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‘पत्रकारों साथियों ने कहा- महाराष्ट्र बदनाम हो रहा, टेस्टिंग कम करिए’: उद्धव के मंत्री नवाब मलिक से नेटिजन्स पूछ रहे नाम

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रवक्ता नवाब मलिक ने गुरुवार (21 मई 2021) को सनसनीखेज दावा कर विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ पत्रकारों ने उन्हें राज्य में ​कोविड-19 की टेस्टिंग कम करने के लिए कहा था, क्योंकि कोरोना के आँकड़े बढ़ने से राज्य की छवि खराब हो रही थी। मलिक ने दावा किया कि उन्हें यह सुझाव राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों को कम दिखाने के लिए दिया गया था।

आज तक को दिए एक इंटरव्यू में नवाब मलिक ने कहा, ”पहले दिन से जब हम टेस्टिंग बढ़ा रहे थे, तब हमें कुछ पत्रकार साथियों के फोन टेस्टिंग कम करने के लिए आ रहे थे। उनका कहना था कि आपका आँकड़ा बढ़ रहा है, जिससे आपकी बदनामी हो रही है।”

उन्होंने आज तक से (3:09 मिनट के करीब सुनें) बातचीत में कहा, “महाराष्ट्र कोरोना के मामले में दूसरों राज्यों से आगे था, यहाँ पर ​​कोरोना संक्रमण चरम पर था। इसके बावजूद आपने कभी किसी को अस्पताल में बेड खोजते या हाथ में ऑक्सीजन सिलेंडर लिए घूमते नहीं देखा होगा।”

उन्होंने आगे कहा, ”जब हम कोरोना की टेस्टिंग बढ़ा रहे थे, तभी हमें कुछ पत्रकारों के फोन आने लगे। उन्होंने हमें कोविड-19 की टेस्टिंग कम करने के लिए कहा था, क्योंकि राज्य में कोरोना के आँकड़े बढ़ रहे थे। उन्होंने हमसे यहाँ तक कहा था कि बढ़ते मामलों के कारण महाराष्ट्र सरकार का मजाक उड़ाया जा रहा है। लेकिन जब से हमने अपना काम गंभीरता से किया है, यह हमारी ताकत बन गया है।”

नवाब मलिक के सनसनीखेज दावों पर नेटिजन्स की प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र में कोरोना की टेस्टिंग को लेकर लापरवाही बरतने और अपने सनसनीखेज दावों को लेकर नवाब मलिक सोशल मीडिया पर नेटिजन्स के निशाने पर आ गए हैं। कई ट्विटर यूजर ने माँग की है कि एनसीपी नेता ऐसे पत्रकारों का पर्दाफाश करें। लोकप्रिय ट्विटर यूजर @BefittingFacts ने कहा, “नमस्कार नवाब मलिक, क्या आप उन पत्रकारों का नाम बता सकते हैं, जिन्होंने आपसे टेस्टिंग को कम करने के लिए कहा था?”

बीजेपी सोशल मीडिया सेल की सदस्य पल्लवी ने लिखा, “क्या नवाब मलिक हमें बताएँगे कि ये ‘पत्रकार साथी’ कौन हैं, जो बदनामी (negative publicity) के डर से आपको कम टेस्टिंग करने की सलाह दे रहे थे? कोरोना महामारी की रफ्तार को काबू करने के लिए तेजी से टेस्टिंग करना सबसे अच्छा तरीका है। ऐसे में जो लोग ऐसी सलाह दे रहे हैं, उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए और महामारी अधिनियम (Epidemic Diseases Act) के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

इसी तरह, कई नेटिजन्स ने मंत्री से उन पत्रकारों के नाम उजागर करने को कहा, जिन्होंने महाराष्ट्र में कोविड-19 की टेस्टिंग कम करने के लिए कहा था।

इससे पहले, विवेक पांडे द्वारा दायर एक आरटीआई के जवाब में यह पता चला था कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने अगस्त 2020 के अंतिम सप्ताह में पीएम को एक पत्र लिखा था और अप्रैल 2021 के पहले सप्ताह तक उनके साथ कोई संपर्क नहीं किया था। उस समय राज्य कोरोना की दूसरी लहर के भारी दबाव में था। इस बीच वह केंद्र सरकार ही थी, जिसने मार्च 2021 में महाराष्ट्र सरकार से हाई अलर्ट पर रहने के लिए संपर्क किया था, क्योंकि राज्य कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा था। बता दें कि 21 मई 2021 तक, महाराष्ट्र में कोरोना के कुल 3,85,785 एक्टिव मामले हैं और कुल 85,355 मौतें हुई हैं।

सनसनी के लिए BBC कैसे करता है छल-प्रपंच: राजकुमारी डायना के साथ पत्रकार बशीर के कपट से समझिए

साल 1995 में ब्रिटिश ब्रॉडकॉस्टिंग कॉरपोर्रेशन (BBC) के पत्रकार मार्टिन बशीर ने राजकुमारी डायना का सनसनीखेज साक्षात्कार लेने के लिए छल का सहारा लिया था। उन्होंने डायना के भाई चार्ल्स स्पेंसर को झूठे दस्तावेज पेश कर ये बताया था कि डायना पर निगरानी रखी जा रही है और उन्हीं के स्टाफ उनके बारे में जानकारी लीक कर रहे हैं।

जब चार्ल्स इन बातों पर गौर करने लगे तभी बशीर ने अपना दाव खेला और इंटरव्यू अरेंज करने के लिए उन्हें मना लिया। इसके बाद बीबीसी का वह सनसनीखेज इंटरव्यू सामने आया जिसमें राजकुमारी ने अपनी असफल शादी को लेकर तमाम खुलासे किए थे।

राजकुमारी डायना के भाई के नोट्स से खुली पोल

बीबीसी पत्रकार के इस कपट की पोल-पट्टी हाल में डायना के भाई चार्ल्स स्पेंसर ने ही खोली। उन्होंने सबूतों के साथ ये दावा किया कि उनकी बहन का इंटरव्यू लेने के लिए उनसे झूठ कहा गया था।

चार्ल्स के इस तरह के दावे के बाद बीबीसी को इस मामले पर जज डायसन के नेतृत्व में जाँच कमेटी बैठानी पड़ी। इसके निष्कर्षों में निकल कर आया कि स्पेंसर के आरोप सच हैं और बशीर ने डायना के इंटरव्यू के लिए उनसे वाकई झूठ कहा था।

इस जाँच रिपोर्ट में कहा गया, “मिस्टर बशीर ने झूठ बोला और उन्हें प्रिंसेस डायना के साथ मीटिंग अरेंज करने के लिए मनाया।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बशीर ने अनुचित तरीके से काम किया और स्ट्रेट डीलिंग में 1993 एडिशन ऑफ प्रोड्यूसर गाइडलाइन का उल्लंघन किया।

इस जाँच रिपोर्ट के आने के बाद बीबीसी ने ब्रिटिश शाही परिवार से अपनी ओर से माफी भी माँगी। बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी ने माना कि इंटरव्यू हासिल करने की प्रक्रिया गलत थी। उन्होने कहा,

“उस समय जो कुछ भी हुआ था, उसकी तह तक जाने के लिए बीबीसी को और अधिक कोशिश करनी चाहिए थी। इसे और अधिक पारदर्शी होना चाहिए था। एक चौथाई सदी बीतने के बाद हम पीछे तो नहीं जा सकते हैं, लेकिन हम एक पूर्ण और बिना शर्त माफी माँग सकते हैं।”

इंटरव्यू से और खराब हुआ रिश्ता- प्रिंसेस डायना का बेटा

जज डायसन की जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रिंसेस डायना के बेटे प्रिंस विलियम ने कहा कि बीबीसी की असफलताओं और मार्टिन बशीर के 1995 के पैनोरमा साक्षात्कार ने उनकी माँ के डर, उनके पागलपन और अलगाव को बढ़ा दिया था। उन्होंने कहा कि इस एपिसोड को फिर कभी टेलीकास्ट नहीं करना चाहिए।

प्रिंस विलियम ने राजकुमारी डायना की स्थिति के लिए न केवल रिपोर्टर बल्कि बीबीसी के मालिकों को भी जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा इस इंटरव्यू ने उनके माता-पिता के रिश्ते को और खराब करने में अपना योगदान दिया और कइयों को दुख पहुँचया। वहीं प्रिंस हैरी ने कहा है कि शोषण और अनैतिक परंपराओं की संस्कृति ने उनकी माँ की जान ले ली।

सोशल मीडिया पर नाराजगी

बीबीसी ने इस मामले में माफी तो माँग ली, लेकिन मामला सोशल मीडिया तक पहुँचने के बाद लोग बीबीसी पत्रकार बशीर पर फूट पड़े। बीबीसी पत्रकार मार्टिन बशीर के कारण ट्विटर पर #DefundTheBBC ट्रेंड रने लगा। यूजर्स बशीर को लेकर कहने लगे कि उन्होंने इंटरव्यू पाने के लिए कैसे झूठ बोला। इस ट्रेंड में बीबीसी की वो स्टोरीज भी शेयर होने लगी जिनसे पाठकों को आपत्ति थी।

स्पेंसर ने नोट्स में रिकॉर्ड कर रखी थी मीटिंग

अब आइए बताएँ कि बीबीसी के मार्टिन बशीर का यह कपट दुनिया के सामने कैसे उजागर हो पाया और वो क्या सबूत थे जिन्हें डायना के भाई ने पेश किए।

दरअसल, दिलचस्प बात ये है कि जिस समय नाइटब्रिज फ्लैट पर बीबीसी पत्रकार से स्पेंसर ने अपनी बहन को मिलवाया, उस दौरान वह बशीर की हर बात को नोट में रिकॉर्ड कर रहे थे। 19 सितंबर 1995 को हुई उस बैठक के नोट्स स्पेंसर के पास सलीके से मौजूद थे।

इन्हीं रिकॉर्ड से ये पता चला कि बीबीसी पत्रकार बशीर द्वारा राजकुमारी डायना के सामने किए गए दावे फर्जी थे। बशीर ने जो उनसे जो-जो कहा वो सब गलत था। जैसे, उनके पत्र पढ़े जा रहे हैं, उन पर निगरानी रखी जा रही है या फिर उनके फोन टैप हो रहे हैं।

मार्टिन बशीर द्वारा बोले गए झूठ

डायना के ईर्द-गिर्द हो रही चीजें कंट्रोल

डायना से मीटिंग के दौरान बशीर ने झूठ बोला था कि उन्हें एमआई 6 के 3 एजेंटों ने बताया था कि प्रिंस चार्ल्स के निजी सचिव रिचर्ड आयलॉर्ड उनके आसपास की चीजों को कंट्रोल कर रहे थे। इसमें डायना के पूर्व बॉडीगार्ड केन व्हार्फ भी शामिल थे। 

पत्रकार ने उन्हें कुछ फर्जी बैंक स्टेटमेंट दिखाए कि उनके करीबी उनके सीक्रेट बेच रहे हैं। इसके बाद बशीर ने डायना के शक का अपनी मीटिंग में जमकर इस्तेमाल किया। नीचे चार्ल्स स्पेंसर द्वारा तैयार किया गया मीटिंग का नोट देख सकते हैं।

साभार: डेली मेल

चार्ल्स के सेक्रेट्री को जोनाथन डिंब्ले करते थे पेमेंट

बशीर ने डायना के सामने दावा किया कि प्रिंस चार्ल्स के सचिव रिचर्ड आयलार्ड को ब्रॉडकास्टर जोनाथन डिंब्ले पेमेंट कर रहे थे। बशीर ने यह भी कहा कि दो साल पहले चार्ल्स के दो सहयोगियों ने डायना और स्पेंसर परिवार पर हमला करने के लिए योजना बनाई थी।

स्पेंसर की साख हो जाएगी समाप्त

बैठक में बशीर ने डायना के मन में डर बैठाया कि स्पेंसर की साख खत्म हो जाएगी। इस अलावा यह भी कहा कि कि प्रिंस चार्ल्स, स्पेंसर की तत्कालीन पत्नी विक्टोरिया को मारना चाहते थे।

विल कार्लिंग के साथ अफेयर

1995 में डायना और रग्बी कप्तान विल कार्लिंग की दोस्ती का हवाला भी बशीर ने दिया। जिन्हें स्पेंसर नोट करते गए।

डायना पर निगरानी

चार्ल्स स्पेंसर के नोट से पता चलता है कि मार्टिन बशीर ने डायना को बताया था कि उनकी कार और फोन लाइन्स को बग किया जा रहा है।

साभार: डेली मेल

कैमिला का डिप्रेस होना

बशीर ने डायना के सामने कैमिला पार्कर बोल्स का भी जिक्र किया और बताया कि वह उस समय डिप्रेस थीं। जिनके बारे में बात करते हुए बाद में डायना ने अपने इंटरव्यू में कहा भी उनकी शादी में तीन लोग थे। कहते हैं कि इस मुद्दे पर बोलने के लिए बशीर ने ही डायना को उकसाया था।

इसके अलावा नोट में टिगी का नाम भी शामिल था जिन पर प्रिंस चार्ल्स के साथ अफेयर होने के आरोप थे।

साभार: डेली मेल

इसमें बर्मा के अर्ल माउंटबेटन की पत्नी एडविना माउंटबेटन का भी उल्लेख किया गया है।

यूएस में बिजनेस डील

स्पेंसर के नोट में सारा फर्ग्यूसन की अमेरिका की कई फर्जी व्यापारिक यात्राओं का भी वर्णन किया गया है। सारा फर्ग्यूसन प्रिंस एंड्रयू की पत्नी थीं, जिनका 1996 में तलाक हो गया था।

नोट में कहा गया है कि तलाक के बाद भी एंड्रयू ने ‘उसकी देखभाल’ की और उसे आर्थिक रूप से मदद भी की थी।

साभार: डेली मेल

आराम के लिए खाती हैं रानी

साभार: डेली मेल

नोट में यह भी लिखा था कि रानी उस समय अस्वस्थ थीं और केवल आराम के लिए खाती थीं।

राजकुमारी डायना का इंटरव्यू और अंत

बता दें कि डायना के इंटरव्यू को बीबीसी ने 20 नवंबर 1995 को टेलीकास्ट किया था। 54 मिनट के प्रोग्राम में राजकुमारी डायना ने कई खुलासे अपने वैवाहिक जीवन को लेकर किए थे। इस प्रोग्राम को 23 मिलियन लोगों ने देखा था।

इस इंटरव्यू में डायना ने अफेयर की अटकलों पर पुष्टि की थी और साथ ही प्रिंस चार्ल्स से अपनी शादी पर कई निजी जानकारी शेयर की थी। इस इंटव्यू के बाद साल 1996 में डायना और चार्ल्स का डायवोर्स हो गया और 36 साल की उम्र में एक कार एक्सिडेंट में राजकुमारी का निधन हुआ।

‘सिंगापुरिया जाली डाक्टर… भाभी को पिटवाने वाली’ – लालू यादव की बेटी पर जीतन राम मांझी की बहू का अटैक

लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य इन दिनों सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहती हैं। इसी बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की बहू ने नीतीश सरकार पर हमला बोलने पर रोहिणी को ट्विटर पर आड़े हाथों लिया। शुक्रवार (21 मई 2021) को दीपा मांझी ने रोहिणी के एक ट्वीट को री-ट्वीट कर ठेठ अंदाज में उन्हें फटकार लगाई, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई ​है।

दरअसल, रोहिणी आचार्य ने बुधवार को (19 मई 2021) ट्वीट करके सुशील मोदी को धमकी दीं कि यदि उनकी बहनों के बारे में कुछ कहा तो वो आकर उनका मुँह तोड़ देंगी। उन्होंने सत्ता में बैठी पार्टी पर भी सवाल उठाए थे। इस पर जीतन राम मांझी की बहू दीपा संतोष मांझी ने ट्वीट करते हुए कहा कि पहले रोहिणी को अपने घर में अपनी भाभी को इंसाफ दिलाना चाहिए।

दीपा ने ट्वीट किया, ”बिहार में एक और बेटी इंसाफ माँग रही है, जिसकी जिंदगी लालू परिवार ने बर्बाद कर दी, क्या गलती थी ऐश्वर्या की जो तुम सब ने मिलकर उसे जलील किया, मारा पीटा? जब अपने घर शीशे के बने हों तो दूसरों के घर पर पत्थर नहीं मारा करते।” उन्होंने इसके बाद एक और ट्वीट में लिखा, ”भाई पिटाए गली-गली, बहन बने बजरंग बली, भाभी को घर में पिटवाती हो, हे भ्रष्टाचार की रोहिणी, तुम इतना ज्ञान कहाँ से लाती हो?”

मांझी की बहू अपने देसी अंदाज में रोहिणी पर पलटवार करते हुए तीसरा ट्वीट करती हैं, “15 साल में तहार अम्मा-पप्पा कौ गो प्लांट लगईलन है हो सिंगापुरिया जाली डाक्टर? चोरी-डकैती करके डाक्टर बनलू आउर दूसर के ज्ञान सिखा रहल बाडू, ठीक से रहा ना तो ठीक हो जईबू, ई बिहार हा बुझाईल।”

मालूम हो कि इससे पहले लालू यादव की बेटी ने नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साधते हुए एक ट्वीट किया था, ”15 वर्षों से सत्ता में बैठकर, क्या मक्खी मार रहे थे..? एक भी लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट नहीं नहीं लगा सके, क्या समुद्र को भी..?, बिहार लाने का इरादा था..!, या बिहार को ही, प्रवासी मजदूरों की तरह, समुद्र के किनारे भेजने का इरादा था, जवाब दो कुर्सी कुमार, नहीं तो कुर्सी छोड़ दो।”

इसके अलावा उन्होंने बिहार में अरसे तक विपक्ष के नेता और उपमुख्यमंत्री रहे सुशील मोदी के लिए भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। लालू की बेटी ने उन्हें ‘थेथर’ बता ‘थूर’ देने की बात कही थी। इससे पहले नवंबर 2017 में लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने सुशील कुमार मोदी के बेटे की शादी में उपद्रव करने की सार्वजनिक तौर पर धमकी दी थी। ‘घर में घुसकर मारेंगे’ टाइप की बातें खुलेआम कही थी। बता दें कि रोहिणी बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत से भी ट्विटर पर पंगा ले चुकी हैं।

‘कोई पूज्य फातिमा बीबी को ऐसा कहे तो तुम्हें कैसा लगेगा’: माँ भवानी के अपमान पर बोला 14 साल का बालवीर, सिर धड़ से हुआ अलग

इस्लाम में ‘ईशनिंदा (Blasphemy)’ की सज़ा काफी सख्त है। शरीयत कानून की मानें तो मौत से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। हाल ही में पाकिस्तान में दो भाइयों पर मस्जिद के अपमान का आरोप लगा और सैकड़ों की भीड़ ने थाने में घुस कर उन्हें मार डालने की कोशिश की। अगर आपको लगता है कि ये सब नया है, तो आप गलत हैं। सैकड़ों वर्ष पूर्व से ही इस्लाम में ऐसा ही होता आ रहा है। ऐसा ही एक नाम है ‘वीर’ हकीकत राय का।

हकीकत राय का जन्म एक खत्री हिन्दू परिवार में हुआ था। उनके बारे में हम जानेंगे, लेकिन उससे पहले अत्याचारी मुगलों की बात। जब हकीकत राय का जन्म हुआ था, तब भारत में मुग़ल शासन भी अपने अंतिम दिन गिन रहा था और साम्राज्य काफी सीमित हो गया था। सितम्बर 1719 से अप्रैल 1748 तक दिल्ली में मुहम्मदशाह ‘रंगीला’ का शासन था। 13वाँ मुग़ल बादशाह मुहम्मदशाह, बहादुरशाह जफ़र I का पोता और खुजिस्ता अख्तर का बेटा था।

मात्र 17 वर्ष की उम्र में उसने तब प्रभावशाली मुग़ल सरदारों सैयद भाइयों की मदद से सत्ता पा ली थी। बाद में उसने सैयद भाइयों में से एक का कत्ल करवा दिया तो एक को ज़हर देकर मरवा दिया। हालाँकि, वामपंथी उसे कला, संगीत, प्रशासनिक विकास और संस्कृति का वाहक मानते हैं। उसी के काल में पर्सिया का नादिर शाह दिल्ली आया और सब कुछ लूट कर ले गया। साथ ही उसने भारत की राजधानी में लाशों का अंबार भी लगा दिया।

हकीकत राय का पालन-पोषण भी कुछ इसी अवधि में हो रहा था। भगवद्गीता सीखते हुए बड़े हो रहे थे। परिवार अमीर था। पूरी खत्री खानदान के हकीकत राय को किसी चीज की कमी न थी। उस दौरान फ़ारसी भाषा का बोलबाला था। संस्कृत से लेकर अंग्रेजी तक, भाषा वो लोकप्रिय नहीं होती है जो सबसे ज्यादा बोली जाती है, बल्कि उस भाषा की माँग सबसे ज्यादा होती है जिनका इस्तेमाल प्रशासनिक कार्यों में होता हो।

सीधे शब्दों में कहें तो हर माँ-बाप अपनी संतान को उस भाषा का ज्ञान प्राथमिकता से देना चाहता है, जिसका इस्तेमाल वहाँ के प्रबुद्धजन करते हों। इसी तरह हकीकत राय को भी फ़ारसी पढ़ने के लिए एक मौलवी के पास भेजा जाता था। मुग़ल काल में अदालतों से लेकर दरबार तक की कार्यवाहियाँ फ़ारसी में ही हुआ करती थीं। जिस सियालकोट में हकीकत राय का जन्म व पालन-पोषण हुआ, वो आज पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित है।

पिता भागमल ने जिस मदरसे में हकीकत राय को फ़ारसी पढ़ने के लिए भेजा था, जाहिर है कि वहाँ अधिकतर छात्र मुस्लिम थे। उसी मदरसे में एक ऐसी छोटी सी घटना हुई, जिसके कारण हकीकत राय को अपनी जान गँवानी पड़ी। पिता की इच्छा थी कि फ़ारसी पढ़ कर उनका बेटा एक बड़ा सरकारी अधिकारी बनेगा। बालक कुशाग्र बुद्धि था और उसने शिक्षक का प्रेम कुछ ही समय में प्राप्त कर लिया। वो मन लगा कर पढ़ता।

लेकिन, मदरसे में पढ़ने वाले अन्य मुस्लिम छात्रों को ये बात खटकती थी। वो किसी न किसी प्रकार से हकीकत राय को प्रताड़ित करने लगे थे और पढ़ाई से ध्यान भटकाने के लिए उन्हें परेशान किया करते थे। मदरसे के कुछ बच्चे चोरी और जुआ में मशगूल थे, जिनकी शिकायत हकीकत ने शिक्षकों से कर दी थी। इसके बाद वो छात्र और भी चिढ़ गए। हकीकत राय की उम्र तब मात्र 13-14 वर्ष ही थी। उनके विवाह की बात भी चल रही थी।

लाहौर के ही एक बड़े घराने में उनका रिश्ता तय होने वाला था। एक दिन जब छात्रों के झगड़े में हकीकत राय के कपड़े फट गए तो पिता भागमल शिकायत लेकर मदरसा पहुँचे। मौलवी ने दोषी छात्रों को सज़ा दी। इसके बाद से ही उन लोगों ने मन बना लिया था कि वो किसी तरह से इसका बदला लेंगे। हकीकत राय का विवाह तय हो चुका था। मौलवी को भी निमंत्रण भेजा गया था। लेकिन, उसी बीच ईद का त्यौहार भी आ गया।

‘सुरुचि प्रकाशन’ द्वारा संकलित हकीकत राय की जीवनी के अनुसार, ईद के दिन हकीकत राय ने एक सोने का सिक्का देकर मौलवी साहब को त्यौहार की बधाई दी। इसी दौरान अन्य छात्र उससे कबड्डी खेलने की जिद करने लगे, लेकिन माँ भवानी की सौगंध खाकर हकीकत राय ने कहा कि उनका खेलने का मन नहीं है। फिर क्या था, मुस्लिम छात्रों ने माँ भवानी को ‘पत्थर का टुकड़ा’ बताते हुए उनकी प्रतिमा को सड़क पर फेंकने और लात से मारने की धमकी दी।

Gateway To Sikhism‘ और सुरुचि प्रकाशन में वर्णित हकीकत राय की जीवनी के अनुसार, उन्होंने माँ भवानी का अपमान करते मुस्लिम छात्रों से बस इतना ही पूछा कि अगर कोई उनकी पूज्य फातिमा बीबी के लिए कोई ऐसा कहेगा तो उन्हें कैसा महसूस होगा? इसके बाद उन छात्रों ने भीड़ जुटा दी और मौलवी से शिकायत की। फिर हकीकत राय को ‘काफिर’ बताते हुए काजी से उनकी शिकायत की गई।

गुरु से भगवद्गीता पढ़ते वीर हकीकत राय

हकीकत राय ने माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्होंने कोई अपशब्द नहीं कहे थे। काजी ने हकीकत राय और उनके पिता के सामने शर्त रखी कि हकीकत को इस्लाम कबूल करना पड़ेगा, तभी उसकी जान बच सकती है। लेकिन, हकीकत राय ने इनकार कर दिया। हकीकत राय को रस्सी से बाँध कर लाहौर के हाकिम के पास ले जाया गया। भागमल के नाम मिन्नतें करने के बावजूद उसने काजी के फैसले को पलटने से इनकार कर दिया।

भागमल अपने बेटे की जान की भीख माँगते रहे, उधर हाकिम ने जल्लाद को आवाज़ दी। उसे आदेश दिया गया कि वो एक ही वार में हकीकत राय का सिर धड़ से अलग कर दे और उसने उपस्थित सभी लोगों के सामने ही ऐसा ही किया। हकीकत राय ने गुरु तेग बहादुर और संभाजी जैसे वीरों के रास्ते पर चलते हुए जान दे दी, लेकिन इस्लाम कबूल नहीं किया। ‘ईशनिंदा’ का झूठा आरोप लगा और उन्हें मार डाला गया।

सिर कलम किए जाने से पहले हकीकत राय ने काजी से पूछा था कि क्या मुस्लिमों को मौत नहीं आती? अगर आती है तो मैं अपना धर्म क्यों छोड़ूँ? हकीकत राय के बलिदान पर सिख सम्राट रणजीत सिंह को भी नाज़ था। 18वीं सदी में इस्लामी शासकों और अंग्रेजों को नाकों चने चबवाने वाले ‘शेर-ए-पंजाब’ रणजीत सिंह अक्सर उनके बलिदान को याद करते थे। सिख और हिन्दू, दोनों ही वीर हकीकत राय को याद करते हैं। पंजाब के गुरदासपुर में उनकी समाधि भी है।

इंटरनेट एक्सप्लोरर Google Chrome डाउनलोड करने के लिए था बेस्ट: माइक्रोसॉफ्ट की बंद करने की घोषणा, बने Memes

माइक्रोसॉफ्ट ने घोषणा की है कि अंततः कंपनी अपने ब्राउजर इंटरनेट एक्सप्लोरर को जून 2022 में बंद करने जा रही है। कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि 1995 में लॉन्च किया गया वेब ब्राउजर इंटरनेट एक्सप्लोरर 15 जून 2022 को बंद हो जाएगा।

माइक्रोसॉफ्ट कंपनी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि विंडोज 10 में अब इंटरनेट एक्सप्लोरर का भविष्य माइक्रोसॉफ्ट एज (Microsoft Edge) में है। कंपनी ने कहा कि यह न केवल इंटरनेट एक्सप्लोरर की तुलना में तेज और सुरक्षित है बल्कि कई एप्लीकेशन और वेबसाइट के लिए अनुकूल भी है।

हालाँकि सोशल मीडिया में कई यूजर्स इंटरनेट एक्सप्लोरर के रिटायर होने की खबर पर मीम शेयर कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि इंटरनेट एक्सप्लोरर का एक ही उपयोग होता था, नया लैपटॉप खरीदने के बाद एक्सप्लोरर से गूगल क्रोम डाउनलोड करना और एक्सप्लोरर को भूल जाना। कई यूजर्स ने इसे एक युग का अंत भी बताया।

आपको बता दें कि वर्तमान में गूगल का क्रोम ब्राउजर, इंटरनेट सर्फिंग के बाजार का लगभग 65% हिस्सा कवर करता है। दूसरे स्थान पर एप्पल द्वारा निर्मित सफारी ब्राउजर है, जो एप्पल के कंप्यूटर्स और दूसरे डिवाइस में काम करता है। एप्पल की हिस्सेदारी 19% है। क्रोम और सफारी के अलावा फायरफॉक्स और माइक्रोसॉफ्ट एज क्रमशः 3.59% और 3.39% हिस्सेदारी के साथ तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।  

अँधेरे में गॉंव में घुसे 500-600, घर से घसीटकर लाए गए ग्रामीण, 34 का गला काटा-पेट चीरा: 22 साल बाद कोई दोषी नहीं

1990 के दशक में बिहार ने कई नरसंहार देखे। इनके कारण लालू-राबड़ी के शासनकाल के जंगलराज को याद कर लोग आज भी सिहर जाते हैं। इन नरसंहारों में से एक सेनारी में अंजाम दिया गया था।

जहानाबाद जिले के सेनारी गॉंव में 18 मार्च 1999 को 34 लोगों की हत्या कर दी गई थी। बेहद क्रूर तरीके से। 22 साल बाद 21 मई 2021 को इस मामले में पटना हाई कोर्ट ने उन सभी 13 लोगों को बरी कर दिया है, जिन्हें निचली अदालत ने दोषी माना था। अब इस मामले में कोई भी दोषी नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इंसानों को भेड़-बकरियों की तरह काटने वाले इस नरसंहार का आखिर दोषी कौन है?

सेनारी नरसंहार के मामले में 15 नवंबर 2016 को जिला अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए सभी लोगों को तत्काल छोड़ने का आदेश हाई कोर्ट ने दिया है। जिला कोर्ट 10 दोषियों को फाँसी और तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जिला कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट के जस्टिस अश्विनी कुमार और अरविंद श्रीवास्तव की पीठ ने रद्द कर दिया। इस केस में कुल 70 लोगों को आरोपित बनाया गया था, जिनमें से 4 की मौत हो चुकी है।

सेनारी में क्या हुआ था उस दिन

18 मार्च 1999 की रात प्रतिबंधित नक्सली संगठन माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के उग्रवादियों ने सेनारी गाँव को घेर लिया। 500-600 उग्रवादी रात के वक्त गाँव में घुसे। घरों से मर्दों को खींचकर बाहर निकाला गया। उन्हें तीन ग्रुप में बाँटकर गाँव के बाहर ले जाया गया। रिपोर्टों के अनुसार लाइन में खड़ा कर बारी-बारी से सबका गला काटा गया और पेट चीरा गया था।

दैनिक भास्कर को 5 साल पहले इस हमले में बचे कुछ लोगों ने आपबीती बताई थी। राकेश शर्मा ने बताया था कि हमलावर धारदार हथियार से एक-एक कर सबको गर्दन रेतकर जमीन पर गिरा रहे थे। उन्होंने बताया था कि हमलावर नशे में थे जिसकी वजह से उनकी जान बच गई थी। पेट पर गहरे वार की वजह से राकेश की आँत का कुछ हिस्सा बाहर आ गया था। वहीं संजय ने बताया था कि एक हमलावर ने उन पर भी वार किया, लेकिन वे किसी तरह से बच गए। जल्दबाजी में हमलावरों ने उन्हें दूसरे झटके में बिना काटे शवों के ढेर में धकेल दिया था।

इस नरसंहार में मरने वाले लोग भूमिहार थे। 300 घर वाले इस गॉंव में 70 भूमिहार परिवार रहते थे। उस समय बिहार ने इस तरह के कई नरसंहार देखे थे। ऐसे ही एक नरसंहार के कारण 1998 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। लेकिन कॉन्ग्रेस के विरोध के कारण 24 दिनों में ही दोबारा राबड़ी सरकार बहाल हो गई थी।

शुक्रवार की नमाज के बाद हर घर-गाड़ी पर लहराओ फिलिस्तीनी झंडा: मौलाना यासीर को UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पुलिस ने मौलाना यासीर अख्तर नाम के मौलवी के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज किया है। मौलवी पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर समुदाय के लोगों से अपने घर की छतों पर और वाहनों पर फिलिस्तीन का झंडा फहराने की अपील की।

मौलाना पर आईपीसी की धारा 505 (2) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। आजमगढ़ के एसपी सुधीर कुमार सिंह ने कहा, “हमारे संज्ञान में आया था कि सरायमीर क्षेत्र के उत्तरी चुरिहार कस्बे का निवासी यासीर ने अपने फेसबुक पेज ‘आजमगढ़ एक्सप्रेस’ पर एक अपील की, जिसमें शुक्रवार की नमाज के बाद समुदाय के लोगों से अपने घर की छतों और वाहनों पर फिलिस्तीनी झंडा प्रदर्शित करने को कहा गया था।”

उन्होंने बताया, “मौलवी के ख़िलाफ़ सरायमीर पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद सर्विलांस सेल की मदद से उसे गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई चल रही है।”

गौरतलब है कि इजरायल और हमास के बीच चले संघर्ष पर आजमगढ़ एक्सप्रेस ने 19 और 20 मई को अपना पोस्ट किया था। इसी के बाद पुलिस हरकत में आई और केस दर्ज कर मौलाना को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपित को जेल भेज दिया गया है।

इस बीच आजमगढ़ एक्सप्रेस पर इस संबंध में सफाई जारी की गई है। गुरुवार को शेयर किए गए पोस्ट का स्क्रीनशॉट लेकर बताया गया है, “यह ब्रेकिंग थी गाजा के लिए। लेकिन लोगों ने अपने इलाके के बारे में ले लिया। जबकि आम बात है किसी दूसरे देश का झंडा भारत मे कैसे फहराया जा सकता है?”

हालाँकि, हमने जब इस पोस्ट की एडिट हिस्ट्री चेक की तो पाया कि वास्तविकता में 19 मई को रात 10 बजकर 46 मिनट पर इस पेज पर यही लिखा गया था, “शुक्रवार को जुमा बाद घर-घर पर और गाड़ी पर फ़िलिस्तीनी झंडा लहराने की अपील।” लेकिन, 20 मई को सुबह 9:09 पर मामले के तूल पकड़ने पर इसे एडिट कर दिया गया और आगे गाजा शब्द जोड़ दिया गया।

बता दें कि 11 दिनों चले संघर्ष के बाद इजरायल और हमास संघर्ष विराम करने पर सहमत हो गए हैं। इन दोनों के बीच हुए संघर्ष में 200 से ज्यादा फिलिस्तीनियों और इजरायल में 12 की मौत हुई। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने युद्धविराम की घोषणा की और सुरक्षा कैबिनेट ने अपने बयान में इसे “आपसी और बिना शर्त” कहा।

सलमान की काठी, काठी का घोड़ा, घोड़ा पर राजा राहुल गाँधी देव राय वर्मा (प्रथम)

कुछ लोगों के लिए पुण्यतिथि का अर्थ होता है पुण्य कमाने की तिथि! ऐसे लोग औरों की पुण्यतिथि के दिन उन्हें याद करके पुण्य कमा लेते हैं। ऐसी कमाई का मूल सिद्धांत यह है कि मृत व्यक्तियों को याद तो पब्लिक में किया जाता है पर इस प्रक्रिया में कमाया जाने वाला पुण्य अक्सर प्राइवेट रहता है और कमाने वाले के काम आता है। पुण्य की ऐसी कमाई करने वाले भविष्यनिधि जैसा कुछ बनाते हैं और उसे किसी लॉकर टाइप जगह रख लेते हैं। इनका विश्वास इस दर्शन में प्रगाढ़ होता है कि; बड़े आदमी की पुण्यतिथि से जितना पुण्य कमा सको उतना स्टॉक रख लो, पता नहीं कब जरूरत पड़ जाए।

जिनकी पुण्यतिथि पर ये पुण्य कमाया जाता है उनके घर वालों के पास अक्सर ऐसे लोगों के पुण्य का पूरा हिसाब-किताब रहता है।

बस इस पुण्य कमाने के चक्कर में ये लोग भूल जाते हैं कि इस प्रक्रिया के पब्लिक में होने की वजह से और लोग भी पुण्यतिथि वाले व्यक्ति को अपनी-अपनी तरह से याद करते हैं। सलमान खुर्शीद को ले लें। उन्होंने राजीव गाँधी की पुण्यतिथि से पुण्य कमाने के अपने प्रयास में ट्वीट किया। ट्वीट चीज ही ऐसी है, बस कर दी जाती है। खुर्शीद ने भी कर दिया। उन्होंने ट्वीट के साथ गांधियों की तस्वीर अटैच कर दी। अरे महात्मा और तुषार गाँधी की नहीं बल्कि राजीव और राहुल गाँधी की। साथ ही उन्होंने लिखा; द वन्स एंड फ्यूचर किंग्स ऑफ डेमोक्रेसी।

अर्थात; लोकतंत्र के भूत और भविष्य के राजा।

मैं होता तो यह पोस्ट करने से पहले खुर्शीद साहब से कहता; खुर्शीद साहब, ऐसे कर्म प्राइवेट में किए जाने चाहिए। आपने राजीव जी की पुण्यतिथि पर पुण्य कमाने के लिए पब्लिक में ट्वीट कर दिया, वो भी उन्हें लोकतंत्र का राजा बताते हुए! जरा भी नहीं सोचा कि मौजवादी ट्वीटकार उन्हें याद करते हुए अपनी-अपनी तरह से मजे लेंगे। लोग यह कह कर हँसेंगे कि; देखो तो जरा, ढाई सौ स्पोर्ट्स स्टेडियम इनके नाम पर थे फिर भी हम इन्हें खिलाड़ी की जगह प्रधानमंत्री मानते रहे पर आज पता चला ये राजा थे! कुछ अव्वल दर्जे के मौजवादी तो राजीव जी को लेकर मीम बना सकते हैं और उनका नाम रख सकते हैं ; राजा राजीव गाँधी देव राय वर्मा प्रथम। कोई याद करते हुए कहेगा; यही वो राजा थे जो हमें पंद्रह पैसे देना चाहते थे इसलिए दिल्ली से एक रूपये भेजते थे। भैया जो भी कहो, थे ये बड़े जानकार राजा। इनके गुप्तचर बहुत काबिल थे जो इन्हें बता दिया था कि एक रुपया भेजने पर जनता तक केवल पंद्रह पैसे पहुँचते हैं। इन्हें पता था कि पंद्रह पैसे देना है तो पूरा एक रूपया भेजना ही पड़ेगा नहीं तो जनता दुःखी रहेगी।

खुर्शीद साहब, आपका ट्वीट देखकर गंभीर लोग सोचेंगे; ह्वाट काइंड ऑफ ऑक्सीमोरोन इज दिस? कम ऑन डूड, कौन सी डेमोक्रेसी में राजा होता है? गांधियों की इतनी चमचागिरी करने का क्या है? कॉन्ग्रेस का घणा समर्थक होगा तो सोचेगा; ऐसे चाटुकारों की वजह से ही कॉन्ग्रेस का यह हाल है। जो शैतान बच्चों के जैसे होंगे वे आपको ट्रोल करेंगे। ट्रोल करते आपको वह याद दिलाएँगे जिसमें आपने बताया था कि सोनिया गाँधी पूरे देश की माँ हैं। और ऐसा थोड़ी है कि केवल मौजवादी और कॉन्ग्रेस के समर्थक ही पढ़ेंगे। यही ट्वीट किसी सिख नौजवान के सामने आ गया तो सोचेगा; यही है वो जिसने हमारे दादाजी की हत्या को यह कहकर जस्टिफाई किया था कि; बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।

और तो और, यही ट्वीट डॉक्टर मनमोहन सिंह के सामने से गुजरेगा तो वे पढ़ते हुए सोचेंगे; अजब इंसान था ये। मैं प्लानिंग कमीशन का चेयरमैन था तो मेरी टीम को इसने जोकरों की टीम कहा था। आरिफ मोहम्मद खान देखेंगे तो सोचेंगे; ओहो, आखिर में सलमान ने राज खोल ही दिया। फालतू में लोग वीपी सिंह को राजा साहब कहते थे। तभी मैं सोचूँ कि एक “पिरधानमंत्री” सुप्रीम कोर्ट के ऐसे ऐतिहासिक फैसले को पलटने के लिए संसद से कानून कैसे बना सकता था। अच्छा हुआ मैं कॉन्ग्रेस से निकल गया नहीं तो आज एक राजा के मातहत काम करने के लिए खुद को माफ़ न कर पाता। यही ट्वीट शाह बानो के बच्चे भी देखेंगे और सोचेंगे; एक राजा होते हुए इसने हमारी अम्मी के साथ अन्याय किया।

आपके ट्वीट से लोग राहुल जी के बारे में भी बात करेंगे। कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता अब नारे लगाएँगे; हमारा राजा कैसा हो, राहुल गाँधी जैसा हो। अवार्ड वापसी वाले विद्वान राहुल गाँधी को भविष्य का राजा मानते हुए अब “लोकतंत्र में राजा का महत्व” या “राजा लोकतंत्र के लिए क्यों आवश्यक है” जैसे टॉपिक पर सेमिनार करेंगे। अरूण पूरी जी इंडिया टुडे के कवर पेज पर “फ्यूचर किंग ऑफ़ द लार्जेस्ट डेमोक्रेसी” हेडलाइन के साथ राहुल जी को छापकर उन्हें फिर से लॉन्च करेंगे। बुद्धिजीवी अब पसंदीदा अखबारों में ; “राहुल शुड एम टू कैप्चर द डेमोक्रेटिक किंगडम ऑफ़ इंडिया इन 2024” जैसी हैडलाइन लिखकर ओपिनियन पीस पब्लिश करवाएँगे। सोनिया जी राहुल को अब दिन भर मेरा पीएम बेटा की जगह मेरा लाजा बेता कहकर दुलारेंगी।

राहुल जी के भी मीम बनेंगे जिनमें उन्हें राजा की पोशाक पहने घोड़े से 7 लोक कल्याण मार्ग पर उतरते हुए दिखाया जाएगा। उनका नाम भी शायद राजा राहुल गाँधी देव राय वर्मा रख दें। वामपंथी दल अब राजशाही को शासन का सबसे अच्छा तरीका बताएँगे ताकि 2024 में कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन हो जाए। राहुल जी औपचारिक रूप से अपने भविष्य के लोकतान्त्रिक दरबार के लिए नौ रत्नों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। राहुल जी अंतरराष्ट्रीय विद्वानों से खुद समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, लोकतंत्र, फाइनेंस, सिक्यूरिटी वगैरह सीखते हैं और उसके एवज़ में इन विद्वानों को खुद केवल दर्शनशास्त्र पढ़ा पाते हैं। अब से वे इन विद्वानों को राजशाही के पाठ भी पढ़ा सकेंगे। कॉन्ग्रेस की पहले से बनी टूलकिट के उद्देश्य के बारे में लिखा जाएगा; प्रिपेयर्ड फॉर हिज हाईनेस राहुल गाँधी, द फ्यूचर किंग ऑफ द डेमोक्रेसी ऑफ इंडिया !

बस एक ही समस्या है। प्रधानमंत्री बनने की तैयारी में राहुल जी ने वर्षों की कड़ी मेहनत की है। अब किंग बनने के लिए मेहनत शुरू से न शुरू करनी पड़ जाए।

नंदीग्राम में पस्त ममता बनर्जी लौट के भवानीपुर आएँगी? TMC के शोभनदेव चट्टोपाध्याय का विधायकी से इस्तीफा

पश्चिम बंगाल के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने मंगलवार (21 मई) को इस्तीफा दे दिया। नंदीग्राम में बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से हारने के बाद अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अपनी पारंपरिक भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है।

विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने चट्टोपाध्याय के इस्तीफा मंजूर करते हुए कहा कि वो इस्तीफे को लेकर संतुष्ट हैं और चट्टोपाध्याय ने अपनी स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है। इसलिए उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भवानीपुर सीट से इस्तीफे के बाद शोभनदेव खरदा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, जहाँ टीएमसी नेता काजल सिन्हा की मौत के बाद उपचुनाव होना है।

वहीं इस्तीफा देने वाले विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले भी दो बार इस सीट से जीत चुकी हैं। चट्टोपाध्याय ने कहा, “जब मैंने सुना कि मुख्यमंत्री यहाँ से चुनाव लड़ना चाहती हैं तो मैंने यह सीट खाली कर दी। मुझ पर कोई दबाव नहीं है। यह उन्हीं (ममता बनर्जी) की सीट थी, मैंने तो बस इसे सुरक्षित किया था।“

2011 में भी ममता बनर्जी के लिए खाली हुई थी भवानीपुर सीट

आपको बता दें कि 2021 में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भवानीपुर विधानसभा सीट से टीएमसी के शोभनदेव चट्टोपाध्याय जीते थे। उन्होंने भाजपा के रुद्रनील घोष को हराया था। चट्टोपाध्याय को जहाँ 73,048 मत प्राप्त हुए थे वहीं भाजपा के रुद्रनील घोष 44,541 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

ममता बनर्जी पहले भी भवानीपुर से चुनाव लड़ चुकी हैं। 2011 में भी टीएमसी के सुब्रत बक्शी ने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए के लिए भवानीपुर सीट खाली की थी। इसके बाद 2016 में इस सीट से ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस की दीपा दास मुंशी को हराया था। इस बार भी मुख्यमंत्री बने रहने के लिए ममता बनर्जी को छह महीने के भीतर चुनाव जीतकर सदन का सदस्य बनना होगा।

हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था, जहाँ उन्हें भाजपा के प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी के हाथों पराजय झेलनी पड़ी। कभी ममता के बेहद करीबी नेताओं में शामिल रहे शुभेंदु अधिकारी विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।        

Sobhandeb Chattopadhyay of tmc resigns from Bhawanipore mamta will contest

कॉन्ग्रेस के पत्र के बाद Twitter ने टूलकिट वाले ट्वीट पर लगाया भ्रामक का लेबल, राहुल गाँधी के प्रोपेगंडा ट्वीट्स पर रहता है चुप

कॉन्ग्रेस पार्टी ने बुधवार (मई 19, 2021) को माइक्रो ब्लॉगिंग एप ट्विटर को एक ईमेल भेज कर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रवक्ता संबित पात्रा, केंद्रीय कपड़ा और महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष सहित कई पार्टी पदाधिकारियों के हैंडल्स सस्पेंड करने को कहा था। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि जिस दस्तावेज को उसका टूलकिट बता कर शेयर किया जा रहा है, वो फर्जी है।

इस टूलकिट में इसका पूरा ब्यौरा था कि कोरोना काल में किए मोदी सरकार को बदनाम करना है। कुंभ को बदनाम करने से लेकर विदेशी मीडिया के साथ साँठगाँठ तक की बात लिखी हुई थी। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि इस दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ किया गया है। हालाँकि, टूलकिट को फर्जी साबित करने के लिए उसने अब तक कोई सबूत नहीं दिया है। कॉन्ग्रेस ने अपनी शिकायत में सिर्फ उस FIRs की प्रति लगाई थी, जो उसने भाजपा नेताओं के विरुद्ध दर्ज कराया था।

इस पत्र में लिखा है कि भाजपा नेताओं ने एक ‘पूर्व-नियोजित आपराधिक षड्यंत्र’ के तहत कॉन्ग्रेस के फर्जी लेटरहेड पर छेड़छाड़ कर के एक दस्तावेज तैयार किया गया, ताकि इसे अपने सोशल मीडिया हैंडल्स से शेयर करा-करा कर सांप्रदायिक तनाव और सामाजिक अशांति का माहौल बनाया जा सके। पार्टी का आरोप है कि देश के विभिन्न राज्यों में हिंसा फैलाने के लिए इस ‘शरारतपूर्ण और मनगढ़ंत’ कंटेंट शेयर किया गया।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने ट्विटर से अपील की है कि इन भाजपा नेताओं के ट्विटर हैंडल्स को स्थायी रूप से निलंबित किया जाए और मामले की पूरी जाँच की जाए। कॉन्ग्रेस ने इन भाजपा नेताओं को ‘आदतन फर्जी कंटेंट फैलाने वाला’ बताते हुए लिखा है कि ट्विटर प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके 1 दिन के भीतर ही ट्विटर ने कॉन्ग्रेस के टूलकिट वाले दस्तावेज को ‘मैनीपुलेटेड मीडिया’ वाले टैग के अंतर्गत डाल दिया।

Twitter ने संबित पात्रा के ट्वीट पर ‘Manipulated Media’ वाला टैग लगा दिया। ट्विटर भ्रामक कंटेंट्स पर ये लेबल लगाता है। ट्विटर ने भी ऐसा कोई तर्क नहीं दिया है, जिससे लगे कि ये फर्जी है। AltNews ने भी इस टूलकिट को फर्जी साबित करने के लिए झूठ फैलाया, लेकिन उनकी भी पोल खुल गई। ट्विटर की हरकतों से तो ऐसा लग रहा है कि वो भी कॉन्ग्रेस की इस टूलकिट का हिस्सा है और इसमें उसका भी कुछ रोल है।

ट्विटर का भाजपा नेताओं के ट्वीट्स पर ‘भ्रामक कंटेंट’ के लेबल लगाने का पुराना इतिहास रहा है। अगर कॉन्ग्रेस या राहुल गाँधी के झूठ को बेनकाब करने के लिए अगर कुछ शेयर किया जाता है तो उसे भी ट्विटर भ्रामक बता देता है। दिसंबर 2020 में एक तस्वीर शेयर कर के राहुल गाँधी ने आरोप लगाया था कि पुलिस एक बुजुर्ग किसान को पीट रही है। भाजपा IT सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने इसका पूरा वीडियो शेयर किया।

उसमें देखा जा सकता था कि वो डंडा किसान को छूता तक नहीं है, लेकिन फिर भी झूठा प्रोपेगंडा फैलाया जा रहा था। इस पर भी ट्विटर ने भ्रामक का लेबल लगा दिया। इसी तरह पीएम मोदी ने असम की एक रैली में बताया कि कैसे कॉन्ग्रेस गरीब को गरीब रखना चाहती है तो कॉन्ग्रेस आईटी सेल हेड रोहन गुप्ता ने इसे काट-छाँट कर ऐसे पेश किया जैसे पीएम मोदी गरीबों को धोखा देने की बात कर रहे हों।

रोहन गुप्ता ने वीडियो के उस हिस्से को हटा दिया था, जिसमें पीएम मोदी कहते हैं कि ये कॉन्ग्रेस का प्रोपेगंडा है। हालाँकि, ट्विटर ने रोहन गुप्ता के वीडियो पर भ्रामक का लेबल नहीं लगाया। इसी तरह दिल्ली दंगों के आरोपित JNU के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को वेरिफाइड का ब्लू टिक दे रखा है। 21 वर्षीय दिशा रवि को भी ब्लू टिक मिला, जिसने ‘किसान आंदोलन’ से अशांति के लिए टूलकिट बनाया था।