उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से लाशों के कफन चोरी करके उन्हें दोबारा बेचने का मामला सामने आया है। इस पूरे मामले से जुड़े एक बड़े गैंग का पर्दाफाश हुआ है जो कब्रिस्तान और श्मशान जैसी जगहों से कफन चुराकर उनकी धुलाई और प्रेस करके उन पर ब्रांडेड स्टीकर लगाकर उन्हें दोबारा बाजार में बेच देता था। बड़ौत पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया है।
बड़ौत पुलिस के इंस्पेक्टर आज शर्मा ने बताया कि पुलिस लॉकडाउन के कारण तलाशी अभियान में जुटी हुई थी तब ब्रांडेड कपड़ों से लदी एक गाड़ी पकड़ी गई। कपड़ों का बिल न होने पर आरोपितों से सख्ती से पूछताछ की गई तब इस पूरे राज का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस के अनुसार आरोपित कब्रिस्तान और शमशान से शवों के वस्त्रों और कफन की चोरी कराते थे। इसके लिए बाकायदा 300-400 रुपए की दिहाड़ी पर मजदूर रखे गए थे जो शवों के कफन और अन्य वस्त्रों की चोरी किया करते थे।
आरोपित शवों से उतारे गए वस्त्रों और कफन की धुलाई करके उस पर प्रेस करते थे। इसके बाद इन कपड़ों पर ग्वालियर की ब्रांडेड कंपनी का स्टीकर लगा दिया जाता था और इन कपड़ों को महँगे दामों पर बेच दिया जाता था। आरोपितों के अनुसार एक कफन की कीमत 400 रुपए तक होती थी। इस मामले में यह भी सामने आया है कि कई कपड़े कोरोना संक्रमित मरीजों के शवों के भी होते थे। सभी आरोपितों के खिलाफ धारा 144 के उल्लंघन और महामारी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
गिरफ्तार किए गए आरोपितों के पास से पास से 520 कफन, 127 कुर्ते, 140 कमीज, 34 धोती, 12 गर्म शॉल, 52 साड़ी, तीन रिबन के पैकेट, 1 टेप कटर और 158 ग्वालियर की कंपनी के स्टीकर बरामद हुए हैं। आरोपितों में शाहरुख खान, बबलू, राजू शर्मा, श्रवण कुमार शर्मा, प्रवीण कुमार जैन, आशीष जैन और ऋषभ जैन शामिल हैं। सभी आरोपित बागपत के बड़ौत के ही रहने वाले हैं। आरोपितों ने स्वीकार किया है कि वो कई सालों से यह काम करते आ रहे हैं।
मेडिकल क्षेत्र के जर्नल लैंसेट ने शनिवार (08 मई) को एक लेख प्रकाशित किया जहाँ भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते संक्रमण का पूरा ठीकरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फोड़ दिया गया। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब लैंसेट ने भारत की वर्तमान सरकार का विरोध किया हो। इसके पहले लैंसेट कश्मीर से अनुच्छेद 370 के उन्मूलन का विरोध भी कर चुका है।
अपने लेख में लैंसेट जर्नल ने भारत सरकार से यह माँग की है की सरकार कोरोना वायरस से संबंधित सभी आँकड़े सत्यता के साथ प्रकाशित करें और संक्रमण को रोकने के लिए सम्पूर्ण लॉकडाउन जैसे उपायों पर विचार करे। हालाँकि संक्रमण की रफ्तार पर लॉकडाउन का कितना असर होता है, यह निश्चित तौर पर कहा नहीं जा सकता है।
भारत में इस समय अधिकांश आबादी या तो आंशिक लॉकडाउन या पूर्ण लॉकडाउन में पहले से ही है। विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत नहीं हैं कि लॉकडाउन के कारण संक्रमण में बहुत ज्यादा कमी आ सकती है। उदाहरण के लिए 19 अप्रैल को दिल्ली में लॉकडाउन किया गया। 1 मई को दिल्ली में संक्रमण की दर 31.10% थी जो शनिवार (08 मई) को 23.34% पहुँच गई। हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में संक्रमण में कमी का प्रमुख कारण हो सकता है दूसरी लहर की पीक का आना जो कि दिल्ली में आ चुकी है।
लैंसेट जर्नल के प्रकाशित किए गए लेख की एक सबसे बड़ी समस्या है उसके द्वारा दिए गए आँकड़ों के सोर्स। भारत में होने वाली मौतों के संबंध में अनुमान व्यक्त करने के लिए लैंसेट द्वारा इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ मैट्रिक्स एण्ड इवैल्यूएशन (IHME) के आँकड़ों का उपयोग किया गया है जिसने 1 अगस्त तक भारत में 1 मिलियन से अधिक मौतों का अनुमान लगाया है।
सोर्स : IHME
IHME के आँकड़े बिल्कुल भी विश्वसनीय नहीं दिखते है क्योंकि IHME ने अनुमान लगाया की भारत में Covid-19 के कारण सितंबर 2020 में 195,135 मौतें हो चुकी हैं जबकि वास्तविकता में मौतों की संख्या लगभग 66,000 ही थी। वर्तमान आँकड़ों की बात करें तो IHME के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण होने वाली मौतें 734,238 हैं जबकि अधिकारिक आँकड़ों के अनुसार यह संख्या 242,362 ही है।
इसका मतलब यह है कि IHME का अनुमान तीन गुना है। इस हिसाब से IHME ने अगस्त तक भारत में सबसे बुरी स्थिति में 1.6 मिलियन मौतों, सबसे अच्छी स्थिति में 1.3 मिलियन मौतों और वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से 1.46 मिलियन मौतों का अनुमान लगाया है। IHME ने तो नवंबर 2020 में रोजाना 1000 मौतों का अनुमान व्यक्त किया था जबकि उस समय भारत में संक्रमण की दर कम हो रही थी।
लैंसेट जर्नल में प्रकाशित लेख के लिए पत्रकार अनु भूयन के लेख को भी आधार माना गया है। भूयन के उस लेख में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई रैलियों का जिक्र था लेकिन बाकी रैली करने वालों का कोई वर्णन नहीं था। हालाँकि, भूयन के लेख में स्पष्ट तौर पर प्रधानमंत्री मोदी या केंद्र सरकार को भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए दोषी नहीं ठहराया गया लेकिन उस लेख में यह जरूर कहा गया की 2021 के प्रारंभ में भारत में यह धारणा प्रबल रूप से प्रचारित हुई थी कि भारत ने कोरोना वायरस संक्रमण पर जीत हासिल कर ली है और लोगों में हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो गई है।
लैंसेट जर्नल ने अनु भूयन के इस लेख को भी एक सोर्स के रूप में प्रकाशित किया और बताया कि यदि भारत में इस प्रकार के विचार प्रचारित हो रहे थे तो मोदी सरकार ही इस राष्ट्रीय आपदा की जिम्मेदार होगी।
लैंसेट जर्नल में दूसरे सोर्स के तौर पर ब्लूमबर्ग के लेख का जिक्र किया गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के तीन पहलू हैं। पहला है कि इस लेख में 18 से 45 वर्ष की आयु के लोगों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने से भीड़ की स्थिति निर्मित हो गई है। हालाँकि की मीडिया समूहों द्वारा यह माँग की जा रही थी कि भारत में 18 से 45 वर्ष की आयु के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू कर देना चाहिए लेकिन जब यह शुरू कर दिया गया तो अब यह आरोप लगाया जा रहा है कि इससे भीड़ उत्पन्न हो रही है।
लेख का दूसरा पहलू यह है कि इसमें विपक्षी पार्टियों द्वारा शासित राज्यों की शिकायत है कि महामारी से सीधे निपटने की बजाय सारा भार राज्यों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। जबकि सच तो यह है कि यही राज्य महामारी से निपटने के लिए अधिक शक्तियों की माँग कर रहे थे।
ब्लूमबर्ग के लेख का तीसरा पहलू हरिद्वार के कुम्भ मेला से जुड़ा हुआ है। ब्लूमबर्ग ने भीड़ इकट्ठी करने के लिए कुम्भ मेला का तो जिक्र किया लेकिन महीनों से चल रहे किसान आंदोलन पर कुछ भी कहने से बचता रहा। हालाँकि, यह सभी को ज्ञात है कि ब्लूमबर्ग मात्र एक प्रोपेगेंडा फैलाने वाला मीडिया हाउस है।
लैंसेट जर्नल में अल-जजीरा और न्यूयॉर्क टाइम्स का भी जिक्र किया गया है। अल-जजीरा ने जहाँ यह कहकर उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की कि सरकार उन अस्पतालों को धमका रही है जो ऑक्सीजन की कमी पर आवाज उठाना चाहते हैं। हालाँकि उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसी ही खबरों के बारे में कहा था कि अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जब मोदी सरकार ने ट्विटर से फेक न्यूज हटाने के लिए कहा था तब न्यूयॉर्क टाइम्स ने प्रोपेगंडा चलाया था कि मोदी सरकार महामारी पर नियंत्रण करने के स्थान पर आलोचना को दबा रही है।
इससे यह साफ पता चलता है कि लैंसेट ने बिना भारतीय शासन व्यवस्था को समझे एक ऐसा लेख प्रकाशित किया है जो वर्तमान मोदी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना के उद्देश्य से ही लिखा गया है। लैंसेट जर्नल द्वारा प्रकाशित यह लेख सीधे तौर पर राजनैतिक उद्देश्यों से प्रेरित दिखता है न कि चिकित्सकीय।
उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले के काजी हजरत अब्दुल हमीद मोहम्मद सालिमुल कादरी (सालिम मियाँ) का इंतकाल हो गया है। रमजान के महीने में शनिवार (8 मई 2021) की देर रात 3:51 बजे उन्होंने अंतिम साँस ली। काजी मोहम्मद सालिमुल कादरी के इंतकाल के बाद उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन और जनाजे के लिए कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के कहर के बीच सरकार ने कड़े आदेश दे रखे हैं कि अंतिम संस्कार में किसी भी सूरत में अधिकतम 20 लोग ही शामिल हो सकेंगे। लेकिन, काजी की मौत के बाद हजारों की संख्या में मुस्लिम बेकाबू भीड़ शामिल थी। सोशल डिस्टेंसिंग तो पूरी तरह से नदारद रही। लोगों के बीच एक इंच की भी दूरी नहीं दिखी।
यही नहीं वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि अधिकतर लोगों ने मास्क नहीं पहन रखे थे। इस दौरान पूरी तरह से कोरोना के प्रोटोकॉल की धज्जियाँ उड़ाई गई। कोरोना के इस दौरान जनाजे के दौरान लापरवाही बरतने से प्रदेश में कोरोना विस्फोट होने का खतरा बढ़ गया है।
वीडियो के वायरल होने के बाद भी मीडिया गिरोह और वामपंथी समूह के मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा है। यही लोग पहले भी सेलेक्टिव आउटरेज दिखाते और अपने चहेतों पर आँख मूँदते नजर आए हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार के नियम के मुताबिक, सार्वजिनक स्थानों पर कोई भी व्यक्ति बिना मास्क के घूमता-फिरता मिलता है, तो उस पर एक हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही दोबारा ऐसा करने पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इससे पहले राजस्थान के सीकर स्थित खीरवा गाँव में एक व्यक्ति के जनाजे में लापरवाही होने के कारण अब तक 21 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले 21 दिनों में इस गाँव के 21 घरों से जनाजे उठ चुके हैं। पहले तो गाँव के ही लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे थे, लेकिन लगातार होती मौतों से अब वो भी दहशत में हैं। प्रशासनिक अमला भी देर से सक्रिय हुआ और अब लोगों की जाँच कर के उन्हें क्वारंटाइन करने की प्रक्रिया चालू की गई है।
29 अक्टूबर 2017 का दिन था। सोशल मीडिया खासकर ट्विटर पर एक कुत्ते की चर्चा हो रही थी। नाम था पिद्दी। बात 4 साल पुरानी हो गई है। इसलिए पहले कुत्ते का फोटो देख लिया जाए। समझने में आसानी होगी।
बिस्कुट खाने की तैयारी करता पिद्दी
यह फोटो एक वीडियो से लिया गया है। वीडियो देख लेंगे तो इस कुत्ते के टैलेंट के आगे सिर झुका लेंगे। पिद्दी चुटकी बजाते ही बिस्कुट खा लेता है – लपक के। बिस्कुट खाने की इस कला को 29 अक्टूबर 2017 के दिन पूरे देश ने देखा नहीं था बल्कि दिखाया गया था।
बड़े-बड़े लोग, ‘निष्पक्ष’ पत्रकार तक इस कुत्ते के आगे ‘दुम’ हिलाने लगे। सोशल मीडिया पर लोगों ने इन सब को भला-बुरा भी कहा था। लेकिन क्या सभी दुम-हिलाव (ऊदबिलाव प्रजाति के ये लोग सोशल मीडिया में पाए जाते हैं, दूसरों को प्रायः ट्रोल्स कहते हैं) गलत थे? क्या इस महान राष्ट्र में एक कुत्ते को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती?
कुत्ता किसका है, यह मानवाधिकार के तहत छिपा लिया गया है
कुत्ते को आखिर प्राथमिकता हो भी क्यों न? ग्लोबल दुनिया में क्या हम अमेरिका से कुत्ता-कल्चर तक नहीं सीख सकते?
अमेरिका में फर्स्ट फैमिली का कॉन्सेप्ट है। कुत्ता वहाँ की फर्स्ट फैमिली के लिए आन-बान-शान की बात होती है। इतना कि फर्स्ट फैमिली के कुत्ते को इज्जत के साथ फर्स्ट डॉग बोला जाता है। चुनाव तक में उसकी चर्चा होती है। उस पर लेख लिखे जाते हैं।
अपने-अपने कुत्तों के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति
अमेरिका की तरह क्या हम अपने देश में एक परिवार को फर्स्ट फैमिली का दर्जा नहीं दे सकते? आखिर किस कंजूस मानसिकता से गुजर रहा है यह देश? ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि देश की एक फर्स्ट फैमिली हो, उस फर्स्ट फैमिली का एक कुकुर हो, जिसे फर्स्ट डॉग कहा जाए… कितना सुंदर और सभ्य होगा वह समाज, जरा सोचिए!
आखिर क्यों पिद्दी सिर्फ भारतीय कुकुर होकर रह जाए? क्या उसका मालिक इतना कमजोर है कि पिद्दी के चर्चे देश-विदेश तक में न करवा पाए? और अगर ऐसा न करवा सका तो कुत्ताधिकार संगठनों की आवाज क्या भारत के खिलाफ नहीं उठेंगी? – ऐसे बहुत सारे प्रश्न पहले से ही मालिक के दिमाग में उठ रहे होंगे… बस फैसला 29 अक्टूबर 2017 को लिया गया… और पिद्दी फेमस हो गया, करवा दिया गया।
न्यू यॉर्क टाइम्स का लेख है, मजाल है कि आप गलत बोल दें!
पिद्दी कुत्ते को लेकर 29 अक्टूबर 2017 के दिन ही एक और घटना घटी थी। किसी शख्स ने एक कहानी सुनाई थी… पुरानी कहानी। कहानी में कुत्ते को बिस्कुट खिलाने का जिक्र है। कहानी में असम से ज्यादा कुत्ते को प्राथमिकता दिए जाने का भी जिक्र है। लेकिन क्यों नहीं? क्या दिक्कत है?
असम नाम के किसी राज्य (पूरे उत्तर-पूर्वी भारत में कोई राज्य है भी क्या? होता तो अमेठी की तरह सड़क-रेल पहुँच चुका होता अब तक) की चर्चा बाद में भी तो की जा सकती है। दिल पे लेकर कहानी क्यों सुना दिए सरमा जी? और कहानी सुनाए तो सुनाए, चुनाव तक खेंच के काहे ले गए इस बात को?
कहानी सुनाने वाले शख्स का नाम है हेमंत बिस्वा सरमा
पिद्दी के मालिक से नहीं तो कम से कम पिद्दी से तो प्यार कर ही सकते थे। पिद्दी का मालिक तो शायद ही कभी असम की बात समझ पाए! कहाँ माथा पटकने गए थे आप? हाँ शायद पिद्दी के लिए बिस्कुट ले जाते तो बात बनती…
…लेकिन वो आपने किया नहीं! करते तो आज असम के मुख्यमंत्री का ताज भला कैसे पहनते! बधाई हो।
नोट: कुत्ते प्रेमी लोग कृपया इसे कुत्ता प्रजाति से नफरत भरा लेख मान कर न पढ़ें।
कोरोना वायरस के कहर के बीच कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में सरकार ने शराब की ऑनलाइन बिक्री करने का निर्णय लिया है। आबकारी विभाग के सूत्रों के मुताबिक, शराब की डिलिवरी के लिए सुबह 9 से रात 8 बजे तक समय निर्धारित किया गया है। इसकी डिलिवरी शराब दुकान के 15 किलोमीटर के दायरे में की जाएगी।
प्रदेश में शराब की ऑनलाइन बिक्री को लेकर राज्य के आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि राज्य में शराब की जगह सैनिटाइजर पीने के कारण कुछ लोगों की मौतें हुई थीं, जिसे देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना संकट की वजह से 2 महीने का लॉकडाउन किया गया है।
मंत्री ने कहा कि पिछले लॉकडाउन के दौरान हम एक बार इस तरह का प्रयोग आजमा चुके हैं। फिलहाल सभी दुकानें बंद हैं। इसके साथ ही शराब की दुकानों को भी बंद रखा गया है। ऐसी हालत में पड़ोसी राज्यों से इसकी तस्करी की घटनाएँ बढ़ रही हैं। हालाँकि, हमारी पुलिस ने इसे रोक रखा है, लेकिन तस्कर राज्य में अवैध शराब को खपाने की ताक में हैं। उन्होंने दावा किया कि शराब की ऑनलाइन बिक्री पूरी तरह से पारदर्शी होगी।
ऐसे बुक करें ऑनलाइन शराब
कोरोना के पहले दौर में जब पिछला लॉकडाउन लगाया गया था तो छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेसी सरकार ने शराब की ऑनलाइन बिक्री की थी। सरकार एक बार फिर से उसी फार्मूले को अपनाने जा रही है। पहले की ही तरह इस बार भी csmcl Online नाम के एप से इसकी बुकिंग होगी, जिसमें ग्राहकों को अपना मोबाइल नंबर, आधार कार्ड और पूरा पता देना होगा। इसका पेमेंट ऑनलाइन होगा, लेकिन डिलिवरी चार्ज 100 रुपए तक हो सकता है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में अधिक नशे के लिए शराब में कफ सिरप मिलाकर पीने से हाल ही में 9 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी। रायपुर में इसी सप्ताह नशे के आदी दो लोगों ने सैनिटाइजर पी लिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के परिणाम के बाद हिंसा शुरू है। दर्जनों भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है और कई अन्य घायल हैं। अब इन हत्याओं के विरोध में विभिन्न देशों में बसे प्रवासी भारतीयों ने विरोध प्रदर्शन किया है। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अपने अकाउंट पर इन प्रवासी भारतीयों के द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों की फोटो शेयर की है।
यूनाइटेड किंगडम के बैसिंगस्टोक में भगवा झंडे और पोस्टर दिखाई दिए जिनमें ‘हिंदुओं के नरसंहार के विरुद्ध प्रदर्शन’ और ‘हिन्दू लाइव्स मैटर’ लिखा हुआ था।
कनाडा में रहने वाले भारतीय प्रवासियों ने भी कैलगरी और टोरंटो में विरोध प्रदर्शन किया। यहाँ एक पोस्टर में लिखा हुआ था, ‘पश्चिम बंगाल में हिन्दू नरसंहार बंद करो। अब बहुत हो चुका। भगवान से डरो।‘ एक अन्य पोस्टर में ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल का कसाई बताया गया।
नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न, जॉर्जिया के अटलांटा और टेक्सास के ह्यूस्टन में भी पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा समर्थित हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन हुए।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा की ये सभी प्रदर्शन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के शासनकाल में हो रही हिंसाओं के खिलाफ है। बंगाल में राज्य सरकार हिंसा रोकने में असफल है जहाँ हिंदुओं की हत्याएँ, बलात्कार और उनका पलायन जारी है। प्रदर्शनकारी ने यह भी कहा की इस मामले पर कोई मीडिया कवरेज नहीं हो रहा है जबकि इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद से लगातार भाजपा कार्यकर्ता और उनके परिवार हिंसा के शिकार हो रहे हैं। अपनी जान की सुरक्षा के लिए भाजपा कार्यकर्ता और अन्य लोग असम पहुँच रहे हैं जहाँ धुबरी और अन्य क्षेत्रों में उन्हें राहत शिविरों में रखा जा रहा है। पलायन करने वाले लोगों की संख्या सैकड़ों में है।
बंगाल में केन्द्रीय राज्य मंत्री वी मुरलीधरन के काफिले पर भी तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों के द्वारा हमला किया गया। न केवल भाजपा बल्कि सीपीआईएम के कार्यकर्ताओं ने भी टीएमसी पर हिंसा का आरोप लगाया है। पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर यह भी आरोप है की हिंसा की रिपोर्ट को राज्यपाल तक पहुँचने से रोका जा रहा है।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेन्द्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) द्वारा कोरोना वायरस संक्रमण के आँकड़ों में हेरफेर करने का आरोप लगाया है साथ ही यह भी कहा है कि सरकार द्वारा पीआर एजेंसियों और सेलिब्रिटीज के माध्यम से मुंबई में संक्रमण में होने का झूठा नैरेटिव चलाया जा रहा है।
शनिवार (08 मई) को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे गए पत्र में देवेन्द्र फडणवीस ने BMC और महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार पर यह आरोप लगाया कि मुंबई में कोरोना वायरस के संक्रमण और उससे हुई मौतों के सही आँकड़े नहीं दिए जा रहे हैं। फडणवीस ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण से हुई मौतों को ‘अन्य कारणों से हुई मौतों’ की श्रेणी में रखा जा रहा है जिससे संक्रमण की मृत्यु दर (CFR) कम दिखाई दे।
मुंबईतील कोविड मृत्यूंची नेमकी आकडेवारी उजेडात येऊ न देणे, चाचण्यांच्या प्रकारातील तडजोडी करीत कोरोनाचा संसर्ग दर कमी होत असल्याचे आभासी चित्र उभे करणे आणि त्यातून कोरोना संकटाची प्रत्यक्ष स्थिती निदर्शनास न येता लढ्यात बाधा उत्पन्न होणे,याबाबत मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे यांना पत्र pic.twitter.com/NigmpjOfcX
इसके अलावा अपने तीन पन्नों के पत्र में देवेन्द्र फडणवीस ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार पीआर एजेंसियों और सेलिब्रिटीज की सहायता से कोरोना वायरस संक्रमण के नियंत्रण में होने का नैरेटिव चला रही है।
मुंबई और महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण की मृत्यु दर (CFR) पर आँकड़े देते हुए देवेन्द्र फडणवीस ने बताया कि संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान जब शेष महाराष्ट्र में दूसरे कारणों से हुई मौतों की दर 0.7% है वही मुंबई में यह 34.9% है। यहाँ तक की संक्रमण की पहली लहर के दौरान जब महाराष्ट्र में दूसरे कारणों से हुई मौतों की दर 0.8% थी तब भी मुंबई में इसे 12% बताया गया।
फडणवीस ने मुंबई में कम टेस्टिंग का आरोप लगाते हुए कहा की मुंबई में रोजाना 1 लाख आरटी-पीसीआर टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध है जबकि यहाँ मात्र 34,000 टेस्ट ही रोजाना की जा रहे हैं। उस पर भी रैपिड एंटीजेन टेस्ट की संख्या 30% है जबकि आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक आरटी-पीसीआर टेस्टिंग सुविधा उपलब्ध न होने पर ही रैपिड एंटीजेन टेस्ट की संख्या 30% हो सकती है अन्यथा यह 10% ही होनी चाहिए।
देवेन्द्र फडणवीस ने अपने पत्र में चिंता जताई है कि कम टेस्टिंग के कारण संक्रमण और मृत्यु दर के सही आँकड़े सामने नहीं आ पाएँगे जिससे समस्या बढ़ती ही जाएगी। फडणवीस का कहना है कि वह कोरोना संक्रमण के दौरान वह सरकार या BMC के प्रयासों को कमतर करके नहीं देख रहे हैं लेकिन सही आँकड़े पेश न कर पाने से कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ लड़ाई कमजोर हो जाएगी।
शुक्रवार को मुंबई में BMC के आँकड़ों के अनुसार 3,039 संक्रमण के नए मामले और 71 मौतें दर्ज की गईं। इसके साथ ही मुंबई में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 6,71,394 हो गई है साथ ही देश की आर्थिक राजधानी में कुल मौतों की संख्या भी 13,687 है।
देशभर में कोरोना वायरस के कहर के बीच केंद्र सरकार ने ग्रामीण स्तर पर मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। महामारी के हालात को देखते हुए केंद्र ने 25 राज्यों की ग्राम पंचायतों के लिए 8923.8 करोड़ रुपए की अनुदान राशि जारी की है। रविवार (9 मई 2021) को केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।
इस अनुदान राशि का इस्तेमाल जिला, ब्लॉक और गाँवों में कोरोना वायरस के चैलेंजेस से निपटने के लिए किया जाएगा।
15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को जारी हुई रकम वर्ष 2021-22 के लिए यूनाइटेड ग्रांट्स की पहली किस्त है। इसे पहले जून, 2021 तक जारी किया जाना था। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर का असर इस बार गाँवों में भी देखा जा रहा है। ऐसे में इस संकट का सामना करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय की सिफारिश पर वित्त मंत्रालय ने अनुदान देने का फैसला किया है।
✅Centre releases Rs. 8923.8 crore to Panchayats in 25 States ✅Release of grant advanced in view of COVID-19 pandemic Read More➡️ https://t.co/tnBYurqdaG
इस राशि का इस्तेमाल स्थानीय निकायों द्वारा कोरोना की रोकथाम के साथ ही अन्य कार्यों में भी किया जा सकेगा। वित्त मंत्रालय ने केंद्र से अनुदान पाने वाले राज्यों की सूची भी जारी की है।
The amount released is the first instalment of the ‘Untied Grants’ for the year 2021-22. It may be utilised by the RLBs, among other things, for various prevention and mitigation measures needed to combat the COVID-19 pandemic.
— Office of Mr. Anurag Thakur (@Anurag_Office) May 9, 2021
केंद्र की लिस्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा 1441.6 करोड़ रुपए का अनुदान उत्तर प्रदेश को मिला है। यूपी के बाद महाराष्ट्र को सबसे अधिक 861.4 करोड़ रुपए, तीसरे नंबर पर बिहार को 741.8 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया है। वहीं पश्चिम बंगाल को 652.2 करोड़, गुजरात को 472.4 करोड़, हरियाणा को 187 करोड़, झारखंड को 249.8 करोड़, कर्नाटक को 475.4 करोड़, मध्य प्रदेश को 588.8 करोड़, राजस्थान को 570.8 करोड़ और तमिलनाडु को 533.2 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया है।
देश इस समय कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से लड़ रहा है। पिछले कई हफ्तों से लगातार साढ़े तीन लाख से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं जो पिछले कुछ दिनों से बढ़कर 4 लाख से भी अधिक हो रहे हैं। राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र की स्थिति सबसे गंभीर हैं जहाँ कई हफ्तों से लगातार 50,000 से अधिक संक्रमित मरीज रोज मिल रहे हैं।
महाराष्ट्र की ऐसी स्थिति के बाद गीतकार जावेद अख्तर ने ट्वीट करके महाराष्ट्र की तारीफ की और कहा कि दूसरों को महाराष्ट्र और बीएमसी से सीखना चाहिए कि Covid-19 से कैसे लड़ा जाए। हालाँकि, उनकी यह बात कई सोशल मीडिया यूजर्स को पसंद नहीं आई जिन्होंने महाराष्ट्र की गंभीर स्थिति पर जावेद अख्तर के ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दी।
जावेद अख्तर ने लिखा, “मैं मानता हूँ कि दूसरों को महाराष्ट्र सरकार और बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से एक या दो सबक सीखने चाहिए जो कोविड के खतरे से पूरी क्षमता के साथ लड़ रहे हैं।“
I believe others need to learn a lesson or two from the government of Maharashtra and Bombay Municipal corporation that are fighting with the menace of COVID with with tremendous competence .
उनके इस ट्वीट पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने महाराष्ट्र में संक्रमण की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए अपनी असहमति दर्ज कराई और जावेद अख्तर से पूछा कि जबकि महाराष्ट्र में संक्रमण और उससे हुई मौतें सबसे ज्यादा हैं, ऐसे में कोई महाराष्ट्र से क्या सीखे?
एक यूजर ने इसे ‘जोक ऑफ द डे’ कहा और जावेद अख्तर को अपने काम पर ध्यान देने की सलाह दी।
Haha, joke of the day! Focus on your work instead of stupid comedy.
एक दूसरे यूजर ने लिखा, “पता नहीं आपको महाराष्ट्र सरकार की कौन सी क्षमता दिखाई दी क्योंकि कई जगह पर लॉकडाउन लगा होने के कारण भी राज्य में रोजाना 50,000 से अधिक नए संक्रमित मिल रहे हैं साथ ही संक्रमण दर भी लगभग 15% बनी हुई है।“
I do not understand what competence you see in MH government. 50k+ cases are reported in the state on a daily basis in spite of a lockdown in place. The positivity rate stands at 15%. Let’s replace usage of adjectives with data!
आपको बता दें कि पिछले 24 घंटे में महाराष्ट्र में 56,578 नए संक्रमित मिले जिसके बाद राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की कुल सँख्या 50 लाख से अधिक हो गई। महाराष्ट्र में अब कुल मरीजों की संख्या रूस, इटली और यूके जैसे देशों से भी अधिक हो गई है। इसके अलावा राज्य में पिछले 24 घंटों में संक्रमण से 864 मौतें भी दर्ज की गईं जिससे मरने वालों की सँख्या भी 75,000 से अधिक हो चुकी है।
असम चुनाव के बाद प्रदेश में नए सीएम की तलाश अब खत्म हो गई है। हेमंत बिस्वा सरमा प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री होंगे। माना जा रहा है कि सर्बानंद सोनोवाल को दिल्ली लाया जा सकता है।
असम में भाजपा के विधायक दल की बैठक रविवार (9 मई 2021) को हुई, जिसमें हेमंत बिस्वा सरमा के नाम को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रस्तावित कर दिया गया है।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव व असम में पार्टी के ऑब्जर्वर अरुण सिंह रविवार को गुवाहाटी पहुँचे। इस मीटिंग में पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल भी शामिल रहे।
Guwahati: Union Minister Narendra Singh Tomar and BJP National General Secretary Arun Singh- party’s Observers for Assam, arrive at the Assembly for Legislative Party party meeting
इससे पहले शनिवार को हिमंत बिस्वा सरमा और सर्बानंद सोनोवाल दिल्ली पहुँचे थे। यहाँ गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी महासचिव बीएल संतोष के साथ मुलाकात की थी। बैठकों के बाद शनिवार देर रात दोनों गुवाहाटी वापस लौटे थे।
2 मई, 2021 को घोषित राज्य विधानसभा चुनाव परिणामों में, बीजेपी ने असम में 126 में से 60 सीटें जीती थीं, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) ने क्रमशः 9 और 6 सीटें जीती थीं।
गौरतलब है कि हेमंत बिस्वा सरमा पहले कॉन्ग्रेस के नेता थे, लेकिन 2014 के आम चुनाव के बाद 2015 में वे भाजपा में शामिल हो गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक वह सोमवार, 10 मई को राज्य के अगले मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।
मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने दिया इस्तीफा
असम के मौजूदा मुख्यमंत्री के पद से सर्वानंद सोनोवाल ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने रविवार को राजभवन में अपना इस्तीफा राज्यपाल जगदीश मुखी को सौंप दिया है।
Guwahati: Sarbananda Sonowal tendered his resignation as the Chief Minister of Assam to Governor Jagdish Mukhi in Raj Bhavan, today pic.twitter.com/k0AO9vAUVt