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‘मैं सन्न हूँ… वह मेरी आँखें थी’: वानखेड़े में सचिन के पहले मैच में स्कोरर थे सुहास, अब कोरोना ने किया ‘नेत्रहीन’

कोरोना संक्रमण ने कई लोगों से जीने का सहारा छीन लिया। ऐसे ही लोगों में से एक हैं ठाणे के सुहास मराठे। सुहास पेशे से क्रिकेट के आँकड़ों, रिकॉर्ड आदि को संकलित (स्टैट्समैन) करने का काम करते हैं। लेकिन पिछले दिनों जब उनकी पत्नी सुचेता ने कोविड के कारण दम तोड़ दिया तो वह भी बुरी तरह टूट गए।

ऐसा नहीं है कि सुहास मराठे, पत्नी के गुजरने के बाद होश खो बैठे या उनके भीतर काम करने की इच्छा नहीं बची। उनके सामने परेशानी ये है कि वह नेत्रहीन हैं और इतने सालों से पत्नी ही उनके पास आँखें बनकर साथ-साथ थीं। आज जब सुचेता जा चुकी हैं तो वह कहते हैं, “मैं सन्न हूँ। टूट गया हूँ। वह मेरी आँखें थी।”

मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, 69 वर्षीय सुहास मराठे की सुचेता से शादी 38 साल पहले हुई थी। सुहास को बाईं आँख से शुरुआत से ही नहीं दिखता था। लेकिन 2002 में कॉर्निया ट्रांसप्लांट के बाद वह पूरी तरह नेत्रहीन हो गए। अपनी पत्नी को याद करते हुए सुहास कहते हैं, “मेरी पत्नी अखबार और मैग्जीन पढ़कर मेरी मदद करती थी। उसने विभिन्न प्रकाशनों में आँकड़ों को संकलित करने में मेरी मदद की थी।”

सुहास मराठे के बारे में बता दें कि 1992-1993 में जब सचिन तेंदुलकर ने वानखेड़े स्टेडियम में अपना पहला टेस्ट मैच खेला तो वह वहाँ ऑल इंडिया रेडियो मराठी कमेंट्री के स्कोरर थे। इसके अतिरिक्त भी कई मैचों में वे स्कोर संकलित करने का काम कर चुके हैं।

कुछ दिन पहले वह और उनकी पत्नी दोनों कोरोना संक्रमित हुए थे। ठाणे के अस्पताल में दोनों इलाज चला। सुहास तो ठीक हो गए, लेकिन उनकी पत्नी वेंटिलेटर सपोर्ट पाने के बाद भी बच नहीं सकीं। वह कहते हैं, “मुझे  इस समय खुद को मजबूत करना होगा। कुछ लोग इस समय बहुत-बहुत समर्थन दे रहे हैं जैसे, शिरिष कोंकार और उनके माध्यम से भारत के स्टैट्स गुरु मोहन मेनन से संवेदनाएँ पाकर भी अच्छा लगा।”

18-45 वर्ष के लिए टीकाकरण में दो दिन शेष, अब जाकर महाराष्ट्र ने लिया निर्णय: 20 मई के बाद लगेगा फ्री वैक्सीन

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार (27 अप्रैल) को पूरे देश में कोरोनावायरस संक्रमण के 3.6 लाख से अधिक नए मामले आए। साथ ही 3200 से अधिक मौतें भी रिकॉर्ड की गईं। राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र अभी भी सर्वाधिक संक्रमित राज्यों में अव्वल स्थिति पर बना हुआ है। राज्य में अब तक 4.34 मिलियन केस सामने आ चुके हैं और लगभग 65,000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। राज्य में कई दिनों से लगातार 50,000 से अधिक संक्रमित मामले रोजाना दर्ज हो रहे हैं।

ऐसी स्थिति के बाद भी महाराष्ट्र की सरकार 1 मई से शुरू होने वाले टीकाकरण के तीसरे चरण के लिए वैक्सीन के दामों पर कोई निर्णय नहीं कर पाई थी। अंततः आज (28 अप्रैल) हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि महाराष्ट्र में 18 से 44 वर्ष की आयु के लोगों को मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी।

लेकिन बड़ी बात यह है कि पूरे देश में 1 मई से शुरू होने वाला टीकाकरण महाराष्ट्र में शुरू नहीं होगा। कैबिनेट की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि 18 से 44 वर्ष की आयु के लोगों का टीकाकरण 20 मई के बाद ही शुरू हो पाएगा। रिपब्लिक की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने यह दावा किया कि वैक्सीन की अनुपलब्धता के कारण 20 मई तक 18 वर्ष से अधिक लोगों के लिए टीकाकरण शुरू नहीं हो पाएगा लेकिन केंद्र ने जानकारी दी है कि राज्य में अभी भी वैक्सीन के 1 करोड़ डोज उपलब्ध हैं और अगले 3 दिनों 80 लाख अतिरिक्त डोज राज्य को उपलब्ध कराए जाएँगे।

इससे पहले लगातार महाराष्ट्र में वैक्सीन के दामों और टीकाकरण पर मत भिन्नता की स्थिति बनी हुई थी। खुद राज्य के मंत्री और शिवसेना के युवा नेता आदित्य ठाकरे राज्य में टीकाकरण की स्थिति पर असमंजस में थे और उन्होंने मुफ्त टीकाकरण की जानकारी देने वाला अपना ट्वीट भी डिलीट किया था।  

सोनिया गाँधी संतुष्ट हैं महाराष्ट्र सरकार के इस प्रयास से :

हालाँकि, जहाँ एक ओर कोरोनावायरस के संक्रमण को सही तरीके से न संभाल पाने के कारण महाराष्ट्र सरकार की लगातार आलोचना होती रही है वहीं दूसरी ओर कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कहा कि वह महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार द्वारा कोरोनावायरस के संक्रमण के प्रबंधन से संतुष्ट हैं। राज्य के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और राजस्व मंत्री बालासाहब थोराट ने यह बात बताई। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी MVA सरकार द्वारा ‘महामारी के कुशल और पारदर्शी प्रबंधन’ से संतुष्ट हैं। आपको बता दें कि महाराष्ट्र की MVA सरकार में कॉन्ग्रेस भी गठबंधन का हिस्सा है।

थोराट ने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने उनसे राज्य में कोविड-19 की स्थितियों पर बात की और राज्य सरकार के महामारी से निपटने के प्रयासों पर अपनी संतुष्टि व्यक्त की। साथ ही थोराट ने यह भी बताया कि सोनिया गाँधी ने राज्य में टीकाकरण कार्यक्रम को तेजी से चलाने का निर्देश भी दिया है।

यह अलग बात है कि जहाँ एक ओर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्य कई दिनों पहले ही 1 मई 2021 से शुरू होने वाले टीकाकरण कार्यक्रम की रूप रेखा तैयार कर चुके हैं और मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराने का निर्णय भी ले चुके हैं, महाराष्ट्र सरकार ने टीकाकरण शुरू होने के ठीक 2 दिन पहले यह निर्णय लिया।

अधिकारी जता चुके थे महाराष्ट्र में टीकाकरण कार्यक्रम में देरी की संभावना :

मंगलवार को यह जानकारी प्राप्त हुई कि बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने यह घोषणा की है कि मुंबई में 18 से 44 वर्ष की आयु के लोगों का टीकाकरण निजी केंद्रों के माध्यम से ही होगा।  

हालाँकि, राज्य में स्वास्थ्य अधिकारियों ने टीकाकरण के तीसरे चरण के कार्यक्रम में देरी की संभावना भी जताई थी। मुंबई में वैक्सीन की अनुपलब्धता के कारण टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हुआ जो कि वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद पुनः प्रारंभ होगा।  

श्रीलंका में सार्वजनिक स्थलों पर बुर्का-नकाब पहनने पर लगाया गया प्रतिबंध: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बताया खतरा

श्रीलंका के मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक स्थलों पर सभी प्रकार के चेहरे के नकाब को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा होने का हवाला देते हुए इस पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) को मंजूरी दे दी। हालाँकि, कोविड-19 से निपटने के लिए मास्क पहनने की अनुमति है।

यह कदम ऐसे समय आया है जब जन सुरक्षा मंत्री सरत वीरसेकरा ने मार्च में एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें बुर्का पर प्रतिबंध लगाने के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी प्राप्त करने की बात कही गई थी। बुर्के का इस्तेमाल मुस्लिम महिलाओं द्वारा चेहरा और शरीर को ढँकने के लिए किया जाता है।

कैबिनेट प्रवक्ता और सूचना मंत्री केहलिया रामबुकवेला ने बुर्के का उल्लेख किए बिना कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर सभी तरह के चेहरा ढँकने वाले नकाब पर प्रतिबंध लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि ये फैसला दो साल पहले लिया गया था, जब ईस्टर संडे वाले दिन चर्च और होटलों पर एक के बाद एक कई आतंकी हमले हुए थे। मंत्री ने कहा, “सभी तरह के नकाब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।” इस तरह से इसमें सभी तरह के बुर्का और नकाब शामिल हो जाएँगे। इस प्रस्ताव को अब कानून बनाने के लिए इसे संसद से अनुमोदित कराना होगा।

श्रीलंका की कैबिनेट के प्रवक्ता और सूचना मंत्री केहलिया रामबुकवेला ने कहा कि श्रीलंका में सार्वजनिक जगह पर चेहरे ढँकने पर फैसला दो साल पहले ही उस वक्त ले लिया गया था जब ईस्टर के दौरान श्रीलंका की चर्च में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने भयानक बम विस्फोट कर दिया था। उस हमले में ढाई सौ से ज्यादा लोग मारे गए थे। जिसके बाद सरकार ने फैसला किया था कि सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढँकने वाले नकाब पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। श्रीलंका के सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा कि चेहरे छिपाने वाले किसी भी तरह के नकाब पहनने पर श्रीलंका में प्रतिबंध लगाया जा रहा है। ये देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, कोलंबो में पाकिस्तानी दूत ने एक ट्वीट में कहा कि यह प्रतिबंध “सिर्फ और सिर्फ श्रीलंकाई मुसलमानों और दुनिया भर के मुस्लिमों की भावनाओं को चोट पहुँचाने का काम करेगा।”

पिछले महीने श्रीलंका में पाकिस्तान के हाई कमीशन साद खट्टक ने कहा था कि श्रीलंका में बुर्के पर प्रतिबंध लगाना एक विभाजनकारी कदम है। श्रीलंका सरकार के इस कदम से मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुँच रही है और श्रीलंका में अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों को भी खतरा पैदा होगा।

श्रीलंका में हमला 

श्रीलंका में साल 2019 में ही सरकार ने इमरजेंसी कदम उठाते हुए सार्वजनिक जगहों पर बुर्का पहनने पर पाबंदी का ऐलान कर दिया था। साल 2019 में पाकिस्तान में ईस्टर के दिन एक के बाद एक कई बड़े बम धमाके हुए थे। इन बम धमाकों के पीछे मुस्लिम कट्टरपंथियों का हाथ था और उस बम धमाके के आरोप में श्रीलंका में कुछ दिन पहले एक बड़े मुस्लिम नेता को गिरफ्तार किया गया। श्रीलंका में उस बम ब्लास्ट में कई मौलानाओं को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनके बम धमाके में सीधे हाथ पाए गए थे। 

श्रीलंका में सिलसिलेवार बम धमाकों को चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात यानी NTJ ने अंजाम दिया था। इस संगठन ने श्रीलंका में एक साथ तीन चर्चों और बड़े होटलों को निशाना बनाया था। जिसमें 250 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उस घटना के फौरन बाद श्रीलंका की सरकार ने अस्थाई तौर पर बुर्के पर प्रतिबंध लगा दिया था और अब कैबिनेट ने भी नकाब पर प्रतिबंध लगाने वाली फाइल पर साइन कर दिए हैं।

बेटे की शादी के लिए रखा था पैसा, अब उससे लोगों को लगवाएँगे कोरोना वैक्सीन: महाराष्ट्र में बीजेपी MLA ने पेश की मिसाल

महाराष्ट्र के कल्याण से भाजपा विधायक गणपत गायकवाड़ ने कोरोना काल में एक नई मिसाल पेश की है। गायकवाड़ ने संकट की इस घड़ी में अपने बेटे के शादी के लिए जमा राशि से क्षेत्र की जनता को वैक्सीन लगवाने का फैसला किया है। वे अपने पैसों से लगभग 1500 लोगों को वैक्सीन लगवाएँगे।

गायकवाड़ ने इस संबंध में बताया, “लॉकडाउन नियमों में केवल 25 लोग शादी में आ सकते हैं… मेरे पास करीब 18 लाख रुपए बचेंगे, जिससे मैं अपने विधानसभा के लोगों को फ्री में वैक्सीन दिलवाऊँगा।”

गायकवाड़ ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में सारी परमिशन ले ली है। उनके फैसले को सोशल मीडिया पर सराहाया जा रहा है। नेटिजन्स का कहना है कि राजनेताओं को इसी तरह व्यवहार करना चाहिए। 

बता दें कि गणपत गायकवाड़ के बेटे की शादी 4 मई को है। धूमधाम से शादी के लिए गायकवाड़ परिवार कुछ महीनों से तैयारी में लगा था। लेकिन कोरोना के संकट को देखते गायकवाड़ परिवार ने अब शादी सादगी से संपन्न करने का फैसला किया। साथ ही शादी में जो भी खर्चा होने वाला था वो सारा पैसा अपने क्षेत्र की जनता के वैक्सीनेशन के लिए खर्च करने का निर्णय लिया है।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में कोरोना की स्थिति अब भी काबू में नहीं है। हालाँकि लॉकडाउन के बाद वहाँ संक्रमितों की संख्या में कमी आई है। पिछले 24 घंटे में वहाँ से 48 हजार से ज्यादा मरीज मिले हैं। वहीं कल्याण क्षेत्र की बात करें तो हर रोज़ 1500 से 1700 कोरोना के नए केस सामने आ रहे हैं। मरीजों के रिश्तेदार इलाज के लिए भटक रहे हैं। जरूरत पड़ने पर न उन्हें दवाई मिल रही है और न ऑक्सीजन। ऐसे में अभी पिछले हफ्ते ही भाजपा विधायक गणपत ने अपने एमएलए फंड से 1 करोड़ रुपए ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाने के लिए दिए थे।

दूल्हे का कॉलर पकड़ा, पुरोहित को पीटा, लग्न भ्रष्ट किया: त्रिपुरा DM की हरकत को 5 विधायकों ने बताया ‘आतंक’, CM ने तलब की रिपोर्ट

एक शादी समारोह में घुस कर लोगों को पीटने वाले त्रिपुरा के DM शैलेश कुमार यादव के खिलाफ भाजपा विधायकों ने कार्रवाई की माँग की है, जिसके बाद मुख्यमंत्री विप्लब कुमार देव ने इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है। वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के मजिस्ट्रेट को निलंबित करने के लिए 5 विधायकों ने मुख्य सचिव मनोज कुमार को पत्र लिखा है, जिसमें DM की हरकतों को ‘पूर्ण रूप से अशिष्ट और असभ्य’ करार दिया गया है।

डीएम शैलेश कुमार यादव ने कोरोना के दिशानिर्देशों का पालन कराने के नाम पर दो शादी समारोहों में मारपीट की। विधायकों ने लिखा, “मैं आपका ध्यान सोमवार (अप्रैल 26, 2021) की रात DM द्वारा गोलाप बागान और माणिक्य कोर्ट में स्टेट टेररिज्म की जो हरकत की, उस ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। ये शादी समारोह कोविड-19 दिशानिर्देशों का पालन करते हुए अनुमति के साथ हो रहा था। ये अशिष्ट और असभ्य हरकत थी।”

इस पत्र पर सत्ताधारी पार्टी के विधायकों दिबाचंद्र हरंगख्वाल, आशीष कुमार साहा, रामप्रसाद पॉल, सुशांता चौधरी और आशीष दास ने हस्ताक्षर किए थे। जिन विवाह भवनों में ये सब किया गया, वो रॉयल उज्जयंता पैलेस का हिस्सा हैं। पत्र में लिखा गया है कि इन्हीं DM ने इस शादी समारोह की अनुमति दी थी और साथ ही 4-4 कार ले जाने के लिए पास भी जारी किए गए थे। 50 लोगों के शामिल होने की शर्त पर समारोह के आयोजन की अनुमति थी।

विधायकों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों के दिशानिर्देशों के अनुरूप इन शादी समारोहों का आयोजन हो रहा था, लेकिन तभी DM अपने सुरक्षा कर्मचारियों के साथ वहाँ घुस गए और लोगों को पीटने लगे, उन्हें धमकियाँ देने लगे। आरोप है कि बुजुर्गों को भी नहीं छोड़ा गया। जब उनके द्वारा ही हस्ताक्षरित आदेश की कॉपी दिखाई गई तो उन्होंने लोगों के सामने ही उसे फाड़ डाला। ऐसा व्यवहार किया गया, जैसे नियमों का उल्लंघन कर के समारोह आयोजित किया जा रहा हो।

विधायकों के अनुसार, DM शैलेश यादव ने दूल्हा-दुल्हन की पिटाई की, बुजुर्ग पुरोहित को धक्का मारा और बुजुर्गों को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए उन्हें धकेल दिया। उन पर पुलिसकर्मियों के साथ भी हाथापाई करने का आरोप है। कहा गया है कि DM ने धमकी दी कि वो वेस्ट अगरतल्ला के पुलिस इंचार्ज को निलंबित करेंगे। उन पर शादी समारोह में उपस्थित महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार करने का आरोप है।

पत्र में विधायकों ने लिखा है कि IAS शैलेश यादव ने महिलाओं को भी हिरासत में लेकर पकड़ कर थाने भिजवाया, जहाँ उन्हें कुछ देर हिरासत में रखने के बाद छोड़ा गया। बताया गया है कि इस घटना के ऑडियो और वीडियो क्लिप्स मौजूद हैं, जो सबूत के रूप में पेश किए जाएँगे। पत्र के अनुसार, वहाँ एक भी महिला पुलिस नहीं थी। अतिथियों पर लाठीचार्ज हुआ और शादी में व्यवधान डाल कर दूल्हे को ‘लग्नभ्रष्ट’ बना दिया गया।

विधायकों ने कहा है कि पुलिसकर्मियों के लिए DM द्वारा ‘चोर’ शब्द का प्रयोग करना ये बताता है कि उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा नियंत्रित विभाग के कर्मियों पर विश्वास नहीं है। अगले कुछ महीनों में कई शादियाँ होनी है, ऐसे में आशंका जताई गई कि ऐसे व्यवधान फिर पैदा किए जा सकते हैं। इस मामले की उच्च-स्तरीय जाँच के साथ-साथ शैलेश यादव को हटाने की माँग भी की गई है। पत्र के साथ शादी का परमिशन लेटर भी भेजा गया है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि शैलेश यादव ने दूल्हे का कॉलर पकड़ा था। उन्होंने ‘चलो, बाहर निकलो’ कहते हुए अतिथियों को खदेड़ा। इस अत्याचार के बारे में पूछने पर उन्होंने ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों’ की दुहाई दी। विरोध होने पर उन्होंने कह दिया कि किसी को दुःख पहुँचा तो वो माफ़ी माँगते हैं, लेकिन वो जनता और समाज के व्यापक हितों को ध्यान में रख कर ऐसा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे लोग SOP का पालन करेंगे।

वहीं दुल्हन के भाई शुभ्रजीत देब ने भी फेसबुक के जरिए अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि हिन्दू विधि-विधान से शुभ लग्न का समय तय किया था और अप्रैल 20 को त्रिपुरा में कड़ाई और तेज़ किए जाने के बाद ये आदेश दिए गए थे। उन्होंने पूछा कि क्या अब इस राज्य में ‘हिन्दू मैरेज एक्ट’ का पालन करना पाप है? उन्होंने सवाल दागा कि जब आदेश दिया था तो उसकी प्रति फाड़ी क्यों? उन्होंने आग्रह किया कि सामान्य नागरिकों को यूँ प्रताड़ित न किया जाए।

‘इनको जिंदा जला देना चाहिए’: कॉन्ग्रेस कार्पोरेटर ने सरकारी कर्मचारियों को धमकाया, महाराष्ट्र के पार्टी अध्यक्ष भी थे साथ

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण से हालात बदतर हैं। स्वास्थ्य सेवा चरमराई हुई है। लेकिन, राज्य की सत्ताधारी महाविकास अघाड़ी के नेताओं की अकड़ में कोई कमी नहीं है। हाल में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जब सत्ताधारी गठबंधन के नेता कोरोना फ्रंटलाइन वॉरियर्स को धमकाते नजर आए हैं।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, कॉन्ग्रेस के कार्पोरेटर बंटी शेलके पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले के साथ नागपुर के नगर पालिका निगम के कार्यालय पहुँचे और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करते हुए उन्हें धमकाया। अपने आपत्तिजनक आचरण के लिए कर्मचारियों की अक्षमता को वजह बताने वाले शेलके ने एक विवादित बयान भी दिया।

प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पटोले की मौजूदगी में, शेलके ने कहा कि अक्षमता के लिए कर्मचारियों को ‘जिंदा जला दिया जाना चाहिए।’ अब देखना ये है कि ऐसे मुश्किल समय में कॉन्ग्रेस कॉर्पोरेटर पर दुर्व्यवहार और कथित तौर पर काम में व्यवधान डालने की कोशिशों के लिए कोई कार्रवाई की जाती है या नहीं।

पिछले सप्ताह इसी तरह एक कोविड हॉस्पिटल में शिवसेना पार्षद संध्या दोषी ने हंगामा खड़ा कर दिया था। अपने रसूख का अनुचित फायदा नहीं मिलने पर वह बिफर गईं थी। इतना ही नहीं उनके साथ अस्पताल में आए शख्स ने मास्क तक नहीं पहन रखा था।

सोनिया गाँधी राज्य सरकार से खुश

इस बीच, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कोरोना वायरस संकट के ‘पेशेवर और पारदर्शी संचालन’ के लिए महाविकास अघाडी सरकार की प्रशंसा की है। उन्होंने सरकार के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट के प्रदर्शन पर भी संतोष व्यक्त किया।

स्वास्थ्य संरचना बदहाल

महाराष्ट्र में मंगलवार को कोरोना संक्रमण के 66,358 नए मामले सामने आए। 895 मौतें हुई। इससे राज्य में मृतकों की संख्या बढ़कर 66,179 हो गई है। राज्य के स्वास्थ्य ढाँचे की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। महाराष्ट्र के बीड से एक अमानवीय तस्वीर सामने आई थी। यहाँ एक एंबुलेंस में 22 शवों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर श्मशान लाया गया और फिर एक चिता पर 2-3 लाश रख अंतिम संस्कार किया गया।

अस्पताल में हादसों का सिलसिला भी थमता नहीं दिख रहा है। ठाणे जिले में बुधवार तड़के अस्पताल में आग लगने से 4 मरीजों की मौत हो गई। पिछले हफ्ते विरार के एक अस्पताल में आग लगने से 13 मरीजों की मौत हो गई थी। उससे पहले ऑक्सीजन टैंकर के रिसाव से नासिक के एक अस्पताल में 23 लोगों की जान चली गई थी। ठाणे की घटना से पहले पिछले चार महीने में महाराष्ट्र के अस्पतालों में चार हादसों में कम से कम 57 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं।

‘मुस्लिमों को बचाने के लिए बनाया बलि का बकरा’: बैंक कर्मी को ‘ईसाई’ होने के कारण पाकिस्तान में नौकरी से निकाला

पाकिस्तान में एक बैंक कर्मचारी को कथित तौर पर ईसाई होने के कारण नौकरी से निकाल दिया गया। वसीम मकबूल नाम का यह बैंक कर्मचारी सेल्स व इनकम टैक्स रिटर्न्स संबंधी विभाग का इन्चार्ज था। कुछ दिन पहले फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने उसके ख़िलाफ़ पड़ताल की और फिर नौकरी से निकाल दिया। अब उसने न्याय की आस में कैथलिक चर्च जस्टिस कमीशन में अपील की है।

यूसीए न्यूज के मुताबिक, नेशनल बैंक ऑफ पाकिस्तान ने वसीम मकबूल पर किसी वसीम शहजाद के साथ FBR यूजर आईडी और पासवर्ड शेयर करने का आरोप लगाया था। साल 2018 में इस वसीम शहजाद ने आत्महत्या कर ली थी। वह भी बैंक में ही काम करता था। 18 मार्च को FBR ने अपने पत्र में लिखा, “उसने (वसीम मकबूल) फर्जी क्रेडिट वाउचर पास किया, जिसमें सही लाभार्थी के बदले अन्य खातों में क्रेडिट दिया गया और उसकी (लाभार्थी) राशि को रद्द कर दिया गया।” 

इस प्रकरण पर अपना पक्ष रखते हुए मकबूल ने स्वीकार किया कि उसने एफबीआर का पासवर्ड शेयर किया था। लेकिन, यूसीए न्यूज से बात करते हुए वह कहा, “मैं 2016 में लाहौर क्षेत्रीय कार्यालय में स्थानांतरित होने के बाद से एक शाखा प्रबंधक के निर्देशों का पालन कर रहा था। शहजाद, प्रबंधन की मदद करता था और उसे परफॉर्मेंस अवॉर्ड भी मिलता था। मेरे से पहले भी उसकी पासवर्ड तक पहुँच थी।”

अपनी शिकायत में मकबूल ने बताया, “शहजाद ने 3 करोड़ का हाथों से लिखा वाउचर अपने पिता और भाभी के अकॉउंट में शेयर किया। वह बैंक मैनेजर के निर्देशों पर फंड एकत्रित करता था। 2 साल मामले में जाँच के बाद सारे मुस्लिम कर्मचारियों को बेगुनाह करार दे दिया गया, जबकि मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। अब महामारी के समय में नौकरी ढूँढना बहुत ज्यादा मुश्किल है।”

इस मामले कैथलिक चर्च नेशनल कमीशन की ओर से डील करने वाले वकील बेहराम खान ने पूरे केस को धार्मिक भेदभाव का मामला बतया है। उन्होंने कहा, “हम इस केस को साल 2018 से मॉनिटर कर रहे हैं। ये दुखद है कि यहाँ धार्मिक तौर पर अल्पसंख्यकों को आसानी से निशाना बनाया जाता है। मुस्लिम नागरिकों को बचाने के लिए मकबूल को सिर्फ़ बलि का बकरा बनाया गया।”

बता दें कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कोई नई बात नहीं है। हिंदुओं के साथ-साथ वहाँ ईसाई लोगों को भी खूब प्रताड़ित किया जाता है। हालत ये है कि अब वहाँ सिर्फ़ 2 प्रतिशत आबादी ईसाइयों की बची है। इनमें अधिकतर लोग अनपढ़ हैं और सफाईकर्मी, किसानी या दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। चर्च नेताओं का भी कहना है कि ईसाइयों को लगातार भेदभाव और नौकरी की कमी का सामना करना पड़ता है, जबकि स्वास्थ्य और रक्षा क्षेत्रों में उनकी भागीदारी है। सरकार बहुत निम्न स्तर का काम ईसाइयों को देती है जैसे सफाईकर्मी आदि का।

‘मोदी-शाह कर रहे सीधी निगरानी’: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- कोरोना की दूसरी लहर को रोकने के लिए कब, क्या, कैसे किया

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर निपटने के लिए जो भी करना आवश्यक था या फिर जिन भी चीजों की ज़रूरत थी, उसने पेशेवर तरीके से अपना दायित्व निभाते हुए वो सब किया है। मोदी सरकार ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर से पहले भी तैयारियाँ की गई थीं। मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) को सुप्रीम कोर्ट में दायर 106 पन्नों के एफिडेविट में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ये बातें कही।

इसके अनुसार, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों की सरकारों के साथ कई बार बैठक की और उनसे बार-बार आग्रह किया कि वो अपने-अपने राज्यों में सार्वजनिक स्थलों पर कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराएँ। MHA के एडिशनल सेक्रेटरी द्वारा तैयार किए गए इस एफिडेविट में सर्वोच्च न्यायालय के सामने कई तथ्य रखे गए हैं, क्योंकि कोरोना से जुड़े कई मामलों की सुनवाई वहाँ चल रही है।

केंद्र सरकार का कहना है कि संक्रमण चरम पर पहुँचने के बाद से गलत नैरेटिव चलाया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने इससे निपटने के लिए कुछ नहीं किया और इससे अनभिज्ञ बनी रही। जस्टिस DY चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एक नवगठित पीठ ने इस एफिडेविट पर संज्ञान लिया। इसमें मोदी सरकार ने बताया है कि किस तरह कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित 15 राज्यों में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए फैसले लिए गए।

सभी राज्यों में सक्रिय कोरोना मामलों को लेकर भविष्य के आँकड़ों का अनुमान लगाया गया था और उसी हिसाब से उन्हें ऑक्सीजन का कोटा मिला। बताया गया है कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश में मात्र 5 दिनों के भीतर माँग 100% बढ़ गई। केंद्र ने बताया है कि 7 कंपनियों को 74-90 लाख रेमेडेसिविर इंजेक्शन के निर्माण के लिए स्वीकृति दी गई थी। ये गंभीर या सामान्य कोरोना स्थिति में दिया जाता है, जो कुल सक्रिय मामलों का 20% ही है।

जहाँ तक Tocilizumab ड्रग की बात है, केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत में इससे पहले ये दवा बनती ही नहीं थी। हालाँकि, भारत में इसके कई विकल्प मौजूद हैं जो उतने ही प्रभावशाली हैं। इस एफिडेविट में राज्यों के साथ हुई केंद्र की बैठक की सूची तारीख़ के साथ दी गई है और किस बैठक में क्या निर्देश दिए गए, ये भी है। सभी राज्य सरकारों को ज़रूरत के आधार पर निर्णय लेने को कहा गया था।

महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, केरल और पश्चिम बंगाल की सरकारों को 5-7 जनवरी 2021 के बीच ही पत्र लिख कर कोरोना के बढ़ते मामलों पर कड़ी नजर रखने को कहा गया था। इसी दौरान केंद्र की एक उच्चस्तरीय समिति ने केरल जाकर स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। केरल और महाराष्ट्र में फिर से ऐसी टीम भेजी गई। 24-25 फरवरी को सभी राज्यों/UTs में ऐसे टीमें भेजी गईं और उन्हें कोरोना मामलों पर नजर रखने को कहा गया।

सभी राज्यों को सर्विलांस के साथ-साथ प्रभावशाली रणनीति बनाने को भी कहा गया था। साथ ही ऐसे कार्यक्रमों को चिह्नित करने को कहा गया था, जिससे कोरोना के फैलने की आशंका हो। केंद्र ने एक बड़ी बात कही है कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने से जुड़ी तैयारियों को लेकर उसने 9 बैठकें पहले ही की थीं। इन बैठकों में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या PMO की तरफ से कोई प्रतिनिधि शामिल होते थे।

इस एफिडेविट में बताया गया है कि किस तरह ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर हो रही तैयारियों में खुद पीएम मोदी और HM अमित शाह शामिल थे। साथ ही कहा गया है कि सभी राजनीतिक दल इसमें सहयोग कर रहे हैं। गैस निर्माताओं को ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए लाइसेंस दिए गए। स्टील प्लांट्स में ऑक्सीजन उत्पादन शुरू किया गया। ऑक्सीजन के औद्योगिक प्रयोग को कम किया गया और टैंकरों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।

केंद्र सरकार ने बताया है कि किसी त्रासदी की स्थिति में बनी राष्ट्रीय योजना में चरण दर चरण विवरण नहीं होते और रोजाना की कार्यवाही को एजेंसियाँ और स्थानीय प्रशासन सुनिश्चित करता है। केंद्र ने कहा है कि हमारे स्वास्थ्य सिस्टम पर अभूतपूर्व संकट आया है, जिससे निपटने के लिए त्वरित और ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्र ने हाई कोर्ट में चल रहे मामलों को भी SC में स्थानांतरित करने का निवेदन किया, ताकि अलग-अलग आदेशों से तैयारियों पर असर न पड़े।

दीवारों में दरार, झुकीं इमारतें और जमीन से निकलता पानी: असम में भूकंप के झटकों के बाद सामने आई भयावह तस्वीरें

असम के गुवाहटी समेत पूर्वोत्तर में बुधवार (अप्रैल 28, 2021) सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी के मुताबिक इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.4 थी। केंद्र बिंदु असम का सोनितपुरा था।

सुबह 7:51 पर आए भूकम्प की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि प्रभावित क्षेत्रों की इमारतों में दरारें आ गई और करीब 30 सेंकेंड तक सभी बिल्डिंग हिलती रहीं। 5 सितारा होटल तक की सीलिंग टूट गई और खेतों में पानी धरती से फूट पड़े।

सोशल मीडिया पर भूकंप के बाद हुए नुकसान की कई तस्वीरें सामने आई हैं। गुवाहटी में सबसे ज्यादा नुकसान की खबर है। हालाँकि, राहत ये है कि अभी तक इस प्राकृतिक आपदा के कारण किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। यहाँ एक के बाद 4 भूकंप के झटके महसूस किए गए।

सीस्मोलॉजी सेंटर के अनुसार, पहला झटका सुबह 7:51 बजे महसूस किया गया। इस बड़े झटके के बाद करीब 7:55 बजे एक और इसके कुछ मिनटों बाद दो और झटके महसूस किए गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस खबर के बाद असम सीएम सोनोवाल से बात की। पीएम ने कहा, “राज्य में आए भूकंप के संबंध में असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से बात की। उन्हें केंद्र की तरफ से हरसंभव मदद का वादा किया है। मैं असम के लोगों की भलाई की कामना करता हूँ।” वहीं अमित शाह ने भी सबकी कुशलता की कामना की और प्रभावित लोगों के साथ खड़े होने का आश्वासन दिया।

इस बीच असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “असम में भूकंप का बड़ा झटका महसूस किया गया है। मैं सभी के कुशल होने की कामना करता हूँ, साथ ही लोगों को अलर्ट रहने की सलाह देता हूँ, बाकी जिलों से अपडेट ले रहा हूँ।”

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्वा ने ट्विटर पर गुवाहटी में हुए नुकसान की तस्वीर साझा की है। तस्वीर में देख सकते हैं कि बिल्डिंग में लगी टाइल्स जमीन पर गिरकर चकनाचूर हो गई है। वहीं दूसरी तस्वीर में दीवार ढह गई है।

स्वास्थ्य मंत्री के इस ट्वीट के नीचे कई अन्य यूजर्स ने भूकंप से हुए नुकसान की तस्वीर बताकर कुछ वीडियो साझा की है। इसमें एक वीडियो में जमीन में आई दरार देख सकते हैं। वहीं दूसरी वीडियो में एक बिल्डिंग में बीच से दरार आ गई है। ऑपइंडिया इन वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, इस भूकंप के बाद नगाँव से भी कुछ डराने वाली तस्वीर आई हैं। वीडियो में देख सकते हैं कि वहाँ एक बिल्डिंग झुक गई है।

बता दें कि असम में इस माह की शुरुआत में भी भूकंप आया था। 6 अप्रैल को वहाँ 2.7 तीव्रता का भूकंप आया था और उससे 1 दिन पहले 5.4 तीव्रता का एक और भूकंप सिक्किम नेपाल सीमा पर आया था। उस दौरान झटके बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्से में महसूस किए गए थे।

30 अप्रैल तक ‘कड़ी निगरानी’ में रहेंगे ममता बनर्जी के करीबी TMC नेता अनुब्रत मंडल, चुनाव आयोग का निर्देश

चुनाव आयोग (EC) ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता अनुब्रत मंडल को ​कड़ी निगरानी में रखने का निर्देश दिया है। वे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी हैं। आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए यह निर्देश दिया है। मंडल 27 अप्रैल की शाम 5 बजे से 30 अप्रैल की सुबह 7 बजे तक कार्यकारी मजिस्ट्रेट और सीएपीएफ को कड़ी निगरानी में रहेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह निर्णय मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ‘मंडल के खिलाफ कई शिकायतें’ मिलने के बाद लिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे पत्र में कहा गया है, “विभिन्न स्रोतों से प्राप्त फीडबैक और डीईओ तथा एसपी, बीरभूम की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने निर्देश दिया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए AITC, बीरभूम के जिलाध्यक्ष मंडल को कार्यकारी मजिस्ट्रेट और सीएपीएफ की कड़ी निगरानी में रखा जाए।”

इसके अवधि के दौरान ‘तिथिके साथ’ वीडियोग्राफी की जाएगी। बीरभूम में गुरुवार को विधानसभा चुनाव के आठवें और अंतिम चरण में मतदान होगा।

यह पहली बार नहीं है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान अनुब्रत मंडल को निगरानी में रखा गया है। उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव और 2016 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी निगरानी में रखा गया था। 2019 में मंडल को मतदान के दौरान एक बूथ से दूसरे बूथ जाने पर कर्मियों को खतरा होने की आशंका के चलते निगरानी में रखा गया था।

गौरतलब है जुलाई 2013 में मंडल ने बीरभूम में एक सार्वजनिक सभा में समर्थकों को पुलिस पर बम फेंकने और पंचायत चुनावों में टीएमसी के बागी उम्मीदवारों के घरों को जलाने के लिए उकसाया था। सितंबर 2018 में वह कैमरे में कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं को पार्टी के एक बागी नेता और एक महिला भाजपा नेता को भांग रखने के झूठे मामले में फँसाने का निर्देश देते हुए पकड़े गए थे।