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‘प्राइवेसी अपडेट वापस लो, वरना उठा सकते हैं सख्त कदम’: मोदी सरकार ने Whatsapp को चेताया, दिया 7 दिन का समय

केंद्र सरकार ने एक बार फिर से इंस्टेंट मैसेजिंग एप व्हाट्सएप्प को नोटिस भेजा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Whatsapp से एक बार फिर से कहा है कि वो अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी को वापस ले। इससे पहले व्हाट्सएप्प ने बड़ी चालाकी से अपने नए अपडेट को कुछ दिनों के लिए रोक दिया था लेकिन अब इस महीने में वो फिर से उसे वापस लेकर आया है। उसने कहा था कि वो मई 15, 2021 तक इसे रोक रहा है।

अब केंद्र सरकार ने उसे भेजी गई नोटिस में कहा है कि उक्त तारीख़ तक प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट को रोकने का ये अर्थ नहीं है कि वो सूचना की प्राइवेसी, डेटा की सुरक्षा और यूजर्स की पसंद नापसंद का सम्मान न करे। केंद्र सरकार ने व्हाट्सएप्प को भेजी गई नोटिस में उसे याद दिलाया है कि उसकी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव और जिस तरह से FAQ सेक्शन के अंतर्गत इसे लाया गया है, वो भारतीय नागरिकों के अधिकारों और हितों को अनदेखा करता है।

ये मामला दिल्ली हाईकोर्ट में भी चल रहा है। वहाँ भी MeitY ने इंस्टेंट मैसेजिंग एप के खिलाफ यही रुख अपनाया है। उसे कह दिया गया है कि भारतीय नागरिकों की सूचनाएँ एवं डेटा की सुरक्षा व प्राइवेसी का अधिकार बहुमूल्य है और इससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। साथ ही उसे याद दिलाया गया है कि किस तरह वो यूरोप व भारत के लोगों के लिए अलग-अलग नीतियाँ लाकर अपना दोहरा रवैया दिखा रहा है।

मंत्रालय ने नोटिस में कहा, “इसमें कोई शंका नहीं है कि आप इस बात से परिचित होंगे कि कई भारतीय नागरिक अपनी रोजमर्रा के जीवन में एक-दूसरे के संवाद के लिए Whatsapp का उपयोग करते हैं। लेकिन, व्हाट्सएप्प द्वारा इसका फायदा उठा कर अपनी अनुचित शर्तें थोपना न सिर्फ समस्या पैदा करने वाला है, बल्कि गैर-जिम्मेदाराना भी है। खासकर वो शर्तें, जो यूरोप और भारत के नागरिकों में भेदभाव करती हैं।”

साथ ही इस नोटिस में भारतीय संविधान व नियम-कानूनों का हवाला देते हुए Whatsapp को ये बताया गया है कि कैसे वो उनका उल्लंघन कर रहा है। साथ ही केंद्र ने चेतावनी दी है कि भारत की संप्रभु सरकार होने के नाते वो नागरिकों के हित के लिए कोई भी संवैधानिक कदम उठा सकता है। फ़िलहाल Whatsapp को 7 दिनों में इस नोटिस का जवाब देने को कहा गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है।

बता दें कि व्हाट्सएप्प की नई प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट को स्वीकार न करने वाला यूजरों से इस एप का प्रयोग कर कॉल या मैसेज करने की सुविधा छीन ली जाएगी। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट में कंपनी ने कहा है कि वो जबरन ऐसा नहीं करवा रहा है क्योंकि ये अनिवार्य नहीं है। व्हाट्सएप्प पहले से ही यूजरों का डेटा अपनी पैरेंट कंपनी फेसबुक के साथ शेयर कर रहा है। व्हाट्सएप्प ने ये कह कर भी खुद का बचाव किया था कि ओला, उबेर, जोमाटो और आरोग्य सेतु जैसे एप भी यूजर्स का डेटा लेते हैं।

‘सिंगापुर वैरिएंट’ पर डर फैलाकर घिरे केजरीवाल: विदेश मंत्रालय ने लताड़ा, सिंगापुर ने जताई आपत्ति

विदेश मंत्रालय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ‘सिंगापुर वैरिएंट’ के नाम पर डर फैलाने को लेकर जवाब देते हुए कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री भारत के लिए नहीं बोलते। मंगलवार (18 मई 2021) को केजरीवाल ने दावा किया था कि सिंगापुर में पाया जाने वाला कोरोना का नया वैरिएंट खतरनाक हैं। इसलिए भारत सरकार को इसे भारत आने से रोकने के लिए सिंगापुर की सारी फ्लाइट बंद कर देनी चाहिए।

इसके बाद विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि सिंगापुर सरकार ने उच्चायोग को केजरीवाल सरकार के बयान पर कड़ी आपत्ति जताने के लिए कॉल किया था।

एस जयशंकर ने केजरीवाल के रवैये को बताया गैरजिम्मेदाराना

केजरीवाल के गलत बयान के कारण विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी इस संबंध में ट्विटर पर स्पष्टीकरण देना पड़ा। भारतीय विदेश मंत्री ने एक ट्वीट में सिंगापुर और भारत के मजबूत रिश्तों को और कोविड दौर में ऑक्सीजन सप्लाई करने पर सराहा।

साथ ही अगले ट्वीट में लिखा, “हालाँकि, ये गैर जिम्मेदार रवैया है, वो भी उनका, जिन्हें मालूम होना चाहिए कि इससे लंबे समय से चली आ रही साझेदारी खराब हो सकती हैं। इसलिए मैं साफ कर देना चाहता हूँ कि दिल्ली के मुख्यमंत्री भारत के लिए नहीं बोलते।”

बता दें कि इससे पहले सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अरविंद केजरीवाल के दावों को खारिज किया था। वहीं सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन ने दिल्ली सीएम को तथ्यों के आधार पर बोलने की सलाह दते हुए कहा था कि सिंगापुर वैरिएंट जैसा कुछ नहीं है।

उन्होंने एस जयशंकर का बयान देखकर उन्हें धन्यवाद कहा। साथ ही लिखा, “अपने-अपने देश के हालातों को सुधारने पर फोकस करते हैं और एक दूसरे का ध्यान देते हैं। कोई भी सुरक्षित नहीं है जब तक हर कोई सुरक्षित न हो।”

वहीं अरविंद केजरीवाल के बयान को लेकर सिंगापुर दूतावास के बाहर भी विरोध हो रहा है। भाजपा का कहना है कि ये केजरीवाल का पैटर्न हो गया है। वह पैनिक क्रिएट करते हैं, वो भी बिन वैज्ञानिक तथ्यों के। वह बोलते और भाग लेते हैं।

वास्तव में, वायरस का B.1617 वैरिएंट सबसे पहले भारत में पाया गया था और तब से यह सिंगापुर सहित कई देशों में फैल गया है। सीएम केजरीवाल के इस रवैये और अज्ञानता ने देश को वैश्विक मंच पर शर्मिंदा किया है।

UP: नोटिस मिलते ही अवैध निर्माण छोड़ भागे, अब ‘100 साल पुरानी मस्जिद ढाहने’ का कर रहे प्रलाप

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में प्रशासन ने अवैध आवासीय परिसर पर कार्रवाई की। इसके बाद प्रशासन पर 100 साल पुरानी ‘गरीब नवाज’ मस्जिद को तोड़ने का आरोप लगाते हुए प्रोपेगेंडा बढ़ाया गया। राम सनेही घाट पर बने तहसील दफ्तर के पास ये अवैध निर्माण किए गए थे।

स्थानीय प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद कई मुस्लिम संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसके पुननिर्माण की माँग की है। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाराबंकी प्रशासन के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की बात कही है। मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने स्थानीय प्रशासन पर साजिश का आरोप लगाया है। मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष साबिर अली ने स्थानीय अधिकारियों पर मस्जिद को रातोंरात ढहाने और पुलिस बल की मौजूदगी में इसका मलबा हटाने का आरोप लगाया।

सुन्नी वक्फ बोर्ड का कहना है कि मस्जिद पंजीकृत था। इसके खिलाफ कोर्ट ने भी कोई आदेश नहीं दिए थे। बोर्ड ने बुधवार (19 मई) को जारी बयान में कहा, “हम कथित रूप से अतिक्रमण हटाने के नाम पर तहसील परिसर के पास स्थित 100 साल पुरानी मस्जिद को गिराने के लिए, तहसील और जिला प्रशासन की, खासकर सब डिविजनल मजिस्ट्रेट की, अवैध और उच्चस्तरीय कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में मस्जिद कमेटी को मार्च में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।, जिसका कमेटी ने 1 अप्रैल को जवाब दिया। बोर्ड का कहना है कि उन्हें आगे की कार्रवाई के बारे में नहीं बताया गया था। इसे ढहाए जाने के समय मस्जिद बंद थी और लोगों का प्रवेश रोकने के लिए बैरीकेड लगे हुए थे।

जिलाधिकारी ने बताई कार्रवाई की वजह

प्रशासन की इस कार्रवाई पर डीएम डॉ आदर्श सिंह ने कहा कि तहसील परिसर में उपजिला मजिस्ट्रेट के आवास के सामने अवैध रूप से बने आवासीय परिसर के संबंध में कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को 15 मार्च 2021 को नोटिस भेजकर स्वामित्व के संबंध में सुनवाई का मौका दिया था। लेकिन नोटिस तामील होते ही परिसर में निवास कर रहे लोग परिसर छोड़कर फरार हो गए, जिसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से 18 मार्च 2021 को तहसील प्रशासन द्वारा इस पर अपना कब्जा प्राप्त कर लिया गया।

जिलाधिकारी आदर्श सिंह के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इस मामले को निस्तारित करने पर यह सिद्ध हुआ कि आवासीय निर्माण अवैध है। इसी आधार पर उपजिला मजिस्ट्रेट रामसनेहीघाट न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत पारित आदेश का अनुपालन 17 मई 2021 को कराया गया।

पुनर्निर्माण की माँग

ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड के कार्यकारी महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी ने इस मस्जिद के गिरने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ” हमारी माँग है कि सरकार उच्च न्यायालय के जरिए इस मामले की जाँच कराए और जिन अफसरों ने यह गैरकानूनी हरकत की है उन्हें निलंबित किया जाए। साथ ही मस्जिद के मलबे को वहाँ से हटाने की कार्रवाई को रोककर और वैसी की वैसी हालत बरकरार रखें। इस जमीन पर कोई दूसरी तामीर करने की कोशिश न की जाए….यह सरकार का कर्तव्य है कि वह उस जगह पर मस्जिद का निर्माण करे और उसे मुसलमानों को सौंप दे।”

वहीं समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष मौलाना अयाज अहमद ने भी कहा कि रामसनेही घाट स्थित गरीब नवाज मस्जिद को ढहा दिया गया है। यह अत्यंत शर्मनाक घटना है। बाराबंकी हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब का केंद्र रहा है। पुलिस प्रशासन ने सोमवार रात कोरोना कर्फ्यू की आड़ में रामसनेहीघाट की गरीब नवाज मस्जिद को शहीद कर दिया। यह मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज है और यह आजादी से पहले की बनी है।

क्या JNU की पूर्व छात्रा सौम्या ने तैयार किया कॉन्ग्रेस का टूलकिट: 2019 लोकसभा चुनाव के वक्त भी थी एक्टिव

सोशल मीडिया पर मंगलवार (2021) को एक दस्तावेज जम कर शेयर किया गया, जिसके बारे में लोगों ने दावा किया कि ये ‘कॉन्ग्रेस का टूलकिट’ है। इसमें कुम्भ मेला को बदनाम करने, ईद का महिमामंडन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने और जलती चिताओं व लाशों की तस्वीरें शेयर कर भारत बदनाम करने का खाका था। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने दावा किया है कि ये ‘टूलकिट’ सौम्या वर्मा ने तैयार किया है।

हमने सौम्या वर्मा का LinkedIn प्रोफ़ाइल खँगाला तो पता चला कि वो प्रोफेसर राजीव गौड़ा के दफ्तर में कार्यरत हैं। MV राजीव गौड़ा कॉन्ग्रेस के सांसद रहे हैं और UPA काल में कई संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं। कर्नाटक कॉन्ग्रेस कमिटी ने उन्हें प्रवक्ता और घोषणापत्र समिति का अध्यक्ष बनाया था। फ़िलहाल वो IIM बेंगलुरु में प्रोफेसर हैं। कॉन्ग्रेस की विचारधारा को फैलाने के लिए वो कई ऑनलाइन कार्यक्रम चलाते हैं।

सौम्या वर्मा ने इंस्टाग्राम पर अपना पता दिल्ली दिया है। संबित पात्रा द्वारा शेयर किए गए कंटेंट के अनुसार, 6 पन्नों वाले कॉन्ग्रेस के ‘टूलकिट’ को उन्होंने ही ‘माइक्रोसॉफ्ट वर्ड 2019’ एप का प्रयोग कर के बनाया है। उन्होंने कुछ तस्वीरें भी शेयर की, जिसमें सौम्या वर्मा कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ दिख रही हैं। संबित पात्रा ने लिखा, “क्या सोनिया व राहुल गाँधी कोई प्रतिक्रिया देंगे? दस्तावेज की ‘प्रॉपर्टीज’ से ही साफ़ है कि इसका ऑथर कौन है।”

लोकसभा चुनाव 2019 के समय भी सौम्या वर्मा का नाम सामने आया था। वो उन युवाओं में शामिल थीं, जिन्होंने कॉन्ग्रेस का घोषणापत्र तैयार किया था। उन्होंने सेंट स्टीफेंस कॉलेज से स्नातक किया है। इसके बाद उन्होंने JNU से इतिहास में मास्टर्स की डिग्री ली। सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी करते समय उनके मन में राजनीति से जुड़ने की इच्छा जागी। वो सोनीपत स्थित अशोका यूनिवर्सिटी के स्नातक छात्रों को पढ़ाती भी थीं।

इस दौरान उन्होंने सिविल सर्विसेज की परीक्षा तो उत्तीर्ण नहीं की, लेकिन राजनीति व राजनीतिक नीतियों के प्रति उनके मन में खासी जागरूकता आई। राजीव् गौड़ा से प्रभावित होकर वो राजनीतिक रिसर्च में रुचि लेने लगीं। ‘द प्रिंट’ से बातचीत में उन्होंने बताया था कि अब वो पर्यावरण व उससे जुड़ी नीतियों में दक्ष होना चाहती हैं। राजीव गौड़ा के दफ्तर में उन्हें ‘डिप्टी हेड ऑफ रिसर्च’ का पद दिया गया।

सौम्या वर्मा ने शशि थरूर और सलमान खुर्शीद जैसे वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेताओं के अंतर्गत काम करते हुए आंतरिक सुरक्षा, पर्यावरण और संस्थागत सुधारों को लेकर रिपोर्ट तैयार की थी। ‘कॉन्ग्रेस के टूलकिट’ के अनुसार, भाजपा कुम्भ पर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए ईद का नाम ले सकती है लेकिन हमें दोनों त्योहारों की तुलना वाले ‘जाल’ में फँसने से बचना है। स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि ईद को लेकर एकदम से चुप्पी साध ली जाए और जहाँ भी ईद को लेकर बात हो उस पोस्ट या ट्वीट से खुद को अलग किया जाए।

कोरोना से जंग का कर्मयोगी: जमीन पर उतर मोर्चा लेने की CM योगी की ताकत, दूसरी लहर पर UP ने ऐसे पाया काबू

कोरोना की दूसरी लहर से लगभग पूरा देश ही जूझ रहा है। महामारी इतनी भयावह है कि स्वास्थ्य सेवा किसी विकसित देश की हो या अल्प विकसित देश की, बुरी तरह से प्रभावित है। सीमित संसाधन हर देश की लड़ाई को पंगु कर रहे हैं, ऐसे में भारत इसका अपवाद कैसे हो सकता है?

लेकिन यह कठिन समय ही नागरिकों को उनके नेताओं की नेतृत्व क्षमता पहचानने का भी मौका दे रहा है। नेताओं को इस बात का भान हो या न हो, पर आम भारतीय के मन और मस्तिष्क में उनकी बातें, उनका प्रदर्शन और उनकी नेतृत्व क्षमता जमा हो रही है।

भारत देख रहा है कि उपलब्ध सीमित संसाधनों के साथ कौन मुख्यमंत्री अपने राज्य के लोगों के लिए क्या-क्या कर रहा है। कौन केवल शिकायतें कर रहा है। कौन केवल मेहनत कर रहा है। कौन प्रोपेगेंडा कर रहा है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि मीडिया किसके खिलाफ, किसके पक्ष में और किसके साथ खड़ा है। इस लड़ाई का ऐसा कोई पहलू नहीं है जो एक आम भारतीय कहीं रिकॉर्ड न कर रहा हो।

ऑक्सीजन की कमी से लेकर उसके सरप्लस तक की यात्रा के दस्तावेज लिखे जा रहे हैं। बॉलीवुड सेलेब्स द्वारा किसी मुख्यमंत्री के यश गायन वाले ट्वीट के स्क्रीनशॉट लिए जा रहे हैं। पूरे भारत को ऑक्सीजन और इंजेक्शन की सप्लाई का दावा करने वाले किसी अति औसत दर्जे के सिने स्टार को ट्रोल किया जा रहा है।

कहीं नाराज़ समर्थक अपने ही मंत्री पर ट्वीट मिसाइल दागे जा रहे हैं। विपक्षी नेता द्वारा सत्ता में वापसी कर भाजपा समर्थकों से बदला लेने की धमकी वाला वीडियो वायरल हुआ जा रहा है। जिनके बच्चों की वैक्सीन मोदी ने कथित तौर पर विदेश भेज दी, वे लॉकडाउन के नियम तोड़कर शिकायती पोस्टर चिपका रहे हैं।

इन घटनाओं के बीच यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ हर जगह दिखाई दे रहे हैं। चाहे वह हॉस्पिटल हो या आँगनबाड़ी में बना टेस्ट सेंटर। गाँव का कोविड सेंटर हो या फिर गाँव में कोरोना पीड़ितों की सहायता के लिए पहुँची टीम से बातचीत। किसी शहर में तीसरी लहर के लिए की जाने वाली तैयारी हो। हर जगह योगी दिखाई दे रहे हैं। पत्रकारों से बात करते हुए, अफसरों के साथ बैठक करते हुए, आदेश देते हुए, ऑक्सीजन सप्लाई के लिए बनने वाले प्लांट का जायज़ा लेते हुए, ऑक्सीजन ऑडिट के लिए पहुँची टीम से मुलाक़ात करते हुए! ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ योगी दिखाई न दे रहे हों। यह बात अलग है कि वे ख़ुद कोरोना संक्रमण से लड़कर स्वस्थ हो वापस लौटे हैं।

साभार: दैनिक हिंदुस्तान

आईआईटी कानपुर और आईआईटी वाराणसी के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से बात करके अपने प्रदेश में ऑक्सीजन ऑडिट की पहल ख़ुद योगी ने की। दिल्ली के आईआईटियन मुख्यमंत्री के ठीक उलट जो आक्सीजन ऑडिट की बात का तब तक विरोध करते रहे जब तक उनके लिए यह करना संभव था।

यह विडंबना ही है कि मुख्यमंत्री के तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश में इनसेफ्लाइटिस से लड़ाई के लिए योगी सरकार की सराहना राष्ट्रीय मंचों पर कम और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अधिक हुई। ऐसे में यह मात्र संयोग नहीं है कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के इस सरकार के तरीक़ों की सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन कर चुका है।

करीब एक महीने पहले रोज नए संक्रमित रोगियों की संख्या क़रीब चालीस हजार से घट कर आज दस हजार के आस-पास आ पहुँची है। टीम बनाकर गाँव में मरीजों को पहचानने की बात हो या उनके इलाज के लिए एक न्यूनतम तैयारी की बात हो, योगी आदित्यनाथ ने विशेषज्ञों पर निर्भरता और विश्वास दिखाया है।

उनकी सरकार ने जिन योजनाओं पर काम शुरू किया है, वे समय पर पूरी हुई तो प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई पहचान मिलेगी। ऑक्सीजन की कमी हो या अस्पतालों में बेड बढ़ाने की आवश्यकता, इस समय योगी सरकार हर समस्या पर काम कर रही है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से लड़ने की तैयारियों की शुरुआत नोएडा के अस्पताल से हो चुकी है और योजना के अनुसार प्रदेश सरकार समय रहते अपनी तैयारियों को पूरा कर लेगी।

ऐसा नहीं कि इस महामारी से लड़ाई में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सब कुछ सही ही किया है। लेकिन यह अवश्य है कि उन्होंने पहले से उपलब्ध संसाधनों को न केवल बढ़ाने का काम किया है, बल्कि अपनी तरफ से हर संभव कोशिश की है कि महामारी पर क़ाबू पाया जा सके।

योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार का मूल्यांकन पहले भी हुआ है और आगे भी होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब उनके नेतृत्व की क्षमता और प्रदर्शन का तार्किक मूल्यांकन भी किया जाएगा।

उमंग का गुस्सा बहुत ज्यादा है…मुझे डर लगता है: GF के सुसाइड पत्र और चैट ने खोले कॉन्ग्रेस विधायक के कई राज, केस दर्ज

मध्य प्रदेश के पूर्व वन मंत्री और वर्तमान में गंधवानी से कॉन्ग्रेस विधायक उमंग सिंघार अपनी ‘गर्लफ्रेंड’ सोनिया भारद्वाज के सुसाइड मामले में चारों ओर से घिर गए हैं। पुलिस को घटनास्थल से सुसाइड नोट बरामद होने के बाद अब वॉट्सऐप चैट से पता चला है कि सोनिया लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रही थीं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि पुलिस के हत्थे सिंघार और भारद्वाज के बीच हुई बातचीत के कई प्रमाण हैं, जिनसे लगता है कि सोनिया उमर सिंघार के साथ रिश्ते को लेकर मानसिक तनाव में थीं। हालाँकि अभी, इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इसके अलावा सूत्रों के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि शादी के नाम पर सोनिया को रोका जा रहा था, जिसके चलते वह काफी परेशान थीं।

आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज

इस रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस के पास सिंघार के खिलाफ काफी सबूत हैं और इसी को देखते हुए घटना के मात्र 30 घंटों के अंदर ही सिंघार को केस में आरोपित बना दिया गया है। उनके खिलाफ गैर जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। लेकिन अभी विधायक की गिरफ्तारी नहीं हुई है। लेकिन पुलिस का कहना है कि वह जल्द ही कॉन्ग्रेस नेता को हिरासत में लेगी।

पुलिस फिलहाल हर कड़ी को जोड़ते हुए अपनी जाँच कर रही है। सोनिया का फोन जब्त करके जरूरी जाँच करवाई जा रही है। अभी तक मिले सारे सबूत और बयान सिंघार के खिलाफ हैं। शुरू में सिंघार इस मामले में आरोपित बनाए जाने से पहले मजिस्ट्रेट से जाँच की माँग कर रहे थे। हालाँकि पुलिस ने बताया कि उनके पास कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं जिन्हें एक-एक कर जमा किया जा रहा है।

गौरतलब है कि हरियाणा के अंबाला की रहने वाली 39 वर्षीय सोनिया भारद्वाज का शव रविवार (मई 16, 2021) को भोपाल स्थित कॉन्ग्रेस विधायक उमर सिंघार के निजी बंगले से बरामद किया गया था। सोनिया ने कथित तौर पर बंगले में फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी। सोनिया के पास से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसमें लिखा था,

“अब मैं और सहन नहीं कर सकती। मैंने अपनी तरफ से सबकुछ किया। पर उमंग का गुस्सा बहुत ज्यादा है। मुझे डर लगता है। वो मुझे अपनी लाइफ में जगह नहीं देना चाहता। उसकी किसी भी चीज को टच करो तो उसको बुरा लगता है। इस बार भी मैं जबरदस्ती भोपाल आई। वो चाहता ही नहीं था कि मैं भोपाल आऊँ। आर्यन सॉरी। मैं तेरी लाइफ के लिए कुछ नहीं कर पाई। मैं जो भी कर रही हूँ, अपनी मर्जी से कर रही हूँ। किसी की कोई गलती नहीं है। उमंग आपके साथ मैंने सोचा था लाइफ सेट हो जाएगी। आई लव यू। कोशिश की अडजस्ट करने की पर आपने जगह नहीं दी मुझे अपनी लाइफ में। आर्यन सॉरी।”

भोपाल के एसीपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता के विरुद्ध आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह दो-तीन दिन से विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। जैसे ही उन्हें इसकी जानकारी हुई वह तत्काल भोपाल आ गए। उनका कहना है कि वो खुद हैरान हैं कि सोनिया ने ऐसा क्यों किया, वो तो बहुत अच्छी मित्र थीं।

कोरोना बेकाबू, फिर भी 500 की ‘छोटी भीड़’ के सामने शपथ लेंगे वामपंथी विजयन: समारोह रोकने को SC में याचिका

जहाँ एक तरफ केरल कोरोना वायरस संक्रमण से बेहाल है, वहीं दूसरी तरफ वामपंथी गठबंधन एक भव्य समारोह के जरिए भीड़ जुटा कर अपनी सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी में लगा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक ने याचिका दायर कर के इस शपथग्रहण समारोह को रोकने की अपील की है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कोरोना दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए सभी राजनीतिक या धार्मिक समारोहों और प्रदर्शनों पर रोक लगाने की बात की गई है।

रिटायर्ड वैज्ञानिक केएम शाहजहाँ ने वकील उषा नंदिनी के जरिए दायर की गई याचिका में कहा है कि कम से कम 1 महीने के लिए 50 लोगों से अधिक के जुटान वाले सभी समारोहों पर रोक लगाई जाए। राजधानी तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में गुरुवार (मई 20, 2021) को दोपहर 3:30 बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में 500 लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है। इसके लिए 80,000 स्क्वायर फ़ीट का पंडाल तैयार किया जा रहा है।

याचिका में लिखा है, “ऐसे समारोह में भीड़ जुटाने की अनुमति कोरोना के इस काल में नहीं दी जा सकती। इसमें आमंत्रण पाकर आने वाले लोग खुद के लिए ही खतरा पैदा कर रहे हैं। पंडाल के निर्माण के लिए हजारों कार्यकर्ताओं की सेवा ली जा रही है। इस ‘सुपर स्प्रेडर’ सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए केरल के सरकारी खजाने से भारी रकम खर्च की जा रही है। अपनी ताकत दिखाने और जीत का जश्न मनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।”

इस समारोह को सत्ता के दुरुपयोग के साथ-साथ लोगों के जीवन को संकट में डालने वाला भी बताया गया है, जिससे कोरोना के और ज्यादा फैलने की आशंका है। याचिका में दावा किया गया है कि नेतागण कोरोना के दिशानिर्देशों को नहीं मान रहे हैं। साथ ही 75 से अधिक लोगों की उपस्थिति वाले शपथग्रहण समारोहों को वर्चुअल कराने की दरख्वास्त की गई है। साथ ही माँग की गई है कि केरल के मुख्य सचिव को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जाए।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का कहना है कि कोरोना के आलोक में ये समारोह सादा ही होगा। उन्होंने कहा कि 2016 में जब उनका शपथग्रहण हुआ था, तब वहाँ 40,000 लोग मौजूद थे। उन्होंने कहा कि ये एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत 140 विधायकों और 29 सांसदों को समारोह में आने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने 500 को एक छोटी संख्या बताते हुए कहा कि न्यायपालिका और मीडिया के लोग भी लोकतंत्र के स्तम्भ हैं, ऐसे में उन्हें भी उपस्थित रहना ही होगा।

‘द न्यूज मिनट’ ने अधिवक्ता अर्यमा सुंदरम के हवाले से लिखा है कि एक शपथग्रहण समारोह में लोगों की उपस्थिति व उनकी संख्या के बारे में कोई संवैधानिक बंदिश नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल व सचिवालय कर्मचारियों के अलावा वो लोग उपस्थित रह सकते हैं, जिन्हें शपथ लेना हो। विशेषज्ञों का कहना है कि ये कार्यक्रम वर्चुअल भी हो सकता है। जब महामारी के समय में अंतिम संस्कार में भी 20 से अधिक लोग मौजूद नहीं रह सकते, इस समारोह से गलत सन्देश जाना तय है।

संवैधानिक विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसी कोई बंदिश नहीं है कि सभी विधायकों और सांसदों का इस कार्यक्रम में उपस्थित रहना अनिवार्य ही है। 2016 में जे जयललिता के निधन के बाद पनीरसेल्वम समेत 31 मंत्रियों ने बिना किसी भीड़-भाड़ के मात्र 10 मिनट में शपथग्रहण समारोह निपटा दिया था। 2017 में राजद से गठबंधन तोड़ कर नीतीश कुमार ने 15 मिनट में शपथ ले ली थी। 2019 में देवेंद्र फड़नवीस ने सुबह-सुबह मात्र 10 लोगों की मौजूदगी में सीएम की शपथ ले ली थी।

केरल के अस्पतालों में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर्स और बेड्स के लिए मारामारी मची है। केरल के 3 जिलों में ‘ट्रिपल लॉकडाउन’ लगा हुआ है, जहाँ लोग घरेलू चीजें खरीदने के लिए भी बाहर नहीं निकल सकते। ये भी समझ से परे है कि विजयन परिणाम घोषित होने से 3 हफ्ते बाद शपथ क्यों ले रहे हैं। 3,47,627 संक्रमितों के साथ केरल देश में तीसरे स्थान पर है। कुल संक्रमितों की संख्या भी 22 लाख के पार हो गई है, जो महाराष्ट्र व कर्नाटक के बाद सर्वाधिक है।

बताते चलें कि नई कैबिनेट में विजयन ने अपने दामाद मुहम्मद रियास सहित 11 मंत्री बनाए हैं। सारे चेहरे नए हैं। पिछली सरकार में केरल की स्वास्थ्य मंत्री रहीं तथाकथित ‘केरल मॉडल’ वाली केके शैलजा को भी इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। 77 वर्षीय मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अपने कैबिनेट में दामाद पीए मुहम्मद रियास को भी जगह दी है, जो CPI(M) के यूथ विंग ‘डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।

प्रोपेगेंडा का यह पाप भारी: टूलकिट से पल्ला झाड़ना कॉन्ग्रेस के लिए मुमकिन नहीं, इकोसिस्टम से बाहर नहीं चलेगा ‘फेक’ वाला जुमला

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक टूलकिट (ToolKit) जारी किया। बताया कि इसे कॉन्ग्रेस पार्टी ने तैयार किया ताकि कोरोना की दूसरी लहर में योजनाबद्ध तरीके से नरेंद्र मोदी, उनकी सरकार और प्रदेशों में बीजेपी सरकारों के विरुद्ध झूठा प्रचार चलाकर उन्हें बदनाम किया जा सके। कॉन्ग्रेस की ओर से वक्तव्य आया कि इस टूलकिट से उसका कोई सम्बंध नहीं है।

कॉन्ग्रेस की प्रतिक्रिया अपेक्षा के अनुरूप ही है। एक लोकतांत्रिक देश में हर राजनीतिक दल से एक न्यूनतम सार्वजनिक व्यवहार की अपेक्षा होती है, इसलिए विपक्ष में बैठा कोई दल यह स्वीकार नहीं करेगा कि उसने सरकार और उसके नेता के विरुद्ध ऐसी साजिश रची।

कॉन्ग्रेस की ओर से आया यह वक्तव्य तब और भी अपेक्षित लगता है जब सरकार के नेता नरेंद्र मोदी हों क्योंकि मोदी की कथित घटती लोकप्रियता अभी तक केवल सोशल मीडिया विमर्श का ही हिस्सा रही है और इसे लेकर किसी तरह का हालिया सर्वे प्रकाशित नहीं हुआ है। कोरोना की तीव्र दूसरी लहर के दौरान नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की असफलता को लेकर परंपरागत मीडिया और सोशल मीडिया में दावे भले किए जा रहे हैं पर फिलहाल एक वृहद् परिप्रेक्ष्य में उन्हें अभी तक मात्र दावों के रूप में ही देखा जाएगा, ऐसे दावे जो समय-समय पर पहले भी किए जाते रहे हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस इस टूलकिट के साथ किसी भी तरह से दिखना नहीं चाहेगी।

टूलकिट को लेकर बीजेपी, कॉन्ग्रेस और इन दलों के समर्थकों की प्रतिक्रियाएँ और काफी हद तक सोशल मीडिया में चल रहा शोर भी अपेक्षा के अनुरूप है। जैसा मैंने लिखा, कॉन्ग्रेस सार्वजनिक तौर पर यह नहीं चाहेगी कि इस टूलकिट से उसका किसी भी तरह का सम्बंध साबित हो। दूसरी ओर बीजेपी यही चाहेगी कि ऐसे सबूत पेश किए जाएँ जो साबित कर दें कि इसका सम्बंध कॉन्ग्रेस से है। राजनीतिक विमर्श में यह विषय अगले कई दिनों तक छाया रहेगा। इस पर तर्क, वितर्क और कुतर्क देखने को मिलेंगे जो लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा हैं।

इस टूलकिट में क्या-क्या लिखा है यह राजनीतिक विमर्शों में सक्रिय रहने वालों को पता है। लिहाजा उन्हें यहाँ दोहराने की आवश्यकता नहीं है। पर इस टूलकिट की सच्चाई क्या है, शायद इस प्रश्न का उत्तर निकट भविष्य में पता न चल सके। कॉन्ग्रेस पार्टी उसे बदनाम करने और इसके खुद के साथ जोड़ने को लेकर बीजेपी के विरुद्ध शिकायत कर चुकी है। लेकिन क्या इतना करना काफी होगा? क्या एक ​शिकायत पार्टी को इस टूलकिट के खुलासे से पैदा होने वाले विमर्श से अलग कर सकेगी? मेरे विचार से लंबे समय तक प्रश्नों से खुद को दूर रखने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेताओं के लिए ऐसा संभव न हो सकेगा।

इस टूलकिट के सम्बंध में प्रश्न पूछे जाएँगे। कॉन्ग्रेस पार्टी उन प्रश्नों का उत्तर दे या न दे पर वह इनसे अपना पल्ला नहीं झाड़ सकेगी क्योंकि वर्तमान समय महत्वपूर्ण है जब यह खुलासा हुआ है। यह टूलकिट भीषण महामारी से जूझ रहे भारतवर्ष में कॉन्ग्रेस पार्टी, उसकी सहयोगी मीडिया, उसके पाले वाले बुद्धिजीवी और उसके बनाए इकोसिस्टम के आचरण के बारे में है। पिछले कई वर्षों में राहुल गाँधी की राजनीतिक जवाबदेही देखी नहीं गई, न तो उनकी पार्टी के सामने और न ही भारतवर्ष की जनता के सामने।

उनकी राजनीति अभी तक अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ वीडियो में कठिन दर्शन झाड़ने, मेहनत करके इकट्ठा की गई भीड़ के सामने मानलॉग डिलिवर करने और ठोस प्रश्नों पर चुप रहने पर निर्भर रही है। पर उनकी यह रणनीति तभी तक चल सकती है जब तक बात उनकी पार्टी के प्रति उनकी जवाबदेही की हो रही है। वे ऐसा राजनीतिक आचरण तभी तक अफोर्ड कर सकते हैं जब तक वे अपने दल से मुखातिब हैं। पर जब बात भारतवर्ष के लोकतंत्र और अन्य दलों को लेकर होगी, उनका यह आचरण मान्य नहीं होगा।

इस टूलकिट के आधार पर प्रश्न पूछा जाएगा कि उसमें जो कुछ लिखा गया है वैसा हुआ या नहीं? दल ने इस टूलकिट में वर्णित योजना के अनुसार अपने इकोसिस्टम के जिस किसी जिस शाखा से जो करने के लिए कहा, उसने वैसा किया या नहीं? सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा के जिन स्वरूपों का वर्णन इस टूलकिट में है वैसा ही प्रोपेगेंडा हुआ या नहीं? इकोसिस्टम से पार्टी ने जो अपेक्षा रखी, उसने अपना वह किरदार निभाया या नहीं? ये सारे प्रश्न पूछे जाएँगे और चूँकि इस बार एक ऐसी टूलकिट लीक हुई है जिसे बनाने वाले और उसके क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी लेने वाले देसी हैं, कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व के लिए इससे खुद को अलग कर पाना लगभग असंभव होगा।

‘गोमूत्र व गोबर से नहीं, कॉमन सेन्स से ठीक होता है कोरोना’: BJP नेता की मौत का 2 पत्रकारों ने बनाया था मजाक, लगा NSA

मणिपुर के पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम और राजनीतिक एक्टिविस्ट एरेन्द्रो लेइचोमबम के खिलाफ ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)’ के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले इन दोनों को अदालत से जमानत मिल गई थी। दोनों के वकील चोंगथम विक्टर ने कहा कि लेइचोमबम और वांगखेम को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इन्हें गुरुवार (मई 13, 2021) को गिरफ्तार कर के रविवार तक के लिए पुलिस कस्टडी में भेजा गया था।

इन दोनों के खिलाफ भाजपा महासचिव पी प्रेमानंद मितेई और पार्टी के उपाध्यक्ष उषम देबाम की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया था। मणिपुर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर साइखोम टिकेंद्र सिंह के निधन के बाद इन दोनों ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इन्होंने भाजपा नेता की मौत का मजाक बनाते हुए लिखा था कि गोमूत्र और गोबर से कोरोना ठीक नहीं हो सकता।

वांगखेम ने लिखा था, “गोबर और गोमूत्र कोरोना को ठीक नहीं कर सकते। ये एक आधारहीन तर्क है। अब कल हम मछली खाएँगे।” वहीं लेइचोमबम ने लिखा था, “कोरोना गोबर व गोमूत्र से नहीं, बल्कि विज्ञान और कॉमन सेन्स से ठीक होता है। प्रोफेसर जी की आत्मा को शांति मिले।” सोमवार को इम्फाल वेस्ट के DM द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार 40 वर्षीय लेइचोमबम और 41 वर्षीय वांगखेम के खिलाफ NSA की धाराएँ लगाई गईं

इस मामले की FIR पहले ही दर्ज की जा चुकी है। DM ने कहा कि ये दोनों ही आरोपित पुलिस कस्टडी में हैं और निकट भविष्य में जमानत पर छूट कर बाहर आ सकते हैं, जिसके बाद आशंका है कि वो फिर से उन्हें गतिविधियों में लिप्त हो जाएँगे जो न सिर्फ प्रदेश की सुरक्षा के लिए खतरा है बल्कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में भी बाधक है। इसीलिए, ‘वैकल्पिक बचाव की व्यवस्था’ के तहत इनके खिलाफ कार्रवाई ज़रूरी है।

अब अगली नोटिस तक वो हिरासत में रहेंगे। वकील विक्टर ने कहा कि इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गोबर और गोमूत्र पर बातें की जा रही थीं और दोनों ने बस उस पर प्रतिक्रिया भर दी है, जिसके लिए कठोर कानून नहीं लगाया जा सकता। इससे पहले इम्फाल वेस्ट के CJM ने दोनों को 50,000 के मुचलके पर जमानत दी थी और कहा था कि वो भविष्य में ऐसी गलती न करें और पूछताछ के लिए उपलब्ध रहें।

कोरोना के सिंगापुर स्ट्रेन पर केजरीवाल का डबल फैक्टचेक, झूठा डर दिखा दिल्ली के CM ने कराई जगहँसाई

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दावे को सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। उन्होंने ट्वीट कर दावा किया था कि सिंगापुर में कोरोना संक्रमण नया रूप आया है जो बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। साथ ही इसके भारत में तीसरी लहर के तौर पर आने की आशंका जताई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि सिंगापुर वैरिएंट जैसा कुछ नहीं है।

बता दें कि भारतीय मीडिया में सिंगापुर स्ट्रेन को लेकर खबरें केजरीवाल के बयान के बाद से आनी शुरू हुईं। केजरीवाल ने मंगलवार (18 मई 2021) को कहा, “सिंगापुर में पाया गया कोरोना का नया रूप बच्चों के लिए बेहद खतरनाक बताया जा रहा है, भारत में ये तीसरी लहर के रूप में आ सकता है। केंद्र सरकार से मेरी अपील है कि सिंगापुर के साथ हवाई सेवाएँ तत्काल प्रभाव से रद्द हों और बच्चों के लिए भी वैक्सीन के विकल्पों पर प्राथमिकता के आधार पर काम हो।”

इसी बयान के बाद 18 मई को तमाम खबरें मीडिया में प्रकाशित हुईं, जिसमें सीएम के हवाले से बताया गया कि सिंगापुर में पाया जाने वाला कोरोना वायरस वैरिएंट बहुत खतरनाक है। सिंगापुर स्वास्थ्य मंत्रालय ने हिंदुस्तान टाइम्स और एनडीटीवी में प्रकाशित खबरों का उल्लेख अपने बयान में किया है। 

बाद में केजरीवाल के ट्वीट पर सिंगापुर के राजदूत की प्रतिक्रिया आई। उन्होंने स्वास्थ मंत्रालय की रिपोर्ट शेयर करके लिखा, “इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि सिंगापुर में एक नया COVID स्ट्रेन है। Phylogenetic टेस्टिंग से पता चला है कि सिंगापुर में हाल के हफ्तों में B.1.617.2 वैरिएंट ही बच्चों समेत कई कोविड मामलों में पाया जा रहा है।” केंद्रीय विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी केजरीवाल के दावों पर सवाल उठाते हुए बताया कि मार्च 2020 से ही अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें बंद हैं।

सिंगापुर के बयान के बाद तमाम लोगों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर देखने को मिली। प्रिशा नाम की यूजर ने सिंगापुर को सॉरी कहते हुए लिखा, “ये हमारा दुर्भाग्य है कि दिल्ली के लोगों ने ऐसे ब्लफमास्टर को फ्री पानी और आधी बिजली के लिए चुना। इसने पिछले 7 साल में कोई अस्पताल नहीं बनवाए और इसका मोहल्ला क्लिनिक सिर्फ प्रोपगेंडा हैबिलकुल इसकी तरह। इसलिए माफ करिए। कृपया इसकी भाँति अन्य भारतीयों को न समझें।”

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस पर प्रतिक्रिया दी और सिंगापुर राजदूत को कहा, “सर, आपको प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है। ये एक गिरा हुआ मंत्री है।”

हेनाली भवसर ने कहा, “अरविंद केजरीवाल कुछ शर्म कर लो। हमारे सिंगापुर के साथ अच्छे संबंध हैं उन्हें मत बर्बाद करो। भारत में सिंगापुर के राजदूत इसे गंभीरता से न लें। इनकी आदत है झूठ और नफरत फैलाने की। हम इनकी ओर से माफी चाहते हैं।”