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कश्मीर से लेकर कंधार तक का भारतीय सेना ने लिया बदला, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बड़े-बड़े आतंकी निपटाए: जानें मसूद अजहर के भाई समेत कौन-कौन सा दहशतगर्द हुआ ढेर

भारतीय सेना ने बुधवार (7 मई 2025) को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के बड़े आतंकी मारे गए। खुफिया जानकारी के आधार पर सुबह 1:30 बजे किए गए इस ऑपरेशन ने आतंकी संगठनों को बड़ा झटका दिया। मारे गए आतंकियों में मसूद अजहर का भाई अब्दुल रऊफ अजहर और लश्कर का कमांडर अबू जुंदाल जैसे खूंखार नाम शामिल हैं। आइए, जानते हैं मारे गए 5 बड़े आतंकियों के बारे में।

मुदस्सर खादियान खास उर्फ अबू जुंदाल

मुदस्सर लश्कर-ए-तैयबा का बड़ा कमांडर था। वह मुरीदके में लश्कर के हेडक्वार्टर मरकज तैयबा का इंचार्ज था। इस आतंकी को पाकिस्तानी सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उसकी अंतिम नमाज एक सरकारी स्कूल में हुई, जिसमें जमात-उद-दावा के हाफिज अब्दुल रऊफ ने अगुवाई की। पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने उसके लिए फातिहा पढ़ी।

हाफिज मुहम्मद जमील

हाफिज मुहम्मद जमील जैश-ए-मोहम्मद का अहम सदस्य और मसूद अजहर का साला था। वह बहावलपुर में जैश के मरकज सुभान अल्लाह का प्रभारी था। जमील युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकी तैयार करता था और संगठन के लिए पैसा जुटाता था। इस हमले में उसका ठिकाना पूरी तरह तबाह हो गया।

मोहम्मद यूसुफ अजहर

मोहम्मद यूसुफ अजहर, जिसे उस्ताद जी या घोसी साहब भी कहते थे, जैश का कमांडर और मसूद अजहर का साला था। वह आतंकियों को हथियारों की ट्रेनिंग देता था। जम्मू-कश्मीर में कई हमलों में शामिल यूसुफ को IC-814 विमान अपहरण मामले में भारत तलाश रहा था।

खालिद उर्फ अबू अकाशा

खालिद लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी था, जो जम्मू-कश्मीर में कई हमलों में शामिल था। वह अफगानिस्तान से हथियारों की तस्करी करता था। उसका अंतिम संस्कार फैसलाबाद में हुआ, जिसमें पाक सेना के बड़े अधिकारी और फैसलाबाद के डिप्टी कमिश्नर शामिल हुए।

मोहम्मद हसन खान

मोहम्मद हसन खान जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी और मुफ्ती असगर खान कश्मीरी का बेटा था। वह PoK में जैश के ऑपरेशनल कमांडर के तौर पर जम्मू-कश्मीर में हमलों की साजिश रचता था। इस हमले में वह भी मारा गया।

इस बीच, भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें भारतीय सैनिक चुन-चुन कर आतंकी ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। भारतीय सेना के सटीक निशानों से आतंकी ढाँचे नेस्तनाबूद हो गए। इस कार्रवाई से पाकिस्तान और उसके पाले आतंकियों में खलबली मच गई है।

कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया, “भारत ने 8 मिलिट्री ठिकानों पर हमला किया। इनमें पाकिस्तानी एयरबेस, हथियार डिपो शामिल हैं।” इससे पहले BSF ने वीडियो जारी कर बताया कि शुक्रवार की देर रात पाकिस्तान के सियालकोट में लूनी स्थित आतंकी लॉन्चपैड तबाह कर किया गया।

यह ऑपरेशन पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें हिंदुओं का नरसंहार किया गया।

मल्लिकार्जुन खड़गे, राकेश टिकैत, नेहा सिंह राठौर, ध्रुव राठी, अविमुक्तेश्वरानंद… याद कर लीजिए वे 5 नाम, जिनके बयान दुनिया को दिखा भारत को बदनाम कर रहा पाकिस्तान

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के साथ पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार किया। इस कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तानी फौज ने अब भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें भारत के कुछ नेताओं, इन्फ्लुएंसर्स और आम लोगों के बयानों को शामिल किया गया है। यह वीडियो 60 देशों के राजदूतों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने पेश किया गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमलों के बाद सरकार पर शिकंजा कसने के लिए पूरी मोदी विरोधी टोली एक साथ आ गई। एक्शन लेने के लिए बड़े बड़े सवाल किए गए, सरकार पर ताने मारे गए। कईयों ने तो ये तक कह डाला कि सरकार ने ही अपने लोगों पर हमला करवाया है। अब जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए भारत ने पाकिस्तान पर एक्शन लेना शुरू कर दिया है तो इस टोली को साँप सूँघ गया है।

पाकिस्तानी फौज का दावा है कि यह वीडियो भारत की ‘असली तस्वीर’ दिखाता है। इसमें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तथाकथित किसान नेता राकेश टिकैत, यूट्यूबर ध्रुव राठी, गायिका नेहा सिंह राठौर और शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद के बयान शामिल हैं। ये बयान पहलगाम हमले के बाद सरकार की आलोचना में दिए गए थे। कुछ ने सरकार पर सवाल उठाए, तो कुछ ने यह तक कहा कि हमला सरकार की साजिश था। पाकिस्तानी फौज ने इन बयानों को भारत के खिलाफ हथियार बनाकर दुनिया के सामने पेश किया है।

पहलगाम हमले के बाद भारत में सरकार से जवाबदेही की माँग उठी थी। विपक्षी नेताओं और कुछ इन्फ्लुएंसर्स ने सरकार पर तीखे हमले किए। लेकिन जब भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, तो इन आलोचकों की बोलती बंद हो गई। पाकिस्तानी फौज ने मौके का फायदा उठाते हुए इन बयानों को वीडियो में जोड़ा और दावा किया कि भारत के अपने लोग ही सरकार के खिलाफ हैं।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर लोगों में गुस्सा है। यूजर्स का कहना है कि सरकार की आलोचना करना अलग बात है, लेकिन देश की एकता और सुरक्षा के समय इस तरह के बयान देना गलत है। कई लोगों ने ध्रुव राठी, नेहा सिंह राठौर और राकेश टिकैत पर देश को कमजोर करने का आरोप लगाया। एक यूजर ने लिखा, “ये लोग देश के मुश्किल वक्त में दुश्मन को ताकत दे रहे हैं।”

इसी बात का फायदा पाक फौज भी दुनिया के सामने उठाना चाहती है। फौजी अधिकारी वीडियो में कहते हुए सुने जा सकते हैं कि ये सभी भारतीय लोग हैं जो मुल्क की असलियत सामने रख रहे हैं।

‘पंजाब में भारत दाग रहा मिसाइलें’: खुद के ड्रोन-मिसाइल फुस्स, सिखों को भड़काने की कोशिश… जानिए कैसे खालिस्तानी आतंकियों को आगे कर रचता है साजिश

पाकिस्तान और भारतके बीच कई युद्ध, सीमा पर झड़पें और आतंकवादी गतिविधियाँ होती रही हैं। लेकिन इन सबके बीच पाकिस्तान की एक ऐसी साजिश है, जो खुलेआम कम दिखती है, पर अंदर ही अंदर भारत को कमजोर करने की कोशिश करती है – यह है खालिस्तानी एजेंडे को हवा देना।

बीते 9-10 मई 2025 की रात को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के तीन हवाई ठिकानों – रावलपिंडी में नूर खान, चकवाल में मुरिद और पंजाब प्रांत के झांग जिले में रफीकी पर जवाबी हमला किया। यह हमला पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों का जवाब था।

इसके बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी पुरानी चाल चली और सिख समुदाय को भारत के खिलाफ भड़काने की कोशिश शुरू कर दी। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि कैसे पाकिस्तान खालिस्तानी अलगाववादियों को मोहरा बनाकर भारत में अराजकता और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद।

पाकिस्तानी सेना ने सिखों को लेकर किया बकवास दावा

9-10 मई 2025 की रात को भारत ने पाकिस्तान के आक्रामक रवैये का करारा जवाब दिया। पाकिस्तान ने भारत पर कई बार ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले करने की कोशिश की थी, जिनमें से एक मिसाइल, फतेह-II, नई दिल्ली को निशाना बनाने की कोशिश में थी। यह मिसाइल हरियाणा के सिरसा में भारतीय सेना ने मार गिराई। इसके बाद भारत ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के तीन प्रमुख हवाई ठिकानों को तबाह कर दिया।

इस हमले से पाकिस्तान बौखला गया। जवाब में पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक बेतुका दावा किया। उसने कहा कि भारत ने पंजाब के आदमपुर हवाई अड्डे से छह बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से एक आदमपुर में ही गिरी और बाकी पाँच सिखों के पवित्र शहर अमृतसर में गिरीं। यह दावा इतना हास्यास्पद था कि इसे कोई तथ्य आधारित विश्लेषण खारिज कर देता। इसका मकसद साफ था – सिख समुदाय, खासकर खालिस्तानी समर्थकों को भारत के खिलाफ भड़काना और यह दिखाना कि भारत सिखों को निशाना बना रहा है।

पाकिस्तान का यह झूठा प्रचार सिख समुदाय को भावनात्मक रूप से उकसाने की कोशिश थी। अमृतसर सिखों का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है, जहाँ स्वर्ण मंदिर जैसे पवित्र स्थल हैं। पाकिस्तान ने सोचा कि इस तरह के दावे से सिखों में भारत सरकार के खिलाफ गुस्सा भड़केगा और वे पाकिस्तान का साथ देंगे। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने ऐसी चाल चली है। दशकों से वह सिखों को भारत के खिलाफ भड़काने की कोशिश करता रहा है और ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह कोशिश और तेज हो गई है।

खालिस्तान एजेंडे की शुरुआत से ही जुड़ी हैं पाकिस्तानी साजिश की जड़ें

खालिस्तान एजेंडे की शुरुआत 1947 के बंटवारे के समय से मानी जा सकती है, जब सिख समुदाय का एक छोटा सा हिस्सा चाहता था कि पंजाब में एक अलग सिख राष्ट्र बने। लेकिन यह माँग उस समय ज्यादा जोर नहीं पकड़ सकी। 1970 के दशक में यह एजेंडा फिर से उभरा, और इसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का बड़ा हाथ था।

साल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान को करारी हार मिली। इस युद्ध में पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बन गया। इस हार का बदला लेने के लिए पाकिस्तान के तत्कालीन नेता जुल्फिकार अली भुट्टो ने खालिस्तान एजेंडा को हवा देने की साजिश रची।

साल 1993 में इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में खालिस्तानी नेता जगजीत सिंह चौहान ने खुलासा किया था कि पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने उनके साथ मिलकर खालिस्तान एजेंडा को शुरू करने की योजना बनाई थी। चौहान ने बताया कि भुट्टो ने ननकाना साहिब को खालिस्तान की राजधानी बनाने का प्रस्ताव रखा था। यह वही समय था जब भुट्टो भारत के साथ शांति वार्ता की बात कर रहे थे। इस दोहरे खेल से साफ है कि पाकिस्तान की मंशा भारत को अंदर से कमजोर करने की थी।

1980 के दशक में खालिस्तान एजेंडा हिंसक रूप ले चुका था। जरनैल सिंह भिंडराँवाले जैसे नेताओं ने सिख युवाओं को भारत सरकार के खिलाफ भड़काना शुरू किया। इस दौरान पंजाब में आतंकवादी गतिविधियाँ चरम पर थीं। लेकिन यह हिंसा अपने आप नहीं फैली। पाकिस्तान की आईएसआई ने खालिस्तानी आतंकवादियों को हथियार, ट्रेनिंग और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराए। बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान कमांडो फोर्स जैसे संगठनों के नेता पाकिस्तान में बैठकर भारत में आतंक फैलाने की साजिश रचते थे।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की नई चाल

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अपनी साजिश को और तेज कर दिया। उसने न सिर्फ सैन्य प्रवक्ताओं के जरिए झूठे दावे किए, बल्कि अपने नागरिकों, खासकर मशहूर हस्तियों को भी इस प्रचार में शामिल किया। पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहम्मद यूसुफ ने एक ट्वीट में दावा किया, “आरएसएस समर्थित बीजेपी सरकार एक आतंकवादी संगठन से कम नहीं है। यह अपने पड़ोसियों में डर फैलाती है, अपने नागरिकों, खासकर सिखों और मुसलमानों, पर अत्याचार करती है और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए फर्जी हमले करवाती है।” इस तरह के बयान सिखों और मुसलमानों को एकजुट दिखाकर भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश हैं।

पाकिस्तान की यह साजिश सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। उसने अपने मीडिया और यूट्यूब चैनलों के जरिए भी सिखों को भड़काने की कोशिश की। उदाहरण के लिए खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि अगर पाकिस्तान खालिस्तान का समर्थन करे, तो पंजाब के सिख भारतीय सेना को पाकिस्तान पर हमला करने से रोक देंगे। यह बयान साफ दिखाता है कि पाकिस्तान खालिस्तानी नेताओं को भारत के खिलाफ मोहरा बना रहा है।

करतारपुर साहिब के नाम पर झूठ परोसता है पाकिस्तान

पाकिस्तान ने पहले भी पवित्र सिख स्थलों का इस्तेमाल सिखों को भड़काने के लिए किया है। साल 2019 में करतारपुर कॉरिडोर के खुलने से सिख तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान में गुरुद्वारा दरबार साहिब जाने की सुविधा मिली। यह एक ऐतिहासिक कदम था, लेकिन पाकिस्तान ने इसका इस्तेमाल अपने प्रचार के लिए किया।

कॉरिडोर के उद्घाटन के ठीक बाद, पाकिस्तानी अधिकारियों ने एक प्रदर्शनी लगाई, जिसमें दावा किया गया कि 1971 के युद्ध में भारतीय वायुसेना ने गुरुद्वारे पर बम गिराया था, जो एक पवित्र कुएँ में गिरकर निष्क्रिय हो गया। इस दावे का कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं था, फिर भी पाकिस्तान ने इसे ‘वाहेगुरु का चमत्कार’ बताकर सिखों की भावनाओं को भड़काने की कोशिश की।

भारत ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया, लेकिन पाकिस्तान ने इस तरह के झूठे प्रचार को जारी रखा। 2019 में भारत ने पाकिस्तान को एक 23 पेज का डोजियर सौंपा, जिसमें 30 ऐसे मामले दर्ज थे, जहाँ सिख तीर्थयात्रियों को खालिस्तानी प्रचार सामग्री दी गई। करतारपुर कॉरिडोर के जरिए पाकिस्तान ने सिख तीर्थयात्रियों को खालिस्तानी विचारधारा से प्रभावित करने की कोशिश की। यह साफ करता है कि पाकिस्तान का मकसद सिर्फ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि सिखों को भारत के खिलाफ भड़काना भी था।

खालिस्तानी आतंकवादियों का पाकिस्तान प्रेम

पाकिस्तान ने हमेशा खालिस्तानी आतंकवादियों को शरण दी है। सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) संगठन चलाने वाले आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू को पाकिस्तान का खुला समर्थन मिलता है। एसएफजे भारत में प्रतिबंधित है और इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। लेकिन पाकिस्तान में इस संगठन को खुली छूट है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, एसएफजे की वेबसाइट्स का डोमेन कराची की एक वेबसाइट से जुड़ा है।

पन्नू के अलावा, कई अन्य खालिस्तानी आतंकवादी पाकिस्तान में शरण ले चुके हैं। साल 2023 में कनाडा के गैंगवार में मारे गए हरदीप सिंह निज्जर ने 2013 में पाकिस्तान का दौरा किया था और वहाँ खालिस्तानी आतंकवादी जगतार सिंह तारा से मिला था। तारा को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हुई थी। 2004 में उसने जेल से सुरंग खोदकर भागने के बाद पाकिस्तान में शरण ली थी।

इसी तरह 1981 में इंडियन एयरलाइंस के विमान अपहरण के लिए जिम्मेदार दल खालसा के सह-संस्थापक गजिंदर सिंह को भी पाकिस्तान में शरण मिली। गजिंदर और उसके साथियों ने भिंडराँवाले की रिहाई और 5 लाख डॉलर की माँग के साथ दिल्ली से अमृतसर जा रहे विमान को लाहौर की ओर मोड़ दिया था। पाकिस्तान ने इस मामले में मुकदमा चलाया और अपहरणकर्ताओं को उम्रकैद की सजा दी, लेकिन 1994 में उसे रिहा कर दिया गया। भारत ने कई बार गजिंदर सिंह को प्रत्यर्पित करने की माँग की, लेकिन पाकिस्तान ने हमेशा यह कहकर इंकार किया कि वह उनके देश में नहीं है।

पाकिस्तान की ‘ब्लीड इंडिया’ साजिश

पाकिस्तान की ‘ब्लीड इंडिया’ साजिश का मकसद भारत को छोटे-छोटे घाव देकर कमजोर करना है। खालिस्तान एजेंडा इस साजिश का एक बड़ा हथियार रहा है। पंजाब भारत का एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है, जो पाकिस्तान के साथ एक लंबी और अस्थिर सीमा साझा करता है। पाकिस्तान ने दशकों से इस राज्य को अस्थिर करने की कोशिश की है। उसने क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद को समर्थन दिया, खालिस्तानी विद्रोह को बढ़ावा दिया और नशीले पदार्थों व हथियारों की तस्करी के नेटवर्क को चलाया।

1980 के दशक में पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद अपने चरम पर था। इस दौरान हजारों लोग मारे गए, और राज्य में अराजकता फैल गई। लेकिन यह हिंसा अपने आप नहीं फैली। पाकिस्तान की आईएसआई ने खालिस्तानी आतंकवादियों को हथियार, धन और ट्रेनिंग दी। बब्बर खालसा, खालिस्तान लिबरेशन फोर्स जैसे संगठनों के नेता पाकिस्तान में बैठकर भारत में आतंक फैलाने की साजिश रचते थे।

सिख-मुस्लिम एकता का ढोंग

पाकिस्तान की एक नई चाल है सिखों और मुसलमानों को एक साथ जोड़कर भारत के खिलाफ माहौल बनाना। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह साजिश और तेज हो गई। मोहम्मद यूसुफ जैसे पाकिस्तानी हस्तियों ने सिखों और मुसलमानों को एकजुट दिखाने की कोशिश की। कुछ वायरल वीडियो में मुस्लिम लोग सिख पगड़ी पहनकर विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए, जबकि कुछ सिखों को मस्जिदों में नमाज पढ़ते दिखाया गया। यह सब एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है, जिसके तहत पाकिस्तान सिखों को यह विश्वास दिलाना चाहता है कि उनकी लड़ाई मुसलमानों के साथ मिलकर लड़ी जा सकती है।

लेकिन यह एक ढोंग है। पाकिस्तान में सिख अल्पसंख्यक हैं और उन्हें कई बार धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। 2018 में पेशावर में एक सिख व्यक्ति की हत्या और 2022 में कराची में एक गुरुद्वारे पर हमला इसके उदाहरण हैं। पाकिस्तान का यह दावा कि वह सिखों का हितैषी है, सिर्फ एक प्रचार है।

झूठे प्रचार की पाकिस्तान की आदत पुरानी

पाकिस्तान की सरकार और सेना ने हमेशा भारत के खिलाफ झूठा प्रचार किया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का दावा कि भारत ने अमृतसर पर मिसाइलें दागीं, इसकी ताजा मिसाल है। इससे पहले, 2016 में पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्री सरदार मोहम्मद यूसुफ ने ननकाना साहिब में एक कार्यक्रम में दावा किया था कि भारत सिखों और कश्मीरियों को ‘गुलाम’ की तरह रखता है। ऐसे बयान सिख तीर्थयात्रियों को भारत के खिलाफ भड़काने के लिए दिए जाते हैं।

यह सच है कि 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार और उसके बाद हुए सिख विरोधी दंगे सिख समुदाय के लिए एक बड़ा आघात थे। इन घटनाओं ने कुछ सिखों में भारत सरकार के प्रति नाराजगी पैदा की। लेकिन यह कहना गलत होगा कि सिख समुदाय भारत से अलग होना चाहता है। पंजाब में 95% से ज्यादा सिख खुद को गर्व से भारतीय मानते हैं। सिख समुदाय ने भारत की सेना, संस्कृति और अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दिया है। पाकिस्तान की साजिशों के बावजूद, सिख समुदाय ने बार-बार एकता का परिचय दिया है।

पाकिस्तान का सपना हमेशा रहेगा अधूरा

पाकिस्तान की खालिस्तानी साजिश कोई नई बात नहीं है। 1971 की हार के बाद से ही वह सिखों को भारत के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह कोशिश और तेज हो गई है। करतारपुर साहिब जैसे पवित्र स्थानों का दुरुपयोग, झूठा प्रचार, खालिस्तानी आतंकवादियों को समर्थन और सिख-मुस्लिम एकता का ढोंग – ये सब पाकिस्तान की उस साजिश का हिस्सा हैं, जिसका मकसद भारत को अस्थिर करना है।

लेकिन सिख समुदाय की देशभक्ति और भारत की एकता ने हर बार इन साजिशों को नाकाम किया है। सिख समुदाय भारत का अभिन्न हिस्सा है, और उसकी वीरता और समर्पण ने हमेशा देश को गौरवान्वित किया है। पाकिस्तान का यह सपना कि वह सिखों को भारत के खिलाफ खड़ा कर देगा, कभी पूरा नहीं होगा। भारत की ताकत उसकी विविधता में है, और सिख समुदाय इस ताकत का अहम हिस्सा है।

जरूरत है कि हम सब इस साजिश को समझें और एकजुट होकर इसका जवाब दें। पाकिस्तान की हर चाल को बेनकाब करना और सिख समुदाय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना हमारी जिम्मेदारी है। भारत की एकता और अखंडता को कोई भी ताकत कमजोर नहीं कर सकती, चाहे वह पाकिस्तान हो या उसके समर्थित खालिस्तानी।

पाकिस्तानी आतंकवाद को IMF ने ₹8500 करोड़ से सींचा, भारत के ‘पाकिस्तानपरस्त’ अपनी ही सरकार को करने लगे बदनाम: राजदीप सरदेसाई-कॉन्ग्रेस गठबंधन कर रहा जो प्रोपेगेंडा, जानिए उसका सच

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने शुक्रवार (9 मई 2025) को पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने के लिए ₹8,500 करोड़ की मंजूरी दी है। इसके बाद कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश और इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भारत सरकार पर हमला बोला है।

जयराम रमेश ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने पहले ही माँग की थी कि भारत आईएमएफ में पाकिस्तान को कर्ज देने का विरोध करे, लेकिन मोदी सरकार ‘डर’ गई और उसने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि अगर भारत ‘नहीं’ में वोट करता तो यह एक मजबूत संदेश होता।

वहीं पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी भारत सरकार के बारे में गलत जानकारी को आगे बढ़ाया और सवाल किया कि भारत ने आईएमएफ मीटिंग में पाकिस्तान को दिए जाने वाले कर्ज के खिलाफ वोट क्यों नहीं किया। सरदेसाई ने 9 मई 2025 को एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “भारत ने आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड की बैठक में पाकिस्तान को दिए जाने वाले कर्ज के लिए वोटिंग से किनारा किया है। सवाल: हमने इस्लामाबाद के खिलाफ वोट क्यों नहीं किया, जबकि इसमें हमारे हित जुड़े हुए थे?”

सोशल मीडिया पर भी आईएमएफ द्वारा पाकिस्तान को कर्ज देने का विरोध किया जा रहा है। कुछ यूजर्स आईएमएफ को आतंकवाद की मदद करने वाली संस्था बता रहे है और इसी के साथ #IMFSupportsTerrorism, #IMFSupportsTerrorist, #ShameOnIMF जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

भारत ने शुक्रवार (9 मई 2025) को IMF की बैठक में पाकिस्तान को और ज्यादा पैसे देने का खुलकर विरोध किया था। भारत ने कहा कि पाकिस्तान का पिछला रिकॉर्ड अच्छा नहीं है और जो भी पैसा दिया जाएगा, उसका इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया जा सकता है।

आईएमएफ की बैठक में पाकिस्तान को ₹8,500 करोड़ का नया कर्ज देने के प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, जिसमें भारत ने हिस्सा नहीं लिया। भारत ने बताया कि पिछले 35 सालों में से 28 साल पाकिस्तान को IMF से मदद मिली है, लेकिन फिर भी वहाँ कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है।

भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तानी फौज का देश के आर्थिक मामलों में बहुत ज्यादा दखल है, जिससे सुधार करना मुश्किल है। भारत ने ऐसे देश को पैसा देने पर आपत्ति जताई जो आतंकवाद को बढ़ावा देता है। भारत ने चेतावनी दी कि ऐसा करने से आईएमएफ जैसे बड़े संस्थानों की बदनामी हो सकती है और दुनिया के नियमों का मजाक उड़ सकता है।

आईएमएफ के नियमों के तहत, सदस्य देश सीधे तौर पर किसी देश को कर्ज देने के प्रस्ताव के खिलाफ वोट नहीं कर सकते हैं। वे या तो इसके पक्ष में वोट कर सकते हैं या वोटिंग से दूर रह सकते हैं। भारत ने इसी नियम के तहत वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया और अपनी असहमति दर्ज कराई।

जम्मू के शंभू मंदिर के भीतर नहीं घुस पाई पाकिस्तानी मिसाइल, दरवाजे पर ही हुए टुकड़े: दिल्ली को दहलाने की कोशिश भी नाकाम, भारतीय सेना ने सिरसा में ही ‘फतेह-2’ को मार गिराया

शुक्रवार (9 मई 2025) की रात अचानक एक खबर फैली कि पाकिस्तान ने दिल्ली एयरपोर्ट की तरफ फतेह-2 नाम की एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी है। इस खबर से लोगों में डर और गलत जानकारी फैलने लगी। इसकी पुष्टि दिल्ली एयरपोर्ट के अधिकारियों ने तुरंत की और इस खबर को गलत साथ ही गैर-जिम्मेदाराना बताया है।

उन्होंने लोगों से अपील की है, कि हमले से जुड़ी अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। इसके अलावा सही खबरों के लिए सिर्फ आधिकारिक सोर्स पर ही भरोसा करें। एयरपोर्ट पर उड़ानें सामान्य रूप से जारी रहीं और कामकाज में कोई रुकावट नहीं आई।

रक्षा सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान ने जो मिसाइल दागी थी, वह दिल्ली तक पहुँची ही नहीं। उसे हरियाणा के सिरसा के ऊपर ही भारत के हवाई सुरक्षा सिस्टम से मार गिराया गया है। इससे किसी भी आम नागरिक या जरूरी जगह को कोई खतरा नहीं हुआ।

पाकिस्तान माहौल खराब करने के लिए ऐसी झूठी अफवाह फैला रहा है। भारतीय सेना ने यह भी बताया कि नियंत्रण रेखा (LoC) पर ड्रोन की गतिविधियाँ और गोलाबारी भी बढ़ गई है।

सेना के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के कई ठिकानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन हर बार उनके हमले नाकाम कर दिए गए। कड़ी निगरानी और तैयारी की वजह से पंजाब और जम्मू में हमारे हवाई सुरक्षा सिस्टम ने दुश्मन के ड्रोन और दूसरे हवाई खतरों को मार गिराया।

जम्मू कश्मीर के आप शंभु मंदिर पर भी पाकिस्तान द्वारा हमले की खबर सामने आई है। ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने शंभु मंदिर के ठीक सामने गेट पर मिसाइल से हमले कर दिया। लेकिन फिलहाल किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं मिली है।

सोशल मीडिया पर भी एक वीडियो काफी वायरल हो रही है। शुकवार (9 मई 2025) को ही पाकिस्तान ने लगातार दूसरी रात जम्मू कश्मीर से लेकर गुजरात तक के 26 स्थानों पर ड्रोन से हमला किया। रक्षा मंत्रालय का दावा है कि हवाई अड्डों और वायुसेना ठिकानों किए गए हमलों को हवा में ही विफल कर दिया गया। इसकी वीडियो भी जारी हुई है। वीडियो में स्थान जम्मू कश्मीर बताया गया है और उधमपुर के डिब्बर इलाके से जोरदार धमाके के बाद धुआँ उठता दिखाई दे रहा है। इसके बाद हवाई सायरन बजाए गए।

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और जम्मू में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कुछ संवेदनशील इलाकों में रात के समय ब्लैकआउट के नियम लागू कर दिए गए हैं और निगरानी ड्रोन लगातार संदिग्ध इलाकों पर नजर रख रहे हैं।

हालाँकि, रक्षा अधिकारियों ने लोगों को विश्वाश दिलाया कि भारत के सभी हवाई ठिकाने सुरक्षित हैं और एयरपोर्ट समेत भीड़भाड़ वाले एरिया को किसी भी प्रकार का सीधा खतरा नहीं है।

जिन लॉन्चपैड से पाकिस्तान छोड़ रहा था ड्रोन और मिसाइल, भारत ने उन्हें ही उड़ाया: कम से कम 4 एयरबेस पर हमला; घबराए PM शहबाज शरीफ ने ‘परमाणु’ कमेटी संग की बैठक

भारतीय सेना की ओर से शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की लगातार कार्रवाई और हर रोज अपनी हार से पाकिस्तान बौखला गया है। शुक्रवार (9 मई 2025) की रात आतंकी मुल्क ने भारत के राजस्थान, गुजरात, पंजाब, जम्मू और कश्मीर के 26 शहरों पर ड्रोन से हमले किए। इसके जवाब में सेना ने न केवल ड्रोन्स मार गिराए बल्कि पाकिस्तान के ड्रोन और और आतंकी लॉन्च पैड भी ध्वस्त कर दिए। डिफेंस सोर्सेज ने इसका वीडियो भी जारी किया गया है।

इससे पहले 9 मई 2025 को भारतीय सेना ने अपनी जवाबी कार्रवाई में ड्रोन से हमला किया था। इसकी जद में पाक पीएम शहबाज शरीफ का लाहौर स्थित घर भी आया था। हालाँकि शरीफ उस समय इस्लामाबाद में थे।

पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमलों की जवाबी कार्रवाई में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। 7 मई 2025 की तड़के शुरू हुए इस मिशन में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके के 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान का लाहौर एयरबेस उड़ा दिया गया।

अपने ऊपर हुए एक्शन से आतंकी मुल्क तिलमिला गया। इसके बाद पाकिस्तान की और से जम्मू कश्मीर, पंजाब और गुजरात के कई शहरों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए गए। हालाँकि भारतीय सेना ने पूरी तैयारी कर रखी है। पाक के अब तक के सभी हमलों का अपने युद्ध कौशल और नई तकनीक से लैस भारतीय सेना ने बेहतर जवाब दिया है और कवच बन सीमा पर तैनात है।

शुक्रवार को भी एक बार फिर पाक ने भारतीय शहरों को निशाने पर लिया तो भारत ने अपना कड़ा रुख दिखला दिया। पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस, मुरीदके और शोरकोट में पाक वायुसेना के ठिकानों पर सेना ने हमला कर तबाह कर दिया है।

पाकिस्तान ने बंद किये पेट्रोल स्टेशन

भारत की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान डर और सकते में है। इसी के चलते इस्लामाबाद के सभी पेट्रोल स्टेशनों को अगले 48 घंटों तक बंद कर दिया गया। पाक ने ये फरमान शनिवार की अलसुबह 6 बजे ही जारी कर दिया।

इस्लामाबाद की ओर से जारी आदेश का स्क्रीनशॉट

पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने ये स्वीकार किया कि भारत ने उनके तीन वायुसेना ठिकानों को निशाना बनाया है। हालाँकि उन्होंने ये भी जोड़ा कि हमलों में पाकिस्तान की वायुसेना को कोई नुकसान नहीं हुआ और पाकिस्तान ने भी भारत के एस एक्शन का जवाब दिया है।

इसके बाद पाकिस्तान की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने 10 मई 2025 की सुबह 3:15 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक सभी उड़ानों को बंद करने की घोषणा कर दी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की लगातार जवाबी सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान की सरकार में काफी उथल पुथल मची हुई है। पाक पीएम शहबाज शरीफ ने अब परमाणु हथियार चलाने वाले कमांड की बैठक भी बुलाई है।

मंदिरों पर हमले, खालिस्तानी दे रहे हिन्दुओं को कनाडा छोड़ने की धमकी: ट्रूडो के हटने के बाद भी नहीं पड़ा कोई फर्क, कार्नी के शासन में भी जारी है हिन्दू घृणा

कनाडा के टोरंटो में रविवार (4 मई, 2025) को खालिस्तान समर्थकों ने एक हिंदू विरोधी परेड का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने खुलेआम कनाडा में रह रहे करीब 8 लाख हिंदुओं को देश से बाहर निकालने का आह्वान किया। यह परेड माल्टन गुरुद्वारे के बाहर आयोजित की गई थी और इसकी तीव्र आलोचना हुई। खालिस्तानियों ने यह ऐसे समय में किया है जब हाल ही में कनाडा में सत्ता परिवर्तन हुआ है और मार्क कार्नी को नया प्रधानमंत्री चुना गया है।

लिबरल पार्टी के भीतर जारी अंदरूनी कलह और जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व पर जनता के घटते भरोसे के चलते मार्क कार्नी ने लिबरल पार्टी के नेता के रूप में ट्रूडो की जगह ली थी। हालाँकि, शुरुआती संकेतों से ऐसा लग रहा है कि कार्नी सरकार भी ट्रूडो की तरह ही खालिस्तानियों पर नरम रहेंगे। इसमें कोई बदलाव की संभावना नहीं है।

खालिस्तानी परेड के दौरान पिंजरे में बंद दिखे थे भारतीय नेता

टोरंटो में आयोजित हिंदू विरोधी परेड के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर के पुतलों को हथकड़ियों और पिंजरे में बंद करके प्रदर्शित किया गया था। इनको देख के लगा कि खालिस्तान समर्थक भारतीय नेताओं का मखौल उड़ाना चाहते थे।

यह घटना जून 2023 में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की सरे, कनाडा में हत्या के बाद बढ़ती भारत विरोधी भावनाओं की एक कड़ी के रूप में देखी जा रही है। निज्जर की हत्या के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इसके लिए भारतीय एजेंटों को जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि, कनाडा इस पर कोई भी सबूत नहीं दे पाया है।

इस परेड में शामिल लोगों ने पंजाब को भारत से अलग कर सिखों के लिए खालिस्तान की माँग करते हुए नारे लगाए। हालाँकि इस तरह की रैलियाँ कनाडा में पहले भी होती रही हैं, लेकिन लिबरल पार्टी के नए नेता मार्क कार्नी के हाल ही में पदभार संभालने के ठीक बाद इस परेड का आयोजन गुस्से का कारण बना है।

इसने इस सवाल को भी जन्म दिया है कि क्या कार्नी भी ट्रूडो की तरह खालिस्तानी तत्वों के प्रति तुष्टिकरण की नीति अपनाएंगे या फिर कनाडा में खाद पानी पाने वाले खालिस्तानियों पर कोई कार्रवाई करेंगे।

इससे पहले एक खालसा परेड के दौरान खालिस्तानी आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा के कार्यकर्ता और अमृतपाल सिंह के मिलिशिया समूह आनंदपुर खालसा फोर्स (AKF) के सदस्य भी नजर आए। इस परेड में फ्लाइट AI-112 पर बम विस्फोट की साजिश में दोषी ठहराए गए बब्बर खालसा से जुड़े आतंकवादी संतोख सिंह खालसा को भी भाषण देते हुए देखा गया।

पत्रकारों और नागरिकों ने कार्नी की चुप्पी पर उठाए सवाल

परेड के वीडियो कनाडाई पत्रकार डैनियल बोर्डमैन ने साझा किए। उन्होंने इसे ‘हिंदू विरोधी घृणा’ का एक स्पष्ट उदाहरण बताया। एक्स (पहले ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “हमारी सड़कों पर उत्पात मचाने वाले जिहादी पहले ही सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा चुके हैं,और अब खालिस्तानी समाज उनके मुकाबले एक विदेशी-वित्तपोषित, वैसे ही खतरे के रूप में उभर रहा है। क्या मार्क कार्नी का कनाडा, जस्टिन ट्रूडो के कनाडा से अलग होगा?”

बोर्डमैन की यह टिप्पणी शॉन बिंदा की एक पोस्ट के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने बताया कि टोरंटो के माल्टन गुरुद्वारे में खालिस्तानी गिरोह खुलेआम 8 लाख हिंदुओं को कनाडा से निर्वासित करने की माँग कर रहे हैं। शॉन ने लिखा, “यह भारत सरकार के खिलाफ कोई विरोध नहीं है, बल्कि खालिस्तानी आतंकवादी समूह की हिंदू विरोधी घृणा है, वही समूह जो कनाडा के सबसे घातक आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार रहा है, फिर भी यहाँ अहंकार से रहने के अधिकार का दावा कर रहा है।”

बिंदा द्वारा शेयर किए गए वीडियो में एक व्यक्ति कहते हुए सुनाई दे रहा है, “भारत कहता है कि कनाडा में उसके लिए कुछ नहीं बचा है। यह यहाँ रह रहे 8 लाख भारतीयों के लिए संदेश है, उन्हें वापस हिंदुस्तान ले जाओ।”

भारत नहीं हिन्दुओं के खिलाफ हैं खालिस्तानी

यह साफ़ है कि टोरंटो में आयोजित हालिया परेड भारत सरकार के खिलाफ कोई सामान्य राजनीतिक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह विशेष रूप से हिंदुओं को निशाना बनाकर किया गया आयोजन था। कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने यह दिखा दिया है कि नई सरकार आने के बाद भी उनकी भारत और हिंदू समुदाय के खिलाफ ज़हर फैलाने की गतिविधियाँ नहीं रुकी हैं।

भले ही कनाडा में राजनीतिक चैप्टर बदल गया हो, लेकिन उसकी नीति वैसी ही है। खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान का समर्थन करते हुए भारत के खिलाफ बयानबाज़ी की। थी इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटे, द रेजिस्टेंस फ्रंट ने 26 निर्दोष हिंदुओं की हत्या कर दी थी।

भारत ने इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई एक्शन लिए थे। इसके बाद पन्नू ने एक पाकिस्तानी चैनल पर कहा था कि यदि पाकिस्तान खुलकर खालिस्तान का समर्थन करता है, तो पंजाब के सिख भारतीय सेना को पंजाब से पाकिस्तान पर हमला नहीं करने देंगे।

कनाडा में खालिस्तानी तत्वों ने हाल के वर्षों में विभिन्न शहरों में कई हिंदू मंदिरों पर हमले किए हैं। वे मंदिरों की दीवारों पर भारत विरोधी और खालिस्तान समर्थक नारे भी लिखते हैं। नवंबर 2024 में ब्रैम्पटन में एक हिंदू मंदिर पर खालिस्तानी गुंडों द्वारा हमला किया गया था, इसके चलते ट्रूडो सरकार की काफी फजीहत हुई थी।

इन घटनाओं के कारण भारत सरकार के लिए आवश्यक हो गया है कि वह कनाडा सरकार पर दबाव बनाए, ताकि वह अपनी जमीन पर सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करे। ट्रूडो सरकार भारत के बार-बार किए जा रहे अनुरोधों के बावजूद इस मोर्चे पर विफल रही थी, इसका पीछे वोटबैंक की राजनीति रही थी।

अब जब कनाडा में नेतृत्व बदल गया है तो भारत मार्क कार्नी से अपेक्षा कर सकता है कि वह इस प्रकार की भारत विरोधी और हिंदू विरोधी घृणा के विरुद्ध सख्त कदम उठाएँ। हालाँकि, हाल ही में हुई परेड और उसमें शामिल गतिविधियों ने इस पर प्रश्न उठाए हैं कि क्या कार्नी सरकार वाकई इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई करेगी।

यह रिपोर्ट मूल रूप से अनुराग ने अंग्रेजी में लिखी है इसको पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

क्या भारत के एयर डिफेंस पावर की थाह ले रहा था पाकिस्तान? हमास स्टाइल में ड्रोन-मिसाइल अटैक का मकसद बेहद शातिराना

ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने गुरुवार (8 मई 2025) को जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान में हमास की स्टाइल में हमले किए। पाकिस्तानियों ने ड्रोन उड़ाए, मिसाइलें दागीं, तोपें गरजाईं। मगर भारत की फौज ने आँखें तरेरते हुए सारे हमले नाकाम कर दिए। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से 400-500 एयर अटैक सिर्फ हमले के लिए नहीं थे, बल्कि पाकिस्तान की ये चाल थी भारत की एयर डिफेंस को चेक करने की। यानी भारत का डिफेंस सिस्टम कितना और कहाँ प्रभावी है और कहाँ कमजोर।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की प्लानिंग ये देखने की थी कि पश्चिम की पूरी सीमा पर भारत किस तरह से मुस्तैद है। ये सब 7 मई 2025 को भारत के जबरदस्त ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुआ। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। वो कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हिंदुओं के नरसंहार के जवाब में की गई थी।

ऑपरेशन सिंदूर से तिलमिलाए पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ में गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें 16 लोग मरे। फिर उसने भारत के 15 फौजी ठिकानों पर हमले की कोशिश की, लेकिन सारी कोशिशें धरी रह गईं। उल्टा, लाहौर में उनका एक डिफेंस सिस्टम ही खराब हो गया।

पाकिस्तान ने क्या चक्कर चलाया?

रक्षा सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से गुरुवार (8 मई 2025) के हमले भारत की ताकत को टटोलने की चाल थी। पाकिस्तान ने 40 से ज्यादा जगहों पर हमले किए, लेकिन उनके ड्रोन और मिसाइलों में या तो बारूद था ही नहीं, या बहुत कमजोर था। एक सूत्र ने कहा, “दुश्मन ऐसा करके देखता है कि उसका ड्रोन कहाँ बिना पकड़े घुस जाता है। अगर ड्रोन वापस आ जाए, तो उन्हें लगता है कि वहाँ हमारा डिफेंस कमजोर है। अगर पकड़ा जाए, तो समझ जाते हैं कि हमारा सिस्टम टाइट है।”

बहरहाल, पाकिस्तान के हमलों के बाद भारत ने कोई मौका नहीं छोड़ा। हमारे ड्रोन सियालकोट, लाहौर और कराची जैसे बड़े ठिकानों पर मंडराए। डिफेंस सिस्टम चालू किए गए और नियंत्रण रेखा पर जमकर जवाबी फायरिंग हुई।

पाकिस्तान और हमास की दोस्ती

भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच एक तरफ ध्यान देना जरूरी हो जाता है, वो इस साल हमास के कुछ लोग पाकिस्तान और पीओके पहुँचे थे। उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर वाले अड्डे और पाकिस्तानी फौज के एक वॉर ट्रेनिंग सेंटर को देखा। ये सेंटर बहावलपुर कोर के नीचे है, जो राजस्थान की सीमा के पास पाकिस्तान का तेज हमला करने वाला दस्ता है।

यही वहीं, फरवरी में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के बड़े आतंकी रावलाकोट, पीओके में ‘कश्मीर सॉलिडेटरी डे’ के मौके पर जमा हुए थे। वहाँ हमास के एक नेता खालिद काद्दौमी ने ‘अल अक्सा फ्लड’ के नाम से भाषण भी दिया था। भारतीय एजेंसियों को शक है कि ये कश्मीर और फिलिस्तीन के मुद्दों को मिलाकर ‘कब्जे के खिलाफ जंग’ का नया ड्रामा रचने की कोशिश थी।

फौजी भाषा में पाकिस्तान की इस चाल को क्या बोलते हैं?

फौजी भाषा में टटोलना यानी ऐसा खेल, जिसमें दुश्मन की डिफेंस को चेक करने के लिए छोटे-मोटे हमले किए जाते हैं। मकसद जमीन जीतना नहीं, बल्कि उसकी ताकत-कमजोरी भाँपना होता है। इस बार पाकिस्तान शायद भारत के रडार की रेंज और जवाब देने की स्पीड को समझना चाहता था।

भले ही इन हमलों से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन मामला गंभीर है। अगर ये टटोलने की चाल थी, तो पाकिस्तान किसी बड़े हमले की प्लानिंग कर सकता है। भारत को हर वक्त चौकस रहना पड़ेगा।

36 जगह, 400 ड्रोन… तुर्की का ‘माल’ लेकर भारत से लड़ने आया था भिखमंगा पाकिस्तान, सारे हुए फुस्स: राडार स्टेशन उड़ाकर सेना ने दिया जवाब, प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीरांगनाओं ने बताया सब कुछ

पाकिस्तान ने 8-9 मई, 2025 की रात को भारत के कई शहरों पर हमला किया था। इसके लिए पाकिस्तान ने तुर्की के ड्रोन इस्तेमाल किए थे। पाकिस्तान के यह ड्रोन भारतीय सेनाओं ने नाकाम कर दिए। भारत ने भी जवाब में पाकिस्तान में 4 जगह हमला किया है। भारत ने पाकिस्तान में राडार भी उड़ा दिया है। यह सभी जानकारी विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी हैं।

शुक्रवार (9 मई, 2025) को विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया है कि पाकिस्तान ने 8-9 मई की रात को भारत के भीतर 300-400 जगह पर ड्रोन के माध्यम से घुसपैठ किया। भारत ने बताया है कि इसका उद्देश्य खुफिया जानकारी इकट्ठा करना और भारतीय सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुँचाना था।

कर्नल सोफिया कुरैशी ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ड्रोन के मलबे की जाँच की गई है। उन्होंने बताया कि यह तुर्की में बने हुए असीसगार्ड सोंगर ड्रोन हैं। भारत ने कहा है कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर से लेकर गुजरात में सर क्रीक तक हमला किया है। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने भटिंडा के सैन्य अड्डे को भी निशाना बनाया है।

कर्नल कुरैशी ने बताया है कि इन हमलों के जवाब में भारत ने भी पाकिस्तान के 4 एयर डिफेन्स सिस्टम पर हमले किए हैं। उन्होंने बताया कि इन 4 में से 1 जगह पर किया गया ड्रोन हमला सफल रहा है और पाकिस्तान के एक राडार को तबाह कर दिया है। पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस को आप नीचे लगे लिंक में देख सकते हैं।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान की हरकतें इस इलाके के हवाई क्षेत्र में खतरा पैदा कर रही हैं। भारत ने इसमें एक फ्लाईट का उदाहरण भी दिया है। भारत ने साफ़ कर दिया है कि पाकिस्तान ने जानबूझ कर भारत पर हवाई हमले किए हैं जिसके जवाब मिल सकते हैं।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कर दिया गया है कि पाकिस्तान की हरकत का स्पष्ट जवाब दिया जाएगा। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया है कि पाकिस्तान के हमले में जम्मू कश्मीर में एक गुरुद्वारे के ग्रंथी की मौत हो गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान लगातार हमलों को लेकर भ्रामक सूचनाएँ फैला रहा है, जिसका भारत लगातार जवाब दे रहा है।

दिल्ली में AAP के साफ होते ही ‘पवित्र’ होने लगी यमुना, कहीं कूड़ा निकाल रहीं मशीनें-कहीं सिल्ट हटा रही JCB: मिशन मोड में काम करवा रही BJP सरकार

8 फरवरी, 2025 को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आए। इन नतीजों में आम आदमी पार्टी (AAP) की करारी हार हुई। भाजपा इसी के साथ 26 वर्षों बाद सत्ता में लौटी। जब दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री आतिशी अपना इस्तीफा देने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को देने पहुँची तो उन्होंने कहा, “आपको यमुना मैया का श्राप लगा है।”

भाजपा ने दिल्ली चुनाव में यमुना की सफाई को बड़ा मुद्दा बनाया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर सभी नेताओं ने AAP की इस विफलता को हर रैली में गिनाया था। सरकार में आने के बाद भाजपा ने स्पष्ट कर दिया था कि वह यमुना सफाई को अपनी प्राथमिकता बनाएगी।

दिल्ली में सत्ता परिवर्तन को लगभग 3 महीने हो चुके हैं। इन 90 दिनों में यमुना की सफाई को लेकर कितना काम हुआ है, इसको जाँचने के लिए ऑपइंडिया ने दिल्ली में यमुना के घाटों और उन जगहों पर पहुँचे जहाँ पहले इसकी हालत बेहद खराब थी। ऑपइंडिया ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि आखिर दिल्ली सरकार यमुना सफाई पर क्या एक्शन ले रही है।

कालिंदी कुंज में मशीने-कर्मचारी सफाई में जुटे

ऑपइंडिया ने इस दौरान उन लोगों से बातचीत भी की जो सालों से यमुना के घाटों पर या तो रह रहे हैं या इससे जुड़े हुए हैं। ऑपइंडिया गुरूवार (8 मई, 2025) दोपहर को यमुना नदी के कालिंदी कुंज स्थित घाट पर पहुँचा। यहाँ यमुना दूर से काफी हद तक पहले की अपेक्षा साफ दिखाई दे रही थी।

यहाँ दूर से दिखने वाला यमुना का पानी घाट किनारे जाने पर थोड़ा गंदा दिखाई दे रहा था और कालिंदी कुंज के पुल से पहले लगे फाटक में कचरा दिखाई दे रहा। लेकिन यहीं आगे बढ़ने पर दिखा कि यमुना से कचरा बाहर निकालने के लिए एक मशीन घाट किनारे खड़ी थी।

कालिंदी कुंज घाट पर यमुना से कूड़ा निकलने के लिए मशीन लगी हुई है

यहाँ पर इस मशीन पर काम करने वाले लोग जी मौजूद थे। ऑपइंडिया से उन्होंने बताया कि कई महीनों से यमुना की सफाई में जुटे हुए हैं। यहीं मौजूद एक और कर्मचारी ने बताया कि दिल्ली में नई सरकार आने के बाद से यमुना सफाई में तेजी आई है। उसने बताया कि समय-समय पर अब अधिकारी भी उसे दिशानिर्देश देते रहते हैं।

यहाँ पर यमुना किनारे बने पक्के व सुंदर से दिखने वाले घाट पर चारों और साफ-सफाई के साथ हरियाली भी दिखाई दी।

यमुना में भाजपा सरकार के बाद बढ़ा पानी

ऑपइंडिया कालिंदी कुंज घाट के बाद ITO स्थित यमुना घाट पर भी पहुँचा। यहाँ पर एक छोर पर बड़ी JCB घाट बनाने में जुटी थी जबकि दूसरे छोर पर एक मशीन यमुना से कचरा निकालने में लगी हुई थी। यहाँ भी यमुना सफाई का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा था। लगातार यहाँ JCB की मदद से गाद (सिल्ट) निकाली जा रहा है व कचरा निकालकर पानी को साफ किया जा रहा है।

यहाँ भी पहले की अपेक्षा यमुना काफी साफ दिखाई दे रही थी। घाट पर सालों से मौजूद सुनील गिरी ने बताया कि दिल्ली में भाजपा सरकार बनने के बाद यमुना में पानी बढ़ा है जो कि पहले कम रहता था। उन्होंने बताया कि पहले कई बार यमुना सूखी भी रहती थी।

ITO घाट पर यमुना से गाद निकाल रही है

सुनील गिरी ने बताया कि इस घाट पर अब यहाँ छठ घाट पर नियमित रूप से यमुना जी की आरती होती है, उन्होंने बताया कि इसमें बड़ी संख्या में भक्त एकत्र होते हैं। घाट पर मौजूद गोताखोर जुम्मन ने बताया कि दिल्ली सरकार वर्तमान में यमुना सफाई पर काफी पैसा खर्च करवा रही है।

उन्होंने सलाह दी कि यहाँ मौजूद सभी 32 डैम की सफाई कराए और फिर उनको नीचे करके पानी छोड़ा जाए तो इस पूरी कवायद का असर दिखाई पड़ेगा। घाट पर मौजूद सेवादार राजू ठाकुर ने बताया कि लोग पूरी श्रद्धा के साथ यमुना में नहाने के मन से आते हैं लेकिन गंदा पानी देखकर दूर से ही हाथ जोड़कर लौट जाते हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन अब सफाई का प्रयास सराहनीय है।

इसी तरह यमुना के और घाटों पर भी लगातार सफाई चल रही है। कई जगह पर कूड़ा निकाला जा रहा तो कहीं जमी हुई गाद हट रही है। यमुना का वैभव लौटाने के लिए घाट भी सुधारे जा रहे हैं। उन नालों को भी बंद किया जा रहा है, जो लगातार यमुना में गंदगी लाते हैं।

दिल्ली में ही सबसे अधिक गंदी होती है यमुना

यमुना नदी उत्तराखंड से हरियाणा होते हुए दिल्ली आती है। यह प्रयागराज में जाकर गंगा से मिलती है। इसकी कुल लम्बाई 1376 किलोमीटर है। राजधानी दिल्ली में यह 54 किलोमीटर बहती है। लेकिन यह सबसे अधिक गंदी दिल्ली में होती है। यह बात राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने एक रिपोर्ट में कहा था। राजधानी दिल्ली में यह 54 किलोमीटर बहती है।

NGT के अनुसार, “वजीराबाद और ओखला के बीच का हिस्सा 22 किलोमीटर का है, जो यमुनोत्री से इलाहाबाद तक नदी की कुल लंबाई 1370 किलोमीटर का 2% भी नहीं है। लेकिन इसका हिस्सा नदी के प्रदूषण में लगभग 76% है।”

नजफगढ़ नाले में होती सफाई (फोटो साभार: @ayush9050/X)

NGT ने बताया था कि मानसून के सीजन के अतिरिक्त 9 महीने दिल्ली में वजीराबाद में यमुना में सीवेज ही बहता है। रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ 22 नाले यमुना में आकर मिलते हैं, यही दिल्ली को सर्वाधिक गंदा करते हैं। NGT ने इन पर काम करने की बात कही थी।

दिल्ली सरकार ने मंजूर किए ₹3100 करोड़

दिल्ली में रेखा गुप्ता की सरकार ने हाल ही में एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमिटी की एक अहम बैठक सचिवालय में बुलाई थी। इस बैठक में दिल्ली के विकास के लिए कई अहम परियोजनाओं के बारे में चर्चा की गई थी। इसमें यमुना की सफाई के लिए ₹3140 करोड़ की मंजूरी यमुना नदी की सफाई के लिए दी गई थी।

यमुना आरती करतीं दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता

दिल्ली सरकार ने बताया था कि इस खर्च से 27 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा। इससे पहले बजट 2025-26 में यमुना सफाई के लिए ₹500 करोड़ दिए गए थे। इसके अलावा जो योजनाएँ पहले यमुना की सफाई के लिए बनाई गई थीं, उन्हें भी अब अमलीजामा पहनाए जाने के लिए मेहनत हो रही है।

सिर्फ दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र की मोदी सरकार भी लगातार यमुना सफाई को लेकर गंभीर है। अप्रैल, 2025 में ही पीएम मोदी ने यमुना की सफाई को लेकर एक बैठक की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि जनता को यमुना की सफाई में हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने छठ को लेकर भी बात की थी।