Home Blog Page 3771

सलमान की काठी, काठी का घोड़ा, घोड़ा पर राजा राहुल गाँधी देव राय वर्मा (प्रथम)

कुछ लोगों के लिए पुण्यतिथि का अर्थ होता है पुण्य कमाने की तिथि! ऐसे लोग औरों की पुण्यतिथि के दिन उन्हें याद करके पुण्य कमा लेते हैं। ऐसी कमाई का मूल सिद्धांत यह है कि मृत व्यक्तियों को याद तो पब्लिक में किया जाता है पर इस प्रक्रिया में कमाया जाने वाला पुण्य अक्सर प्राइवेट रहता है और कमाने वाले के काम आता है। पुण्य की ऐसी कमाई करने वाले भविष्यनिधि जैसा कुछ बनाते हैं और उसे किसी लॉकर टाइप जगह रख लेते हैं। इनका विश्वास इस दर्शन में प्रगाढ़ होता है कि; बड़े आदमी की पुण्यतिथि से जितना पुण्य कमा सको उतना स्टॉक रख लो, पता नहीं कब जरूरत पड़ जाए।

जिनकी पुण्यतिथि पर ये पुण्य कमाया जाता है उनके घर वालों के पास अक्सर ऐसे लोगों के पुण्य का पूरा हिसाब-किताब रहता है।

बस इस पुण्य कमाने के चक्कर में ये लोग भूल जाते हैं कि इस प्रक्रिया के पब्लिक में होने की वजह से और लोग भी पुण्यतिथि वाले व्यक्ति को अपनी-अपनी तरह से याद करते हैं। सलमान खुर्शीद को ले लें। उन्होंने राजीव गाँधी की पुण्यतिथि से पुण्य कमाने के अपने प्रयास में ट्वीट किया। ट्वीट चीज ही ऐसी है, बस कर दी जाती है। खुर्शीद ने भी कर दिया। उन्होंने ट्वीट के साथ गांधियों की तस्वीर अटैच कर दी। अरे महात्मा और तुषार गाँधी की नहीं बल्कि राजीव और राहुल गाँधी की। साथ ही उन्होंने लिखा; द वन्स एंड फ्यूचर किंग्स ऑफ डेमोक्रेसी।

अर्थात; लोकतंत्र के भूत और भविष्य के राजा।

मैं होता तो यह पोस्ट करने से पहले खुर्शीद साहब से कहता; खुर्शीद साहब, ऐसे कर्म प्राइवेट में किए जाने चाहिए। आपने राजीव जी की पुण्यतिथि पर पुण्य कमाने के लिए पब्लिक में ट्वीट कर दिया, वो भी उन्हें लोकतंत्र का राजा बताते हुए! जरा भी नहीं सोचा कि मौजवादी ट्वीटकार उन्हें याद करते हुए अपनी-अपनी तरह से मजे लेंगे। लोग यह कह कर हँसेंगे कि; देखो तो जरा, ढाई सौ स्पोर्ट्स स्टेडियम इनके नाम पर थे फिर भी हम इन्हें खिलाड़ी की जगह प्रधानमंत्री मानते रहे पर आज पता चला ये राजा थे! कुछ अव्वल दर्जे के मौजवादी तो राजीव जी को लेकर मीम बना सकते हैं और उनका नाम रख सकते हैं ; राजा राजीव गाँधी देव राय वर्मा प्रथम। कोई याद करते हुए कहेगा; यही वो राजा थे जो हमें पंद्रह पैसे देना चाहते थे इसलिए दिल्ली से एक रूपये भेजते थे। भैया जो भी कहो, थे ये बड़े जानकार राजा। इनके गुप्तचर बहुत काबिल थे जो इन्हें बता दिया था कि एक रुपया भेजने पर जनता तक केवल पंद्रह पैसे पहुँचते हैं। इन्हें पता था कि पंद्रह पैसे देना है तो पूरा एक रूपया भेजना ही पड़ेगा नहीं तो जनता दुःखी रहेगी।

खुर्शीद साहब, आपका ट्वीट देखकर गंभीर लोग सोचेंगे; ह्वाट काइंड ऑफ ऑक्सीमोरोन इज दिस? कम ऑन डूड, कौन सी डेमोक्रेसी में राजा होता है? गांधियों की इतनी चमचागिरी करने का क्या है? कॉन्ग्रेस का घणा समर्थक होगा तो सोचेगा; ऐसे चाटुकारों की वजह से ही कॉन्ग्रेस का यह हाल है। जो शैतान बच्चों के जैसे होंगे वे आपको ट्रोल करेंगे। ट्रोल करते आपको वह याद दिलाएँगे जिसमें आपने बताया था कि सोनिया गाँधी पूरे देश की माँ हैं। और ऐसा थोड़ी है कि केवल मौजवादी और कॉन्ग्रेस के समर्थक ही पढ़ेंगे। यही ट्वीट किसी सिख नौजवान के सामने आ गया तो सोचेगा; यही है वो जिसने हमारे दादाजी की हत्या को यह कहकर जस्टिफाई किया था कि; बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।

और तो और, यही ट्वीट डॉक्टर मनमोहन सिंह के सामने से गुजरेगा तो वे पढ़ते हुए सोचेंगे; अजब इंसान था ये। मैं प्लानिंग कमीशन का चेयरमैन था तो मेरी टीम को इसने जोकरों की टीम कहा था। आरिफ मोहम्मद खान देखेंगे तो सोचेंगे; ओहो, आखिर में सलमान ने राज खोल ही दिया। फालतू में लोग वीपी सिंह को राजा साहब कहते थे। तभी मैं सोचूँ कि एक “पिरधानमंत्री” सुप्रीम कोर्ट के ऐसे ऐतिहासिक फैसले को पलटने के लिए संसद से कानून कैसे बना सकता था। अच्छा हुआ मैं कॉन्ग्रेस से निकल गया नहीं तो आज एक राजा के मातहत काम करने के लिए खुद को माफ़ न कर पाता। यही ट्वीट शाह बानो के बच्चे भी देखेंगे और सोचेंगे; एक राजा होते हुए इसने हमारी अम्मी के साथ अन्याय किया।

आपके ट्वीट से लोग राहुल जी के बारे में भी बात करेंगे। कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता अब नारे लगाएँगे; हमारा राजा कैसा हो, राहुल गाँधी जैसा हो। अवार्ड वापसी वाले विद्वान राहुल गाँधी को भविष्य का राजा मानते हुए अब “लोकतंत्र में राजा का महत्व” या “राजा लोकतंत्र के लिए क्यों आवश्यक है” जैसे टॉपिक पर सेमिनार करेंगे। अरूण पूरी जी इंडिया टुडे के कवर पेज पर “फ्यूचर किंग ऑफ़ द लार्जेस्ट डेमोक्रेसी” हेडलाइन के साथ राहुल जी को छापकर उन्हें फिर से लॉन्च करेंगे। बुद्धिजीवी अब पसंदीदा अखबारों में ; “राहुल शुड एम टू कैप्चर द डेमोक्रेटिक किंगडम ऑफ़ इंडिया इन 2024” जैसी हैडलाइन लिखकर ओपिनियन पीस पब्लिश करवाएँगे। सोनिया जी राहुल को अब दिन भर मेरा पीएम बेटा की जगह मेरा लाजा बेता कहकर दुलारेंगी।

राहुल जी के भी मीम बनेंगे जिनमें उन्हें राजा की पोशाक पहने घोड़े से 7 लोक कल्याण मार्ग पर उतरते हुए दिखाया जाएगा। उनका नाम भी शायद राजा राहुल गाँधी देव राय वर्मा रख दें। वामपंथी दल अब राजशाही को शासन का सबसे अच्छा तरीका बताएँगे ताकि 2024 में कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन हो जाए। राहुल जी औपचारिक रूप से अपने भविष्य के लोकतान्त्रिक दरबार के लिए नौ रत्नों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। राहुल जी अंतरराष्ट्रीय विद्वानों से खुद समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, लोकतंत्र, फाइनेंस, सिक्यूरिटी वगैरह सीखते हैं और उसके एवज़ में इन विद्वानों को खुद केवल दर्शनशास्त्र पढ़ा पाते हैं। अब से वे इन विद्वानों को राजशाही के पाठ भी पढ़ा सकेंगे। कॉन्ग्रेस की पहले से बनी टूलकिट के उद्देश्य के बारे में लिखा जाएगा; प्रिपेयर्ड फॉर हिज हाईनेस राहुल गाँधी, द फ्यूचर किंग ऑफ द डेमोक्रेसी ऑफ इंडिया !

बस एक ही समस्या है। प्रधानमंत्री बनने की तैयारी में राहुल जी ने वर्षों की कड़ी मेहनत की है। अब किंग बनने के लिए मेहनत शुरू से न शुरू करनी पड़ जाए।

नंदीग्राम में पस्त ममता बनर्जी लौट के भवानीपुर आएँगी? TMC के शोभनदेव चट्टोपाध्याय का विधायकी से इस्तीफा

पश्चिम बंगाल के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने मंगलवार (21 मई) को इस्तीफा दे दिया। नंदीग्राम में बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से हारने के बाद अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अपनी पारंपरिक भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है।

विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने चट्टोपाध्याय के इस्तीफा मंजूर करते हुए कहा कि वो इस्तीफे को लेकर संतुष्ट हैं और चट्टोपाध्याय ने अपनी स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है। इसलिए उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भवानीपुर सीट से इस्तीफे के बाद शोभनदेव खरदा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, जहाँ टीएमसी नेता काजल सिन्हा की मौत के बाद उपचुनाव होना है।

वहीं इस्तीफा देने वाले विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले भी दो बार इस सीट से जीत चुकी हैं। चट्टोपाध्याय ने कहा, “जब मैंने सुना कि मुख्यमंत्री यहाँ से चुनाव लड़ना चाहती हैं तो मैंने यह सीट खाली कर दी। मुझ पर कोई दबाव नहीं है। यह उन्हीं (ममता बनर्जी) की सीट थी, मैंने तो बस इसे सुरक्षित किया था।“

2011 में भी ममता बनर्जी के लिए खाली हुई थी भवानीपुर सीट

आपको बता दें कि 2021 में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भवानीपुर विधानसभा सीट से टीएमसी के शोभनदेव चट्टोपाध्याय जीते थे। उन्होंने भाजपा के रुद्रनील घोष को हराया था। चट्टोपाध्याय को जहाँ 73,048 मत प्राप्त हुए थे वहीं भाजपा के रुद्रनील घोष 44,541 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

ममता बनर्जी पहले भी भवानीपुर से चुनाव लड़ चुकी हैं। 2011 में भी टीएमसी के सुब्रत बक्शी ने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए के लिए भवानीपुर सीट खाली की थी। इसके बाद 2016 में इस सीट से ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस की दीपा दास मुंशी को हराया था। इस बार भी मुख्यमंत्री बने रहने के लिए ममता बनर्जी को छह महीने के भीतर चुनाव जीतकर सदन का सदस्य बनना होगा।

हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था, जहाँ उन्हें भाजपा के प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी के हाथों पराजय झेलनी पड़ी। कभी ममता के बेहद करीबी नेताओं में शामिल रहे शुभेंदु अधिकारी विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।        

Sobhandeb Chattopadhyay of tmc resigns from Bhawanipore mamta will contest

कॉन्ग्रेस के पत्र के बाद Twitter ने टूलकिट वाले ट्वीट पर लगाया भ्रामक का लेबल, राहुल गाँधी के प्रोपेगंडा ट्वीट्स पर रहता है चुप

कॉन्ग्रेस पार्टी ने बुधवार (मई 19, 2021) को माइक्रो ब्लॉगिंग एप ट्विटर को एक ईमेल भेज कर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रवक्ता संबित पात्रा, केंद्रीय कपड़ा और महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष सहित कई पार्टी पदाधिकारियों के हैंडल्स सस्पेंड करने को कहा था। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि जिस दस्तावेज को उसका टूलकिट बता कर शेयर किया जा रहा है, वो फर्जी है।

इस टूलकिट में इसका पूरा ब्यौरा था कि कोरोना काल में किए मोदी सरकार को बदनाम करना है। कुंभ को बदनाम करने से लेकर विदेशी मीडिया के साथ साँठगाँठ तक की बात लिखी हुई थी। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि इस दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ किया गया है। हालाँकि, टूलकिट को फर्जी साबित करने के लिए उसने अब तक कोई सबूत नहीं दिया है। कॉन्ग्रेस ने अपनी शिकायत में सिर्फ उस FIRs की प्रति लगाई थी, जो उसने भाजपा नेताओं के विरुद्ध दर्ज कराया था।

इस पत्र में लिखा है कि भाजपा नेताओं ने एक ‘पूर्व-नियोजित आपराधिक षड्यंत्र’ के तहत कॉन्ग्रेस के फर्जी लेटरहेड पर छेड़छाड़ कर के एक दस्तावेज तैयार किया गया, ताकि इसे अपने सोशल मीडिया हैंडल्स से शेयर करा-करा कर सांप्रदायिक तनाव और सामाजिक अशांति का माहौल बनाया जा सके। पार्टी का आरोप है कि देश के विभिन्न राज्यों में हिंसा फैलाने के लिए इस ‘शरारतपूर्ण और मनगढ़ंत’ कंटेंट शेयर किया गया।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने ट्विटर से अपील की है कि इन भाजपा नेताओं के ट्विटर हैंडल्स को स्थायी रूप से निलंबित किया जाए और मामले की पूरी जाँच की जाए। कॉन्ग्रेस ने इन भाजपा नेताओं को ‘आदतन फर्जी कंटेंट फैलाने वाला’ बताते हुए लिखा है कि ट्विटर प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके 1 दिन के भीतर ही ट्विटर ने कॉन्ग्रेस के टूलकिट वाले दस्तावेज को ‘मैनीपुलेटेड मीडिया’ वाले टैग के अंतर्गत डाल दिया।

Twitter ने संबित पात्रा के ट्वीट पर ‘Manipulated Media’ वाला टैग लगा दिया। ट्विटर भ्रामक कंटेंट्स पर ये लेबल लगाता है। ट्विटर ने भी ऐसा कोई तर्क नहीं दिया है, जिससे लगे कि ये फर्जी है। AltNews ने भी इस टूलकिट को फर्जी साबित करने के लिए झूठ फैलाया, लेकिन उनकी भी पोल खुल गई। ट्विटर की हरकतों से तो ऐसा लग रहा है कि वो भी कॉन्ग्रेस की इस टूलकिट का हिस्सा है और इसमें उसका भी कुछ रोल है।

ट्विटर का भाजपा नेताओं के ट्वीट्स पर ‘भ्रामक कंटेंट’ के लेबल लगाने का पुराना इतिहास रहा है। अगर कॉन्ग्रेस या राहुल गाँधी के झूठ को बेनकाब करने के लिए अगर कुछ शेयर किया जाता है तो उसे भी ट्विटर भ्रामक बता देता है। दिसंबर 2020 में एक तस्वीर शेयर कर के राहुल गाँधी ने आरोप लगाया था कि पुलिस एक बुजुर्ग किसान को पीट रही है। भाजपा IT सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने इसका पूरा वीडियो शेयर किया।

उसमें देखा जा सकता था कि वो डंडा किसान को छूता तक नहीं है, लेकिन फिर भी झूठा प्रोपेगंडा फैलाया जा रहा था। इस पर भी ट्विटर ने भ्रामक का लेबल लगा दिया। इसी तरह पीएम मोदी ने असम की एक रैली में बताया कि कैसे कॉन्ग्रेस गरीब को गरीब रखना चाहती है तो कॉन्ग्रेस आईटी सेल हेड रोहन गुप्ता ने इसे काट-छाँट कर ऐसे पेश किया जैसे पीएम मोदी गरीबों को धोखा देने की बात कर रहे हों।

रोहन गुप्ता ने वीडियो के उस हिस्से को हटा दिया था, जिसमें पीएम मोदी कहते हैं कि ये कॉन्ग्रेस का प्रोपेगंडा है। हालाँकि, ट्विटर ने रोहन गुप्ता के वीडियो पर भ्रामक का लेबल नहीं लगाया। इसी तरह दिल्ली दंगों के आरोपित JNU के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को वेरिफाइड का ब्लू टिक दे रखा है। 21 वर्षीय दिशा रवि को भी ब्लू टिक मिला, जिसने ‘किसान आंदोलन’ से अशांति के लिए टूलकिट बनाया था।

‘अपने कपड़े उतारो’: जब म्यूजिक प्रोड्यूसर ने 19 साल की लेडी गागा का किया रेप, प्रेग्नेंट कर दर्द में छोड़ा

विश्व की सबसे मशहूर पॉप सिंगरों में से एक लेडी गागा ने हाल में अपने साथ हुए यौन शोषण को लेकर खुलासा किया। उन्होंने ओप्रा विंफ्रे के शो में बताया कि मात्र 19 साल की उम्र में एक म्यूजिक प्रोड्यूसर ने उनका बलात्कार किया था। इसके बाद वह प्रेग्नेंट भी हुईं और उनके दिमाग पर इसका गहरा असर भी हुआ।

35 वर्षीय लेडी गागा का असली नाम Stefani Joanne Angelina Germanotta है। ओप्रा के शो (The Me You Can’t See) में भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “मैं 19 साल की थी और मैं एक बिजनेस में काम करती थी। वहाँ एक प्रोड्यूसर ने मुझसे कहा, अपने कपड़े उतारो। मैंने मना किया और वहाँ से जाने लगी। उसने मुझसे कहा कि वह मेरे हर म्यूजिक को जला देंगे। इसके बाद वह रुके नहीं। उसने मुझसे कहना बंद नहीं किया। मैं सन्न रह गई… बाकी याद भी नहीं। ”

गागा के मुताबिक, “रेप के बाद मैं कई हफ्तों, हफ्तों, हफ्तों, हफ्तों तक बीमार थी और मुझे एहसास हुआ कि मेरे वही दर्द हैं जब मुझे उस शख्स ने रेप के बाद प्रेगनेंट करके एक कोने में छोड़ा था।” पॉप सिंगर कहती हैं कि इस घटना ने उन्हें शारीरिक और मानसिक तौर पर तोड़ दिया था, जिसका असर आज भी है। वह बताती हैं कि घटना के बाद उन्हें इतना दर्द होता था कि उनके डॉक्टर ने किसी मनोवैज्ञानिक के पास जाने की सलाह दी।

उन्होंने कहा, “मैं टूट गई थी और कुछ सालों के लिए मैं वो लड़की नहीं रह गई थी। जब मैं दर्द महसूस करती हूँ तो मुझे वैसा ही महसूस होता है जैसा कि मुझे बलात्कार के बाद हुआ था। मेरे पास बहुत सारे एमआरआई और स्कैन हैं जिनमें आया कुछ नहीं। लेकिन शरीर को सब याद था।”

गागा के जीवन पर इस यौन शोषण का असर कितना गहरा हुआ इसकी कल्पना इससे की जा सकती है कि उन्होंने कई बार खुद को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। वह उस घटना को याद करते हुए बताती हैं, “अगर मेरे 6 माह बहुत अच्छे बीत जाएँ, फिर भी बुरा लगने के लिए सिर्फ एक ट्रिगर की जरूरत है। जब मैं कहती है कि मुझे बुरा लग रहा है तो मेरा मतलब है कि मैं काटना चाहती हूँ।”

वह बताती हैं कि कभी भी किसी को दिखाना कि आप दुख में हैं आपको मदद नहीं करेगा। अपनी कहानी बताते हुए गागा ने यह भी कहा कि उन्हें दया नहीं चाहिए। वह बस अपनी कहानी बताकर दूसरों की मदद करना चाहती हैं। गागा बोलीं, “मैंने इस कहानी को अपने लिए नहीं बताया। क्योंकि ईमानदारी से ये बहुत मुश्किल हैं। मुझे बहुत शर्म आती है कि मैं लोगों को कैसे समझाऊँ कि मेरे पास विशेषाधिकार हैं, मेरे पास पैसा है, मेरे पास शक्ति है, और मैं दुखी हूँ? आप ऐसा कैसे कर सकते हैं?”

वह कहती हैं, “मैं अपनी कहानी इसलिए नहीं बता रही कि मैं चाहती हूँ आप मेरे लिए रोएँ। मैं बढ़िया हूँ। लेकिन अपना दिल किसी और के लिए खोलो। मैं बता रही हूँ क्योंकि मैं इससे गुजरी हूँ और लोगों को मदद की जरूरत है। तो ये मेरे उबरने का एक पार्ट है कि मैं आपसे बात कर पा रही हूँ।”

बता दें कि गागा इससे पहले ओप्रा से साल 2020 में भी अपने मेंटल हेल्थ पर बात कर चुकी हैं। उन्होंने तब भी इन बातों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि उनके पास मदद के लिए कोई नहीं था। लेकिन दवाइयों ने और अच्छे इलाज ने उनकी मदद की। उन्होंने बताया था कि अपने से बड़े 20 साल के उस रेपिस्ट को वह दोबारा नहीं देखना चाहतीं, क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो शायद उन्हें डर से पैरालाइज हो जाए।

हाउस अरेस्ट में रहेंगे ममता के मंत्री-विधायक: जमानत पर हाई कोर्ट पीठ के जजों में मतभेद, अब बड़ी बेंच में सुनवाई

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के मंत्री फिरहाद हकीम और सुब्रत मुखर्जी हाउस अरेस्ट में रहेंगे। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर सोवन चटर्जी भी नजरबंद रहेंगे। कलकत्ता हाई कोर्ट की एक पीठ ने शुक्रवार (21 मई 2021) को यह​ आदेश दिया। चारों नेताओं की नारदा स्टिंग केस में पिछले तीनों सीबीआई ने गिरफ्तारी की थी।

लाइव लॉ के मुताबिक जमानत याचिका पर कलकत्ता ​हाई कोर्ट की खंडपीठ में दो जजों के बीच मतभेद होने के बाद यह आदेश दिया गया है। साथ ही मामले को बड़ी पीठ पास भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस राजेश बिंदल का मानना था कि चारों नेताओं को नजरबंद रखा जाए। वहीं जस्टिस अरिजीत बनर्जी अंतरिम जमानत दिए जाने के पक्ष में थे।

जस्टिस बनर्जी ने कहा, ”पीठ के एक जज को लगा कि जमानत दे दी जानी चाहिए, लेकिन दूसरे जज इससे सहमत नहीं थे। इसलिए जमानत को लेकर अब बड़ी बेंच फैसला करेगी। इस बीच महामारी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए नेताओं को नजरबंद रखे जाने के लिए मँजूरी दी जाती है।”

हाई कोर्ट ने गिरफ्तार किए गए नेताओं में से दो के राज्य सरकार में मंत्री और एक के विधायक होने के कारण उन्हें अपने कार्यों के निर्वहन के लिए हाउस अरेस्ट के दौरान फाइलों तक पहुँचने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों से मिलने की अनुमति दी है। इसके अलावा पीठ ने मौजूदा आदेश पर रोक लगाने के सीबीआई के अनुरोध को भी खारिज कर दिया। पीठ ने कहा, “वे जनता के लिए जो भी काम कर रहे हैं, उसे जारी रखने दें।”

सीबीआई की ओर से कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से अपने आदेश पर स्टे लगाने को कहा। वहीं, टीएमसी नेताओं के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से कहा कि नजरबंद रखा जाना भी गिरफ्तारी से कम नहीं है। उन्हें रिहा कर दिया जाना चाहिए।

बता दें कि चारों नेताओं को सोमवार (17 मई 2021) को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इनकी गिरफ्तारी के बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीबीआई दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गई थीं और एजेंसी को अपनी गिरफ्तारी की चुनौती दी थी। हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने चारों नेताओं को जमानत दे दी थी। लेकिन कुछ ही घंटों बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।

रेप केस से बरी हुए तरुण तेजपाल के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी गोवा सरकार, 2013 में महिला सहकर्मी ने लगाया था यौन उत्पीड़न का आरोप

महिला सहकर्मी के यौन शोषण के मामले में शुक्रवार (21 मई 2021) को सेशन कोर्ट से बरी होने वाले ‘तहलका’ पत्रिका के प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ गोवा सरकार हाईकोर्ट में अपील करेगी। ‘तहलका’ के संपादक रहे तेजपाल पर 2013 में पत्रिका के ही एक कार्यक्रम के दौरान गोवा के फाइव स्टार होटल की लिफ्ट में अपनी ही महिला सहकर्मी के यौन शोषण का आरोप लगा था। इस मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।

हालाँकि, रेप केस में 2014 में उन्हें जमानत मिल गई थी, जिसके बाद से तेजपाल जमानत पर बाहर थे। उन्हें शुक्रवार (21 मई 2021) को सेशन कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। निचली अदालत के इसी फैसले को अब गोवा सरकार हाईकोर्ट में चुनौती देगी।

बरी होने के बाद क्या कहा तेजपाल ने

पूर्व ‘तहलका’ संपादक तेजपाल ने कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद सबसे पहले उनका केस लड़ने वाले वकील राजीव गोम्स को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा राजीव उनसे हमेशा कहते थे कि वो पैसों के लिए केस नहीं लड़ते हैं। गौरतलब है कि हाल ही कोरोना संक्रमित होने के बाद तेजपाल के वकील राजीव गोम्स का निधन हो गया था। इस पर तेजपाल ने कहा कि कोई भी व्यक्ति राजीव से बेहतर वकील की उम्मीद नहीं करेगा।

तेजपाल ने उन्हें बरी करने वाली जस्टिस क्षमा जोशी को भी सच के साथ खड़े होने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वक्त आने पर वो पूरी डिटेल्स के साथ मामले में अपना पक्ष रखेंगे। फिलहाल वो अपने परिवार के साथ प्राइवेसी चाहते हैं।

जस्टिस क्षमा जोशी ने 8 मार्च को ही इस मामले की अंतिम दलील सुन ली थी और बुधवार (मई 19, 2021) को ही इस मामला का फैसला सुनाया जाना था। लेकिन, फैसले की तिथि को 2 दिन टाल दिया गया था। इससे पहले भी कई बार फैसले की तिथि को टाला गया था। बताया गया था कि कोरोना महामारी के कारण कोर्ट में कर्मचारियों की कमी थी

2014 में गोवा क्राइम ब्रांच ने उनके खिलाफ 2846 पन्नों की भारी भरकम चार्जशीट दायर की थी। इससे पहले उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करने की गुहार लगाई थी। हालाँकि, इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली थी।

कोविड से किसान की मौत के बावजूद राकेश टिकैत जारी रखेंगे आंदोलन, कहा, ‘प्रदर्शन स्थलों पर कोविड वैक्सीन केंद्र बनाए सरकार’

भारतीय किसान संघ (BKU) के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने दिल्ली बॉर्डर पर केन्द्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए प्रदर्शन स्थलों के पास ही कोविड टीकाकरण केंद्र बनाने की माँग की है। टिकैत का बयान ऐसे समय में आया है जब सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे दो किसानों की मंगलवार को मृत्यु हो गई और उनमें से एक किसान कोरोना वायरस से संक्रमित था।

खेड़ा बॉर्डर पर मीडिया से बातचीत करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक कृषि कानून समाप्त नहीं किए जाते तब तक किसान प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे और न ही प्रदर्शन स्थलों से हटेंगे। किसानों की मौत की जिम्मेदारी सरकार पर डालते हुए टिकैत ने कहा कि सरकार प्रदर्शन स्थलों के नजदीक टीकाकरण केंद्र शुरू करे जिससे किसानों को Covid-19 के टीके लगाए जा सकें। हालाँकि ध्यान देने योग्य बात यह है कि खुद राकेश टिकैत कोरोना वायरस का टीका पहले ही ले चुके हैं।

MSP मिले बिना नहीं हिलेंगे किसान: टिकैत

टिकैत ने कहा, ”बीमारी अस्पताल की ओर ले जाती है और किसानों का यह आंदोलन संसद की ओर, इसलिए ये दोनों अलग हैं। यदि कोई बीमार है तो उसे देखना सरकार का काम है।”

कृषि कानूनों के खिलाफ लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने राकेश टिकैत ने कहा, “किसान कहीं नहीं जाएंगे। हम तब तक नहीं हिलेंगे जब तक एमएसपी नहीं दिया जाता है और सरकार हमसे बात नहीं करती है। एक आंदोलन जारी रखने के लिए छह महीने पर्याप्त नहीं हैं। हमने यहां एकता और एक मजबूत बंधन सीखा है इसलिए अब यहां से हटना मुश्किल है।’

किसान नेता ने किया आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध

वहीं दूसरी ओर BKU के एक दूसरे किसान संगठन भारतीय किसान संघ (किसान) के प्रवक्ता भोपाल सिंह ने राष्ट्रहित में किसान आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध किया है। सिंघू बॉर्डर पर किसानों की मौत के बाद भोपाल सिंह ने कहा कि यदि ऐसे ही किसानों की मौत होती रही तो आंदोलन कौन करेगा। सिंह ने यह भी कहा कि फिलहाल देश में स्थिति सही नहीं है और इसलिए किसानों को वर्तमान में अपना प्रदर्शन समाप्त करना चाहिए। ये प्रदर्शन परिस्थितियों के हिसाब से भविष्य में भी किए जा सकते हैं।

आपको बता दें कि मंगलवार (18 मई) को सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे दो किसानों की मृत्यु हो गई थी। दोनों किसान पंजाब के रहने वाले थे। इनमें से एक किसान कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था। मरने वालों में बलबीर सिंह (50) और महेंदर सिंह (70) शामिल हैं। दोनों क्रमशः पटियाला और लुधियाना के रहने वाले हैं।

सोनीपत के चीफ मेडिकल ऑफिसर जसवंत सिंह पुनिया ने बताया था कि बलबीर सिंह को बीमार हालत में अस्पताल लाया गया हालाँकि उनकी मृत्यु हो चुकी थी। जाँच करने पर यह सामने आया कि बलबीर कोरोना वायरस से संक्रमित थे।  

फर्जीवाड़े को लेकर वक्फ बोर्ड के 8 मेंबर पर केस: बारांबकी में ‘मस्जिद ढहाने’ का रच रहे थे प्रोपेगेंडा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में अवैध निर्माण पर कार्रवाई के बाद सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और सपा जैसे राजनीतिक दल ‘100 साल पुरानी मस्जिद’ ढहाने का प्रोपेगेंडा चला रहे हैं। अब रामसनेही घाट के तहसील परिसर में बने अवैध निर्माण में वक्फ बोर्ड का फर्जीवाड़ा सामने आया है। अवैध कब्जे को वक्फ संपत्ति घोषित करने के मामले में पुलिस ने बोर्ड के 8 सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाराबंकी पुलिस ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के निरीक्षक समेत 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में अधिकारी ने आरोप लगाया है कि 8 सदस्यों ने एक मस्जिद को वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत कराने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी की और धोखाधड़ी का सहारा लिया।

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया है कि आरोपितों ने वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत तहसील परिसर में अवैध रूप से एक ढाँचा बनवाया। उन्होंने दावा किया कि दस्तावेजों में हेराफेरी कर राजस्व विभाग की किसी रिपोर्ट के बिना उन्होंने सरकारी जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप पंजीकृत कराया था।

ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने बाराबंकी में प्रशासन द्वारा मस्जिद गिराने का आरोप लगाते हुए न्यायिक जाँच की माँग की थी। ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के कार्यकारी महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी ने एक बयान में कहा था, “रामसनेही घाट तहसील में सदियों पुरानी (100 वर्ष पुरानी) गरीब नवाज मस्जिद को प्रशासन ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सोमवार (17 मई 2021) की रात पुलिस की मौजूदगी में ध्वस्त कर दिया।

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी बाराबंकी जिले की रामसनेही घाट तहसील में स्थित मस्जिद को ध्वस्त किए जाने का आरोप लगाते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी। बोर्ड के अध्यक्ष जुफर अहमद फारूकी ने कहा कि ये मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड के तहत पंजीकृत थी। फारूकी ने कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा था, “यह न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि शक्तियों का दुरुपयोग भी है। साथ ही हाईकोर्ट द्वारा पारित अप्रैल 24, 2021 के आदेश का पूर्ण उल्लंघन है। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड इस मस्जिद का पुनर्निर्माण करने, उच्च स्तरीय जाँच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जल्द ही हाईकोर्ट में मामला दायर करेगा।”

विपक्षी दल कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी भी इस घटना को लेकर हमलावर हैं। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष मौलाना अयाज अहमद ने भी दावा किया था कि रामसनेही घाट स्थित गरीब नवाज मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने इसे शर्मनाक घटना करार देते हुए कहा कि बाराबंकी हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस-प्रशासन ने सोमवार (मई 17, 2021) की रात कोरोना कर्फ्यू की आड़ में रामसनेही घाट की गरीब नवाज मस्जिद को ‘शहीद’ कर दिया। पुलिस ने इस मामले को सियासी रंग देने वाले कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू समेत कई कॉन्ग्रेसी नेताओं को गुरुवार (20 मई 2021) को हिरासत में लिया था।

‘असली भारत’ के नाम पर राजदीप सरदेसाई ने परोसा झूठ, उत्तराखंड सरकार ने खोली पोल

इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई एक बार फिर झूठ परोसते पकड़े गए हैं। इस बार उनकी पोल उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्रालय ने खोली है। 20 मई को उन्होंने अपने शो में असली भारत की कहानी दिखाने के नाम पर बताया था कि उत्तराखंड में सरकार मृतकों का दाह-संस्कार भी ढंग से नहीं करवा रही। मृतकों को खुले में जलाना पड़ रहा है।

इस स्टोरी पर राज्य स्वास्थ्य विभाग का जवाब आने के बाद से सरदेसाई की एक बार फिर थू- थू हो रही है। उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि भैंसवाड़ा फार्म, प्रशासन द्वारा दाह संस्कार के लिए नामित स्थल है। यहाँ COVID-19 प्रोटोकॉल के अनुसार शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। यह कहानी सत्यापित नहीं की गई और इसकी प्रकृति सनसनीखेज है, ऐसा करना वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई के लिए अशोभनीय है।

अगले ट्वीट में स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि एसडीएम अल्मोड़ा, एएमए-जेडपी और ईओ-एनपी अल्मोड़ा साइट के प्रभारी हैं। वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं। पहाड़ियों में कोई नामित श्मशान नहीं है, लेकिन घाटों पर दाह-संस्कार के लिए इंतजाम किए गए हैं। पीपीई किट वाला व्यक्ति एक सरकारी कर्मचारी है जो अपने निर्दिष्ट कामों को कर रहा है।

भैंसवाड़ा फार्म में कोविड संक्रमित शवों के लिए बनाए गए घाट का उल्लेख हमें मीडिया रिपोर्ट में भी देखने को मिलता है। अमर उजाला की रिपोर्ट में 16 मई 2021 को लिखा गया था, “कोविड की दूसरी लहर के दौर में कोरोना से मरने वालों की तादाद बढ़ रही है। प्रशासन को संक्रमितों के शवों को जलाने के लिए नई जगहों की तलाश करनी पड़ रही है। ऐसे में लमगड़ा क्षेत्र के भैंसवाड़ा फार्म को संक्रमित शवों के दाह संस्कार के लिए घाट बनाया गया है।”

एक ओर जहाँ उत्तराखंड सरकार के पास इस बात के प्रमाण हैं कि घाट को कोविड-संक्रमित शवों के लिए आरक्षित किया गया है।

भैंसवाड़ा फार्म में कोविड शवों को जलाने के लिए स्थल चयनित किया गया

वहीं सरदेसाई अपनी सहकर्मी ऐश्वर्या पालीवाल की ग्राउंड रिपोर्ट दिखाने से पहले कहते हैं कि कोरोना वायरस पहाड़ों में पहुँच गया और कोविड पीड़ितों के परिवार वाले खुले में शव जलाने के लिए मजबूर हैं।

अब सरदेसाई के इस शो की हकीकत खुलने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स उनके लिए कह रहे हैं कि इस आदमी को छुट्टी पर भेज देना चाहिए। इसे निलंबन के बाद भी अक्ल नहीं आई है। कुछ लोग ट्विटर से अपील कर रहे हैं कि वह सरदेसाई पर कार्रवाई करके दिखाएँ कि वो पक्षपात नहीं करते। वहीं कुछ ऐसे भी है जो उत्तराखंड सरकार से ये सवाल कर रहे हैं कि आखिर वो ऐसी झूठी खबर दिखाने के आरोप में इन पर एफआईआर क्यों नहीं करती।

पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री ने लाइव इंटरव्‍यू में लगाए इजरायल पर ”बिना सबूत” गंभीर आरोप, एंकर ने लताड़ते हुए कहा, ‘यहूदी विरोधी’

पाकिस्‍तान के व‍िदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक लाइव इंटरव्यू में इजरायल के खिलाफ विवादित टिप्पणी की, जिसके लिए एंकर ने उन्हें यहूदी-विरोधी करार दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार (20 मई 2021) को टीवी चैनल सीएनएन के लाइव इंटरव्‍यू में कुरैशी ने बिना किसी ठोस सबूत के कहा कि इजरायल ”डीप पॉकेट्स” (अत्यधिक पैसे के लिए प्रयोग किया जाने वाला अमेरिकी स्लैंग) के बावजूद ”मीडिया युद्ध” में हार रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने आरोप लगाया क‍ि इजरायल मीडिया को न‍ियंत्रित कर रहा है। अपने इस बयान को लेकर अमेरिकी न्यूज चैनल की यहूदी एंकर का विरोध झेलना पड़ा।

संयुक्‍त राष्‍ट्र में इजरायल को घेरने के लिए अमेरिका पहुँचे कुरैशी ने गुरुवार (20 मई 2021) को एक लाइव इंटरव्यू में इजराइल-हमास संघर्ष पर चर्चा के दौरान कहा कि इजरायल हार रहा है। अपने संबंधों के बाद भी वह मीडिया युद्ध में हार रहा है। इसको लेकर उन्हें सीएनएन की एंकर की कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने इजरायल को बताया मीडिया को नियंत्रित करने वाला

दरअसल, सीएनएन की एंकर बियाना गोलोड्रीगा (Bianna Golodryga) के साथ इंटरव्‍यू में अपने बड़बोलेपन के लिए कुख्यात कुरैशी ने कहा, ”इजरायल के पास “डीप पॉकेट” है और वह मीडिया को नियंत्रित करता है। अपने संबंधों के बावजूद इजरायल हमास के खिलाफ अपनी लड़ाई में मीडिया युद्ध में हार रहा है।” गोलोड्रीगा ने पूछा कि आप किस तरह के संबंध की बात कर रहे हैं। इसको लेकर कुरैशी ने हँसते हुए जवाब दिया, ”हाहाहा डीप पॉकेट।” इसका मतलब पूछे जाने पर पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री ने कहा कि ”इजरायल मीडिया को नियंत्रित करता है।” वे बहुत प्रभावशाली हैं।” इस पर यहूदी एंकर ने पाकिस्तान के मंत्री को करारी फटकार लगाते हुए कहा कि आप यहूदी विरोधी हैं।

मैं इसे यहूदी विरोधी टिप्‍पणी मानती हूँ: CNN एंकर

कुरैशी के इस बयान पर गोलोड्रीगा ने उन्हें घेरते हुए कहा, ”मैं इसे यहूदी विरोधी टिप्‍पणी मानती हूँ।” इस पर मंत्री ने जोर देकर कहा कि वह यहूदी विरोधी बातचीत को सही नहीं ठहरा रहे हैं, तो सीएनएन की एंकर ने कुरैशी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने एक यहूदी विरोधी बयान के साथ अपनी बातचीत शुरू की। एंकर ने कहा कि मुझे खेद है कि मैं व्यक्तिगत रूप से एक पत्रकार के रूप में आपकी बातों से आहत हूँ। आपने यह सुझाव देकर शुरुआत की है कि मीडिया में इजरायल के करीबी और शक्तिशाली दोस्त हैं। यह एक यहूदी विरोधी बयान है। गोलोड्रीगा द्वारा कुरैशी को लताड़ने का पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसके बाद जब सीएनएन की एंकर ने चीन में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ अत्‍याचार के मुद्दे को उठाया तो वह बगले झाँकने लगे। कुरैशी ने कहा कि वह इसके बारे में सार्वजनिक रूप से कोई टिप्‍पणी नहीं करेंगे।

कुरैशी ने आगे कहा, “मैं किसी भी रॉकेट हमले को सही नहीं ठहराऊँगा और मैं हवाई हमलों को भी सही नहीं ठहरा सकता, जो इजरायल द्वारा किए जा रहे हैं। मैं इसके लिए उन्हें माफ नहीं कर सकता।”

इंटरव्यू के कुछ मिनट बाद जब कुरैशी ने सुझाव दिया कि फिलिस्तीनियों और इजरायलियों के लिए युद्धविराम एकमात्र विकल्प है, तो यहूदी एंकर पूछती हैं कि क्या पाक मंत्री द्वारा सुझाए गए समाधानों में यहूदी विरोध शामिल है।

इससे पहले कुरैशी ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की थी कि फिलिस्तीन में हिंसा को बंद कराया जाए। उन्‍होंने कहा कि अब वह समय आ गया है, जब कहा जाए कि बहुत हो गया। कुरैशी तुर्की के विदेश मंत्री के साथ अमेरिका पहुँचे हैं। बता दें कि कुरैशी अपने इस बयान के लिए अब सोशल मीडिया में जमकर ट्रोल हो रहे हैं।

इस बीच, इजरायल और हमास ने शुक्रवार तक गाजा पट्टी सीमा पर संघर्ष विराम पर सहमति जताई है, जिससे 11 दिनों की बमबारी समाप्त हो गई। इजरायल और हमास दोनों ने संघर्ष में जीत का दावा किया है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गाजा और इजरायल के बीच युद्धविराम का स्वागत किया।