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गले में तार बाँधा, ईंट-डंडों से पीटा, माँ के सामने कर दी हत्या: सुप्रीम कोर्ट से BJP वर्कर की विधवा, बंगाल में चुनाव बाद भड़की थी हिंसा

पश्चिम बंगाल में 2 मई 2021 को चुनावी नतीजों में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की जीत सुनिश्चित होने के बाद हिंसा भड़क उठी थी। विपक्ष खासकर बीजेपी समर्थक इस दौरान निशाने पर थे। बीजेपी से जुड़े जिन लोगों की हत्या की गई उनमें अभिजीत सरकार और हारन अधिकारी भी शामिल थे। हिंसा की सीबीआई जाँच या विशेष जाँच दल (SIT) के गठन को लेकर इनके परिजनों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है।

याचिका पर सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि किस बेरहमी से इनकी हत्या की गई। अभिजीत सरकार की पत्नी जो इस घटना की चश्मदीद भी हैं ने बताया, “भीड़ ने उनके गले में सीसीटीवी कैमरे का तार बाँध दिया। गला दबाया। ईंट और डंडों से पीटा। सिर फाड़ दिया और माँ के सामने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। आँखों के सामने बेटे की हत्या होते देख उनकी माँ बेहोश होकर मौके पर ही गिर गईं।”

सरकार की दो मई को उनके घर से बाहर घसीट कर हत्या कर दी गई थी। हमले से ठीक पहले वे दो बार फेसबुक पर लाइव हुए और टीएमसी गुंडों के हमले को लेकर बताया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील महेश जेठमलानी ने शीर्ष अदालत को बताया कि सरकार के शव का अभी तक अंतिम संस्कार नहीं हुआ है। लिहाजा उनके पोस्टमार्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए। साथ ही अदालत को बताया कि जिनकी हत्या की गई वे बीजेपी से जुड़े थे। इस दौरान राज्य प्रशासन और पुलिस ने मूकदर्शक रहकर हिंसा करने वालों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने इन मामलों में कार्रवाई और अदालती निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया।

दूसरी ओर बंगाल हिंसा को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर मंगलवार 18 मई 2021 को कलकत्ता हाई कोर्ट में भी सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने कहा कि हिंसा के पीड़ित मानवाधिकार आयोग (NHRC) और महिला आयोग (NCW) जैसी संस्थाओं में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आयोगों से ऐसी शिकायतों को तत्काल राज्य के पुलिस महानिदेशक को प्रेषित करने के निर्देश भी पाँच जजों की पीठ ने दिए। हाई कोर्ट में अब इस मामले की 25 मई को सुनवाई होगी।

बंगाल हिंसा को लेकर पिछले दिनों विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने चौंकाने वाले दावे किए थे। एक बयान में संगठन ने बताया था कि इस हिंसा से बंगाल के 3500 से ज्यादा गाँव प्रभावित हुए हैं। 40 हजार से अधिक हिंदू पीड़ित हैं। इनमें बड़ी संख्या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के लोगों की है।

विहिप के अनुसार हिंसा के दौरान बंगाल में कई जगह महिलाओं पर बर्बर अत्याचार हुआ। खेतों, दुकानों और घरों को नष्ट कर दिया गया। लूट और मारपीट नहीं करने के एवज में उनसे जबरन पैसा वसूला जा रहा। मछली व्यवसाइयों के तालाबों में जहर डाल दिया गया। कई जगहों पर हिंदुओं से उनके आधार, वोटर और राशन कार्ड समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज छीन लिए जाने की बात भी कही गई थी।

बच्चों व महिलाओं की आड़ में छिपने वाले आतंकियों के लिए इजरायल की ‘निंजा तकनीक’, दुश्मन को यूँ ढेर करता है बिन धमाके वाला छोटा पैकेट

फिलिस्तीन में स्थित आतंकी संगठन हमास की तरफ से किए जाने वाले रॉकेट फायर्स का इजरायल की तरफ से भरपूर जवाब दिया जा रहा है। जिस सटीकता से इजरायल ने हमास के ठिकानों को तबाह किया है, उससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि उसके पास ‘निंजा मिसाइल तकनीक’ मौजूद है। अमेरिका के पास भी 6 ब्लेड वाले निंजा मिसाइल मौजूद हैं। गाज़ा में बमबारी से तबाह एक कार की तस्वीर के आधार पर दावा किया जा रहा है कि इजरायल ने भी इस तकनीक को विकसित कर लिया है।

मंगलवार (मई 18, 23021) को Citroen Xsara मॉडल की एक सफ़ेद कार इजरायल के हमले का निशाना बनी। ‘इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF)’ ने बताया कि उसने हमास के आत्मघाती सबमरीन के संचालकों को निशाना बनाया है। IDF ने इस हमले का जो वीडियो जारी किया, उसमें देखा जा सकता है कि कार के ड्राइवर की तरफ एक मिसाइल आता है, जिससे कार की खड़कियाँ और दरवाजे तो तबाह हो जाते हैं लेकिन कार वहीं मौजूद रहती है।

ड्राइवर की मौत हो जाती है और मिसाइल आगे जाकर सड़क पर गिरती है। जिस सटीकता और कुशलता से ये हमला हुआ, वो छोटी मिसाइलों से ही संभव है। लीबिया, सीरिया और इलाक़ में अमेरिका भी R9X मिसाइलों का उपयोग करता रहा है, जो बल के साथ-साथ 6 ब्लेड्स का इस्तेमाल करती हैं। लोग पूछ रहे हैं कि इजरायल ने कहीं अमेरिका के साथ मिल कर इसका अपना वर्जन तो नहीं बना लिया? निंजा मिसाइल से गाड़ी पर किए जाने वाले हमलों में एक छेद भर बनता है लेकिन गाड़ी यूँ ही खड़ी रहती है।

6 ब्लेड्स वाले मिसाइलों से जब हमला किया जाता है तो ये छेद किसी तारे की आकृति का बनता है। ये छोटे से लक्ष्य को भेद कर दुश्मन को मार गिराता है। सामान्य रॉकेट जब गिरते हैं तो वहाँ ब्लास्ट होता है और आसपास की चीजें तबाह हो जाती हैं, लेकिन ‘निंजा मिसाइलों’ में ऐसा नहीं होता। हालाँकि, गाज़ा पट्टी वाले हमले में कार को कई अन्य जगह भी नुकसान होता दिखा है, लेकिन कार और उसका रंग फिर भी स्पष्ट दिख रहा है।

वहाँ पर दो अन्य गाड़ियाँ भी खड़ी थीं, जिन्हें थोड़ा नुकसान पहुँचा है। लेकिन, पारम्परिक मिसाइलों से अगर हमला किया जाता तो शायद तबाही का मंजर कहीं ज्यादा ही होता। एक विशेषज्ञ ने कहा कि मिसाइल के हमले में किसी एक व्यक्ति का मारा जाना, उस मिसाइल हमले के लक्ष्य को पहचानने की सूक्ष्मता को दिखाता है। हालाँकि, इजरायल के पास अमेरिका का R9X मौजूद नहीं है। लेकिन, जिस मिसाइल से हमला हुआ वो उसी तरह का कोई वर्जन है।

इजरायल ने ये तकनीक इसलिए भी विकसित की होगी क्योंकि गाज़ा पट्टी के आतंकी अक्सर महिलाओं और बच्चों के पीछे छिपने की कोशिश करते हैं। छोटी मिसाइलों में बम सामग्रियों की जगह 45 किलो का धातु प्रयोग में लाया जाता है, जो लक्ष्य को भेद देता है। इसके 6 ब्लेड्स लक्ष्य तक पहुँचने के एकदम पहले बाहर आते हैं। 2017 में सीरिया में अलकायदा के सरगना अबू खयर अल-मासरी को मारने में इसके पहली बार इस्तेमाल हुआ था।

इसके बाद से कई देशों में छोटे लक्ष्यों को भेदने के लिए अमेरिका ने इनका इस्तेमाल किया है। लीबिया, ईराक, यमन और सोमालिया के अलावा 2019 में अफगानिस्तान में भी इसका प्रयोग किया गया। मान लीजिए कुछ लोग साथ बैठ कर डिनर कर रहे हैं और उनमें से किसी एक को चिह्नित कर मार गिराना है, तो ये मिसाइल कारगर है। ये ड्राइवर को नुकसान पहुँचाए बिना गाड़ी में बैठे दुश्मन को ढेर कर सकता है।

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी अलकायदा के सबसे बड़े सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के लिए इन्हीं मिसाइलों का प्रयोग किया था, लेकिन बाद में सील कमांडो को भेजा गया। इजरायल का कहना है कि लगातार नौवें दिन उस पर रॉकेट्स फायर किए जा रहे हैं, ऐसे में वो जवाब देता रहेगा। इजरायल के पास मिसाइल हमलों से बचने के लिए ‘आयरन डोम‘ सिस्टम भी है। उसने कहा है कि वो लोगों की जान बचाने के लिए माफ़ी नहीं माँगेगा।

नोबेल पुरस्कार पाने के लिए जेफरी एपस्टीन नामक व्यक्ति के साथ रिलेशनशिप में थे बिल गेट्स

दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर और दुनिया के चौथे सबसे अमीर शख्स बिल गेट्स को लेकर आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। डेली बीस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अरबपति बिल गेट्स शादीशुदा होने के बावजूद जेफरी एपस्टीन (Jeffery Epstein) नामक व्यक्ति के साथ रिलेशनशिप में थे।

बिल गेट्स का मानना ​​था कि यौन उत्पीड़न के जुर्म में दोषी करार दिए जा चुके एपस्टीन की वजह से उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार हासिल करने में मदद मिल सकती है। गेट्स फाउंडेशन के एक पूर्व कर्मचारी ने मीडिया आउटलेट को बताया कि फाउंडेशन की कॉम्यूनिकेशन टीम को बताया गया था दोनों के बीच संबंध स्थापित किए गए थे, ताकि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार आसानी से मिल सके।

पूर्व कर्मचारी ने कहा, “हम सब जानते थे कि इस रिश्ते से बिल गेट्स और मेलिंडा के रिश्ते में दरार पड़ सकती है। उस व्यक्ति ने जेफरी एपस्टीन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी लोग जानते थे कि यह आदमी सही नहीं था।”

डेली बीस्ट ने पूर्व कर्मचारी के हवाले से कहा, “उन्होंने (गेट्स) सोचा था कि जेफरी उनकी मदद करेगा। वह सही लोगों को जानेंगे। इससे उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार आसानी से मिल सकता है, जिसे बिल दुनिया में सबसे अधिक महत्व देते हैं। पूर्व कर्मचारी ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि वह अंततः निराश थे कि यह काम नहीं कर सके।”

बिल गेट्स के एक प्रवक्ता ने इस बात से इनकार किया है कि उन्होंने नोबेल पुरस्कार पाने के लिए जेफरी एपस्टीन से मदद माँगी थी। प्रवक्ता ने आगे कहा कि नोबेल पुरस्कार निश्चित रूप से एक महान सम्मान होगा। यह कहना गलत है कि बिल गेट्स यह सम्मान पाने के लिए पागल थे और इसे उन्होंने अपना टारगेट बनाया हुआ था।

उन्होंने कहा, “अगर एपस्टीन के पास गेट्स की ओर से किसी भी पुरस्कार या सम्मान से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में खुद को सम्मिलित करने की योजना थी। तो इसकी जानकारी न तो गेट्स को थी और न ही उनके साथ काम करने वाले अन्य किसी व्यक्ति को थी।”

बता दें कि बिल गेट्स और मिलिंडा गेट्स के तलाक के साथ ही उनके 27 वर्षों के रिश्ते का अंत हो गया है। हाल ही में कंपनी के कामकाज के दौरान भी उनके एक अफेयर की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट की ही एक महिला कर्मचारी के साथ बिल गेट्स का अफेयर था और वो उसे डेट पर चलने के लिए भी कहते थे।

‘मोदी स्ट्रेन’: कैसे कॉन्ग्रेस टूलकिट ने की PM मोदी की छवि खराब करने की कोशिश? NDTV भी हैशटैग फैलाते आया नजर

सोशल मीडिया पर 18 मई को एक टूलकिट कॉन्ग्रेस के नाम से वायरल हुआ, जिसमें भारत, केंद्र सरकार और पीएम मोदी की छवि को खराब करने का दुर्भावनापूर्ण प्रयास देखा गया। कॉन्ग्रेस का कहना है कि टूलकिट नकली है और उसने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है।

टूलकिट में एक वर्ग ऐसा था जो विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने की बात कर रहा था। उस सेक्शन में, यह उल्लेख किया गया था कि “संकट और कुप्रबंधन” के बावजूद, पीएम मोदी की अप्रूवल रेटिंग कॉन्ग्रेस पार्टी की अपेक्षा से अधिक है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के सदस्यों और वालंटियर से इस स्थिति को ‘उनकी छवि को खराब करने और उनकी लोकप्रियता को कम करने के अवसर’ के रूप में लेने का आग्रह किया।

‘पीएम मोदी की छवि खराब करने के लिए हर संसाधन का इस्तेमाल करें’

पाँच सबसेक्शनों में विभाजित, सेक्शन में कहा गया कि वे समय के साथ विकसित संसाधनों का उपयोग करके पीएम मोदी की छवि को कैसे खराब कर सकते हैं। पहला बिंदु पीएम मोदी या भाजपा समर्थकों की तरह दिखने वाले अकाउंट को सक्षम करना और सरकार के खिलाफ एजेंडा को आगे बढ़ाना था।

दूसरे बिंदु पर चर्चा की गई कि कैसे भारत में विदेशी संवाददाताओं और विदेशी प्रकाशनों के लिए लिखने वाले इंडियन ओपेड लेखकों को ‘पीएम मोदी के अंतर्गत कुप्रबंधन’ पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करने के लिए किया जा सकता है।

टूलकिट के क्रिएटरों ने सभी से अंतिम संस्कार और शवों के ‘नाटकीय चित्रों’ का उपयोग करने का आग्रह किया। सभी ने देखा है कि पिछले कुछ हफ्तों से इस तरह की तस्वीरें कैसे सामने आ रही हैं, जिससे जनता में परेशानी हो रही है। उन्होंने आगे सभी को उन पत्रकारों से संपर्क करने के लिए कहा जो अंतिम संस्कार को कवर कर रहे हैं और स्थानीय स्तर पर ‘सही छवि’ को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं।

टूलकिट ने सभी से पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक वाक्यांशों का उपयोग करने के लिए ‘अपने खेमे के बुद्धिजीवियों और राय बनाने वालों’ से संपर्क करने का आग्रह किया। यह बताया गया कि बुद्धिजीवियों और राय बनाने वालों को ‘राजनीतिक रूप से उपयोग किए जाने पर अधिक स्वीकार्यता’ होनी चाहिए।

सोशल मीडिया स्वयंसेवकों से #ModiStrain का इस्तेमाल करने का आग्रह किया

इस सेक्शन में मुझे सबसे ज्यादा झटका यह लगा कि कॉन्ग्रेस टूलकिट म्यूटेंट कोविड -19 स्ट्रेन इंडियन स्ट्रेन या मोदी स्ट्रेन कहकर भारत और पीएम मोदी की छवि खराब करना चाहता है। हमने मोदी स्ट्रेन शब्द की खोज की और इस वाक्यांश के इस्तेमाल के बाद से एक टाइमलाइन बनाने की कोशिश की। जिसमें हमने यही पाया।

हैशटैग #ModiStrain 22 अप्रैल, 2021 से चलाया जा रहा है। बहुत सारे सोशल मीडिया उपयोगकर्ता जो कॉन्ग्रेस के अनुयायी प्रतीत होते हैं, हैशटैग का उपयोग कर रहे हैं।

अप्रैल 2021 से ट्विटर यूजर्स द्वारा मोदी स्ट्रेन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है

हैशटैग और फ्रेज “#IndiaStrain” और “India Strain” सोशल मीडिया पर अधिक प्रमुखता से उपयोग किए जाते हैं। अप्रैल 2021 की दूसरी छमाही तक, ट्विटर पर इसका उपयोग तेजी से बढ़ा, और उनमें इंडियन स्ट्रेन के उल्लेख के साथ ट्वीट्स की एक लहर थी।

NDTV जैसे भारतीय मीडिया हाउसों को शब्द और हैशटैग फैलाते हुए देखा जा सकता है।

सत्यापित समाचार आउटलेट द्वारा वाक्यांश और हैशटैग “इंडिया स्ट्रेन” और “#इंडियास्ट्रेन” का उपयोग किया जा रहा है

यह देखना दिलचस्प है कि हर कोई इंडियन स्ट्रेन या इंडिया स्ट्रेन वाक्यांश का उपयोग करने के लिए इतना उतावला है, जबकि वे इसे चीनी वायरस या वुहान वायरस कहने के खिलाफ थे।

नोट- ऑपइंडिया स्वतंत्र रूप से टूलकिट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सका है।

कॉन्ग्रेस टूलकिट का प्रभाव? पैट कमिंस और दलाई लामा को PM CARES फंड में दान करने के लिए किया गया था ट्रोल

सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को बदनाम करने के लिए एक नया टूलकिट सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी एक बार फिर से सुर्खियों में है। “कोर्नरिंग नरेंद्र मोदी एंड कोविड मिसमैनेजमेंट” शीर्षक वाले चार-पृष्ठ के दस्तावेज में पीएम केयर्स फंड को बदनाम करने की योजना थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोविड रिलीफ ट्रस्ट को बदनाम करने के लिए टूलकिट में उजागर की गई रणनीति पहले से ही अमल में है।

वायरल हो रहे ‘पीएम मोदी को बदनाम’ करने के लिए टूलकिट के अनुसार, दस्तावेजों में क्रिकेटर पैट कमिंस और तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा दोनों को सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स द्वारा घेरने की रणनीति सामने आई है।

टूलकिट के सेक्शन II (बी) में लिखा है, “अगर कोई सेलिब्रिटी PMCARES को दान करता है, तो उनसे आक्रामक तरीके से सवाल करें। अगर वे सोशल मीडिया पर हैं, तो उन्हें शर्मिंदा करने के लिए कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया विभाग का इस्तेमाल करें।” छोटे और प्रभावशाली ट्विटर यूजर्स द्वारा दो सेलिब्रिटीज से ऑनलाइन सवाल कर उन्हें परेशान किया गया है। क्या टूलकिट में ऊपर दी गई नापाक योजनाएँ पहले से ही अमल में थीं।

PM CARES Fund की स्थापना मार्च 2020 में की गई थी, जब दुनिया भर में कोरोना महामारी फैल गई थी। PM CARES फंड एक आपातकालीन कोष है, जिसे कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था। प्रधानमंत्री इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और इसके सदस्यों में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं।

पैट कमिंस ने कोरोना से जूझ रहे भारत के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाया था

26 अप्रैल को, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर पैट कमिंस ने कोरोना से जूझ रहे भारत के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाया था। उन्होंने ट्वीट किया, ”भारत एक ऐसा देश है, जहाँ पिछले कुछ वर्षों से मुझे बहुत प्यार मिला है और यहाँ के लोग भी बहुत प्यारे और सपोर्टिंग हैं। मैं जानता हूँ कि पिछले कुछ समय से इस देश में कोरोना वायरस की वजह से काफी दिक्कतें पैदा हो गई हैं, जिसमें पूरे देश में अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी का होना शामिल है। ऐसे में एक खिलाड़ी होने के नाते, मैं पीएम केयर्स फंड में 50 हजार यूएस डॉलर(लगभग 38 लाख रुपए) सहायता राशि के रूप में देना चाहता हूँ और मैं अपने साथी खिलाड़ियों से भी गुजारिश करता हूँ कि वे भी मदद के लिए आगे आएँ।”

हालाँकि, उनके इस ट्वीट के बाद उन्हें कुछ ही घंटों के बाद धमकाया जाने लगा। ट्वीटर पर वैरिफाइड अकाउंट ने पीएम केयर्स फंड की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। कुछ ने दावा किया कि इस धन का इस्तेमाल भाजपा चुनाव लड़ने के लिए करेगी, जबकि अन्य ने आरोप लगाया कि इस धन का गलत प्रबंधन किया गया है।

एक कॉन्ग्रेस समर्थक ने पैट कमिंस को भ्रमित करने का प्रयास किया था। उसने कहा कि उनकी यह पहल बेहद सराहनीय है, लेकिन उन्होंने अपना पैसा गलत हाथों में दे दिया है। फिर, उस व्यक्ति ने बेबुनियाद दावा किया कि पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से चुनाव जीतने के लिए किया गया था।

कुछ दिनों बाद, इक्का-दुक्का क्रिकेटरों ने भी घोषणा की कि उन्होंने पीएम केयर्स फंड से अपना दान यूनिसेफ ऑस्ट्रेलिया को स्थानांतरित कर दिया है। जबकि पैट कमिंस ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया।

दलाई लामा ने पीएम केयर्स फंड में दान करने का संकल्प लिया था

वहीं, पिछले महीने निर्वासित तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने पीएम केयर्स फंड में दान करने का संकल्प लिया था। कोरोना महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई में उनका योगदान सराहनीय था। लेकिन 1959 से भारत में रह रहे आध्यात्मिक गुरु को जल्द ही सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की नफरत का सामना करना पड़ा। एक यूजर ने लिखा, “कृपया लोगों को दान करें, पीएम-केयर्स के जरिए नहीं।”

एक अन्य यूजर्स ने दावा किया कि यह धन उन लोगों तक नहीं पहुँच सकता है, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। पीएम-केयर्स में योगदान करने की बजाय प्रभावितों को मुफ्त भोजन में दान देना ज्यादा फायदेमंद है।

बता दें कि सोशल मीडिया पर एक और टूलकिट धड़ल्ले से वायरल हो रहा है, जिसके बारे में भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि ये कॉन्ग्रेस पार्टी का है। उक्त दस्तावेज पर कॉन्ग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ छाप भी अंकित है और बताया जा रहा है कि पार्टी ने अपने नेताओं को दी गई निर्देशावली को दस्तावेज का शक्ल दिया था, जो अचानक से लीक हो गया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे ट्विटर पर शेयर करते हुए तंज कसा कि कॉन्ग्रेस इस तरीके से आपदा में लोगों की मदद कर रही है।

मायावती का उड़ाया था भद्दा मजाक: फेमिनिज्म इन इंडिया की एडिटर जपलीन पसरीचा ने 9 साल बाद माँगी माफी

जपलीन पसरीचा अक्सर अपने लेख और विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रही हैं। फेमिनिज्म इन इंडिया की संस्थापक-सीईओ व एडिटर इन चीफ जपलीन पसरीचा ने साल 2012 में बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर एक आपत्तिजनक (sexist jibe) ट्वीट किया था। इसको लेकर उन्होंने 9 साल बाद यानी आज (18 मई 2021) ट्वीट कर माफी माँगी है।

दरअसल, उन्होंने अपने एक ट्वीट में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के बच्चे नहीं होने और उनके द्वारा जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन की बात करने के लिए उनका मजाक उड़ाया था।

महिलाओं के मुद्दे पर जोर शोर से अपनी बात रखने वाली जपलीन पसरीचा ने बहन मायावती का मजाक उड़ाते हुए ट्वीट किया था, ”मायावती लोकसभा में परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण के बारे में बात कर रही हैं। लालू गुस्से में बोले: बेबी, जब आप गेम खेल नहीं सकती, तो नियम मत बनाओ।”

इतने सालों के बाद ट्वीट के वायरल होने के बाद पसरीचा ने मंगलवार (18 मई 2021) को माफी माँगी। उन्होंने इसके लिए ‘internalised sexism and casteism’ को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने लिखा, ”9 साल पहले किए गए इस ट्वीट के लिए मैं बिना शर्त माफी माँगती हूँ। उस समय मैं इससे बिल्कुल अंजान थी। तब से मैंने बहुत सारे internalised sexism and casteism को अनसुना कर दिया है। मुझे माफ कर दो, हाथ जोड़ती हूँ।”

उन्होंने कहा कि नौ साल पुराने ट्वीट को लेकर उनके खिलाफ एक अभियान शुरू किया गया।

वहीं, जपलीन पसरीचा द्वारा मायावती को लेकर किए गए कमेंट पर उनकी काफी निंदा भी की गई थी।

एक यूजर ने लिखा कि तुम फेमिनिस्ट होने का दावा करती हो, चूल्लू भर पानी में डूबकर मर जाओ जपलीन।

मालूम हो कि उनके ट्वीट ने सवर्णों के खिलाफ कई जातिवादी हमलों को हवा दे दी। अम्बेडकरवादी पत्रकार सुमित चौहान ने कहा कि सवर्ण मानसिक रूप से बीमार लोग हैं और स्वभाव से अत्यधिक जातिवादी हैं। साथ ही कहा कि ये भारत में नारीवाद का झंडा उठाये घूमती हैं।

इससे पहले, स्टैंडअप कॉमेडियन नेविल शाल ने सोमवार (17 मई 2021) को 5 साल पुराने एक मजाक के लिए माफी माँगी थी, जिसमें उन्होंने ‘रिजर्वेशन-कोटे’ का मजाक उड़ाया था। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से स्टैंडअप कॉमेडियन के एक वीडियो की क्लिप काफी वायरल हो रही है। इसमें वह रिजर्वेशन और मेडिकल कॉलेज में कोटा सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। इसे लेकर ट्विटर पर लोगों में काफी गुस्सा दिखा, जिसके बाद शाह ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक माफीनामा पोस्ट किया था।

ऑक्सीजन सिलेंडर के बदले सेक्स मामले पर NCW ने लिया संज्ञान: दिल्ली पुलिस कमिश्नर से जाँच और कार्रवाई की माँग

देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर की चपेट में है। इसके साथ ही यौन उत्पीड़न की घटनाएँ भी लगातार बढ़ रही हैं। इन चुनौतीपूर्ण स्थितियों ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। जैसा कि सबको पता है भारत में ऑक्सीजन का संकट बना हुआ है। इसी बीच कुछ लोग लाचार लोगों का फायदा उठा रहे हैं।

पिछले दिनों ऐसी ही एक चौंकाने वाली घटना दिल्ली से सामने आई थी। एक लड़की ने अपने पिता के लिए ऑक्सीजन की मदद माँगने पर उसे लड़के ने सेक्स करने के लिए कहा। दूसरी लड़की ने ट्विटर इस बारे लोगों को जानकारी दी। इसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।

घटना के बारे में एक ट्विटर यूजर ने बताया था कि उसकी दोस्त की बहन को अपने बीमार पिता के लिए ऑक्सीजन चाहिए था। लेकिन उसके पड़ोसी ने सिलेंडर के बदले उसे साथ सोने को कहा। भवरीन कंधारी नाम की लड़की ने ट्विटर पर लिखा, “मेरी सहेली की बहन जो मेरी छोटी बहन जैसी है। वह एक एलिट कॉलोनी में रहती है। उसके पड़ोसी ने बीमार पिता के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर देने के बदले उसे साथ में सोने को कहा। इस मामले में क्या एक्शन ले सकते हैं क्योंकि %$* तो इस बात से इनकार ही करेगा।”

अब एनसीडब्ल्यू प्रमुख रेखा शर्मा ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को मामले में हस्तक्षेप करने और समयबद्ध जाँच करने के लिए लिखा है। एनसीडब्ल्यू ने आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की भी माँग की है।

एनसीडब्ल्यू ने एसएन श्रीवास्तव को पत्र लिखा, “महामारी के बीच घटना से आयोग परेशान है। इसलिए, आपको मामले में हस्तक्षेप करने और समयबद्ध तरीके से जाँच करने की आवश्यकता है। साथ ही, आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के संबंधित धाराओं के तहत तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। की गई कार्रवाई को जल्द से जल्द आयोग को सूचित किया जाना चाहिए।”

इसके अलावा हाल ही में केरल में ई-पास के लिए एक रिक्वेस्ट आई जिसमें व्यक्ति ने लिखा था कि उसे सेक्स के लिए बाहर जाना है। बता दें कि कन्नूर के कन्नापुरम के इरीनेव में रहने वाले इस व्यक्ति ने वजह की जगह पर लिखा था कि वह शाम में कन्नूर की किसी जगह पर सेक्स के लिए जाना चाहता है। व्यक्ति का आवेदन चूँकि अजीब था, इसलिए असिस्टेंट कमिश्नर ने फौरन उस आदमी को पकड़कर लाने के निर्देश दिए। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, वल्ला पत्तन पुलिस ने उसे पकड़ा और पूछताछ के लिए थाने लाई।

पूछताछ में व्यक्ति ने अपनी गलती के लिए माफी माँगी। उसने बताया कि उसकी एप्लीकेशन में स्पेलिंग एरर हो गया था, जिसे वह भेजने से पहले सही करना भूल गया। उसके मुताबिक वह सेक्स की जगह ‘सिक्स ओ क्लॉक’ लिखना चाहता था। पुलिस ने उसकी बात सुनकर उसकी माफी स्वीकारी और कहा कि गैर जरूरी चीजों के लिए ई-पास की डिमांड न करें।

BMC ने कराई अपनी किरकिरी: कोविड वैक्सीन के लिए जारी किया था ग्लोबल टेंडर, किसी ने नहीं लगाई बोली

वैक्सीन निर्माताओं द्वारा एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (ईओआई) जमा करने की अंतिम तिथि मंगलवार (18 मई 2021) को समाप्त हो गई है। वहीं, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के हाथ सिर्फ निराशा ही लगी। टीकाकरण प्रक्रिया को तेजी लाने के लिए BMC ने बुधवार (12 मई 2021) को विदेशों में वैक्सीन निर्माताओं से एक करोड़ खुराक की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया था। ऐसा करने वाला यह देश का पहला नगर निगम बन गया, लेकिन इसे किसी वैक्सीन निर्माता से एक भी बोली नहीं मिली।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएमसी ने टीकों की खरीद के लिए सख्त शर्तें लगाई थीं। शर्तों में से एक यह थी कि बोली लगाने वाले वैक्सीन निर्माता को वर्क ऑर्डर जारी होने की तारीख से 3 सप्ताह के भीतर खुराक देनी होगी। वैक्सीन निर्माताओं के लिए 1 करोड़ वैक्सीन खुराक की डिलीवरी के लिए इतना कम समय पर्याप्त नहीं था।

गौरतलब है कि अधिकांश वैश्विक कंपनियाँ टीकों की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही हैं और मौजूदा ऑर्डर के पीछे भाग रही हैं। भले ही बीएमसी ने फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन जैसी कोविड वैक्सीन के विदेशी निर्माताओं के लिए अपना टेंडर खोल रखा था, लेकिन ऐसी सभी कंपनियों को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से पहले मंजूरी लेने होती है।

नगरीय निकाय ने वैक्सीन निर्माताओं के लिए यह शर्त भी रखी थी कि बीएमसी के पास ये सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उन्हें भंडारण सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी। ऐसी कठोर शर्तों, स्वीकृत कार्यों के लंबित होने, लचीलेपन की कमी और वितरण प्रक्रिया जटिल होने के कारण वैक्सीन निर्माताओं ने भी इस प्रस्ताव को लेकर खास रूचि नहीं दिखाई।

उल्लेखनीय है कि फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए बेहद कम तापमान की आवश्यकता होती है। फाइजर कोविड-19 वैक्सीन के भंडारण के लिए शून्य से 70 डिग्री सेल्सियस कम तापमान चाहिए होता है। भारत के ज्यादातर हिस्सों में कोल्ड चेन में सबसे कम शून्य से 25 डिग्री सेल्सियस नीचे तक के तापमान में टीके रखे जा सकते हैं। देश के कस्बों, गाँवों और सुदूर क्षेत्रों में इतने कम तापमान वाली कोल्ड स्टोरेज चेन नहीं हैं, ऐसे में वैक्सीन को वहाँ तक पहुँचाना बेहद कठिन होता है।

इसके अलावा बीएमसी टेंडर में यह भी शर्त रखी गई थी कि कंपनियों को कोई एडवांस भुगतान नहीं किया जाएगा और वैक्सीन की डिलीवरी में देरी होने पर उन पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।

बता दें कि मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर के 13 मई 2021 को कहा था कि टीके के लिए ग्लोबल टेंडर जारी करने वाले हम दुनिया के पहले नगर निगम हैं। उन्होंने बताया कि टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 18 मई है वर्क ऑर्डर पूरा होने के बाद, उन्हें 3 सप्ताह से कम समय में टीके वितरित करने होंगे। इसके लिए आईसीएमआर (ICMR) और डीसीजीआई (DCGI) के दिशानिर्देशों को पूरा करना है।

₹50 हजार मुआवजा, 2500 पेंशन, बिना राशन कार्ड भी फ्री राशन: कोरोना को लेकर केजरीवाल सरकार की ‘मुफ्त’ योजना

दिल्‍ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने कोरोना महामारी में माता पिता को खोने वाले बच्‍चों को 2500 रुपए प्रति माह और मुफ्त शिक्षा देने का ऐलान किया है। सीएम केजरीवाल ने डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की। इस मौके पर अहम घोषणाएँ करते हुए उन्‍होंने बताया कि 72 लाख लोगों को इस महीने का राशन मुफ़्त मिलेगा।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से भी इन राशन कार्ड धारकों को पाँच किलो प्रति माह राशन दिया जा रहा है। इस हिसाब से अब इनको 10 किलो राशन मुफ्त में दिया जाएगा। 5 किलो दिल्ली सरकार देगी और 5 किलो प्रधानमंत्री योजना के तहत यानी कुल 10 किलो राशन मुफ्त मिलेगा। उन्होंने कहा कि जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और वह गरीब हैं उनके लिए भी दिल्ली सरकार राशन की व्यवस्था करेगी। उन्‍होंने कहा कि जो लोग राशन माँगेंगे और कहेंगे कि हम गरीब हैं उनको राशन दिया जाएगा जैसे पिछली बार दिया था वैसे ही इस बार भी देंगे।

सीएम केजरीवाल ने कहा कि कोरोना से जिनकी मौत हुई, उनके परिवार को 50 हज़ार का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा जिस परिवार में कमाने वाले व्यक्ति की कोरोना से मौत हुई, उस परिवार को ₹50000 मुआवजे के साथ साथ 2500 रुपए महीना पेंशन दी जाएगी। 

सीएम केजरीवाल ने कहा कि जिनके घरों में कोरोना की वजह से कमाने वाला शख्स नहीं रहा, उनको पेंशन देने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि पति की मौत की स्थिति में पत्नी को, पत्नी की मौत की स्थिति में पति को और किसी अविवाहित की मौत की स्थिति में उसके माता-पिता को ये पेंशन मिलेगी।

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर किसी घर में किसी बच्चे के माता-पिता कि कोविड से दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो जाती है तो हर महीने 2500 रुपए का पेंशन 25 साल की उम्र तक तक बच्चे को दिया जाएगा। इसके अलावा शिक्षा का सारा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। उन्‍होंने कहा, “पिछले 4 से 5 दिन के अंदर मैंने और मेरे मंत्रियों ने बैठ कर इस पर काफी विचार मंथन किया। हमने यह देखने की कोशिश की कि लोग कहाँ-कहाँ मुसीबत में हैं और कहाँ-कहाँ से पैसा बचा सकते हैं सभी जगहों से पैसा निकाल कर यह योजना आपके लिए बनाई है।”

2 से 18 साल के बच्चों पर ट्रायल के लिए कोवैक्सिन को मिली मंजूरी, कोरोना इलाज से हटाई गई प्लाज्मा थेरेपी

कोरोना के इलाज से प्लाज्मा थेरेपी हटा दी गई है तो वहीं ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को 2 से 18 साल के बच्चों पर ट्रायल की मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि बच्चों पर ट्रायल 10 से 12 दिन में शुरू हो जाएगा। पहले कोरोना वैक्सीन पर निगाह रखने वाली सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने इसके ट्रायल की सिफारिश की थी।

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया, “कोवैक्सिन को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) द्वारा 2 से 18 वर्ष के आयु वर्ग में चरण II / III नैदानिक ​​परीक्षणों के लिए मंजूरी दे दी गई है। मुझे बताया गया है कि परीक्षण अगले 10-12 दिनों में शुरू हो जाएगा।”

जानकारी के मुताबिक, भारत बायोटेक की ओर से ये ट्रायल 525 वॉलंटियर्स पर किया जाएगा। ये 2 से 18 साल के बच्चों पर किया जा रहा कोवैक्सिन के क्लीनिकल ट्रायल का फेज़ 2 और फेज़ तीन होगा। ट्रायल के दौरान पहली और दूसरी वैक्सीन का डोज़ 28 दिनों के अंतर पर दिया जाएगा।

आपको बता दें कि भारत में अभी कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप चल रहा है। इस लहर ने देश के स्वास्थ्य सिस्टम को झकझोर दिया है, हालाँकि अब स्थिति सुधार की ओर है। ऐसे में एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि भारत में अभी कोरोना की तीसरी लहर भी आएगी और इसमें बच्चों पर सबसे ज्यादा असर होगा।

दुनिया में अभी बेहद कम देश हैं, जहाँ पर बच्चों को वैक्सीन लगाने का काम शुरू किया गया है। हालाँकि, अमेरिका में फाइज़र की वैक्सीन को मंजूरी मिली है, जो अब 12 साल से अधिक उम्र वाले बच्चों लगाई जा रही है।

वहीं केंद्र सरकार ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए क्लिनिकल परामर्श (clinical guidance) में संशोधन किया है। सरकार ने सोमवार (मई 17, 2021) को मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी के इस्‍तेमाल को नैदानिक प्रबंधन दिशा-निर्देश से हटा दिया। सरकार ने पाया कि कोरोना मरीजों के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी गंभीर बीमारी को दूर करने और मौत के मामलों में कमी लाने में मददगार साबित नहीं हुई है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के एक अधिकारी ने बताया कि कार्यबल ने क्लीनिकल गाइडेंस फार मैनेजमेंट आफ अडल्ट कोविड-19 पेशेंट्स को संशोधित कर दिया है और उसमें से स्वस्थ हुए व्यक्ति के प्लाज्मा (ऑफ लेबल) को हटा दिया है। पिछली गाइडलाइंस में मध्यम स्तर की बीमारी के शुरआती दौर में (लक्षण दिखने के सात दिनों के भीतर) प्लाज्मा थेरेपी के ‘ऑफ लेबल’ इस्तेमाल की सिफारिश की गई थी।