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कोरोना काल में हिसार में जुटी ‘किसानों’ की भारी भीड़, राकेश टिकैत ने कहा- 2024 तक जारी रखेंगे आंदोलन

हरियाणा के हिसार में भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत की अगुवाई में हजारों किसान एकत्रित हुए हैं। इस दौरान काफी लोगों के चेहरे पर मास्क नहीं थे। यह प्रदर्शन बीते 16 मई को प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हुई हिंसक झड़प के बाद पकड़े गए प्रदर्शनकारियों पर मुकदमों के विरोध में हो रहा है। राकेश टिकैत ने कहा इस दौरान कहा कि किसानों पर दर्ज मुकदमे वापिस करवाकर ही हिसार से वापस जाएँगे।

टिकैत ने हिसार में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान किसान आंदोलन जल्द खत्म करने से इनकार करते हुए कहा कि हम 2024 तक आंदोलन करते रहेंगे। उन्होंने कोरोना काल में भीड़ एकत्र होने का ठीकरा सरकार पर फोड़ा।

टिकैत समेत कई किसान नेता मौजूद

सुबह से ही दूर-दूर से लोग हिसार में प्रदर्शन के लिए एकत्रित हो रहे थे। दोपहर तक बड़ी संख्या में लोग आ जुटे। राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार किसानों पर जुल्म कर रही है। किसान अपना हक माँग रहे हैं। इससे पहले टिकैत ने किसानों से दिल्ली में जुटने का आह्वान किया था। टिकैत ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि किसान आंदोलन शाहीन बागवाला धरना नहीं है, जिसे सरकार जब चाहे उखाड़ फेंके, दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे किसानों के जत्थे नए कृषि कानून वापस होने के बाद ही हटेंगे।

आखिर क्या हुआ था हिसार में?

मई महीने के मध्य में हिसार में प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई थी। जिसमें काफी प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी जख्‍मी हुए थे। पुलिस ने 300 से अधिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी और 80 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था। राकेश टिकैत समेत किसान संगठनों के कई नेताओं ने इसका विरोध किया।

हिसार में विरोध-प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है, जब 26 मई को दिल्‍ली में किसान संगठनों ने सरकार द्वारा पास तीन कृषि बिलों के विरोध में काला दिवस मनाने का ऐलान किया है।

किसान संगठनों ने किया है 26 मई को काला दिवस मनाने का ऐलान

गौरतलब है कि संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने कृषि कानूनों के विरोध में 26 मई को देशव्यापी काला दिवस मनाने का फैसला किया है। रविवार (मई 23, 2021) को कॉन्ग्रेस समेत 12 बड़ी विपक्षी पार्टियों ने संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान का समर्थन किया है। इसमें पाँच मौजूदा मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। इस दिन किसान आंदोलन को शुरू हुए 6 महीने पूरे हो जाएँगे।

12 विपक्षी दलों की तरफ से संयुक्त किसान मोर्चा के समर्थन में जारी किए गए ताजा बयान में 23 मई को लिखे गए पत्र का भी जिक्र किया गया, जिसमें नए कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग की गई थी। इसमें कहा गया था कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। इससे आंदोलन कर रहे किसान सीमाओं से लौट जाएँगे और लाखों अन्नदाताओं को महामारी का शिकार होने से बचाया जा सकता है। कृषि कानूनों को तत्काल निरस्त करने के अलावा विपक्षी नेताओं ने स्वामीनाथन आयोग द्वारा अनुशंसित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) C2+50 प्रतिशत के कानूनी अधिकार की माँग भी की।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान संगठन केन्द्र के साथ बातचीत फिर शुरू करने को तैयार हैं, लेकिन यह बातचीत नए कृषि कानूनों को वापस लेने पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि माँगें पूरी होने से पहले किसानों के प्रदर्शन स्थल से हटने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। मीडिया से बातचीत के दौरान टिकैत ने कहा कि जब सरकार बात करना चाहेगी, संयुक्त किसान मोर्चा बात करेगा। 

अमरिंदर सिंह ने की प्रस्तावित धरना प्रदर्शन न करने की अपील

कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन से प्रस्तावित 3 दिन के धरना प्रदर्शन को रोकने की अपील की। सीएम ने संगठन से कहा है कि प्रदर्शन करने से कोरोना वायरस का संक्रमण काफी तेजी से फैल सकता है। दरअसल किसान संगठन ने राज्य सरकार पर कोरोना की स्थिति से निपटने में असफल रहने का आरोप लगाते हुए 28 मई को पटियाला में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया था।

इससे पहले भारतीय किसान संघ (BKU) के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने दिल्ली बॉर्डर पर केन्द्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए प्रदर्शन स्थलों के पास ही कोविड टीकाकरण केंद्र बनाने की माँग की। टिकैत का बयान ऐसे समय में आया, जब सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे दो किसानों की मृत्यु हो गई और उनमें से एक किसान कोरोना वायरस से संक्रमित था।

‘कॉन्ग्रेस टूलकिट’ को ‘Manipulated media’ बताने पर दिल्ली पुलिस ने ट्विटर इंडिया को भेजा नोटिस: माँगे सबूत

कॉन्ग्रेस टूलकिट मामले में दिल्ली पुलिस ने सोमवार (24 मई 2021) को ट्विटर को नोटिस भेजा है। पुलिस ने सोशल मीडिया कंपनी से पूछा है कि उनके पास ऐसी कौन सी जानकारी है जिसके आधार पर वो बीजेपी नेताओं और अन्य लोगों के ट्वीट को ‘manipulated’ यानी भ्रामक बता रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ट्विटर से जानकारी साझा करने को कहा है। स्पेशल सेल के वरिष्ठ सूत्र के मुताबिक, फिलहाल इस मामले में किसी प्रकार की कोई एफआईआर दर्ज नही की गई है। लेकिन, हम शुरुआती तौर पर मामले की छानबीन कर सबूत इकट्ठे करने की कोशिश कर रहे हैं।

ट्विटर को भेजा गया दिल्ली पुलिस का नोटिस

दिल्ली पुलिस ने ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी को 22 मई, 2021 को इस केस से जुड़े दस्तावेजों के साथ पुलिस के सामने पेश होने को कहा था। इस पर जवाब देते हुए माहेश्वरी ने कहा था कि वह ट्विटर कम्युनिकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सेल्स हेड हैं। जबकि, उनके वेरीफाइड ट्विटर अकाउंट के मुताबिक वे ट्विटर इंडिया के एमडी हैं।

इससे पहले ट्विटर ने 21 मई को मोदी सरकार को निशाना बनाने के लिए कॉन्ग्रेस द्वारा तैयार किए गए कथित टूलकिट पर संबित पात्रा के एक ट्वीट को मैनिपुलेटेड मीडिया करार दे दिया था। ट्विटर का कहना है कि वह “उन ट्वीट्स को लेबल कर सकता है, जिनमें मीडिया (वीडियो, ऑडियो और इमेज) शामिल हैं जिन्हें भ्रामक रूप से बदल दिया गया है या गढ़ा गया है।” इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा कड़ी आपत्ति जताते हुए ट्विटर से यह टैग हटाने के लिए कहा गया था।

हालाँकि, अमेरिकी सोशल मीडिया साइट्स पर सरकार की लताड़ का कोई असर नहीं हुआ। उसने शनिवार (22 मई 2021) को राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे, भाजपा की राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी प्रीति गाँधी, आंध्र प्रदेश के सह प्रभारी सुनील देवधर, भाजपा की मीडिया पैनलिस्ट चारू प्रज्ञा और दिल्ली भाजपा के महासचिव कुलजीत सिंह चहल के ट्वीट में ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का टैग लगा दिया था। इसके अलावा ‘कॉन्ग्रेस टूलकिट’ शेयर करने वाले कई अन्य लोगों के ट्वीट्स में भी ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का टैग लगा दिया था।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने बुधवार (19 मई, 2021) को ट्विटर को एक ईमेल भेज कर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रवक्ता संबित पात्रा, केंद्रीय कपड़ा और महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष समेत कई पार्टी पदाधिकारियों के हैंडल्स को सस्पेंड करने को कहा था। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया था कि जिस दस्तावेज को उसका टूलकिट बता कर शेयर किया जा रहा है, वो फर्जी है।

‘भाजपा से नाराज़ है संघ, फैसले लेने से पहले मंत्रियों तक से नहीं पूछा जाता’: RSS ने ‘इंडिया टुडे’ के लेख को बताया शरारत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने ‘इंडिया टुडे’ में छपे एक लेख का खंडन किया है, जिसमें संघ और भाजपा के बीच अनबन होने की बात की गई है। इस लेख में दावा किया गया है कि कभी RSS के प्रचारक रहे नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के 7 साल पूरे होने तक कभी ये नहीं सोचा होगा कि संघ के साथ उनके रिश्ते इस कदर खराब होंगे। लेख के अनुसार, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटाने के बावजूद कोरोना की दूसरी लहर ने जिस तरह मई के पहले 10 दिनों में ही 40,000 लोगों की जान ली, उससे संघ नाराज़ है।

‘इंडिया टुडे’ की फरवरी 24, 2021 को जारी हुए अंक में ये लेख संस्थान के सीनियर एडिटर अनिलेश एस महाजन ने लिखा है और भाजपा व RSS में मनमुटाव की बात की है। लेख की मानें तो संघ का पूरा ध्यान राहत कार्य पर है, जबकि जमीन पर सरकार के नदारद रहने से वो नाराज़ भी है। इसमें लिखा है कि पिछले साल की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार देश को सम्बोधित भी नहीं किया है और उनके मंत्रीगण केवल सोशल मीडिया पर ही सक्रिय हैं।

साथ ही एक ‘वरिष्ठ RSS नेता’ के हवाले से लिखा है, “भारत में कोरोना की दूसरी लहर काफी विपत्तिपूर्ण रही है। पिछले साल के मुकाबले अबकी काफी ज्यादा लोग मारे गए। सभी लोग चिंतित हैं, लेकिन अभी आलोचना करने का सही समय नहीं है।” साथ ही सरसंघचालक मोहन भागवत के एक बयान “क्या जनता, क्या शासक – सभी गफलत में आ गए” का जिक्र किया गया है। साथ ही भागवत द्वारा उर्दू शब्द इस्तेमाल करने की ओर ध्यान खींचा गया है।

RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अम्बेकर ने इस लेख का खंडन करते हुए लिखा, “पाक्षिक पत्रिका ‘इंडिया टुडे’ की 31 मई, 2021 के अंक में प्रकाशित रिपोर्ट आधारहीन, मनगढ़ंत और तथ्यों के विपरीत है। उपरोक्त विषय पर RSS अधिकारियों के साथ कोई चर्चा नहीं हुई। महामारी में संघ की भूमिका पर बात हुई। सरकार की भूमिका के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। सामान्य बातचीत को सनसनी फैलाने के उद्देश्य से बिना किसी तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है।”

संघ की तरफ से आए आधिकारिक बयान में ये भी कहा गया है कि कोरोना के इस विपत्तिकाल में केवल भ्रान्ति फैलाने के उद्देश्य से लिखी गई इस शरारतपूर्ण रिपोर्ट को हम सिरे से ख़ारिज करते हैं। उक्त लेख में भाजपा से वापस संघ में बुलाए गए राम माधव के भी एक लेख का जिक्र है, जिसमें उन्होंने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और उचित आलोचना के स्वागत की बात की थी। संघ नेताओं के हवाले से दावा किया गया है कि कोई भी निर्णय लेने में मंत्रियों तक से सलाह नहीं ली जाती है।

लेख के इस हिस्से को अब हटा दिया गया है

यहाँ तक कि इस लेख में कृषि कानूनों और ‘सार्वजनिक कंपनियों को प्राइवेट बनाने’ के लिए भी संघ को नाराज़ बता दिया गया है। साथ ही ये भी लिखा है कि RSS एक हद से आगे न बढ़ते हुए सरकार को समय दे रहा है। लेख के अनुसार, संघ को उम्मीद है कि स्थिति सुधरने के साथ पासा पलटेगा और ऑक्सीजन सप्लाई मजबूत होने से ऐसा हो भी रहा है; संघ को आशा है कि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ेगी।

RSS के खंडन के बाद ‘इंडिया टुडे’ ने लेख को अपडेट करते हुए दवा किया है कि वो इस लेख के ‘सब्स्टांस’ के साथ अब भी खड़ा है। लेकिन, इसमें संघ के सह कार्यवाह अरुण कुमार के बयान को हटाया गया है। इसमें अरुण कुमार को देश के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर के विजयराघवन पर निशाना साधते हुए बताया गया था। लिखा था कि अरुण कुमार ने पूछा है कि आखिर तीसरे लहर की आशंका जताने वाले राघवन ने दूसरी लहर को लेकर क्यों नहीं चेताया?

वैसे ये पहली बार नहीं है जब ‘इंडिया टुडे’ या इसके पत्रकारों ने इस तरह की हरकत की हो। ‘किसान आंदोलन’ के दौरान जब प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में उत्पात मचाया था, जब चैनल के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक प्रदर्शनकारी के पुलिस की गोली से मारे जाने की अफवाह फैलाई थी। और तो और, ‘इंडिया टुडे’ अपनी ही फेक न्यूज़ का फैक्ट-चेक कर चुका है। भाजपा विरोधी प्रोपेगंडा का उसका पुराना इतिहास रहा है।

‘मैरिज सर्टिफिकेट के बिना किसी की मौत नहीं हो रही’: समलैंगिक शादी पर तत्काल सुनवाई का केंद्र ने HC में किया विरोध

समलैंगिक शादी को मान्यता देने से जुड़ी याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई का केंद्र सरकार ने विरोध किया है। दिल्ली हाई कोर्ट से केंद्र ने कहा कि अदालत अभी अत्यंत जरूरी मामलों की सुनवाई कर रही है। लिहाजा रोस्टर के हिसाब से इस पर गौर किया जाए।

केंद्र की दलीलों के बाद मामले की सुनवाई 6 जुलाई तक स्थगित कर दी गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने याचिका पर सुनवाई को लेकर स्थगन-पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि देश फिलहाल एक महामारी से निपट रहा है। अन्य जरूरी मामले हैं जिन पर विचार करने की आवश्यकता है। मेहता ने कहा, “एक सरकार के रूप में, तात्कालिकता के संदर्भ में हमारा ध्यान वर्तमान मुद्दों पर है।” उन्होंने कोर्ट से यह भी कहा कि इस समय कानून अधिकारी भी महामारी से संबंधित मामलों से निपट रहे हैं।

वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता सौरभ कृपाल ने कहा कि सरकार को तटस्थ होना चाहिए और कोर्ट को तात्कालिकता निर्धारित करनी होगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश एक अन्य वकील डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने अदालत से कहा कि अस्पतालों में प्रवेश और उपचार के लिए भी इसकी जरूरत पड़ रही है। इसके जवाब में मेहता ने कहा, “अस्पतालों के लिए विवाह प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। मैरिज सर्टिफिकेट के बिना किसी की मौत नहीं हो रही है।”

इससे पहले समलैंगिक विवाह को लेकर अपना रुख साफ करते हुए केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट से कहा था कि सेम सेक्स के जोड़े का पार्टनर की तरह रहना, भारतीय परिवार नहीं माना जा सकता और इसे मान्यता देने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। केंद्र ने कहा था, “हमारे देश में, एक पुरुष और एक महिला के बीच विवाह के संबंध की वैधानिक मान्यता के बावजूद, विवाह आवश्यक रूप से उम्र, रीति-रिवाजों, प्रथाओं, सांस्कृतिक लोकाचार और सामाजिक मूल्यों पर निर्भर करता है।”

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर हिंदू विवाह अधिनियम के तहत समान लिंग विवाह को मान्यता देने की माँग की गई है। याचिका अभिजीत अय्यर मित्रा, गोपी शंकर एम, गीति थडानी और जी ओरवसी ने दायर कर रखी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हिंदू विवाह अधिनियम किसी भी दो हिंदुओं की शादी को अनुमति देता है। इसमें कहीं ऐसा नहीं कहा गया है कि शादी आदमी और औरत के बीच ही होनी चाहिए। लिहाजा समलैंगिकों को भी शादी का अधिकार होना चाहिए और उनकी शादी को मान्यता दी जानी चाहिए।

तौलिए में ली क्लास, लड़कियों पर किए सेक्शुअल कमेंट: चेन्नई के PSBB स्कूल के छात्रों ने शिक्षक के खिलाफ शुरू किया ऑनलाइन अभियान

चेन्नई में स्कूलों के एक समूह, पद्म शेषाद्री बाला भवन (PSBB) के पूर्व और वर्तमान छात्रों ने एक शिक्षक पर छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया में अपनी आपबीती शेयर की। शिक्षक की पहचान राजगोपालन के रूप में हुई है। इसकी शुरुआत ट्विटर से हुई, जहाँ पर कुछ प्रतिभागियों ने स्कूल परिसर में भेदभाव का आरोप लगाया। ट्विटर पर इसकी शुरुआत होते ही कई छात्राओं ने अपने साथ घटित हुए भयानक किस्से साझा किए। जल्द ही, पूर्व और वर्तमान दोनों छात्र, इस शिक्षक से जुड़े अपने खराब अनुभव बताने के लिए आगे आए।

गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने ऑनलाइन अभियान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उक्त शिक्षक वर्तमान में चेन्नई के पीएसबीबी स्कूल की केके नगर शाखा में नियुक्त है।

मॉडल कृपाली समदरिया ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक अभियान शुरू किया है और सभी से अपने अनुभव साझा करने का आग्रह किया है ताकि शिक्षक के कथित अनुचित व्यवहार को उजागर किया जा सके। उन्हें स्कूल के दौरान और स्कूल के बाद राजगोपालन के साथ भयानक अनुभव बताते हुए कई मैसेज प्राप्त हुए। विशेष रूप से, 2018 में एक इंटरव्यू में, कृपाली ने उल्लेख किया था कि दुबले होने के कारण उन्हें शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी।

राजगोपालन ने तौलिये में ली ऑनलाइन क्लास

कृपाली के साथ अपनी आपबीती साझा करने वाले छात्रों में से एक ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया कि राजगोपालन ने तौलिए में ऑनलाइन क्लास लिया। उसने लिखा, “वह अपने बाथरूम से सीधे कमर में तौलिया लपेट कर क्लास में आया था।” छात्र ने सबूत के तौर पर कृपाली के साथ एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया।

राजगोपालन तौलिए में क्लास अटेंड करते थे (साभार: कृपाली समदरिया इंस्टाग्राम स्टोरी)

रात में वीडियो कॉल और लड़कियों से ‘डेट’ पर चलने के लिए कहा

कई छात्राओं ने आरोप लगाया कि राजगोपालन ने उनके शरीर पर अनुचित टिप्पणी की, अनुचित तरीके से छुआ और फिल्मों के लिए बाहर चलने के लिए कहा। छात्राओं में से एक ने डायरेक्ट मैसेज (DM) में उल्लेख किया कि राजगोपालन ने उसके कई बैचमेट्स और जूनियर्स को परेशान किया। लड़की, जो वर्तमान में स्कूल में एक छात्रा है, ने कहा कि राजगोपालन ने उसकी एक दोस्त को फिल्म देखने चलने को कहा। उसने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षक ने क्लास ग्रुप में एक अश्लील लिंक साझा किया।

वह क्लास ग्रुप में अश्लील लिंक भेजता था (साभार: कृपाली समदरिया इंस्टाग्राम स्टोरी)

उसने यह भी कहा कि उसने तस्वीरें माँगी और छात्राओं से देर रात तक वीडियो कॉल पर बात करने के लिए कहा।

वीडियो कॉल के लि कहता था (साभार: कृपाली समदरिया इंस्टाग्राम स्टोरी)

छात्रा ने व्हाट्सएप पर भेजे गए संदेशों के स्क्रीनशॉट भी साझा किए, जिसमें वह छात्रा की पोशाक की अनुचित रूप से सराहना कर रहा था।

नाबालिग लड़की को भेजा गया व्हाट्सएप मैसेज (साभार: कृपाली समदरिया इंस्टाग्राम स्टोरी)

जिस छात्रा से राजगोपालन ने फिल्म देखने जाने के लिए कहा था, वह भी आगे आई और मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर किया। उसने कहा कि वह उसके प्रोजेक्ट चेक करने के अनुरोध की अनदेखी कर रहा था। एक दिन जब उसने राजगोपालन को मैसेज करके प्रोजेक्ट चेक करने के लिए कहा तो वह मान गया और अगले ही दिन उसने उसे बाहर फिल्म देखने चलने के लिए मैसेज किया।

उसने पूछा था, “आज तुम फ्री हो क्या, हम मूवी देखने जा सकते हैं।” जब छात्रा ने उसे कॉर्नर करते हुए सवाल किया कि उसे एक शिक्षक का ऐसा कहना अनुचित लगता है, तो उसने दावा किया कि वह किसी और को यह मैसेज भेज रहा था, जो गलती से उसके पास चला गया।

उसने लड़की से फिल्म देखने के लिए चलने बोला (साभार: कृपाली समदरिया इंस्टाग्राम स्टोरी)

एक पूर्व छात्रा ने कहा कि उसने कक्षा के सामने उसे गले लगाने की कोशिश की थी। एक अन्य छात्र ने एक छात्रा के स्तन के बारे में उस शिक्षक के द्वारा क्लास में सुनाया गया एक बहुत ही अनुचित चुटकुला साझा किया। कई छात्रों ने कहा कि उनके व्यवहार को अक्सर साथी छात्रों और यहाँ तक कि स्कूल के प्रशासन द्वारा भी सामान्य बताया जाता है। अफसोस की बात है कि राजागोपालन यौन उत्पीड़न समिति का प्रमुख था।

एक अन्य छात्रा ने आपबीती तब साझा की जब वह पाँच साल पहले हांकांग में एक स्कूल प्रतियोगिता में उसके साथ गई थी। यात्रा के दौरान, उसने छात्रा के साथ सेक्शुअल जोक किए और यहाँ तक कि उसे शराब पिलाने की भी कोशिश की। वह उस समय 16 साल की थी। जब उसने बार-बार मना किया, तो उसने उसे नीचा दिखाया और पुरस्कार न जीतने के लिए उसे शर्मिंदा किया। उसने कहा कि वह भी हांगकांग में छात्राओं के साथ खरीदारी करने के लिए भी गया और उनके द्वारा खरीदे गए कपड़ों के बारे में अनुचित प्रश्न पूछे।

एक छात्रा ने अपने उस दोस्त के बारे में बताया जिसके घुँघराले बाल थे। लड़के उसे चिढ़ा रहे थे और उसके बाल जबरदस्ती खींच रहे थे। जब राजगोपालन ने उसकी चीख सुनी, तो उसने कथित तौर पर कहा, “तुम ऐसे क्यों चिल्ला रही हो जैसे तुम्हारा बलात्कार किया जा रहा है।”

छात्रा पर रेप कमेंट

लड़कों को भी नहीं बख्शा गया

छात्रों में से एक आगे आया और आपबीती साझा की। उसने आरोप लगाया कि राजगोपालन ने स्कूल में फोन लाने का आरोप लगाते हुए उसकी तलाशी लेते हुए उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ था।

उसने लड़कों का भी उत्पीड़न किया

अन्य शिक्षकों पर भी आरोप

कई छात्रों ने कक्षा में अनुचित व्यवहार के लिए अन्य शिक्षकों को भी निशाने पर लिया। छात्रों में से एक ने संस्कृत के एक पूर्व शिक्षक के बारे में बात की जो छात्रों को गाली देता था, बिना किसी स्पष्ट कारण के उन्हें थप्पड़ मारता था और यहाँ तक कि छात्राओं के साथ खुले तौर पर फ्लर्ट भी करता था। वह ‘गलती से’ लड़कियों के चेंजिंग रूम में चला जाता था और लड़कों और लड़कियों दोनों को अनुचित तरीके से छूता था। इंस्टाग्राम स्टोरी में एक महिला जीव विज्ञान शिक्षक का उल्लेख किया गया था, जो पुरुष छात्रों के साथ खुले तौर पर फ्लर्ट करती थी, लड़कियों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करती थी और कक्षा में अपशब्दों का इस्तेमाल करती थी। वह छात्रों के साथ यौन टिप्पणी और मजाक भी करती थी।

प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं

कई छात्रों ने उल्लेख किया कि उन्होंने उपयुक्त अधिकारियों से संपर्क किया था जिन्होंने किसी भी शिकायत का जवाब नहीं दिया। यहाँ तक कि अभिभावकों की शिकायतों पर भी ध्यान नहीं दिया गया और छात्रों को चुप रहने की चेतावनी दी गई। कई शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया, और छात्रों को कथित तौर पर राजगोपालन या पीएसबीबी में किसी अन्य शिक्षक के खिलाफ शिकायत करने के लिए हंसी का पात्र बना दिया गया। छात्रों को चुप रहने के लिए कहा गया था अन्यथा उनका ‘भविष्य बर्बाद हो जाएगा।’

DMK सांसद ने की जाँच की माँग

डीएमके सांसद और महिला विंग सचिव कनिमोझी ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए कहा, “चेन्नई के PSBB स्कूल में एक कॉमर्स टीचर पर यौन उत्पीड़न का आरोप चौंकाने वाला है। इसकी जाँच की जानी चाहिए और स्कूल अधिकारियों समेत उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए जो जो छात्रों की शिकायतों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।”

स्कूल प्रशासन ने जारी किया बयान

मामले पर PSSB स्कूल ने भी बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि इस तरह की शिकायतें भविष्य में कभी भी प्रबंधन के समक्ष नहीं आई थी। मगर अब स्कूल प्रशासन स्वत: संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई करेगा।

अब देश में आया यलो फंगस, ब्लैक और व्‍हाइट से है ज्यादा खतरनाक; कई अंगों पर सीधे अटैक: जानिए लक्षण और इलाज

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों और उसके बाद आए ब्‍लैक फंगस व व्‍हाइट फंगस से देश पहले से ही त्रस्‍त है। इसी बीच भारत में यलो फंगस (Yellow Fungus) ने भी दस्‍तक दे दी है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रविवार (24 मई 2021) को यलो फंगस का पहला मामला सामने आया है। यलो फंगस की चपेट में आए 34 वर्षीय मरीज का इलाज फिलहाल गाजियाबाद के एक अस्पताल में चल रहा है। वह कोरोना से संक्रमित भी रह चुका है और डाइबिटीज से भी पीड़ित है।

ब्‍लैक, व्‍हाइट फंगस से कहीं ज्यादा खतरनाक है यलो फंगस (Yellow Fungus)

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यलो फंगस (Yellow Fungus) ब्‍लैक और व्‍हाइट फंगस से कहीं ज्यादा खतरनाक है और घातक बीमारियों में से एक है। बताया जा रहा है कि यलो फंगस पहले शरीर को अंदर से कमजोर करता है फिर जैसे-जैसे फंगस का असर बढ़ता है मरीज का वजन तेजी से कम होने लगता है। इसके बाद यह ज्यादा घातक रूप ले लेता है।

ये हैं Yellow Fungus के लक्षण

येलो फंगस के मरीज को सुस्ती लगना, कुपोषण, भूख कम लगना या बिल्कुल भी भूख न लगना जैसे शुरुआती लक्षण सामने आते हैं। साथ ही मरीज का वजन भी कम होने लगता है। वहीं, इस दौरान यदि किसी को घाव है तो उसमें से मवाद निकलना शुरू हो जाती है और घाव बहुत ही धीमी गति से ठीक होता है। इसके मरीज की आँखें भी अंदर धँस जाती हैं शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं।

अगर किसी मरीज को काफी समय से सुस्‍ती लग रही है, कम भूख लगती है या फिर खाने का बिल्‍कुल भी मन नहीं करता तो इसे नजरअंदाज नहीं करें और तुरंत डॉक्‍टर के पास जाएँ। इसका एकमात्र इलाज amphoteracin b इंजेक्शन है, जो एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीफंगल है।

यलो फंगस होने के कारण

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाकी दोनों फंगस की तरह यलो फंगस भी गंदगी के कारण तेजी से फैलता है और यह किसी भी मरीज को हो सकता है। लिहाजा अपने घर के अंदर और आस-पास सफाई रखें। बैक्टीरिया और फंगस को विकसित होने से रोकने के लिए जितनी जल्दी हो सके पुराने खाद्य पदार्थों को हटा दें। इसके अलावा घर में नमी का होना भी बैक्टीरिया और फंगस को बढ़ाता है। इसलिए सफाई और स्‍वच्‍छता का ध्‍यान रखकर इस बैक्‍टीरिया या फंगस को दूर किया जा सकता है।

क्या है ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस?

व्हाइट फंगस‘ अगर किसी के शरीर में प्रवेश कर गया तो वो उसके फेंफड़ों के साथ-साथ नाखून, चमड़ी, पेट, किडनी, दिमाग और मुँह के अलावा प्राइवेट पार्ट्स को भी निशाना बनाता है, इसीलिए इसे ‘ब्लैक फंगस’ से ज्यादा खतरनाक बताया गया है। इसकी प्रकृति कोविड-19 वायरस की तरह ही है।

ये हाई रिजोल्यूशन सिटी (HRCT) स्कैन से पकड़ में आता है। अगर इसका संक्रमण फैलता है तो फिर देश के स्वास्थ्य व्यवस्था को तीन मोर्चों पर लड़ाई लड़नी पड़ेगी। जैसे कोरोना मुख्यतः मरीज के फेंफड़ों को निशाना बनाता है, ये भी वैसा ही करता है लेकिन कई अन्य अंगों पर भी दुष्प्रभाव छोड़ता है। मुँह के भीतर ये घाव का कारण बन जाता है। 

वहीं, ब्लैक फंगस को Mucormycosis या Zygomycosis भी कहते हैं, जो Mucormycetes नामक फफूँदी समूह के कारण पैदा होते हैं। अगर इसका इलाज नहीं किया जाए तो ये काफी ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। अगर आपके सर व चेहरे में दर्द है, साँस लेने में तकलीफ हो रही है, मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, उलटी में खून निकल रहा हो और देखने में परेशानी हो रही हो तो जल्द ही डॉक्टर से संपर्क करें।

इसके इलाज के लिए प्रतिदिन इन्ट्रावेनस इंजेक्शन दिया जाता है, जिसकी कीमत 3500 रुपए के आसपास होती है। लगभग 8 हफ़्तों तक इसे रोज लेने की ज़रूरत पड़ सकती है। ये फ़िलहाल अकेला ड्रग है, जिससे सफलतापूर्वक इसका इलाज हो रहा है। ‘ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया’ ने इस साल मार्च में सीरम की दवा Liposomal Amphotericin B (LAmB) को मंजूरी दी। इसकी और भी दवाएँ आ सकती हैं।

‘ये मुस्लिम नहीं संघी है, इसका नाम अमित सिंह है’: पटना के ‘खान सर’ पर भड़के कट्टरपंथी, यूँ समझाया था सुरेश और अब्दुल का फर्क

पटना स्थित ‘Khan GS Research Centre’ के संचालक और यूट्यूब के जरिए अलग अंदाज़ से पढ़ाने वाले शिक्षक ‘खान सर’ सोशल मीडिया पर विवादों में हैं। कोई उन्हें संघी बता रहा है तो कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक। ‘खान सर’ को लेकर ‘रिपोर्ट ऑन खान सर’ और ‘फेक खान सर’ जैसे कई ट्रेंड्स चल रहे हैं। साथ ही उनके कुछ वीडियोज के क्लिप्स भी शेयर किए जा रहे हैं और उन्हें ‘अमित सिंह’ बताया जा रहा है।

बता दें कि यूट्यूब पर ‘खान सर’ के 92.7 लाख सब्सक्राइबर्स हैं। ‘टीपू सुल्तान पार्टी’ ने खान सर की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “हमें नहीं पता कि ये व्यक्ति मुस्लिम है भी या नहीं लेकिन ये निश्चित रूप से एक संघी है।” इस ट्वीट की रिप्लाई में सलीम शेख ने कहा कि ये मुस्लिम नहीं हो सकता। वहीं किसी ने इसे ‘संघी खान’ बताया तो किसी ने दावा किया कि उनका असली नाम अमित सिंह है और उनकी अकादमी के छात्रों ने उन्हें ‘खान सर’ का नाम दे दिया है।

राहुल मिश्रा नामक यूजर ने ट्विटर पर रक वीडियो शेयर किया, जिसमें खान सर कहते दिख रहे हैं, “मोदी जी मैं आपको गारंटी देता हूँ कि आपको हराने वाले कोई होगा ही नहीं, जब तक मुस्लिम लोग आपको गाली देना नहीं छोड़ेंगे।” साथ ही उन्होंने साजिद रशीदी, शोएब जमाई और अंसार रजा जैसों के लिए ‘बकलोल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ये हिन्दुओं और मोदी को गाली देने के लिए पैसे मिलते हैं।

मोहम्मद समीर विंधानी ने खान सर को ‘फेक मुस्लिम’ बताते हुए लिखा कि उनका असली नाम अमित सिंह है। इसके लिए उसने खान सर के एक कथित इंटरव्यू का टेक्स्ट शेयर किया, जिसमें लिखा है कि एक बैच में उन्हें ‘फैज़ल खान’ नाम दे दिया, वरना पहले लोग उन्हें अमित सिंह कहते थे।

अमित शर्मा नामक यूजर ने भी खान सर का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि उन्होंने काफी अच्छे से सुरेश और अब्दुल के बीच का अंतर समझाया है। इसमें खान सर कहते हैं, “समास का एक प्रकार है द्वन्द समास, जिसमें एक ही चीज के 2 अर्थ होते हैं। जैसे, सुरेश ने जहाज उड़ाया। अब्दुल ने जहाज उड़ाया। दोनों के अलग-अलग अर्थ हैं। सुरेश ने जहाँ जहाज चलाया, वहीं अब्दुल ने उड़ाया मतलब भड़काया।”

एक ने तो उनकी तलाक लगी तस्वीर शेयर कर के उनके हिन्दू होने का दावा किया। फेसबुक पर एक यूजर द्वारा शेयर किए गए वीडियो में खान सर कहते दिख रहे हैं कि पहली बार जब एक कोचिंग में गए तो वहाँ लड़के नहीं थे, लेकिन उनके पढ़ाने के बाद लड़के इतने बढ़ गए कि कोचिंग वालों के भीतर डर बैठ गया कि ये लड़के उनके पीछे न चले जाएँ, इसीलिए उन्होंने नाम व नंबर जाहिर न करने की शर्त रखते हुए उन्हें ‘खान सर’ नाम दे दिया।

थनोस नामक यूजर ने आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए भाजपा नेता मुख़्तार अबबस नकवी को ‘ओल्ड वैरिएंट’ तो खान सर की तस्वीर शेयर करते हुए ‘न्यू वैरिएंट लिखा।’ एक वीडियो में खान सर ने मुस्लिम मुल्कों के संगठन OIC के लिए ‘मदरसा छाप’ शब्द का प्रयोग किया। एक ट्विटर यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए तंज कसा कि क्या उनके खिलाफ FIR होगी?

एक ट्विटर यूजर ने दावा किया कि खान सर आतंकवाद के खिलाफ हैं, इसीलिए मुस्लिम समाज के लोग उनका विरोध कर रहे हैं। हालाँकि, इस दौरान कई लोग खान सर के समर्थन में भी सामने आए और उनके पढ़ाने के अंदाज़ और रिसर्च की तारीफ़ की।

सूर्य के चारों ओर इंद्रधनुषी गोला: Sun Halo के कारण बेंगलुरु के लोगों को आज दिखा यह ‘आश्चर्य’

बेंगलुरु के लोगों ने जब सोमवार (24 मई) सुबह आसमान की ओर देखा तो वह सूरज के चारों ओर एक इंद्रधनुषी रिंग या गोला देखकर आश्चर्यचकित से रह गए। इस इंद्रधनुषी रिंग से सूरज एक अलग ही अंदाज में नजर आया।

फिर क्या था लोगों ने सूरज की मनमोहक तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।


क्या है Sun Halo

इस घटना को 22-डिग्री halo के रूप में जाना जाता है क्योंकि सूर्य या चंद्रमा के चारों ओर बनने वाले इस गोले की त्रिज्या लगभग 22 डिग्री होती है।

22-डिग्री halo एक प्रकाशीय घटना है जो आइस-क्रिस्टल halo के परिवार से संबंधित है। सूर्य या कभी-कभी चंद्रमा का halo (प्रभामंडल) (जिसे मून रिंग या विंटर halo भी कहा जाता है), तब बनता है जब सूर्य या चंद्रमा की किरणें सिरस (cirrus) क्लाउड में मौजूद हेक्सागोनल (षट्कोण) आइस क्रिस्टल के माध्यम से विक्षेपित/अपवर्तित हो जाती हैं। इन बादलों में लाखों छोटे बर्फ के क्रिस्टल होते हैं, जो एक गोलाकार इंद्रधनुषी रिंग का आभास देने के लिए प्रकाश को अपवर्तित, विभाजित और यहां तक कि परावर्तित करते हैं। halo के प्रकट होने के लिए, क्रिस्टल को आपकी आंख के संबंध में चमकदार और सही अवस्था में होना चाहिए।

एक और ऐसी घटना है जिसके परिणामस्वरूप सूर्य या चंद्रमा के चारों ओर एक रिंग या गोले का निर्माण होता है और कभी-कभी इसके भी 22-डिग्री helo होने का भ्रम होता है। इस घटना का नाम कोरोना है। हालाँकि 22-डिग्री helo के विपरीत, यह बर्फ के क्रिस्टल के बजाय पानी की बूंदों द्वारा निर्मित होता है और यह बहुत छोटा और अधिक रंगीन होता है।

भले ही यह एक दुर्लभ ब्रह्मांडीय घटना लगे, लेकिन Google सर्च करने से पता चलता है कि helo सामान्य घटनाएँ हैं जो दुनिया भर में नियमित रूप से नजर आती हैं। ठंडे देशों में helo का दिखना बहुत आम बात है लेकिन उष्णकटिबंधीय देश होने के कारण भारत में यह दुर्लभ और अप्रत्याशित घटना है।

नशे का इंजेक्शन दे कंटेनर में ठूँस रखे थे गोवंश, सिख के भेष में था ड्राइवर, ले जा रहे थे मेवात: झारखंड में प्रतिबंधित माँस के साथ 3 गिरफ्तार

हरियाणा के पानीपत में 22 गोवंश को तस्करों से बचाया गया है। इन्हें पंजाब से मेवात ले जाया जा रहा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 22 बैल एक कंटेनर में ठूँस कर रखे गए थे। इन्हें नशे का इंजेक्शन दिया गया था।

गोरक्षकों ने शनिवार (22 मई 2021) को बाबरपुर मंडी के पास जीटी रोड पर नाका लगाकर इस कंटेनर को पकड़ा। गोरक्षा दल हरियाणा के उपाध्यक्ष आजाद सिंह आर्य के हवाले से दैनिक जागरण ने बताया है कि उन्हें अंबाला की तरफ से गोवंश का कंटेनर आने की सूचना मिली थी। जिस वाहन पर कंटेनर लदा था उसके चालक ने धोखा देने के लिए सिख का भेष बना रखा था।

गोरक्षकों ने रोकने की कोशिश की तो उनको कुचलने का प्रयास भी ड्राइवर ने किया। लेकिन, गोरक्षकों ने पीछा कर तस्करों को दबोच लिया। इनकी पहचान मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना गाँव निवासी रिजवान, इंतजार, करेटू गाँव के शफीम और तावली गाँव के इसरार के तौर पर हुई है। मुक्त कराए गए बैलों को बड़ोली गाँव की गोशाला में रखा गया है। सदर थाना प्रभारी अशोक कुमार के हवाले से दैनिक भास्कर ने बताया है कि आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर उनसे पूछताछ की जा रही है।

मालगाड़ी से कट कर 17 गायों की मौत

पानीपत के आसन कला गाँव के पास शनिवार को मालगाड़ी की चपेट में आने से 17 गायों की मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार करीब 20 से 22 गाय रेलवे ट्रैक के पास से गुजर रहे थे। गुजर रहे मालगाड़ी के ड्राइवर ने हॉर्न बजाया तो गाय ट्रैक पर आ गईं। 17 गायों की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की मदद से मृत गोवंशों को मिट्टी में दबा दिया।

प्रतिबंधित माँस के साथ 3 गिरफ्तार

झारखंड के रामगढ़ जिले के बरकाकाना थाना क्षेत्र के डुड़गी गाँव में शनिवार रात छापेमारी कर पुलिस ने प्रतिबंधित माँस के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान गुल मोहम्मद, मोहम्मद रुस्तम और जावेद अंसारी के तौर पर हुई है। पुलिस के मुताबिक गश्ती के दौरान गौकशी की सूचना मिलने पर कार्रवाई की गई। पुलिस जब गाँव पहुँची तो गुल मोहम्मद के घर के पास जमावड़ा देखा। पुलिस को देखते ही लोग भाग निकले। गुल मोहम्मद के घर के भीतर बेचे जाने के लिए रखा गया गौ माँस मिला।

केजरीवाल को सीधे वैक्सीन नहीं: राज्यों को मोदी सरकार से 21.80 करोड़ डोज, जून से बच्चों के लिए टीके का ट्रायल संभव

भारत सरकार अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 21.80 करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीन की खुराक मुहैया करा चुकी है। 1.80 करोड़ से अधिक वैक्सीन की खुराक अभी भी इनके (राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों) पास उपलब्ध है। इसके अलावा बताया जा रहा है कि जून से बच्चों के लिए टीके का ट्रायल शुरू किया जा सकता है। वहीं, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को वैक्सीन निर्माता कंपनियों से बड़ा झटका लगा है। उन्होंने केजरीवाल को सीधे वैक्सीन देने से इनकार करते हुए कहा कि हम केवल भारत सरकार से ही डील करेंगे।

अरविंद केजरीवाल ने सोमवार (24 मई 2021) को कहा, “हमने कोरोना वैक्सीन के लिए मॉडर्ना और फाइजर से बात की है, लेकिन उनकी ओर से कहा गया है कि वो राज्य को वैक्सीन नहीं देंगे। उनका कहना है कि हम सिर्फ केंद्र सरकार से ही इस पर बात करेंगे। ऐसे में मेरी केंद्र सरकार से अपील है​ कि केंद्र सरकार इनसे बात करके वैक्सीन आयात करें और राज्यों में बाँटे। हम पहले ही काफी समय गँवा चुके हैं, अब और देर करना बहुत खतरनाक हो सकता है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार (24 मई 2021) को अपने एक बयान में कहा, ”सरकार ने अभी तक नि:शुल्क और राज्य द्वारा सीधे खरीदे जाने पर 21.80 करोड़ से अधिक टीकों की खुराक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को उपलब्ध कराई है। 40,650 खुराक अगले तीन दिन में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को मिल जाएँगी।”

मालूम हो कि दिल्ली के अलावा रविवार (23 मई 2021) को वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना ने पंजाब सरकार द्वारा वैक्सीन आपूर्ति की माँग को भी ठुकरा दिया। कंपनी का कहना है कि वह अपनी नीतियों के अनुसार केवल केंद्र सरकार से ही इस मामले पर बातचीत करती है। अमेरिकी वैक्सीन निर्माता कंपनी के अलावा पंजाब सरकार ने स्पूतनिक, फाइजर और जॉनसन एंड जॉनसन से वैक्सीन की खरीद के लिए संपर्क किया था।

हालाँकि, पंजाब सरकार द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक इन कंपनियों में से सिर्फ मॉडर्ना ने ही अपना जवाब दिया। वैक्सीन निर्माता कंपनी ने अपनी नीतियों का हवाला देते हुए कहा था कि वैक्सीन से संबंधित मुद्दों पर वह केवल भारत सरकार से ही संपर्क करेगी। कंपनी राज्यों या निजी ग्राहकों से कोई सौदा नहीं करती।

वहीं, वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्‍चों के लिए बेहद घातक साबित हो सकती है। ऐसे में भारत सरकार ने बच्‍चों की कोरोना वैक्‍सीन को लेकर भी अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत बायोटेक (Bharat Biotech) जून 2021 से बच्‍चों के लिए कोविड-19 वैक्सीन पर ट्रायल शुरू कर सकता है। कंपनी के बिजनेस डेवलपमेंट एंड इंटरनेशनल एडवोकेसी हेड डॉ. राचेस एला के अनुसार, कंपनी को तीसरी या चौथी तिमाही के अंत तक कोवैक्सीन के परीक्षण के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से मंजूरी मिल सकती है।

डॉ. राचेस ने आगे कहा, ”सरकार की मदद से ही हम आज यहाँ तक पहुँचने में कमयाब हो सके हैं। कोरोना वैक्सीन भारत बायोटेक और ICMR के संयुक्त प्रयास से तैयार की गई है। सरकार ने इसके लिए 1,500 करोड़ रुपए की खरीद का ऑर्डर दिया है। इससे हमें अपनी जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। हम जल्‍द ही इसके लिए बेंगलुरु और गुजरात में भी अपनी यूनिट खोल रहे हैं।”