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यूपी के इन 7 जिलों में 18-44 साल के लोगों का वैक्सीनेशन शुरू, CM योगी ने कहा- संक्रमण में कमी, रिकवरी रेट बेहतर होना सुखद

उत्तर प्रदेश में शनिवार से 18-44 आयु वर्ग के लोगों का कोविड वैक्सिनेशन शुरू हो गया। पहले चरण में सात जिलों को वैक्सिनेशन में शामिल किया गया है। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ लखनऊ के अवंतीबाई अस्पताल पहुँचे और यहाँ उन्होंने वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत की।

सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि फ्री टीका उपलब्ध कराने के अभियान की मुख्यमंत्री रात में निगरानी करते रहे और उन्होंने शुक्रवार देर शाम सरकारी विमान भेजकर हैदराबाद से टीके की खेप मँगवाई।

इसलिए चुने गए पहले ये 7 जिले

अधिकारिक जानकारी के मुताबिक जिन सात जिलों में टीकाकरण की शनिवार को शुरुआत हुई, उनमें लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और बरेली शामिल हैं। उन्होंने कहा था कि पहले चरण में उन सात जिलों में टीकाकरण होगा जहाँ नौ हजार से अधिक एक्टिव केस हैं।

सात जिलों के बाद शामिल होंगे अन्य जिले

अवंतीबाई अस्पताल पहुँचे योगी ने कहा कि टीकाकरण के लिए जो सॉफ्टवेयर बना है, उसका परीक्षण भी इन जिलों में किया जाएगा और उसके पश्चात अन्य जिलों में भी इसे विस्तारित किया जाएगा।

1.01 करोड़ ने ली पहली खुराक

योगी ने कहा कि देश में कोविड रोधी टीकाकरण शुरू होने के बाद से राज्य में अब तक 1.23 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। इनमें 1.01 करोड़ वे लोग हैं जिन्होंने पहली खुराक ली है और 22.33 लाख से अधिक लोगों ने दूसरी खुराक ली है।

बनाए गए 85 अलग केंद्र

यूपी सीएम ने कहा कि राज्य में 45 वर्ष के लिए 2500 केंद्रों पर तीसरे चरण का वैक्सिनेशन शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन शुरू किया है। पहले चरण में हमने उन 7 जनपदों को लिया है जिनमें पॉजिटिविटी रेट और सक्रिय मामले सर्वाधिक हैं। इन 7 जनपदों में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए अलग से 85 केंद्र बनाए हैं।

5 करोड़ वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर

योगी ने कहा कि हमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए भी वैक्सीन उपलब्ध हो गई है, हमने सीधे कंपनियों से वैक्सीन खरीदी है। प्रदेश में हम 5 करोड़ वैक्सीन का ग्लोबल टेंडर भी प्रारंभ कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में संक्रमण के नए मामलों में कमी और रिकवरी रेट बेहतर होना सुखद है। हालाँकि लोगों को कोविड बिहेवियर को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। सीएम योगी ने टीम-9 के साथ कोरोना की स्थिति की समीक्षा करते हुए शनिवार (मई 1, 2021) को कहा कि पिछले 24 घंटो में कोविड के 30317 नए केस आए जबकि 38826 लोग कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं। यह स्थिति सुखद है। प्रदेश में संक्रमण कम हो रहा है और रिकवरी बेहतर हो रही है। हमें इसी प्रकार टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट की नीति को प्रभावी ढंग से लागू रखना होगा। यह बहुत जरूरी है कि प्रदेशवासी कोविड बिहेवियर को जीवनशैली का हिस्सा बनाएँ।

उन्होंने कहा कि बीते 24 घंटों में प्रदेश में 2,66,326 कोविड टेस्ट संपन्न हुए हैं। इसमें 1,14,172 टेस्ट केवल आरटीपीसीआर माध्यम से हुए हैं। अब तक उत्तर प्रदेश में 4.10 करोड़ टेस्ट हो चुके हैं। यह देश के सभी राज्यों में सर्वश्रेष्ठ है। सीएचसी और पीएचसी स्तर पर एंटीजन टेस्ट बढ़ाए जाने की जरूरत है।

इसी के साथ-साथ प्रदेश में 2500 केंद्रों पर 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का टीकाकरण पूर्ववत जारी है। उन्होंने कहा कि कोविड से लड़ाई में टीकाकरण अहम है। देश मे सर्वाधिक टीकाकरण उत्तर प्रदेश में हुआ है। नि:शुल्क टीकाकरण की घोषणा करने वाला उत्तर प्रदेश प्रथम राज्य है। हम सभी नागरिकों के वैक्सीनेशन के लिए नियोजित भाव से कार्य कर रहे हैं।

वहीं उत्तर प्रदेश अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल ने बताया, “प्रदेश में रेमडेसिविर की उपलब्धता को बढ़ाया गया है पहले 20,000 डोज़ प्रतिदिन मिलते थे, कल से यह संख्या 50,000 कर दी जाएगी। ऑक्सीजन की उपलब्धता लगातार बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। कल प्रदेश में 631 मीट्रिक टन ऑक्सीजन प्राप्त हुई।”

रोहित सरदाना की मौत पर जश्न मनाने के बाद कट्टरपंथियों ने ट्रेंड कराया #StandWithSharjeelUsmani

पत्रकारिता जगत में शुक्रवार (मार्च 30, 2021) को रोहित सरदाना के निधन के बाद मातम पसरा रहा। हर कोई आजतक के वरिष्ठ पत्रकार के देहांत की खबर सुनकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा था। इस बीच इस्लामी कट्टरपंथियों और वामपंथियों के संदेशों ने लोगों को बुरी तरह झकझोर दिया। इनमें से एक नाम न्यूजलॉन्ड्री के स्तंभकार शरजील उस्मानी का है। वही शरजील उस्मानी जिस पर दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में कई तरह के इल्जाम लगे थे।

कल जैसे ही सरदाना के निधन की पुष्टि हुई, शरजील उस्मानी ट्विटर पर जश्न मनाने लगा। उसने सरदाना के सहकर्मी राजदीप सरदेसाई के ट्वीट पर नफरत से भरी प्रतिक्रिया दी।

रोहित सरदाना को बड़े अक्षरों में उस्मानी ने “मनोरोगी, झूठ बोलने वाला, नरसंहार करवाने वाला” कहा। इसके अलावा ये भी लिखा कि रोहित सरदाना को पत्रकार के तौर पर नहीं याद किया जाना चाहिए।

ये ट्वीट उस्मानी ने राजदीप सरदेसाई के ट्वीट पर किया था। लोगों ने इसे देखा तो उस्मानी को खूब खरी खोटी सुनाई। तभी कुछ इस्लामी कट्टरपंथी आए और देखते ही देखते ट्विटर पर #StandWithSharjeelUsmani ट्रेंड करने लगा।

एक शेख नाम के ट्विटर यूजर ने कहा कि शरजील ने वो किया जो उसे करना था। अगर देश को बचाना है, तो हर किसी को उसकी तरह ही बनना होगा।

सीएए प्रदर्शनों को भड़काने वालों में से एक आफरीन फातिमा ने कहा कि लिबरलों को न केवल सरदाना के कर्मों पर लीपा-पोती करने के लिए शर्म आनी चाहिए बल्कि मुस्लिम युवाओं को भड़काने के लिए भी शर्मिंदा होना चाहिए। आफरीन के मुताबिक जो लोग सरदाना के लिए लिख रहे हैं वो इस्लामोफोबिया फैला रहे हैं।

इसी प्रकार सैंकड़ों लोगों ने शरजील उस्मानी की भाषा में ट्वीट में किया और यहाँ तक कहा कि जब सरदाना को किसी समुदाय के ख़िलाफ़ नफरत फैलाने में शर्म नहीं आई तो उन्हें सच बोलने में क्यों आएगी।

अब इस बात को जानने के लिए कि आखिर ट्विटर पर एक हैशटैग के साथ तमाम कट्टरपंथी किसे समर्थन दे रहे हैं, तो हमें उस्मानी के एक ट्वीट थ्रेड को देखना होगा। इसे उसने ट्विटर पर अपनी आलोचना के बाद शेयर किया था।

इस थ्रेड में उस्मानी ने खुद को उत्पीड़ित समुदाय का कहते हुए उन लोगों पर अपना गुस्सा उतारा जो उसे मृत्यु का जश्न मनाने पर बुरा भला बोल रहे थे। उसने लिबरलों को निशाने पर लेते हुए कहा कि ये लोग चाहते हैं कि एक उत्पीड़ित समुदाय का व्यक्ति तय की गई सीमाओं में ही बात रखे। 

उसने कहा कि सरदाना मुस्लिमों के नरसंहार करवा रहा था और उसके सहकर्मी अब भी यही कर रहे हैं। वह कहता है कि वह सरदाना को याद करने की बजाय उन पीड़ितों को याद करेगा जिन्हें उसने (रोहित सरदाना ने) क्रिमिनल कहा और वह अब भी जेल में हैं।

यहाँ ध्यान रहे कि उस्मानी जिस पत्रकार के लिए घटिया बातें कर रहा है, उनका निधन कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद हुआ। उससे पहले उन्होंने सिर्फ अपना काम किया बिना शरजील इमाम जैसे हिंदू विरोधी दंगों में शामिल लोगों का महिमामंडन किए।

उस्मानी कहता है कि अगली बार जब कोई फासीवादी मरे तो लोगों को उसपर उदास नहीं होना चाहिए। ये सबसे बड़ा मानवता का काम होगा।

गौरतलब है कि शरजील उस्मानी के एक-एक शब्द इस्लामी एजेंडा के वाहक हैं। इसी के तहत लोगों की मृत्यु का जश्न मनाया जाता है। उसका होना भी लिबरल मीडिया और बुद्धिजीवियों की देन है। यही लिबरल कुछ दिन पहले एल्गार परिषद 2021 में उसकी स्पीच पर तालियाँ पीट रहे थे।

वहाँ भी इस उस्मानी ने हिंदू समुदाय के विरुद्ध जहर उगला था। उसकी टिप्पणियों पर जब लोगों ने सवाल उठाए तो कई गिरोह के लोगों ने उसे जस्टिफाई किया। इसके अलावा इसी उस्मानी ने कश्मीरी पंडितों को ‘most pampered minority’ कहा था। तब भी लिबरलों ने इसके बयान का बचाव किया था।

मगर, अब ये उस्मानी पूरी तरह से अपनी हकीकत दिखा चुका है और अब चाहकर भी लोग इसके कुकर्मों पर पर्दा नहीं डाल सकते। लिबरलों ने इसे पाला-पोसा और इसका बचाव करके इतना बड़ा कर दिया कि ये खुलकर नफरत फैलाने लगा। ऐसे में हम हैरान कैसे हों कि ये अब खुलकर किसी की मृत्यु पर जश्न मनाता है।

शहाबुद्दीन… सब इंस्पेक्टर रामसागर सिंह याद आए, पत्रकार राजदेव रंजन याद आए

यहाँ गोली नहीं छूटेगा तो क्या अगरबत्ती जलेगा… मुन्ना शुक्ला पैदा ही कानून तोड़ने के लिए हुआ है

ज्यादा दिन नहीं हुए जब नाइट कर्फ्यू के दौरान डांस पार्टी का आयोजन करने वाले बिहार के पूर्व बाहुबली विधायक मुन्ना शुक्ला का यह वीडियो वायरल हुआ था। अजीब संयोग है कि उसकी तरह ही जरायम की दुनिया से आया शहाबुद्दीन भी इसी दौर में मर गया। शहाबुद्दीन उस दौर में मरा है, जब बिहार की कानून-व्यवस्था फिर से सवालों के घेरे में है। तब मरा है जब उसके सरपरस्त रहे लालू यादव को जमानत मिल गई है और एम्स ने कहा है कि परिजन जब चाहे उन्हें घर ले जाए। वह उस महामारी से मरा है, जिससे भारत में दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर उसकी मौत की खबर को पीड़ादायक बताया है। ‘जन्नत में जगह’ मिलने की दुआ की है। बिहार के मुख्यमंत्री ने ‘गहरी शोक संवेदना’ व्यक्त की है। नीतीश कुमार की सरकार में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की हम (HUM) के प्रवक्ता दानिश रिजवान का कहना है कि इस मौत से ‘पूरा बिहार सदमे में है’।

मैं शहाबुद्दीन की मौत पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बात नहीं करना चाहता। न उन अवसरवादियों की ‘नैतिकता’ की पड़ी है, जो रोहित सरदाना की मौत का जश्न मना रहे थे और आज यह पाठ पढ़ा रहे हैं कि मौत के बाद किसी की आलोचना नहीं होनी चाहिए। मैं अपनी और आपकी बात करना चाहता हूँ। शहाबुद्दीन का नाम सुनते ही आपके जेहन में क्या उभरता है?

मैं तो जब भी यह नाम सुनता हूँ एक बेबस बाप चंदेश्वर प्रसाद याद आ जाते हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर याद आते हैं। सब इंस्पेक्टर रामसागर सिंह याद आते हैं। पत्रकार राजदेव रंजन याद आते हैं। वह डर याद आता है जो जेल में बंद शहाबुद्दीन को जमानत मिलने पर सीवान में पसर जाता था। यकीन मानिए, शहाबुद्दीन याद आता भी नहीं है।

16 दिसंबर 2020 की रात चंदेश्वर प्रसाद यानी चंदा बाबू भी इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे। उनकी मौत से तीन दिन पहले ही शहाबुद्दीन कोर्ट की इजाजत के बाद अपने बीवी-बच्चों से मिला था। लेकिन, चंदा बाबू को बेटों का कंधा नसीब नहीं हो पाया था। क्यों?

कभी सीवान के जाने-माने व्यवसायी रहे चंदा बाबू ने शहाबुद्दीन को रंगदारी और अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया था। जवाब में उनके दो बेटों गिरीश और सतीश का अपहरण कर लिया गया। उन्हें शहाबुद्दीन के गाँव प्रतापपुर स्थित उसकी कोठी पर ले जाया गया। 16 अगस्त 2004 को वहाँ दोनों भाइयों को तेज़ाब से नहला दिया गया और तब तक ऐसा किया गया, जब तक उनकी तड़प-तड़प कर मौत न हो गई। इस मामले में गवाह रहे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रोशन की कोर्ट जाते समय हत्या कर दी गई।

चंद्रशेखर 1996 में सीवान लौटे। मकसद था अपनी पार्टी भाकपा (माले) को मजबूत करना। सीवान को गुंडागर्दी से मुक्ति दिलाना। 31 मार्च 1997 को बीच चौराहे पर उन्हें गोलियों से भून दिया गया। इसका ऑर्डर देना वाला शहाबुद्दीन था और अंधाधुंध फायरिंग करने वाले उसके गुर्गे। हिंदुस्तान अखबार के पत्रकार रहे राजदेव रंजन की 2016 में सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई। बाद में मुकदमा वापस लेने के लिए उनकी पत्नी को शहाबुद्दीन के नाम से धमकी मिलती रही।

मुझे प्रतापपुर में 15 मार्च 2001 को पुलिस पर चली वे गोलियाँ याद आती हैं, जिसकी गूँज पूरे देश ने सुनी थी। मुझे प्रतापपुर के बगल का वह गाँव खलीलपुरा याद आता है जहाँ शहाबुद्दीन के गुर्गों ने सब-इंस्पेक्टर रामसागर सिंह को घेर कर मार डाला था। मुझे सीवान जिले का बिंदुसर गाँव याद आता है, जहाँ के चंद्रशेखर रहने वाले थे। 2016 में शहाबुद्दीन को जमानत मिलने की खबर आने के बाद जिस गाँव में अजीब तरह का सन्नाटा और भय पसर गया था।

यह सच है कि बाद के वर्षों में शहाबुद्दीन का सीवान में वर्चस्व कमजोर पड़ गया। वह खुली हवा से ज्यादा जेल की कोठरी में रहा। उसके अपराध के भय से पैदा डर, राजद की पूरी ताकत जुड़ने के बावजूद उसकी पत्नी हिना शहाब को जीत नहीं दिला पाए। यह भी सच है कि कल के सीवान का ‘साहब’, सीवान में समानांतर सरकार चलाने वाला, ‘दरबार’ लगाने वाला शहाबुद्दीन बहुत बेबस और लाचार होकर मरा। पूरी ताकत लगाने के बावजूद अपने पिता के जनाजे तक में शामिल नहीं हो पाया।

संभव है कल को आँकड़ों के हिसाब से उसके अपराधों को कमतर ठहराने की कोशिश होगी। उसके मजहब का हवाला देकर उसे ही प्रताड़ित बताने की कोशिश होगी। पर सच यही है कि गिरीश और सतीश की हत्या आँकड़ों में केवल दो मर्डर ही दिखते हैं, लेकिन उन्हें तेजाब से नहलाने और तड़पा-तड़पा कर मारने से पैदा हुआ खौफ किसी आँकड़ों में दर्ज नहीं होता है। वह कोई सामान्य अपराधी नहीं था। पाकिस्तान की आईएसआई तक से उसके संबंध सामने आए थे।

2020 में हाई कोर्ट ने जब उसे पैरोल पर सीवान जाने देने की अनुमति को लेकर दिल्ली और बिहार की सरकारों से रिपोर्ट माँगी थी, तो दोनों सरकारों ने ही हाथ खड़े कर दिए थे। ये बताता है कि बिहार तो दूर, दिल्ली का शासन-प्रशासन भी, जंगलराज का दौर खत्म होने के डेढ़ दशक बाद भी, शहाबुद्दीन पर लगाम कसने में खुद को नाकाम पाता था, खासकर जब वह जेल से बाहर हो। उसे तिहाड़ भी इसलिए शिफ्ट किया गया था, क्योंकि बिहार के जेल से वह बेधड़क अपना साम्राज्य चला लेता था। ऐसे ही नहीं उसने जेल से निकलते ही नीतीश कुमार को ‘परिस्थितियों का मुख्यमंत्री’ कह दिया था।

भले आज राजनीतिक लोकाचार में नीतीश कुमार उसकी मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त कर रहे हों। लेकिन सच यही है कि शहाबुद्दीन की मौत कोरोना संक्रमण से हुई केवल एक और मौत नहीं है। यह उस डर की मौत है जो उसके होने से पैदा होता था।

बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से एक डॉ सहित 8 मरीजों की मौत, हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को लगाई फटकार

सरकार और प्रशासन के दावों के उलट देश की राजधानी दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट बरकरार है। इस बीच दिल्ली के बत्रा अस्पताल में बुरी खबर आ रही है। बत्रा अस्पताल के डायरेक्टर का कहना है कि यहाँ पर भर्ती 8 मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के चलते हो गई है। जिसमें एक डॉक्टर भी शामिल हैं।

इनमें 6 आईसीयू में भर्ती थे, जबकि 2 नॉर्मल वार्ड में भर्ती थे। ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण सभी 8 मरीजों की जान गई है। अस्पताल में भर्ती तकरीबन 300 मरीजों की भी जान भी संकट में है। 

यहाँ पर बता दें कि कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे दिल्ली के बत्रा अस्पताल में शनिवार (मई 1, 2021) को एक बार फिर ऑक्सीजन की किल्लत हो गई। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, यहाँ पर कुल 307 मरीज भर्ती थे। इस दौरान ऑक्सीजन नहीं मिलने से 8 मरीजों की मौत हो गई। 

बत्रा अस्पताल ने इस बाबत शनिवार को दिल्ली हाई कोर्ट को जानकारी दी है। इसके मुताबिक, उनके यहाँ ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। बत्रा अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि शनिवार सुबह 6 बजे से SOS में थे। हमारे पास 307 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 230 ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं।

अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. एससीएल गुप्ता ने बताया कि शनिवार सुबह सात बजे से ही वह दिल्ली सरकार से गुहार लगा रहे थे कि कुछ ही घंटे की ऑक्सीजन बची है। इसके बावजूद ऑक्सीजन नहीं मिली। उन्होंने कहा कि हर 10 मिनट पर वह संबंधित अधिकारियों को अपडेट दे रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने समय पर ऑक्सीजन नहीं भेजा। इस कारण 12.45 से डेढ़ बजे तक मरीज बिना ऑक्सीजन के रहे। इसमें आठ मरीजों की मौत हो गई।

सेना से क्यों मदद नहीं माँगी

दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और उनकी असफलता को देखते हुए कोर्ट आग बबूला हो गया और कहा कि अगर स्थिति आपसे सँभल नहीं रही थी तो सेना की माँग करनी चाहिए थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस वक्त हर कोई तनाव में हैं, यहाँ तक कि हम खुद तनाव में हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल उठाया और कहा कि दिल्ली सरकार ने अब तक आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की मदद के लिए रिक्वेस्ट क्यों नहीं की है।

बुनियादी ढाँचे की स्थापना के लिए सशस्त्र बलों की मदद लेने के सुझावों पर दिल्ली सरकार के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि इस प्रक्रिया में हम उच्चतम स्तर पर हैं। हमारी सरकार इसे देख रही है और जल्द ही दिल्ली में 15000 और बेड जुड़ जाएँगे। हम 15 हजार अतिरिक्त बेड लगा रहे हैं, लेकिन हमारे पास इन बेड्स के लिए ऑक्सीजन नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि आपने सेना की माँग क्यों नहीं की। अगर आप सेना से अनुरोध करते तो वे अपने स्तर पर काम करते। उनका अपना बुनियादी ढाँचा है।

दिल्ली में कोरोना के 27 हजार से अधिक नए मामले 

दिल्ली में शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) को कोरोना संक्रमण की वजह से 375 और मरीजों की मौत हो गई, जबकि कोविड-19 के 27,047 नए मामले सामने आए। वहीं संक्रमित होने की दर 32.69 प्रतिशत रही। यह जानकारी दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग की नवीनतम बुलेटिन में दी गई है। शुक्रवार को लगातार नौवाँ दिन था, जब दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण से 300 से अधिक मौतें हुईं। बुलेटिन के अनुसार दिल्ली में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 11,49,333 हो गई जिसमें से 10.33 लाख से अधिक संक्रमण मुक्त हो गए हैं। वहीं मृतक संख्या 16,147 है।

2 मई को ही आएँगे यूपी पंचायत चुनाव के नतीजे, SC ने मतगणना पर रोक लगाने से किया इनकार

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के नतीजे 2 मई को ही घोषित किए जाएँगे। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार (1 मई, 2021) को यूपी पंचायत चुनावों की मतगणना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। दरअसल, कोर्ट ने 829 मतगणना केंद्रों पर कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन किए जाने का राज्य निर्वाचन आयोग का आश्वासन स्वीकार करते हुए मतगणना की इजाजत दी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद किसी भी तरह के जश्न और रैलियों की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोरोना संकट को देखते हुए मतगणना को स्थगित कर दिया जाए तो कोई आसमान नहीं टूट पडे़गा। कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए, क्या आपने विचार किया है कि मतगणना को स्थगित किया जा सकता है? हर जगह संकट है। क्या आपके पास स्वास्थ्य सुविधाएँ हैं? जाँच उपलब्ध है?’ यदि दो-तीन हफ्ते के लिए काउंटिंग को टाल दिया जाए तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से जारी किया गया दिशा-निर्देश भी माँगा है।

कोर्ट ने यूपी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की माँगते हुए आगे कहा कि 2 लाख से अधिक सीटों की मतगणना होगी, जिसके लिए केवल 800 केंद्र हैं। तो आप हर केंद्र पर लगभग 800 सीटों की गिनती करेंगे। प्रत्येक सीट पर कई उम्मीदवार होंगे, ऐसे में आप काउंटिंग स्टेशन पर प्रति व्यक्ति 75 लोगों की सीमा को कैसे सुनिश्चित करेंगे।

इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भाटी ने कहा कि यूपी पंचायत चुनावों के लिए मतगणना रविवार को निर्धारित की गई है, क्योंकि राज्य में साप्ताहिक कर्फ्यू लगा हुआ है। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना आसान होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी चुनाव आयोग को संबंधित याचिकाओं पर इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा सुनवाई पूरी होने तक मतदान केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज संभाल कर रखने का निर्देश दिया है। 

बता दें कि शनिवार को बीते 24 घंटे में भारत में कोरोना वायरस के 4 लाख से अधिक नए मामले सामने आए और 3500 से अधिक लोगों की मौत हुई। शुक्रवार को दायर इस याचिका में चुनावी ड्यूटी के दौरान कोरोना की वजह से जान गँवाने वाले अधिकारियोंं का हवाला देते हुए वोटों की गिनती पर रोक लगाने की माँग की गई थी। इसको लेकर कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था, लेकिन अब कोर्ट ने मंजूरी दे दी है कि कल (2 मई) अपने नियत समय पर ही मतगणना होगी।

मेरे पापा ऑक्सीजन की कमी से मरे: बरखा दत्त का आरोप, एंबुलेंस ड्राइवर ने कहा – ‘मैडम ने खुद चेक किया, भरा था गैस’

पत्रकार बरखा दत्त को गुरुवार (अप्रैल 29, 2021) को उनके पिता एसपी दत्त के निधन की दुखद सूचना मिली। बरखा दत्त ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनके पिता का निधन हो गया। एयर इंडिया के पूर्व अधिकारी (एसपी दत्त) ने मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) को कोरोना वायरस संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया

देश इस समय कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। इस विकट परिस्थिति में बरखा दत्त सड़क पर निकल कर रिपोर्टिंग कर रही हैं। और इसी बीच बरखा दत्त ने अपने पिता को खो दिया।

अपने पिता की मौत के कुछ दिनों बाद, सीएनएन के किम ब्रूनहुबर के साथ एक इंटरव्यू में बरखा दत्त ने कहा, “मेरे पिता ने मुझसे अंतिम शब्द कहा था कि मुझे घुटन हो रही है। कृपया मेरा इलाज करें और मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। जो प्राइवेट एंबुलेंस उन्हें लेकर हॉस्पिटल गई, उसमें लगा ऑक्सीजन सिलेंडर काम नहीं कर रहा था।”

बरखा दत्त ने कहा, “उन्हें लाने में देरी हो गई, क्योंकि शहरों में अभी भी एंबुलेंस के लिए कोई ग्रीन कॉरिडोर नहीं है। जब तक हम अस्पताल पहुँचे, उनका ऑक्सीजन स्तर गिर गया था क्योंकि एंबुलेंस में लगा ऑक्सीजन (सिलेंडर) फेल हो चुका था। उन्हें इंटेनसिव केयर यूनिट (ICU) में ले जाना पड़ा। इसके बाद वो फिर वापस नहीं आए।”

बरखा दत्त ने आगे कहा, “इस घटना के 48 घंटे भी नहीं हुए थे, जब हम उनका अंतिम संस्कार करने के लिए शमशान घाट गए। यहाँ पर जगह नहीं थी। कई परिवारों के बीच लड़ाइयाँ हो रही थीं। मुझे मेरे पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा। ऐसी मुश्किल घड़ी में ये सब करना काफी कष्टप्रद रहा।”

दत्त ने कहा, “मैं इसलिए बोल रही हूँ क्योंकि मुझे इस बात का एहसास है कि इस क्षति के बावजूद मैं ज्यादातर भारतीयों की तुलना में भाग्यशाली हूँ। आज, मैं भारत के अनाथों के बारे में सोच रही हूँ।” उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों के बाहर इंतजार कर रहे परिवारों या मृतक का अंतिम संस्कार करने की स्थिति को देख कर उनका दिल टूट गया है। दत्त ने यह भी दावा किया कि कोरोना वायरस मरीजों में से एक के भाई ने उन्हें बताया कि परिवार को भगवान के भरोसे पर छोड़ दिया गया है।

एंबुलेंस ड्राइवर ने दिया स्पष्टीकरण

बरखा दत्त द्वारा किए गए खुलासे के बाद, हमें बताया गया है कि एम्बुलेंस के ड्राइवर और केयरटेकर को अपने मालिक की तरफ से काफी कुछ सुनना पड़ा। जबकि ड्राइवर ने समझाया था कि जब भी किसी की मौत होती है, तो उसे दुख होता है। उन्होंने यह भी कहा कि शायद संकट के समय किए गए दावे पूरी तरह से सच नहीं होंगे। इसके बाद, एम्बुलेंस ड्राइवर और उसके मालिक ने इस आरोप से इनकार किया कि वाहन में ऑक्सीजन सिलेंडर काम नहीं कर रहा था।

एम्बुलेंस चालक सोनू ने कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर भरा हुआ था और बरखा दत्त ने खुद ही सप्लाय की जाँच की थी। ऑडियो बातचीत को पल्स द्वारा प्रकाशित किया गया था। उन्होंने कहा कि पत्रकार ने ऑक्सीजन की आपूर्ति के बारे में एडवांस में पूछताछ की थी। उनके अनुसार, उन्होंने अपने पिता को अस्पताल पहुँचाने से पहले मास्क और ऑक्सीजन के प्रवाह दोनों की जाँच की थी।

(Video Courtesy: Youtube/The Pulse)

सोनू ने दावा किया, “उन्होंने यात्रा के दौरान मुझे बाधित किया और बार-बार मुझसे ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाँच करने के लिए कहा। मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि यह ठीक काम कर रहा है। हम बिना किसी समस्या के अस्पताल पहुँचे थे। हमारे साथ उनके दो वाहन भी थे। मरीज का केयरटेकर भी उनके साथ था। मैं भी 15-20 मिनट के लिए आपातकालीन विभाग के बाहर खड़ा था। मरीज बिना किसी परेशानी के एम्बुलेंस से नीचे उतर गया।”

उसने दोहराया, “मैंने उनके घर की पहली मंजिल से एम्बुलेंस तक मरीज को व्यक्तिगत रूप से पहुँचाया था। वह झूठ क्यों बोल रही है? मैंने उन्हें दिखाया था कि मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर ठीक से काम कर रहा था। बरखा दत्त के दो ड्राइवरों और एक सुरक्षा गार्ड सहित कई गवाह थे। मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ।” सोनू ने आगे कहा कि एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर गायब होने के दावे झूठे हैं और उन्होंने पत्रकार को इसका डेमो भी दिया था।

एंबुलेंस के ड्राइवर ने कहा कि मरीज (बरखा के पिता) के एंबुलेंस में चढ़ने से पहले बरखा ने एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर की जाँच करने के लिए कहा। ड्राइवर का दावा है कि बरखा ने उससे पूछा कि बड़ा सिलेंडर है या छोटा? इतना ही नहीं, बरखा ने उससे यह सवाल भी किया कि छोटी एंबुलेंस में बड़ा ऑक्सीजन सिलेंडर क्यों है? बरखा द्वारा जाँच कर लेने के बाद ड्राइवर ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने मरीज के लिए ऑक्सीजन मास्क रखा है? इस पर बरखा ने कहा कि क्यों उसके पास नहीं है? इसका जवाब देते हुए ड्राइवर ने कहा कि उसके पास एक है लेकिन ज्यादातर मरीज अपना ऑक्सीजन मास्क इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। मगर यदि उनके पास नहीं है तो एंबुलेंस में एक है।

सोनू ने आगे कहा कि हॉस्पिटल जाने के दौरान एंबुलेंस को बीच में रोक कर फिर से सिलेंडर के सुचारू रूप से काम करने पर सवाल उठाया गया था। उस समय ड्राइवर ने दिखाया था कि ऑक्सीजन सिलेंडर वास्तव में काम कर रहा था। उसने यह भी दावा किया कि बरखा दत्त झूठ बोल रही थीं और अगर वह सच कह रहीं, तो उन्होंने एक फोटो खींची थी।

पल्स ने बताया कि उन्हें सोनू और बरखा के बीच बातचीत का ऑडियो क्लिप मिला था। बरखा दत्त ने CNN से कहा कि ऑक्सीजन न मिलने की वजह से उनके पिता की हालत गंभीर हो गई, जबकि एंबुलेंस ड्राइवर ने दोहराया कि एंबुलेंस से उतरते वक्त मरीज सामान्य था। इसके साथ ही सोनू ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि बरखा दत्त ने अपने पिता के आवास से अस्पताल तक की यात्रा से पहले ऑक्सीजन की आपूर्ति और मास्क की कार्यप्रणाली की स्वयं जाँच की थी।

आम आदमी करता रहे वैक्सीन का इंतजार लेकिन पत्रकारों का हो पहले टीकाकरण: एडिटर्स गिल्ड ने लिखी चिट्ठी

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (Editor Guild of India) ने शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) को केंद्र सरकार से माँग की है कि हर पत्रकार को प्राथमिकता के साथ वैक्सीनेट किया जाए। उनका कहना है कि पत्रकार फ्रंटलाइन वर्कर्स की तरह काम पर डटे थे।

एडिटर्स गिल्ड ने बयान में कहा, “गिल्ड ये जानकर बेहद परेशान है कि केंद्र सरकार ने अभी तक पत्रकारों के टीकाकरण के लिए महीनों से कोई कदम नहीं उठाए हैं। इनमें से कई फ्रीलांसर हैं और उनका बीमा तक नहीं है। बाकी मीडिया संस्थानों के लिए काम करते हैं जो जरूरी नहीं कि कंपनी द्वारा कराए गए बीमा का फायदा उठाएँ।”

आगे इसमें लिखा है, “कुछ हफ्ते पहले एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने माँग की थी कि पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर मानकर प्राथमिकता से वैक्सीनेट किया जाए ताकि वह नए वैरिएंट से सुरक्षित रहें। विभिन्न राज्य सरकारों और मीडिया संस्थानों के समर्थन के बावजूद केंद्र सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी।”

अब कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के बीच एडिटर्स गिल्ड का ये बयान मीडिया के रवैये से थोड़ा विरोधाभासी है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस महामारी में कई पत्रकार अपनी मर्जी से जनता तक जानकारियाँ पहुँचाने के काम में लगे रहे। मुख्यधारा मीडिया भी कहता रहा कि वह जनता का एक भाग हैं, उनकी आवाज हैं और सामान्य जन के साथी हैं। 

फिर आखिर अब क्या हुआ? मुश्किल की घड़ी आई और तो सबसे पहले वह अपनी ताकत का इस्तेमाल कर खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं। सामान्य नागरिकों से जो उनकी कमिटमेंट थी वह उससे कैसे भाग सकते हैं। ये स्वार्थ नहीं तो क्या है।

मीडिया का दावा होता है कि वो जनता के लिए लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन इस बार एडिटर्स गिल्ड जैसे अपनी ताकत का उपयोग कर वैक्सीनेशन की लाइन में आगे आना चाहता है, ये साफ जाहिर है कि वह केवल अपने लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि कैसे कोई आम आदमी लाइन में लग कर वैक्सीन लगवाने का इंतजार कर रहा है। एडिटर्स गिल्ड की एकजुटता यहाँ पर सामान्य जन के साथ नहीं है। वह बस आगे जाकर अपनी शक्ति का लाभ उठाना चाहते हैं।

एडिटर्स गिल्ड का कहना है कि अप्रैल 2020 से लेकर अब तक 100 से ज्यादा पत्रकार अपनी जान गँवा चुके हैं। हर मृत्यु भयावह है क्योंकि कोई भी एक व्यक्ति अपने संसार का प्रतिनिधित्व करता है। हर मृत्यु पर शोक होना चाहिए। लेकिन ये भी सच है कि भारत में अब तक 2,00,000 से ज्यादा लोग जान गँवा चुके हैं और कई अन्य लोगों की जान खतरें में है।

इसलिए इस बात का कोई तुक नहीं है कि पत्रकारों का प्राथमिकता से टीकाकरण होना चाहिए वो भी आम जनता से पहले। यही लोग हैं जो सामान्य दिनों में वीआईपी कल्चर को कोसते हैं लेकिन यदि खुद को उससे फायदा हो तो ये उसका लाभ उठाने से भी गुरेज नहीं करते।

ध्यान रहे कि अब तक इस गिल्ड ने आजतक के एंकर रोहित सरदाना की मृत्यु पर जश्न मनाने वालों के ख़िलाफ कोई बयान नहीं जारी किया है। जाहिर है कि गिल्ड के लिए हर कोई समान होगा लेकिन ये और भी स्पष्ट है कि कुछ अन्य लोग उनके लिए दूसरों की तुलना में ऊपर हैं।

‘अल्लाह आपको जन्नत में आला मक़ाम दें… आपकी कमी हमेशा खलेगी’ – हत्यारे शहाबुद्दीन की मौत पर RJD में शोक

राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व सासंद मोहम्मद शहाबुद्दीन की शनिवार (मई 1, 2021) को दिल्ली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। कई मामलों में सजा काट रहा मोहम्मद शहाबुद्दीन काफी समय से तिहाड़ जेल में बंद था। कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उसे दिल्ली के पंडित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

ब‍िहार में आरजेडी के कई नेताओं ने अपराधी और हत्यारे शहाबुद्दीन की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए उसे श्रद्धांजलि दी है। आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर शहाबुद्दीन के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

तेजस्वी ने अपने ट्वीट में लिखा है, “पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का कोरोना संक्रमण के कारण असमय निधन की दुःखद ख़बर पीड़ादायक है। ईश्वर उनको जन्नत में जगह दे, परिवार और शुभचिंतकों को संबल प्रदान करे। उनका निधन पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। दुख की इस घड़ी में राजद परिवार शोक संतप्त परिजनों के साथ है।”

तेजस्वी के इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए आरजेडी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा गया, “समस्त राजद परिवार उनके असामयिक निधन पर गहरी शोक संवेदना प्रकट करता है। ईश्वर शोकाकुल परिवार और शुभचिंतकों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करे। आपकी कमी हमेशा खलेगी। अल्लाह आपको जन्नत में आला मक़ाम दें।”

वहीं आरजेडी सिवान के ट्विटर हैंडल से लिखा गया, “सिवान के राजनीति के स्तंभ, पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब कोरोना से जंग हार गए। समस्त राजद परिवार उनके निधन पर गहरी संवेदना प्रकट करता है। ईश्वर उनके परिवार और सभी शुभचिंतकों को इस दुःख की घड़ी में हिम्मत दें। आपकी कमी हमेशा खलेगी। अल्लाह आपको जन्नत में आला मक़ाम दें।”

राजद के प्रदेश अध्यक्ष कारी सोहैब ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा, “इस कोरोना महामारी और सिस्टम ने हमारे दल व बिहार के कद्दावर नेता, कौम के हमदर्द और पूर्व लोकसभा सांसद जनाब मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब को हमसे छीन लिया। शहाबुद्दीन साहब के वफ़ात की ख़बर सुनकर दिली सदमा हुआ। अल्लाह उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता करे।”

इससे पहले शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) को उन्होंने ट्विटर पर लिखा था, “सिवान के पूर्व लोकसभा सांसद एवं बिहार के कद्दावर नेता जनाब मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब के कोरोना संक्रमित होने के बाद अचानक से उनकी तबीयत ज़्यादा खराब होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया है। आप तमाम लोग उनके सेहतयाबी के लिए ज्यादा से ज्यादा दुआ का एहतेमाम करे।”

आरजेडी नेता रविंद्र राय ने दुख व्यक्त करते हुए लिखा, “सिवान के पूर्व सांसद डॉ मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब आज इस दुनिया को छोड़ के चले गए। सिवान ने आज एक अपना विकास पुरुष नेता खो दिया। जिसका भरपाई शायद कभी नहीं किया जा सकता। इस महान शख्सियत को तहे दिल से नमन करता हूँ। भगवान इनके आत्मा को शांति प्रदान करे।”

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भी राजद के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के निधन पर शोक व्यक्त किया। नीतीश कुमार ने कहा कि वे बहुत लंबे समय तक सिवान से विधायक और सांसद रहे। सीएम ने उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की बात कही।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता आमिर उल्लाह खान ने भी शहाबुद्दीन की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इल्लिही राजिओन। शहाबुद्दीन साहब पूर्व सांसद का निधन, परिवार के सदस्यों के प्रति संवेदना। अल्लाह मरहूम की मकफ़रत फरमाए … अमीन।”

बता दें कि शहाबुद्दीन ने चंदा बाबू के दो बेटों को तेजाब से नहला कर मार डाला। इस मामले में उनका तीसरा बेटा गवाह था लेकिन इससे पहले कि वो अदालत पहुँचता, उसकी भी हत्या कर दी गई। लेकिन, इस मामले में आरोपित शहाबुद्दीन का उस समय कुछ नहीं हो पाया। नाम से ही सीवान और आसपास के इलाक़े थर-थर काँपते थे।

1980 के दशक तक सिवान की सियासत में आपराधिक तत्वों का बोलबाला था। 1980 के दशक में कई अपराधों में नाम आने के बाद शहाबुद्दीन ने सियासत में एंट्री की। एक दौर था, जब तेजाब कांड हो, चंद्रशेखर हत्याकांड हो या सिवान में कोई भी अपराध, शहाबुद्दीन का नाम हमेशा सुर्खियों में रहता था। जिले के अस्पताल हो, स्कूल हों या बैंक या फिर कोई भी दफ्तर… हर जगह ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर शहाबुद्दीन का कानून चलता था।

100000 मरीजों को हर दिन ऑक्सीजन दे रहा मुकेश अम्बानी का RIL, 1000 MT का प्रतिदिन उत्पादन

कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच रिलायंस समूह सक्रियता से देश की सहायता के लिए आगे आया है। महाराष्ट्र को 100 टन ऑक्सीजन मुफ्त में उपलब्ध कराने से लेकर अब देश का सबसे बड़ा ऑक्सीजन उत्पादक बन गया है रिलायंस समूह। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) देश में सबसे ज्यादा मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन कर रहा है। वर्तमान में रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी और उसके दूसरे अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से 1000 मीट्रिक टन मेडिकल लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है जो कि देश के कुल मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन का लगभग 11% है।

RIL के अनुसार कंपनी का मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन शून्य से आज 1000 मीट्रिक टन तक पहुँच गया है जिससे प्रतिदिन लगभग 100,000 मरीजों की ऑक्सीजन की आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है। कंपनी के अनुसार चेयरमैन मुकेश अंबानी खुद ही ऑक्सीजन के उत्पादन और उसके सरल परिवहन की समीक्षा कर रहे हैं।

RIL के द्वारा दिए गए आँकड़ों के अनुसार अप्रैल 2021 में रिलायंस के द्वारा 15,000 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन लगभग 15,00,000 मरीजों को मुफ्त में उपलब्ध कराई जा चुकी है।

रिलायंस कंपनी ने बताया कि ARAMCO, BP और भारतीय वायु सेना की सहायता से ऑक्सीजन परिवहन के लिए 24 ISO कंटेनर्स को एयरलिफ्ट किया जा चुका है और आगे अधिक ISO कंटेनर्स की व्यवस्था करने की योजना है।

RIL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा, “रिलायंस के लिए Covid-19 के इस बढ़ते संक्रमण के दौरान लोगों की जान बचाने से अधिक जरूरी कुछ भी नहीं है।“ उन्होंने जामनगर के अपने इंजीनियर्स पर गर्व करते हुए कहा कि उन्होंने संकट की इस घड़ी में मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति के लिए राष्ट्रसेवा के भाव से जो कार्य किया है वह सराहनीय है।

मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन और उसके परिवहन के लिए रिलायंस ने दो स्तर पर आधारित रणनीति बनाई है। पहली रणनीति है, जामनगर और दूसरे औद्योगिक केंद्रों में मेडिकल ऑक्सीजन के तीव्र उत्पादन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं पर ध्यान देना और दूसरी रणनीति है, लोडिंग-अनलोडिंग और परिवहन साधनों तथा प्रक्रियाओं का संवर्धन।

रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन और मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी ने कहा कि महामारी के इस दौर में एक-एक जान कीमती है और देश की सहायता करने के लिए रिलायंस सब कुछ करेगा।

रिलायंस ने बताया कि उसके द्वारा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘मुफ्त’ में मेडिकल ऑक्सीजन मुहैया कराई जा रही है। महामारी के दौरान देश में रिलायंस अब तक 55,000 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति कर चुका है।   

Remdesivir के लिए देश में हर जगह मारामारी, महाराष्ट्र के रायगढ़ में रोक: 90 मरीजों पर इंजेक्शन का साइड इफेक्ट

कोरोना वायरस के इलाज में रेमडेसिविर इंजेक्शन को बहुत कारगर माना जा रहा है। इसलिए देश में रेमडेसिविर की मारामारी बढ़ गई है। कई राज्यों में इसकी कालाबाजारी हो रही है। महाराष्ट्र सरकार इस इंजेक्शन को खरीदने के लिए काफी प्रयास कर रही है। लेकिन अब इस इंजेक्शन के साइड इफेक्ट (किसी खास कंपनी के) नजर आने लगे हैं।

ताजा मामला महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले का है। यहाँ 90 कोरोना मरीजों में इसके साइड इफेक्ट देखने को मिले हैं, जिसके चलते पूरे जिले में रेमडेसिविर इंजेक्शन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि (एफडीए) मंत्री राजेंद्र शिंगणे ने कहा कि रायगढ़ जिले में कम से कम 90 कोरोना मरीजों को एक विशेष ब्रांड की रेमडेसिविर की खुराक दी गई थी, जिसके गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिले हैं। इतनी ज्यादा तादाद में मरीजों की शिकायत मिलने के बाद पूरे जिले में इंजेक्शन के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है।

शिंगणे ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया, “यह घटना गुरुवार (29 अप्रैल 2021) को जिले के तीन अस्पतालों में सामने आई। जिन कोरोना मरीजों को इलाज के लिए हेटेरो हेल्थ केअर कंपनी का रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया गया था, उन सभी ने इससे साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव) की शिकायत की थी।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह चौंकाने वाली घटना तब सामने आई, जब इंजेक्शन देने के बाद कुछ मरीजों को सर्दी और बुखार की शिकायत शुरू हुई। इसके बाद तुरंत जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसके बारे में सूचित किया। मंत्री ने आश्वसत किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और सभी मरीजों की हालत अब स्थिर है। अब चिंता का करने की कोई जरूरत नहीं है।

बताया जा रहा है कि रायगढ़ जिले में हेटेरो हेल्थ केअर कंपनी की कोविफोर इंजेक्शन की 500 डोज भेजी गई थी। इस दवा को तकरीबन 120 मरीजों पर इस्तेमाल किया गया, जिसमें से 90 मरीजों में इसके साइड इफेक्ट्स होने की बात सामने आई है। 

मामला प्रकाश में आने के बाद मुंबई में एफडीए अधिकारियों ने कोविफोर ब्रांड से जुड़े लोगों को तुरंत निलंबित कर दिया है और संबंधित चिकित्सा अधिकारियों द्वारा इस पूरी घटना की जाँच होने तक अपने बैच को वापस बुला लिया है।

इस घटना के बाद अब इसके इस्तेमाल पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। रेमडेसिविर इंजेक्शन को कोरोना संक्रमण से बचाने वाला माना जाता है। इसे खरीदने के लिए लोगों को लंबी-लंबी लाइनें लगानी पड़ रही हैं। कुछ लोग जरूरतमंदों को ऊँचे दामों पर नकली इंजेक्शन बेच रहे हैं। ऐसे में रेमडेसिविर इंजेक्शन असली है या नकली, ये जानना बेहद जरूरी हो गया है।

हाल ही में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की डीसीपी और आईपीएस अधिकारी मोनिका भारद्वाज ने दो ट्वीट के जरिए रेमडेसिविर की नकली और असली शीशी की पहचान कैसे की जाए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने रेमडेसिविर इंजेक्शन के असली और नकली पैकेट की तस्वीरें शेयर करते हुए बताया है कि कि हम असली रेमडेसिविर के पैकेट की पहचान कैसे कर सकते हैं।