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महाराष्ट्र: डिप्टी CM अजित पवार की ‘छवि चमकाने’ के वास्ते, उद्धव सरकार उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर खर्च करेगी 6 करोड़ रुपये

पैसों की कमी से जूझ रही महाराष्ट्र सरकार ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार के सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैंडल करने के लिए करीब 6 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पवार के पास वित्त और योजना विभाग भी हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार (12 मई) को सोशल मीडिया खातों को संभालने के लिए एक बाहरी एजेंसी की नियुक्ति के तौर-तरीकों पर अंडर-सेक्रेटरी आरएन मुसाले द्वारा हस्ताक्षरित एक आदेश को लागू कर दिया। इस एजेंसी को यह भी कार्य दिया गया है कि वह अजित पवार द्वारा लिए गए फैसलों को आम लोगों तक पहुँचाना सुनिश्चित करे।

मुसाले के आदेश के मुताबिक बाहरी एजेंसी अजित पवार के ट्विटर हैंडल और फेसबुक, ब्लॉगर, यूट्यूब और इंस्टाग्राम अकाउंट्स को हैंडल करेगी। इसके अलावा वह साउंड क्लाउड, वॉट्सऐप बुलेटिन, टेलीग्राम चैनल और एसएमएस को भी संभालेगी। बाहरी एजेंसी की नियुक्ति उप मुख्यमंत्री के सचिवालय और सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय के परामर्श से की जाएगी।

‘अजित पवार के फैसलों को आम लोगों तक पहुँचाए एजेंसी’

आदेश में उल्लेख किया गया है कि महाराष्ट्र के सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय (DGIPR) में सोशल मीडिया को संभालने के लिए पेशेवर और तकनीकी क्षमता का अभाव है, इसलिए यह महसूस किया गया कि यदि किसी बाहरी एजेंसी को काम पर रखा गया तो यह उचित होगा। मुसाले ने अपने आदेश में कहा, ‘यह सुनिश्चित करना बाहरी एजेंसी की जिम्मेदारी होगी कि महत्वपूर्ण निर्णय और संदेश लोगों तक पहुंचे और वे उपमुख्यमंत्री के साथ ट्विटर हैंडल, फेसबुक, ब्लॉगर, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, साउंड क्लाउड, वॉट्सऐप और टेलीग्राम चैनल पर संवाद करने में सक्षम हों।’

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने निर्देश दिया है कि बाहरी एजेंसी का चुनाव केवल उन एजेंसियों में से होना चाहिए जो पहले से ही सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय (DGIPR) के पैनल पर हैं, और यह सुनिश्चित करना कि सोशल मीडिया पर संदेश त्रुटिरहित हों, सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय की जिम्मेदारी होगी। इस आदेश में कहा गया है कि अगर जरूरत पड़ी सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय (DGIPR) उस एजेंसी को और पैसा उपलब्ध करा सकता है जोकि पहले ही मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के लिए काम कर रही है। ये भी सुनिश्चित करना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और उपमुख्यमंत्री कार्यालय से जारी संदेश एक जैसे न हों।

‘अजित पवार की इमेज चमकाने के लिए बाहरी एजेंसी की जरूरत क्यों?’

संयोग से मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट को संभालने के लिए पहले ही जुलाई 2020 में एक बाहरी एजेंसी नियुक्त की थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक एजेंसी की नियुक्ति करते समय ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया का पालन किया गया था।

वहीं एक वरिष्ठ नौकरशाह ने अजित पवार की इमेज चमकाने के लिए एक बाहरी एजेंसी की नियुक्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, ”हमारे पास एक सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय है जिसमें करीब 1200 कर्मचारी हैं और जिसका सालाना बजट 150 करोड़ रुपए है। तो हमें उपमुख्यमंत्री की छवि चमकाने के लिए किसी बाहरी एजेंसी की क्या जरूरत है?”

2022 में भारत 10.1% के ग्रोथ रेट साथ चीन को पछाड़ तीव्र वृद्धि दर हासिल करने वाली होगी अर्थव्यवस्था

भारत इस समय कोरोनो वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार (11 मई 2021) को अपने बयान में कहा कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 2022 में 10.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वह उस समय दुनिया के प्रमुख देशों में तीव्र वृद्धि दर हासिल करने वाली अर्थव्यवस्था होगी। इसमें यह भी कहा गया है कि 2022 में यह वृद्धि दर चीन के मुकाबले भी अधिक होगी। रिपोर्ट में चीन की वृद्धि दर 2022 में 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो 2021 में 8.2 प्रतिशत की संभावना से कम है।

हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि 2021 का वृद्धि परिदृश्य अभी काफी नाजुक दिख रहा है। इसका कारण देश में माहामारी का तेजी से फैलना है। संयुक्त राष्ट्र ने विश्व आर्थिक स्थिति और संभावना (डब्ल्यूईएसपी) रिपोर्ट की मध्यावधि समीक्षा में कहा कि भारत की वृद्धि दर 2022 में 10.1 प्रतिशत रहेगी। यह जनवरी में जारी रिपोर्ट में 5.9 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले लगभग दोगुनी है। वहीं, मध्यावधि रिपोर्ट में भारत की वद्धि दर 2021 में 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि 2020 में इसमें 6.8 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान था।

वहीं, नोमुरा के डॉ. अरुदीप नंदी का कहना है कि कोरोनो वायरस के प्रकोप के कारण अर्थव्यवस्था में मंदी है और यह कम गंभीर है। भारत में कोरोनो वायरस के खिलाफ जारी जंग के बीच Nomura India Business Resumption Index (एनआईबीआरआई) नौ मई को समाप्त सप्ताह में महामारी पूर्व स्तर के 64.5 प्रतिशत पर पहुँच गया है। इस सप्ताह इसमें 5 प्रतिशत की और गिरावट आई है।

NIBRI में गिरावट के लिए देश में कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए 20 से अधिक राज्यों ने ‘लॉकडाउन’ और अन्य पाबंदियाँ लगाने को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जो अनुक्रमिक विकास पर प्रभाव डाल रहे हैं।

डॉ. अरुणदीप नंदी भारत की स्थिति को लेकर उत्साहित हैं, उन्होंने कहा कि इस बार जीडीपी पर प्रभाव पिछले वर्ष की तुलना में कम होगा। ईटी नाउ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पिछले साल के लॉकडाउन में भारत लगभग 55 प्रतिशत के स्तर से नीचे था। वहीं, इस वर्ष मंदी अपेक्षाकृत कम है, क्योंकि सूचकांकों से पता चलता है कि भारत 35 प्रतिशत पूर्व-महामारी के स्तर से नीचे है।

COVID-19 की दूसरी लहर के कारण अर्थव्यवस्था में मंदी कैसे सीमित होगी। इस पर उन्होंने बताया कि कोरोना की पहली लहर से हम सभी अंजान थे। इस दौरान सभी कोरोना वायरस के प्रकोप से भयभीत थे। इसने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया। हालाँकि, दूसरी लहर में उनका तर्क है कि इस बार अर्थव्यवस्था को नुकसान सीमित होने की संभावना है।

बता दें कि ‘नोमुरा इंडिया बिजनेस रिजम्पशन इंडेक्स’ (एनआईबीआरआई) में उल्लेखनीय गिरावट यह संकेत देता है कि विभिन्न राज्यों में ‘लॉकडाउन’ से तिमाही दर तिमाही आधार पर वृद्धि दर पर असर पड़ेगा।

‘हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहादियों को चुकानी होगी भारी कीमत’: बेंजामिन नेतन्याहू ने दिए बड़े हमले के संकेत

फिलिस्तीन और इजरायल के बीच अब आर-पार की जंग छिड़ गई है। मंगलवार (मई 11, 2021) को फिलिस्तीन के हमास संगठन ने अब तक का सबसे बड़ा हमला बोलते हुए इजराइल पर 1000 से अधिक रॉकेट दागे। तो वहीं इजराइल ने मंगलवार को गाजा पर हवाई हमले कर दो बहुमंजिला इमारतों को निशाना बनाया। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि इजरायली सैन्य अभियान ने गाजा आतंकवादियों को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह लड़ाई कुछ समय के लिए जारी रहेगी।

मंगलवार देर रात एक राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित भाषण में, उन्होंने कहा कि हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के आतंकी समूहों को इजरायल के नागरिकों पर अपने हमलों के लिए भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि इजरायल एक गहन अभियान के साथ आगे बढ़ेगा, लेकिन मिशन को पूरा करने में ‘समय लगेगा’ और इजरायल के निवासियों को अधिकारियों द्वारा जारी किए गए सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना चाहिए।

रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज़ और आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ अविव कोहवी के साथ बयान देते हुए, नेतन्याहू ने फिलिस्तीनी आतंकवादी समूहों को दोषी ठहराते हुए कहा, “उनका खून उनके हाथों पर है।”

हमले के एक दिन बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि हवाई हमले से तीन घातक परिणाम आए, जिसमें एक भारतीय नर्स की मौत भी शामिल है। उन्होंने कहा, “हम एक दुश्मन के सामने एकजुट होते हैं। हम सभी मृतकों के लिए शोक मनाते हैं और घायलों के लिए प्रार्थना करते हैं और आईडीएफ बलों के साथ खड़े हैं।”

इजरायल के रक्षा मंत्री का बयान

नेतन्याहू के बाद रक्षा मंत्री गैंट्ज़ ने बोलते हुए कहा कि इज़रायल रक्षा बल सभी को सुरक्षित रखता है, यहूदी और अरब समान हैं। इसके अलावा उन्होंने देश के भीतर दो समुदायों के बीच शांत रहने का भी आह्वान किया। 

हालाँकि, रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रतिशोध लिया जाएगा और आईडीएफ ने ‘पाइप लाइन में कई लक्ष्यों को’ पहचान लिया है कि वह गाजा में स्ट्राइक कर सकता है। उन्होंने कहा कि इजरायल पर फायर करने के उनके लापरवाह फैसले के कारण आतंकी संगठन बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं और आगे भी होते रहेंगे।

IDF चीफ ने प्रतिक्रिया दिया

आईडीएफ चीफ कोहवी ने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना केवल एन्क्लेव में फिलिस्तीनी आतंकवादी समूहों को कड़ी टक्कर दे रही है और पिछले डेढ़ दिनों में 500 से अधिक टारगेटेड स्ट्राइक किए हैं।

कोहवी ने दोहराया, “हम सबसे गंभीर तरीके से आतंकी समूहों पर प्रहार करने के लिए दृढ़ हैं।” सेना ने शुरू में यह माना कि इजरायल राज्य के विनाश के लिए समर्पित एक आतंकवादी संगठन हमास, इस समय इजरायल के साथ पूर्ण रूप से संघर्षरत नहीं था। हालाँकि, पिछले दो दिनों में उस आकलन में बदलाव आया जब फिलिस्तीनी आतंकी समूहों ने दो घटनाओं को अंजाम दिया, अल-अक्सा हमले के बाद यरूशलेम में अशांति और इजरायल पर हमला करने के लिए शेख जर्राह से फिलिस्तीनी परिवारों को बेदखल करना।

इसी घटना पर बोलते हुए, इज़रायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के प्रमुख नादव अरगमन ने घोषणा की कि आतंकवादी संगठनों द्वारा हिंसा के बाद ‘अब बात करने का समय नहीं है।’

इजरायल पर हमला

हमास आतंकी समूह, जो वर्तमान में गाजा पर शासन करता है, ने दावा किया कि इजरायल पर एक हिंसक हमले में एक बार में 130 से अधिक रॉकेट लॉन्च किए गए थे। इजरायली बलों के मुताबिक, फिलिस्तीन इस्लामिक जिहाद के आतंकवादी भी इजरायल पर हमला करने वाले रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं।

इजरायल आतंकी ठिकाने पर जवाबी हमले में लगा हुआ है जिसके परिणामस्वरूप हमास के दो शीर्ष नेता मारे गए। एक अपडेट देते हुए नेतन्याहू ने बताया कि सेना ने अब तक गाजा पट्टी में सैकड़ों ठिकानों को निशाना बनाया है और आश्वासन दिया है कि छापेमारी जारी रहेगी।

WHO ने कहा- हम देशों के नाम पर नहीं रखते वायरस का नाम, स्वास्थ्य मंत्रालय ने मीडिया समूहों को चेताया

दुनिया भर में इस समय कोरोना की दूसरी लहर सबसे घातक साबित हो रही है। इस दौरान भारत में कोरोना के सबसे अधिक केस सामने आ रहे हैं। इस तबाही के लिए कोरोना वायरस के नए वेरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसे विश्व भर में बड़ी चालाकी से लेफ्ट मीडिया द्वारा इंडियन वेरिएंट के नाम से पुकारा जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दस्तावेज का हवाला देते हुए इंडियन वेरिएंट शब्द का उपयोग किया गया था। हालाँकि, इसके बाद डब्ल्यूएचओ ने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने ट्वीट में साफ किया है कि वह किसी वायरस का नाम किसी देश के नाम पर नहीं रखता है। उन्होंने लिखा, ”विश्व स्वास्थ्य संगठन किसी वायरस या उसके वेरिएंट का नाम उन देशों के नाम के आधार पर नहीं रखता जहाँ से वे सबसे पहले आए हैं। इस संदेश के बाद डब्ल्यूएचओ ने भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय समाचार एंजेसी के साथ कुछ समाचार समूहों को भी टैग किया है।”

वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस ट्वीट को आधार बनाकर एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, ”ध्यान दें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नोवल कोरोना वायरस के B.1.617 वेरिएंट को भारतीय (Indian) वेरिएंट नहीं कहा है। उसे विश्व स्वास्थ्य संगंठन ने वेरिएंट ऑफ कंसर्न कहा था।” भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को बिना आधार का बताया है, जिन्होंने B.1.617 म्यूटेंट स्ट्रेन के लिए इंडियन वेरिएंट शब्द का उपयोग किया है।

बता दें कि इन मीडिया रिपोर्ट्स में खबर दी गई थी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वेरिएंट को ‘वेरिएंट ऑफ ग्लोबल कंसर्न’ कहा था। वहीं, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने 32 पेज के दस्तावेज में भारतीय वेरिएंट शब्द का उपयोग नहीं किया है। वहीं, डब्ल्यूएचओ के ट्वीट पर लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ ने वायरस को चीनी वायरस कहने पर डर का इशारा भी किया है।

12 ऐसे उदाहरण, जब वामपंथी मीडिया ने फैलाया कोविड वैक्सीन के खिलाफ प्रोपेगेंडा, लोगों में बनाया डर का माहौल

इस समय देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहले की अपेक्षा भारत अब रिकवरी की राह पर है। केंद्र और राज्य सरकारें अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने, ऑक्सीजन की सप्लाई और जरूरी दवाओं को मुहैया कराने का जीतोड़ प्रयास कर रही हैं।

केंद्र सरकार कोरोना की बेकाबू रफ्तार को काबू करने के लिए इस दिशा में सबसे सशक्त टीकाकरण अभियान चला रही है। इसके मद्देनजर मोदी सरकार ने COVID-19 वैक्सीन के निर्यात पर भी अंकुश लगाया है। साथ ही राज्यों को सीधे निर्माताओं से वैक्सीन खरीदने की अनुमति दी है।

सरकार के अथक प्रयासों के बावजूद कोरोना महामारी के इस दौर में वामपंथी मीडिया झूठ को आधार बनाकर भ्रामक सूचनाएँ दे रहे हैं। हमारे पास 12 ऐसे उदाहरण हैं, जब वामपंथी मीडिया ने कोरोना की दूसरी लहर से ठीक पहले अपने ऑनलाइन पोर्टल्स पर वैक्सीन को लेकर फैक न्यूज फैलाई और लोगों के बीच भय का माहौल पैदा किया।

1- ‘द प्रिंट’ ने कोविशिल्ड और कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी मिलने पर उठाया था सवाल

जनवरी 2021 में, कोरोना वैक्सीन को लेकर चल रही तमाम कवायद के बीच ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भारत में निर्मित COVID-19 वैक्सीन कोविशिल्ड और कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। इसको लेकर ‘द प्रिंट’ ने भारत की नियामक प्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक लेख प्रकाशित किया था।

द प्रिंट का लेख

2- द प्रिंट ने अपने लेख में कोवैक्सीन की स्वीकृति को ‘राजनीतिक जुमला’ कहा था

द प्रिंट में प्रकाशित एक अन्य लेख में डीसीजीआई द्वारा सीरम इंस्टीट्यूट के कोविशिल्ड और भारत बायोटेक के कोवैक्सिन टीके को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी देने को ‘राजनीतिक जुमला’ के रूप में पेश किया था। उन्होंने लेख में टीके के दुष्प्रभाव के बारे में लिखा और लोगों में इसके प्रति भय का माहौल पैदा करने का प्रयास किया।

3- द प्रिंट ने वैक्सीन के प्रभाव पर जताया संदेह

जब भारत दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को शुरू करने के लिए तैयार था, तभी प्रिंट ने एक और लेख प्रकाशित किया। भारत की खतरनाक रिकवरी कॉकटेल शीर्षक से प्रकाशित यह लेख वैक्सीन की गुणवत्ता पर संदेह को लेकर था।

द प्रिंट

4- डॉक्टरों को कोवैक्सीन पर संदेह: द प्रिंट

द प्रिंट में प्रकाशित एक अन्य लेख में कहा गया था कि यहाँ तक कि डॉक्टरों को भी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन पर संदेह है।

5- नियामक समिति को वैक्सीन की मंजूरी देने के बारे में आश्वस्त नहीं किया: प्रिंट

प्रिंट ने यह दावा किया कि कोवैक्सीन टीके के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दिए जाने से एक दिन पहले, नियामक समिति को वैक्सीन की मंजूरी देने के बारे में आश्वस्त नहीं किया गया था।

6- द वायर ने लेख प्रकाशित किया, जिसमें कहा गया कि दो टीकों की मंजूरी भारतीय विज्ञान को कलंकित करती है

वामपंथी प्रचार साइट द वायर ने भी उन लेखों को प्रकाशित किया, जिन्होंने टीके को लेकर भ्रामक सूचनाओं को बढ़ावा देने का काम किया। द वायर ने एक लेख प्रकाशित किया जिसका शीर्षक था “भारत ने दो टीके प्राप्त किए हैं, लेकिन इसके नियामकों ने भारतीय विज्ञान को कलंकित किया है।”

द वायर

7- द वायर में प्रकाशित लेख कोवैक्सीन के परीक्षण डेटा के बारे में संदेह पैदा करता है

वायर ने अपने एक अन्य लेख में कोवैक्सीन के परीक्षण डेटा के बारे में संदेह पैदा किया। वायर द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित वैक्सीन को लेकर दुष्प्रचार करने वाला यह दूसरा लेख था।

8- द वायर ने की चीन से भारत की तुलना

द वायर ने अपने लेख में भारत की तुलना चीन से की। उसने लिखा, ”क्या भारत चीन के रास्ते पर चलना चाहता है, जहाँ कई टीकों का अस्तित्व है, लेकिन कोई विश्वास नहीं करता है।” इस लेख में भी उसने टीकों को लेकर सवाल उठाए।

9- द वायर ने भारत के COVID टीकों के आँकड़ों पर सवाल उठाया

टीकों को जनवरी 2021 के पहले सप्ताह में मंजूरी दी गई थी, लेकिन फरवरी के मध्य में भी द वायर ने टीकों के खिलाफ अपना दुष्प्रचार जारी ​रखा। 19 फरवरी को प्रकाशित एक लेख में वायर ने कहा कि अभी भी SARS-CoV-2 वेरिएंट के खिलाफ भारत के COVID टीकों के लिए प्रभावकारी डेटा की कमी थी।

10- वायर ने भारत के टीकाकरण अभियान पर संदेह व्यक्त किया

द वायर ने भारत के टीकाकरण अभियान पर भी संदेह जताया। उसने एक लेख में लिखा, ”टीकाकरण अभियान पर कोई सहमति नहीं थी फिर भी सरकार इस पर ​अडिग रही।” संक्षेप में वायर ने कहा कि टीकाकरण अभियान को तब तक नहीं शुरू किया जाना चाहिए, जब तक कि सभी विवादों को समाप्त नहीं कर दिया जाता।

11- कोविड-19 वैक्सीन को मंजूरी देने के बाद स्क्रॉल का डर आया सामने

एक अन्य वामपंथी पोर्टल स्क्रॉल.इन ने वैक्सीन को लेकर अफवाह फैलाने का काम किया। भारत द्वारा दो स्वदेशी कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दिए जाने के कुछ दिनों बाद स्क्रॉल ने भारत के टीकाकरण अभियान को कम करने के लिए एक लेख प्रकाशित किया। इसमें कहा गया कि भारत आत्मनिर्भर वैक्सीन घोषित करने की जल्दबाजी में आग से खेल रहा है।

12- स्क्रॉल भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को लेकर सवाल उठाता है

स्क्रॉल ने अपने एक लेख में यह तर्क दिया कि भारत को एक “अनटेस्टेड टीका” नहीं खरीदना चाहिए, जब बेहतर सुरक्षा डेटा वाला एक सस्ता विकल्प उपलब्ध हो। यह भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के संदर्भ में था।

इजरायल पर हमास के जिहादी हमले के बीच भारतीय ‘लिबरल’ फिलिस्तीन के समर्थन में कूदे, ट्विटर पर छिड़ा ‘युद्ध’

इजरायल और हमास के बीच हफ्तों से जारी तनाव अब हिंसक हो चुका है। रातों-रात दोनों पक्षों के बीच हुए हमलों में मौत का आँकड़ा तेजी से बढ़ा है। ताजा अपडेट के मुताबिक, हमास ने इजरायल पर करीब 1000 रॉकेट दागे हैं।

बुधवार तक हमास (इजराइल इसे आतंकी संगठन मानता है) इजरायल पर लगातार रॉकेट छोड़ता रहा। इजरायल की आर्मी ने सोशल मीडिया पर ये जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “सेंट्रल और दक्षिणी इजरायल में लगातार रॉकेट दागे जा रहे हैं, बहुत हो गया, अब ये रुक जाना चाहिए।”

हमास ने तेल अवीव, एश्केलोन औ होलोन शहर पर सोमवार से लेकर बुधवार को रॉकेट फायर किए। इसमें से ज्यादातर रॉकेट इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम आयरन डोम ने रोक लिए, लेकिन कई रॉकेट आबादी वाले इलाकों में गिरकर फट गए। हमास ने इजरायल पर एक हजार से ज्यादा रॉकेट दागे।

इजरायल दुआ के साथ साथ भारत के लिए दवा भी भेज रहा है। इसी हफ्ते इजरायल ने भारत को बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स भेजा है। भारत स्थित इजरायल के राजदूत रोम मल्का ने अपने ट्वीटर अकाउंट के जरिए कहा था कि संकट के समय में इजरायल पूरी ताकत से भारत के साथ खड़ा है और भारत की मदद करते हुए इजरायल को गर्व महसूस हो रहा है।

अब जब इजरायल राष्ट्रीय संकट का सामना कर रहा है तो जहाँ भारतीयों की तरफ से इजरायल के साथ खड़े होने के मैसेज सामने आ रहे हैं, वहीं कुछ विपक्ष और वामपंथी ने इस्लामवादियों के साथ एक अलग रास्ता चुना है।

भारतीय ‘लिबरल’ फिलिस्तीन का समर्थन करते हैं

दिल्ली कॉन्ग्रेस के वीपी अली मेहदी ने बुधवार (मई 12, 2021) को यहूदी राष्ट्र के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। मेहदी ने इजरायल के विनाश की कामना करते हुए कहा कि अल्लाह इसे नष्ट कर देगा। मेहदी ने ट्वीट किया, “अल्लाह इजरायल को नष्ट कर देगा इंशाल्लाह #अल्लाहुअकबर।”

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एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भारत के सहयोगी इजरायल की निंदा करने के लिए भारत सरकार से आह्वान किया कि भारत हमेशा एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के विचार का समर्थन करता है।

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जारी संघर्ष के एक वीडियो को साझा करते हुए, ओवैसी ने कहा कि फिलिस्तीन को तब कोई रक्षक नहीं चाहिए जब उनके पास अल्लाह हों। ओवैसी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “हमको किसी मुमालिक या बादशाह की जरूरत नहीं है फिलीस्तीन के लिए, हमारा अल्लाह हमारे लिए काफी है।”

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कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी भी फिलिस्तीन को बचाने के नारे लगा रहे हैं। एक हवाई हमले का वीडियो साझा करते हुए, निजामी ने ट्वीट किया, “उनका खून इजरायल के हाथों में लगा है। हम नहीं भूलेंगे! #SavePalestine #PalestinianLivesMatter।”

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नफरत फैलाने के लिए कुख्यात शरजील उस्मानी ने अल-अक्सा मस्जिद की घटना के बाद लोगों को प्यूमा और एचपी जैसे ब्रांडों का बहिष्कार करने के लिए कहा है। सूची में सार्वजनिक रूप से कैटरपिलर बुलडोजर पर प्रतिबंध लगाने के लिए भी कहा गया है क्योंकि इसका उपयोग फिलिस्तीनी घरों और खेतों के विध्वंस के लिए किया जाता है।

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इतना ही नहीं, उस्मानी #DeathToOccupation अभियान में भी शामिल हुए, जो कश्मीर और फिलिस्तीन में विदेशी कब्जे से मुक्ति के लिए कहता है।

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बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने अपने ट्वीट में इजरायल को एक रंगभेद और आतंकवादी राज्य के रूप में चिह्नित किया।

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भारत के चुनाव आयोग के साथ पंजीकृत होने का दावा करने वाली टीपू सुल्तान पार्टी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कुछ दशकों पहले तक इज़राइल एक राष्ट्र के रूप में मौजूद नहीं था और ट्विटर पर #BoycottIsrael अभियान चला रहा है।

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इस बीच, लगातार हवाई हमलों और दंगों के तहत तेल अवीव और लोद जैसे घनी आबादी वाले इजरायल में स्थिति गंभीर बनी हुई है।

अफगानिस्तान: रमजान में 15 आत्मघाती हमलों और 200 बम ब्लास्ट में गई 255 नागरिकों की जान, 500 घायल

अफगानिस्तान में रमजान के महीने की शुरुआत के बाद से अब तक तालिबान द्वारा 15 आत्मघाती और दर्जनों अन्य हमले किए गए हैं। यह जानकारी मंगलवार (मई 11, 2021) को अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने दी। मंत्रालय के अनुसार 13 अप्रैल को शुरू हुए रमजान की इस अवधि में 200 विस्फोटों और 15 आत्मघाती बम विस्फोटों में कुल 255 नागरिक मारे गए। इस दौरान 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

टोलोन्यूज के मुताबिक, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मंगलवार को कहा, “मैं सभी सुरक्षा बलों को धन्यवाद देता हूँ। उन्होंने 800 से अधिक घटनाओं को रोका और 800 से अधिक आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” टोलोन्यूज द्वारा प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, पिछले महीने (13 अप्रैल से 12 मई) के दौरान नागरिक मृत्यु की संख्या में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

रविवार रात तालिबान ने घोषणा की कि वे ईद के त्योहार के लिए तीन दिवसीय युद्ध विराम का पालन करेंगे। बाद में सोमवार को, अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी सभी अफगान बलों को ईद के दौरान संघर्ष विराम का पालन करने का निर्देश दिया। अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि ज़ल्माय ख़लीज़ाद ने मंगलवार को तालिबान और अफगान सरकार द्वारा ईद के त्योहार के दौरान देश में युद्ध विराम को बनाए रखने की घोषणाओं का स्वागत किया था।

खलीलजाद ने ट्वीट किया, “मैं तालिबान और अफगान सरकार द्वारा ईद संघर्ष विराम का पालन करने की घोषणाओं का स्वागत करता हूँ। हाल के हफ्तों में हिंसा भयावह रही है और अफगान लोगों ने इसकी कीमत चुकाई है।”

वहीं तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने ट्वीट कर कहा कि नेरख जिले के पुलिस मुख्यालय, इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट और बड़ी संख्या में आर्मी बेस पर कब्जा जमा लिया गया है। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि हमने दुश्मनों के कई सैनिकों को मार दिया है। इसके अलावा कई लोग जख्मी हुए हैं और कई लोगों को हमने जिंदा अगवा कर लिया है।

सैनिकों के तमाम हथियारों, गोला बारुदों और सैन्य वाहनों को भी कब्जे में ले लिया है। अफगानिस्तान में रमजान महीने के दौरान ही तालिबान की ओर से की गई हिंसा में 255 नागरिकों की मौत हुई है। इसके अलावा 500 लोग जख्मी हुए हैं।

शशि थरूर ने फिर फैलाया झूठ, लिखा- ‘अंडमान में कोरोना से हर रोज 4-5 मौतें’: PIB ने खोली पोल

पूरा देश इस वक्त कोरोना महामारी से जूझ रहा है। महामारी के इस दौर में सोशल मीडिया पर कई तरह की खबरें वायरल हो रही हैं जिन्हें लोग आँख बंद करके शेयर कर रहे हैं। हालाँकि इनमें से कई खबरें फर्जी भी होती हैं। ऐसे में इन्हें शेयर करने से पहले इस बात पर गौर करना बहुत जरूरी है कि कौन सी खबर सही है और कौन सी फर्जी। ऐसी ही एक खबर अंडमान को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने भी ट्विटर पर इस खबर को शेयर किया है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है, ”अंडमान में कोरोना की गंभीर स्थिति को लेकर चिंतित हूँ। जीबी पंत अस्पताल में हर रोज 4-5 मौतें हो रही हैं। 4 लाख लोगों के लिए केवल 50 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। लोगों में लक्षण दिखने के बाद भी टेस्टिंग नहीं हो रही है।” हालाँकि ये खबर कितनी सच है आइए जानते हैं-

क्या है इस खबर की सच्चाई?

पीआईबी के फैक्ट चेक विभाग ने इस खबर की सच्चाई बताई है। उनके मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ये खबर पूरी तरीके से गलत है। पीआईबी फैक्ट चेक ने ट्वीट करते हुए बताया है कि शशि थरूर ने जो ट्वीट किया है, उसमें फैक्ट्स गलत हैं।

क्या है सही तथ्य

पीआईबी के मुताबिक अंडमान में हर 10 लाख लोगों में सबसे ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं। वहीं दूसरी लहर में कुल 16 लोगों की मौत हुई है। यहाँ रिकवरी रेट भी सबसे ज्यादा है जो कि 96 फीसदी है।

पीआईबी द्वारा सच्चाई बताने के बाद शशि थरूर ने ट्वीट करते हुए लिखा, “यह सुनकर खुशी हुई। द्वीप पर मेरे सोर्स सरकार के कर्मचारी हैं, जिन्होंने मुझे इन समस्याओं की तरफ ध्यान आकर्षित करवाने की भीख माँगी थी। वे अपनी पहचान उजागर होने से डरते हैं, इसलिए मैं उन्हें आगे आने के लिए नहीं कह सकता। मैं आशा करता हूँ कि मेरे सोर्स गलत थे।”

गौरतलब है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की मौत की झूठी खबर फैलाई थी। शशि थरूर ने ट्विटर पर लिखा था, “पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के गुजर जाने से मैं बेहद दुःखी हूँ। मैं उनके साथ अपनी कई सकारात्मक बातचीत को याद करता हूँ। एक बार उन्होंने और दिवंगत केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मुझे BRICS की बैठक के लिए मॉस्को जाने वाली संसदीय समिति का नेतृत्व करने को कहा था।”

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहीं सुमित्रा महाजन को NCP सुप्रीमो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने भी ‘भावपूर्ण श्रद्धांजलि’ देते हुए इसे राजनीतिक और सामाजिक क्षति करार दिया था। हालाँकि, अधिकतर ने बाद में अपने ट्वीट्स डिलीट कर लिए।

‘सामना’ में रानी अहिल्या बाई की तुलना ममता बनर्जी से देख भड़के परिजन, CM उद्धव को पत्र लिख जताई नाराजगी

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुलना ‘महान महिला शासक’ रानी अहिल्या बाई होलकर से किए जाने के बाद रानी के वंशजों में गुस्सा है। लेख को पढ़ने के बाद उनके एक परिजन श्रीमंत भूषण सिंह राजे होलकर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भी लिखा है।

पत्र में राउत की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि ये बेहद शर्मनाक है कि एक राष्ट्रीय नेता की तुलना आजकल के राजनेताओं से की जाए, वो भी टुच्चे फायदों के लिए। होलकर ने बताया कि अहिल्याबाई ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और जनता की सेवा में लगाया, उनकी तुलना एक ऐसी नेत्री से नहीं हो सकती जो राजनीति के लिए अपने लोगों पर अत्याचार करे।

पत्र में उन्होंने लिखा की ऐसी तुलना सिर्फ और सिर्फ वैचारिक क्षमता उजागर करती है। किसी को भी पहले अपनी योग्यता साबित करनी चाहिए और बाद में लोगों को उसका मूल्य तय करने देना चाहिए। 

संजय राउत का विश्लेषण

संजय राउत ने अपने संपादकीय में ममता बनर्जी को अहिल्याबाई होलकर के समतुल्य रखकर कॉन्ग्रेस के विपक्षी पार्टी होने पर कई सवाल उठाए थे। ऐसी तुलना करके राउत ने बताना चाहा था कि ममता बनर्जी एक उभरती हुई विपक्षी नेता है। 

बता दें कि इससे पहले संजय राउत विपक्षी नेता के तौर पर शरद पवार का नाम ले चुके हैं। उनका कहना था कि यूपीए को एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार अच्छे से दिशा दिखा पाएँगे।

अहिल्या बाई होलकर

उल्लेखनीय है कि शिवसेना के मुखपत्र में जिन अहिल्याबाई होलकर की तुलना तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी से की गई, वो एक महिला शासक थीं। उन्हें राजमाता या महारानी अहिल्याबाई होलकर भी कहा जाता था। वह न केवल एक योद्धा थीं, बल्कि पढ़ी लिखी, कई भाषा की जानकार और बोलियों में निपुण थीं। महेश्वर में 30 साल रहते हुए उन्होंने खुद को जनसेवा में समर्पित कर दिया था। इसके अलावा औद्योगीकरण को बढ़ावा और  धर्म शब्द का प्रसार करने का काम भी रानी अहिल्या द्वारा किया गया था।

सौम्या के बेटे ने इजरायल को दिलाई मोशे की याद: इस्लामी आतंक ने दोनों से छीने अपने

इजरायल में रह रही भारतीय महिला सौम्या संतोष की फलस्तीन के इस्लामी आतंकी संगठन हमास के रॉकेट हमले में मौत पर शोक व्यक्त करते हुए इजरायली राजदूत रॉन माल्क ने 2008 के मुंबई आतंकी हमले में अपने माता-पिता को गँवाने वाले इजरायली बच्चे मोशे को याद किया।

सौम्या पिछले 7 साल से इजरायल में रहकर एक बुजुर्ग महिला की देखरेख करती थीं। केरल के इडुक्की में उनके पति और 9 साल का बेटा रहता है। मंगलवार (11 मई) को जब सौम्या अपने पति से वीडियो कॉल पर बात कर रही थीं, उसी समय हमला हुआ।

बाद में इजराइल के राजदूत रॉन माल्क ने मंगलवार को सोशल मीडिया के जरिए सौम्या की मौत की पुष्टि की। माल्क ने घटना पर दुख प्रकट करते हुए मुंबई आतंकी हमले में बचे मोशे को याद किया और कहा कि उनका मन सौम्या के बेटे अडोन के लिए व्यथित है।

उन्होंने कहा, “मैंने हमास के आतंकवादी हमले की शिकार हुईं सौम्या संतोष के परिवार से बात की। मैंने उनकी दुर्भाग्यपूर्ण क्षति के लिए दुःख व्यक्त किया और इजराइल की ओर से अपनी संवेदना व्यक्त की। पूरा देश उनके जाने का शोक मना रहा है और हम उनके लिए यहाँ हैं।”

मॉल्क ने कहा, “मेरा दिल उनके 9 साल के बेटे अडोन के लिए दुखी है, जिसने इतनी कम उम्र में अपनी माँ को खो दिया है। अब उसे उनके बिना बड़ा होना पड़ेगा। यह हमला मुझे छोटे मोशे की याद दिलाता है, जिसने 2008 के मुंबई हमलों के दौरान अपने माता-पिता को खो दिया था। ईश्वर उन्हें शक्ति और साहस दे।”

कौन है मोशे जिसका इजरायली राजदूत ने किया जिक्र

26 नवंबर 2008 को जब मुंबई आतंकी हमला हुआ, उस समय इजरायली बच्चा मोशे होल्त्जबर्ग मात्र 2 साल का था। उसके माता पिता नरीमन हाउस में एक सांस्कृतिक केंद्र चलाते थे। लेकिन 26 नवंबर को रात करीब पौने नौ बजे चार आतंकियों ने नरीमन हाउस पर हमला किया और इजरायली नागरिकों को बंधक बना लिया। 

आतंकियों ने उस दिन जिन लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी उनमें मोशे के माता-पिता भी शामिल थे। आतंकियों ने मोशे के पिता गैवरिएल होल्त्जबर्ग और माँ रिवका को उसके सामने ही गोली मार दी थी। लेकिन मोशे अपनी भारतीय आया सैंड्रा सैमुएल के कारण बच गया। सैंड्रा ने ही मोशे को उस कमरे से उठाया था जहाँ उसके माता-पिता की हत्या हुई थी।

सैंड्रा मोशे के रोने की आवाज सुनकर जब स कमरे में पहुँची तो उसे खून से सनी लाशों के बीच रोता पाया। सैंड्रा ने उसे चुपचाप उठाया और वहाँ से भागने में कामयाब रहीं। इसके बाद मोशे को उसके नाना-नानी को सौंप दिया गया।

मुंबई आतंकी हमले में अपने माता-पिता के मारे जाने के 10 साल बाद मोशे जनवरी 2018 में भारत आया था और इस दौरान वह मुंबई के उस नरीमन हाउस भी गया। पीएम मोदी ने दिसंबर 2019 में मोशे के नाम एक खत लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि मोशे की कहानी हर किसी को प्रेरित करती है।