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क्या ढूँढ लिए हैं एलोपैथी ने इन बीमारियों के स्थायी इलाज? IMA और दवा कंपनियों से बाबा रामदेव ने पूछे 25 सवाल

हाल ही में एलोपैथी दवाओं को लेकर बाबा रामदेव का एक वीडियो वायरल होने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया। इसको लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने भी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद रामदेव ने अपने बयान पर डॉक्टरों से माफी माँग ली। हालाँकि, यह विवाद अभी थमा नहीं है।

योग गुरु ने सोमवार (24 मई 2021) को एक और ट्वीट किया, जिसके बाद यह मामला फिर से गर्माता दिख रहा है। रामदेव ने ट्वीट कर डॉक्टरों के संगठन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और दवा कंपनियों से 25 सवाल पूछे हैं। उन्होंने हाइपरटेंशन, टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज जैसे कई बीमारियों के स्थायी समाधान के बारे में भी सवाल पूछा है।

उन्होंने आगे पूछा, ”एलोपैथी को शुरू हुए 200 साल हो गए, जरा बताइए टीबी और चेचक जैसी बीमारियों के स्थायी समाधान ढूँढ लिए गए, लेकिन उसी तरह लिवर संबंधी रोग के उपाय क्यों नहीं ढूँढे जा सके। बाबा रामदेव ने दवा कंपनियों से पूछा है कि आँखों का चश्मा उतारने और हीयरिंग एड हट जाने का बेजोड़ इलाज हो तो बताएँ।”

बाबा रामदेव ने अपने ट्वीट में कई ऐसी गंभीर बीमारियों के बारे में IMA और दवा कंपनियों से सवाल पूछा है, जिनका अभी तक स्थायी इलाज नहीं ढूँढा जा सका है। उन्होंने कहा कि एलोपैथी में बिना साईड इफैक्ट के हिमोग्लोबिन बढ़ाने का तरीका बता दें। आदमी बहुत हिंसक, क्रूर और हैवानियत कर रहा ​है उसको इंसान बनाने वाली एलोपैथी में कोई दवा बताएँ। आदमी के सारे ड्रग्स एडिक्शन, नशा छूट जाए, ऐसी कोई एलोपैथी में दवा बताएँ।

आगे उन्होंने अपने सवालों की लिस्ट में पायरिया, माइग्रेन, कोलेस्ट्रॉल ट्राइग्लिसराइड्स, सोरायसिस, पार्किंसन, अनिद्रा, एसिडिटी जैसे तमाम रोगों के नाम गिनाए हैं, जिनके लिए उनका दावा है कि इन रोगों का अभी तक स्थायी इलाज एलोपैथी में नहीं खोजा जा सका है।

बता दें कि हाल ही में बाबा रामदेव का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह एलोपैथी की निंदा करते हुए सुने गए थे। उन्होंने कहा था कि एलोपैथी दवाओं के कारण ही कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की जान गई है। इस पर बाबा रामदेव को चिट्ठी लिखते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सम्पूर्ण देशवासियों के लिए Covid-19 से युद्धरत डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी देवतुल्य हैं। ऐसे में बाबा रामदेव के आपत्तिजनक बयान ने देश भर की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने चिट्ठी ट्वीट करते हुए योग गुरु रामदेव से अपना बयान वापस लेने की माँग की थी।

दरअसल, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) आईएमए ने बाबा रामदेव के विशेष रूप से दो बयानों पर आपत्ति जताई थी। वायरल वीडियो में रामदेव ने कहा था, ”एलोपैथी ऐसी बेकार साइंस है कि पहले इनकी हाइड्रोऑक्सीक्लोरोक्वीन फेल हो गई, फिर रेमडेसिविर फेल हो गई। फिर एंटीबायोटिक्स इनके फेल हो गए, स्टेरॉयड फेल हो गए। प्लाज्मा थेरेपी के ऊपर भी बैन लग गया। आइवरमेक्टिन भी फेल हो गई। बुखार के लिए फैबिफ्लू दे रहे हैं, वो भी फेल है।”

AAP की ‘डर्टी पॉलिटिक्स’: देश की छवि खराब करने के लिए अमेरिका-यूके में वैक्सीनेशन के झूठे आँकड़े कर रही पेश

आम आदमी पार्टी (AAP) ने सोमवार (24 मई 2021) को वैक्सीन के ऐसे आँकड़े पेश किए, जिन्हें मिलावटी कचरा कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जबरदस्त फर्जी और झूठी खबरें फैलाने के बावजूद, ट्विटर ने अभी तक इन पर कोई भी कार्रवाई नहीं की है।

पार्टी द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में, AAP विधायक सौरभ भारद्वाज दावा कर हैं कि यूनाइटेड किंगडम में 88% लोग वैक्सीन लगा चुके हैं। इसी तरह अमेरिका के 84% लोग वैक्सीन की खुराक ले चुके हैं, जबकि भारत में केवल 13% लोग ही वैक्सीन लगवा पाए हैं।

दरअसल, आम आदमी पार्टी द्वारा जारी किए गए ये आँकड़ें झूठे हैं। केंद्र सरकार की छवि धूमिल करने के ​लिए वह यह फर्जी खबरें फैला रही है।

यूके में वैक्सीन के आँकड़े

यूनाइटेड किंगडम की सरकारी वेबसाइट के अनुसार, वहाँ अब तक वैक्सीन की कुल 37,943,681 पहली खुराक दी जा चुकी है। ब्रिटेन की जनसंख्या 6.6 करोड़ को देखते हुए लगभग 57.49 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक मिल चुकी है।

वैक्सीन की कुल 22,643,417 डोज दी जा चुकी हैं, जो दर्शाता है कि 34.30% आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया जा चुका है। साथ ही यह भी दिखाता है कि यहाँ कुल व्यस्कों में से 72% ने वैक्सीन की पहली डोज ले ली है और 43% लोगों ने दूसरी डोज भी ले ली है।

इसके अलावा, यूके में सभी वयस्कों के लिए टीकाकरण नहीं खोला गया है। वर्तमान में, इंग्लैंड में 34 वर्ष से कम, उत्तरी आयरलैंड में 25 वर्ष से कम और स्कॉटलैंड में 30 वर्ष से कम आयु वाले लोगों के लिए टीकाकरण नहीं खोला गया है। वेल्स के अधिकांश क्षेत्रों में वयस्कों के लिए वैक्सीनेशन खोल दिया गया है। इस तरह आम आदमी पार्टी ने जो 88 फीसदी का आँकड़ा पेश किया है, वह उसकी कोरी कल्पना है।

अमेरिका में वैक्सीन के आँकड़े

अमेरिका में कम से कम 49.2% लोगों ने टीके की पहली खुराक ले ली है। वहीं, 49.6% वयस्कों को पूरी तरह से टीका लगाया गया है और 65 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए यह आँकड़ा 73.9% है। यानी अब अमेरिका में अब तक कुल 39.2% आबादी को पूरी तरह से टीका लग चुका है।

जैसा कि ‘आप’ विधायक सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है, यह आँकड़ा 84 प्रतिशत से काफी दूर है।

भारत में वैक्सीन के आँकड़े

भारत में अब तक कुल 15,29,30,249 लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक दी जा चुकी है। भारत की कुल जनसंख्या 125 करोड़ है, इसका मतलब है कि कम से कम 12.23% आबादी को टीके की पहली खुराक मिल गई है। भारत की जनसंख्या अमेरिका और यूके की तुलना में कहीं अधिक है। ऐसे में स्वाभाविक है कि भारत को अपनी पूरी आबादी का टीकाकरण करने में अधिक समय लगेगा, लेकिन AAP टीकाकरण अभियान पर घटिया राजनीति करके देश भर में अपनी किरकिरी करा रही है।

खुर्शीद ने राहुल गाँधी को बताया ‘लोकतंत्र का राजा’, जावेद अख्तर ने कहा- ‘यह ख्वाब, मोदी को बनाएगा हमेशा के लिए PM’

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने शुक्रवार (मई 21, 2021) को ट्वीट कर राहुल गाँधी को लोकतंत्र के भविष्य का राजा (प्रधानमंत्री) बता डाला। खुर्शीद ने राहुल और राजीव गाँधी की कोलाज फोटो शेयर करते हुए ट्वीट किया, ”भारतीय लोकतंत्र के पूर्व और भविष्य के राजा।” हालाँकि, उनकी यह बात कई लोगों के गले नहीं उतरी, जिसको लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर जम कर ट्रोल किया गया।

वहीं, बॉलीवुड के लेखक व गीतकार जावेद अख्तर सलमान खुर्शीद की इस बात से असहमत नजर आए। अख्तर ने खुर्शीद के ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मशहूर लेखक ने कहा कि लोकतंत्र का राजा कहना अपने आप में विरोधाभास है। राहुल गाँधी अच्छे विपक्षी नेता हो सकते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नहीं।

अख्तर ने ट्वीट किया, ”मिस्टर सलमान खुर्शीद आपका विरोधाभास, ‘लोकतंत्र का राजा’ बेहद निराशाजनक है। राहुल गाँधी एक विपक्षी नेता के तौर पर स्वीकार्य हैं, लेकिन जो कोई भी उनके प्रधानमंत्री बनने का सपना देखता है वो नरेंद्र मोदी को हमेशा के लिए भारत का प्रधानमंत्री बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।”

जावेद अख्तर का यह ट्वीट भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा द्वारा खुर्शीद को लताड़ने के बाद आया है। खुर्शीद की बिना सिर पैर की इस बात के जवाब में पात्रा ने पूर्व सांसद को याद दिलाया कि भारत एक लोकतंत्र है, वंश नहीं। पात्रा ने कहा कि खुर्शीद द्वारा घोषित लोकतंत्र में राजा नहीं होते, बल्कि राजवंशों के राजा होते हैं।

दरअसल, खुर्शीद की यह टिप्पणी राजीव गाँधी की पुण्यतिथि के दिन आई थी। राजीव गाँधी की 21 मई, 1991 को एक आत्मघाती हमलावर ने हत्या कर दी थी, जब वे तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी सभा में थे।

बता दें कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी, जो अब केरल के वायनाड से एक सांसद के रूप में विपक्ष में हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों में वह कॉन्ग्रेस के गढ़ अमेठी से हार गए थे। राहुल जब पार्टी में अध्यक्ष के पद पर थे, तब कॉन्ग्रेस को पिछले लोकसभा चुनावों में भी करारी हार का सामना करना पड़ा था।

उनकी पार्टी को सिर्फ 52 सीटें ही मिली थी। इसके चलते राहुल गाँधी को अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था और पार्टी ने अभी तक इस पद के लिए चुनाव नहीं कराया है। इस पद पर सोनिया गाँधी को अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया गया, जो डेढ़ साल से अधिक समय से इस पद पर हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस के नेताओं का राहुल गाँधी को भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में देखना खुद से बेमानी करने जैसा है।

कोरोना संकट में भी भारत में रिकॉर्ड FDI: 2020-21 में 81.72 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ अब तक का सबसे ज़्यादा निवेश

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सोमवार (मई 24, 2021) को कहा कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 2020-21 के दौरान नीतिगत सुधारों, निवेश सुविधा और व्यापार करने में आसानी के मोर्चे पर सरकार द्वारा किए गए उपायों के कारण 19% बढ़कर 59.64 बिलियन डॉलर हो गया। .

जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान भारत ने अब तक का सबसे अधिक 81.72 बिलियन डॉलर का एफडीआई प्रवाह अर्जित किया है और यह पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 (74.39 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की तुलना में 10% अधिक है।

एफडीआई इक्विटी प्रवाह वित्त वर्ष में 19% बढ़ा। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2020-21 (59.64 बिलियन अमेरिकी डॉलर) 2019-20 (49.98 बिलियन अमेरिकी डॉलर)। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए शीर्ष निवेशक देशों के मामले में, ‘सिंगापुर’ 29% के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद यू.एस.ए (23%) और मॉरीशस (9%) है। 

वित्तीय वर्ष के दौरान ‘कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर’ शीर्ष क्षेत्र के रूप में उभरा है। 2020-21 में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का लगभग 44% हिस्सा क्रमशः निर्माण (इन्फ्रास्ट्रक्चर) गतिविधियों (13%) और सेवा क्षेत्र (8%) में है। ‘कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर’ क्षेत्र के तहत, प्रमुख प्राप्तकर्ता राज्य गुजरात (78%), कर्नाटक (9%) और दिल्ली (5%) वित्तीय वर्ष 2020-21 में हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान गुजरात के अधिकांश इक्विटी प्रवाह ‘कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर’ (94%) और ‘निर्माण (इन्फ्रास्ट्रक्चर) गतिविधियों’ (2%) क्षेत्रों में बताया गया है। 

निर्माण (इन्फ्रास्ट्रक्चर) गतिविधियाँ, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर, खुदरा व्यापार, ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रिकल उपकरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान पिछले वर्ष की तुलना में इक्विटी में 100% से अधिक की छलांग दर्ज की है। वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान प्रतिशत वृद्धि के मामले में शीर्ष 10 देशों में सऊदी अरब शीर्ष निवेशक है। इसने पिछले वित्तीय वर्ष में बताए गए 89.93 मिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में 2816.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया।

वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान क्रमशः यूएसए और यूके से एफडीआई इक्विटी प्रवाह में वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में 227% और 44% की वृद्धि दर्ज की गई। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र ने कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह के लगभग 44 प्रतिशत हिस्से के साथ सबसे अधिक अंतर्वाह अर्जित किया। इसके बाद क्रमशः निर्माण (बुनियादी ढाँचे) गतिविधियों (13 प्रतिशत) और सेवा क्षेत्र (8 प्रतिशत) का स्थान रहा।

अमेरिकी विशेषज्ञ ने की PM मोदी की तारीफ, Alt News के प्रतीक सिन्हा ने की उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश: यहाँ जानें उनकी उपलब्धियाँ

विपक्षी दलों का बचाव करने के लिए हास्यास्पद औचित्य और तुच्छ तर्क देने के अलावा, प्रोपेगेंडा आउटलेट AltNews भारत और मोदी सरकार के पक्ष में बोलने वाले सभी लोगों को बदनाम करने की कोशिश करता है। 

हाल ही में, प्रोपेगैंडा आउटलेट AltNews के संस्थापक, प्रतीक सिन्हा ने एक विशेषज्ञ को नीचा दिखाने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। बता दें कि विशेषज्ञ ने COVID-19 संकट के बावजूद सबसे बड़ी उभरती शक्ति के रूप में भारत की प्रशंसा की और भारत की शक्ति संरचना को स्थिर और मोदी सरकार को सुरक्षित बताया।

अरब न्यूज में प्रकाशित एक लेख में, अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञ डॉ. जॉन हल्समैन ने तर्क दिया कि COVID-19 संकट के बावजूद, भारत सबसे बड़ा उभरता हुआ देश बना हुआ है और इसमें निहित गुण उसे दुनिया में ‘सबसे शक्तिशाली’ देश बनने में मदद करेंगे। हल्समैन ने यह भी नोट किया कि मोदी सरकार राजनीतिक रूप से इस तरह सुरक्षित है कि अन्य ‘विकासशील देश केवल ईर्ष्या कर सकते हैं।’

हालाँकि, हमेशा की तरह देश और भारत सरकार की प्रशंसा AltNews के सह-संस्थापक को रास नहीं आया। लेखक की साख पर सवाल उठाते हुए, सिन्हा ने ट्वीट किया कि अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञ के ट्विटर पर केवल 160 फॉलोवर्स थे।

साभार: ट्विटर

सोशल मीडिया पर फॉलो करना शायद ही किसी की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता को मापने का एक पैमाना है। अनगिनत व्यक्तित्व अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना जारी रखते हैं, भले ही उनकी सोशल मीडिया पर कोई सक्रिय उपस्थिति न हो। कुछ के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डिएक्टिवेट अकाउंट हैं। कुछ के फॉलोवर्स काफी कम हैं, क्योंकि वह सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव नहीं होते हैं। तो सिर्फ इसलिए कि कोई सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध नहीं है या ट्विटर पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स नहीं है, यह बताने का पर्याप्त कारण नहीं है कि उनकी विश्वसनीयता कम है।

कुछ स्व-घोषित फैक्ट-चेकर्स वेबसाइट उन्हें क्लीन चिट देने के लिए राजनीतिक दलों के साथ मिलीभगत करती है, और जिनके ट्विटर पर बड़ी संख्या में फॉलोवर्स हैं, भले ही उनके झूठ का एक से अधिक अवसरों पर भंडाफोड़ किया गया हो। उनकी ट्विटर फॉलोइंग किसी भी तरह से उनकी विश्वसनीयता का प्रतीक नहीं है।

संक्षेप में, ट्विटर पर फॉलोअर्स की संख्या का किसी व्यक्ति की अपने कार्यक्षेत्र में विश्वसनीयता पर कोई असर नहीं पड़ता है। यहाँ तक ​​कि उथली नैतिकता वाले और बिना विश्वसनीयता वाले लोगों की भी सोशल मीडिया वेबसाइटों पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। जैसे, ट्विटर और सोशल मीडिया वेबसाइटों से परे एक जीवन है और कुछ लोगों को सोशल मीडिया पर लोगों से जुड़ने में दिलचस्पी नहीं हो सकती है।

डॉ जॉन हल्समैन की पेशेवर उपलब्धियाँ

प्रतीक सिन्हा उस विशेषज्ञ की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं जिसने भारत सरकार की प्रशंसा की। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि डॉ. हल्समैन एक सम्मानित विदेश नीति विशेषज्ञ और एक प्रमुख वैश्विक राजनीतिक जोखिम परामर्श फर्म जॉन सी. हल्समैन इंटरप्राइजेज के अध्यक्ष और प्रबंध पार्टनर हैं।

हल्समैन बर्लिन में जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में रेजिडेंट अल्फ्रेड वॉन ओपेनहेम स्कॉलर थे। वह लंदन शहर के समाचार पत्र सिटी एएम के वरिष्ठ स्तंभकार भी हैं। हल्समैन इटली के एस्पेन इंस्टीट्यूट में शोध पत्रों में भी योगदान देते हैं और हेग सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज में एक वरिष्ठ शोध फेलो हैं।

इससे पहले हल्समैन वहाँ अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक वरिष्ठ शोध फेलो होने के अलावा, हेरिटेज फाउंडेशन के लिए लिखते थे। उन्होंने जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज (एसएआईएस) में यूरोपीय सुरक्षा अध्ययन और स्कॉटलैंड के सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय में विश्व राजनीति और अमेरिकी विदेश नीति भी पढ़ाया। इसके अलावा, हल्समैन ने 3 किताबें भी लिखीं- एथिकल रियलिज्म, द गॉडफादर डॉक्ट्रिन, और अरब के लॉरेंस की जीवनी जिसका शीर्षक टू बिगिन द वर्ल्ड ओवर अगेन है।

कुंभ से कोरोना, चुनावी रैली स्थगित कर रोना… लेकिन ‘किसानों’ को समर्थन देना: देश के संघर्ष में यह है विपक्षी दलों का चरित्र

किसी भी दम तोड़ते आंदोलन के लिए कहीं से भी मिलने वाला समर्थन ऑक्सीजन की तरह होता है। किसान आंदोलन के लिए वही समर्थन खाद-पानी की तरह है। ऐसे में आश्चर्य नहीं कि दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान उन्हें मिलने वाले देसी, विदेशी, हिन्दुस्तानी या खालिस्तानी, हर तरह के समर्थन को तुरंत स्वीकार कर लेते हैं। उनके साथ जैसे उनकी माँगों के औचित्य पर बात नहीं हो सकती, वैसे ही इस पर बात नहीं हो सकती कि उन्हें मिल रहा समर्थन किस ओर से और किससे आ रहा है। 

समर्थन के लेन-देन में लिप्त लोग इस पर बात करने के लिए तैयार नहीं कि जिन कानूनों को रद्द करने की माँग पर यह आंदोलन खड़ा किया गया है उन माँगों को लेकर पहले उनका मत क्या था। इनके साथ इस विषय पर भी बातचीत संभव नहीं है कि जब कानून को पहले ही अट्ठारह महीनों के लिए स्थागित कर दिया गया है तो फिर महामारी के दिनों में संक्रमण की संभावनाओं को देखते हुए आंदोलन को कुछ दिनों के लिए स्थगित क्यों नहीं किया जा सकता?     

आंदोलन जब से शुरू हुआ है, तब से अब तक, ऐसा नहीं है कि किसानों ने केवल समर्थन लिया है। उन्होंने समर्थन दिया भी है। उनके नेता हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में अपने समर्थक दलों और नेताओं के समर्थन में आंदोलन की जगह से चलकर चुनाव वाले राज्यों में गए और उनके लिए वोट की अपील भी की। समर्थन लेन-देन की यह प्रक्रिया तब से जारी है। इस लेन देन संबंधित ताजा घटनाक्रम में कॉन्ग्रेस सहित बारह प्रमुख विपक्षी दलों ने 26 मई को होने वाले संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी विरोध को अपने समर्थन की घोषणा की है।

किसी को इस बात से मतलब नहीं है कि लगातार हो रहे आंदोलन को क्या व्यावहारिकता की कसौटी पर कसा जा सकता है? प्रश्न यह है कि भारत के लिए चिंतित रहने का दावा करने वाले पहले से ही महामारी के कारण उत्पन्न हुई आर्थिक मंदी के दौर में आंदोलन से होने वाले आर्थिक नुकसान की बात क्यों नहीं करते? टिकरी और गाज़ीपुर बॉर्डर के आस-पास के लोगों को होनेवाली असुविधाओं को लेकर बातचीत क्यों नहीं हो सकती? जब पूरा देश कोरोना से लड़ रहा है तब संक्रमण को रोकने के लिए प्रयासरत सरकारें किसानों के इस जमावड़े को लेकर कुछ बोलती क्यों नहीं?    

हिन्दुओं के कुंभ को सुपर स्प्रेडर बताने वाली कॉन्ग्रेस, उसके साथी दल, किसानों के समर्थक और मीडिया का मानना है कि किसान यदि दिल्ली बॉर्डर पर धरना देंगे तो कोरोना नहीं फैलेगा पर वही किसान यदि कोरोना रोकने को लेकर पंजाब सरकार की विफलता पर विरोध करने के लिए इकठ्ठा होंगे तब संक्रमण फैलने की संभावना रहेगी।

रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों से अनुरोध किया है कि वे उनकी सरकार की विफलता के विरुद्ध 28 मई से होने वाले अपने तीन दिन के धरने को वापस लें क्योंकि वह धरना सुपर स्प्रेडर हो सकता है। 

यह कैसी राजनीति है? पंजाब की सरकार दिल्ली में किसानों के धरने को पूरा समर्थन देती हैं पर पंजाब में उनके धरने को संक्रमण फैलाने का साधन बताती हैं? दिल्ली में किसानों के धरने को दिल्ली सरकार का पूरा समर्थन है। भारत में कोरोना की तीव्र दूसरी लहर के लिए कई लोग किसान आंदोलन के धरनों को जिम्मेदार मानते हैं। ऐसे लोगों का मानना है कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार स्ट्रेन ब्रिटेन से चलकर किसान आंदोलन के रास्ते भारत में पहुँचा। यह बहस का मुद्दा हो सकता है और नहीं भी, पर क्या इस बात से इनकार किया जा सकता है कि ईद के जमावड़े और किसानों के धरने को छोड़ कर भारत में होने वाले लगभग हर जमावड़े को कोरोना के लिए जिम्मेदार बताया जा चुका है?

यदि कुंभ में स्नान के लिए पहुँचने वाले हिन्दुओं की वजह से कुंभ को सुपर स्प्रेडर बताया जा सकता है या पश्चिम बंगाल की राजनीतिक रैलियों में जमा होने वालों को संक्रमण के लिए जिम्मेदार बताया जा सकता है तो किसानों के इतने बड़े धरने को जिम्मेदार क्यों नहीं बताया जा सकता? इन धरनों में लोग पहले से बैठे ही थे, और लोग लगातार आ रहे हैं जिन्हें देखने से ही पता चलता है कि वे संक्रमण रोकने के लिए घोषित नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं पर उनसे कोई प्रश्न नहीं पूछ सकता।  

लॉकडाउन के नियमों का पालन न करने के बावजूद किसानों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती। कार्रवाई तो दूर, समर्थन देने वाली सरकार, विपक्षी दल, मीडिया और आन्दोलन जीवियों ने आजतक एक बार अनुरोध भी नहीं किया कि आंदोलन जारी करना है तो किसान संक्रमण रोकने के लिए एक न्यूनतम प्रोटोकॉल का पालन कर प्रयासरत सरकारों की मदद करें। उल्टा कथित तौर पर कमल नाथ किसानों को अपने दल द्वारा दिए जा रहे समर्थन को एक अलग ही स्तर पर ले जाते हुए अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश देते हैं कि वे किसानों के समर्थन में आग लगा दें। पर जब वही किसान पंजाब सरकार के खिलाफ धरने पर बैठना चाहते हैं तो कान्ग्रेस के नेता उनके सामने विनती करने लगते हैं। 

किसानों का आचरण शुरू से ऐसा रहा है जैसे उन्हें किसी बात की फिक्र ही नहीं है और उनके लिए उनका यह आंदोलन देश हित के ऊपर है। उनके जो नेता शुरूआती दिनों में राजनीति को लेकर चौकन्ने दिखने की कोशिश भी करते थे, वे भी अब बिना किसी लिहाज के आचरण करने पर उतर आए हैं। उधर महामारी काल में भी विपक्षी दलों का आचरण राजनीतिक रसातल पर दिखाई दे रहा है। संक्रमण रोकने का उनकी सरकारों के प्रयासों में कमी हो या केंद्र सरकार से शिकायत, वैक्सीन को लेकर अफवाहों की बात हो या टीकाकरण पर राजनीति, पी एम केयर्स द्वारा राज्यों को दिए गए उपकरणों का दुरुपयोग हो या केंद्र सरकार के प्रयासों का विरोध, विपक्षी दल और उनके नेता अभी तक गलत जगह खड़े हुए दिखे हैं और उनके द्वारा छेड़ी गई राजनीतिक लड़ाई ने कोरोना के विरुद्ध देश के संघर्ष को पीछे छोड़ दिया है।

‘कॉन्ग्रेस टूलकिट’ केस: ट्विटर इंडिया के दिल्ली और गुरुग्राम ऑफिस पर पुलिस की रेड, आज ही भेजा था नोटिस

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ‘कॉन्ग्रेस टूलकिट’ जाँच के सिलसिले में सोमवार (मई 24, 2021) को दिल्ली और गुड़गाँव में ट्विटर इंडिया के दफ्तरों में छापेमारी कर रही है। बता दें कि आज ही कॉन्ग्रेस टूलकिट मामले में दिल्ली पुलिस ने ट्विटर को नोटिस भेजा था।

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर से पूछा था कि उनके पास ऐसी कौन सी जानकारी है जिसके आधार पर वो बीजेपी नेताओं और अन्य लोगों के ट्वीट को ‘manipulated media’ यानी भ्रामक न्यूज़ बता रहे हैं।

आज ही भेजे गए नोटिस में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ट्विटर से जानकारी साझा करने को कहा था। दिल्ली पुलिस ने कहा था कि ये जानकारी जाँच के लिए महत्वपूर्ण है। मामले की जाँच कर रही स्पेशल सेल सच का पता लगाना चाहती है। ट्विटर ने अंतर्निहित सच्चाई जानने का दावा किया है, इसलिए उसे सफाई देना चाहिए।

इससे पहले ट्विटर ने 21 मई को मोदी सरकार को निशाना बनाने के लिए कॉन्ग्रेस द्वारा तैयार किए गए कथित टूलकिट पर संबित पात्रा के एक ट्वीट को मैनिपुलेटेड मीडिया करार दे दिया था। ट्विटर का कहना था, “ वह उन ट्वीट्स को लेबल कर सकता है, जिनमें मीडिया (वीडियो, ऑडियो और इमेज) शामिल हैं जिन्हें भ्रामक रूप से बदल दिया गया है या गढ़ा गया है।” इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा कड़ी आपत्ति जताते हुए ट्विटर से यह टैग हटाने के लिए कहा गया था।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने बुधवार (19 मई, 2021) को ट्विटर को एक ईमेल भेज कर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रवक्ता संबित पात्रा, केंद्रीय कपड़ा और महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष समेत कई पार्टी पदाधिकारियों के हैंडल्स को सस्पेंड करने को कहा था। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया था कि जिस दस्तावेज को उसका टूलकिट बता कर शेयर किया जा रहा है, वो फर्जी है।

भोपाल गैस त्रासदी पर ध्यान देने के बजाय राजीव गाँधी थे PMO के सौंदर्यीकरण में व्यस्त, ‘कॉन्ग्रेस वैनिटी प्रोजेक्ट’ का खुलासा

भारत के सातवें प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की 30वीं पुण्यतिथि (21 मई 2021) के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए अनगिनत लेख लिखे गए। इन्ही में से एक ‘द वीक’ में सुनीता कोहली का लेख प्रकाशित हुआ। लेख में कई बड़े खुलासे किए गए हैं। इसके मुताबिक, राजीव गाँधी ने भोपाल गैस त्रासदी के कुछ महीने बाद ही अपने वैनिटी प्रोजेक्ट के तहत पीएमओ का सौंदर्यीकरण करवाया था।

सुनीता कोहली ने कथित तौर पर राजीव गाँधी के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। इनमें साउथ ब्लॉक में प्रधानमंत्री सचिवालय का पुनर्निर्माण, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, हैदराबाद हाउस, पंचशील भवन, जवाहर भवन और दो आधिकारिक बोइंग विमान के अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट मीटिंग रूम की परियोजनाओं पर भी काम किया है। हालाँकि, इन दिनों प्रधानमंत्री कार्यालय का सौंदर्यीकरण सुर्खियों में है, क्योंकि यह राजीव गाँधी के प्रधानमंत्री बनने के कुछ महीने बाद और भोपाल गैस त्रासदी की अनदेखी कर तैयार किया गया था।

लेखिका के अनुसार, राजीव गाँधी के साथ उन्होंने जो सबसे महत्वपूर्ण काम किया, वह 1985 में साउथ ब्लॉक में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और सचिवालय के पुर्निर्माण और सौंदर्यीकरण का था, जिस पर पूर्व पीएम विशेष ध्यान दे रहे थे। हर्बर्ट बेकर (9 जून 1862–4 फरवरी 1946) एक ब्रिटिश शिल्पकार था। इसे ही सचिवालय के सौंदर्यीकरण का दायित्व सौंपा गया था। प्रधानमंत्री कार्यालय को नया रूप देने में उस समय करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे, जबकि भोपाल गैस त्रासदी में जान गँवाने वालों के परिवार वालों और इससे प्रभावित लोगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया था। हालाँकि, जितने रुपए राजीव गाँधी ने अपनी आत्मसंतुष्टि के लिए PMO को डिजाइन करने में खर्च किए उसका आधा भी उन्होंने उन मासूमों पर खर्चा करना जरुरी नहीं समझा, जो इस दुनिया में अपने आपको बेबस और लाचार समझ रहे थे।

पीएमओ में आए बदलाव पर कोहली लिखती हैं, ”प्रधानमंत्री ने अपने कमरे को पूरी तरह से नया कर दिया था। कमरा काफी सुंदर और डिजाइन किया हुआ लग रहा था, लेकिन अब इसमें पहले वाली बात नहीं थी। इस कार्यालय के लिए फर्नीचर के सभी आइटम कस्टम-डिजाइन किए गए थे। एक नई डेस्क का निर्माण किया गया था, जैसा कि पहले 1950 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के लिए तीन मूर्ति भवन में बनाया गया था, हालाँकि बाद में इसे संग्रहालय में बदल दिया गया था। अब इंदिरा गाँधी द्वारा इस्तेमाल की गई इसकी प्रतिकृति अब प्रधानमंत्री के कार्यालय में थी।”

गौरतलब है कि 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी के बाद एंडरसन के अमेरिका जाने के पीछे राजीव गाँधी का हाथ बताया जाता है। कहा जाता है तत्कालीन पीएम राजीव गाँधी के इशारे पर राज्य के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने उनकी देश छोड़कर जाने में मदद की थी। एंडरसन को सरकारी प्लेन से कड़ी सुरक्षा के बीच भोपाल से दिल्ली पहुँचाया गया था, जिसके बाद वो अमेरिका वापस चला गया और कभी भारत लौट कर नहीं आया।

आधिकारिक तौर पर इस हादसे में 3,787 लोगों के मरने की बात कही गई, लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों में यह संख्या 20-25 हजार बताई जाती है। पीड़ितों के संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि 15,274 लोगों की मौत हुई और 5,74,000 लोग बीमार हुए थे।

बता दें कि साल 2019 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामलीला मैदान की रैली में यह जानकारी दी कि भारत के मुख्य युद्धपोत आईएनएस विराट का इस्तेमाल राजीव गाँधी ने अपने निजी मनोरंजन और छुट्टियों के लिए किया तो यह बात बहुत लोगों को एक जुमला लगी थी। हालाँकि, भाषण के थोड़ी देर बाद ही में इंटरनेट पर इंडिया टुडे की एक स्टोरी शेयर की गई थी, जिसमें राजीव गाँधी के कथित मनोरंजक छुट्टियों की पूरी जानकारी विस्तृत रूप से दी गई थी।

इंडिया टुडे मैगजीन की जनवरी 31, 1988 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अनिता प्रताप ने इस पूरे ‘हॉलीडे’ का ब्यौरा दिया था। उन्होंने लिखा था कि राजीव गाँधी की पूरी कोशिश थी कि प्रेस उनसे दूर रहे, लेकिन इंडियन एक्सप्रेस एवं बाकी मीडिया के फोटोग्राफ़र ने उनकी कई तस्वीरें निकाल लीं। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय नौसेना के युद्धपोत का इस्तेमाल हुआ, जो कि आश्चर्यजनक बात है।

द्वीप का वह छोटा हिस्सा 26 दिसंबर 1987 को तब सुर्खियों में आया, जब राजीव के बेटे राहुल गाँधी ने यहाँ अपने चार दोस्तों के साथ नारंगी और सफेद रंग की लक्षद्वीप प्रशासन के हेलीकॉप्टर से उड़ान भरी। मेहमानों की सूची में राहुल और प्रियंका के चार दोस्त, सोनिया गाँधी की बहन, बहनोई और उनकी बेटी, उनकी विधवा माँ आर. मैनो, उनके भाई और एक मामा शामिल थे।

जमीन पर था लॉकडाउन तो ‘आसमान’ में की शादी, DGCA ने दिए जाँच के निर्देश: होगी सख्त कार्रवाई

आसमान में शादी रचाने का एक नव दंपति का फैसला स्पाइसजेट के क्रू पर भारी पड़ा है। मिड-एयर शादी की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने सोमवार (मई 24, 2021) को क्रू के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उन्हें तत्काल डी-रोस्टर करने का निर्देश दिया है।

दरअसल, देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण कई राज्यों ने लॉकडाउन लगाया है। लॉकडाउन के कारण लोगों को शादी जैसे समारोह में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा और वे दिक्कतों से बचने के तरह-तरह के रास्ते निकाल रहे हैं। एक ऐसा ही मामला तमिलनाडु के मदुरै में सामने आया है। मदुरै के राकेश और दीक्षा ने हवाई जहाज में शादी की है। हालाँकि, इस मामले को लेकर डीजीसीए ने कार्रवाई करने की बात भी कही है। 

कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के कारण तमिलनाडु सरकार ने 31 मई तक लॉकडाउन लगा रखा है। ऐसे में राकेश और दीक्षा ने एक चार्टर्ड विमान किराए पर लिया और हवाई जहाज में शादी के बंधन में बँध गए। फ्लाइट मे 160 से अधिक गेस्ट भी थे। रिपोर्ट्स के अनुसार फ्लाइट ने मदुरै से उड़ान भरी। उड़ान दो घंटे की थी और इसी दौरान दोनों शादी के बंधन में बँधे। इस शादी की तस्वीर जल्द ही वायरल हो गई ।

गेस्ट का आरटी-पीसीआर टेस्ट करने का दावा

शादी की वायरस तस्वीरों में गेस्ट बिना मास्क के नजर आ रहे हैं और कोई सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी करता नजर नहीं आ रहा।  हालाँकि, इस कपल ने दावा किया कि सभी 160 यात्री उनके रिश्तेदार थे और उनका आरटी-पीसीआर टेस्ट किया गया था और नेगेटिव रिपोर्ट आने के बाद फ्लाइट में सवार हुए थे।

डीजीसीए ने शिकायत दर्ज करने का दिया निर्देश 

एयरपोर्ट के डायरेक्टर ने कहा, “मदुरै से एक स्पाइसजेट चार्टर्ड उड़ान बुक की गई थी। एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारी मिड एयर मैरिज सेरेमनी समारोह से अनजान थे।” वहीं, डीजीसीए ने कहा कि मिड-एयर मैरिज की जाँच शुरू कर दी है और एयरलाइंस और एयरपोर्ट अथॉरिटी से पूरी रिपोर्ट माँगी है। एयरलाइन ने संबंधित अधिकारियों के साथ कोविड नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है।

स्पाइसजेट ने बयान जारी करते हुए कहा कि बोइंग 737 को 23 मई को मदुरै में एक ट्रैवल एजेंट द्वारा यात्रियों के एक समूह के लिए उनकी शादी के बाद ट्रिप के लिए किराए पर लिया गया था। उन लोगों को स्पष्ट रूप से कोविड नियमों का पालन करने के बारे में बताया गया था और फ्लाइट में किसी भी समारोह की अनुमति नहीं दी गई थी। बार-बार अनुरोध और रिमाइंडर के बावजूद, यात्रियों ने COVID दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया। इसलिए अब एयरलाइन नियमों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है।

18-44 साल वालों का Covid वैक्सीन के लिए सरकारी केन्द्रों पर होगा ऑनसाइट रजिस्ट्रेशन, 19 करोड़ से अधिक को लगा टीका

दुनिया के सबसे बड़ी वैक्सीनेशन अभियान में और अधिक तेजी लाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 18-44 वर्ष आयु वर्ग के लिए CoWIN डिजिटल प्लेटफॉर्म की साइट पर रजिस्ट्रेशन करने की छूट दे दी है। 18 से अधिक उम्र वालों का ऑन-साइट रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट किया जा रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह निर्णय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दिए गए एप्लीकेशन के आधार पर लिया है।

सरकार के इस कदम का उद्देश्य वैक्सीन की बर्बादी को कम करना और इंटरनेट, स्मार्ट फोन या मोबाइल फोन तक पहुँच के बिना भी टीका लगाने की सुविधा देना है।

केंद्र सरकार ने बयान जारी कर कहा है, “ऑनलाइन स्लॉट के साथ रजिस्ट्रेशन कराने वाला व्यक्ति अपॉइंटमेंट के बावजूद जिस दिन नहीं आता है तो दिन के अंत तक कुछ वैक्सीन अनउपयोगी रह जाती हैं। ऐसे मामलों में कम से कम टीकों की बर्बादी हो इसके लिए लाभार्थियों के ऑन साइट रजिस्ट्रेशन भी होगा।”

शुरुआती चरण में सरकार यह सुविधा केवल सरकारी कोविड टीकाकरण सुविधाओं पर शुरू करेगी। वहीं हर राज्य अपने-अपने राज्यों में ऑन-साइट रजिस्ट्रेशन को एक्टिवेट करने के लिए खुद ही उत्तरदायी होगा।

सरकार द्वारा जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है, “राज्य व केंद्रशासित प्रदेश को स्थानीय परिस्थिति के आधार पर 18-44 वर्ष आयु वर्ग के लिए ऑन-साइट रजिस्ट्रेशन की सुविधा वाले समूहों के पंजीकरण और नियुक्तियों को खोलने का निर्णय लेना चाहिए, ताकि टीके की बर्बादी को कम करने और टीकाकरण की सुविधा के लिए एक अतिरिक्त उपाय किया जा सके।

केंद्र ने दी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की सलाह

स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सभी जिला टीकाकरण अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की सलाह दी है। साथ ही केंद्र ने सभी जिला टीकाकरण अधिकारियों को साइट पर रजिस्ट्रेशन समेत अन्य मुद्दों पर राज्य सरकार के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की सिफारिश भी की है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि टीकाकरण की सुविधा का लाभार्थी अधिकतम लाभ उठा सकें, इसके लिए टीकाकरण सेवाएँ प्रदान करने के लिए पूरी तरह से आरक्षित सत्र भी आयोजित किए जा सकते हैं। साथ ही ऐसे लाभार्थियों को पर्याप्त संख्या में जुटाने के लिए पहले से कोशिशें करने की आवश्यकता है।

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रजिस्ट्रेशन के दौरान अधिकतम सुरक्षा व सावधानी बरतने की नसीहत दी है, जिससे वैक्सीनेशन के दौरान सेंटरों पर अनावश्यक भीड़ से बचा जा सके।

देश के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है कि अब तक 19 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन के डोज लग चुके हैं।