने एक-दूसरे से यह सीख लिया है कि अगर तुम शक्तिशाली हो तो युद्ध अपराध करके भी बच सकते हो — क्योंकि दुनिया चुप्पी साध लेती है। चाहे वो ज़ायोनिज़्म हो, हिंदुत्वा फ़ासीवाद हो या अमेरिकी श्रेष्ठतावाद — सभी रूपों में साम्राज्यवाद फैलता जा रहा है और जो भी उसके रास्ते में आता है, उसे खाक कर देता है।”

मंदाना करीमी की इंस्टाग्राम स्टोरी, भारत विरोधी प्रपंच

यानी, जिस मंदाना करीमी ने कुछ वर्षों पहले ही हिन्दू धर्म अपनाया था और हिन्दू रीति-रिवाज से विवाह किया था, उनके लिए अब हिन्दू धर्म फासीवाद और साम्राज्यवाद हो गया है। उनके लिए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया जाना महिलाओं-बच्चों को निशाना बनाए जाने के समान है। ये वो मंदाना करीमी कह रही हैं, जिन्हें 6 फ़िल्में, 3 रियलिटी शो, एक सीरियल और एक वेब सीरीज मिली। जिन्हें यहाँ के बड़े अभिनेताओं के साथ विज्ञापन मिला, जिन्हें मॉडलिंग के कई बड़े काम भी इसी भारत में मिले।

क्या मंदाना करीमी को ये नहीं दिखाई दिया कि कैसे पाकिस्तान ने भारत के गुरुद्वारों को निशाना बनाया है? कैसे बच्चों की जान ले ली गई। उन बच्चों की लाशों की तस्वीरें सोशल मीडिया में तैर रही हैं। इसका बदला लेने के लिए भारत फिर कुछ आतंकियों को मरेगा तो मंदाना करीमी जैसों का फिर से पोस्ट आ जाएगा। 15 से अधिक लोग सीमा पार से हुई गोलीबारी में मारे गए हैं, सरे मासूम नागरिक हैं। पहलगाम में जो 26 मारे गए, सब हमारे निर्दोष लोग थे। मंदाना करीमी को तब समस्या नहीं हुई। अब हो रही है।

बॉलीवुड नहीं बन पाया भारत का ‘सॉफ्ट पॉवर’

आज जब वही मंदाना करीमी पाकिस्तान के विरोधी में दुश्मन मुल्क़ पाकिस्तान का एजेंडा चलाती हैं तो अनायास ही ‘पैरासाइट’ फिल्म की याद आ ही जाती है। वैसे भी जिस बॉलीवुड को भारत का ‘सॉफ्ट पॉवर’ होना चाहिए था, हमेशा से उसका पूरा ज़ोर भारत के दुश्मनों को ख़ुश करने में ही रहा। फराह खान द्वारा निर्देशित और शाहरुख़ खान अभिनीत ‘मैं हूँ ना’ (2004) में दिखाया गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच समस्या का एक ही कारण है – एक ‘हिन्दू आतंकवादी’। अगर ये एक किरदार हट जाए तो सब ठीक हो जाएगा, दुनिया ठीक से चलने लगेगी।

अमेरिका ने किस तरह से हॉलीवुड के जरिए देश-दुनिया में अपने एजेंडे का प्रयास किया, किस तरह शीत युद्ध के ज़माने में सोवियत रूस ने हॉलीवुड फिल्मों को बैन कर दिया – उससे पता चलता है कि बॉलीवुड इन सब मामलों में पीछे रहा। हालाँकि, थोड़ा बदलाव आया है और अब वही बॉलीवुड हमारे ऐतिहासिक नायकों पर ‘छावा’ जैसी फ़िल्में बना रहा है, कश्मीरी पंडितों का नरसंहार दिखा रहा है और सर्जिकल स्ट्राइक पर फिल्म बना रहा है। पहले ऐसा नहीं था। मंदाना करीमी बॉलीवुड की उसी पौध का DNA धारण करती हैं और ये उनकी मानसिकता में दिखाई दे रहा है।

अंत में, ये भी जान लीजिए कि केवल राजनीति या मनोरंजन की इंडस्ट्री में ही ऐसे ‘पैरासाइट’ नहीं हैं। पत्रकारिता की दुनिया में भी कई ऐसे हैं, जो बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। आरफा खानम शेरवानी को ही ले लीजिए, जिन्होंने ‘The Wire’ पर पाकिस्तान का एजेंडा चलाते हुए कहा कि भारत ने आम नागरिकों को मारा है। मंदाना करीमी भी यही कह रही हैं। अब समय आ गया है जब ऐसे-ऐसों को दाना-पानी देना बंद होना चाहिए, पैरासाइट हटाने वाले एंटीबायोटिक्स का इंतजाम किया जाना चाहिए।

‘पाकिस्तान ने अब गड़बड़ की तो फिर नहीं छोड़ेंगे’: NSA अजीत डोभाल ने चीन को फोन कर स्पष्ट बता दिया, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कई देशों के शीर्ष मंत्रियों से की बात

भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का करारा जवाब देते हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की। इस कार्रवाई के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बात की और भारत की नपी-तुली कार्रवाई का स्पष्ट संदेश दिया। डोभाल ने कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर पाकिस्तान ने कोई हिमाकत की, तो उसे कड़ा जवाब मिलेगा।

डोभाल ने चीन के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, सऊदी अरब, यूएई, रूस और फ्रांस के अपने समकक्षों से भी बात की। उन्होंने अमेरिकी NSA मार्को रुबियो को बताया कि भारत ने केवल आतंकी शिविरों को निशाना बनाया, किसी पाकिस्तानी नागरिक या सैन्य ठिकाने को नहीं। भारत ने साफ किया कि उसका इरादा तनाव बढ़ाना नहीं, बल्कि भविष्य के हमलों को रोकना है। डोभाल ने इन देशों को पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे के खिलाफ मिसाइल हमलों के बारे में जानकारी दी।

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने मुजफ्फराबाद, कोटली, बहावलपुर जैसे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जो लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के भर्ती केंद्र, प्रशिक्षण शिविर और हथियार डिपो थे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि यह कार्रवाई विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर आधारित थी, जिसने भारत के खिलाफ और हमलों की साजिश का खुलासा किया था। मिस्री ने कहा, “हमारी कार्रवाई सटीक, जिम्मेदार और गैर-उग्रवादी थी। इसका मकसद आतंकी ढांचे को ध्वस्त करना था, न कि युद्ध को बढ़ावा देना।”

चीन ने इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को संयम बरतने की सलाह दी। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और पाकिस्तान पड़ोसी हैं और उन्हें शांति से मसले सुलझाने चाहिए। यह पहली बार है जब चीन ने इस तरह की स्थिति में पाकिस्तान को खुलकर समर्थन देने से परहेज किया।

जानिए ‘एक चुटकी सिंदूर’ का महत्व, जो भारत ने पाकिस्तान को समझाया: हजारों वर्षों से सुहागिनों का है श्रृंगार, हनुमान जी को भी है प्रिय

भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ मंगलवार (6 मई, 2025) की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया। भारतीय सेना ने 9 हमलों में कई आतंकी ठिकानों को मिसाइल से अटैक कर तबाह कर दिया। ये 13 दिन पहले जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले का बदला था, जिसमें महिलाओं के सिंदूर उजाड़े गए थे। पत्नियों के सामने उनके पति को गोली से मार डाला था।

इसके जवाब में भारत ने दुश्मनों को एक चुटकी सिंदूर की कीमत समझा दी है। अब कोई भी इस सिंदूर पर आँच डालने से पहले सौ बार सोचेगा। आतंकियों के खिलाफ इस हमले को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम देने के पीछे भी कारण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नाम का सुझाव दिया था। क्योंकि, पीएम जानते थे उन महिलाओं के दर्द को जिन्होंने अपने पति को खोया।

पहलगाम में जिन आतंकियों ने महिलाओं से कहा था, ‘जाकर मोदी को बता देना’, उन्हीं मोदी ने महिलाओं के प्रतिशोध को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए वास्तविक रूप दिया। अपने सुहाग को खोने वाली इन महिलाओं के सम्मान में ही इस कार्रवाई का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा गया।

भारतीय संस्कृति में सिंदूर का महत्व

भारतीय संस्कृति में सिंदूर को सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक माना जाता है। यह विवाहित महिलाओं की निशानी होती है। स्त्री के सोलह श्रृंगार में सिंदूर का खास महत्व है। हिंदू धर्म में सुहाग की निशानी के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।

शादी के समय सात फेरों के बाद पति अपनी अर्द्धांगिनी को सिंदूर लगाता है। इसके बाद ही विवाह संपन्न होता है। इसी सिंदूर को जीवन भर महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र के लिए लगाती हैं।

आमतौर पर महिलाएँ लाल रंग का सिंदूर लगाती हैं। ये लाल रंग के पाउडर के रूप में होता है। पारंपरिक रूप से विवाहित महिलाएँ इसे माथे या बालों के बीच में लगाती हैं।

हालाँकि, सिंदूर सिर्फ लाल रंग का ही नहीं होता है। देश के विभिन्न हिस्सों में नारंगी रंग का सिंदूर भी लगाया जाता है। खासतौर पर पूर्वांचल के हिस्सों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में महिलाएँ नारंगी रंग का सिंदूर लगाती हैं। इसके अलावा महिलाएँ गुलाबी रंग का सिंदूर भी लगाती हैं।

सिंदूर का इतिहास

हिंदू धर्म में सिंदूर की परंपरा हजारों युग पुरानी है। स्कंद पुराण और अन्य ग्रंथों में देवी पूजा के संदर्भ में सिंदूर का उल्लेख है। विशेष रूप से माँ पार्वती और माँ दुर्गा के लिए यह दिव्य ऊर्जा (शक्ति) का प्रतीक है। इसी कारण से सिंदूर को वैवाहिक अनुष्ठानों में शामिल किया जाता है।

गुप्त काल (लगभग 320-550 ईस्वी) तक सिंदूर को हिंदू विवाह के रीति-रिवाजों से जुड़ गया। मनुस्मृति और अन्य ग्रंथों में सुहागिनों के लिए श्रृंगार के वर्णन में इसका जिक्र हुआ है। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे भारत में फैल गई।

जब श्री हनुमान ने पूरे शरीर पर लगा लिया सिंदूर

रामायण में देवी सीता अपने पति भगवान राम के लिए सिंदूर लगाती थीं। रामायण कथा के अनुसार जब श्रीराम, लक्ष्मण और माँ सीता वनवास से वापस लौटे थे। तब, श्रीराम ने अयोध्या के राजा के रूप में राज्य को सँभाला। ऐसे में भक्त हनुमान जी श्रीराम को उपहार देना चाहते थे।

हनुमान जी ने माँ सीता से प्रश्न पूछा कि माता! प्रभु श्रीराम को क्या पसंद है? अर्थात उन्हें किस चीज को देखकर अधिक प्रसन्नता होती है? माता सीता जब प्रश्न का उत्तर दे रही थी उस वक्त वे अपनी माँग में सिंदूर भी लगा रही थीं। हनुमान जी ने सिंदूर का महत्व पूछा तो माँ सीता ने मुस्कुराते हुए कहा, “इससे प्रभु श्रीराम को दीर्घायु मिलेगी। इसीलिए मैं सिंदूर माँग में लगाती हूँ।”

माता सीता की बात सुनकर हनुमान जी ने प्रसन्न होकर कहा कि क्या इस चुटकी भर सिंदूर को लगाने से प्रभु श्रीराम प्रसन्न होते हैं? तब माता सीता मुस्कुराई और कहा, “हाँ! मेरी माँग में सिंदूर को देखकर प्रभु श्रीराम बहुत प्रसन्न होते हैं।”

माता सीता की बात सुनकर हनुमान जी ने सोचा कि अगर एक चुटकी सिंदूर से प्रभु श्रीराम प्रसन्न होते हैं, तो इससे बेहतर उपहार प्रभु के लिए कुछ नहीं हो सकता। हनुमान जी अयोध्या के राजदरबार में पूरे शरीर पर सिंदूर लगाकर आए। हनुमान जी का समर्पण भाव देखकर श्रीराम ने उन्हें गले लगा लिया।

बंगाल में सिंदूर खेला

बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान दशमी पर सिंदूर खेला होता है। इस दिन माँ दुर्गा को सिंदूर समर्पित कर धूमधाम से विदाई दी जाती है। विवाहित महिलाएँ सिंदूर खेला परंपरा को निभाती हैं। खासतौर पर बंगाली समाज में इसका अधिक महत्व है।