हाल ही में मध्य प्रदेश के भोपाल में ‘मुस्लिम गैंग’ द्वारा हिन्दू लड़कियों को शिकार बनाए जाने की घटना सामने आई। अब ‘लव जिहाद’ के इस मामले में अब नया खुलासा हुआ है। जाँच में सामने आया है कि मुख्य आरोपित फरहान छात्राओं के वीडियो पॉर्न साइट्स को बेचने वाला था। उसके फोन से इसके सबूत मिले हैं। उसने ये साजिश छात्रा को सबक सिखाने के लिए रची थी, जो कि उसे इग्नोर करने लगी थी।
फरहान को वीडियो बेचने का आइडिया उसके दोस्त और आरोपित अबरार और नबील ने दिया था। दरअसल इंदौर में रह रही छात्रा उसे लगातार इग्नोर करने लगी थी। फरहान उसे जबरदस्ती मिलने के लिए दबाव बना रहा था। वह छात्रा के इंदौर स्थित घर में हंगामा भी कर चुका था। लेकिन छात्रा उससे मिलने को राजी नहीं हुई। छात्रा को सबक सिखाने के लिए फरहान ने साथियों संग मिलकर वीडियो पॉर्न साइट पर बेचने की योजना बनाई।
पुलिस के मुताबिक, फरहान एक पॉर्न साइट के संपर्क में था और पीड़ित छात्राओं के अश्लील वीडियो उन साइट्स पर बेचने वाला था। उसके मोबाइल फोन में एक पॉर्न साइट पर वीडियो बेचने का लिंक और पॉर्न सर्च करने का सबूत मिला है, जिसमें उसकी मदद आरोपित अबरार और नबील कर रहे थे। इन दोनों ने ही फरहान को पॉर्न साइट्स पर वीडियो बेचने का तरीका सिखाया।
फरहान के खास थे अबरार और नबील
पूरे मामले में आरोपित अबरार और नबील की भी अहम भूमिका है। दोनों आरोपित लड़कियों को अपने कमरे में कभी पढ़ाई तो कभी पार्टी के नाम पर बुलाया करते थे। कमरे में गुप्त जगहों पर पहले से ही मोबाइल वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ सेट कर दिए जाते थे। पार्टी के नाम पर लाउड म्यूजिक के साथ गांजे से भरी सिगरेट लड़कियों को दी जाती थी। मुख्य आरोपित फरहान भी अकसर लड़कियों को इन दोनों के ही कमरे पर लाया करता था। अबरार और नबील कॉलेज में फरहान के जूनियर थे। फरहान इन दोनों पर खास भरोसा रखता था।
फरहान की गिरफ्तारी के बाद से ही अबरार और नबील फरार थे। नबील को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नबील को पुलिस की दो टीमें पश्चिम बंगाल और बिहार में पिछले पाँच दिनों से इनकी तलाश में जुटी हुई थीअबरार की लास्ट लोकेशन मुर्शिदाबाद में ट्रेस की गई थी। हालाँकि, वह भी मूल रूप से बिहार का ही रहने वाला है।
बुधवार (30 अप्रैल 2025) को पुलिस ने फरहान की कोर्ट में पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिग से कराई। इससे पहले 13 अप्रैल, 2025 को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। अब आरोपित को अशोका गार्डन पुलिस 5 दिन की रिमांड पर लेगी।
क्लब-90 रेस्टोरेंट संचालक भी शामिल
फरहान हिंदू युवतियों को क्लब 90 नाम के रेस्टोरेंट लाया करता था। लगभग हर रोज उसका यहाँ आना-जाना लगा रहता था। छात्राओं को इसी लोकेशन पर बुलाकर गलत हरकत करता था। फिर यहाँ से नाइट क्लब, पार्टी और बड़े होटलों में ले जाया करता था। पुलिस को फरहान के फोन से जो तस्वीरें मिली हैं। वो इसी रेस्टोरेंट की हैं जो छात्राओं के कॉलेज से महज 100 मीटर की दूरी पर है।
पुलिस बुधवार (30 अप्रैल, 2025) को फरहान को लेकर क्लब-90 पहुँची। यहाँ पीछे 7 कमरे मिले, जिनमें बेड रखे हैं। रेस्टोरेंट संचालक प्राइवेसी के नाम पर घंटों बैठने के लिए केबिन देता था। साथ ही गाँजा भी उपलब्ध कराता था। पुलिस ने रेस्टोरेंट की सील कर दिया है। पुलिस अब संचालक को भी मामले में आरोपित बना सकती है।
साहिल की डांस एकेडमी मुख्य अड्डा
SIT की जाँच में पता चला है कि आरोपित साहिल की डाँस एकेडमी मुख्य अड्डा थी। यहाँ से 30 लड़कियों के डांस सीखने का रिकॉर्ड मिला है। इनमें सभी लड़कियाँ हिंदू हैं। साहिल इवेंट मैनेजमेंट का काम भी करता था। इसके नाम पर वह कई बड़े आयोजनों में लड़कियों को भेजने का काम भी करता था।
बता दें कि भोपाल के एक निजी कॉलेज छात्राओं के साथ लव जिहाद का मामला सामने आया। 18 अप्रैल, 2025 को मामले का खुलासा हुआ। जब पहली पीड़िता ने बागसेवनिया थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने बताया कि आरोपित उसे अपनी सहेलियों को भी अपने साथियों से मिलवाले के लिए मजबूर कर रहे थे। बाद में उन लड़कियों के साथ भी गलत हरकतें की गई। पुलिस को शक है कि पीड़िताओं और आरोपितों की संख्या बढ़ सकती है। इसीलिए मामले की जाँच का दायरा बढ़ा दिया गया है।
सीएम मोहन यादव ने दी चेतावनी
भोपाल में लव जिहाद गैंग का पर्दाफाश होने के मामले में राज्य के सीएम मोहन यादव ने चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सुशासन के लिए पहचाना जाता है। जो भी व्यक्ति अपराध में संलिप्त पाया जाएगा। उसे सख्त सजा दी जाएगी। चाहे वह अपराधी राज्य के भीतर हो या राज्य छोडकर भाग गया हो। पुलिस उसे पकड़कर लाएगी और कानून के अनुसार दंडित करेगी।
उत्तराखंड के नैनीताल में एक बुजुर्ग मुस्लिम ने एक हिन्दू बच्ची से रेप किया। रेप करने वाला आरोपित उत्तराखंड के बाहर का रहने वाला बताया जा रहा है। रेप की घटना को लेकर हिन्दू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया है। आरोपित मुस्लिम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नैनीताल के मल्लीताल इलाके में बुधवार (30 अप्रैल 2025) रात को यह घटना सामने आई। लोगों को सूचना मिली कि उस्मान ठेकेदार नाम के एक शख्स ने 12 वर्षीय हिन्दू बच्ची के साथ रेप किया। यह घटना तब हुई जब बच्ची की माँ घर से बाहर थी।
उस्मान उत्तर प्रदेश के बरेली का रहने वाला बताया जा रहा है। बताया गया है कि उस्मान ने घर के काम के लिए तीन दिन पहले बच्ची को अपने यहाँ बुलाया था और उसे 200 रुपये भी दिए थे। यह भी सूचना मिली है कि उस्मान ने अपनी कार में बच्ची के साथ रेप किया।
घटना सामने आने के बाद हिन्दू संगठनों ने कार्रवाई की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। भीड़ में शामिल कई लोगों ने कहा कि उस्मान को जनता के बीच लाया जाए। पथराव और हंगामे की भी सूचना सामने आई है। बाद में मौके पर पहुँची पुलिस ने किसी तरह भीड़ को शांत किया। भीड़ को काबू में लाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
इसके चलते नैनीताल के कई इलाकों में बाजार बंद हो गया। भारी प्रदर्शन के बाद उस्मान के विरोध में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने उस्मान के खिलाफ रेप और POCSO की धाराओं में मुकदमा लिखा है। उस्मान को हिरासत में भी लिया गया है।
प्रदर्शनकारी हिन्दू संगठनों ने पीड़िता का मेडिकल करवाने की माँग की। इस दौरान उन्होंने ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के भी नारे लगाए। थी। हिन्दू संगठनों ने घोषणा की है कि गुरुवार (1 मई 2025) को नैनीताल का पूरा बाजार बंद रहेगा। कोई भी दुकान नहीं खुलेगी। पुलिस अब इस मामले में जाँच कर कार्रवाई कर रही है।
जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने मंगलवार (29 अप्रैल 2025) को एक सीआरपीएफ जवान मुनीर अहमद और उनकी पाकिस्तानी बीवी मीनल के ‘ऑनलाइन’ निकाह पर बड़ा सवाल उठाया है। कोर्ट ने कहा है कि यह निकाह कानूनी तौर पर सही है या नहीं, इस पर विचार करना होगा।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान पता चला कि मुनीर और उनकी पत्नी ने ‘ऑनलाइन’ निकाह किया है, लेकिन उनके निकाह के कागजात (निकाहनामा) में निकाह की जगह जम्मू के हंदवाल लिखी है। जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने इसे सही नहीं बताया, क्योंकि ऑनलाइन निकाह में दोनों अलग-अलग जगहों पर थे। बीवी पाकिस्तान में थीं और मुनीर जम्मू-कश्मीर में।
मुनीर और उनकी पत्नी ने ‘ऑनलाइन‘ निकाह की थी। पत्नी वीजा पर भारत आईं, लेकिन उनका वीजा 22 मार्च 2025 को खत्म हो गया है और वह अभी भी यहीं हैं। कोर्ट ने जोड़े से पूछा है कि जब निकाह ऑनलाइन हुई, तो कागजात में हंदवाल का नाम क्यों लिखा गया।
आगे जज राहुल भारती ने कहा कि भारत सरकार को यह देखना होगा कि ऐसी ऑनलाइन शादियाँ कानून में मानी जाएँगी या नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि मुनीर ने अपने विभाग को अपने निकाह के बारे में बताया था। यह भी कहा था कि 5 नवंबर 2023 को निकाह होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्योंकि न तो मुनीर पाकिस्तान गया और न ही उनकी बीवी भारत आईं।
मुनीर ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने अपनी बीवी के वीजा के लिए लंबे समय से अर्जी दी है, मगर कोर्ट ने कहा कि वीजा देना या नहीं देना यह सरकार का काम है। अभी उनकी पत्नी का वीजा खत्म हो चुका है और वह गैरकानूनी तरीके से भारत में रह रही हैं।
हाई कोर्ट ने साफ किया कि जब सरकार इस मामले पर विचार करेगी, तभी पता चलेगा कि महिला को वीजा मिलेगा या नहीं। कोर्ट ने सरकार को दस दिन में जवाब देने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 मई 2025 को होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला को जम्मू-कश्मीर से निकाला जाएगा या नहीं, यह कोर्ट के आखिरी फैसले पर निर्भर करेगा।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच पहलगाम आतंकी हमले को लेकर मतभेद चल रहे हैं। इस मामले में एक सीआरपीएफ जवान अपनी बीवी को पाकिस्तान वापस भेजने से रोकने के लिए कोर्ट गया है। इससे यह भी पता चला है कि बहुत से पाकिस्तानी लोग, जो पहले वीजा लेकर भारत आए थे, अभी भी यहीं रह रहे हैं।
भारत ने पाकिस्तान की एयरलाइंस के लिए एयरस्पेस बंद कर दिया है। इससे पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान होगा क्योंकि उड़ानों की दूरी और वक्त दोनों में इजाफा होगा। ये कदम पाकिस्तान के लिए सख्त कूटनीतिक संदेश भी है। इससे पहले भारत ने सिंधु जल समझौते को रद्द कर पाकिस्तान के खिलाफ वाटर स्ट्राइक की थी और अब एयरस्पेस रोक कर बड़ा एयरस्ट्राइक करने जा रहा है।
भारत के इस कदम का असर दक्षिण पूर्व एशिया जाने वाली उड़ानों पर खास तौर पर पड़ेगा और वहाँ जाने के लिए विमानों को भारत के चारों तरफ चक्कर लगानी होगी। इससे इंधन की खपत काफी बढ़ेगी जिसका असर विमान के किराए पर भी दिखेगा। यात्री पाकिस्तानी विमान से यात्रा करने से कतरा सकते हैं जिससे एयरलाइंस को राजस्व का नुकसान हो सकता है। पाकिस्तान ने पहले भी भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर चुका है।
भारत ने पाकिस्तानी एक्शन का जवाब दिया है। दरअसल अब दोनों देशों के विमान एक-दूसरे के एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। भारत का एयरस्पेस पाकिस्तान से कहीं बड़ा है, ऐसे में पाकिस्तान को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
भारत के ताबड़तोड़ एक्शन और सैन्य तैयारी को देखते हुए पाकिस्तान घबरा गया है। उसने अपनी खुफिया एजेंसी ISI के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद असीम मलिक को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी NSA भी बना दिया है।
दरअसल पाकिस्तान को अब अपने देश में छिपे मोस्ट वांटेड आतंकियों की चिंता सता रही है। उसे डर है कि कहीं भारत आतंकी आकाओं को मार कर उसकी पोल न खोल दे। यही वजह है कि आतंकी संगठन लश्कर ए तैय्यबा के चीफ हाफिज सईद की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उसे स्पेशल सर्विस ग्रुप के पूर्व कमांडरों की सुरक्षा में रखा गया है।
लाहौर के घनी आबादी वाले इलाके में सईद का ठिकाना है जो मदरसे और मस्जिद से सटा हुआ है ताकि उसे मारने से पहले भारत को पाकिस्तानी नागरिकों की सुरक्षा की चिंता रहे।
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई आर-पार के मोड़ पर पहुँच रही है। नक्सली एक-एक कर अपने ठिकाने हार रहे हैं। सुरक्षाबल उनका सफाया करके उनके ठिकानों पर तिरंगा फहरा रहे हैं। नक्सलियों के खिलाफ 22 अप्रैल, 2025 से चालू हुए सबसे बड़े ऑपरेशन में निर्णायक सफलता मिल रही है। ऑपरेशन का केंद्रबिंदु कर्रेगुट्टा पहाड़ी है, उससे नक्सली भाग रहे हैं।
इस पर सुरक्षाबलों ने तिरंगा फहरा दिया है। इस पहाड़ी को भी छत्तीसगढ़ में CRPF, पुलिस और DRG और विशेष कमांडो ने घेर रखा है। सुरक्षाबलों के इस ऑपरेशन के चलते लाल आतंकी घबराए हुए हैं, वह सरकार से अब बात करना चाहते हैं। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने इससे इनकार कर दिया है।
जमीन छोड़ भाग रहे नक्सली
छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा जहाँ मिलती है, वहाँ पर यह कर्रेगुट्टा पहाड़ी है। यह 5 हजार फीट की ऊँचाई पर है। पहाड़ी और उसके आसपास घना जंगल है। यहाँ तक कि आसपास कोई आबादी नहीं है। यहाँ 22 अप्रैल, 2025 को सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन चालू किया था। सुरक्षाबलों को सूचना थी कि यहाँ हिडमा जैसे कई बड़े नक्सली कमांडर ठहरे हुए हैं।
इसके बाद इसको छत्तीसगढ़ की पुलिस, DRG, CRPF, कोबरा कमांडो और महाराष्ट्र के कमांडो समेत 10 हजार जवानों ने इस पहाड़ी को घेरना चालू किया। इस पहाड़ी पर जवान ना पहुँचे, इसके लिए माओवादी IED भी लगा रखी थीं। हालाँकि सुरक्षाबलों के पहुँचने के बाद उनकी नक्सलियों से मुठभेड़ चालू हुई।
इसमें तीन महिला नक्सली मार गिराई गईं। इन पर ₹8 लाख का इनाम था। इनके अलावा 8 और नक्सलियों के मारे जाने की सूचना सुरक्षाबलों को मिली है। हालाँकि, इन नक्सलियों के शव नहीं बरामद हुए हैं। नक्सली और सुरक्षाबल लगातार आपस में टकरा रहे हैं।
सुरक्षाबलों की मजबूती देख कर नक्सल घबरा गए हैं, 200 स्क्वायर किलोमीटर से ज्यादा वाले इस इलाके में वह भागने का प्रयास कर रहे हैं। उनके भागने की दिशा तेलंगाना की तरफ है। तेलंगाना की तरफ से उतनी सख्ती ना होने के चलते यह नक्सली भागने की फिराक में हैं।
कर्रेगुट्टा पर फहराया तिरंगा
कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर सुरक्षाबलों के ऑपरेशन के चलते नक्सली भाग रहे हैं और जवान लगातार इलाकों में बढ़त बनाए हुए हैं। यहाँ जवान कुछ इलाकों में 9 दिन चढ़ाई करने के बाद पहुँचे हैं। उन्हें बड़ी मात्रा में IED भी यहाँ मिले हैं। अब इन इलाकों से नक्सलियों को भगा कर सुरक्षाबल तिरंगा फहरा रहे हैं। नक्सलियों के ऑपरेशनल हेडक्वार्टर रहे इस पहाड़ी का इंच-इंच अब मुक्त करवाने के बाद अपनी बढ़त दिखा रहे हैं। इसकी तस्वीरें भी सामने आई हैं।
Chhattisgarh | A screenshot of a video shared with ANI, shows the tricolour flying atop Karegutta Hill that has been taken from Naxals during the anti-naxal operation by Security Forces in Bijapur
The Karegutta hill located on the border of Chhattisgarh and Telangana, which was… pic.twitter.com/NnsCADlurU
कभी जंगली इलाकों में समानांतर सरकार चलाने वाले नक्सली अब घुटनों पर आ गए हैं। हजारों जवानों और आम लोगों को मारने वाले नक्सली अब सरकार से ‘सीजफायर’ करने को कह रहे हैं। CPI माओवादी ने सरकार से अपील की है कि वह उनके सफाए के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कगार’ को बंद कर दे।
इस सीजफायर को तेलंगाना के नेता भी समर्थन दे रहे हैं। BRS प्रमुख KCR भी यही अपील कर चुके है। वहीं तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी इस पर विचार करने की बात कर चुके हैं। लेकिन वर्षों से नक्सलवाद का दंश झेल रहे छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार इस मूड में नहीं है।
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने सीजफायर करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा, “मामला ये है कि शांति समझौता करने के लिए कुछ लोग इकट्ठा हो रहे हैं। ये कौन लोग हैं, ये तब कहाँ थे जब दरभाडोरा में 27 नागरिकों को नक्सलियों ने मार दिया था।”
#WATCH | Raipur, Chhattisgarh | BRS president K Chandrasekhar Rao urged the Centre to have a dialogue with the Naxals and stop Operation Kagar.
Chhattisgarh Dy CM Vijay Sharma says, "… Who are these people and where were they when 27 people were killed in Dharbandora? Or in… pic.twitter.com/d3faZ9jp1q
उन्होंने आगे कहा, “जब बस्तर के आदिवासियों की हत्या हुई तब ये लोग कहाँ थे। अभी यह कैसे उभर कर आ रहे हैं… झीरम घाटी में जब इतने लोग मार दिए गए तब यह सब कहाँ थे?” डिप्टी सीएम विजय सीएम शर्मा ने कहा, “इनसे क्यों बात की जाए, ये कौन हैं… इनके प्रयासों से कुछ नहीं होने वाला है।”
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि जिन नक्सलियों को बात करनी है वह मुख्यधारा में आना चुनें वरना कोई बात नहीं होगी।
लगातार मारे जा रहे नक्सली
गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च, 2026 का समय सुरक्षाबलों को नक्सलियों का सफाया करने के लिए दिया है। इसे लिए लगातार ऑपरेशन हो रहे हैं। 2024 में सुरक्षाबलों ने 290 नक्सली मारे थे। वहीं 2025 में यह संख्या लगभग 130 पहुँच चुकी है। सैकड़ों की संख्या में नक्सली सरेंडर कर चुके हैं।
वर्ष 2025 में सुरक्षाबलों को नक्सलियों के खिलाफ लगातार बड़ी सफलताएँ हाथ लगी हैं। अब तक कई ऐसे ऑपरेशन छत्तीसगढ़ में हो चुके हैं, जिनमें एक दर्जन से ज्यादा नक्सली एक साथ मार गिराए गए हों। एक रिपोर्ट बताती है कि अब तक 2025 के भीतर छत्तीसगढ़ में 120 से अधिक नक्सली मार गिराए गए हैं।
2025 के पहले दिन से ही सुरक्षाबलों ने नक्सलियों पर शिकंजा कसना चालू कर दिया था। 2 जनवरी, 2025 को बीजापुर में हुई मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए थे। उसके बाद यह सिलसिला चलता ही रहा। 16 जनवरी को हुई एक मुठभेड़ में 18 नक्सली मार गिराए गए थे।
21 जनवरी, 2025 को गरियाबंद पहाड़ी पर हुई एक मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें नक्सलियों का टॉप कमांडर चलापति भी था। चलापति ₹1 करोड़ का इनामी नक्सली था। उसके साथ ही एक-दो और भी बड़े कमांडर मारे गए थे।
इस वर्ष की सबसे बड़ी मुठभेड़ 9 फरवरी को हुई थी। नेशनल पार्क क्षेत्र में हुए ऑपरेशन के दौरान यहाँ 31 नक्सली मार गिराए गए थे। यह ऑपरेशन महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सुरक्षाबलों ने मिलकर किया था। यह हमला नक्सलियों की एक मीटिंग पर हुआ था। इसी तरह के बड़े ऑपरेशन के चलते नक्सलियों की अब कमर टूट गई है।
सुरक्षाबल अब उन इलाकों में घुस रहे हैं, जहाँ पहले नक्सली एकक्षत्र राज कर रहे थे। उन्हें ग्रामीणों से मिलने वाला समर्थन भी अब कम हो चुका है। दुर्गम इलाकों में चौकियाँ बनाने के चलते सुरक्षाबल उनकी हर एक मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं।
इंदौर में 27 वर्ष के एक शख्स जिब्राइल पर एक शिक्षिका का बलात्कार और इस्लामी धर्मांतरण कराने का आरोप लगा है। मंगलवार (29 अप्रैल 2025) को पीड़िता ने देर रात लसूड़िया थाने पहुँच कर इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। जिब्राइल ने उसे हत्या की धमकी भी दी थी। बकौल पीड़िता, हार्डवेयर कारोबारी जिब्राइल ने कहा कि अगर वो उसके साथ नहीं चली तो वो उसके परिवार को वैसे ही जान से मार डालेगा, जैसा पहलगाम में हुआ। बता दें कि 22 अप्रैल को आतंकियों ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हमला करके 28 पर्यटकों की जान ले ली थी।
पीड़िता ने बताया है कि जिब्राइल ने उसके घर पहुँचकर मारपीट की और गंदी-गंदी गालियाँ दी। पीड़िता की माँ से भी मारपीट की गई। उसने एक अस्पताल के पास पीड़िता को इसके बाद बुलाया और उससे लड़ने-झगड़ने लगा। इस दौरान उसने पीड़िता को अपनी रखैल बताते हुए ऐलान किया कि वो उसकी सगाई नहीं होने देगा। उसने सोने की चेन पहनाते हुए कहा , “तू मेरी रखैल है, ये ले अपना इनाम।” उसने लालच भी दिया कि वो उसकी सारी ज़रूरतें पूरी करेगा। जब पीड़िता ने उसकी सोने की चेन ठुकरा दी तो वो हत्या की धमकी देने लगा।
बकौल पीड़िता, जिब्राइल उसे जबरन एक होटल में भी ले गया और चाकू की नोंक पर उसे धमकी दी। वहीं उसने चाकू की नोंक पर ही पीड़िता के साथ बलात्कार किया। जाते समय उसने ये भी धमकाया कि अगर पीड़िता उससे बात करना बंद करती है तो वो और उसका परिवार अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे। कई बार रेप की बात सामने आ रही है। पीड़िता की पिता की मौत हो चुकी है और वो 2020 से इंदौर में रह रही है। जिब्राइल पहले से शादीशुदा है और उसके 4 बच्चे भी हैं। उसने पीड़िता का फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी।
पीड़िता द्वारा दी गई शिकायत, फोटो साभार: ‘दैनिक भास्कर’
2025 में पीड़िता इंदौर आ गई तो वहाँ भी जिब्राइल ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और धमकाने लगा। जब उसे लड़की की सगाई की बात पता चली तो वो और उग्र हो उठा। एक सोने की दुकान में ले जाकर उसने कहा कि तुझे जो चाहिए वो गहने ले ले, लेकिन ये सगाई तोड़ दे।
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हिन्दुओं की पीड़ा सामने आ रही है। पाकिस्तान में हिन्दुओं की कितनी दयनीय स्थिति है, इसको लेकर भी एक वीडियो सामने आया है। इसमें एक बुजुर्ग हिन्दू पाकिस्तानी हिन्दुओं की पीड़ा बताई है। वायरल हो रहा यह वीडियो कुछ समय पुराना है। यह वीडियो पहलगाम हमले के बाद सोशल मीडिया पर वायरल है। यह अकेला ऐसा वीडियो नहीं है जिसमें पाकिस्तानी हिन्दुओं की समस्याएँ बताई गईं हों। पाकिस्तान के के हिन्दुओं की उत्पीड़न की खबरें लगातार पाकिस्तान से आती रहती हैं।
वीडियो में बुजुर्ग ने पीएम मोदी से भावुक अपील की है कि पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू, सिख समुदाय की बहू-बेटियों को बचा लें। वीडियो में वह कहते हैं कि 1947 में कई फैमिली भारत चली गईं लेकिन कई हिन्दू दुर्भाग्य से पाकिस्तान में रह गए क्योंकि बॉर्डर बंद कर दिए गए थे।
वीडियो में दिखने वाले बुजुर्ग हिन्दू के मुताबिक, “हिन्दू पाकिस्तान की जनसंख्या के 1%-2% है, हमारी बेटियाँ बहुत तकलीफ में हैं पिछले 12 सालों में 13-14 हजार हिन्दू बेटियों का मजहब बदला गया। हम ये नहीं चाहते हैं कि आप हमारी वजह से पाकिस्तान से कोई बदला लें।”
बुजुर्ग हिन्दू वीडियो में कहते हैं, “हमारी पीएम मोदी से एक ही अपील है कि इस्लामाबाद में जितने भी हिन्दू या सिख लोगों की अर्जी पड़ी हुई है माइग्रेशन के लिए या रिफ्यूजी स्टेटस के लिए प्लीज इनको वीजा दीजिए। कोई कहता है 10 हजार हैं कोई कहता है कि 1 लाख है ऐसे भी लोग हैं जिनकी अप्लीकेशन दो साल से पड़ी हुई हैं।”
वीडियो में बुजुर्ग कहते हैं कि उनके भांजे की बेटी का वीजा दो साल तक पड़ा रहा, बाद में उसका अपहरण करके उसका मजहब बदला गया। उन्होंने बताया, “ऐसे किस्से बहुत हैं हमारी लड़कियों को कभी फँसाया जाता है कभी ब्रेन वॉश किया जाता है कभी अगवा किया जाता है। हमारी कोई नहीं सुनता। न तो पुलिस, न ही जज और न ही मुख्यमंत्री। “
वीडियो में बुजुर्ग पीएम मोदी को उनकी माँ की याद भी दिला रहे हैं। वे कहते हैं, “हम करें कहाँ जाएँ हमारी माँ रोती है, आपकी भी तो माँ थी लेकिन अब नहीं है। आप बॉर्डर खोल दीजिए ताकि ये आ पाएँ। हमारी हालत तो ये हैं कि जब बेटी अगवा हो जाती है तो वकील की फीस देने के लिए झोपड़ी तक बेचनी पड़ती है।”
उन्होंने पीड़ा बताते हुए कहा, “कोर्ट में लड़की के यह कहने के बाद भी कि उसे अगवा किया गया, मुझे अपने माँ-बाप के पास भेज दें लेकिन ये लोग नहीं भेजते। यहाँ इंसाफ नहीं होता है। कोर्ट भी कुछ नहीं करता है।” वायरल वीडियो में दिख रहे हिन्दू बुजुर्ग कहते हैं कि वह पाकिस्तान की हकीकत बता रहे हैं।
पाकिस्तानी हिन्दू के इस वीडियो में बताई गई पीड़ा को इस बात से भी समझा जा सकता है कि हाल ही में भारत के पाकिस्तानियों के वीजा कैंसल करने के बाद कई हिन्दू शरणार्थी वापस जाने को तैयार नहीं है। हिन्दू शरणार्थी बताते हैं कि पाकिस्तान में उनकी स्थिति काफी खराब है और भारत में वह मरना पसंद करेंगे।
कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में रेप और हत्या मामले में पीड़िता के पिता ने CBI पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसी असली दोषियों को बचा रही है। पिता ने ये भी दावा किया कि बेटी के मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप ग्रुप लेफ्ट किया गया है। यानी मौत के बाद भी बेटी का मोबाइल फोन इस्तमाल किया जा रहा था।
मीडिया से बातचीत में पीड़ित पिता ने कहा, “CBI पर भरोसा था लेकिन अब हम सारी उम्मीद खो रहे हैं। CBI मेरी बेटी के बलात्कार और हत्या के पीछे के अपराधियों को जानती है लेकिन वह पूरे मामले का खुलासा नहीं कर रही है।”
#WATCH | North 24 Parganas, West Bengal | RG Kar Medical College and Hospital rape and murder victim's father says, "… CBI has presented two drastically different reports in the Calcutta High Court and the Sealdah district Court… We will tell this today in the High Court that… pic.twitter.com/LFSdgx9Vbz
पीड़िता के पिता ने बताया कि CBI ने कोलकाता हाई कोर्ट और सियालदह के जिला कोर्ट में दो बिल्कुल अलग रिपोर्ट पेश की हैं। उन्होंने कहा, “हम हाईकोर्ट में यह बताएँगे कि दो अलग-अलग स्थित रिपोर्ट पेश की जा रही हैं। यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट के जज भी उनके समक्ष प्रस्तुत की गई रिपोर्ट की गंभीरता पर संदेह कर रहे हैं।”
इसके अलावा पीड़िता के पिता ने दावा किया है कि CBI उनकी बेटी के असली अपराधियों को जानती है लेकिन किसी वजह से इसका खुलासा नहीं कर रही है। पीड़िता के पिता ने बताया कि उनका CBI से विश्वास टूटता नजर आ रहा है।
बेटी की मौत के बाद मोबाइल नंबर एक्टिव
पीड़िता के पिता ने यह भी दावा किया कि उनकी बेटी का मोबाइल हादसे में मौत के बाद भी एक्टिव है। उन्होंने बताया कि बेटी के नंबर से व्हाट्सअप ग्रुप में हलचल देखी गई है। उन्होंने बताया है कि उनकी बेटी को एक व्हाट्सएप ग्रुप से निकाल दिया गया गया है। उन्होंने बताया कि इसके लिए उनकी बेटी के फोन को एक्सेस किया गया है।
CBI के पास उसका फोन है लेकिन जाँच एजेंसी इस बात से इनकार करती है। पीड़िता के पिता का कहना है कि उनकी बेटी के मोबाइल फोन में सभी उत्तर हैं। उन्होंने कानूनी प्रक्रिया पर निराशा जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी पर भी अब भरोसा नहीं है।
मुख्य आरोपित को उम्रकैद
बता दें कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 9 अगस्त 2024 को एक 31 वर्षीय महिला डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जिसके बाद लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। मामले की जाँच पहले स्थानीय पुलिस कर रही थी लेकिन कोलकाता हाईकोर्ट ने पुलिस की जाँच से असंतोष जताया। इसके बाद मामले को CBI को सौंपा गया था।
CBI ने मुख्य आरोपित संजय रॉय सहित कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है, जिसे इस अपराध का दोषी माना गया। 20 जनवरी 2025 को कोलकाता हाईकोर्ट मामले में मुख्य आरोपित साबित करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फिलहाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट एक स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी पीड़ितों के माता-पिता का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
मोदी सरकार देश में जातीय जनगणना करवाएगी। यह जातीय जनगणना अगली सामान्य जनगणना के साथ होगी। इसको राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने मंजूरी दे दी है। मोदी सरकार ने यह भी आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस और INDI गठबंधन के बाकी दल जाति जनगणना को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं।
बुधवार (30 अप्रैल, 2025) को यह फैसला केन्द्र सरकार की कैबिनेट की बैठक में लिया गया है। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की। इस कैबिनेट बैठक में गन्ने का उचित मूल्य बढ़ाने समेत और भी कई फैसले लिए गए।
रेल और IT मामलों के केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आज फैसला किया है कि जाति जनगणना को आगामी जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के हितों के प्रतिबद्ध है।
#WATCH | Delhi | "Cabinet Committee on Political Affairs has decided today that Caste enumeration should be included in the forthcoming census," says Union Minister Ashiwini Vaishnaw on Union Cabinet decisions. pic.twitter.com/0FtK0lg9q7
अश्विनी वैष्णव ने इसके साथ ही कॉन्ग्रेस पर हमला भी बोला। उन्होंने कहा, “मनमोहन सिंह ने लोकसभा से कहा था कि जातिगत जनगणना के लिए एक कैबिनेट समिति बनाई जाएगी। यह वादा पूरा नहीं हुआ… लेकिन कॉन्ग्रेस ने इसकी जगह पर केवल एक जाति सर्वे करवाया। उसका नाम SECC है।”
उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस और INDI गठबंधन के दलों ने जाति जनगणना को सिर्फ एक राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। संविधान में जातिगत जनगणना केन्द्रीय सूची में है और केंद्र का अधिकार है। कुछ राज्यों में इसको लेकर सर्वे हुए हैं जो राजनीतिक नजरिए से किए गए हैं इनमे कोई पारदर्शिता नहीं है।”
अश्विनी वैष्णव ने आगे बताया, “इसी तरह के सर्वे के चलते सामाजिक सद्भाव में दरार पड़ी है। सामाजिक संरचना में राजनीतिक दरार ना पड़े इसलिए जनगणना में जातीय जनगणना को शामिल किया जाएगा। राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह फैसला लिया है।”
केन्द्र सरकार का यह फैसला कॉन्ग्रेस समेत तमाम दलों के लिए झटके के जैसा आया है। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी जाति जनगणना को लम्बे समय से हथियार बनाते रहे हैं। मोदी सरकार ने इसे सामान्य जनगणना के साथ शामिल करके नहले पर दहला मार दिया है। अब कॉन्ग्रेस इस मुद्दे को नहीं भुना पाएगी।
इस फैसले की सराहना गृह मंत्री अमित शाह ने भी की है, उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आज हुई CCPA की बैठक में, आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लेकर सामाजिक समानता और हर वर्ग के अधिकारों के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया है।”
सामाजिक न्याय के लिए संकल्पित मोदी सरकार ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में आज हुई CCPA की बैठक में, आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लेकर सामाजिक समानता और हर वर्ग के अधिकारों के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता का…
उन्होंने आगे लिखा, “कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने दशकों तक सत्ता में रहते हुए जातिगत जनगणना का विरोध किया और विपक्ष में रहते हुए इस पर राजनीति की। इस निर्णय से आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े सभी वर्गों का सशक्तीकरण होगा, समावेशन को बढ़ावा मिलेगा और यह वंचितों की प्रगति के नए मार्ग प्रशस्त करेगा।”
कॉन्ग्रेस ने वहीं एक ओर इस फैसले का स्वागत किया है तो वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार पर इसमें देरी का आरोप लगाया है।
सोशल मीडिया पर रविवार (26 अप्रैल ,2025) को ‘मुस्लिम पीड़ित’ की झूठी कहानी फैलाई गई, जिसमें दावा किया गया कि कोलकाता की एक स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंपाकली सरकार ने एक मुस्लिम मरीज का इलाज करने से इनकार कर दिया। आरोप था कि कस्तूरी दास मेमोरियल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर चंपाकली ने कंगकोना खातून नामक महिला को उसके मजहब के चलते चिकित्सा सेवा देने से मना कर दिया।
रिपोर्ट में डॉ सरकार को विलेन दिखाने के लिए एक अपुष्ट कॉल रिकॉर्डिंग भी पेश की गई। यह उल्लेख करना ज़रूरी है कि उस ऑडियो क्लिप की अब तक कोई फॉरेंसिक जाँच नहीं हुई है और उसकी असलियत की पुष्टि नहीं हो सकी है।
हालाँकि, यह दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक निकला। यह घटना पहलगाम आतंकी हमले के बाद सामने आई उन कई फर्जी खबरों में से एक है, जो सोशल मीडिया और कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा फैलाई जा रही हैं। इसके पीछे की मंशा इस्लामी आतंकवादियों द्वारा किए गए हिंदुओं के नरसंहार जैसे गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाना और हिंदुओं को गलत तरीके से खलनायक के रूप में प्रस्तुत करना प्रतीत होता है।
‘द क्विंट’ और कुछ अन्य मीडिया संस्थानों द्वारा इन फर्जी कहानियों को पुनः प्रकाशित कर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिससे सांप्रदायिक तनाव और गलतफहमियों को बढ़ावा मिला।
वामपंथी प्रोपेगेंडा आउटलेट ‘द क्विंट’ ने डॉ चंपाकली सरकार के हवाले से यह बयान दिया, “आपके मजहब के लोग मेरे धर्म के लोगों को मार रहे हैं, आप लोग हत्यारे हैं।”
‘द क्विंट’ की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट
इसमें आगे आरोप लगाया गया है, “डॉक्टर ने कहा – आपके पति को हिंदुओं द्वारा मार दिया जाना चाहिए ताकि आप उस दर्द को महसूस कर सकें जो हिंदुओं ने झेला है। आपको अपने इलाज के लिए केवल मदरसों और मस्जिदों में जाना चाहिए, जहाँ मुस्लिमों को आतंकवादी बनना सिखाया जाता है।”
डिजिटल मीडिया पोर्टल ‘द क्विंट’ के हवाले से, ये बात सामने आई है जिसमें डॉ सरकार को एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर खलनायक के रूप में दिखाया गया है। आरोप है कि यह रिकॉर्डिंग असत्यापित है और इसे बिना पुष्टि के रिपोर्ट में प्रमुखता दी गई। रिपोर्ट में कंगकोना खातून, उनके पति और भाभी महफूजा (जो पेशे से वकील हैं) के बयानों को गलत रूप में प्रस्तुत किया गया है।
वहीं, डॉ सरकार के पक्ष को बहुत ही सीमित जगह दी गई, जबकि पूरी रिपोर्ट उन्हीं के इर्द-गिर्द केंद्रित थी। रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार अलीज़ा नूर ने इस ख़बर को लिखा, जिन पर पहले भी ‘मुस्लिम पीड़ित’ की कहानी को स्थापित करने के लिए एक फर्जी खबर फैलाने के आरोप लग चुके हैं।
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्टस के अनुसार, डॉक्टर को मरीज के मजहब का पता नहीं था और उसके सरनेम ‘खातून’ की जानकारी मिलने के बाद डॉक्टर नाराज हो गई।
शिकायत के अनुसार, डॉक्टर पिछले 7 महीनों से महिला का इलाज कर रही थी, डॉक्टर मरीज का पहला नाम कोंकणा से जानती थी। आरोप लगाया गया है कि उसका सरनेम ‘खातून’ देखकर डॉक्टर ने कथित तौर पर कहा की वो मुस्लिम महिला का इलाज नहीं करेंगी। बकौल रिपोर्ट, डॉक्टर ने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का हवाला दिया और मजहबी कट्टरता के आरोप लगाए।
इस फर्जी खबर को मुस्लिम मिरर, डेक्कन क्रॉनिकल, मकतूब मीडिया और सियासत जैसी इस्लामी प्रचार साइटों द्वारा प्रोपेगंडा के तहत फैलाने का काम किया गया।
दावे बनाम सच्चाई, क्या था असल मामला?
कंगकोना खातून पिछले 7 महीने से अपनी नियमित जाँच के लिए डॉ सरकार के पास जा रही थीं। इतने लंबे समय तक इलाज के दौरान डॉक्टर को मरीज की मजहबी पहचान का पता न चलना असंभव सा लगता है। यदि डॉक्टर पूर्वाग्रही होतीं, तो शुरुआत से ही इलाज करने से इनकार कर देतीं। खातून का कहना है कि डॉक्टर को उसके उपनाम के बारे में हाल ही में जानकारी मिली और तभी से उनके व्यवहार में बदलाव आया।
दिलचस्प बात यह है कि यह खुलासा पहलगाम आतंकी हमले के दो दिन बाद हुआ। उसके मुताबिक, गुरुवार (24 अप्रैल, 2025) को डॉक्टर ने उसका इलाज करने से मना कर दिया, जिसके बाद 25 अप्रैल को उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। हालाँकि, जब जाँच शुरू हुई और तथ्य सामने आए, तो उसके आरोपों की बुनियाद कमजोर पड़ गई।
डॉक्टर को महिला के पूरे नाम से ही जा रहा था पेमेंट, देख सकते हैं सरनेम
कोलकाता के प्रसिद्ध एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ प्रमोद रंजन रॉय ने गुरुवार (24 अप्रैल 2025) को सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें दिखाया गया था कि कंगकोना खातून ने डॉ चंपाकली सरकार को परामर्श शुल्क का भुगतान किया था। यह स्क्रीनशॉट उसी दिन का था जिस दिन खातून ने आरोप लगाया था कि उनका उचित इलाज नहीं किया गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब किसी तरह का इलाज किया ही नहीं गया, तो मरीज ने डॉक्टर को जाँच के लिए परामर्श शुल्क क्यों अदा किया?
इस मुद्दे पर अब और भी स्पष्टता आ गई है। मंगलवार, (29 अप्रैल, 2025) को ‘पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम’ (WBDF) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि उन्होंने डॉ चंपाकली सरकार द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा की है, और उस समीक्षा के आधार पर उनके बयान को सही और विश्वसनीय माना है।
WBDF द्वारा प्रेस विज्ञप्ति
WBDF ने अपने बयान में कहा, “संबंधित डॉक्टर से सीधे संपर्क करने और तथ्यों की पुष्टि करने के बाद, हमने पाया कि बताए गए तथ्य प्रसारित किए जा रहे आरोपों के विपरीत हैं। वास्तव में, जिस मरीज़ की बात हो रही है, उसे मरीज़ के अनुरोध पर डॉक्टर ने उसके घर पर देखा था। सबूत के तौर पर, हमने परामर्श शुल्क की ऑनलाइन भुगतान रसीद की पुष्टि की है, जिस पर उचित समय और दिनांक अंकित है, जो बताता है कि परामर्श वास्तव में हुआ था।” WBDF के बयान ने कंगकोना खातून के झूठ की हवा निकाल दी।
यह बताया गया है कि खातून ने डॉ चंपक और सरकार के बीच एक निजी बातचीत सुनी थी, जो उनके खातून से संबंधित नहीं थी।
इसमें यह भी बताया गया है कि पहले भी डॉक्टरों को झूठे आरोपों के तहत इसी तरह निशाना बनाया गया है। ऑपइंडिया ने इस मामले को लेकर ‘पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम’ (WBDF) के सदस्य डॉ. कौशिक चाकी से संपर्क किया, जिन्होंने प्रेस विज्ञप्ति की प्रामाणिकता की पुष्टि की।
डॉ चंपाकली सरकार का क्या कहना है
डॉ प्रमोद रंजन रॉय द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पीड़िता डॉ चंपाकली सरकार ने अपना बयान दिया है।
उन्होंने अपने बयान में लिखा, “मैं डॉ CK सरकार हूँ। मैं पिछले 30 सालों से बेहाला, साउथ 24 परगना में प्रैक्टिशनर हूँ। मैं मेडिकल नैतिकता में विश्वास रखती हूँ। मेरे लिए सभी मरीज एक समान हैं। मैं अपने सभी मरीजों को समान प्राथमिकता देती हूँ। मेरी नजर में जाति, धर्म और नस्ल का कोई महत्व नहीं है। मैं मरीजों का सही और नैतिक तरीके से इलाज करने की पूरी कोशिश करती हूँ। कुछ लोगों को मुझसे दिक्कत थी। आप लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। मेरे करियर को बर्बाद करने की कोशिश की गई है। मुझे सोशल मीडिया और न्यूज रिपोर्ट से जानकारी मिली है। संकट के समय में इस तरह की अफवाहें फैलाई जाती हैं। मुझे उम्मीद है कि आप लोग इस पर विश्वास नहीं करेंगे।”
साथ ही, डॉक्टर ने निजी कारणों से अपने 3 दशक लंबे करियर को बर्बाद करने की कोशिश करने के लिए खातून के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात भी कही है।
डॉ चंपाकली सरकार ने ‘द टेलीग्राफ’ को बताया, “मेरे 80 प्रतिशत मरीज़ मुस्लिम हैं। क्या मैं कुछ ऐसा कहूँगी जिससे मुझे सबसे ज़्यादा दुःख पहुँचे? मैंने परनाश्री पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज कराई है कि मुझे बदनाम किया जा रहा है।”
डॉक्टर ने यह भी कहा की यह असत्यापित ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग फ़र्जी है। उन्होंने ‘द क्विंट’ से कहा, “नहीं, यह सब फ़र्ज़ी है, यह मेरी कॉल रिकॉर्डिंग नहीं है।”
यह हिंदू समुदाय को बदनाम करने का पहला प्रयास नहीं है। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद, ऐसी साजिशों की कोशिश हुई हैं जिनका इस्तेमाल आकर आतंकी हमलों के पीछे मजहबी घृणा वाली वास्तविकता से ध्यान बँटाया जा सके, कश्मीरियों और मुस्लिमों को हिन्दुओं द्वारा निशाना बनाए जाने की झूठी कहानी गढ़ी जा सके।
इस रणनीति के तहत ‘मुस्लिम पीड़ित’ कार्ड का इस्तेमाल किया गया, ताकि बहस का केंद्र आतंकवाद से हटकर सांप्रदायिक पीड़ाओं की ओर मोड़ा जा सके। इसी सिलसिले में, एक और फ़र्ज़ी खबर सोशल मीडिया पर फैलाई गई, जिसमें दावा किया गया कि बेंगलुरु में एक मुस्लिम कॉर्पोरेट कर्मचारी की मौत उसके हिंदू सहकर्मियों द्वारा ‘गायत्री मंत्र’ ज़बरदस्ती जपवाने और पहलगाम हमले पर प्रतिक्रिया न देने के कारण हुई।
इस फर्जी खबर का पर्दाफाश ऑपइंडिया ने किया। यह कहानी मूल रूप से एक लिंक्डइन यूजर इशान सक्सेना की मनगढ़ंत पोस्ट पर आधारित थी, जिसे तथाकथित पत्रकार अलीजा नूर ने बिना किसी तथ्य की जाँच के रिपोर्ट किया। इस खबर को वामपंथी मीडिया प्लेटफॉर्म ‘द क्विंट‘ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया, लेकिन जब सच्चाई सामने आई, तो बिना किसी माफ़ीनामे के चुपचाप हटा दिया गया। यह दिखाता है कि किस तरह तथ्यों की पुष्टि किए बिना ‘नैरेटिव’ गढ़ने की कोशिश की जाती है, और जब वो फिट नहीं बैठती, तो उसे दबा दिया जाता है।
'Journalist' at @TheQuint deletes her X & Instagram account days after being exposed for peddling fake news.
Aliza Noor had published the fake story of 'assault' on a Muslim corporate worker in Bengaluru for not commenting on Pahalgam terror attack & not chanting Gayatri Mantra pic.twitter.com/T6b0Z2VFW9
— Dibakar Dutta (দিবাকর দত্ত) (@dibakardutta_) April 29, 2025
नूर, जिन्होंने पहले कोलकाता के डॉक्टर की कहानी लिखी थी, अब ताज़ा खुलासे के बाद अपने एक्स (Twitter) और इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर चुकी हैं। इसी प्रोपेगेंडा तंत्र ने जामिया मिलिया इस्लामिया की एक कश्मीरी छात्रा के साथ छेड़छाड़ की घटना को भी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया था। लेकिन जब बाद में मामला सामने आया कि आरोपित मेवात का मोहम्मद आबिद है, तो यह पूरा नैरेटिव अचानक शांत हो गया।