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पाकिस्तान का एक-एक इंच भारत की जद में, बिना किसी की मदद के कर दिया नेस्तनाबूत: अफगानिस्तान के पूर्व उप-राष्ट्रपति ने गिनाया कैसे सफल रहा ‘ऑपरेशन सिंदूर’

अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने रविवार (11 मई 2025) को भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव को लेकर भारत की कार्रवाई को एक बड़ी रणनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि भारत का ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ साफ तौर पर एक निर्णायक जीत है और इसके बाद हुआ युद्धविराम भारत की कूटनीतिक कामयाबी को दिखाता है।

सालेह ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर की तुलना पाकिस्तान के ऑपरेशन ‘बनयान उल मरसूस’ से करते हुए कहा कि भारत का नजरिया ज़्यादा साफ, आत्मनिर्भर और रणनीतिक रूप से असरदार रहा। उन्होंने भारत की उस नीति की तारीफ की जो उसके सैन्य और राजनीतिक फैसलों को निर्णायक बनाती है।

भारत की रणनीतिक आजादी और आत्मविश्वास

अमरुल्लाह सालेह ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की रणनीतिक आजादी का प्रतीक बताया। सालेह ने कहा कि भारत ने इस बार पहली बार किसी भी तरह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से न तो अनुमति माँगी और न ही कोई सहानुभूति, उसने पाँचों महाशक्तियों को नजरअंदाज दिया। यह भारत के आत्मविश्वास, संप्रभुता और स्वतंत्र सोच का मजबूत संदेश था।

आतंकियों और उनके मददगारों दोनों पर सीधा वार

सालेह ने कहा कि भारत ने आतंकवादियों और उसे पालने-पोसने वाले, दोनों को एकसाथ निशाना बनाकर ये दिखा दिया कि अब राज्य प्रायोजित आतंकवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत ने यह सोच खत्म कर दी कि आतंकी अपने राज्य से अलग-थलग काम करते हैं। भारत ने पाकिस्तान में न सिर्फ आतंकियों, बल्कि उन्हें पालने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की, जो अब एक नए रणनीतिक दौर की ओर इशारा करता है। इससे पाकिस्तान की ‘इनकार की नीति’ पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पाकिस्तान की सैन्य महत्वाकांक्षाएँ और उसकी कमजोर आर्थिक हालत

अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने कहा कि युद्ध के दौरान ही पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से कर्ज माँगा और हैरानी की बात है कि उसे कर्ज मिल भी गया। लेकिन यह जंग लड़ने के लिए काफी नहीं है। सालेह के मुताबिक, पाकिस्तान के पास युद्ध शुरू करने की ताकत हो सकती है, लेकिन उसे लंबे समय तक खींचने की क्षमता नहीं है। IMF से मिला पैसा कोई युद्ध नहीं जिता सकता।

रणनीतिक संयम की परीक्षा

सालेह ने बताया कि 22 अप्रैल को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने भारत के रणनीतिक संयम की परीक्षा लेने की कोशिश की। संभव है कि वे जानते-बूझते यही नतीजा चाहते थे, लेकिन उन्हें इससे कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आतंकी शायद भारत को खुलेआम शर्मिंदा करना चाहते थे, लेकिन उनकी सोच आज भी 2008 में अटकी हुई लगती है।

नूर खान एयरबेस पर हमला – भारत की पहुँच का बड़ा संदेश

पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने अपनी ताकत और पहुँच का ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है। रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस, जिसे पाकिस्तान का सबसे सुरक्षित इलाका माना जाता था, वह भी हमले से नहीं बच पाया। सालेह ने कहा, “मैं हमेशा सोचता था कि यह एयरबेस पाकिस्तान का सबसे महफूज़ ठिकाना है, लेकिन अब साफ हो गया कि पाकिस्तान का कोई भी हिस्सा भारत की पहुँच से बाहर नहीं है।”

मजहबी फतवों में भी भारत की कूटनीतिक जीत

पाकिस्तान ने हमेशा मुस्लिम दुनिया की सहानुभूति पाने के लिए मजहबी फतवों का सहारा लिया है, लेकिन इस बार यह दाँव भी नहीं चला। भारत के उलेमा, खासकर देवबंद के उलेमा ने भारत के समर्थन में फतवा जारी किया, जिससे पाकिस्तान का यह खास ‘हथियार’ भी उससे छिन गया। सालेह ने कहा, “पाकिस्तान अब इस्लामी दुनिया में सहानुभूति पाने के लिए जो मजहबी दावे करता था, वह अब खत्म हो चुके हैं। वैसे भी देवबंद भारत में ही है।”

भारत ने ऑपरेशन में पूरी गोपनीयता बरती

सालेह ने कहा कि भारत ने लोकतंत्र की तमाम चुनौतियों के बावजूद ऑपरेशन के दौरान जबरदस्त गोपनीयता बनाए रखी। जहाँ लोकतांत्रिक देशों में अक्सर जानकारी लीक हो जाती है, भारत से ऑपरेशन के बारे में बहुत कम खबरें बाहर आईं। यह बात दर्शाती है कि भारत ने ऑपरेशन की गोपनीयता को बनाए रखने में बेहद कुशलता दिखाई।

पाकिस्तान का ऑपरेशन – सिर्फ प्रचार और दावा

अफगान नेता ने पाकिस्तान के ऑपरेशन ‘बनयान उल मरसूस’ की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। सालेह ने कहा कि इससे जुड़ी कोई ठोस तस्वीर या सबूत सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा, “मैंने पाकिस्तान के इस ऑपरेशन से जुड़ी कोई स्पष्ट तस्वीर (फोटो-वीडियो) नहीं देखा, जिससे लगता है कि यह शायद कभी ठीक से हुआ ही नहीं। वास्तव में युद्धविराम ने पाकिस्तान को शर्मिंदगी से बचा लिया।”

पूर्व अफगानी उप-राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व ने जरूर बड़ी-बड़ी बातें की हैं, लेकिन हकीकत में भारत का आकाश खुला रहा, उड़ानें सामान्य रहीं और न दिल्ली, न ही अमृतसर में कोई मिसाइल गिरने जैसी घटना हुई। इससे साफ होता है कि पाकिस्तान के दावे खोखले थे और युद्धविराम ने उसे बड़ी बेइज्जती से बचा लिया।

11 एयरबेस तबाह करवा के जीत का दम भर रहे शाहबाज़ शरीफ: चायनीज माल फेल फिर भी चीन को थैंक्यू, जानिए पाकिस्तानी PM के फर्जी दावों का सच

पाकिस्तानी फौज ने 10 मई को एक तरफ सीजफायर का उल्लंघन किया और दूसरी तरफ मुल्क के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कैमरे पर झूठ बोलकर खूब शेखी झाड़ते दिखाई दिए। उन्होंने दावा किया उन्होंने जंग में उनके मुल्क ने जीत हासिल कर ली है।

पीएम शरीफ ने अपनी मुल्क की आवाम को ऐसे बताया जैसे युद्ध विराम का उल्लंघन भारत ने किया था और उन्होंने तो बस जवाब दिया, हकीकत जबकि यह है कि 10 मई को सीजफायर के बाद जो अटैक किए गए वो पाकिस्तान की ओर से किए गए थे।

शहबाज शरीफ बयान में यहीं नहीं रुके। लगातार भारत से मुँह की खाने वाले पाकिस्तान को लेकर उन्होंने दावा किया, कि उनकी फौज भारत पर भारी पड़ी। उन्होंने ये जताया कि भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों को निशाना बनाया है, जबकि सच्चाई ये है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत पहली कार्रवाई के बाद ही भारत ने साफ कर दिया था कि उन्होंने सिर्फ आतंकी ठिकानों को टारगेट किया है।

खुद को पाक साफ बताने वाला पाकिस्तान जो LOC पर लगातार गोलियाँ और मोर्टार दागकर कश्मीर के लोगों को मारता रहा, उस पर शहबाज शरीफ ने एक शब्द नहीं बोला।

उनका कहना था कि पाकिस्तानी फौज ने भारत को ऐसा घाव दिया है जो कभी नहीं भर पाएगा, लेकिन भारत की कार्रवाई अगर देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत ने पाकिस्तान 11 एयरबेस तबाह किए हैं, जिनमें नूरखान, रफ़ीकी, मुरीद, सुक्कुर, सियालकोट, पसरूर, चूनियाँ, सरगोधा, सकरदु, भोलारी और जैकोबाबाद का नाम शामिल है।

इसके अलावा शहबाज शरीफ ने अपने बयान में खास तौर पर चीन को ‘धन्यवाद’ बोला और इस मुश्किल घड़ी में पाकिस्तान का साथ देने के लिए आभार जताया। ये सब उन्होंने केवल चीन को खुश करने के लिए किया, क्योंकि ये स्पष्ट है कि कि पाकिस्तान के एयरबेसों को जो नुकसान हुआ उसके पीछे एक कारण चीनी सैन्य प्रणाली HQ-9 का विफल होना भी है।

जिस ब्रह्मोस ने उड़ाया PAF का परमाणु वाला एयरबेस, अब वो लखनऊ में बनेगा: राजनाथ सिंह ने किया उद्घाटन, CM योगी बोले – पाकिस्तान देख चुका है दम

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए रविवार (11 मई 2025) का दिन ऐतिहासिक रहा। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ नोड पर दुनिया की सबसे खतरनाक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की उत्पादन इकाई का शुभारंभ हुआ। इस समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे, जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली से डिजिटल माध्यम से हिस्सा लिया। दोनों नेताओं ने मिलकर इस परियोजना का उद्घाटन किया, जो भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और सामरिक ताकत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

इस मौके पर टाइटेनियम एंड सुपर एलॉय मैटेरियल्स प्लांट का भी उद्घाटन हुआ। यह प्लांट चंद्रयान मिशन और लड़ाकू विमानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री बनाएगा। साथ ही, ब्रह्मोस मिसाइलों के परीक्षण के लिए इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी का भी लोकार्पण हुआ। ये परियोजनाएँ भारत को रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं।

लखनऊ में बनी ब्रह्मोस उत्पादन इकाई 300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई है। इसके लिए यूपी सरकार ने 80 हेक्टेयर जमीन मुफ्त दी थी। इस इकाई को सिर्फ साढ़े तीन साल में तैयार कर लिया गया। ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस की साझेदारी का नतीजा है। इसकी रेंज 290-400 किलोमीटर है और यह ध्वनि की गति से तीन गुना तेज (मैक 2.8) चलती है। इसे जमीन, हवा और समुद्र से लॉन्च किया जा सकता है। यह ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक पर काम करती है, जो दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक निशाना लगाती है।

ब्रह्मोस के सेंटर में सीएम योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी सीएम (फोटो साभार: Whatsapp Channel Yogi Adityanath)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह दिन लखनऊ, उत्तर प्रदेश और पूरे भारत के लिए गर्व का पल है। उन्होंने बताया कि लखनऊ के लिए उनका सपना था कि यह शहर रक्षा क्षेत्र में बड़ा योगदान दे, जो अब पूरा हो रहा है। उन्होंने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुए कहा कि भारत ने तब अपनी ताकत दिखाई थी, और आज ब्रह्मोस जैसी परियोजनाएँ उसी ताकत को और बढ़ा रही हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस की ताकत दिख चुकी है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को कुचलने के लिए उसी की भाषा में जवाब देना होगा। योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को मजबूत बताया और कहा कि अब कोई भी आतंकी घटना युद्ध जैसी मानी जाएगी।

यह परियोजना न केवल रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि लखनऊ को रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र भी बनाएगी। योगी और राजनाथ ने इस मौके पर भारत की सामरिक ताकत और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दुनिया के सामने दोहराया।

जारी है ‘ऑपरेशन सिंदूर’… भारतीय वायुसेना का बड़ा ऐलान: फिर तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ PM मोदी की बैठक

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में धर्म पूछ-पूछकर 26 निर्दोषों की हत्या किए जाने के 13 दिन बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया, जिसमें 100 से अधिक आतंकी मारे गए, आतंकियों के 9 गढ़ तबाह किए गए और पाकिस्तानी वायुसेना के 11 एयरबेस तबाह कर दिए गए। बीच में पाकिस्तान ने 400 ड्रोन से भारत पर हमला किया, लेकिन ‘पृथ्वी’, ‘आकाश’ और S-400 जैसे हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने सब मार गिराया। फिर अचानक से शनिवार (10 मई, 2025) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सीजफायर की घोषणा की।

फिर भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर के कहा कि भारत और पाकिस्तान ने आपस में बातचीत करके सभी प्रकार के हमलों को रोकने का समझौता किया है। इसके बाद आम लोग आक्रोशित हो गए और पूछने लगे कि जब पाकिस्तान को और सबक सिखाने का मौका हमारे पास था, फिर अचानक से सीजफायर क्यों। दावा किया गया कि अमेरिका ने उसमें मध्यस्थता की है। नूर खान एयरबेस पर हमले के बाद पाकिस्तान को अपने परमाणु जखीरे के खात्मे का डर था, इसीलिए वो गिड़गिड़ाते हुए ट्रम्प के पास पहुँचा।

अब जनाक्रोश के बीच भारतीय वायुसेना का नया बयान आया है, जो दिलचस्प है। IAF ने ऐलान किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी ख़त्म नहीं हुआ है। अपने बयान में भारतीय वायुसेना ने कहा, “हमने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सौंपे गए कार्यों को सटीकता और पेशेवर तरीके से सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह अभियान सुनियोजित और संयमित ढंग से, राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप चलाया गया। चूँकि अभियान अभी भी जारी है, इसीलिए विस्तृत जानकारी उपयुक्त समय पर साझा की जाएगी।”

साथ ही भारतीय वायुसेना ने सभी से अनुरोध किया है कि वो किसी भी प्रकार की अटकलें लगाने या अपुष्ट जानकारी प्रसारित करने से बचें। IAF द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को ‘Ongoing Operation’ बताए जाने का अर्थ है कि ये चालू है, अभी ख़त्म नहीं हुआ है। पाकिस्तान ने पिछले कुछ दिनों में जमकर भ्रामक सूचनाएँ फैलाई हैं और कई भारतीय भी इस कारण भ्रमित हो गए। राफेल मार गिराए जाने से लेकर भारतीय सैन्य ठिकानों को तबाह करने जैसे कई दावे बिना किसी सबूत के चलाए गए।

उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ रविवार (11 मई, 2025) को भी एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और NSA अजीत डोभाल भी मौजूद रहे। आधी रात के बाद पाकिस्तान की तरफ से भी सीजफायर के उल्लंघन की कोई ख़बर सामने नहीं आई है। जम्मू कश्मीर के पूर्व DGP शेष पाल वैद्य ने कहा है कि भारत कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करता, ये एक द्विपक्षीय मुद्दा है और रहेगा।

11 एयरबेस किए तबाह, परमाणु भंडार नष्ट करने वाला था भारत… ट्रम्प ने इशारों में बताया क्यों भागा-भागा सीजफायर के लिए आया पाकिस्तान

पहलगाम में पाकिस्तान पोषित आतंकियों ने 22 अप्रैल, 2025 को 26 निर्दोष नागरिकों का धर्म पूछकर नरसंहार किया। इसके 13 दिन बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के 9 बड़े ठिकानों को हवाई हमला करके नेस्तनाबूत कर दिया। पाकिस्तान के भारत में 400 ड्रोन भेजकर हमला किया, लेकिन हमारे डिफेंस सिस्टम ने उन्हें मार गिराया। जवाबी कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस तबाह कर दिए। तभी अचानक से शनिवार (11 मई, 2025) की शाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सीजफायर की घोषणा की।

इसके बाद से ही लगातार चर्चा है कि अचानक से ये ‘सीजफायर’ क्यों? भारतीय विदेश मंत्रालय ने किसी भी प्रकार के मध्यस्थता का जिक्र नहीं किया और कहा कि दोनों मुल्क़ों के DG (मिलिट्री ऑपरेशन्स) ने आपस में बातचीत करके हमलों को रोकने का फ़ैसला लिया है। हालाँकि, इसके बावजूद भी पकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन जारी रखा और विदेश सचिव विक्रम मिसरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी निंदा करनी पड़ी और कहना पड़ा कि पाकिस्तान को जिम्मेदारीपूर्वक समझौता के पालन करना चाहिए।

हालाँकि, अब सामने आ रहा है कि आख़िर पाकिस्तान क्यों भागता-भागता अमेरिका के पास गया और उसने सीजफायर के लिए पैरवी करवाई। सीजफायर के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ ने भी डोनाल्ड ट्रम्प को धन्यवाद दिया, लेकिन भारत ने कहीं ट्रम्प का नाम नहीं लिया। कारण ये है कि भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस को तबाह कर दिया – नूरखान, रफ़ीकी, मुरीद, सुक्कुर, सियालकोट, पसरूर, चूनियाँ, सरगोधा, सकरदु, भोलारी और जैकोबाबाद।

इनमें से नूरखान एयरबेस सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से कुछ ही दूरी पर पाकिस्तान का परमाणु भंडार रखा हुआ है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपने लेख में बताया है कि पाकिस्तान को अपने परमाणु भंडार को नष्ट किए जाने का भय था। यही कारण है कि जिस अमेरिकी के उप-राष्ट्रपति JD वेंस ने कहा था कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष से हमारा कोई लेना-देना नहीं है, उसी अमेरिका के राष्ट्रपति ने ट्वीट करके सीजफायर की घोषणा की। अमेरिका के नए स्टेट सेक्रेटरी और NSA मार्को रुबियो का भी इसमें रोल है।

NYT ने अपने लेख में बताया है, “सबसे बड़ी चिंता की वजह तब सामने आई जब पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस पर धमाके हुए। रावलपिंडी को इस्लामाबाद के पास स्थित एक प्रमुख सैन्य छावनी माना जाता है। यह एयरबेस पाकिस्तान की सेना का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ से सैन्य परिवहन गतिविधियों का संचालन होता है और यहीं से हवा में ईंधन भरने की व्यवस्था होती है, जिससे पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को लंबे समय तक उड़ान में बनाए रखा जा सकता है।”

इसके बाद ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लिखा है कि यह एयरबेस पाकिस्तान के स्ट्रैटेजिक प्लान्स डिवीजन’ के मुख्यालय से भी ज्यादा दूर नहीं है। आपको बता दें कि ये वही है विभाग जो देश के परमाणु हथियारों की निगरानी और सुरक्षा करता है। माना जाता है कि पाकिस्तान के पास इस समय लगभग 170 या उससे अधिक परमाणु हथियार हैं, जिन्हें देशभर में अलग-अलग स्थानों पर रखा गया है। एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान को अपना न्यूक्लियर कमांड सेंटर के खात्मे का डर था।

उक्त पूर्व अधिकारी के अनुसार, नूरखान एयरबेस पर भारत के हमले को इस रूप में लिया जाना चाहिए कि उसने ये दिखा दिया कि वो पाकिस्तान के परमाणु भंडार को भी नष्ट कर सकता है। यही कारण है कि अमेरिका ने इस संघर्ष में हस्तक्षेप किया। ये भी समझिए कि इस पूरे संघर्ष में पहले और अंतिम बड़ी स्ट्राइक भारत ने की। 9 आतंकी ठिकानों को तबाह करके ये शुरू हुआ था, 11 एयरबेस को तबाह करके ये ख़त्म हुआ। पाकिस्तान के इतना भीतर घुसकर भारत ने कभी स्ट्राइक नहीं किया था, ये पहली बार ऐसा हुआ।

मात्र 90 मिनट के भीतर पाकिस्तान ने जिस तरह से पाकिस्तान के भीतर स्थित 11 एयरबेस को ध्वस्त किया, उससे न केवल पाकिस्तान घबरा गया बल्कि अमेरिका की चिंताएँ भी बढ़ गई थीं। भारत ने अपने लंबे रेंज की मिसाइलों एवं ड्रोन्स का इस्तेमाल करके ये बता दिया कि पाकिस्तान के पूरे के पूरे मिलिट्री फ्रंटलाइन को वो अपनी पूर्ण सैन्य क्षमता का इस्तेमाल किए बिना तबाह करने की क्षमता रखता है। तभी पाकिस्तान भागकर अमेरिका के पास मिन्नतें करते हुए गया।

‘भारत ने कराची बंदरगाह की तरफ भेजे मिसाइलों से लैस युद्धपोत’: कश्मीरी समाँ लतीफ़ और ‘द टेलीग्राफ’ की फर्जी खबर, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चलाया पाकिस्तानी नैरेटिव

जहाँ एक तरफ भारत ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया और 6 एयरबेस तबाह कर दिए, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मीडिया का एक धड़ा इस दौरान भारत विरोधी कवरेज में लगा रहा। ख़ासकर ‘द टेलीग्राफ’ के समाँ लतीफ़ ने एक ऐसी ख़बर चलाई जिसे मीडिया संस्थान को बाद में डिलीट करना पड़ा। युद्ध के माहौल में ऐसी ग़ैर-ज़िम्मेदाराना रिपोर्टिंग का परिचय देकर ‘द टेलीग्राफ’ ने पाकिस्तान का फ़र्ज़ी एजेंडा चलाया।

असल में ‘द टेलीग्राफ’ में समाँ लतीफ़ ने एक ख़बर लिखी, जिसका शीर्षक था – “और अधिक टकरावों के बाद भारत ने कराची की तरफ युद्धपोत भेजे”। इस ख़बर में बताया गया कि नई दिल्ली ने उस कराची बंदरगाह को निशाना बनाते हुए जहाजी बड़ा तैनात किया है, जहाँ से पाकिस्तान का 60% विदेशी कारोबार होता है। साथ ही ये भी लिखा गया दो परमाणु शक्तियों के बीच सीमा पर संघर्ष के बाद भारत द्वारा सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से लैस युद्धपोत भेजे गए हैं।

इस फ़र्ज़ी ख़बर के बाद सोशल मीडिया में भी अफवाहों का दौर शुरू हो गया। कई मीडिया संस्थानों ने कराची पोर्ट पर ब्लास्ट की ख़बरें चलाईं, सोशल मीडिया ने भी इसे हाथोंहाथ लिया। बता दें कि ये वही समाँ लतीफ़ है जिसे सितंबर 2022 में ‘सोसाइटी ऑफ एडिटर्स यूके’ ने ‘फ्रीलेंसर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया था। लंदन में हुए अवॉर्ड समारोह में उसे आमंत्रित भी किया गया था। वो कश्मीरी पत्रकार है, UK के ‘इंडिपेंडेंट’ और जर्मनी के DW में भी लिख चुका है।

‘द टेलीग्राफ’ की वो ख़बर, जिसे उसने बाद में हटा लिया

सिर्फ़ ये ख़बर ही नहीं, बल्कि ‘द टेलीग्राफ’ पर प्रकाशित अन्य ख़बरों में भी समाँ लतीफ़ ने पाकिस्तानी नैरेटिव को ही प्राथमिकता दी। जैसे, उसकी एक रिपोर्ट का शीर्षक है – “दोनों पक्षों द्वारा उल्लंघन के आरोपों के बीच पाकिस्तान सीजफायर को लेकर ‘प्रतिबद्ध’ है”। एक अन्य ख़बर में उसने सीजफायर का पूरा क्रेडिट अमेरिका को देते हुए लिखा, “जानिए कैसे अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान को युद्ध से वापस खींचा”। अन्तरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह की रिपोर्टिंग से भारत की साख को धक्का पहुँचाने का प्रयास किया गया।

सीजफायर के 4 घंटे बाद ही पाकिस्तान ने दिखाई औकात, देर रात जम्मू-कश्मीर से जैसलमेर तक में किए ड्रोन हमले: उधमपुर में 1 जवान बलिदान, नगरोटा में सेना पर फायरिंग

पाकिस्तान ने 10 मई को सीजफायर का उल्लंघन कर अपनी नापाक नीयत का एक बार फिर प्रमाण दे दिया। उसने जम्मू-कश्मीर के कई ठिकानों पर युद्ध विराम होने के बावजूद गोलियाँ चलाईं और बम छोड़े। ये हरकत उसने सीजफायर होने के महज 3 घंटे बाद ही की।

जानकारी के अनुसार, श्रीनगर में रात भर में धमाकों की आवाज आती रही। वही वहाँ कई ड्रोन उड़ते भी दिखाई दिए। खुद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने इस पर पुष्टि की। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए लिखा- कोई सीजफायर नहीं है। एयर डिफेंस यूनिट ने अभी गोलीबारी शुरू की है।

सामने आई इस वीडियो में ताबड़तोड़ धमाकों की आवाज सुनाई पड़ रही है। वहीं अखनूर जिले में भी फायरिंग की घटना हुई और जोगवां में भी। इसी तरह राजौरी और पुंछ में भी नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया जबकि नगरोटा और उधमपुर में पाकिस्तानियों ने ड्रोन से हमले के प्रयास किया।

उधमपुर में उन्होंने एयरफोर्स स्टेशन को निशाना बनाया। सेना ने भी जवाबी कार्रवाई में उस ड्रोन नष्ट किया, लेकिन उसके मलबे की चपेट में आने से हमारे एक जवान (सुरेंद्र सिंह मोगा, राजस्थान के झुंझनू से) बलिदान हो गए। नगरोटा में भी सेना पर भी फायरिंग की जानकारी सामने आई। यहाँ भी घटना में एक जवान के घायल होने का मालूम चला है।

देर रात खबरें ये भी आई कि पाकिस्तानियों ने जैसलमेर को भी निशाना बनाया। बताया गया कि वहाँ भी 6 धमाके सुनाई पड़े। जैसलमेर के अलावा बाड़मेर और श्रीगंगानगर में भी पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन हमले हुए।

पाकिस्तान की इस हरकत के बाद राजस्थान, पंजाब और गुजरात समेत तमाम जिलों में ब्लैकआउट कर दिया गया। वहीं बॉर्डर वाले जिलों में बिजली काट दी गई और लोगों को घर से न निकलने की एडवाइजरी जारी की गई।

इन सारी घटनाओं के बाद देश की सेना हाई अलर्ट पर है। पुष्टि की गई है कि पाकिस्तान ने युद्ध विराम का उल्लंघन कुछ समय बाद ही कर दिया और देश में जगह-जगह हमले के प्रयास किए।

इन सारी घटनाओं के बाद देश की सेना हाई अलर्ट पर है। पुष्टि की गई है कि पाकिस्तान ने युद्ध विराम का उल्लंघन कुछ समय बाद ही कर दिया और देश में जगह-जगह हमले के प्रयास किए। जबकि 10 मई की शाम को ये सामने आया थाा कि सीजफायर के लिए पाकिस्तान ने भारत से संपर्क किया है, जिसके बाद भारत युद्ध विराम के लिए तैयार हो गया है।

इस बाबत 10 मई को, पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक (DGMO) ने भारतीय DGMO से फोन पर बातचीत की थी। इस बातचीत में दोनों पक्षों ने शाम 5 बजे से सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई। यह जानकारी भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा की। उन्होंने बताया कि यह समझौता पूरी तरह से द्विपक्षीय था और इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं थी।

हम जिस युद्ध काल में जी रहे हैं, उसमें ‘युद्ध विराम’ जैसा कुछ होता नहीं…

भावनाओं का उद्वेग कभी-कभी नेत्रों पर पट्टी बाँध देता है। जब से भारत-पाकिस्तान के बीच तत्काल और पूर्ण ​युद्ध विराम की खबर आई है, ऐसा ही देखने को मिल रहा है। जिनकी नेत्रों पर पट्टी नहीं है, उन्हें भी 1191 ईस्वी में हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गोरी के बीच लड़े गए तराइन के पहले युद्ध का स्मरण हो रहा है। जो सरल, सहज और देसी तरीकों से संवाद में विश्वास करते हैं, उनका कहना है कि अधमरे साँप को नहीं छोड़ा चाहिए।

इसके अतिरिक्त एक वर्ग ऐसा भी है जो इस बात को लेकर चिंतित है कि विपक्ष इंदिरा गाँधी का नाम लेकर ताने मार रहा है। हिंदू, मोदी और भारत घृणा में डूबा मीडिया इसे ‘पराजय’ के तौर पर प्रस्तुत करेगा। पाकिस्तान और इस्लाम परस्त शेखी बखारेंगे।

विचारों के इन तमाम प्रवाहों के बीच यह स्मरण होना चाहिए कि भारत ने कोई युद्ध नहीं छेड़ा था। हमने पाकिस्तान के टुकड़े करने के लक्ष्य निश्चित नहीं किए थे। हमने संघर्ष विराम का उल्लंघन नहीं किया था।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत के बाद ही सेना ने स्पष्ट कर दिया था कि उसके लक्ष्य पर पाकिस्तान के वे ठिकाने थे, जहाँ से पहलगाम जैसे हमले करने वाले इस्लामी आतंकियों को निर्देशित किया जाता है। उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। भारत और हिंदुओं को निशाना बनाने का षड्यंत्र रचा जाता है।

यही कारण है कि 6 मई 2025 की रात भारत ने इस्लामी आतंक के 9 अड्डों पर मिसाइल दागे। ये अड्डे हैं,

भारत के इस एक्शन से न केवल आतंकी कैंप तबाह हुए, बल्कि 100 से अधिक आतंकवादी भी ढेर हुए। आतंकी मौलाना मसूद अज​हर का तो खानदान ही खाक हो गया। 5 ऐसे आतंकवादी मार गिराए गए, जिसको लेकर कहा जा सकता है कि भारतीय सेना ने कश्मीर से लेकर कंधार तक का बदला एक साथ ले लिया। ये आतंकी हैं,

इन आतंकियों को ढेर कर, इन आतंकियों के जनाजे की तस्वीरें दिखाकर, भारत ने दुनिया के सामने पाकिस्तान के उस झूठ को भी उजागर किया, जिसके तहत वह खुद को ‘आतंकवाद का पीड़ित’ बताता है। इसके बाद बौखलाहट में पाकिस्तानी फौज ने न केवल नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया, बल्कि हमारे सैन्य से लेकर रिहायशी इलाकों तक को निशाना बनाकर गोले दागे, ड्रोन और मिसाइल छोड़े। मंदिर, गुरुद्वारे, स्कूल तक को निशाना बनाने की कोशिश की।

भारत ने इसके बाद जो कुछ किया वह जवाब देने तक ही सीमित था। हमले नाकाम कर पाकिस्तान में घुसकर जवाबी कार्रवाई तक की गई। इन सीमित कार्रवाइयों ने परमाणु हमले की गीदड़भभकी देने वाले पाकिस्तान को भीख की कटोरी लेकर पूरी दुनिया के सामने घूमने को विवश कर दिया। यह तथ्य अब आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक हो चुका है कि अपने 8 एयरबेस पर भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने ही युद्ध विराम की गुहार लगाई थी।

जब हम युद्ध में गए ही नहीं, जब हमने सीमित कार्रवाइयों से ही अपने लक्ष्य हासिल कर लिए, फिर मुल्ला मुनीर की फौज की गुहार को सुनना ही उस राष्ट्र का धर्म होना चाहिए जो सनातन की नींव पर खड़ा है। नरेंद्र मोदी की सरकार ने वही किया है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि 2008 में मुंबई में 26/11 के हमलों में इन्हीं इस्लामी आतंकियों ने 166 जानें ली थी। हम कुछ नहीं कर पाए थे। उस समय के हमारे रक्षा मंत्री कहते थे कि हथियार खरीदने को पैसे नहीं हैं।

नरेंद्र मोदी ने 11 सालों की सत्ता में ही इस स्थिति को पूरी तरह पलट दिया है। सर्जिकल स्ट्राइक हो, एयरस्ट्राइक हो या फिर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हमने बताया है कि हम कभी भी पाकिस्तान का उसके घर में घुसकर उपचार सकते हैं और वह हमारा कुछ नहीं कर सकता है। हमास आतंकियों की मिसाइलों को निष्फल करने वाले इजरायल के आयरन डोम को देखने वाली आँखों ने पहली बार सुदर्शन, AKASH, MRSAM, L-70 की ताकत को देखा है। यह बताता है कि इन 11 सालों में रक्षा के क्षेत्र में हम कितने आत्मनिर्भर, उन्नत और ताकतवर हुए हैं। यही कारण है कि जब पाकिस्तान ड्रोन और मिसाइल दाग रहा था, हम सब अपने घरों में चैन की नींद सो रहे थे। सुबह जब आँख खुलती थी तो पता चलता था कि दिल्ली पर दागे गए मिसाइल को रास्ते में ही हमारी सेना ने मार गिराया है।

ऐसे में हमें उन पार्टियों, कथित बुद्धिजीवियों, कलाकारों की प्रतिक्रियाओं की चिंता ही नहीं होनी चाहिए जिनके बयानों का इस्तेमाल पाकिस्तान की तरफ से भारत को बदनाम करने के लिए किया गया है। हमें उन मीडिया संस्थानों की परवाह ही नहीं करनी चाहिए जो पहलगाम में धर्म पूछकर हिंदुओं की हत्या करने वाले इस्लामपरस्तों को ‘आतंकवादी’ लिखने में संकोच करते हैं।

वैसे भी ये पारंपरिक युद्ध का जमाना नहीं है। हम सदैव युद्धकाल में ही जी रहे हैं। मोदी सरकार ने स्पष्ट भी कर दिया है कि अब से आतंकी हमला भी युद्ध माना जाएगा। युद्ध विराम की घोषणा के चंद घंटों बाद ही संघर्ष विराम के टूटने की भी खबरें आ रही हैं। इसलिए सूअर घर के भीतर के हो या बाहर के उनका इलाज होना निश्चित है।

यह दूसरी बात है कि वो समय आपकी आकांक्षाओं पर आज फिट नहीं बैठता। पर जैसा कि मैंने कहा है कि हम युद्ध काल में ही जी रहे हैं और युद्ध काल में धैर्य सबसे महत्वपूर्ण शस्त्र होता है। धैर्य रखिए। समय ही आपके आज के सभी प्रश्नों का उत्तर भी देगा और मनवांछित परिणाम भी।

वैसे भी युद्ध काल के जिस दौर में हम जी रहे हैं, युद्ध विराम जैसा कुछ होता नहीं। लेकिन भावनाओं के जिस आवेग में आप पाकिस्तान का सरेंडर नहीं देख पा रहे, भारत की जिस विजय को नहीं महसूस कर पा रहे हैं, उस यथार्थ से आपका साक्षात्कार तभी होगा जब भावनाओं का यह ज्वार उतरेगा।

नूर अली खान एयरबेस की तबाही से भारत ने दिया पाकिस्तान को साफ मैसेज: न तो ‘एयर फोर्स वन’ सुरक्षित और न ही उसके टॉप मिलिटरी बॉस, सभी को कभी भी बना सकते हैं निशाना

पहलगाम में आम लोगों और हिंदू धर्म पर हमले के बाद पाकिस्तान ऐसा लग रहा है जैसे खुद को मुसीबत में डाल रहा है। 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ शुरू किया। इसमें भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के अंदर जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे 9 आतंकी ठिकानों को सटीक हवाई हमलों से तबाह कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए और भारत के उत्तर और पश्चिमी हिस्सों में कई जगहों पर ड्रोन और मिसाइलों से निशाना साधा। लेकिन भारत ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। हालाँकि अब पाकिस्तान की माँग पर सीजफायर लागू हो गया है।

9 और 10 मई की रात के बीच पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर 26 जगहों पर ड्रोन से हमले किए। इनमें बारामुल्ला, श्रीनगर, अवंतीपोरा, नगरोटा, जम्मू, फिरोजपुर, पठानकोट, फाजिल्का, लालगढ़ जट्टा, जैसलमेर, बाड़मेर, भुज, कुआर्बेट और लाखी नाला जैसे अहम इलाकों को निशाना बनाया गया। खबरें ये भी आईं कि पाकिस्तान ने दिल्ली पर मिसाइल हमला करने की कोशिश की, जिसे भारतीय सुरक्षा बलों ने हरियाणा के सिरसा में रोक लिया।

पाकिस्तान ने जम्मू के आप शंभू मंदिर और माता वैष्णो देवी जैसे हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर भी हमला करने की कोशिश की। इसके जवाब में भारत ने 10 मई की सुबह बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में पाकिस्तान के अहम सैन्य हवाई ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी सैन्य संपत्ति सुरक्षित है, लेकिन तस्वीरों में बड़े विस्फोट और भारी नुकसान साफ दिख रहा है।

भारत ने इन पाकिस्तानी एयरबेसों को बनाया निशाना

रावलपिंडी पीएएफ बेस नूर खान: ये वो जगह है, जहां से कथित तौर पर कैप्टन अभिनंदन वर्थमान का विमान मार गिराया गया था।

शोरकोट पीएएफ बेस रफीकी: इसका नाम 1965 के युद्ध में मारे गए एक पाकिस्तानी पायलट के नाम पर है।

पीएएफ बेस मुरीद: इसे भारत ने आखिरी बार 1971 के युद्ध में तबाह किया था।

भारत ने जिन वायुसेना ठिकानों को निशाना बनाया, उनमें नूर अली खान एयरबेस खास है, क्योंकि ये रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। इसे निशाना बनाकर भारत ने साफ और मजबूत संदेश दिया है।

रक्षा विशेषज्ञ दिव्य कुमार सोती के मुताबिक, भारत ने रावलपिंडी के नूर अली खान एयरबेस पर मिसाइल हमला किया, जो पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय से जुड़ा है। ये एयरबेस नंबर 12 वीआईपी स्क्वाड्रन का केंद्र है, जहाँ से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और बड़े सैन्य अधिकारियों के लिए खास विमान उड़ते हैं। इस हमले का मतलब है कि अब पाकिस्तान का शीर्ष सैन्य नेतृत्व रावलपिंडी से हवाई रास्ते से बाहर नहीं निकल सकता। भारत ने साफ कर दिया है कि वो आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तानी जनरलों को निशाना बनाने से नहीं हटेगा।

नूर अली खान एयरबेस पर मौजूद नंबर 12 स्क्वाड्रन पाकिस्तान वायुसेना की वीआईपी ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन यूनिट है, जिसे पाकिस्तान का ‘एयर फोर्स वन’ भी कहा जाता है। ये स्क्वाड्रन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वायुसेना प्रमुख को आधिकारिक यात्राओं के लिए ट्रांसपोर्ट देता है। पहले ये एक बमवर्षक यूनिट थी, लेकिन 1953 में इसे वीआईपी स्क्वाड्रन बना दिया गया।

नूर अली खान एयरबेस सिर्फ वीआईपी बेस ही नहीं है, बल्कि यहाँ बड़े सैन्य अधिकारी और कमांडर भी रहते हैं। इस परिसर में पुराना बेनजीर भुट्टो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पीएएफ कॉलेज चकलाला (जो विमानन कैडेटों को ट्रेनिंग देता है) और फजिया इंटर कॉलेज नूर खान भी है। इसकी वजह से ये बेस रणनीतिक, सैन्य और पढ़ाई के लिहाज से बहुत अहम है।

नूर अली खान एयरबेस पर हमला करके भारत ने पाकिस्तान को बहुत सख्त संदेश दिया है। ये बेस न सिर्फ पाकिस्तान के ‘एयर फोर्स वन’ का मुख्यालय है, बल्कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वायुसेना प्रमुख जैसे बड़े नेताओं के ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और सुरक्षा का भी केंद्र है। साथ ही, यहाँ कई बड़े सैन्य अधिकारी रहते हैं। इस अहम बेस पर हमला करके भारत ने दिखा दिया कि अगर पाकिस्तान तनाव कम नहीं करता, तो भारत न सिर्फ उसके बड़े सैन्य ठिकानों को नाकाम कर सकता है, बल्कि उसके शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व तक भी पहुँच सकता है।

9 मई को भारत की प्रेस ब्रीफिंग – ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जवाब में पाकिस्तान कैसे आम लोगों को निशाना बना रहा है

9 मई 2025 को भारत सरकार ने एक खास प्रेस ब्रीफिंग की, जिसमें पाकिस्तान के हालिया हमलों और दुस्साहस का पूरा ब्यौरा दिया गया। इस ब्रीफिंग में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी ने मिलकर देश और दुनिया को हालात की गंभीरता और भारत की प्रतिक्रिया के बारे में बताया।

विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया कि 8 और 9 मई की रात को पाकिस्तानी सेना ने पश्चिमी सीमा पर कई बार भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की, ताकि भारतीय सैन्य ढाँचे को नुकसान पहुँचाए। साथ ही, पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर भारी हथियारों से गोलीबारी भी की, जिससे तनाव और बढ़ गया।

विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कहा कि 8 और 9 मई की रात पाकिस्तानी सेना ने लेह से लेकर सर क्रीक तक अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर ड्रोन से घुसपैठ की कोशिश की। इसके लिए करीब 300 से 400 ड्रोन का इस्तेमाल हुआ और 36 जगहों पर घुसपैठ की कोशिश की गई। भारतीय सेना ने कई ड्रोनों को मार गिराया। इतने बड़े पैमाने पर ड्रोन घुसपैठ का मकसद शायद भारत की हवाई रक्षा प्रणालियों को परखना और खुफिया जानकारी जुटाना था।

ड्रोन हमलों के बाद बरामद मलबे की जाँच चल रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ये तुर्की में बने अस्सिगार्ड सोंगर ड्रोन हैं। उसी रात, पाकिस्तान के एक हथियारबंद ड्रोन ने बठिंडा सैन्य स्टेशन पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय बलों ने इसे समय रहते पकड़कर नाकाम कर दिया। जवाब में, भारत ने पाकिस्तान के चार हवाई रक्षा ठिकानों पर हथियारबंद ड्रोन भेजे। विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया कि इनमें से एक ड्रोन ने पाकिस्तान के एक एयर डिफेंस रडार को तबाह कर दिया।

पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास कई जगहों पर भारी तोपों और हथियारबंद ड्रोनों से गोलीबारी की, जिसमें भारतीय सेना के कुछ जवान वीरगति को प्राप्त हुए और कई घायल हो गए। इसके जवाब में भारत ने भी तेज और सटीक गोलीबारी की, जिससे पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ।

विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने पाकिस्तान की गैर-जिम्मेदार हरकतों को उजागर करते हुए बताया कि 7 मई की शाम को ड्रोन और मिसाइल हमले करने के बावजूद पाकिस्तान ने अपने नागरिक हवाई क्षेत्र को बंद नहीं किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जानबूझकर नागरिक विमानों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जबकि उसे पता है कि भारत उसके हमलों का तुरंत जवाब देगा। इससे अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास उड़ने वाले नागरिक और अंतरराष्ट्रीय विमानों की सुरक्षा को खतरा हो रहा है।

भारत सरकार ने फ्लाइट राडार 24 के स्क्रीनशॉट दिखाए, जिनमें साफ दिखा कि पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के दौरान कराची और लाहौर के बीच नागरिक विमान उड़ रहे थे। विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने अपनी प्रतिक्रिया में बहुत संयम दिखाया, ताकि अंतरराष्ट्रीय नागरिक विमानों की सुरक्षा बनी रहे। ब्रीफिंग में कर्नल सोफिया कुरैशी ने हिंदी में और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने अंग्रेजी में जानकारी दी। इसके बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि पाकिस्तान ने जानबूझकर भारतीय नागरिकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसका भारत ने सही, पर्याप्त और जिम्मेदार तरीके से जवाब दिया।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पाकिस्तान के हालिया हमलों के खंडन को हास्यास्पद और दोगलेपन का सबूत बताया। उन्होंने पाकिस्तान के उस दावे को भी सख्ती से खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि भारतीय सेना अपने ही धार्मिक स्थलों पर हमले कर रही है। मिस्री ने इस आरोप को बेतुका और अपमानजनक बताया।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने साफ कहा कि पाकिस्तान दुनिया को गुमराह करने में कामयाब नहीं होगा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने पुंछ में एक गुरुद्वारे पर हमला किया, जिसमें कई लोग मारे गए। पाकिस्तान के उस दावे को खारिज करते हुए कि भारत अपने ही धार्मिक स्थलों या शहरों पर हमला करता है, मिस्री ने इसे पागलपन भरी सोच बताया और कहा कि शायद पाकिस्तान ऐसा सोचता है क्योंकि वो खुद ऐसा करता रहा है, जैसा इतिहास में कई बार देखा गया है।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पाकिस्तान के उस दावे को भी झूठ बताया, जिसमें कहा गया था कि भारत ने ननकाना साहिब गुरुद्वारे को निशाना बनाया। उन्होंने इसे पाकिस्तान के दुष्प्रचार का हिस्सा बताया। मिस्री ने कहा कि पाकिस्तान जानबूझकर सांप्रदायिक रंग देकर विवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान दावा करता है कि उसने किसी धार्मिक स्थल पर हमला नहीं किया, लेकिन मैंने कल ही पुंछ में गुरुद्वारे पर हुए हमले की बात बताई थी, जिसमें मासूम लोग मारे गए। इसके बजाय जिम्मेदारी लेने की जगह पाकिस्तान ने ये बेतुका और अपमानजनक आरोप लगाया कि भारतीय सेना और वायुसेना खुद अमृतसर जैसे अपने शहरों को निशाना बना रही हैं।”

उन्होंने कहा, “ये पाकिस्तान की अपने गलत कामों से पल्ला झाड़ने की हताश कोशिश है, और ये दुनिया को धोखा देने का उनका तरीका है। ये कामयाब नहीं होगा। पुंछ के गुरुद्वारे पर पाकिस्तान ने हमला किया था, जिसमें गुरुद्वारे के एक रागी समेत सिख समुदाय के कुछ लोग मारे गए।”

एक सवाल के जवाब में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए करतारपुर साहिब कॉरिडोर की सेवाएँ अगले आदेश तक बंद कर दी गई हैं। उन्होंने ये भी बताया कि पाकिस्तान का एक गोला पुंछ में एक ईसाई मिशनरी स्कूल के पास एक घर पर गिरा, जिसमें क्राइस्ट स्कूल के दो छात्र मारे गए और कई घायल हो गए। इसके अलावा, एक और पाकिस्तानी हमले में पास के एक ईसाई कॉन्वेंट को निशाना बनाया गया, जिससे उसका ढाँचा क्षतिग्रस्त हुआ। हमले के दौरान कॉन्वेंट के लोग क्राइस्ट स्कूल के बंद पड़े भूमिगत हॉल में छिपे।

यहूदी अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के बारे में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद इस जघन्य अपराध के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार था। उन्होंने खास तौर पर अहमद उमर सईद शेख का जिक्र किया, जो एक ब्रिटिश-पाकिस्तानी जिहादी था और जिसे भारत ने हिरासत में लिया था, लेकिन 2000 में रिहा कर दिया गया। मिस्री ने बताया कि डेनियल पर्ल को बहकाकर उसकी हत्या की साजिश में इस शेख की अहम भूमिका थी। उन्होंने कहा कि ये लोग, संगठन और घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। इसीलिए, बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर भारत का हमला डेनियल पर्ल की हत्या जैसे अपराधों की जवाबदेही का हिस्सा है।

यह रिपोर्ट मूलतः ऑपइंडिया इंग्लिश पर प्रकाशित हुई है, जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

बलूच लड़ाकों ने पाकिस्तान पर बोला हमला, मंगोचार शहर पर कब्जा कर 39 ठिकानों पर किए हमले; CPEC हाइवे भी किया ब्लॉक: आजादी के जल्द ऐलान का दावा, भारत से की दूतावास खोलने की अपील

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूच विद्रोहियों ने एक बार फिर तांडव मचाया है, जिसने पाकिस्तानी फौज और सुरक्षाबलों को हिलाकर रख दिया। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने शनिवार (10 मई 2025) को दावा किया कि उसकी ‘फतेह स्क्वाड’ ने कालात जिले के मंगोचार शहर पर कब्जा कर लिया है। इस साहसिक ऑपरेशन में खजिनाई हाइवे को ब्लॉक किया गया और स्थानीय पुलिस कर्मियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।

इस बीच, बलूच प्रतिनिधि मीर यार बलूच ने एक सनसनीखेज बयान में कहा कि ‘पाकिस्तान का पतन नजदीक है’ और जल्द ही बलूचिस्तान की आजादी की औपचारिक घोषणा हो सकती है। उन्होंने भारत से दिल्ली में बलूचिस्तान का आधिकारिक दूतावास खोलने और संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की माँग की है।

बलोच लड़ाकों ने पाकिस्तानी फौज को पहुँचाई भारी चोट

BLA के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने बताया कि ये हमले बलूचिस्तान के 39 अलग-अलग ठिकानों पर किए गए, जिनमें पुलिस स्टेशन, हाइवे ब्लॉक, सैन्य काफिलों और सरकारी मुखबिरों को निशाना बनाया गया। ये ऑपरेशन बलूचिस्तान की प्राकृतिक संपदा के कथित दोहन और पाकिस्तानी फौज के दमन के खिलाफ BLA की रणनीति का हिस्सा हैं।

ये हमले तुरबत, केच, क्वेटा और पंजगुर जैसे प्रमुख शहरों में हुए। तुरबत के डी बलोच इलाके में ग्रेनेड हमले की खबरें हैं, जबकि केच के बुलेदा में भारी गोलीबारी और विस्फोटों ने इलाके को दहला दिया। क्वेटा के हजारगंजी और फैजाबाद में फौजी चौकियों पर ग्रेनेड से हमला किया गया।

पंजगुर के वाशबोद में विद्रोहियों ने CPEC हाइवे को बंद कर वाहनों की तलाशी ली और यात्रियों की पहचान जाँची। दो पुलिस वाहनों को जब्त कर हथियार कब्जे में लिए गए, जबकि एक पुलिस थाने और एक चेकपोस्ट को आग के हवाले कर दिया गया। हौशाब जिले में विद्रोहियों ने NADRA कार्यालय और लेविज स्टेशन को जला दिया और पूरे इलाके पर नियंत्रण कर लिया। इस दौरान 10 गैर-स्थानीय लोगों को बंधक बनाए जाने की भी खबर है।

स्वतंत्र बलूचिस्तान की घोषणा जल्द, भारत और UN से माँगी गई मदद

वहीं, मीर यार बलूच ने दावा किया कि जल्द ही स्वतंत्र बलूचिस्तान की अंतरिम सरकार की घोषणा होगी, जिसमें बलूच महिलाओं को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आजादी समारोह जल्द आयोजित होगा, जिसमें मित्र देशों के नेताओं को राष्ट्रीय परेड में शामिल होने का न्योता दिया गया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान की मुद्रा और पासपोर्ट छपाई के लिए अरबों रुपये की फंडिंग की भी माँग की।

मीर यार बलूच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि संयुक्त राष्ट्र तत्काल शांति मिशन भेजे और पाकिस्तानी फौज को बलूचिस्तान की जमीन, हवाई क्षेत्र और समुद्र से हटने का आदेश दे। उन्होंने गैर-बलूच सैन्य और प्रशासनिक कर्मियों को तुरंत प्रांत छोड़ने की चेतावनी दी।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने अभी तक इन हमलों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से पता चला है कि सुरक्षाबल बैकफुट पर हैं।

न्यूज9लाइव की एक रिपोर्ट के अनुसार, BLA ने इन हमलों को बलूचिस्तान में पाकिस्तानी कब्जे के खिलाफ अपनी आजादी की लड़ाई का हिस्सा बताया है।

इंडिया टुडे ने बताया कि बलूच विद्रोही पाकिस्तानी फौज की कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं, खासकर तब जब पाकिस्तान भारत के साथ सीमा पर तनाव का सामना कर रहा है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि CPEC परियोजनाओं के खिलाफ बलूच विद्रोहियों का गुस्सा बढ़ रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये हमले पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती हैं। बलूच विद्रोहियों की बढ़ती सक्रियता और उनकी अंतरराष्ट्रीय अपील क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। BLA का CPEC विरोध और आजादी की माँग पाकिस्तान के लिए आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ा रही है। BLA ने चेतावनी दी है कि अगर संसाधनों का दोहन और सैन्य दमन जारी रहा, तो और हमले होंगे।