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‘आज तक’ के पत्रकार रोहित सरदाना का निधन: कोरोना से थे संक्रमित, सुधीर चौधरी ने दी सूचना

‘आज तक’ के लोकप्रिय न्यूज एंकर रोहित सरदाना का शुक्रवार (30 अप्रैल 2021) को निधन हो गया। हर्ट अटैक से उनकी मृत्यु हुई। वे कोरोना संक्रमित भी थे। बताया जा रहा है कि पहले उनकी माँ को संक्रमण हुआ था। गुरुवार को वे वेंटिलेटर पर थे। उन्हें काफी इंफेक्शन बताया जा रहा था।

‘जी न्यूज़’ के मुख्य संपादक एवं CEO सुधीर चौधरी ने सोशल मीडिया पर उनकी मृत्यु की सूचना दी। बता दें कि रोहित सरदाना ‘जी न्यूज़’ के शो ‘ताल ठोक के’ के एंकर हुए करते थे दोनों तब साथ काम करते थे। फिर उन्होंने ‘आज तक’ पर ‘दंगल’ डिबेट शो की एंकरिंग शुरू की। वो सोशल मीडिया पर भी सबसे लोकप्रिय पत्रकारों में से एक थे।

सुधीर चौधरी ने लिखा, “अब से थोड़ी पहले जितेंद्र शर्मा (ज़ी न्यूज़ के क्राइम एडिटर) का फ़ोन आया। उसने जो कहा सुनकर मेरे हाथ काँपने लगे। हमारे मित्र और सहयोगी रोहित सरदाना की मृत्यु की ख़बर थी। ये वायरस हमारे इतने क़रीब से किसी को उठा ले जाएगा ये कल्पना नहीं की थी। इसके लिए मैं तैयार नहीं था। ये भगवान की नाइंसाफ़ी है। ॐ शांति!” सोशल मीडिया में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

रोहित सरदाना अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी पत्नी और छोटी सी बेटी के साथ तस्वीरें शेयर करते थे। वो एक आस्थावान व्यक्ति थे, जो नवरात्रि के व्रत के दौरान खासे सक्रिय रहते थे और ‘कन्या पूजन’ व अन्य प्रक्रियाओं को पूरा कर लोगों को इसके बारे में जानकारी देते रहते थे। संक्रमित होने के बावजूद वे सोशल मीडिया पर लोगों की मदद के लिए उनके डिटेल्स पोस्ट कर रहे थे और कोरोना से जुड़ी खबरें शेयर कर रहे थे।

मुर्दाघर से श्मशान तक दलालों का नेटवर्क, मजिस्ट्रेट तक को नहीं बख्शा: राजस्थान में कोरोना संक्रमितों के दाह संस्कार के लिए भी वसूली

कोरोना संक्रमण से राजस्थान का हाल बेहाल है। इसकी आड़ में कई तरह के गोरखधंधे धड़ल्ले से चल रहे। हालत इतनी खराब है कि संक्रमितों की मौत के बाद उनके दाह संस्कार के लिए भी वसूली हो रही है। ये रुपया दलालों के हाथ में जा रहा है। आम आदमी की तो बात ही छोड़ दीजिए, उदयपुर में जाँच करने गए न्यायिक अधिकारी तक को दलालों ने नहीं बख्शा। न्यायिक अधिकारी ने 13 श्मशान घाटों पर छापेमारी की। हिरणमगरी सेक्टर-3 व गवर्द्धनविलास सेक्टर-13 स्थित मोक्षधाम श्मशानों में दलालों ने क्रमशः 15,000 और 2100 रुपए माँगे।

ये राशि तो सिर्फ कोरोना संक्रमित के शव को उठाने भर के लिए ही थी। चिता पर लड़की जमाने से लेकर शव को जलाने तक के कई अन्य खर्चों का हिसाब अलग से माँगा गया। मीडिया में खबरें आने के बाद अशोक नगर श्मशान घाट पर अधिकारियों ने 5 कर्मचारियों की नियुक्ति की और किसी व्यक्ति द्वारा रुपए माँगने पर प्रशासन को सूचना देने सम्बन्धी बोर्ड लगाए। उप महापौर ने इसकी निगरानी के लिए इंस्पेक्टर के नेतृत्व में एक टीम का गठन भी किया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष RP सोनी ने ADJ व प्राधिकरण के सचिव कुलदीप सूत्रधार को 13 श्मशान घाटों के निरीक्षण के लिए भेजा। इसी दौरान एक सेंटर पर उन्हें 15,000 तो एक पर 2500 रुपए माँगे गए। उन्होंने तत्क्षण इसकी रिपोर्ट बना कर निगम आयुक्त और SP को सौंपी। अंतिम संस्कार वाले मृत व्यक्ति के विवरण पंजीकृत कर दाह-संस्कार की व्यवस्था करने को कही गई। समस्त थानाध्यक्षों को भी दलालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा।

RP सोनी ने कहा कि संविधान किसी को न सिर्फ गरिमा से जीवन जीने का अधिकार देता है, बल्कि मृत्यु के बाद गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार का अधिकार भी देता है। उन्होंने कहा कि मरणोपरांत भी व्यक्ति का ये अधिकार सुरक्षित रहे, इसलिए सभी श्मशान घाटों का निरीक्षण किया जाए। बता दें कि अस्पताल से श्मशान ले जाने के लिए भी रुपए माँगे जाते हैं। दलाली के इस खेल में शव जलाने के लिए ही सिर्फ 5-8 हजार रुपए ले लिए जाते हैं।

शव जलाने में दलाली को लेकर ‘राजस्थान पत्रिका’ की कवरेज (साभार)

‘राजस्थान पत्रिका’ ने इस सम्बन्ध में पड़ताल की तो पाया कि मुर्दाघर से लेकर श्मशान तक ये रैकेट सक्रिय है। इसमें शामिल लोगों का कहना है कि वे जान जोखिम में डाल ये सब कर रहे हैं, इसलिए इतने रुपए देने तो बनते हैं। 15 दिन में उदयपुर जिले में 200 से अधिक ऐसे अंतिम संस्कार हुए हैं। लकड़ी से लेकर अन्य समान तक के रुपयों में दलाली वसूली जाती है, जबकि नगर निगम ने लाश पहुँचाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था कर रखी है।

मजिस्ट्रेट की जाँच के दौरान मिले दलाल ने भी कहा कि अगर व्यक्ति को कोविड-19 संक्रमण नहीं था तो वो 3000 रुपए में दाह-संस्कार कर देता। उस दलाल ने अपना नंबर भी दिया और लाश के वजन के हिसाब से 6 क्विंटल लकड़ी का इंतजाम करने को कहा। एक दलाल ने तो एक आईडी कार्ड भी लटका रखा था और उसने गर्व से बताया कि पिछली 4 पीढ़ियों से इस श्मशान घाट पर उसके ही परिवार का कब्ज़ा रहा है।

जो खुद पुलिस से भागता-छिपता रहा… आज वो चिदंबरम जनता को बगावत का पाठ पढ़ा रहा: हाय कॉन्ग्रेस, Bye कॉन्ग्रेस

पिछले एक वर्ष में विपक्ष की कुल भूमिका में दो तिहाई भूमिका कॉन्ग्रेस के नेताओं की रही है। राहुल गाँधी को जब भी संदेश देने की इच्छा हुई, वे किसी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ के साथ चर्चा करते दिखे। देश इतना आलसी कि चर्चा में उनके द्वारा प्रयोग किए गए दर्शन, छायावादी संदेश, मैनेजमेंट स्किल वगैरह को डीकोड करने के कठिन काम से कतराता रहा और दुनिया भर के बड़े-बड़े विशेषज्ञों के साथ की उनकी बातचीत को कॉमडी वीडियो बताकर डिस्कार्ड करता रहा।

उसके बाद और कॉन्ग्रेस नेता मैदान में आए। उन्होंने सरकार को तथाकथित सकारात्मक सलाह देने से लेकर गाली तक देने का काम किया। किसी ने बताया कि PM केयर फंड बनाकर देश के साथ छल किया गया है तो किसी ने बताया कि कोरोना पर काबू पाने को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। यह बात अलग है कि इसी PM केयर फंड द्वारा भेजे गए वेंटिलेटर कॉन्ग्रेस शासित पंजाब और झारखंड में वैसे ही रखे रह गए और कभी किसी अस्पताल में लगाए नहीं गए। महाराष्ट्र सरकार कोरोना की पहली लहर को भी काबू में न कर सकी। राजस्थान सरकार की प्राथमिकताएँ बार-बार लोगों को दिखाई दी।

देश में बनने वाले कोरोना के टीके को लेकर बार-बार अफ़वाहें फैलाई गईं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के साथ उनके एक और मंत्री ने टीके को लेकर जनता में भ्रम पैदा करने की कई बार कोशिश की। कॉन्ग्रेस के नेता इस बात पर बार-बार बोले कि राज्यों को अपने नियम बनाने की स्वतंत्रता दी जाए और जब स्वतंत्रता दे दी गई तो इन्हीं नेताओं ने कहना शुरू किया कि केंद्र सरकार ने पल्ला झाड़ लिया। विदेशी वैक्सीन के आयात को लेकर माहौल बनाया गया। केंद्र सरकार ने जब पैंतालीस वर्ष की आयु से ऊपर वालों को पहले टीका लगाना अपनी प्राथमिकता बताया तो कॉन्ग्रेस ने हर नागरिक को टीका देने की बात न केवल कही बल्कि उसका माहौल भी बनाया और जब केंद्र ने टीकाकरण के तृतीय चरण की घोषणा की तो कॉन्ग्रेस शासित राज्यों ने सबसे पहले यह कहा कि वे इस अभियान को शुरू नहीं कर सकेंगे।

दूसरी लहर इतनी तेज है कि देश भर की स्वास्थ्य व्यवस्था उसकी मार सहन नहीं कर पा रही। लगभग हर राज्य में संक्रमण इतनी तेज़ी से बढ़ा है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था वाले दुनिया के विकसित देश भी ऐसे संक्रमण को रोक पाने में सक्षम न होते। ऐसा नहीं कि सिस्टम की कमी उजागर नहीं हुई है। कोई ऐसा नहीं मानता पर कौन सी स्वास्थ्य व्यवस्था होती जो ऐसे विकट संक्रमण के सामने खड़ी हो पाती? डॉक्टर मनमोहन सिंह ने केंद्र को पत्र लिखकर सुझाव देने के नाम पर क्या किया, वह सबके सामने है।

इन सब के बीच सरकार की कमियों पर उसकी आलोचना अवश्य होनी चाहिए पर गत एक वर्ष से विपक्ष की लगातार नकारात्मक राजनीति ने अब एक नया ही मोड़ ले लिया है। कॉन्ग्रेसी नेताओं की इस नकारात्मक राजनीति की वर्षों पुरानी गौरवशाली परंपरा को तब एक नया आयाम मिला, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने जनता को सुझाव दिया कि वह सरकार के विरुद्ध बग़ावत कर दे। जो नेता कड़ी से कड़ी मेहनत करके देश के सबसे पुराने दल को पाँच सौ पैंतालीस सांसदों की लोकसभा में पचपन सीटें नहीं दिला पाते वे जनता को सुझाव दे रहे हैं कि वह सरकार के विरुद्ध बग़ावत कर दे। हो सकता है इस विश्वास के साथ दे रहे हों कि जनता उनकी बात मान ही लेगी और बग़ावत कर देगी।

किसी सरकार से परेशान होकर बग़ावत करना या न करना तो जनता के हाथ में है पर क्या ऐसे सुझाव देने के लिए पास रहने वाला नैतिक बल हर किसी के पास है? क्या चिदंबरम एक बार आत्मनिरीक्षण करेंगे कि वे कौन हैं? कि उनके और उनके परिवार के ऊपर कैसे-कैसे आरोप और चार्जशीट हैं? जनता की यादों से वह सीन अभी तक धूमिल नहीं हुआ होगा जब चिदंबरम गिरफ़्तारी से बचने के लिए पुलिस से भाग रहे थे। अभी तक जनता नहीं भूली होगी कि उनके पुत्र ने कैसे-कैसे कांड किए हैं। कि महाराष्ट्र से लेकर बंगाल तक कितने स्कैम में उनका या उनके परिवार का नाम है। यूपीए के दिनों के सबसे ताकतवर माने जाने वाले मंत्री की करतूतें किसे याद न होंगी?

यूपीए सरकार के स्कैम किसे याद नहीं हैं? किसे याद नहीं कि पिछले सत्तर वर्षों में लोकतांत्रिक मूल्यों की बात पर कॉन्ग्रेस और कॉन्ग्रेसी बार-बार कहाँ खड़े दिखाई दिए हैं? इंदिरा गाँधी द्वारा लगाए गए आपातकाल से लेकर यूपीए तक कॉन्ग्रेस ने लोकतंत्र में अपने अविश्वास को कैसे-कैसे और कितनी बार अपने कर्मों से उजागर नहीं किया है? पर आपातकाल, जो कि एक असामान्य घटना थी, को छोड़ कर कभी किसी विपक्षी नेता ने जानता को बग़ावत के लिए इस तरह से उकसाया है? जब भी ऐसा समय आया है, विपक्ष चुनाव का सहारा लेकर ही राजनीतिक लड़ाई लड़ने के पक्ष में दिखाई दिया।

जिन बातों के आधार पर चिदंबरम जनता को बग़ावत की सलाह दे रहे हैं उन बातों की गंभीरता और उनकी सत्यता को लेकर बहस एक अलग बात है पर बग़ावत के लिए उकसाना क्या किसी भी दृष्टि से एक अच्छे लोकतंत्र की बात हो सकती है? वो भी तब जब देश एक असाधारण महामारी से जूझ रहा है? दुनिया भर के देश इस महामारी से पीड़ित हुए हैं। विकसित अमेरिका से लेकर अति विकसित यूरोप तक, कौन सा देश ऐसा है जो इससे अछूता रहा हो? जहाँ की स्वास्थ्य व्यवस्था ने हाथ खड़े न कर दिए हों? पर क्या वहाँ के विपक्ष ने भी उन देशों की जनता को बग़ावत करने का सुझाव ही दिया होगा?

भारतवर्ष आज कोरोना से पीड़ित है। हो सकता है कल और अधिक पीड़ित हो जाएँ पर ऐसा नहीं हो सकता कि हमेशा पीड़ित ही रहेगा। ऐसा नहीं होगा कि यह संकट देश से जाएगा ही नहीं। अवश्य जाएगा पर चिदंबरम का बग़ावत वाला यह सुझाव जनता को हमेशा याद रह जाएगा। साथ ही यह भी याद रहेगा कि कैसे विपक्ष के एक नेता या एक दल ने संकट की घड़ी में लोकतांत्रिक मूल्यों को ताक पर रखकर ऐसी बात कही थी जो दीर्घकालिक दृष्टि से देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए न केवल घातक थी बल्कि दुनिया भर में स्वस्थ्य लोकतंत्र की परम्पराओं पर काला धब्बा थी।

कोरोना टीकाकरण में ‘रिजर्वेशन’? छत्तीसगढ़ के कॉन्ग्रेसी CM का PM मोदी को पत्र, बताया किनको मिले सर्वोच्च प्राथमिकता

छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेसी सरकार के मुखिया भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर कोरोना टीकाकरण में भी ‘रिजर्वेशन’ की माँग की है। बता दें कि बुधवार (अप्रैल 28, 2021) से 18 वर्ष से लेकर 44 वर्ष तक की उम्र के लोगों को वैक्सीन देने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया और 1 मई से टीकाकरण भी प्रारंभ हो जाएगा। ‘CoWin’ और ‘आरोग्य सेतु’ के माध्यम से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चालू है और 2 करोड़ से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में याद दिलाया है कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशानुसार इस आयु वर्ग के लोगों के टीकाकरण हेतु वैक्सीन की खरीद राज्यों द्वारा ही की जानी है। उन्होंने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ राज्य ने कोविशील्ड और कोवैक्सीन की 25-25 लाख डोजेज का ऑर्डर भी दे दिया है। उन्होंने बताया कि जहाँ कोविशील्ड बनाने वाली SII ने अब तक कोई उत्तर नहीं दिया है, कोवैक्सीन निर्माता ‘भारत बायोटेक’ ने जवाब दिया है।

CM बघेल के अनुसार, ‘भारत बायोटेक’ ने राज्य से कहा है कि मई महीने तक मात्र 3 लाख वैक्सीन की डोज उपलब्ध कराई जा सकती है। उन्होंने चिंता जताई है कि रजिस्ट्रेशन की संख्या और ज़रूरतों को देखते हुए उस अनुपात में वैक्सीन की डोज उपलब्ध ही नहीं है। उन्होंने आशंका जताई है कि टीकाकरण के लिए बनाई गई सोशल साइट्स में भीड़ प्रबंधन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।

उन्होंने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वैक्सीन किसको पहले दिया जाए और किसको बाद में, इसके लिए कोई प्राथमिकता तय की जानी चाहिए। उन्होंने माँग की है कि प्राथमिकता के क्रम में ‘सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग’ को तवज्जो दी जाए। उन्होंने आशंका जताई है कि अगर रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था सिर्फ ऑनलाइन ही रही तो इससे गरीब और पिछड़े वंचित रह जाएँगे, जो तकनीक से दूर हैं।

भूपेश बघेल ने कहा है कि पूर्व में जिस तरह 45 वर्ष से ऊपर की उम्र के लोगों को टीकाकरण सेंटर पर जाकर ही रजिस्ट्रेशन और वैक्सीनेशन कराने की व्यवस्था दी गई थी, ठीक उसी तरह 18-44 आयु वर्ग के लोगों के लिए भी व्यवस्था की जाए। बता दें कि छत्तीसगढ़ में फ़िलहाल कोरोना के 1,17,910 सक्रिय मामले हैं और पिछले 24 घंटों में यहाँ 15,804 नए मामले सामने आए हैं।

‘असीमित नहीं हैं मजहबी अधिकार’: घर में ईसाई प्रार्थना सभा के लिए हाई कोर्ट ने प्रशासनिक अनुमति को जरूरी बताया

मद्रास हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि मजहबी अधिकार भी असीमित नहीं हैं। इसके साथ ही अदालत ने गुरुवार (29 अप्रैल 2021) को वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें कन्याकुमारी के जिला कलेक्टर के आदेश को चुनौती दी गई थी।

जिला कलेक्टर ने घर में ईसाई प्रार्थना सभा के आयोजन पर रोक लगा दी थी। इसे टी विल्सन ने चुनौती दी थी। हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के जस्टिस एन आनंद वेंकटेश ने कहा कि विल्सन अपने घर में निजी प्रार्थना नहीं कर रहे थे। बकायदा लोगों को जुटाकर प्रार्थना सभा कर रहे थे, जिसके लिए जिला प्रशासन की अनुमति आवश्यक है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सांप्रदायिक सद्भावना को ठेस पहुँचाते हुए उनकी निजी प्रार्थना को लेकर झूठी शिकायत की गई थी। डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ने अदालत के सामने फोटोग्राफ्स और अन्य सबूत पेश किए जिससे पता चल रहा था कि विल्सन के घर में नियमित तौर पर सुबह के 9 बजे से दोपहर के 12 बजे तक क्रिश्चियन रिलीजियस ट्रस्ट की ओर से प्रार्थना सभा का आयोजन होता था। इस दौरान स्पीकर और माइक्रोफोन का भी इस्तेमाल होता था। इससे होने वाली परेशानियों को लेकर विल्सन के पड़ोसियों ने जिला प्रशासन से शिकायत की थी।

विल्सन ने इसे निजी प्रार्थना सभा बताते हुए 2016 में अदालत का दरवाजा खटखटाया था। जस्टिस वेंकटेश ने कहा कि मजहबी अधिकारों के भी असीमित होने का दावा नहीं किया जा सकता। यदि यह दूसरों के अधिकारों को प्रभावित करता है तो इसके लिए आवश्यक अनुमति लेनी जरूरी है। उन्होंने सुनवाई के दौरान पूर्व के अदालती निर्णयों और प्रार्थनाओं को लेकर बाइबिल के संदर्भों का भी हवाला दिया।

अदालत ने कहा, “प्रार्थना की आड़ में याचिकाकर्ता वास्तव में मजहबी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रार्थना हॉल का निर्माण कर रहे थे। किसी भी धार्मिक आस्था का आधार सच्चाई है और कोई भी धर्म किसी भी ऐसे कार्य को बर्दाश्त नहीं करता है, जो किसी व्यक्ति को सच्चाई से दूर ले जाए। वर्तमान मामले में, याचिकाकर्ता जो खुद को धर्मनिष्ठ ईसाई होने का दावा करता है, वह सच्चाई से कोसों दूर है।” कोर्ट ने कहा कि इस तरह की सार्वजनिक प्रार्थना के लिए याचिकाकर्ता को तमिलनाडु पंचायत भवन नियमावली, 1997 के नियम 4 (3) के तहत जिला कलेक्टर से अनुमति लेनी चाहिए थी।

मोदी सरकार फेसबुक को कंट्रोल कर रही, हैशटैग हटवा रही: विदेशी मीडिया की भ्रामक खबर को मिला जवाब

भारत सरकार ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के उस दावे को शरारती प्रयास करार दिया है, जिसमें उसने कहा था कि भारत सरकार देश में सोशल मीडिया को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। ट्विटर पर पोस्ट किए गए अपने संदेश में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट भ्रामक थी और इसका इरादा शरारतपूर्ण था।

WSJ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, सूचना और प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने कहा, “वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक स्टोरी जिसमें सार्वजनिक असंतोष पर अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार द्वारा फेसबुक को कुछ खास हैशटैग हटाने के लिए कहने की कोशिश की गई है, वह तथ्यों में भ्रामक है और इरादे में शरारतीपूर्ण है। सरकार ने इस हैशटैग को हटाने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया है। फेसबुक ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसे गलती से हटा दिया गया था।”

सरकार ने आगे एक राष्ट्र के रूप में महामारी से सामूहिक लड़ाई के लिए मीडिया हाउसों और करोड़ों आम भारतीयों को साथ मिलकर चलने की जरूरत है। अपने अगले ट्वीट में सूचना और प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने कहा, ”हमारे फ्रंट-लाइन वर्कर्स और चिकित्सा पेशेवरों के प्रयासों के लिए एक ताकत के रूप में कार्य करने में मीडिया की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। इस तरह के संवेदनशील समय में, हम मीडिया से करोड़ों आम भारतीयों के साथ भागीदारी करने का आग्रह करते हैं ताकि हम महामारी से सामूहिक रूप से लड़ सकें।”

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा कि सरकार ने ब्लॉक करवाया हैशटैग

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने 28 अप्रैल की अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत सरकार ने हैशटैग ब्लॉक करवा दिया था। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा कि फेसबुक ने अस्थायी रूप से एक हैशटैग को ब्लॉक कर दिया था, जिसमें लोगों ने पीएम मोदी से इस्तीफा देने की माँग की थी। बाद में हैशटैग फिर से बहाल कर दिया गया। WSJ ने लिखा, “#ResignModi हैशटैग को फेसबुक पर कई घंटों के लिए ब्लॉक कर दिया गया था, जो कि गहराते कोविड-19 संकट के बीच भारत की प्रतिक्रिया पर सार्वजनिक असंतोष को रोकने का सरकार का प्रयास था।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले मोदी सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे ट्विटर, फेसबुक, गूगल आदि से इस कटेंट को हटाने के लिए कहा था।

विवाद पर फेसबुक का स्पष्टीकरण

इस विवाद पर फेसबुक के नीति संचार निदेशक एंडी स्टोन ने एक ट्वीट के जरिए जवाब दिया और कहा, “हमने अस्थायी रूप से गलती से इस हैशटैग को ब्लॉक कर दिया, इसलिए नहीं कि भारत सरकार ने हमसे ऐसा करने को कहा था, और इसे बहाल कर दिया गया है।”

फेसबुक के नीति संचार निदेशक का जवाब

फेसबुक ने इस ट्वीट के जरिए साफ कर दिया कि उसके प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक उस हैशटैग से भारत सरकार का कोई लेनादेना नहीं था। लेकिन कुछ मीडिया हाउस ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट को उठाया और इसे भारत सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा के रूप में चलाया।

भारत सरकार के खिलाफ WSJ की मार्च 2021 की रिपोर्ट

यह पहली बार नहीं है, जब वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भारत सरकार के खिलाफ ऐसी भ्रामक खबर प्रकाशित की है। इससे पहले मार्च 2021 में भी, WSJ ने “भारत ने फेसबुक, वॉट्सऐप और ट्विटर के कर्मचारियों को दी जेल भेजने की धमकी” शीर्षक के साथ एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। सूचना और प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने उस रिपोर्ट को भी इंगित किया और कहा कि यह भी फर्जी खबर थी। मंत्रालय ने कहा, “यह उल्लेख करना उचित है कि 5 मार्च, 2021 को, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने शीर्षक- “भारत ने फेसबुक, वॉट्सऐप और ट्विटर के कर्मचारियों को दी जेल भेजने की धमकी” के साथ एक फर्जी खबर प्रकाशित की थी। सरकार ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को इस पूरी तरह से नकली और निर्मित कहानी का आधिकारिक खंडन भेजा था।”

सरकार ने पहले भी WSJ की भ्रामक खबर का किया था खंडन

ऑपइंडिया के हाथ भारत सरकार द्वारा WSJ को भेजा वह खत है, जिसमें भारत सरकार ने WSJ को लिखा था, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव अजय प्रकाश साहनी ने कहा कि उपरोक्त लेख केवल तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं बल्कि भ्रामक भी था। उन्होंने कहा कि सरकारी ने किसी भी संवाद के जरिए, न तो लिखित या मौखिक, कभी भी इन सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के कर्मचारियों को जेल भेजने के लिए धमकी नहीं दी है।

उन्होंने कहा, “इसलिए, गहरे अफसोस के साथ, मैं यह कहना चाहता हूँ कि वॉल स्ट्रीट जर्नल की कल्पना किसी भी तथ्य से परे है और दुनिया की सबसे बड़ी खुली इंटरनेट अर्थव्यवस्था को बदनाम करने का प्रयास है जो इंटरनेट की सार्वभौमिक, आसान और सस्ती उपलब्धता और भारतीयों की अभिनव भावना के कारण संपन्न है।”

भारत सरकार ने संसद में जवाब देते हुए कहा कि ट्विटर पर प्रतिबंध लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं था, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। “अगर कुछ लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आतंकवाद, हिंसा, आतंकवाद के कारणों, चाइल्ड पोर्नोग्राफी और अवैध गतिविधियों की एक पूरी श्रृंखला का दुरुपयोग करते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार माना जाएगा।”

‘दिल्ली में लागू हो राष्ट्रपति शासन, वरना सड़कों पर बिछ जाएँगी लाशें’: AAP विधायक के दोस्त को नहीं मिली दवाइयाँ और ऑक्सीजन

दिल्ली में कोरोना के कुप्रबंधन को लेकर आम आदमी पार्टी (AA)) की सरकार आम जनता और न्यायपालिका के निशाने पर तो है ही, अब उसके अपने ही विधायक ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्वकी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। दिल्ली के पुराने नेताओं में से एक और चाँदनी चौक लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मटिया महल विधानसभा से विधायक शोएब इकबाल ने कहा है कि उन्हें आज दिल्ली की हालत देख कर रोना आ रहा है।

शोएब इकबाल ने कहा, “मेरा दिल मचल रहा है। मैं परेशान हूँ। मुझे रात भर नींद नहीं आ रही है। जिस तरह से लोगों की बेचैनी देख रहा हूँ… ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। दवाइयाँ नहीं मिल रही हैं। मेरा एक दोस्त इस वक़्त तड़प रहा है। अस्पताल में उसके पास न ऑक्सीजन है, न वेंटिलेटर है। मेरे पास रात से ही उसका पर्चा पड़ा हुआ है। उसे मैं रेमडेसिविर इंजेक्शन कहाँ से लाकर दूँ? कहीं उसे कुछ हो न जाए!”

AAP विधायक शोएब इकबाल ने कहा कि उनके दोस्त की बच्चियाँ तड़प रही हैं। उसे ‘न्यू लाइफ हॉस्पिटल’ में भर्ती कराया गया है। विधायक ने कहा कि पैसा है, लेकिन इसके बावजूद उसे न अस्पताल मिल रहा है और न दवाइयाँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें उनके MLA होने पर फख्र की जगह बेइज्जती महसूस हो रही है, क्योंकि सरकार साथ नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि इतना वरिष्ठ विधायक होने के बावजूद ये सब हो रहा है।

शोएब इक़बाल ने कहा कि इस आपदा में किसी से संपर्क नहीं किया जा सकता और ये तक नहीं पता है कि कौन नोडल ऑफिसर है या किसकी क्या जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “मैं ये चाहूँगा कि दिल्ली हाई कोर्ट तुरंत प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला ले, वरना जैसी स्थिति है यहाँ सड़कों पर लाशें बिछ जाएँगी। बहुत बुरी स्थिति है।” शोएब इक़बाल ने तुरंत प्रभाव से दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने की गुजारिश की

बता दें कि शोएब इकबाल 1993 में पहली बार जनता दल के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके अगले साल से लेकर अब तक वो कई बार दिल्ली विधानसभा की विभिन्न समितियों के सदस्य रहे हैं। 2003 में जदयू के टिकट पर विधायक बने। 2008 में उन्होंने लोजपा से जीत दर्ज की। 2013 में फिर जदयू में लौटे और विधायक बने। 2020 में उन्होंने AAP का दामन थामा और जीत दर्ज की। वो दिल्ली विधानसभा के डिप्टी स्पीकर और प्रोटेम स्पीकर भी रहे हैं।

साथी कैदियों को ‘कट्टर’ बनाया, खुद को ‘कट्टरता मुक्त’ दिखा बाहर निकला: उस्मान खान ने 2 को गोद डाला था

ब्रिटेन के मशहूर लंदन ब्रिज के पास 29 नवंबर 2019 को हुई आतंकी घटना में 2 लोगों की मौत हो गई थी। आतंकी उस्मान खान को भी मौके पर ही गोली मारकर ढेर कर दिया गया था। अब उस्मान खान को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

इसके मुताबिक वह जेल अधिकारियों को मूर्ख बनाकर बाहर निकलने में कामयाब हुआ था। असल में उसने अधिकारियों को विश्वास दिला दिया था कि वो Deradicalise (कट्टरता मुक्त) हो गया है। लेकिन वास्तविकता ये थी कि उसने जेल के अन्य कैदियों को भी कट्टर बना दिया था।

8 साल जेल में बिताने के बाद दिसंबर 2018 में लाइसेंस (पैरोल) पर वह रिहा हुआ था। इसके करीब एक साल बाद लंदन ब्रिज के करीब ‘फिशमोंगर्स हॉल’ में किए गए हमले में उसने दो लोगों को चाकू से गोद डाला था।

उस्मान खान ने जैक मेरिट (25) और सस्किया जॉन्स (23) की चाकू से गोद कर हत्या की थी। ये दोनों ही कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से जुड़े थे और जेल में बंद कैदियों के पुनर्वास व सुधार पर कार्य कर रहे थे। उस्मान खान ने हमले के समय नकली आत्मघाती बनियान पहन रखा था। हमले के लगभग 13 मिनट बाद लंदन ब्रिज पर उसे मार गिराया गया।

हमले के कुछ दिन पहले उसने एक मोटा और बड़ा सा जैकेट खरीदा था। ऐसे उसने नकली आत्मघाती बनियान को ढकने के लिए किया था। व्हाइटमूर जेल में आतंकरोधी अभियान के मुखिया स्टीव मचिन भी उस कॉन्फ्रेंस में बतौर अतिथि आए थे जिसमें यह हमला हुआ था। स्टीव ने बताया कि उन्होंने उस्मान से पूछा भी था कि उसने इतने बड़े कपड़े क्यों पहने हैं। जवाब में उसने ठंड होने की बात कही थी।

जेल से छोड़े जाने के बाद पहले उसे एक प्रोबेशन हॉस्टल में रखा गया था। उसके बाद उसने खुद के घर का इंतजाम कर लिया था। उस कॉन्फ्रेंस में उसके आसपास में कई लोग बैठे हुए थे। इनमें जेल के अधिकारियों से लेकर कई अन्य अतिथि थे जो कैदियों के पुनर्वास के प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे थे। एक पुलिस अधिकारी ने उस्मान खान से उसके परिवार के बारे में पूछा था तो उसने खूब बातें भी की और एक कहानी सुनाई। उस्मान खान ने बताया कि कैसे उसकी बहन अपने बच्चों को लेकर जब स्कूल गई थी और उसे बच्चों की माँ के बदले लोगों ने बहन ही समझ लिया।

उस्मान खान को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने को लेकर फरवरी 2012 में आठ साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर बमबारी करने की योजना बना रहा था। वह पाकिस्तान मूल का था और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर में एक आतंकवादी कैंप स्थापित करना चाहता था

असम और पुडुचेरी में BJP सरकार, बंगाल में भगवा लहर: कॉन्ग्रेस तमिलनाडु में बस ‘सहायक’, वामपंथ केरल में सिमटा

2021 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मतदान आज (अप्रैल 29, 2021) मतदान समाप्त हुआ। पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में वोट पड़े। अब सिर्फ 2 मई को नतीजों का इंतजार है। बंगाल से पहले असम में तीन चरणों में मतदान पूरे हुए थे। वहीं केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में 1 चरण में ही चुनाव संपन्न कराए गए थे।

असम, पुडुच्चेरी, तमिलनाडु और केरल में क्रमशः 83.81%, 81.70%, 72.79% और 74.05% मतदान हुआ। अब चूँकि मतदान पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं ऐसे में अलग-अलग न्यूज एजेंसियाँ अपने एग्जिट पोल जारी कर रही हैं। आइए जानें 5 राज्यों को लेकर अलग अलग एग्जिट पोल क्या कहते हैं:

पश्चिम बंगाल की 294 सीट पर एग्जिट पोल:

  • बंगाल की 294 विधानसभा सीट पर प्रदीप भंडारी के जन की बात ने अनुमान लगाया है कि भाजपा को इस बार राज्य 162-185 सीटें मिलेंगी। तृणमूल के हाथ 121-104 आएँगी जबकि संजुक्त मोर्चा 9-3 पर सिमटेगा।
  • रिपब्लिक टीवी- CNX के मुताबिक TMC को 128 से 138 सीटें मिलने की संभावना है जबकि बीजेपी बीजेपी+ को 138 से 148 सीटें मिल रही हैं। कॉन्ग्रेस का गठबंधन 11 से 21 सीटें हासिल कर सकता है।
  • टाइम्स नाउ-सीवी ओटर एग्जिट पोल के अनुसार टीएमसी को 158 सीटें, बीजेपी को 115 सीटें, कॉन्ग्रेस, लेफ्ट, आईएसएफ गठबंधन को 19 सीटें मिलने का अनुमान है
  • इंडिया टीवी- Peoples Pulse के मुताबिक, भाजपा के पास 173-192 सीट, टीएमसी को 64-88 सीट मिलने की उम्मीद है।
  • एबीपी एग्जिट पोल के मुताबिक, राज्य में TMC को 152-164 सीटें, बीजेपी को 109-121 सीटें, कॉन्ग्रेस को 14- 25 सीटें मिल सकती हैं।

असम की 126 सीट पर एग्जिट पोल

एबीपी और सी वोटर के एग्जिट पोल के मुताबिक, बीजेपी को 58-71 सीटें मिल सकती हैं जबकि कॉन्ग्रेस को 53-66 सीटें मिलती दिख रही हैं। इसके अलावा अन्य के खाते में 5 सीटें जा सकती हैं।

आज तक के एग्जिट पोल की मानें तो बीजेपी+ को 75 से 85 और कॉन्ग्रेस को 40-50 सीटें मिलेंगी। अन्य के खाते में 1-4 सीटें जा सकती हैं।

पोलस्ट्रेट एग्जिट पोल में भाजपा गठबंधन को 59 से 69 सीटें, कॉन्ग्रेस गठबंधन को 55 से 65 सीटें, अन्य को 0 से 5 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

न्यूज 24 के टुडेज चाणक्य एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा गठबंधन काफी आगे आते हुए 61 से 79 सीटों के साथ करीब 43 फीसदी वोट प्रतिशत हासिल करेगा। कॉन्ग्रेस गठबंधन- 47 से 65 पाएगा। अन्य को 3 सीट मिलेगी।

रिपब्लिक-सीएनएक्स एग्जिट पोल कहता है कि भाजपा के मुकाबले कॉन्ग्रेस सत्ता से बहुत दूर है। उनके अनुसार भाजपा गठबंधन 74 से 84 सीटें पाएगा। कॉन्ग्रेस गठबंधन- 40 से 50 सीटें अन्य को 1 से 3 सीटें मिलेंगी।

तमिलनाडु की 234 सीट पर क्या कहते हैं एग्जिट पोल

रिपब्लिक-सीएनएक्स के अनुमान कहते हैं कि तमिलनाडु में डीएमके-कॉन्ग्रेस की सरकार आएगी। गठबंधन को 150-170 सीटें मिलने की उम्मीद है। वहीं, AIADMK-BJP गठबंधन को को 58-68 सीटें मिलेंगी। AIMMK को भी 4-6 सीटें मिलने का अनुमान है।

न्यूज 24-टुडेज चाणक्य के अनुसार DMK-कॉन्ग्रेस के पास 175 से ज्यादा सीटें AIADMK-BJP को 57 सीटें और अन्य को केवल 2 सीट मिलेगी।

एबीपी-सी वोटर कहता है, राज्य में डीएमके गठबंधन को 160-172 सीटें आएँगी जबकि AIADMK+ को 58-70 सीटें मिलने का अनुमान है। अन्य के पास 0-7 सीटें जा सकती हैं।

इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया के सर्वे में DMK+ को 175-195 सीटें, बीजेपी+एआईएडीएमके को 38-54 सीटें मिल सकती हैं। अन्य के खाते में 1-2 सीटें आ सकती हैं।

पुडुचेरी के लिए एग्जिट पोल

सी-वोटर के मुताबिक बीजेपी को 16 -20 सीटें मिलने का अनुमान है। कॉन्ग्रेस को 11-13 सीटें और अन्य के खाते में 1 से 2 सीटें जाती दिखाई दे रही हैं।

रिपब्लिक सीएनएक्स एक्जिट पोल ने भाजपा को 19-23 सीटें, कॉन्ग्रेस को 6-10 सीटें और अन्य को शून्य मिलने का अनुमान लगाया है।

इंडिया टुडे-एक्सिस-माय-इंडिया के अनुसार NDA के खाते में 20 -36 सीटें, कॉन्ग्रेस+ के खाते में 6-10 सीटों और अन्य को शून्य मिल सकती हैं। 

TV9 भारतवर्ष पोलस्ट्रेट के अनुसार बीजेपी गठबंधन को 17 से 19 सीट, कॉन्ग्रेस गठबंधन को 11, एएमएमके गठबंधन-00 मिलेगा।

केरल एग्जिट पोल

इंडिया टुडे-एक्सिस-माय-इंडिया के अनुसार केरल में एक बार फिर लेफ्ट की सरकार बनेगी। पोल में एलडीएफ गठबंधन को 104-120 सीट, यूडीएफ गठबंधन को 20-36 सीट, मिल रही है।

एबीपी-सी वोटर के एग्जिट पोल में एलडीएफ को 71 से 77 सीटें,  यूडीएफ को 62 से 68 सीटें, एनडीए को 0 से 2 सीटें मिलती दिखाई गई हैं।

रिपब्लिक-एसीएनएक्स एग्जिट पोल कहता है कि केरल में एलडीएफ- 72 से 80 सीटें, यूडीएफ- 58 से 64 सीटें, एनडीए- 1 से 5 सीटें हासिल करेगा।

टीवी 9 भारतवर्ष का पोलस्ट्रे एग्जिट पोल कहता है- एलडीएफ- 72 से 80 सीटें, यूडीएफ- 59 से 69 सीटें, एनडीए-0 से 2 सीटें, अन्य- 0 से 6 सीटें मिलेंगी।

न्यूज 24 का टुडेज चाणक्य एग्जिट पोल के मुताबिक एलडीएफ- 93 से 111 सीटें, यूडीएफ- 26 से 44 सीटें, एनडीए- 0 से 6 सीटें, अन्य- 0 से 3 सीटें मिलेंगी।

क्या होता है एग्जिट पोल?

एग्जिट पोल मतदान केंद्रों से बाहर निकलने के तुरंत बाद मतदाताओं के सर्वेक्षण पर आधारित होता है। आमतौर पर, समाचार पत्रों और TV चैनलों के लिए काम करने वाली निजी सर्वेक्षण फर्म या संस्थाएँ मतदाताओं से पूछती हैं कि उन्होंने वास्तव में किसे वोट दिया और यह मानते हुए कि उन्हें सही उत्तर मिले हैं, वे परिणाम के रुझान की भविष्यवाणी करते हैं।

एग्जिट पोल पर आधारित चुनावी भविष्यवाणियों ने पिछले एक दशक में टेलीविजन की पहुँच को भारत में डिजिटल समाचार पोर्टलों के बढ़ने के साथ काफी बढ़ा दिया है। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ऐसे एग्जिट पोल अक्सर फेल होते हैं, जिसकी बड़ी वजह है सैंपल साइज का छोटा होना और दूसरा जिनसे पूछा गया – उन्होंने कितना सही जवाब दिया।

6 साल की बेटी रात भर पापा के साथ सोती रही… उठी तो वीडियो गेम खेलने लगी: वीडियो कॉल पर पता चला मौत का मामला

कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत के साथ ही देश में कई ऐसी खबरें आईं, जिन्होंने सभी के हृदय को झकझोर कर रख दिया। चीन की इस महामारी ने न जाने कितनों के घर उजाड़ दिए और ऐसा दुख दिया, जिससे जीवन भर न उबरा जा सके। कई लोगों के सगे-संबंधी उन्हें छोड़कर इस दुनिया से चले गए तो कइयों को व्यापार या नौकरी में ऐसा नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई करना उनके लिए लगभग असंभव है। ऐसी ही खबरों के बीच बिहार के पटना से एक हृदय विदारक खबर आई, जिसे पढ़कर किसी का भी मन व्यथित हो जाए।

प्रभात कुमार नालंदा के इस्लामपुर के निवासी थे लेकिन रामकृष्ण नगर की मधुबन कॉलोनी में किराए के मकान में रहते थे और पटना जंक्शन के पास हार्डवेयर की एक दुकान चलाते थे। पत्नी से अनबन थी तो वह अपने मायके बिहटा में रहती थी। प्रभात के साथ उनकी 6 साल की मासूम बेटी रहती थी। कुछ दिनों पहले ही प्रभात का स्वास्थ्य खराब हुआ। उन्हें बुखार और साँस लेने में समस्या हुई। अपने दोस्त से उन्होंने इसकी चर्चा की तो दोस्त ने घर पर रह कर आराम करने की सलाह दी।

कई दिनों तक खराब स्वास्थ्य के चलते प्रभात कुमार की मृत्यु हो गई। मासूम बेटी को इसका अंदाजा भी नहीं था कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। अबोध बच्ची अपने पिता के शव के पास बैठी रही और रात होने पर शव के साथ सो भी गई। सुबह उठी तो अपने पिता के फोन पर वीडियो गेम खेलने लगी।

मंगलवार को मकान मालिक मनोहर जब कमरे में पहुँचे तो प्रभात को बिस्तर पर लेटा हुआ पाया। बेटी ने बताया कि उसके पिता सो रहे हैं। मनोहर ने बच्ची को बिस्किट का पैकेट दिया और चले गए।

तीन दिन से जब प्रभात कुमार अपनी दुकान नहीं पहुँचे तब उनके दोस्त राजेश ने हालचाल जानने के लिए उन्हें फोन किया। फोन बच्ची ने ही उठाया और कहा कि पापा सो रहे हैं, जग नहीं रहे। कुछ देर बाद राजेश ने वीडियो कॉल किया और बच्ची से कहा कि वह फोन का कैमरा अपने पिता की तरफ करे। प्रभात कुमार के शरीर में कोई हरकत न दिखने पर राजेश ने कोरोना हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दी।

सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी घटना स्थल पर पहुँचे। चूँकि मृतक प्रभात कुमार में कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण थे, ऐसे में उनके शव का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत किया गया। बच्ची को फिलहाल मकान मालिक को सौंप दिया गया।