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कोरोना संकट में पैट कमिंस के बाद ब्रेट ली ने डोनेट किए ₹42 लाख, कहा- भारत मेरे लिए दूसरा घर

भारत इस वक्त कोरोना के कहर से जूझ रहा है। देश के ज्यादातर अस्पतालों में इस वक्त कोरोना की वजह से ऑक्सीजन की भारी किल्लत हो गई है। हजारों लोग ऑक्सीजन की कमी से अपनी जान गँवा रहे हैं। ऐसे में देश और विदेश के तमाम लोग मदद का हाथ बढ़ाने के लिए आगे आए हैं।

इस बीच ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) को भारतीय अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए 1 बिटकॉइन (करीब 42 लाख रुपए) डोनेट करने का ऐलान किया है। आईपीएल के कारण ब्रेट ली इस वक्त भारत में हैं। इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज पैट कमिंस में भारत की मदद के लिए 50,000 डॉलर (करीब 37 लाख रुपए) डोनेट करने का ऐलान किया था।

ब्रेट ली ने ट्विटर पर भारतीय लोगों के लिए एक भावुक मैसेज भी शेयर किया है। ब्रेट ली ने अपने ट्विटर पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “भारत हमेशा मेरे लिए दूसरे घर जैसा रहा है। यहाँ पर मुझे लोगों से जो प्यार अपने प्रोफेशनल करियर और रिटायरमेंट के बाद भी मिला उसके लिए मेरे दिल में एक स्पेशल जगह है। मैं इस महामारी से जिस तरह लोग जूझ रहे हैं, उसको देखकर काफी दुखी हूँ। मुझे इस बात की खुशी है कि मैं इस पोजिशन में हूँ कि कुछ हद तक अंतर पैदा कर सकता हूँ और इसको ही ध्यान रखते हुए, मैं एक बिटकॉइन (लगभग 42 लाख रुपए) क्रिप्टो रिलीफ में डोनेट करना चाहता हूँ, जिससे देश के अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई में मदद हो सके। यह समय है एकजुट होने का और यह तय करने का कि हमसे जितना हो सके हम जरूरतमंदों की उतनी मदद करें। मैं सभी हेल्थ कर्मचारियों को धन्यवाद कहना चाहता हूँ जो इस मुश्किल समय में काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “मैं सभी लोगों से विनती करता हूँ कि वह अपना ध्यान रखें, घर के अंदर रहे, अपने हाथ अच्छे से धोए और तभी बाहर निकले जब बहुत जरूरी हूँ, मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। शाबाश पैट कमिंस तुमने जो कल पहल की उसके लिए।”

बता दें कि भारत में कोरोना के चलते लगातार बिगड़ रहे हालातों की वजह से कई ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी आईपीएल 2021 से अपना नाम वापस ले चुके हैं। एंड्रयू टाय, एडम जाम्पा और केन रिचर्ड्सन उन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी में शामिल हैं, जिन्होंने मौजूदा सीजन से अपना नाम वापस ले लिया है। जाम्पा और रिचर्डसन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर की तरफ से खेलते हैं। हालाँकि, इन दोनों खिलाड़ियों के टूर्नामेंट से हटने के बावजूद ग्लेन मैक्सवेल, डैन क्रिस्टियन और डैनियल सैम्स के रूप में तीन और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर्स हैं, जो आरसीबी टीम से जुड़े रहेंगे।

खुद मास्क न पहनने के बावजूद, राजस्थान के ट्रांसजेंडर कॉन्ग्रेस पार्षद ने दो हिंदू साधुओं को पीटा: वीडियो वायरल

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा क्षेत्र में मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) की सुबह कॉन्ग्रेस के एक पार्षद को दो हिंदू साधुओं की पिटाई करते हुए देखा गया।

रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित की पहचान पूनम महंत के रूप में की गई है। वह वार्ड नंबर 35 की पार्षद हैं और इस साल जनवरी में कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनी गई थीं। वायरल हुए वीडियो में ट्रांसजेंडर कॉन्ग्रेस पार्षद दो हिंदू संतों को थप्पड़ मारते और उन्हें एक कोने में ढकेलते हुए दिखाई दे रही है। इसके बाद उन्होंने उनसे पूछा, “कोरोना वायरस महामारी के समय आपके मास्क कहाँ हैं?” यहाँ पर यह उल्लेख करना आवश्यक है कि कॉन्ग्रेस पार्षद ने खुद न तो मास्क पहना था और न ही किसी चीज से चेहरा ढँका था।

“तुम्हारा मास्क कहाँ है?” पूछने पर एक साधु ने गर्दन में लपेटे कपड़े के टुकड़े की तरफ इशारा किया (बताने की कोशिश की कि यह उनका मास्क है)। इसके बाद उसने साधु से छड़ी छीन कर धमकी देते हुए मास्क लगाने के लिए कहा और मारने के लिए आगे बढ़ी। अपने बचाव में, उसने दावा किया है कि उसने साधुओं को केवल इसलिए रोका क्योंकि वे बिना मास्क के घूम रहे थे।

सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ने ‘डैमेज कंट्रोल’ करने की कोशिश की। आरोपित द्वारा वायरल किए गए एक अन्य वीडियो में एक साधु को पार्षद के घर के पास जाते देखा गया। इसके बाद ‘ट्रांसजेंडर’ घर से बाहर निकलती है और साइनबोर्ड की तरफ इशारा करती है।

उसे पढ़ते हुए वह कहती है, “कृपया मास्क पहनें।” इसके बाद पूनम महंत अंदर जाती है और मास्क लेकर आती है। उसने साधु को मास्क दिया और कोरोना वायरस संकट के बीच खुद की देखभाल करने का आग्रह किया।

सोशल मीडिया पर आलोचना से बचने और खुद को एक वास्तविक राजनीतिक नेता के रूप में चित्रित करने की उसकी तमाम कोशिशों के बावजूद नेटिजन्स को उसके इस कारनामें पर यकीन नहीं हुआ।

85 वर्षीय COVID+ RSS स्वयंसेवक ने दूसरे के लिए छोड़ा हॉस्पिटल में अपना बेड: जान देकर भी कायम रखी सेवा की मिसाल

पूरा देश कोरोना महामारी के बुरे दौर से गुजर रहा है। देश में कोरोना की दूसरी लहर ने कहर बरपाया है। इस विकट और भयानक समय में दयालुता, निस्वार्थता और बलिदान की कहानियाँ लोगों के जीवन में आशा की किरण लेकर आती है।

ऐसी ही एक घटना में, एक आरएसएस सेविका, शिवानी वाखरे, ने नागपुर के 85 वर्षीय आरएसएस कार्यकर्ता नारायण दाभदकर द्वारा किए गए अनोखे बलिदान की कहानी साझा की। इसके बाद स्वयंसेवक राहुल कौशिक ने भी इस घटना को ओरिजिनल पोस्ट की तस्वीर के साथ ट्विटर पर शेयर किया।

आरएसएस कार्यकर्ता नारायण दाभदकर की यह कहानी फेसबुक पर मूल रूप से मराठी में बताई गई है। इसमें बताया गया है कि नारायण दाभदकर आरएसएस के एक कार्यकर्ता हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज की सेवा करने में बिताया, वो कोरोना महामारी की दूसरी लहर से संक्रमित थे। जैसे ही उनका SPO2 स्तर गिरा, उनकी बेटी ने उन्हें शहर के अस्पताल में ए़डमिट कराने की कोशिश की।

घटना को बयाँ करता फेसबुक पोस्ट

काफी प्रयासों के बाद वह इंदिरा गाँधी अस्पताल में उनके लिए बेड रिजर्व कराने में कामयाब रहीं। वाखरे ने लिखा कि दाभदकर को साँस लेने में तकलीफ होने लगी, जिसके बाद उन्हें उनके पोते अस्पताल लेकर आए। अस्पताल की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए दोनों इंतजार कर रहे थे कि तभी दाभदकर काका ने 40 की उम्र की एक महिला को अपने बच्चों के साथ रोते हुए देखा और अस्पताल के अधिकारियों से अपने पति को एडमिट के लिए बेड की भीख माँगते हुए देखा, जिसकी स्थिति काफी गंभीर थी।

घटना को बयाँ करता फेसबुक पोस्ट

बिना कुछ सोचे-समझे दाभदकर काका ने आराम से मेडिकल टीम को सूचित किया कि उनका बिस्तर महिला के पति को दे दिया जाए। उन्होंने कहा, “मैं अब 85 वर्ष का हो चुका हूँ, मैंने अपना जीवन जी लिया है। आपको मेरे बदले इस आदमी को बेड ऑफर करना चाहिए, क्योंकि उसके बच्चों को उसकी जरूरत है।”

इसके बाद उन्होंने अपने पोते से फोन करके उनकी बेटी को इस फैसले के बारे में बताने के लिए कहा। उनकी बेटी यह फैसला सुनकर हैरान रह गई, हालाँकि कुछ देर बाद वह भी इस पर सहमत हो गई। दाभदकर काका ने तुरंत सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि वह युवक के लिए अपना बिस्तर छोड़ रहे हैं और उसने अपने पोते को वापस घर ले जाने के लिए कहा। अगले तीन दिनों तक बहादुरी से वायरस से लड़ने के बाद उनका स्वर्गवास हो गया।

हमने किसी को बेहतर जीवन देने के लिए समय और आर्थिक बलिदानों को देते हुए देखा है, लेकिन दूसरे के लिए लंबा जीवन सुनिश्चित करने के लिए अपने स्वयं के जीवन का बलिदान करना निश्चित रूप से एक ऐसा कार्य है जिसे समझ पाना नामुमकिन है। इसके साथ ही हमें अपने फ्रंटलाइन वर्कर्स, मेडिकल स्टाफ और ऐसे व्यक्तियों को धन्यवाद देना चाहिए जो महामारी के इस दौर में समाज की निस्वार्थ और अथक सेवा कर रहे हैं।

यूपी में रिटायर्ड डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ देंगे सेवा, कोविड मरीजों को फ्री में लगेगा रेमडेसिव‍िर इंजेक्‍शन: CM योगी

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से देश भर में अफरा-तफरी का माहौल है। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद संयम से काम ले रहे हैं। उन्होंने कोरोना संकट से निपटने के लिए एक और बड़ी घोषणा की है। मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति पटरी पर लाने के बाद योगी सरकार अब कोरोना के मरीजों को मुफ्त में रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराएगी। इससे वे जल्द से जल्द स्वस्थ हो सकेंगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार सभी सरकारी अस्पतालों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की व्यवस्था कर रही है। यहाँ पर इलाज करा रहे लोगों को इंजेक्शन मुफ्त मे दिया जाएगा। हालाँकि, प्रदेश के निजी अस्पतालों को कंपनियों और बाजार से ही रेमडेसिविर खरीदना होगा।

सीएम योगी ने मंगलवार को सभी सरकारी और साथ ही राज्य के निजी अस्पतालों में सरकारी अस्पताल से रेफर होने के बाद भर्ती कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को नि:शुल्क रेमडेसिविर इंजेक्शन देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी ने यह भी कहा कि यदि किसी निजी अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है और वहाँ पर उपचार करा रहे संक्रमित की जीवन रक्षा के लिए बहुत जरूरी है, तो वहाँ के जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को उस अस्पताल को रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराना होगा। 

मुख्‍यमंत्री ने विभिन्‍न जिलों में जरूरत के मुताबिक रेमडेसिविर की पर्याप्‍त सप्‍लाई करवाई करवाने का आदेश दिया है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि जो लोग कोविड दवाओं की कालाबाजारी में संलिप्‍त पाए जाएँगे उनके खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, इसी कड़ी में सीएम योगी ने डॉक्टरों, सुरक्षा कर्मियों, पैरामेडिकल स्टाफ की जिलावार सूची तैयार करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है। सूची में वही लोग शामिल होंगे, जो हाल ही में कोरोना से संक्रमित होने के बाद ठीक हुए हैं और अपनी सेवाएँ देने को इच्छुक हैं। सीएम ने आवश्यक होने पर इन लोगों को अस्पतालों में तैनात करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उन्होंने यह भी आदेश दिया है कि राज्य के सभी जिलों में COVID अस्पतालों में बेडों की संख्या को तत्काल दोगुना करने के प्रयास किए जाएँ।

इसके अलावा यूपी में कोरोना की रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। यूपी सरकार ने एक मई से शुरू हो रहे टीकाकरण अभियान को लेकर तैयारियाँ तेज कर दी हैं। रविवार को सीएम ने बताया था कि दोनों स्वदेशी वैक्सीन निर्माता कंपनियों Covishield को 50 लाख और Covaxin को 50 लाख डोज का ऑर्डर दिया गया है। वहीं इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार भी उत्तर प्रदेश को वैक्सीन की डोज उपलब्ध कराएगी।

बता दें कि प्रदेश का चिकित्सा विभाग अभी हर रोज जिलों में 5 से 6 हजार वॉयल रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध करा रहा है। इसका वितरण महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण और उत्तर प्रदेश चिकित्सा आपूर्ति निगम लिमिटेड के माध्यम से हो रहा है।

महाराष्ट्र में एक एम्बुलेंस में ठूँसकर श्मशान भेजे गए 22 कोरोना मरीजों के शव: तस्वीरें देखकर भड़के लोग, पुलिस ने छिना मोबाइल

महाराष्ट्र में कोरोना का कहर जारी है। इसी बीच बीड से एक अमानवीय तस्वीर सामने आई है। यहाँ एक एंबुलेंस में 22 शवों को एक दूसरे के ऊपर रखकर श्मशान लाया गया और फिर एक चिता पर 2 से 3 लाशों को रखकर अंतिम संस्कार किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिला प्रशासन ने दलील है कि उसके पास एंबुलेंस नहीं है। इसलिए बीड जिले के अंबाजोगाई में स्वामी रामानंद तीर्थ अस्पताल में कोरोना से मरने वाले 22 मरीजों के शवों को रविवार (25 अप्रैल 2021) को एक ही एंबुलेंस में भरकर श्मशान में ले जाया गया।

अस्पताल प्रशासन ने कहा कि पिछले साल कोविड-19 के पहले दौर में उनके पास 5 एंबुलेंस थीं। उनमें से 3 को बाद में वापस ले लिया गया और अब अस्पताल में दो ही एंबुलेंस बची हैं, जिसमें कोरोना मरीजों को लाया और ले जाया जाता है। वहीं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर शिवाजी शुक्रे ने कहा, ”अस्पताल प्रशासन के पास पर्याप्त एंबुलेंस नहीं होने के कारण ऐसा हुआ है।”

अस्पताल ने दी सफाई, हमने एंबुलेंस मुहैया कराने के लिए लिखा था पत्र

एक अन्य अधिकारी ने कहा, ”कभी-कभी, मृतकों के संबंधियों को ढूँढने में समय लग जाता है। लोखंडी सवारगाँव के कोविड-19 केंद्र से भी शवों को हमारे अस्पताल में भेजा जा रहा है, क्योंकि उनके पास कोल्ड स्टोरेज नहीं है।” उन्होंने कहा कि तीन और एंबुलेंस मुहैया कराने के लिए हमने 17 मार्च को जिला प्रशासन को पत्र भी लिखा था।

उन्होंने आगे कहा, ”अव्यवस्था से बचने के लिये हमने अंबाजोगाई नगर परिषद को पत्र भी लिखा था कि सुबह 8 से बजे से रात 10 बजे तक अंतिम संस्कार कराए जाएँ और अस्पताल वार्ड से ही शवों को श्मशान भेजा जाए।”

इस मामले पर बीड के जिला कलेक्टर रवींद्र जगताप ने कहा किया, “मैंने अंबाजोगाई एडिशनल कलेक्टर को मामले की जाँच करने का आदेश दिया है। हम दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।”

अंबाजोगाई नगर परिषद के मुख्य अधिकारी अशोक साबले का कहना है कि शवों को मांडवा रोड पर स्थित श्मशान (कोविड-19 मरीजों के अंतिम संस्कार के लिए तय श्मशान) में ले जाना मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी है। इस बीच, भाजपा नगर पार्षद सुरेश ढास ने आरोप लगाया कि अस्पताल और स्थानीय नगर निकाय एक दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त हैं। इस अमानवीय तस्वीर के सामने आने के बाद लोगों में काफी गुस्सा है।

बताया जा रहा है कि जब एक मृतक के दो रिश्तेदार एंबुलेंस की वीडियो बना रहे थे और बोरियों में बंद शवों की तस्वीरें ले रहे थे, तभी पुलिस ने उनके फोन जब्त कर लिए। उन्होंने कहा कि शवों के अंतिम संस्कार के बाद ही आपके फोन वापस किए जाएँगे। सोशल मीडिया पर इस घटना के फैलने के बाद एक टीम को बीड जिला प्रशासन द्वारा तुरंत अंबाजोगाई भेजा गया।

बता दें कि बीड जिले में कोरोना मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। अंबाजोगाई में स्थिति गंभीर है। 27 अप्रैल तक महाराष्ट्र में कोरोना के कुल 67,6647 एक्टिव मामले और कुल 65,284 मौतें हुई हैं।

‘ये आदेश हमें खुश करने के लिए दिया है’: जजों के लिए 5 स्टार होटल पर केजरीवाल सरकार की हाईकोर्ट ने लगाई क्लास

दिल्ली के 5 सितारा अशोक होटल को जजों, न्यायिक अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए कोविड केयर के तौर पर रिजर्व करने के मामले में आज (अप्रैल 27, 2021) दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने दिल्ली सरकार के आदेश पर संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा से कहा कि उन्होंने मीडिया में जो पढ़ा, वो बहुत भ्रामक है। कोर्ट ने ऐसी कोई अपील नहीं की कि उन्हें होटल में 100 बेड रिजर्व दिए जाएँ।

बार एंड बेंच के ट्वीट के अनुसार, कोर्ट ने स्पष्ट बताया कि उनकी ओर से न्यायाधीशों और अन्य न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए अशोक होटल परिसर को प्राथमिकता के आधार पर कोविड-19 सुविधा में बदलने का कोई अनुरोध नहीं किया।

कोर्ट ने कहा, “हमने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है कि आप इसे इस होटल या उस होटल में स्थापित करें। बैठक का उद्देश्य था कि न्यायपालिका विशेष रूप से अधीनस्थ अदालत… हम पहले ही दो न्यायिक अधिकारियों को खो चुके हैं…. हमें बस ये चाहिए कि अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो, तो वह सुविधा दी जानी चाहिए।”

कोर्ट ने आगे कहा, “आप आदेश को बिना किसी मतलब के इधर उधर घुमा रहे हैं। हमने ऐसा कुछ नहीं कहा।” हाईकोर्ट ने पूछा, “आपको लगता है कि जब लोगों को बेड नहीं मिल रहा है, तो हम फाइव स्टार होटल में 100 बेड्स माँगेंगे।” कोर्ट ने दिल्ली सरकार से ये भी पूछा कि आखिर वो कहना क्या चाहते हैं।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा, “कौन सी सुरक्षा?…. आपने ऐसा खुद को लाभ पहुँचाने के लिए किया या फिर हमें खुश करने के लिए।” कोर्ट के मुताबिक दिल्ली सरकार ने आदेश में कहा कि कोर्ट के अनुरोध पर… जबकि कोर्ट का अनुरोध यह था ही नहीं।

अदालत ने कहा, “क्या हम ऐसी फैसिलिटी के लिए बोल सकते हैं कि हमें इतने इतने बेड दो? क्या ये पक्षपात नहीं होता।” बता दें कि इस दौरान दिल्ली सरकार की ओर पेश हुए राहुल मेहरा ने मीडिया पर हर चीज का ठीकरा फोड़ना चाहा। हालाँकि कोर्ट ने कहा कि मीडिया गलत नहीं है। आदेश गलत है। कोर्ट ने कहा, “यह सोच से परे है कि हम एक संस्थान होने के नाते ऐसी प्राथमिकता लेंगे वो भी उस समय जब लोग सड़कों पर मर रहे हैं।”

दिल्ली सरकार ने जारी किए थे आदेश

गौरतलब है कि सोमवार को मीडिया में हर जगह बताया गया था कि दिल्ली हाई कोर्ट के निवेदन के बाद सरकार ने ये फैसला लिया कि अशोका होटल दिल्ली उच्च न्यायालय के जज और अन्य न्यायिक कर्मचारियों के लिए आरक्षित होगा। इस बाबत एडीएम ने नोटिफिकेशन भी जारी किया। इसमें बताया गया था कोविड फैसिलिटी को प्राइमस हॉस्पिटल द्वारा संचालित किया जाएगा।

वहाँ जो भी बायोमेडिकल वेस्ट होंगे, उन्हें ठिकाने लगाना होटल की जिम्मेदारी होगी। होटल के कर्मचारियों को सुरक्षा के सभी उपकरण दिए जाएँगे और उनकी विशेष ट्रेनिंग भी होगी। अगर होटल में कर्मचारियों की कमी है तो हॉस्पिटल से स्वास्थ्यकर्मी बुलाए जाएँगे।

कमरों, हाउसकीपिंग, सैनिटाइजेशन, मरीजों के लिए भोजन इत्यादि की व्यवस्था होटल ही करेगा। इसमें जो भी खर्च आएगा, वो हॉस्पिटल को बताया जाएगा और हॉस्पिटल ही होटल को पूरे खर्च का वहन करेगा। हॉस्पिटल अतिरिक्त खर्चे पर अलग से डॉक्टर्स और पैरामेडिकल कर्मचारियों को वहाँ भेज सकता है। 

‘गिद्ध मत बनिए… आपसे दिल्ली नहीं सँभल रही तो हम केंद्र को कहेंगे’: केजरीवाल सरकार को HC ने फिर फटकारा

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली में ऑक्सीजन सिलेंडरों और दवाओं की कालाबाजारी पर हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार की व्यवस्था विफल हो गई है, क्योंकि ऑक्सीजन सिलेंडरों और दवाओं का कालाबाजारी जारी है।

दिल्ली के शांति मुकुंद अस्पताल ने हाई कोर्ट में बताया कि उसे जितनी पर्याप्त ऑक्सीजन मुहैया नहीं कराया गया। अब अस्पताल के पास ऑक्सीजन नहीं है। इस पर दिल्ली सरकार ने कहा कि वह अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रही है। शांति मुकुंद अस्पताल ने बताया कि उसे रोजाना 3 मीट्रिक टन ऑक्सीजन चाहिए, पर मिला सिर्फ 2.69 मीट्रिक टन। हाई कोर्ट ने अस्पताल से पूछा कि अब क्या स्थिति है, इस पर उन्होंने जवाब दिया कि मरीज मर रहे हैं।

यह वक्त ‘गिद्ध’ बनने का नहीं: HC

अस्पताल का जवाब सुनकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि आखिर सरकार कर क्या रही है, हम तो इस सरकार से तंग आ गए हैं, आखिर ऑक्सीजन कहाँ पर है। कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि ऑक्सीजन रिफिलर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कोर्ट का गुस्सा सुनवाई में आए एक सप्लायर पर भी फूटा और बेहद सख्त लफ्जों में नसीहत देते हुए कहा कि यह वक्त ‘गिद्ध’ बनने का नहीं है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट में मुल्तान नाम का एक सप्लायर भी पेश हुआ। अदालत ने उससे कहा कि दिल्ली सरकार के आदेशों के मुताबिक वह अस्पतालों को ऑक्सीजन की सप्लाई कर रहे हैं क्या? कोर्ट ने इसके बाद सप्लायर को नसीहत देते हुआ कहा कि यह वक्त गिद्ध बन जाने का नहीं है। क्या यह कोई अच्छी मानवीय भावना है?

दिल्ली सरकार को HC की फटकार

देश की राजधानी में ऑक्सीजन की कमी और मरीजों को हो रही दिक्कत पर दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा, “आप का सिस्टम किसी काम नहीं है। आपका सिस्टम पूरी तरह से फेल है। कालाबाजारी पर लगाम तक नहीं लगा पा रहे हैं आप।” हाई कोर्ट ने सवाल किया कि कैसे लोग इस वक्त पर भी जरूरी दवाइयों की जमाखोरी कर पा रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वे उन प्लांट को टेकओवर कर ले जो हमारे आदेशों के बावजूद सुनवाई में शामिल नहीं हुए।

हाई कोर्ट ने इनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई को नोटिस भेजे जाने की चेतावनी दी। हाई कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह इन्हीं प्लांट के स्टाफ से उन प्लांट को चलाएँ और ऑक्सीजन का आवंटन करें। दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सरकार तुरंत शांति मुकुंद अस्पताल को आवश्यक ऑक्सीजन मुहैया कराए।

इसके साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार से कहा कि यदि आप से स्थिति नहीं सँभल रही तो हमें बताइए, हम केंद्र को सँभालने के लिए कहेंगे। हम इस तरह से लोगों को मरने नहीं दे सकते। हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार को ऑक्सीजन के डिस्ट्रीब्यूशन के लिए ही नहीं, ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए भी कमर कसनी चाहिए।

दिल्ली HC ने 5 कंपनियों के खिलाफ जारी किया अवमानना का नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने पाँच ऑक्सीजन रिफिलर्स कंपनियों के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया है। ये कंपनियाँ हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद सुनवाई के दौरान मौजूद नहीं थी। कोर्ट ने एक सप्लायर तरुण सेठ से कहा कि हम आपको अभी कस्टडी में ले लेंगे। आप अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई क्यों नहीं कर रहे हैं? आप हमें बेवकूफ समझते है? 

बता दें कि सुनवाई के दौरान सप्लायर तरुण सेठ ने दावा किया कि उन्हें सिर्फ 4 अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई के लिए कहा गया है। लेकिन कोर्ट ने इस झूठ को पकड़ लिया। जिसके बाद दिल्ली सरकार को सेठ एयर को टेकओवर करने के निर्देश दिए।

रेमडेसिविर को लेकर बिफरा हाई कोर्ट

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि उनके पास रेमडेसिविर की सीमित सप्लाई है। जिस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या सप्लाई की समस्या पर केंद्रित पोर्टल बनाया जा सकता है जिससे इस समस्या से निपटने में मदद मिले? कोर्ट ने कहा कि घर पर रह रहे मरीजों को रेमडेसिविर ना देने के दिल्ली सरकार का आदेश गलत है, इससे आप पीड़ित की जान ले रहे हैं। अगर आपके अस्पताल में बेड उपलब्ध होते तो अलग बात होती, लेकिन आपके पास नहीं है तो फिर आप ऐसा कैसे कह सकते हैं कि आप अस्पताल में एडमिट नहीं हैं तो आपको रेमडेसिविर नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह काफी मुश्किल समय है। लोग घर पर ही खुद अपना इलाज कर रहे हैं तो सरकार को भी सहयोग करना चाहिए।

आरफा खानम के ट्वीट पर स्मृति ईरानी ने लिया संज्ञान: पड़ताल में नहीं निकला मरीज को Covid, हार्ट अटैक से हुई मौत

द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने सोमवार (अप्रैल 26, 2021) को शशांक नाम के लड़के के लिए मदद माँगते हुए ट्विटर पर मैसेज पोस्ट किया। मैसेज में लिखा था कि शशांक को जल्दी से अपने दोस्त के नाना जी के लिए ऑक्सीजन की जरूरत है। इस संदेश में आरफा ने शशांक की डिटेल्स भी दी।

15 मिनट के अंदर आरफा के इस संदेश पर अमेठी सांसद स्मृति ईरानी ने संज्ञान ले लिया। उन्होंने शशांक से संपर्क साधने की कोशिश की। हालाँकि, बात न हो पाने पर आरफा को बता भी दिया कि शशांक कॉल नहीं उठा रहा।

ईरानी ने बताया कि उन्होंने शशांक को तीन बार कॉल की, लेकिन एक भी बार कोई रिस्पांस नहीं आया। इतना ही नहीं, उन्होंने अमेठी पुलिस और अमेठी के जिलाधिकारी को भी शशांक की मदद के लिए फौरन निर्देश दे दिए।

जब आरफा ने स्मृति ईरानी का यह ट्वीट देखा तो उन्होंने शशांक के साथ किसी अंकित को बताया कि भाजपा सांसद उन लोगों से बात करने का प्रयास कर रही हैं। इसके 29 मिनट बाद आरफा ने रात 1 बजे बताया कि शशांक के नानाजी अब दुनिया में नहीं रहे।

गौर दीजिए! पहले ट्वीट में लिखा था कि वो शशांक के दोस्त के नानाजी हैं और दूसरे ट्वीट में बताया गया कि शशांक के नानी जी दुनिया में नहीं रहे।

मामला चूँकि जिलाधिकारी के पास पहुँच गया था तो डीएम ने खुद केस में तहकीकात की। जाँच में सामने आया कि मरीज का ईलाज प्राइवेट अस्पताल में चल रहा था और वास्तविकता में मरीज का कोविड-19 का चेक अप ही नहीं हुआ, न ही उसे किसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया।   

ऑपइंडिया को शशांक से क्या पता चला

जब ऑपइंडिया ने इस संबंध में शशांक से बात की, तो शशांक ने आरफा को जानने से इंकार कर दिया। वह बोले कि उन्होंने ये सारी बातें कभी कही ही नहीं, जैसा कि आरफा कह रही हैं। शशांक ने ऑपइंडिया को बताया “मैं उन्हें नहीं जानता। उन्होंने रीट्वीट किया लेकिन मुझको नहीं पता कैसे। दूर-दूर तक कोई कनेक्शन नहीं है मेरा।”

शशांक ने हमें बताया कि उन्होंने अपना ट्वीट शाम 7:30 बजे किया। इसके बाद उसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिशें हुई लेकिन तब तक नानाजी जा चुके थे। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था।

वहीं शशांक के ट्वीट को हमने देखा तो पता चला कि शशांक को ऑक्सीजन सिलिंडर की आवश्यकता थी, लेकिन उन्होंने इसके लिए सोनू सूद को टैग किया था।

अमेठी पुलिस ने दी शशांक के ‘नानाजी’ की जानकारी

शशांक के पोस्ट पर अमेठी पुलिस की प्रतिक्रिया है। पुलिस ने कहा, “तत्काल संपर्क किया तो जानकारी हुई कि इनके चचेरे भाई के नाना 88 वर्षीय थे, न उन्हें COVID था, न ऑक्सीजन की चिकित्सीय परामर्श थी। रात 8 बजे उनकी मृत्यु हार्ट अटैक से हुई। इस समय सोशल मीडिया पर इस प्रकार की समाज मे भय पैदा करने वाली पोस्ट डालना निन्दनीय ही नहीं, कानूनी अपराध भी है।”

ऑपइंडिया ने जब दोबारा अमेठी पुलिस के बयान पर शशांक को कॉन्टैक्ट करना चाहा तो उनसे संपर्क नहीं हुआ। वहीं उससे पहले जब हमने उस अंकित के बारे में पूछा, जिसे उनके साथ टैग किया गया था, तो शशांक ने फोन काट दिया और दोबारा कॉल रिसीव नहीं की। कुल मिलाकर हमें अपनी पड़ताल में जानकारी ये हुई कि आरफा खानम ने अपने ट्वीट पर शशांक का मैसेज देर रात शेयर किया, जबकि 4 घंटे पहले मरीज का देहांत हो चुका था।

आरफा खानम का पक्ष

अपने ट्वीट पर अमेठी पुलिस का बयान देखने के बाद कुछ देर पहले आरफा ने बयान दिया है। उन्होंने अंकित का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कहा, “संकट की इस घड़ी में नागरिक एक दूसरे की मदद कर रहे हैं, जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। मैं भी एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते जो लोग मुझसे मदद की गुहार लगा रहे हैं, उनके संदेश ट्वीट कर रही हूँ। तथ्यों की जाँच करना पुलिस का काम है। आपकी जानकारी के लिये ये स्क्रीन शॉट लगा रही हूँ।”

अगले ट्वीट में आरफा ने लिखा, “मेरे द्वारा ट्वीट किए संदेशों में 99% लोगों से निजी तौर पर मेरी कोई जान पहचान नहीं है। लेकिन एक भारतीय नागरिक का फ़र्ज़ निभाते हुए, मैं उनका संदेश लोगों तक पहुँचा रही हूँ।”

‘इधर से घास डालूँगा, उधर से दूध निकलेगा’: विज्ञापन में कॉन्ग्रेसियों को हुए सोनिया-राहुल के दर्शन, दफ्तर में तोड़फोड़

मुंबई में स्टोरिया (Storia) फूड्स ऐंड बेवरेज प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के विज्ञापन पर विवाद हो गया है। विज्ञापनों में कंपनी ने अपने नए रेंज के मिल्कशेक लॉन्च किए थे। स्टोरिया शेक्स के लिए उन्होंने पहली बार हर प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन दिया। इसकी टैग लाइन थी- विश इट नेवर गेट्स ओवर।

कंपनी ने अपने ब्रांड के लिए 3 एड रिलीज किए। हर एड 45 सेकेंड का है और स्टोरिया शेक फ्लेवर को प्रमोट करता है। पहले एड में क्रिकेट लीग प्रेस कॉन्फ्रेंस का सीन है। दूसरे एड में दिखाया गया है कि कलाकार कैसे वर्कआउट मिलने के बाद स्टोरिया का ड्रिंक न मिलने पर नाराज हो जाता है। सबसे आखिरी और विवादित स्टोरिया के चॉकलेट शेक का विज्ञापन है। कारण इसमें थोड़ी राजनीति का टच है।

तीनों एड किसी न किसी की पैरोडी है। लेकिन जो आखिरी वाला है उसमें दिख रही महिला और युवक कथित तौर पर सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के गेटअप में दिखते हैं। बस यही वजह है इस एड के विवाद में आने का।

इसमें देख सकते हैं शेक पी रही है और खत्म होने पर दुखी मन से कहती हैं- इट्स ऑल ओवर। इसके बाद उसका बेटा कहता है, “डोंट वरी मम्मी। मैं एक ऐसी मशीन बनाऊँगा इधर से घास डालूँगा उधर से दूध निकलेगा।” इतने में महिला कहती है कि वो मशीन नहीं गाय होती है! थोड़ी देर में उसे स्टोरिया का चॉकलेट शेक मिलता है और अपने बेटे की बातें सुन वो पूछती है कि ये कब ओवर होगा। 

इस पैरोडी के कारण कॉन्ग्रेस नेता आज मुंबई के अंधेरी ईस्ट में स्थित बेवरेज कंपनी के कार्यालय पहुँच गए। सामने आई वीडियो में देख सकते हैं किकोरोना पाबंदियों के बावजूद कई कार्यकर्ताओं ने दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ मचाई। वीडियो में देख सकते हैं कि दफ्तर में हर चीज इधर-उधर है और जगह-जगह काँच टूटे पड़े हुए हैं। अंत में कुछ कॉन्ग्रेस नेताओं को दफ्तर में सोनिया गाँधी जिंदाबाद, राहुल गाँधी जिंदाबाद, मुंबई कॉन्ग्रेस जिंदाबाद के नारे लगाते भी देखा जा सकता है। 

रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई पुलिस ने कॉन्ग्रेसियों को हिरासत में ले लिया है। कंपनी के संस्थापक व मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा, “हम स्टोरिया में अपने उपभोक्ताओं के प्रति एक जिम्मेदारी महसूस करते हैं क्योंकि जो हम उन्हें देते हैं वो सीधा उनके जीवन और स्वास्थ्य पर असर डालता है… हम इस 360 कैम्पेन के जरिए अपने उपभोक्ताओं तक पहुँचने के लिए उत्सुक हैं वो भी एक मजेदार और प्रभावशाली तरीके। ”

शाह ने कहा, “वर्तमान महामारी के साथ हम लोगों को मूड को हल्का करने का प्रयास कर रहे हैं, वो भी उस श्रेणी में जो गंभीर है और स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है। यह अभियान हमारे मिलेनियल्स और जनरल जेड के साथ महत्वपूर्ण ब्रांड के विचार को बढ़ाने का एक शानदार तरीका है। इसका फॉर्मेट सबसे अच्छा, पैरोडिकल और प्रभावशाली है।”

News18 ने माँगी माफी: CM योगी के कोविड और ऑक्सीजन संकट पर दिए बयान पर चलाया था गलत ग्राफिक

न्यूज 18 उत्तर प्रदेश ने कल (अप्रैल 26, 2021) सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान को गलत ग्राफिक्स के साथ दिखाने के लिए माफी माँगी है। चैनल ने अपनी गलती के लिए ट्वीट करके माफी माँगी है।

न्यूज 18 उत्तर प्रदेश ने ट्वीट करते हुए लिखा, “गलत ग्राफिक्स चलने पर हमें खेद है। कल सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि जहाँ तक ऑक्सीजन की कमी की बात है यूपी में ऑक्सीजन की कमी ना के बराबर है। पर जल्दबाजी में टाइपिंग गलती से ग्राफिक्स में चल गया कि यूपी में कोविड केस ना के बराबर है। इस गलती पर हमें खेद है।”

मेनस्ट्रीम के हिंदी चैनल ने उत्तर प्रदेश में मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई के बारे में अपडेट देते हुए सीएम के बयान को गलत तरीके से पेश किया। संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह कहते हुए सुना गया कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी ना के बराबर है, जबकि चैनल ने अपनी ग्राफिक्स में चलाया कि यूपी में कोरोना के मामले ना के बराबर हैं। 

सीएम के बयान को गलत तरीके से पेश करता न्यूज 18 का ग्राफिक

सीएम योगी का यह संबोधन राज्य को कोविड-19 महामारी की वर्तमान स्थिति और निपटने के तरीके से अपडेट कराने को लेकर था। राज्य में नए मामलों की कमी के बारे में बताते हुए उन्होंने राज्य को आश्वासन दिया कि बेड, मेडिकल ऑक्सीजन और चिकित्सा आपूर्ति में कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने लोगों से यह भी आग्रह किया कि वे पैनिक और आपदा के कारण भयभीत न हों।

पिछले सप्ताह विभिन्न समाचार पत्रों के संपादकों के साथ हुई वर्चुअल बातचीत में, सीएम ने कालाबाजारी और लोगों के बीच व्याप्त भय पर प्रकाश डाला और कहा, “किसी भी COVID अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है, चाहे वह निजी हो या सरकारी। समस्या कालाबाजारी और जमाखोरी है, जिससे जल्द ही निपट लिया जाएगा। हम ऑक्सीजन की उचित निगरानी के लिए IIT कानपुर, IIM लखनऊ और IIT BHU के साथ मिलकर एक ऑक्सीजन ऑडिट करेंगे। ऑक्सीजन की माँग, आपूर्ति और वितरण के लाइव ट्रैकिंग की व्यवस्था लागू की जाएगी।”