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फिल्म नहीं ‘भाई पोर्न’ है: 10 मिनट का मसाला है सलमान खान की ‘राधे’, बेकार कर दिए 2 घंटे

जैसा कि कई वर्षों से होता आ रहा है, इस साल भी ईद पर सलमान खान की फिल्म आई। फिल्म का नाम है – ‘राधे – योर मोस्ट वॉन्टेड भाई’। ‘राधे’ नाम सलमान खान के लिए नया नहीं है क्योंकि वो इसी नाम का किरदार ‘तेरे नाम (2003) और ‘वॉन्टेड (2009)’ में निभा चुके हैं। लेकिन, सलमान खान की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनकी नई फिल्म देखने पर दर्शकों को होने वाला टॉर्चर बढ़ता ही जा रहा है।

‘राधे’ एक ऐसी फिल्म है, जिसमें किसी भी किरदार को लेकर आपके मन में शंका उठ सकती है कि आखिर ये इस फिल्म में मौजूद है ही क्यों? इस फिल्म पर प्रभु देवा की छाप कम और सलमान खान का हस्तक्षेप ज्यादा दिखता है। अगर सारे फालतू दृश्यों को हटा दें तो ये फिल्म मात्र 10 मिनट में निपटाई जा सकती है। ये समझ से परे है कि जो चीज 10 मिनट में दिखाई जा सकती थी, उसे 2 घंटे में क्यों दिखाया गया?

आई, एक-एक कर फिल्म के किरदारों की बात करते हैं। सबसे पहले बात सलमान खान की। 55 की उम्र में 28 साल की दिशा पटानी के साथ रोमांस करते दिखे सलमान खान की इस फिल्म में पुलिस अधिकारी के रूप में एंट्री होती है, जो पुलिस कम और किसी गली का आवारा लड़का ज्यादा लगता है। हेयरस्टाइल ऐसा डाला गया है जैसे वो युवा लगें। अधिकतर दृश्य जबरदस्त क्रिएट किए गए हैं, जो दक्षिण की फिल्मों में इससे बेहतर ढंग से फिल्माए जाते हैं और अच्छे भी लगते हैं।

एक दृश्य में सलमान खान फोटोशूट के लिए अपने कपड़े उतारते हैं और उनकी ‘बॉडी’ देख कर आसपास के लोग पागल होने लगते हैं। दावा तो ये भी किया जा रहा है कि इसमें सलमान खान का कम और VFX एडिटिंग व कैमरा का कमाल ज्यादा है। वॉन्टेड के डायलॉग्स दोहरा कर ‘डेजा वु’ की कोशिश नाकाम रही है। एक दृश्य में तो हद ही हो जाती है जब सलमान खान घायल होने की ‘एक्टिंग’ करते हैं।

उनका किरदार कहीं सीधे नहीं जाता बल्कि शीशे फोड़ कर एंट्री लेता है। यहाँ तक कि उनकी एंट्री वाले दृश्य को फिर से स्लो कर के दिखाया जाता है, जो किसी टॉर्चर से कम नहीं है। जब विलेन उन्हें डंडे से मारता है तो टन-टन की ऐसी आवाज़ आती है, जैसे वो लोहे के बने हों। बीच-बीच में फिजूल के गाने हैं। गंभीर परिस्थिति में ‘सीटी मार’ गाना आ धमकता है। गानों में सलमान स्टेप्स करने की कोशिश भी करते हैं।

दूसरा किरदार है जैकी श्रॉफ का, जो राधे के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी होते हैं। फिल्म में वो कहीं लड़की वाले कपड़े पहन कर सलमान खान के साथ डांस कर रहे होते हैं तो कहीं शराब पी कर उलूलजलूल बकते रहते हैं। फिल्म की हीरोइन उनकी बहन ही होती है, जिसका एक ही काम है और वो है जहाँ-जहाँ हीरो से राह में टकरा जाना। अन्य जितने भी किरदार हैं, वो क्यों हैं यही समझ में नहीं आता।

फिल्म में न एक्शन है और न ही कॉमेडी, जबकि इन्हीं दोनों के नाम पर इसे बेचा जा रहा है। 2 साल बाद किसी अभिनेता की फिल्म आए और वो इस तरह से बनाई जाए तो समझ से परे है कि फिल्मिंग के दौरान हो क्या रहा था। फिल्म में एक ही किरदार ढंग से लिखा गया है और वो है रणदीप हुड्डा का। एक खतरनाक विलेन के रूप में उन्हें जहाँ-तहाँ घुस कर खून करते हुए दिखाया गया है और इस किरदार का बिल्डअप ठीक है।

फिल्म में महिलाओं का चित्रण बेकार है। दिशा पटानी को केवल फैंसी ड्रेस दिखाने के लिए रखा गया है। एक महिला पुलिसकर्मी को काफी ‘कमजोर’ दिखाया गया है। हाँ, फिल्म में ड्रग्स और युवाओं को दिखा कर, उनके मोटिवेशन की बातें कर के ‘Gen X’ का ध्यान अपनी तरफ खींचने की कोशिश की गई है। शायद सलमान खान को लगा हो कि युवाओं और स्कूली बच्चों को दिखाने से वो उनके फैन बन जाएँगे।

ये चौंकाने वाली बात है कि ‘राधे’ भी ऑनलाइन लीक हो गई थी और पाइरेसी के कारण सलमान खान को चेतावनी तक जारी करनी पड़ी। आखिर कौन लोग हैं जो इस फिल्म को देखने के लिए इसे लीक करा रहे हैं? उन्हें जेल नहीं, मुआवजा मिलना चाहिए क्योंकि फिल्म देखने के बाद वो भी इस स्थिति में नहीं होंगे कि जेल भी जा सकें। ये फिल्म खुद एक प्रकार की सज़ा है। जैसा कि ‘Mashable India’ में समीक्षक सुश्री साहू ने लिखा है, ये सिर्फ और सिर्फ एक ‘भाईजान पोर्न’ है।

सुनियोजित ढंग से हुआ कुंभ को बदनाम करने का प्रयास: कॉन्ग्रेस Toolkit पर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद ने जारी किया बयान

भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस पर कल (मई 18, 2021) एक टूलकिट का इस्तेमाल कर कुंभ को बदनाम करने का इल्जाम लगाया था। अब इसी क्रम में जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने लोगों से अपील की है कि वह मुद्दे का राजनीतिकरण न करें। उन्होंने आरोप लगाया कि कुंभ को बदनाम करके भारत की संस्कृति सभ्यता और विश्वसास को सुनियोजित ढंग से धूमिल करने का प्रयास हुआ।

अपने ट्विटर हैंडल पर जारी की गई वीडियो संदेश में स्वामी अवधेशानंद ने कुंभ की महत्ता से बात शुरू करते हुए कहा, “भारतीय संस्कृति, संस्कार, सभ्यता उसकी संवेदनाएँ अगर कहीं एक साथ दिखाई देती हैं तो वो कुंभ का महापर्व है। कुंभ पर्व केवल हिंदुओं का नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNESCO ने उसे सांस्कृत धरोहर के रूप में भी घोषित किया है।”

टूलकिट को लेकर वह बोले, “एक टूलकिट के द्वारा यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि कुंभ के मेले से कोरोना का संक्रमण गया। आँकड़ों की सत्यता को पहचानिए। जब कुंभ का मेला चल रहा था। तब अन्य प्रदेशों में कोविड की अधिक प्रचंडता थी। ऐसी उत्तराखंड में नहीं थी या कुंभ के अवसर पर नहीं थी। एक सुनियोजित ढंग से भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार अथवा हमारी पर्व परंपरा, मूल्यों पर, विशेषत: हमारी सांस्कृतिक निष्ठा पर प्रहार किया जा रहा है।”

स्वामी अवधेशानंद ने ऐसे प्रयासों को निंदा करते करते हुए कहा, “इस तरह अन्य मतों को और धर्मावलंबियों को प्रश्रय देकर और हिंदू संस्कृति का दुष्प्रचार करके कुछ स्वार्थ पूरे नहीं होंगे। समाज इसकी निंदा करता है, भर्तसना करता है, कुंभ निस्संदेह ऐसा नहीं था जैसा बताया जा रहा है। कुंभ ऐसा नहीं था जैसा बताया जा रहा है।”

कुंभ के विरुद्ध तैयार किए गए माहौल पर नाराजगी व्यक्त करते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा, “संत समाज में भारी रोष है। हमने बड़ा संयम रखा। माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान पर कुंभ कुछ ही घंटों में समेट दिया गया था। उसका विसर्जन कर दिया गया था। कुछ ही संख्या में लोग स्नान करने पहुँचे थे। तो उसकी जो विराटता और व्यापकता थी, उसका विसर्जन कर दिया गया था।”

बता दें कि स्वामी अवधेशानंद से पहले टूलकिट को लेकर भाजपा ने कॉन्ग्रेस पर वार किया था। भाजपा ने बताया था कि कैसे टूलकिट में निर्देश हैं कि कुंभ को सुपर स्प्रेडर कुंभ कहा जाए ताकि लोगों को एहसास हो कि सभी समस्याओं के लिए लिए हिंदू नीतियाँ जिम्मेदार हैं। अब इसी टूलकिट पर संज्ञान लेते हुए स्वामी अवधेशानंद ने अपना उक्त बयान जारी किया है।

उन्होंने कहा, “आँकड़ों को देखें। उसके यथार्थ को समझें। कुंभ से कोरोना का प्रकोप नहीं गया। इसपर राजनीति करना शोभा नहीं देता। भारत की परंपरा, मूल्यों में विश्वास रखें। यहीं आप जन्में है, पले हैं-बढ़ें हैं। इसलिए भारत माँ को अपना ईष्ट मानकर अपना सर्वस्व उसे सौंपकर देखों आपका हमेशा मंगल होगा। ”

मालूम हो कि 17 अप्रैल को पीएम मोदी ने कुंभ मेले के मद्देनजर स्वामी अवधेशानंद से बात की थी। इसके बाद स्वामी अवधेशानंद ने कुंभ समापन की घोषणा करते हुए कहा था, “भारत की जनता व उसकी जीवन रक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए हमने विधिवत कुम्भ के आवाहित समस्त देवताओं का विसर्जन कर दिया है। जूना अखाड़ा की ओर से यह कुम्भ का विधिवत विसर्जन-समापन है।”

‘आतंकवादी हैं सारे मुसलमान’: मायावती का मजाक उड़ाने वाली जपलीन पसरीचा का एक और ट्वीट वायरल

‘फेमिनिज्म इन इंडिया’ की संस्थापक-सीईओ व एडिटर इन चीफ जपलीन पसरीचा ने साल 2012 में बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर एक आपत्तिजनक (sexist jibe) ट्वीट किया था। इस ट्वीट पर उन्होंने कल (18 मई) ही माफी मांगी थी। लेकिन अब पसरीचा का एक और पुराना ट्वीट वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि सभी मुस्लिम आतंकवादी हैं। यह ट्वीट पसरीचा द्वारा सितंबर 2013 में किया गया था जिसमें उन्होंने लिखा था, “Because all muslims are terrorists”.

2013 में जपलीन पसरीचा द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

फेमिनिस्ट जपलीन पसरीचा का लगभग 8 साल पुराना यह ट्वीट ट्विटर पर वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर उनकी आलोचना कर रहे हैं। यूजर्स लिख रहे हैं कि पसरीचा ‘इस्लामोफोबिया’ से पीड़ित हैं और उन्हें इसका इलाज कराने की जरूरत है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि पसरीचा के ट्वीट घृणित हैं और वह 90% मुसलमानों की वजह से 10% मुसलमानों को बदनाम कर रही हैं।

जपलीना पसरीचा ने दी सफाई

इस पुराने ट्वीट पर आलोचना झेलने के बाद जपलीन पसरीचा ने कहा कि लोग उनके इस पुराने ट्वीट को गलत ढंग से ले रहे हैं। सफाई देते हुए पसरीचा ने कहा कि उनका यह ट्वीट व्यंग्यात्मक था।

ट्वीट वायरल होने के बाद पसरीचा की सफाई

पसरीचा के अनुसार उन्होंने 2013 में पहली इंडियन-अमेरिकन नीना दवुलुरी (Nina Davuluri) द्वारा मिस अमेरिका का खिताब जीतने के बाद यह ट्वीट किया था क्योंकि नीना के खिलाफ उस समय अमेरिका के एक बड़े वर्ग ने नस्लीय टिप्पणियाँ करते हुए उन्हें ‘अरब’ और ‘आतंकी’ कहना शुरू कर दिया था। नीना द्वारा झेले गए इसी भेदभाव के चलते पसरीचा ने यह ट्वीट व्यंग्यात्मक तौर पर किया था न कि इस्लामोफोबिया के चलते।

ज्ञात हो कि जपलीन पसरीचा ने बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए 2012 में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने अपने एक ट्वीट में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के बच्चे नहीं होने और उनके द्वारा जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन की बात करने के लिए उनका मजाक उड़ाया था।

महिलाओं के मुद्दे पर जोर शोर से अपनी बात रखने वाली जपलीन पसरीचा ने बहन मायावती का मजाक उड़ाते हुए ट्वीट किया था, ”मायावती लोकसभा में परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण के बारे में बात कर रही हैं। लालू गुस्से में बोले: बेबी, जब आप गेम खेल नहीं सकती, तो नियम मत बनाओ।” इस ट्वीट के वायरल होने पर जब उनकी आलोचना हुई तब उन्होंने कल (18 मई) इसके लिए माफी माँग ली।

कल गौरी अम्मा, आज शैलजा टीचर: महिलाओं को ऐसे ही निपटाते हैं वामपंथी, केरल हो या पोलित ब्यूरो-सुलूक दोयम ही

केके शैलजा समर्थकों के बीच शैलजा टीचर के नाम से जानी जाती हैं। उन्हें केरल विधानसभा में माकपा (CPM) का व्हिप बनाने की अटकलें लग रही है। इन अटकलों का दौर तब शुरू हुआ है जब केरल की नई वामपंथी सरकार में शैलजा को शामिल नहीं करने को लेकर सोशल मीडिया में एक धड़े में काफी नाराजगी देखी जा रही है।

दिलचस्प यह है कि यह धड़ा लेफ्ट-लिबरल जमात से ही ताल्लुक रखता है। यही वह खेमा है जिसने केरल विधानसभा चुनावों के दौरान शैलजा को लेकर तारीफों के पुल बाँध दिए थे। कोरोना से निपटने के उनके उस मॉडल की शान में कसीदे पढ़े थे जिसका जनाजा कब का उठ चुका था।

पिनराई विजयन की अगली पिछली सरकार में शैलजा स्वास्थ्य मंत्री थीं। इस बार के चुनावों में भी उन्होंने 60 हजार से ज्यादा वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की है। लेकिन विजयन ने इस बार शैलजा सहित अपने किसी भी पुराने कैबिनेट सहयोगी के साथ आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया। इसकी जगह अपने दामाद सहित 11 नए चेहरों को मौका देने का फैसला किया है।

पुराने मंत्रियों में से एक शैलजा ही हैं जिनको मौका नहीं दिए जाने पर उनकी आलोचना हो रही है। खैर, विजयन का यह फैसला वामपंथी दलों की महिला विरोधी संस्कृति का एक और नमूना है। जेएनयू के ढाबों पर जोर-जोर से लैंगिक समानता की बात करने वाले वामपंथी वैचारिक तौर पर कितने दोगले होते हैं यह उनकी दलीय संस्कृति पर गौर करने से पता चल जाता है। शैलजा पहली मजबूत महिला नेता नहीं हैं, जिन्हें पार्टी ने निपटाया है।

केरल की ही बात करें तो गौरी अम्मा के नाम से प्रसिद्ध रहीं केआर गौरी के साथ हुआ सुलूक याद आ जाता है। गौरी अम्मा की मृत्यु 11 मई 2021 को ही हुई है। यानी, केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों के 9 दिन बाद। एक जमाने में वे केरल की कद्दावर वामपंथी महिला नेत्री हुआ करती थीं। न्यूज मिनट की एक रिपोर्ट बताती है कि 1987 का विधानसभा चुनाव सीपीएम ने उनके पोस्टर लगा और उनको मुख्यमंत्री बनाने का वादा कर जीता था। लेकिन, नतीजों के बाद उनको दरकिनार कर एके नायर को नेतृत्व सौंप दिया। अब ऐसा ही शैलजा के साथ उस वक्त किया गया है, जब यह माना जा रहा था कि भविष्य में वह राज्य में मुख्यमंत्री पद की सबसे प्रबल दावेदार हैं।

ऐसा भी नहीं है कि वामपंथी दलों में महिलाओं को निपटाने का यह दस्तूर केवल राज्यों में है। माकपा ने अपनी शीर्ष ईकाई पोलित ब्यूरो का दरवाजा महिलाओं के लिए पहली बार 2005 में खोला। पहला मौका बृंदा करात को मिला था। यह अजीब संयोग है कि उसी साल उनके पति प्रकाश करात को पार्टी महासचिव की जिम्मेदारी मिली थी। फिलहाल प्रकाश करात वाली भूमिका सीताराम येचुरी के पास है और पोलित ब्यूरो में महिला प्रतिनिधित्व के नाम पर सुभाषिनी अली हैं। लेकिन, पोलित ब्यूरो के दरवाजे खुलने से ऐसा नहीं हुआ कि पार्टी में महिलाओं के नेतृत्व का उभार हुआ हो। प्रकाश करात के पृष्ठभूमि में जाते ही मीडिया की लाडली रहीं बृंदा करात भी चर्चाओं से गायब हो गईं।

भारतीय राजनीति में वामपंथी दलों के अवसान का क्रम 2009 से शुरू हुआ। लेकिन, इन दलों में महिला नेतृत्व का कभी सूर्योदय ही नहीं हुआ। आधी आबादी को पार्टी या सरकार चलाने और उससे संबंधित फैसले लेने के योग्य कभी माना ही नहीं गया। संगठन, सरकार और चुनावों में उनकी भूमिका हमेशा से वामपंथियों ने ‘शो पीस’ ही बनाकर रखी। उन्हें हमेशा दोयम होने का अहसास कराया।

और यह सब तब हुआ जब भारत को पहली महिला प्रधानमंत्री 1966 में मिल गई थी। पहली महिला मुख्यमंत्री तो 1963 में ही मिल गई थी। यहाँ तक कि 1995 में देश ने पहली दलित महिला मुख्यमंत्री को भी देख लिया। लेकिन, लाल कोठरी ने उनके लिए दरवाजे ऐसे वक्त में भी बंद कर रखे हैं जब वामपंथी दल मृत्यु शय्या पर लेटे भारत की राजनीतिक जमीन पर अंतिम साँसे गिन रहे हैं। उससे भी शर्मनाक यह है कि इस सुलूक के बावजूद वे शैलजा की तरह हर फैसले का ‘स्वागत’ करने को अभिशप्त भी हैं।

‘प्राइवेसी अपडेट वापस लो, वरना उठा सकते हैं सख्त कदम’: मोदी सरकार ने Whatsapp को चेताया, दिया 7 दिन का समय

केंद्र सरकार ने एक बार फिर से इंस्टेंट मैसेजिंग एप व्हाट्सएप्प को नोटिस भेजा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Whatsapp से एक बार फिर से कहा है कि वो अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी को वापस ले। इससे पहले व्हाट्सएप्प ने बड़ी चालाकी से अपने नए अपडेट को कुछ दिनों के लिए रोक दिया था लेकिन अब इस महीने में वो फिर से उसे वापस लेकर आया है। उसने कहा था कि वो मई 15, 2021 तक इसे रोक रहा है।

अब केंद्र सरकार ने उसे भेजी गई नोटिस में कहा है कि उक्त तारीख़ तक प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट को रोकने का ये अर्थ नहीं है कि वो सूचना की प्राइवेसी, डेटा की सुरक्षा और यूजर्स की पसंद नापसंद का सम्मान न करे। केंद्र सरकार ने व्हाट्सएप्प को भेजी गई नोटिस में उसे याद दिलाया है कि उसकी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव और जिस तरह से FAQ सेक्शन के अंतर्गत इसे लाया गया है, वो भारतीय नागरिकों के अधिकारों और हितों को अनदेखा करता है।

ये मामला दिल्ली हाईकोर्ट में भी चल रहा है। वहाँ भी MeitY ने इंस्टेंट मैसेजिंग एप के खिलाफ यही रुख अपनाया है। उसे कह दिया गया है कि भारतीय नागरिकों की सूचनाएँ एवं डेटा की सुरक्षा व प्राइवेसी का अधिकार बहुमूल्य है और इससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। साथ ही उसे याद दिलाया गया है कि किस तरह वो यूरोप व भारत के लोगों के लिए अलग-अलग नीतियाँ लाकर अपना दोहरा रवैया दिखा रहा है।

मंत्रालय ने नोटिस में कहा, “इसमें कोई शंका नहीं है कि आप इस बात से परिचित होंगे कि कई भारतीय नागरिक अपनी रोजमर्रा के जीवन में एक-दूसरे के संवाद के लिए Whatsapp का उपयोग करते हैं। लेकिन, व्हाट्सएप्प द्वारा इसका फायदा उठा कर अपनी अनुचित शर्तें थोपना न सिर्फ समस्या पैदा करने वाला है, बल्कि गैर-जिम्मेदाराना भी है। खासकर वो शर्तें, जो यूरोप और भारत के नागरिकों में भेदभाव करती हैं।”

साथ ही इस नोटिस में भारतीय संविधान व नियम-कानूनों का हवाला देते हुए Whatsapp को ये बताया गया है कि कैसे वो उनका उल्लंघन कर रहा है। साथ ही केंद्र ने चेतावनी दी है कि भारत की संप्रभु सरकार होने के नाते वो नागरिकों के हित के लिए कोई भी संवैधानिक कदम उठा सकता है। फ़िलहाल Whatsapp को 7 दिनों में इस नोटिस का जवाब देने को कहा गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है।

बता दें कि व्हाट्सएप्प की नई प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट को स्वीकार न करने वाला यूजरों से इस एप का प्रयोग कर कॉल या मैसेज करने की सुविधा छीन ली जाएगी। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट में कंपनी ने कहा है कि वो जबरन ऐसा नहीं करवा रहा है क्योंकि ये अनिवार्य नहीं है। व्हाट्सएप्प पहले से ही यूजरों का डेटा अपनी पैरेंट कंपनी फेसबुक के साथ शेयर कर रहा है। व्हाट्सएप्प ने ये कह कर भी खुद का बचाव किया था कि ओला, उबेर, जोमाटो और आरोग्य सेतु जैसे एप भी यूजर्स का डेटा लेते हैं।

‘सिंगापुर वैरिएंट’ पर डर फैलाकर घिरे केजरीवाल: विदेश मंत्रालय ने लताड़ा, सिंगापुर ने जताई आपत्ति

विदेश मंत्रालय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ‘सिंगापुर वैरिएंट’ के नाम पर डर फैलाने को लेकर जवाब देते हुए कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री भारत के लिए नहीं बोलते। मंगलवार (18 मई 2021) को केजरीवाल ने दावा किया था कि सिंगापुर में पाया जाने वाला कोरोना का नया वैरिएंट खतरनाक हैं। इसलिए भारत सरकार को इसे भारत आने से रोकने के लिए सिंगापुर की सारी फ्लाइट बंद कर देनी चाहिए।

इसके बाद विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि सिंगापुर सरकार ने उच्चायोग को केजरीवाल सरकार के बयान पर कड़ी आपत्ति जताने के लिए कॉल किया था।

एस जयशंकर ने केजरीवाल के रवैये को बताया गैरजिम्मेदाराना

केजरीवाल के गलत बयान के कारण विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी इस संबंध में ट्विटर पर स्पष्टीकरण देना पड़ा। भारतीय विदेश मंत्री ने एक ट्वीट में सिंगापुर और भारत के मजबूत रिश्तों को और कोविड दौर में ऑक्सीजन सप्लाई करने पर सराहा।

साथ ही अगले ट्वीट में लिखा, “हालाँकि, ये गैर जिम्मेदार रवैया है, वो भी उनका, जिन्हें मालूम होना चाहिए कि इससे लंबे समय से चली आ रही साझेदारी खराब हो सकती हैं। इसलिए मैं साफ कर देना चाहता हूँ कि दिल्ली के मुख्यमंत्री भारत के लिए नहीं बोलते।”

बता दें कि इससे पहले सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अरविंद केजरीवाल के दावों को खारिज किया था। वहीं सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन ने दिल्ली सीएम को तथ्यों के आधार पर बोलने की सलाह दते हुए कहा था कि सिंगापुर वैरिएंट जैसा कुछ नहीं है।

उन्होंने एस जयशंकर का बयान देखकर उन्हें धन्यवाद कहा। साथ ही लिखा, “अपने-अपने देश के हालातों को सुधारने पर फोकस करते हैं और एक दूसरे का ध्यान देते हैं। कोई भी सुरक्षित नहीं है जब तक हर कोई सुरक्षित न हो।”

वहीं अरविंद केजरीवाल के बयान को लेकर सिंगापुर दूतावास के बाहर भी विरोध हो रहा है। भाजपा का कहना है कि ये केजरीवाल का पैटर्न हो गया है। वह पैनिक क्रिएट करते हैं, वो भी बिन वैज्ञानिक तथ्यों के। वह बोलते और भाग लेते हैं।

वास्तव में, वायरस का B.1617 वैरिएंट सबसे पहले भारत में पाया गया था और तब से यह सिंगापुर सहित कई देशों में फैल गया है। सीएम केजरीवाल के इस रवैये और अज्ञानता ने देश को वैश्विक मंच पर शर्मिंदा किया है।

UP: नोटिस मिलते ही अवैध निर्माण छोड़ भागे, अब ‘100 साल पुरानी मस्जिद ढाहने’ का कर रहे प्रलाप

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में प्रशासन ने अवैध आवासीय परिसर पर कार्रवाई की। इसके बाद प्रशासन पर 100 साल पुरानी ‘गरीब नवाज’ मस्जिद को तोड़ने का आरोप लगाते हुए प्रोपेगेंडा बढ़ाया गया। राम सनेही घाट पर बने तहसील दफ्तर के पास ये अवैध निर्माण किए गए थे।

स्थानीय प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद कई मुस्लिम संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसके पुननिर्माण की माँग की है। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाराबंकी प्रशासन के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की बात कही है। मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने स्थानीय प्रशासन पर साजिश का आरोप लगाया है। मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष साबिर अली ने स्थानीय अधिकारियों पर मस्जिद को रातोंरात ढहाने और पुलिस बल की मौजूदगी में इसका मलबा हटाने का आरोप लगाया।

सुन्नी वक्फ बोर्ड का कहना है कि मस्जिद पंजीकृत था। इसके खिलाफ कोर्ट ने भी कोई आदेश नहीं दिए थे। बोर्ड ने बुधवार (19 मई) को जारी बयान में कहा, “हम कथित रूप से अतिक्रमण हटाने के नाम पर तहसील परिसर के पास स्थित 100 साल पुरानी मस्जिद को गिराने के लिए, तहसील और जिला प्रशासन की, खासकर सब डिविजनल मजिस्ट्रेट की, अवैध और उच्चस्तरीय कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में मस्जिद कमेटी को मार्च में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।, जिसका कमेटी ने 1 अप्रैल को जवाब दिया। बोर्ड का कहना है कि उन्हें आगे की कार्रवाई के बारे में नहीं बताया गया था। इसे ढहाए जाने के समय मस्जिद बंद थी और लोगों का प्रवेश रोकने के लिए बैरीकेड लगे हुए थे।

जिलाधिकारी ने बताई कार्रवाई की वजह

प्रशासन की इस कार्रवाई पर डीएम डॉ आदर्श सिंह ने कहा कि तहसील परिसर में उपजिला मजिस्ट्रेट के आवास के सामने अवैध रूप से बने आवासीय परिसर के संबंध में कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को 15 मार्च 2021 को नोटिस भेजकर स्वामित्व के संबंध में सुनवाई का मौका दिया था। लेकिन नोटिस तामील होते ही परिसर में निवास कर रहे लोग परिसर छोड़कर फरार हो गए, जिसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से 18 मार्च 2021 को तहसील प्रशासन द्वारा इस पर अपना कब्जा प्राप्त कर लिया गया।

जिलाधिकारी आदर्श सिंह के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इस मामले को निस्तारित करने पर यह सिद्ध हुआ कि आवासीय निर्माण अवैध है। इसी आधार पर उपजिला मजिस्ट्रेट रामसनेहीघाट न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत पारित आदेश का अनुपालन 17 मई 2021 को कराया गया।

पुनर्निर्माण की माँग

ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड के कार्यकारी महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी ने इस मस्जिद के गिरने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ” हमारी माँग है कि सरकार उच्च न्यायालय के जरिए इस मामले की जाँच कराए और जिन अफसरों ने यह गैरकानूनी हरकत की है उन्हें निलंबित किया जाए। साथ ही मस्जिद के मलबे को वहाँ से हटाने की कार्रवाई को रोककर और वैसी की वैसी हालत बरकरार रखें। इस जमीन पर कोई दूसरी तामीर करने की कोशिश न की जाए….यह सरकार का कर्तव्य है कि वह उस जगह पर मस्जिद का निर्माण करे और उसे मुसलमानों को सौंप दे।”

वहीं समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष मौलाना अयाज अहमद ने भी कहा कि रामसनेही घाट स्थित गरीब नवाज मस्जिद को ढहा दिया गया है। यह अत्यंत शर्मनाक घटना है। बाराबंकी हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब का केंद्र रहा है। पुलिस प्रशासन ने सोमवार रात कोरोना कर्फ्यू की आड़ में रामसनेहीघाट की गरीब नवाज मस्जिद को शहीद कर दिया। यह मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज है और यह आजादी से पहले की बनी है।

क्या JNU की पूर्व छात्रा सौम्या ने तैयार किया कॉन्ग्रेस का टूलकिट: 2019 लोकसभा चुनाव के वक्त भी थी एक्टिव

सोशल मीडिया पर मंगलवार (2021) को एक दस्तावेज जम कर शेयर किया गया, जिसके बारे में लोगों ने दावा किया कि ये ‘कॉन्ग्रेस का टूलकिट’ है। इसमें कुम्भ मेला को बदनाम करने, ईद का महिमामंडन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने और जलती चिताओं व लाशों की तस्वीरें शेयर कर भारत बदनाम करने का खाका था। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने दावा किया है कि ये ‘टूलकिट’ सौम्या वर्मा ने तैयार किया है।

हमने सौम्या वर्मा का LinkedIn प्रोफ़ाइल खँगाला तो पता चला कि वो प्रोफेसर राजीव गौड़ा के दफ्तर में कार्यरत हैं। MV राजीव गौड़ा कॉन्ग्रेस के सांसद रहे हैं और UPA काल में कई संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं। कर्नाटक कॉन्ग्रेस कमिटी ने उन्हें प्रवक्ता और घोषणापत्र समिति का अध्यक्ष बनाया था। फ़िलहाल वो IIM बेंगलुरु में प्रोफेसर हैं। कॉन्ग्रेस की विचारधारा को फैलाने के लिए वो कई ऑनलाइन कार्यक्रम चलाते हैं।

सौम्या वर्मा ने इंस्टाग्राम पर अपना पता दिल्ली दिया है। संबित पात्रा द्वारा शेयर किए गए कंटेंट के अनुसार, 6 पन्नों वाले कॉन्ग्रेस के ‘टूलकिट’ को उन्होंने ही ‘माइक्रोसॉफ्ट वर्ड 2019’ एप का प्रयोग कर के बनाया है। उन्होंने कुछ तस्वीरें भी शेयर की, जिसमें सौम्या वर्मा कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ दिख रही हैं। संबित पात्रा ने लिखा, “क्या सोनिया व राहुल गाँधी कोई प्रतिक्रिया देंगे? दस्तावेज की ‘प्रॉपर्टीज’ से ही साफ़ है कि इसका ऑथर कौन है।”

लोकसभा चुनाव 2019 के समय भी सौम्या वर्मा का नाम सामने आया था। वो उन युवाओं में शामिल थीं, जिन्होंने कॉन्ग्रेस का घोषणापत्र तैयार किया था। उन्होंने सेंट स्टीफेंस कॉलेज से स्नातक किया है। इसके बाद उन्होंने JNU से इतिहास में मास्टर्स की डिग्री ली। सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी करते समय उनके मन में राजनीति से जुड़ने की इच्छा जागी। वो सोनीपत स्थित अशोका यूनिवर्सिटी के स्नातक छात्रों को पढ़ाती भी थीं।

इस दौरान उन्होंने सिविल सर्विसेज की परीक्षा तो उत्तीर्ण नहीं की, लेकिन राजनीति व राजनीतिक नीतियों के प्रति उनके मन में खासी जागरूकता आई। राजीव् गौड़ा से प्रभावित होकर वो राजनीतिक रिसर्च में रुचि लेने लगीं। ‘द प्रिंट’ से बातचीत में उन्होंने बताया था कि अब वो पर्यावरण व उससे जुड़ी नीतियों में दक्ष होना चाहती हैं। राजीव गौड़ा के दफ्तर में उन्हें ‘डिप्टी हेड ऑफ रिसर्च’ का पद दिया गया।

सौम्या वर्मा ने शशि थरूर और सलमान खुर्शीद जैसे वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेताओं के अंतर्गत काम करते हुए आंतरिक सुरक्षा, पर्यावरण और संस्थागत सुधारों को लेकर रिपोर्ट तैयार की थी। ‘कॉन्ग्रेस के टूलकिट’ के अनुसार, भाजपा कुम्भ पर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए ईद का नाम ले सकती है लेकिन हमें दोनों त्योहारों की तुलना वाले ‘जाल’ में फँसने से बचना है। स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि ईद को लेकर एकदम से चुप्पी साध ली जाए और जहाँ भी ईद को लेकर बात हो उस पोस्ट या ट्वीट से खुद को अलग किया जाए।

कोरोना से जंग का कर्मयोगी: जमीन पर उतर मोर्चा लेने की CM योगी की ताकत, दूसरी लहर पर UP ने ऐसे पाया काबू

कोरोना की दूसरी लहर से लगभग पूरा देश ही जूझ रहा है। महामारी इतनी भयावह है कि स्वास्थ्य सेवा किसी विकसित देश की हो या अल्प विकसित देश की, बुरी तरह से प्रभावित है। सीमित संसाधन हर देश की लड़ाई को पंगु कर रहे हैं, ऐसे में भारत इसका अपवाद कैसे हो सकता है?

लेकिन यह कठिन समय ही नागरिकों को उनके नेताओं की नेतृत्व क्षमता पहचानने का भी मौका दे रहा है। नेताओं को इस बात का भान हो या न हो, पर आम भारतीय के मन और मस्तिष्क में उनकी बातें, उनका प्रदर्शन और उनकी नेतृत्व क्षमता जमा हो रही है।

भारत देख रहा है कि उपलब्ध सीमित संसाधनों के साथ कौन मुख्यमंत्री अपने राज्य के लोगों के लिए क्या-क्या कर रहा है। कौन केवल शिकायतें कर रहा है। कौन केवल मेहनत कर रहा है। कौन प्रोपेगेंडा कर रहा है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि मीडिया किसके खिलाफ, किसके पक्ष में और किसके साथ खड़ा है। इस लड़ाई का ऐसा कोई पहलू नहीं है जो एक आम भारतीय कहीं रिकॉर्ड न कर रहा हो।

ऑक्सीजन की कमी से लेकर उसके सरप्लस तक की यात्रा के दस्तावेज लिखे जा रहे हैं। बॉलीवुड सेलेब्स द्वारा किसी मुख्यमंत्री के यश गायन वाले ट्वीट के स्क्रीनशॉट लिए जा रहे हैं। पूरे भारत को ऑक्सीजन और इंजेक्शन की सप्लाई का दावा करने वाले किसी अति औसत दर्जे के सिने स्टार को ट्रोल किया जा रहा है।

कहीं नाराज़ समर्थक अपने ही मंत्री पर ट्वीट मिसाइल दागे जा रहे हैं। विपक्षी नेता द्वारा सत्ता में वापसी कर भाजपा समर्थकों से बदला लेने की धमकी वाला वीडियो वायरल हुआ जा रहा है। जिनके बच्चों की वैक्सीन मोदी ने कथित तौर पर विदेश भेज दी, वे लॉकडाउन के नियम तोड़कर शिकायती पोस्टर चिपका रहे हैं।

इन घटनाओं के बीच यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ हर जगह दिखाई दे रहे हैं। चाहे वह हॉस्पिटल हो या आँगनबाड़ी में बना टेस्ट सेंटर। गाँव का कोविड सेंटर हो या फिर गाँव में कोरोना पीड़ितों की सहायता के लिए पहुँची टीम से बातचीत। किसी शहर में तीसरी लहर के लिए की जाने वाली तैयारी हो। हर जगह योगी दिखाई दे रहे हैं। पत्रकारों से बात करते हुए, अफसरों के साथ बैठक करते हुए, आदेश देते हुए, ऑक्सीजन सप्लाई के लिए बनने वाले प्लांट का जायज़ा लेते हुए, ऑक्सीजन ऑडिट के लिए पहुँची टीम से मुलाक़ात करते हुए! ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ योगी दिखाई न दे रहे हों। यह बात अलग है कि वे ख़ुद कोरोना संक्रमण से लड़कर स्वस्थ हो वापस लौटे हैं।

साभार: दैनिक हिंदुस्तान

आईआईटी कानपुर और आईआईटी वाराणसी के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से बात करके अपने प्रदेश में ऑक्सीजन ऑडिट की पहल ख़ुद योगी ने की। दिल्ली के आईआईटियन मुख्यमंत्री के ठीक उलट जो आक्सीजन ऑडिट की बात का तब तक विरोध करते रहे जब तक उनके लिए यह करना संभव था।

यह विडंबना ही है कि मुख्यमंत्री के तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश में इनसेफ्लाइटिस से लड़ाई के लिए योगी सरकार की सराहना राष्ट्रीय मंचों पर कम और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अधिक हुई। ऐसे में यह मात्र संयोग नहीं है कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के इस सरकार के तरीक़ों की सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन कर चुका है।

करीब एक महीने पहले रोज नए संक्रमित रोगियों की संख्या क़रीब चालीस हजार से घट कर आज दस हजार के आस-पास आ पहुँची है। टीम बनाकर गाँव में मरीजों को पहचानने की बात हो या उनके इलाज के लिए एक न्यूनतम तैयारी की बात हो, योगी आदित्यनाथ ने विशेषज्ञों पर निर्भरता और विश्वास दिखाया है।

उनकी सरकार ने जिन योजनाओं पर काम शुरू किया है, वे समय पर पूरी हुई तो प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई पहचान मिलेगी। ऑक्सीजन की कमी हो या अस्पतालों में बेड बढ़ाने की आवश्यकता, इस समय योगी सरकार हर समस्या पर काम कर रही है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से लड़ने की तैयारियों की शुरुआत नोएडा के अस्पताल से हो चुकी है और योजना के अनुसार प्रदेश सरकार समय रहते अपनी तैयारियों को पूरा कर लेगी।

ऐसा नहीं कि इस महामारी से लड़ाई में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सब कुछ सही ही किया है। लेकिन यह अवश्य है कि उन्होंने पहले से उपलब्ध संसाधनों को न केवल बढ़ाने का काम किया है, बल्कि अपनी तरफ से हर संभव कोशिश की है कि महामारी पर क़ाबू पाया जा सके।

योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार का मूल्यांकन पहले भी हुआ है और आगे भी होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब उनके नेतृत्व की क्षमता और प्रदर्शन का तार्किक मूल्यांकन भी किया जाएगा।

उमंग का गुस्सा बहुत ज्यादा है…मुझे डर लगता है: GF के सुसाइड पत्र और चैट ने खोले कॉन्ग्रेस विधायक के कई राज, केस दर्ज

मध्य प्रदेश के पूर्व वन मंत्री और वर्तमान में गंधवानी से कॉन्ग्रेस विधायक उमंग सिंघार अपनी ‘गर्लफ्रेंड’ सोनिया भारद्वाज के सुसाइड मामले में चारों ओर से घिर गए हैं। पुलिस को घटनास्थल से सुसाइड नोट बरामद होने के बाद अब वॉट्सऐप चैट से पता चला है कि सोनिया लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रही थीं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि पुलिस के हत्थे सिंघार और भारद्वाज के बीच हुई बातचीत के कई प्रमाण हैं, जिनसे लगता है कि सोनिया उमर सिंघार के साथ रिश्ते को लेकर मानसिक तनाव में थीं। हालाँकि अभी, इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इसके अलावा सूत्रों के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि शादी के नाम पर सोनिया को रोका जा रहा था, जिसके चलते वह काफी परेशान थीं।

आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज

इस रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस के पास सिंघार के खिलाफ काफी सबूत हैं और इसी को देखते हुए घटना के मात्र 30 घंटों के अंदर ही सिंघार को केस में आरोपित बना दिया गया है। उनके खिलाफ गैर जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। लेकिन अभी विधायक की गिरफ्तारी नहीं हुई है। लेकिन पुलिस का कहना है कि वह जल्द ही कॉन्ग्रेस नेता को हिरासत में लेगी।

पुलिस फिलहाल हर कड़ी को जोड़ते हुए अपनी जाँच कर रही है। सोनिया का फोन जब्त करके जरूरी जाँच करवाई जा रही है। अभी तक मिले सारे सबूत और बयान सिंघार के खिलाफ हैं। शुरू में सिंघार इस मामले में आरोपित बनाए जाने से पहले मजिस्ट्रेट से जाँच की माँग कर रहे थे। हालाँकि पुलिस ने बताया कि उनके पास कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं जिन्हें एक-एक कर जमा किया जा रहा है।

गौरतलब है कि हरियाणा के अंबाला की रहने वाली 39 वर्षीय सोनिया भारद्वाज का शव रविवार (मई 16, 2021) को भोपाल स्थित कॉन्ग्रेस विधायक उमर सिंघार के निजी बंगले से बरामद किया गया था। सोनिया ने कथित तौर पर बंगले में फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी। सोनिया के पास से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसमें लिखा था,

“अब मैं और सहन नहीं कर सकती। मैंने अपनी तरफ से सबकुछ किया। पर उमंग का गुस्सा बहुत ज्यादा है। मुझे डर लगता है। वो मुझे अपनी लाइफ में जगह नहीं देना चाहता। उसकी किसी भी चीज को टच करो तो उसको बुरा लगता है। इस बार भी मैं जबरदस्ती भोपाल आई। वो चाहता ही नहीं था कि मैं भोपाल आऊँ। आर्यन सॉरी। मैं तेरी लाइफ के लिए कुछ नहीं कर पाई। मैं जो भी कर रही हूँ, अपनी मर्जी से कर रही हूँ। किसी की कोई गलती नहीं है। उमंग आपके साथ मैंने सोचा था लाइफ सेट हो जाएगी। आई लव यू। कोशिश की अडजस्ट करने की पर आपने जगह नहीं दी मुझे अपनी लाइफ में। आर्यन सॉरी।”

भोपाल के एसीपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता के विरुद्ध आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह दो-तीन दिन से विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। जैसे ही उन्हें इसकी जानकारी हुई वह तत्काल भोपाल आ गए। उनका कहना है कि वो खुद हैरान हैं कि सोनिया ने ऐसा क्यों किया, वो तो बहुत अच्छी मित्र थीं।