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हिन्दू लड़कियों को फँसाता था मोहम्मद साहिल, गर्लफ्रेंड गुलशन करती थी मदद: अश्लील वीडियो बनाकर पॉर्न साइट्स पर बेचता था

बिहार के वैशाली से लव जेहाद का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मोहम्मद साहिल नाम का शख्स अपनी गर्लफ्रेंड गुलशन खातून की मदद से पहले लड़कियों को फँसाता था और फिर अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करता था। इतना ही नहीं इंटरनेशनल पॉर्न साइट्स पर इसे बेचता भी था। उसने अलग-अलग धर्मों की लड़कियों को इसका निशाना बनाया हालाँकि उसके निशाने पर ज्यादातर हिन्दू लड़कियाँ थी। उसने इस डर्टी गेम का शिकार दर्जनों लड़कियों को बनाया।

बिहार पुलिस के मुताबिक मोहम्मद साहिल ने गर्लफ्रेंड बनाने का धँधा शुरू कर पैसे बनाए। पुलिस अब ये पता लगा रही है कि उसने किन-किन पॉर्न साइट्स पर इसे बेचा और कितने पैसे वसूले। किन देशों से ये पॉर्न साइट्स चल रहे हैं इसका पता भी लगाया जा रहा है।

इस डर्टी गेम का खुलासा तब हुआ जब एक नाबालिग लड़की का पोर्न वीडियो वायरल हुआ। इसके बाद मोहम्मद साहिल पर प्राथमिकी दर्ज कर उसे 2 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया। लेकिन घटना के 15 दिन बाद भी पीड़िता का ना तो मेडिकल कराया गया और ना ही कोर्ट में पेश हुई।

थक हार कर मामले की जानकारी पीड़िता के परिजनों ने मीडिया को दी और मामला उजागर हुआ। स्थानीय डीएसपी अबू जफर आलम के मुताबिक वीडियो वायरल करने का मामला सामने आया है। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। आगे की जाँच की जा रही है। पीड़िता के परिजनों के मुताबिक घर की बेटी कंप्यूटर क्लास के लिए जाती थी, वहीं उसकी दोस्ती गुलशन खातून से हुई। गुलशन खातून से मिलने अक्सर मोहम्मद साहिल आया करता था। इस दौरान गुलशन ने ही लड़की से साहिल को मिलवाया। धीरे-धीरे वो साहिल के झांसे में आ गयी। साहिल के साथ उसने कई फोटो खिचवाए और सेल्फी भी ली। इसके बाद साहिल उसे लेकर होटल गया और दोनों के ‘संबंध’ बने। इस दौरान साहिल ने वीडियो बनाए। वीडियो दिखाकर लड़की को ब्लैकमेल किया जाने लगा।

शाइन सिटी का मालिक राशिद नसीम को लखनऊ की अदालत ने ‘भगोड़ा’ घोषित किया, करोड़ों रुपये की सम्पत्ति को लेकर दुबई भागा

शाइन सिटी नाम की एक कंपनी का मालिक है राशिद नसीम। उसने लोगों से मेहनत की कमाई रियल एस्टेट में लगाने के लिए कहा और फिर उनके करोड़ों रुपये लेकर दुबई भाग गया।

अब लखनऊ की एक स्पेशल कोर्ट ने राशिद नसीम को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि वह एक ऐसा अपराधी है जो पैसे की धोखाधड़ी करके भागा है और कानून से छिप रहा है।

जाँच करने वाली एजेंसी ईडी का कहना है कि राशिद ने लोगों से करीब एक हजार करोड़ रुपये ठगे हैं। वह 2019 में नेपाल के रास्ते दुबई भाग गया और उसने इसके लिए नकली पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था।

ईडी ने अदालत से कहा था कि राशिद को भगोड़ा घोषित किया जाए ताकि उसकी संपत्तियों को जब्त करके नीलाम किया जा सके और निवेशकों के पैसे वापस मिल सकें। इसके बाद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट, लुकआउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है। स्थानीय अदालतों से भी उसे भगोड़ा घोषित किया गया है।

ईडी ने पहले ही राशिद और उसकी कंपनी की करीब 128 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। राशिद के खिलाफ धोखाधड़ी के 554 मामले दर्ज हैं। ED का कहना है कि वह दुबई में बैठकर भी लोगों को ठग रहा है। हाल ही में ईडी ने उसके कुछ साथियों को गिरफ्तार किया है और उनकी 190 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।

ईडी के एक्शन के बाद राशिद नसीम ने अपने फेसबुक अकाउंट पर जवाब देते हुए लिखा है कि FIR है या फिर अलिफ लैला के किस्से। इससे आगे नसीम लिखता है कि 2019 से 2020 तक लखनऊ गोमतीनगर में FIR करवाने वाले सभी कस्टमर एफआईआर की स्टोरी एक जैसी होती थी।

विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे कुछ और बड़े धोखेबाजों को भी पहले इसी तरह भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। लेकिन उत्तर प्रदेश में यह पहला मामला है जब किसी को इस नए कानून के तहत भगोड़ा घोषित किया गया है।

120 उड़ानें प्रभावित, 20 ट्रेनों में देरी, 3 बच्चों समेत महिला की मौत… भारी बारिश और आँधी-तूफ़ान से थमी दिल्ली, IMD ने जारी किया अलर्ट

दिल्ली में भारी बारिश और आँधी-तूफ़ान के कारण स्थिति बदतर हो गई है। 4 लोगों की मौत की सूचना है। पूरी राजधानी में धूल के कारण दिखाई देना भी बंद हो गया। लगभग 120 उड़ानों में देरी हुई। मृतकों में एक महिला और उसके 3 बच्चे शामिल हैं। दिल्ली के द्वारका में बारिश व आँधी-तूफ़ान के कारण इनके घर पर पेड़ गिर गया, जिससे इनकी मौत हो गई। दिल्ली के इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आने वाली 3 उड़ानों को जयपुर और अहमदाबाद डाइवर्ट करना पड़ा। दिल्ली एयरपोर्ट पर आने वाली उड़ानों के लिए 21 मिनट और जाने वाली उड़ानों के लिए 61 मिनट की औसतन देरी हुई।

दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों को सहज अनुभव देने के लिए ग्राउंड स्टाफ द्वारा लगातार प्रयास किए जाने का भरोसा दिलाया गया है। वहीं, कई एयरलाइंस ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी फ्लाइट की ताज़ा स्थिति ज़रूर जाँच लें। एयर इंडिया ने ‘X’ पर जारी बयान में कहा, “दिल्ली आने-जाने वाली कुछ उड़ानें या तो देरी से चल रही हैं या डायवर्ट की जा रही हैं, जिससे हमारी कुल उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ सकता है। हम कोशिश कर रहे हैं कि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो।”

तेज़ हवाओं के कारण पेड़ बिजली के तारों पर गिर गए, जिससे दिल्ली डिविज़न में रेल संचालन प्रभावित हुआ और करीब 15 से 20 ट्रेनें देर से चल रही हैं। दिल्ली के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी रही, जिसमें द्वारका, खानपुर, साउथ एक्सटेंशन रिंग रोड, मिंटो रोड, लाजपत नगर और मोती बाग जैसे क्षेत्रों से तस्वीरें सामने आईं। तेज़ हवाओं के कारण कई जगह पेड़ उखड़ गए या उनकी टहनियाँ गिर गईं। हालाँकि, संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन अभी बाकी है। लोगों को सलाह दी गई है कि मौसम के हिसाब से घर में ही रहें, जब तक ज़रूरत न हो बाहर न निकलें। दिल्ली का तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में भारी बारिश, तूफान और 70-80 किमी/घंटा तक की रफ्तार से हवाएँ चलने की संभावना है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी मध्यम बारिश का अनुमान जताया गया है। मौसम विभाग ने दिल्ली के लिए शनिवार तक ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है, जिसमें भारी बारिश, आँधी और तेज़ हवाओं की चेतावनी दी गई है। बुधवार शाम को आसमान में बादल छा गए थे और अधिकतम तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो इस मौसम के औसत से 0.9 डिग्री कम था

हालाँकि, मई में भारत के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से ज़्यादा गर्मी पड़ने की संभावना जताई गई है, लेकिन बीच-बीच में आने वाले तूफानों से थोड़ी राहत मिलेगी। आईएमडी के अनुसार, उत्तर भारत में इस बार मई में औसत (64.1 मिमी) से 109% अधिक बारिश हो सकती है। बार-बार होने वाले तेज़ तूफानों से इस बार मई 2024 जैसी भीषण गर्मी से कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

जज एजाज खान, शो में दिखा रहे सेक्स की पोजीशन… चैलेंज- लड़कियों का कपड़े उतारना: Ullu के शो ‘House Arrest’ को लेकर उठे सवाल, BJP सांसद बोले- कार्रवाई होगी

बीते कुछ सालों तक खबरें आया करती थीं कि किस तरह रियल्टी शो के नाम पर चलने वाले टीवी सीरियल सच्चाई से कोसों दूर होते हैं। लेकिन बदलते समय के साथ इन्होंने भी अपना रूप बदल लिया है। टीवी के रियल्टी शो की जगह OTT प्लेटफॉर्म के रियल्टी शो ने ले ली है।

लेकिन यहाँ सच्चाई से कोई समझौता नहीं किया जा रहा बल्कि रियल्टी के नाम पर सॉफ्ट पोर्न परोसा जा रहा है। पोर्न और अश्लील कंटेंट के बीच की महीन रेखा का फायदा उठाता हुआ एक और ऐसा ही शो ‘हाउस अरेस्ट’ अब सवालों के घेरे में हैं। यह Ullu App का शो है और इसका जज एजाज खान है।

इस कथित रियल्टी शो की कुछ क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। इसके बाद लोग इसमें दिखाई जाने वाली नग्नता, फूहड़पन और सीधे-सीधे पोर्न जैसे कंटेंट परोसने पर भड़क गए। उन्होंने इसके बैन की माँग की है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में एक्शन लेने की अपील की है।

क्यों हो रहा विवाद?

Ullu App के शो हाउस अरेस्ट की कुछ क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। ऐसी ही एक क्लिप में जज एजाज खान सामने बैठी लड़कियों से खुल्लम-खुल्ला सेक्स और उसके तरीके पर बात करता है। शो में एक लड़की उससे कहती है कि उसे इस विषय में ज्यादा जानाकारी नहीं है तो वह पूछता है, “तुमने एक्सपेरिमेंट नहीं किया कभी?”

इसके बाद वह वहीं मौजूद एक लड़के और एक लड़की को पोजीशंस दिखाने को कहते हैं। यहीं मौजूद एक और लड़की दूसरे लड़के को समझाती है कि उसे कैसे एक लड़की को उठा कर सेक्स की पोजीशन दिखानी है। इसके बाद यह लड़का और लड़की ऐसा करके भी दिखाते हैं।

इसके बाद दूसरे को सेक्स के बारे में समझाने वाला लड़का-लड़की खुद भी एक ऐसी ही भद्दी हरकत करके दिखाते हैं। इस दौरान वह काफी अश्लील इशारे करते हैं और इसे एकदम सॉफ्ट पोर्न की तरह प्रस्तुत कर करते हैं। जज बन कर बैठा एजाज खान इनकी तारीफ़ करता है।

इसी शो की एक और वीडियो वायरल हो रही है जो और अधिक आपत्तिजनक है। इसमें लड़कियों को उनके कपड़े उतारने का चैलेंज दिया गया है। इस क्लिप में लडकियाँ अपने कपड़े उतार रही हैं। इस दौरान अश्लील भाषा का इस्तेमाल भी हो रहा है। एजाज खान और बाकी इस दौरान ताली बजाते हैं।

ऐसे ही और भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। इनमें भी अधिकांश बातचीत नग्नता, सेक्स और ऐसे ही फूहड़पने से जुड़ी हुई है। इसे रियल्टी शो का बस नाम दे दिया गया है।

लोगों ने की बैन करने की माँग

एजाज खान के इस अश्लील शो के वीडियो सामने आने के बाद लगातार लोग प्रश्न उठा रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय से इस शो पर बैन लगाने की माँग की है और कहा है कि इससे लोगों के दिमाग पर विपरीत असर पड़ रहा है। पत्रकार नबीला जमाल ने इसको लेकर लिखा, “मुझे लगा था कि भारत में पोर्न बैन है शायद।”

वहीं राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा, “मैंने स्थायी समिति में यह मुद्दा उठाया है कि उल्लू ऐप और ऑल्ट बालाजी जैसे ऐप अश्लील सामग्री के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा लगाए गए प्रतिबंध से बच निकलने में कामयाब रहे हैं। मैं अभी भी उनके जवाब का इंतजार कर रही हूँ।”

वहीं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि यह नहीं चलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी समिति इस मामले को संज्ञान में लेकर कार्रवाई करेगी।

कई लोगों ने यह भी लिखा है कि इससे समाज के तानेबाने को गहरी क्षति पहुँच रही है। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि शो में शामिल होने वाली अधिकांश लड़कियां हिन्दू हैं जबकि जज एजाज खान मुस्लिम है। लोगों ने प्रश्न पूछा कि क्या इसके पीछे कोई अलग साजिश तो नहीं है। इसके अलावा समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया का उदाहरण देकर भी प्रतिबंधों की माँग की गई है।

वाराणसी में गंगा आरती में मुस्लिम लड़के ने की युवती से छेड़खानी, लोगों ने पीटा तो खेला ‘विक्टिम कार्ड’: मामले की जाँच में निकली कई चौंकाने वाली जानकारी, अब ATS के पास पहुँची जाँच

वाराणसी के गंगा घाट पर एक नाबालिग मुस्लिम लड़के ने गंगा आरती में आई युवती से छेड़खानी की। उसने युवती को गलत तरीके से छुआ, इसके चलते उसका यहाँ मौजूद लोगों ने विरोध किया। उसकी कुछ लोगों ने पिटाई भी कर दी। मुस्लिम लड़के ने दावा किया पिटाई से पहले उसका धर्म पूछा गया। मामला जब पुलिस के पास पहुँचा तो उसे साजिश का शक हुआ। इसके बाद अब यह जाँच ATS को सौंप दी गई है। मुस्लिम लड़के की हिन्दू घाट पर मौजूदगी से कई प्रश्न उठे हैं।

यह घटना 28 अप्रैल, 2025 को वाराणसी के दशाश्वमेव घाट पर हुई। बताया गया कि मुस्लिम युवक ने आरती के बाद प्रसाद लेने की आड़ में लड़की का पीछा किया। इसके बाद लड़की चिल्लाने लगी और भीड़ ने उसे पकड़ लिया और पीटने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। घाट पर आरती समिति के सदस्यों ने भी इस घटना की पुष्टि की है।

पुलिस ने इस मामले में शुरूआती जाँच के तौर पर घाट का CCTV फुटेज निकाला और मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ATS को दे दिया। पुलिस को यह भी शक है कि जानबूझकर इस मामले को धार्मिक विवाद का एंगल देने का प्रयास किया गया।

ATS ने इस मामले में घाट पर जाँच की है और CCTV फुटेज जब्त की है। उन्होंने अस्पताल में मुस्लिम लड़के से बात करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी। ATS उससे कुछ मुद्दों पर सवाल पूछना चाहती है। ATS जानना चाहती है कि जब मुस्लिम लड़के का घर चौराहा पड़ाव में है, जो कि दशाश्वमेध घाट से करीब 12 किलोमीटर दूर है। वह इतनी दूर क्या करने आया?

इसके अलावा ATS इस बात को लेकर भी जाँच करेगी कि शुरू में इस घटना को एक लड़की के साथ छेड़छाड़ की बात सामने आई थी, बाद ये कई लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें मिली। ATS को शक है कि मुस्लिम लड़का संदिग्ध तौर पर घात पर मौजूद था।

ATS इस बात की भी जाँच करेगी कि गंगा आरती के दौरान घाट पर उसकी मौजूदगी क्यों थी और क्या वह रोज आता-जाता था। इस बात का भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि वह अपने मोबाइल डिवाइस पर किसका वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था?

क्या ISI का कोई कनेक्शन?

ATS को एक और एंगल इस मामले में मिला है। दरअसल, आरोपित मुस्लिम युवक चौरहट इलाके का रहने वाला है। जनवरी 2020 में राशिद अहमद को ATS ने वाराणसी के चित्तुपुर इलाके से पकड़ा था। पति से अलग होने के बाद उसकी माँ चंदौली के चौरहट पड़ाव स्थित अपने मायके में रहती थी। राशिद भी उन्हीं के साथ रहता था और पोस्टर बनाने का काम करता था।

वह दो बार पाकिस्तान में अपनी खाला के घर गया था। राशिद को अपनी खाला की बेटी से प्यार हो गया था और उसके रिश्तेदारों ने उसे ISI में नौकरी करने के लिए प्रोत्साहित किया। वह 2018 में कराची में अपनी मौसी के घर गया और उसके बाद ISI से संपर्क स्थापित किया।

2019 से उसने अपने फोन से चंदौली में सैन्य और CRPF प्रतिष्ठानों की तस्वीरें खींचनी शुरू कीं और उन्हें एजेंसी को भेजना शुरू किया। 5 मार्च को लखनऊ की विशेष NIA की अदालत ने मोहम्मद राशिद को जासूसी मामले में दोषी पाया था।

बयान भी बदल रहा मुस्लिम लड़का

जनवरी 2022 में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की ओर से वाराणसी के पंचगंगा, मणिकर्णिका, दशाश्वमेध, रामघाट से लेकर अस्सी घाट तक के रास्तों पर कई पोस्टर लगाए गए थे। इनमें साफ तौर पर लिखा था कि यहाँ गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।

यह स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि गंगा घाट कोई मजे का अड्डा नहीं हैं। यह भी स्पष्ट कहा गया था कि जबरदस्ती घुसने वाले किसी गैर हिन्दू को पुलिस को दिया जाएगा। इस मामले में पुलिस का एक बयान भी सामने आया है।

काशी जोन के DCP गौरव बंसल ने बताया है कि जाँच की शुरुआत में यह सिर्फ छेड़छाड़ का मामला लग रहा था। उन्होंने बताया कि पुलिस की पूछताछ और घाट से CCTV फुटेज की समीक्षा के बाद युवक की संलिप्तता संदिग्ध लगने लगी।

उन्होंने कहा कि उसका घर भी घाट से काफी दूर है, जिससे उसके वहाँ होने और आरती में शामिल होने के कारणों के बारे में पूछताछ की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ के दौरान रेहान ने अपना बयान भी बदल दिया।

बेसमेंट में सालों तक रखा कैद, कई मर्दों से करवाया रेप… सगी बहनों के साथ हुई बर्बरता: जंजीरों से बाँधकर रखता था डेविड, पीने को देता था फर्श का गंदा पानी

अमेरिका के मिल्वॉकी शहर से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक 64 साल के व्यक्ति ने दो नाबालिग लड़कियों के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी। तहखाने में बंद कर जंजीरों से बाँधकर रखा। पीड़िता को खाने के नाम पर ब्रेड के टुकड़े दिए गए। यहाँ तक की प्यास लगने पर जमीन पर पड़ा गंदा पानी पीने को मजबूर कर दिया गया। पुलिस ने मामले में आरोपित डेविड बॉयड को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

तहखाने में बड़ा हुक की तस्वीर (साभार : INDEPENDENT)

ये मामला 7 जनवरी 2025 को सामने आया। जब इनमें से एक पीड़िता ने अपने माता-पिता को उसके साथ बीती घटना की जानकारी दी। परिजन ने पुलिस में शिकायत की। शिकायत के अनुसार, 2024 तक पीड़िता के साथ यौन शोषण किया गया। आरोपित उसकी सगी दादी का बॉयफ्रेंड है।

पीड़िता ने बताया कि आरोपित उसका 8 साल की उम्र से शोषण कर रहा है। दादी के घर पर न होने पर बॉयड उसके साथ गलत हरकत करता था। फिर एक दिन वो बच्ची को अपने घर ले आया। वहाँ काफी समय बेसमेंट में बुरी हालत में रखा और बदसलूकी की। पीड़िता के अनुसार, बॉयड ने कथित तौर पर एक बार बॉक्स कटर का उपयोग करके उसके शरीर के विभिन्न हिस्सों को काटा, जिसमें उसके निजी अंग भी शामिल थे।

तहखाने में जमीन पर पड़ा ब्रेड का टुकड़ा (साभार: INDEPENDENT)

पुलिस ने बताया कि आरोपित की पहली शिकार पीड़िता की बड़ी बहन थी। साल 2015 से वह उसके साथ दरिंदगी कर रहा था, जब पीड़िता महज 5 साल की थी और 12 साल की उम्र तक ऐसा करता रहा। पुलिस को पीड़िता की छोटे बहन ने शिकायत की, जो बॉयड के चंगुल से भागकर पुलिस तक पहुँची।

पीड़िता ने तहखाने का नक्शा बनाया

पीड़िता ने पुलिस को तहखाने का नक्शा बनाकर दिखाया। उसके साथ हुई बदसलूकी को चित्रों में उकेरा। चित्र में एक वॉशर और ड्रायर के बगल में एक पोल दिखाया गया है, जिसमें एक छड़ी की आकृति की गर्दन से एक ‘चेन’ जुड़ी हुई है, जिसे लड़की ने ‘मैं’ के रूप में लेबल किया है। आकृति के पैर में रोटी का एक टुकड़ा है, जिसके नीचे झरने का एक स्केच है, जिस पर ‘पानी” लेबल है।

पीड़िता द्वारा बनाया गया तहखाने का नक्शा (साभार: Independent)

इसी के आधार पर पुलिस ने आरोपित डेविड बॉयड के मिलवॉकी स्थित घर पर 26 अप्रैल, 2025 को छापा मारा। जहाँ से जुर्म के कई सबूत मिले। घर के तहखाने में जंजीरें, छत से लटकता एक बड़ा हुक, फर्श पर पानी का गड्ढा और सीढ़ियों पर ब्रेड के टुकड़े बरामद हुए। इसके अलावा चाकू और धारदार हथियार भी मिले।

पुलिस ने बताया कि डेविड ने पहले उस पर लगे यौन शोषण के आरोपों को निराधार बताया। लेकिन जब पीड़िता द्वारा बनाया गया नक्शा दिखाया गया। तो वह घबरा गया और बहाना बनाकर भागने की कोशिश करने लगा।

यौन तस्करी का भी आरोप

पीड़िता ने आरोपित बॉयड पर लड़की को कई लोगों के पास तस्करी करने का भी आरोप लगाया है। बताया कि एक बार कई आदमी एक साथ उसके सामने खड़े थे। बॉयड ने उनसे पूछा कि उनमें से पहले कौन लड़की के साथ सोना चाहता है। लेकिन, अचानक बॉयड की बेटी ने उसे आवाज़ लगाई और ये चीज़ वहीं रुक गई।

मिल्वॉकी और ब्राउन डियर पुलिस मामले की गहनता से जाँच कर रही है। बॉयड पर यौन शोषण, तस्करी, शारीरिक उत्पीड़न और गैरकानूनी कैद जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं। उसे जेल भेज दिया गया है। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही है।

नैनीताल में हिन्दू बच्ची से रेप करने वाले उस्मान के घर पर चलेगा बुलडोजर, धामी सरकार ने दिया नोटिस: वकील भी नहीं लड़ेंगे केस, लोग बोले- फाँसी दो

उत्तराखंड के नैनीताल में हिन्दू बच्ची से रेप करने वाले मोहम्मद उस्मान के घर पर बुलडोजर चलेगा। उसे प्रशासन ने इस संबंध में नोटिस भेज दिया है। मोहम्मद उस्मान का घर अवैध कब्जे वाला पाया गया है। उस्मान के खिलाफ लगातार नैनीताल में प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके चलते शहर भर में अघोषित कर्फ्यू लगा हुआ है। उस्मान को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया है, यहाँ भी मौजूद वकीलों ने उसे पीटने की कोशिश की है।

धामी सरकार ने जारी किया नोटिस

बुधवार (30 अप्रैल, 2025) को मोहम्मद उस्मान के 12 वर्षीय हिन्दू बच्ची का रेप करने की बात सामने आई थी। इसके बाद उसके खिलाफ बड़ा प्रदर्शन हुआ था। मोहम्मद उस्मान ने इस बच्ची को अकेला पा कर गाड़ी के भीतर रेप किया था। बच्ची उस्मान के घर पर छोटे-मोटे काम के लिए आया-जाया करती थी।

मोहम्मद उस्मान के गिरफ्तार होने के बाद उसके घर की भी जाँच की गई है। 1 मई, 2025 को नैनीताल नगर पालिका के इस सर्वे में मोहम्मद उस्मान का घर कब्जे की जमीन पर पाया गया है। नगर पालिका को पता चला है कि मोहम्मद उस्मान का घर वन भूमि को अतिक्रमित करके बनाया गया है।

मोहम्मद उस्मान को इस संबंध में नोटिस भी जारी किया गया है। यह नोटिस उसके घर पर चस्पा किया गया है। नैनीताल नगर पालिका ने कहा है कि मोहम्मद उस्मान को 3 दिन के भीतर अपना अतिक्रमण हटाना होगा। अगर वह अपना अतिक्रमण नहीं हटाएगा तो नगर पालिका इस संबंध में कार्रवाई करेगी और इसे खुद हटा देगी।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस मकान के ध्वस्तीकरण में कोई छूट नहीं देने वाला है। धामी सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में महिलाओं के विरुद्ध अपराध करने वालों के खिलाफ हर तरह की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने उस्मान को कोर्ट में किया पेश

मोहम्मद उस्मान को बुधवार को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। उसे गुरुवार (1 मई, 2025) को पुलिस ने हलद्वानी में कोर्ट में पेश किया है। बच्ची से रेप के चलते गुस्साए वकीलों ने उस्मान को पीटने का प्रयास कोर्ट में पेशी के दौरान किया। पुलिस किसी तरह उसे बचा कर पेश कर पाई। वकीलों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह उस्मान का केस नहीं लड़ेंगे।

वहीं नैनीताल इस घटना के भारी आक्रोश है। घटना के विरोध में नैनीताल को गुरुवार को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। इस दौरान कोई दुकान और स्कूल-कॉलेज नहीं खुले। स्थानीय लोगों ने हिन्दू संगठनों के साथ मिलकर नैनीताल की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन में रैली निकाली।

उन्होंने आरोपित को फाँसी दिए जाने की माँग की है। उन्होंने यह मुकदमा फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की माँग भी की है। प्रदर्शन और बंद के चलते नैनीताल के भीतर अघोषित कर्फ्यू का माहौल बन गया है और सड़कों पर पर्यटक भी नहीं मौजूद हैं।

जिनकी फैमिली इनकम ₹25+ लाख सालाना, उनको नहीं मिलेगी स्कॉलरशिप: जानिए राजस्थान हाई कोर्ट ने क्यों लगाई रोक, क्यों बताया सरकारी पैसों का दुरुपयोग

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 25 लाख रुपए से अधिक की वार्षिक आय वाले परिवारों के लिए सरकारी स्कॉलरशिप की व्यवस्था रोक दी है। ‘स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप फॉर हाई स्टडीज’ के तहत ये स्कॉलरशिप राज्य सरकार द्वारा दी जाती है। पहले इसका नाम राजीव गाँधी के नाम पर था। एक अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा है कि उन छात्रों को ये स्कॉलरशिप नहीं मिलेगी जिनकी पारिवारिक आय साल में 25 लाख रुपए से अधिक है। ये कैंडिडेट्स E3 कैटेगरी के अंतर्गत आते हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट का कहना है कि सरकारी खजाने से लाखों रुपए ऐसे छात्रों को दे दिए गए जिनके अभिभावक अमीर हैं, इससे ऐसे ज़रूरतमंद व गरीब छात्रों को स्कॉलरशिप से वंचित रहना पड़ा जो पढ़ने-लिखने में बहुत अच्छे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि वो सरकार और उसके अधिकारियों के विवेकाधीन ऐसे फैसलों पर आँखें बंद करके नहीं रह सकता, जहाँ स्कॉलरशिप के नाम पर सरकारी खजाने से उनपर पैसे लुटाए जाएँ जो इसके अधिकारी नहीं हैं। जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने ये फ़ैसला सुनाया।

उन्होंने कहा कि करदाताओं के ख़ून-पसीने की कमाई को ग़लत तरीके से ख़र्च किया जा रहा है क्योंकि इस छात्रवृत्ति योजना के E3 कैटेगरी के अंतर्गत ऐसे संपन्न परिवारों ने इसका लाभ ले लिया है जिनकी आमदनी पर्याप्त है। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे ये योजना उसी ख़ास वर्ग के लिए बनाई गई है। उच्च न्यायालय ने माना कि इसमें उत्कृष्ट अकादमिक रिकॉर्ड को मानक नहीं बनाया गया है, ऐसे में औसत प्रदर्शन वाले छात्रों को इसका फ़ायदा देना इसके मूल उद्देश्य को ही निष्फल कर देता है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा, “ऐसे संपन्न परिवारों के छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिल गया जिनकी कोई जरूरत नहीं थी, और जिन छात्रों को वास्तव में इस आर्थिक सहायता की आवश्यकता थी — जो मेधावी हैं, जिनका शैक्षणिक रिकॉर्ड उत्कृष्ट है और जो देश-विदेश की प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करना चाहते हैं – उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाया। इस तरह, यह योजना जरूरतमंदों के हक को छीनकर अमीरों की सुविधा का जरिया बन गई है।”

इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उच्च न्यायालय ने इसे “छात्रवृत्ति की आड़ में सरकारी तंत्र द्वारा सार्वजनिक धन के दुरुपयोग” का मामला बताते हुए संज्ञान लिया। साथ ही सरकार से जवाब माँगा कि आखिर क्यों इसे रोकने के लिए इस योजना को बंद न किया जाए। बता दें कि इस योजना के तहत विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ने के इच्छुक छात्रों को छात्रवृत्ति मिलती है। 8 लाख रुपए से कम आय वालों को इसमें E1 और 8 से 25 लाख रूपए तक की आय वाले परिवारों को E2 कैटेगरी में रखा गया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि आज के समय में जब शिक्षा सबसे मूल्यवान और महँगी अस्तु बन चुकी है, ऐसे में छात्रवृत्तियाँ सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाले अवसर बन गई हैं।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने जनजातीय लड़की का किया कन्यादान, पैर भी धोए: कहा- विवाह ही कुटुंब का आधार, काशी में एक साथ हुईं 125 शादियाँ

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक साथ 125 हिन्दू जोड़ों का विवाह सम्पन्न करवाया गया। इस कायर्क्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए। उन्होंने यहाँ एक जनजातीय समाज की कन्या का कन्यादान भी किया। उन्होंने इस दौरान यहाँ मौजूद लोगों को कुटुंब का महत्व समझाया।

संघ प्रमुख बुधवार (30 अप्रैल, 2025) को वाराणसी में अक्षय कन्यादान महोत्सव में पहुँचे थे। यहाँ पर 125 जोड़ों की शादी आयोजित की गई थी। यह जोड़े समाज के कमजोर तबकों से जुड़े हुए थे। इनके लिए वाराणसी के खोजवां इलाके में 125 मंडप तैयार किए गए थे। यह मंडप एक तालाब के किनारे पर बनाए गए थे।

इस दौरान लड़के-लड़की और तमाम परिजन भी मौजूद थे। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने यहाँ सोनभद्र की जनजातीय समाज से आने वाली लड़की राजवंती का कन्यादान किया। राजवंती के पिता मजदूर हैं। उसका विवाह अमन नाम के लड़के से सम्पन्न हुआ।

संघ प्रमुख भागवत ने यहाँ पहले राजवंती के पैर धोए और बाद में सभी संस्कार पूरे किए। उन्होंने विवाह सम्पन्न होने पर ₹501 का शगुन भी जोड़े को दिया। उन्होंने इस दौरान दूल्हे अमन को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वह उनकी बेटी राजवंती को आगे प्रसन्न रखे और कमाता रहे।

125 विवाह का यह कार्यक्रम संघ के ही एक बड़े पदाधिकरी ने आयोजित किया था। इस आयोजन में ऐसा पहली बार हुआ कि सामूहिक विवाह में भी बारात निकली। इसके लिए बग्गियाँ तैयार की गई थीं। आयोजन में शामिल किए गए जोड़े सभी समाज से थे। इसमें दलित, जनजातीय और सवर्ण आदि जोड़ों का विवाह करवाया गया है।

संघ प्रमुख ने इस दौरान यहाँ मौजूद लोगों को सन्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि विवाह से कुटुंब बनते हैं और कुटुंब से ही समाज बनते हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि समाज को मजबूत करने के लिए प्रतिवर्ष ऐसे आयोजन किए जाने चाहिए। उन्होंने परिवारों को सप्ताह में एक बार साथ भोजन करने और मातृभाषा का प्रयोग करने को भी कहा।

वाराणसी में सम्पन्न हुए इस कायर्क्रम में 5 हजार लोग पहुँचे थे। यहाँ शादियाँ सम्पन्न करवाने के लिए बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से ज्योतिषाचार्य बुलाए गए थे। उन्होंने मंत्रोच्चार के साथ यह शादियाँ सम्पन्न करवाईं।

‘इज्जत से समझौता’ कर कॉन्ग्रेस सरकार में महिलाओं को मिलती थी नौकरी: असम CM सरमा का दावा, विरोध पर कहा- जाकर जाँच कमीशन का गला पकड़ो

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने आरोप लगाया है कि राज्य में कॉन्ग्रेस के शासनकाल में महिलाओं को सरकारी नौकरी पाने के लिए ‘इज्जत से समझौता’ करना पड़ता था। उनके इस बयान पर कॉन्ग्रेस बौखला गई है। वहीं मुख्यमंत्री सरमा ने कहा है कि उन्होंने सिर्फ तथ्यों के आधार पर बात कही है।

असम में वर्तमान में पंचायत चुनावों के लिए प्रचार चल रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा इसके लिए चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। उन्होंने इसी दौरान एक रैली में पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकार पर यह आरोप जड़े। उन्होंने एक जाँच आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान महिलाओं को राज्य में नौकरी के लिए अपने ‘सम्मान से समझौता’ करना पड़ता था।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि कॉन्ग्रेस सरकार में नौकरियों में हुई गड़बड़ी को लेकर बनाए गए जस्टिस बिप्लब शर्मा जाँच आयोग के सामने एक पीड़िता ने अपने बयान में यह सभी बातें बताई थीं। उन्होंने कहा था कि यह गड़बड़ियाँ असम लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 2013-14 में हुई थी।

मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी इस दौरान कहा कि जब से राज्य में भाजपा सत्ता में आई है, तब से यह स्थिति बदल गई है और अब नौकरियों में गड़बड़ियाँ बंद हो गई हैं। हिमंता बिस्वा के इस बयान को कॉन्ग्रेस ने बड़ा मुद्दा बनाने का प्रयास किया। कॉन्ग्रेस ने दावा किया किया कि यह राज्य की महिलाओं का अपमान है।

वहीं मुख्यमंत्री सरमा ने इसका जवाब भी दिया। उन्होंने कहा कि रैली में कही गई सारी बातें उन्होंने जस्टिस बिप्लब शर्मा जाँच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर कही थीं। उन्होंने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस को अधिक समस्या है तो वह जस्टिस शर्मा से जाकर प्रश्न पूछ सकती है। उन्होंने यह जवाब असम कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा के आरोपों के बाद दिया।

गौरलतब है कि 2016 से पहले 15 वर्ष तक लगातार असम में कॉन्ग्रेस की सरकार रही थी। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता तरुण गोगोई राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे थे। उनकी सरकार पर नौकरियों में 2013-14 में गड़बड़ी का आरोप लगा था। भाजपा ने सत्ता में आने के बाद इसको लेकर दो जाँच कमीशन बनाए थे।

रिपोर्ट में पता चला था कि इस दौरान अभ्यर्थियों के नम्बर बढ़ाए गए थे, उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ हुई थी। इसके अलावा और भी कई गड़बड़ियाँ पाई गईं थी। यह रिपोर्ट फरवरी, 2025 में असम विधानसभा में रखी गई थी। अब इसी में आए एक बयान को लेकर बवाल मचा है।